RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव

Rajasthan Board RBSE Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव

RBSE Solutions for Class 8 Science

RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव

RBSE Class 8 Science हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव Intext Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आपने देखा होगा कि कुछ रोगों के लिए विशेष प्रकोष्ठ बनाए गए हैं जहाँ आपको मरीज के नजदीक भी जाने नहीं दिया होगा। क्या आप बता सकते हैं ऐसा क्यों किया होगा?
उत्तर:
संक्रामक रोग से बचने के लिए।

प्रश्न 2.
सर्दी, खाँसी, जुकाम के समय आपको खाँसते समय मुख पर रूमाल रखने के लिए क्यों कहा जाता है।
उत्तर:
जिससे की वायरस का संक्रमण न हो।

प्रश्न 3.
आपने अखबार में पढ़ा होगा कि गुजरात में बाढ़ आने के बाद हैजा फैल गया, ऐसा क्यों हुआ होगा?
उत्तर:
हैजा एक संक्रामक रोग है तथा यह दूषित जल एवं भोजन से फैलता है। बाढ़ के पश्चात् चारों ओर दूषित पानी, नमी और गंदगी फैलने से जीवाणु/रोगाणु उत्पन्न हो जाते हैं। जिससे भोजन – पानी दूषित हो जाता है। यही हैजा फैलने का कारण है।

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सही विकल्प चयन कीजिए

Question 1.
कुष्ठ रोग उत्पन्न होता है ………………..
(अ) विषाणु
(ब) जीवाणु
(स) प्रोटोजोआ
(द) अमीबा
उत्तर:
(ब) जीवाणु

Question 2.
संक्रामक रोग का उदाहरण है ………………..
(अ) हैजा
(ब) एनीमिया
(स) जोड़ों का दर्द
(द) कैन्सर
उत्तर:
(अ) हैजा

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Question 3.
छोटी माता (चिकन पॉक्स) का संचरण करने वाला वायरस है ………………..
(अ) वेरीसेला जोस्टर
(ब) राइनोवायरस
(स) प्लाज्मोडियम
(द) ई – कोलाई
उत्तर:
(अ) वेरीसेला जोस्टर

Question 4.
एनीमिया में शरीर में किसकी कमी हो जाती है ………………..
(अ) रक्त की
(ब) विटामिन की
(स) जल की
(द) खनिज लवणों की
उत्तर:
(अ) रक्त की

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. पोलियो रोग का संचरण ………………… और ………………… द्वारा होता
  2. दस्त एवं पेचिश में ………………… घोल का उपयोग किया जाता
  3. सर्दी – जुकाम ………………… द्वारा होता है।
  4. ………………… की गोली कृमि से मुक्ति दिलाने में मदद करती है।

उत्तर:

  1. वायु, जल
  2. ORS
  3. राइनो वायरस,
  4. ऐल्बेंडाजोल।

सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
1. → (ब)
2. → (द)
3. → (अ)
4. → (स)

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
एच. आई. वी का चित्र बनाइए।
उत्तर:
चित्र – वाइरस
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प्रश्न 2.
टीके का क्या कार्य है?
उत्तर:
यदि मृत अथवा निष्क्रिय सूक्ष्म जीवों को स्वस्थ शरीर में प्रविष्ट कराया जाय, तो शरीर की कोशिकाएँ उसी के अनुसार लड़ने के लिए प्रतिरक्षी तैयार करके रोगकारक सक्ष्म जीवों को नष्ट कर देती हैं। ये प्रतिरक्षी तबसे हमारे शरीर में हमेशा के लिए विद्यमान हो जाते हैं तथा रोग से हमारी रक्षा करते हैं। टीका (Vaccine) इसी प्रकार कार्य करता है। हैजा, क्षय, चेचक, हिपेटाइटिस जैसी अनेक बीमारियों को वैक्सीन द्वारा रोका जा सकता है।

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प्रश्न 3.
स्वाइन फ्लू के लक्षण लिंखिए।
उत्तर:
स्वाइन फ्लू के लक्षण निम्नवत् हैं

  1. गले में तकलीफ
  2. जुकाम
  3. बुखार।

प्रश्न 4.
एड्स से बचाव के उपाय लिखिए।
उत्तर:
एड्स से बचाव के उपाय निम्नवत् हैं

  1. दाड़ी बनवाने से पूर्व यह सुनिश्चित करें कि एक उस्तरे से सभी की दाड़ी नहीं बन रही हो।
  2. रक्त चढ़ाए जाने से पहले एच. आई. वी. परीक्षण।
  3. सीरिंज और इंजेक्शन की सुई को उपयोग के बाद नष्ट करना।
  4. संयमित जीवन-शैली अपनाना।

