कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न

Engaging with these Hamara Rajasthan Book Class 7 Solutions and  कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न उत्तर will strengthen your knowledge and prepare you for assessments.

Class 7 Our Rajasthan मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न

प्रश्न 1.
संसार के मानचित्र में अंकित कीजिए-
(1) मकर रेखा (2) हिन्द महासागर (3) एशिया (4) अफ्रीका (5) भारत (6) नील नदी (7) दक्षिणी अमेरिका (8) आस्ट्रेलिया (9) यूरोप (10) उत्तरी अमेरिका (11) अन्टार्कटिका (12) ग्रीनलैण्ड (13) प्रशान्त महासागर (14) अटलांटिक महासागर (15) आर्कटिक महासागर (16) कर्क रेखा।
उत्तर:
निम्न मानचित्र देखें।
कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न 1

प्रश्न 2.
भारत के मानचित्र में निम्न स्थानों को अंकित कीजिए-
(1) इलाहाबाद (2) हैदराबाद (3) चेन्नई (4) दिल्ली (5) पूना (6) झाँसी (7) श्रीनगर (8) शिमला (9) चण्डीगढ़ (10) जयपुर (11) लखनऊ (12) भोपाल (13) गांधीनगर (14) मुम्बई (15) गोआ (16) बैंगलोर (17) पाण्डिचेरी (18) तिरुवनन्तपुरम् (19) पटना (20) कोलकाता (21) भुवनेश्वर (22) गंगटोक (23) इम्फाल (24) आइजोल (25) अगरतल्ला (26) पोर्टब्लेयर (27) दादरा नगर हवेली (28) दिसपुर (29) शिलांग (30) कोहिमा (31) इटानगर (32) दीव (33) दमन (34) अमृतसर (35) अहमदाबाद (36) साबरमती (37) पोरबन्दर (38) आगरा (39) पणजी।
उत्तर:
निम्न मानचित्र देखें।
कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न 2

प्रश्न 3.
भारत के मानचित्र में निम्न स्थानों को अंकित कीजिए-
(1) पानीपत (2) दिल्ली (3) जैसलमेर (4) नागौर (5) मथुरा (6) बिजनौर (7) अजमेर (8) चित्तौड़गढ़ (9) आगरा (10) बदायूँ (11) लखनऊ (12) गुजरात (13) सूरत (14) पटना (15) वाराणसी (16) मुंबई (17) चोल (18) गोवा (19) गया (20) जबलपुर (21) चेन्नई (22) पांडिचेरी (23) उज्जैन (24) मदुरै (25) मंगलौर (26) नासिक (27) ऐलोरा (28) अजन्ता !
उत्तर:
निम्न मानचित्र देखें।
कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न 3

प्रश्न 4.
विश्व के मानचित्र में प्रमुख समुद्र, झीलें एवं नदियों को दर्शाइये-
उत्तर:
निम्न मानचित्र देखें।
कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न 4

प्रश्न 5.
संसार के मानचित्र में महासागरीय धाराएँ दर्शाइये।
उत्तर:
निम्न मानचित्र देखें।
कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न 5

प्रश्न 6.
विश्व के मानचित्र में प्रमुख समुद्र और हवाई पत्तन को दर्शाइए।
उत्तर:
निम्न मानचित्र देखें।
कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न 6

प्रश्न 7.
राजस्थान के मानचित्र में राजनीतिक स्थिति को दर्शाइए।
उत्तर:
निम्न मानचित्र देखें।
कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न 7

प्रश्न 8.
राजस्थान के मानचित्र में प्रमुख खनिजों के वितरण को दर्शाइए।
उत्तर:
निम्न मानचित्र देखें।
कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न 8

प्रश्न 9.
राजस्थान के मानचित्र में राष्ट्रीय एवं वन्य जीव अभयारण्य को दर्शाइए।
उत्तर:
निम्न मानचित्र देखें।
कक्षा 7 हमारा राजस्थान मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न 9

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 9 के प्रश्न उत्तर संविधान निर्माण में राजस्थान का योगदान

Engaging with these Hamara Rajasthan Book Class 7 Solutions and कक्षा 7 हमारा राजस्थान पाठ 9 के प्रश्न उत्तर संविधान निर्माण में राजस्थान का योगदान will strengthen your knowledge and prepare you for assessments.

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 9 Question Answer in Hindi संविधान निर्माण में राजस्थान का योगदान

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 9 के प्रश्न उत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-

1. आवश्यक नियमों व कानूनों का संग्रह, जिनके आधार पर किसी संस्था या देश का संचालन किया जाता है, कहलाता है-
(अ) संग्रहालय
(ब) संविधान
(स) विद्यालय
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) संविधान

2. 26 जनवरी, 1950 को हम महत्त्वपूर्ण दिवस के रूप में याद करते हैं, क्योंकि इस दिन-
(अ) संविधान निर्मित हुआ
(ब) संविधान सभा का गठन हुआ
(स) संविधान लागू हुआ
(द) हमारा देश आजाद हुआ
उत्तर:
(स) संविधान लागू हुआ

II. स्तंभ ‘अ’ एवं ‘ब’ को सुमेलित करें-

स्तंभ ‘अ’ स्तंभ ‘ब’
(अ) जयनारायण व्यास (i) जयपुर
(ब) गोकुल लाल असावा (ii) उदयपुर
(स) हीरा लाल शास्त्री (iii) जोधपुर
(द) बलवंत सिंह मेहता (iv) शाहपुरा (भीलवाड़ा)

उत्तर:

स्तंभ ‘अ’ स्तंभ ‘ब’
(अ) जयनारायण व्यास (iii) जोधपुर
(ब) गोकुल लाल असावा (iv) शाहपुरा (भीलवाड़ा)
(स) हीरा लाल शास्त्री (i) जयपुर
(द) बलवंत सिंह मेहता (ii) उदयपुर

III. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. भारतीय संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष ……………. थे।
उत्तर:
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

2. संविधान दिवस ……………. को मनाया जाता है।
उत्तर:
26 नवम्बर

IV. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
कैबिनेट मिशन क्या था?
उत्तर:
भारत में स्वतंत्रता आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने अपने तीन मंत्रियों का एक दल भारत भेजा, जिसको हम ‘कैबिनेट मिशन’ के नाम से जानते हैं। इसी कैबिनेट मिशन की योजनानुसार 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 9 के प्रश्न उत्तर संविधान निर्माण में राजस्थान का योगदान

प्रश्न 2.
‘अखण्ड भारत’ के प्रकाशक कौन थे?
उत्तर:
जयनारायण व्यास सन् 1936 ई. में ‘अखंड भारत’ के प्रकाशक थे।

V. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
संविधान सभा के उन सदस्यों के नाम लिखिए जो राजस्थान के मूल निवासी थे।
उत्तर:
संविधान सभा के सदस्य (राजस्थान मूल निवासी)

नाम रियासत
1. मुकुट बिहारी लाल भार्गव अजमेर – मेरवाड़ा
2. माणिक्य लाल वर्मा उदयपुर
3. जयनारायण व्यास जोधपुर
4. बलवंत सिंह मेहता उदयपुर
5. रामचंद्र उपाध्याय अलवर
6. दवेल सिंह कोटा
7. गोकुल लाल असावा शाहपुरा (भीलवाड़ा)
8. जसवंत सिंह बीकानेर
9. राज बहादुर भरतपुर
10. हीरा लाल शास्त्री जयपुर
11. सरदार सिंह खेतड़ी

प्रश्न 2.
हीरालाल शास्त्री का जीवन परिचय बताइए।
उत्तर:
हीरालाल शास्त्री – इनका जन्म 24 नवम्बर, 1899 को जयपुर के जोबनेर कस्बे में हुआ। अर्जुनलाल सेठी के सम्पर्क में आने के बाद इन्होंने राजकीय सेवा से त्याग पत्र दे दिया। संविधन सभा में इन्होंने सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार की वकालत की थी। शास्त्रीजी ने टोंक जिले की निवाई तहसील के वनस्थली ग्राम में जीवन कुटीर नामक संस्था की स्थापना की. जिसके माध्यम से सेवा की दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य किया। इसकेपश्चात् वे जयपुर प्रजामंडल से जुड़े रहे। ये अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् के प्रधानमंत्री और बाद में राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री बने।

प्रश्न 3.
बलवंत सिंह मेहता का संक्षिप्त परिचय दीजिये।
उत्तर:
बलवंत सिंह मेहता – इनका जन्म 8 फरवरी, 1900 ई. में उदयपुर में हुआ। ये सन् 1938 ई. में प्रजामंडल के पहले अध्यक्ष बने । बलवंत सिंह मेहता ने सन् 1943 ई. में उदयपुर में वनवसी छात्रावास की स्थापना की। ये संविधान सभा के सदस्य के रूप में मूल संविधान पर हस्ताक्षर करने वाले प्रथम राजस्थानी थे।

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 9 Important Question Answer in Hindi

I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-

1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संविधान निर्माण हेतु संविधान सभा बनाने की माँग पहली बार कब की?
(अ) 1935 ई. में
(ब) 1936 ई. में
(स) 1937 ई. में
(द) 1938 ई. में
उत्तर:
(अ) 1935 ई. में

2. कैबिनेट मिशन की योजनानुसार संविधान सभा का गठन कब किया गया?
(अ) 1935 ई. में
(ब) 1945 ई. में
(स) 1946 ई. में
(द) 1949 ई. में
उत्तर:
(स) 1946 ई. में

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 9 के प्रश्न उत्तर संविधान निर्माण में राजस्थान का योगदान

3. संविधान सभा के सदस्य सरदार सिंह किस रियासत से जुड़े थे?
(अ) उदयपुरं
(ब) खेतड़ी
(स) भरतपुर
(द) कोटा
उत्तर:
(ब) खेतड़ी

4. संविधान सभा के सदस्य सी. एस. वेंकटाचारी किस रियासत के प्रशासनिक अधिकारी थे?
(अ) जयपुर
(ब) जोधपुर
(स) बीकानेर
(द) उदयपुर
उत्तर:
(ब) जोधपुर

II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-

1. संविधान सभा के गठन के समय राजस्थान अनेक ……………. में विभाजित था।
उत्तर:
रियासतों

2. माणिक्य लाल वर्मा जी का लिखा हुआ ……………. गीत बहुत लोकप्रिय हुआ।
उत्तर:
‘पंछिड़ा’

3. रामचंद्र उपाध्याय ……………. रियासत के प्रतिनिधि के रूप में संविधान सभा के सदस्य थे।
उत्तर:
अलवर

4. गोकुल लाल असावा की प्रारम्भिक शिक्षा ……………. के मिडिल स्कूल में हुई।
उत्तर:
शाहपुरा।

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न- 

प्रश्न 1.
संविधान क्या है?
उत्तर:
संविधान आवश्यक नियमों व कानूनों का एक संग्रह है, जिनके आधार परदेश या किसी संस्था को संचालित किया जाता है।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 9 के प्रश्न उत्तर संविधान निर्माण में राजस्थान का योगदान

प्रश्न 2.
भारत का संविधान कब लागू हुआ?
उत्तर:
भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ।

प्रश्न 3.
किन राजस्थान मूल प्रवासियों को संविधान सभा का सदस्य चुना गया?
उत्तर:
राजस्थानी प्रभुदयाल हिम्मत सिंह पश्चिम बंगाल से, बनारसी दास झुंझुनूवाला बिहार से, पदम सिंहानिया उत्तर प्रदेश से संविधान सभा के सदस्य चुने गये।

प्रश्न 4.
संविधान सभा में उदयपुर के प्रतिनिधि कौन थे?
उत्तर:
माणिक्यलाल वर्मा को उदयपुर से संविधान सभा का प्रतिनिधित्व दिया गया।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
संविधान सभा से क्या अभिप्राय है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
संविधान सभा – यह जनता के प्रतिनिधियों की वह सभा है जो संविधान का निर्माण करती है। भारतीय संविधान सभा में ब्रिटिश शासन के अधीन प्रान्तों के निर्वाचित प्रतिनिधि व देशी रियासतों के मनोनीत प्रतिनिधि सम्मिलित थे। संविधान सभा में राजस्थान के ब्रिटिश प्रान्त व रियासतों के सदस्य भी शामिल थे।

प्रश्न 2.
‘भारतीय संविधान निर्माण’ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ब्रिटिश सरकार द्वारा भेजे गए कैबिनेट मिशन की योजना के अनुसार 1946 में भारतीय संविधान सभा का गठन किया गया, जिसके स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद चुने गये। संविधान सभा ने एक प्रारूप समिति बनाई, डॉ. भीमराव अम्बेडकर को इसका अध्यक्ष बनाया गया। 13 दिसम्बर, 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा के सामने ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ पेश किया। संविधान सभा के सदस्यों ने, स्वतंत्रता संग्राम से उपजे आदर्शों को ध्यान में रखते हुए संविधान का निर्माण किया। संविधान निर्माण में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा। संविधान सभा ने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान को स्वीकार कर लिया। परिणामत: 26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया।

प्रश्न 3.
संविधान सभा के उन सदस्यों के नाम सूचीबद्ध कीजिए, जो राजस्थान की रियासतों में प्रशासनिक अधिकारी थे।
उत्तर:
संवधान सभा के सदस्य, जो राजस्थान की रियासतों में प्रशासनिक अधिकारी थे-

नाम रियासत
1. सर वी. टी. कृष्णमाचारी जयपुर
2. सी. एस. वेंकटाचारी जोधपुर
3. सरदार के. एम. पत्रिकर बीकानेर
4. सर टी. विजयराघवाचार्या उदयपुर

V. निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
संविधान सभा में राजस्थान के निवासी सदस्यों का परिचय दीजिए।
उत्तर:
संविधान सभा के गठन के समय राजस्थान अनेक रियासतों में बँटा हुआ था। जबकि अजमेर-मेरवाड़ा प्रान्त सीधे ही ब्रिटिश शासन के अधीन था। संविधान सभा में राजस्थान के निवासी सदस्य निम्नलिखित थे –

1. मुकुट बिहारी लाल भार्गव – इनका जन्म 30 जनवरी, 1903 को राजस्थान की उदयपुर रियासत में हुआ। ये वकील थे और राजबंदियों के मुकदमों की पैरवी करते थे। ये ‘व्यक्तिगत सत्याग्रह’ और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में जेल भी गए। संविधान सभा में इन्होंने अजमेर-मेरवाड़ा प्रान्त का प्रतिनिधित्व किया।

2. माणिक्य लाल वर्मा-इनका जन्म 4 दिसम्बर, 1897 को भीलवाड़ा के बिजोलिया में हुआ। इन्होंने सत्याग्रह आंदोलन का अजमेर में संचालन किया और मेवाड़ प्रजामंडल के प्रथम अधिवेशन की 1941 ई. में अध्यक्षता की। ये 1948 ई. में वृहत्तर राजस्थान के प्रधानमंत्री व 1963 ई में राजस्थान खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष रहे। श्री वर्मा को उदयपुर से संविधान सभा का प्रतिनिधित्व दिया गया।

3. जयनारायण व्यास – इनका जन्म 18 फरवरी, 1899 को जोधपुर में हुआ। 1927 ई. में ‘तरुण राजस्थान’ के प्रधान संपादक तथा 1936 ई. में ‘अखंड भारत’ के प्रकाशक रहे ये 1951 ई. से 1956 ई. की अवधि में दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे। ये जोधपुर से संविधान सभा के सदस्य बने।

4. बलवंत सिंह मेहता- इनका जन्म 8 फरवरी, 1900 ई. को उदयपुर में हआ। ये 1938 ई. में प्रजामंडल के प्रथम अध्यक्ष बने। ये संविधान सभा के सदस्य के रूप में मूल संविधान पर हस्ताक्षर करने वाले पहले राजस्थानी थे।

5. रामचंद्र उपाध्याय – ये प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी व पेशे से वकील थे। इन्होंने अलवर रियासत के प्रतिनिधि के रूप में संविधान सभा की सदस्यता ली।

6. दलेल सिंह – इनका जन्म 18 मार्च, 1909 को हुआ। ये कोटा के महाराव के निजी सचिव व कानून के जानकार थे। इन्होंने कोटा के प्रतिनिधि के तौर पर 1946 से 1950 तक संविधान सभा में कार्य किया।

7. गोकुल लाल असावा – इनकी प्रारम्भिक शिक्षा शाहपुरा के माध्यमिक विद्यालय में हुई। इन्हेंने कोटा के हार्वर्ड कॉलेज में अध्यापन कार्य किया। बाद में अजमेर आ गये और क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण 1930 से 1932 के मध्य चार बार जेल जाना पड़ा। ये असावा शाहपुरा (भीलवाड़ा) से संविधान सभा के प्रतिनिधि बने।

8. जसवंत सिंह – ये बीकानेर रियासत के महाराजा सार्दुल सिंह के प्रधानमंत्री थे। संविधान का निर्माण होने पर इन्होंने बीकानेर का प्रतिनिधित्व किया। बाद में इन्हें राज्यसभा का सदस्य भी मनोनीत किया गया।

9. राज बहादुर – ये पेशे से वकील थे। इन्होंने समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान हेतु कार्य किया तथा भरतपुर रियासत में बेगार प्रथा का विरोध किया। ये भरतपुर के प्रतिनिधि के तौर पर संविधान सभा में मनोनीत किए गए। ये केन्द्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री भी रहे तथा नेपाल में भारत के राजदूत बनकर रहे।

10. हीरा लाल शास्त्री – इनका जन्म 24 नवम्बर, 1899 को जयपुर के जोबनेर कस्बे में हुआ। इन्होंने वनस्थली ग्राम में जीवन कुटीर के माध्यम से समाज सेवा किया। तत्पश्चात् जयपुर प्रजामंडल से जुड़े। ये अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् के प्रधानमंत्री और बाद में राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री बने। संविधान सभा में जयपुर का प्रतिनिधित्व करते हुए इन्होंने सभी नगारिकों के लिए समान अधिकार की वकालत की।

11. सरदार सिंह – इन्होंने संविधान सभा में खेतड़ी का प्रतिनिधित्व किया। ये 1950 से 1952 के बीच अस्थायी संसद के सदस्य भी रहे। 1952 से 1956 के मध्य राज्यसभा के सदस्य रहे। इन्हें 1958 से 1961 के बीच लाओस में भारतीय राजदूत बनाकर भेजा गया।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 9 के प्रश्न उत्तर संविधान निर्माण में राजस्थान का योगदान

गतिविधि

प्रश्न 1.
अपने शिक्षक की सहायता से कैबिनेट मिशन के तीनों सदस्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत भेजे गए कैबिनेट मिशन के सदस्यों के नाम हैं-
1. लॉर्ड पैथिक लारेंस (भारत सचिव),
2. सर स्टेफर्ड क्रिप्स (व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष ),
3. ए. वी. अलेक्जेंडर (एडमिरैलिटी के प्रथम लॉर्ड या नौसेना मंत्री)।

प्रश्न 2.
शिक्षक के निर्देशन में अपने विद्यालय की छात्र- संसद के संविधान पर जानकारी प्राप्त करें।
उत्तर:
विद्यालय में छात्र संसद का प्रारूप तैयार किया गया है, संविधान भी लिखा जा चुका है। छात्र संसद में प्रत्येक विभागों के प्रतिनिधि सांसद कहे जायेंगे। सीनेट में इस बात पर चर्चा होगी कि सर्वोच्च पद को क्या नाम दिया जाए। सीनेट में महासचिव, अध्यक्ष, स्पीकर, चेयरपरसन या प्रधानमंत्री नाम रखे जाएंगे। छात्र संसद के गठन से विद्यार्थियों का हस्तक्षेप विद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में भी होगा। विशेष परिस्थितियों में सीनेट में छात्र प्रतिनिधि भी बुलाए जाएंगे। छात्र संसद गठन के बाद छात्र अपनी माँगों को लेकर धरना प्रदर्शन के बजाय प्रतिनिधियों को अपनी परेशानियों से अवगत कराएंगे।

छात्र संसद का ढाँचा इस तरह से होगा-
छात्र संसद का ढाँचा भारतीय संसद से मिलता-जुलता रहेगा। विद्यालय के सभी विभागों के विद्यार्थी मिलकर 60 सांसद चुनेंगे। इन 60 लोगों में तकरीबन 12 से 15 कमेटी बनेगी। चुने हुए विद्यार्थी सांसद, सर्वोच्च पद का चुनाव करेंगे। कमेटी छात्रों से संबंधित कार्यों की मॉनीटरिंग करेगी। संसद का कार्यकाल 1 वर्ष का होगा। विद्यालय प्रंसिपल संसद की निगरानी करेंगे।

योग्यता – चुनाव केवल मेधावी छात्र ही लड़ सकेंगे। चुनाव लड़ने के लिए छात्र को 7 वर्ष पुराना विद्यार्थी होना आवश्यक होगा। उद्देश्य इतना ही है किं चुनाव के लिए छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 9 के प्रश्न उत्तर संविधान निर्माण में राजस्थान का योगदान

प्रश्न 3.
संविधान सभा में राजस्थान के सदस्यों के नाम का चार्ट बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिये। संभव हो तो चित्रों (फोटो) का संकलन भी कीजिए।
उत्तर-
संविधान सभा में राजस्थान के सदस्य

नाम/फोटो (चित्र) रियासत
1. मुकुट बिहारी लाल भार्गव अजमेर – मेरवाड़ा
2. माणिक्य लाल वर्मा उदयपुर
3. जयनारायण व्यास जोधपुर
4. बलवंत सिंह मेहता उदयपुर
5. रामचंद्र उपाध्याय अलवर
6. दवेल सिंह कोटा
7. गोकुल लाल असावा शाहपुरा (भीलवाड़ा)
8. जसवंत सिंह बीकानेर
9. राज बहादुर भरतपुर
10. हीरा लाल शास्त्री जयपुर
11. सरदार सिंह खेतड़ी

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 8 के प्रश्न उत्तर आजादी से पूर्व राजस्थान में सामाजिक-शैक्षणिक सुधार

Engaging with these Hamara Rajasthan Book Class 7 Solutions and कक्षा 7 हमारा राजस्थान पाठ 8 के प्रश्न उत्तर आजादी से पूर्व राजस्थान में सामाजिक-शैक्षणिक सुधार will strengthen your knowledge and prepare you for assessments.

