RBSE Class 8 Hindi अपठित बोध अपठित गद्यांश

Rajasthan Board RBSE Solutions for Class 8 Hindi अपठित बोध अपठित गद्यांश Questions and Answers, Notes Pdf.

The questions presented in the RBSE Solutions for Class 8 Hindi are solved in a detailed manner. Get the accurate RBSE Solutions for Class 8 all subjects will help students to have a deeper understanding of the concepts. Students can access the Class 8 Hindi Chapter 10 Question Answer and deep explanations provided by our experts.

RBSE Class 8 Hindi अपठित बोध अपठित गद्यांश

निर्देश - निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर उनके नीचे दिए गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए -

अवतरण (1) 

हमें स्वराज्य तो मिल गया, परन्तु सुराज्य हमारे लिए एक सुखद स्वप्न ही है। इसका प्रधान कारण यह है कि देश को समृद्ध बनाने के उद्देश्य से कठोर परिश्रम करना हमने अब तक नहीं सीखा। श्रम का महत्त्व और मूल्य हम जानते ही नहीं। हम हाथों से काम करने को हीन लक्षण समझते हैं। हम यही सोचते हैं कि किस प्रकार काम से बचा जाये। यह दूषित मनोवृत्ति राष्ट्र की आत्मा में घर कर गई है और हटाये हटती नहीं है। यदि हम इससे मुक्त नहीं होते तो देश आगे नहीं बढ़ सकता और स्वराज्य, सुराज्य में परिणत नहीं हो सकता। 

प्रश्न :

  1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। 
  2. स्वराज्य सुराज्य में कब तक परिणत नहीं हो सकता? 
  3. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए। (एक-तिहाई शब्द)

 
उत्तर : 

  1. शीर्षक - 'स्वराज्य सुराज्य कैसे बने'। 
  2. जब तक मन में बैठी दूषित मनोवृत्ति का त्याग नहीं करते, तब तक स्वराज्य सुराज्य में परिणत नहीं हो सकता। 
  3. सारांश - हमने आजादी तो अवश्य प्राप्त कर ली लेकिन सुराज्य हमारे लिए सपना मात्र ही रहा, क्योंकि हम हाथों से काम करना हीनता समझते हैं और न इस दूषित मनोवृत्ति को छोड़ना चाहते हैं।

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अवतरण (2) 

धन के बिना मनुष्य ऊपर उठ सकता है, विद्या के बिना भी वह उन्नति कर सकता है, परन्तु चरित्र के बिना वह सर्वथा पंगु है। किसी अन्य गुण से इसकी तुलना नहीं की जा सकती। निर्धन और धनवान्, अशिक्षित और शिक्षित प्रत्येक मनुष्य के लिये चरित्र-बल आवश्यक है। निर्धन की तो यह एकमात्र पूँजी है। धनवान् के लिये निर्धन की अपेक्षा चरित्र की अधिक आवश्यकता होती है, क्योंकि प्रलोभन व वासना के जाल में फंसे रहना, धनवान के लिये अधिक सम्भव है। चरित्रहीन धनवान्, चरित्रहीन निर्धन की अपेक्षा कहीं अधिक भयंकर होता है। 

प्रश्न : 

  1. उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए। 
  2. चरित्र-बल की किसके लिए अधिक आवश्यकता बताई गयी है और क्यों? 
  3. गद्यांश का सारांश लिखिए।(लगभग एक-तिहाई शब्द)

उत्तर : 

  1. शीर्षक - 'चरित्र का महत्त्व'। 
  2. धनवान् के लिए चरित्र बल की अधिक आवश्यकता बतलाई गयी है, क्योंकि धनवान् व्यक्ति लोभ-लालच और वासना के जाल में अधिक फँसा रहता है।
  3. सारांश - धन और विद्या के बिना मनुष्य उन्नति कर सकता है, परन्तु चरित्र के बिना वह पंगु है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए चरित्र-बल आवश्यक है। निर्धन के लिए तो यह पूँजी है लेकिन धनवान हेतु भी परम आवश्यक है, क्योंकि चरित्रहीन होने पर वह दूसरों का और भी बुरा कर सकता है।

अवतरण (3) 

