RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 6 पौधों में जनन

Rajasthan Board RBSE Class 8 Science Chapter 6 पौधों में जनन

RBSE Solutions for Class 8 Science

RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 6 पौधों में जनन

RBSE Class 8 Science पौधों में जनन Intext Questions and Answers

पृष्ठ 60.

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या आपने सोचा है कि

  1. नीम के पेड़ के नीचे नीम के पौधे ही क्यों उगते हैं।
  2. बकरी अपने ही समान बच्चे को जन्म क्यों देती है?
  3. ऐसा किस कारण होता है?
  4. अगर ऐसा नहीं होगा तो क्या होगा?

उत्तर:
अपनी जाति का अस्तित्व बनाए रखने के लिए प्रत्येक सजीव अपने समान संतति पैदा करता है। सजीवों का अपने समान ही संतति को उत्पन्न करने की प्रक्रिया जनन कहलाती है। सजीवों में यह प्रक्रिया पीढ़ी – दर – पीढ़ी चलती रहती है ताकि उनकी जातियों का अस्तित्व तथा निरन्तरता बनी रहे।

पृष्ठ 60.

प्रश्न 2.
एक आलू लीजिए। उसे ध्यान से देखिए। उसमें खाँचों से कुछ उभरी हुई रचनाएँ होती हैं जिन्हें आँख कहते हैं। इन आँख युक्त टुकड़ों को काटिए। इन टुकड़ों को मिट्टी में गड्ढा खोदकर बोइए। फिर गड्ढे को मिट्टी से भर दीजिए और नियमित पानी डालिए। कुछ दिनों बाद आलू के टुकड़ों को खोदकर निकालिए। आप क्या अवलोकन करते हैं?
उत्तर:
आलू की आँखों से नये पादप अंकुरित होते दिखाई देते हैं।

पृष्ठ 61.

प्रश्न 3.
गुलाब की एक शाखा को उसकी पर्व संधि से काटिए। पर्व संधि तने या शाखा का वह भाग है जहाँ से पत्ती निकलती है। शाखा का यह 10 – 12 सेमी लम्बा टुकड़ा कर्तन या कलम कहलाता है। इसे तिरछा काटकर मिट्टी में दबा दीजिए और नियमित पानी दीजिए। कलम से नई शाखा को निकलने में कितने दिनं लगे?
उत्तर:
15 से 20 दिन।

पृष्ठ 62.

प्रश्न 4.
अपने घर के नजदीक या परिक्षेत्र में स्थित बेकरी की दुकान से यीस्ट का पाउडर या यीस्ट केक लीजिए। चुटकी भर यीस्ट को जल से भरे पात्र में डालिए। अब इसमें शक्कर (1 चम्मच) डालकर जल को हिलाएँ अब इस पात्र को गरम जगह रखिए। एक घण्टे बाद इस द्रव की एक बूंद को काँच की स्लाइड पर रखकर माइक्रोस्कोप में देखने पर क्या मिलताहै?
उत्तर:
नई यीस्ट कोशिकाएँ दिखाई देती हैं। यीस्ट कोशिका से छोटे बल्ब के रूप में मुकुल बनती है।

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पृष्ठ 63.

प्रश्न 5.
धतूरे का पुष्प लीजिए। उसकी अलग-अलग संरचनाओं को पहचानने का प्रयास कीजिए। उनके अलग-अलग हिस्सों को एक चार्ट शीट पर चिपकाइए एवं अध्यापक की सहायता से उसे नामांकित करने का प्रयास कीजिए। पुष्प का सबसे बाहरी चक्र हरी पत्तियों के सदृश्य संरचनाओं का बना होता है इसे बाह्य दलपुंज कहते हैं इसका एक सदस्य बाह्य दल कहलाता है। बाह्य दलपुंज के बाद भीतर सफेद पत्तियों का सुन्दर-सा चक्र दलपुंज कहलाता है। इसका एक सदस्य दल कहलाता है। ये दोनों चक्र पुष्प के सहायक चक्र कहलाते हैं। ये जनन प्रक्रिया में पुष्प की सहायता करते हैं। पुष्प का अवलोकन कर निम्न सारणी को भरिए।
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उत्तर:
धतूरे के पुष्प के विभिन्न भागों का विवरण
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RBSE Class 8 Science पौधों में जनन Text Book Questions and Answers