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 8 Question Answer in Hindi आजादी से पूर्व राजस्थान में सामाजिक-शैक्षणिक सुधार

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 8 के प्रश्न उत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-

1. आजादी पूर्व राजस्थान में कौन-सी कुप्रथाएँ थीं-
(अ) सती प्रथा
(ब) डाकन प्रथा
(स) बाल विवाह
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

2. 1819 में आधुनिक शिक्षा का पहला स्कूल कहाँ खोला गया?
(अ) जयपुर
(ब) अजमेर
(स) उदयपुर
(द) जोधपुर
उत्तर:
(ब) अजमेर

II. मिलान कीजिए-

1. दास प्रथा (i) उदयपुर
2. अमृता देवी (ii) अजमेर
3. मेयो कॉलेज (iii) कुरीतियाँ
4. विद्याभवन (iv) खेजड़ली आंदोलन

उत्तर:

1. दास प्रथा (iii) कुरीतियाँ
2. अमृता देवी (iv) खेजड़ली आंदोलन
3. मेयो कॉलेज (ii) अजमेर
4. विद्याभवन (i) उदयपुर

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
वनस्थली विद्यापीठ की स्थापना किस उद्देश्य से की गई?
उत्तर:
वनस्थली विद्यापीठ की स्थापना का उद्देश्य पूर्व एवं पश्चिम की आध्यात्मिक विरासत एवं वैज्ञानिक उपलब्धि के समन्वय को व्यक्त करने वाले व्यक्तित्व का विकास करना रहा है।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 8 के प्रश्न उत्तर आजादी से पूर्व राजस्थान में सामाजिक-शैक्षणिक सुधार

प्रश्न 2.
आधुनिक शिक्षा के नाम से खोले गए स्कूलों के बन्द होने का कारण बताइए।
उत्तर:
आधुनिक शिक्षा के नाम से खोले गए स्कूलों में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था, अतः ईसाई धर्म की शिक्षा का विरोध हुआ। परिणामतः ये स्कूल बंद कर दिए गए।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
नानाभाई, सेंगाभाई एवं कालीबाई की जीवनी को बताइए।
उत्तर:
नाना भाई खांट डूंगरपुर में पाठशाला के संचालक थे, सेंगा भाई उसी पाठशाला में अध्यापक थे, जबकि कालीबाई डूंगरपुर गाँव की 13 वर्षीय भील बालिका थी। पाठशाला द्वारा जनजागृति का कार्य किया जा रहा था, जो कि वहाँ के महारावल को पसंद नहीं था। अतः उन्होंने पाठशाला को बंद करने के लिए मजिस्ट्रेट व पुलिस को भेजा। पुलिस ने नानाभाई को पाठशाला बंद करने को कहा, उनके मना करने पर उन्हें गोली मार दी गई, जबकि सेंगा भाई को पीटकर रस्सी से गाड़ी के पीछे बांध दिया गया। किसी भी व्यक्ति ने प्रतिरोध नहीं किया परन्तु बालिका कालीबाई जो खेत से घास काटकर आ रही थी, उसने हिम्मत दिखाई और सेंगा भाई की रस्सी को दाँतली से काट दिया। यह देखकर पुलिस ने नन्हीं बालिका पर अंधाधुंध गोलियाँ बरसाईं। कालीबाई अपने गुरु की रक्षा करते हुए शहीद हो गई। इस प्रकार, नाना भाई की हिम्मत, सेंगा भाई की सहनशीलता व कालीबाई के त्याग ने शिक्षा के प्रति समर्पण, लगन और गुरुभक्ति की मिसाल प्रस्तुत की।

प्रश्न 2.
बाल विवाह किसे कहते हैं? समझाइए
उत्तर:
बाल विवाह कम उम्र या अवयस्क बालक बालिकाओं का विवाह कर देना बाल विवाह कहलाता है, यह एक कुप्रथा है। इससे बालक-बालिकाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जो कि किसी भी प्रगतिशील समाज के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है।

राष्ट्रीय स्तर पर बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने हेतु समाज सुधारक स्वामी दयानन्द सरस्वती ने आवाज उठाई। परिणामस्वरूप, 10 दिसम्बर, 1903 को अलवर रियासत ने बाल विवाह निषेध कानून बनाया। भारत स्तर पर, बाल विवाह पर रोक संबंधी कानून सर्वप्रथम सन् 1929 में पारित किया गया। सन् 1949, 1978 और 2006 में इसमें संशोधन किए गए। वर्तमान में विवाह हेतु बालिकाओं की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और बालकों की 21 वर्ष निर्धारित है।

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 8 Important Question Answer in Hindi

I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-

1. राजस्थान में ब्रिटिश शासन का प्रभाव रहा-
(अ) 1818 से 1947 तक
(ब) 1857 से 1947 तक
(स) 1915 से 1947 तक
(द) 1935 से 1943 तक
उत्तर:
(अ) 1818 से 1947 तक

2. लॉर्ड विलियम बैंटिक ने सती प्रथा को कब गैर कानूनी घोषित किया?
(अ) 1818 ई. में
(ब) 1829 ई. में
(स) 1832 ई. में
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) 1818 ई. में

3. राजस्थान में कन्या वध की कुप्रथा को सर्वप्रथम किस राज्य ने गैर कानूनी घोषित किया?
(अ) कोटा
(ब) बीकानेर
(स) जोधपुर
(द) अलवर
उत्तर:
(ब) बीकानेर

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 8 के प्रश्न उत्तर आजादी से पूर्व राजस्थान में सामाजिक-शैक्षणिक सुधार

4. अंग्रेजों ने 1833 ई. के चार्टर अधिनियम द्वारा किस प्रथा को समाप्त किया?
(अ) कन्या वध
(ब) सती प्रथा
(स) दास प्रथा
(द) डाकन प्रथा
उत्तर:
(स) दास प्रथा

II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-

1. भारतीय समाज में ……………. से ही शिक्षा का महत्त्व रहा है।
उत्तर:
प्राचीन काल

2. ……………. ई. में अंग्रेजी भाषा को राजकीय भाषा बना दी गई।
उत्तर:
1835

3. डूंगरपुर राज्य में जनजागृति हेतु सेवा संघ द्वारा ……………. खोली गईं।
उत्तर:
पाठशालायें

4. 10 मार्च, 1905 को जन्मे ……………. सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में प्रसिद्ध हैं।
उत्तर:
मामा बालेश्वर दयाल।

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
प्राचीन काल में किस तरह का जातिगत स्वरूप विद्यमान था?
उत्तर:
प्राचीन काल में समाज में वर्णव्यवस्था पर आधारित जातिगत स्वरूप विद्यमान था, जो श्रम और कार्य विभाजन पर आधारित सकारात्मक व्यवस्था थी।

प्रश्न 2.
ब्रिटिश सरकार किस कारण भारतीय जनता के सामाजिक और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती थी?
उत्तर:
अपनी अहस्तक्षेप नीति के चलते ब्रिटिश सरकार भारतीय जनता के सामाजिक और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती थी।

प्रश्न 3.
सती प्रथा को रोकने का प्रयास किन मुस्लिम शासकों ने भी किया?
उत्तर:
मध्यकाल में मुहम्मद बिन तुगलक और अकबर ने भी सती प्रथा को रोकने के प्रयास किए।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 8 के प्रश्न उत्तर आजादी से पूर्व राजस्थान में सामाजिक-शैक्षणिक सुधार

प्रश्न 4.
डाकन प्रथा का प्रचलन सर्वाधिक कहाँ था?
उत्तर:
राजस्थान के मेवाड़ और कोटा राज्यों में डाकन प्रथा का प्रचलन अधिक था।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान में शिक्षा की स्थिति एवं सुधार की ओर उठाए गए कदम की समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में शिक्षा विभिन्न कालक्रमों से गुजरी है। अंग्रेजी प्रशासन ने 19वीं शताब्दी से पूर्व की शिक्षा को देशी शिक्षा का नाम दिया। जबकि इसके बाद की शिक्षा को अंग्रेजी शिक्षा, पाश्चात्य शिक्षा या आधुनिक शिक्षा का शीर्षक प्रदान किया। इस प्रकार, 19वीं शताब्दी में जहाँ शिक्षा का प्रारम्भिक स्वरूप नजर आता है तो वहीं अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव भी स्पष्ट होता है।

सन् 1819 ई. में आधुनिक शिक्षा का प्रथम विद्यालय अजमेर में खोला गया, तत्पश्चात् पुष्कर, भिनाय एवं केकड़ी में भी शिक्षण संस्थायें खुलीं। सन् 1835 में अंग्रेजी भाषा को राजकीय भाषा बना दी गई। अतः अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली का महत्त्व बढ़ा और रियासतों में आधुनिक शिक्षा प्रणाली अपनाने वाले शिक्षण संस्थायें खुलने लगीं। सन् 1872 में वायसराय लॉर्ड मेयो के नाम पर अजमेर में मेयो कॉलेज की स्थापना हुई, जिसका प्रथम सत्र 1875-76 में प्रारंभ हुआ। इसी क्रम में, पण्डित जनार्धन राय नागर ने सभी के लिए शिक्षा उद्देश्य से 21 अगस्त, 1937 को राजस्थान विद्यापीठ संस्था की स्थापना की।

प्रश्न 2.
राजस्थान में महिला शिक्षा हेतु किए गए प्रयासों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सन् 1861 ई. में मिशनरी संस्था कन्या वर्नाकुलर स्कूल प्रारम्भ किया गया। सरकार द्वारा 1866 ई. में पुष्कर अजमेर मेरवाड़ा केन्द्र शासित क्षेत्र में प्रथम सरकारी कन्या स्कूल खोला गया। इसके साथ ही देशी रियासतों में महिला शिक्षा को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए गए। परिणामस्वरूप, उदयपुर, जयपुर, भरतपुर, अलवर, कोटा, झालावाड़, टोंक, बीकनेर आदि रियासतों में कन्या विद्यालय की शुरुआत की गई।

हीरालाल शास्त्री ने अपनी पत्नी रतन शास्त्री के सहयोग से महिला शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु वनस्थली विद्यापीठ की स्थापना की। श्रीमती रतन शास्त्री को महिला शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिला के तौर पर जाना जाता है। महिला शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के कारण इन्हें कई सम्मान मिले, जिनमें पद्मश्री, पद्मभूषण एवं जमनालाल बजाज अवार्ड प्रमुख हैं।

V. निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. आजादी से पूर्व राजस्थान में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व राजस्थान में सती प्रथा, कन्या वध, बाल विवाह, अनमेल विवाह, दास प्रथा व डाकन प्रथा जैसी कुरीतियाँ प्रचलित थीं। इन कुरीतियों का परिचय निम्नलिखित है-

1. सती प्रथा – पति की मृत्यु के पश्चात् उसकी पत्नी को अपने पति की चिता में जलना सती प्रथा थी। यह कुप्रथा भारत के अन्य क्षेत्रों के साथ राजस्थान में भी प्रचलित थी। ब्रिटिश काल में राजा राममोहन राय के अथक प्रयासों के वशीभूत होकर लॉर्ड विलियम बैंटिक ने सन् 1829 ई. में कानून बनाकर सती प्रथा को गैर कानूनी घोषित कर दिया।

2. कन्या वध – कन्या वध की कुप्रथा का प्रचलन भी जोरों पर था, लोग कन्याओं को पैदा होते ही मार देते थे। राजस्थान में कन्या वध कुप्रथा को सर्वप्रथम कोटा राज्य ने गैर कानूनी घोषित किया। तत्पश्चात् बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और अलवर राज्यों ने इस प्रथा को गैर कानूनी घोषित किया।

3. बाल विवाह एवं अनमेल विवाह – कम उम्र की कन्याओं का विवाह उनसे अधिक उम्र के पुरुषों से करना अनमेल विवाह कहलाता है। जबकि कम उम्र के अवयस्क बालक- बालकाओं का विवाह कर देना बाल विवाह कहलाता है। वे दोनों ही कुप्रथाएँ समाज में प्रचलित थीं। इससे बालक- बालिकाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है जो कि प्रगतिशील समाज के लिए उपयुक्त नहीं होता। राष्ट्रीय स्तर पर इन कुप्रथाओं को रोकने हेतु स्वामी दयानन्द सरस्वती ने आवाज उठाई। जबकि राजस्थान में 10 दिसम्बर, 1903 को अलवर रियासत ने बाल विवाह और अनमेल विवाह निषेध कानून बनाया।

4. दास प्रथा – भारत में यह प्रथा प्राचीन काल से अस्तित्व में थी। राजस्थान भी इससे बच नहीं था। दास शासकों, सामंतों या धनिकों के यहाँ सेवा सुश्रुषा के लिए रखे जाते थे। दासों की संख्या के आधार पर कुल और परिवारों की प्रतिष्ठा एवं उच्चता का आंकलन होता था। इस प्रथा को चाकर या हाली के तौर पर जाना जाता था। इस कुप्रथा को अंग्रेजों ने 1833 ई. के चार्टर अधिनियम द्वारा समाप्त किया।

5. डाकन प्रथा – यह अंधविश्वास पर आधारित कुप्रथा थी। इस कुप्रथा के तहत राजस्थान में कुछ जातियों में स्त्रियों पर डाकन होने का आरोप लगाकर उन्हें मार डाला जाता था। मेवाड़ और कोटा में इसका प्रचलन अधिक था। सन् 1833 ई. में ए. जी. जी. राजपूताना ने इस प्रथा के उन्मूलन हेतु रियासतों के शासकों पर दबाव डाला। परिणामत: इस कुप्रथा को निषेध कर दिया गया।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 8 के प्रश्न उत्तर आजादी से पूर्व राजस्थान में सामाजिक-शैक्षणिक सुधार

प्रश्न 2.
आजादी से पूर्व राजस्थान में सामाजिक एवं शैक्षणिक सुधार करने वाले जननायकों का परिचय दीजिए।
उत्तर:
राजस्थान की भूमि पर ऐसे जननायक भी हुए हैं. जिन्होंने समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के साथ ही शैक्षणिक सुधर कार्य भी किए। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-

1. भोगीलाल पण्ड्या – ये सन् 1904 में डूंगरपुर में जन्मे। इन्होंने डूंगरपुर में विद्यालय की स्थापना की। इसके अतिरिक्त इन्होंने प्रौढ़ों के लिए भी पाठशाला स्थापित की, वह आगे चलकर वागड़ सेवा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

2. नाना भाई खांट, सेंगा भाई, कालीबाई – नाना भाई खांट डूंगरपुर में जन-जागृति हेतु सेवा संघ द्वारा खोली गई पाठशाला के संचालक थे, उसी पाठशाला में सेंगाभाई अध्यापक थे। जबकि कालीबाई पाठशाला में पढ़ने वाली 13 वर्षीय भील कन्या थी। महारावल को पाठशाला द्वारा पठन-पाठन पसंद नहीं था, अतः उसने उसे बंद करवाने हेतु पुलिस भेजा। नाना भाई द्वारा मना किए जाने पर पुलिस ने उनकी हत्या कर दी। बीच-बचाव करने पर सेंगा भाई को पहले तो पीटा गया। फिर रस्सी से बाँधकर गाड़ी से खींचा गया, यह देख कालीबाई ने दांतली से अपने गुरु की रस्सी काट दी। इस पर पुलिस ने उस बालिका पर गोलियाँ चलाई। अल्पायु में कालीबाई शहीद हो गयी।

इस प्रकार, नाना भाई खांट, सेंगा भाई व कालीबाई ने शिक्षा हेतु त्याग किया।

3. करणी सिंह – बीकानेर रियासत के महाराजा करणी सिंह का जन्म 1924 ई. में हुआ था। इनके द्वारा बालिका शिक्षा हेतु सराहनीय प्रयास किए गए। इन्होंने सहशैक्षिक गतिविधियों के उन्नयन हेतु खेलकूद, निशानेबाजी आदि को प्रोत्साहित किया एवं छात्रवृत्ति की शुरुआत की।

4. हीरालाल शास्त्री – इनका जन्म जयपुर के जोबनेर में एक कृषक परिवार के घर 24 नवम्बर, 1899 में हुआ। समाज सेवा की भावना से ये बचपन से ओत-प्रोत थे। सन् 1929 में इन्होंने दूरस्थ एवं पिछड़े गाँव वनस्थली को अपना कार्यक्षेत्र चुना। यहाँ इन्होंने जीवन कुटीर नामक संस्था स्थापित की। ये आगे चलकर प्रजामंडल में भी सक्रिय रहे तथा 1948 ई. में जयपुर स्टेट के एवं 30 मार्च, 1949 को राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री बने। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपनी पत्नी के सहयोग से वनस्थली विद्यापीठ की स्थापना भी की।

5. श्रीमती रतन शास्त्री – इन्हें महिला शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जाना जाता है। इन्होंने हीरालाल शास्त्री के सहयोग से वनस्थली विद्यापीठ की स्थापना की। महिला एवं बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान एवं सराहनीय कार्य करने हेतु इन्हें विभिन्न सम्मानों से पुरस्कृत किया गया। जिनमें से प्रमुख हैं— पद्मश्री, पद्मभूषण एवं जमनालाल बजाज अवार्ड।

6. किशोरी देवी – इनका जन्म झुंझुनूं जिले के दुलारों का बास गाँव में हुआ था। ये स्वतंत्रता सेनानी एवं सामजिक कार्यकर्ता थीं। 1938 ई. में इनके पति सरदार हरलाल सिंह को झूठे मुकदमे में फंसाकर वहाँ के जागीरदार ने कारावास में डाल दिया। जिसका विरोध करने के लिए किशोरी देवी ने आंदोलन चलाया। उन्होंने महिलाओं का समूह बनाकर जयपुर में सत्याग्रह भी किया। इसके अतिरिक्त, महिलाओं के उत्थान हेतु कई समाज सुधार कार्य भी किए।

7. मामा बालेश्वर दयाल – इनका जन्म 10 मार्च, 1905 को हुआ तथा ये राजस्थान में सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काफी प्रसिद्ध हैं। इन्होंने भील जनजाति के उत्थान हेतु विशेष कार्य किया। इस हेतु उन्होंने जल, जंगल और जमीन नामक प्रमुख आंदोलन चलाया।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर आजादी का आन्दोलन और राजस्थान

Engaging with these Hamara Rajasthan Book Class 7 Solutions and कक्षा 7 हमारा राजस्थान पाठ 7 के प्रश्न उत्तर आजादी का आन्दोलन और राजस्थान will strengthen your knowledge and prepare you for assessments.