प्रश्न 5.
कैंसर रोग के लक्षण लिखिए।
उत्तर:
कैंसर रोग के लक्षण निम्नवत् हैं

  1. शरीर के किसी हिस्से में गाँठ का निर्माण होना।
  2. प्रारंभिक अवस्था में गाँठ में दर्द नहीं होता है।
  3. उच्च अवस्था में गाँठ में असहनीय दर्द होता है।
  4. यह जीभ, कंठ, अस्थि, रक्त, फेंफड़ों गर्भाशय आदि में हो सकता है।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कृमि संक्रमण चक्र को समझाइए। बच्चों की सेहत पर कृमि के हानिकारक प्रभाव, कृमि संक्रमण के बचाव के तरीके व बच्चों को कृमि नियंत्रण से होने वाले फायदों को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
बच्चों की सेहत पर कृमि के हानिकारक प्रभाव

  1. पेट में दर्द, मितली, उल्टी और दस्त
  2. थकान और बेचैनी
  3. भूख न लगना
  4. मल में खून आना
  5. खून की कमी कुपोषण
  6. पेट में सूजन
  7. लगातार खाँसी
  8. वजन में कमी

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कृमि संक्रमण से बचाव के तरीके:

  1. खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोएँ।
  2. फलों और सब्जियों को खाने से पहले पानी से अच्छी तरह धोएँ।
  3. साफ पानी या उबाल कर पानी पीएँ। जूते पहनें।
  4. नाखून साफ और छोटे रखें।
  5. खुली जगह में शौच न करें, शौचालय का प्रयोग करें।
  6. शौचालय के आस – पास सफाई रखें।
  7. बच्चों को कृमि नियन्त्रण के फायदे समझाएँ।

कृमि नियन्त्रण के फायदे:

  1. बच्चे आँगनबाड़ी केन्द्र या स्कूल रोजाना जा सकते हैं।
  2. वह चुस्त रहते हैं और उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।
  3. बच्चों का विकास जल्दी होता है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित को विस्तार से समझाइए।

  1. हीमोफीलिया
  2. खाद्य विषाक्तन
  3. नारू रोग
  4. एनीमिया
  5. कुष्ठ रोग।

उत्तर:

1. हीमोफीलिया (Haemophilia) – यह एक आनुवंशिक रोग है। इसके जीन पुरुषों के लिंग गुणसूत्र (X) पर पाए जाते हैं और स्त्रियों के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचरित होते हैं।
लक्षण:

  • इस रोग में साधारण चोट लग जाने पर रुधिर का बहना बन्द नहीं होता है।
  • रुधिर का थक्का नहीं बनता है।
  • अतिरिक्त रक्त स्राव से मृत्यु हो जाती है। उपचार – समय से रक्त प्रदान करके इसका उपचार किया जाना चाहिए।

2. खाद्य विषाक्तन (Food Poisoning) – सूक्ष्म जीवों द्वारा संदूषित भोजन ग्रहण करने से खाद्य विषाक्तन हो जाता है। संक्रमित व्यक्ति को उल्टी होने लगती है तथा जी घबराता है। संदूषित भोजन में सूक्ष्म जीव विषैले पदार्थ उत्पन्न करते हैं जो भोजन को जहरीला (विषाक्त) बना देते हैं।

  • बचाव – हमें संदूषित भोजन खाने से बचना चाहिए।
  • उपचार – समय पर चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार लेना चाहिए।

3. नारू रोग – यह रोग सफेद धागों के समान गोल कृमि द्वारा होता है, जिसकी लम्बाई 30 cm से 125 cm तक होती है। इसके सूक्ष्म जीव साइक्लोप्स सूक्ष्म जीव द्वारा जल के माध्यम से स्वस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं। मादाकृमि मांसपेशियों में विकास करती है।
रोग का कारण:

  • अस्वच्छ जल का सेवन।
  • कुएँ, तालाब अथवा बाक्ड़ी का संदूषित जल पीने से।
  • जल को बिना छाने पीने से।

रोग के लक्षण:

  • हाथ या पैर की त्वचा पर फुसी होना।
  • फुसी में अत्यधिक दर्द होना।
  • बुखार आना।
  • अगर कृमि को समय पर न निकाला जाय तो मरने पर विषैला – पदार्थ छोड़ती है जिससे गाँठे बन जाती हैं।

रोग से बचाव:

  • जल को छानकर पीना चाहिए।
  • जल को उबालकर पीना चाहिए।

4. एनीमिया (Anaemia):
इस रोग में रोगी व्यक्ति के शरीर में लौह तत्व की कमी, शरीर में खून की कमी तथा हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है।
रोग के लक्षण:

  • चेहरा सफेद पड़ जाना।
  • शरीर कमजोर हो जाना।
  • जल्दी थक जाना।
  • चक्कर आना।
  • जीभ पर सफेद छाले पड़ जाना।

रोग से बचाव:
आवश्यकतानुसार पौष्टिक आहार जैसे – अंकुरित दालें, अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अंजीर, चुकन्दर, बैंगन तथा तिल लेने से रोग से बचाव किया जा सकता है। उपचार – रोगी व्यक्ति को आयरन की गोली लेनी चाहिए।

5. कुष्ठ रोग (Leprosy) – यह रोग माइक्रो – बेक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु द्वारा होता है तथा यह रोग रोगी से निरन्तर सम्पर्क से फैलता है।रोग के लक्षण:

  • त्वचा पर चकत्ते बनते हैं।
  • चकत्ते सुन्न पड़ जाते हैं।
  • इन पर चोट, जलन, दर्द आदि का अनुभव नहीं होता है।
  • इनकी अधिकता से अंग कार्य करना बन्द कर देते हैं।
  • अंगुलियाँ विकृत हो जाती हैं।

रोग से बचाव:

  • रोगी को अलग रखना चाहिए।
  • रोगी द्वारा प्रयुक्त सामग्री को अलग रखना चाहिए।
  • रोगी के कपड़ों को डिटॉल से धोना चाहिए।

उपचार एवं निदान:

  • सम्बन्धित अंग की शल्य चिकित्सा करानी चाहिए।
  • टीकाकरण।
  • पूरा अंग क्षतिग्रस्त होने पर कृत्रिम अंग लगाना।।

क्रियात्मक कार्य

प्रश्न 1.
अपने क्षेत्र में होने वाले संक्रामक तथा विशिष्ट रोगों की सची बनाएँ। संक्रामक तथा विशिष्ट रोगों के फैलने के कारण, लक्षण एवं बचाव की सारणी बनाकर कक्षा कक्ष में लगाएँ।
उत्तर:
संकेत – वे रोग जो पारस्परिक सम्पर्क से फैलते हैं संक्रामक रोग कहलाते हैं। जैसे – हैजा, टायफाइड, क्षयरोग, सर्दी – जुकाम आदि। ये रोग वायु, जल एवं भोजन, कीटों व सम्पर्क द्वारा फैलते हैं। अपने क्षेत्र में होने वाले रोगों की सूची अग्रवत् बनाएँ –
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अपने क्षेत्र के विशिष्ट रोगों जैसे – मलेरिया, डेंगू बुखार, कैंसर आदि की सूची बनाकर अपने कक्षा-कक्ष में लगायें। इस क्रियात्मक कार्य में अपने अध्यापक की सहायता लें।

प्रश्न 2.
अपने आस – पास के क्षेत्र को रोगमुक्त बनाने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को सूचीबद्ध करें तथा स्वयं भी – योगदान दें।
उत्तर:
संकेत – क्षेत्र को रोगमुक्त बनाने के लिए उपाय:

  1. स्वच्छ पेयजल आपूर्ति।
  2. जल टैंक, जलाशयों तथा संग्राहकों की नियमित सफाई तथा रोगाणुमुक्त रखना।
  3. मानव मल का भूमिगत सीवेज तंत्र द्वारा निस्तारण।
  4. मक्खी तथा मच्छरों के प्रजनन क्षेत्रों का उन्मूलन जैसे – मच्छर रुके हुए जल में अण्डे देते हैं अतः क्षेत्र में जलभराव रोकना चाहिए।
  5. मच्छर – मक्खियों के घर में प्रवेश को रोकने के लिए विभिन्न युक्तियों का प्रयोग।

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प्रश्न 3.
आपके क्षेत्र के चिकित्सालय का अवलोकन कर वहाँ काम में लिए जा रहे उपकरणों के नाम व उनके उपयोग की जानकारी कर सूची बनाइए।
उत्तर:
काम में लिए जा रहे उपकरण व उनके उपयोग