सही विकल्प का चयन कीजिए

Question 1.
कायिक जनन पाया जाता है …………………
(अ) आलू में
(ब) गेहूँ में
(स) नीम में
(द) मटर में
उत्तर:
(अ) आलू में

Question 2.
नर और मादा युग्मक के संयोजन को कहते हैं …………………
(अ) परागण
(ब) निषेचन
(स) मुकुलन
(द) बीजाणु
उत्तर:
(ब) निषेचन

Question 3.
एकलिंगी पुष्प है …………………
(अ) मक्का
(ब) सरसों
(स) गुलाब
(द) पिटूनिया
उत्तर:
(अ) मक्का

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Question 4.
द्विलिंगी पुष्प है …………………
(अ) पपीता
(ब) मक्का
(स) ककड़ी
(द) सरसों
उत्तर:
(द) सरसों

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. फर्न तथा मॉस ………………… द्वारा प्रजनन करते हैं।
  2. सजीवों द्वारा अपने ही समान ………………… को उत्पन्न करना ………………… कहलाता है।
  3. नर युग्मक व मादा युग्मक के संयोजन से ………………… बनता है।
  4. ………………… में परागकण परागकोश से उसी पुष्प के ………………… वर्तिकान पर पहुँचते हैं।

उत्तर:

  1. अलैंगिक जनन
  2. संतति, जनन
  3. युग्मनज
  4. स्वपरागण

सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
1. (d)
2. (c)
3. (b)
4. (a)

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियों का वर्णन-कीजिए। प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
इस प्रकार के जनन में केवल एक ही जीव संतान उत्पन्न कर सकता है। अलैंगिक जनन की अनेक विधियाँ हैं जो कि निम्नवत् हैं

  1. मुकुलन
  2. विखण्डन
  3. बीजाणु निर्माण
  4. पुनरुद्भवन (रीजनरेशन) इत्यादि।

1. मुकुलन – कुछ जीवों के शरीर पर एक छोटी-सी कलिका निकलती है। कलिका जीवद्रव्य एवं केन्द्रक का भाग होता है। विकसित होने पर यह कलिका पृथक हो जाती है। उदाहरण – यीस्ट, हाइड्रा।

2. विखण्डन – यह अलैंगिक जनन की वह विधि है जिसमें एक जीव टुकड़ों में टूटकर नये जीव का निर्माण करता है। उदाहरण – स्पाइरोगायरा।

3. बीजाणु निर्माण-कुछ जीवों में जैसे कि (ब्रैड माउल्ड) डबलरोटी पर रुई के जाले के समान कवक उग आते हैं। इनमें बीजाणुधानियाँ विकसित होती हैं। बीजाणु धानियों में बीजाणु उत्पन्न होते हैं। बीजाणु मुक्त होकर हवा में तैरते रहते हैं व अनुकूल परिस्थितियाँ आने पर अंकुरित होकर नये कवक तन्तुओं में विकसित हो जाते हैं। उदाहरण – राइजोपस, म्यूकर।

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प्रश्न 2.
एकलिंगी तथा द्विलिंगी पुष्प में अन्तर समझाइये।
उत्तर:
एकलिंगी पुष्प में पुंकेसर अथवा स्त्रीकेसर में से कोई एक जनन अंग उपस्थित होता है जबकि द्विलिंगी पुष्प में, पुंकेसर तथा स्त्रीकेसर दोनों जनन अंग उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 3.
स्वपरागण व परपरागण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब परागकण उसी पुष्प के वर्तिकान पर अथवा उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं तो यह प्रक्रिया स्वपरागण कहलाती है तथा जब एक पादप के पुष्प से दूसरे पादप के पुष्प के वर्तिकान पर पहुँचते हैं तो यह क्रिया पर परागण कहलाती है।