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 7 Question Answer in Hindi आजादी का आन्दोलन और राजस्थान

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-

1. ” ‘चेतावणी रा चंगट्या” नामक प्रसिद्ध सोरठें लिखे थे—
(अ) केसरी सिंह बारहठ ने
(ब) अर्जुन लाल सेठी ने
(स) जोरावर सिंह बारहठ ने
(द) राव भोपाल सिंह खरवा ने
उत्तर:
(अ) केसरी सिंह बारहठ ने

2. राव सवाई कृष्ण सिंह के समय में बिजोलिया की जनता से लागतें (लाग) ली जाती थी-
(अ) 48 प्रकार की
(ब) 84 प्रकार की
(द) 44 प्रकार की
(स) 88 प्रकार की
उत्तर:
(ब) 84 प्रकार की

II. स्तंभ ‘अ’ एवं ‘ब’ को सुमेलित करें-

स्तंभ ‘अ’ स्तंभ ‘ब’
मारवाड़ प्रजामंडल माणिक्य लाल वर्मा
मेवाड़ प्रजामंडल पं. अभिन्न हरि
जयपुर प्रजामंडल जमनालाल बजाज
बीकानेर प्रजामंडल जयनारायण व्यास
कोटा प्रजामंडल मघाराम वैद्य

उत्तर:

स्तंभ ‘अ’ स्तंभ ‘ब’
मारवाड़ प्रजामंडल जयनारायण व्यास
मेवाड़ प्रजामंडल माणिक्य लाल वर्मा
जयपुर प्रजामंडल जमनालाल बजाज
बीकानेर प्रजामंडल मघाराम वैद्य
कोटा प्रजामंडल पं. अभिन्न हरि

III. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. भगत आंदोलन ……………. द्वारा चलाया गया।
उत्तर:
गोविन्द गुरु

2. 1919 में वर्धा में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना ……………. द्वारा की गयी।
उत्तर:
विजय सिंह पथिक।

IV. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
किन्हीं तीन किसान आंदोलनों के नाम लिखिए।
उत्तर:
तीन किसान आंदोलन निम्न हैं- (i) बिजोलिया आंदोलन (ii) बेगूं किसान आंदोलन, (iii) बूंदी किसान आंदोलन।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर आजादी का आन्दोलन और राजस्थान

प्रश्न 2.
गोविन्द गुरु किसके विचारों से प्रभावित थे?
उत्तर:
गोविन्द गुरु दयानंद सरस्वती के विचारों से बहुत अधिक प्रभावित थे।

V. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
बिजोलिया किसान आंदोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
बिजोलिया किसान आंदोलन – यह आंदोलन धाकड़ जाति के किसानों द्वारा प्रारम्भ किया गया। यह 44 वर्षों तक चला एवं पूर्णतया अहिंसात्मक रहा और मुख्यतः तीन चरणों में विभक्त था – प्रथम चरण (1897 से 1914 तक), दूसरा चरण (1914 से 1923 तक) और तीसरा चरण (1923 से 1941 तक)।

राव सवाई कृष्ण सिंह के समय भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया के किसानों से 84 प्रकार की लागतें ली जाती थी। बाद में प्रजा पर चंवरी कर भी लगा दिया गया। किसानों के विरोध के बाद चंवरी कर की लागत माफ कर दी गयी एवं अन्य लगानों में छूट दी गयी। आगे चलकर, पृथ्वीसिंह ने जनता पर ‘तलवार बन्दी’ की लागत लगा दी। किसानों ने विजयसिंह पथिक के नेतृत्व में आंदोलन जारी रखा, उन्हें माणिक्यलाल वर्मा का भी साथ मिला। इस आंदोलन से जमनालाल बजाज भी जुड़े। एक लंबे संघर्ष के बाद आंदोलन समाप्त हुआ और किसानों से समझौता करके उनकी जमीनें वापिस दी गई।

प्रश्न 2.
प्रजामंडल से आप क्या समझते हैं? इनके नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रजामंडल का अर्थ है, प्रजा का मंडल अथवा संगठन। राजस्थान में प्रजामंडलों ने जन भागीदारी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। जन आंदोलन के संचालन का दायित्व जनता को दिया गया एवं राजस्थान की विभिन्न रियासतों में प्रजामंडलों का गठन किया गया, जिनके नाम हैं-

  • मारवाड़ प्रजामंडल
  • जयपुर प्रजामंडल
  • मेवाड़ राज्य प्रजामंडल
  • बीकानेर राज्य प्रजामंडल
  • कोटा राज्य प्रजामंडल

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 7 Important Question Answer in Hindi

I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-

1. बिजोलिया किसान आंदोलन कितने वर्षों तक चला?
(अ) 11
(ब) 22
(स) 33
(द) 44
उत्तर:
(द) 44

2. बेंगू किसान आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
(अ) जमनालाल बजाज
(ब) विजय सिंह पथिक
(स) रामनारायण चौधरी
(द) पं. नयनूराम
उत्तर:
(स) रामनारायण चौधरी

3. मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना कब हुई?
(अ) सन् 1934 में
(ब) सन् 1936 में
(स) सन् 1938 में
(द) सन् 1939 में
उत्तर:
(अ) सन् 1934 में

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर आजादी का आन्दोलन और राजस्थान

4. सेठ दामोदर दास राठी ने ब्यावर में आर्य समाज की नींव कब रखी?
(अ) 1920 में
(ब) 1921 में
(स) 1935 में
(द) 1947 में
उत्तर:
(ब) 1921 में

II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-

1. देश में जब आजादी का आंदोलन चल रहा था, तब ……………. भी उससे अछूता नहीं रहा।
उत्तर:
राजस्थान

2. मध्यकाल में राजस्थान में ……………. एवं ……………. के मध्य अच्छे सम्बन्ध थे।
उत्तर:
जागीरदारों, किसानों

3. अलवर राज्य में ……………. किसानों की फसलों को नुकसान पहुँचते थे।
उत्तर:
जंगली सूअर

4. ठाकुर कल्याण सिंह ने पूर्व ठाकुर की मृत्यु पर हुए खर्चे के लिए ……………. में वृद्धि कर दी।
उत्तर:
लगान।

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
प्रजामंडलों की भूमिका बताइए।
उत्तर:
प्रजामंडलों ने राजस्थान के लोगों में राजनीतिक चेतना जागृत की एवं बाद में राजस्थान के एकीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 2.
बिजोलिया किसान आंदोलन कितने चरणों में चलाया गया?
उत्तर:
यह आंदोलन मुख्यतः तीन चरणों में सम्पन्न हुआ- प्रथम चरण (1897 से 1914 तक), दूसरा चरण (1914 से 1923 तक) और तीसरा चरण (1923 से 1941 तक)।

प्रश्न 3.
गोविन्द गुरु का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर:
गोविन्द गुरु का जन्म डूंगरपुर राज्य में एक साधारण बंजारा परिवार में हुआ था।

प्रश्न 4.
अर्जुन लाल सेठी कितनी भाषाओं के जानकार थे?
उत्तर:
ये अंग्रेजी, पारसी, संस्कृत, अरबी और पाली के विद्वान थे।

IV. लघुत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान में आजादी का आंदोलन किस प्रकार शुरू हुआ?
उत्तर:
जब देश में आजादी के आंदोलनों का दौर चल रहा था, तब राजस्थान भी इससे अछूता नहीं रहा। इस समय राजस्थान के अजमेर पर अंग्रेजों का प्रत्यक्ष अधिपत्य था जबकि शेष राजस्थान पर देशी राजा-महाराजाओं का शासन था। अतः यहाँ स्वतंत्रता संघर्ष का स्वरूप थोड़ा भिन्न था। धीरे-धीरे अंग्रेजों ने देशी रियासतों के काम-काज में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया था, जिससे कि यहाँ के सामाजिक ताने-बाने में फर्क आया। इन सबके विरुद्ध यहाँ के किसानों एवं जनजातियों ने आवाज बुलंद की एवं संघर्ष किया। कालान्तर में विभिन्न रियासतों में प्रजामंडलों की स्थापना हुई। इन प्रजामंडलों ने लोगों में राजनीतिक चेतना जागृत की एवं उन्हें एकीकृत किया। इस प्रकार, किसान एवं जनजाति आंदोलन राष्ट्रीय आंदोलन बनते गए और राजस्थान में भी स्वतंत्रता की माँग बढ़ी।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर आजादी का आन्दोलन और राजस्थान

प्रश्न 2.
राजस्थान में किसान आंदोलन क्यों हुए?
उत्तर:
मध्यकाल में राजस्थान के जागीरदारों और किसानों के आपसी संबंध मधुर थे। अतः विभिन्न जागीरदार क्षेत्रीय किसानों को अपनी जागीर में बसने हेतु प्रोत्साहित करते थे। परन्तु, बाद में अंग्रेजों एवं राजाओं के मध्य सहायक संधियाँ हुईं जिससे कि अंग्रेजों ने राजाओं से नगद लगान वसूलना प्रारम्भ किया। राजाओं ने यह राशि जागीरदारों से तथा जागीरदारों ने संबंधित किसानों से वसूलनी प्रारंभ की। अंगेजों के संगत में आकर पहले राजा, फिर जागीरदार भोग-विलास एवं ऐशोआराम में संलिप्त हो गए। इस तरह के खर्ची का बोझ भी किसानों पर डाला जाने लगा। इन सभी दिक्कतों से परेशान होकर किसानों ने अपना विरोध जताने के लिए विभिन्न आंदोलन किए।

प्रश्न 3.
बिजोलिया किसान आंदोलन के दौरान किन महान विभूतियों ने अपना सहयोग दिया?
उत्तर:
बिजोलिया किसान आंदोलन धाकड़ जाति के किसानों द्वारा प्रारम्भ कया गया। किसानों के प्रतिनिधि नानजी और ठाकरी पटेल ने मेवाड़ महाराणा से इसकी शिकायत की तथा साधु सीताराम दास, फतहकरण चारण और ब्रह्मदेव ने प्रथम चरण में नेतृत्व किया। दूसरे चरण में विजयसिंह पथिक ने आंदोलन का नेतृत्व किया, उनको माणिक्यलाल वर्मा का भी साथ मिला। आंदोलन के तीसरे चरण में जमनालाल बजाज ने नेतृत्व की कमान सँभाली। अंजना देवी चौधरी, रमा देवी, नारायणी देवी वर्मा जैसी महिला नेत्रियों ने भी इस आंदोलन में अपना योगदान दिया। लगभग 44 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद आंदोलन सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।

प्रश्न 4.
संप सभा के बारे में आप क्या जानते हैं? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
संप सभा-संप सभा की स्थापना गोविंद गुरु ने सन् 1883 ई. में की, जिसका प्रथम अधिवेशन 1903 में हुआ। गोविंद गुरु ने इस सभा की स्थापना आदिवासियों को संगठित करने के लिए की थी। गोविंद गुरु के अनुयायी भगत कहलाते थे, अतः संप सभा को भगत आंदोलन भी कहा गया है। संप का अर्थ है एकजुटता, प्रेम और भाईचारा संप सभा का मुख्य उद्देश्य समाज सुधार था। संप सभा की शिक्षाएँ थीं— रोजाना स्नानादि करो, यज्ञ एवं हवन करो, शराब मत पीओ, मांस मत खाओ, चोरी व लूटपाट मत करो, खेती मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करो, बच्चों को पढ़ाओ, स्कूल खुलवाओ, पंचायतों में फैसले करो, अदालतों के चक्कर मत काटो, राजा- जागीरदारं या सरकारी अफसरों को बेगार मत दो, इनका अन्याय मत सहो अन्याय का मुकाबला करो, स्वदेशी का उपयोग करो, आदि।

V. निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान के प्रमुख किसान आंदोलन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पूर्व में राजस्थान के राजाओं- जागीरदारों के साथ किसानों के संबंध बेहतर थे। परंतु अंग्रेजों के आगमन पर देशी रियासतों के राजाओं ने उनसे सहायक संधियाँ कीं और अंग्रेजों ने उनसे नगद लगान की माँग की। राजाओं ने यह राशि जागीरदारों से तथा जागीरदारों ने आगे किसानों से वसूलना प्रारम्भ किया। किसानों से बेगार भी लिया जाने लगा। परेशान एवं पीड़ित किसानों ने अंततः आंदोलन का रास्ता अपनाया। राजस्थान में कई किसान आंदोलन हुए, जिनमें से कुछ प्रमुख प्रमुख निम्न हैं-
कुछ

• बिजोलिया किसान आंदोलन – यह संगठित किसान आंदोलन वर्तमान भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया में धाकड़ जाति के किसानों द्वारा प्रारंभ किया गया। यह आंदोलन मुख्यत: तीन चरणों में चलाया गया – प्रथम चरण (1897 से 1914 तक), दूसरा चरण ( 1914 से 1923 तक) और तीसरा चरण (1923 से 1941 तक)।

इस आंदोलन में नानजी, ठाकरी पटेल, साधु सीताराम दास, फतहकरण चारण, ब्रह्मदेव, विजयसिंह पथिक, मणिक्यलाल वर्मा, सेठ जमनालाल बजाज आदि समाजसेवी नेताओं की सशक्त भूमिका रही। अंजना देवी चौधरी, रमा देवी, नारायणी देवी वर्मा जैसी महिला नेत्रियों ने भी अपना विशेष योगदान दिया।

• बेगूं किसान आंदोलन – बिजोलिया आंदोलन से प्रेरित होकर मारवाड़ के बेगूं ठिकाने में भी किसानों ने जागीरदार के विरुद्ध आवाज उठाई। पथिक जी के आदेश से रामनारायण चौधरी ने किसानों का नेतृत्व किया। रुपाजी व कृपाजी धाकड़ जैसे नेताओं ने अपना बलिदान देकर आंदोलन को सफल बनाया। प्रशासन को झुकना पड़ा और लगभग 34 लागतें समाप्त की गईं व बेगार भी बंद कर दिया गया।

• अलवर किसान आंदोलन – यह आंदोलन दो कारणों से दो चरणों में चला। प्रथम, अलवर राज्य में जंगली सूअरों का आतंक था, वे किसानों की फसलों को नुकसान पहुँचाते। परन्तु उन्हें मारने की मनाही थी, अतः 1921 में किसानों ने आंदोलन किया। द्वितीय, सन् 1925 में अलवर महाराजा जय सिंह द्वारा की गई लगान वृद्धि के विरुद्ध किसानों ने नीमूचाणा गाँव में सभा का आयोजन किया। इस सभा पर जलियांवाला बाग की तरह अंधाधुंध गोलियाँ चलाई गईं।

• सीकर किसान आंदोलन – जयपुर राज्य के बड़े ठिकानों में से एक सीकर में किसानों ने लगान वृद्धि का विरोध किया। सरदार हरलाल सिंह, नेताराम सिंह तथा पृथ्वी सिंह गोठड़ा इस आंदोलन के प्रमुख नेता थे। किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर गोलियाँ चलीं, जिसकी गूँज लंदन के हाउस ऑफ कॉमंस में हुई। अंततः बंदोबस्त सुधार हेतु किसानों को आश्वस्त करना पड़ा तथा लगान में भी कमी करनी पड़ी।

• शेखावाटी किसान आंदोलन – शेखावाटी के किसानों ने भी लगान वृद्धि का विरोध किया। चिड़ावा में मास्टर कालीचरण ने सेवा समिति का गठन किया। नवलगढ़, मंडावा, डूंडलोद, बिसाऊ, मालासर के किसानों ने भी लगान देने से मना कर दिया। ठिकानेदारों व ठाकुरों ने किसानों पर अत्याचार किये। यहाँ का स्थायी समाधान आजादी के बाद हो पाया।

• अन्य किसान आंदोलन – सन् 1945 में चंडावत में किसान आंदोलन हुआ, जिसे कुचलने के लिए लाठियों व भालों का प्रहार किया गया। सन् 1947 में डाबड़ा में लगान, लाग- बाग, बेगार के विरुद्ध लगभग 600 किसान ठिकानेदार से मिलने गए, तो उन पर बंदूकें, तलवारें व भाले चलवाए गए।

• बूंदी किसान आंदोलन – इस आंदोलन की शुरुआत सन् 1926 में पं. नयनूराम, रामनारायण चौधरी एवं हरिभाई किंकर के नेतृत्व में हुई। किसानों ने लाग-बाग व बेगार का विरोध किया, हीनानक भील को पुलिस की गोली का शिकार होना पड़ा। अंततः बूंदी राज्य प्रशासन ने 1943 में किसानों की माँगें स्वीकार कर ली।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर आजादी का आन्दोलन और राजस्थान

प्रश्न 2.
राजस्थान के जन-जाति आंदोलन के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
राजस्थान में भील व मीणा जैसी जनजातियाँ प्राचीन काल से निवास करती रही हैं। दक्षिणी राजस्थान में भीलों की बाहुल्यता है, जबकि जयपुर एवं आस-पास के क्षेत्रों में मीणा जाति का बाहुल्य है । अंग्रेजी काल में इन जनजातियों का भारी शोषण किया गया, उसी समय कुछ जनसेवकों एवं समाज सुधारकों ने इनमें जागृति उत्पन्न की। इन्होंने अपने अधिकारों हेतु आंदोलन किए, जो कि निम्नलिखित हैं-

• भील आंदोलन – भील जनजाति में जागृति की विचारधारा का सूत्रपात करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका गोविंद गुरु की रही। उन्होंने संप सभा की स्थापना की और भीलों को एकजुट किया। उन्होंने बेगार व अनुचित लागतें न देने हेतु भीलों का आह्वान किया। सन् 1913 में मानगढ़ पहाड़ी पर आश्विन सुदी पूर्णिमा को संप सभा का अधिवेशन किया जा रहा था तब अंग्रेजी सिपाहियों ने पहाड़ी को चारों तरफ से घेरकर अंधाधुंध गोलियाँ चलाई। परिणामतः घटनास्थल पर ही हजारों की संख्या में भील आदिवासी मारे गये और अनगिनत घायल हुए, गोविन्द गुरु के पैर में गोली लगी। इस घटना की सर्वत्र निंदा हुई तथा इसे जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड के समतुल्य माना गया। क्योंकि गोविंद गुरु के अनुयायियों को भगत कहा जाता था, अतः इस आंदोलन को भगत आंदोलन भी कहा गया।

आदिवासी समुदाय के दूसरे मसीहा थे मोतीलाल तेजावत। उन्होंने चित्तौड़गढ़ के मातृकुण्डीयां में किसानों व आदिवासियों को बेगार, लगान, अत्याचार आदि के विरुद्ध संघर्ष हेतु जागृत किया। आंदोलन को गति देने के लिए एकता पर बल दिया गया, अत: इसे एकी आंदोलन भी कहा गया। इस आंदोलन के तहत हजारों आदिवासी उदयपुर में एकत्रित हुए तथा महाराणा को 21 सूत्रीय मांगपत्र दिया, इस मांगपत्र को ‘मेवाड़ की ‘पुकार’ के नाम से जाना जाता है। महाराणा ने तत्काल 18 माँगें मान लीं।

बाँसवाड़ा, देवल और डूंगरपुर में भीलों को संगठित करने में भोगीलाल पंड्या तथा हरिदेव जोशी की भी महती भूमिका रही।

• मीणा आंदोलन – प्रारम्भ में अंग्रेजी शासन ने मीणा जनजाति के एक विशेष वर्ग को शांति व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दे रखी थी। अतः ये मीणा लोग गाँवों की चौकीदारी करते थे। इस तरह के मीणाओं को ‘चौकीदार मीणा’ कहा जाता था। आगे चलकर, राज्य में होने वाली चोरी-डकैती के लिए अक्सर इन मीणाओं को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा और कोई चोरी हुआ माल बरामद न होने पर उस माल की कीमत मीणाओं से वसूली जाने लगी। अंग्रेजी सरकार ने 1924 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत 12 वर्ष से अधिक आयु के मीणा जाति के लोगों को प्रतिदिन समीप के थाने में अपनी उपस्थिति देने हेतु पाबंद कर दिया। इस कानून एवं व्यवहार से मीणाओं में असंतोष व रोष व्याप्त हो गया।

