RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

Rajasthan Board RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण Textbook Exercise Questions and Answers.

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RBSE Class 8 Science Solutions Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

RBSE Class 8 Science वायु तथा जल का प्रदूषण InText Questions and Answers


पृष्ठ 242

प्रश्न 1. 
क्या अम्लीय वर्षां खेतों की मिट्टी (मदा) तथा पौधों को भी प्रभावित करती है? 
उत्तर:
हाँ, अम्लीय वर्षा का प्रभाव खेतों की मिट्टी तथा पौधों पर भी पड़ता है। इससे मिट्टी प्रदूषित हो जाती है तथा पौधों पर भी अनेक हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं। 

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प्रश्न 2. 
वायुमण्डल में CO2 की मात्रा कैसे बढ़ती है और इसका आधिक्य कैसे हो जाता है? 
उत्तर:
वायुमण्डल में CO2  की मात्रा बढ़ने के अनेक कारण हैं। मानवीय क्रियाकलापों, यथा - औद्योगीकरण, वाहनों से निकला धुआँ आदि से CO2 वातावरण में निरन्तर फैलती जा रही है। दूसरी ओर वन क्षेत्र घट रहा है जिससे CO2 की खपत करने वाले वृक्षों की संख्या भी घट रही है। इससे वायुमण्डल में CO2 का आधिक्य होता जा रहा है।

RBSE Class 8 Science वायु तथा जल का प्रदूषण Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1. 
किन विभिन्न विधियों द्वारा जल का संदूषण होता है? 
उत्तर:
निम्नलिखित विधियों द्वारा जल का संदूषण होता:

  1. तेल निकालने के समय पेट्रोलियम के समुद्र में रिसने से तथा जहाजों के संचालन से समुद्री जल प्रदूषित होता है। 
  2. नाभिकीय रिएक्टर संयंत्रों से निकलने वाला कचरा भी जल को प्रदूषित करता है। 
  3. औधोगिक इकाइयाँ हानिकारक रसायनों को नदियों तथा नालों में प्रवाहित कर देते हैं इससे जल प्रदूषण होता है।
  4. खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए उपयोग किए गए पीड़कनाशी जल में घुलकर खेतों से जलाशय में चले जाते हैं। इससे जलाशयों में शैवाल उग आते हैं क्योंकि ये रसायन शैवालों की वृद्धि में सहायक हैं।
  5. ये शैवाल जब मर जाते हैं तो इससे जीवाणु की मात्रा में वृद्धि हो जाती है जो जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देते हैं, जिससे जलीय जीव मर जाते हैं व इससे जल प्रदूषण होता है। 
  6. अनुपचारित वाहित मल सीधे ही जल में प्रवाहित कर देने से जल प्रदूषित हो जाता है। 
  7. विद्युत संयंत्रों तथा उद्योगों से छोड़ा गया गर्म जल भी जल संदूषण का कारण है। 

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प्रश्न 2. 
व्यक्तिगत स्तर पर आप वायु प्रदूषण को कम करने में कैसे सहायता कर सकते हैं?
अथवा
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए आप कोई चार सुझाव दीजिए। 
उत्तर:
व्यक्तिगत स्तर पर हम वायु प्रदूषण को निम्नलिखित उपायों से कम करने में सहायता कर सकते हैं:

  1. घरों के आस - पास पेड़ - पौधे लगाकर। 
  2. जन (सार्वजनिक) परिवहन के साधनों का उपयोग करना। 
  3. निजी वाहनों के उपयोग को कम करना। डीजल अथवा सीसा रहित पेट्रोल का उपयोग करना, CNG का प्रयोग करना। 
  4. कूड़ा - कर्कट तथा टायरों आदि के जलाने पर रोक लगाना।

प्रश्न 3. 
स्वच्छ, पारदर्शी जल सदैव पीने योग्य होता है। टिप्पणी कीजिए। 
उत्तर:
यह कथन सही नहीं है कि स्वच्छ पारदर्शी जल सदैव पीने योग्य होता है क्योंकि उसमें रोगवाहक सूक्ष्मजीव और घुले हुए अपद्रव्य भी हो सकते हैं, जिसको पीकर हम बीमार भी पड़ सकते हैं। इसलिए सदैव पेयजल ही पीना चाहिए। अगर उपलब्ध पानी की गुणवत्ता के बारे में सही जानकारी न हो तो उसे उबालकर या फिल्टर करके ही पीना चाहिए। 

