RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 5 जैव-विविधता

Rajasthan Board RBSE Class 8 Science Chapter 5 जैव-विविधता

RBSE Solutions for Class 8 Science

RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 5 जैव-विविधता

RBSE Class 8 Science जैव-विविधता Intext Questions and Answers

पृष्ठ 47.

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या जलवायु का प्रभाव वहाँ के जीव – जन्तुओं, पेड़-पौधों एवं सूक्ष्मजीवों की प्रजातियों पर भी पड़ता है?
उत्तर:
हाँ, जलवायु का प्रभाव वहाँ के जीव – जन्तुओं, पेड़-पौधों एवं सूक्ष्मजीवों की प्रजातियों पर भी पड़ता है।

पृष्ठ 47.

प्रश्न 2.
हमारे आस – पास के क्षेत्र में पाए जाने वाले जीव-जन्तुओं एवं पेड़-पौधों को निम्नलिखित सारणी में सूचीबद्ध करो
उत्तर:
हमारे आस – पास पाए जाने वाले पेड़ – पौधे एवं जीव जन्तु.
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पृष्ठ 48.

प्रश्न 3.
क्या सम्पूर्ण भारत में पाए जाने वाले जीवजन्तुओं, पेड़-पौधों एवं सूक्ष्मजीवों की प्रजातियाँ समान.
उत्तर:
हमारे देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की वातावरणीय अवस्थाओं की भिन्नताओं के कारण इन क्षेत्रों में पाये जाने वाले जीव – जन्तु एवं पेड़ – पौधों की प्रजातियाँ भी भिन्न हैं।

पृष्ठ 48.

प्रश्न 4.
क्या आप ऐसे जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधों के बारे में जानते हैं?

  1. जिनके बारे में आपने वैज्ञानिक ग्रंथों में पढ़ा है अथवा जो पादप एवं जन्तु संग्रहालयों में संरक्षित हैं। परन्तु प्राकृतिक एवं कृत्रिम संरक्षित क्षेत्रों में नहीं पाए जाते हैं।
  2. जो प्राकृतिक आवासों में तो नहीं पाए जाते हैं परन्तु कृत्रिम संरक्षित क्षेत्रों में पाये जाते हैं।
  3. यदि समय रहते इनके संरक्षण के उपाय नहीं किये गये तो इनकी संख्या में निरन्तर कमी होने के कारण ये विलुप्त हो सकते हैं।
  4. जो किसी स्थान या क्षेत्र विशेष में पाये जाते हैं।

उत्तर:

  1. डोडो पक्षी, जंगली कबूतर, सेंट हेलेना, वूड्स।
  2. हवाई कौआ, व्योमिंग मेंढ़क, काला मुलायम खोल कछुआ, कालीमंतन मेंगो (कस्तूरी)।
  3. एशियाटिक सिंह, डॉल्फिन, कृष्ण मृग, एक सींग वाला गैंडा, सोन चिरैया, गिद्ध, रोहिड़ा, गुगुल, फोग।
  4. स्नो तेंदुआ (हिमालय रेंज), गंगा नदी की डॉल्फिन (गंगा नदी), सू – फोग (राजस्थान), लाल चन्दन (दक्षिणपश्चिमी घाट)।

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पृष्ठ 52.

प्रश्न 5.
विलुप्त, प्राकृतिक आवासों में विलुप्त, संकटापन्न, विशेष क्षेत्री श्रेणी के लिए सारणी बनाइए और अवलोकन करके बताइए कि कौन-कौन सी पादप तथा जन्तु प्रजातियाँ एक से अधिक श्रेणी में आ रही हैं।
उत्तर:
सारणी 5.2
RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 5 जैव-विविधता 2
गंगा नदी की डाल्फिन एवं फोगड़ा दोनों प्रजातियाँ संकटापन्न एवं विशेष क्षेत्री श्रेणी के अन्तर्गत आ रही हैं।

पृष्ठ 52.

प्रश्न 6.
जैव-विविधता में निरन्तर कमी क्यों आ रही है?
उत्तर:
जैव विविधता में निरंतर कमी आने का मुख्य कारण वनों को बड़े पैमाने पर काटा जाना है। वृक्ष को काटने से इस पर आश्रित सभी जीव-जन्तु एवं पक्षियों के आवास नष्ट हो जाते हैं, ऐसे छोटे-छोटे कीट-पतंगे जो हमें दिखाई भी नहीं देते परन्तु हमारे लिए बहुत महत्व के हैं, वे भी नष्ट हो जाते हैं। नष्ट होने वाले इन सभी प्रकार के सजीवों में कुछ सजीव ऐसे भी होते हैं जो विशेष प्रकार के वृक्षों को ही अपना आश्रय स्थल बनाते हैं। इस प्रकार विशेष प्रकार के वृक्षों के कटने से उन पर आश्रित जीव-जन्तुओं की संख्या में निरन्तर कमी होती जाती है और वे निकट भविष्य में लुप्त होने के कगार तक पहुँच सकते हैं।

पृष्ठ 64.

प्रश्न 7.
जैव विविधता को हम किस प्रकार संरक्षित कर सकते हैं?
उत्तर:
जैव विविधताओं के संरक्षण हेतु हम निम्नलिखित विधियाँ अपना सकते हैं

RBSE Class 8 Science जैव-विविधता Text Book Questions and Answers

सही विकल्प का चयन कीजिए

Question 1.
वह प्रजाति जो प्राकृतिक आवासों में नहीं पायी जाती है, परन्तु संरक्षित क्षेत्रों में पायी जाती है, कहलाती है?
(अ) संकटापन्न
(ब) विलुप्त
(स) प्राकृतिक आवासों में विलुप्त
(द) विशेष क्षेत्री
उत्तर:
(स) प्राकृतिक आवासों में विलुप्त

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Question 2.
निम्न में संकटापन्न प्रजाति है ………………..
(अ) नीम
(ब) खेजड़ी
(स) इन्द्रोक
(द) बेर
उत्तर:
(स) इन्द्रोक

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. सभी संकटापन्न स्पीशीज का रिकॉर्ड में रखा जाता है।
  2. जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधों की ऐसी प्रजातियाँ जिनका कोई भी प्रतिनिधि वर्तमान में जीवित नहीं है ……………….. श्रेणी में आते हैं।
  3. किसी क्षेत्र विशेष में पाये जाने वाले पेड़-पौधों व जीव-जन्तुओं की प्रजातियों को उस क्षेत्र की ……………….. कहते हैं।
  4. सम्पूर्ण विश्व में ……………….. जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं।