  1. अल्ट्रासाउंड मशीन – अल्ट्रासाउंड करने के लिए
  2. एम. आर. आइ. मशीन मैग्नेटिक रेसोनेन्स इमेजिंग देखने के लिए
  3. वेंटिलेटर मरीज को बचाने के लिए कृत्रिम जीवन रक्षा प्रणाली
  4. ECG मानीटर – हृदय की धड़कन की जाँच के लिए
  5. Cr स्कैनर – मानव शरीर के अन्दर का प्रतिबिम्ब देखने के लिए
  6. डायलिसिस मशीन – डायलिसिस करने के लिए
  7. इको मशीन – हृदय की गति व संरचना देखने के लिए
  8. X – ray मशीन हड्डी व पेशियों का प्रतिबिम्ब देखने के लिए
  9. सर्जिकल उपकरण – आपरेशन करने में प्रयुक्त उपकरण
  10. थर्मामीटर – तापमान नापने के लिए
  11. स्टेथोस्कोप – धड़कन मापने के लिए
  12. आक्सीजन गैस मशीन-मनुष्य को ऑक्सीजन देने के लिए
  13. एन्डोस्कोपी उपकरण – पेट के अन्दर की कार्यविधि देखने के लिए
  14. ब्लड प्रेशर मानीटर – रक्तचाप मापने के लिए

प्रश्न 4.
अपने शिक्षक की मदद से टीकाकरण अभियान की जानकारी अपने क्षेत्र में दीजिए तथा टीकाकरण करवाने में सहयोग करिए।
उत्तर:
संकेत टीकाकरण अभियान हमारे देश में टीकाकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत 15 वर्ष तक की आय के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को घातक रोगों के विरुद्ध टीके दिए जाते हैं। ये रोग हैं तपेदिक (टी. बी.), डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस, खसरा तथा पोलियो। पहली बार गर्भधारण करने पर, हर स्त्री को टिटनेस टॉक्साइड (टी. टी.) के 2 टीके लगवाने चाहिए। ये टीके गर्भावस्था में कभी भी लगवाए जा सकते हैं।
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (भारत):
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प्रश्न 5.
अध्याय में दिए गए रोगों से बचाव के लिए अपने मोहल्ले/गाँव का समूहवार भ्रमण कर उन्हें बचाव के तरीके बताएँ।
उत्तर:
संकेत – विभिन्न रोगों को समूहवार वर्गीकृत कर उनके कारण, लक्षण व बचाव एवं उपचार की जानकारी समूहवार भ्रमण कर जन समुदाय को दें।

प्रश्न 6.
भोजन के अवयव, स्रोत, प्रभाव, कमी एवं अधिकता से होने वाले रोगों का चार्ट बनाकर कक्षा कक्ष में लगाएँ। संकेत – चार्ट : भोजन के प्रमुख अवयव व उनके स्रोत एवं प्रभाव
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उत्तर:
कमी एवं अधिकता से होने वाले रोग
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प्रश्न 7.
समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित रोगों से सम्बन्धित जानकारियाँ एकत्रित करें तथा भित्ति पत्रिका का निर्माण कर विद्यालय में लगाएँ।
उत्तर:
संकेत – विद्यार्थी अध्यापक से परामर्श प्राप्त कर स्वयं करें। यहाँ पर केवल कुपोषण जनित रोगों का चार्ट दिखाया गया है।
चार्ट – कुपोषण जनित रोग या न्यूनता रोग:

  1. जीरोफ्थेलमिया (Xerophthalmia) – विटामिन A की कमी से नेत्र की कॉर्निया का शुष्क हो जाना।
  2. रतौंधी (Night Blindness) – विटामिन A की कमी से होने वाला नेत्र रोग।
  3. क्वाशियोरकर (Kwashiorker) – प्रोटीन की कमी से होने वाला रोग।
  4. बेरी – बेरी (Beriberi) – विटामिन B की कमी से होने वाला रोग।
  5. भेंघा (Goitre) – आयोडीन युक्त नमक न खाने से होने वाला रोग।
  6. स्कर्वी (Scurvy) – विटामिन C की कमी से होने वाला रोग।
  7. रिकेट्स (Rickets)-बच्चों में विटामिन D की कमी से होने वाला रोग।
  8. ऑस्टियोमेलेशिया (Osteomalasia) – विटामिन D की कमी से होने वाला अस्थि रोग।

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प्रश्न 8.
विश्व एड्स दिवस (एक दिसम्बर) पर जागरूकता अभियान के आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।
उत्तर:
संकेत – इसके लिए विद्यार्थी अपने अध्यापक को साथ लेकर रैलियाँ निकालें और एड्स रोग के कारण, लक्षण, बचाव और इसके उपचार से लोगों को अवगत करायें। बैनर और लाउडस्पीकर के प्रयोग से लोगों को सही सलाह दें।

