RBSE Class 12 Biology Notes Chapter 13 जीव और समष्टियाँ

These comprehensive RBSE Class 12 Biology Notes Chapter 13 जीव और समष्टियाँ will give a brief overview of all the concepts.

Rajasthan Board RBSE Solutions for Class 12 Biology in Hindi Medium & English Medium are part of RBSE Solutions for Class 12. Students can also read RBSE Class 12 Biology Important Questions for exam preparation. Students can also go through RBSE Class 12 Biology Notes to understand and remember the concepts easily.

RBSE Class 12 Biology Chapter 13 Notes जीव और समष्टियाँ

→ इकोलॉजी (Ecology) शब्द को पहली बार जर्मन जीव वैज्ञानिक अर्स्ट हैकल (Ernst Haeckel)ने प्रतिपादित किया। इससे पहले. 18वीं व 19वीं सदी में अनेक वैज्ञानिक इकोलॉजी पर महत्वपूर्ण कार्य कर चुके थे पर उस कार्य पर इकोलॉजी का लेबल नहीं था।

→ सफाई सहजीविता (Cleaning symbiosis) दो जातियों के बीच की ऐसी पारस्परिक क्रिया है जिसमें क्रस्टेशियन, मछलियाँ व पक्षी जैसे जीव अपने पृष्ठवंशी साथियों की सफाई करते हैं। कोरल रीफ की कुछ छोटी मछलियाँ तो बड़ी मछलियों के मुँह में जाकर सफाई करती हैं।

→ एक ही प्रजाति में विभिन्न रूप-आकार वाले जीवों का पाया जाना बहुरूपता या पालीर्फिज्म (Polymorphism) कहलाता है उदाहरण के लिए सीलेन्टेरेट जन्तु फाइसेलिया (Physalia) की कॉलोनी के जीव।

→ मछलियों में समुद्री घोड़ा (Sea horse), एम्फीबियन में सैलामेन्डर (Salamenders), रेप्टाइल्स. में साँप व छिपकली अपने अण्डे/बच्चों की देखभाल के सामान्य उदाहरण हैं। 

→ चीतल (Spotted Deers)के झुण्ड पर जब परभक्षी जन्तु का आक्रमण होता है तब सबसे अच्छे सींगों वाले व चीतल को झुण्ड के सब हिरन बीच में कर लेते हैं ताकि उसे किसी तरह का नुकसान न हो। जन्तुओं में दूसरों की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग अर्थात अपनी जान न्यौछावर कर देने का यह एक बेहतरीन उदाहरण है। इसे एल्ट्रस्टिक व्यवहार (altruistic behaviour) कहा जाता है। एल्टूइज्म को चीटियों, मधुमक्खियों व दीमकों की अनेक प्रजातियों में देखा जा सकता है। 

→ वैगटेल (Wagtail) नामक चिड़िया जब समूह में दाना चुगती है तो कुछ सदस्य केवल पहरेदारी करते हैं तथा खाना खाने वाले समूह को बाज के हमले से बचाते हैं। बाद में वह खाते हैं व कुछ अन्य पहरेदारी करते हैं। लाल चोंच वाली ऑक्स पेकरव पीली चोंच वाली ऑक्सपेकर (ox जम्वे) नामक चिड़ियाँ अफ्रीकी राइनों को टिक्स व अन्य परजीवियों से सुरक्षा दिलाते हैं। वह अपने स्तनधारी साथी को आसपास के किसी खतरे से भी आगाह करते रहते हैं।

→ रयुफस वुडपेकर एक प्रकार की खतरनाक चींटियों के घोंसले में ही अपना घोंसला बनाती हैं। ये चींटियों को ही खाती है लेकिन यह खतरनाक चींटी इस पक्षी के अण्डों, बच्चों व वयस्क को किसी प्रकार की हानि नही पहुँचाते हैं। प्रकृति में समष्टि नियंत्रण का यह अजीब तरीका है।

→ पौधों द्वारा शाकाहारी जन्तुओं से बचे रहने के उद्देश्य से विकसित अनेक रसायन कीटों के हार्मोन के समान होते हैं तथा कीटों के लार्वा के विकास को प्रभावित करते हैं।

