RBSE Class 12 Biology Notes Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

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RBSE Class 12 Biology Chapter 4 Notes जनन स्वास्थ्य

→ जनन स्वास्थ्य का अर्थ जनन के सभी पहलुओं जैसे भौतिक, भावनात्मक, व्यावहारिक व सामाजिक की पूर्ण सकुशलता से है। अपना देश विश्व का ऐसा पहला देश था जिसने जननात्मक रूप से स्वस्थ समाज के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अनेक कार्य योजनाओं को प्रारम्भ किया। जननिक स्वास्थ्य के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम लोगों में जननांगों, किशोरावस्था व उससे जुड़े बदलावों, स्वस्थ, सुरक्षित व साफ-सुथरी यौन प्रक्रियाओं, एड्स सहित अन्य यौन संचरित रोगों आदि के प्रति जागरूकता का प्रचार-प्रसार व परामर्श सुविधाएं प्रदान करना है। यह सभी जनन व बाल स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम के उद्देश्य हैं। इन कार्यक्रमों से जुड़े कुछ अन्य पहलू हैं ऋतुस्राव की अनियमितताओं, सगर्भता व उससे जुड़े मामलों, प्रसव, प्रेरित गर्भपात, यौन संचरित रोग, गर्भ निरोधक व जन्म नियंत्रण, प्रसवोत्तर शिशु एवं मातृ देखभाल आदि जैसी समस्याओं की देखभाल व चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराना।

→ कुल मिलाकर देखा जाय तो हमारे देश में जनन स्वास्थ्य की दिशा में सुधार हुआ है, जो मातृ मृत्युदर, शिशु मृत्युदर में कमी, यौन संचरित रोगों की शीघ्र पहचान व उपचार व बन्ध्य दम्पतियों की सहायता आदि के रूप में स्पष्ट है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं व बेहतर रहन-सहन की परिस्थितियों ने जनसंख्या विस्फोट को बढ़ावा दिया है। इस तीव्र जनसंख्या वृद्धि ने विभिन्न प्रकार के गर्भ निरोधकों के गहन प्रचार-प्रसार को अपरिहार्य बना दिया। आधुनिक समय में विभिन्न प्रकार के गर्भ निरोधक उपाय जैसे प्राकृतिक, परम्परागत, रोध, अन्तःगर्भाशयी युक्तियाँ (आई.यू.डी.), पिल्स, टीके या इंजेक्शन, अन्तर्राप व शल्यी विधियाँ आदि उपलब्ध हैं। यद्यपि गर्भ निरोधक उपाय जनन स्वास्थ्य बनाए रखने की नियमित आवश्यकता नहीं है फिर भी सगर्भता से बचने या सगर्भता में अन्तराल रखने हेतु व्यक्तियों को इसे इस्तेमाल में लाने को बाध्य होना पड़ता है।

→ हमारे देश में प्रेरित गर्भपात या सगर्भता के चिकित्सीय समापन को कानूनी मान्यता प्राप्त है। सामान्य रूप से सगर्भता का चिकित्सीय समापन बलात्कार जैसे मामलों से हुई अनचाही सगर्भता, गर्भनिरोधकों की असफलता या अन्य कारणों से बनी अनचाही सगर्भता को समाप्त करने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में भी प्रेरित गर्भपात किया जाता है जब सगर्भता का बना रहना माँ, भ्रूण या दोनों ही के लिए प्राणघातक हो। प्राथमिक रूप से यौन सम्बन्धों द्वारा संचरित होने वाले रोग या संक्रमण यौन संचरित रोग कहलाते हैं। इस प्रकार के रोगों से जुड़ी कुछ जटिलताएँ हैं, श्रोणि शोथज रोग (पी.आई.डी.), मृत शिशु जन्म तथा बन्ध्यता आदि। इन रोगों की शीघ्र जाँच व निदान से इनका इलाज सुलभ हो जाता है। अनजाने या बहुत से लोगों से सम्भोग से बचना, सम्भोग के समय अनिवार्य रूप से कंडोम का प्रयोग यौन रोगों से बचाव के कुछ सरल उपाय हैं। दो वर्ष तक मुक्त सहवास के बावजूद सगर्भता या संतान उत्पन्न करने की अक्षमता बन्ध्यता कहलाती है। बन्ध्य दम्पतियों की मदद हेतु आज अनेक विधियाँ जिन्हें सहायक जनन प्रौद्योगिकी कहते हैं. उपलब्ध हैं। इनमें से एक प्रमुख विधि है पात्रे निषेचन या इन विट्रो फर्टिलाइजेशन, इसमें स्त्री के जनन मार्ग में भ्रूण स्थानान्तरण कर दिया जाता है। यह विधि टेस्ट ट्यूब बेबी नाम से प्रसिद्ध है।

