RBSE Solutions for Class 11 English Woven Words Short Stories Chapter 7 Glory at Twilight

Rajasthan Board RBSE Solutions for Class 11 English Woven Words Short Stories Chapter 7 Glory at Twilight Textbook Exercise Questions and Answers.

The questions presented in the RBSE Solutions for Class 11 English are solved in a detailed manner. Get the accurate RBSE Solutions for Class 11 all subjects will help students to have a deeper understanding of the concepts. Our team has come up with Tenses Class 11 to ensure that students have basic grammatical knowledge.

RBSE Class 11 English Solutions Woven Words Short Stories Chapter 7 Glory at Twilight

RBSE Class 11 English Glory at Twilight Textbook Questions and Answers

Understanding the Text :

Question 1. 
Give reasons for the following: 
(a) Satyajit attending the village wedding. 
(b) Satyajit's recollection of the forgerer when he was on the train. 
(c) Srinath and his family members' eager expectation of Satyajit's arrival. 
(d) Srinath's disappointment with Satyajit. 
(e) Satyajit's feeling that he was an impostor. 
(f) Satyajit not disclosing his present financial status to his uncle. 

निम्न का कारण दीजिए

(a) सत्यजीत का गाँव की शादी में उपस्थित होना। 
(b) सत्यजीत का जालसाज को याद करना जब वह ट्रेन में था।
(c) श्रीनाथ और उसके परिवार के सदस्यों का सत्यजीत के आगमन पर बेसब्री की आशाएँ। 
(d) श्रीनाथ की सत्यजीत के साथ निराशा।। 
(e) सत्यजीत की यह भावना कि वह छल करने वाला है। 
(f) सत्यजीत का अपने अंकल के सामने अपनी वर्तमान आर्थिक स्थिति का प्रकटीकरण न करना।
Answer:
(a) Satyajit's attending the village wedding was nothing but a mere fact of pride and self-realisation. He led a simple life as a boy but in his elder age, he became a recognised person and got some prestige. The village people gave him looks of wonder and amazement. He became open-handed in his prosperity. It was his benediction that Srinath could be able to settle his daughters well.

हिन्दी अनुवाद-सत्यजीत का गाँव की शादी में उपस्थित होना केवल गर्व और आत्मानुभूति के सिवाय कुछ भी नहीं था। लड़के के रूप में उसने एक साधारण जीवन जिया लेकिन अपनी बड़ी उम्र में वह एक परिचित व्यक्ति बन गया और उसे प्रतिष्ठा मिली। गाँव के लोग उसे आश्चर्य से देखते थे। अपनी समृद्धि के दिनों में खुले हाथ से खर्च करने वाला हो गया। यह उसी का आशीर्वाद था कि श्रीनाथ अपनी बेटियों को बहुत अच्छी तरह से व्यवस्थित करने में सफल हो सका।

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(b) Satyajit had some recollections of the forgerer when he was on train as he got his promotion after he had caught the forgerer. He knew that if success came fast, downfall would be faster. Ironically, although catching the forgerer paved the way towards his glory, promotion and prosperity yet he had all regrets for the man and thought that he should have given a chance to live as he was seeking himself a second chance to make a living. Now, he was on the verge of destruction. 

हिन्दी अनुवाद-सत्यजीत को जालसाज की कुछ स्मृतियाँ हैं जबकि वह ट्रेन में है। उसे उन्नति जालसाज को पकड़ने के बाद ही मिली थी। वह जानता था कि यदि सफलता जल्दी से आए तो विफलता उससे ज्यादा तेजी से आयेगी। विडम्बनापूर्ण यह है कि यद्यपि जालसाज को पकड़ने ने उसके लिए यश, उन्नति और समृद्धि का रास्ता खोल दिया लेकिन अब वह उस व्यक्ति के लिए पछता रहा था और उसने सोचा कि उसे उस व्यक्ति को रहने के लिए एक मौका और दे देना चाहिए था जैसा कि वह स्वयं भी रहने के लिए एक और मौके की तलाश में था। अब नष्ट होने के कगार पर था।

(c) When Satyajit was prosper, he was very liberal to spend money. He was on the zenith of his status. It was true that Satyajit and uncle Srinath did not have any blood relation yet he spent a lot of money in his daughters' marriages. He gave money as much as Srinath needed. That's why, Srinath and his family members had an eager expectation of Satyajit's arrival.

हिन्दी अनुवाद-जब सत्यजीत समृद्ध था, वह धन खर्च करने में अत्यधिक उदार था। वह अपनी समृद्धि के शिखर पर था। यह बात सत्य थी कि सत्यजीत और अंकल श्रीनाथ के बीच रक्त सम्बन्ध नहीं थे लेकिन फिर भी उसने श्रीनाथ की बेटियों की शादी में बहुत अधिक धन खर्च किया था। उसने इतना धन दिया जितना श्रीनाथ को आवश्यकता थी। यही कारण था कि श्रीनाथ और उसके परिवार के अन्य सदस्यों को सत्यजीत के आगमन से अत्यधिक आशा थी।

(d) Srinath had a very high expectation from Satyajit as he had spent a lot of money in the marriages of his other daughters. That's why he was much sure that Satyajit would give him Rs. 2001/- to give the in-laws of Beena without knowing the financial condition of Satyajit. That's why he was extremely disappointed to know the fact that Satyajit was not able to give him the required amount of money.

हिन्दी अनुवाद-श्रीनाथ को सत्यजीत से अत्यधिक आशा थी क्योंकि उसने श्रीनाथ की अन्य बेटियों की शादी में अत्यधिक धन खर्च किया था। यही कारण था कि वह पूरी तरह से निश्चिन्त था कि सत्यजीत बीना के ससुराल वालों के लिए देने के लिए 2001/-रु. दे देगा जबकि उसे सत्यजीत की आर्थिक स्थिति का ज्ञान नहीं था। यही कारण था कि वह इस वास्तविकता को जानकर अत्यन्त निराश होता है कि सत्यजीत उसे उसकी आवश्यकता का धन उपलब्ध कराने में असमर्थ है।

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(e) The story presents the mixed emotions of Satyajit. On one hand, he enjoys the zenith of his success but on the other hand now he knows well that he is not what he used to be. He has regrets in his mind for attending the marriage at this time of crisis in his life yet he doesn't disclose it. He knows it well that now, he does not have what he had before but he enjoys the sun shine of his bygone better days with a feeling of being an imposter.

हिन्दी अनुवाद-कहानी सत्यजीत की मिश्रित भावनाओं को प्रस्तुत करती है। एक ओर, वह अपनी सफलता की ऊँचाइयों का आनन्द उठाता है लेकिन दूसरी ओर वह यह भी भली प्रकार जानता है कि वह अब वह नहीं है जो पहले हुआ करता था। वह अपने जीवन में इस समय कमी के कारण शादी में उपस्थित होने के लिए अपने मन में दुःख व्यक्त करता है लेकिन वह इस बात को खोलता नहीं है। वह यह अच्छी तरह जानता है कि अब उसके पास वह नहीं है जो उसके पास पहले हुआ करता था परन्तु वह छल की भावना के साथ अपने गुजरे हुए शानदार दिनों की सुखद धूप का आनन्द लेता है।

(f) Satyajit earned a lot of money. So he was always ready to help others. His image had been framed as that of God. He had a very high and prestigious position in society. Srinath was grateful to him for his benediction that he could be able to get his daughters married in well established families. This was the reason why Satyajit did not want to tell his turn of fortune to anyone as he was called their benefactor. So he did not disclose his present financial status to his uncle who thought him to be the philanthropist at the time of need.

हिन्दी अनुवाद-सत्यजीत ने अत्यधिक धन कमाया। इसलिए वह हमेशा दूसरों की सहायता करने को तैयार रहता था। उसकी छवि भगवान की-सी हो गई थी। उसकी समाज में अत्यन्त उच्च और सम्मानजनक स्थिति थी। श्रीनाथ उसके आशीर्वाद के लिए आभारी था कि वह अपनी बेटियों की शादी सम्मानित परिवारों में कर सका। यही कारण था कि सत्यजीत किसी को भी अपने भाग्य परिवर्तन के बारे में बताना नहीं चाहता था क्योंकि उसे सबका हित चाहने वाला माना जाता था। इसीलिए उसने अपनी वर्तमान आर्थिक स्थिति के बारे में अपने अंकल को नहीं बताया जो उसे आवश्यकता के समय हमेशा दूसरों की सहायता करने वाला मानता था।

Question 2. 
Describe the cycle of events in Satyajit's life that brought him back to where he began.
सत्यजीत के जीवन में उन घटनाओं के चक्र का वर्णन कीजिए जो उसे वापस वहीं पर ले आयी जहाँ से उसने अपना जीवन शुरू किया था।
Answer:
Satyajit was a simple boy in the village. He reached the zenith of his success through hardwork, farsightedness and honest work. He witnessed a lot of changes in his life. He was just a clerk in a bank. He caught a case of forgery and got promotion as a Managing Director. He lavishly expended money but a turning point came into his life and the wheel of fortune turned him back where he had begun. His bank collapsed and he as well. He became as poor as he was in his prime of life.

सत्यजीत गाँव में एक साधारण बालक था। वह सफलता के शिखर पर कठोर परिश्रम, दूरदृष्टि और ईमानदारी के कार्य से पहँचा। वह अपने जीवन में अत्यधिक परिवर्तन का गवाह रहा। वह बैंक में केवल एक क्लर्क था। उसने जालसाजी का एक केस पकड़ा और वह प्रबन्ध निदेशक के पद पर उन्नति पा गया। वह हाथ खोलकर खर्च करता था लेकिन उसके जीवन में एक मोड़ आया और भाग्य का चक्र उसे वहीं वापस लेकर पहुँच गया जहाँ से उसने शुरू किया था। उसका बैंक डूब गया और साथ ही वह भी। वह उतना ही गरीब हो गया जितना वह अपने जीवन की शुरुआत में था।

Talking About the Text :

Question 1. 
It is difficult to adjust to a fall from glory. 
यश से नीचे गिरकर समायोजन करना अत्यन्त कठिन होता है।
Answer:
Glory at Twilight clearly depicts that it is too difficult to adjust to a fall from glory. A man finds it extremely difficult to accept defeat after being an achiever. A man works hard to achieve success day and night but suddenly falling from such heights after gaining glory, it becomes very difficult for a person to accept the failure easily.

Each and everyone of his acquaintance in his surroundings knows the success story of the person and they beg help from him but suddenly, when this person collapses, he finds himself unable to do so. Thus, he feels that society is not giving him the honour that he used to get when he was a prosperous person. In this way, it becomes difficult for him to adjust. So happens with Satyajit also.

RBSE Solutions for Class 11 English Woven Words Short Stories Chapter 7 Glory at Twilight

Glory of Twilight स्पष्ट रूप से यह प्रदर्शित करती है कि यश से नीचे गिरना इतना कठिन हो जाता है कि उसे समायोजित नहीं किया जा सकता। एक सफल प्राप्तकर्ता के बाद व्यक्ति के लिए हार स्वीकार करना अत्यन्त कठिन हो जाता है। व्यक्ति सफलता पाने के लिए दिन-रात कठोर परिश्रम करता है लेकिन अचानक यश प्राप्त करने के बाद इतनी ऊँचाई से नीचे गिरना व्यक्ति के लिए आसानी से इस असफलता को स्वीकार करना अत्यन्त कठिन हो जाता है।

उसके आस-पास के वातावरण में प्रत्येक परिचित व्यक्ति उसकी सफलता की कहानी को जानता है और वे उससे सहायता माँगते हैं लेकिन अचानक, जब इस व्यक्ति का पतन होता है, तो वह दूसरों की सहायता करने में असमर्थ हो जाता है। इस प्रकार उसे महसूस होता है कि समाज उसे वह सम्मान नहीं दे रहा है जो उसे तब मिला करता था जब वह समृद्ध था। इस प्रकार उसे समायोजन करना कठिन हो जाता है। ऐसा ही सत्यजीत के साथ होता है।

Question 2. 
'Failure had a tempo faster than success.' 
'असफलता की गति सफलता से तीव्र होती है।'
Answer:
So far as the story concerns, it was clearly depicted that the people who achieve success very fast, fall also very fast. The tempo of future was always faster than success. People spend their whole life and get success but it comes to an end within a short time. On one hand, people strive hard to attain success while on the other hand, it takes a few minutes to reach failure.

It is also true that the success of others is a matter of chance for some but failure they consider to be pre-destined. Success is achieved through planned way and hard work for long but it is also true that failure strikes abruptly. It never knocks the door before approaching. The same happened with Satyajit also. So the saying that 'Failure had a tempo faster than success' proved with Satyajit.

जहाँ तक कहानी का प्रश्न है, यह स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि जो लोग बहुत तेजी से सफलता पाते हैं, उनकी असफलता बहुत तेज होती है। असफलता की प्रक्रिया सफलता से ज्यादा तीव्र होती है। लोग सफलता पाने के लिए पूरा जीवन लगा देते हैं लेकिन उसका अन्त थोड़े समय में ही हो जाता है। एक ओर लोग सफलता प्राप्त करने में कठिन संघर्ष करते हैं जबकि दूसरी ओर, असफलता तक पहुँचने में केवल थोड़ासा ही समय लगता है।

यह भी सत्य है कि दूसरों की सफलता कुछ लोगों के लिए मौके की बात होती है लेकिन असफलता को वे पूर्व निर्धारित मानते हैं। सफलता योजना बनाकर तथा कठिन परिश्रम के द्वारा लम्बे समय में अर्जित की जाती है लेकिन यह भी सत्य है कि असफलता अचानक ही आ जाती है। यह आने से पहले कोई लक्षण भी नहीं दिखाती है। ठीक यही सत्यजीत के साथ हुआ। अतः यह कहना कि 'असफलता की गति सफलता से तीव्र होती है' सत्यजीत के साथ सिद्ध हो जाती है।

Talking About the Text :

Question 1. 
It is difficult to adjust to a fall from glory. 
यश से नीचे गिरकर समायोजन करना अत्यन्त कठिन होता है।
Answer:
Glory at Twilight clearly depicts that it is too difficult to adjust to a fall from glory. A man finds it extremely difficult to accept defeat after being an achiever. A man works hard to achieve success day and night but suddenly falling from such heights after gaining glory, it becomes very difficult for a person to accept the failure easily.

Each and everyone of his acquaintance in his surroundings knows the success story of the person and they beg help from him but suddenly, when this person collapses, he finds himself unable to do so. Thus, he feels that society is not giving him the honour that he used to get when he was a prosperous person. In this way, it becomes difficult for him to adjust. So happens with Satyajit also.