प्रश्न 4.
पुष्प का नामांकित चित्र बनाइये।
उत्तर:
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प्रश्न 5.
अनिषेक जनन को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
जब पौधों में बिना निषेचन के ही पुष्प, सीधे फल में परिवर्तित हो जाता है तो उसे अनिषेक जनन कहते हैं। इस प्रकार बने फलों में बीज नहीं होते हैं। जैसे – केला, अंगूर आदि।

प्रश्न 6.
मेण्डल के आनुवंशिकता के तीनों नियम लिखिए।
उत्तर:
मेण्डल के तीन नियम हैं –

  1. प्रभाविता का नियम
  2. पृथक्करण का नियम
  3. स्वतन्त्र अपव्यूहन का नियम।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लैंगिक व अलैंगिक जनन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लैंगिक एवं अलैंगिक जनन में निम्नलिखित अन्तर हैं –
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प्रश्न 2.
लैंगिक जनन की प्रक्रिया को सचित्र समझाइये।
उत्तर:
लैंगिक जनन वह विधि है जिसमें नर तथा मादा जीव युग्मक (गैमीट) उत्पन्न करते हैं जिनके मिलने से नयी संतान का निर्माण होता है। पुष्प का सबसे बाहरी चक्र हरी पत्तियों सदृश्य संरचनाओं का बना होता है इसे बाह्य दलपुंज कहते हैं इसका एक सदस्य बाह्य दल कहलाता है। बाह्य दल पुंज के बाद भीतर सफेद पत्तियों का सुन्दर – सा चक्र दलपुंज कहलाता है। इसका एक सदस्य दल कहलाता है। ये दोनों चक्र पुष्प के सहायक चक्र कहलाते हैं। ये जनन प्रक्रिया में पुष्प की सहायता करते हैं।
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पुष्पों में दलपुंज के अन्दर जननांग पाये जाते हैं, इसमें पुंकेसर नर जननांग तथा स्त्रीकेसर मादा जननांग होते हैं। पुंकेसर-पुंकुसर में परागकोष पाए जाते हैं जिसमें असंख्य परागकण निर्मित होते हैं।

स्त्रीकेसर:
स्त्रीकेसर में वर्तिकाग्र, वर्तिका और अण्डाशय होते हैं। अण्डाशय में एक या अधिक बीजाण्ड हो सकते है। अण्ड निर्माण बीजाण्ड में होता है।

निषेचन:
स्त्रीकेसर के वर्तिकान तक पहुँच कर परागकण, परागण की प्रक्रिया द्वारा अंकुरित होते हैं। परागकण के अंकुरण से परागनली बनती है जो वर्तिका से होते हुए अण्डाशय तक वृद्धि कर अण्डाशय में स्थित बीजाण्ड तक पहुँचती है। परागनली में स्थित नर केन्द्रक बीजाण्ड में स्थित अण्डकोशिका से संयोजित हो जाते हैं। इस प्रकार नर केन्द्रक के मादा केन्द्रक अर्थात् अण्डकोशिका के संयोजन की प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं। निषेचन के द्वारा एक द्विगुणित युग्मनज का निर्माण होता है।