उत्तर:

  1. रेड डेटा पुस्तक
  2. विलुप्त
  3. जैव विविधता प्रजाति
  4. 34

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पौधों और वन्य जीवों के लिए संरक्षित एवं सुरक्षित स्थान कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
सरकारों द्वारा स्थापित वन्य जीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान आदि पौधों एवं वन्य जीवों के लिए संरक्षित एवं सुरक्षित स्थान हैं।

प्रश्न 2.
रेड डाटा पुस्तक क्या है?
उत्तर:
रेड डेटा पुस्तक में सभी संकटापन्न स्पीशीज का रिकॉर्ड रखा जाता है। पौधे, जन्तुओं और अन्य स्पीशीज के लिए अलग-अलग रेड डाटा पुस्तके हैं।

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प्रश्न 3.
जैव विविधता हॉट स्पॉट क्या है?
उत्तर:
अत्यधिक जैव विविधता सम्पन्न एवं विशेष क्षेत्री प्रजातियों के आवास स्थल रहे वे जैव भौगोलिक क्षेत्र जहाँ की महत्वपूर्ण (पादप एवं जन्तु) जैव विविधता मानव की स्वार्थपूर्ण गतिविधियों के कारण नष्ट हो रही हैं, जैव विविधता हॉट स्पॉट कहलाते हैं। विश्व में कुल 34 जैव विविधता हॉट स्पाट हैं जिनमें से दो, पश्चिमी घाट व पूर्वी हिमालय क्षेत्र भारत में हैं।

प्रश्न 4.
वनस्पति उद्यानों की स्थापना क्यों की गई?
उत्तर:
प्राकृतिक रूप से लुप्तप्राय एवं संकटापन्न पादप प्रजातियों के संरक्षण के लिए वनस्पति उद्यानों की स्थापना की गई।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वनोन्मूलन के क्या कारण एवं दुष्परिणाम हैं? लेख लिखिए।
उत्तर:
वनोन्मूलन के निम्न कारण हैं:
1. ईंधन, फर्नीचर, निर्माण कार्यों, कागज, लकड़ी की आकर्षक सजावटी वस्तुएँ, जहाज आदि बनाने के लिए लकड़ी आवश्यक है। इन कार्यों हेतु उपयोग में ली जाने वाली लकड़ी के लिए वनों की अंधाधुंध एवं अनियंत्रित कटाई हो रही है।

2. पशुओं द्वारा वनों की अतिचराई भी वनोन्मूलन का मुख्य कारण है।

3. तेजी से बढ़ती जनसंख्या एवं शहरीकरण भी वनों के विनाश का कारण है। बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्य आपूर्ति हेतु वनों की कटाई कर कृषि क्षेत्र को बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा सड़क, रेलवे लाइन, बाँध, भवन, फैक्ट्रियों आदि के लिए भी वनों की कटाई की जा रही है।

4. कई जानवरों का उनके दाँत, माँस, खाल, सींग, हड्डियों आदि के लिए शिकार किया जाता है। अंधाधुंध शिकार के कारण देश में जानवरों व पक्षियों की अनेकों प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर पहुँच चुकी हैं।

वनोन्मूलन के दुष्प्रभाव : जैव – विविधता पर वनोन्मूलन के निम्नांकित दुष्प्रभाव पड़ते हैं
1. पेड़ – पौधों की जड़ें मृदा को दृढ़ता से बाँधे रखती हैं। इनकी कटाई से मृदा ढीली पड़ जाती है तथा तेज हवा अथवा जल बहाव के साथ बहकर चली जाती है। मृदा की ऊपरी परत में ह्यूमस एवं पोषक तत्व बहुतायत में पाए जाते हैं। इस परत के बहकर चले जाने से मृदा की उर्वरकता कम हो जाती है जिससे वहाँ की वनस्पतियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

2. जन्तुओं, पक्षियों एवं पादपों की विभिन्न प्रजातियों के लिए वन एक प्राकृतिक उत्तम आवास है। वनों के विनाश से उनके आवास उजड जाते हैं।

3. हम जानते हैं कि पेड़ – पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कार्बन डाइ – ऑक्साइड (CO2) ग्रहण की जाती है और ऑक्सीजन गैस (O2) बाहर निकल जाती है। वनों के विनाश से वायुमण्डल में इन गैसों का सन्तुलन बिगड़ रहा है। वायुमण्डल में कार्बन डाइ-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से विश्व का ताप बढ़ रहा है। जिसे भूमण्डलीय तापक्रम वृद्धि/वैश्विक ऊष्मण/विश्व ऊष्णन (Global Warming) कहते हैं।

4. वृक्ष भूमि से जल का अवशोषण जड़ों द्वारा ही करते हैं एवं यह जल वाष्पोत्सर्जन की क्रिया द्वारा वाष्प के रूप में मुक्त होता है। वनों की कटाई से वायुमण्डल में जलवाष्प की मात्रा निरंतर घटती जा रही है जिससे वर्षा में निरंतर कमी आ रही है।

5. पर्वतीय क्षेत्रों के वृक्षों की कमी से मृदा की दृढ़ता से बँधने की क्षमता समाप्त हो रही है, जिससे चट्टानें खिसकने की घटना बढ़ रही हैं; जैसे-उत्तराखण्ड की त्रासदी।

6. वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण भी पादप एवं जन्तुओं पर विपरीत प्रभाव डालते हैं।

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प्रश्न 2.
जैव – विविधता के संरक्षण हेतु क्या-क्या प्रयास किए गए? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
जैव-विविधता के संरक्षण हेतु केन्द्रीय एवं राज्य सरकारों द्वारा वन्य जीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान आदि बनाये गए हैं। इनके संरक्षण एवं सुरक्षा हेतु नियम, कानून और नीतियाँ बनायी गयीं।

1. वन्य जीव अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान:
जन्तुओं, पक्षियों और पादपों की कुछ महत्त्वपूर्ण प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवासों में संरक्षण के लिए विश्व के अनेक देशों में कई वन्य जीव अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना की गई। हमारे देश में भी 510 से अधिक वन्य जीव अभयारण्य एवं 102 राष्ट्रीय उद्यान हैं। इन वनों में पेड़ों को काटना एवं जन्तुओं का शिकार करना वर्जित है। कुछ वन्य जीव अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान निम्नानुसार हैंम. प्र. में बांधवगढ़ (टाइगर), कर्नाटक के बांदीपुर (टाइगर), गुजरात में गिर (एशियाटिक सिंह), आसाम में काजीरंगा (भारतीय गैंडा), म.प्र. में कान्हा (टाइगर),केरला में पेरियार (एशियाई हाथी), जम्मू एवं कश्मीर में दाचीगम (कश्मीर स्टेग), भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (पक्षी, साइबेरियन क्रेन), रणथम्भौर बाघ अभयारण्य राजस्थान (बाघ), सुन्दरवन बाघ अभयारण्य (बाघ)। राजस्थान में 30 वन्य जीव अभयारण्य, 4 राष्ट्रीय उद्यान एवम् 4 आखेट निषेध क्षेत्र हैं।