→ अगर सभी सहायक जनन प्रौद्योगिकियों का एक साथ प्रयोग किया जाय तो पैदा होने वाली सन्तान के पाँच माता-पिता हो सकते हैं

  • बन्ध्य माँ जो अण्डाणु नहीं बना सकती
  • बन्ध्य पिता जो शुक्राणु निर्माण में अक्षम है
  • इन माता-पिता को शुक्राणु देने वाला,
  • इनको अण्डदाता
  • सरोगेट माँ। 

RBSE Class 12 Biology Notes Chapter 4 जनन स्वास्थ्य 

→ 28 सप्ताह के बाद मृत भ्रूण को जन्म देना स्टिल बर्थ (still birth) कहलाता है।

→  स्त्री के आन्तरिक जनन अंगों का संक्रमण श्रोणि शोथज रोग (pelvic inflammatory disease) कहलाता है। यह प्रायः यौन जनित रोगों के
कारण उत्पन्न होता है।

→ निर्वात पम्प (Vacuum aspiration) 12 सप्ताह तक के गर्भ के प्रेरित गर्भस्राव की सामान्य विधि है।

→ प्रथम परखनली शिशु का जन्म इंग्लैंड में 25 जुलाई 1978 को हुआ। डारार्बट एडवर्ड व डॉ वैट्रिक स्टेप्टो को बन्ध्य दम्पत्ति लेस्ले व गिल्बर्ट ब्राउन को शिशु के रूप में सहायक जनन प्रौद्योगिकी का यह प्रथम उपहार देने का श्रेय जाता है। भारत में प्रथम परखनली शिशु कोलकाता में 3 अक्टूबर 1978 को पैदा हुआ।

→ भारत सरकार ने अपनी जनसंख्या नीति 16 अप्रैल 1976 को घोषित की। इसमें पुरुष व स्त्री के लिए विवाह की उम्र, परिवार कल्याण कार्यक्रमों को अपनाने वाले परिवारों को अतिरिक्त सुविधाएँ दिये जाने आदि का उल्लेख

→ बन्ध्यता के अनेक मामलों को केवल औषधियों से ठीक किया जा सकता है व इनमें सहायक जनन प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता नहीं होती।

→ शुक्राणुओं की अनुपस्थिति (azoospermia), शुक्राणुओं की कमी (ओलिगोस्पर्मिया), शुक्राणुओं की असामान्यता, नपुंसकता पुरुषों में बन्ध्यता के प्रमुख कारण हैं। पात्रे निषेचन के लिए अण्डाणु को स्त्री के अण्डाशय से लेप्रोस्कोप व अन्य उपकरणों की मदद से निकाला जाता है। शुक्राणुओं को द्रव नाइट्रोजन (-176°C) में कई वर्षों तक भंडारित किया जा सकता है।
RBSE Class 12 Biology Notes Chapter 4 जनन स्वास्थ्य 1

→ चीन की जनसंख्या वृद्धि दर भारत से कम है अत: 15-20 वर्षों में भारत की जनसंख्या चीन की जनसंख्या से अधिक हो जायेगी।