यह युग्मनज आगे विभाजित होकर भ्रूण का निर्माण करता है। इस प्रकार निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड से बीज व अण्डाशय से फल का निर्माण होता है। फल के उपयोग के पश्चात बीज स्वतंत्र होकर उगकर नये पादप बनाते हैं। सुविकिसित (आवृत्तबीजी) पौधों के इस प्रकार संतति उत्पन्न करने की प्रक्रिया लैगिंक जनन कहलाती है। एंजियोस्पर्म में भ्रूणपोष त्रिगुणित होता है।
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प्रश्न 3.
कायिक जनन की विधियों को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
बीजरहित पौधों में जनन क्रिया, कायिक जनन विधि द्वारा होती है। इसके अन्तर्गत पौधे के किसी कायिक अंग जैसे-जड़, तना, पत्ती, कलिकाओं द्वारा नया पौधा तैयार हो जाता है। कायिक जनन की निम्न विधियाँ हैं
1. कलम लगाना – इस विधि में तने के कलिका युक्त छोटे-छोटे टुकड़े काट लिये जाते हैं। इन टुकड़ों को कलम कहते हैं। इनके निचले सिरों को उचित स्थान पर भूमि में दबा देते हैं, जिनसे कुछ दिनों के बाद जड़ें निकल आती हैं और उपस्थित कलिकाएँ वृद्धि करके नया पौधा बना लेती हैं। गुलाब, कैक्टस, अनानास, गुड़हल आदि में हम कलम से ही पौधे उगाते हैं।

2. रोपण – इस विधि में उगाये जाने वाले पौधे की कलम को किसी अन्य वृक्ष के लूंठ स्कन्ध पर लगा देते हैं। स्कन्ध पौधे में तने के नीचे मिट्टी में मूल तंत्र होता है। कलम उगाये जाने वाले पौधे की टहनी होती है। दोनों भागों को बाँध देते हैं और पौधे उगाते हैं; जैसे-आम।

3. दाव लगाना – कुछ पौधों में हम पौधे की किसी शाखा को झुकाकर नम मिट्टी में दबा देते हैं। कुछ समय बाद जड़ निकल आती है और उसके बाद नई पौध बन जाती है। नई पौध को इसके पैतृक पौधे से काटकर अलग कर देते हैं। यह वृद्धि करके पूर्ण पौधा बन जाता है। बेला, चमेली, कनेर आदि में यह विधि अपनाई जाती है।

RBSE Class 8 Science पौधों में जनन Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

Question 1.
पौधे के निम्नलिखित अंगों में से कौन-सा कायिक – जनन के लिए सबसे अधिक अनुकूल है …………………
(अ) जड़
(ब) तना
(स) पत्ती
(द) पत्रप्रकलिका
उत्तर:
(ब) तना

Question 2.
कायिक जनन में …………………
(अ) पौधों की शुद्धता बनी रहती है
(ब) पौधे कम समय में उत्पन्न किए जा सकते हैं
(स) पौधों को बाहरी साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता
(द) उपरोक्त सभी कथन सत्य हैं।
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी कथन सत्य हैं।

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Question 3.
पौधों में अलैंगिक जनन की प्रमुख विधियाँ हैं …………………
(अ) विखण्डन
(ब) मुकुलन
(स) बीजाणु जनन
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी

Question 4.
पादपों में जनन की विधियाँ हैं …………………
(अ) 1
(ब) 2
(स) 3
(द) 4
उत्तर:
(द) 4

Question 5.
कटहल एक संग्रहित फल है निम्नलिखित फलों में ऐसा ही फल कौन – सा है …………………
(अ) आम
(ब) गेहूँ
(स) शहतूत
(द) स्ट्रॉबेरी
उत्तर:
(स) शहतूत

Question 6.
आनुवंशिकी के जनक हैं …………………
(अ) मेण्डल
(ब) हरगोविन्द
(स) मिचेली
(द) वटलर
उत्तर:
(अ) मेण्डल

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Question 7.
आनुवंशिकता के नियम हैं …………………
(अ) 1
(ब) 2
(स) 3
(द) 4
उत्तर:
(स) 3

Question 8.
निषेचन के बाद पुष्य का कौन-सा भाग फल में बदल जाता है …………………
(अ) पुंकेसर
(ब) वर्तिका
(स) अण्डाशय
(द) बीजाणु
उत्तर:
(स) अण्डाशय