2. प्राणी उद्यान या चिड़ियाघर (Zoo):
उद्यान वह स्थान है जहाँ पक्षियों एवं जन्तुओं को आम नागरिकों के लिए वन्य . जीवों के बारे में जानकारी देने हेतु प्रदर्शन के लिये रखा जाता है। ये प्राकृतिक रूप से लुप्तप्राय (Extinct in Wild) प्राणियों के प्रजनन केन्द्र के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करते हुए वन्य जीवों के प्रति लगाव पैदा करना है।

3. वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens):
इनकी स्थापना प्राकृतिक रूप से लुप्तप्राय एवं संकटापन्न पादप प्रजातियों के संरक्षण के लिए की गई। पूरे संसार में लगभग 1600 वनस्पति उद्यान हैं। ये वनस्पति उद्यान बीज बैंक एवम् वनस्पतियों को संरक्षित करने के उद्देश्य से स्थापित किए जाते हैं। हमारे देश में आचार्य जगदीश चन्द्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान, सिबपुर, हावड़ा पश्चिम बंगाल में है। यह 269 एकड़ में फैला हुआ है। प्रवासी पक्षियों के प्रवास स्थल-हमारे देश में जलवायवीय विभिन्नताओं के कारण विदेशी पक्षियों की कई प्रजातियाँ अपने मूल प्राकृतिक आवासों की प्रतिकूल परिस्थितियों (अत्यधिक ठण्ड) से बचने के लिए सर्दियों के मौसम में लम्बी दूरी तय करके अपने प्रजनन काल में भारत आती हैं। इन्हें प्रवासी पक्षी (Migratory Birds) कहते हैं जैसे-कुरजाँ (साइबेरियन क्रेन)।

क्रियात्मक कार्य ।

प्रश्न 1.
अपने जिले के वन व अभयारण्य की जैव-विविधता का अध्ययन कीजिए। इसकी वनस्पति एवं जन्तु प्रजातियों के फोटोग्राफ एवं आरेखित चित्रों के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर:
इसको विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 2.
अपने बुजर्गों, माता-पिता, शिक्षकों की मदद से पता लगाएँ कि आस-पास के क्षेत्र में कौन-कौन से जन्तु एवं पेड़-पौधे पहले मिलते थे किन्तु अब विलुप्त हो गए हैं या जिनकी संख्या कम रह गयी है, उनकी सूची बनाइए।
उत्तर:
विलुप्त जन्तु – डोडा पक्षी, जंगली कबूतर, वूली मेमथ, चीता, पांडा।
विलुप्त पेड़ – पौधे – सेंट हेलेना जैतून, चन्दन, कोकिया।

प्रश्न 3.
राजस्थान में स्थित अभयारण्यों, उनके जिलों के नाम तथा संरक्षित जन्तुओं के नामों की सारणी चार्ट पर बनाइए।
उत्तर:
सारणी:
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प्रश्न 4.
लुप्त होने वाली जैव प्रजातियों का पता लगाकर उनके संरक्षण के लिए किए जा रहे सामाजिक कार्यों, रैली तथा अन्य अभियानों में भागीदारी निभाएँ।
उत्तर:
लुप्त होने वाली प्रजातियाँ डोडो पक्षी, जंगली कबूतर, सेंट हेलेना, जेतून, वूड्स, कोकिया, कूकी हैं।
सामाजिक कार्य:

  1. विलुप्त जीव के प्राकृतिक वातावरण की स्थिति ज्ञात करना।
  2. वनों की संख्या में वृद्धि करना।
  3. प्रदूषण की स्थिति को ध्यान में रखना।
  4. प्रवास की राह में बाधा दूर करना।
  5. समुद्री धारा में परिवर्तन का ध्यान रखना।
  6. मानवीय गतिविधियों को कम करना।
  7. आक्रामक विदेशी प्रजातियों को आने से रोकना।

RBSE Class 8 Science जैव-विविधता Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

Question 1.
वह पुस्तक जिसमें सभी संकटापन्न स्पीशीज का रिकार्ड रखा जाता है ……………………
(अ) यलो डाटा बुक
(ब) व्हाइट डाटा बुक
(स) ब्लैक डाटा बुक
(द) रेड डाटा बुक
उत्तर:
(द) रेड डाटा बुक

Question 2.
भारत का प्रथम आरक्षित वन है ……………………
(अ) सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान
(ब) काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
(स) घाना पक्षी अभयारण्य
(द) पचमढ़ी उद्यान
उत्तर:
(अ) सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान

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Question 3.
वनों को काटने से किस गैस की वायुमंडल में वृद्धि हो जाती है?
(अ) ऑक्सीजन
(ब) नाइट्रोजन
(स) कार्बन डाइ – ऑक्साइड
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) कार्बन डाइ – ऑक्साइड

Question 4.
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, घाना में आने वाले प्रवासी पक्षी का नाम है ……………………
(अ) कुरजाँ
(ब) सिसोन
(स) किसन
(द) किसोन
उत्तर:
(अ) कुरजाँ

Question 5.
एक टन कागज प्राप्त करने के लिए लगभग कितने पेड़ों को काटना पड़ता है?
(अ) 10
(ब) 12
(स) 15
(द) 17
उत्तर:
(द) 17

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Question 6.
आचार्य जगदीश चन्द्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान …………………… कहाँ पर है?
(अ) उत्तर प्रदेश
(ब) राजस्थान
(स) पश्चिम बंगाल
(द) कश्मीर।
उत्तर:
(स) पश्चिम बंगाल

Question 7.
IUCN ने जीव-जन्तु तथा पेड़-पौधों की प्रजातियों को कितने भागों में बाँटा है?
(अ) 1
(ब) 2
(स) 3
(द) 4
उत्तर:
(द) 4

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. भारत को …………………… सम्पन्न राष्ट्र कहा जाता है।
  2. विलुप्त पादप प्रजाति ……………………
  3. जैव – विविधता में होने वाली कमी …………………… कहलाती है।
  4. सजीवों के अस्तित्व के लिए …………………… अत्यन्त आवश्यक है।
  5. पशुओं द्वारा वनों की अति चराई …………………… का मुख्य कारण है।

