RBSE Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

Rajasthan Board RBSE Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से Important Questions and Answers. 

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RBSE Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. 
अत्यधिक पुराने पौधों, जानवरों या मानवों के अवशेष जो एक पत्थर के रूप में बदलकर प्रायः किसी चट्टान में । समा जाते हैं एवं लाखों वर्षों तक उसी रूप में पड़े रहते हैं, कहलाते हैं
(क) प्रजाति 
(ख) जीवाश्म
(ग) शैल । 
(घ) पंच ब्लेड। 
उत्तर:
(ख) जीवाश्म

RBSE Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से  

प्रश्न 2. 
जीवों का एक ऐसा समूह जिसके नर और मादा मिलकर बच्चे पैदा कर सकते हैं एवं बाद में भी यह क्रम जारी
रहता है। कहलाता है
(क) प्रजाति 
(ख) जीवाश्म
(ग) लक्षण 
(घ) होमो 
उत्तर:
(क) प्रजाति 

प्रश्न 3. 
हमें पहले होमिनिड प्राणियों के अस्तित्व का साक्ष्य मिलता है
(क) लगभग 66 लाख वर्ष पहले
(ख) 20 लाख वर्ष पहले 
(ग) 56 लाख वर्ष पहले
(घ) इनमें से कोई नहीं। 
उत्तर:
(ग) 56 लाख वर्ष पहले

प्रश्न 4. 
होमिनिडों की शाखाओं को कहा जाता है
(क) जीनस 
(ख) जीसस
(ग) होमो
(घ) लातिनी। 
उत्तर:
(क) जीनस 

प्रश्न 5. 
ओल्डुवई गोर्ज रिफ्ट घाटी, जहाँ आदिकालीन मानव के इतिहास के चिह्न पाए गये हैं, वह स्थित है
(क) दक्षिणी अमेरिका में 
(ख) एशिया में
(ग) ऑस्ट्रेलिया में 
(घ) पूर्वी अफ्रीका में। 
उत्तर:
(घ) पूर्वी अफ्रीका में। 

प्रश्न 6. 
होमोनिअंडरथल के जीवाश्म पाए गए हैं
(क) निअंडर घाटी में 
(ख) हाइडलबर्ग में 
(ग) होमो में 
(घ) ओल्डुवई गोर्ज में। 
उत्तर:
(क) निअंडर घाटी में 

प्रश्न 7. 
क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल के अनुसार
(क) मनुष्य की उत्पत्ति एक ही स्थान पर हुई है 
(ख) मनुष्य की उत्पत्ति अलग-अलग स्थानों पर हुई है (ग) उपर्युक्त  (क) एवं 
(ख) दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं। 
उत्तर:
(ख) दोनों

प्रश्न 8. 
आधुनिक मानव का प्रादुर्भाव 1.9 से 1.6 लाख वर्ष पूर्व हुआ, वह सम्बन्धित है
(क) आस्ट्रेलोपिथिकस से
(ख) होमो हैबिलिस से 
(ग) निअंडरथल से
(घ) होमोसैपियंस से। 
उत्तर:
(घ) होमोसैपियंस से। 

प्रश्न 9. 
पत्थर के औज़ार सम्भवतः सर्वप्रथम बनाए थे
(क) होमोसैपियंस ने
(ख) निअंडरथल ने 
(ग) आस्ट्रेलोपिथिकस ने
(घ) इनमें से कोई नहीं। 
उत्तर:
(ग) आस्ट्रेलोपिथिकस ने

प्रश्न 10. 
दफनाने की प्रथा का सबसे पहला साक्ष्य कब प्राप्त हुआ
(क) लगभग 3 लाख वर्ष पूर्व
(ख) लगभग 5 लाख वर्ष पूर्व 
(ग) लगभग 7 लाख वर्ष पूर्व
(घ) लगभग 1 लाख वर्ष पूर्व। 
उत्तर:
(क) लगभग 3 लाख वर्ष पूर्व

अतिलघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. 
पृथ्वी पर मानव के समान प्राणी कब प्रकट हुए? 
उत्तर:
लगभग 56 लाख वर्ष पूर्व । 

RBSE Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से  

प्रश्न 2. 
प्रारम्भिक मनुष्य किस प्रकार भोजन प्राप्त करते थे?
उत्तर:
प्रारम्भिक मनुष्य जानवरों का शिकार करके एवं पौधों से प्राप्त होने वाले उत्पादों को एकत्रित करके भोजन प्राप्त करते थे।

प्रश्न 3. 
आदिमानव के इतिहास की जानकारी किस प्रकार प्राप्त होती है?
उत्तर:
आदिमानव के इतिहास की जानकारी मानव के जीवाश्मों, पत्थर के औजारों एवं गुफाओं की चित्रकारियों की खोजों से प्राप्त होती है।

प्रश्न 4. 
जीवाश्म क्या होते हैं?
उत्तर:
जीवाश्म किसी बहुत पुराने पौधों, पशु या मानव के अवशेष होते हैं जो एक पत्थर के रूप में बदलकर चट्टानों में समा गए हैं।

प्रश्न 5. 
जीवाश्म किस प्रकार लाखों वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं? 
उत्तर:
जीवाश्म प्रायः चट्टानों में दबे रहते हैं जिस कारण से लाखों वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं। 

प्रश्न 6. 
हमें किस साक्ष्य से यह जानकारी मिलती है कि मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ है?
उत्तर:
मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ है, इस बात का साक्ष्य हमें मानव की उन प्रजातियों के जीवाश्मों से मिलता है जो अब लुप्त हो चुकी हैं।

प्रश्न 7. 
चार्ल्स डार्विन की मानव की उत्पत्ति सम्बन्धी पुस्तक का नाम बताइए। 
उत्तर:
ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज (On the Origin of Species). 

प्रश्न 8.
चार्ल्स डार्विन द्वारा लिखित पुस्तक ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज का प्रकाशन कब हुआ?
उत्तर:
24 नवम्बर, 1859 को। 

प्रश्न 9. 
मानव के विकास के सम्बन्ध में चार्ल्स डार्विन ने क्या तर्क दिया? 
उत्तर:
मानव का विकास बहुत समय पहले जानवरों से ही क्रमिक रूप में हुआ है। 

प्रश्न 10. 
प्राइमेट क्या हैं?
उत्तर:
प्राइमेट स्तनपायी प्राणियों के एक बड़े समूह के अन्तर्गत एक उपसमूह है जिसमें वानर, लंगूर एवं मानव सम्मिलित हैं।

प्रश्न 11. 
स्तनपायी प्राणियों की प्राइमेट श्रेणी का उद्भव कब व कहाँ हुआ? 
उत्तर:
360 लाख वर्ष पूर्व एशिया और अफ्रीका में। 

प्रश्न 12. 
होमिनॉइड क्या है? 
उत्तर:
होमिनॉइड प्राइमेट का एक उपवर्ग था जिसमें वानर सम्मिलित थे। 

प्रश्न 13. 
होमिनॉइड (Hominoids) का प्रादुर्भाव कब हुआ होगा? 
उत्तर:
लगभग 240 लाख वर्ष पहले। 

प्रश्न 14. 
होमिनिड का विकास किस प्राणी वर्ग से हुआ? 
उत्तर:
होमिनॉइड से। 

प्रश्न 15. 
होमिनिडों का उद्भव कहाँ हुआ था? 
उत्तर:
अफ्रीका में। 

RBSE Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से  

प्रश्न 16. 
किन साक्ष्यों से यह पता चलता है कि होमिनिडों का उद्भव अफ्रीका में हुआ था? 
उत्तर:

  1. अफ्रीका वानरों का समूह होमिनिडों से बहुत घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। 
  2. सबसे प्राचीन होमिनिड जीवाश्म पूर्वी अफ्रीका में पाए गए हैं। 

प्रश्न 17. 
सबसे प्राचीन होमिनिड किस वंश (जीनस) के हैं? 
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस वंश के। 

प्रश्न 18. 
होमिनिड का सम्बन्ध किस परिवार से है? 
उत्तर:
होमिनिड का सम्बन्ध 'होमोनिडेई' नामक परिवार से है, जिसमें सभी मानव प्राणी सम्मिलित हैं। 

प्रश्न 19. 
होमिनिड समह की कोई दो विशेषताएँ लिखिए। 
उत्तर:

  1. मस्तिष्क का बड़ा आकार 
  2. पैरों के बल सीधे खड़े होने की क्षमता।

प्रश्न 20. 
वैज्ञानिकों ने विभिन्न मानव प्रजातियों को उनका नाम देने के लिए किन-किन भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया है?
उत्तर:

  1. यूनानी,
  2. लातिनी। 

प्रश्न 21. 
आस्ट्रेलोपिथिकस के कौन-कौन से शारीरिक लक्षण उसे वृक्षों पर रहने के अनुकूल बनाते थे? 
उत्तर:

  1. आगे के अवयवों का लम्बा होना, 
  2. टखनों के घुमावदार जोड़,
  3. हाथों व पैरों की मुड़ी हुई हड्डियाँ। 

प्रश्न 22. 
होमो शब्द का क्या अर्थ है? 
उत्तर:
होमो लातिनी भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ है-आदमी। इसमें स्त्री व पुरुष दोनों सम्मिलित हैं। 

प्रश्न 23. 
होमो को किन-किन प्रजातियों में सम्मिलित किया गया है? 
उत्तर:

  1. होमो हैबिलिस,
  2. होमो एरेक्टस, 
  3. होमोसैपियंस। 

प्रश्न 24. 
होमो एरेक्टस के प्राचीनतम जीवाश्म किन-किन महाद्वीपों में पाये गये हैं? 
उत्तर:
होमो एरेक्टस के प्राचीनतम जीवाश्म अफ्रीका और एशिया दोनों महाद्वीपों में पाये गये हैं। 

प्रश्न 25. 
होमो हैबिलिस के जीवाश्म कहाँ से प्राप्त हुए हैं? 
उत्तर:

  1. ओमो (इथियोपिया) एवं ओल्डुवई गोर्ज (तंजानिया)। 

प्रश्न 26. 
ओल्डुवई गोर्ज क्या है?
उत्तर:
ओल्डुवई गोर्ज पूर्वी अफ्रीका का एक रिफ्ट घाटी क्षेत्र है, जहाँ आदिकालीन मानव के इतिहास के चिह्न पाए गए हैं।

प्रश्न 27.
ओल्डुवई गोर्ज की खोज कब व किसने की? 
उत्तर:
ओल्डुवई गोर्ज की खोज 17 जुलाई 1859 को एक जर्मन तितली संग्राहक ने की थी।

RBSE Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से  

प्रश्न 28. 
यूरोप में मिले सबसे पुराने जीवाश्म कौन-कौन से हैं? ये किस प्रजाति के हैं?
उत्तर:
यूरोप में मिले सबसे पुराने मानव जीवाश्म होमो हाइडलबर्गेसिस तथा होमो निअंडरथलैंसिस के हैं। ये दोनों ही होमोसैपियंस प्रजाति के हैं।

प्रश्न 29. 
आस्ट्रेलोपिथिकस व होमो के मस्तिष्क में क्या अन्तर था? 
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो का मस्तिष्क बड़ा होता था। 

प्रश्न 30. 
मस्तिष्क के आकार में वृद्धि होमो के किस लक्षण को दर्शाती है? 
उत्तर:
अधिक बुद्धिमत्ता एवं अच्छी स्मृति को। 

प्रश्न 31. 
आदिकालीन मानव किन-किन तरीकों से भोजन प्राप्त करता था? 
उत्तर:

  1. संग्रहण
  2. शिकार
  3. अपमार्जन
  4. मछली पकड़ना। 

प्रश्न 32. 
अपमार्जन क्या है?
उत्तर:
अपमार्जन से आशय त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करने से है। 

प्रश्न 33. 
आदिकालीन मानव की संग्रहण क्रिया में क्या-क्या सम्मिलित था?
उत्तर:
आदिकालीन मानव की संग्रहण क्रिया में पेड़-पौधों से मिलने वाले खाद्य-पदार्थों जैसे बीज, सब्जियाँ, बेर, फल व कंदमूल आदि को एकत्रित करना सम्मिलित था।