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

  1. प्रत्येक सजीव अपने समान ……………….. पैदा करता है।
  2. अलैंगिक जनन में युग्मकों का ……………….. नहीं होता है।
  3. दलपुंज के अन्दर पुष्प के ……………….. अंग पाये जाते हैं।
  4. स्त्रीकेसर में वर्तिकाग्र, वर्तिका और ……………….. होता है।
  5. एंजियोस्पर्म में भ्रूणपोष ……………….. होता है।
  6. बीजाण्ड से ……………….. का निर्माण होता है।

उत्तर:

  1. संतति
  2. संलयन
  3. जनन
  4. अण्डाशय
  5. त्रिगुणित
  6. बीज

सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
1. → E
2. → C
3. → F
4. → B
5. → D
6. → A

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कायिक जनन किसके द्वारा सम्भव है?
उत्तर:
कायिक जनन जड़, तना, पत्ती द्वारा किसी के साथ सम्भव है।

प्रश्न 2.
तने द्वारा कायिक जनन किन-किन पौधों में सम्भव है?
उत्तर:
पोदीना, हल्दी, अदरक आदि।

प्रश्न 3.
मुकुलन विधि द्वारा अलैंगिक जनन किसमें होता है?
उत्तर:
यीस्ट में।

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प्रश्न 4.
पादपों में जनन की कितनी विधियाँ हैं?
उत्तर:
पादपों में जनन की विधियाँ निम्नलिखित हैं

  1. कायिक जनन
  2. अलैंगिक जनन
  3. लैंगिक जनन
  4. अनिषेक जनन।

प्रश्न 5.
ऐच्छिक किस्म का पौधा प्राप्त करने की सबसे अच्छी विधि कौन – सी है?
उत्तर:
रोपण।

प्रश्न 6.
पत्तियों द्वारा कायिक जनन का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
ब्रायोफिलम।

प्रश्न 7.
अलैंगिक जनन किसे कहते हैं?
उत्तर:
अलैंगिक जनन में नये जीव की उत्पत्ति एक ही जनक से होती है। इनमें युग्मकों का संलयन नहीं होता।

प्रश्न 8.
अलैंगिक जनन की कौन-कौन सी विधियाँ हैं?
उत्तर:
मुकुलन, विखण्डन, बीजाणुजनन।।

प्रश्न 9.
बीजाणुजनन किनमें होता है?
उत्तर:
बीजाणुजनन निम्न वर्ग के सजीवों जैसे-शैवाल, कवक, मॉस व फर्न में होता है।

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प्रश्न 10.
निषेचन किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह क्रिया जिसमें पुष्प के नर भाग तथा मादा भाग के केन्द्रक आपस में मिलकर भ्रूण का गठन करते हैं, निषेचन कहलाता है।

प्रश्न 11.
परागनली में नर युग्मक की कितनी संख्या होती है?
उत्तर:
परागनली में नर युग्मक की संख्या 2 होती है।

प्रश्न 12.
पुष्य के जनन अंग कहाँ पाये जाते हैं?
उत्तर:
दलपुंज के अन्दर।

प्रश्न 13.
भ्रूण कहाँ पाया जाता है?
उत्तर:
बीज में भ्रूण पाया जाता है।

प्रश्न 14.
सबसे बड़े पुष्प का नाम बताइये?
उत्तर:
रेफ्लीशिया।

प्रश्न 15.
सबसे बड़े बीज का नाम बताइये?
उत्तर:
लोडोइसिया।

प्रश्न 16.
सबसे छोटा पुष्प बताइये?
उत्तर:
वुल्फिया।

प्रश्न 17.
सबसे छोटे बीज का नाम बताइये?
उत्तर:
ऑर्किड।

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प्रश्न 18.
फल किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिपक्व अण्डाशय ही फल कहलाता है।

प्रश्न 19.
आनुवंशिकी किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में आनुवंशिक लक्षणों के स्थानान्तरण की इस प्रक्रिया को आनुवंशिकी कहते हैं।