उत्तर:

  1. जैव – विविधता
  2. कोकिया कूकी
  3. जैव – विविधता क्षरण
  4. जैव – विविधता
  5. वनोन्मूलन।

सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
1. (b)
2. (c)
3. (d)
4. (a)
5. (e)

यदि कथन सत्य हो तो T और गलत है तो कोष्ठक में F लिखिए

  1. कालीमंतनमेंगो विलुप्त पादप प्रजाति है।
  2. चट्टानों के खिसकने का कारण वनोन्मूलन है।
  3. बिज्जू संकटापन्न जंतु प्रजाति है।
  4. उड़ने वाली गिलहरी भारत में नहीं पाई जाती है।

उत्तर:

  1. False
  2. True
  3. True
  4. False

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजंतु अभयारण्यों एवं जैवमण्डल संरक्षित क्षेत्रों को बनाने का क्या उद्देश्य है?
उत्तर:
संरक्षित क्षेत्रों को बनाने का उद्देश्य उन जन्तुओं को संरक्षित करना है जिनकी संख्या कम है तथा वे विलुप्त हो सकते हैं।

प्रश्न 2.
क्या संकटापन्न स्पीशीज का कोई रिकॉर्ड है?
उत्तर:
हाँ, रेड डॉटा बुक ऐसी पुस्तक है, जिसमें सभी संकटापन्न स्पीशीज का रिकॉर्ड रखा जाता है।

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प्रश्न 3.
क्या वनोन्मूलन का कोई स्थायी हल है?
उत्तर:
पुनर्वनारोपण, वनोन्मूलन का स्थायी हल है।

प्रश्न 4.
यदि हम वृक्षों की कटाई करते रहे तो क्या होगा?
उत्तर:
उस क्षेत्र में वर्षा कम होगी., बाढ़ अधिक आएगी तथा आर्द्रता घटेगी। इससे उस क्षेत्र का भूमिगत जल स्तर नीचे जाएगा।

प्रश्न 5.
यदि जन्तु का आवास बाधित हो तो क्या होगा?
उत्तर:
उनके अस्तित्व पर खतरा बढ़ेगा तथा वे संकटापन्न स्पीशीज में आ सकते हैं। आवास न होने से वे शहरों व गाँवों की ओर आयेंगे जिससे मानव-जीवन भी प्रभावित होगा।

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प्रश्न 6.
संरक्षित वन भी वन्य जन्तुओं के लिए सुरक्षित क्यों नहीं हैं?
उत्तर:
वनों के आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग वनों का अतिक्रमण करके उन्हें नष्ट कर देते हैं।

प्रश्न 7.
अभयारण्य से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वह क्षेत्र जहाँ जन्तु एवं उनके आवास किसी भी प्रकार के विक्षोभ से सुरक्षित रहते हैं, अभयारण्य कहलाते हैं।

प्रश्न 8.
वनोन्मूलन के दो प्राकृतिक कारक बताइए।
उत्तर:

  1. दावानल और
  2. भीषण सूखा

प्रश्न 9.
प्रवासी पक्षी से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
ऐसे पक्षी जो उड़कर सुदूर क्षेत्रों तक लम्बी यात्रा करते हैं, प्रवासी पक्षी कहलाते हैं।

प्रश्न 10.
जैव – विविधता किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी विशेष क्षेत्र में पाये जाने वाले पेड़ – पौधे व जीव – जन्तुओं की प्रजातियों को उस क्षेत्र की जैव-विविधता कहते हैं।

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प्रश्न 11.
विलुप्त प्रजाति क्या है?
उत्तर:
जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधों की ऐसी प्रजातियाँ जिनका कोई भी प्रतिनिधि वर्तमान में जीवित नहीं है, विलुप्त श्रेणी में आते हैं।

प्रश्न 12.
प्राकृतिक आवासों में विलुप्त जन्तु तथा पादप प्रजातियाँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर:
जन्तु प्रजातियाँ-हवाई कौआ, व्योमिंग मेढ़क, काला मुलायम खोल कछुआ। पादप प्रजातियाँ – कालीमंतन मेंगो (कस्तूरी)।

प्रश्न 13.
संकटापन्न जन्तु क्या हैं?
उत्तर:
जन्तु जिसकी संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती – जा रही है और वे विलुप्त हो सकते हैं “संकटापन्न जन्तु” कहलाते हैं।

प्रश्न 14.
विशेष क्षेत्री प्रजातियाँ क्या हैं?
उत्तर:
पौधे एवं जन्तुओं की वे प्रजातियाँ जो किसी क्षेत्र विशेष में ही पायी जाती हैं, उन्हें विशेष क्षेत्री प्रजातियाँ कहते हैं।

प्रश्न 15.
जैव – विविधता क्षरण से आप क्या समझते हो?
उत्तर:
जैव विविधताओं में होने वाली कमी जैव-विविधता क्षरण कहलाती है।

प्रश्न 16.
जैव – विविधता क्षरण के दो कारण लिखिए।
उत्तर:

  1. वनोन्मूलन
  2. जानवरों व पक्षियों का शिकार।

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प्रश्न 17.
वैश्विक ऊष्मण किसे कहते हैं?
उत्तर:
वायुमण्डल में कार्बन डाइ – ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से विश्व का ताप बढ़ रहा है। जिसे भूमण्डलीय तापक्रम वद्धि वैश्विक ऊष्मण (Global Warming) कहते हैं।

प्रश्न 18.
हमारे देश में कितने वन्य जीव अभयारण्य तथा राष्ट्रीय उद्यान हैं?
उत्तर:
हमारे देश में 510 से अधिक वन्य जीव अभयारण्य तथा 102 राष्ट्रीय उद्यान हैं।

प्रश्न 19.
भारत को जैव-विविधता सम्पन्न राष्ट्र क्यों का जाता है?
उत्तर:
सम्पूर्ण विश्व में पायी जाने वाली लगभग 2,50,000 पादप प्रजातियों से 45000 प्रजातियाँ अकेले भारत में ही पायी जाती है। भारत में पाये जाने वाले जीव – जन्तुओं, पेड़पौधों एवं सूक्ष्मजीवों में ये विभिन्नताएँ विश्व के दूसरे देशों की अपेक्षा अधिक हैं। इस कारण भारत को जैव – विविधता सम्पन्न राष्ट्र कहा जाता है।

