RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 17 पर्यावरण

Rajasthan Board RBSE Class 8 Science Chapter 17 पर्यावरण

RBSE Solutions for Class 8 Science

RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 17 पर्यावरण

RBSE Class 8 Science पर्यावरण Intext Questions and Answers

पृष्ठ 179.

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नीचे दी गई सारणी में देखी गई वस्तुओं, पेड़पौधों, जीव – जन्तु एवं हुए अनुभवों को भरिए
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 17 पर्यावरण 1

RBSE Class 8 Science पर्यावरण Text Book Questions and Answers

विकल्प का चयन कीजिए

Question 1.
प्राकृतिक पर्यावरण के जैविक घटक हैं ……………..
(अ) पौधे
(ब) पहाड़
(स) मैदान
(द) जल
उत्तर:
(अ) पौधे

Question 2.
सामान्य भाषा में प्रदूषण का अर्थ है ……………..
(अ) अदूषित वातावरण
(ब) दूषित वातावरण
(स) अदूषित व दूषित वातावरण
(द) सुहाना वातावरण
उत्तर:
(ब) दूषित वातावरण

RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 17 पर्यावरण

Question 3.
पर्यावरण को बनाए रखने के लिए पर्यावरणीय जीवन शैली में नहीं है ……………..
(अ) सीमित उपयोग
(ब) संयमित उपयोग
(स) सदाचारी उपयोग
(द) असीमित उपयोग
उत्तर:
(द) असीमित उपयोग

Question 4.
विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है?
(अ) 21 जून
(ब) 5 जून
(स) 2 अक्टूबर
(द) 14 नवम्बर
उत्तर:
(ब) 5 जून

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. हमें चारों ओर से घेरने वाला आवरण ही ……………… कहलाता है।
  2. भारतीय संस्कृति में बताए गए पंचतत्व ……………… हैं।
  3. अजैविक घटक में ……………… आते हैं।
  4. भू – प्रदूषण से भूमि की उर्वरता व ……………… में कमी आई है।

उत्तर:

  1. पर्यावरण
  2. पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश
  3. निर्जीव
  4. उत्पादन क्षमता।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण के प्रकार लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण को मुख्य रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

  1. सामाजिक पर्यावरण
  2. प्राकृतिक पर्यावरण।

प्रश्न 2.
प्रदूषण किसे कहते हैं? इनके प्रकार लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण के सभी घटकों का सन्तुलित रूप में रहना ही पर्यावरण की आदर्श अवस्था कहलाती है। इनमें से ‘कसी घटक में भी असन्तुलन की स्थिति पैदा होने पर समस्त जीव जगत प्रभावित होता है। पर्यावरण के इन विभिन्न घटकों में होने वाले अवांछित परिवर्तनों को प्रदूषण कहते हैं।

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प्रश्न 3.
पर्यावरण को बचाने के लिए आप क्या संकल्प लेंगे? लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण को बचाने के लिए हमें अपने जीवन के विशेष दिवसों (जन्म दिवस, त्योहार, पुण्यतिथि आदि पर वृक्ष लगाने का संकल्प लेकर पर्यावरण संरक्षण में अपना सहयोग देना चाहिए।

प्रश्न 4.
पर्यावरण रक्षा के लिए किन-किन स्तरों पर प्रयास कर सकते हैं? लिखिए।
उत्तर:
हम सभी मिलकर पर्यावरण संरक्षण हेतु विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर सकते हैं। वह स्तर निम्न प्रकार से हैंव्यक्तिगत, पारिवारिक, सार्वजनिक, कार्यस्थल, विद्यालय, शासकीय स्तर।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण व इसके संरक्षण हेतु भारतीय दृष्टिकोण के बारे में समझाइये।
उत्तर:
भारतीय संस्कृति एवं परम्पराओं में पर्यावरण के घटकों का सदैव पूजन किया जाता है। हमारी संस्कृति में हरे वृक्षों को काटना पाप है। स्नान के बाद पौधे व वृक्ष पर जल चढ़ाते हैं, सूर्य की पूजा की जाती है। जो ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। भारतीय संस्कृति में पर्यावरण पर विशेष महत्व दिया गया है। मनुष्य का प्रकृति के साथ अटूट सम्बन्ध है। पृथ्वी जल, वायु, अग्नि, आकाश को पर्यावरण के प्रमुख घटक माना गया है। हमारा शरीर भी इन्हीं पाँच तत्वों से मिलकर बना है। पर्यावरण के इन्हीं पंचतत्वों को सुरक्षा करने से ही हमारा जीवन सुरक्षित रह सकेगा। हम धरती को मातृवत मानते हैं एवं जल, नदियाँ, पर्वत, वृक्ष, जलाशयों, वायु आदि को पूजनीय मानकर पर्यावरण संरक्षण की व्यवस्था करते हैं।