→ कुछ कीड़े बदबूदार रसायन उत्पन्न कर अपने परभक्षियों से बचने का प्रयास करते हैं।

→ दक्षिण अफ्रीका की एक गजेल हिरन जैसी प्रजाति शेर का आक्रमण होने पर परभक्षी को भ्रमित करने के उद्देश्य से 2 से 4 मीटर ऊँची सीधी छलांग लगाती है। इससे झुण्ड के जीवों को भागने का अवसर मिल जाता

→ एबिन्गडन कछुए का नाम गैलापेगोस द्वीप समूह के एक द्वीप के नाम एविन्गडन (Abingdon) पर आधारित है

→  मनुष्य व रेकून जैसे जीव सामान्यीकृत प्रजाति (Generalised Species) का उदाहरण हैं। इनकी कर्मताओं (niches) का व्यापक परास है। इनका आहार विविध प्रकार, का है, अनेक प्रकार के आवासों में रह सकते हैं तथा पर्यावरण के विस्तृत परास को सहन कर सकते हैं। दूसरी प्रकार की प्रजाति विशिष्टीकृत प्रजाति (specialized species)हैं जैसे पांडा (Pandas); धब्बेदार उल्लू (Spotted owl) तथा स्वच्छ जलीय डॉलफिन (Fresh water Dolphins)। इनका आहार सीमित प्रकार का होता है। यह विशिष्ट आवासों में रह सकते हैं तथा पर्यावरण के केवल मामूली बदलावों को सहन करने में सक्षम हैं।

RBSE Class 12 Biology Notes Chapter 13 जीव और समष्टियाँ 

→ जाइंट पांडा (Giant Panda) तो केवल बांस की पत्तियाँ खाते हैं। लाजिस्टिक वृद्धि मॉडलों का प्रयोग यह बताने के लिए किया जाता है कि पर्यावरण या तो 'r' चयन को प्रेरित करता है या 'K' चयन को। r चयन ऐसे पर्यावरण में होता है जिसका पूर्वानुमान नहीं किया जा सकता तथा जहाँ समष्टि का आकार गैर घनत्वीय कारकों या घनत्व से स्वतंत्र कारकों (Density independent factors) द्वारा प्रभावित होता है। ऊर्जा का प्रयोग अधिक से अधिक (जितना अधिक सम्भव हो सके) जीव उत्पन्न करने के लिए होता हैं। वयस्क छोटे होते हैं तथा माता-पिता द्वारा अण्डों या शिशुओं
की देखभाल का अभाव होता है। 

→ K चयन (K-Selection) ऐसे अपेक्षाकृत स्थिर पर्यावरण में कार्य करता है जहाँ समष्टि का आकार घनत्व आधारित कारकों द्वारा निर्धारित होता है। ऊर्जा का प्रयोग जीवित बने रहने तथा बार-बार दोहराये जाने वाली प्रजनन घटनाओं पर होता है। वयस्क बड़े होते हैं। तथा शिशु देखभाल पायी जाती है। वास्तविक जीवन इतिहास इनके बीच में हो सकते हैं। 'अजैविक कारक समष्टि आकार को नियंत्रित करने वाले गैर घनत्व आधारित (density independent) कारक हैं। जबकि जैविक कारक जैसे परभक्षण, स्पर्धा समष्टि आकार को नियंत्रित करने वाले घनत्व आधारित कारक हैं।

→ विकसित देशों में जनसंख्या स्थिर (Stable) जबकि विकासशील व अल्पविकसित देशों में तेजी से बढ़ने वाली है।

→ कुछ एफिड्स गर्मियों में अलैंगिक प्रजनन द्वारा अपनी संख्या बढ़ाते हैं तथा केवल एक बार लैंगिक प्रजनन द्वारा संतति उत्पन्न करते हैं। अगर सीमाकारी नियंत्रण या पर्यावरणीय प्रतिरोध न हो तो मक्खी के एक जोड़े से बनी संततियों का भार कुछ वर्षों में ही पृथ्वी के भार से अधिक हो जायेगा।