प्रश्न 34. 
योजनाबद्ध रूप से शिकार एवं माँस के लिए बड़े स्तनधारी जानवरों के वध के सबसे प्राचीन प्रमाण किन-किन स्थानों से प्राप्त हुए हैं?
उत्तर:
दक्षिणी इंग्लैण्ड में बॉक्सग्रोव से 5 लाख वर्ष पहले एवं जर्मनी में शोनिंजन से 4 लाख वर्ष पहले का प्रमाण ।

प्रश्न 35.
लगभग 7 से 5 लाख वर्ष पुराने शल्क उपकरण व हस्तकुठार कहाँ से प्राप्त हुए हैं?
उत्तर:
केन्या में स्थित किलोंबे व ओलोर्जेसाइली नामक खनन स्थलों से। 

प्रश्न 36. 
आदिकालीन मानव की गुफाओं एवं खुले निवास क्षेत्रों के कोई दो साक्ष्य बताइए।
उत्तर:

  1. लेज़रेट गुफा (दक्षिण फ्रांस) 
  2. टेरा अमाटा की झोंपड़ियाँ (दक्षिण फ्रांस के समुद्र तट पर)।

प्रश्न 37. 
पत्थर के औजारों के साथ-साथ आग में पकाई गई चिकनी मिट्टी और जली हुई हड्डियों के टुकड़ों के साक्ष्य कहाँ से प्राप्त हए हैं?
उत्तर:

  1. चेसोवांजा (केन्या)
  2. स्वार्टक्रान्स (दक्षिण अफ्रीका)।

प्रश्न 38. 
आदिकालीन गुफाओं में पाए गए चूल्हे किस बात के द्योतक हैं? 
उत्तर:
आग के नियंत्रित उपयोग के। 

प्रश्न 39. 
आदिकालीन मानव को आग के नियंत्रित प्रयोग से क्या-क्या लाभ थे? 
उत्तर:

  1. आग के नियंत्रित प्रयोग से गुफाओं में प्रकाश व उष्णता मिलती थी। 
  2. इससे भोजन भी पकाया जा सकता था। 

RBSE Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से  

प्रश्न 40. 
मानव में औजार बनाने की ऐसी कौन-सी विशेषता है जो वानरों में नहीं पायी जाती?
उत्तर:
शारीरिक एवं स्नायुतंत्रीय अनुकूलनों के कारण मानव हाथ का कुशलतापूर्वक प्रयोग कर सकता है परन्तु वानर ऐसा नहीं कर सकते हैं।

प्रश्न 41. 
पत्थर के औजार बनाने एवं उनका प्रयोग किए जाने का सबसे प्राचीनतम साक्ष्य किन-किन देशों के पुरास्थलों से प्राप्त हुआ है?
उत्तर:

  1. इथियोपिया
  2. केन्या। 

प्रश्न 42. 
किस आदिकालीन मानव ने सर्वप्रथम पत्थर के औजार बनाए थे? 
उत्तर:
सम्भवतः आस्ट्रेलोपिथिकस ने।

प्रश्न 43. 
किस आदिकालीन मानव के मस्तिष्क में ऐसी विशेषताएँ पायी गयीं, जिसके कारण उसके लिए बोलना संभव हुआ होगा?
उत्तर:
होमोहैबिलिस। 

प्रश्न 44. 
आपके विचार से आदिकालीन स्त्रियाँ कुछ विशेष प्रकार के औजार क्यों बनाती होंगी?
उत्तर:
आदिकालीन स्त्रियाँ संभवतः अपने एवं अपने बच्चों के लिए भोजन प्राप्ति हेतु कुछ विशेष प्रकार के औजार बनाती होंगी।

प्रश्न 45. 
सिले हुए कपड़ों का सबसे पहला साक्ष्य कब प्राप्त हुआ? उत्तर-लगभग 21000 वर्ष पूर्व।

प्रश्न 46. 
फ्रांस की किन-किन गुफाओं में प्रारम्भिक मानव द्वारा बनायी गयी जानवरों की सैकड़ों चित्रकारियाँ पायी गयी हैं।
उत्तर:
लैसकॉक्स और शोवे की गुफाओं में।

प्रश्न 47. 
स्वर तंत्र का विकास कब हुआ? इसका सम्बन्ध विशेष रूप से किससे रहा है?
उत्तर:
स्वर तंत्र का विकास लगभग 2 लाख वर्ष पहले हुआ था। इसका सम्बन्ध विशेष रूप से आधुनिक मानव से रहा है।

प्रश्न 48. 
आल्टामीरा क्या है? यह कहाँ स्थित है? 
उत्तर:
आल्टामीरा एक गुफा-स्थल है जो स्पेन में स्थित है। 

प्रश्न 49. 
आल्टामीरा की गुफा की खोज कब व किसने की? 
उत्तर:
नवम्बर 1879 में मार्सिलीनो ने। 

प्रश्न 50. 
आल्टामीरा की गुफा की छत पर क्या बना हुआ था? 
उत्तर:
आल्टामीरा की गुफा की छत पर विभिन्न जानवरों की चित्रकारियाँ बनी हुई थीं। 

प्रश्न 51. 
आल्टामीरा की गुफा की ओर मार्सिलीनो का ध्यान किसने दिलाया? 
उत्तर:
मार्सिलीनो की पुत्री मारिया ने। 

प्रश्न 52. 
स्पेन एवं फ्रांस की गुफाओं में किन-किन जानवरों की चित्रकारियाँ पाई गयी हैं? 
उत्तर:
गौरों, घोड़ों, साकिन, हिरनों, गैंडों, भालुओं, तेंदुओं, शेरों, लकड़बग्घों और उल्लुओं की। 

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प्रश्न 53. 
हादज़ा लोग जमीन एवं उसके संसाधनों पर अपना दावा क्यों नहीं करते?
उत्तर:
इसका कारण यह है कि वे चाहे जहाँ रह सकते हैं, पशुओं का शिकार करते हैं, कंदमूल और शहद इकट्ठा कर सकते हैं एवं पानी ले सकते हैं। इस सम्बन्ध में हादज़ा प्रदेश में उन पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है।

प्रश्न 54. 
हादज़ा जनसमूह का मुख्य भोजन क्या है? 
उत्तर:
हादज़ा लोगों का मुख्य भोजन जंगली साग-सब्जियाँ व कंदमूल फल हैं।

प्रश्न 55. 
विश्व का वह क्षेत्र कौन-सा है जहाँ आज से लगभग 10,000 वर्ष पूर्व खेती व पशुपालन प्रारम्भ हुआ था?
उत्तर:
भूमध्य सागर के तट से लेकर ईरान में जागरोस पर्वतमाला तक फैला हुआ क्षेत्र, जिसे फर्टाइल क्रीसेंट अर्थात उर्वर अर्धचन्द्राकार प्रदेश कहते हैं।  

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर (SA1)

प्रश्न 1. 
आज के मनुष्य से मिलते-जुलते मानव प्राणी धरातल पर कब अस्तित्व में आए? प्रारम्भ में मनुष्य ने भोजन किस प्रकार प्राप्त किया?
उत्तर:
आज के मनुष्य से मिलते-जुलते मानव प्राणी धरातल पर लगभग 160,000 वर्ष पहले अस्तित्व में आए। प्रारम्भ में मनुष्य अपना भोजन मरे हुए प्राणियों के शरीर में से माँस निकालकर, जानवरों का शिकार करके अथवा वृक्षों से कंद-मूल, फल और बीज आदि एकत्रित कर प्राप्त करता था।

प्रश्न 2. 
हम यह किस प्रकार कह सकते हैं कि मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ था?
उत्तर:
मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ, इस बात का साक्ष्य हमें मानव की उन प्रजातियों (Species) के जीवाश्मों से मिलता है, जो अब लुप्त हो चुकी हैं।

प्रश्न 3. 
प्रजाति अथवा स्पीशीज किसे. कहते हैं?
उत्तर:
प्रजाति जीवों का एक ऐसा समूह होता है जिसके नर और मादा मिलकर बच्चे उत्पन्न कर सकते हैं और उनके बच्चे भी आगे चलकर सन्तान उत्पन्न करने में समर्थ होते हैं। एक प्रजाति-विशेष के सदस्य दूसरी प्रजाति के सदस्यों से संभोग करके बच्चे पैदा नहीं कर सकते। प्रजाति को अंग्रेजी भाषा में स्पीशीज (Species) भी कहा जाता है।

प्रश्न 4. 
होमिनिडों का उदय अफ्रीका में हुआ था? इस सम्बन्ध में कौन-कौन से दो साक्ष्य दिए जा सकते हैं? 
उत्तर:
होमिनिडों का उदय अफ्रीका में हुआ था। इस सम्बन्ध में निम्नलिखित दो साक्ष्य दिये जा सकते हैं

  1. अफ़्रीकी वानरों का समूह होमिनिडों से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है।
  2. पूर्वी अफ्रीका में पाए गए आस्ट्रेलोपिथिकस वर्ग से सम्बन्धित आरम्भिक होमोनिड के जीवाश्म लगभग 56 लाख वर्ष पुराने हैं। इसके विपरीत अफ्रीका से बाहर पाए गए जीवाश्म 18 लाख वर्ष से अधिक पुराने नहीं हैं।

प्रश्न 5. 
होमिनिड समूह की कुछ विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
'होमिनिड' होमिनिडेई नामक परिवार के सदस्य होते हैं। इस परिवार में सभी रूपों के मानव प्राणी शामिल हैं। इस समूह की अनेक विशेषताएँ हैं; जैसे-'मस्तिष्क का बड़ा आकार, पैरों के बल सीधे खड़े होने की क्षमता, दो पैरों के बल चलना, हाथ की विशेष क्षमता जिससे वह औजार बना सकता था और उनका प्रयोग कर सकता था।

प्रश्न 6. 
आस्ट्रेलोपिथिकस एवं होमो के मध्य मुख्य अन्तर बताइए।
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस एवं होमो के मध्य मुख्य अन्तर मस्तिष्क के आकार, जबड़ों एवं दाँतों में है। आस्ट्रेलोपिथिकस के मस्तिष्क का आकार होमो की अपेक्षा बड़ा होता है, जबड़े अधिक भारी होते हैं एवं दाँत भी अधिक बड़े होते हैं।

प्रश्न 7. 
वैज्ञानिकों द्वारा समस्त मानव प्रजातियों के नाम किन भाषाओं से लिए गए हैं? एक उदाहरण दीजिए। 
उत्तर:
वैज्ञानिकों द्वारा समस्त मानव प्रजातियों के नाम लातिनी व यूनानी भाषाओं से लिए गए हैं। उदाहरण के रूप में, आस्ट्रेलोपिथिकस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के 'आस्ट्रल' शब्द जिसका अर्थ है 'दक्षिणी' तथा यूनानी भाषा के शब्द 'पिथिकस' से हुई है जिसका अर्थ है 'वानर'।

प्रश्न 8. 
आस्ट्रेलोपिथिकस मानव के आद्य रूप में वानर अवस्था के कौन-कौन से लक्षण पाए जाते थे? 
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस' मानत के आद्य रूप में वानर अवस्था के निम्नलिखित लक्षण पाए जाते थे

  1. होमो की तुलना में मस्तिष्क का अपेक्षाकृत छोटा होना। 
  2. पिछले दाँत बड़े होना। 
  3. उसमें सीधे खड़े होकर चलने की अधिक क्षमता न होना।

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प्रश्न 9. 
होमो शब्द का क्या अर्थ है? होमो के अवशेषों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है?
उत्तर:
होमो' एक लातिनी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है 'आदमी', इसमें स्त्री व पुरुष दोनों सम्मिलित हैं। वैज्ञानिकों ने होमो को उनकी विशेषताओं के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा है-

  1. होमो हैबिलिस (औजार बनाने वाले),
  2. होमो एरेक्टस (सीधे खड़े होकर पैरों पर चलने वाले)
  3. होमो सेपियंस (प्राज्ञ या चिंतनशील मनुष्य)।