मीणा समाज में व्याप्त विभिन्न बुराइयों का निराकरण करने, जरायम पेशा जैसे कठोर कानून को हटवाने और चौकीदारी प्रथा समाप्त करने के लिए आंदोलन चलाया गया। लगातार कोशिशों के परिणामस्वरूप आजादी के बाद सन् 1952 में जाकर जरायम पेशा कानून समाप्त किया जा सका।

प्रश्न 3.
राजस्थान की प्रमुख रियासतों में प्रजामंडलों की स्थापना पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
पं. जवाहरलाल नेहरू का कथन था कि किसी भी स्थान पर जन आंदोलन तभी आरम्भ किया जा सकता है जब वहाँ की जनता तैयार एवं एकजुट हो। अतः राजस्थान की विभिन्न रियासतों में प्रजामंडल स्थापित किए गए, ताकि वहाँ की प्रजा अर्थात् जन सामान्य को संगठित किया जा सके।

राजस्थान की प्रमुख रियासतों में प्रजामंडलों की स्थापना निम्नवत् हुई-

• मारवाड़ प्रजामंडल – सन् 1934 में भंवरलाल सर्राफ की अध्यक्षता में जयनारायण व्यास ने जोधपुर में मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना की। इस प्रजामंडल आंदोलन को गति देने हेतु सन् 1938 में रणछोड़ दास गट्टारी की अध्यक्षता में मारवाड़ लोक परिषद् का गठन किया गया।

• जयपुर प्रजामंडल – यह राजस्थान का पहला प्रजामंडल था। इसकी स्थापना सन् 1931 में कर्पूरचंद पारगी एवं जमनालाल बजाज के प्रयासों से हुई। सन् 1936 में इस प्रजामंडल का पुनर्गठन हुआ तथा चिरंजीलाल मिश्र के नेतृत्व में इसने कार्य करना शुरू किया। सन् 1938 में जमनालाल बजाज की अध्यक्षता में पहला अधिवेशन हुआ। आगे चलकर हीरालाल शास्त्री भी जयपुर प्रजामंडल के अध्यक्ष बने। इस प्रजामंडल ने रियासत में उत्तरदायी शासन की स्थापना की माँग रखी।

• मेवाड़ राज्य प्रजामंडल – बलवंत सिंह मेहता की अध्यक्षता में 24 अप्रैल, 1938 को मेवाड़ राज्य प्रजामंडल स्थापित किया गया। माणिक्यलाल वर्मा ने इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रजामंडल ने महाराणा पर निरंतर दबाव डाला कि वे अंग्रेजों से संबंध न रखें। स्वतंत्रता संघर्ष में भी प्रजामंडल की सक्रिय भूमिका रही।

• बीकानेर राज्य प्रजामंडल – सन् 1936 में बीकानेर राज्य प्रजामंडल की स्थापना मघाराम वैद्य ने की। राय सिंह नगर में 30 जून, 1946 को प्रजामंडल का खुला अधिवेशन किया गया।

• कोटा राज्य प्रजामंडल – इस हाडौती प्रजामंडल की स्थापना नयनूलाल ने अभिन्न हरि, तनसुख लाल आदि के सहयोग से की। मई 1939 में कोटा में पं. नयनूराम की अध्यक्षता में प्रजामंडल का अधिवेशन हुआ। कोटा राज्य प्रजामंडल के कार्यकर्ताओं ने भी भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया तथा उत्तरदायी शासन की माँग रखी।

• अन्य प्रजामंडल – उपर्युक्त सभी प्रमुख रियासतों के अतिरिक्त पूर्वी राजस्थान के राज्यों में भी प्रजामंडल आंदोलन की गतिविधियाँ समानांतर रूप से संचालित की जाती रहीं। इन सभी राज्यों में उत्तरदायी शासन की संयुक्त माँग उठी।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर आजादी का आन्दोलन और राजस्थान

प्रश्न 4.
राजस्थान के प्रमुख जन नायकों का परिचय दीजिए एवं भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान के कुछ प्रमुख जन नायक निम्नलिखित रहे हैं-

1. गोविंद गुरु – इनका जन्म डूंगरपुर राज्य में एक साधारण बंजारा परिवार में हुआ था। ये दयानंद सरस्वती से अत्यधिक प्रभावित थे। इन्होंने सामाजिक उत्थान के उद्देश्य से संप सभा की स्थापना की। संप सभा के माध्यम से इन्होंने आदिवासियों का चारित्रिक विकास एवं सामाजिक उत्थान किया। आदिवासियों को शराब, मांस, चोरी, लूटमार आदि से दूर रहने का उपदेश दिया। इस प्रकार, गोविंद गुरु ने डूंगरपुर, बांसवाड़ा, दक्षिणी मेवाड़, सिरोही, गुजरात और मालवा के बीच के पहाड़ी प्रदेश में रहने वाले आदिवासियों को संगठित कर दिया।

2. अर्जुन लाल सेठी – इनका जन्म जयपुर में हुआ था। ये अंग्रेजी, पारसी, संस्कृत, अरबी और पाली के विद्वान थे। जयपुर में इन्होंने वर्धमान विद्यालय की स्थापना की, जहाँ देशभर के क्रांतिकारियों को समुचित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था थी। श्री सेठी धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को देश सेवा एवं क्रांति का पाठ भी पढ़ाते थे। राजस्थान में सशस्त्र क्रांति का संगठन करने की जिम्मेदारी श्री सेठी को दी गयी।

3. केसरी सिंह बारहठ – इनका जन्म 21 नवम्बर, 1872 को शाहपुरा में हुआ था। इन्हें राजस्थान में सशस्त्र क्रांति का जनक माना जाता है। इन्होंने राजपूताने के जागीरदारों व रईसों का स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय सहयोग प्राप्त करने का कार्य किया। उदयपुर, जोधपुर व बीकानेर के राजघरानों पर केसरी सिंह बारहठ का गहरा असर था। उन्होंने ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ नामक प्रसिद्ध सोरठा लिखकर मेवाड़ महाराणा को अंग्रेजों के प्रति सचेत किया।

4. विजय सिंह पथिक – इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ, इनका वास्तविक नाम भूपसिंह गुर्जर था। इन्होंने विजय सिंह पथिक के नाम से बिजोलिया किसान आंदोलन के दूसरे चरण का सफल नेतृत्व किया। सन् 1919 में इन्होंने राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की।

5. सेठ दामोदर दास राठी – इनका जन्म मारवाड़ के पोकरण में हुआ था। इनका बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय चर्चाओं की ओर झुकाव था। खरवा के राव गोपाल सिंह से श्री राठी की गहरी मित्रता थी। प्रथम महायुद्ध के दौरान सम्पूर्ण देश में 21 फरवरी, 1915 को क्रांति करने की योजना थी। इस हेतु, राजस्थान में अजमेर व नसीराबाद की छावनी पर कब्जा करने की जिम्मेदारी खरवा के राव गोपाल सिंह और भूपसिंह को दी गई। इस दौरान आर्थिक सहायता सेठ दामोदर दास राठी ने उपलब्ध करवाई थी। सन् 1921 में श्री राठी ने ब्यावर में आर्य समाज की नींव रखी।

6. ठाकुर जोरावर सिंह बारहठ – इनका जन्म 12 सितम्बर, 1883 को उदयपुर में हुआ। ये ठाकुर केसरी सिंह बारहठ के छोटे भाई और अमर शहीद कुंवर प्रताप सिंह के चाचा थे। चाँदनी चौक में लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने वाले रासबिहारी बोस के साथ ठाकुर जोरावर सिंह भी उपस्थित थे। इनको पकड़ने के लिए कोटा सरकार तथा बिहार सरकार ने भारी इनाम की घोषणा कर रखी थी। अतः ये लगातार भूमिगत रहे।

7. कुंवर प्रताप सिंह बारहठ – इनका जन्म 24 मई, 1893 को उदयपुर में हुआ था। ये केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे। इन्होंने रासबिहारी बोस के साथ क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया। इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बरेली जेल में भेज दिया गया, जहाँ कठोर यातनाएँ दी गईं। इनसे अन्य क्रांतिकारियों के बारे में पूछताछ की गई परंतु इन्होंने अपने साथियों के बारे में नहीं बताया। अंग्रेजों की अमानुषिक यातनाओं का शिकार होकर बरेली जेल में अल्पायु में ही शहीद हो गये।

8. राव गोपाल सिंह खरवा – इनका जन्म 19 अक्टूबर, 1872 को राजस्थान में अजमेर के समीप हुआ। ये खरवा स्टेट के प्रशासक थे। इन्होंने राजस्थान में सशस्त्र क्रांति के दौरान विजयसिंह पथिक का पूर्ण सहयोग किया। क्रांति की योजना विफल हो गयी और इन दोनों को टॉडगढ़ किले में नजरबंद कर दिया गया। कुछ दिनों बाद भाग निकले परंतु पुन: सलेमाबाद में पकड़ लिए गए और तिहाड़ जेल भेज दिए गए। सन् 1920 में रिहा होने पर रचनात्मक कार्यों में संलग्न हो गए।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 6 के प्रश्न उत्तर राजस्थान के प्रमुख शासक

Engaging with these Hamara Rajasthan Book Class 7 Solutions and कक्षा 7 हमारा राजस्थान पाठ 6 के प्रश्न उत्तर राजस्थान के प्रमुख शासक will strengthen your knowledge and prepare you for assessments.

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 6 Question Answer in Hindi राजस्थान के प्रमुख शासक

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 6 के प्रश्न उत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-

1. ‘राजपूताने का कर्ण’ कहा जाता है-
(अ) महाराजा रायसिंह
(ब) महाराणा सांगा
(स) मिर्जा राजा जयसिंह
(द) महाराणा प्रताप
उत्तर:
(अ) महाराजा रायसिंह

2. विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया-
(अ) महाराणा प्रताप
(स) महाराजा सूरजमल
(ब) सवाई जयसिंह
(द) महाराणा कुम्भा
उत्तर:
(द) महाराणा कुम्भा

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. ज्योतिष अध्ययन के लिए जंतर-मंतर (वेधशालाओं) का निर्माण ……………. ने करवाया।
उत्तर:
सवाई जयसिंह

2. प्रसिद्ध कवि चन्दवरदायी ने ……………. की रचना की।
उत्तर:
पृथ्वीराज रासो ग्रंथ।

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
महाराजा सूरजमल कहाँ के शासक थे?
उत्तर:
महाराजा सूरजमल भरतपुर के शासक थे।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 6 के प्रश्न उत्तर राजस्थान के प्रमुख शासक

प्रश्न 2.
महाराजा जसवंत सिंह की किन्हीं दो पुस्तकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(1) आनन्द प्रकाश, (2) भाषा भूषण।

IV. लघुत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
सवाई जयसिंह द्वारा किये गए कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
सवाई जयसिंह द्वारा किये गए कार्य – सवाई जयसिंह का अधिकांश समय राज्य के बाहर सैनिक अभियानों, मुगल राजनीति व मालवा में मराठों के प्रसार को रोकने में पूरा हुआ। राजस्थान के इतिहास में सवाई जयसिंह की गणना महान् शासक, सेनापति, विद्वान, आश्रयदाता और नक्षत्र एवं गणित विद्या के ज्ञाता के रूप में की जाती है। सवाई जयसिंह ने नक्षत्रों की गति की गणना हेतु एक शुद्ध सारणी का निर्माण करवाया। ज्योतिष विद्या पर आधारित ‘जयसिंह करीका’ तथा ज्योतिष यंत्रों पर आधारित ‘सिद्धांत सम्राट’ व ‘यंत्रराज’ आदि ग्रंथों का निर्माण करवाया। ज्योतिष अध्ययन हेतु जंतर-मंतर नामक वेधशालाओं का निर्माण करवाया, जो कि जयपुर, दिल्ली, मथुरा, बनारस और उज्जैन में स्थित हैं।

प्रश्न 2.
राणा कुम्भा की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ बताइये।
उत्तर:
सिसोदिया वंश के कला प्रेमी शासक कुम्भा का जन्म 1417 ई. में चित्तौड़ में हुआ तथा 1433 ई. में मेवाड़ के राज सिंहासन पर बैठे। महाराणा कुम्भा के व्यक्तित्व में कटार, कलम और कला की त्रिवेणी थी। सांस्कृतिक दृष्टि से कुम्भा का शासन काल मेवाड़ के इतिहास का स्वर्ण युग था । कुम्भा ने महाराजाधिराज, रायरायन, महाराणा, राजगुरु, दानगुरु, हालगुरु, परमगुरु, चापगुरु आद योग्यता अभिव्यक्त करने वाली उपाधियाँ प्राप्त की हुई थी।

मेवाड़ में स्थित 84 दुर्गों में से 32 दुर्ग, कुम्भा द्वारा निर्मित हैं। कुम्भा ने अचलगढ़ दुर्ग, वसंतगढ़ दुर्ग, भोमट दुर्ग, मंचिंद दुर्ग, कुम्भलगढ़ तथा कुम्भ-श्याम मंदिर, चित्तौड़ के दुर्ग में स्थित विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया। कुम्भा महान संगीतकार भी थे, उनके द्वारा रचित संगीत के ग्रंथों में संगीतराज, संगीत मीमांसा, सूड़ प्रबंध सबसे प्रमुख हैं।

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 6 Important Question Answer in Hindi

I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-

1. जयपुर में जंतर-मंतर का निर्माण किसने करवाया था?
(अ) सवाई जयसिंह
(ब) सवाई मानसिंह
(स) औरंगजेब
(द) मुहम्मदशाह
उत्तर:
(अ) सवाई जयसिंह

2. पृथ्वीराज चौहान के दरबार में लेखक थे-
(अ) चंदवरदायी
(ब) विद्यापति गौड़
(स) पृथ्वीभट्ट
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी

3. महाराणा कुम्भा मेवाड़ के राजसिंहासन पर कब बैठे?
(अ) 1417 ई. में
(ब) 1433 ई. में
(स) 1468 ई. में
(द) 1488 ई. में
उत्तर:
(ब) 1433 ई. में

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 6 के प्रश्न उत्तर राजस्थान के प्रमुख शासक

4. महाराजा सूरजमल ने अपनी योग्यता से भरतपुर राज्य का विस्तार करने हेतु कौन-से इलाके जीते थे?
(अ) फर्रुखनगर
(स) रोहतक
(ब) धौलपुर
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी

II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-

1. राजस्थान में कई ऐसे ……………. हुए हैं, जिन्हें हम वीर और महान कह सकते हैं।
उत्तर:
शासक

2. राणा सांगा अपनी ……………. और ……………. के लिए प्रसिद्ध हैं।
उत्तर:
वीरता, उदारता

3. मारवाड़ के इतिहास में राव मालदेव का शासन मारवाड़ का ……………. कहलाता है।
उत्तर:
“शौर्य युग”

4. महाराणा प्रताप ने ……………. में भी कृषि और वनों के विकास का प्रयास किया।
उत्तर:
संकटकाल।

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
कछवाहा वंश के शासक जयसिंह को ‘मिर्जा राजा’ की उपाधि कब प्राप्त हुई ?
उत्तर:
मुगल बादशाह शाहजहाँ ने सन् 1639 ई. में जयसिंह को ‘मिर्जा राजा’ की उपाधि से विभूषित किया।

प्रश्न 2.
सवाई जयसिंह ने किस आयु में प्रशासन का भार सँभाला?
उत्तर:
सवाई जयसिंह अपने पिता की मृत्यु के पश्चात् मात्र 12 वर्ष की अवस्था में सन् 1699 ई. में राजगद्दी पर बैठे।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 6 के प्रश्न उत्तर राजस्थान के प्रमुख शासक

प्रश्न 3.
भारत में जंतर-मंतर किन स्थानों पर स्थित है?
उत्तर:
सवाई जयसिंह ने भारत में ज्योतिष के अध्यापन हेतु जंतर-मंतर नाम से पाँच वेधशालाएं बनवाई, जो जयपुरं, दिल्ली, मथुरा, बनारस और उज्जैन में स्थित हैं। कुम्भा ने गीतगोविंद की रसिकप्रिया टीका व चंडीशतक की टीका भी लिखी।

प्रश्न 4.
महाराजा सूरजमल की कला व साहित्य भावना प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
महाराजा सूरजमल ने कला मर्मज्ञ के रूप में अपने प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में किले व महल बनवाए। इन्होंने अपने राज्य में साहित्यकारों को संरक्षण दिया।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
मालदेव की उपलब्धियाँ चिह्नित कीजिए।
उत्तर:
राठौड़ वंश के शासक मालदेव स्वतंत्रता प्रेमी एवं महत्त्वाकांक्षी प्रवृत्ति के थे। मारवाड़ के इतिहास में मालदेव का शासन काल ‘शौर्य युग’ कहलाता है। मालदेव ने अपनी निरंतर सैनिक विजयों और कूटनीति से मारवाड़ राज्य की सीमा का विस्तार ही किया। उन्होंने अपने शासन के दौरान कुल 52 युद्ध किए और एक साथ छोटे-बड़े 58 परगनों पर अपना प्रभुत्व जमाए रखा। मालदेव ने सर्वप्रथम भाद्राजूण को जीता, उसके बाद नागौर, मेड़ता, सिवाना व बीकानेर पर भी विजय प्राप्त की। फारसी इतिहासकारों ने मालदेव को ‘हशमत वाला शासक’ नाम दिया है, जिसका अर्थ ताकतवर शासक होता है।

अपनी विजयों एवं राज्य विस्तार के अतिरिक्त मालदेव ने सोजत, मालकोट (मेड़ता) व पोकरण आदि दुर्गों का निर्माण भी करवाया।

प्रश्न 2.
महाराणा प्रताप के संघर्षों को रेखांकित कीजिए।
उत्तर:
उदयसिंह के ज्येष्ठ पुत्र राणा प्रताप का राज्याभिषेक 28 फरवरी, 1572 ई. को हुआ। शासन भार ग्रहण करते ही उन्हें अनेकानेक कठिनाइयों से जूझना पड़ा, जैसे—मुगल शासक अकबर की मेवाड़ पर अधिकार करने की इच्छा, मेवाड़ की आर्थिक एवं सैन्य शक्ति को सुदृढ़ करना, भाई जगमाल का नाराज होकर अकबर से जा मिलना आदि। इन सब के बावजूद महाराणा प्रताप ने कभी घुटने नहीं टेके। उन्होंने मुगलों को लगातार चुनौती दी, अकबर की अधीनता को स्वीकार नहीं किया।

महाराणा प्रताप अपनी वीरता और युद्ध कला के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने व्यक्तित्व से मेवाड़ के प्रत्येक व्यक्ति को मातृभूमि की स्वतंत्रता एवं अक्षुण्णता हेतु सब कुछ न्यौछावर कर देने वाला योद्धा बना दिया। इसके साथ ही उन्होंने मानवाधिकारों का भी पोषण किया और प्रजा के सुख-दुःख का बराबर ध्यान रखा। महाराणा प्रताप ने संकटकाल में भी कृषि और वनों के विकास का प्रयास किया तथा इन विषयों पर आधारित ‘विश्व वल्लभ’ जैसी पुस्तक भी लिखवाई।

प्रश्न 3.
महाराजा राजसिंह प्रथम की धार्मिक सद्भावना का परिचय दें।
उत्तर:
महाराणा जगतसिंह के पुत्र राजसिंह ने मेवाड़ का शासक बनने के पश्चात् उत्तराधिकार के युद्ध में औरंगजेब का भरपूर साथ दिया। परंतु औरंगजेब की धार्मिक नीतियों ने राजसिंह को उसका विरोधी बना दिया। औरंगजेब ने हिन्दू धर्म विरोधी अभियान चला रखा था और मंदिरों एवं मूर्तियों को लगातार नष्ट करवाया जा रहा था । अतः ब्रज से गोवर्धननाथ (श्रीनाथजी) की मूर्ति को लेकर आए हुए गोस्वामी भक्तों को महाराजा राजसिंह ने शरण दी। उन्होंने सिंहाड़ (नाथद्वारा) में श्रीनाथजी की मूर्ति और द्वारिकाधीश की मूर्ति कांकरोली (राजसमंद) में स्थापित कर वहाँ मंदिर बनवाया। इसके अतिरिक्त, उदयपुर में अम्बामाता का मंदिर और अनेक जलस्रोत भी बनवाए। कांकरोली में राजसमंद झील का सौंदर्य विश्व प्रसिद्ध है।