→ प्रशांत महासागरीय सामन (Salman) मछली अण्डे देने के लिए स्वच्छ जलीय धाराओं (नदियों आदि) में चढती हैं। अण्डे देने के बाद वह मर जाती है। शिशु मछलियाँ कुछ वर्षों के लिए फिर से समुद्र मे लौटती हैं तथा अण्डे देने स्वच्छ जल में आती हैं। परभक्षिता व परजीविता के बीच का एक सम्बंध पेरासिटॉइड (Parasitoid) है। इसमें एक कीट दूसरे कीट के शरीर में अण्डे देता है जिससे निकले लार्वा उस पोषक को खा जाते हैं।

→ पारिस्थितिकी या इकोलॉजी जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसमें जीवधारियों व उनके अजैविक व जैविक पर्यावरण के बीच की पारस्परिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। यह जैविक संगठन के चार स्तरों जीवधारियों, समष्टियों, समुदायों व जीवोम से सम्बंधित है।

→ तापमान, प्रकाश, जल व मृदा पर्यावरण के सर्वाधिक महत्वपूर्ण भौतिक कारक हैं। एक जीव इन कारकों हेतु विभिन्न प्रकार से अनुकूलित होता है। जीव का स्थिर आन्तरिक पर्यावरण बनाये रखना अर्थात साम्यावस्था जीव के इष्टतम प्रदर्शन या कार्य-क्षमता में योगदान करता है। लेकिन केवल कुछ जीव, नियमनकर्ता या रेगुलेटर्स बदलते पर्यावरण में साम्यावस्था बनाये रखने में सक्षम होते हैं। अन्य जन्तु आन्तरिक पर्यावरण का या तो आंशिक रूप से नियमन करते है या संरूप (कन्फर्म) विधि अपनाते हैं। 

→ कुछ अन्य प्रजातियों ने प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों से बचने हेतु अनुकूलन विकसित कर लिए हैं यह अनुकूलन स्थान, प्रवास व समय विषयक जैसे शीत निष्क्रियता, ग्रीष्म निष्क्रियता, डायापॉज हो सकते हैं। प्राकृतिक वरण द्वारा विकासीय बदलाव समष्टि के स्तर पर होते हैं। अत: समष्टि पारिस्थितिकी, इकोलॉजी का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। किसी दिये गये भौगोलिक क्षेत्र में निवास करने वाले एक ही प्रजाति के सदस्यों का समूह जो समान संसाधनों का उपयोग व स्पर्धा करता है उस आवास की समष्टि बनाता है।

→ समष्टि में ऐसे गुण होते हैं जो वैयक्तिक जीव में नही पाये जाते जैसे जन्मदर व मृत्युदर, लिंग अनुपात व आयु वितरण आदि। विभिन्न आयु वर्ग के नर व मादा जीवों के अनुपात का ग्राफीय निरूपण आयु पिरामिड कहलाता है। इसकी आकृति से पता लगता है कि समष्टि स्थिर है, बढ रही है या आकार में कम हो रही है। किसी समष्टि पर किसी भी कारक का पारिस्थितिक प्रभाव इसके आकार, समष्टि घनत्व पर परिलक्षित होता है।

→ समष्टि घनत्व को संख्या, जैवभार, प्रतिशत कवर आदि के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। जन्म व आप्रवासन से समष्टि के आकार में वृद्धि तथा मृत्यु व उत्प्रवासन से कमी होती है। जब संसाधन असीमित होते हैं तब समष्टि वृद्धि प्रायः चरघातांकी होती है। लेकिन संसाधनों के धीरे-धीरे सीमित हो जाने पर वृद्धि का तरीका लॉजिस्टिक हो जाता है। दोनों ही अवस्थाओं में वृद्धि अन्ततः पर्यावरण की धारण क्षमता द्वारा सीमित होती है। किसी समष्टि की वृद्धि करने की नैसर्गिक क्षमता प्राकृतिक वृद्धि की नैसर्गिक दर (r) के रूप में मापी जाती है।