प्रश्न 10. 
होमो हैबिलिस क्या हैं?
उत्तर:
होमोहैबिलिस 'होमो' की एक प्रजाति है। होमो हैबिलिस औजार बनाना जानते थे। ये 22 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में थे। ये बस्तियों के आसपास के प्रदेश में निवास करते थे। इनके जीवाश्म इथियोपिया के ओमो व तंजानिया के ओल्डुवई गोर्ज से प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 11.
होमो एरेक्टस के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
होमो एरेक्टस होमो की एक प्रजाति है। होमो एरेक्टस सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलता था। ये 18 लाख वर्ष पहले अफ्रीका, एशिया एवं यूरोप के मध्य अक्षांशीय क्षेत्रों में निवास करते थे। इनके जीवाश्म केन्या के कूबीफ़ोरा व पश्चिमी तुर्काना तक जावा के मोड़ जोकर्ता व संगीरन से प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 12. 
होमोसैपियन्स के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-होमोसैपियन्स 'होमो' की एक प्रजाति है। इसे बुद्धिमान अथवा चिंतनशील मानव कहा गया। इनका काल 1.9 से 1.6 लाख वर्ष पूर्व माना गया। ये अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, एशिया व यूरोप के मध्य अक्षांशों में पाए गए। होमोसैपियन्स को आधुनिक मानव भी कहा जाता है।

प्रश्न 13. 
उन जीवाश्मों के नाम बताइए जिनके नाम उन स्थानों के नाम से लिए गए हैं जहाँ वे प्रथम बार पाए गए।
अथवा 
कोई दो उदाहरण दीजिए जिसमें होमो के जीवाश्मों को उनकी प्राप्ति स्थल के नाम पर नामित किया गया है? 
उत्तर:

  1. जर्मनी के शहरं हाइडलबर्ग में पाए गए जीवाश्मों को होमो हाइडलबर्गेसिस के नाम से जाना गया। 
  2. जर्मनी की निअंडर घाटी में पाए गए जीवाश्म होमो निअंडरथलैंसिस के नाम से जाने गए।

प्रश्न 14. 
यूरोप में पाए गए प्रारम्भिक जीवाश्मों के नाम एवं वितरण बताइए। वे कब व कहाँ अचानक विलुप्त हो गए?
उत्तर:
यूरोप में पाए गए प्रारम्भिक जीवाश्म होमो हाइडलबर्गेसिस एवं होमो निअंडरथलैंसिस हैं। होमो हाइडलबर्गेसिस (8 लाख वर्ष से 1 लाख वर्ष पूर्व) के जीवाश्म अफ्रीका, एशिया एवं यूरोप में पाए गए हैं। होमो निअंडरथलैंसिस (1,30,000 से 35,000 वर्ष पूर्व) के जीवाश्म यूरोप, पश्चिमी और मध्य एशिया में पाये गये हैं। ये पश्चिमी यूरोप में लगभग 35,000 वर्ष पहले अचानक विलुप्त हो गए।  

प्रश्न 15. 
आधुनिक मानव के उत्पत्ति स्थल के विकास में प्रचलित मत कौन-कौन से हैं?
अथवा 
आधुनिक मानव का उद्भव कहाँ हुआ? 
उत्तर:
आधुनिक मानव के उत्पत्ति स्थल के विषय में दो मत प्रचलित हैं, जो परस्पर विपरीत हैं

  1. क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल-इसके अनुसार अनेक क्षेत्रों में अलग-अलग मनुष्यों की उत्पत्ति हुई। 
  2. प्रतिस्थापन मॉडल-इसके अनुसार मनुष्य का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ। 

प्रश्न 16. 
आदिकालीन मानव की अपमार्जन व रसदखोरी की क्रिया का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
आदिकालीन मानव अपमार्जन या रसदखोरी के द्वारा उन जानवरों के शवों से माँस-मज्जा खुरचकर निकालते थे जो जानवर अपने आप मर जाते व अथवा किन्हीं अन्य हिंसक पशुओं द्वारा मार दिए जाते थे।

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प्रश्न 17. 
पेड़ों पर रहने वाले तथा गुफाओं एवं झोंपड़ियों में रहने वाले होमिनिडों के जीवन में क्या अन्तर था?
उत्तर:

  1. पेड़ों पर रहने वाले होमिनिड वर्षा, आँधी व तूफान आदि से सुरक्षित नहीं थे जबकि गुफाओं व झोंपड़ियों में रहने वाले होमिनिड इनसे सुरक्षित थे।
  2. पेड़ों पर रहने वाले होमिनिड आग का नियन्त्रित उपयोग करना नहीं जानते थे जबकि गुफाओं व झोंपड़ियों में रहने वाले होमिनिड इससे पूर्णतः परिचित थे।

प्रश्न 18. 
आल्टामीरा क्या है? यह क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर:
आल्टामीरा एक गुफा-स्थल है जो स्पेन नामक एक यूरोपीय देश में स्थित है। इस गुफा की छत पर जानवरों के अनेक चित्र उत्कीर्ण हैं। इन चित्रों में रंग की अपेक्षा किसी प्रकार की लेई (पेस्ट) का प्रयोग किया गया था।

प्रश्न 19.
फ्रांस एवं स्पेन की किन गुफाओं में आदिकालीन चित्रकारियाँ पाई गई हैं? इन चित्रकारियों में किन-किन जानवरों के चित्र सम्मिलित हैं?
उत्तर:
फ्रांस में स्थित लैसकॉक्स एवं शोवे की गुफाओं में तथा स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफाओं में जानवरों की अनेक चित्रकारियाँ पाई गई हैं। ये चित्रकारियाँ 30,000 से 12,000 वर्ष पहले बनायी गयी थीं। इनमें गौरों (जंगली भैंसों), घोड़ों, साकिन, गैंडों, हिरनों, शेरों, भालुओं, तेंदुओं, लकड़बग्घों और उल्लुओं आदि के चित्र सम्मिलित हैं।

प्रश्न 20. 
हादज़ा लोग कौन हैं? ये लोग कहाँ निवास करते हैं?
उत्तर:
हादज़ा शिकारियों एवं संग्राहकों का एक छोटा समूह है जो अफ्रीका महाद्वीप में स्थित 'लेक इयासी' नामक एक खारे पानी की विभ्रंश (रिफ्ट) घाटी में बनी झील के आसपास रहते हैं। ये लोग शिविरों में रहते हैं। उनके शिविर पेड़ों अथवा चट्टानों के बीच बने होते हैं।

प्रश्न 21. 
हादज़ा जनसमूह के लोगों का भोजन किस प्रकार का होता है?
उत्तर:
हादज़ा लोगों के क्षेत्र में शिकार के लिए असीमित मात्रा में पशु उपलब्ध होने के उपरांत भी ये लोग अपने भोजन के लिए मुख्य रूप से जंगली साग-सब्जियों पर ही निर्भर रहते हैं। संभवतः इनके भोजन का 80 प्रतिशत तक भाग मुख्य रूप से वनस्पतिजन्य होता है और शेष 20 प्रतिशत भाग माँस और शहद से पूरा किया जाता है।

प्रश्न 22. 
हादज़ा लोगों के शिविरों की स्थिति एवं आकार में मौसम के अनुसार परिवर्तन क्यों होता रहता है?
उत्तर:
हादज़ा लोगों के शिविरों की स्थिति एवं आकार जल की उपलब्धता पर निर्भर करता है। नमी के मौसम में इन लोगों के शिविर सामान्यतया छोटे और दूर-दूर तक फैले हुए होते हैं। सूखे के मौसम में इनके शिविर जल के स्रोतों के आसपास बड़े और घने बसे होते हैं। 

प्रश्न 23. 
संजातिवृत्त क्या है? अथवा नृवंशविज्ञान से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
संजातिवृत्त अथवा नृवंशविज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसमें समकालीन नृजातीय समूहों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया जाता है। इसमें उनके रहन-सहन, खान-पान, आजीविका के साधन, प्रौद्योगिकी आदि का पता लगाया जाता है एवं समाज में स्त्री-पुरुष की भूमिका, कर्मकांड, रीति-रिवाज, सामाजिक रूढ़ियों एवं राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 24. 
मानव इतिहास की एक युगान्तकारी घटना क्या है?
उत्तर:
10,000 से 4,500 वर्ष पहले तक दुनिया के भिन्न-भिन्न भागों में रहने वाले लोगों ने कुछ जंगली पौधों को अपने उपयोग के लिए उगाना और जानवरों को पालतू बनाना सीख लिया। इसके फलस्वरूप खेती और पशुचारण कार्य उनकी जीवन पद्धति का एक अंग बन गया। इस प्रकार मानव द्वारा खेती करना व पशुपालन करना सीख जाने की घटना मानव इतिहास की एक युगांतकारी घटना है।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर (SA2)

प्रश्न 1. 
"मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ है।" इस कथन को सप्रमाण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वैज्ञानिकों के मतानुसार मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ है। इस धरातल पर मानव की एक के पश्चात् एक कई प्रजातियाँ उत्पन्न हुईं और लुप्त हो गयीं। लाखों वर्षों तक चली इस प्रक्रिया के पश्चात् आधुनिक मानव का विकसित रूप सामने आया। इस बात का प्रमाण हमें मानव की उन प्रजातियों के अवशेषों अथवा जीवाश्मों से प्राप्त होता है जो अब लुप्त हो चुकी हैं। उनके शारीरिक लक्षणों के आधार पर मानव को भिन्न-भिन्न प्रजातियों में बाँटा गया है। जीवाश्मों का काल निर्धारण प्रत्यक्ष रासायनिक विश्लेषण द्वारा अथवा उन परतों का अप्रत्यक्ष रूप से काल निर्धारण करके किया गया है जिनमें जीवाश्म मिलते हैं। चार्ल्स डार्विन ने भी अपनी पुस्तक 'ऑन दि ओरिजिन ऑफ स्पीशीज' में भी यह बताया है कि मानव बहुत समय पहले जानवरों से ही क्रमिक रूप से विकसित होकर अपने वर्तमान रूप में आया है। इससे स्पष्ट होता है कि मानव की ये प्रजातियाँ एक क्रम से अलग-अलग काल में जीवित रहीं। इनके शारीरिक लक्षणों में परिवर्तन होता रहा और एक लम्बे समय पश्चात् आज का मानव अस्तित्व में आया।

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प्रश्न 2. 
प्राइमेट से क्या आशय है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
प्राइमेट-यह स्तनधारी प्राणियों के एक अधिक बड़े समूह के अन्तर्गत एक उपसमूह है। इस वर्ग में वानर, लंगूर एवं मानव आदि सम्मिलित हैं। लगभग 360 लाख वर्ष पूर्व एशिया व अफ्रीका में स्तनधारी प्राणियों की 'प्राइमेट' नामक श्रेणी का उद्भव हुआ। प्रमुख विशेषताएँ-प्राइमेट्स की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है

  1. इनके शरीर पर बाल होते हैं। 
  2. इनका गर्भकाल अपेक्षाकृत लम्बा होता है। 
  3. ये बच्चों को जन्म देते हैं। 
  4. माताओं में बच्चों को दूध पिलाने के लिए ग्रन्थियाँ होती हैं। 
  5. इन प्राणियों के दाँत भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं।


प्रश्न 3.
मिनिड प्राणियों का विकास किससे हुआ? होमिनिड व होमिनॉइड में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
होमिनिड प्राणियों का विकास होमिनॉइड उपसमूह से हुआ है। इन दोनों में निम्नलिखित अन्तर पाये जाते हैं

  1. होमिनॉइड के मस्तिष्क का आकार होमिनिड की तुलना में छोटा होता था।
  2. होमिनॉइड चौपाये होते थे और चारों पैरों के बल चलते थे परन्तु उनके शरीर का अगला हिस्सा और अगले दोनों पैर लचकदार होते थे। इसके विपरीत होमिनिड सीधे खड़े होकर पिछले दो पैरों के बल चलते थे।
  3. इन दोनों के हाथों में भी बहुत अन्तर पाया जाता था। होमिनिड के हाथ विशेष प्रकार के होते थे जिनकी सहायता से वे औजारों का निर्माण कर सकते थे एवं उनका प्रयोग कर सकते थे जबकि होमिनॉइड के हाथों की रचना इस प्रकार की नहीं होती थी।