→ आर्तव चक्र के दौरान किसी स्त्री के शरीर के तापमान का पूर्ण रिकार्ड अण्डोत्सर्ग की असामान्यता के बारे में संकेत दे सकता है।

→ फैलोपियन नलिका में भ्रूण का अन्तर्रोपण एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy) कहलाता है।

→ सुजाक या गोनोरिया एक प्रमुख यौन संचरित रोग है जिसे द क्लेप (the clap) के नाम से जाना जाता है।

→ सिफलिस रोग का रोगजनक एक विशेष प्रकार का जीवाणु है जिसे स्पाइरोकीट (spirochaete) कहते हैं। 

→ यह कुंडलिनी प्रकार का (spiral shaped) होता है। यौन जनित रोगों का संचरण अन्य साधनों से भी हो सकता है अतः इनकी परिभाषा “प्राथमिक रूप से लैंगिक संसर्ग से फैलने वाले रोग' के रूप में देना अधिक उचित है। उदाहरण के लिए सिफलिस अन्य माध्यमों से भी संचरित होता है। 

→ सहेली नाम की गर्भ निरोधक गोली “सेलेक्टिव एस्ट्रोजन रिसेप्टर माड्युलेटर” के रूप में कार्य करती है। इसका रासायनिक नाम ओरमेलोक्सीफेन (ormeloxifene) है तथा इसका निर्माण हिन्दुस्तान लेटेक्स लिमिटेड कर रही है। प्राचीन समय में कुछ शासक रानियों के हरम में कार्य करने वाले सेवकों के वृषण बाल्यकाल में ही नष्ट करा देते थे। इससे टेस्टोस्टीरॉन का निर्माण न होने के कारण उनकी आवाज पतली ही बनी रहती है। किशोरावस्था के बाद वाक तन्तु (vocal cords) टेस्टोस्टीरॉन के कारण ही लम्बे हो जाते हैं अत: आवाज की पिच (pitch) कम हो जाती है। वृषण रहित ऐसे युवाओं को गाने-सुनाने और हरम में रानियों के काम-काज की जिम्मेदारी सौंपी जाती थी। वृषण हट जाने के कारण वह बन्ध्य होते थे।

→ Amniocentesis (उल्ब परीक्षण) भ्रूण में गुणसूत्रीय
असामान्यताओं को ज्ञात करने की एक विधि जिसका दुरुपयोग भ्रूण के लिंग परीक्षण हेतु भी किया जाता है।

→ Artificial Insemination (कृत्रिम वीर्य सेचन) वह तकनीक जिसमें किसी बन्ध्य पति/दाता का वीर्य कृत्रिम रूप से स्त्री की योनि अथवा गर्भाशय में प्रविष्ट कराया जाता है। 

→ Assisted Reproductive Technologies (सहायक जनन प्रौद्योगिकियाँ) वह चिकित्सीय तकनीकें जो बन्ध्य लोगों के लिए सगर्भता के अवसर सुलभ करा देती हैं।

→ Barrier Method (रोधक विधियाँ) गर्भ निरोध के ऐसे उपाय जिनमें किसी यांत्रिक/भौतिक साधन द्वारा शुक्राणुओं का अण्डकोशिका तक पहुँचना रोक दिया जाता है।

→ Cervical Cap (गर्भाशयी ग्रीवा टोपी) गर्भ निरोध हेतु रबर/प्लास्टिक से बनी एक टोपीनुमा रचना जो रोध या बैरियर की भाँति कार्य करती है।

→ Diaphragms गर्भाशयी ग्रीवा पर लगाने वाला एक रोधक गर्भ निरोध उपाय।

→ Embryo Transfer (भ्रूण स्थानान्तरण) इन विट्रो फर्टिलाइजेशन से बने भ्रूण को फैलोपियन नलिका अथवा गर्भाशय में स्थानान्तरित करना।