प्रश्न 20.
निषेचन के पश्चात् बीजाड और अण्डाशय का क्या होता है?
उत्तर:
निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड बीज में तथा अण्डाशय फल में परिवर्तित हो जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अनिषेक जनन क्या है?
उत्तर:
अनिषेक जनन – जब पौधों में बिना निषेचन के ही पुष्प, सीधे फल में परिवर्द्धित हो जाता है तो उसे अनिषेक जनन कहते हैं। इस प्रकार बने फलों में बीज नहीं होते हैं। जैसे-केला, अंगूर आदि।

प्रश्न 2.
कलम किस प्रकार लगाते हैं?
उत्तर:
इस विधि में पौधे की डाल को तिरछा काटकर नम मिट्टी में दबा देते हैं कुछ दिन बाद उसमें से जड़ निकल आती है जो बाद में वृद्धि कर नया पौधा बन जाता है। इसी को कलम लगाना कहते हैं।

प्रश्न 3.
कायिक जनन के लाभ बताइये।
उत्तर:
कायिक जनन के लाभ:

  1. इससे पादप कम समय में विकसित हो जाते हैं।
  2. इससे पादप से पुष्प व फल कम अवधि में प्राप्त होते हैं।
  3. इसमें नवीन पादप एक ही जनक से प्राप्त होते हैं।
  4. इससे आनुवंशिकीय समरूप पौधे उगते हैं जिससे पैतृक लक्षण संरक्षित रहते हैं।

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प्रश्न 4.
जनन किसे कहते हैं? जनन जातियों के अस्तित्व के लिए क्यों आवश्यक है।
उत्तर:
इस पृथ्वी पर प्रत्येक जीव जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है चाहे वह पौधा हो या जन्तु इसलिए अपनी जाति का अस्तित्व बनाए रखने के लिए प्रत्येक सजीव अपने समान संतति पैदा करता है। सजीवों का अपने समान ही संतति को उत्पन्न करने की प्रक्रिया जनन कहलाती है। सजीवों में यह प्रक्रिया पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती है ताकि उनकी जातियों का अस्तित्व तथा निरन्तरता बनी रहे।

प्रश्न 5.
मुकुलन की प्रक्रिया को सचित्र समझाइये।
उत्तर:
किसी बेकरी की दुकान से यीस्ट का पाउडर या यीस्ट को लीजिए। चुटकी भर यीस्ट को पात्र में लिए जल में डालिए। अब इसमें शक्कर (1 चम्मच) डालकर जल को हिलाएँ अब इस पात्र को गरम जगह रखिए। एक घंटे बाद इस द्रव की एक बूंद को काँच की स्लाइड पर रखकर माइक्रोस्कोप में देखते हैं। चित्रानुसार
RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 6 पौधों में जनन 9
नई यीस्ट कोशिकाएँ दिखाई देगी। यीस्ट कोशिका से छोटे बल्ब के रूप में मुकुल बनती है। मुकुल धीरे-धीरे वृद्धि करती है और जब यह जनक से अलग होती है तो नई यीस्ट कोशिकाओं में परिवर्तित हो जाती है।

प्रश्न 6.
एकलिंगी पुष्प तथा द्विलिंगी पुष्प को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
एकलिंगी पुष्प-ऐसे पुष्प जिनमें पंकेसर अथवा स्त्रीकेसर में से कोई एक जनन अंग उपस्थित होता है, एकलिंगी पुष्प कहलाते हैं। उदाहरण – मक्का, पपीता, ककड़ी आदि। द्विलिंगी पुष्प-ऐसे पुष्प जिनमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों जनन अंग उपस्थित होते हैं, द्विलिंगी पुष्प कहलाते हैं। उदाहरण-सरसों, गुलाब, पिटुनिया, धतूरा आदि।