प्रश्न 4. 
उन साक्ष्यों का उल्लेख कीजिए जिससे यह पता चलता है कि होमिनिड प्राणियों का उद्भव अफ्रीका में हुआ था?
उत्तर:
दो प्रकार के साक्ष्यों से यह पता चलता है कि प्रारम्भिक आदिमानव ‘होमिनिड' का उद्भव अफ्रीका महाद्वीप में हुआ था। पहला साक्ष्य यह है कि अफ्रीकी वानरों. (एप) का समूह होमिनिडों से बहुत गहराई से जुड़ा है। दूसरा, सबसे प्राचीन होमिनिड जीवाश्म (आस्ट्रेलोपिथिकस वंश) पूर्वी अफ्रीकी में पाये गये हैं और उनका समय लगभग 56 लाख वर्ष पहले का माना जाता है। इसके विपरीत, अफ्रीका महाद्वीप से पाये गये होमिनिडों के जीवाश्म 18 लाख वर्ष से अधिक पुराने नहीं हैं।

प्रश्न 5. 
प्रारम्भिक मानव को आस्ट्रेलोपिथिकस नाम दिए जाने के क्या कारण हैं? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
प्रारम्भिक मानव को आस्ट्रेलोपिथिकस नाम इसलिए दिया गया है कि इसके अनेक लक्षण वानर से मिलते-जुलते थे। इन लक्षणों में होमो की तुलना में अपेक्षाकृत छोटे आकार का मस्तिष्क, लम्बे पिछले दाँत एवं हाथों की दक्षता का सीमित होना था। उसमें सीधे खड़े होकर चलने की क्षमता अधिक नहीं थी क्योंकि वह अभी भी अपना अधिकांश समय वृक्षों पर बिताता था। उसके शारीरिक लक्षण वृक्षों पर जीवन बिताने के अनुकूल थे। उदाहरण के लिए, लम्बे अग्र बाजू, हाथों व पैरों की हड्डियों का मुड़ा होना व टखनों के जोड़ों का घुमावदार होना आदि। आस्ट्रेलोपिथिकस जैसे-जैसे लम्बी दूरियों तक चलना एवं औजार बनाना सीखता गया, उसमें अनेक विशिष्ट मानवीय लक्षण विकसित होते गये।

प्रश्न 6. 
आदिकालीन मानव के अवशेष किस प्रकार विभिन्न प्रजातियों में वर्गीकृत किए गए? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
आदिकालीन मानवों के अवशेषों को विभिन्न जातियों में एक-दूसरे से हड्डियों की रचना के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। उदाहरण के रूप में; आदिकालीन मानव की प्रजातियाँ उनकी खोपड़ियों के आकार एवं विशिष्ट जबड़ों के आधार पर बाँटी गयीं। इन सभी लक्षणों का उद्विकास सकारात्मक प्रतिपुष्टि अवस्था के साथ हुआ। उदाहरण के लिए; दो पैरों पर खड़े होकर चलने की क्षमता के कारण मानव के हाथ बच्चों व वस्तुओं को लाने-ले जाने के लिए स्वतन्त्र हो गये। जैसे-जैसे हाथों का प्रयोग अत्यधिक बढ़ने लगा वैसे-वैसे मानव सीधा खड़ा होकर चलने लगा। इसके अतिरिक्त हाथों के स्वतंत्र होने से वह उनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से करने लगा। दो पैरों पर चलने के साक्ष्य हमें लेतोली (तंजानिया) से प्राप्त होमिनिड के जीवाश्मों से मिला है। इथियोपिया के हादार से हमें मानव अंगों की हड्डियों के जीवाश्म मिले हैं जो कि मानव के दो पैरों पर चलने के स्पष्ट साक्ष्य हैं।

प्रश्न 7. 
प्रारम्भिक मानव को दो पैरों पर खड़े होकर चलने की क्षमता के कारण क्या लाभ प्राप्त हुए? संक्षेप में बताइए।
अथवा 
आदिकालीन मानव-प्रतिरूप को दो पैरों पर चलने से क्या लाभ प्राप्त हुए? दो पैरों पर चलने वाले मानव के प्रारम्भिक प्रत्यक्ष साक्ष्य कहाँ से प्राप्त हुए हैं?
उत्तर:
आरम्भिक मानव के दो पैरों पर खड़े होकर चलने की क्षमता के कारण उसके हाथ कार्यमुक्त हो गए। वह अब हाथों का प्रयोग बच्चों को उठाने, खिलाने, औजार बनाने अथवा आवश्यक वस्तुओं को उठाने में कर सकता था। हाथों के लगातार प्रयोग से मानव की दो पैरों पर खड़े होकर चलने की कुशलता में धीरे-धीरे वृद्धि होती गयी। इसके अतिरिक्त चार पैरों की बजाय दो पैरों पर चलने से उसकी शारीरिक ऊर्जा भी कम खर्च होने लगी। लेकिन दौड़ते समय यह लाभ विपरीत हो गया। अब दौड़ते समय उसे अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती थी। दो पैरों पर चलने वाले मानव के प्रारम्भिक प्रत्यक्ष प्रमाण लेतोली (तंजानिया) व हादार (इथियोपिया) से प्राप्त हुए हैं।

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प्रश्न 8. 
हिमयुग से मानव के विकास की प्रक्रिया में क्या व कैसे परिवर्तन आया? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
लगभग 25 लाख वर्ष पहले आये हिमयुग से पृथ्वी का एक बड़ा भाग बर्फ से ढंक गया जिस कारण जलवायु एवं वनस्पति की स्थिति में बड़े-बड़े परिवर्तन देखने को मिले। धरातल पर तापमान एवं वर्षा में कमी आ गयी जिस कारण वन कम हो गए। वहीं दूसरी ओर घास के मैदानों के क्षेत्रफल में वृद्धि हो गयी। इन समस्त घटनाओं के फलस्वरूप आस्ट्रेलोपिथिकस (वानर अवस्था वाले प्राचीन मानव) के प्रारम्भिक रूप धीरे-धीरे लुप्त हो गए। ये मानव जंगलों में रहते थे। आस्ट्रेलोपिथिकस मानव प्रजाति का स्थान अन्य मानव प्रजातियों ने ले लिया जो सूखी परिस्थितियों में आराम से निवास कर सकती थीं। ऐसी प्रजातियों में होमो वंश के सबसे पुराने प्रतिनिधि सम्मिलित थे। 

प्रश्न 9. 
होमो क्या है? इसकी विभिन्न प्रजातियों के जीवाश्म कहाँ से प्राप्त हुए हैं?
अथवा 
होमो को उनकी प्रजातियों की विशेषताओं के आधार पर कौन-कौन से नाम दिए गए हैं? संक्षेप में बताइए।
अथवा 
होमो की विभिन्न प्रजातियों के नाम एवं उनके आवास स्थलों के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा 
होमो का क्या अर्थ है? इन्हें कौन-कौन सी प्रजातियों में सम्मिलित किया गया है?
उत्तर:
'होमो' लातिनी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है आदमी'। इसमें स्त्री व पुरुष दोनों सम्मिलित हैं। वैज्ञानिकों ने 'होमो' को कई प्रजातियों में सम्मिलित किया है। इन प्रजातियों को उनकी विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग नाम प्रदान किए गए हैं। इस प्रजाति के जीवाश्मों को निम्नांकित तीन भागों में बाँटा गया है

  1. होमो हैबिलिस-औजार बनाने वाली मानव प्रजाति। 
  2. होमो एरेक्टस-सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलने वाली मानव प्रजाति। 
  3. होमो सेपियंस-प्राज्ञ अर्थात् बुद्धिमान मनुष्य अथवा चिंतनशील मानव प्रजाति।

होमो हैबिलिस के प्राचीनतम जीवाश्म अफ्रीका के ओमो (इथियोपिया) एवं ओल्डुवई गोर्ज (तंजानिया) से प्राप्त हुए हैं जबकि होमो एरेक्टस के जीवाश्म अफ्रीका व एशिया दोनों महाद्वीपों के कूबीफ़ोरा व पश्चिमी तुर्काना (केन्या) एवं मोड़ जोकर्ता व संगीरन (जावा-इण्डोनेशिया) में पाए गए हैं। 

प्रश्न 10. 
आस्ट्रेलोपिथिकस एवं होमो के मध्य क्या अन्तर थे? ये अन्तर क्या दर्शाते हैं?
अथवा 
आस्ट्रेलोपिथिकस व होमो के मध्य शारीरिक अन्तरों पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस एवं होमो के मध्य निम्नलिखित अन्तर थे

  1. आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो का मस्तिष्क बड़ा होता था।
  2.  होमो के जबड़े बाहर की ओर कम निकले हुए होते थे। 
  3. होमो के दाँत आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में अपेक्षाकृत छोटे होते थे। 
  4. आस्ट्रेलोपिथिकस का समय 56 लाख वर्ष पूर्व था जबकि होमो का समय 25 से 20 लाख वर्ष पूर्व था।

आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो के मस्तिष्क का बड़ा आकार उसके बुद्धिमान होने एवं उसकी तीव्र स्मृति को दर्शाता है। जबड़ों एवं दाँतों में हुआ परिवर्तन सम्भवतः उनके (होमो) खान-पान में हुई भिन्नता से सम्बन्धित प्रतीत होता है। 

प्रश्न 11. 
आधुनिक मानव के उद्भव के प्रतिस्थापन मॉडल का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा 
मानव विकास के प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार होमोसैपियंस (बुद्धिमान मनुष्य) का उद्भव कहाँ हुआ?
उत्तर:
प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मानव का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ। यह तर्क आधुनिक मानव (होमोसैपियंस) में दिखाई देने वाले लक्षणों की क्षेत्रीय विभिन्नताओं पर आधारित है कि मानव एक ही स्थान पर उत्पन्न हुआ। इस मत के समर्थक विद्वानों का तर्क है कि आधुनिक मानव में पाई जाने वाली अत्यधिक समानताएँ उस जनसंख्या के वंश के कारण हैं जो एक ही क्षेत्र में (अफ्रीका) में उत्पन्न हुई। यहाँ से इनका प्रसार अन्य स्थानों को हुआ। इस मत के समर्थकों का यह भी कहना है कि आधुनिक मानव में जो शारीरिक अन्तर दिखाई देते हैं वे लोगों द्वारा अनुकूलन के कारण उत्पन्न हुए हैं। यह अनुकूलन हजारों वर्षों से अधिक काल में लोगों के किसी विशेष स्थान पर जाने एवं वहाँ स्थाई रूप से बस जाने के कारण हुआ।

प्रश्न 12. 
आधुनिक मानव के विकास के क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल के अनुसार होमोसैपियन्स का विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक मानव के रूप में उद्विकास हुआ। यही कारण है कि आधुनिक मानव के लक्षणों एवं विशेषताओं में विश्व के विभिन्न भागों में अन्तर पाया जाता है। यह तर्क आधुनिक मानव के लक्षणों की विभिन्नताओं पर आधारित है। इस मत का समर्थन करने वाले विद्वानों का तर्क है कि लोगों में ये असमानताएँ एक ही क्षेत्र में पहले से मौजूद होमो एरेक्टस व होमो हाइडलबर्गेसिस समुदायों के मध्य पायी जाने वाली भिन्नताओं के कारण दिखाई देती हैं।

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प्रश्न 13. 
आदिकालीन मानव होमिनिड के खाद्य स्रोतों के विषय में बताइए।
उत्तर:
ऐसा माना जाता है कि आदिकालीन मानव होमिनिड अपमार्जन अथवा रसदखोरी के माध्यम से मृत जानवरों के शरीर से माँस-मज्जा प्राप्त करते होंगे। ये जानवर या तो प्राकृतिक रूप से मर जाते होंगे अथवा अन्य हिंसक जानवरों के द्वारा मार दिए जाते होंगे। यह भी सम्भव है कि छोटे-छोटे स्तनधारी जानवरों; जैसे-चूहे, छछूदर तथा पक्षी एवं उनके अंडे, सरीसृप तथा कीड़े-मकोड़े भी आदिकालीन होमिनिड के द्वारा खाए जाते होंगे। 