पेड़ – पौधों को जल चढ़ाकर सींचने की परम्परा आज भी चल रही है। परम्परागत उपायों से पर्यावरण को बिना हानि पहुँचाए, अन्य पदार्थों को सुरक्षित रखा जा सकता है। हमारी संस्कृति में जीवों की देवी – देवताओं के वाहन के रूप में भी प्रमुख स्थान दिया गया है। नागपंचमी के दिन नाग की पूजा, बच्छबारस के दिन गाय के बछड़े की पूजा, श्राद्ध पक्ष में कौए को खीर खिलाना, चींटियों को तिल, आटे का चूर्ण डालना, पक्षियों को दाना डालना, गाय को रोटी, कुत्ते को रोटी खिलाना आदि। इन उदाहरणों से पता चलता है कि हमारी संस्कृति में प्राणी मात्र के प्रति दया का भाव रखते हुए . इनके संरक्षण को प्रमुखता दी गई है। पीपल, वट वृक्ष, आँवला, तुलसी की पूजा की जाती है। बहुत से पेड़-पौधों में औषधीय गुण होते हैं जिनका उपयोग हम दैनिक जीवन में करते हैं।

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प्रश्न 2.
पर्यावरण संरक्षण में राजस्थान की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
पर्यावरण मानव जीवन के लिए ही नहीं अपितु जीवजन्तुओं, पशु – पक्षियों, पेड़ पौधों के जीवन निर्वहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए राजस्थान में किए गए प्रयासों के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:
1. जोधपुर जिले के खेजड़ली ग्राम में अमृता देवी का बलिदान।

2. राजसमन्द जिले के पिपलांत्री ग्राम के किरणनिधि संस्था के कार्य।

3. राजस्थान के विश्नोई समुदाय के लिए वन एवं वन्य प्राणी उनके धार्मिक अनुष्ठान का भाग बन गए हैं। भारत सरकार ने पिछले दिनों जल संरक्षण हेतु अमृता देवी विश्नोई पुरस्कार की व्यवस्था की है। यह पुरस्कार अमृता देवी विश्नोई की स्मृति में दिया जाता है जिन्होंने 1731 में राजस्थान के जोधपुर के पास खेजड़ली गाँव में ‘खेजरी वृक्षों’ को बचाने हेतु 363 लोगों के साथ अपने आपको बलिदान कर दिया। हर वर्ष इनकी याद में भाद्रपद सुदी दशमी को खेजड़ली ग्राम में मेले का आयोजन किया जाता है।

4. पिपलांत्री ग्राम की किरणनिधि संस्था द्वारा एक अभियान चलाया जाता है। जिसमें ग्राम में पुत्री के जन्म को उत्सव के रूप में बनाया जाता है तथा इस दिन ग्रामवासियों द्वारा एक सौ ग्यारह पौधे लगाये जाते हैं। ग्रामवासियों द्वारा इन पौधों के संरक्षण हेतु रक्षा बन्धन के उत्सव पर रक्षासूत्र बाँधकर इनकी सुरक्षा करने का संकल्प लिया जाता है।

RBSE Class 8 Science पर्यावरण Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

Question 1.
सामाजिक पर्यावरण से सम्बन्धित क्या नहीं है ……………….
(अ) आपसी सद्भाव
(ब) भाईचारा
(स) धैर्य
(द) नकारात्मक सोच
उत्तर:
(द) नकारात्मक सोच

Question 2.
जलवायवीय घटक हैं ……………….
(अ) वर्षा
(ब) हिमपात
(स) ओस
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

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Question 3.
पिपलांत्री ग्राम किस जिले में है ……………….
(अ) उदयपुर
(ब) राजसमन्द
(स) भीलवाड़ा
(द) अजमेर
उत्तर:
(ब) राजसमन्द

Question 4.
पृथ्वी दिवस मनाया जाता है ……………….
(अ) 5 जून
(ब) 22 अप्रैल
(स) 22 जून
(द) 23 सितम्बर
उत्तर:
(ब) 22 अप्रैल

Question 5.
पर्यावरणीय असन्तुलन के दुष्परिणाम हैं ……………….
(अ) आँधी
(ब) तूफान
(स) प्रदूषण
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