प्रश्न 4.
पृथ्वीराज चौहान की वीरता एवं साहस का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पृथ्वीराज रासो के आदिपर्व में, पृथ्वीराज चौहान के गुणों का वर्णन किया गया है। महाराज सोमेश्वर के पूर्व जन्मों की तपस्या के फलस्वरूप ही, पृथ्वीराज जैसे गुणी पुत्र का उनके घर जन्म हुआ। पृथ्वीराज चौहान की तुलना उस समय महान परमार राजा विक्रमादित्य परमार से की गई है। निःसंदेह पृथ्वीराज 32 गुणों से सुशोभित एक महान राजा थे। बाल्यकाल से ही इस वीर ने, अपने पराक्रम का डंका शक्तिशाली साम्राज्यों के बीच बजा दिया। पृथ्वीराज चौहान को विशाल साम्राज्य अपने तात श्री विग्रहराज चौहान से विरासत में मिला था। लगभग 1168 ई. में पृथ्वीराज चौहान का 15 वर्ष की अल्पायु में राजतिलक किया गया, उनकी संरक्षिका थीं उनकी स्वयं की माता कर्पूरदेवी।

एक विशाल साम्राज्य पृथ्वीराज के पास पूर्व से ही था, अब तो समय दिग्विजय करने का था। इस दिग्विजय को पूर्ण करने के सामने बड़ी शक्ति थी चंदेल, कीर्तिसागर के मैदान पर चंदेलों और चौहानों के बीच बड़ा भयंकर युद्ध हुआ। दोनों पक्षों की ओर से भारी जन-धन की हानि हुई। अंततः इस युद्ध में पृथ्वीराज विजयी हुए तथा चंदेलों ने चौहानों की प्रभुता स्वीकार कर ली। इसके पश्चात् पृथ्वीराज ने चालुक्यों को परास्त किया और अपनी प्रतिज्ञा पूरी करते हुए अपने पिता के हत्यारे भीमदेव का शीष धड़ से अलग कर दिया। इस प्रकार, वे लगातार विजय प्राप्त करते गए।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 6 के प्रश्न उत्तर राजस्थान के प्रमुख शासक

V. निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान के प्रमुख शासकों का परिचय दीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में कई ऐसे शासक हुए हैं, जिन्हें हम वीर और महान कह सकते हैं क्योंकि उन्होंने अपने कार्यों से प्रदेश को गौरवान्वित किया है। ऐसे ही कुछ प्रमुख शासकों का परिचय निम्नलिखित है-

• पृथ्वीराज चौहान ( 1177-1192 ई.)- पृथ्वीराज चौहान का जन्म सन् 1166 ई. में गुजरात के पाटण में हुआ था। उनके पिता का नाम सोमेश्वर एवं माता का नाम कर्पूरदेवी था। पृथ्वीराज की अल्पायु में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई। ऐसी स्थिति में माता कर्पूरदेवी ने संरक्षिका के रूप में शासन का भार संभाला। शासक बनने के उपरांत पृथ्वीराज चौहान ने सर्वप्रथम अपनी आंतरिक शक्ति को बढ़ाया। उनमें योग्य प्रशासक, वीर एवं साहसी योद्धा व सेनानायक तथा विद्यानुरागी आदि सभी गुण विद्यमान थे। अतः पृथ्वीराज चौहान का नाम भारत के प्रतापी शासकों में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।

• महाराणा कुम्भा (1433-1468 ई) – परमार वंश के कलाप्रेमी शासक महाराणा कुम्भा का जन्म सन् 1417 ई. में चित्तौड़ में हुआ। उन्होंने 1433 ई. में मेवाड़ का शासन भार संभाला। महाराणा की उपलब्धियों में बूंदी, सिरोही, गागरोन व वागड़ की विजय तथा मेवाड़ की मारवाड़ से मैत्री संबंध महत्त्वपूर्ण हैं। कुम्भा का शासन काल मेवाड़ के इतिहास का स्वर्ण युग था। मेवाड़ में स्थित 84 दुर्गों में से 32 दुर्ग कुम्भा ने बनवाए। कुम्भा महान संगीतकार व साहित्यकार भी थे। इस प्रकार, महाराणा कुम्भा के व्यक्तित्व में कटार, कला व कलम की त्रिवेणी विद्यमान थी।

• महाराणा सांगा (1509-1528 ई.) – इनका जन्म 12 अप्रैल, 1482 को चित्तौड़ में हुआ, इनका वास्तविक नाम संग्राम सिंह था। इनके पिता राणा रायमल थे। राणा सांगा ने उत्तराधिकार के युद्ध में विजय प्राप्त करके मेवाड़ का शासन संभाला। इन्होंने लोधी वंश के अफगान राजाओं तथा तुर्की के मुगलों से निरंतर लोहा लिया और अपने राज्य की सुरक्षा की। महाराणा सांगा एक पराक्रमी योद्धा थे, साथ ही अपनी वीरता और उदारता के लिए प्रसिद्ध हैं। इन्होंने सभी राजपूत राज्यों को संगठित कर राजपूताना संघ का निर्माण एवं नेतृत्व किया।

• मालदेव (1532-1562 ई.) – मालदेव राठौड़ वंश के राव गांगा के पुत्र थे, इनका जन्म 5 दिसम्बर, 1511 ई. को हुआ। मालदेव 1532 ई. में मारवाड़ के शासक बने। वे स्वतंत्रता प्रेमी एवं महत्त्वाकांक्षी प्रवृत्ति के थे । उन्होंने कभी भी तत्कालीन सूर वंश या हुमायूँ द्वारा सत्ता को पुनः प्राप्ति कर लेने पर मुगल वंश के साथ अपने राज्य का विलय नहीं किया। बल्कि निरंतर सैनिक विजयों और कूटनीति से मारवाड़ की सीमा का विस्तार किया। अतः राव मालदेव का शासन काल मारवाड़ का शौर्य युग कहलाता है।

• महाराणा प्रताप ( 1572-1597 ई.) – महाराणा प्रतापका जन्म 9 मई, 1540 ई. को कुम्भलगढ़ में हुआ। ये उदयसिंह के ज्येष्ठपुत्र थे, इनकी माता का नाम जयवन्ता बाई था। राणा प्रताप का राज्याभिषेक 28 फरवरी, 1572 ई. को किया गया। महाराणा प्रताप अपनी वीरता और युद्ध कला के लिए जाने जाते हैं। इन्होंने महत्त्वाकांक्षी मुगल शासक अकबर की अधीनता कभी स्वीकार नहीं की। अपितु अपनी मातृभूमि मेवाड़ की रक्षार्थ अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया।

• महाराजा रायसिंह ( 1574 – 1612 ई.) – रायसिंह का जन्म 20 जुलाई, 1541 ई. को बीकानेर के राव कल्याणमल के घर ज्येष्ठ पुत्र के तौर पर हुआ। महाराजा रायसिंह का राज्याभिषेक 1574 ई. में हुआ । इन्होंने अपने रणकौशल का परिचय देते हुए गुजरात, काबुल, कंधार एवं दक्षिण भारत के अभियानों में सफलता प्राप्त की। ये अपनी दानशीलता हेतु प्रसिद्ध थे, अतः इन्हें ‘राजपूताने का कर्ण’ भी कहते हैं।

• मिर्जाराजा जयसिंह (1621 – 1667 ई.) – जयसिंह प्रथम का जन्म 15 जुलाई, 1611 ई. को आमेर में हुआ था। इनके पिता राजा माहा सिंह तथा माता दमयंती थीं। ये सन् 1621 ई. में आमेर की राजगद्दी पर बैठे और विभिन्न सैनिक अभियानों में अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन किया। शाहजहाँ ने 1639 ई. में जयसिंह को ‘मिर्जा-राजा’ की उपाधि दी। मिर्जा-राजा जयसिंह वीर सेनानायक और कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ साहित्य और कला के प्रेमी भी थे।

• महाराजा जसवन्त सिंह (1638-1678 ई.) – जसवन्त सिंह का जन्म दिसम्बर, 1626 ई. में बुरहानपुर में हुआ था। इनके पिता गजसिंह की मृत्यु के उपरांत इनका राज्याभिषेक किया गया। इन्होंने मुगल उत्तराधिकार युद्ध में शाहजहाँ का साथ दिया, अतः शाहजहाँ ने इन्हें ‘महाराजा’ की उपाधि प्रदान की। इन्होंने मुगलों के लिए अनेक सैनिक अभियान किए, दक्षिण भारत में औरंगाबाद के निकट जसवंतपुरा कस्बा बसाया।

• महाराजा राजसिंह प्रथम ( 1652 – 1680 ई.) – महाराणा जगतसिंह के पुत्र राजसिंह का जन्म 24 सितम्बर, 1629 को हुआ, इनकी माता का नाम महारानी मेडतणीजी था। मात्र 23 वर्ष की छोटी आयु में उनका राज्याभिषेक हुआ। उन्होंने मुगल उत्तराधिकार के युद्ध में औरंगजेब का साथ दिया, परंतु उसकी धर्मान्धता ने उन्हें उसका विरोधी बना दिया। महाराजा ने औरंगजेब का निरंतर विरोध किया और हिन्दू धर्म की रक्षा की।

• सवाई जयसिंह ( 1699 – 1743 ई.) – इनका जन्म 3 नवम्बर, 1688 ई. को आमेर में हुआ। इनके पिता महाराजा बिशन सिंह की मृत्यु के पश्चात् 12 वर्ष की अवस्था में इन्होंने 1699 में राजगद्दी की जिम्मेदारी संभाली। इनका अधिकांश समय सैनिक अभियानों, मुगल राजनीति और मराठों का विरोध करने में पूर्ण हुआ। तत्कालीन मुगल सम्राट औरंगजेब ने उन्हें ‘सवाई’ की उपाधि प्रदान की। राजस्थान के इतिहास में सवाई जयसिंह की गिनती महान शासक, सेनापति, विद्वान, आश्रयदाता और नक्षत्र एवं गणित विद्या के जानकार के तौर पर होती है।

• महाराजा सूरजमल (1755 1763 ई.) – महाराजा सूरजमल का जन्म फरवरी, 1707 में हुआ। इनके पिता बदनसिंह ने अपनी अस्वस्थता को देखते हुए, 1755 ई. में इन्हें जाट साम्राज्य का राजा बना दिया। सूरजमल वीर सेनानायक, चतुर कूटनीतिज्ञ एवं कलाप्रेमी शासक थे। इन्होंने अपनी योग्यता से भरतपुर राज्य को विस्तारित किया और गाजियाबाद, रोहतक, झज्जर, आगरा, धौलपुर, मैनपुरी, हाथरस, बनारस व फर्रुखनगर आदि को जीत लिया।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 5 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में व्यापार

Engaging with these Hamara Rajasthan Book Class 7 Solutions and कक्षा 7 हमारा राजस्थान पाठ 5 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में व्यापार will strengthen your knowledge and prepare you for assessments.

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 5 Question Answer in Hindi राजस्थान में व्यापार

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 5 के प्रश्न उत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-

1. राजस्थान में निम्नांकित में से कौन-सा उद्योग बड़े उद्योग की श्रेणी में आता है?
(अ) घाणी तेल
(ब) शहद
(स) सूती वस्त्र उद्योग
(द) खादी सिल्क
उत्तर:
(स) सूती वस्त्र उद्योग

2. कौन-सी वस्तु राजस्थान से निर्यात नहीं की जाती है?
(अ) ऊनं
(ब) जवाहरात
(स) पेट्रोल
(द) संगमरमर पत्थर
उत्तर:
(स) पेट्रोल

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. ब्यावर में वर्ष 1889 में ……………. की स्थापना की गयी।
उत्तर:
सूती वस्त्र मिल

2. राजस्थान सरकार ने कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति का निर्माण वर्ष ……………. में किया है।
उत्तर:
2019

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान में आयात की जाने की वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
राजस्थान में चावल, मिट्टी के तेल, खनिज तेल, बिजली के सामान, मशीनरी, परिवहन उपकरणों आद का आयात किया जाता है।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 5 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में व्यापार

प्रश्न 2.
राज्य में निर्यात संवर्धन की दो योजनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. राज्य स्तरीय निर्यात पुरस्कार योजना।
  2. निर्यात प्रोत्साहन, प्रक्रिया एवं दस्तावेजीकरण।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान में कृषि आधारित उद्योगों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में कृषि आधारित उद्योगों को दो श्रेणी में बाँटा जा सकता है-

1. वृहत उद्योग – राजस्थान में कृषि आधारित बड़े उद्योगों में मुख्यतया सूती वस्त्र उद्योग तथा चीनी उद्योग सम्मिलित हैं। सूती वस्त्र उद्योग राजस्थान का प्राचीन एवं सर्वाधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। बड़े उद्योगों में सूती वस्त्रों का उत्पादन मशीनों द्वारा व्यापक स्तर पर किया जाता है। जबकि, चीनी उद्योग के अंतर्गत वृहद मिलों में गन्ने का रस प्रयोग कर चीनी एवं शक्कर का निर्माण किया जाता है।

2. लघु एवं कुटीर उद्योग – राजस्थान राज्य में कृषि आधारित लघु उद्योगों में मुख्यतया खाद्य तेल, गुड़, खांडसारी एवं दाल उद्योग शामिल हैं। जबकि राजस्थान खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड राज्य में खादी के साथ-साथ अन्य कुटीर उद्योगों का भी प्रबंधन करता है । कुटीर उद्योगों में सूती खादी, खादी सिल्क, घाणी तेल, गुड़ तथा खांडसारी, शहद आदि शामिल हैं।

प्रश्न 2.
आयात-निर्यात की परिभाषा एवं महत्त्व को समझाइये।
उत्तर:
आयात-निर्यात वस्तु विनिमय के अंतर्गत अन्य देश या राज्य से वस्तुओं को मंगवाना आयात कहलाता है एवं वस्तुओं को अन्य देश या राज्य में भेजना निर्यात कहलाता हैं।

महत्त्व – आयात-निर्यात राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं एवं स्थानीय जनजीवन के विकास व समुन्नति हेतु अति महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि सभी राज्यों या देशों के पास कुछ विशेष वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करने के लिए आवश्यक संसाधन और कौशल नहीं होता है।

प्रत्येक वस्तु का उत्पादन एक विशेष भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थिति में होता है। वस्तुओं के उत्पादन हेतु विशेष प्राकृतिक संसाधनों, अन्य कौशलों व कई बार विशेष तकनीक की भी आवश्यकता होती है, जो कि सर्वत्र उपलब्ध हो ऐसा जरूरी नहीं है। अतः किसी स्थान विशेष में जिन वस्तुओं का उत्पादन अधिक होता है उसे निर्यात किया जाता है एवं जिन वस्तुओं का उत्पादन कम होता है उसे आयात किया जाता है।

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 5 Important Question Answer in Hindi

I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-

1. राजस्थान में कृषि आधारित बड़े उद्योग हैं-
(अ) सूती वस्त्र उद्योग
(ब) चीनी या शक्कर उद्योग
(स) गुड़ या खांडसारी उद्योग
(द) दोनों (अ) व (ब)
उत्तर:
(द) दोनों (अ) व (ब)

2. राजस्थान में पहली सूती वस्त्र मिल की स्थापना किस वर्ष हुई?
(अ) 1880 में
(ब) 1888 में
(स) 1889 में
(द) 1988 में
उत्तर:
(स) 1889 में

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 5 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में व्यापार

3. वस्तुओं का विनिमय निम्न से संबंधित है-
(अ) आयात
(ब) निर्यात
(स) दोनों (अ) व (ब)
(द) उत्पादन
उत्तर:
(स) दोनों (अ) व (ब)

4. राजस्थान में निम्न का आयात किया जाता है-
(अ) मिट्टी का तेल
(ब) खनिज तेल
(स ) चावल
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी

II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-

1. वर्तमान में ……………. को वस्त्र नगरी के नाम से भी जाना जाता है।
उत्तर:
भीलवाड़ा

2. चीनी मिलें ……………. उत्पादन क्षेत्रों के पास स्थापित की जाती हैं।
उत्तर:
गन्ना

3. जब व्यापार एक राज्य या अन्य राज्य से होता है तो यह ……………. व्यापार कहलाता है।
उत्तर:
अन्तर्राज्यीय

4. ……………. सरसों एवं ग्वार, अजवाइन, धनिया, मेथी, ईसबगोल, ऊन के उत्पादन में अग्रणी है।
उत्तर:
राजस्थान।

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान के आर्थिक विकास में कौनसे क्षेत्र महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
राजस्थान के आर्थिक विकास में कृषि के साथ-साथ उद्योग एवं व्यापार का भी महत्त्वपूर्ण स्थान है।

प्रश्न 2.
राजस्थान में प्रथम सूती वस्त्र मिल की स्थापना कहाँ पर हुई?
उत्तर:
राजस्थान में पहली सूती वस्त्र मिल “द कृष्णा मिल्स लि.” की स्थापना ब्यावर में वर्ष 1889 में की गई थी।

प्रश्न 3.
राजस्थान में कुटीर उद्योगों का प्रबंधन कौन करता है?
उत्तर:
राजस्थान खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड राज्य में खादी के साथ अन्य कुटीर उद्योगों के प्रबंधन का भी कार्य करता है।

प्रश्न 4.
राजस्थान शुद्ध रूप से किन वस्तुओं का आपूर्तिकर्ता है?
उत्तर:
राजस्थान शुद्ध रूप से ज्वार एवं बाजरा, तिलहन, कच्चा सूत, खली, संगमरमर और पत्थर, बांस, सरसों का तेल, निर्मित सूत आदि वस्तुओं का आपूर्तिकर्ता है।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान के सूती वस्त्र उद्योग पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सूती वस्त्र उद्योग – यह राजस्थान में कृषि आधारित मुख्य वृहद उद्योगों में से एक है। सूती वस्त्र उद्योग राजस्थान का प्राचीन, परम्परागत, संगठित एवं सर्वाधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। इस हेतु कपास की खेती की जाती है, जब कपास पक जाते हैं तो उसे बीज से अलग कर रोएं निकाल लिए जाते हैं। रुई को छोटी-छोटी गुच्छी बनाकर चरखे पर काती जाती है जिससे सूत के धागे प्राप्त होते हैं। इन धागों को पहले रंग कर ताने बनाए जाते हैं, फिर ताने को खड्डी पर चढ़ाकर कपड़ा बना लिया जाता है। बड़े उद्योगों में सूती वस्त्रों का निर्माण मशीनों द्वारा बड़े स्तर पर किया जाता है।

राजस्थान में प्रथम सूती वस्त्र मिल की स्थापना सन् 1889 में ब्यावर में की गई। वर्तमान में ब्यावर, भीलवाड़ा, जयपुर, किशनगढ़, पाली, हनुमानगढ़, कोटा, गंगानगर, विजयनगर आदि में सूती वस्त्र की मिलें स्थापित हैं। भीलवाड़ा को वस्त्र नगरी के नाम से भी जाना जाता है।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 5 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में व्यापार

प्रश्न 2.
प्रसंस्करण व निर्यात संवर्धन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
प्रसंस्करण – यह ऐसी प्रक्रिया होती है जिसके द्वारा शीघ्र नष्ट हो जाने वाले कृषि उत्पादों को खाद्य पदार्थ के रूप में रूपांतरित किया जाता है जिससे कि उनका दीर्घावधिक उपयोग हो सके।

निर्यातन संवर्धन – राजस्थान राज्य कई वस्तुओं के उत्पादन में अग्रणी है तथा यहाँ निर्यात की कई संभावनाएँ हैं, किन्तु पर्याप्त निर्यात नहीं हो पा रहा है। इसलिए सरकार ने निर्यात संवर्धन की कई योजनाएँ लागू की हैं, जैसे—- राज्य स्तरीय निर्यात पुरस्कार योजना। इसके साथ-साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत उद्यमियों को अपना निर्यात व्यापार प्रारम्भ करने हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाता है।

राजस्थान काफी समृद्ध है, किन्तु आर्थिक विकास हेतु राज्य में प्रसंस्करण एवं निर्यात संवर्धन को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

V. निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
आयात-निर्यात से क्या अभिप्राय है? राजस्थान के संदर्भ में इस पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
आयात-निर्यात से अभिप्राय-अन्य देशों एवं राज्यों से विभिन्न वस्तुओं को मंगवाना आयात कहलाता है जबकि कुछ वस्तुओं को अपने यहाँ से अन्य देशों एवं राज्यों को भेजना निर्यात कहलाता है।