प्रश्न 14. 
मानव द्वारा आखेट कब प्रारम्भ हुआ? इनके आखेट स्थलों का भी उल्लेख कीजिए।
अथवा 
मानव द्वारा नियोजित ढंग से जानवरों का शिकार कब प्रारम्भ हुआ? उसके शिकार स्थलों के बारे में बताइए।
अथवा 
"आदिकालीन मानव कुछ स्थलों को सोच-समझकर शिकार के लिए चुनता था।" सप्रमाण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मानव द्वारा आखेट (शिकार) लगभग 5 लाख वर्ष पूर्व प्रारम्भ हुआ था। नियोजित ढंग से जानबूझकर शिकार तथा विशाल स्तनधारी जानवरों के वध के प्रमाण दक्षिणी इंग्लैण्ड के बॉक्सग्रोव में 5 लाख वर्ष पहले के तथा जर्मनी के शोनिंजन से 4 लाख वर्ष पहले के मिले हैं। लगभग 35,000 वर्ष पहले नियोजित शिकार के साक्ष्य यूरोप के कुछ स्थलों से प्राप्त हुए हैं। इस काल में मानव योजनाबद्ध ढंग से जानवरों के शिकार के लिए कुछ स्थलों का सोच-समझकर चुनाव करता था। ऐसा ही एक स्थल चेक गणराज्य में दोलनी वेस्तोनाइस था, जो एक नदी के पास स्थित था। रेडियर व घोड़ा जैसे स्थान बदलने वाले जानवर बड़ी संख्या में पतझड़ और बसंत के मौसम में उस नदी के पार जाते थे, तब इनका बड़ी संख्या में शिकार किया जाता था। समय की शुरुआत से 29) इन स्थानों के चुनाव से साफ पता चलता है कि आदिकालीन मानव इन जानवरों के आवागमन के बारे में जानकारी रखते होंगे। उन्हें बड़े स्तर पर तेजी से जानवरों के मारने के साधनों के बारे में भी अच्छा ज्ञान होगा।

प्रश्न 15. 
आदिकालीन मानव के रहन-सहन के बारे में किन-किन साक्ष्यों से जानकारी मिलती है? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
आदिकालीन मानव के रहन-सहन के बारे में अनेक साक्ष्यों से जानकारी मिलती है। इस सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने का एक तरीका है-उनके द्वारा निर्मित शिल्पकृतियों के फैलाव की जाँच करना। उदाहरण के रूप में, केन्या में किलोंबे और ओलोर्जेसाइली के खनन स्थलों से हजारों की संख्या में लगभग 7 से 5 लाख वर्ष पुराने शल्क उपकरण एवं हस्त कुठार प्राप्त हुए हैं। इतनी विशाल मात्रा में एक ही स्थान पर उपकरण प्राप्त होने का मुख्य कारण यह रहा होगा कि जिन स्थानों पर खाद्य प्राप्ति के संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थे, वहाँ लोग बार-बार आते रहे होंगे। ऐसे क्षेत्रों में लोग शिल्पकृतियों सहित अपने क्रियाकलापों के अनेक चिह्न छोड़ जाते होंगे।

प्रश्न 16. 
उन साक्ष्यों का उल्लेख कीजिए जब प्रारंभिक मानव ने गुफाओं तथा खुले क्षेत्रों में आवास का प्रचलन शुरू किया।
अथवा 
"प्रारंभिक मानव गुफाओं एवं खुले निवास क्षेत्रों में रहता था।" सप्रमाण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
4 लाख से 1.25 लाख वर्ष पहले गुफाओं तथा खुले निवास क्षेत्रों का प्रचलन प्रारंभ हो गया। इसके अनेक साक्ष्य यूरोप के कई पुरास्थलों में मिलते हैं, जो निम्न प्रकार से हैं
(i) दक्षिणी फ्रांस की लेज़रेट गुफा में एक 12x4 मीटर आकार का एक शरण स्थल प्राप्त हुआ है जो गुफा की दीवार से सटाकर बनाया गया था। इस शरण स्थल के अन्दर दो चूल्हे भी मिले हैं, इसके अलावा अनेक प्रकार की खाद्य सामग्रियों के साधन; जैसे-फलों, वनस्पतियों, काष्ठफलों, बीजों, पक्षियों के अण्डों तथा मीठे जल की मछलियों (जैसे- ट्राउट, पर्च व कार्प) के भी साक्ष्य मिले हैं।

(ii) फ्रांस के समुद्र तट पर स्थित टेरा अमाटा नामक स्थान पर घास-फूस एवं लकड़ी की छत वाली कच्ची कमजोर झोपड़ियों के साक्ष्य मिले हैं। ऐसा माना जाता है कि आदिकालीन मानव इन झोपड़ियों का प्रयोग अल्पकालीन मौसमी प्रवास के लिए करता था।

(iii) केन्या में चेसोवांजा और दक्षिण अफ्रीका में टिक्रान्स में पत्थर के औजारों के साथ-साथ आग में पकाई गयी चिकनी मिट्टी और जली हुई हड्डियों के टुकड़े मिले हैं जो 14 लाख से 10 लाख वर्ष पुराने हैं। 

प्रश्न 17. 
चूल्हे के उपयोग से आदिमानव को किस प्रकार का लाभ हुआ होगा?
अथवा 
आदिमानव द्वारा चूल्हे के उपयोग से किसका संकेत मिलता है?
उत्तर:
चूल्हे, आग के नियंत्रित प्रयोग के द्योतक हैं। अतः चूल्हों का उपयोग इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आदिमानव द्वारा आग का नियंत्रित उपयोग किया जाता रहा होगा। इससे अनेक लाभ हुए होंगे; जैसे-नियंत्रित आग का प्रयोग गुफाओं के अन्दर प्रकाश और उष्णता मिलने में मददगार होता था और इससे भोजन भी पकाया जा सकता था। अलावा लकड़ी को कठोर करने में आग का इस्तेमाल होता था। जैसे कि भाले की नोंक बनाने में। शल्क निकालकर औजार बनाने में भी उष्णता उपयोगी होती थी। साथ ही आग का उपयोग खतरनाक जानवरों को भगाने में भी किया जाता था।

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प्रश्न 18. 
लगभग 35,000 वर्ष पहले जानवरों को मारने के तरीकों में हम क्या सुधार पाते हैं? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लगभग 35,000 वर्ष पहले जानवरों को मारने के लिए बनाये गये औजारों की तकनीक में हम सुधार पाते हैं। इस बात का प्रमाण यह है कि फेंककर मारने वाले भाले, धनुष व तीर जैसे नवीन किस्म के औजार बनाये जाने लगे। विभिन्न औजारों से माँस को साफ किया जाने लगा। उसमें से हड्डियाँ निकाल दी जाती थीं और फिर उसे सुखाकर, हल्का सेंकते हुए सुरक्षित रख लिया जाता था। इस प्रकार सुरक्षित रखे खाद्य को बाद में खाया जा सकता था। समूरदार (फर) वाले जानवरों को फंसाने के लिए नये औजारों का प्रयोग प्रारम्भ हुआ। सुई का आविष्कार हुआ जिससे जानवरों की रोएँदार खाल को सिलकर वस्त्र की तरह प्रयोग किया जाने लगा। उदाहरण के लिए; सिले हुए कपड़ों का साक्ष्य लगभग 21,000 वर्ष पहले का प्राप्त हुआ है। पंच ब्लेड तकनीक के द्वारा छैनी (रुखानी) की तरह के छोटे-छोटे औजार बनाये जाने लगे। इनकी सहायता से हड्डियों, सींगों, हाथी दाँत तथा लकड़ी आदि पर नक्काशी सम्भव हुई।

प्रश्न 19. 
पंच ब्लेड तकनीक क्या है? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदिमानव द्वारा औजार निर्माण की वह विधि जिसके द्वारा रुखानी जैसे औजार बनाए जाने लगे। इसकी सहायता से हड्डियों, सींगों, हाथी दाँत तथा लकड़ी पर नक्काशी की जाने लगी। इसे पंच ब्लेड तकनीक कहा गया। इसका वर्णन निम्नानुसार है

  1. इस तकनीक द्वारा एक बड़े पत्थर के ऊपरी सिरे को पत्थर के हथौड़े की सहायता से हटाया जाता है। 
  2. इससे एक चपटी सतह तैयार की जाती है जिसे प्रहार पंच अर्थात् घन कहा जाता है। 
  3. इसके पश्चात् इस पर हड्डी या सींग से बने हुए पंच और हथौड़े की सहायता से प्रहार किया जाता है।
  4. इससे एक नुकीली पट्टी बन जाती है जिसका चाकू की तरह प्रयोग किया जा सकता है अथवा उनसे एक प्रकार की छैनियाँ बन जाती हैं जिनसे हड्डी, सींग, हाथी दाँत या लकड़ी पर नक्काशी की जा सकती है। 

प्रश्न 20. 
भाषा के विकास के बारे में कौन-कौन से मत प्रचलन में हैं? बताइए।
अथवा 
मानव में भाषा का विकास किस प्रकार हुआ? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
हमारे धरातल पर जीवित प्राणियों में से मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसके पास अपनी स्वयं की भाषा है। भाषा के विकास के विषय में कई प्रकार के मत प्रचलित हैं, जो निम्नलिखित हैं

  1. होमिनिड भाषा में हाव-भाव (अंग विशेष) या हाथों का संचालन (हिलाना) सम्मिलित था।
  2. उच्चारित अथवा बोली जाने वाली भाषा से पहले गाने या गुनगुनाने जैसे मौखिक या अशाब्दिक संचार का प्रयोग होता था।
  3. मानव भाषा की शुरुआत सम्भवतः आह्वान या बुलावों की क्रिया से हुई थी जैसा कि प्राइमेट्स (नर-वानरों) में देखा गया। विकास की प्रारम्भिक अवस्था में मानव बोलने में बहुत ही कम ध्वनियों का प्रयोग करता होगा। यही ध्वनियाँ धीरे-धीरे भाषा के रूप में विकसित हो गयी होंगी।

प्रश्न 21. 
उच्चरित अर्थात् बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति कब हुई? संक्षेप में बताइए।
अथवा
उच्चरित भाषा की उत्पत्ति के सन्दर्भ में कौन-कौन से अनुमान लगाये जा सकते हैं? 
उत्तर:
उच्चरित भाषा अर्थात् बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति के सन्दर्भ में निम्नलिखित अनुमान लगाये जा सकते हैं

  1. ऐसा माना जाता है कि होमोहैबिलिस के मस्तिष्क में कुछ ऐसी विशेषताएँ थीं जिनके कारण उसके लिए बोलना सम्भव हुआ होगा। सम्भवतः भाषा का विकास सर्वप्रथम 20 लाख वर्ष पूर्व प्रारम्भ हुआ होगा।
  2. मस्तिष्क में हुए परिवर्तनों के अतिरिक्त मानव में स्वर तंत्र का विकास भी महत्वपूर्ण था। स्वर तंत्र का विकास लगभग 2 लाख वर्ष पूर्व हुआ था। इसका सम्बन्ध विशेष रूप से आधुनिक मानव से रहा है।
  3. एक अन्य अनुमान यह है कि भाषा, कला के साथ-साथ लगभग 40,000-35,000 वर्ष पहले विकसित हुई। उच्चरित भाषा कला के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है क्योंकि ये दोनों ही विचार अभिव्यक्ति के माध्यम हैं।

प्रश्न 22. 
फ्रांस और स्पेन की किन-किन गुफाओं में जानवरों की चित्रकारियाँ पाई गई हैं? इन चित्रकारियों का सम्बन्ध किससे था?
उत्तर:
फ्रांस में स्थित लैसकॉक्स और शोवे की गुफाओं में और स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में जानवरों की अनेक चित्रकारियाँ पाई गई हैं। जो 30,000 से 12,000 साल पहले के बीच में कभी बनाई गईं होंगी। इनमें गौरों (जंगली बैल), घोड़ों, पहाड़ी बकरों, हिरनों, विशालकाय जानवरों, गैंडों, शेरों, भालुओं, तेंदुओं, उल्लुओं और लकड़बग्घों आदि के चित्र सम्मिलित हैं। संभवतः इन चित्रकारियों का सम्बन्ध धार्मिक क्रियाओं, रहस्यों और जादू-टोनों से था। सम्भवतः चित्रकारी के रूप में जादू-टोना करके मनुष्य अपने शिकार को सफल बनाने का प्रयास करता होगा। यह भी कहा जाता है कि शायद ये गुफाएँ संगम स्थल थीं जहाँ लोगों के छोटे-छोटे समूह मिलते थे और सामूहिक क्रियाकलापों का सम्पादन करते थे। ऐसा भी सम्भव है कि वहाँ लोगों के समूह मिलकर शिकार की योजना बनाते हों अथवा शिकार के तरीकों एवं तकनीकों पर एक-दूसरे से चर्चा करते हों। यह भी सम्भव है ये चित्रकारियाँ आगे आने वाली पीढ़ियों को इन तकनीकों की जानकारी देने के लिए की गई हों। 