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प्रश्न 4. 
आप अपने शहर की नगरपालिका के सदस्य हैं। ऐसे उपायों की सूची बनाइए जिससे नगर के सभी निवासियों को स्वच्छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। 
उत्तर:
अगर मैं अपने नगर की नगरपालिका का सदस्य होता तो मैं स्वच्छ जल की आपूर्ति के लिए जल बोर्ड के साथ समय - समय पर बैठक करता और जल के नमूने गैर - सरकारी  प्रयोगशाला में भी भेज उसकी जाँच करवाता। यदि आवश्यक होता तो इस सम्बन्ध में पत्र आदि के द्वारा जल बोर्ड को उचित कार्यवाही के लिए कहता। इसके साथ - साथ सभी पाइपों को भी समय - समय पर चैक करवाता ताकि कहीं से पेयजल का पाइप खराब हो तो बदला जा सके ताकि संदूषित पानी घरों तक नहीं पहुंच सके और इसके अलावा क्षेत्र की पानी की टंकियों को भी समय - समय पर चैक करवाकर उनकी साफ - सफाई का ध्यान रखता। 

प्रश्न 5. 
शुद्ध वायु तथा प्रदूषित वायु में अन्तर स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर:

शुद्ध वायु (Pure Air)

प्रदूषित वायु (Polluted Air)

1. यह स्वच्छ तथा पारदर्शी होती है।

1. यह स्वच्छ एवं पारदर्शी नहीं होती है।

2. इसमें कोई गंध नहीं होती है।

2. इसमें दुर्गन्ध हो सकती है।

3. सूक्ष्मजीव अनुपस्थित होते है।

3. सूक्ष्मजीव उपस्थित हो सकते हैं।

4. इसमें आतथा धूल कण उपस्थित नहीं होते हैं।

4.इसमें धुआँ तथा धूल कण अत्यधिक मात्रा में उपस्थित होते हैं।


प्रश्न 6. 
उन अवस्थाओं की व्याख्या कीजिए जिनसे अम्ल वर्षा होती है। अम्ल वर्षा हमें कैसे प्रभावित करती है? 
उत्तर:
अम्ल वर्षा (Acid Rain):
विभिन्न उद्योगों से निकली सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी गैसें वायुमण्डल में उपस्थित जलवाष्प से अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं। ये बारिश के साथ पृथ्वी पर बरस जाते हैं। वर्षा में घुले इन अम्लों के कारण यह अम्ल वर्षा कहलाती है। 

अम्ल वर्षा हमें निम्न प्रकार प्रभावित करती है:

  1. जब यह अम्लीय वर्षा ऐतिहासिक स्मारकों के ऊपर गिरती है तो उसमें उपस्थित अम्ल ऐतिहासिक स्मारक के संगमरमर के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके उसे धीरेधीरे क्षति पहुंचाता रहता है। इसलिए संगमरमर पत्थर के बने ताजमहल को भी क्षति पहुंच रही है। 
  2. अम्ल वर्षा मिट्टी की अम्लीयता बढ़ा देती है जिससे मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है। साथ ही यह खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचाती है। 
  3. अम्ल वर्षा से जल प्रदूषण भी बढ़ता है। 

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प्रश्न 7. 
निम्नलिखित में से कौन - सी पौधा घर गैस नहीं
(क) कार्बन डाइऑक्साइड 
(ख) सल्फर डाइऑक्साइड 
(ग) मेथैन
(घ) नाइट्रोजन 
उत्तर:
(च) नाइट्रोजन। 

प्रश्न 8. 
पौधा घर प्रभाव (Green House Effect) का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए। 
उत्तर:
सूर्य प्रकाश में उपस्थित अवरक्त किरणें पृथ्वी की सतह पर पहुंच जाती हैं तथा अपने ऊष्मीय प्रभाव के कारण पृथ्वी की सतह तथा अन्य वस्तुओं को गर्म करती हैं। कुछ विकिरणे पृथ्वी की सतह तथा अन्य वस्तुओं द्वारा परावर्तित करके वायुमण्डल को वापिस भेज दी जाती हैं। परन्तु पृथ्वी द्वारा परावर्तित की गई विकिरणें वायुमण्डल में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड के अणुओं में पृथ्वी की सतह से परावर्तित होकर आई विकिरणों को अवशोषित कर लेती हैं। इसलिए पृथ्वी का वायुमण्डल गर्म हो जाता है। विकिरणों के कारण वायुमण्डल के गर्म हो जाने को पौधा घर प्रभाव कहते हैं। 