Glory of Twilight स्पष्ट रूप से यह प्रदर्शित करती है कि यश से नीचे गिरना इतना कठिन हो जाता है कि उसे समायोजित नहीं किया जा सकता। एक सफल प्राप्तकर्ता के बाद व्यक्ति के लिए हार स्वीकार करना अत्यन्त कठिन हो जाता है। व्यक्ति सफलता पाने के लिए दिन-रात कठोर परिश्रम करता है लेकिन अचानक यश प्राप्त करने के बाद इतनी ऊँचाई से नीचे गिरना व्यक्ति के लिए आसानी से इस असफलता को स्वीकार करना अत्यन्त कठिन हो जाता है।

उसके आस-पास के वातावरण में प्रत्येक परिचित व्यक्ति उसकी सफलता की कहानी को जानता है और वे उससे सहायता माँगते हैं लेकिन अचानक, जब इस व्यक्ति का पतन होता है, तो वह दूसरों की सहायता करने में असमर्थ हो जाता है। इस प्रकार उसे महसूस होता है कि समाज उसे वह सम्मान नहीं दे रहा है जो उसे तब मिला करता था जब वह समृद्ध था। इस प्रकार उसे समायोजन करना कठिन हो जाता है। ऐसा ही सत्यजीत के साथ होता है।

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Question 2.
'Failure had a tempo faster than success.'
'असफलता की गति सफलता से तीव्र होती है।'
Answer:
So far as the story concerns, it was clearly depicted that the people who achieve success very fast, fall also very fast. The tempo of future was always faster than success. People spend their whole life and get success but it comes to an end within a short time. On one hand, people strive hard to attain success while on the other hand, it takes a few minutes to reach failure.

It is also true that the success of others is a matter of chance for some but failure they consider to be pre-destined. Success is achieved through planned way and hard work for long but it is also true that failure strikes abruptly. It never knocks the door before approaching. The same happened with Satyajit also. So the saying that 'Failure had a tempo faster than success' proved with Satyajit.

जहाँ तक कहानी का प्रश्न है, यह स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि जो लोग बहुत तेजी से सफलता पाते हैं, उनकी असफलता बहुत तेज होती है। असफलता की प्रक्रिया सफलता से ज्यादा तीव्र होती है। लोग सफलता पाने के लिए पूरा जीवन लगा देते हैं लेकिन उसका अन्त थोड़े समय में ही हो जाता है। एक ओर लोग सफलता प्राप्त करने में कठिन संघर्ष करते हैं जबकि दूसरी ओर, असफलता तक पहुँचने में केवल थोड़ासा ही समय लगता है।

यह भी सत्य है कि दूसरों की सफलता कुछ लोगों के लिए मौके की बात होती है लेकिन असफलता को वे पूर्व निर्धारित मानते हैं। सफलता योजना बनाकर तथा कठिन परिश्रम के द्वारा लम्बे समय में अर्जित की जाती है लेकिन यह भी सत्य है कि असफलता अचानक ही आ जाती है। यह आने से पहले कोई लक्षण भी नहीं दिखाती है। ठीक यही सत्यजीत के साथ हुआ। अतः यह कहना कि 'असफलता की गति सफलता से तीव्र होती है' सत्यजीत के साथ सिद्ध हो जाती है।

Question 3. 
Satyajit should have revealed his predicament to his uncle. 
सत्यजीत को अपनी दुर्दशा के बारे में अपने अंकल को पहले ही बता देना चाहिए था।
Answer:
Predicament is a situation which is unpleasant, difficult perplexing and dangerous. In this story, Satyajit fell a prey to predicament and was sandwiched between his fall and the expectations of uncle Srinath. He had helped him a lot earlier so uncle expected this time also but the wheel of his fortune had turned now and he could not disclose his present status to anyone because of his ego and pride.

For this reason, he had to suffer a lot and ultimately he had to put his house and pond at mortgage. It is true that revelation would have lightened his mood and heart. So, it might have been easier for Satyajit to be true and honest. He could also be successful to save his property of village.

दुर्दशा एक ऐसी स्थिति होती है जो कि दु:खद, कठिन, भ्रम में डालने वाली और खतरनाक होती है। इस कहानी में, सत्यजीत दुर्दशा का शिकार हो गया और अपने पतन और अंकल श्रीनाथ की आशाओं के बीच पिस गया। उसने अंकल की पहले बहत सहायता की थी इसलिए अंकल को इस बार भी आशा थी लेकिन उसके भाग्य का चक्र घूमा और वह किसी को भी अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में अपने अहम् और गर्व के कारण बता नहीं पाया।

इस कारण से उसे अत्यधिक कष्ट उठाना पड़ा और अन्त में उसे अपना घर और तालाब बन्धक रखना पड़ा। यह सत्य है कि अपनी स्थिति के प्रकटीकरण ने उसके मन और हृदय को हल्का कर दिया होता। अतः सत्यजीत के लिए सत्य और ईमानदार होना बहुत सरल हो जाता। वह गाँव की अपनी सम्पत्ति को बचाने में भी सफल हो जाता।

Question 4. 
The author's comment on crime and punishment. 
लेखक की अपराध और सजा पर टिप्पणी।
Answer:
Since the beginning of the story, the author believed that Satyajit achieved what he deserved. He always justified the promotion to the Managing Director but the fact was that he did not deserve it. Now, when the wheel of his fortune had turned, he began to despise the person whose forgery helped him to be promoted.

He no longer liked the person as he touched the peak of his success because of this person but now he has fallen from this status. Had he not caught this forger, he would not have touched such heights and then, there was no fear of fall. Now he wanted that the clock of time should turn back and he would let the person go. He was the cause of his sudden success because of which he had to suffer now.

कहानी के प्रारम्भ से ही लेखक को विश्वास था कि सत्यजीत ने वही प्राप्त किया जिसके वह योग्य था। उसने हमेशा प्रबन्ध निदेशक के पद पर अपनी उन्नति को न्यायोचित ठहराया लेकिन वास्तविकता यह थी कि वह इस योग्य नहीं था। अब, जब उसका भाग्य चक्र घूम चुका था, वह उस व्यक्ति से घृणा करने लगा जिसकी जालसाजी ने उसकी उन्नति में सहायता प्रदान की।

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अब उसे वह व्यक्ति बिल्कुल भी पसन्द नहीं था क्योंकि उसने उन्नति के शिखर को इसी व्यक्ति के कारण छुआ लेकिन अब वह अपने स्तर से नीचे गिर चुका है। यदि उसने उस जालसाज को नहीं पकड़ा होता तो उसने इतनी उन्नति भी नहीं की होती और फिर, उसे पतन का कोई भय नहीं होता। अब वह यह चाहता था कि समय की घड़ी वापस लौट जाए और वह उस व्यक्ति को जाने देगा। वह उसकी अचानक सफलता का कारण था और उसी के कारण अब वह कष्ट उठा रहा है। 

Appreciation :

Question 1. 
How is Satyajit's financial crash introduced to the reader? 
सत्यजीत की आर्थिक स्थिति का विखण्डन पाठकों के सामने किस प्रकार प्रस्तुत किया गया है?
Answer:
Satyajit was a poor boy when he lived in his village but through his hard work, he got success but ultimately again he has reached in the state of utter poverty. Now, he has a long list of the things that he dare not purchase. He is trying to quit some habits like smoking. We come to know about this intention when he is on the train and is about to smoke but drops the plan because he is not able to bear such luxury. He has rationed his habits as it is the time of shortage for him.

He had helped uncle Srinath a lot earlier but now he has Rupees one hundred one to give as benediction. He finds himself unable to purchase a perambulator for his newly born son, he has realised that the wheel of fortune does not favour him. Thus, he come to know that he is facing a financial crisis nowadays.

जब सत्यजीत गाँव में रहता था, वह एक गरीब बालक था लेकिन अपने कठिन परिश्रम से उसे सफलता मिली लेकिन अन्त में एक बार फिर वह अत्यधिक गरीबी की स्थिति में पहुँच गया है। अब उसके पास उन सामानों की लम्बी सूची है जिन्हें खरीदने की वह हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। वह धूम्रपान जैसी कुछ आदतों को छोड़ना चाह रहा है। हमें इस बात का पता तब चलता है जब वह ट्रेन में है और सिगरेट पीना चाहता है लेकिन वह इस विचार को त्याग देता है क्योंकि वह इतनी विलासिता का जीवन व्यतीत नहीं कर सकता है।

उसने अपनी आदतों को नियन्त्रित कर लिया है क्योंकि उसका यह समय अत्यधिक कमी का समय है। उसने अंकल श्रीनाथ की पहले बहुत सहायता की थी लेकिन अब उसके पास आशीर्वाद में देने के लिए मात्र एक सौ एक रुपये हैं। उसके पास अपने नवजात बेटे के लिए गाड़ी खरीदने के लिए भी पैसे नहीं हैं। उसने महसूस कर लिया है कि भाग्य का चक्र उसके पक्ष में नहीं है। इस प्रकार हमें पता चलता है कि आजकल वह आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

Question 2. 
Comment on the way in which the story is narrated from Satyajit's perspective.
सत्यजीत के दृष्टिकोण से, जिस विधि से यह कहानी लिखी गई है, उस पर टिप्पणी करिये।
Answer:
Satyajit is the protagonist of the story. He has seen many ups and downs in his life but he has been extremely biased in expressing his opinion. It seems that Satyajit is trying to justify him at every point of the story even when he feels regretful for not giving another chance to the forgerer or when he feels extremely joyous at being considered to be like God in the village. Completely broken condition of his spirit and soul is revealed

when he clearly admits that the tempo of failure occurs to a man faster than sụccess. The story also explains how he could have the moments of epiphany to forgive the forgerer, how he became a stupid for coming at the occasion of the marriage of Beena where Srinath and his family members expected a sufficient benediction from him and how he pulled Srinath from being ashamed in the marriage. All these incidences are narrated from the perspective of Satyajit.

सत्यजीत कहानी का नायक है। उसने अपने जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव देखे हैं लेकिन वह अपने विचार व्यक्त करने में अत्यधिक पक्षपातपूर्ण रहा है। ऐसा लगता है कि सत्यजीत कहानी में हर बिन्दु पर स्वयं को न्यायोचित सिद्ध करने की कोशिश कर रहा है उस समय भी जब उसे जालसाज को एक और मौका न दे पाने का दुःख होता है अथवा जब उसे गाँव में भगवान की तरह माने जाने पर खुशी होती है।

उसकी आत्मा की पूरी तरह से टूटी हुई स्थिति तब स्पष्ट होती है जब वह यह स्वीकार करता है कि किसी व्यक्ति के लिए असफलता की गति सफलता की गति से अत्यधिक तीव्र होती है। कहानी यह भी बताती है कि किस प्रकार वह जालसाज को क्षमा करके देवतुल्य होने का समय प्राप्त कर सकता है, कि वह किस प्रकार बीना की शादी में आकर मूर्ख बन गया जहाँ पर श्रीनाथ और उसके परिवार के सदस्य उससे एक पर्याप्त आशीर्वाद चाहते थे और किस प्रकार उसने श्रीनाथ को शादी में शर्मिन्दा होने से बचाया। ये सारी घटनाएँ सत्यजीत के दृष्टिकोण से बताई गई हैं।

Question 3. 
How has the author used the episode of the bank theft to comment on Satyajit's success in his career?
लेखक ने सत्यजीत के व्यावसायिक जीवन की सफलता पर टिप्पणी करने के लिए बैंक में चोरी की कहानी को किस प्रकार उपयोग किया है?
Answer:
The author presents Satyajit as the protagonist in the story. Satyajit is brought up in utter poverty but he gets a job in a bank. The author has presented a well knit plot of the story. The story presents a rapid rise of a common man from a mere clerk to the post of managing director. But the story also depicts how success which is earned through shortcuts cannot live longer.

It is always short-lived. This is the main episode in the story. It is Satyajit's luck that he is able to capture a forgerer and, in return, he gets promotion but this is also true that this promotion does not have any logic. Thus Satyajit is standing on an uncertain foundation which ultimately brings misfortune for him and again he reaches where he started from.

लेखक ने सत्यजीत को कहानी में नायक के रूप में प्रस्तुत किया है। सत्यजीत का पालन-पोषण अत्यधिक गरीबी में हुआ परन्तु उसे बैंक में रोजगार मिल गया। लेखक ने कहानी की सुगठित विषय-वस्तु प्रस्तुत की है। कहानी एक साधारण व्यक्ति की तीव्र उन्नति को प्रस्तुत करती जो कि साधारण क्लर्क से प्रबन्ध निदेशक बन जाता है। लेकिन कहानी यह भी प्रदर्शित करती है कि सफलता जो कि छोटे उपायों से अर्जित की जाती है वह लम्बे समय तक नहीं चल पाती है।

यह हमेशा संक्षिप्त होती है। यह कहानी की मुख्य विषयवस्तु है। यह सत्यजीत का भाग्य ही है कि वह एक जालसाज को पकड़ने में सफल हो सका और बदले में, उससे रोजगार में उन्नति मिली लेकिन यह भी सत्य है कि इस उन्नति का कोई तर्क नहीं है। इस प्रकार सत्यजीत एक अनिश्चित आधार पर खड़ा था जो कि अन्त में उसके लिए दुर्भाग्य लेकर आता है और वह वहीं पहुँच जाता है जहाँ से उसने शुरू किया था।

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Question 4. 
How do these lines capture the essence of the story : 'Glory was all overlaid with dark shame. Glory was dead.' ‘.... let him be wrapped a while in the lingering twilight splendour of departed glory'.
ये पंक्तियाँ किस प्रकार कहानी का सार प्रस्तुत करती हैं"यश पूरी तरह से घनी शर्म से ढंका हुआ था। यश समाप्त हो गया था।"
"... उसे थोड़ी देर के लिए ही सही, समाप्त हो चुके यश के चारों ओर हल्के वैभव के आवरण में स्वयं को ढंक लेना चाहिए"।
Answer:
These lines clearly depict the state of mind of Satyajit. Satyajit has faced so many challenges in his life. Although he has lost everything now yet he is not ready to accept his defeat or failure. He does not want that everyone should come to know about his ruin though he is completely broken to pieces. His uncle Srinath has a high respect and honour for him, though he does not know his present condition. 

Earlier he has ejoyed his status of being superior in the society and he is also used to show himself with a glorified look. His benediction helped uncle Srinath to get his daughters married in the reputed families. This is the reason why Satyajit finds it difficult to digest his fall. 'Glory is dead' is the final statement that reveals Satyajit's helplessness. He thinks that departed glory is utter shameful situation in public for him.

ये पंक्तियाँ सत्यजीत की मानसिकता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करती हैं। सत्यजीत ने अपने जीवन में अनेकों चुनौतियों का सामना किया है। यद्यपि अब उसका सब कुछ समाप्त हो गया है लेकिन फिर भी वह अपनी असफलता अथवा पराजय को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

वह नहीं चाहता है कि हर व्यक्ति को उसके नष्ट होने के बारे में पता चले यद्यपि वह पूरी तरह से टूट चुका है। उसके अंकल श्रीनाथ उसका अत्यधिक सम्मान करते हैं, यद्यपि उसे सत्यजीत की वर्तमान स्थिति का पता नहीं है। पूर्व में उसने समाज में श्रेष्ठ व्यक्ति होने की स्थिति का भरपूर आनन्द लिया है और वह स्वयं को यशवान् व्यक्ति के रूप में प्रदर्शित करता रहा है। उसके आशीर्वाद ने अंकल श्रीनाथ को अपनी बेटियों को सम्मानित परिवारों में शादी करने में सहायता की।

यही कारण है कि सत्यजीत अपने पतन को पचाने में असमर्थ पाता है। 'यश समाप्त हो गया' वह अन्तिम वाक्य है जो सत्यजीत की मजबूरी को प्रदर्शित करता है। वह सोचता है कि समाप्त होता हुआ यश उसके लिए सार्वजनिक रूप से अत्यन्त शर्मनाक स्थिति है। 

Language Work : 

1. Notice this description

Tall, thin, near forty, he had sharp features, the hair receding on his temple in wide shiny patches. His eyes hated glare and he wore smart eye-glasses to shield them. His mouth, thinlipped, would tighten in response to a line that suggested strength of will but might have only been pride. Look at the padding of adjectives. Notice how physical features are related to mental qualities.