प्रश्न 9.
एड्स जागरूकता के लिए भूमिका निर्वहन करें तथा इसका आलेख तैयार करें।
उत्तर:
संकेत – एड्स जागरूकता के लिए रोग के कारण तथा बचाव पर उद्बोधन दें तथा इसका आलेख निम्नवत् तैयार करें।
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RBSE Class 8 Science हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
निम्न में से संक्रामक रोग नहीं है ………………
(अ) टायफाइड
(ब) क्षयरोग
(स) सर्दी – जुकाम
(द) कैंसर
उत्तर:
(द) कैंसर

Question 2.
चिकन पॉक्स की तरह ही विषाणु जनित रोग है ………………
(अ) क्षय रोग
(ब) हैजा
(स) टायफाइड
(द) एड्स
उत्तर:
(द) एड्स

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Question 3.
मलेरिया रोग का कारण है ………………
(अ) प्लाज्मोडियम
(ब) सालमोनैला
(स) राइनोवायरस
(द) HIV वायरस
उत्तर:
(अ) प्लाज्मोडियम

Question 4.
अनियंत्रित कोशिका विभाजन से उत्पन्न रोग है ………………
(अ) एड्स
(ब) कैंसर
(स) टायफाइड
(द) सर्दी – जुकाम
उत्तर:
(ब) कैंसर

Question 5.
टीकाकरण से किस रोग को नहीं रोका जा सकता है ………………
(अ) क्षयरोग
(ब) हिपेटाइटिस
(स) कैंसर
(द) चेचक
उत्तर:
(स) कैंसर

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. हैजा रोग का संचरण ……………… एवं ……………… से होता है।
  2. आवारा कुत्ते, बिल्लियों तथा बन्दरों के काटने से ……………… रोग हो जाता है।
  3. खसरा वायरस का संचरण ……………… द्वारा होता है।
  4. मलेरिया का रोग कारक ……………… है।

उत्तर:

  1. दूषित जल, भोजन
  2. रेबीज
  3. वायु,
  4. प्लाज्मोडियम

सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
1.→ D
2. → E
3. → B
4. → A
5. → C

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संक्रामक रोग किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे रोग जो पारस्परिक सम्पर्क से फैलते हैं संक्रामक रोग कहलाते हैं जैसे – हैजा, क्षयरोग आदि।

प्रश्न 2.
असंक्रामक रोग किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते हैं असंक्रामक रोग कहलाते हैं।

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प्रश्न 3.
एड्स रोग मनुष्य को किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर:
एड्स (AIDS) एक घातक विषाणुजनित रोग है जिसमें रोगी का प्रतिरक्षा तन्त्र नष्ट हो जाता है तथा रोगी की रोगों से लड़ने की क्षमता समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 4.
कैंसर का क्या उपचार है?
उत्तर:
कोबाल्ट कीमोथैरपी तथा शल्य क्रिया द्वारा कैंसर का उपचार होता है।

प्रश्न 5.
किन्हीं दो आनुवंशिक रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. हीमोफीलिया
  2. वर्णान्धता

प्रश्न 6.
स्वाइन फ्लू रोग के फैलने के क्या कारण हैं?
उत्तर:
स्वाइन फ्लू संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर तथा गन्दे तथा संक्रमित हाथों से होता है।

प्रश्न 7.
डेंगू बुखार किस प्रकार प्रसारित होता है?
उत्तर:
डेंगू बुखार संक्रमित व्यक्ति या मादा जाति के ऐडिस ऐग्पति (Aedes Aegypti) नामक मच्छर के काटने से होता है।

प्रश्न 8.
पोलियो ड्रॉप्स क्या है?
उत्तर:
पोलियो ड्रॉप्स बच्चों को दिया जाने वाला एक टीका (Vaccine) है। जो बच्चों को पोलियो रोग से बचाता है।

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प्रश्न 9.
चेचक के टीके की सर्वप्रथम खोज किसने की थी?
उत्तर:
एडवर्ड जेनर ने चेचक के लिए 1798 में चेचक के टीके की खोज की थी।

प्रश्न 10.
राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम कब प्रारम्भ किया गया?
उत्तर:
राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन का प्रारम्भ 1953 में राष्ट्रीय स्तर पर किया गया।

प्रश्न 11.
संक्रामक रोगों से बचाव के उपाय बताइये।
उत्तर:
संक्रामक रोग दूषित वायु, जल, भोजन, कीट एवं बीमार व्यक्ति के सम्पर्क में आने से फैलते हैं। इसलिए कीट संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क से बचाव करके एवं शुद्ध जल, भोजन, स्वच्छता अपना कर व्यक्ति संक्रामक रोगों से बच सकता है।