RBSE Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

प्रश्न 23. 
आल्टामीरा की गुफा कहाँ स्थित है? इस गुफा की चित्रकारियों की संक्षेप में विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आल्टामीरा स्पेन में स्थित एक गुफा-स्थल है। इस गुफा की चित्रकारियों की ओर मार्सिलीनो सैंज दि सउतुओला का ध्यान उनकी पुत्री मारिया द्वारा नवम्बर 1879 में दिलाया गया था। मार्सिलीनो एक स्थानीय जमींदार एवं एक शौकीन पुरातत्वविद् था। एक दिन वह गुफा का फर्श खोद रहा था। उसी समय उसकी छोटी-सी बेटी मारिया की नजर गुफा की छत पर बनी चित्रकारियों की ओर पड़ी। मारिया ने अपने पिता का ध्यान इस ओर दिलाया। मार्सिलीनो ने देखा कि गुफा की छत पर बनी इन चित्रकारियों में रंग की अपेक्षा एक विशेष प्रकार की लेई का प्रयोग किया गया है। सन् 1880 में मार्सिलीनो ने एक पुस्तिका प्रकाशित की जिसमें आल्टामीरा के गुफा चित्रों का विस्तार से वर्णन किया। 

प्रश्न 24. 
हादज़ा लोग कौन हैं? इनकी जीवन-शैली का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। 
उत्तर:
हादज़ा शिकारियों एवं संग्राहकों का एक छोटा समूह है, जो अफ्रीका महाद्वीप में स्थित लेक इयासी के आसपास रहते हैं। हादज़ा लोग अपने भोजन में मुख्य रूप से जंगली साग-सब्जियों का प्रयोग करते हैं। वे माँस का भी प्रयोग करते हैं। ये लोग हाथी को छोड़कर शेष सभी प्रकार के जानवरों; जैसे-हिरण, चिंकारा, जंगली सूअर, बबून बंदर, शेर, तेंदुआ, लकड़बग्घे, जिराफ, साही मछली आदि का शिकार करते हैं एवं उनका माँस खाते हैं। ये लोग अपने शिविर वृक्षों व चट्टानों के मध्य साग-सब्जी, माँस एवं जल की सुविधा वाले स्थानों पर लगाते हैं। ये लोग जमीन एवं उसके साधनों पर अपना अधिकार नहीं जमाते हैं। किसी भी मौसम में इन लोगों के लिए भोजन की कोई कमी नहीं रहती है। सूखे के मौसम में भी कंदमूल, बेर, बाओबाब पेड़ के फल आदि पर्याप्त मात्रा में भोजन हेतु प्राप्त हो जाते हैं। - 

प्रश्न 25. 
आदिमानव ने 10,000 से 4,500 वर्ष पहले कृषि एवं पशुपालन का कार्य क्यों प्रारम्भ किया?
अथवा आदिमानव ने किन कारणों से जंगली जानवरों का शिकार एवं जंगली पेड़-पौधों को एकत्रित करना छोड़कर कृषि एवं पशुपालन कार्य प्रारम्भ किया?
उत्तर:
आदिमानव ने 10,000 से 4,500 वर्ष पहले जंगली जानवरों एवं जंगली पेड़-पौधों को एकत्रित करना छोड़कर कृषि एवं पशुचारण करना आरम्भ किया, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित थे
(i) लगभग 13000 वर्ष पहले अन्तिम हिमयुग की समाप्ति के पश्चात् अपेक्षाकृत अधिक गर्म एवं नम मौसम की शुरुआत हुई। इसके फलस्वरूप जंगली जौ एवं गेहूँ की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गईं। इसके अतिरिक्त खुले जंगलों एवं घास के मैदानों के विस्तार के साथ-साथ जंगली भेड़ों, बकरियों, गधों, सूअरों आदि जानवरों की संख्या भी बढ़ती चली गई। 

(ii) जंगलों, घास के मैदानों एवं जानवरों की अधिकता वाले क्षेत्रों में निवास हेतु लोगों का आकर्षण बढ़ता चला गया और वे स्थाई रूप से वहाँ रहने लगे।

(iii) लोग कुछ क्षेत्रों को अधिक पसन्द करने लगे थे फलस्वरूप वहाँ भोजन की आपूर्ति को बढ़ाये जाने का दबाव बढ़ने लगा। सम्भवतः इसी कारण से कुछ क्षेत्रों में कुछ विशेष प्रकार के अनाज के पौधे उगाने एवं जानवरों को पालने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो गयी। इस प्रकार जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या की वृद्धि, कुछ विशेष किस्म के पौधों; यथा-गेहूँ, जौ, चावल, मोंठ, बाजरा आदि तथा जानवरों; जैसे-भेड़, बकरी व सूअर आदि की जानकारी तथा उन पर मानव की निर्भरता आदि अनेक कारणों से आदिमानव ने कृषि एवं पशुपालन की गतिविधियों को प्रारम्भ किया।

प्रश्न 26. 
आदिमानव द्वारा खेती और पशुचारण की प्रक्रिया अपनाने से और क्या-क्या परिवर्तन प्रारम्भ हुए होंगे?
उत्तर:
आदिमानव द्वारा खेती और पशुचारण की प्रक्रिया अपनाने से कई अन्य परिवर्तन प्रारम्भ हुए होंगे; जैसे

  1. मिट्टी के ऐसे बर्तन बनाये जाने लगे जिनमें अनाज तथा अन्य उपजों को सुरक्षित रखा जा सके और खाना पकाया जा सके।
  2. आवश्यकता अनुसार पत्थर के नये किस्म के औजरों का इस्तेमाल होने लगा। 
  3. हल जैसे अन्य उपकरण खेती के काम में आने लगे। 
  4. धीरे-धीरे लोग ताँबा और राँगा जैसी धातुओं से परिचित हो गये। 
  5. मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए चाक और परिवहन के लिए पहिए का इस्तेमाल होने लगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. 
नीचे दी गई मानव प्रजातियों के बारे में आप क्या जानते हैं? विस्तार से बताइए। 

  1. होमिनॉइड
  2. होमिनिड 
  3. आस्ट्रेलोपिथिकस
  4. होमो हैबिलिस
  5. होमो एरेक्टस
  6. होमो सैपियंस।

उत्तर:
(i) होमिनॉइड-
धरातल पर लगभग 240 लाख वर्ष पहले प्राइमेट श्रेणी में एक उपसमूह उत्पन्न हुआ जिसे होमिनॉइड के नाम से जाना गया। इस उपसमूह के अन्तर्गत वानर सम्मिलित थे। इनका मस्तिष्क छोटा था तथा ये चारों पैरों के बल चलते थे लेकिन इनके शरीर का अगला भाग और अगले दोनों पैर लचकदार होते थे।

(ii) होमिनिड-
हमारी पृथ्वी पर होमिनिड के अस्तित्व के प्रमाण हमें लगभग 56 लाख वर्ष पहले के मिलते हैं। होमिनिड का विकास होमिनॉइड उपसमूह से हुआ माना जाता है। होमिनिड के मस्तिष्क का आकार होमिनॉइड की तुलना में बड़ा होता था। वे सीधे खड़े होकर दो पैरों के बल चलते थे। इनके हाथ विशेष किस्म के होते थे जिनकी सहायता से वे औजार बना सकते थे तथा उनका प्रयोग भी कर सकते थे।

(iii) आस्ट्रेलोपिथिकस-
आस्ट्रेलोपिथिकस लातिनी भाषा के शब्द 'ऑस्ट्रल' अर्थात् 'दक्षिणी' एवं यूनानी भाषा के शब्द 'पिथिकस' अर्थात् वानर से मिलकर बना है। आस्ट्रेलोपिथिकस नाम देने का एक प्रमुख कारण यह था कि इस मानव के प्रारम्भिक रूप में वानर अवस्था के अनेक लक्षण मौजूद थे। धरातल पर आस्ट्रेलोपिथिकस का उद्भव 56 लाख वर्ष पहले माना जाता है। होमो की तुलना में इनका मस्तिष्क छोटा था, पिछले दाँत बड़े थे तथा हाथों की दक्षता सीमित थी। इनमें सीधे खड़े होकर चलने की क्षमता भी अधिक नहीं थी। पेड़ों पर अधिकांश समय व्यतीत करने का कारण इस प्रजाति के आगे के अवयव लम्बे, हाथ व पैरों की हड्डियों का मुड़ा होना एवं टखने के जोड़ों का घुमावदार होना आदि थे।

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(iii) होमो हैबिलिस-
यह होमो प्रजाति का एक प्रकार है। ये औजार बनाने वाली मानव प्रजाति थी। इनका धरातल पर उद्भव 22 लाख वर्ष पूर्व माना जाता है। इनके जीवाश्म इथियोपिया में ओमो तथा तंजानिया के ओल्डुवई गोर्ज से प्राप्त हुए हैं।

(iv) होमो एरेक्टस-
यह होमो प्रजाति का एक उपवर्ग है। इस प्रजाति के मानव सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलते थे। इनका धरातल पर उद्भव 18 लाख वर्ष पूर्व माना जाता है। अफ्रीका महाद्वीप में स्थित केन्या के कूबीफ़ोरा व पश्चिमी तुर्काना तथा एशिया महाद्वीप में स्थित जावा के मोड़ जोक” व संगीरन से इनके जीवाश्म की प्राप्ति हुई है।

(v) होमोसैपियंस-
इसे चिंतनशील, बुद्धिमान या आधुनिक मनुष्य कहा जाता है। इसका उद्भव काल 1.9 से 1.6 लाख वर्ष पूर्व माना जाता है। आधुनिक मानव के प्रारम्भिक जीवाश्म ओमो किबिश (इथियोपिया), बार्डर गुफा, दी केल्डर्स, क्लासीज़ नदी का मुहाना (दक्षिण अफ्रीका), दर एस सुल्तान (मोरक्को), कफज़ेह स्खुल (इजराइल), मुंगो झील (आस्ट्रेलिया), नियाह गुफा (बोर्नियो), क्रोमैगनन, लेस आइजीस (फ्रांस) आदि से प्राप्त हुए हैं। होमोसैपियन्स का मस्तिष्क बड़ा, जबड़े बाहर की ओर कम निकले हुए तथा दाँत छोटे थे। इनके बड़े मस्तिष्क को अच्छी स्मृति व समझदारी से जोड़ा गया। इनके जबड़ों व दाँतों में परिवर्तन सम्भवतः उसके खान-पान की आदतों से सम्बन्धित थे।

प्रश्न 2. 
आधुनिक मानव के उद्भव के सम्बन्ध में प्रचलित मतों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आधुनिक मानव के उद्भव स्थल के बारे में विद्वानों में मतभेद हैं। इस सम्बन्ध में दो मत प्रचलित हैं, जिनका वर्णन निम्नलिखित प्रकार से है