(a) Pick out other such descriptions of people from the story.
(b) Try writing out a description of a person you have observed closely. 
Answer:
(a)

  • There first born, for he had married late in life. His son, his heir.
  • Eye upon eye, Alarm mind in the face and hand on the counter shaking curiously, surprised, stressed by a quick impulse. He took out the check...... 
  • ............while Kamini, Damini and Suhashi sat near him on their haunches and waved palm leaf fans with all their energy, as though each passing minute had to be fully used before their hands were deprived of their privilege sweat broke out on their faces and they shifted their fans from right hand to left and again to the right.
  • Their mother, who stood by, now spoke in a murmur, husky with emotion. 

(b) My close friend Shyam, a short statured, fatty, heavy face, with bulging eyes, deep wrinkles on his face, gloomy looking, panting came to me last evening. 

Question 2.
Notice these expressions
'We bask in your benediction. Our life-spark itself is held in your fist.' “This is her day. Let Beena alone wash and wipe the reverent feet. All her life she will remember this honour befalling her on her auspicious day of her marriage'. 
• How do they capture the Indian idiom?
• Underline other such expressions. 
Answer:
These idioms seem to be literally translated into English from Indian idioms and proverbs. As “bark in your benediction' means 'to enjoy with blessings' and 'life spark itself is held in your fist' means “our life is confined into your fist, if you open your fist and give us required money, we will live otherwise there may be the end of our lives. 
(i) Your benediction is our blind man's staff. 
(ii) But for the bigness of your heart. 
(iii) Our hearts grow big with pride at the sight of a son of Bengal.

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Question 3.
Notice these fragments in para three of the lesson
(a) The banking establishment of which he had attained control. 
(b) The amazing tempo of it all. These are not complete sentences but serve to capture the character's train of thought. Such devices are often used in creative writing. 
Answer:
Some more sentences like these sentences are - 
(i) The amazing tempo of it all. 
(ii) And now? What now? 
(iii) Then an expectant hush.

RBSE Class 11 English Glory at Twilight Important Questions and Answers

Short Questions Answers :

Question 1. 
Write down the glimpses of outside of the train as Satyajit was riding on the way.
सत्यजीत जिस ट्रेन से जा रहा था, उसके बाहरी दृश्य का वर्णन कीजिए।
Answer:
Satyajit was riding on the train, the train was slow, narrow-gauged which had freak of an engine used to stop without any reason between the corn fields just to pluck pumpkin or ripe melons or green gram from the peasants. Some people were not willing and they felt disturbed while others enjoyed the scenery outside.

सत्यजीत ट्रेन से जा रहा था, ट्रेन धीमी गति की सबसे छोटी पटरी वाली थी जिसके इंजन की आवाजें आ रही थीं जो कि बिना किसी कारण अनाज के खेतों में सिर्फ इसलिए रुक जाती थी कि कद् तोड़ना था अथवा पके हुए तरबूज तोड़ने थे अथवा किसानों से चना लेना था। कुछ लोग इस बात के इच्छुक नहीं थे और वे परेशान महसूस कर रहे थे जबकि कुछ दूसरे लोग बाहरी दृश्य का आनन्द ले रहे थे।

Question 2. 
What were the dowry items, according to Uncle Srinath, that were arranged and how they were arranged?
दहेज के कौन-कौनसे सामान, अंकल श्रीनाथ के अनुसार, की व्यवस्था की गई थी और यह किस प्रकार की गई थी?
Answer:
According to Uncle Srinath, the marriage gifts 'or dowry items that were arranged, were sari, jacket, chemise and brass utensils for the new household. And all these items were arranged by her three elder daughters who were wedded in the rich families with the benediction of Satyajit.

अंकल श्रीनाथ के अनुसार, वैवाहिक उपहार अथवा दहेज के सामान जिनकी व्यवस्था की गई थी, वे थे साड़ी, जैकेट, शमीज और नवविवाहित के लिए धातु के बर्तन। और ये सारा सामान उसकी तीन बड़ी बेटियों द्वारा दिया गया था जिनकी शादी सत्यजीत के आशीर्वाद से धनी परिवारों में हुई थी।

Question 3. 
What was Satyajit's state of mind when he was being received? 
जब सत्यजीत का स्वागत किया जा रहा था तब उसकी मानसिक स्थिति क्या थी? ।
Answer:
The state of mind when Satyajit was being received, was full of tension Uncle Srinath was explaining him about the dowry while he was thinking of his pocket. He had just Rs. 200/- in his pocket and he was to give some money as benediction and buy a perambulator for his newly born son. So he was swinging about the amount, he should give as benediction.

जब सत्यजीत का स्वागत किया जा रहा था तब उसके मस्तिष्क में अत्यधिक तनाव था। अंकल श्रीनाथ उसे दहेज के बारे में बता रहे थे जबकि वह अपनी जेब के बारे में सोच रहा था। उसके पास मात्र दो सौ रुपये थे और कुछ धन आशीर्वादस्वरूप देना था और अपने नवजात बेटे के लिए एक गाडी खरीदनी थी। अतः वह उस धन-राशि के बारे में झूल रहा था कि उसे आशीर्वाद में कितना धन देना चाहिए।

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Question 4. 
Who was Harish? Why was Uncle Srinath angry with him? 
हरीश कौन था? अंकल श्रीनाथ उससे नाराज क्यों थे?
Answer:
Harish was the money lender at Shantipur village. He was such a rich money lender as who could provide Rs. 2001/- at the time of night. Uncle Srinath was angry with him because he wanted to pay money against security. He wanted Satyajit's house and fish pond as security. Only then, he was ready to pay money which Uncle Srinath could not tolerate.

हरीश शान्तिपुर गाँव का साहूकार था । वह इतना धनी साहूकार था कि उस रात के समय भी रु. 2001/उपलब्ध करा सकता था। अंकल श्रीनाथ उससे इसलिए नाराज थे क्योंकि वह प्रतिभूतियों के बदले ही धन उपलब्ध करना चाहता था। वह सत्यजीत का घर और मछलियों का तालाब प्रतिभूतियों के रूप में चाहता था। केवल तभी वह धन उपलब्ध कराना चाहता था जो कि अंकल श्रीनाथ सहन नहीं कर सके।

Question 5. 
Why did Satyajit catch a large fish from his pond? 
सत्यजीत ने अपने तालाब से एक बड़ी मछली क्यों पकड़ी?
Answer:
Satyajit caught a large fish from the pond and took it to Uncle Srinath's house. Srinath was extremely happy to see it. He patted the head of the fish with an affectionate hand and told that this auspicious one would be served when the bride and groom would break their marriage fast at midnight.

सत्यजीत ने तालाब से एक बड़ी मछली पकड़ी और उसे लेकर अंकल श्रीनाथ के घर गया। श्रीनाथ को उसे देखकर अत्यधिक खुशी हुई। उसने बड़े प्रेम से मछली का सिर थपथपाया और बताया कि यह शुभ मछली तब परोसी जाएगी जब दुल्हन और दूल्हा मध्यरात्रि में अपना शादी का व्रत खोलेंगे। 

Long Questions Answers :

Question 1. 
Why had Satyajit sent his wife to her parents? 
सत्यजीत ने अपनी पत्नी को उसके माता-पिता के पास क्यों भेज दिया था?
Answer:
Satyajit was an ordinary clerk in bank but with his honesty and farsightedness, he became the Managing Director of the bank. But wheel of his fortune turned and the bank collapsed. All his private assets including his shares of companies, house and his two cars were gone. He got an opportunity to send his wife to her parents as she was to give birth to a child. Now, he was unable to bear her expenses. So he sent her there to avoid his disclosure of his poverty.

सत्यजीत बैंक में एक सामान्य क्लर्क था लेकिन अपनी ईमानदारी और दूरदर्शिता से वह प्रबन्ध निदेशक बन गया। लेकिन उसके भाग्य का चक्र घूमा और बैंक समाप्त हो गया। उसकी पूरी सम्पत्ति जिसमें उसके विभिन्न कम्पनियों के शेयर, उसका घर और दोनों कारें बिक गईं। उसे अपनी पत्नी को उसके माता-पिता के पास भेजने का मौका मिल गया क्योंकि उसे बच्चे को जन्म देना था। अब वह उसके खर्चों को सहन करने में असमर्थ था। अतः उसने अपनी पत्नी को अपनी गरीबी की बात खुलने से बचाने के लिए उसके माता-पिता के पास भेज दिया।

Question 2. 
Why was Satyajit thinking now that the man should have been given a chance to live?
सत्यजीत ने अब क्यों सोचा था कि उस व्यक्ति को जीने का एक मौका और मिलना चाहिए था?
Answer:
As Satyajit was lost in deep thoughts of his past life and how he could be able to capture the forgerer, he was also thinking about his own life also. He could not provide any chance to the man but now he had also reached in the same state so he wanted another chance to uplift himself. He thought that he should have given another chance to man which could help him to get another chance.

जब सत्यजीत अपने पिछले जीवन के बारे में गहन विचारों में डूबा हुआ था और वह जालसाज को किस प्रकार पकड़ने योग्य हो गया, वह यह भी सोच रहा था उसका पिछला जीवन कैसा बाावह उस व्यक्ति को कोई मौका नहीं दे सका लेकिन अब वह भी उसी स्थिति में पहुँच गया था इसलिए वह स्वयं को दूसरा मौका देना चाहता था। उसने सोचा कि उसे उस व्यक्ति को एक और मौका देना चाहिए जिससे कि उसे भी दूसरा मौका प्राप्त हो सके।

Question 3. 
How was Satyajit received at the railway station? 
सत्यजीत का रेलवे स्टेशन पर किस प्रकार स्वागत हुआ?
Answer:
When Satvajit reached the Shantipur Railway Station, he found many people waiting for his arrival. They were alert and excited to receive him. One of them was holding the national flag on a high bamboo pole. Satyajit was confused and thought whether there was a political leader in the train.

He thought how Uncle Srinath could lead a political procession. As soon as Satyajit got down the train, people rushed towards him saying, Swagatam! Welcome! A small girl garlanded him with jasmine flowers and Unck Srinath gave a welcome speech in his honour.

जब सत्यजीत शान्तिपुर रेलवे स्टेशन पर पहुँचा तो उसने बहुत से आदमियों को उसका इन्तजार करते हुए पाया। वे सतर्क थे और उसका स्वागत करने के लिए उत्साहित थे। उनमें से एक ऊंचे बांस के स्तम्भ पर राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए था। सत्यजीत भ्रमित हो गया और उसने सोचा कि क्या ट्रेन में कोई राजनेता है। वह सोच रहा था कि अंकल श्रीनाथ राजनीतिक जुलूस का नेतृत्व किस प्रकार कर सकते हैं। जैसे ही सत्यजीत ट्रेन से उतरा, लोग उसकी ओर यह कहते हुए दौड़ पड़े, स्वागतम् ! स्वागतम् ! एक छोटी बच्ची ने चमेली के फूलों की माला उसके गले में पहनाई और अंकल श्रीनाथ ने उसके सम्मान में स्वागत भाषण दिया।

Question 4. 
Discuss Satyajit's visit in the village Shantipur. What were his emotiours? 
सत्यजीत की शान्तिपुर गाँव में यात्रा का वर्णन कीजिए। उसकी क्या भावनाएं थीं?
Answer:
Satyajit was the native of Shantipur. When he went there to attend the marriage of Beena, he took the opportunity to visit the village. He met the elders and sipped the milk of green coconuts. He visited his house occupied by a tenant and touched the walls possessively. He felt a security from this house which he could not get from his huge city mansion. He saw his fish pond and sprinkled a palmful of its water on his head. He fet deeply attached to his village.

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सत्यजीत शान्तिपुर गाँव का निवासी था। जब वह बीना की शादी में शामिल होने वहाँ गया तो उसने इस अवसर का लाभ गाँव घूमने में लिया। वह बड़ों से मिला और हरे नारियल का रस उसने पीया। वह अपने घर भी गया जिसमें अब किरायेदार रह रहा था और बड़े अधिकार से उसकी दीवालों को छुआ। इस घर से उसे एक सुरक्षा की भावना महसूस हुई जो वह शहर के अपने बड़े घर में महसूस नहीं कर सका। उसने अपना मछलियों का तालाब देखा और हथेली भर पानी लेकर अपने सिर पर छिड़का। उसे अपने गांव से अत्यधिक लगाव महसूस हुआ।

Seen Passages 

Read the passage given below and answer the questions that follow :

Passage-1.

Satyajit, languid on the cushioned bench now vacated by the other occupants, reached out for his cigarettes but, on second thought, withdrew his hand brusquely. That won't do, he told himself with a stern shake of his head. His smoke was rationed. He had attuned himself in the past month to a fast-growing list of denials, large and small, and this was one. How can he afford the unrestricted luxury of chain smoking? Life lay sharpening to realities that still had the semblance of an undreamable dream. 

Questions : 

1. Why did Satyajit withdraw his hand brusquely?
सत्यजीत ने रूखेपन से अपना हाथ क्यों पीछे खींच लिया? 

2. Why has Satyajit rationed his smoking?
सत्यजीत ने अपने धूम्रपान को कम क्यों कर दिया है? 

3. Who is Satyajit?
सत्यजीत कौन है? 

4. Why does Satyajit have a list of denials?
सत्यजीत के पास न पूरी होने वाली आशाओं की सूची क्यों थी? 

5. Where did Satyajit sit?
सत्यजीत कहाँ बैठा था? 

6. What was his life showing to him?
जीवन उसे क्या दिखा रहा था? 
Answers : 
1. Satyajit withdrew his hand brusquely because he wanted to give up his habit of chain smoking. 
सत्यजीत ने रूखेपन से अपना हाथ इसलिए खींच लिया क्योंकि वह लगातार धूम्रपान की आदत को त्यागना चाहता था। 

2. Satyajit has rationed his smoking because of his poverty.
सत्यजीत ने अपनी गरीबी के कारण अपने धूम्रपान को कम कर दिया है। 

3. Satyajit is the protagonist of the story.
सत्यजीत कहानी का नायक है। 

4. Satyajit has a list of denials because he has no earnings now. He has no more job now. 
सत्यजीत के पास न पूरी होने वाली आशाओं की सूची इसलिए है क्योंकि उसकी इस समय कोई आय नहीं है। अब उसके पास कोई रोजगार नहीं है। 

5. Satyajit sat on the cushioned bench vacated by the other occupant.
सत्यजीत गद्दी वाली बैन्च पर बैठ गया जो कि किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा खाली की गई थी। 

6. Life lay sharpening to realities that still had the semblance of an undreamable dream. 
जीवन कठोर वास्तविकताओं से परिचित करा रहा था जो कि न देखने वाले स्वप्नों के अनुरूप था।

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Passage - 2.