प्रश्न 12.
रोग क्या है?
उत्तर:
हमारा शरीर नियमित रूप से भोजन का पाचन, उत्सर्जन, श्वसन आदि क्रियाएँ करता रहता है। जब कभी आन्तरिक या बाह्य कारणों से इन क्रियाओं में बाधा उत्पन्न होती है या अनियमितता उत्पन्न होती है तो इस अवस्था को रोग कहते हैं।

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प्रश्न 13.
सर्दी, खाँसी, जुकाम के समय आपको खाँसते समय मुख पर रूमाल रखने के लिए क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
सर्दी, खाँसी, जुकाम संक्रामक रोग हैं। ये रोग संक्रमित व्यक्ति के संपर्क, दूषित जल, वायु एवं भोजन द्वारा फैलते है। खाँसते समय असंख्य रोगणु वायु में चले जाते हैं जो कि दूसरे लोगों को संक्रमित कर सकते हैं, इसलिए खाँसते समय मुख पर रूमाल रखने के लिए कहा जाता है।

प्रश्न 14.
भूख नहीं लगना, वजन घटना, कमजोरी बढ़ना, लगातार सर्दी एवं कफ, कम ताप का बुखार, थूक के साथ रक्त आदि किस बीमारी के लक्षण हैं। रोग का नाम एवं कारक जीव का नाम बताइये।
उत्तर:
रोग – क्षय रोग (T – B)
कारक जीव – माइक्रो बैक्टीरियम ट्यूबरक्यूलोसिस

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
क्षय रोग के प्रमुख लक्षण लिखिए। इसका क्या उपचार है?
उत्तर:
भूख नहीं लगना, वजन घटना, लगातार सर्दी व कफ, कम ताप का बुखार, थूक के साथ रक्त का निकलना, सीने में दर्द, ज्यादा चलने पर साँस का फूलना, लसिका ग्रन्थियों का फूल जाना आदि क्षय रोग के प्रमुख लक्षण हैं। उपचार थूक की जाँच, सीने का एक्स – रे, M.D.T. का चिकित्सक अनुसार सेवन, DOTs के नियंत्रण में रहना क्षय रोग के प्रमुख उपचार हैं।

प्रश्न 2.
हैजा रोग के प्रमुख लक्षण लिखिए तथा इसका उपचार बताइए।
उत्तर:
हैजा विब्रियो कोलेरी नामक जीवाणु जनित रोग है। इस रोग के प्रमुख लक्षण उल्टियाँ होना, जलीय दस्त, मांसपेशियों में ऐंठन, शरीर में जल की कमी, बुखार, तेज प्यास लगना, जीभ का सूखना, आँखें सना, पेट तथा आंत में संक्रमण हैं। हैजा का उपचार ORS जीवन रक्षक घोल पीना व दवाइयाँ लेना है।

प्रश्न 3.
टाइफाइड रोग कारक का नाम लिखिए एवं इस रोग के लक्षण और उपचार बताइए।
उत्तर:
टाइफाइड रोग सालमोनेला टाइफी नामक जीवाणु से फैलता है। इस रोग के प्रमुख लक्षण छोटी आंत में सक्रमण, प्रतिदिन सिरदर्द तथा बुखार आना, दूसरे सप्ताह में बुखार अधिक, तीसरे व चौथे सप्ताह में बुखार कम, शरीर में दर्द, कब्ज, धीमा हृदय स्पंदन, जीभ के ऊपरी भाग में लाल चकत्ते पड़ जाना है। उपचार रोगी को बुखार आने पर पूरा आराम, प्रतिजैविकों से उपचार तथा चिकित्सक की निगरानी में दवाइयाँ लेनी चाहिए।

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प्रश्न 4.
रेबीज (जलांतक) रोग के कारण, लक्षण तथा उपचार लिखिए।
उत्तर:
रेबीज (जलांतक) रोग संक्रमित कुत्ता, बन्दर, लोमड़ी, भेड़िया जिनकी लार में रेबीज विषाणु होता है के काटने से होता है। इस रोग के प्रमुख लक्षण तेज बुखार आना, सिर दर्द, बेचैनी, कंठ का अवरुद्ध होना तथा पानी से डर लगना है। उपचार रेबीज ग्रस्त जानवर को मारना, घाव को पानी तथा साबुन से धोना, डाक्टर की देखरेख में एण्टीरेबीज के इन्जेक्शन लगवाना इस रोग का उपचार है।