  1. क्षेत्रीय निरन्तरता मत 
  2. प्रतिस्थापन मत।

1. क्षेत्रीय निरन्तरता मत:
इस मत के अनुसार, विश्व के अनेक क्षेत्रों में अलग-अलग मानव प्रजाति की उत्पत्ति हुई। इस मत के अनुसार, आधुनिक मनुष्यों की उत्पत्ति दुनिया के अलग-अलग भागों में एक साथ न होकर अलग-अलग समय में हुई। यह मॉडल बताता है कि अलग-अलग प्रदेशों में रहने वाले होमो सैपियन्स का आधुनिक मानव के रूप में विकास धीरे-धीरे अलग-अलग गति से हुआ है। यही कारण है कि आधुनिक मानव विश्व के विभिन्न भागों में अलग-अलग स्वरूपों में दिखाई देता है। इस मत को समर्थन देने का एक प्रमुख कारण वर्तमान समय के मनुष्यों के लक्षणों एवं विशेषताओं में क्षेत्रीय अन्तर पाया जाना है। इस मत के समर्थक विद्वानों का कहना है कि इन विभिन्नताओं का कारण एक ही क्षेत्र में पाए जाने वाले होमो एरेक्टस और होमो हाइडलबर्गेसिस समुदायों में पाए जाने वाले अन्तर हैं।
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2. प्रतिस्थापन मत:
मानव उद्भव के इस मत के अनुसार, मनुष्य चाहे कहीं भी रहा हो उसके सभी पुराने रूप बदल गए और उसका स्थान आधुनिक मनुष्य ने पूर्णतः ग्रहण कर लिया है। इस मत का समर्थन इस बात से होता है कि आधुनिक मानव में सभी स्थानों पर शारीरिक तथा उत्पत्तिमूलक समरूपता पाई जाती है। इस मत के समर्थन में विद्वानों द्वारा यह तर्क दिया जाता है कि यह समानता इसलिए है क्योंकि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात् अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे। वहीं से वे अन्य स्थानों को गए, इस बात की पुष्टि इथियोपिया के ओमो नामक स्थान पर मिले प्राचीन मानव जीवाश्मों से हो जाती है। दूसरी ओर, आज के मनुष्यों में पाई जाने वाली शारीरिक भिन्नताएँ किसी स्थान विशेष पर निरन्तर हजारों वर्षों तक स्थायी रूप से रहने के कारण हैं, भिन्न-भिन्न स्थानों की परिस्थितियों ने ही ये भिन्नताएँ उत्पन्न की क्योंकि मनुष्य स्थान विशेष की परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेता है।

प्रश्न 3. 
प्रारम्भिक मानव के भोजन प्राप्त करने के विभिन्न तरीकों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रारम्भिक मानव (आदिकालीन मानव) के भोजन प्राप्त करने के तरीके समय के अनुसार बदलते रहते हैं। आदिकालीन मानव कई तरीके से भोजन जुटाता था वे तरीके निम्नलिखित हैं

  1. संग्रहण, 
  2. अपमार्जन, 
  3. शिकार, 
  4. मछली पकड़ना।।

(i) संग्रहण-संग्रहण की क्रिया के अन्तर्गत वृक्षों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ; जैसे—बीज, गुठलियाँ, बेर व कन्दमूल को एकत्रित करना सम्मिलित था। संग्रहण के बारे में तो केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है क्योंकि हमें इस सम्बन्ध में प्रत्यक्ष साक्ष्य बहुत कम मिलते हैं। हमें हड्डियों के जीवाश्म तो पर्याप्त मात्रा में मिल जाते हैं पर पौधों के जीवाश्म तो दुर्लभ ही हैं।

(ii) अपमार्जन-अपमार्जन से आशय त्यागी गई वस्तुओं की सफाई करने से है। अब प्रमुख रूप से यह माना जाने लगा है कि आदिकालीन होमिनिड मानव उन जानवरों की लाशों से माँस और मज्जा खुरचकर निकालने लगे थे जो जानवर अपने आप मर जाते थे या अन्य हिंसक जानवरों द्वारा मार दिए जाते थे। सम्भव है कि प्रारम्भिक होमिनिड अवस्था में मानव चूहे, छछूदर जैसे कृतकों, स्तनधारी जानवरों, पक्षियों व उनके अंडों, साँप जैसे रेंगने वाले जीवों तथा कीड़े-मकोड़ों को खाकर अपनी भूख शांत करते हों।

(iii) शिकार-यह माना जाता है कि संग्रहण के पश्चात् शिकार की शुरुआत हुई लगभग 5 लाख वर्ष पहले आदिकालीन मानव द्वारा विभिन्न जानवरों के शिकार करने के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, स्तनपायी जानवरों का योजनाबद्ध शिकार और उनका वध करने का सबसे पुराना स्पष्ट प्रमाण दो स्थलों से मिलता है, ये स्थल हैं दक्षिणी इंग्लैण्ड में बॉक्सग्रोव और जर्मनी में शोनिंजन। लगभग 35000 वर्ष पहले मानव द्वारा योजनाबद्ध ढंग से शिकार करने का प्रमाण कुछ यूरोपीय स्थलों से भी प्राप्त होता है। आदिमानव ने चेक गणराज्य में दोलनी वेस्तोनाइस नामक स्थल को, जो कि नदी के निकट स्थित था, सोच-समझकर शिकार के लिए चुना था। जब रेडियर और घोड़े जैसे स्थान परिवर्तित करने वाले जानवरों के झुण्ड पतझड़ और वसन्त के मौसम में उस नदी के पार जाते थे तब उनका बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता था। इन स्थलों के चुनाव से इस बात का पता चलता है कि लोगों को जानवरों के आवागमन एवं उन्हें शीघ्रता से बड़े स्तर पर मारने के तरीकों के बारे में जानकारी प्राप्त थी।

(iv) मछली पकड़ना-आदिकालीन मानव द्वारा मछली पकड़ना भी भोजन प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण तरीका था। इस बात की जानकारी पुरातात्विक महत्व के विभिन्न स्थलों से प्राप्त मछलियों की हड्डियों के मिलने से होती है।

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प्रश्न 4. 
आदिकालीन मानव के वृक्षों से उतरकर गुफाओं एवं खुले स्थलों पर आवास के बारे में विस्तार से चर्चा कीजिए।
उत्तर:
आदिकालीन मानव द्वारा वृक्षों से उतरकर गुफाओं एवं खुले स्थलों पर आवास के अनेक प्रत्यक्ष साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। आदिमानव की जीवन-शैली के विषय में जानकारी का एक तरीका उनके द्वारा बनाए गए औजार हैं। शल्क (परतदार) औजार तथा हस्त कुठार, कीनिया के किलोम्बे तथा ओलोर्जेसाइली नामक स्थलों पर हुई खुदाई में प्राप्त हुए हैं, ये औजार सात लाख से पाँच लाख वर्ष पुराने हैं। यह भी सम्भव है कि कुछ स्थलों पर भोजन प्राप्ति के लिए संसाधन पर्याप्त मात्रा में मिलते होंगे एवं वहाँ लोगों का आवागमन अधिक रहता होगा। ये लोग इन स्थलों पर अपने क्रियाकलापों के चिहन जैसे शिल्प वस्तुएँ एवं औजार आदि छोड़ जाते होंगे।

पुरातत्वविदों का मानना है वि. आरम्भिक होमोनिड भी होमोहैबिलिस की तरह किसी स्थान विशेष पर पाए गए भोजन को वहीं खाकर समाप्त कर देते थे, इसके पश्चात् अलग-अलग स्थानों पर जाकर सोते थे एवं अपना अधिकांश समय वृक्षों पर बिताते थे। गुफाओं एवं खुले निवास क्षेत्रों का प्रचलन 4 लाख से 1.25 लाख वर्ष पहले प्रारम्भ हो गया था। इस समयावधि में मानव वृक्षों से उतर चुका था तथा गुफाओं व खुले स्थलों पर निवास करने लगा था, इस बात के प्रमाण यूरोप महाद्वीप के अनेक पुरास्थलों से प्राप्त हुए हैं। दक्षिणी फ्रांस की लेजरेट गुफा में एक 12 x 4 मीटर आकार का एक शरण स्थल प्राप्त हुआ है जो गुफा की दीवार से सटाकर बनाया गया है।

इस शरण स्थल में दो चूल्हे भी मिले हैं, इसके अलावा अनेक प्रकार की खाद्य सामग्रियों के साधन; जैसे-फलों, वनस्पतियों, काष्ठ फलों, बीजों, पक्षियों के अंडों तथा मीठे जल की मछलियों जैसे ट्राउट, पर्च और कार्प के भी साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। टेरा अमाटा नामक स्थान पर लकड़ी एवं घास-फूस से निर्मित झोंपड़ियों के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। यह माना जाता है कि आदिकालीन मानव द्वारा इन झोंपड़ियों का प्रयोग अल्पकालीन मौसमी आवास के लिए किया जाता होगा। टेरा अमाटा की झोंपड़ी के किनारों को सहारा देने के लिए बड़े पत्थरों का प्रयोग किया जाता था।

झोंपड़ी के फर्श पर बिखरे हुए पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े उन स्थानों के द्योतक हैं जहाँ बैठकर लोग पत्थर के औजार बनाते थे। यहाँ चूल्हे भी बने हुए थे। केन्या में चेसोवांजा और दक्षिण अफ्रीका में स्वार्टक्रान्स में पत्थर के औजारों के साथ-साथ आग में पकाई गई चिकनी मिट्टी और जली हुई हड्डियों के टुकड़े भी मिले हैं। ये 14 लाख से 10 लाख वर्ष पुराने हैं। चूल्हों का उपयोग इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आदिमानव द्वारा आग का नियंत्रित उपयोग किया जाता होगा। इससे अनेक लाभ हुए होंगे जैसे आग से गुफा के अन्दर उष्णता व प्रकाश करना, आग से खाना पकाना, लकड़ी को कठोर करना तथा आग से खतरनाक जानवरों को डराकर भगाना आदि।

प्रश्न 5. 
“धरातल पर जीवित प्राणियों में मानव ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसके पास अपनी भाषा है और वह उसे बोलकर अपने विचारों और मनोभावों को व्यक्त कर सकता है।" इस कथन के सन्दर्भ में संप्रेषण और संचार के माध्यम के रूप में भाषा एवं कला के विकास को विस्तार से बताइए।
अथवा
"संप्रेषण एवं संचार का माध्यम भाषा और कला है।" कथन को सप्रमाण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संचार के माध्यम के रूप में भाषा और कला का विकास-इस बात से हम सभी परिचित हैं कि धरातल पर जीवित प्राणियों में से मानव ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसके पास अपनी भाषा है और वह उसे बोलकर अपने विचारों और मनोभावों को व्यक्त कर सकता है।

1. भाषा संप्रेषण व संचार का एक उत्कृष्ट माध्यम है, भाषा के विकास के बारे में निम्नलिखित मत प्रचलन में हैं

  •  होमिनिड भाषा में हावभाव एवं हाथों का संचालन सम्मिलित था। 
  • उच्चरित भाषा से पूर्व मौखिक अथवा अशाब्दिक संचार का प्रयोग होता था।
  • मानव की वाणी का प्रारम्भ सम्भवतः बुलावों की क्रिया से हुआ था जैसा कि नर-वानरों में देखा गया। प्रारम्भ में मानव बहुत कम ध्वनियों का प्रयोग करता था। धीरे-धीरे ये ध्वनियाँ वाक्य के रूप में विकसित होती चली गईं।

2. उच्चरित अर्थात् बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति के विषय में निश्चित रूप से साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। ऐसा
माना जाता है कि होमो हैबिलिस के मस्तिष्क में ऐसी विशेषताएँ थीं जिसके कारण उसके लिए बोलना सम्भव हुआ होगा। ऐसा माना जाता है कि सम्भवतः भाषा का विकास 20 लाख वर्ष पूर्व हुआ होगा।

3. भाषा की उत्पत्ति में मस्तिष्क के विकास के अतिरिक्त स्वर तंत्र का विकास भी महत्वपूर्ण रहा है। स्वर तंत्र का विकास लगभग 2 लाख वर्ष पहले हुआ था। इसका सम्बन्ध विशेष रूप से आधुनिक मानव से रहा है।

4. एक अन्य मत के अनुसार भाषा एवं कला का विकास लगभग एक ही समय पर 40,000 से 35,000 वर्ष पूर्व हुआ था। उच्चरित अर्थात् बोली जाने वाली भाषा का विकास कला के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा रहा है। भाषा और कला दोनों ही संप्रेषण अर्थात् विचार-अभिव्यक्ति के माध्यम हैं।