He had no business to be on this wretched train on a neglected railroad, travelling away from the city where he must look for work, for the means of living. With the sudden collapse of his bank, all his private assets were gone overnight; the equities; the house on Tagore Street; even the two cars, his and his wife's. A mercy that she was away from the scene, with her parents at Delhi, and unaware of the full extent of the ruin. A telegram had come last Tuesday announcing the safe birth of her child. Their first-born, for he had married late in life. His son, his heir. And he had sold off his diamond ring to send his young wife a remittance for the name-giving rites. 

Questions : 

1. What are the three assets mentioned in the passage owned by Satyajit?
सत्यजीत की वे तीन कौनसी सम्पत्तियाँ हैं जो अनुच्छेद में आयी हैं?

2. Whom has his wife given birth?
उसकी पत्नी ने किसको जन्म दिया है? 

3. How did he arrange money to send his wife?
उसने अपनी पत्नी के पास भेजने के लिए धन की व्यवस्था कैसे की? 

4. Where was his wife?
उसकी पत्नी कहाँ है?

5. Why were his assets gone overnight?
उसकी सम्पत्तियाँ रातोंरात कैसे चली गई? 

6. How much did Satyajit's wife know about his ruin?
सत्यजीत की पत्नी उसके पूरी तरह बरबाद हो जाने के बारे में कितना जानती थी? 
Answers : 
1. The three assets mentioned in the passage are equities, two cars and a house.
अनुच्छेद में आयी हुई तीन सम्पत्तियाँ हैं-अंश, दो कार एवं एक घर। 

2. His wife has given birth to a son.
उसकी पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया है। 

3. He sold his diamond ring to send money to his wife.
उसने अपनी पत्नी के पास धन भेजने के लिए अपनी हीरे की अंगूठी बेच दी। 

4. His wife was in Delhi with her parents.
उसकी पत्नी अपने माता-पिता के साथ दिल्ली में है। 

5. His assets were gone overnight because of sudden collapse of his bank.
उसकी सम्पत्तियाँ उसकी बैंक के अचानक डूब जाने के कारण रातोंरात चली गईं। 

6. Satyajit's wife was unaware of the full extent of the ruin 
सत्यजीत की पत्नी उसके बरबाद होने के बारे में पूरी तरह से अन्जान थी।

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Passage-3.

Feet bounded up the counter. The bank clerk hunted down his prey on the gravel path, twenty paces from the front door. There was no struggle. The man crumpled down in a heap. He squatted with head between his hands, looking 'down, tears rolling down. 'Why did you have to commit forgery?' 'She has TB.' 'She?' 'She is dying for want of medicine.' 'Who?' 'My wife. I saw no other meAnswer:I give lessons in Maths to the rich man's son. That money...' The head between the hands wagged from side to side in a queer rhythmic frenzy. 

Questions : 

1. Where did the bank clerk hunt his prey down?
बैंक क्लर्क ने अपने शिकार को किस प्रकार पकड़ा? 

2. Why was his prey weeping?
उसका शिकार क्यों रो रहा था? 

3. What did the man do to earn money?
व्यक्ति धन कमाने के लिए क्या करता था? 

4. How could the clerk recognise that the man was a forgerer?
क्लर्क कैसे पता लगा सका कि वह व्यक्ति जालसाज था? 

5. Why did the man commit forgery?
उस व्यक्ति ने जालसाजी क्यों की?

6. Who is the bank clerk in fact referred here?
यहाँ पर सन्दर्भित बैंक क्लर्क वास्तव में कौन है? 
Answers: 
1. The bank clerk hunted down his prey on the gravel path, twenty paces from the front door.
बैंक क्लर्क ने अपने शिकार को मुख्य दरवाजे से बीस कदम दूर कंकड़ पत्थर वाले रास्ते पर पकड़ लिया। 

2. His prey was wecping because his wife was suffering from TB.
उसका शिकार इसलिए रो रहा था क्योंकि उसकी पत्नी टीबी की मरीज थी। 

3. The man used to give lessons of Maths to earn money.
व्यक्ति धन कमाने के लिए गणित पढ़ाया करता था। 

4. The clerk could recognise through his shaking hands.
क्लर्क उसके कांपते हुए हाथों से पता लगा सका। 

5. The man committed forgery because his wife was dying for want of medicine.
उस व्यक्ति ने जालसाजी इसलिए की क्योंकि उसकी पत्नी दवाइयों के अभाव में मरी जा रही थी। 

6. The bank clerk referred here is in fact Satyajit himself. 
यहाँ पर सन्दर्भित बैंक क्लर्क वास्तव में सत्यजीत ही है।

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Passage - 4.

The engine came to life with a shrill of warning. The passenger hurried back. Another half-hour and it was Shantipur. Satyajit leaned out of the door, his eyes looking for Uncle Srinath on the station platform, where many people stood crowded together, alert and apparently excited, one of them holding aloft the national flag on a bamboo pole.

A political celebrity on the train? Strange that Uncle Srinath, who had always feared politics, was kading the group. Suddenly, there was a rush of legs towards Satyajit as he stepped down. The legs stopped and a booming chorus followed, Swagatam! Welcome! 

Questions: 

1. What did the shrill warning of the engine indicate?
इंजन की तेज आवाज की चेतावनी ने क्या संकेत दिया? 

2. What was Satyajit's eyes looking for?
सत्यजीत को ऑखें क्या ढूंढ़ रही थी? 

3. Why did a crowd come at the station?
स्टेशन पर भीड़ क्यों आयी थी? 

4. Who was leading the crowd?
भीड़ का नेतृत्व कौन कर रहा था? 

5. How did the crowd cry seeing Satyajit'?
सत्यजीत को देखकर भीड़ कैसे चिल्लाई? 

6. What was a man holding aloft?
एक व्यक्ति किस चीज को ऊंचा किए हुए था? 
Answers : 
1. The shrill waming of the engine indicated that the train was about to depart so all the passengers hurried back. 
इंजन की तेज आवाज की चेतावनी ने संकेत दिया कि ट्रेन चलने वाली है अतः सारे यात्री जल्दी से वापस आ गये।

2. Satyajit's eyes were looking for Uncle Srinath.
सत्यजीत की आँखें अंकल श्रीनाथ को ढूँढ़ रही थीं। 

3. The crowd came to welcome Satyajit at the station.
भीड़ सत्यजीत का स्वागत करने स्टेशन पर आयी थी। 

4. Uncle Srinath was leading the crowd.
भीड़ का नेतृत्व अंकल श्रीनाथ कर रहे थे। 

5. Seeing Satyajit, the crowd cried in chorus-Swagatam! Welcome!
सत्यजीत को देखकर, भीड़ सामूहिक रूप से चिल्लाई-स्वागतम्! स्वागतम्! 

6. A man was holding aloft the national flag on a bamboo pole. 
एक व्यक्ति राष्ट्रीय ध्वज को लम्बे बाँस पर ऊँचा किए हुए था।

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Passage-5.

“You have been more of a father to these girls than he,' jerking her head at her invisible husband. “But for the bigness of your heart, they would still be maids under this room, shooting up in years and in height with no chance of having husband and home. She lifted her sari fringes to her eyes, wiping off two grateful tears. The meal over, Uncle Srinath, who had been shuttling between the inner verandah and the outer quarters, now stopped, leaning over his guest. 

Questions : 
1. “You have been more of a father to these girls than he.” Who is 'he' here?
You have been more of a father to these girls than he.” यहाँ पर 'he' कौन है? 

2. "She lifted her sari.............. ." Who is 'She' here?
“She lifted her sari.............. .” यहाँ पर 'She' कौन है? 

3. What do you mean by “shooting up in years and in height.”
"shooting up in years and in height.” इस पंक्ति का क्या अर्थ है? 

4. Why did Srinath stop leaning over his guest?
श्रीनाथ अपने मेहमान की ओर झुकते हुए क्यों रुक गये? 

5. What do you mean by “her invisible husband?”
"her invisible husband" से आपका क्या अभिप्राय है? 

6. Where was Uncle Srinath shuttling?
अंकल श्रीनाथ कहाँ पर लगातार चक्कर लगा रहे थे? 
Answers : 
1. he' is Uncle Srinath here.
यहाँ पर 'he' अंकल श्रीनाथ हैं। 

2. Here 'She' is the mother of the daughters.
यहाँ पर She' बेटियों की माँ है। 

3. This line means that had Satyajit not helped with money to Srinath, his daughters might not have been married at their right age and height would have increased. 
इस पंक्ति का अर्थ है कि यदि सत्यजीत ने धन से श्रीनाथ की सहायता नहीं की होती तो उसकी बेटियों की शादी ठीक उम्र में नहीं हुई होतीं और उनकी लम्बाई बढ़ती रही होती। 

4. Uncle Srinath stopped to tell him about the things that had been arranged to give Beena and another Rs. 2001/- that he required yet. 
अंकल श्रीनाथ उन वस्तुओं के बारे में उसे बताने के लिए रुके जिनकी बीना को देने के लिए व्यवस्था कर ली गई थी तथा रु. 2001/- जिनकी अभी भी आवश्यकता थी।

5. “her invisible husband” means that her husband was not there but she felt his presence.
"her invisible husband" से अभिप्राय यह है कि उसका पति वहाँ नहीं था लेकिन उसने अपने पति की वहाँ पर उपस्थिति महसूस की। 

6. Uncle Srinath had been shuttling between the inner varandah and the outer quarters. 
अंकल श्रीनाथ अन्दर के अहाते और बाहरी निवास के बीच लगातार चक्कर लगा रहे थे।

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Passage-6.

Uncle Srinath rushed out of the house, panic on his face. He had been under the impression that a millionaire always had his pockets stuffed with money. Satyajit returned to the assembled guests. Instantly the groom, on his foot-high satin-draped platform, fat round cushions on three sides of him, was forgotten. Silence. All eyes took their fill of the rich man.

A god on the pedestal of fortune. He too sat quiet, the tiredness within him heavier than ever before. The peace he had attained erstwhile was gone. He longed to see the face of his newborn son. The rich man's son who would never ride in a perambulator. 

Questions : 
1. Why did Uncle Srinath rush out of the house?
अंकल श्रीनाथ तेजी से घर के बाहर क्यों भागे? 

2. Where does Satyajit want to go and why?
सत्यजीत कहाँ जाना चाहता है और क्यों? 

3. Why was Satyajit so depressed?
सत्यजीत इतना निराश क्यों था? 

4. Why would the rich man's son never ride in a perambulator?
एक धनी व्यक्ति का बेटा बच्चा गाड़ी की सवारी कभी क्यों नहीं कर पायेगा? 

5. What impression did Srinath have about a millionaire?
श्रीनाथ की एक लखपति के बारे में क्या धारणा थी? 

6. How did Satyajit sit?
सत्यजीत किस प्रकार बैठा हुआ था? 
Answers : 
1. Uncle Srinath rushed out of the house to arrange money that he expected to receive from Satyajit. 
अंकल श्रीनाथ तेजी से घर के बाहर धन की व्यवस्था करने के लिए भागे जो कि उन्हें सत्यजीत से प्राप्त होने की आशा थी। 

2. Satyajit wants to go to Delhi to see his newly born baby.
सत्यजीत अपने नवजात शिशु को देखने दिल्ली जाना चाहता है। 

3. Satyajit was so depressed because he did not have the amount that Srinath demanded.
सत्यजीत इतना निराश इसलिए था क्योंकि उसके पास उतना धन नहीं था जितना श्रीनाथ ने माँगा था। 

4. A rich man's son would never ride in a perambulator because now that rich man had been poor. He had only Rs. 200/- which are to be given as benediction and rest was for his return travelling fare. 
धनी व्यक्ति का बेटा कभी भी बच्चा गाड़ी की सवारी नहीं कर पायेगा क्योंकि अब वह धनी व्यक्ति गरीब हो गया था। उसके पास मात्र रु. 200/- थे जो कि आशीर्वाद स्वरूप दिये जाने थे और बाकी उसके वापसी के किराये के लिए थे।

5. Srinath had been under the impression that a millionaire always had his pockets stuffed with money. 
श्रीनाथ की एक लखपति के बारे में यह धारणा थी कि एक लखपति हमेशा अपनी जेबों को धन से भरकर रखता है। 

6. Satyajit sat quietly. The tiredness within him was heavier than ever before.
सत्यजीत शान्त होकर बैठा हुआ था। उसके अन्दर की थकान पहले की कभी की थकान से ज्यादा भारी थी।

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Passage-7.

'The insult, what about the insult?' Srinath's wrathful hand cleaved the air. When the thing is done, I will make the shark rub his fat nose on the ground at your feet; I will do that, be sure. You will also see the whole village spit at the shark, thoo!' The deed was signed, the house was gay with marriage music. Satyajit walked off to the deep dark under the fig tree, all by himself.
“What now,' he said under his breath, and a dim smile pinched the corners of his lips as he stuck between them the cork tip of a cigarette, the last one in the tin, and lifted a lit match with slow tremulous deliberation. 

Questions : 

1. What is the name of the money-lender?
साहूकार का क्या नाम है? 

2. Who has the cork tip of a cigarette in his mouth?
सिगरेट के कार्क का सिरा किसके मुँह में है? 

3. What is the insult being referred here?
यहाँ पर कौनसे अपमान को सन्दर्भित किया गया है? 

4. What is the significance of ‘What now”?
"What now' इस वाक्य की क्या महत्ता है? 

5. Why was Srinath so wrathful?
श्रीनाथ इतना नाराज क्यों था? 

6. Why was the house gay with marriage music?
घर शादी की खुशियों के संगीत से क्यों भर गया? 
Answers : 
1. The name of the money-lender is Harish.
साहूकार का नाम हरीश है। 

2. The cork tip of a cigarette is in the mouth of Satyajit.
सिगरेट के कार्क का सिरा सत्यजीत के मुँह में है। 

3. The insult being referred here is that Harish wanted some security against paying a loan. 
यहाँ पर जो अपमान सन्दर्भित किया गया है वह है कि हरीश धन उधार देने के बदले में कोई जमानत चाहता था। 

4. The significance of 'What now' is that Satyajit is uncertain towards his future, social status and way of earning his livelihood. "What now' इसकी महत्ता यह है कि सत्यजीत अपने भविष्य, सामाजिक स्तर और आजीविका कमाने के साधन के लिए अनिश्चित है। 

5. Srinath was so wrathful because the money-lender had demanded some security to pay loan which he thought to be an insult.
श्रीनाथ इसलिए नाराज था क्योंकि साहूकार ने धन उधार देने के लिए कुछ जमानत की माँग की जिसे उसने अपमान समझा था। 

6. The house was gay with marriage music because the money required had been arranged. 
घर शादी की खुशियों के संगीत से इसलिए भर गया क्योंकि जितने धन की आवश्यकता थी, उसकी व्यवस्था हो गई थी।

Glory at Twilight Summary and Translation in Hindi

About the Author-

Bhabani Bhattacharya (1906-1988), one of the foremost Indian writers of fiction in English, won acclaim for his novel, So Many Hungers (1947), which presents a vivid picture of the Bengal famine during World War II. He won the Sahitya Akademi Award for Shadow from Ladakh (1966). He also wrote a number of short stories. 