रिक्त स्थानों की पूर्ति करो

  1. हरे पेड़ पौधे ………………. कहलाते हैं।
  2. सामान्य भाषा में प्रदूषण का अर्थ ………………. है।
  3. ………………. दशमी को खेजड़ली ग्राम में मेले का आयोजन किया जाता है।
  4. जो रस पिण्ड या शरीर में है वही ………………. में है।
  5. श्राद्ध पक्ष में ………………. को खीर खिलाई जाती है।

उत्तर:

  1. उत्पादक
  2. दूषित वातारण
  3. भाद्रपद सुदी
  4. ब्रह्माण्ड
  5. कौए।

सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
1. → C
2. → D
3. → B
4. → A

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राकृतिक उत्पादक के अन्तर्गत कौन आते हैं?
उत्तर:
पारिस्थतिक तन्त्र के सजीव प्राणियों को भोजन उपलब्ध कराने वाले सभी हरे पेड़ पौधे प्राकृतिक उत्पादक के अन्तर्गत सम्मिलित हैं।

प्रश्न 2.
अपघटक किसे कहते हैं?
उत्तर:
मिट्टी और वायु में रहने वाले सूक्ष्मजीव, जीवाणु तथा कवक आदि अपघटक कहलाते हैं।

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प्रश्न 3.
अजैविक घटक किसे कहते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण के निर्जीव संघटक अजैविक घटक कहलाते हैं। वायु, जल, मृदा, तापमान, शैल आदि अजैविक घटकों में सम्मिलित किए जाते हैं।

प्रश्न 4.
पर्यावरण से क्या आशय है?
उत्तर:
‘पर्यावरण’ दो शब्दों के मेल से बना है – ‘परि’ + ‘आवरण’। ‘परि’ शब्द का अर्थ है ‘चारों ओर से’ तथा ‘आवरण’ शब्द का अर्थ है ‘ढके हुए’ या ‘घेरे हुए’ अतः ‘पर्यावरण’ का अर्थ है- ‘जो हमसे अलग होते हुए भी हमें चारों ओर से घेरे या ढके हुए है।

प्रश्न 5.
पारिस्थितिक तन्त्र की संरचना किन दो घटकों के सम्मिलन से हुई है?
उत्तर:

  1. जैविक घटक
  2. अजैविक घटक।

प्रश्न 6.
अजैविक घटक में से किन्हीं चार का नाम बताइए।
उत्तर:

  1. भूमि
  2. मृदा
  3. खनिज
  4. जल।

प्रश्न 7.
उपभोक्ता (Consumer) क्या होते हैं?
उत्तर:
पारितन्त्र के वे प्राणी जो अपने भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर होते हैं, उपभोक्ता कहलाते हैं।

प्रश्न 8.
अजैविक संघटकों के अन्तर्गत कौन से पदार्थ आते हैं?
उत्तर:
अजैविक संघटकों के अन्तर्गत अकार्बनिक एवं कार्बनिक पदार्थों को सम्मिलित किया जाता है।

प्रश्न 9.
‘पर्यावरण संरक्षण’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
पर्यावरण के विभिन्न घटकों के मध्य सन्तुलन को बनाए रखना।

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प्रश्न 10.
किन्हीं चार प्रकार के प्रदूषण बताइए।
उत्तर:

  1. जल प्रदूषण
  2. वायु प्रदूषण
  3. भू – प्रदूषण
  4. ध्वनि प्रदूषण।

प्रश्न 11.
पर्यावरण संरक्षण के लिए राजस्थान में किए गए प्रयासों के कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. जोधपुर जिले के खेजड़ली ग्राम में अमृता देवी का बलिदान।
  2. राजसमन्द जिले के पिपलांत्री ग्राम के किरणनिधि संस्था के कार्य।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण, इसके प्रकार और घटकों को एक चार्ट द्वारा निरूपित कीजिए।
उत्तर:
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प्रश्न 2.
जैविक घटक से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जैविक घटक के अन्तर्गत सभी प्रकार की वनस्पति (हरे पेड़ – पौधे) जीव – जन्तु व सूक्ष्म जीव आते हैं। हरे पेड़-पौधे उत्पादक (Producer) व जीव-जन्तु उपभोक्ता एवं सूक्ष्म जीव अपघटक कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
भीड़ – भाड़ वाली जगहों पर जाने पर हमारे सफेद कपड़ों पर हल्की कालिख क्यों जम जाती है?
उत्तर:
वायु में यातायात के साधनों; जैसे – स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार, ट्रक, जीप, बस, आदि से निकलने वाले धुएँ के मिलने से वायु दूषित हो जाती है। इसका पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इस दूषित वायु के सम्पर्क में आने से हमारे वस्त्रों पर हल्की कालिख-सी जम जाती है।