प्रत्येक वस्तु का उत्पादन एक विशेष भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थिति में किया जाता है। किसी भी वस्तु के उत्पादन हेतु विशेष प्राकृतिक संसाधनों, शारीरिक श्रम, विशेष कौशल व कई बार कुछ तकनीकों की भी आवश्यकता होती है, जो हर राज्य या देश के पास उपलब्ध हो ऐसा जरूरी नहीं है। अतः किसी स्थान विशेष में जिन वस्तुओं का उत्पादन बहुतायत होता है उसे अन्य स्थानों पर बेचा जाता है तथा जिन वस्तुओं का उत्पादन कम होता है उसे अन्य स्थानों से खरीदा जाता है। इस प्रकार वस्तुओं का विनिमय करना व्यापार कहलाता है। व्यापार राज्यों के मध्य होता है तो अन्तर्राज्यीय व्यापार कहलाता है और जब यह राष्ट्रों के मध्य होता है तो अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है।

राजस्थान में आयात-निर्यात की स्थिति – राजस्थान राज्य में जो भी वस्तुएँ उत्पादित की जाती हैं, चाहे कृषि उत्पाद हों, वनोत्पाद हों या फिर औद्योगिक उत्पादन, राज्य में एक स्थान से दूसरे स्थान को भेजी जाती हैं। राजस्थान सरसों, ग्वार, अजवाइन, धनिया, मेथी, ईसबगोल, व ऊन के उत्पादन में अग्रणी है। इसके साथ ही जीरा, मोटे अनाज, सोयाबीन, दालों, तिलहन, सब्जियों, लहसुन, संतरे व दुग्ध के उत्पादन में भी राज्य का प्रमुख योगदान है। इनमें से कई वस्तुओं को वैसे का वैसे जबकि कुछ को प्रसंस्कृत करके राज्य से बाहर भेजा जाता है।

राजस्थान शुद्ध रूप से ज्वार, बाजरा, तिलहन, कच्चा सूत, खली, संगमरमर, पत्थर, बांस, सरसों का तेल, निर्मित सूत आदि का आपूर्तिकर्ता है तथा इनका निर्यात अन्य राज्यों को किया जाता है। जबकि अन्य राज्यों से चावल, मिट्टी के तेल, खनिज तेल, बिजली के सामान, मशीनरी, परिवहन उपकरणों आदि का आयात किया जाता है। राजस्थान से अनेक वस्तुएँ दूसरे देशों को भी निर्यात की जाती हैं। जिनमें शामिल हैं— कपड़ा, जवाहरात एवं आभूषण, आयामी संगमरमर पत्थर, ग्रेनाइट तथा अभ्रक पत्थर की वस्तुएँ, ऊन एवं ऊनी कपड़े, रासायनिक सामग्रियाँ, हस्तशिल्प, चमड़ा एवं चर्म उत्पाद, तैयार वस्त्र, अभियांत्रिकी, कृषि एवं खाद्य उत्पाद, दरियाँ एवं कालीन, धातु (लौह), इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर इत्यादि।

इस प्रकार, राजस्थान राज्य बहुत-सी वस्तुओं के उत्पादन में अग्रणी है तथा यहाँ निर्यात की काफी संभावनाएँ भी हैं, किन्तु पर्याप्त निर्यात हो नहीं पा रहा है। अतः सरकार ने निर्यात संवर्धन की कई योजनाएँ लागू की हैं, जैसे- ‘राज्य स्तरीय निर्यात पुरस्कार योजना’। साथ ही, ‘निर्यात प्रोत्साहन, प्रक्रिया एवं दस्तावेजीकरण’ पर प्रशिक्षण कर्यक्रम के तहत उद्यमियों को अपना निर्यात व्यापार शुरू करने हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति, 2019 का निर्माण किया है जिसके अंतर्गत राज्य में कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि उत्पादों की निर्यात संभावनाओं को तलाशकर उन अवसरों का लाभ उठाने के प्रावधान करती है।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 5 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में व्यापार

गतिविधि-

प्रश्न- फल-सब्जी, डेयरी उत्पाद का प्रसंस्करण किया जाता है, जिसे आप पैकेट बन्द भोजन, पेय पदार्थों के रूप में उपयोग करते हैं।
शिक्षक की सहायता से प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की सूची बनाइए।
उत्तर:
प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की सूची

खाद्य पदार्थ

  1. डेयरी उत्पाद (दूध, दही, क्रीम, घी, पनीर, चीज आदि)
  2. फ्रोजन फल व सब्जियाँ, मांस
  3. कृत्रिम मक्खन, मूँगफली का मक्खन
  4. डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, सब्जियाँ
  5. फास्ट फूड (पिज्जा, बर्गर, हैमबर्गर, सैंडविच आदि)
  6. पैक पेय जल/पेय पदार्थ (सूप, शोरबा, जूस)
  7. कोल्ड ड्रिंक, कृत्रिम रस, कृत्रिम नींबू पानी
  8. अचार, मुरब्बा, चटनी, सिरका, सॉस, केचप, मेयोनेज आदि
  9. मिठाइयाँ, कलाकन्द, मिष्ठान
  10. कैंडी, टॉफी, चॉकलेट आदि
  11. चीनी, गुड़, खांडसारी आदि
  12. बिस्कुट, ब्रेड, टोस्ट
  13. सूखे फल व मेवे
  14. केक, पेस्ट्री, पैनकेक
  15. नमकीन, ढोकला, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स आदि

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 4 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में कृषि विपणन

Engaging with these Hamara Rajasthan Book Class 7 Solutions and कक्षा 7 हमारा राजस्थान पाठ 4 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में कृषि विपणन will strengthen your knowledge and prepare you for assessments.

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 4 Question Answer in Hindi राजस्थान में कृषि विपणन

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 4 के प्रश्न उत्तर

आओ करके देखें-

प्रश्न 1.
मंडियों में किसानों को कौनसी सुविधाएँ दी जाती हैं? पता लगाइए।
उत्तर:
मंडियों में किसानों को निम्नलिखित सुविधाएँ दी जाती हैं-

  • कृषि जिंसों की बिक्री और खरीद की सुविधा प्रदान करना।
  • किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलवाना।
  • बिचौलियों से किसानों का बचाव एवं सुरक्षा प्रदान करना।
  • दैनिक बाजार भावों की जानकारी प्रदान करना।
  • उपज के मूल्यों की ऑनलाइन उपलब्ध करवाना।
  • किसानों की सहायता हेतु आढ़तियों की व्यवस्था करना।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर किसानों की उपज खरीदना।

प्रश्न 2.
यह पता लगाइए कि आपके क्षेत्र में उचित मूल्य की दुकान पर कौन-कौनसी वस्तुएँ किस कीमत पर मिल रही हैं?
उत्तर:

मूल्य सूची (उचित मूल्य की दुकान)
सामग्री मूल्य
1. गेहूँ ……………………
2. चीनी ……………………
3. केरोसीन ……………………
4. चावल/मोटा अनाज ……………………
5. अन्य ……………………

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

I. अग्रलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-

1. कृषि विपणन बोर्ड मदद करता है-
(अ) किसान की
(ब) शिक्षक की
(स) विद्यार्थी की
(द) पशुपालक की
उत्तर:
(अ) किसान की

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 4 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में कृषि विपणन

2. कृषि उपज मण्डी में मध्यस्थों से वसूला जाता है-
(अ) बाजार शुल्क
(ब) लाइसेन्स शुल्क
(स) सेवा शुल्क
(द) परीक्षा शुल्क
उत्तर:
(ब) लाइसेन्स शुल्क

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. मंडियों की स्थापना तथा विकास के लिए राजस्थान में ……………. की स्थापना 1974 में की गई।
उत्तर:
राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड

2. सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा ……………. को खाद्य वस्तुएँ सही दाम में मिलती हैं।
उत्तर:
गरीब उपभोक्ताओं।

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राज्य में नियमन के लिए किन कृषि जिंसों को अधिसूचित किया गया है?
उत्तर:
राज्य में नियमन के लिए निम्न कृषि जिंसों को अधिसूचित किया गया है-
अनाज, बाजरा, दलहन, तिलहन, कपास, लघु वनोपज आदि।

प्रश्न 2.
राज्य की कोई दो कृषि उपज मंडियों के नाम बताइए जो विश्व प्रसिद्ध हैं।
उत्तर:
उत्तर:
राज्य की जोधपुर मंडी जीरे तथा कोटा की रामगंज मंडी धनिया व मेथी के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
कृषि उपज मंडियों से आप क्या समझते हैं? इन मंडियों की क्या आवश्यकता है?
उत्तर:
कृषि उपज मंडी – यह एक ऐसा बाजार है, जहाँ कृषि उपज को खरीदा और बेचा जाता है। यह बाजार न केवल कृषि जिंसों की बिक्री और खरीद की सुविधा प्रदान करता है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और ग्रामीण कल्याण में भी मदद करता है। ये बाजार नियमों के आधार पर संचालित होते हैं, इसलिए इन्हें विनियमित बाजार भी कहा जाता है। इन बाजारों का विनियमन कृषि विपणन बाजार समिति द्वारा किया जाता है।

आवश्यकता – कृषि उपज मंडियों के माध्यम से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य दिलाने का प्रयास किया जाता है। ये बिचौलियों से किसानों का बचाव कर उनकी उपज को बोली द्वारा बेचने की सुविधा प्रदान करती हैं। कई मंडियों में दैनिक बाजार भावों की जानकारी भी प्रदान की जी है। वर्तमान में कुछ मंडियाँ ऑनलाइन भी बाजार भाव प्रसारित कर रही हैं, जिससे उपज का सही मूल्य कभी भी प्राप्त किया जा सकता है।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 4 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में कृषि विपणन

प्रश्न 2.
राजस्थान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को समझाइए।
उत्तर:
सार्वजनिक वितरण प्रणाली- आम उपभोक्ताओं तक कृषि उपज एवं अन्य खाद्य वस्तुएँ सही दामों में पहुँचाने के लिए सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था की है। इसके अंतर्गत कृषि उपजों, विशेषकर अनाजों को उचित मूल्य की दुकानों या राशन की दुकानों के माध्यम से गरीब उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का प्रयास किया जाता है। इससे सभी को खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य की पूर्ति में सहायता प्राप्त होती है। यह कार्य खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामला विभाग द्वारा किया जाता है।

उचित मूल्य की दुकानों के नेटवर्क के माध्यम से गेहूँ, चावल, चीनी एवं केरोसीन जैसी आवश्यक वस्तुओं का वितरण, मासिक आधार पर नियमित रूप से किया जाता है। वर्तमान में पोस (पीओएस) मशीन द्वारा उपभोक्ताओं को बायोमैट्रिक सत्यापन के उपरांत राशन सामग्री का वितरण किया जा रहा है। इससे लक्षित लाभार्थियों तक सामग्री की पहुँच सुनिश्चित हो सकी है।

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 4 Important Question Answer in Hindi

I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-

1. राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड की स्थापना किस वर्ष की गई?
(अ) 1971 में
(ब) 1972 में
(स) 1973 में
(द) 1974 में
उत्तर:
(द) 1974 में

2. मंडियों में बाजार शुल्क किससे वसूला जाता है?
(अ) खरीददारों से
(ब) मध्यस्थों से
(स) किसानों से
(द) मंडी समिति से
उत्तर:
(अ) खरीददारों से

3. मंडियों में लाइसेंस शुल्क किससे वसूल किया जाता है?
(अ) कृषि विपणन बाजार समिति से
(ब) कृषि उपज मंडी से
(स) किसानों से
(द) मध्यस्थों से
उत्तर:
(द) मध्यस्थों से

4. उचित मूल्य की दुकानों के नेटवर्क स्थापित करने का कार्य किसका है?
(अ) आढ़तियों का
(ब) राज्य सरकार का
(स) केन्द्र सरकार का
(द) उपभोक्ताओं का
उत्तर:
(ब) राज्य सरकार का

II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-

1. सरकार ने कई मंडियों को ……………. कर दिया है, जिससे उपज के मूल्य कभी भी पता किये जा सकते हैं।
उत्तर:
ऑनलाइन

2. किसानों की सहायता के लिए मंडी में ……………. भी होते हैं।
उत्तर:
आढ़तिये

3. किसान को उसकी उपज का सही मूल्य दिलवाने का प्रयास ……………. द्वारा किया जाता है।
उत्तर:
सरकार

4. राज्य के निर्धन वर्गों तक ……………. को सही कीमत पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से पहुँचाया जाता है।
उत्तर:
खाद्यान्नों

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
नाथू को अपनी मूंग की फसल बेचने में कठिनाई क्यों हुई?
उत्तर:
पिछले वर्ष मूँग की कीमत बहुत अधिक थी अतः इस बार सभी किसानों ने मूंग की फसल बोई। परिणामत: मूंग की पैदावार अधिक हो गई और उसे बेचने में कठिनाई हुई।

प्रश्न 2.
किसी फसल की अच्छी पैदावार का कोई एक दुष्परिणाम बताइए।
उत्तर:
फसल की अच्छी पैदावार होने पर उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता है।

प्रश्न 3.
राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य क्या रहा है?
उत्तर:
राजस्थान राज्य में कृषि उपज मंडियों की स्थापना तथा उनका विकास करने के लिए राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड को स्थापित किया गया।

प्रश्न 4.
कृषि उपज मंडियों की आय का मुख्य स्रोत बताइए।
उत्तर:
मंडियों में खरीददारों से बाजार शुल्क तथा मध्यस्थों से लाइसेंस शुल्क वसूल किया जाता है, जो कि इन मंडियों की आय होती है।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. आढ़तियों से आप क्या समझते हैं? इनकी भूमिका स्पष्ट कीजए।
उत्तर:
विभिन्न मंडियों में अन्य सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं के अतिरिक्त किसानों की सहायता हेतु आढ़तिये भी होते हैं। इन आढ़तियों में से कुछ आढ़तिये, जिन्हें कच्चे आढ़तिये भी कहा जाता है, किसानों की उपज को मंडी में बनी अपनी दुकानों पर बेचते हैं और अपनी आढ़त या कमीशन काटकर किसान को उसकी उपज के उचित मूल्य का भुगतान कर देते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ पक्के आढ़तिये भी होते हैं जो कि कच्चे आढ़तियों से थोक व्यापारियों या मिल वालों के लिए उपज का क्रय करते हैं तथा क्रय किए गए सामग्री का अपनी व्यवस्था के अनुसार संग्रह भी करते हैं।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 4 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में कृषि विपणन

प्रश्न 2.
किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने हेतु सरकार प्रत्यक्षतः क्या उपाय करती है? स्पष्ट कीजिए
उत्तर:
यदि किसान को कृषि उपज मंडियों में भी सही खरीददार नहीं मिलते हैं, तो भी किसान को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। यदि किसान को उसकी उपज का सही दाम देने वाले क्रेता नहीं मिलते, तो ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ पर सीधे किसान से उसकी उपज को खरीद लिया जाता है। इस प्रकार से, किसानों के उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने हेतु सरकार द्वारा प्रत्यक्ष तौर पर प्रयास किया जाता है।

V. निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
‘राजस्थान में कृषि विपणन’ का विस्तृत विवरण दीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में कृषि विपणन- किसानों को अपनी पैदा की गई फसल को बेचने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। स्थानीय स्तर पर फसल बेचने हेतु काफी प्रयास करने पड़ते थे। यदि कोई फसल खरीदने को तैयार भी होता, तो उपज का मूल्य काफी कम देना चाहता। इस कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। यदि फसल की पैदावार अच्छी हो जाती, तो उचित दाम मिलने में दिक्कत आती थी। इस तरह की स्थिति का निवारण करने हेतु सरकार द्वारा कृषि उपज मंडियों की व्यवस्था की गई।

कृषि उपज मंडी – यह सरकार द्वारा स्थापित एक ऐसा बाजार है, जहाँ कृषि उपज को खरीदा और बेचा जाता है। यहाँ कृषि जिंसों की बिक्री और खरीद की सुविधा प्रदान की जाती है। इन मंडियों के माध्यम से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य दिलवाने का प्रयास किया जाता है। ये मंडियाँ नियमों के आधार पर संचालित होती हैं, इसलिए इन्हें विनियमित बाजार भी कहा जाता है। इन बाजारों का विनियमन कृषि विपणन बाजार समिति द्वारा किया जाता है।

कृषि विपणन- इसके अंतर्गत वे सभी गतिविधियाँ या सेवाएँ आती हैं जो कृषि को खेत से लेकर उपभोक्ता तक पहुँचाने में करनी पड़ती हैं, जैसे— परिवहन, प्रसंस्करण, भण्डारण, ग्रेडिंग आदि।

राजस्थान में कृषि विपणन मंडियों की स्थापना तथा विकास हेतु राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड की स्थापना सन् 1974 में की गई। इसके पश्चात् बिचौलियों से किसानों का बचाव कर उचित मूल्य पर उनकी उपज को बेचने की सुविधा प्रदन की गई। किसान अपनी फसलों को मंडियों में ले जाते हैं, जहाँ बोली लगाई जाती है तथा सही दाम पर फसलों को खरीदा जाता है।

बड़ी मंडियों में दैनिक बाजार भावों की जानकारी मुहैया करवायी जाती है। सरकार ने कई मंडियों को ऑनलाइन भी कर दिया है जिससे कि उपज के मूल्य घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं।

आढ़तियों की भूमिका – लगभग सभी मंडियों में किसानों की सहायता हेतु आढ़तिये भी होते हैं। ये आढ़तिये दो तरह के होते हैं-

(i) कच्चे आढ़तिये – वे आढ़तिये जो किसानों की उपज को मंडी में बनी अपनी दुकानों पर बेचते हैं और अपनी आढ़त या कमीशन काटकर किसान को उसकी उपज के सही मूल्य का भुगतान कर देते हैं।

(ii) पक्के आढ़तिये- वे आढ़तिये जो कच्चे आढ़तियों से थोक व्यापारियों या मिल वालों के लिए उपज का क्रय करते हैं एवं सामग्रियों का संग्रह करते हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य – यदि किसानों को कृषि उपज मंडियों में उनकी उपज का सही मूल्य भुगतान करने वाले क्रेता नहीं मिलते, तो सीधे सरकार द्वारा उनकी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद लिया जाता है। इस तरह के प्रत्यक्ष प्रयास द्वारा सरकार किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य प्रदान करती है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली – एक ओर जहाँ सरकार नियमित कृषि मंडियों के माध्यम से किसानों को उचित मूल्य दिलवाने का प्रयास करती है। वहीं दूसरी ओर, सरकार आम उपभोक्ता तक कृषि उपज एवं अन्य खाद्य वस्तुओं को पहुँचाने का भी प्रयास करती है। इसके लिए सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था की है।

उचित मूल्य की दुकान – इसके माध्यम से सरकार द्वारा किसानों से खरीदी गई कुछ उपजों, विशेषकर अनाजों को गरीब उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का प्रयास किया जाता है। इससे सभी को खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य की पूर्ति में सहायता प्राप्त होती है। यह कार्य खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामला विभाग द्वारा संपादित किया जाता है।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 4 के प्रश्न उत्तर राजस्थान में कृषि विपणन

गतिविधि

प्रश्न-
आपके क्षेत्र की मंडी में जाइये एवं वहाँ होने वाले क्रियाकलापों की सूची बनाइये एवं कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
क्षेत्रीय मंडी में होने वाले क्रियाकालपों की सूची

  • मंडी में चारों ओर चहल-पहल है, सब कुछ गतिमान है।
  • आढ़तिये अपने-अपने आढ़त पर विराजमान हैं।
  • दुकानदार अपनी दुकानों को सजाने में संलग्न हैं। खरीददार लगातार मंडी में आ रहे हैं।
  • कुछ लोग दुकानों पर सामानों का भाव पूछ रहे हैं।
  • कहीं ट्रकों से खाद्य सामग्रियाँ उतारी जा रही हैं।
  • कुछ छोटे विक्रेता रेहड़ी व ठेले पर साग-सब्जियाँ बेच रहे हैं।
  • मंडी में एक ओर अनाज व परचून की दुकाने हैं, तो दूसरी ओर फल व सब्जियों की दुकानें सजी हैं।
  • मंडी में शांति व सुरक्षा बनाए रखने हेतु मंडी समिति की ओर से सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।
  • खरीददारों की मदद हेतु पूछताछ केन्द्र की व्यवस्था की गयी है।
  • खरीदे गए सामग्रियों को मंडी के बाहर तक पहुँचाने हेतु दिहाड़ी मजदूर भी अपने कार्य हेतु तत्पर हैं।
  • मंडी के गेट के समीप कुछ जलपान की दुकानें भी हैं, जहाँ लोग चाय-कॉफी पी रहे हैं।
  • मंडी के बाहर छोटे वाहन सवारियों हेतु खड़े हैं, जो उनके खरीदे गए वस्तुओं को घर तक पहुँचा रहे हैं।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 3 के प्रश्न उत्तर कृषि एवं सिंचाई

Engaging with these Hamara Rajasthan Book Class 7 Solutions and कक्षा 7 हमारा राजस्थान पाठ 3 के प्रश्न उत्तर कृषि एवं सिंचाई will strengthen your knowledge and prepare you for assessments.