'Glory at Twilight' is taken from the collection, Steel Hawk and Other Stories.

लेखक के बारे में भवानी भट्टाचार्य (1906-1988), अंग्रेजी कथा-साहित्य के भारतीय लेखकों में अग्रणी, ने अपने उपन्यास So Many Hungers (1947) के द्वारा अपने प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित किया जो कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बंगाल की भुखमरी का विविध चित्रण प्रस्तुत करती है। उन्होंने साहित्य अकादमी पुरस्कार अपने उपन्यास Shadow from Ladakh (1966) के लिये जीता। उन्होंने अनेकों लघु कहानियाँ भी लिखीं।

Glory at Twilight उनके कहानी-संग्रह Steel Hawk and Other Stories से ली गई है।

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About the Story 

Glory at Twilight by Bhabani Bhattacharya is the story that revolves round Satyajit who enjoyed the most successful days in his life. He worked in a bank where he caught hold a man who was trying to encash an unsigned cheque. After this incident, he was promoted. Then, he was married. He was on the pinnacle of his successful profession. But suddenly, his bank went bankrupt and so did Satyajit. Now he had nothing with him, he sent his pregnant wife to her parents where she gave birth to a son.

He got an invitation of marriage from Srinath for his daughter's marriage but at the village, uncle Srinath expected him what he had not thought. For ₹ 2001, he had to mortgage his house and fish pond to pay uncle Srinath. Now, he found him on the dilemma. He was not able to buy even a perambulator for his newly born son. And in the end he put a question - “What now”? The story ends here.

कहानी के बारे में-

Glory at Twilight भवानी भट्टाचार्य की एक ऐसी कहानी है जो सत्यजीत के | चारों ओर घूमती है जिसने अपने जीवन में सफलतम दिनों का आनन्द लिया। वह एक बैंक में कार्य करता था जहाँ पर उसने एक व्यक्ति को पकड़ लिया जो बिना हस्ताक्षर किया हुआ चैक भुनाने की कोशिश कर रहा था। इस घटना के बाद उसको उन्नति मिल गयी। तत्पश्चात्, उसकी शादी हो गई। वह अपने व्यवसाय | की सफलता के शिखर था। लेकिन अचानक उसकी बैंक दिवालिया हो गई और साथ ही सत्यजीत भी। अब उसके पास कुछ भी नहीं था। उसने अपनी गर्भवती पत्नी को उसके माता-पिता के पास भेज दिया जहाँ पर उसने एक पुत्र को जन्म दिया।

उसे श्रीनाथ की पुत्री के विवाह का निमन्त्रण मिला लेकिन गाँव में अंकल श्रीनाथ को उससे ऐसी उम्मीद थी जो उसने सोची भी नहीं थी। 2001 रुपए में उसे अपना घर और मछलियों का तालाब गिरवी रखना पड़ा ताकि अंकल श्रीनाथ को धन दे सके। अब वह पूरी तरह से परेशानियों में फंसा हुआ है। वह अपने नवजात पुत्र के लिए एक गाड़ी भी खरीदने की स्थिति में नहीं है। और अन्त में वह प्रश्न करता है - "अब क्या?" यहीं पर कहानी समाप्त हो जाती है।

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद 

The slow narrow-gauge ............... undreamable dream. (Page 85)

कठिन शब्दार्थ-Freak (फ्रीक्) = unusual (सनक)। fistfuls (फिस्ट्फु ल्स ) = handful (मुट्ठी भर)। languid (लैग्विड्) = lacking spirit (निस्तेज)। brusquely (ब्रुक्ल ) = rudely (अशिष्टता से)। attuned (अट्यून्ड्) = to bring on correct pitch (अनुकूल करना/सुर मिलाना)। semblance (सेम्ब्ल न्स्) = outward appearance (अनुरूपता)।

हिन्दी अनुवाद-धीमी गति की नैरोगेज भारतीय ट्रेन जिसके इंजन की अजीब-सी आवाज आ रही थी, अपने रास्ते में बिना किसी कारण के अनियमित स्थानों पर रुकती हुई अनाज के खेतों के बीच से अथवा गाँव के पास से जा रही थी-ऐसा कहा गया कि गार्ड ने कद्दू तोड़ने अथवा पके हुए तरबूज तोड़ने अथवा किसान से थोड़ा-सा हरा चना खरीदने के लिये गाड़ी को रुकने का संकेत दिया था। कुछ यात्री बड़बड़ाए और तनी हुई भौंह, अपने मस्तिष्क में अधिकारियों के लिए अथवा समाचार-पत्रों के लिए गुस्से से भरे हुए पत्र लिखते हुए बैठ गये लेकिन दूसरे लोगों ने इसे खुली हवा में सांस लेने अथवा हरे-भरे खेतों का अवलोकन करने का अवसर माना और वे चुपके से नीचे उतर गये।

सत्यजीत किसी दूसरे यात्री द्वारा खाली की गई गद्दी युक्त सीट पर निस्तेज-सा बैठा हुआ था उसने अपनी सिगरेट निकाली लेकिन दूसरी बात सोचते ही झटके से अपना हाथ पीछे खींच लिया। ऐसा नहीं चलेगा अपने सिर को एक कठोर झटका देते हुए उसने अपने आप से कहा। उसने धुएँ को मर्यादित ढंग से इधर-उधर किया। उसने अपने आप को इनकार करने की तेज गति से बढ़ती हुई अपनी आवश्यकताओं की सूची के साथ अनुकूल कर लिया था, बड़ी और छोटी आवश्यकताएँ और यह भी उनमें से एक थी। वह किस प्रकार बिना रुकावट के श्रृंखलाबद्ध धूम्रपान की विलासिता का खर्च उठा सकता है? जीवन कठोर वास्तविकताओं से परिचित करा रहा था जो कि न देखने वाले स्वप्नों के अनुरूप था। 

RBSE Solutions for Class 11 English Woven Words Short Stories Chapter 7 Glory at Twilight

He winced, .................. What now?' (Pages 85-86)

कठिन शब्दार्थ-winced (विन्स्ड ) = the facial expression of sudden pain (दर्द का भाव आना) । reminiscence (रेमिनिस्न्स् ) = recall (स्मृतियाँ)। initiative (इनिशटिव्) = first step (पहल करना) । receding (रिसीडिङ्) = retreat (दूर)। patches (पैच्ज) = spot (धब्बा, पैबन्द)। obsession (अब्सेशन्) = an irrational motive (मनोग्रस्ति, सनक)। repose (रिपोज) = rest (विश्राम)।

हिन्दी अनुवाद-हमेशा की तरह, अपनी आँखों में घूमते हुए भाग्य के चक्र को देखते हुए उसके चेहरे पर दर्द के भाव आ गये। स्मृतियों के भण्डार में वह अपनी इच्छा के विरुद्ध खींचे जाने के कारण गोल-गोल घूम गया। वह बैंक जिसका नियन्त्रण उसने अपने हाथ में ले लिया था। इस सब में उसकी आश्चर्यजनक गति। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि उसके भाग्य ने उसका साथ दिया लेकिन इसके पीछे उसका मस्तिष्क, उसकी पहल, धैर्य, शक्ति थी। केवल एक क्लर्क से शुरू करके वह प्रबन्ध निदेशक बन गया था। और अब? अब क्या?

लम्बा, दुबला, लगभग चालीस वर्षीय, उसके बड़े तीक्ष्ण नैन नक्श थे, उसके बाल सुन्दर, चमकदार और कनपटी के ऊपर लहराते हुए थे। उसकी आँखें चमक सहन नहीं कर पाती थीं और वह शानदार चश्मा उन्हें ढकने के लिए प्रयोग करता था। उसका मुँह, पतले होंठों से युक्त, एक पंक्ति में इस तरह से कसा हुआ कि जो उसकी इच्छा शक्ति को प्रदर्शित करता था लेकिन शायद यह उसका केवल एक गर्व था। अब क्या? उसने गहरी साँस लेते हुए स्वयं से कहा । ये शब्द उसके लिए एक मनोवृत्ति अथवा सनक बन गये थे। 'अब क्या?' 

He had no business.............Glory was dead. (Page 86)

कठिन शब्दार्थ-wretched (रेचिड्) = very sad (बहुत दु:खी)। collapse (कलैप्स्) = to fall down (अचानक ढह जाना)। equities (इक्विटीज्) = fairness (सममूल्य शेयर, निष्पक्षता, समानता)। ruin (रूइन्) = spoil (नष्ट होना)। remittance (रिमिट्न्स् ) = money sent to someone (भेजा हुआ धन)। sequel (सीक्वल्) = continuation (उत्तर कथा, बाद की कहानी)।

हिन्दी अनुवाद-ट्रेन के इस उपेक्षित रास्ते की इस दुःखद ट्रेन में यात्रा करते हुए उसके पास कोई कार्य नहीं था, शहर से दूर जाते हुए जहाँ पर उसे कोई कार्य तलाशना ही था ताकि वह आजीविका कमा सके। अचानक उसकी बैंक ढह जाने के कारण एक रात में ही उसकी व्यक्तिगत सम्पत्तियाँ, जिसमें शामिल थीं उसके सममूल्य (कम्पनी) शेयर, टैगोर स्ट्रीट का मकान, यहाँ तक कि उसकी दोनों कारें-एक उसकी अपनी और एक उसकी पत्नी की--सब चली गई।

यह ईश्वर की दया ही थी कि वह इस परिदृश्य से दूर दिल्ली में अपने माता-पिता के साथ थी और उसकी बरबादी की उसे जानकारी नहीं थी। पिछले मंगलवार को उसके पास एक टेलीग्राम जिसमें उसके बच्चे के सुरक्षित जन्म के बारे में लिखा था, उसके पास आया था। उसका बेटा, उसका उत्तराधिकारी। और उसने बच्चे के नामकरण संस्कार के खर्च के लिए अपनी युवा पत्नी के पास भेजने के लिए अपनी हीरे की अंगूठी बेच दी।

उसकी (पत्नी की) शादी एक धनी व्यक्ति के साथ हुई थी---और अब इस परेशानी में उसका जीवन और ज्यादा कठोर हो गया। निःसन्देह वह उसके (सत्यजीत के) (विवाह) पूर्व के जीवन के बारे में सब कुछ जानती थी। लेकिन वह कहानी की विषय-वस्तु थी। यह कहानी बड़ी खुशी से उनके पुत्र को सुनाई जा सकती थी जब वह बड़ा हो जाएगा। यह कहानी उत्तर कथा के रूप में नष्ट हो चुकी थी—असफलता। यश घनी शर्म में डूब चुका था। यश समाप्त हो गया था। 

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It would be easy ................. going away. (Pages 86-87) 

कठिन शब्दार्थ- humble (हम्बल) = not proud (विनम्र)। struggle (स्ट्रगल्) = fight (संघर्ष)। grateful (ग्रेट्फ्ल ) = showing thanks (कृतज्ञ)। grille (ग्रिल) = lattice (जाली, जंगला)। impulse (इम्पल्स्) = urge (प्रेरणा)| instance (इन्स्टन्स्) = example (उदाहरण)। stark (स्टाक्) = rude (कठोर)।

हिन्दी अनुवाद-आज यह ज्यादा सरल रहेगा कि यदि सिवाय उसके कोई अन्य व्यक्ति सोचने के लिये नहीं होंगे। एक छोटे से गाँव में पैदा होकर, स्वाध्याय से शिक्षित, संघर्ष ही उसकी प्राण-वायु थी। जो लिपिकीय कार्य उसने प्राप्त किया था उसके लिए वह कितना कृतज्ञ था। भाग्य-चक्र का घूमना? वह आश्चर्यचकित था। एक वर्ष बाद अगला परिवर्तन और ज्यादा नाटकीय था। क्या कारण था कि वह काउन्टर की पीतल की जाली के परे खड़े हुए व्यक्ति की ओर स्थिर दृष्टि से देखता रहा? नकद भुगतान के लिए जो चैक उसके सामने प्रस्तुत किया गया था वह कोई बड़ी धन-राशि का नहीं था। आँखों से आँखें मिलीं। चेहरे पर विविध प्रकार के भाव और अत्यधिक काँपता हुआ काउन्टर पर रखा हुआ हाथ । 

आश्चर्यचकित, तीव्र भावना से काँपता हुआ, वह चैक को लेकर एकाउन्ट्स डैस्क पर गया, रिकॉर्ड में रखे हुए हस्ताक्षर से मिलान किया। हस्ताक्षर मिल गये। लेकिन वह चेहरा । वह (काँपता हुआ) हाथ। सैकड़ों कारण और चैक से सम्बन्धित कोई भी कारण उस चेहरे और हाथ की व्याख्या नहीं कर सका। फिर उसी भावना के वशीभूत वह टेलीफोन पर पहुँचा।"श्रीमान्जी, क्या आपने दो हजार रुपये के चैक पर हस्ताक्षर किए हैं? इस पर कल की दिनांक पड़ी हुई है.........." "दो हजार रुपये? नहीं", उसके हृदय में जैसे वायु की कमी से दर्द हो गया। "श्रीमान्जी, क्या आप पूरी तरह से आश्वस्त हैं? हस्ताक्षर पूरी तरह से ठीक प्रतीत हो रहे हैं।" अगले ही क्षण वह तेजी से दौड़ता हुआ अपने काउन्टर पर आया। वह व्यक्ति कहाँ गया? वहाँ, बाहर जाने के दरवाजे के पास और उसका चेहरा एक क्षण के लिए पीछे मुड़ा तो उस पर गहन भय के भाव थे। वह बाहर जा रहा था। 

Feet bounded up.....chance to live? (Page 87) 

कठिन शब्दार्थ-prey (प्रे) = target (शिकार)। gravel (ग्रैवल) = crushed rock (कंकड़, बजरी)। crumpled (क्रम्ब्ल्ड ) = full of untidy creases and folds (मुड़ा हुआ सिलवटदार)। squatted (स्क्वॉट्ड) = knee bend (उकडूं बैठना)। wagged (वैग्ड) = shake (हिलना, काँपना)। frenzy (फ्रेन्जि ) = crazy (पागलपन, सनक)। contempt (कन्टेम्प्ट) = disdain (घृणा, अपमान)। crouched (क्राउच्ड) = to bend legs (दुबक कर)। volition (वलिश्न्) = power to choose (निर्णय अथवा चयन क्षमता)।