प्रश्न 20.
IUCN क्या है?
उत्तर:
IUCN एक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था है जिसका पूरा नाम (International Union For conservation of Nature : IUCN) अन्तर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ है। इस संघ के द्वारा जीव – जन्तु एवं पेड़ – पौधों की प्रजातियों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

  1. विलुप्त
  2. प्राकृतिक आवासों में विलुप्त
  3. संकटापन्न
  4. विशेष क्षेत्री

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हमें जैव विविधता का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
जीवन के निर्वाह के लिए जैव – विविधता आवश्यक है, यदि जैव – विविधता संरक्षित नहीं होगी तो पृथ्वी पर जीवन चक्र प्रभावित हो जाएगा। पूरे विश्व को खाद्य पदार्थ प्रदान करने के लिए जैव – विविधता का संरक्षण करना। चाहिए।

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प्रश्न 2.
वनोन्मूलन के कारक व उनके प्रभाव क्या हैं?
उत्तर:
वनोन्मूलन के कारक – मनुष्य वनोन्मूलन निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए करता है:

  1. कृषि भूमि के लिए
  2. पशुओं के अतिचारण के लिए
  3. घरों एवं कारखानों के निर्माण के लिए
  4. सड़कों और बाँधों के निर्माण के लिए

वनोन्मूलन के प्रभाव – वनोन्मूलन के मुख्य दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  1. अधिक बाढ़ आने का खतरा
  2. ऑक्सीजन/कार्बन डाइ – ऑक्साइड के अनुपात का असंतुलन
  3. भूस्खलन
  4. जलवायु परिवर्तन
  5. वन में रहने वाले पशु – पक्षियों का नष्ट होना या प्रवास करना
  6. स्थलीय जल में कमी
  7. भूमि की उर्वरता में कमी

प्रश्न 3.
प्रवास से आप क्या समझते हो?
उत्तर:
प्रवास – कुछ स्पीशीजों द्वारा अपने आवास से किसी निश्चित समय में बहुत दूर जाना प्रवास कहलाता है। प्रवास ज्यादातर पक्षियों में पाया जाता है। जलवायु में परिवर्तन के कारण प्रवासी पक्षी प्रत्येक वर्ष एक निश्चित समय में उड़कर जाते हैं।

प्रश्न 4.
वनोन्मूलन से एक ओर जहाँ वर्षा में कमी आती है तो दूसरी ओर बाढ़ आना कैसे संभव हो सकता है?
उत्तर:
वनोन्मूलन के कारण पृथ्वी पर ताप एवं प्रदूषण के स्तर में वृद्धि होती है, जिसकी वजह से जलचक्र में परिवर्तन होने से वर्षा में कमी आती है। दूसरी ओर वनोन्मूलन के कारण मिट्टी की रोकने की क्षमता भी अपेक्षाकृत कम हो जाती है, जिससे जलप्रवाह के कारण बाढ़ आती है।

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प्रश्न 5.
क्या कुछ विशेष क्षेत्री स्पीशीज विलुप्त हो सकती हैं? क्या यह सच है?
उत्तर:
हाँ, बढ़ती हुई जनसंख्या तथा उनके आवास (जंगलों के) नष्ट होने से नयी स्पीशीज के प्रवेश से विशेष क्षेत्री स्पीशीज के प्राकृतिक आवास पर प्रभाव पड़ सकता है तथा इनके अस्तित्व को भी खतरा हो सकता है।

प्रश्न 6.
विलुप्त जन्तु तथा पादप प्रजातियाँ कौन-कौनसी है?
उत्तर:
जन्तु प्रजातियाँ – डोडो पक्षी, जंगली कबूतर, वुली मेमथ, तस्मानियन टाइगर । पादप प्रजातियाँ-सेंट हेलेना जेतून, वूड्स, साइकेडस, कोकिया कूकी।

प्रश्न 7.
प्राकृतिक आवासों में विलुप्त प्रजातियों को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
प्राकृतिक आवासों में विलुप्त – जीव – जन्तु एवं पेड़-पौधों की ऐसी प्रजातियाँ जिनका कोई भी प्रतिनिधि प्राकृतिक आवासों में जीवित नहीं है परन्तु कृत्रिम आवासों में जीवित अवस्था में आज भी देखे जा सकते हैं।

प्रश्न 8.
विशेष क्षेत्री जन्तु तथा पादप प्रजातियों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जन्तु प्रजातियाँ-स्नो तेंदुआ (हिमालय रेंज), गंगा नदी की डाल्फिन। पादप प्रजातियाँ-इन्द्रोक, पेंपा, खेडुला, सू-फोग, लाल चन्दन।

प्रश्न 9.
चिड़ियाघर व वन्यप्राणी अभयारण्य में क्या अन्तर है?
उत्तर:
चिड़ियाघर में कृत्रिम वातावरण होता है तथा यहाँ जन्तुओं का प्रदर्शन मनोरंजन के लिए होता है। किन्तु वन्य-प्राणी अभयारण्य का वातावरण प्राकृतिक होता है तथा यह विस्तृत जंगली भू-भाग पर फैला होता है।

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प्रश्न 10.
यदि मिट्टी की ऊपरी परत अनावरित हो जाये तो क्या होगा?
उत्तर:
मिट्टी की ऊपरी परत अनावरित होने पर नीचे की कठोर चट्टानें दिखाई देंगी तथा मृदा में ह्यूमस की कमी होगी। जिससे भूमि की उर्वरता अपेक्षाकृत कम हो जाएगी। धीरे-धीरे यह उर्वरा भूमि मरुस्थल में परिवर्तित हो जाती है। यह प्रक्रिया मरुस्थलीकरण कहलाती है।

प्रश्न 11.
फैक्टरियों एवं आवास की माँग की आपूर्ति हेतु वनों की अनवरत कटाई हो रही है। क्या इन परियोजनाओं के लिए वृक्षों की कटाई न्यायसंगत है? इस पर चर्चा कीजिए तथा एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर:
नहीं, इन परियोजनाओं के लिए वृक्षों की कटाई न्यायगत नहीं है। वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है क्योंकि:

  1. पेड़ पर्याप्त मात्रा में वर्षा लाने तथा प्रकृति में जलचक्र बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
  2. वृक्ष बाढ़ को रोकने के लिए आवश्यक हैं।
  3. वृक्ष वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि वन उनके प्राकृतिक आवास को बनाये रखते हैं। वनों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष
  4. लाभों को देखते हुए इनकी कटाई किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है।