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 3 Question Answer in Hindi कृषि एवं सिंचाई

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 3 के प्रश्न उत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-

1. रबी की फसलों के समूह की पहचान कीजिए-
(अ) बाजरा, सरसों, चावल
(ब) मक्का, गेहूँ, ग्वार
(स) मूंगफली, तिल, कपास
(द) गेहूँ, चना, सरसों
उत्तर:
(द) गेहूँ, चना, सरसों

2. जल संरक्षण हेतु सिंचाई की उत्तम विधि है-
(ब) खुले धोरों के द्वारा
(अ) नहरों द्वारा
(स) बूंद-बूंद सिंचाई एवं फव्वारे द्वारा
(द) तालाब द्वारा
उत्तर:
(स) बूंद-बूंद सिंचाई एवं फव्वारे द्वारा

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. राजस्थान में 1. ……………., 2. ……………., 3. ……………., फसलें होती हैं।
उत्तर:
रबी, खरीफ, जायद,

2. एशिया का सबसे बड़ा कृषि फार्म राजस्थान के ……………. में स्थित है।
उत्तर:
श्रीगंगानगर जिले में सूरतगढ़।

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान में सिंचाई के कौन-कौनसे साधन हैं?
उत्तर:
राजस्थान राज्य में सिंचाई के प्रमुख साधन कुएँ एवं नलकूप, नहरें, तालाब इत्यादि हैं।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 3 के प्रश्न उत्तर कृषि एवं सिंचाई

प्रश्न 2.
राजस्थान में बाजरे का उत्पादन करने वाले जिलों के नाम लिखिए।
उत्तर:
राजस्थान के अलवर, जयपुर, सीकर, नागौर, जोधपुर जिलों में बाजरे का उत्पादन किया जाता है।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
खाद्यान्न फसलें किसे कहते हैं? उदाहरण देते हुए समझाइए।
उत्तर:
खाद्यान्न फसलें – जिन फसलों के उत्पाद भोजन के लिए उपयोग में लिए जाते हैं वे खाद्यान्न फसलें कहलाती हैं। जैसे गेहूँ, जौ, ज्वार, मक्का, चावल, दालें इत्यादि। राजस्थान में निम्नलिखित खाद्यान्न फसलें उगायी जाती हैं-

(i) गेहूँ – राजस्थान के प्रमुख गेहूँ उत्पादक जिले श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा, बारां, भरतपुर हैं।

(ii) जौ एवं ज्वार – जौ का उत्पादन जयपुर, श्रीगंगानगर, सीकर, अलवर, भीलवाड़ा, अजमेर, झुंझुनूं नागौर जिलों में किया जाता है। जबकि ज्वार का उत्पादन अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, भरतपुर, जयपुर जिलों में होता है।

(iii) मक्का – यह राजस्थान का प्रमुख भोजन है, इसे भीलवाड़ा, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमन्द आदि जिलों में उत्पादित किया जाता है।

(iv) बाजरा – अलवर, जयपुर, सीकर, नागौर, जोधपुर जिलों में बाजरे का उत्पादन किया जाता है।

(v) चनां – चने का उत्पादन बीकानेर, जैसलमेर, अजमेर, जयपुर, पाली जिलों में होता है।

प्रश्न 2.
दलहन एवं तिलहन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
दलहन – जिन फसल उत्पादों से दालें बनायी जाती हैं, उन्हें दलहन कहते हैं जैसे मूंग, मोठ, चना आदि।

तिलहन – जिन फसलों के उत्पाद से तेल निकाला जाता है, उन्हें तिलहन कहते हैं जैसे- तिल, मूंगफली, सरसों आदि।

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 3 Important Question Answer in Hindi

I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-

1. प्रत्येक फसल को निम्न में से किसकी आवश्यकता होती
(अ) निश्चित तापमान
(ब) पानी की मात्रा
(स) मृदा एवं जलवायु
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी

2. रबी फसल की बुआई कब ( राजस्थान में) की जाती है?
(अ) अक्टूबर, नवम्बर
(ब) मार्च, अप्रैल
(स) जून, जुलाई
(द) सितम्बर, अक्टूबर
उत्तर:
(अ) अक्टूबर, नवम्बर

3. निम्न में से खरीफ फसल कौन-सी है?
(अ) गेहूँ
(ब) बाजरा
(स) खरबूजा
(द) तरबूज
उत्तर:
(ब) बाजरा

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 3 के प्रश्न उत्तर कृषि एवं सिंचाई

4. व्यापारिक फंसल कौन-सी है? पहचानिए।
(अ) मक्का
(ब) चावल
(स) कपास
(द) जौ।
उत्तर:
(स) कपास

II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-

1. गाँव में अधिकांश लोग खेती करते हैं जिनको ……………. कहते हैं।
उत्तर:
किसान / कृषक

2. राजस्थान में कई बार वर्षा की कमी से ……………. पड़ जाता है।
उत्तर:
अकाल

3. बाजरे के उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान का भारत में ……………. स्थान है।
उत्तर:
प्रथम

4. राजस्थान, देश का सर्वाधिक ……………. उत्पादक राज्य है।
उत्तर:
सरसों

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
कृषि को परिभाषित करें।
उत्तर:
कृषि – फसल उगाकर खाद्यान्न एवं अन्य उत्पाद पैदा करना कृषि कहलाता है। यह एक प्राथमिक व्यवसाय है।

प्रश्न 2.
व्यापारिक फसल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जिन फसलों का उत्पादन विक्रय हेतु किया जाता है; उन्हें व्यापारिक फसलें कहते हैं। जैसे— गन्ना व कपास।

प्रश्न 3.
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले का कृषि क्षेत्र में क्या विशेष योगदान है?
उत्तर:
राजस्थान राज्य के श्रीगंगानगर जिले में सूरतगढ़ में एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा कृषि फार्म स्थित है।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान की प्रमुख फसली मौसम चक को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
प्रमुख फसली मौसम चक्र निम्न है-
राजस्थान की प्रमुख फसलें

रबी खरीफ जायद
गेहूँ, सरसों, चुकन्दर गन्ना, चावल, चना, जौ इत्यादि। बाजरा, ग्वार, मक्का, मूँग, मोठ, तिल, ज्वार, मूँगफली, कपास, गन्ना इत्यादि फल, खरबूजा, तरबूज, सब्जी, ककड़ी इत्यादि।
बुआई- बुआई- बुआई-
अक्टूबर, नवम्बर जुलाई अप्रैल
कटाई- कटाई- कटाई-
मार्च, अप्रैल अक्टूबर, नवम्बर जून

प्रश्न 2.
राजस्थान में सकल सिंचित क्षेत्र का सिंचाई के साधनों के अनुसार वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में सकल सिंचित क्षेत्रों का सिंचाई के साधनों के अनुसार वर्गीकरण (2016-2017 के दौरान) –
हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 3 के प्रश्न उत्तर कृषि एवं सिंचाई 1

प्रश्न 3.
जलपुरुष राजेन्द्र सिंह के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
जलपुरुष के नाम से प्रसिद्ध राजेन्द्र सिंह का जन्म 6 अगस्त, 1959 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के डौला गाँव में हुआ था। राजेन्द्र सिंह भारत के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। वे जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रसिद्ध हैं। सन् 1981 में उनका विवाह हुए डेढ़ बरस ही हुआ था, कि उन्होंने नौकरी छोड़ी, घर का सारा सामान बेचा और कुल तेईस हजार रुपए की पूँजी लेकर अपने कार्यक्षेत्र में उतर गए। उन्होंने ठान लिया कि वह पानी की समस्या का कुछ हल निकालेंगे। अतः उन्होंने ‘तरुण भारत संघ’ नामक एक संस्था बनाई जिसे एक गैर सरकारी संगठन का रूप दिया। अपने अथक प्रयासों से राजेन्द्र सिंह ने राजस्थान जैसे राज्य को जल संकट से उबारने हेतु काम किया। सन् 2015 में उन्हें स्टॉकहोम जल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो कि पानी के लिए नोबेल पुरस्कार माना जाता है। इसके अतिरिक्त, उन्हें सामुदायिक नेतृत्व हेतुं 2011 का रमन मैगसेसे पुरस्कार भी प्रदान किया गया। ‘जोहड़’ के नाम से राजेन्द्र सिंह के जीवन यात्रा पर उनकी जीवनी भी लिखी गई है।

V. निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान में बोई जानी वाली प्रमुख फसलों एवं उनके उत्पादक जिलों को रेखांकित कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में बोई जानी वाली प्रमुख फसलें एवं उत्पादक जिले निम्नलिखित हैं-

1. गेहूँ – यह रबी की फसल है जिसे राजस्थान में शीतकाल में उगाया जाता है। राजस्थान के प्रमख गेहूँ उत्पादक जिलों में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा, बारां, भरतपुर इत्यादि शामिल हैं।

2. जौ – यह रबी की फसल है जो कि शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क जलवायु से संबंधित है। राजस्थान में जौ का उत्पादन जयपुर, श्रीगंगानगर, सीकर, अलवर, भीलवाड़ा, अजमेर, झुंझुनूं, नागौर इत्यादि जिलों में किया जाता है।

3. ज्वार – यह शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क जलवायु से संबंधित खरीफ फसल है। जवार का उत्पादन राजस्थान के अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, भरतपुर, जयपुर इत्यादि जिलों में किया जाता है।

4. मक्का – यह खरीफ फसल है, जो कि राजस्थान विशेषतः मेवाड़ का प्रमुख भोजन है। भीलवाड़ा, उदयपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमन्द आदि राजस्थान के प्रमुख मक्का उत्पादक जिले हैं।

5. बाजरा – बाजरा भी एक खरीफ फसल है, जिसके लिए राजस्थान की जलवायु उपयुक्त है। इसे कम वर्षा, उच्च तापमान तथा उपजाऊ बलुई मिट्टी में उगाया जाता है। यह राजस्थान का प्रमुख खाद्यान्न है तथा उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान का प्रथम स्थान है। यहाँ बाजरे का उत्पादन अलवर, जयपुर, सीकर, नागौर, जोधपुर जिलों में किया जाता है।

6. चना – यह रबी की प्रमुख फसल है। राजस्थान में चने का उत्पादन बीकानेर, जैसलमेर, अजमेर, जयपुर, पाली जिले में होता है।

7. सरसों – यह रबी की फसल है, जिसका राजस्थान देश का सर्वाधिक उत्पादक राज्य है। यहाँ सरसों के प्रमुख उत्पादक जिले अलवर, टोंक, भरतपुर, श्रीगंगानगर, सवाई माधोपुर, हनुमानगढ़, जयपुर, जोधपुर, बारां हैं।

उपर्युक्त फसलों के अलावा, राजस्थान में मूँग, मोठ, उड़द और अरहर इत्यादि अन्य दलहनें उत्पादित होती हैं। साथ ही, चावल, कपास, ईसबगोल, राई, अलसी, गन्ना इत्यादि फसलें भी बोई जाती हैं। राजस्थान का बाजरा, ग्वार, मोठ, ईसबगोल, सरसों व जीरा के उत्पादन में अग्रणी स्थान है। यहाँ श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा कृषि फार्म स्थित है।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 3 के प्रश्न उत्तर कृषि एवं सिंचाई

प्रश्न 2.
सिंचाई के साधनों का उल्लेख करते हुए जल की बचत हेतु उपाय सुझाइए।
उत्तर:
सिंचाई के साधन – हर तरह की फसल के उत्पादन हेतु पानी की आवश्यकता रहती है। सिंचाई की सहायता से फसलों का उत्पादन सिंचित कृषि कहलाता है। विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के सिंचाई के साधन प्रयुक्त किए जाते हैं। सिंचाई के प्रमुख साधन कुएँ एवं नलकूप, नहरें, तालाब इत्यादि हैं।

राजस्थान में सिंचाई हेतु सिंचाई के साधनों में से सर्वाधिक कुएँ व नलकूप प्रयुक्त किए जाते हैं। इन साधनों द्वारा जयपुर, भरतपुर, अलवर, दौसा, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, अजमेर आदि जिलों में सिंचाई की जाती है।

जबकि राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर जिलों में इन्दिरा गाधी नहर के माध्यम से नहरी सिंचाई की जाती है। इसके अतिरिक्त, भीलवाड़ा, बूँदी, कोटा, अलवर, टोंक, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा, उदयपुर, अजमेर, जोधपुर, पाली, जालोर इत्यादि जिलों में भी नहर से ही सिंचाई की जाती है।

जल की बचत – कृषि हेतु भूजल के अत्यधिक उपयोग से भूमिगत जल का स्तर निरंतर नीचे जा रहा है। अतः वर्षा जल के संरक्षण एवं प्राकृतिक जल स्रोत के पुनरुद्धार की अति आवश्यकता है। इसी क्रम में, कुएँ एवं नलकूपों से की जाने वाली सिंचाई अगर फव्वारा के माध्यम से एवं बूँद-बूँद सिंचाई पद्धति से की जाए तो जल की अधिकाधिक बचत होगी। साथ ही, अगर धोरे एवं नहरें पक्की बना ली जाएँ तो उनसे भी आवश्यक जल की पर्याप्त बचत की जा सकती है।

आओ अभ्यास करें

प्रश्न- कक्षा का प्रत्येक विद्याथी एक फसल का नाम बताएँ तथा उसे खाद्यान्न, तिलहन, दलहन फसलों में वर्गीकृत करें। प्रत्येक फसल से बनने वाले खाद पदार्थों के उदाहरण भी बताएँ।
उत्तर-

फसल वर्गीकरण बनने वाला खाद्य पदार्थ
1. गेहू खाद्यान्न रोटी, ब्रेड, दलिया
2. सरसों तिलहन परांठा, पकौड़ी
3. चावल खाद्यान्न खिचड़ी, मीठे चावल
4. चना दलहन ढोकला, गट्टे की सब्जी
5. जौ खाद्यान रोटी, सत्तू
6. बाजरा खाद्यान्न रोटी, खिचड़ी
7. मक्का खाद्यान रोटी, पॉपकॉर्न, कॉर्नफ्लेक्स
8. मूंग दलहन दाल, खिचड़ी, पापड़
9. मोठ दलहन दाल
10. तिल तिलहन फ्राई, छौंक
11. ज्वार खाद्यान रोटी
12. मूंगफली तिलहन तलना, मक्खन
13. राई तिलहन छौंक, तड़का
14. अलसी तिलहन तलना, छौंकना
15. उड़द दलहन दाल पकौड़ी, दही-बड़ा
16. मसूर दलहन दाल, पापड़
17. सोयाबीन तिलहन तलना, बड़िया
18. मटर दलहन दाल, सब्जी
19. अरहर दलहन दाल
20. महुआ तिलहन तेल, तलना

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 2 के प्रश्न उत्तर खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

Engaging with these Hamara Rajasthan Book Class 7 Solutions and कक्षा 7 हमारा राजस्थान पाठ 2 के प्रश्न उत्तर खनिज एवं ऊर्जा संसाधन will strengthen your knowledge and prepare you for assessments.

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 2 Question Answer in Hindi खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 2 के प्रश्न उत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-

1. धात्विक खनिज समूह की पहचान कीजिए-
(अ) सीसा, ताँबा, लोहा
(ब) सीसा, संगमरमर, जिप्सम
(स) ताबा, मैंगनीज, चूना पत्थर
(द) ग्रेनाइट, ताँबा, अभ्रक
उत्तर:
(अ) सीसा, ताँबा, लोहा

2. चंदेरिया सीसा – जस्ता शोधक संयंत्र किस जिले में स्थापित है?
(अ) चित्तौड़गढ़
(ब) जयपुर
(स) जैसलमेर
(द) नागौर
उत्तर:
(अ) चित्तौड़गढ़

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. ……………. प्रकार का कोयला श्रेष्ठ होता है?
उत्तर:
एंथ्रेसाइट

2. ऊर्जा के परंपरागत संसाधन ……………. हैं।
उत्तर:
कोयला, खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस।

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
ऊर्जा के गैर-परंपरागत संसाधनों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ऊर्जा के गैर-परंपरागत संसाधनों में परमाणु ऊर्जा, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, बायोमास इत्यादि आते हैं।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 2 के प्रश्न उत्तर खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

प्रश्न 2.
दो धात्विक खनिजों के नाम बताते हुए उनके संबंधित जिले लिखिए।
उत्तर:

  1. लौह अयस्क – जयपुर, सीकर, झुंझुनूं
  2. ताँबा — झुंझुनूं, अलवर, सीकर

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
खनिज किसे कहते हैं? इनका महत्त्व समझाइए।
उत्तर:
खनिज- प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाला पदार्थ जिसका निश्चित संगठन हो, वह खनिज कहलाता है।

खनिज का महत्त्व – प्राकृतिक संसाधनों में खनिज संसाधन महत्त्वपूर्ण है। औद्योगिक विकास के लिए खनिजों की उपलब्धता महत्त्वपूर्ण होती है। राजस्थान में विभिन्न प्रकार के खनिज पाए जाते हैं, जिनसे प्राप्त उत्पादों से दैनिक उपयोग में आने वाली अनेक वस्तुएँ निर्मित होती हैं। खनिजों की उपलब्धता एवं उत्पादन में, राजस्थान का अरावली पर्वतमाला क्षेत्र सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 2.
सौर ऊर्जा पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सौर ऊर्जा – राजस्थान एक गर्म प्रदेश है, अतः यहाँ सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग सम्भव है। अधिकाधिक गर्मी से सौर ऊर्जा उत्पाद की संभावना बढ़ जाती है। सौर ऊर्जा का उपयोग ऊर्जा संयंत्र, स्ट्रीट लाइट, सोलर कुकर, वाटर हीटर्स आदि में किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा से चलित छत सौर ऊर्जा संयंत्रों एवं घरेलू उपकरणों पर वित्तीय सहायता देकर, इनके उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। जोधपुर के भाडला में देश के सबसे बड़े सोलर पार्क की स्थापना की गई है।

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 2 Important Question Answer in Hindi

I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-

1. अजायबघर में देखा जा सकता है—
(अ) अस्त्र-शस्त्र
(ब) कपडे
(स) राजाओं के दैनिक उपयोग की वस्तुएँ
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी

2. निम्न में से धात्विक खनिज की पहचान कीजिए।
(अ) चूना पत्थर
(ब) लौह अयस्क
(स) संगमरमर
(द) कोयला
उत्तर:
(ब) लौह अयस्क

3. निम्न में से अधात्विक खनिज कौन-सा है?
(अ) जिप्सम
(ब) चाँदी
(स) मैंगनीज
(द) ताँबा
उत्तर:
(अ) जिप्सम

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 2 के प्रश्न उत्तर खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

4. ऊर्जा के गैर परंपरागत साधनों में कौन-सा शामिल नहीं है?
(अ) परमाणु ऊर्जा
(ब) कोयला
(स) पवन ऊर्जा
(द) बायोमास
उत्तर:
(ब) कोयला

II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-

1. राजस्थान में विभिन्न प्रकार के ……………. पाये जाते हैं।
उत्तर:
खनिज

2. देश का अधिकतम ……………. राजस्थान में उत्पादित होता है।
उत्तर:
सीसा – जस्ता

3. बाड़मेर में गिरल में ……………. आधारित ताप विद्युत संयंत्र है।
उत्तर:
लिग्नाइट

4. लाखों वर्षों की ……………. प्रक्रिया द्वारा खनिज बनते हैं।
उत्तर:
भूगर्भिक।

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान को खनिजों का अजायबघर कहा जाता है। क्यों?
उत्तर:
राजस्थान में विभिन्न प्रकार के खनिज पाये जाते हैं, इसलिए इसे खनिजों का अजायबघर भी कहा जाता है।