प्रत्येक राष्ट्र की अपनी एक सांस्कृतिक धरोहर होती है, जिसके बल पर वह प्रगति के पथ पर अग्रसर होता रहता है। मानव युग-युग से अपने जीवन को अधिक सुखमय, उपयोगी, शान्तिपूर्ण एवं आनन्दपूर्ण बनाने का प्रयास करता रहा है। इस प्रयास का आधार वह सांस्कृतिक धरोहर होती है, जो प्रत्येक व्यक्ति को विरासत में मिलती है। इस प्रयास के फलस्वरूप मानव अपना विकास करता है। यह विकासक्रम सांस्कृतिक आधार के बिना सम्भव नहीं होता। 

प्रश्न -

  1. उक्त अवतरण का शीर्षक लिखिए। 
  2. राष्ट्र किस वस्तु के बल पर प्रगति करते हैं? 
  3. उक्त अवतरण का सारांश लिखिए।(लगभग एकतिहाई शब्द) 

उत्तर : 

  1. शीर्षक - 'सांस्कृतिक धरोहर'। 
  2. राष्ट्र अपनी सांस्कृतिक धरोहर के बल पर कार्य करते हैं। 
  3. सारांश - प्रत्येक राष्ट्र अपनी सांस्कृतिक धरोहर के बल। पर ही प्रगति के पथ पर अग्रसर होता रहता है। मानव जीवन को अधिक सुखमय, आनन्दमय और विकासमय बनाने का आधार उसकी अपनी सांस्कृतिक धरोहर ही होती है।

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अवतरण (4) 

राजस्थान की मरुभूमि वीर-प्रसविनी कही जाती है। यहाँ समय-समय पर ऐसे वीर पैदा हुए हैं, जिन्होंने अपने रक्त से इसका गौरव बढ़ाया है और इसकी खातिर अपने प्राण न्यौछावर किये हैं। यहाँ की वीर-नारियों ने सतीत्व की रक्षा के लिए अपने प्राण अग्निदेव को समर्पित किये हैं। मेवाड केसरी राणा प्रताप ने अपनी जन्मभूमि की रक्षा के लिए तन-मन-धन सब-कुछ अर्पण कर डाला। जंगलों में भटकते फिरे, भूमि पर शयन किया और घास की रोटियाँ खाईं, परन्तु वे अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहे। पन्ना का त्याग तथा पद्मिनी का जौहर राजस्थानी शौर्य का ज्वलन्त उदाहरण माना जाता है। इसी कारण इसको वीरों की भूमि कहा जाता है।

प्रश्न : 

  1. उक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। 
  2. राणा प्रताप ने किसलिए अपना सब कुछ अर्पण कर दिया था? 
  3. उक्त अवतरण का सारांश लिखिए।(लगभग एकतिहाई शब्द) 

उत्तर : 

  1. शीर्षक - 'वीरभूमि राजस्थान'। 
  2. राणा प्रताप ने राष्ट्र-हित में अपना तन-मन-धन सबकुछ अर्पण कर दिया था। 
  3. सारांश - राजस्थान में समय-समय पर अनेक ऐसे सपूत हुए हैं जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किये। इसी प्रकार पन्नाधाय और पद्मिनी आदि वीरांगनाओं ने इसके गौरव के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया। इसी कारण इसको वीरों की भूमि कहा जाता है।

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अवतरण (5) 

मन तभी प्रसन्न रह सकता है, जबकि हमारा शरीर स्वस्थ तथा ठीक रहे। मनुष्य जीवन में हमें यदि सफलता प्राप्त हो सकती है तो अपना शरीर स्वस्थ होने से ही सम्भव है। हमें यदि अपना भविष्य सफल बनाना है तो शरीर स्वस्थ रखना पड़ेगा। संसार में ऊंचा पद प्राप्त करना है तो शरीर का स्वस्थ रहना आवश्यक है। शरीर को शक्तिशाली और स्वस्थ बनाये रखने के लिए नियमित व्यायाम नितान्त अपेक्षित है। व्यायाम से ही शरीर स्वस्थ रहता है, मुख कान्तियुक्त होता है, आँखों की ज्योति बढ़ती है और बुद्धि का विकास होता है। 

प्रश्न : 