प्रश्न 12.
अपने स्थानीय क्षेत्र में हरियाली बनाए रखने में आप किस प्रकार योगदान दे सकते हैं? अपने द्वारा की जाने वाली क्रियाओं की सूची तैयार कीजिए।
उत्तर:
अपने क्षेत्र में हरियाली बनाये रखने के लिए हम निम्नलिखित क्रियाओं द्वारा योगदान दे सकते हैं:

  1. वृक्षों से संबंधित जागरूकता अभियान चलाकर।
  2. वन महोत्सव मनाकर।
  3. लोगों को नर्सरी से मुफ्त मिलने वाले पौधों के बारे में जानकारी देकर।
  4. जन्म दिवस, शादी आदि पर लोगों को पौधे उपहार देकर।
  5. वृक्षों को काटने पर अपने प्रयासों तथा सरकारी कानून की सहायता से रोकथाम।
  6. सड़क के दोनों ओर वृक्ष लगाकर।
  7. घरों के बाहर पौधे लगाकर।
  8. विशेष क्षेत्रों में उद्यान बनाकर।

प्रश्न 13.
वनोन्मूलन से वर्षा दर किस प्रकार कम हुई? समझाइए।
उत्तर:
पेड़ – पौधे पर्यावरण में जलचक्र बनाये रखने के लिए मुख्य कारक होते हैं। वनोन्मूलन के कारण पौधे, मृदा से जल का शोषण नहीं करेंगे और बादल बनाने के लिए अपनी पत्तियों से जल का वाष्पन भी नहीं करेंगे। यदि बादल नहीं. बनेंगे तो वर्षा भी नहीं होगी।

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प्रश्न 14.
हमें कागज की बचत क्यों करनी चाहिए? उन कार्यों को बताइए जिनके द्वारा आप कागज की बचत कर सकते हैं?
उत्तर:
एक टन कागज प्राप्त करने के लिए पूर्ण रूप से विकसित 17 वृक्षों को काटा जाता है। वृक्षों की बचत करने के लिए कागज की बचत अत्यन्त आवश्यक है। कागज की बचत हम निम्न प्रकार से कर सकते हैं-हम कागज का पुन: उपयोग कर सकते हैं तथा कागज का पुनः चक्रण 5 – 7 बार उपयोग हेतु किया जा सकता है। यदि कोई छात्र दिन में मात्र 1 कागज की बचत करता है तो हम एक वर्ष में अनेक वृक्ष बचा सकते हैं। इसके द्वारा हम न केवल वृक्षों को बचाएँगे अपितु कागज उत्पादन के उपयोग में आने वाले जल एवं ऊर्जा की बचत भी कर सकते हैं। इसी के साथ-साथ कागज उत्पादन के उपयोग में आने वाले हानिकारक रसायनों में कमी आएगी। जन-जागरूकता अभियान चलाकर भी कागज की बचत कर सकते हैं।

प्रश्न 15.
पाँच राष्ट्रीय पार्कों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. कार्बेट राष्ट्रीय पार्क – उत्तराखण्ड।
  2. संजय राष्ट्रीय पार्क – महाराष्ट्र।
  3. पेरियार राष्ट्रीय पार्क – केरल।
  4. कान्हा राष्ट्रीय पार्क – मध्य प्रदेश।
  5. वमुघाटा राष्ट्रीय पार्क – कर्नाटक।

प्रश्न 16.
विशेष क्षेत्री प्रजाति से क्या तात्पर्य है? समझाइए।
उत्तर:
पौधे एवं जन्तुओं की वह स्पीशीज जो किसी विशेष क्षेत्र में विशिष्ट रूप से पाई जाती है, उसे विशेष क्षेत्री स्पीशीज कहते हैं। जैसे पंचमढ़ी जैवमण्डल। आरक्षित क्षेत्र में साल और जंगली आम के पेड़ विशेष क्षेत्री वनस्पति प्रजाति हैं। विशालकाय गिलहरी यहाँ की विशेष क्षेत्री जन्तु प्रजाति है।

प्रश्न 17.
जैव विविधता को कैसे संरक्षित किया जा सकता है?
उत्तर:

  1. लोगों को शिक्षित करके।
  2. शिकार करने पर रोक लगाकर।
  3. राष्ट्रीय पार्क तथा अभयारण्य की स्थापना करके।
  4. वन्य जीवन अधिनियम, 1972 के प्रावधानों को लागू करके।
  5. आधुनिक जैव तकनीकी अपनाकर, जिससे दुर्लभ और संकटापन्न जातियों को बचाया जा सके।

प्रश्न 18.
वनों के विनाश का क्या कारण है?
उत्तर:
वनों का विनाश मुख्यतः निम्न कारणों से हो रहा है-

  1. वनों के कटने से
  2. अधिक चराई से
  3. जंगलों में लगने वाली आग से
  4. अनेक पीड़कों तथा रोगों के कारण।

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प्रश्न 19.
विश्व उष्णन (ग्लोबल वार्मिंग) का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
वनों के कम होने से पर्यावरण में कार्बन डाइ ऑक्साइड और अन्य कुछ गैसों की वृद्धि हो जाती है, जिसके फलस्वरूप पर्यावरण के ताप में वृद्धि होने से धरती का वातावरण अधिक गर्म हो जाता है। यह विश्व उष्णन का मुख्य कारण है।

प्रश्न 20.
देश में बहुत से राष्ट्रीय उद्यान तथा संरक्षित क्षेत्र बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
भारत में बहुत से राष्ट्रीय उद्यान तथा संरक्षित क्षेत्र बनाने का उद्देश्य दुर्लभ प्रजातियों के वन्य प्राणियों के जीवन भंडार को सुरक्षित रखना है, ताकि ये दुर्लभ प्राणी पृथ्वी से पूरी तरह विलुप्त न हो जाएँ। इनका. मुख्य उद्देश्य वन्य प्राणियों तथा उनके प्राकृतिक वातावरण का संरक्षण करना है।

प्रश्न 21.
वनोन्मूलन के दो दुष्प्रभाव बताइए।
उत्तर:

  1. प्राकृतिक एवं मानव जनित गतिविधियों से वातावरण में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। इस प्रकार परिवर्तित वातावरण में जो प्रजातियाँ अनुकूलित नहीं हो पातीं वे दुर्लभ और लुप्त हो रही हैं।
  2. प्राकृतिक आपदायें; जैसे – भूकम्प, बाढ़, सूखा, चक्रवात आदि विभिन्न पादप एवं जन्तुओं की प्रजातियों के लुप्त होने का प्रमुख कारण है।