प्रश्न 9. 
आपके द्वारा कक्षा में विश्व ऊष्णन (Global Warming) के बारे में दिया जाने वाला संक्षिप्त भाषण लिखिए।
उत्तर:
विश्व ऊष्णन (Global Warming)वायुमण्डल के औसत ताप में निरन्तर वृद्धि हो रही है। इसे ही 'विश्व ऊष्णन' कहते हैं। इसका कारण वायुमण्डल में लगातार CO2 मेथैन आदि गैसों के स्तरों में वृद्धि है। औद्योगीकरण, वाहनों से निकलने वाला धुआँ तथा वनों का काटना आदि इसके लिए मुख्य रूप से जवाबदेह हैं। विश्व ऊम्मन की वजह से ही हिमालय के गंगोत्री हिमनद पिघलने आदि शुरू हो गए हैं और पृथ्वी पर कई क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार शताब्दी के अन्त तक 2° C तक ताप में वृद्धि हो सकती है जो कि एक संकटकारी स्तर है। विश्व ऊष्णन के लिए उत्तरदायी पौधा - घर गैसों के उत्सर्जन में कमी करने के लिए अनेक देशों ने आपस में अनुबन्ध किया है। संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अन्तर्गत हुआ क्योटो प्रोटोकॉल एक ऐसा ही अनुबन्ध है जिस पर बहुत से देश हस्ताक्षर कर चुके हैं। व्यक्तिगत स्तर पर विश्व कृष्णन के प्रभावों को सीमित करने के लिए हमें अधिक से अधिक वन लगाने चाहिए। सीसारहित पेट्रोल, वैकल्पिक ऊर्जा आदि का प्रयोग तथा जनजागरूकता अभियान चलाने चाहिए। 

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प्रश्न 10. 
ताजमहल की सुन्दरता पर संकट का वर्णन कीजिए। 
उत्तर:
ताजमहल की सुन्दरता संसार में अद्वितीय है इसलिए इसे विश्व के सात अजूबों में स्थान मिला हुआ है। परन्तु तेजी से बढ़ते प्रदूषण ने विश्व की इस अमूल्य धरोहर पर भी संकट ला दिया है। ताजमहल के चारों ओर स्थित रबड़ प्रक्रमण, स्वचालित वाहन निर्वातक, रसायन और विशेषकर मधुरा तेल परिष्करण जैसे उद्योग प्रदूषित गैसों को वर्षा के साथ मिलाकर अम्ल वर्षा करते हैं। इसी के कारण ताजमहल के संगमरमर का संक्षारण हो रहा है और यह पीला भी हो रहा है। इसको सुरक्षित रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने उद्योगों को CNG, LPG आदि स्वच्छ ईंधनों का उपयोग करने के आदेश दिए हैं और ताज के क्षेत्र में मोटर वाइनों में सीसा रहित पेट्रोल का उपयोग करने के आदेश दिए हैं। 

प्रश्न 11. 
जल में पोषकों के स्तर में वृद्धि किस प्रकार जल - जीवों की उत्तरजीविता को प्रभावित करती है? 
उत्तर:
जाल में पोषकों (नाइट्रेट, फास्फेट) के स्तर में वृद्धि जल - जीवों की उत्तरजीविता को निम्न प्रकार से प्रभावित करती हैनाइटेट उर्वरक शैवाल के लिए अच्छा भोजन है। इसलिए जाल भण्डारों के जल में नाइट्रेट की उपस्थिति से उनमें शैवाल की मात्रा अत्यधिक तेजी से बढ़ती है। शैवाल की अत्यधिक वृद्धि से नदियों, झीलों तथा तालाबों के जल में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम हो जाती है। इससे जल में रहने वाले जीव - जन्तुओं की मृत्यु तक हो सकती है।

Bhagya
Last Updated on May 24, 2022, 3:22 p.m.
Published May 17, 2022