  1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। 
  2. शरीर को शक्तिशाली बनाने के लिए क्या जरूरी है? 
  3. गद्यांश का सारांश लिखिए।(लगभग एक-तिहाई शब्द) 

उत्तर : 

  1. शीर्षक - 'व्यायाम का महत्त्व'। 
  2. शरीर को शक्तिशाली बनाने के लिए व्यायाम जरूरी है। 
  3. सारांश - मन को प्रसन्न रखने के लिए शरीर का स्वस्थ रहना जरूरी है। जीवन में सफलता पाने हेतु, शरीर को शक्तिशाली और स्वस्थ बनाने हेतु व्यायाम नितान्त अपेक्षित है। व्यायाम से मुख की कान्ति, नेत्रों की ज्योति और बुद्धि बढ़ती है।

अवतरण (6) 

अनुशासन का महत्त्व जीवन में उसी तरह है जिस प्रकार भोजन और पानी का। अनुशासन से मानसिक एवं बौद्धिक विकास होता है। मनुष्य की सरसता और सौम्यता इसी गुण पर आधारित है। मनुष्य अपनी जीवनोन्नति के लिए उच्चादर्शी का निर्माण तथा उन पर चलने के अपूर्व साधन अनुशासन द्वारा ही प्राप्त करता है। इसे अपनाने वाला व्यक्ति जीवन के प्रत्येक क्षण को अमूल्य समझने लगता है। वह सदैव ज्ञान| प्राप्ति के लिए उत्सुक रहता है। नियमित जीवन व्यतीत करने से उसका हृदय, मस्तिष्क तथा स्वास्थ्य सदैव शुद्ध, विकसित तथा सबल होकर बुद्धि निर्मल एवं तीक्ष्ण हो जाती है। 

प्रश्न : 

  1. गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। 
  2. मनुष्य की बुद्धि का विकास कब होता है? 
  3. उक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।(लगभग एक| तिहाई शब्द) 

उत्तर : 

  1. शीर्षक - 'अनुशासन का महत्त्व'। 
  2. अनुशासन अपनाने से हृदय और मस्तिष्क स्वस्थ रहता है, इससे मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है। 
  3. सारांश - मानव जीवन में अनुशासन का अत्यधिक महत्त्व है। अनुशासन से व्यक्ति अपने जीवन को उच्च बना सकता है और उससे ही उसकी बुद्धि का विकास होता है। ज्ञानप्राप्ति एवं उत्तम स्वास्थ्य के लिए अनुशासन अपूर्व साधन है।

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अवतरण (7) 

मनुष्य समाज का एक अंग है। समाज की उन्नति के साथ उसकी उन्नति होती है और समाज की अवनति से उसकी भी अवनति होती है। अतः प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह ऐसे कार्य करे, जिससे समाज सदा उन्नति की ओर अग्रसर हो। समाज-सेवा का भाव बाल्यकाल से ही जागृत करना चाहिए। जिस समाज में इस प्रकार सदाचरण व सेवाभाव की शिक्षा का महत्त्व है, वह समाज स्वस्थ रहता है। उसमें रहने वाले लोग विनम्र होते हैं और वे दूसरों की सहायता और सेवा से प्रसन्न होते हैं। वह समाज देश की उन्नति के सभी कार्यों में अत्यधिक प्रसन्नता के साथ भाग लेता है। संसार में जितने भी महापुरुष हुए हैं, उन सबने इस भावना को अपनाकर समाज को उन्नत किया है। 

प्रश्न : 

  1. उक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। 
  2. प्रत्येक व्यक्ति का क्या कर्त्तव्य बताया गया है? 
  3. उक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।(लगभग एकतिहाई शब्द) 

उत्तर : 

  1. शीर्षक - 'समाज सेवा का महत्त्व'। 
  2. प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य बताया गया है कि वह ऐसे कार्य करे, जिससे समाज हमेशा उन्नति की ओर अग्रसर हो। 
  3. सारांश - मनुष्य समाज में रहकर सदा उसकी उन्नति का प्रयास करे। समाज-सेवा की भावना से सदाचरण, विनम्रता और सहयोग के भाव जागते हैं। संसार के महापुरुषों ने इसी भावना को अपनाकर समाज को उन्नत किया है।
Prasanna
Last Updated on June 23, 2022, 12:15 p.m.
Published June 16, 2022