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प्रश्न 7.
पुष्यों में लैंगिक जनन किस प्रकार होता है?
उत्तर:
पुंकेसरों में परागकोश पाए जति हैं जिनमें असंख्य परागकण निर्मित होते हैं। परागकणों के अंकुरित होने से इनमें नर केन्द्रकों का निर्माण होता है। स्त्रीकेसर में वर्तिकाग्र, वर्तिका और अण्डाशय होते हैं। अण्डाशय में एक या अधिक बीजाण्ड हो सकते हैं। मादा युग्मक अथवा अण्ड निर्माण बीजाण्ड में होता है। निषेचन के बाद बीजाण्ड से बीज तथा अण्डाशय से फल का निर्माण होता है।

प्रश्न 8.
परागण किसे कहते हैं?
उत्तर:
परागकण हल्के होने के कारण वे जल, वायु, कीटों या जन्तुओं के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचते हैं। पुष्पों पर बैठने वाले कीटों के शरीर पर परागकण चिपक जाते हैं। जब ये कीट अन्य पुष्पों पर बैठते हैं तो ये परागकण उस पुष्प की वर्तिकान पर गिर जाते हैं। किसी भी माध्यम से परागकणों का परागकोश से पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचना परागण कहलाता है।

प्रश्न 9.
स्वपरागण तथा परपरागण को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
स्वपरागण – जब परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर अथवा उसी पौधे के दूसरे किसी पुष्प के वर्तिकान पर पहुँचते हैं तो परागण की यह प्रक्रिया स्वपरागण कहलाती है। उदाहरण-मटर, टमाटर। परपरागण-जब एक पादप के पुष्प से परागकण उसी प्रजाति के दूसरे पादप के पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते या पहुँचते हैं तो यह क्रिया परपरागण कहलाती है। उदाहरण गुलाब, पॉपी।

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प्रश्न 10.
मेण्डल ने अपने आनुवंशिकी के प्रयोगों हेतु मटर के पौधों का ही चयन क्यों किया?
उत्तर:
मेण्डल ने अपने आनुवंशिकी प्रयोगों के लिए मटर के पौधे का चयन निम्न कारणों से किया

  1. सात स्पष्ट दिखाए दिए जाने वाले विपर्यासी लक्षण।
  2. मटर का अल्प अवधि का जीवनकाल।
  3. मटर में सामान्यत : स्व – परागण होता है लेकिन आवश्यकतानुसार पर-परागण भी सरलता से कराया जा सकता है।

प्रश्न 11.
क्लोन किसे कहते हैं?
उत्तर:
कायिक जनन से बनने वाले पौधे अपने पैतृक पौधे के समान गुणों वाले होते हैं। इन पौधों को क्लोन कहते हैं। उदाहरण-आलू, अदरक अरबी, घास, चमेली आदि।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वपरागण व परपरागण में अन्तर बताइये।
उत्तर:
स्वपरागण व पर परागण में अन्तर
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प्रश्न 2.
पादपों में कायिकजननको उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
एक आलू लिया। उसमें खाँचों में कुछ उभरी हुई रचनाएँ होती हैं जिन्हें आँखें कहते हैं। इन आँख युक्त टुकड़ों को काटा। इन टुकड़ों को मिट्टी में गड्ढा खोदकर बोया। फिर गड्ढे को मिट्टी से भर दिया और नियमित पानी डाला। कुछ दिनों बाद आलू के टुकड़ों को खोदकर निकाला। आलू की आँखों से नये पादप अंकुरित होते दिखाई देते हैं। बीज के अतिरिक्त पौधे के किसी अन्य कायिक भाग से परिवर्द्धित होकर नए पौधे के बनने की प्रक्रिया को कायिक जनन कहते हैं।
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कायिक जनन से बनने वाले पौधे अपने पैतृक पौधे के समान गुणों वाले होते हैं। ये क्लोन कहलाते हैं। उदाहरण-आलू, घास, प्याज, अरबी, अदरक, चमेली आदि। इसी प्रकार ब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा) में पत्तियों के खाँचों – में कलिकाएँ पाई जाती हैं। इन कायिकाओं अथवा कलिकाओं युक्त पत्ती के गीली मिट्टी में गिर जाने से प्रत्येक कलिका से नया पौधा विकसित होता है। कैक्टस में तना पादप से अलग होकर नए पादप को जन्म देता है एवं डहेलिया में जड़ें नए पादपों को जन्म देती हैं।