हिन्दी अनुवाद-पैर कानूनी कार्य करने के लिए बाध्य हो गये। बैंक क्लर्क ने अपने शिकार को मुख्य दरवाजे से बीस कदम की दूरी पर कंकड़ पत्थर वाले रास्ते से पकड़ लिया। कोई संघर्ष नहीं हुआ। वह व्यक्ति शरीर को मोड़कर एक ढेर के रूप में बैठ गया। वह उकडूं बैठा हुआ था और अपने सिर को हाथों से पकड़े हुए था, नीचे की ओर देख रहा था और उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। "तुम्हें यह जालसाजी क्यों करनी पड़ी?" "वह टी.बी. की मरीज है।" । "वह (कौन)?" "वह दवाई की कमी के कारण मरी जा रही है।" "कौन?" "मेरी पत्नी।" "मुझे कोई दूसरा साधन दिखाई नहीं दिया। मैं एक धनी व्यक्ति के बेटे को गणित पढ़ाता हूँ। वह ." उसका सिर जो कि उसके हाथों में था, एक अजीब से लयबद्ध पागलपन के कारण एक ओर से दूसरी ओर हिल-डुल रहा था।

यह वह दिन था जब क्लर्क की एकाउन्टैण्ट के रूप में पदोन्नति हो गई। जो कुछ उसने प्राप्त किया, वह उसका अधिकारी था। वह केवल एक क्लर्क बनने के लिए पैदा नहीं हुआ था। रोमांच में खोया हुआ, उसकी उन्नति के लिए उसकी ईमानदारीपूर्वक प्रयास के लिए वह जालसाज सहयोगी हुआ। तुम मरती हुई पत्नी को भी बचाने के लिए इस तरह का अपराध नहीं कर सकते। लेकिन आज, वह जब ट्रेन की इस बैन्च पर अकेला बैठा हुआ था, तो उसने अपने मस्तिष्क में बहुत सारे (काल्पनिक) चित्र देखे और परेशान हो गया। 

वह उकडूं ऊबड़खाबड़ रास्ते पर बैठा हुआ व्यक्ति जो कि शान्त दुःख में लिपटा हुआ था। सलाखों के पीछे कैदी, जमा हुआ चेहरा, ऐसा लगता था कि वह अपने अन्दर ही मर चुका है। क्या उसके पास कहने के लिए कुछ है? न्यायाधीश ने उससे पूछा। "मुझे सजा दो।" "क्या यह पर्याप्त है?" "मुझे हत्यारे की तरह सजा दो।" "हत्यारा?" "मैंने अपनी पत्नी को शर्मनाक स्थिति में पहुँचाया है। शर्म भी टी.बी. के बराबर तेज गति से मारती है।"  हाँ, उस दुर्भाग्यशाली व्यक्ति ने अपने काँपते हाथों से अपने लिए ही बुरे समय का पहिया चला दिया। उस समय से कानूनी चक्र अपने हिसाब से लगातार चल रहा था। वह इस जालसाज का पूरी तरह आभारी था। अब इतनी देर हो चुकी थी कि उसे वह बाहर नहीं निकाल सकता था, क्या उसे जीवित रहने का एक और मौका मिलना चाहिए? 

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Too late............self-satisfaction. (Page 88) 

कठिन शब्दार्थ-prostrate (प्रॉस्ट्रेट्) = lying down flat on the ground (जमीन की ओर मुँह .. करके जमीन पर सीधा लेटा हुआ)। wreckage ('रेकिज्) = broken pieces (टुकड़े)। overreach (ओवरीच्) = outwit (धोखा देना) । perspective (पस्पेक्टिव्) = position (दृष्टिकोण)। wrenching (रेन्विङ्) = racking (अत्यन्त कष्टदायी)। negotiations (निगोशिएशन्स्) = dialogue (समझौता)। benediction (बेनिडिक्श्न् ) = blessing (आशीर्वाद)।

हिन्दी अनुवाद-बहुत देर। वह स्वयं भी इस समय जीवित रहने का मौका चाहता था। बैंक का व्यापार अब टूटकर उसके चारों ओर बिखर गया था और वह स्वयं भी जमीन पर टूटा हुआ औंधे मुंह पड़ा हुआ धूलमिट्टी को खा रहा था। सारा दोष उसी का था। उसने स्वयं को ही धोखा देने की कोशिश की थी। समय के साथ-साथ प्रत्येक गलत कदम स्पष्ट हो गया था। बैंक का कार्य अचानक ही समाप्त हो गया। असफलता में सफलता की तुलना में ज्यादा तीव्र गति होती है।

उसे अपने आप से बहुत दूर उड़ जाने की अत्यधिक आवश्यकता थी और यही कारण था कि वह ट्रेन में था। ठीक उसी समय उसके पास एक पत्र आया जिससे उसे थोड़ा-सा आराम मिला, उसके आन्तरिक कष्ट से अस्थायी आराम। "मेरी पाँचवीं बेटी बीना की शादी इस महीने की बीस तारीख को होने वाली है। मैंने आपको इस व्यवस्था की उन्नति के बारे में लगातार पत्र लिखे हैं। मैं अपनी दूसरी, तीसरी और चौथी बेटियों-कामिनी, दामिनी और सुहाशी की तरह आपके आशीर्वाद के लिए प्रतीक्षारत हूँ। बीना की शादी के बाद, केवल अरुणा (शादी के लिए) रह जाएगी और वह अपने दसवें वर्ष में चल रही है। आपका अकेले का आशीर्वाद मुझे बेटियों की समस्या से बाहर निकाल सकता है। मुझे यही सब कहना था - आपका असहाय अंकल, श्रीनाथ।"

बेटियों की समस्या, वास्तव में! सत्यजीत के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कराहट आ गई। अंकल श्रीनाथ, शान्तीपुर गाँव में उसके पड़ौसी लेकिन कोई खून का रिश्ता नहीं था, अपनी अनेकों बेटियों को इस तरह सुरक्षित करते हुए प्रतीत हुए कि उनकी शादी की आवश्यकताओं की बार-बार होने वाली समस्या को दूसरे लोग सहन करेंगे। और सत्यजीत, अपनी समृद्धि की चकाचौंध में खुले हाथ से भी ज्यादा खर्च करने वाला रहा। यह गर्व और आत्मसन्तुष्टि की बात थी।  

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In his younger days ...............on the marriage day. (Pages 88-89)

कठिन शब्दार्थ-brilliance (ब्रिलिअन्स्) = great brightness (प्रतिभा, चमक)। homage (हॉमिज्) = respect (सम्मान)। tread (ट्रेड्) = to put foot (चलना)। ancestral (ऐन्सेस्ट्रल) = hereditary (पैतृक)। leased (लीस्ड्) = hired (पट्टा)। intact (इन्टैक्ट) = not damaged (क्षतिग्रस्त नहीं)। demolition (डेमलिश्न्) = destruction (विनाश, विध्वंस)।

हिन्दी अनुवाद-अपने युवावस्था के दिनों में, गाँव के लोगों ने उसके बारे ज्यादा कुछ भी नहीं सोचा था, उसके अन्दर किसी भी प्रकार कोई विशेष बुद्धिमानी अथवा आभा नहीं देखी थी। साधारण ग्रामीणों में से एक। और यही कारण था कि उसे इस प्रकार सफलता मिली। उसे अंकल श्रीनाथ और उसी तरह के अन्य लोगों के आश्चर्य और उनके सम्मान की आवश्यकता थी जबकि उन्हें उसके धन के प्रयोग की इच्छा थी। यह साफतौर पर लेन-देन ही था।

यह सब कुछ समाप्त हो गया। अपने हवाई किले से नीचे गिरकर सत्यजीत को धरती पर सामान्य नागरिक की तरह अवश्य ही चलना चाहिए लेकिन वह उस वृद्ध व्यक्ति से किसी भी तरह से इन्कार नहीं कर सका। उसे अवश्य ही कुछ सहायता भेजनी चाहिए। वह राशि के बारे में सोच रहा था। उसने खर्च करने से पहले प्रत्येक रुपये के बारे में सोचा। तत्पश्चात्, अचानक, वह एक निर्णय पर आ गया था। वह शान्तीपुर जायेगा और शादी में शामिल होगा। यह उसके लिए स्वागतपूर्ण आनन्द होगाशहर में उसका दम घुट रहा था। उसका मस्तिष्क ताजगी से पूर्ण हो जाएगा।

उसकी शक्ति आने वाले संघर्ष के लिए नवीनीकृत हो जाएगी, उस दृश्य को साक्षात् अपने सामने पाकर जो कि उसके जीवन का प्रारम्भिक बिन्दु रहा था। एक बार फिर से वही उसका प्रारम्भिक बिन्दु हो जाए, बाहरी रूप से उतना ही जितना आन्तरिक रूप से। वह अपने पैतृक घर और मछलियों के तालाब को देखने के लिए इस मौके का उपयोग करेगा जो कि दोनों ही पट्टे पर उठा दिए गये हैं, अत्यधिक विध्वंस के बीच भी उसकी सम्पत्ति का कुछ हिस्सा बिल्कुल भी क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। जिसे अन्तिम उपहार के रूप में उसे अपनी पत्नी को देना ही चाहिए। और वह अंकल श्रीनाथ से शादी वाले दिन आने का वायदा कर चुका था।

The engine came .......... Swagatam! Welcome!' (Pages 89-90)

कठिन शब्दार्थ- shrill (शिल्) = high and unpleasant sound (तेज और अप्रिय आवाज)। apparently (अ'पैरट्लि ) = evidently (स्पष्ट रूप से)। celebrity (स'लेब्रटि) = a famous person (विख्यात व्यक्ति)। chorus (कॉरस्) = in a group (समूह में)। awestruck (ऑस्ट्रक्) = feeling of reverance and respect with wonder (आश्चर्य के साथ सम्मान की भावना)। jasmine (जैज्मिन्) = a kind of flower (चमेली)। daze (डेज्) = unable to think (सोचने में असमर्थ)। stubble (स्टब्ल्) = short hair on man's face (दाढ़ी के छोटे बाल)। cheekbones ('चीकबोन्स्) = the bone below eye (गाल की हड्डी)। elation (इलेशन्) = high spirits (प्रफुल्लता)।

हिन्दी अनुवाद-इंजन ने तेज आवाज में चेतावनी की सीटी बजाई। यात्री जल्दी से वापस आ गये। आधा घण्टा और फिर उसके बाद शान्तिपुर आ गया। सत्यजीत दरवाजे के बाहर झुका हुआ था, उसकी आँखें स्टेशन के प्लेटफार्म पर अंकल श्रीनाथ को खोज रही थीं, जहाँ पर बहुत से लोग एक-दूसरे के साथ भीड़ बनाकर खड़े हुए थे, सावधान और स्पष्ट रूप से उत्साहित, उनमें से एक अपने हाथ में लम्बा बाँस लिए हुए था जिस पर ऊँचा राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहा था। ट्रेन में कोई राजनीतिक सुप्रसिद्ध व्यक्ति? यह बड़ी अनोखी बात थी कि अंकल श्रीनाथ, जो कि हमेशा राजनीति से डरते रहे, स्वयं ही एक समूह का नेतृत्व कर रहे थे। अचानक, जैसे ही सत्यजीत ट्रेन से नीचे उतरा, बहुत से लोग दौड़कर उसकी ओर आ गये। वे सारे लोग रुक गये और तेज सामूहिक आवाज आयी। स्वागतम् ! स्वागत!

एक छोटी-सी कन्या चेहरे पर आश्चर्य और सम्मान के साथ अपने हाथ में चमेली के फूलों की माला लिए वहाँ आयी। जब वह कन्या अपने पंजों के बल फूलों की माला को उसके गले में डालने के लिए ऊँची हुई तो सत्यजीत आश्चर्य के कारण कुछ भी सोचने में असमर्थ वहाँ खड़ा हो गया। वह बिना यह जाने कि क्या हो रहा है, उस सम्मान को पाने के लिए यन्त्रवत् झुक गया। निश्चित रूप से.यह एक अत्यधिक जिज्ञासापूर्ण गलती थी।

"स्वागत!" फिर से आवाजें आयीं। और उसके बाद आशा के अनुरूप शान्ति छा गई। अंकल श्रीनाथ समूह की ओर मुड़े। उनके चेहरे पर गालों की हड्डी और दाढ़ी के छोटे-छोटे भूरे बालों में, स्पष्ट अत्यधिक प्रफुल्लता दिखाई दे रही थी।

"मित्रों और भाइयों! बंगाल ने कार्य के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में महानता देखी है। मैं नामों का उच्चारण करके आपके शान को कम नहीं (मानूँगा) करूँगा। केवल व्यापार और उद्योग है जिसमें बंगाल पीछे रह गया है। दुःख की बात है कि व्यापार की ऊँचाइयाँ देहात अथवा विदेशों से आये हुए लोगों के हाथ में चली गई हैं। और यही कारण है कि बंगाल के एक बेटे को देखकर हमारा हृदय गर्व से फूल जाता है जिसने इस क्षेत्र में इतनी बड़ी सफलता प्राप्त की है, वह क्षेत्र जहाँ हर कोई नहीं जा सकता और अब वह मातृभूमि का यश बन गया है।" "स्वागतम्! स्वागत!"

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'Swagatam!' the combined .......... husky with emotion. (Pages 90-91)

कठिन शब्दार्थ-stoop (स्टूप्) = to bend (झुकना) | scrambling (स्क्रै ड्लिङ्) = struggle to go high (ऊँचा उठने के लिए संघर्ष)। privilege (प्रिवलिज्) = special right (विशेषाधिकार)। reverant (रेवरन्ट्) = showing respect (श्रद्धालु)। auspicious (ऑस्पिशस्) = that seems to be successful in future (सौभाग्यशाली)। slender (स्लेन्ड(र)) = thin and attractive (पतला और आकर्षक)। pensive (पेन्सिव्) = meditative (विचारमग्न)। wiggled (विग्ल्ड् ) = up and down or side to side (हिलना-डुलना)। whey (वे) = milk whey (मट्ठा, छाछ)। husky ('हस्कि ) = deep and harsh sound (बैठी हुई आवाज)।

हिन्दी अनुवाद-"स्वागतम्!" सामूहिक तेज आवाज आयी जबकि तिरंगा ध्वज अपने लम्बे बाँस पर सहमति में लहराया।
जब सत्यजीत मिट्टी-इंटों के बने घर के दरवाजे पर बैल गाड़ी से उतरा तो महिलाओं का एक समूह पीतल के कटोरों में भरे हुए पानी लिए चिन्तातुर इन्तजार करती हुई उसकी ओर दौड़ी और उसके पैरों पर झुक गई और ठण्डे पानी से उसके पैर धोने के अधिकार को प्राप्त करने के लिए धक्का-मुक्की कर रही थीं। सत्यजीत घबराकर पीछे हट गया। "यह मेरी बीना का विशेषाधिकार है" श्रीनाथ ने मुस्कुराते हुए तेज आवाज में कहा। "केवल बीना को इन सम्माननीय पैरों को धोने और पोंछने दो। वह अपने जीवन भर अपनी शादी के इस सौभाग्यशाली दिन को प्राप्त इस सम्मान को याद रखेगी।