प्रश्न 22.
संकटापन्न प्रजातियाँ क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
संकटापन्न प्रजातियाँ:
जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधों की वे प्रजातियाँ जिनकी संख्या निरंतर एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है, यदि समय रहते इनके संरक्षण के उपाय नहीं किए गए तो वे निकट समय में विलुप्त हो सकती हैं, “संकटापन्न प्रजातियाँ” कहलाती हैं। जैसेजन्तु प्रजातियाँ-एशियाटिक सिंह, गंगा नदी की डाल्फिन, कृष्ण मृग, एक सींग वाला गैंडा, डेजर्ट लिजार्ड, गोडावण, सोन चिरैया, गिद्ध, बिज्जू। पादप प्रजातियाँ-पनीरबन्ध, रोहिड़ा, इन्द्रोक, गुगुल, फोग या फोगडा।

प्रश्न 23.
कुछ वन्य अभयारण्य तथा राष्ट्रीय उद्यानों के नाम । बताइए।
उत्तर:
मध्य प्रदेश में बांधवगढ़ (टाइगर), कर्नाटक के बांदीपुर (टाइगर), आसाम में काजीरंगा (भारतीय गैंडा), भरतपुर में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (पक्षी, साइबेरियन क्रेन)।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए(क) धन्यप्राणी उद्यान एवं जैवमण्डलीय आरक्षित क्षेत्र, (ख) चिड़ियाघर एवं अभयारण्य, (ग) संकटापन्न एवं विलुप्त स्पीशीज, (घ) वनस्पतिजात एवं प्राणिजात।
उत्तर:
(क) वन्यप्राणी उद्यान – इस स्थान में जंगली जानवरों की सुरक्षा और संरक्षण किया जाता है। उदाहरण – सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान। जैवमण्डलीय आरक्षित क्षेत्र – ये वन्य जीवन, पौधे और जन्तु संसाधनों तथा उस क्षेत्र के आदिवासियों के पारम्परिक ढंग से जीवनयापन हेतु विशाल संरक्षित क्षेत्र होते हैं। उदाहरण – पंचमढ़ी जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र।

(ख) चिड़ियाघर – ऐसा स्थान जहाँ जानवर अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रहते हैं। उदाहरण – दिल्ली का चिड़ियाघर। अभयारण्य – वह क्षेत्र जहाँ जन्तु और उनके आवास को संरक्षण में रखा जाता है। उदाहरण – पंचमढ़ी वन्यप्राणी अभयारण्य।

(ग) संकटापन्न स्पीशीज – वे जन्तु जिनकी संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है तथा वे विलुप्त हो सकते हैं। उदाहरण – बाघ।। विलुप्त स्पीशीज-वे जन्तु जो पृथ्वी से विलुप्त हो चुके हैं। उदाहरण – डायनासोर।

(घ) वनस्पतिजात – किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़ – पौधों का समूह उस क्षेत्र के वनस्पतिजात कहलाते हैं। साल, सागौन आदि पंचमढ़ी जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र के वनस्पतिजात हैं। प्राणिजात – किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले जीव – जन्तुओं का समूह उस क्षेत्र के प्राणिजात कहलाते हैं। उदाहरण-हिरण, चीतल आदि पंचमढ़ी जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र के प्राणिजात हैं।

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प्रश्न 2.
वनोन्मूलन का निम्न पर क्या प्रभाव पड़ता है? चर्चा कीजिए।
(क) वन्यप्राणी, (ख) पर्यावरण, (ग) गाँव (ग्रामीण क्षेत्र), (घ) शहर (शहरी क्षेत्र), (ङ) पृथ्वी, (च) अगली
पीढ़ी।
उत्तर:
वनोन्मूलन का प्रभाव:
(क) वन्यप्राणी – जंगली जानवर भोजन और आवास के लिए जंगलों पर पूरी तरह निर्भर हैं। वनोन्मूलन से उनके प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाते हैं तथा वे भोजन के लिए भी परेशान हो जाते हैं, इस कारण उनके अस्तित्व पर खतरा बन सकता है तथा वे विलुप्त हो सकते हैं।

(ख) पर्यावरण – वनोन्मूलन से पृथ्वी के ताप एवं प्रदूषण स्तर में वृद्धि होती है। वायुमण्डल में ऑक्सीजन की कमी आती है तथा कार्बन डाइ-ऑक्साइड का स्तर बढ़ता जाता है। भूमि जल स्तर का भी निम्नीकरण हो जाता है। इससे वर्षा एवं भूमि की उर्वरता में कमी आती है। इसके अतिरिक्त बाढ़ तथा सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बढ़ जाती है। इसकी वजह से प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ रहा है।

(ग) गाँव (ग्रामीण क्षेत्र) – अधिकतर कृषि गाँव में होती है। वनोन्मूलन के कारण वर्षा तथा मिट्टी की उत्पादन क्षमता में कमी आती है तथा प्राकृतिक आपदाओं; जैसे-बाढ़, सूखा तथा मरुस्थलीकरण जैसी आपदाओं की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं जिससे ग्रामीण जीवन काफी हद तक प्रभावित होता है।

(घ) शहर (शहरी क्षेत्र) – शहरों में उद्योगों की संख्या अधिक होती है और वाहन भी बहुत अधिक मात्रा में चलते हैं। वनोन्मूलन के कारण कार्बन डाइ-ऑक्साइड की मात्रा वातावरण में बढ़ जाती है तथा वायु प्रदूषण होता है जिससे शहरी जिंदगी बहुत अधिक प्रभावित होती है।

(ङ) पृथ्वी – वनोन्मूलन से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ता है अर्थात् पृथ्वी का तापमान व प्रदूषण बढ़ता है। वृक्षों की कमी होने से मृदा अपरदन होता है। इससे मृदा में ह्यूमस की कमी होती है। धीरे – धीरे भूमि मरुस्थल में परिवर्तित हो जाती है!