प्रश्न 5.
छोटी माता (चिकन पॉक्स) रोग का कारण, लक्षण तथा उपचार लिखिए।
उत्तर:
छोटी माता (चिकन पॉक्स) वेरीसेला जोस्टर नामक विषाणु द्वारा उत्पन्न रोग है। इस रोग के लक्षण हल्का/मध्यम बुखार आना, पीठ में दर्द, घबराहट, पूरे शरीर पर दाने – दाने आदि हैं। 4 से 7 दिनों बाद दानों पर पपड़ी पड़ जाती है। उपचार कुछ खास तरीके से तैयार मल्हम/नारियल का तेल दानों पर लगाना तथा सम्बन्धित दवाइयाँ लेना इस रोग का उपचार है।

प्रश्न 6.
खसरा के विषाणु किस प्रकार संचरित होते हैं? इस रोग के प्रमुख लक्षण तथा उपचार लिखिए।
उत्तर:
खसरा के विषाणुओं का संचरण वायु द्वारा होता है। इस रोग के प्रमुख लक्षण चमड़ी पर लाल-लाल दाने उभरना, खुजली तथा जलन होना आदि हैं। इसका उपचार प्रतिरोधी क्रीम (Antiseptic Cream) लगाना तथा चिकित्सक के निर्देशानुसार औषधियाँ लेना है।

RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव

प्रश्न 7.
मलेरिया रोग किस परजीवी के कारण फैलता है? इस रोग के प्रमुख लक्षण तथा उपचार लिखिए।
उत्तर:
मलेरिया रोग संघ प्रोटोजोआ के परजीवी जन्तु प्लाज्मोडियम द्वारा फैलता है। इसका संचरण मादा ऐनोफेलीज मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया रोग में तेज ठण्ड के साथ बुखार, बुखार नियमित अन्तरालों में, शरीर में दर्द, प्यास अधिक लगना, चेहरा लाल, यकृत तथा प्लीहा में सूजन, कमजोरी आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। इस रोग का उपचार रक्त की जाँच कराना एवं चिकित्सक की सलाह से दवाइयाँ लेकर किया जाता है।

प्रश्न 8.
हिपेटाइटिस A के रोग कारक का संचरण किस प्रकार होता है? इस रोग के लक्षण, बचाव व उपचार बताइए।
उत्तर:
हिपेटाइटिस A के रोगकारक विषाणु का संचरण दूषित जल से होता है।
लक्षण:

  1. लीवर (यकृत) का कमजोर होना।
  2. लीवर में पानी भरना।
  3. पाचन क्षमता का कमजोर होना।

बचाव:

  1. उबले पेयजल का प्रयोग।
  2. टीकाकरण।

उपचार:

  1. लिवोसिन टेबलेट खाना
  2. Liv – 50 का सेवन
  3. चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार प्रतिजैविक दवाइयों का सेवन

प्रश्न 9.
ऐनीमिया रोग का कारण, लक्षण, बचाव तथा उपचार लिखिए।
उत्तर:
ऐनीमिया रोग शरीर में लौह तत्व की कमी, खून की कमी, हीमोग्लोबिन की कमी से होता है।
लक्षण:

  1. चेहरा सफेद पड़ जाता है।
  2. शरीर कमजोर हो जाता है।
  3. रोगी शीघ्र थक जाता है।
  4. जीभ पर सफेद छाले पड़ जाते हैं।

बचाव – इस रोग से बचाव शारीरिक आवश्यकतानुसार पौष्टिक आहार, अंकुरित दालें, अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अंजीर, चुकन्दर, बैंगन, तिल आदि लेकर किया जा सकता है।

उपचार – इस रोग के निदान के लिए आयरन की गोली लेनी चाहिए।

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प्रश्न 10.
श्रीमती सावित्री बाई फुले पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
श्रीमती सावित्री बाई फुले का जन्म महाराष्ट्र प्रान्त. के सतारा जिले के नई गाँव में हुआ था। 9 वर्ष की अल्पायु में इनका विवाह कर दिया गया। उस समय समाज में छुआछूत का अत्यधिक बोलबाला था लेकिन फिर भी इन्होंने अपने कुएँ पर सभी को पानी भरने की व्यवस्था कराई। इन्होंने छुआ-छूत, जातिप्रथा आदि का डटकर विरोध किया तथा महिला अधिकारों के प्रति संघर्ष किया। प्लेग की महामारी के समय ये लोगों की मदद के लिए आगे आईं एवं गरीब व्यक्तियों के लिए चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था करवाई। वे आधुनिक भारत की अग्रणी महिला नेत्रियों में से एक थीं।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जीवाणु जनित तथा 5 विषाणु जनित रोगों के नाम तथा उनके रोग कारकों के नाम सूचीबद्ध कीजिए। जीवाणु जनित रोग
उत्तर:
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विषाणु जनित रोग
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प्रश्न 2.
डेंगू बुखार क्या है? यह कैसे होता है? इसके कारण, लक्षण व बचाव के उपाय लिखिए।
उत्तर:
डेंगू एक विषाणु जनित रोग है, जो कि संक्रमित मादा जाति के ऐडिस ऐग्पति (Aedes aegypti) नामक मच्छर के काटने से होता है।
कारण:

  1. मच्छरों के गंदे पानी में पनपने के कारण।
  2. कीटों के पनपने के कारण।
  3. मच्छरों के काटने के कारण।
  4. प्लेटलेट्स की संख्या कम होने के कारण।
  5. कूलर में पानी भरा रहने पर मच्छरों के पनपने के कारण।
  6. गन्दगी के कारण।
  7. खून के अभाव के कारण।

लक्षण – संक्रमित मच्छर के काटने के तीन से चौदह दिनों बाद डेंगू बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं। जो निम्नानुसार हैं:

  1. तेज ठंड लगकर बुखार आना।
  2. सिर दर्द।
  3. आँखों में दर्द।
  4. बदनदर्द या जोड़ों में दर्द।
  5. भूख कम लगना।
  6. जी मिचलाना, उल्टी।
  7. दस्त लगना।
  8. चमड़ी के नीचे लाल चट्टे आना।
  9. गम्भीर स्थिति में आँख – नाक में से खून निकलना।

बचाव के उपाय:

  1. घर के अन्दर और आसपास पानी जमा नहीं होने दें।
  2. अगर किसी चीज में हमेशा पानी जमाकर रखते हैं तो पहले उसे साबुन और पानी से अच्छे से धो लेना चाहिए, जिससे मच्छर के अण्डों को हटाया जा सके।
  3. घर में कीटनाशक का छिड़काव करें।
  4. कूलर का काम न होने पर उसमें जमा पानी निकालकर सुखा दें।
  5. खिड़की और दरवाजे में जाली लगाकर रखें।
  6. शरीर को पूरा ढककर रखें।
  7. रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
  8. अन्य (स्प्रे, क्रीम) आदि का उपयोग करें।
  9. अपने आसपास के लोगों का भी मच्छर के फैलने से रोकने के लिए प्रोत्साहित करें।
  10. अपना परिवेश स्वच्छ रखें।
  11. अपने आस – पास में अगर किसी डेंगू मरीज का पता चलता है तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग एवं नगर निगम को दें जिससे
  12. तुरन्त मच्छर विरोधी उपाय का प्रबन्धन किया जा सके।

उपचार:

  1. रोगी को तुरन्त डॉक्टर की सलाह अनुसार आराम करना चाहिए और समय पर दवा लेनी चाहिए।
  2. रोगी को पर्याप्त मात्रा में आहार और पानी लेना चाहिए।
  3. नियमित प्लेटलेट्स की जाँच करानी चाहिए।
  4. पपीते के पत्ते का रस पीना चाहिए, क्योंकि इससे प्लेटलेट्स की मात्रा बढ़ती है।

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प्रश्न 3.
रोगों के निवारण हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रमों पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।
उत्तर:
रोगों के निवारण हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम – विभिन्न रोगों के निवारण हेतु प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम निम्नवत हैं:
1. राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम, इस कार्यक्रम का प्रारम्भ 1953 में राष्ट्रीय स्तर पर किया गया। इस कार्यक्रम में मच्छरों को मारने हेतु रासायनिक पदार्थों को छिड़कना (फोगिंग), रोगियों का पता लगाना, औषधियों का वितरण करना मुख्य है।

2. राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम – इसके अन्तर्गत राष्ट्रीय स्तर पर क्षयं रोग केन्द्र, जिला केन्द्र तथा प्रदर्शन केन्द्र स्थापित करना है। इन केन्द्रों का कार्य स्वस्थ व्यक्तियों में टीके लगाना, रोग का पता लगाने तथा रोगियों को उचित उपचार, परामर्श तथा चिकित्सा देना।

3. राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम – इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रोगियों में इस रोग की प्रारम्भिक अवस्था का पता लगाना तथा उनके उपचार का प्रबन्ध करना। रोगियों के पुनर्वास का तथा उनकी जीविका का प्रबन्ध करना।

4. राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम – इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्र को पोलियो मुक्त करना है। इसके अन्तर्गत बच्चों को नियमित पल्स पोलियो की दवाई पिलाई जाती है।

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