सत्यजीत ने कन्या की ओर देखा जो कि शर्मीली, दुबली-पतली और शानदार चेहरे पर बड़ी विचारमग्न आँखों के साथ आगे बढ़ी। "अच्छा तो यह दुल्हन है," और वह मुस्कराया तथा आशीर्वाद देने की मुद्रा में उसके बालों को छुआ। "मैं आशा करता हूँ कि दूल्हा भी इस कन्या के योग्य होगा", उसने कहा जब वह उसके (सत्यजीत) जूते खोलने के लिए झुकी। कन्या ने उसके मोजे उतारे और उसके पैरों को तरोताजा करने के लिए ठण्डा पानी पैरों पर डाला और अत्यधिक सावधानी से उन्हें धोया।

जब उसकी पतली अँगलियाँ सत्यजीत के पैरों के अंगूठे के बीच में गई तो वह इधर-उधर हिला क्योंकि उसे गुदगुदी महसूस हुई। इस समय वह अन्दर वाले अहाते में गलीचे के ऊपर बैठा हुआ था और उसके हाथ में मिठाइयों से भरी प्लेट और एक ग्लास मट्ठा था जबकि कामिनी, दामिनी और सुहाशी उसके पास उकडूं बैठी हुईं अपनी पूरी शक्ति से ताड़पत्र से पंखा झल रही थीं, ऐसा लगता था कि इस विशेषाधिकार से वंचित होने से पूर्व वे प्रत्येक क्षण का पूरा उपयोग करना चाहती थीं। उनके चेहरे पर पसीना आ गया और उन्होंने अपने पंखे दायें हाथ से बायें हाथ में ले लिए और फिर से दायें हाथ में ले लिए। उनकी माँ जो वहाँ खड़ी थी, अब भावनाओं से पूर्ण धीमी, भारी और बैठी हुई आवाज में बोली। 

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You have been...........................newborn son. (Page 91)

कठिन शब्दार् थ- invisible = that cannot be seen i fringes = outer boundary (किनारा)। shuttling (शटिलङ्) = to go and back between two points (इधर से उधर जाना)। confided (कन्फाइड्) = reveal in private (गुप्त बात बताना)। chemise (शमीज्) = sleeveless garment (शमीज)। utensils (यू'टेन्स्ल ) = pots made of metal (धातु के बर्तन)। propitious (प्रपिशस्) = favourable (अनुकूल)। perambulator (पैरेम्ब्यू लेट(र)) = a toy for kids (बच्चा गाड़ी)।

हिन्दी अनुवाद-"इन बेटियों के लिए आप इनके पिता से भी बढ़कर रहे हो," अपने सिर को अपने अदृश्य पति की ओर झटका देते हुए उसने कहा, "बिना आपके हृदय की महानता के वे अभी भी इसी घर में कुँवारी बैठी होती और पति और घर के होने का कोई मौका नहीं होता तथा वे उम्र और लम्बाई में बढ़ रही होती", कृतज्ञता से भरी हुई आँखों से आँसुओं को पोंछने के लिए साड़ी के किनारे को आँखों तक उठाते हुए उसने कहा। भोजन समाप्त होने पर, अंकल श्रीनाथ जो कि अन्दर के अहाते और बाहरी निवास के बीच लगातार चक्कर लगा रहे थे, अपने मेहमान के पास आते हुए रुके।

"बीना को उसकी माँ के पुराने जेवरात दे दिये गये हैं", उसने रहस्योद्घाटन किया। "और इसलिए दहेज की समस्या के इस हिस्से का समाधान हो गया है। उसकी तीनों विवाहित बहिनों, जिन्हें आने अपने सामने देखा था और जिनके जीवन में सम्पूर्ण खुशी आपके आशीर्वाद के कारण ही है, ने उसे शादी के वे सारे उपहार उसे दे दिए हैं जो उसके पास होने चाहिए : साड़ी, जैकेट, शमीज, साथ ही पीतल के बर्तन भी उसे अपना नया घर बसाने के लिए।"

"बहुत अच्छा! बहुत अच्छा!" सत्यजीत खुशी से चिल्लाया। उसके पर्स में दो सौ रुपये थे और वह सोच रहा था कि इनमें से कितने रुपये उसे शादी में उपहारस्वरूप दे देने चाहिए। शायद एक सौ रुपये; अथवा एक सौ एक रुपये, क्योंकि कोई धन-राशि जिसके अन्त में शून्य हो वह शुभ नहीं मानी जाती। भोजन के दौरान वह धीरे-धीरे इस संख्या को जोड़ रहा था : दस, बीस और अन्त में वह अतिरिक्त पचास पर आकर रुक गया। अब जबकि बीना को वह सब कुछ मिल गया है जो उसे चाहिए इसलिए वह धन-राशि में से थोड़ा-सा हिस्सा काट सकता था। इसे एक सौ एक रुपये ही रहने देने चाहिए। बचे हुए पचास रुपये से वह अपने नवजात बच्चे के लिए एक गाड़ी खरीदेगा। 

Your benediction..............High Court Judge-'(Pages 91-92)

कठिन शब्दार्थ-pilgrimage (पिल्ग्रिमिज्) = visit to a religious place (तीर्थयात्रा) | inmost (इन्मोस्ट) = within self (अन्तर्तम, गुप्त)। devotees (डेवोटी) = follower and admirer (भक्त, सेवक)। animatedly (ऐनिमेड्लि ) = interesting (रोचक)। obeisance (ओ बेसन्स) = willingness to obey (आज्ञा का पालन)। superior (सूपिअरिअ(र)) = better (श्रेष्ठ)। genius (जीनिअस्) = very great (अतिमहान)। violent (वाइअलन्ट्) = try to hurt or kill (हिंसक)। predicted (प्रिडिक्ट्ड्) = prophesy (भविष्यवाणी)।

हिन्दी अनुवाद-"आपका आशीर्वाद तो हमारे लिए अन्धे व्यक्ति का सहारा है," श्रीनाथ कहता रहा। "क्या मेरे पास कहने के लिए कुछ और है?" उसने स्पष्ट रूप से निश्चय किया कि उसके पास (कहने के लिए) नहीं है, क्योंकि अचानक ही उसने विषय को बदल दिया।"मेरा घर तीर्थस्थान बन गया है। तुम इस गाँव की शान हो, इसकी शक्ति हो। तुम्हारे अन्दर लोग अपने अन्तर्मन के सपनों को पूरा होते हुए देखते हैं। क्या तुम अब थोड़ी देर के लिए आगन्तुकों को दर्शन दोगे जो कि इस समय प्रतीक्षा में बैठे हैं"

सत्यजीत मेजबान के पीछे-पीछे चल दिया। उसके भक्त जमीन पर चटाई पर बैठे हुए थे और रोचक बातें कर रहे थे और उसे देखते ही वहाँ पर तुरन्त ही शान्ति छा गई। छाती पर जुड़े हुए हाथों के साथ सत्यजीत ने उन सबका अभिवादन किया। उसकी दृष्टि स्कूल के अध्यापक पर पड़ी जिसने उसे तब पढ़ाया था जब वह एक लड़का था और एक गहन आज्ञापालक बन गया। गर्व से भरे हुए व्यक्ति ने चटाई पर बैठे लोगों की ओर दृष्टि पहले डाली और फिर बोला :

"क्या मैंने नहीं कहा था? क्या मैंने उन बहुत समय पहले के दिनों सैकड़ों बार नहीं कहा.था कि मेरे इस युवा शिष्य के चेहरे पर अति महानता की ज्योति प्रज्वलित हो रही है? कि वह अन्य सभी युवा शिष्यों में बिल्कुल अलग दिखाई देता था-" वह थोड़ी देर रुका और बीच में भूलने को ढंकने के लिए उसने खाँसी का एक तीव्र प्रहार लिया। फिर उसने कहना शुरू किया : "कि अपने चेहरे पर अति महानता की चमक लिए हुए वह संसार से बिल्कुल अलग था जबकि दूसरे युवा लोग कहाँ ठहरते हैं? क्यों, मैंने भविष्यवाणी की थी कि वह उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होगा-" 

RBSE Solutions for Class 11 English Woven Words Short Stories Chapter 7 Glory at Twilight

Satyajit burst into..............freedom, content. (Page 92) 

कठिन शब्दार्थ-perpetual (प'पेचुअल) = everlasting (निरन्तर)। feud (फ्यूड्) = a bitter quarrel (झगड़ा)। inventive (इन्वेन्टिव्) = clever and original ideas (मौलिक और चतुराई से भरा)। bogey ('बोगि) = cause of fear (भय का कारण)| drab (ड्रैब) = monotonous (नीरस)। twinge (ट्विन्ज्) = a sudden short pain (अचानक उठा दर्द)। regret (रिग्रेट्) = to feel sorry (दुःखी होना) । basking (बैस्किङ्) = to feel warmth (धूप सेंकना)। imposter (इम्पॉस्ट(र्)) = deceitful person (छल करने वाला, पाखण्डी)। impersonated (इम्पसनेट) = assume the character of (पर रूप धारण करना)। splendour (स्प्ले न्ड(र)) = very impressive beauty (भव्य, वैभव)। fury (फ्यु अरि) = anger (क्रोध)। content (कन्टे न्ट) = satisfied (सन्तुष्ट)।

हिन्दी अनुवाद-सत्यजीत बड़ी जोर से हँस पड़ा । "अफसोस, मैं उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नहीं हूँ।" "उससे भी ज्यादा, बहुप्त ज्यादा!" बूढ़े व्यक्ति ने गिनती की। उसकी अच्छी स्मृति वापस लड़के की ओर चली गई जिसके साथ उसका निरन्तर झगड़ा रहता था। हमेशा किसी न किसी प्रकार की शरारत पर

उतारू - इस प्रकार उसका मस्तिष्क हमेशा मौलिक और चतुराई से भरा हुआ रहता था। उसे अंकगणित से भय रहता था। वह अपने धन के ढेर को किस प्रकार गिनता है? उसके पास दस लाख हैं, यदि श्रीनाथ विश्वास करे। दस लाख? और बूढ़े व्यक्ति ने स्मृति द्वारा प्रस्तुत किए गये नीरस चित्र में जल्दी से रंग भरे। "उन बहुत पहले के दिनों में, मैं उसके चारों ओर दो परछाइयाँ देख सकता था, जीवन की तरह स्पष्ट–सरस्वती उसके बायीं ओर और लक्ष्मी उसके दायीं ओर। और मैं उस समय भी यह जानता था कि ज्ञान और धन की दोनों देवियाँ, यद्यपि दोनों एक-दूसरे को देखना भी पसन्द नहीं करतीं, लेकिन फिर भी दोनों एक-साथ हो गई, एक-साथ रहीं क्योंकि दोनों के प्रति समान प्रेम था।" उसने दोनों हथेलियों को जोड़कर मस्तक से लगायाअपना प्रणाम करते हुए शायद दोनों देवियों के लिए।

सत्यजीत मनोरंजन करने के लिए दृढ़ था। उसे अचानक दुःख का अहसास हुआ कि उसने जब यहाँ आने के बारे में नहीं सोचा और लोगों के सम्मान की गर्मी को प्राप्त नहीं किया जब वास्तव में उसे यहाँ होना चाहिए था। अब वह एक छल करने वाला व्यक्ति था। उसने कुछ सप्ताह पहले वाले व्यक्ति का रूप धारण कर लिया। उसने अपने हाथ से चेहरे की ओर गुस्से में झटका दिया और एक मक्खी को उड़ा दिया और उसे दुःख हुआ। उसे आज तो खुश रहना ही होगा भले ही झूठी प्रतिध्वनि ही क्यों न हो, उसे थोड़ी देर के लिए ही सही समाप्त हो चुके यश के चारों ओर हल्के वैभव के आवरण में स्वयं को ढक लेना चाहिए। कल वह किसी धारा की तरह पूरी तरह उत्तेजना में होगा, परेशानियों में दबा हुआ, और जीवन के लिए संघर्ष करता हुआ। आज वह शान्ति, स्वतन्त्रता और सन्तुष्टि के साथ अपनी अन्तिम साँस लेगा।

Through the rest ............ announced happily. (Pages 92-93)

कठिन शब्दार्थ - proffered (प्रॉफ्-अ(र)ड) = to give (भेंट देना) । security (सि क्युअरटि) = free from danger (सुरक्षा)। tenant (टेनन्ट) = renter (किरायेदार)। mansion (मैन्श्न् ) = a large house (बड़ा घर, हवेली)। sprinkled (स्प्रिङ्क्ल्ड् ) = scattering of liquid (छिड़काव)। carp (काप्) = a large fish (बड़ी मछली)। ecstasy (एक्स्ट सि) = a feeling of great happiness (आनन्द की भावना) । palanquins (पॉलन्कीन्) = carried by four bearers (पालकी)। betel leaf (बीटल् लीफ्) = leaves that are chewed with betel nut (पान)। almanac (ऑ:ल्मनैक) = calendar (पंचांग)।

हिन्दी अनुवाद-बाकी के पूरे दिन वह गाँव में चारों ओर घूमता रहा, बड़ों से मुलाकात करता रहा, दिये गये हरे नारियल का दूध पीता रहा। वह अपने घर भी गया जहाँ पर अब किरायेदार रह रहा था। उसका अपना घर और उसने अधिकारपूर्वक उसकी दीवालों को छुआ। इस छोटे से घर ने उसे सुरक्षा की वह भावना दी जो कि उसे शहर के विशाल घर को देखकर भी नहीं आयी थी। उसने एक घण्टा मछलियों के तालाब के पास गुजारा । उसका अपना तालाब-और उसने उसमें से एक हथेली भर पानी अपने सिर पर छिड़का। उसके हुक में एक बड़े आकार की मछली फँसी हुई थी। जब वह मछली को लेकर घर आया, तो अंकल श्रीनाथ ने उसे बड़ी तल्लीनता से देखा-एक ऐसी भावना अथवा विचार जैसे कि उसने ऐसी मछली पहले कभी नहीं देखी हो। 

"कितनी शानदार मछली!" उसने स्पष्ट खुशी से साँस ली। उसने प्रेमपूर्वक अपने हाथ से मछली का सिर थपथपाया। "दूल्हा और दुल्हन इस सौभाग्यशाली मछली का सेवन करेंगे जब वे मध्यरात्रि को अपने शादी के व्रत को खोलेंगे। यह उनके लिए वे सारी शुभकामनाएँ लेकर आयेगी जो जीवन प्रदान कर सकता है।" शाम का धुंधलका हो गया था जबकि बारात बैलगाड़ियों और पालकियों में आ गयी। स्वागत में शंख ध्वनि हुई।

युवा महिलाएँ दरवाजे पर इकट्ठी हो गई और अत्यन्त खुशी के साथ तेज आवाज में परम्परागत शुभकामनाएँ दीं; उलू-उलू-उलू-उलू-उलू! जब बारात पूरी तरह से व्यवस्थित हो गई, पान चबाते हुए और पंचांग के अनुसार शादी के समय का इन्तजार कर रही थी तभी सत्यजीत ने अपने पर्स के बारे में सोचा। अब समय आ गया अपने एक सौ एक रुपये से अलग होने का । श्रीनाथ, उसके विचारों को पढ़ते हुए, उसे पीछे की ओर अंजीर के वृक्ष के नीचे अन्धकारयुक्त एकान्त में ले गया "मेरा माँगने वाला कटोरा तैयार है" उसने प्रसन्नतापूर्वक घोषणा की। 

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'Yes, Yes,'.........would understand. (Pages 93-94) 

कठिन शब्दार्थ - blow (ब्लो) = a powerful stroke with fist (घूसा)। feast (फीस्ट) = a dinner party (प्रीतिभोज)। abstract (ऐब्स्ट्रै क्ट) = existing only as an idea (कल्पना भाव, अमूर्त)। snare (स्नेअ(र)) = trap (जाल)। petty (पेटि) = small and unimportant (छोटा और नगण्य) । pittance (पिटन्स्) = a very small amount (अत्यधिक छोटी राशि)। confession (कन्फैशन्) = to admit faults (गलती स्वीकार करना)।

हिन्दी अनुवाद"हाँ, हाँ" सत्यजीत ने स्वीकृति में सिर हिलाया। "दहेज की नकद धन-राशि निश्चित हो गई है। केवल दो हजार एक रुपये।" "क्या!" सत्यजीत ने अपने पेट पर एक तीव्र प्रहार महसूस किया। "बस यही पर्याप्त है।" "दो हजार एक रुपये?"