RBSE Class 12 Biology Notes Chapter 13 जीव और समष्टियाँ

→ प्रकृति में, विभिन्न प्रजातियों की समष्टियाँ किसी आवास में एकाकी रूप से नहीं रहतीं अपितु विभिन्न प्रकार से पारस्परिक क्रियाएँ करती हैं। इन पारस्परिक क्रियाओं के निष्कर्ष के आधार पर यह स्पर्धा (दोनों प्रजातियों को हानि), परभक्षण (एक प्रजाति को हानि दूसरी को लाभ) परजीविता, जो परभक्षण के समान है, सहभोजिता (एक प्रजाति को लाभ व दूसरी अप्रभावित) अमेन्सेलिज्म (एक को हानि व दूसरी अप्रभावित) तथा सहोपकारिता (दोनों प्रजातियों को लाभ) प्रकार की हो सकती है। परभक्षण एक महत्वपूर्ण पारस्परिक क्रिया है जिसके द्वारा पोषण स्तरों में ऊर्जा का स्थानान्तरण तथा शिकार की समष्टि का नियंत्रण होता है।

→ पौधों में शाकाहारी जन्तुओं से बचाव हेतु अनेक आकारिकीय व रासायनिक सुरक्षा उपायों का विकास हुआ है। स्पर्धा में यह माना जाता है कि श्रेष्ठ स्पर्धी अपने कमजोर स्पर्धी का निष्कासन कर देगा (कम्पटीटिव एक्सक्लुसन सिद्धान्त) लेकिन अनेक प्रजातियों ने स्पर्धा को नकार कर ऐसी विधियों का विकास कर लिया है जो सहअस्तित्व को बढ़ावा देती हैं। पौधों व उनके परागण कर्ताओं की पारस्परिक क्रिया प्रकृति से सहोपकारिता के सर्वोत्कृष्ट उदाहरणों में से एक है।

→ ग्रीष्म निष्क्रियता (Aestivation)-ग्रीष्म ऋतु में जीव का प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए उपापचयी क्रियाएं मंद कर लम्बी निष्क्रिय अवस्था में चले जाना।

→ आयु वितरण (Age distribution): किसी समष्टि में विभिन्न आयु वर्ग के जीवों की आपेक्षिक बहुलता।

→ स्वपारिस्थितिकी (Autoecology)-किसी एक जीव या एक जीव प्रजाति की उसके पर्यावरण से पारस्परिक क्रियाओं का अध्ययन।

→ जैव मण्डल (Biosphere)-पृथ्वी पर वायुमण्डल, जलमण्डल व स्थलमंडल का जीवन योग्य भाग/पृथ्वी के सभी जीवोमों का योग।

→ जैवीय कारक (Biotic Factor)-पर्यावरण के ऐसे कारक जो जीवधारियों से सम्बंधित हैं जैसे प्रतिस्पर्धा, चारण (grazing)

→ सर्काडियन रिदम (Circardian rhythms)-जीवों की दिन के प्रकाश के प्रति दैनिक अनुक्रियाएं।

→ सहजीविता (Commensalism)-जीवों के बीच की ऐसी पारस्परिक क्रिया जिसमें एक जीव लाभान्वित होता है जबकि दूसरे को

→ डेमोग्राफी (Demography)-मनुष्य की जनसंख्या का वैज्ञानिक अध्ययन।

→ उपरति/डाएपॉज (Diapause)-कुछ जन्तुप्लवकों (कीटों) द्वारा उपापचय के निलम्बन (suspension) की अवस्था ताकि प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना किया जा सकें।

→ प्रसुप्ति (Dormancy)-बीजों की ऐसी अवस्था जिसमें अनुकूल परिस्थितियों में भी अंकुरण नही होता। जीवों की प्रतिकूल परिस्थितियों से

→ पारिस्थितिकी (Ecology)-जीवों की आपस की तथा उनके पर्यावरण के साथ की पारस्परिक क्रिया का अध्ययन।

→ उत्प्रवासन (Emigration)-किसी आवास में रह रही समष्टि में बाहर के उसी प्रकार के जीवों का जुड़ जाना।

→ पर्यावरण (Environment)-परिवेश, जीव के चारों ओर के सभी जैव व अजैव कारकों का समुच्चय।

→ यूरीहैलाइन (Euryhaline)-जन्तु जो लवणीय जल के एक बड़ी परास (Wide range of salt water) को सहन करने में सक्षम हों। 

RBSE Class 12 Biology Notes Chapter 13 जीव और समष्टियाँ

→ यूरीथर्मल (Eurythermal)-ऐसे जीव जो ताप में उतार-चढ़ाव के एक बड़े बदलाव को सहन करने में सक्षम हों।