5. फ्रांस में स्थित लैसकॉक्स और शोवे तथा स्पेन की आल्टामीरा आदि गुफाओं से 30,000 से 12,000 वर्ष पहले की निर्मित चित्रकारियाँ प्राप्त हुई हैं। इनमें जंगली बैलों व भैंसों, घोड़ों, हिरणों, शेरों, भालुओं, लकड़बग्घों व उल्लुओं के साथ-साथ विशालकाय जानवरों के चित्र प्रमुख हैं। यह माना जाता है कि जानवरों की इन चित्रकारियों का सम्बन्ध धार्मिक क्रियाओं, रस्मों एवं जादू-टोनों आदि से था। लोगों का विश्वास था कि जानवरों के चित्र बनाने से शिकार करने में सफलता मिलने की सम्भावना अधिक होती है। गुफाओं की इन चित्रकारियों के सम्बन्ध में यह भी कहा जाता है कि सम्भवतः ये गुफाएँ संगम स्थल थीं जहाँ लोगों के छोटे-छोटे समूह आपस में मिलकर विभिन्न विषयों पर चर्चा करते होंगे। इस मत के अतिरिक्त यह भी माना जाता है कि आदिमानव द्वारा गुफाओं में चित्रकारियाँ आगामी पीढ़ियों को इन तकनीकों की जानकारी देने के लिए बनाई गई होंगी। 

प्रश्न 6. 
हादज़ा जनसमूह के निवास स्थल, रहन-सहन एवं खान-पान का विस्तार से वर्णन कीजिए।
अथवा 
हादज़ा लोगों की गतिविधियों पर एक निबन्ध लिखिए।
अथवा 
हादज़ा जनसमूह के बारे में मानव विज्ञानी जेम्स वुडबर्न द्वारा सन् 1960 में दिये गये विवरण का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सन् 1960 में मानव विज्ञानी जेम्स वुडबर्न ने अफ्रीकी महाद्वीप की लेक इयासी (एक खारे पानी की विभ्रंश झील) के आस-पास रहने वाले हादज़ा जनसमूह के बारे में विवरण प्रस्तुत किया था, जिसका वर्णन निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत प्रस्तुत है
(i) हादज़ा जनसमूह का निवास स्थल-हादज़ा जनसमूह शिकारियों एवं संग्राहकों का एक छोटा समूह है जो अफ्रीका महाद्वीप में स्थित लेक इयासी नामक एक नमकीन पानी की एक विभ्रंश घाटी में बनी झील के आसपास रहता है। पूर्वी हादज़ा का निवास क्षेत्र सूखा व चट्टानी है। यहाँ सवाना घास, काँटेदार झाड़ियाँ व एकासिया के पेड़ पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। यहाँ जंगली खाद्य वस्तुएँ पर्याप्त मात्रा में मिलती हैं।

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(ii) हादज़ा जनसमूह का रहन-सहन-हादज़ा लोग शिविर लगाकर रहते हैं। ये लोग अपने शिविर घास के खुले मैदानों में वृक्षों और चट्टानों के मध्य लगाते हैं जहाँ खाद्य पदार्थों व जल की पर्याप्त उपलब्धता होती है। इन लोगों के शिविरों का आकार और स्थिति पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है। नमी के मौसम में हादज़ा लोगों के शिविर प्रायः छोटे और दूर-दूर तक फैले हुए होते हैं तथा सूखे के मौसम में पानी के स्रोतों के आस-पास घने बसे होते हैं। हादज़ा लोगों के निवास क्षेत्र में अनेक प्रकार के जानवर पाये जाते हैं। इनके निवास क्षेत्र में वनस्पति खाद्य-कंदमूल, बेर, बाओबाब पेड़ के फल आदि पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं।

(iii) हादज़ा लोगों का खान-पान-हादज़ा प्रदेश में अनेक प्रकार के जानवर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इन जानवरों में हाथी, गैंडे, भैंसे, जिराफ़, हिरन, चिंकारा, जंगली सूअर, बबून बंदर, शेर, तेंदुआ व लकड़बग्घा आदि प्रमुख हैं। यहाँ छोटे जानवर भी पाये जाते हैं जिनमें खरगोश, गीदड़, कछुए, सार्क मछली आदि प्रमुख हैं। हादज़ा लोग हाथी को छोड़कर शेष सभी प्रकार के जानवरों का शिकार कर उनका माँस खाते हैं। इनके निवास क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में वनस्पति खाद्य; जैसे-कंदमूल, बेर, बाओबाब वृक्ष के फल तथा जंगली मधुमक्खियों का शहद मिलता है, जिनका ये भक्षण करते हैं। इनके भोजन का 80 प्रतिशत भाग सम्भवतः वनस्पतिजन्य होता है।

ये अपनी जरूरतों का शेष 20 प्रतिशत भाग माँस व शहद से पूरा करते हैं। यहाँ पाई जाने वाली सात प्रकार की जंगली मधुमक्खियों के शहद व सूंडियों को बड़े शौक से खाया जाता है। सूखे के समय में भी हादज़ा लोगों को भोजन की कमी नहीं होती है। इसका कारण यह है कि इन लोगों के प्रदेश में सूखे के मौसम में भी वनस्पति खाद्य जैसे कंदमूल, बेर, बाओबाब वृक्षों के फल आदि प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।

प्रश्न 7. 
क्या वर्तमान आखेटक-संग्राहक समाजों के बारे में प्राप्त ज्ञान का उपयोग सुदूर अतीत के मानव के जीवन को पुनर्निर्मित करने में किया जा सकता है? इस विषय पर प्रचलित विचारधाराओं का विस्तार से वर्णन कीजिए।
अथवा 
'शिकारी-संग्राहक समाज वर्तमान से अतीत की ओर' विषय पर विस्तार से एक लेख लिखिए।
उत्तर:
मानव विज्ञानियों के अध्ययन के आधार पर वर्तमान समय के आखेटक संग्राहक समाजों के विषय में . जैसे-जैसे हमारे ज्ञान में वृद्धि हुई है, वैसे-वेसे हमारे समक्ष यह सवाल उत्पन्न होता है कि वर्तमान के आखेटक (शिकारी)- संग्राहक समाजों के विषय में प्राप्त ज्ञान को सुदूर अतीत के मानव के जीवन को पुनर्निर्मित करने में किया जा सकता है। इस विषय के सम्बन्ध में वर्तमान में दो परस्पर विरोधी विचारधाराएँ निम्न रूप में प्रचलित हैं
(i) प्रथम विचारधारा-
विद्वानों के एक वर्ग ने आज के आखेटक-संग्राहक समाजों से प्राप्त तथ्यों एवं आँकड़ों का सीधे अतीत के अवशेषों की व्याख्या करने हेतु उपयोग कर लिया है। उदाहरण के रूप में, कुछ पुरातत्वविदों का मत है कि लगभग 20 लाख वर्ष पहले के होमिनिड स्थल जो तुर्काना झील के किनारे स्थित हैं, सम्भवतः आदिकालीन मानवों के निवास स्थल थे। जहाँ वे सूखे के मौसम में आकर निवास करते थे। वर्तमान हादज़ा व कुंगसैन समाजों में भी ऐसा ही व्यवहार पाया जाता है।

(ii) द्वितीय विचारधारा-
दूसरी ओर कुछ विद्वानों का मत है कि संजाति वृत्त तथ्यों और समंकों (आँकड़ों) का उपयोग अतीत के समाजों के क्रियाकलापों को समझने में नहीं किया जा सकता है। क्योंकि दोनों चीजें एक-दूसरे से पूर्णतः भिन्न हैं। उदाहरण के लिए; वर्तमान काल में आखेटक-संग्राहक समाज शिकार और संग्रहण के साथ-साथ अन्य अनेक गतिविधियों में संलग्न हैं। वे छोटे-छोटे जंगल उत्पादों का निर्माण और व्यापार करते हैं अथवा वे पड़ौस के किसानों के खेतों पर मजदूरी करते हैं। इसके अतिरिक्त ये समाज भौगोलिक, राजनैतिक एवं सामाजिक रूप से पूर्णतः अलग-थलग पड़े हुए हैं। ये जिन परिस्थितियों में रहते हैं, वे आरम्भिक मानव की अवस्था से बहुत भिन्न हैं। आज के आखेटक-संग्राहक समाजों की जीवनशैली भी भिन्न-भिन्न है। कई विषयों में तो परस्पर विरोधी तथ्य दिखाई देते हैं। जैसे कि आज के शिकारी समाज शिकार व संग्रहण को अलग-अलग महत्व देते हैं।

उनके आकार भिन्न-भिन्न अर्थात् छोटे-बड़े होते हैं। उनके क्रियाकलापों में भी अन्तर पाया जाता है। भोजन प्राप्त करने में श्रम विभाजन के विषय को लेकर भी कोई आम सहमति नहीं है। यद्यपि आज स्त्रियाँ संग्रहण का कार्य करती हैं एवं पुरुष शिकार करते हैं। परन्तु ऐसे समाजों के भी उदाहरण मिलते हैं जहाँ स्त्रियाँ व पुरुष दोनों ही शिकार व संग्रहण के साथ-साथ औजार बनाने का कार्य भी करते हैं। सम्भवतः संग्राहक समाज में स्त्री और पुरुष दोनों की भूमिका लगभग एक समान होती है। यद्यपि इसमें समाजों के अन्तर्गत कुछ अन्तर पाया जाता है। अतः वर्तमान स्थिति से अतीत के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना अत्यन्त जटिल है।

मानचित्र सम्बन्धी प्रश्नोत्तर 

प्रश्न 1.
विश्व के रेखा मानचित्र में निम्न को दर्शाइए

  1. होमिनिडों का उद्भव स्थल
  2. होमोहैबिलिस के जीवाश्म प्राप्ति क्षेत्र 
  3. होमोएरेक्टस के जीवाश्म प्राप्ति क्षेत्र 
  4. 45000 वर्ष पूर्व आधुनिक मानव का निवास स्थल।

 उत्तर:

  1. अफ्रीका
  2. तंजानिया, इथोपिया 
  3. केन्या, जावा
  4. आस्ट्रेलिया

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प्रश्न 2. 
विश्व के रेखा मानचित्र में आधुनिक मानवों के प्राचीनतम जीवाश्मों के प्राप्ति स्थलों को दर्शाइए-
उत्तर:
दक्षिण अफ्रीका, इथोपिया, फ्रांस, बोर्नियो, मोरक्को, इज़राइल, आस्ट्रेलिया।

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प्रश्न 3. 
यूरोप के रेखा मानचित्र में निम्नलिखित को दर्शाइए 

  1. शोनिंजन 
  2. निअंडर घाटी 
  3. हाइडलबर्ग 
  4. लेज़रेट गुफा 
  5. आल्टामीरा
  6. बॉक्सग्रोव। 

उत्तर:
RBSE Solutions for Class 11 History Chapter 1 समय की शुरुआत से 4
 
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए इस अध्याय से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. 
कौन-सा महाद्वीप मानव जाति का जन्मस्थल कहलाता है?
(क) एशिया 
(ख) यूरोप 
(ग) अफ्रीका
(घ) दक्षिणी अमेरिका। 
उत्तर:
(ग) अफ्रीका

प्रश्न 2. 
कथन (A) होमोसैपियन्स मानव का सामान्यतः कॉकेशसी, मंगोलाइड, नीग्रोइड, ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों में विभाजन उद्भूत होता है।
कथन (R) इस प्रकार के वर्गीकरण से प्रजातिवाद उद्भूत होता है। कूट: 
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A का सही स्पष्टीकरण है। 
(ख) A और R दोनों सही हैं परन्तु R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है। 
(ग) A सही है परन्तु R गलत है।
(घ) A गलत है परन्तु R सही है। 
उत्तर:
(ग) A सही है परन्तु R गलत है।

RBSE Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

प्रश्न 3. 
निम्न में से किस युग्म का सुमेल है?
(क) हाइडलबर्ग मानव-दक्षिण अफ्रीका 
(ख) सोलो मानव-जर्मनी 
(ग) क्रोमेग्नन मानव-फ्रांस
(घ) रोडेशियाई मानव-जावा। 
उत्तर:
(ग) क्रोमेग्नन मानव-फ्रांस

प्रश्न 4. 
निम्न में से कौन-सा नवीनतम मानव समझा जाता है?
(क) हाइडलबर्ग मानव
(ख) क्रोमेग्नन मानव 
(ग) पिल्टडान मानव
(घ) निअण्डरथल मानव। 
उत्तर:
(ख) क्रोमेग्नन मानव 

Prasanna
Last Updated on Sept. 24, 2022, 10:23 a.m.
Published July 27, 2022