श्रीनाथ मुस्कराया। "हर चीज की व्यवस्था हो गई है, यहाँ तक कि शादी की दावत की कीमत का भी प्रबन्ध हो गया है। केवल इस अन्तिम वस्तु को आपके आशीर्वाद का इन्तजार है।"
आशीर्वाद–श्रीनाथ का प्रिय शब्द । इसके अर्थ में कोई कल्पना नहीं। इसकी केवल धन के अर्थ में ही व्याख्या की जा सकती थी। सत्यजीत ने अपने अन्दर प्रज्वलित अग्नि को महसूस किया। उसने अपने पैर आशीर्वाद के जाल में फैला दिए हैं, बिना सोचे-समझे । वह इतना मूर्ख कैसे हो सकता है?

श्रीनाथ ने इस शान्ति को अपनी फीकी-सी हँसी के साथ तोड़ा। "यह तो आपके धन के सागर में एक बूंद के बराबर है। इनकी छोटी धन-राशि माँगते हुए भी मुझे शर्म महसूस हो रही है।"
"आपने यह बात पत्र में क्यों नहीं लिखी और मुझे क्यों नहीं बताया?" आवाज में कठोरता थी।

फीकी-सी हँसी की फिर से आवाज आयी।"क्या मुझमें समझ नहीं है? मैं इतना बड़ा बेवकूफ नहीं हूँ जितना दिखाई देता हूँ। क्या ! क्या लखपति व्यक्ति को धन के बारे में लिखा जाता है! और इतनी छोटी धनराशि के बारे में। समुद्र में एक बूंद (के बराबर)।"

"एक बूंद", सत्यजीत ने प्रतिध्वनि की, उसका मुँह सूख गया। यह समय था जब उसे स्वीकार कर लेना चाहिए। (इस समय) वह श्रीनाथ से बुरी स्थिति में था। सिर्फ जीवित रहने के लिए कठोर संघर्ष उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। श्रीनाथ भी समझ लेगा। 

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'Millionaire!'.............in a perambulator. (Page 94) 

कठिन शब्दार्थ-rhapsody (रैप्सॉडि) = extremely appreciation (अत्यधिक प्रशंसा)। adequate (ऐडिक्वट्) = enough (पर्याप्त)। plausible (प्लॉजब्ल्) = reasonable (विश्वसनीय)। panic (पैनिक) = terror (भय) | assembled (अ'सेम्ब्ल्ड् ) = in a group (इकट्ठा )। pedestol (पेडिस्ट्ल ) = base (आधार) | erstwhile (अस्ट्वाइल्) = in the past (पूर्व समय में)।

हिन्दी अनुवाद-"लखपति!" उसकी आवाज में अत्यधिक प्रशंसा थी। मुँह के सामने स्पष्ट पूजा । एक श्रद्धालु, अपने भगवान के सामने प्रार्थना करता हुआ।"हम तो आपके आशीर्वाद की धूप सेंकते हैं। हमारी तो प्राणवायु भी तुम्हारी मुट्ठी में है; आप इसे केवल अपनी अंगुलियों को कसकर दबाकर ही नष्ट कर सकते हैं। शब्द वह नहीं कह सकते जो मैं महसूस कर रहा हूँ..........."

हाँ, भगवान् कभी लखपति रहा था, निःसन्देह । वह बीता हुआ कल था। आज...........स्वीकारोक्ति उसके गले में ही अटक गई जिसे लखपति के निर्जीव हाथ द्वारा जकड़ लिया गया। गलती को स्वीकार कर लेना ज्यादा ठीक रहेगा। वह अत्यधिक कार्य की व्यस्तता के बीच जल्दी में यहाँ चला आया है और पर्याप्त धन-राशि लाने के बारे में उसने सोचा भी नहीं था। यह बात ज्यादा विश्वसनीय रहेगी। बाद में इस बात का कोई महत्त्व नहीं रह जाएगा भले ही श्रीनाथ को इस भयानक सच्चाई के बारे में पता जल जाए, जैसा कि उसे पता चल ही जाएगा।

लेकिन इससे भी ज्यादा शक्तिशाली बात जो उसने सोची।"मुझे सुबह की ट्रेन पकड़नी थी और मुझे बैंक जाने का समय ही नहीं मिला। क्या गाँव में कोई ऐसा व्यक्ति हो सकता है............." जो "चैक के बदले नकद" दे दे, ये शब्द लगभग उसके होंठों पर आ गये। "गाँव का कोई व्यक्ति उधार दे देगा........." अंकलं श्रीनाथ तेजी से दौड़ते हुए बाहर भागे, उसके चेहरे पर चिन्ता की लकीरें थीं। वह इस प्रभाव में रहा था कि लखपति लोग हमेशा अपनी जेबों को धन से भरकर रखते हैं। सत्यजीत वापस इकट्ठे बैठे हुए

लोगों के पास आ गया। तुरन्त ही दुल्हा, जो कि एक फुट ऊँचे चमकदार कपड़े से बने मंच पर बैठा था और जिसके तीन ओर मोटे गोल तकिये लगे हुए थे, उसे सभी लोग भूल गये। चारों ओर शान्ति थी। सभी लोग
आँखें भरकर धनी व्यक्ति को देख लेना चाहते थे। एक भगवान जो कि भाग्य के आधार-स्तम्भ पर खड़ा है। वह भी शान्त होकर बैठा था, उसके अन्दर पहले कभी इतनी थकान नहीं रही जितनी भारी (थकान) वह इस समय महसूस कर रहा था। पहले उसने जितनी शान्ति प्राप्त की थी वह अब समाप्त हो गई थी। वह अपने नवजात बेटे का चेहरा देखना चाहता था। एक (ऐसे) धनी व्यक्ति का बेटा जो कभी बच्चों की गाड़ी की सवारी भी नहीं कर पायेगा।

Srinath returned................the full story.' (Pages 94-95)

कठिन शब्दार्थ-beckoning (बेकनिङ्) = summon with a wave (हाथ के इशारे से बुलाना)। refuses (रिफ्यूज्ज) = decline (इन्कार कर देना) । swift (स्विफ्ट) = quick (शीघ्र)। preposterous (प्रिपॉस्टरस्) = ridiculous (हास्यास्पद)| malice (मैलिस्) = a wish to hurt other (दुर्भावना)। grovel (ग्रोवल) = creep (रेंगना, गिड़गिड़ाना)। cynical ('सिनिक्ल) = an act of selfish (स्वार्थ, सनक)। tolerated (टॉलरेट्ड) = to endure (सहन करना)। foresee (फाँसी) = anticipate (पूर्वानुमान होना)।

हिन्दी अनुवाद-श्रीनाथ आधे घण्टे में वापस आ गया। उसका चेहरा क्रोधित दिखाई दे रहा था। सत्यजीत ने उसे हाथ के इशारे से बुलाता हुआ देखा, अपने पैरों पर अनमने ढंग से खड़ा हुआ और लोगों से दूर बाहर की ओर चला गया।

"शान्तिपुर में केवल एक व्यक्ति है जो इस समय देर रात में इतना धन नकद दे सकता है", श्रीनाथ ने कहा, "हरीश, साहूकार। यद्यपि वह भी इतनी धन-राशि पेशगी देने से इन्कार कर रहा है।"
आराम का एक तेज प्रवाह! "क्या हरीश को मेरे ऊपर विश्वास नहीं है?" साहूकारों की एक छठवीं ज्ञानेन्द्रिय भी कार्य करती है। इस बात की भी कोई जानकारी नहीं थी कि हरीश को अपना धन कब वापस मिलेगा - शायद कभी नहीं।

"हास्यास्पद! क्या वह एक लखपति व्यक्ति के शब्द और हस्ताक्षर पर विश्वास नहीं कर सकता! हरीश की बुद्धि खराब हो गई है; अथवा क्या यह उसकी दुर्भावना है?" आवाज में क्रोध आ गया।"मैं उसे घसीट कर तुम्हारे पास ला सकता था और वह तुम्हारे पैरों में गिड़गिड़ा सकता था और उसकी मोटी नाक को जमीन पर रगड़वा सकता था।" सत्यजीत उदार हो सकता था। "इसकी आवश्यकता नहीं, इसकी आवश्यकता नहीं। इस स्वार्थपूर्ण समय में विश्वास बाहर हो गया है।" और इसमें आश्चर्य की बात यह थी कि उसके पैर आशीर्वाद की जाल में उलझकर जवाब दे रहे थे!

"यदि इस तरह की बातों को सहन किया जाता है तो हमारा देश कहाँ होगा? नेहरू इस बारे में क्या कर रहे हैं? क्या कोई उसे यह बताने वाला नहीं है कि देश में किस तरह कार्य हो रहा है?"
सत्यजीत ने उत्तेजित व्यक्ति के कन्धे पर थपथपाया, और उसे आराम दिया। श्रीनाथ ने स्पष्ट प्रयासों से स्वयं को नियन्त्रित किया। उसका चेहरा दुःखी था। "क्या करना चाहिए?" उसने निराशा व्यक्त की।"दूल्हे का पिता पत्थर का बना हुआ है। जब तक समारोह शुरू होने से पूर्व उसे नकद धन-राशि नहीं दी गई तो वह इस शादी को तोड़ देगा। इतने अपमान के बाद बीना के साथ कौन शादी करेगा?"

सत्यजीत ने अनुकूल सहानुभूति दिखाते हुए अपना सिर हिलाया। "काश तुमने मुझे पत्र में लिख दिया होता। केवल दो या तीन शब्द। फिर भी चिन्ता मत करो। तुम्हें दूसरा उचित दूल्हा मिल जाएगा, इससे भी ज्यादा अच्छा। भाग्य की विधियों के बारे में कौन भविष्यवाणी कर सकता है?" उसने अपने पर्स को दूसरी बार फिर टटोला। उसने जो पचास रुपये काटे हैं वे उसे फिर से मिला देना चाहिए। अब यह धन-राशि एक सौ इक्यावन रुपये होनी चाहिए। उस स्थिति में भी जब उसके बेटे के लिए एक बच्चों की गाड़ी नहीं होगी। श्रीनाथ ने अपना गला दो बार साफ किया। "मुझे पूरी कहानी तुम्हें बताने में शर्म महसूस हो रही है।" 

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'Yes?'........tremulous deliberation. (Pages 95-96)

कठिन शब्दार्थ-trembled (ट्रेम्ब्ल्ड् ) = to shake (काँपना)possessions (पजेशन्स) = ownership (मालिक)। toppled (टॉप्ल्ड् ) = tumble (गिर पड़ना, खो जाना) | deluge (डल्यूज्) = a heavy rainfall (मूसलाधार वर्षा)। supplication (सप्लि 'केश्न्) = plea (विनती)। drugged (ड्रग्ड) = liquor (नशीली दवा) । wrathful (रॉथ्फुल्) = very great anger (तीव्र रोष)। cleaved (क्लीव्ड्) = split (अलग कर देना)। tremulous (ट्रेम्यूलस) = quavering (काँपता हुआ)। deliberation (डिलिबरेश्न्) = careful (सावधानीपूर्वक)।

हिन्दी अनुवाद-"अच्छा?" "हरीश धन देने का इच्छुक है।" "क्या! तुमने तो अभी कहा था............"
"वह (धन देने के बदले में) सुरक्षा चाहता है। वह प्रतिभूति चाहता है, वह बुरी दृष्टि वाला कठोर निर्दयी व्यक्ति । तुम्हारा घर और मछलियों का तालाब। पागलपन! यह सोचना कि घर और तालाब लखपति के हस्ताक्षर से भी ज्यादा मूल्यवान हैं।"

सत्यजीत अन्दर ही अन्दर काँप गया। "घर और तालाब" वह अपने आप से फुसफुसाया। एकमात्र सम्पत्तियाँ जो भयानक वर्षा में भी नहीं गिरी (अर्थात् उसके ऊपर भयानक कष्टों में भी सुरक्षित रहीं)। केवल यही सम्पत्तियाँ बची थीं जिन्हें वह अपनी पत्नी को दे सकता था

"सारे प्राचीन मूल्य समाप्त हो गये, हमारा भारत कहाँ होगा? क्या नेहरू में यह सब समझने का ज्ञान नहीं है? क्या! एक तालाब का वजन एक लखपति के शब्दों से भी ज्यादा होता है, एक घर उसके हस्ताक्षर से ज्यादा अच्छी जमानत है ! लेकिन फिर भी, इसके अतिरिक्त क्या हो सकता है? दोनों हथेलियों को जोड़कर उसने विनती की। बेटियों की समस्या में उसके अतिरिक्त और क्या किया जा सकता है?" सत्यजीत की एक अनोखी नशीली दवाई के प्रभाव की-सी दृष्टि हो गई। और लखपति के गले से एक बेजान आवाज आयी। "साहूकार से इन शर्तों पर धन उधार ले लो।" 

"अपमान, उस अपमान के बारे में क्या? श्रीनाथ के क्रोधित हाथ हवा में उठे। "जब यह बात समाप्त हो जाएगी, तब उस निर्दयी व्यक्ति की मोटी नाक तुम्हारे पैरों में जमीन पर रगड़वा दूंगा; मैं यह अवश्य ही करूँगा, निश्चिन्त रहो। आप भी देखोगे कि पूरा गाँव उसके ऊपर थूकेगा, थू।"

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कानूनी प्रपत्र पर हस्ताक्षर हो गये, पूरे घर में शादी के संगीत की खुशी भर गई। सत्यजीत अंजीर के पेड के नीचे गहन अन्धकार की ओर चला गया, अकेला ही। "और अब क्या?" उसने गहरी साँस लेते हुए कहा और एक मध्यम हँसी उसके होंठों के कोनों पर तैर गई, जब उसने सिगरेट के कॉर्क के सिरे को होंठों के बीच में दबाया, जो कि उसके पैकिट में अन्तिम सिगरेट थी और काँपते हुए हाथों से सावधानीपूर्वक एक जली हुई माचिस की तीली उसने उठायी।

Bhagya
Last Updated on Aug. 17, 2022, 12:47 p.m.
Published Aug. 17, 2022