प्रश्न 4.
पर्यावरण को बचाए रखने के लिए हमें क्या जीवन शैली अपनानी चाहिए?
उत्तर:

  1. भविष्य में आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर प्राकृतिक संसाधनों का सीमित, संयमित एवं सदाचारी उपयोग करें।
  2. जैव अपघटनीय उत्पादों का अधिकतम उपयोग करें।
  3. उपयोग में लिए गए पदार्थों का पुनः चक्रण कर पर्यावरण को संरक्षित रखें।

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प्रश्न 5.
पर्यावरण को बचाए रखने के लिए कोई दो स्लोगन बताइए।
उत्तर:

  1. पेड़ – पौधे लगाने का है संकल्प हमारा। जिससे कि पर्यावरण बिगड़े नहीं हमारा।
  2. पर्यावरण का रखें ध्यान, तभी बनेगा देश महान।

प्रश्न 6.
जीवाणु एवं कवक अपघटक क्यों कहलाते हैं?
उत्तर:
जीवाणु एवं कवक अपघटक कहलाते हैं क्योंकि ये मृत पेड़ – पौधों एवं जीव – जन्तुओं के शरीर में उपस्थित जटिल कार्बनिक यौगिकों को सरल पदार्थों में अपघटित कर देते हैं। पर्यावरण के लिए अपघटकों का महत्व निम्न प्रकार है:

  1. अपघटक पदार्थों के चक्रण की क्रिया में योगदान करते हैं।
  2. ये पर्यावरण की स्वच्छता के लिए योगदान करते हैं।

प्रश्न 7.
संरक्षण के लिए कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर:

  1. वनों में अंदर तथा वनों के समीप रहने वाले लोगों को वनों एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा के कार्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए और उन्हें, इनसे होने वाले लाभों एवं इनकी कमी से होने वाली हानियों के बारे में जाग्रत करना चाहिए।
  2. जहाँ से वनों को काटा जा चुका है वहाँ नए वनों का विकास करना चाहिए तथा उसमें विभिन्न वन्यजीवों को छोड़ना चाहिए।
  3. हमें वनों एवं वन्य उत्पादों के विकल्पों की खोज करनी चाहिए जिससे वनों पर कम से कम निर्भर रहना पड़े।
  4. वनों के काटे जाने तथा वन्य प्राणियों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण मित्र बनने के लिए जीवन शैली के व्यावाहारिक पक्षों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. बिजली और पानी का कम से कम उपयोग करना चाहिए। ऊँची छतों व रोशनदान युक्त मकान बनाकर उनमें 5 स्टार रेटिंग वाले विद्युत उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।
  2. नहाने व कपड़े धोने के पश्चात जल को उपचारित कर पेड़-पौधों हेतु प्रयोग में लाना चाहिए। पानी का आवश्यकतानुसार उपयोग करना चाहिए।
  3. पर्यावरण को क्षति पहुँचाने वाली वस्तुओं को यथासंभव उपयोग नहीं करना चाहिए।
  4. प्राकृतिक संसाधनों का संयमित एवं आवश्यकता अनुरूप ही प्रयोग करना चाहिए।
  5. जैविक खाद – जैसे सब्जियों के छिलके, सड़े-गले फल, सूखी पत्तियाँ, टूटी शाखाओं इत्यादि से जैविक खाद तैयार करनी चाहिए।
  6. ‘5 जन’ को विश्व पर्यावरण दिवस, 22 अप्रैल’ को पृथ्वी दिवस वाले दिन पोस्टर, स्लोगन प्रतियोगिता, नाटकों एवं गोष्ठियों का आयोजन करना चाहिए।
  7. सार्वजनिक क्षेत्रों में जनभागीदारी द्वारा सामूहिक वृक्षारोपण के कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।

प्रश्न 2.
क्या आप अपने विद्यालय में कुछ परिवर्तन सुझा सकते हैं, जिससे इसे पर्यानुकूलित बनाया जा सके।
उत्तर:
हम अपने विद्यालय में निम्नलिखित परिवर्तन करके इसे पर्यानुकूलित बना सकते हैं:

  1. अपने विद्यालय भवन को साफ-सुथरा रखें तथा इसके आस – पास कूड़ा – करकट व गंदगी एकत्र न होने दें।
  2. इससे निकलने वाले कूड़े को कहीं दूर भूमि में गड्ढा खोदकर उसमें दबा दें, जिससे इसका विघटन हो जाए।
  3. विद्यालय प्रांगण में बगीचे की स्थापना करें और इसमें उत्पन्न पत्तियों एवं कूड़े-करकट की खाद बनाकर पौधों के पोषण के लिए प्रयोग करें।
  4. हम अपने साथियों को पेड़-पौधों की रक्षा के लिए जाग्रत करें।
  5. शौचालय तथा मूत्रालय की नियमित सफाई करवाएँ।
  6. अनावश्यक विद्युत खर्च न होने दें।
  7. पानी का अपव्यय न होने दें।
  8. विद्यालय भवन हवादार एवं प्रकाश आने योग्य हो जिससे पंखे एवं बल्बों की कम से कम आवश्यकता हो।
  9. विद्यालय प्रांगण में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएँ।
  10. पॉलिथीन का प्रयोग न करें।

प्रश्न 3.
पर्यावरण शिक्षा का आशय क्या है?
उत्तर:
पर्यावरण शिक्षा वह शिक्षा है, जिसमें पर्यावरण के विभिन्न अंगों या संसाधनों की क्रियाओं, उनके संतुलन, सदुपयोग, दुरुपयोग, प्रदूषण तथा संरक्षण का ज्ञान कराया जाता है। वर्तमान समय में प्राकृतिक संसाधनों के ह्रास, पर्यावरण असंतुलन, प्रदूषण आदि समस्याएँ अत्यंत जटिल रूप में विद्यमान हैं। प्राकृतिक संसाधन मानवीय विकास का आघात है, किंतु इनका ह्रास या विनाश समस्त मानवीय प्रगति को अवरुद्ध कर देता है। पर्यावरण शिक्षा के द्वारा संसाधनों को युगों-युगों तक मानवीय विकास का स्रोत बनाया जा सकता है।

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प्रश्न 4.
पर्यावरण संरक्षण के प्रसंग में मिट्टी की उपयोगिता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह सर्वविदित है कि मृदा एक आधारभूत संसाधन है। इसके गुणों में ह्रास का प्रभाव मानव जीवन पर अवश्य ही पड़ता है। मृदा प्रदूषण के कारण उसकी शक्ति क्षीण हो जाती है तथा उत्पादन अत्यधिक कम हो जाता है। मृदा प्रदूषण के कुछ दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  1. विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों के अनियमित निक्षेपण से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है एवं दुर्गंध आती है, अपितु अनेक प्रकार के जीव-जंतुओं की संख्या बढ़ती है। अपशिष्टों के सड़ने-गलने से विभिन्न प्रकार के रोगाणुओं में वृद्धि होती है।
  2. औद्योगिक अपशिष्टों द्वारा मृदा अथवा जल स्रोतों के प्रदूषण से हानिकारक रसायन मनुष्यों एवं पशुओं में पहुँच जाते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।
  3. अपशिष्टों तथा मल से युक्त जल द्वारा भूमि की निरंतर सिंचाई करते रहने पर मृदा की सरंध्रता में ह्रास हो जाता है जिससे मृदा में
  4. वायुसंचार बाधित होता है जो जड़ों एवं सूक्ष्म जीवाणुओं के श्वसन में अवरोध उत्पन्न करता है। जिससे मृदा प्रदूषित हो जाती है।अपशिष्टों के अनियमित निक्षेपण के कारण नालियाँ एवं नाले अवरुद्ध हो जाते हैं जिससे प्रदूषित जल एवं कीचड़ चारों ओर मृदा पर फैल जाता है और मृदा प्रदूषित हो जाती है।
  5. अपशिष्टों के हानिकारक विषैले तत्त्व मृदा में पहुँच जाते हैं, जिससे मृदा प्रदूषित हो जाती है। ऐसी मृदा में उत्पादित फसलों के उपयोग से ये तत्व पशुओं एवं मनुष्यों में पहुँच जाते हैं जिससे उनमें अनेक बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती हैं।
  6. सार्वजनिक संस्थाओं, औदयोगिक इकाइयों, होटलों, घरों. कल-कारखानों से निकलने वाले प्रदूषित जल की समुचित व्यवस्था न होने के कारण स्थान पर जल-भराव, कीचड़ या दल-दल हो जाता है जिससे मृदा प्रदूषण होता है।

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