→ हैलोफाइट (Halophyte)-अत्यधिक लवणीय मृदा या जल में उगने वाले पौधे।

→ हीलियोफाइट (Heliophyte)-सूर्य का प्रकाश पसन्द करने वाले पौधे जो प्रकाश की उच्च तीव्रता में उगते हैं।

→ शीत निष्क्रियता (Hibernation)-कुछ जीवों की कम ताप से बचने हेतु सर्दी की लम्बी नींद (Winter sleep) जिसमें उपापचयी क्रियाएं मंद रहती हैं।

→ होमियोथर्मिक (Homeothermic)-एंडोथर्मिक या गर्म खून वाले जीव जिनमें शरीर का तापमान स्थिर रहता है जैसे स्तनधारी।

→ साम्यावस्था (Homeostasis)-स्थिर आन्तरिक पर्यावरण बनाये रखने की प्रक्रिया जैसे ताप नियमन।

→ ह्यूमस (Humus)-आंशिक रूप से अपघटित काला एमार्फस जैविक पदार्थ जो मृदा की उपजाऊ शक्ति बढ़ाता है।

→ काष्ठलता (Liana)-उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों की काष्ठ लताएं (woody climbers)जो वृक्षों से लिपटकर कैनोपी तक पहुंच जाती हैं।

→ प्रवास (Migration)-जीवों का प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए अनुकूल पर्यावरण वाले स्थानों पर अस्थाई रूप से जाना।

→ सहोपकारिता (Mutualism)-दो जीवों के बीच की पारस्परिक क्रिया जिसमें दोनों ही साझेदारों को लाभ होता है।

→ रात्रिचर (Nocturnal)-जीव जो रात्रि में सक्रिय रहते हैं जैसे कॉकरोच, उल्लू।

→ परासरण नियमन (Osmoregulation)-वह प्रक्रिया जिसके द्वारा जीव के शरीर में जल व आयनों के सान्द्रण का नियमन होता है।
अर्थात
जीव के शरीर द्रवों की परासरणी सान्द्रता का नियमन।

→ परजीविता (Parasitism)-जीवों के बीच की वह पारस्परिक क्रिया जिसमें एक जीव (परजीवी) को लाभ तथा दूसरे (पोषक) को हानि होती है। परजीवी पोषक से पोषण प्राप्त करता है।

→ पादपभक्षी (Phytophagous)-किसी भी प्रकार के शाकाहारी जंतु जो पौधों से आहार प्राप्त करते हैं।

→ ठण्डे रक्त वाले (Poikilothermic)-ऐसे जंतु जो अपने शरीर का ताप स्थिर नही रख पाते, शरीर का ताप पर्यावरण के ताप के साथ बदलता है, जैसे मछली, एम्फीबियन, सरीसृप।

→ परभक्षण (Predation)-वह पारस्परिक क्रिया जिसमें एक (परभक्षी) जीव दूसरे (शिकार) जीव को मार कर खा जाता है।

→ दीप्तिकालिता (Photoperiodism)-जीव की प्रकाश की अवधि के प्रति अनुक्रियाएं जैसे पौधों में पुष्पन।

→ समष्टि (Population)-किसी दिये भौगोलिक क्षेत्र में नियत समय पर उपस्थित एक ही प्रजाति के जीवों की संख्या।

→ छाया प्रिय पौधे (Sciophyte)-ऐसे पौधे जो बहुत कम प्रकाश तीव्रता में उगते हैं।

RBSE Class 12 Biology Notes Chapter 13 जीव और समष्टियाँ

→ स्तरीकरण (Stratification)-वर्षा वनों में वनस्पति कां अनेक स्तरों के रूप में पाया जाना।

→ गर्ती पर्णरन्ध्र (Sunken Stomata)-वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल हानि कम करने के लिए मरुस्थलीय पौधों की पत्तियों में गड्ढों में उपस्थित पर्णरन्ध्र।

→ स्टेनोथर्मल (Stenothermal)-ऐसे जीव जो तापमान के एक सीमित परास को सहन करने की क्षमता रखते हैं।

→ शुष्कोद्भिद पौधे (Xerophytes)-शुष्क आवासों में पाये जाने वाले पेड़-पौधे।

Prasanna
Last Updated on July 27, 2022, 2:24 p.m.
Published July 27, 2022