प्रश्न 3.
बीजाणु जनन की प्रक्रिया सचित्र समझाइये?
उत्तर:
बीजाणु जनन – डबलरोटी के टुकड़ों को अगर नमी में रखा जाता है तो कुछ समय पश्चात् डबलरोटी पर रुई के जाले के समान कवक उग जाते हैं जिसे आम भाषा में फफूंद कहते हैं। डबलरोटी पर रुई के जाल के समान फैले हए कवक में काले व भूरे रंग की बीजाणुधानियों में बीजाणु दिखाई देते हैं।
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जब ये बीजाणु मुक्त होते हैं तो वायु में तैरते हैं और हल्के होने के कारण काफी दूर – दूर तक चले जाते हैं। प्रत्येक बीजाणु उच्च ताप और निम्न आर्द्रता जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में एक कठोर आवरण अपने चारों ओर बना लेता है। अनुकूल परिस्थितियाँ आने पर बीजाणु अंकुरित : होकर नए कवक तन्तुओं में विकसित हो जाते हैं। जैसे म्यूकर, राइजोपस। इस प्रकार का जनन सामान्यतः निम्न वर्ग के सजीवों जैसे-शैवाल, कवक, मॉस व फर्न में होता है।

प्रश्न 4.
मेण्डल द्वारा चयनित मटर के पौधे में पाये जाने वाले विपरीत लक्षणों की सूची बनाइये? मेण्डल ने इन्हें क्या नाम दिया?
उत्तर:
विपरीत लक्षणों (गुण युग्मों) की सूची
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इन सात – जोड़ी विपरीत लक्षणों के वाहकों को मेण्डल ने कारक नाम दिया, जिन्हें वर्तमान में जीन कहते हैं।

प्रश्न 5.
पौधों में फलों का निर्माण किस प्रकार होता है। फलों को कितने वर्गों में विभाजित किया जा सकता है? लिखिए।
उत्तर:
फल – फल का निर्माण अण्डाशय में होता है अर्थात् परिपक्व अण्डाशय ही फल कहलाता है। परिपक्व अण्डाशय की भित्ति से फल भित्ति का निर्माण होता है। फल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं –
1. सत्य फल – यदि फल के बनने में केवल अण्डाशय ही भाग लेता है, तो उसे सत्य फल कहते हैं, जैसे – आम।

2. असत्य फल – कभी – कभी अण्डाशय के अतिरिक्त पुष्प के अन्य भाग जैसे पुष्पासन, बाह्य दल इत्यादि भी फल बनाने में भाग लेते हैं। ऐसे फलों को असत्य फल अथवा आभासी फल कहते हैं। जैसे – सेब (Apple), नाशपाती में पुष्पासन फल निर्माण में भाग लेता है। अतः सेब एवं नाशपाती एक आभासी फल हैं। फलों के वर्ग – समस्त फलों को

3. वर्गों में विभाजित किया गया है:

  • सरल फल – जब किसी पुष्प के अण्डाशय से केवल एक ही फल बनता है तो उन्हें सरल फल कहते हैं; जैसे – आम, गेहूँ आदि।
  • पुंज फल – जब एक बहुअण्डपी पुष्प के युक्ताण्डपी अण्डाशय से अलग – अलग फल बनें परन्तु समूह के रूप में रहें तो इन्हें पुंज फल कहते हैं; जैसे – स्ट्रॉबेरी आदि।
  • संग्रहित फल – जब एक संपूर्ण पुष्पक्रम के समस्त पुष्प फल निर्माण में भाग लेते हैं। इस प्रकार बनने वाला फल संग्रहित फल कहलाते हैं; जैसे – शहतूत, कटहल आदि।

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