(च) अगली पीढ़ी पर प्रभाव – वनोन्मूलन के कारण दुर्लभ जन्तु प्रजातियाँ एवं वनस्पति नष्ट हो जाती हैं, जिन्हें अगली पीढ़ी केवल चित्रों में ही देख सकती है। वनोन्मूलन के कारण अगली पीढ़ी को अनेक संसाधनों की कमी से जूझना पड़ेगा।

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प्रश्न 3.
वन्य जीवन का संरक्षण बहुत आवश्यक है। क्यों?
उत्तर:
वन्य जीवन का संरक्षण प्रकृति में जीन भंडार को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है, अर्थात् इस पृथ्वी से जानवरों तथा पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों को विलुप्त होने से रोकने के लिए वन्य जीव संरक्षण आवश्यक है। प्रकृति में पारिस्थितिक संतुलन बनाये रखने के लिए भी वन्य जीवन का संरक्षण आवश्यक है, उदाहरण के लिए यदि हम वन में शेरों तथा बाघों जैसे माँसाहारी जानवरों के शिकार पर प्रतिबंध लगाकर उन्हें संरक्षित करते हैं तो वे हिरणों जैसे शाकाहारी जानवरों की संख्या पर नियंत्रण रखेंगे जो वन के हरे पौधों को खाते हैं। इससे वन के पौधे अधिक होने से बचेंगे तथा पारिस्थितिक संतुलन बना रहेगा। आर्थिक दृष्टि से भी वन्य जीवन हमारे लिए उपयोगी है। देशी – विदेशी पर्यटक हमारे देश में उन्हें देखने आते हैं, जिससे बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है, कुछ जन्तु; जैसे-पश्चिम बंगाल का एक सींग वाला गैंडा, शाही बंगाली शेर आदि केवल भारत में ही पाए जाते हैं।

प्रश्न 4.
अपने राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों के विषय में सूचना एकत्र कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान के दो प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान:
1. घाना पक्षी अभयारण्य – इसे केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान भी कहते हैं। यह भरतपुर के दक्षिण पूर्व में स्थित है। यहाँ विदेशी प्रवासी पक्षी एवं 300 से अधिक जातियों के भारतीय पक्षी पाये जाते हैं। सफेद सारस ठंड के मौसम में यहाँ आते हैं। स्थानीय पक्षी हंस, शुक, कोयल आदि भी यहाँ पाये जाते हैं।

2. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान – यह पार्क अरावली एवं विन्ध्य पहाड़ श्रृंखला के मिलने के स्थान पर स्थित है। यह सवाई माधोपुर के पास ऐतिहासिक दुर्ग रणथम्भौर के पास अत्यन्त विशाल क्षेत्र में फैला है। 1974 में यहाँ बाघों की गिरती संख्या को देखते हुए उसकी रोकथाम हेतु बाघ परियोजना प्रारम्भ की गई। यहाँ चीतल, सांभर, नील गाय, जल पक्षी व चिन्कारा आदि पाए जाते हैं।

प्रश्न 5.
जैव – विविधता ऊष्ण स्थल (Hot Spot) क्या है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
जैव – विविधता ऊष्णस्थल-अत्यधिक जैव:
विविधता सम्पन्न एवं विशेष क्षेत्री प्रजातियों के आवास स्थल रहे वे जैव भौगोलिक क्षेत्र जहाँ की महत्वपूर्ण (पादप एवं जन्तु) जैव-विविधता मानव की स्वार्थपूर्ण गतिविधियों के कारण ण नष्ट हो रही है, जैव-विविधता हॉट स्पॉट कहलाते हैं। इन जैव-विविधता ऊष्ण स्थलों में अत्यधिक संकटापन्न, लुप्तप्राय व विशेष क्षेत्री पादप एवं जन्तु प्रजातियाँ सम्मिलित हैं। सम्पूर्ण विश्व में 34 जैव विविधता हॉट स्पॉट हैं। जिनमें दो जैविक हॉट स्पॉट पश्चिमी घाट व पूर्वी हिमालयी क्षेत्र भारत में हैं। तीव्र गति से वनोन्मूलन के कारण इन हॉट स्पॉट में पायी जाने वाली प्रजातियाँ संकट में हैं।

अतः इन्हें बचाने की आवश्यकता है। पेड़ – पौधे हमारी पृथ्वी पर एकमात्र ऐसे सजीव हैं जो सूर्य से प्राप्त प्रकाश ऊर्जा का रूपान्तरण हमारे लिये भोज्य पदार्थों के रूप में प्रयुक्त होने वाली रासायनिक ऊर्जा में कर सकते हैं। अतः हमें जैव-विविधताओं का संरक्षण करने हेतु प्रयासरत रहना चाहिए।

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प्रश्न 6.
राजस्थान में गायों की जैव – विविधता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
राजस्थान में गायों की जैव – विविधता:
1. कांकरेज – यह वंश बाड़मेर, पाली और जालोर जिले के सांचोर तथा नैगड़ क्षेत्र में पाया जाता है। औसत दर्जे का लम्बा एवं शक्तिशाली शरीर, चौड़ा सीना, सीधी कमर और काले झंवर की अपेक्षाकृत छोटी पूँछ, इस वंश की प्रमुख पहचान है। तेज चलने एवं बोझा ढोने की क्षमता के कारण ये कृषकों की पसंद हैं।

2. मालवी – यह वंश भारवाहक पशु के रूप में प्रसिद्ध है। झालावाड़ के मालवी प्रदेश में पाए जाने वाले इस वंश का शरीर गठीला और रंग धूसर होता है। इस वंश का शरीर गठीला, कमर सीधी, ढालू पुढे, मजबूत एवं छोटी टाँगें, चौड़ा सीना विकसित हुआ, छोटे व नुकीले कान और एड़ी तक पहुँचने वाले काले cझंवर की मध्यम लम्बाई की पूँछ इस नस्ल की प्रमुख पहचान है।

3. राठी – इस नस्ल की गायें अधिक दूध देने वाली होती हैं। यद्यपि इस वंश में साहीवाल, लाल सिंधी और हरियाणा नस्ल का मिश्रण है। ये बादामी रंग की अथवा चितकबरी होती हैं। इस नस्ल की गणना भारत की सर्वश्रेष्ठ गायों में है। ये गायें 25 से 30 पौंड तक दूध देती हैं। इनकी पूँछ लम्बी एवं पेट बड़ा होता है। इस नस्ल के बैल ढीले एवं वजनदार होते हैं।

4. नागौरी – नागौरी नस्ल के बैल चुस्त एवं फुर्तीले होने के साथ – साथ हल जोतने के लिए भी प्रसिद्ध हैं। नागौरी वंश का उत्पत्ति क्षेत्र नागौर जिले का सोहालक प्रदेश है। हृष्ट-पुष्ट एवं लम्बा शरीर, मजबूत गर्दन एवं पुढें, औसत दर्जे के सींग, समतल ललाट, लम्बे कान, पतले पैर, पुष्ट थुआ और छोटी पूँछ जिसके सिरे पर टखने के नीचे तक पहुँचने वाला इस नस्ल की गाय एवं बैल की प्रमुख पहचान है।

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