→ ICSI-Intra Cytoplasmic Sperm Injection (अन्त: कोशिकाद्रव्यीय शुक्राणु अन्तःक्षेपण)-सहायक जनन प्रौद्योगिकी की वह तकनीक जिसमें किसी बन्ध्य पुरुष के एक शुक्राणु को अण्ड कोशिका में इंजैक्ट किया जाता है।

→ Infertility (बन्ध्य ता) सन्तान पैदा करने की अक्षमता।

→ Infant Mortality Rate - IMR (शिशु मृत्यु दर) एक वर्ष में प्रति 1000 जीवित शिशु जन्मों पर एक वर्ष के अन्दर मरने वाले शिशुओं की संख्या।

→ IUD-Intra Uterine Device (अन्तः गर्भाशयी युक्तियाँ) गर्भ निरोध की गर्भाशय में स्थापित की जाने वाली युक्तियाँ जो हार्मोनल, कॉपर आधारित होती है। IUCD भी कहलाती हैं।

→ IUI-Intra Uterine Insemination (अन्त: There are सेचन) पति/दाता से प्राप्त वीर्य को कृत्रिम रूप से स्त्री के गर्भाशय में प्रविष्ट कराना।

→ IUT-Intra Uterine Transfer (अन्तः गर्भाशयी स्थानान्तरण) पात्रे निषेचन से बने 8 से अधिक कोरक खण्डों वाले भ्रूण को स्त्री के गर्भाशय में स्थानान्तरित करना।।

→ Lactational Amenorrhea (दुग्धस्रावी अनार्तव (स्तनपान अनार्तव) प्रसव के कुछ माह बाद तक सक्रिय स्तनपान के कारण माहवारी का अनुपस्थिति होना।

RBSE Class 12 Biology Notes Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

→ MMR-Maternal Mortality Rate (मातृ मृत्यु दर) प्रति 1000 सगर्भता स्थितियों में प्रतिवर्ष होने वाली मृत्यु की संख्या जिसमें सगर्भता अवधि, प्रसव व प्रसव के 42 दिनों के अन्दर हुई मृत्यु शामिल

→ MTP-Medical Termination of Pregnancy (सगर्भता का चिकित्सीय समापन) प्रेरित गर्भपात या ऐच्छिक गर्भपात।

→ Oral Contraceptives (मुखीय गर्भ निरोधक) हार्मोनल गोलियाँ जिन्हें गर्भ निरोध हेतु प्रयोग किया जाता है। 

→ Pills (गोलियाँ) गर्भनिरोध हेतु बनी हार्मोनल मुखीय औषधियाँ, एक प्रकार का मुखीय गर्भनिरोधक।

→ Sterilization (बन्ध्यकरण) गर्भनिरोध की शल्य चिकित्सीय विधियाँ, जैसे ट्यूबैक्टॉमी व वेसेक्टॉमी।

→ STD-Sexually Transmitted Diseases (यौन संचरित रोग) प्राथमिक रूप से लैंगिक सम्पर्क द्वारा संचरित होने वाले रोग जैसे सिफलिस, एड्स आदि। 

→ Test Tube Baby (परखनली शिशु/टेस्ट ट्यूब बेबी) पात्रे निषेचन या इन विट्रो फर्टिलाइजेशन व बाद में भ्रूण के गर्भाशय में स्थानान्तरण से विकसित शिशु।

→ Vault (वाल्ट) रोधक गर्भ निरोध का एक उपाय।

→ VD Venereal Disease (रतिज रोग) यौन संचरित रोगों का ही एक नाम।

→ ZIFT-Zygote Intra Fallopian Transfer (युग्मनज का अन्तः फैलोपियन नलिका स्थानान्तरण) इन विट्रो फर्टिलाइजेशन से विकसित 8 कोशिकीय भ्रूण का फैलोपियन नलिका में स्थानान्तरण।

Prasanna
Last Updated on July 27, 2022, 11:51 a.m.
Published July 27, 2022