प्रश्न 2.
परंपरागत ऊर्जा संसाधन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
ऊर्जा के परंपरागत संसाधनों में कोयला, खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस इत्यादि आते हैं। ये एक बार उपयोग में ले लेने पर सदा के लिए समाप्त हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
गैर परम्परागत ऊर्जा संसाधन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ऊर्जा के गैर परंपरागत संसाधनों में परमाणु ऊर्जा पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, बायोमास इत्यादि आते हैं। इनका उपयोग बार-बार किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा कैसे की जा सकती है ?
उत्तर:

  1. हमें खनिजों के अनियमित दोहन पर नियन्त्रण करना चाहिए।
  2. हमें ऊर्जा के प्रयोग में सावधानी बरतनी चाहिए और इसके अपव्यय को रोकना चाहिए।

IV. लघुत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
खनिज कितने प्रकार के होते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
खनिजों के प्रकार निम्नलिखित हैं-
• धात्विक खनिज – जिन खनिजों में धातु की मात्रा पाई जाती है, उन्हें धात्विक खनिज कहते हैं। धात्विक खनिज कठोर होते हैं तथा इनमें चमक होती है। इन्हें पिघलाकर नवीन उत्पाद तैयार किया जा सकता है।

• अधात्विक खनिज – जिन खनिजों में धातु की मात्रा नहीं पाई जाती है, उन्हें अधात्विक खनिज कहते हैं। अधात्विक खनिजों को गलाने से कोई नवीन उत्पाद प्राप्त नहीं होता है।

• ऊर्जा खनिज – जिन खनिजों से ऊर्जा की प्राप्ति होती है, उन्हें ऊर्जा खनिज कहते हैं, जैसे- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस इत्यादि।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 2 के प्रश्न उत्तर खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

प्रश्न 2.
खनिज के क्षेत्र में राजस्थान की क्या स्थिति है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में विभिन्न प्रकार के खनिज पाये जाते हैं, अतः राजस्थान को खनिजों का अजायबघर भी कहा जाता है। राजस्थान का वॉलेस्टोनाइट, जास्पर, सीसा – जस्ता इत्यादि खनिजों में एकाधिकार है। संगमरमर, ग्रेनाइट, कोटा स्टोन, बलुआ पत्थर, चांदी, जिप्सम, रॉक फॉस्फेट, केलसाइट, फॉस्फॉराइट, बालक्ले, सोपस्टोन एवं ताँबा के उत्पादन में भी राज्य अग्रणी है। खनिजों की उपलब्धता एवं उत्पादन में, राजस्थान का अरावली पर्वतमाला क्षेत्र सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है।

देश का अधिकतम सीसा जस्ता राजस्थान में उत्पादित किया जाता है, इसके उप-उत्पाद के रूप में चाँदी, केडमियम भी प्राप्त होता है। उदयपुर के देबारी में जस्ता रोधक संयंत्र तथा चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया में सीसा जस्ता शोधक संयंत्र स्थापित किया गया है।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
ऊर्जा संसाधन से क्या अभिप्राय है? इसका वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
ऊर्जा संसाधन – ऐसा संसाधन जिनका उपयोग ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, ऊर्जा संसाधन कहलाते हैं। उदाहरण- कोयला, पेट्रोलियम, हवा, जल, सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा इत्यादि।

ऊर्जा संसाधनों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है—
1. परंपरागत ऊर्जा संसाधन
2. गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधन

ऊर्जा के परंपरागत संसाधन

1. कोयला – कोयला चार प्रकार का होता है; एंथ्रेसाइट, बिटुमिनस, लिग्नाइट एवं पीट। एंथ्रेसाइट कोयला उत्तम किस्म का होता है। राजस्थान में लिग्नाइट कोयला पाया। जाता है, यहाँ पलाना, बीकानेर, बाड़मेर व जैसलमेर क्षेत्र में कोयला मिलता है। बाड़मेर में गिरल क्षेत्र में लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत संयंत्र स्थापित है।

2. खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस-ईंधन हेतु भूमि के भीतर छिपे खनिज के प्राकृतिक भण्डारों से निकाले गए तेल को खनिज तेल कहा जाता है। यह राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, नागौर क्षेत्र में पाया जाता है। जबकि घोटारु, कमलीताल, तनोट, मनिहारी टिब्बा, रामगढ़, राजेश्वरी, डंडेवाला आदि में प्राकृतिक गैस के भण्डार मिलते हैं, यह प्राकृतिक गैस कई गैसों का मिश्रण है तथा ईंधन का प्रमुख स्रोत है। जैसलमेर, बारां, व धौलपुर में प्राकृतिक गैस आधारित विद्युत गृह स्थापित हैं।

3. जल विद्युत – जल विद्युत का ऊर्जा संसाधन में प्रमुख स्थान है। राजस्थान में विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत विद्युत उत्पादन एवं प्राप्त किया जा रहा है, जैसे – गाँधीसागर, राणाप्रताप सागर, माही बजाज सागर, भाखड़ा नांगल व व्यास परियोजना प्रमुख हैं।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 2 के प्रश्न उत्तर खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

ऊर्जा के गैर परंपरागत संसाधन

1. परमाणु ऊर्जा – वह ऊर्जा जिसे नियंत्रित नाभिकीय अभिक्रिया से उत्पन्न किया जाता है तथा फिर बिजली उत्पन्न करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में स्थित परमाणु ऊर्जा संयंत्र देश का दूसरा परमाणु विद्युत संयंत्र है। यह पहला बेहद अत्याधुनिक तकनीक एवं प्रौद्योगिकी से बनाया गया दाबित भारी जल संयंत्र है।

2. पवन ऊर्जा – बहती वायु से उत्पन्न की गई ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं। यह एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। राजस्थान के भौतिक स्वरूप एवं जलवायु, पवन ऊर्जा के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं। वर्तमान में जैसलमेर, प्रतापगढ़, जोधपुर, बाड़मेर जिलों में पवन आधारित विद्युत गृह स्थापित हैं।

3. बायोमास – बायोमास ऊर्जा के स्रोत हैं। इन्हें सीधे जलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है या इनको विभिन्न प्रकार के जैव ईंधन में परिवर्तित करने के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है। बायोमास के उदाहरण हैं- गन्ने को खोई, धान की भूसी, अनुपयोगी लकड़ी व गोबर आदि। राजस्थान में उदयपुर, जयपुर सहित अनेक जिलों में बायोगैस संयंत्र स्थापित किये गये हैं । बायोगैस संयंत्र हेतु राजस्थान सरकार अनुदान भी देती है।

4. सौर ऊर्जा सूर्य से जो ऊर्जा प्राप्त होती है उसे विद्युत ऊर्जा में बदलना ही सौर ऊर्जा कहा जाता है। सामान्य रूप से सौर ऊर्जा को सूर्य से प्राप्त किरणों को परिवर्तित करके बनाया जाता है। सौर ऊर्जा को सौर शक्ति के नाम से भी जाना जाता है।

राजस्थान एक गर्म प्रदेश है अतः यहाँ सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग सम्भव है। जोधपुर के भाडला में देश के सबसे बड़े सोलर पार्क की स्थापना की गई है।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 1 के प्रश्न उत्तर वन, वन्य जीव एवं संरक्षण

Engaging with these Hamara Rajasthan Book Class 7 Solutions and कक्षा 7 हमारा राजस्थान पाठ 1 के प्रश्न उत्तर वन, वन्य जीव एवं संरक्षण will strengthen your knowledge and prepare you for assessments.

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 1 Question Answer in Hindi वन, वन्य जीव एवं संरक्षण

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 1 के प्रश्न उत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-

1. राजस्थान का राज्य पक्षी है-
(अ) मोर
(ब) गोडावण
(स) तोता
(द) कबूतर
उत्तर:
(ब) गोडावण

2. राजस्थान में सदाबहार वन कहाँ पाये जाते हैं-
(अ) करौली
(ब) उदयपुर
(स) श्रीगंगानगर
(द) माउन्ट आबू
उत्तर:
(द) माउन्ट आबू

II. मिलान कीजिए-

1. सीतामाता वन्य जीव अभयारण्य (i) साइबेरियन क्रेन
2. राष्ट्रीय मरु उद्यान वन्य जीव अभयारण्य (ii) उड़न गिलहरी
3. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (iii) गोडावण
4. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (iv) बाघ

उत्तर:

1. सीतामाता वन्य जीव अभयारण्य (ii) उड़न गिलहरी
2. राष्ट्रीय मरु उद्यान वन्य जीव अभयारण्य (iii) गोडावण
3. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (iv) बाघ
4. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (i) साइबेरियन क्रेन

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यानों के नाम लिखिए।
उत्तर:
1. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, 2. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान, 3. मुकंदरा राष्ट्रीय उद्यान।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 1 के प्रश्न उत्तर वन, वन्य जीव एवं संरक्षण

प्रश्न 2.
राजस्थान के किन्हीं चार वन्य जीव अभयारण्यों के जाता है? नाम लिखिए।
उत्तर:
1. केसर बाग वन्य जीव अभयारण्य, 2. जयसमन्द वन्य जीव अभयारण्य, 3. नाहरगढ़ वन्य जीव अभयारण्य, 4. शेरगढ़ वन्य जीव अभयारण्य।

IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
वनों से होने वाले लाभ का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वन प्रकृति के द्वारा प्रदत्त अमूल्य उपहार हैं। पेड़- पौधे हमें शुद्ध हवा देने के साथ वर्षा में भी सहयोग करते हैं। पेड़-पौधे वन्य जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं। वन प्राकृतिक सुंदरता के साथ ही जलवायु को सम बनाते हैं। वन आजीविका के साधन भी होते हैं।

वनों का आर्थिक महत्त्व उनसे प्राप्त होने वाले उत्पादन से होता है। राजस्थान के वनों से इमारती लकड़ी, ईंधन कीलकड़ी, तेंदू पत्ता, बाँस, गोंद, खस, औषधियाँ इत्यादि प्राप्त होती हैं।

प्रश्न 2.
राजस्थान के उष्ण कटिबंधीय कटीले वनों की विशेषताएँ लिखिए
उत्तर:
राजस्थान के उष्ण कटिबंधीय कटीले वनों की विशेषताएँ-

  • यहाँ तापमान अधिक एवं वर्षा कम होती है।
  • इस क्षेत्र में वृक्षों की पत्तियाँ छोटी होने के कारण वाष्पीकरण कम मात्रा में होता है।
  • पेड़ों की जड़ें गहरी होती हैं, जिससे ये जमीन के काफी नीचे से पानी प्राप्त कर सकते हैं।
  • राज्य वृक्ष – खेजड़ी ( कल्पवृक्ष), राज्य पुष्प रोहिड़ा व अत्यंत पौष्टिक सेवण घास इत्यादि इसी क्षेत्र में प्राप्त होते हैं।

Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 1 Important Question Answer in Hindi

I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-

1. राजस्थान राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग कितना भाग वन क्षेत्र है?
(अ) आधा भाग
(ब) दसवाँ भाग
(स) बीसवाँ भाग
(द) तीसवाँ भाग
उत्तर:
(ब) दसवाँ भाग

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 1 के प्रश्न उत्तर वन, वन्य जीव एवं संरक्षण

2. राजस्थान राज्य में सर्वाधिक वन क्षेत्र किस जिले में पाया
(अ) उदयपुर
(ब) चुरू
(स) जयपुर
(द) भरतपुर
उत्तर:
(अ) उदयपुर

3. राजस्थान के किस वृक्ष को कल्पवृक्ष माना जाता है?
(अ) रोहिड़ा
(ब) खेजड़ी
(स) धौकड़ा
(द) कैर
उत्तर:
(ब) खेजड़ी

4. राजस्थान राज्य में कितने संरक्षित क्षेत्र हैं?
(अ) 7
(स) 13
(ब) 11
(द) 17
उत्तर:
(द) 17

II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-

1. ……………. में साइबेरियन क्रेन, सारस, बगुला, बया, कोयल, बटेर जैसे अनेक पक्षी पाये जाते हैं।
उत्तर:
पक्षी उद्यान

2. अरावली पर्वतमाला ……………. को दो भागों में विभक्त करती हैं।
उत्तर:
राजस्थान

3. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान ……………. के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर:
भारतीय बाघ

4. शुष्क वन अनुसंधान संस्थान ……………. में स्थित है।
उत्तर:
जोधपुर

III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
ईशान के पिता वन विभाग में कहाँ कार्यरत थे?
उत्तर:
ईशान के पिता भरतपुर के केवलादेव घना राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में कार्यरत थे।

प्रश्न 2.
राजस्थान राज्य में सर्वाधिक तथा सबसे कम वन क्षेत्र किन जिलों में पाया जाता है?
उत्तर:
सर्वाधिक वन क्षेत्र उदयपुर तथा सबसे कम वन क्षेत्र चुरू जिले में पाया जाता है।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 1 के प्रश्न उत्तर वन, वन्य जीव एवं संरक्षण

प्रश्न 3.
राजस्थान में कुल कितने वन्य जीव अभयारण्य हैं?
उत्तर:
राजस्थान में 26 वन्य जीव अभयारण्य हैं।

प्रश्न 4.
राजस्थान के राज्य पशु कौनसे हैं?
उत्तर:
वन श्रेणी में चिंकारा एवं पालतू श्रेणी में ऊँट राजस्थान के राज्य पशु हैं।

IV. लघुत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यानों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में तीन राष्ट्रीय उद्यान हैं-
1. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान – यह भरतपुर जिले में स्थित है। यहाँ साइबेरियन क्रेन, सारस, बगुले, बया, कोयल, बटेर आदि पक्षी पाये जाते हैं।

2. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान – यह सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। यह उद्यान भारतीय बाघ के लिए प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त यहाँ भालू, चीतल, सांभर, नीलगाय, मगरमच्छ आदि भी पाये जाते हैं।

3. मुकंदरा राष्ट्रीय उद्यान – यह कोटा और चित्तौड़गढ़ जिले में फैला हुआ है। यहाँ बाघ, रीछ, जरख, गीदड़, भेड़िया, सांभर, चीतल, नीलगाय, चिंकारा, सियार आदि वन्य जीव पाये जाते हैं।

प्रश्न 2.
राजस्थान वन संरक्षण पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
राजस्थान राज्य में कुल 13 संरक्षित क्षेत्र हैं। पारिस्थितिकीय एवं पर्यावरण संतुलन बने रहने के साथ-साथ प्रदेशवासियों के सामाजिक, आर्थिक उत्थान के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु राजस्थान राज्य की वन नीति 2010 में राज्य के सम्पूर्ण भू-भाग के 20 प्रतिशत को वृक्षाच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन राजस्थान में वन क्षेत्र लगभग 10 प्रतिशत ही है। वनों की अन्धाधुन्ध कटाई एवं जागरूकता के अभाव के कारण राजस्थान में आरक्षित वनं का क्षेत्रफल समय के साथ घटा है।

शुष्क वन अनुसंधान संस्थान जोधपुर में स्थित है। इस संस्थान का उद्देश्य शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में वनों एवं वन्य जीवों के विकास हेतु अनुसंधान करना है। वन संरक्षण के उद्देश्य से राज्य सरकार एवं अनेक संस्थाओं द्वारा जनमानस में जागरूकता हेतु अभियान चलाये गये हैं। वनों से लकड़ी काटने पर पाबंदी लगाई गई है। वृक्षारोपण, चारागाह विकास एवं सामाजिक वानिकी के कार्य किये गये हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
राजस्थान के वनों के कितने प्रकार हैं? वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग दसवाँ भाग वन क्षेत्र है, जिसका वर्गीकरण निम्नलिखित है-

• वैधानिक (कानूनी) दृष्टि से वनों का वर्गीकरण
1. आरक्षित वन – ये कुल वन क्षेत्र के एक तिहाई से अधिक हैं। इस वर्ग के वन सरकारी नियंत्रण में आते हैं। पर्यावरण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होने के कारण इस क्षेत्र में पशु चराने व लकड़ी काटने पर प्रतिबंध होता है।

2. सुरक्षित वन – ये कुल वन क्षेत्र के आधे से अधिक क्षेत्र पर फैले हैं। इन वनों पर भी सरकारी नियंत्रण होता है। कुछ नियमों के साथ इस क्षेत्र में पशुओं को चराने व लकड़ी काटने की अनुमति दी जाती है।

3. अवर्गीकृत वन – सुरक्षित किये गये वनों के अतिरिक्त शेष वन इसके अंतर्गत आते हैं। इस श्रेणी के वनों में पशु चराने एवं लकड़ी काटने पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है।

• भौगोलिक दृष्टि से वनों का वर्गीकरण
1. उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन – ये वन राजस्थान के शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क भागों में पाये जाते हैं। इन वनों में झाड़ियाँ एवं कंटीले वृक्ष पाये जाते हैं। रोहिड़ा, खेजड़ी, धौकड़ा, बेर, बबूल, कैर, नीम इत्यादि मुख्य वृक्ष हैं यहां की मरुस्थलीय वनस्पति को मरुदभिद् भी कहा जाता है।

2. उष्ण कटिबंधीय शुष्क पतझड़ वन – इन वनों को मानसूनी वन भी कहते हैं। इन वनों में पाई जाने वाली अधिकांश लकड़ियाँ मजबूत होती हैं । यहाँ के वृक्ष ग्रीष्मकाल में अपनी पत्तियां गिरा देते हैं। इन वनों में सागवान, बरगद, आम, तेंदू, सालर, महुआ, गूलर, धौक, ढाक, साल, सीताफल, बाँस, आँवला, नीम, शीशम इत्यादि वृक्ष पाये जाते हैं।

3. अर्द्ध – उष्ण सदाबहार वन – सदैव हरे-भरे होने के कारण इन वनों को सदाबहार वन कहते हैं। ये वन पहाड़ी के ऊँचाई वाले भागों में ही पाये जाते हैं। जैसे—आबू पर्वतीय क्षेत्र। इन वनों में आम, बाँस, सागवान आदि मुख्य वृक्ष पाये जाते हैं।

हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 1 के प्रश्न उत्तर वन, वन्य जीव एवं संरक्षण

गतिविधि-

प्रश्न- जरा सोचें यदि वन ना रहे तो क्या होगा?
उत्तर:
वन हमारी दुनिया की जीवनरेखा हैं, उनके बगैर हम पृथ्वी पर जिंदगी का पहिया घूमने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। हमारे ग्रह को पेड़ जो सेवाएँ देते हैं, उनकी सूची बहुत लंबी है – वे इंसानों और दूसरे जानवरों के छोड़े हुए कार्बन को सोखते हैं, जमीन पर मिट्टी की परत को बनाए रखने का काम करते हैं, पानी के चक्र के नियमितीकरण में भी इनका अहम योगदान है, इसके साथ पेड़ प्रकृति और इंसान के खान-पान के सिस्टम को चलाते हैं और न जाने कितनी प्रजातियों को भोजन प्रदान करते हैं। इसके अलावा ये दुनिया के अनगिनत जीवों को आश्रय देते हैं। निर्माण सामग्री यानी लकड़ी के रूप में ये इंसानों को अपना घर बनाने के लिए भी मदद करते हैं।

पेड़ हमारे लिए इतने काम के हैं, फिर भी हम इन्हें बेरहमी से काटते रहते हैं, जैसे कि इनकी इस धरती के लिए कोई उपयोगिता ही नहीं है। अगर हम धरती पर मौजूद सभी पेड़ काट डालते हैं, तो इससे प्रलय आने के अतिरिक्त किसी अन्य स्थिति की कल्पना नहीं की जा सकती है। हम ऐसी धरती पर रह रहे होंगे, जो जिंदगी को सहारा नहीं दे सकेगी। दुनिया इतनी भयानक होगी कि वहाँ किसी जीव के पनपने का तो दूर, मौजूदा जीवों के जीने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। पेड़ों के साथ ही धरती पर मौजूद ज्यादातर जिंदगी समाप्त हो जाएगी, जंगलों में रहने वाले जीव भी मर जाएँगे, जो पेड़ों पर ही निर्भर हैं। धरती की जलवायु में भी बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिलेगा।