RBSE Class 12 Sociology Important Questions Chapter 2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

Rajasthan Board  RBSE Class 12 Sociology Important Questions Chapter 2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना Important Questions and Answers.

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RBSE Class 12 Sociology Important Questions Chapter 2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

प्रश्न 1. 
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में जनगणना कार्य की शुरूआत हुई थी
(क) 1860-65 के मध्य
(ख) 1867-72 के मध्य 
(ग) 1880-85 के मध्य
(घ) 1888-1893 के मध्य 
उत्तर:
(ख) 1867-72 के मध्य

प्रश्न 2. 
'एस्से ऑन पापुलेशन' किसकी रचना है
(क) राबर्ट बीरस्टीड 
(ख) मैकाईवर-पेज 
(ग) इलियट-मैरिल 
(घ) माल्थस
उत्तर:
(घ) माल्थस

RBSE Class 12 Sociology Important Questions Chapter 2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

प्रश्न 3. 
जनसंख्या संवृद्धि का अर्थ है- 
(क) जन्म और मृत्यु के मध्य सामन्जस्य
(ख) जन्म और मृत्यु के बीच अन्तर 
(ग) जन्म की अपेक्षा मृत्यु की अधिक दर
(घ) मृत्यु की अपेक्षा जन्म की अधिक दर। 
उत्तर:
(ख) जन्म और मृत्यु के बीच अन्तर 

प्रश्न 4. 
प्रति एक हजार बच्चों के पीछे जीवित बच्चों की संख्या कहलाती है
(क) जन्म दर 
(ख) मृत्यु दर
(ग) प्रजनन दर 
(घ) लिंगानुपात 
उत्तर:
(ग) प्रजनन दर 

प्रश्न 5. 
सन् 2001 के जनगणना आँकड़ों के अनुसार भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात है
(क) 927 
(ख) 930 
(ग) 933
(घ) 935 
उत्तर:
(ग) 933

प्रश्न 6. 
देश के किस राज्य में लिंगानुपात सबसे कम है
(क) पंजाब 
(ख) हरियाणा 
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) राजस्थान 
उत्तर:
(क) पंजाब 

प्रश्न 7. 
भारत के किस राज्य में साक्षरता दर सर्वाधिक पाई जाती है
(क) महाराष्ट्र 
(ख) राजस्थान 
(ग) उड़ीसा
(घ) केरल 
उत्तर:
(घ) केरल 

प्रश्न 8. 
लिंग परीक्षण पर रोक लगाने हेतु 'प्रसूतिपूर्व नैदानिक प्रविधियाँ अधिनियम' भारत में क्रियान्वित किया गया था
(क) सन् 1990 में 
(ख) सन् 1997 में 
(ग) सन् 1999 में 
(घ) सन् 2003 में 
उत्तर:
(ग) सन् 1999 में 

प्रश्न 9. 
जनसंख्या का सुव्यवस्थित अध्ययन क्या है?
(क) जनसांख्यिकी। 
(ख) समाजविज्ञान 
(ग) जनगणना 
(घ) अर्थव्यवस्था 
उत्तर:
(क) जनसांख्यिकी। 

प्रश्न 10. 
किस समाजशास्त्री ने विभिन्न देशों में आत्महत्या की दरों में पाए जाने वाले अन्तर का अध्ययन किया है ?
(क) थॉमस रॉबर्ट माल्थस 
(ख) ऑगस्ट कॉम्टे 
(ग) मैंक्स वेबर 
(घ) एमिल दुर्खाइम 
उत्तर:
(घ) एमिल दुर्खाइम 

प्रश्न 11. 
जनसंख्या की आयु संरचना से तात्पर्य है
(क) निर्धारित अवधि के दौरान हुए जीवंत बच्चों की कुल संख्या। 
(ख) कुल जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में व्यक्तियों का अनुपात। 
(ग) एक क्षेत्र-विशेष में निर्धारित अवधि के दौरान हुई मृत्यु की संख्या।
(घ) प्रति 1000 स्त्रियों की इकाई के पीछे जीवित जन्मे बच्चों की संख्या।
उत्तर:
(ख) कुल जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में व्यक्तियों का अनुपात। 

प्रश्न 12. 
ऐसे बुजुर्ग और बच्चे किस वर्ग में आते हैं जो काम नहीं कर सकते? 
(क) कार्यशील वर्ग 
(ख) जनसंख्या संवृद्धि वर्ग 
(ग) पराश्रित वर्ग 
(घ) विशेष वर्ग
उत्तर:
(ग) पराश्रित वर्ग 

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

प्रश्न 1. 
.....................और....................."विद्वानों ने माल्थस के इस विचार की आलोचना की कि गरीबी का कारण जनसंख्या वृद्धि है। 
उत्तर:
उदारवादी, मार्क्सवादी

प्रश्न 2. 
डेमोग्राफी शब्द यूनानी भाषा के दो शब्दों ........................ और ..................... से मिलकर बना है। 
उत्तर:
डेमोस, ग्राफीन

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प्रश्न 3. 
.....................जनसांख्यिकी में अधिकतर जनसंख्या के आकार यानी मात्रा का अध्ययन किया जाता है।
उत्तर:
आकारिक

प्रश्न 4.
.....................की 1790 की जनगणना सबसे पहली आधुनिक किस्म की जनगणना थी। 
उत्तर:
1790

प्रश्न 5. 
भारत में जनगणना का कार्य अंग्रेजी सरकार ने सर्वप्रथम.....................के बीच प्रारम्भ किया।
उत्तर:
1867-82

प्रश्न 6.
.....................इसलिए होता है क्योंकि मृत्यु दर, रोग नियंत्रण, जनस्वास्थ्य और बेहतर पोषण के उन्नत तरीकों के द्वारा अपेक्षाकृत तेजी से नीचे ला दी जाती है। 
उत्तर:
जनसंख्या विस्फोट

प्रश्न 7. 
जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अन्तर शून्य होने पर यह कहा जा सकता है कि जनसंख्या.....................स्तर पर पहुँच गई है। 
उत्तर:
प्रतिस्थापन

प्रश्न 8. 
.....................अनुपात जनसंख्या के पराश्रित और कार्यशील हिस्सों को मापने का साधन है।
उत्तर:
पराश्रितता 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. 
जन सांख्यिकीय संक्रमण सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर:
जन सांख्यिकीय संक्रमण सिद्धान्त का तात्पर्य है-जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास के समग्र स्तरों से जुड़ी होती है। 

प्रश्न 2. 
विश्व में आधुनिक किस्म की जनगणना सर्वप्रथम कब और कहाँ पर आरम्भ हुई थी?
अथवा 
विश्व में आधुनिक किस्म की जनगणना सर्वप्रथम किस देश में प्रारंभ हुई थी?
उत्तर:
सन् 1790 में अमेरिका में आरम्भ हुई थी। 

प्रश्न 3. 
जनसंख्या स्थिर कब मानी जाती है ?
उत्तर:
जब जन्म दर और मृत्यु दर के बीच अन्तर शून्य हो जाता है तो जनसंख्या स्थिर मानी जाती है। 

प्रश्न 4. 
जनसंख्या विस्फोट क्यों होता है? 
उत्तर:
जब किसी देश में जनसंख्या वृद्धि दर बहुत उच्च होती है, तो वहाँ जनसंख्या विस्फोट होता है। 

प्रश्न 5. 
माल्थस के द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के लिए कौनसे दो तरीके बताये गये हैं ? 
उत्तर:

  1. यौन संयम अथवा अधिक उम्र में विवाह 
  2. प्राकृतिक निरोध।

प्रश्न 6. 
किस विचारक ने कहा था, कि जनसंख्या वृद्धि ज्यामितीय रूप में लेकिन उसी दौरान खाद्यान्नों का उत्पादन गणितीय क्रम में बढ़ता है?
उत्तर:
माल्थस ने। 

प्रश्न 7. 
डेमोग्राफी को हिन्दी में क्या कहते हैं? 
उत्तर:
डेमोग्राफी को हिन्दी में जनसांख्यिकी कहते हैं। 

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प्रश्न 8. 
शिशु मृत्यु दर किसे कहते हैं ?
उत्तर:
प्रति 1000 जीवित बच्चों में से एक वर्ष के दौरान मरने वाले बच्चों के औसत प्रतिशत को शिशु मृत्यु दर कहा जाता है।

प्रश्न 9. 
स्त्री-पुरुष अनुपात से क्या तात्पर्य है? 
उत्तर:
किसी क्षेत्र विशेष में प्रति 1000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या को स्त्री-पुरुष अनुपात कहा जाता है। 

प्रश्न 10. 
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या कितनी है? 
उत्तर:
121 करोड़। 

प्रश्न 11. 
वह कौनसा वर्ष था जबकि जनसंख्या वृद्धि की अपेक्षा प्रथम बार जनसंख्या में गिरावट आई और कितनी?
अथवा 
भारत में किस सन् में जनसंख्या वृद्धि की अपेक्षा पहली बार गिरावट आयी? 
उत्तर:
सन् 1921 में 0.03 प्रतिशत की गिरावट आई। 

प्रश्न 12. 
भारत में मृत्यु दर में गिरावट के कोई दो कारण बताइए। 
उत्तर:

  1. चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि 
  2. शिक्षा और जागरूकता।

प्रश्न 13. 
भारत के किस राज्य में प्रजनन दर प्रतिस्थापन दर के नीचे है? 
उत्तर:
केरल में प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर के नीचे है। 

प्रश्न 14. 
भारत में जनसंख्या के आयु वर्ग में सबसे बड़ा आयु वर्ग कौनसा है? 
उत्तर:
भारत की जनसंख्या में सबसे बड़ा आयु वर्ग 15 से 60 वर्ष के आयु वर्ग का है। 

प्रश्न 15. 
भारत की जनसंख्या में सबसे छोटा आयु वर्ग कौन-सा है?
उत्तर:
भारत की जनसंख्या में सबसे छोटा आयु वर्ग 60 से अधिक का आयु वर्ग है। 

प्रश्न 16. 
भारत में सर्वाधिक स्त्री-पुरुष अनुपात तथा सबसे कम स्त्री-पुरुष अनुपात किन राज्यों का है? 
उत्तर:
भारत में सर्वाधिक स्त्री-पुरुष अनुपात केरल में और सबसे कम स्त्री-पुरुष अनुपात बिहार में है। 

प्रश्न 17. 
भारत के उस राज्य का नाम बताइए जहाँ पर बाल स्त्री-पुरुष अनुपात सबसे कम है। 
उत्तर:
वह राज्य पंजाब है। 

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प्रश्न 18. 
'ऐस्से आन पॉपुलेशन' पुस्तक के लेखक कौन हैं ? 
उत्तर:
थॉमस रोबर्ट माल्थस। 

प्रश्न 19. 
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में स्त्री-पुरुषों में साक्षरता का प्रतिशत कितना है? 
उत्तर:
स्त्रियों और पुरुषों में साक्षरता का प्रतिशत क्रमशः 64.6 और 80.9 है। 

प्रश्न 20. 
भारत में सर्वाधिक और सबसे कम साक्षरता किन राज्यों में पाई जाती है? 
उत्तर:
केरल में सर्वाधिक और बिहार में सबसे कम साक्षरता पाई जाती है। 

प्रश्न 21. 
एमिल दुर्खाइम ने आत्महत्या की दर के सन्दर्भ में क्या कहा था?
उत्तर:
एमिल दुर्खाइम का कहना था कि आत्महत्या की दर को सामाजिक कारणों के द्वारा स्पष्ट करना ही जरूरी है।

प्रश्न 22. 
भारत में नगरों में जनसंख्या वृद्धि के दो कारण बताइए। 
उत्तर:

  1. नगरों में रोजगार के साधन 
  2. उच्च जीवन स्तर की सुविधा। 

प्रश्न 23. 
विश्व में सर्वप्रथम किस देश के द्वारा और कब अपनी जनसंख्या नीति घोषित की गई थी? 
उत्तर:
भारत के द्वारा सन् 1952 ई. में।

प्रश्न 24. 
सन् 1975-76 में राष्ट्रीय आपात काल के दौरान परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफलता क्यों नहीं मिल सकी थी?
उत्तर:
क्योंकि सरकार के द्वारा जोर-जबरदस्ती से बन्ध्याकरण की नीति को अपनाया गया था। 

प्रश्न 25. 
भारत के कौनसे दो राज्य जनसंख्या वृद्धि के प्रतिस्थापन स्तर या उसके बहुत निकट पहुँच चुके हैं ? 
उत्तर:
केरल और तमिलनाडु। 

प्रश्न 26. 
जनसांख्यिकी लाभांश कब उत्पन्न होता है? 
उत्तर:
जनसाख्यिकी लाभांश जनसंख्या में कार्यशील लोगों के अनुपात में वृद्धि होने पर उत्पन्न होता है। 

प्रश्न 27. 
भारत में प्रजनन दर की वर्तमान स्थिति क्या है ? 
उत्तर:
भारत में प्रजनन दर की वर्तमान स्थिति 3.0 है। 

प्रश्न 28. 
भारत में साक्षरता की कमी के दो कारण बताइए। 
उत्तर:

  1. निर्धनता 
  2. सामाजिक रूढ़ियाँ। 

प्रश्न 29. 
भारत में आयु संभाविता की स्थिति बताइए। 
उत्तर:
आयु संभाविता 37 वर्ष से बढ़कर 62 वर्ष हो गई है। 

प्रश्न 30. 
भारत में जनसंख्या वृद्धि के कोई दो कारण बताइए। 
उत्तर:

  1. अशिक्षा 
  2. निर्धनता। 

प्रश्न 31. 
वर्ष 2010 के लिए राष्ट्रीय सामाजिक-जनसांख्यिकी के दो लक्ष्य बताइए। 
उत्तर:

  1. शिशु मृत्यु दर को 30 के स्तर पर लाना। 
  2. संचारी रोगों का निवारण और नियंत्रण करना। 

प्रश्न 32. 
शिशु और मातृ-मृत्यु की ऊँची दरें किस बात का सूचक होती हैं ? 
उत्तर:
शिशु और मातृ-मृत्यु की ऊँची दरें पिछड़ेपन और गरीबी की सूचक होती हैं। 

प्रश्न 33. 
कार्यशील वर्ग में किस आयु वर्ग के लोग आते हैं? 
उत्तर:
कार्यशील वर्ग में प्रायः 15 से 64 वर्ष तक के लोग आते हैं। 

प्रश्न 34. 
1921 के बाद भारत में मृत्यु दर में गिरावट आने का क्या कारण था? 
उत्तर:
अकालों और महामारियों पर नियंत्रण का बढ़ना।

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प्रश्न 35. 
सरकार ने अभी ग्रामीण इलाकों में भूख और भुखमरी की समस्या के समाधान के लिए कौनसा कानून बनाया है?
उत्तर:
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम नामक कानून।

प्रश्न 36. 
पराश्रितता अनुपात क्या है? 
उत्तर:
यह जनसंख्या के पराश्रित हिस्सों को मापने का साधन है। 

प्रश्न 37. 
बाल मृत्यु दर से आप क्या समझते हैं? 
उत्तर:
एक वर्ष में 1000 पैदा हुए बच्चों की तुलना में मरने वाले बच्चों की संख्या बाल मृत्यु दर कहलाती है। 

प्रश्न 38. 
उदारवादी और मार्क्सवादी विद्वानों ने माल्थस के किस विचार की आलोचना की? 
उत्तर:
गरीबी का कारण जनसंख्या वृद्धि है।

प्रश्न 39. 
हैलीबरी में माल्थस किस विषय के प्रोफेसर थे? 
उत्तर:
इतिहास और राजनीतिक अर्थशास्त्र। 

प्रश्न 40. 
प्राकृतिक वृद्धि दर से आपका क्या तात्पर्य है? 
उत्तर:
जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अन्तर। 

प्रश्न 41. 
स्त्री-पुरुष अनुपात क्या बताता है? 
उत्तर:
किसी क्षेत्र-विशेष में एक निश्चित अवधि के दौरान प्रति 1000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या। 

प्रश्न 42. 
जनसंख्या की आयु संरचना से क्या तात्पर्य है? 
उत्तर:
कुल जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में व्यक्तियों का अनुपात। 

प्रश्न 43. 
जनसंख्या के पराश्रित और कार्यशील हिस्सों को मापने का साधन क्या है? 
उत्तर:
पराश्रितता अनुपात। 

प्रश्न 44. 
पैंडेमिक शब्द का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
पैंडेमिक शब्द ऐसी महामारी के लिए उपयोग किया जाता है जो बहुत व्यापक भौगोलिक क्षेत्र को प्रभावित करती है।

प्रश्न 45. 
एपिडेमिक शब्द का उपयोग क्यों किया जाता है? 
उत्तर:
एपिडेमिक शब्द को सीमित क्षेत्र में फैली महामारी के लिए उपयोग किया जाता है। 

प्रश्न 46. 
प्रसव पूर्व नैदानिक प्रविधियाँ अधिनियम नामक कानून कब से लागू है? 
उत्तर:
19991. 

प्रश्न 47. 
2001 से 2011 तक की अवधि में स्त्रियों की साक्षरता में कितने प्रतिशत वृद्धि हुई? 
उत्तर:
10.4%

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प्रश्न 48. 
आयु संभाविता से क्या आशय है?
उत्तर:
आयु संभाविता इस बात की सूचक है. कि एक औसत व्यक्ति अनुमानतः कितने वर्षों तक जीवित रहता है। 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. 
जनसांख्यिकी शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई है तथा इसका अर्थ क्या है?
उत्तर:
जनसांख्यिकी को आंग्ल भाषा में 'डेमोग्राफी' कहा जाता है जिसकी उत्पत्ति यूनानी भाषा के 'डेमोस' और 'ग्राफीन' शब्दों से मिलकर हुई है जिसका अर्थ है-लोगों का वर्णन।

प्रश्न 2. 
आकारिक जनसांख्यिकी और सामाजिक जनसांख्यिकी में क्या अन्तर है?
उत्तर:
आकारिक जनसांख्यिकी में जनसंख्या के आकार का अध्ययन किया जाता है जबकि सामाजिक जनसांख्यिकी में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पक्षों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 3. 
विश्व में स्त्री-पुरुष अनुपात स्त्रियों के पक्ष में क्यों है? 
उत्तर:
विश्व में स्त्री-पुरुष अनुपात स्त्रियों के पक्ष में है क्योंकि

  1. शैशवावस्था में बालिका शिशुओं में बालक शिशुओं की अपेक्षा रोग-प्रतिरोधक-क्षमता अधिक होती है। 
  2. अधिकांश समाजों में स्त्रियाँ पुरुषों की तुलना में अधिक वर्षों तक जीवित रहती हैं। 

प्रश्न 4. 
भारत में राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के दो उद्देश्य बताइये। 
उत्तर:

  1. जन्म नियंत्रण के विभिन्न उपायों के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि दर को धीमा करना। 
  2. जन-स्वास्थ्य के मानक स्तरों में सुधार करना। 

प्रश्न 5. 
जन्म दर और मृत्यु दर से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
जन्म दर-एक निर्धारित अवधि में प्रति एक हजार जनसंख्या के पीछे जीवित उत्पन्न हुए बच्चों की संख्या को जन्म दर कहा जाता है। मृत्यु दर प्रति एक हजार जनसंख्या के पीछे एक निर्धारित अवधि में होने वाली मृत्यु की संख्या को मृत्यु दर कहा जाता है।

प्रश्न 6. 
जनसांख्यिकी विषय के अन्तर्गत जनसंख्या से संबंधित किन रुझानों तथा प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है?
उत्तर:
जनसांख्यिकी के अन्तर्गत जनसंख्या से संबंधित, जनसंख्या के आकार में परिवर्तन, जन्म, मृत्यु तथा प्रवसन के स्वरूप और जनसंख्या की संरचना और गठन जिसमें स्त्रियों, पुरुषों और विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के अनुपात आदि का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 7. 
18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में यूरोप में कौन सी दो भिन्न प्रक्रियायें लगभग एक साथ घटित हुईं? 
उत्तर:
18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में यूरोप में दो भिन्न-प्रक्रियाएँ लगभग साथ - साथ घटित हुईं

  1. राजनीतिक संगठन के रूप में राष्ट्र-राज्य की स्थापना।
  2. आंकड़ों से संबंधित आधुनिक विज्ञान सांख्यिकी की शुरूआत। 

प्रश्न 8. 
राज्य द्वारा सामाजिक आंकड़े इकट्ठे करने का आधुनिक रूप कब अस्तित्व में आया?
उत्तर:
राज्य द्वारा सामाजिक आंकड़े इकट्ठे करने का आधुनिक रूप 18वीं शताब्दी के अन्तिम वर्षों में अस्तित्व में आया। अमेरिका की सन् 1790 की जनगणना संभवतः सबसे पहली आधुनिक किस्म की जनगणना थी।

प्रश्न 9. 
जनसंख्या संवृद्धि दर से क्या तात्पर्य है ? यह कितने प्रकार की होती है?
उत्तर:
जनसंख्या संवृद्धि दर का तात्पर्य है-जन्म और मृत्यु दर के बीच का अन्तर। जनसंख्या संवृद्धि दर तीन प्रकार की होती है।

  1. प्रतिस्थापन (स्थिर) संवृद्धि दर 
  2. ऋणात्मक संवृद्धि दर और 
  3. धनात्मक या ऊँची संवृद्धि दर। 

प्रश्न 10. 
जनसंख्या वृद्धि की प्रतिस्थापन दर से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
जब जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अन्तर शून्य (अथवा व्यावहारिक रूप से नगण्य) होता है, तब हम इसे प्रतिस्थापन या स्थिर संवृद्धि दर कहते हैं। इस स्थिति में जितने लोग मरते हैं, उनका स्थान भरने के लिए उतने ही नए बच्चे जन्म लेते हैं।

प्रश्न 11. 
ऋणात्मक संवृद्धि दर क्या है ? ऐसे किन्हीं तीन देशों के नाम लिखिये, जिनकी वर्तमान में संवृद्धि दर ऋणात्मक है।
उत्तर:
जब किसी समाज का प्रजनन शक्ति स्तर प्रतिस्थापन दर से नीचा रहता है, तो वह ऋणात्मक संवृद्धि दर की स्थिति से गुजरता है। वर्तमान में जापान, रूस और इटली की संवृद्धि दर ऋणात्मक है।

प्रश्न 12. 
प्रजनन दर का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
प्रजनन दर का अर्थ है-बच्चे पैदा कर सकने की आयु (15 से 49 वर्ष तक) वाली प्रति 1000 स्त्रियों की इकाई के पीछे जीवित जन्में बच्चों की संख्या।

प्रश्न 13. 
शिशु मृत्यु दर एवं मातृ-मृत्यु दर का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
शिशु मृत्यु दर - शिशु मृत्यु दर उन बच्चों की मृत्यु की संख्या दर्शाती है जो जीवित पैदा हुए 1000 बच्चों में से एक वर्ष की आयु प्राप्त होने से पहले ही मौत के मुंह में चले जाते हैं।
मातृ - मृत्यु दर-मातृ-मृत्यु दर उन स्त्रियों की संख्या की सूचक है जो जीवित प्रसूति के 1000 मामलों में अपने बच्चों को जन्म देते समय मृत्यु को प्राप्त हो जाती हैं।

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प्रश्न 14. 
आयु - संभाविता की गणना किस आधार पर की जाती है ?
उत्तर:आयु - संभाविता की गणना किसी क्षेत्र विशेष में एक निश्चित अवधि के दौरान एक आयु विशेष में मृत्यु दर सम्बन्धी आंकड़ों के आधार पर की जाती है।

प्रश्न 15. 
भारत में गिरते हुए स्त्री-पुरुष अनुपात के दो सामाजिक कारक बताइये। 
उत्तर:
भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात घटता जा रहा है क्योंकि यहाँ

  1. बेटों को बेटियों से अधिक पसंद किया जाता है। 
  2. बालिका शिशुओं की उपेक्षा की जाती है। 

प्रश्न 16. 
जनसंख्या की आयु संरचना से क्या तात्पर्य है और यह किनके अनुसार बदलती रहती है ?
उत्तर:
जनसंख्या की आयु संरचना से तात्पर्य है कि कुल जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में व्यक्तियों का अनुपात क्या है। यह विकास और औसत आयु संभाविता के स्तरों में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार बदलती रहती है।

प्रश्न 17. 
पराश्रित वर्ग में किन्हें शामिल किया जाता है?
उत्तर:
पराश्रित वर्ग में ऐसे बुजुर्ग लोग आते हैं जो अपने बुढ़ापे के कारण काम नहीं कर सकते और ऐसे बच्चे भी आते हैं जो इतने छोटे हैं कि काम नहीं कर सकते।

प्रश्न 18. 
गिरता हुआ पराश्रितता अनुपात आर्थिक संवृद्धि का स्रोत कैसे बन सकता है ?
उत्तर:
गिरता हुआ पराश्रितता अनुपात आर्थिक संवृद्धि और समृद्धि का स्रोत बन सकता है क्योंकि वहाँ कार्यशील लोगों का अनुपात काम न करने वालों की तुलना में बहुत अधिक बड़ा होता है।

प्रश्न 19. 
1911 से 1921 के बीच भारत की संवृद्धि दर ऋणात्मक क्यों रही?
उत्तर:
1911 से 1921 के बीच भारत की संवृद्धि दर -0.03 प्रतिशत रही क्योंकि 1918-19 के दौरान इंफ्लूएंजा महामारी का भीषण तांडव रहा जिसने लगभग 1.25 करोड़ लोगों यानी देश की कुल जनसंख्या के 5 प्रतिशत अंश को मौत के मुँह में धकेल दिया था।

प्रश्न 20. 
1921 के बाद भारत में महामारियों पर नियंत्रण कैसे पाया गया?
उत्तर:
1921 के बाद भारत में ज्वर, प्लेग, चेचक जैसी बीमारियों के उपचार में किये गये सुधारों, बड़े पैमाने पर चलाए गए टीकाकरण कार्यक्रमों और व्यापक रूप से संचालित स्वच्छता अभियानों ने महामारियों को नियंत्रित करने में सहायता की।

प्रश्न 21. 
अमर्त्य सेन ने अकाल के क्या कारण बताये हैं ?
उत्तर:
अमर्त्य सेन के अनुसार अनाज के उत्पादन में गिरावट आने तथा भोजन खरीदने या किसी तरह से प्राप्त करने की लोगों की अक्षमता के कारण अकाल पड़ते रहे हैं।

प्रश्न 22. 
भारत के कुछ सम्पन्न क्षेत्रों में लिंग-अनुपात के गिरावट के दो कारण बताइये। 
उत्तर:
भारत के कुछ सम्पन्न क्षेत्रों में लिंग-अनुपात के गिरावट के कारण ये हैं

  1. लिंग विशेष का गर्भपात कराना जिससे लड़कियों को पैदा ही नहीं होने दिया जाता। 
  2. चयनात्मक आधार पर बालिका भ्रूण को गर्भ में ही नष्ट कर दिया जाता है। 

प्रश्न 23. 
जनसंख्या की अशोधित जन्म दर और सहज संवृद्धि दर क्या है?
उत्तर:
अशोधित जन्म दर सम्पूर्ण जनसंख्या के लिए स्थूल औसत दर होती है। सहज संवृद्धि दर से तात्पर्य जन्म दर और मृत्यु दर के बीच के अन्तर से है।

प्रश्न 24. 
राष्ट्रीय सामाजिक-जनसांख्यिकी के दो लक्ष्य बताइये। 
उत्तर:

  1. शिशु मृत्यु दर को प्रति 1000 जीवित शिशु जन्म के पीछे 30 के स्तर पर लाया जाए।
  2. संचारी रोगों का निवारण और नियंत्रण किया जाए। 

प्रश्न 25. 
जनसांख्यिकी संक्रमण सिद्धान्त के अनुसार जनसंख्या विस्फोट क्यों होता है?
उत्तर:
जनसांख्यिकी संक्रमण सिद्धान्त के अनुसार जनसंख्या विस्फोट इसलिए होता है क्योंकि रोग नियंत्रण, जनस्वास्थ्य तथा बेहतर उन्नत तरीकों के द्वारा मृत्यु दर तेजी से नीचे आ जाती है।

प्रश्न 26. 
बढ़ता हुआ पराश्रितता अनुपात चिन्ता का विषय क्यों है ?
उत्तर:
बढ़ता हुआ पराश्रितता अनुपात जनसंख्या के कार्यशील अनुपात को कम करता है। ऐसी स्थिति में आश्रितों का बोझ होने की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 27. 
जनसांख्यिकी लाभांश कब उत्पन्न होता है?
उत्तर:
जनसांख्यिकी लाभांश जनसंख्या में काम नहीं करने वाले पराश्रित लोगों की तुलना में कार्यशील लोगों के अनुपात में वृद्धि के परिणाम स्वरूप उत्पन्न होता है।

RBSE Class 12 Sociology Important Questions Chapter 2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

प्रश्न 28. 
जनसांख्यिकी का अध्ययन समाजशास्त्र के लिए महत्त्वपूर्ण क्यों है ?
उत्तर:
जनसांख्यिकी का अध्ययन समाजशास्त्र के लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि समाजशास्त्र के उद्भव और एक अलग अकादमिक विषय के रूप में इसकी स्थापना का श्रेय बहुत कुछ जनसांख्यिकी को ही जाता है।

प्रश्न 29. 
वर्ष 2041 तक प्रक्षेपित जनसंख्या के राज्यवार हिस्से (पाई डायग्राम) वृत्त आरेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
अथवा 
वर्ष 2041 तक प्रक्षेपित जनसंख्या वृद्धि के राज्यवार हिस्सों का एक पाई डायग्राम बनाइये। 
उत्तर:
वर्ष 2026 तक प्रक्षेपित जनसंख्या के क्षेत्रवार (राज्यवार) हिस्से
RBSE Class 12 Sociology Important Questions Chapter 2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना-1

प्रश्न 30. 
कुछ देशों के नाम लिखिये जहाँ पाँच वर्ष के कम उम्र के बच्चों की मृत्यु सर्वाधिक होती है। आपके विचार से मृत्यु के सबसे आम कारण क्या हो सकते हैं?
उत्तर:
इन देशों में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु सर्वाधिक होती है:

  1. भारत 
  2. नाइजीरिया 
  3. कांगो 
  4. पाकिस्तान 
  5. चीन।

मृत्यु के आम कारण हैं:

  1. लोगों में जागरूकता की कमी, 
  2. चिकित्सा सुविधाओं का अभाव और 
  3. बीमारियों की प्राथमिकता रोकथाम के अभाव।

प्रश्न 31. 
जनसांख्यिकी विषय के अन्तर्गत किन बातों का अध्ययन किया जाता है?
उत्तर:
जनसांख्यिकी विषय के अन्तर्गत जनसंख्या से सम्बन्धित अनेक रुझानों तथा प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है, जैसे-जनसंख्या के आकार में परिवर्तन; जन्म, मृत्यु तथा प्रवसन के स्वरूप; और जनसंख्या की संरचना और गठन अर्थात् उसमें स्त्रियों, पुरुषों और विभिन्न आयु वर्ग के लोगों का क्या अनुपात है?

प्रश्न 32. 
थॉमस रोबर्ट माल्थस के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
माल्थस (1766-1834) ने कैंब्रिज में शिक्षा प्राप्त की थी और ईसाई पादरी बनने का प्रशिक्षण लिया था। बाद में उन्हें लंदन के पास हैलीबरी में स्थित ईस्ट इंडिया कंपनी कॉलेज में इतिहास और राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। ईस्ट इंडिया कंपनी का यह कॉलेज उस समय की प्रशासनिक भारतीय सेवा (इंडियन सिविल सर्विस) के भावी अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण केन्द्र था।

प्रश्न 33. 
जनसांख्यिकीय संकल्पनाओं को किस रूप में अभिव्यक्त किया जाता है?
उत्तर:
जनसांख्यिकीय संकल्पनाओं को दरों या अनुपातों के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है, उनमें दो संख्याएँ शामिल होती हैं। इन संख्याओं में से एक खास आँकड़ा होता है जिसकी गणना एक विशिष्ट भौगोलिकप्रशासनिक इकाई के लिए की जाती है और दूसरी संख्या तुलना के लिए मानक का काम देती है।

प्रश्न 34. 
उन राज्यों के नाम लिखिये जिनमें जन्म दर और मृत्यु दर में कमी अधिकतम है। जन्म दर और मृत्यु दर में गिरावट क्या संकेत करती है? .
उत्तर:
निम्नलिखित राज्यों में जन्म दर में कमी अधिकतम है:

  1. पंजाब 
  2. केरल 
  3. महाराष्ट्र 
  4. पश्चिमी बंगाल।

निम्नलिखित राज्यों में मृत्यु दर अधिकतम है:

  1. मध्यप्रदेश 
  2. राजस्थान 
  3. बिहार 
  4. उत्तरप्रदेश।

जन्म दर में कमी यह संकेत करती है कि इन राज्यों में आर्थिक संवृद्धि और शिक्षा का स्तर उच्च है जबकि जन्म दर में अधिकता यह बताती है कि इन राज्यों में गरीबी अधिक तथा शिक्षा का स्तर निम्न है।

प्रश्न 35. 
स्त्री-पुरुष अनुपात को परिभाषित कीजिए। भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात गिरने के दो कारण लिखिये।
अथवा 
जनसांख्यिकीविदों और समाजशास्त्रियों के अनुसार भारत में बच्चों के स्त्री-पुरुष अनुपात में कमी आने के क्या कारण हैं?
उत्तर:
परिभाषा-किसी क्षेत्र विशेष में एक निश्चित अवधि के दौरान प्रति एक हजार पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या को स्त्री-पुरुष अनुपात कहा जाता है।
भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात गिरने के कारण हैं:

  1. शैशवावस्था में बालिकाओं की देखभाल में घोर उपेक्षा से बालिका मृत्यु की उच्च दर, 
  2. लिंग विशेष का गर्भपात, 
  3. बालिका. शिशुओं की हत्या, 
  4. लिंग परीक्षण तथा कन्या भ्रूण हत्या।

प्रश्न 36. 
जनसांख्यिकी संक्रमण के तीन चरण कौन-कौनसे हैं ?
उत्तर:

  1. प्रथम चरण-इसमें जन्म - मृत्यु दर दोनों ही बहुत उच्च होने से जनसंख्या वृद्धि दर कम होती है। यह अल्प - विकसित तथा पिछड़े समाज में होती है।
  2. द्वितीय (संक्रमणकालीन) चरण-जब समाज पिछड़ी अवस्था से उन्नत अवस्था में जाता है तो मृत्यु दर में काफी कमी आ जाती है तथा जनसंख्या वृद्धि दर ऊँची रहती है।
  3. तृतीय चरण-विकसित समाज, जहाँ जन्म दर-मृत्यु दर दोनों ही काफी कम होती है। अत: वृद्धि दर काफी कम रहती है।

प्रश्न 37. 
भारत के कौनसे राज्य जनसंख्या वृद्धि के 'प्रतिस्थापन स्तर' पर या उसके बहुत निकट पहुँच चुके हैं ? किन राज्यों में अब भी जनसंख्या वृद्धि दर बहुत ऊँची है ? इन क्षेत्रीय विभिन्नताओं के दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत के केरल और तमिलनाडु राज्य जनसंख्या वृद्धि के प्रतिस्थापन स्तर पर या उसके बहुत निकट पहुँच चुके हैं। बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश राज्यों में आज भी जनसंख्या वृद्धि दर बहुत ऊँची है। इन क्षेत्रीय विभिन्नताओं के कारण हैं:

  1. राज्यों में प्रजनन दरों में काफी भिन्नताएँ हैं। 
  2. राज्यों में मृत्यु दरों में भी अन्तर है।

प्रश्न 38. 
क्या आप महसूस करते हैं कि माता-पिता आज भी बेटियों की बजाय बेटों को अधिक पसंद करते हैं? आपकी राय में इस पसन्द के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, आज भी माता - पिता बेटियों की बजाय बेटों को अधिक पसंद करते हैं क्योंकि

  1. धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्पराओं में पुत्र के द्वारा पिता के वंश को चलाना तथा उत्तराधिकार के नियम पुत्र की पसंदगी के लिए उत्तरदायी रहे हैं।
  2. पुत्री का विवाह के बाद पराए घर जाना और पुत्र का माता-पिता के परिवार में रहना तथा उसका बुढ़ापे का सहारा होना भी पुत्र प्राप्ति की कामना के कारण रहे हैं।

प्रश्न 39. 
आयु संरचना में परिवर्तन के क्या कारण हैं?
उत्तर:
जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में व्यक्तियों का अनुपात आयु संरचना कहलाता है। आयु संरचना विकास के स्तरों और औसत आयु संभाविता के स्तरों में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार बदलती रहती है। इसके अलावा, शिशुओं तथा प्रसूताओं की मृत्यु की ऊँची दरें भी आयु संरचना को प्रभावित करती हैं। विकास के साथ - साथ जीवन स्तर में सुधार होता जाता है और उसके कारण आयु की संभाविता भी बढ़ जाती है। इसके फलस्वरूप आयु संरचना में परिवर्तन आता है।

प्रश्न 40. 
बढ़ता हुआ पराश्रितता किन देशों में और क्यों चिन्ता का कारण बन जाता है?
उत्तर:
बढ़ता हुआ पराश्रितता अनुपात उन देशों में चिन्ता का कारण बन जाता है जहाँ जनता बुढ़ापे की समस्या से जूझ रही होती है क्योंकि वहाँ आश्रितों की संख्या बढ़ जाने से कार्यशील आयु वाले लोगों का अनुपात अपेक्षाकृत छोटा हो जाता है जो आश्रितों का बोझ ढोने में कठिनाई महसूस करता है।

RBSE Class 12 Sociology Important Questions Chapter 2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

प्रश्न 41. 
गिरता हुआ पराश्रितता अनुपात आर्थिक संवृद्धि और समृद्धि का स्त्रोत बन सकता है। स्पष्ट करें।
उत्तर:
गिरता हुआ पराश्रितता अनुपात आर्थिक संवृद्धि और समृद्धि का स्रोत बन सकता है क्योंकि वहाँ कार्यशील लोगों का अनुपात काम न करने वालों की तुलना में अधिक बड़ा होता है। इसे कभी-कभी जनसांख्यिकीय लाभांश अथवा आयु संरचना के परिवर्तन से प्राप्त होने वाला फायदा कहा जाता है। 

प्रश्न 42. 
जनसांख्यिकी से आप क्या समझते हैं ?
अथवा 
जनसांख्यिकी से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जनसांख्यिकी-जनसांख्यिकी के अन्तर्गत जनसंख्या से सम्बन्धित अनेक रुझानों और प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है, जैसे-जनसंख्या के आकार में परिवर्तन, जन्म, मृत्यु और प्रवसन का स्वरूप, जनसंख्या की संरचना और गठन अर्थात् स्त्रियों, पुरुषों और विभिन्न आयु वर्गों के लोगों के अनुपात का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 43. 
आकारिक जनसंख्या और सामाजिक जनसंख्या में क्या अन्तर है?
उत्तर:
आकारिक जनसंख्या - आकारिक जनसंख्या का संबंध जनसंख्या परिवर्तन के संघटकों के विश्लेषण तथा मापन से होता है। इसमें मात्रात्मक विश्लेषण पर बल तथा गणितीय विधि का प्रयोग किया जाता है। सामाजिक जनसंख्या - इसके अन्तर्गत जनसंख्या की संरचना और परिवर्तनों के व्यापक कारणों व परिणामों का पता लगाया जाता है। 

प्रश्न 44. 
माल्थस के जनसंख्या वृद्धि सिद्धान्त के बारे में व्याख्या करें।
अथवा 
माल्थस के जनसंख्या वृद्धि के सिद्धान्त पर प्रकाश डालिये।
उत्तर:
माल्थस के अनुसार मनुष्यों की जनसंख्या का विस्तार हमेशा गुणोत्तर रूप से होता है, वहीं कृषि में खाद्यान्नों व अन्य भरण-पोषण के साधनों में वृद्धिं गणितीय रूप से होती है । इस प्रकार जनसंख्या में वृद्धि दर भरणपोषण के संसाधनों से अधिक होती है। फलतः मनुष्य हमेशा ही गरीबी में जीवनयापन के लिए दण्डित होता है।

प्रश्न 45. 
माल्थस ने जनसंख्या नियंत्रण के कौनसे उपाय बताये हैं? 
उत्तर:
माल्थस ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो प्रकार के उपाय बताए हैं

  1. मनुष्य कृत्रिम निरोधों द्वारा, जैसे कि अधिक आयु में विवाह करके अथवा ब्रह्मचर्य की नीति का पालन करके सीमित संख्या में बच्चे पैदा कर सकता है।
  2. माल्थस का मानना था कि अकालों और बीमारियों के द्वारा प्रकृति स्वयं जनसंख्या पर नियंत्रण करती है।

प्रश्न 46. 
माल्थस के सिद्धान्त की दो आलोचना कीजिए। उत्तर-माल्थस के सिद्धान्त की निम्न आधारों पर आलोचना की जाती है

  1. आर्थिक संवृद्धि जनसंख्या वृद्धि से अधिक हो सकती है। 19वीं सदी में यूरोप में माल्थस की भविष्यवाणी असत्य साबित हुई क्योंकि जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के बाद भी खाद्यान्नों का उत्पादन और जीवन स्तर उन्नत बने थे।
  2. कुछ विद्वानों का मत है कि गरीबी का कारण जनसंख्या वृद्धि नहीं बल्कि आर्थिक संसाधनों का असमान वितरण है।

प्रश्न 47. 
जनसांख्यिकी संक्रमण का सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर:
जनसांख्यिकी संक्रमण का सिद्धान्त-इस सिद्धान्त के अनुसार जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास के स्तरों के साथ जुडी होती है।

  1. प्रथम चरण:अल्पविकसित समाज में ऊँची मृत्यु और जन्म दरों के कारण जनसंख्या वृद्धि दर निम्न रहती है। 
  2. द्वितीय संक्रमणकारी चरण में ऊँची जन्म दर तथा निम्न मृत्यु दर से जनसंख्या विस्फोट होता है तथा 
  3. तृतीय चरण में विकसित देशों में दोनों की निम्न दर होने से वृद्धि दर नीची रहती है।

प्रश्न 48. 
जनसंख्या संवृद्धि दर से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
जनसंख्या संवृद्धि दर-जनसंख्या संवृद्धि दर का अर्थ है - जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अन्तर। यह तीन रूपों में दिखाई देती है

  1. प्रतिस्थापन या स्थिर जनसंख्या संवृद्धि दर-जब जन्म दर और मृत्यु दर का अन्तर शून्य या लगभग शून्य हो तो उसे स्थिर जनसंख्या संवृद्धि दर कहते हैं।
  2. ऋणात्मक दर-जब मृत्यु दर पर जन्म दर से अधिक होती है। 
  3. धनात्मक दर-जब जन्म दर मृत्यु दर से काफी अधिक होती है। 

प्रश्न 49. 
स्त्री-पुरुष अनुपात किसे कहते हैं ? यह अनुपात स्त्रियों के पक्ष में क्यों रहता है ?
उत्तर-स्त्री-पुरुष अनुपात-स्त्री-पुरुष अनुपात का अर्थ है-किसी क्षेत्र विशेष में एक निश्चित अवधि के दौरान प्रति 1000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या।
स्त्री-पुरुष अनुपात के स्त्रियों के पक्ष में रहने के कारण

  1. शैशवावस्था में बालिका शिशुओं में बालक शिशुओं की अपेक्षा अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता का होना। 
  2. पुरुषों की तुलना में स्त्रियों का अधिक लम्बे समय तक जीवित रहना।

प्रश्न 50. 
यद्यपि स्त्री-पुरुष अनुपात स्त्रियों के पक्ष में होता है परन्तु चीन, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे देशों में इसकी विपरीत स्थिति क्यों है?
उत्तर:
यद्यपि स्त्री-पुरुष अनुपात स्त्रियों के पक्ष में होता है तथापि चीन, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे देशों में इसकी विपरीत स्थिति है क्योंकि इन देशों में पुरुषों को स्त्रियों की अपेक्षा अधिक महत्त्व दिया जाता है; बेटे को अधिमान्यता दी जाती है और बालिका शिशुओं की उपेक्षा की जाती है।

प्रश्न 51. 
आयु संरचना क्या है और यह बदलती क्यों रहती है ? 
उत्तर:
आयु संरचना-कुल जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों के अनुपात को ही आयु संरचना कहा जाता है। आयु संरचना में बदलाव के कारण

  1. आयु संरचना विकास के स्तरों और आयु संभाविता के स्तरों में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार बदलती रहती है।
  2. शिशुओं और प्रसूताओं की उच्च मृत्यु दर तथा लोगों के जीवन स्तर में आया सुधार भी इसे प्रभावित करते

प्रश्न 52. 
भारत के पास भविष्य में काफी बड़ा और बढ़ता हुआ श्रमिक बल होगा जो संवद्धि तथा समृद्धि की दृष्टि से अप्रत्याशित लाभ प्रदान कर सकेगा। संक्षिप्त में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वर्तमान समय में भारत विश्वभर के युवा देशों में से एक है। वर्ष 2000 में भारत की जनसंख्या का 1/3 भाग 15 वर्ष की आयु से नीचे था। वर्ष 2020 में भारतीयों की औसत उम्र सिर्फ 29 साल होगी जबकि चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका में औसत आयु 37 वर्ष, पश्चिमी यूरोप में 45 वर्ष और जापान में 48 वर्ष होगी। अत:भारत के पास काफी बड़ा और बढ़ता हुआ श्रमिक बल होगा जो संवृद्धि तथा समृद्धि की दृष्टि से अप्रत्याशित लाभ प्रदान कर सकेगा।

प्रश्न 53. 
'जनसांख्यिकीय लाभांश' की सम्भावना को वास्तविक संवृद्धि में कैसे बदला जा सकता है ?
उत्तर:
'जनसांख्यिकीय लाभांश' की संभावना को वास्तविक संवृद्धि में तभी बदला जा सकता है जब कार्यशील आयु वर्ग में शिक्षा और रोजगार के स्तरों में भी तद्नुरूप वृद्धि हो। क्योंकि श्रमिक बल में शामिल नए लोग शिक्षित नहीं होंगे तो उनकी उत्पादकता नीची रहेगी। यदि वे बेरोजगार रहते हैं तो वे बिल्कुल भी कमा नहीं सकेंगे और पराश्रितों की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे।

प्रश्न 54. 
क्यों कुछ देश जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा उठा सकते हैं और कुछ देश ऐसा नहीं कर पाते?
उत्तर:
कार्यशील आयु वर्ग का व्यक्ति बेरोजगार भी हो सकता है। कार्यशील आयु वर्ग और बेरोजगार वर्ग के बीच का अंतर बेरोजगारी व अपूर्णरोजगारी की स्थिति पर निर्भर है। बेरोजगारी या अपूर्णरोजगारी श्रमिक बल के एक भाग को उत्पादक कार्य से बाहर रखती है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि क्यों कुछ देश जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा उठा सकते हैं जबकि कुछ और देश ऐसा नहीं कर पाते।

प्रश्न 55. 
जनसंख्या की आयु-संरचना से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आयु-संरचना-कुल जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों के अनुपात को ही आयु संरचना कहते हैं। उदाहरण के लिए भारत वर्ष की 2011 के आँकड़ों के अनुसार सम्पूर्ण जनसंख्या में 0-14 के आयु वर्ष; 15-60 के आयु वर्ग तथा 60 से ऊपर आयु वर्ग का अनुपात क्रमशः 29%, 63% और 8% है।

प्रश्न 56. 
पराश्रितता अनुपात क्या है और बढ़ता हुआ पराश्रितता अनुपात चिन्ता का विषय क्यों है?
उत्तर:
पराश्रितता अनुपात 15 वर्ष से कम और 64 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की संख्या को 15 से 64 वर्ष के आयु लोगों की संख्या से भाग देने के बाद प्राप्त हुई संख्या के बराबर होता है। बढ़ता हुआ पराश्रितता अनुपात इसलिए चिन्ता का विषय हो जाता है क्योंकि इससे कार्यशील लोगों का अनुपात कम होता है जो आश्रितों का बोझा ढोने में कठिनाई महसूस करता है।

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प्रश्न 57. 
किस अवधि में भारत में जनसंख्या संवद्धि दर नकारात्मक रही और क्यों?
उत्तर:
वर्ष 1911 से 1921 के बीच भारत में जनसंख्या संवृद्धि की दर नकारात्मक या ऋणात्मक (-0.03 प्रतिशत) रही। इसका कारण 1918-19 के दौरान इंफ्लूएंजा महामारी का भीषण तांडव था जिसने लगभग 1.25 करोड़ लोगों यानी देश की कुल जनसंख्या के 5 प्रतिशत अंश को मौत के मुंह में धकेल दिया था।

प्रश्न 58. 
इंफ्लूएंजा की बीमारी क्या है?
उत्तर:
इंफ्लूएंजा नाम की बीमारी एक विषाणु द्वारा फैलायी जाती है जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र के ऊपरी अवयवों यानी नाक, गला, श्वसनी और फेंफड़ों पर आक्रमण कर देता है। इसके विषाणुओं की जननिक बनावट कुछ ऐसी होती है कि वे वैक्सीन के असर से अपने आपको उन्मुक्त कर लेते हैं।

प्रश्न 59. 
सन् 1921 के बाद भारत में मृत्यु दर में गिरावट क्यों आई परन्तु जन्म दर थोड़ी ही गिर पाई, क्यों ?
उत्तर:
सन् 1921 के बाद भारत में उपचार पद्धतियों में सुधार, बड़े पैमाने पर चलाए गए टीकाकरण अभियानों ने महामारियों को नियंत्रित करने में सहायता की, इससे मृत्यु दर में गिरावट आई, लेकिन अशिक्षा तथा सामाजिक एवं धार्मिक मान्यताओं के कारण जन्म दर को नियंत्रित नहीं किया जा सका, इसलिए जन्म दर थोड़ी ही गिर पायी।

प्रश्न 60. 
भारत में अकाल के लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी रहे हैं? 
उत्तर:
भारत में अकाल के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी रहे हैं

  1. वर्षा पर निर्भर कृषि क्षेत्रों में मानसूनी वर्षा की कमी के कारण कृषि उपज की कमी से अकाल पड़ते हैं।
  2. परिवहन और संचार के साधनों के अभाव तथा इस दिशा में सरकारी प्रयत्नों के अभाव के कारण भी अकाल पड़ते रहे हैं।
  3. 'हकदारी की पूर्ति व अभाव' के कारण भी अकाल पड़ते हैं।

प्रश्न 61. 
भारत में विभिन्न राज्यों में प्रजनन दर की स्थिति बताइये।
उत्तर:

  1. वर्ष 2016 तक आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल राज्य कुल प्रजनन दर को 1.7 तक नीचे लाने में सफल हुए हैं।
  2. केरल की कुल प्रजनन दर भी प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है।
  3. वर्ष 2009 के टी.एफ.आर. के अनुसार बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्य की प्रजनन दरें क्रमशः 3.3, 2.8, 2.7 और 3.1 थीं।

प्रश्न 62. 
भारत की आयु संरचना को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या में अधिकांश भारतीय युवावस्था में हैं क्योंकि देश की सम्पूर्ण जनसंख्या में 2011 के आंकड़ों के अनुसार 15 वर्ष से कम आयु वाले वर्ग (0-14 आयु वर्ग) का हिस्सा 29 प्रतिशत है, 15-60 के आयु वर्ग का हिस्सा 63 प्रतिशत है और 60 से ऊपर आयु वर्ग का हिस्सा 8 प्रतिशत है।

प्रश्न 63. 
जनसांख्यिकीय लाभांश से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जनसांख्यिकीय लाभांश किसी देश में पराश्रित लोगों की तुलना में कार्यशील लोगों के अनुपात में वृद्धि के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता है क्योंकि कार्यशील वर्ग के द्वारा एक ओर तो अपना भरण - पोषण किया जाता है तो दूसरी ओर पराश्रित लोगों को सहायता भी देता है।

प्रश्न 64. 
"भारत के सम्मुख जनसांख्यिकीय लाभांश का द्वार खुला हुआ है।" कैसे?
उत्तर:
आज भारत के सम्मुख जनसांख्यिकीय लाभांश का द्वार खुला हुआ है। यह लाभांश का द्वार इस तथ्य के कारण खुला है कि यहाँ कार्यशील लोगों की वर्तमान पीढ़ी अपेक्षाकृत बड़ी है और उसे वृद्ध लोगों की अपेक्षाकृत छोटी पीढ़ी का भरण-पोषण करना पड़ रहा है, लेकिन इसको प्राप्त करने के लिए हमें उपयुक्त नीतियों का पालन करना होगा।

प्रश्न 65. 
"भारत में बाल स्त्री - पुरुष अनुपात चिन्ता का विषय बना हुआ है।" कैसे?
उत्तर:
भारत में सन् 1991 से 2001 तक बाल स्त्री-पुरुष अनुपात में 18 अंकों की गिरावट आयी है जो कि 945 से घटकर 927 पर आ गयी है। 2011 में यह और घटकर 919 ही रह गया है। यह स्थिति चिन्ताजनक है क्योंकि भारत में पहले ही स्त्री - पुरुष अनुपात 2011 के आंकड़ों के अनुसार 943 है, जो स्त्रियों की कमी को दर्शाता है। बाल स्त्री-पुरुष अनुपात और कम होने से भविष्य में स्त्रियों की जनसंख्या में भारी कमी आयेगी।

प्रश्न 66. 
भारत के आर्थिक विकास और संवृद्धि में आयु - संरचना के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर:
भारत के आर्थिक विकास एवं संवृद्धि में आयु संरचना के महत्त्व को निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया

  1. भारत में 60 वर्ष से ऊपर के लोगों की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है जो भारत में बढ़ती जीव प्रत्याशा व चिकित्सा व स्वास्थ्य व पोषण में वृद्धि को दर्शाता है। यह भारत में संवृद्धि और आर्थिक विकास को सूचित करता है।
  2. भारत में 0-14 आयु वर्ग की जनसंख्या में गिरावट से स्पष्ट होता है कि लोग परिवार नियोजन को अपनाकर जनसंख्या - नियंत्रण कर रहे हैं।
  3. भारत में 15-59 आयु वर्ग की कार्यशील जनसंख्या का 63 प्रतिशत तक हो जाना भारत के विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

प्रश्न 67. 
'जनसांख्यिकीय लाभांश' के अवसर को प्राप्त करने में रोजगार एक बड़ी समस्या है। उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
'जनसांख्यिकीय लाभांश' के अवसर को प्राप्त करने में रोजगार एक बड़ी समस्या है। इस कथन को निम्न उदाहरण से स्पष्ट किया जा सकता है-वर्ष 1999-2000 के राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन के आँकड़ों और भारतीय जनगणना 2001 के आँकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण और नगरीय दोनों प्रकार के इलाकों में रोजगार पैदा करने की दर में एक साथ भारी गिरावट आई है।

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प्रश्न 68. 
भारत में बाल स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट के लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी रहे हैं ? उत्तर-भारत में बाल स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट के लिए अग्र कारण उत्तरदायी रहे हैं

  1. शैशवावस्था में बच्चियों की देखभाल में घोर उपेक्षा से उनकी उच्च मृत्यु दर का होना। 
  2. लिंग विशेष के गर्भपात के कारण बच्चियों को जन्म नहीं लेने दिया जाता। 
  3. बालिका शिशुओं की हत्या तथा लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या। 

प्रश्न 69. 
भारत में गिरते लिंग अनुपात के कारणों की विवेचना कीजिए। उत्तर-भारत में गिरते लिंग अनुपात के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

  1. मातृ मृत्यु दर की अधिकता-यद्यपि देश में विकास के साथ - साथ मातृ मृत्यु दर में गिरावट आयी है तथापि अभी भी यह अधिक है।
  2. बालिका शिशुओं की हत्या-बालिका शिशुओं की हत्या भी देश में गिरते लिंगानुपात का कारण रही है।
  3. कन्या भ्रूण हत्या में-सोनोग्राफी की द्वारा लिंग परीक्षण से कन्या भ्रूण हत्या में बढ़ी हैं। इससे स्त्रीपुरुष अनुपात गिरता जा रहा है।

प्रश्न 70. 
"भारत में सबसे निम्नतर बाल स्त्री-पुरुष अनुपात सबसे अधिक समृद्ध क्षेत्रों में पाया जाता है।" क्यों?
उत्तर:
भारत में पंजाब, हरियाणा, चण्डीगढ़, दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे समृद्ध राज्यों में निम्नतर बाल स्त्री-पुरुष अनुपात पाया जाता है क्योंकि आर्थिक दृष्टि से धनी परिवार एक या दो सन्तानों को जन्म देना पसंद करते हैं। इसलिए वे अपनी पसंद से ही लड़का या लड़की को जन्म दे सकते हैं। सोनोग्राफी के द्वारा ऐसा कर पाना आसान हो गया है।

प्रश्न 71. 
जनसांख्यिकीय अध्ययन में साक्षरता का महत्त्व बताइये।
उत्तर:
जनसांख्यिकीय अध्ययन में साक्षरता का महत्त्व इस प्रकार है:

  1. साक्षरता शक्ति सम्पन्न होने का महत्त्वपूर्ण साधन है।
  2. साक्षरता से आजीविका के विकल्पों के बारे में तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आती है।
  3. इससे लोगों में अपने समुदाय के प्रति सांस्कृतिक और आर्थिक कल्याण के कार्यक्रमों के प्रति रुचि जागृत होती है।

प्रश्न 72. 
भारत में विभिन्न सामाजिक समूहों में साक्षरता की दरों में बहुत भिन्नता पाई जाती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  1. भारत में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में साक्षरता दर कम पाई जाती है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुषों की साक्षरता दर जहाँ 80.9 प्रतिशत थी, वहाँ स्त्रियों की साक्षरता दर 64.6 प्रतिशत ही थी।
  2. अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों में भी साक्षरता दरें काफी नीची हैं।
  3. भारत में क्षेत्रीय दृष्टि से भी साक्षरता दरों में अन्तर है।

प्रश्न 73. 
भारत की जनसांख्यिकी संक्रमण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भारत की जनगणना के आँकड़ों (भारतीय जनसंपर्क महासंघ) से पता चलता है कि 1991 के बाद से भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट आई है। 1990 में एक महिला औसतन 3.8 बच्चों को जन्म देती थी, वहीं आज यह कम होकर 2.7 बच्चे प्रति महिला हो गए हैं (ब्लूम, 2011)। हालांकि प्रजनन क्षमता और जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आ रही है, लेकिन भारत की जनसंख्या वृद्धि की तीव्र गति के कारण 2050 तक इसके 1.6 अरब तक पहुँचने का अनुमान है। जनसंख्या की गति ऐसी स्थिति को संदर्भित करती है जहाँ प्रजनन की उम्र में महिलाओं की बड़ी संख्या अगली पीढ़ी के दौरान जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देगी।

प्रश्न 74. 
भारत में नगरीकरण के लिए उत्तरदायी कोई तीन कारण बताइये। उत्तर-भारत में नगरीकरण के लिए उत्तरदायी कारण

  1. शहरों में रोजगार के साधनों का उपलब्ध होना।
  2. गांवों में अब तालाबों, वन प्रदेशों, गोचर भूमियों जैसी साझी सम्पत्ति के संसाधनों का समाप्त होना तथा ईंधन, चारा आदि वस्तुएँ भी बाजार से खरीदना।
  3. शहरों में अपरिचितों से सम्पर्क तथा दलितों की अपमानजनक स्थिति से मुक्ति का मिलना।

प्रश्न 75. 
जनसंख्या के प्राकृतिक निरोध (Checks-positive) से क्या आशय है?
उत्तर:
प्राकृतिक निरोध-टी. आर. माल्थस द्वारा इस शब्द का प्रयोग जनसंख्या वृद्धि की दर पर लगने वाली ऐसी रोकथाम के सम्बन्ध में किया गया है जो प्रकृति द्वारा, मानव इच्छाओं की परवाह न करते हुए, लगाई जाती है। ऐसे निरोधों के उदाहरणों में अकाल, महामारियां और अन्य प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं।

प्रश्न 76. 
जनसंख्या के कृत्रिम निरोध (Checks-preventive) से क्या आशय है ?
उत्तर:
कृत्रिम (निवारक) निरोध-टी. आर. माल्थस द्वारा इस शब्द का प्रयोग जनसंख्या वृद्धि की दर पर लगने वाली ऐसी रोकथाम के सम्बन्ध में किया गया है जो मनुष्यों द्वारा स्वयं अपने ऊपर स्वेच्छा से लगाई जाती है। ऐसे निरोधों के उदाहरणों में देरी से विवाह करना, ब्रह्मचर्य का पालन करना या संतति निरोध के उपाय शामिल हैं।

प्रश्न 77. 
महामारी से क्या आशय है ?
उत्तर:
महामारी (Epidemic) का अर्थ है-किसी खास भौगोलिक क्षेत्र के लोगों में एक समय-विशेष पर किसी बीमारी के रोगियों की दर में अचानक वृद्धि हो जाना। किसी आम बीमारी को महामारी बनाने वाला निर्णायक तत्व यह है कि उसके होने या फैलने की दर सामान्य से काफी ऊँची हो।

प्रश्न 78. 
स्थानिक महामारी और सार्वभौमिक या देशव्यापी महामारी में क्या अन्तर है?
उत्तर:
यदि कोई बीमारी होने की दर किसी खास भौगोलिक क्षेत्र में ऊँची तो हो पर लगातार एक स्तर पर ही बनी रहे, उसमें अचानक कोई बढ़ोतरी न हो, तो इसे स्थानिक महामारी कहा जायेगा और यदि कोई महामारी राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर फैल जाए तो उसे देशव्यापी या सार्वभौमिक महामारी कहा जाता है।

RBSE Class 12 Sociology Important Questions Chapter 2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

प्रश्न 79. 
समानान्तर वृद्धि से क्या आशय है ?
उत्तर:
समानान्तर वृद्धि-संख्याओं की ऐसी श्रृंखला जो किसी भी संख्या से प्रारम्भ हो सकती है, लेकिन जहाँ प्रत्येक परवर्ती संख्या पूर्ववर्ती संख्या में एक निर्धारित राशि जोड़ने से प्राप्त होती है, जैसे-5, 10, 15, 20 आदिआदि। इसमें 5 प्रारंभ संख्या है, इसमें प्रत्येक में 5 जोड़ने से नई संख्या प्राप्त होती है।

प्रश्न 80. 
गुणोत्तर वृद्धि से क्या आशय है?
उत्तर:
गुणोत्तर वृद्धि-संख्याओं की ऐसी शृंखला जो किसी भी संख्या से प्रारंभ हो सकती है, लेकिन जहाँ प्रत्येक परवर्ती संख्या पूर्ववर्ती संख्या को एक सतत् गुणक से गुणा करने परं प्राप्त होती है। उदाहरण के लिए 5, 25, 125, 625 आदि-आदि। 

निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. 
जनसांख्यिकी से आप क्या समझते हैं? जनसांख्यिकी अध्ययन का महत्त्व बताइए।
अथवा 
एक नागरिक के लिए जनसंख्या अध्ययन की क्या उपयोगिता होती है?
उत्तर:
जनसांख्यिकी का अर्थ-जनसांख्यिकी को आंग्ल भाषा में 'डेमोग्राफी' कहा जाता है। जिसकी उत्पत्ति यूनानी भाषा के 'डेमोस' और 'ग्राफीन' शब्दों से मिलकर हुई है, जिसका अर्थ है-लोगों का वर्णन। जनसांख्यिकी के अन्तर्गत जनसंख्या से सम्बन्धित अनेक रुझानों और प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है, जैसेजनसंख्या के आकार में परिवर्तन, जन्म, मृत्यु और प्रवसन का स्वरूप, जनसंख्या की संरचना और गठन अर्थात् स्त्रियों, पुरुषों और विभिन्न आयु वर्गों के लोगों के अनुपात का अध्ययन किया जाता है।

जनसांख्यिकी अध्ययन का महत्त्व जनसांख्यिकी अध्ययन के निम्न महत्त्व हैं:

  1. जन्म और मृत्यु दर का ज्ञान: जनसांख्यिकी अध्ययन के द्वारा यह ज्ञात हो जाता है कि निश्चित अवधि के दौरान प्रति एक हजार व्यक्तियों पर जन्म और मृत्यु दर कितनी रही है।
  2. जनसंख्या वितरण और क्षेत्र विकास की जानकारी: इसके माध्यम से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पलायन करने वाले तथा विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार, प्रौद्योगिकी, व्यापार और वाणिज्य के बारे में जानकारी मिल जाती है।
  3. स्त्री - पुरुष अनुपात का ज्ञान: इससे यह भी ज्ञात हो जाता है कि एक निश्चित अवधि में प्रति 1000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या कितनी है।
  4. आयु संरचना की जानकारी: जनसांख्यिकी अध्ययन के द्वारा विभिन्न आयु वर्गों की जानकारी तथा अर्थव्यवस्था में इनकी भूमिका के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाती है।
  5. साक्षरता की जानकारी: जनसांख्यिकी अध्ययन के द्वारा देश में साक्षरता की स्थिति (स्त्री-पुरुष साक्षरता) के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाती है।
  6. व्यावसायिक संरचना की जानकारी: जनसंख्या अध्ययन के द्वारा देश में व्यावसायिक संरचना की जानकारी मिल जाती है।
  7. राष्ट्रीय नीतियों को बनाने में सहायक: जनसांख्यिकी अध्ययन के द्वारा राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण तथा उन्हें क्रियान्वित करने में भी सहायता मिल जाती है।
  8. ग्रामीण और शहरी जनसंख्या की जानकारी: जनसंख्या अध्ययन के द्वारा यह भी पता चल जाता है कि देश की कुल जनसंख्या का कितने प्रतिशत भाग गाँवों में तथा कितना भाग शहरों में निवास कर रहा है तथा देश के विकास कार्यों में इनकी भूमिका क्या है। निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि जनसांख्यिकी अध्ययन विभिन्न कारणों से उपयोगी होता है। 

प्रश्न 2. 
माल्थस के जनसंख्या वृद्धि के सिद्धान्त की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए। 
उत्तर:
माल्थस का जनसंख्या वृद्धि का सिद्धान्त प्रसिद्ध अंग्रेज राजनीतिक अर्थशास्त्री माल्थस के द्वारा सन् 1788 में अपने निबन्ध 'एन एस्से ऑन पॉपुलेशन' में जनसंख्या वृद्धि के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया गया था, जो कि एक प्रकार से निराशावादी सिद्धान्त था। माल्थस के अनुसार मनुष्यों की जनसंख्या उस दर की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती है जिस दर से मनुष्य के भरण - पोषण के साधन (विशेष रूप से भोजन, लेकिन कपड़ा और अन्य कृषि आधारित उत्पाद भी) बढ सकते हैं। इसलिए मनुष्य को हर स्थिति में जीने के लिए दण्डित किया जाता है क्योंकि कृषि उत्पादन में वृद्धि हमेशा ही जनसंख्या वृद्धि से पीछे रहेगी। माल्थस के द्वारा दो बातें कही गईं
1. जनसंख्या का विस्तार ज्यामितीय अथवा गुणोत्तर रूप में (जैसे-2, 4, 8, 16, 32 की श्रृंखला में) होता है।
2. इसी दौरान कृषि उत्पादन में वृद्धि गणितीय अथवा समांतर रूप में (जैसे-2, 4, 6, 8, 10 की श्रृंखला में) होती है। चूँकि जनसंख्या की वृद्धि दर भरण - पोषण के संसाधनों के उत्पादन में होने वाली वृद्धि की दर से सदा आगे रहती है, इसलिए संवृद्धि को बढ़ाने का एक ही उपाय है कि जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया जाये। माल्थस के द्वारा जनसंख्या को नियंत्रित करने के दो प्रकार के उपाय बताये गये हैं

  1. बड़ी उम्र में विवाह करके अथवा यौन संयम धारण करके अथवा ब्रह्मचर्य को धारण करके।
  2. अकाल और महामारियों के रूप में प्राकृतिक निरोध भी जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया करते हैं, जो कि खाद्य आपूर्ति तथा जनसंख्या के बीच सन्तुलन स्थापित करने के प्राकृतिक उपाय हैं।

आलोचना - माल्थस के इस सिद्धान्त की निम्न रूपों में आलोचना की गई है:
1. आर्थिक संवृद्धि जनसंख्या वृद्धि से अधिक हो सकती है। उदाहरण के लिए, 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में यूरोप के देशों में माल्थस की भविष्यवाणी असत्य साबित हुई क्योंकि जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के बाद भी खाद्यान्नों का उत्पादन और जीवन स्तर उन्नत बने थे।

2. उदारवादी और मार्क्सवादी विचारकों ने इस सिद्धान्त की आलोचना की कि गरीबी का कारण जनसंख्या वृद्धि है। इनके अनुसार गरीबी और भुखमरी जैसी समस्यायें जनसंख्या वृद्धि की अपेक्षा आर्थिक संसाधनों के असमान वितरण के कारण उत्पन्न होती हैं।

प्रश्न 3. 
1918-19 की सार्वभौमिक इंफ्लूएंजा महामारी पर लेख लिखिए।
उत्तर:
इंफ्लूएंजा नाम की बीमारी एक विषाणु द्वारा फैलाई जाती है जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र के ऊपरी अवयवों यानी नाक, गला तथा श्वसनी और कभी-कभी फेफड़ों पर भी आक्रमण कर देता है। इंफ्लूएंजा के विषाणुओं की जननिक बनावट कुछ ऐसी होती है कि वे अपने आप में छोटे-बड़े जननिक परिवर्तन लाकर स्वयं को मौजूदा टीका-द्रव्यों (वैक्सीन) के असर से उन्मुक्त कर लेते हैं। पिछली शताब्दी में इंफ्लूएंजा के विषाणुओं में तीन बार बड़े-बड़े जननिक परिवर्तन आए जिसके परिणामस्वरूप सार्वभौमिक महामारियाँ (पैंडेमिक्स) फैली
और अत्यन्त विशाल संख्या में लोग इंफ्लूएंजा से पीड़ित हुए और मृत्यु का ग्रास बने। इनमें सबसे कुख्यात महामारी 'स्पैनिश फ्लू' थी जिसने विश्व की जनसंख्या को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया और ऐसा समझा जाता है कि 1918-1919 के दौरान इससे पीड़ित होकर कम-से-कम 4 करोड़ लोग मौत के मुँह में चले गए। इसके बाद अभी कुछ साल पहले ही इंफ्लूएंजा की महामारी देशव्यापी स्तर पर कई क्षेत्रों में दो बार फैली-1957 में 'एशियन इंफ्लूएंजा' और 1968 में 'हांगकांग इंफ्लूएंजा' और उससे विश्वस्तर पर लाखों लोग पीड़ित हुए और मृत्यु का ग्रास बन गए।

1918-19 के स्पैनिश फ्लू से संपूर्ण विश्व की कुल जनसंख्या का 20% भाग पीड़ित हुआ और 2.5 से 5% तक मानव जनसंख्या इसकी वजह से नष्ट हो गई। इंफ्लूएंजा से पहले 25 सप्ताहों में ही ढाई करोड़ लोगों की मौत हो गई। इसके विपरीत एड्स की बीमारी से पहले 25 वर्ष में ढाई करोड़ लोग मृत्यु को प्राप्त हुए। इंफ्लूएंजा विश्वभर में फैल गया और इससे छह महीने में 250 लाख से भी अधिक लोगों की मृत्यु हो गई। ।

संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 28% जनसंख्या इस महामारी से पीड़ित हुई और उनमें से 5,00,000 से 6,75,000 लोग काल के गाल में चले गए। ब्रिटेन में इससे मरने वालों की संख्या 2,00,000 और फ्रांस में 4,00,000 से भी ज्यादा बताई जाती है। अलास्का और दक्षिणी अफ्रीका में इससे गाँव-के-गाँव तबाह हो गए। आस्ट्रेलिया में इससे 10,000 लोग मरे तथा फीजी द्वीपसमूह में केवल दो सप्ताह में वहाँ की 14% जनसंख्या नष्ट हो गई और पश्चिमी समोआ में 22% लोग मर गए। भारत में अनुमानतः 170 लाख लोग मारे गए यानी तत्कालीन भारत की जनंसख्या का लगभग 5% भाग नष्ट हो गया। ब्रिटिश भारतीय सेना में लगभग 22% सैनिक इस महामारी से पीड़ित होकर मृत्यु को प्राप्त हो गए।

प्रश्न 4. 
निम्न अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिये
(क) जनसंख्या संवृद्धि दर 
(ख) प्रजनन दर। 
उत्तर:
(क) जनसंख्या संवृद्धि दर जनसंख्या संवृद्धि दर का अर्थ है:
जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अन्तर। जब यह अन्तर शून्य होता है तो कहा जाता है कि जनसंख्या स्थिर हो गई है अथवा वह प्रतिस्थापन स्तर पर पहुंच गई है। यह एक ऐसी अवस्था होती है जिसमें जितने वृद्ध व्यक्ति मरते हैं और उनके रिक्त स्थान को पूरा करने के लिए उतने ही नये बच्चे जन्म लेते हैं। कभी-कभी कुछ समाजों को ऋणात्मक संवृद्धि दर की स्थिति से भी गुजरना पड़ता है अर्थात् उनका प्रजनन शक्ति स्तर प्रतिस्थापन दर से नीचा रहता है। कुछ समाज ऐसे भी होते हैं जहाँ जनसंख्या संवृद्धि दर बहुत उच्च हो जाती है विशेष रूप से जबकि वे संक्रमण की स्थिति से गुजर रहे होते हैं। दूसरे शब्दों में, ऐसे समाजों में प्रजनन शक्ति स्तर प्रतिस्थापन दर से नीचा होता है।

आज विश्व में कई देश ऐसे हैं जो कि इस स्थिति से गुजर रहे हैं। इन देशों में जापान, रूस, इटली और पूर्वी यूरोप के देशों को शामिल किया जा सकता है।कुछ समाज ऐसे भी हो सकते हैं जहाँ पर जनसंख्या संवृद्धि दर बहुत उच्च (धनात्मक) भी हो सकती है, विशेष रूप से तब जबकि वे जनसांख्यिकी संक्रमण के दौर से गुजर रहे होते हैं। इसमें जन्म दर उच्च होती है लेकिन मृत्यु दर कम हो जाती है।

(ख) प्रजनन दर प्रजनन दर का अर्थ है:
बच्चे पैदा कर सकने की आयु (जो प्रायः 15 से 49 वर्ष मानी जाती है) वाली प्रति 1000 स्त्रियों के पीछे जीवित जन्मे बच्चों की संख्या।
(1) अशोधित दर-यह सम्पूर्ण जनसंख्या के लिए मोटे तौर पर एक स्थूल औसत दर होती है।

(2) सकल प्रजनन दर-ऐसे जीवित जन्म लेने वाले बच्चों की कुल संख्या जिन्हें कोई एक स्त्री जन्म देती यदि वह बच्चे पैदा करने की आयु वर्ग में पूर्णतः जीवित रहती और इस आयु वर्ग के प्रत्येक हिस्से में औसत उतने ही बच्चे पैदा करती जितने कि उस क्षेत्र में आयु विशेष की प्रजनन दरों के अनुसार होने चाहिये। इसे इस प्रकार से भी कहा जा सकता है कि सकल प्रजनन दर - 'स्त्रियों के एक विशेष वर्ग के द्वारा उनकी प्रजनन आयु की अवधि के अन्त तक पैदा किये गये बच्चों की औसत संख्या के बराबर होती है।' प्रजनन आयु की अवधि का अनुमान एक निश्चित आयु में पाई जाने वाली आयु विशेष की दरों के आधार पर लगाया जाता है। दूसरा तरीका यह है कि सकल प्रजनन दर स्त्रियों के एक विशेष वर्ग के द्वारा उसकी प्रजनन आयु की अवधि के अन्त तक पैदा किये गये बच्चों की औसत संख्या के बराबर होती है। 

प्रश्न 5. 
निम्नलिखित पर टिप्पणियाँ लिखिये
(क) स्त्री-पुरुष अनुपात 
(ख) आयु संरचना। 
उत्तर:
(क) स्त्री-पुरुष अनुपात अर्थ-किसी क्षेत्र-विशेष में एक निश्चित अवधि के दौरान प्रति 1000 पुरुषों पर स्त्रियों की औसत संख्या को स्त्री-पुरुष अनुपात कहा जाता है। प्रायः विश्व के सभी देशों में स्त्रियों का अनुपात पुरुषों की अपेक्षा अधिक होता है। इस तथ्य के बावजूद कि प्राकृतिक दृष्टि से मादा बच्चों की अपेक्षा नर बच्चे अधिक जन्म लेते हैं, जो कि प्रायः प्राकृतिक तौर पर 1000 नर बच्चों पर 943 से 952 मादा बच्चे पैदा होते हैं। स्त्री-पुरुष अनुपात के स्त्रियों के पक्ष में रहने के दो कारण हैं(1) शैशवावस्था में बालिका शिशुओं में बालक शिशुओं की अपेक्षा रोग-प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है।

(2) अधिकांश समाजों में स्त्रियाँ पुरुषों की अपेक्षा अधिक समय तक जीवित रहती हैं। ये दोनों ही कारण स्त्री-पुरुष अनुपात को गहराई से प्रभावित करते हैं।
प्रायः यह देखा जाता है कि 1000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या 1050 तक होती है परन्तु जापान, दक्षिण कोरिया और विशेष रूप से भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात घटता जा रहा है। इसका कारण बेटों को बेटियों की अपेक्षा अधिक महत्त्व देना रहा है।

(ख) आयु संरचना अर्थ-कुल जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में व्यक्तियों का अनुपात ही आयु संरचना कहलाती है। आयु संरचना विकास के स्तरों और औसत आयु संभांविता के स्तरों में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार बदलती रहती है। प्रारम्भ में निम्न स्तर की चिकित्सा सुविधाओं, रोग के प्रकोप तथा अन्य कई कारणों से जीवन प्रत्याशा कम थी। इसके अतिरिक्त शिशुओं तथा प्रसूताओं की मृत्यु दर उच्च होने के कारण आयु संरचना प्रभावित होती है। विकास के अनुसार आयु संरचना बदलती रहती है। विकास के साथ-साथ जीवन स्तर में सुधार आता है। इसके कारण आयु संभाविता बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप आयु संरचना भी बदल जाती है। छोटी आयु के हिस्से में अपेक्षाकृत छोटे हिस्से और बड़ी आयु के हिस्सों में बड़े हिस्से पाये जाते हैं। इस स्थिति को जनसंख्या का बूढ़ा होना भी कहा जाता है।

प्रश्न 6. 
भारत के कौन-कौन से राज्य जनसंख्या संवृद्धि प्रतिस्थापन स्तरों को प्राप्त कर चुके हैं 
अथवा 
प्राप्ति के बहुत नजदीक हैं ? कौन-से राज्यों में अब भी जनसंख्या संवृद्धि की दरें बहुत ऊँची हैं ? आपकी राय में इन क्षेत्रीय अन्तरों के क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अन्तर शून्य होता है तब हम यह कह सकते हैं कि जनसंख्या 'स्थिर' हो गई है अथवा 'प्रतिस्थापन स्तर' पर पहुँच गई है। अर्थात् प्रतिस्थापन दर से तात्पर्य उस संवृद्धि की दर से है जो पुरानी पीढ़ी के लोगों के मरने के उपरान्त उस स्थान की पूर्ति के लिए नई पीढ़ी के लिए आवश्यक होती है। जनसंख्या वृद्धि के प्रतिस्थापन स्तर को प्राप्त करने वाले राज्य-तमिलनाडु, केरल, गोआ, नागालैण्ड, मणिपुर, त्रिपुरा, जम्मू और कश्मीर तथा पंजाब हैं। जनसंख्या वृद्धि के निकटतम प्रतिस्थापन दर को प्राप्त करने वाले राज्य-उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम तथा पश्चिम बंगाल हैं। तीव्र जनसंख्या वृद्धि वाले राज्य-उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश हैं। विभिन्न राज्यों के प्रतिस्थापन स्तर में क्षेत्रीय अन्तर के निम्न कारण हो सकते हैं

1. साक्षरता प्रतिशत में विभिन्नता।

2. विभिन्न प्रदेशों की सामाजिक परिस्थितियाँ भिन्न-भिन्न हैं। उदाहरण-आतंकवाद, युद्ध जैसी स्थिति तथा उपद्रव की स्थिति जम्मू एवं कश्मीर तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों में विद्यमान है।

3. विभिन्न राज्यों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में भिन्नताएँ हैं। 

  • गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक उत्तर प्रदेश, बिहार तथा उड़ीसा में है।
  • सामाजिक-सांस्कृतिक संस्कार-लोगों का ऐसा धार्मिक विश्वास है कि अधिक बच्चों का मतलब आपके उपार्जन के लिए अधिक हाथ हैं।

प्रश्न 7. 
भारत में जनसंख्या के आकार और संवृद्धि पर एक लेख लिखिए।
उत्तर:
विश्व में चीन के बाद भारत जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा देश है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ है। जैसा कि सारणी से ज्ञात होता है कि भारत में जनसंख्या संवृद्धि दर बहुत उच्च नहीं रही है। सन् 1901-1951 के मध्य औसत वार्षिक संवृद्धि दर 1.33 प्रतिशत से अधिक नहीं हुई, जिसे एक साधारण संवृद्धि दर कहा जा सकता है। देश में सन् 1911 से 1921 के बीच जनसंख्या संवृद्धि की दर नकारात्मक अर्थात् ऋणात्मक रूप से -0.03 प्रतिशत रही। इसका मूल कारण 1918-19 में इंफ्लूएंजा नामक महामारी का तांडव रहा था, जिसमें 1.25 करोड़ व्यक्ति अकाल मौत के शिकार हुए, जो कि देश की कुल जनसंख्या के 5 प्रतिशत थे।


1931 से पहले, जन्म दरें और मृत्यु दरें दोनों ही ऊंची रही हैं। इस संक्रमण के बाद मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आई है, जबकि जन्म दर थोड़ी सी गिरी। ऐसा बीमारियों के उपचारों में किये गये सुधारों आदि से संभव हुआ। ब्रिटिश शासन काल से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति के दौरान देश की जनसंख्या में काफी वृद्धि हुई, जो कि 1961-1981 के दौरान 2.2 प्रतिशत तक जा पहुँची। इसके बाद देश में जनसंख्या संवृद्धि दर में गिरावट तो आई है फिर भी यह विकासशील देशों में सबसे उच्च स्तर पर बनी हुई है। निम्न तालिका में स्थूल जन्म दर और मृत्यु दर का तुलनात्मक रूप से उल्लेख किया जा रहा है भारत की जनसंख्या और 20वीं और 21वीं शताब्दी में इसकी संवृद्धि

वर्ष

कुल जनसंख्या(लाखों में)

औसत वार्षिक संवृद्धि दर (%)

दशकीय संवृद्धि दर (%)

1901

1911

1921

1931

1941

1951

1961

1971

1981

1991

2001

2011

238

252

251

279

319

361

439

548

683

846

1028

1210

-

0.56

-0.03

1.04

1.33

1.25

1.96

2.22

2.20

2.14

1.95

1.63

-

5.8

-0.3

11.0

14.2

13.3

21.6

24.8

24.7

23.9

21.5

17.7


स्रोत-राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग, भारत सरकार

प्रश्न 8.
"मृत्यु दर में भारत में गिरावट आई है परन्तु जन्म दर में उतनी तेजी से गिरावट नहीं है।" कैसे?
उत्तर-यदि भारत में जनगणना आँकड़ों को देखा जाये तो स्पष्ट होता है कि यहाँ पर मृत्यु दर में गिरावट आई है परन्तु जन्म दर में उतनी तेजी से गिरावट नहीं आ पाई है।
मृत्यु दर में तीव्र गिरावट के कारण-1931 के बाद से मृत्यु दर में गिरावट आने का प्रमुख कारण यह था कि अकालों और महामारियों पर नियंत्रण बढ़ गया। इनमें महामारियों में रोकथाम अधिक महत्त्वपूर्ण हुई। ऐसी बीमारियों (ज्वर, प्लेग, हैजा, चेचक) के उपचार में किए गए सुधारों तथा बड़े पैमाने पर चलाये गए टीकाकरण कार्यक्रमों और स्वच्छता अभियानों ने बहुत सहायता की। जिससे मृत्यु दर में तीव्र गिरावट आयी।

जन्म दर में तीन गिरावट नहीं आना-इस काल में जन्म दर में इतनी तेजी से गिरावट नहीं आयी। इसका कारण यह है कि जन्म दर एक ऐसी सामाजिक-सांस्कृतिक प्रघटना है जिसमें परिवर्तन अपेक्षाकृत धीमी गति से आते हैं। सामान्य रूप से समृद्धि का बढ़ता हुआ स्तर जन्म दर को मजबूती से नीचे की ओर खींचता है। जब एक बार शिशु मृत्यु दर में गिरावट आ जाती है तथा शिक्षा एवं जागरूकता के स्तरों में भी कुल मिलाकर के वृद्धि हो जाती है, तो इसके परिणामस्वरूप परिवार का आकार छोटा होने लग जाता है। भारत में राज्यों में प्रजनन दरों में भिन्नतायें-भारत में विभिन्न राज्यों में प्रजनन दरों में भिन्नताएँ पाई जाती हैं

  1. आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्य कुल प्रजनन दरों को 1.7 तक नीचे लाने में सफल रहे हैं।
  2. केरल में कुल प्रजनन दर वास्तव में प्रतिस्थापन दर के नीचे है। इसका अर्थ है कि भविष्य में जनसंख्या में गिरावट आयेगी।.
  3. हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कुल प्रजनन दर काफी कम है।
  4. देश के कुछ राज्य विशेष रूप से बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश ऐसे राज्य हैं जहाँ प्रजनन दर 3 या इसके उच्च स्तर पर है।

निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि भारत में विभिन्न राज्यों में मृत्यु दर और जन्म दर का औसत अलग-अलग रहा है। कुछ राज्यों में जन्म दर औसत से अधिक है जबकि कुछ राज्य जन्म दर को नियंत्रित करने में काफी सफल रहे हैं। मृत्यु दर को भी नियंत्रित करने में काफी सफलता मिली है।

प्रश्न 9. 
थॉमस रोबर्ट माल्थस के विषय में संक्षिप्त में लिखिए। इन्होंने अपने निबन्ध 'ऐस्से ऑन पॉपुलेशन' में जनसंख्या विषयक सिद्धान्त में क्या कथन दिया है?
उत्तर:
थॉमस रोबर्ट माल्थस का जन्म 1766 में और मृत्यु 1834 में हुई थी। माल्थस ने कैम्ब्रिज में शिक्षा प्राप्त की थी और ईसाई पादरी बनने का प्रशिक्षण लिया था। बाद में उन्हें लंदन के पास हैलीबरी में स्थित ईस्ट इंडिया कम्पनी कॉलेज में इतिहास और राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। ईस्ट इंडिया कम्पनी का यह कॉलेज उस समय की प्रशासनिक भारतीय सेवा के भावी अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण केन्द्र था। इन्होंने अपने निबन्ध 'ऐस्से ऑन पॉपुलेशन' में जनसंख्या विषयक सिद्धान्त में लिखा था "जनसंख्या की शक्ति पृथ्वी द्वारा मनुष्य के भरण-पोषण के लिए उत्पादन करने की उसकी शक्ति से इतनी अधिक होती है कि मानव प्रजाति को किसी-न-किसी रूप में असामयिक मृत्यु का सामना करना ही होगा। मनुष्यों के दुर्गुण ही जनसंख्या को घटाने के सक्रिय और सक्षम कारक होते हैं । 

वे विनाश की विशाल सेना में अग्रणी होते हैं और अकसर यह भयंकर कार्य स्वयं ही संपन्न कर देते हैं। लेकिन यदि वे अपने इस विनाशकारी संग्राम में असफल हो जाते हैं तो फिर बीमारियाँ, महामारियाँ, घातक रोग और प्लेग आदि भयंकर रूप में उनका स्थान ले लेते हैं और हजारों-लाखों लोगों का सफाया कर देते हैं। फिर भी यदि उन्हें अपनी विनाशलीला में पूरी सफलता नहीं मिलती तो व्यापक विनाशकारी अकाल उनकी सहायता के लिए आ धमकता है और अपने घातक वज्रपात से चोट पहुँचाकर बस उतने ही लोगों को जिंदा छोड़ता है जिनके लिए दुनिया में खाद्य सामग्री पर्याप्त मात्रा में होती है।"

प्रश्न 10. 
क्या बदलती हुई आयु संरचना भारत को 'जनसांख्यिकी लाभांश' प्रदान कर रही है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत की आयु संरचना में जनसांख्यिकी लाभांश इस तथ्य के कारण प्राप्त हो सकता है कि भारत वर्तमान में विश्व के सर्वाधिक युवा देशों में से एक है। अधिकांश भारतीय युवावस्था में हैं और यहाँ की आयु का औसत भी अधिकांश अन्य देशों की तुलना में कम है। सन् 2001 में देश की कुल जनसंख्या का 34 प्रतिशत भाग 15 वर्ष से कम आयु से नीचे था। 15-59 आयु वर्ग का हिस्सा 59 प्रतिशत तथा 60 से अधिक आयु वर्ग का भाग 7 प्रतिशत था। इस प्रकार 2001 में भारत में कार्यशील जनसंख्या का 59 प्रतिशत भाग था जो 2011 में बढ़कर 63 प्रतिशत हो गया।

जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति-'जनसांख्यिकीय लाभांश' जनसंख्या में काम न करने वाले पराश्रित लोगों की अपेक्षा कार्यशील जनसंख्या में वृद्धि के परिणामस्वरूप प्राप्त होता है। कार्यशील जनसंख्या प्राय: 15 से 64 वर्ष तक मानी जाती है। कार्यशील जनसंख्या एक ओर अपना भरण-पोषण करती है तो दूसरी ओर अपने आयु समूह से बाहर अर्थात् बच्चों और वृद्धों का भरण-पोषण करती है। क्योंकि इन वर्गों के लोग कोई काम नहीं करते, इसलिए वे पराश्रित जनसंख्या के अन्तर्गत आते हैं। इस प्रकार भारत की बदलती हुई आयु संरचना जनसांख्यिकीय लाभांश प्रदान करने की स्थिति में है।

जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति को प्रभावित करने वाले अन्य तत्व-इस जनसंख्या के लाभांश की स्थिति को वास्तविक संवृद्धि में तभी परिवर्तित किया जा सकता है जब कार्यशील आयु वर्ग में शिक्षा तथा रोजगार की इसी अनुपात में वृद्धि हो क्योंकि यदि श्रमिक बल में शामिल लोगों में शिक्षा नहीं होगी तो उनकी उत्पादकता नीची होगी। साथ में यदि इन्हें रोजगार प्राप्त नहीं होगा तो ये पराश्रितों की श्रेणी में आ जायेंगे। वास्तविकता तो यही है कि जब तक योजनाबद्ध विकास के जरिये इस आयु वर्ग का ठीक से उपयोग नहीं किया जाता, तब तक लाभांश मिल पाने के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।

यद्यपि भारत के सामने जनसांख्यिकी लाभांश का अवसर द्वार खुला हुआ है। पराश्रितता अनुपात पर जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियों का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है तथापि 1987 से 1994 के बीच शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में 2.4 प्रतिशत की गिरावट आई जो कि सन् 1994 से 2004 के बीच ग्रामीण लोगों में 0.7 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 0.3 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है। आज भारत के सामने अवसरों का जो जनसांख्यिकी द्वार खुला है उसका लाभ उठाने के लिए रणनीतियाँ तैयार हो चुकी हैं। परन्तु हाल के अनुभव बताते हैं कि इन नीतियों को क्रियान्वित कर पाना आसान नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो हम सम्भावित लाभों को गँवा बैठेंगे।

प्रश्न 11. 
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के महत्त्वपूर्ण लक्ष्य लिखिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के महत्त्वपूर्ण लक्ष्य निम्नलिखित हैं:

  1. नीति में जनस्वास्थ्य व्यय को समयबद्ध ढंग से जी.डी.पी. के 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। वर्तमान में यह जी.डी.पी. का 1.04 प्रतिशत है। 
  2. जन्म के समय जीवन प्रत्याशा को 67.5 वर्ष से बढ़ाकर वर्ष 2025 तक 70 वर्ष करना।' 
  3. वर्ष 2022 तक प्रमुख वर्गों में रोगों की व्याप्तता तथा इसके रुझान को मापने के लिए विकलांगता समायोजित आयु वर्ष (DALY) सूचकांक की नियमित निगरानी करना। 
  4. वर्ष 2025 तक राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate : TFR) को घटाकर 2.1 पर लाना।
  5. वर्ष 2025 तक पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मृत्यु दर को कम करके 23 करना तथा एम.एम.आर. के वर्तमान स्तर को वर्ष 2020 तक घटाकर 100 करना। 
  6. नवजात शिशु मृत्यु दर को घटाकर 16 करना तथा मृत जन्म लेने वाले बच्चों की दर को वर्ष 2025 तक · घटाकर एक अंक में लाना। 
  7. वर्ष 2020 के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करना जिसे एच.आई.वी./एड्स के लिए 90 : 90 : 90 के लक्ष्य के रूप में परिभाषित किया गया है अर्थात् एच.आई.वी. पीड़ित सभी 90 प्रतिशत लोग अपनी एच.आई.वी. स्थिति के बारे में जानते हैं। सभी 90 प्रतिशत एच.आई.वी. संक्रमण से पीड़ित लोग स्थायी एंटीरोट्रोवाइरल चिकित्सा प्राप्त करते हैं तथा एंटीरोट्रोवाइरल चिकित्सा प्राप्त करने वाले सभी 90 प्रतिशत लोगों में वायरल रोकथाम होगा। 
  8. क्षयरोग के नए स्पुटम पॉजिटिव रोगियों में 85 प्रतिशत से अधिक की इलाजदर को प्राप्त करना और उसे बनाए रखना तथा नए मामलों में कमी लाना ताकि वर्ष 2025 तक इसे समाप्त किया जा सके।
  9. वर्ष 2025 तक दृष्टिहीनता की व्याप्तता को घटाकर 0.25/1000 करना तथा रोगियों की संख्या को वर्तमान स्तर से घटाकर एक-तिहाई करना।
  10. हृदयवाहिका रोग, कैंसर मधुमेह या सांस के पुराने रोगों से होने वाली अकाल मृत्यु को वर्ष 2025 तक घटाकर 25 प्रतिशत करना। 
  11. 2025 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग मौजूदा स्तरों से 50 प्रतिशत बढ़ाएँ। 
  12. प्रसवपूर्व देखभाल कवरेज 90 प्रतिशत से ऊपर और जन्म के समय कुशल उपस्थिति 2025 तक 90 प्रतिशत से अधिक हो। 
  13. 2025 तक एक वर्ष की आयु के नवजात शिशु 90 प्रतिशत से अधिक पूरी तरह से प्रतिरक्षित हो। 
  14. 2025 तक राष्ट्रीय और उप राष्ट्रीय स्तर पर 90 प्रतिशत से ऊपर परिवार नियोजन की आवश्यकता को पूरा करना।
  15.  घरेलू स्तर पर ज्ञात उच्च रक्तचाप और मधुमेह से ग्रस्त लोगों को 2025 तक 80 प्रतिशत नियंत्रित रोग की स्थिति में लाना। 
  16.  वर्तमान तंबाकू के उपयोग को 2020 तक 15 प्रतिशत और 2025 तक 30 प्रतिशत तक घटाना। 
  17. 2025 तक पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्टंट करने के प्रचलन में 40 प्रतिशत की कमी लाना। 
  18. 2020 तक सभी के लिए सुरक्षित पानी और स्वच्छता तक पहँच की सुविधा उपलब्ध करवाना। 
  19. 2020 तक 334 प्रति लाख कृषि श्रमिकों की व्यवसाय संबंधी चोटों को वर्तमान स्तर से आधा करना। 
  20. 2020 तक राज्य के स्वास्थ्य व्यय को राज्य बजट में 28 प्रतिशत तक बढ़ाना। 
  21. 2025 तक भयावह स्वास्थ्य व्यय का सामना करने वाले परिवारों के अनुपात में वर्तमान स्तरों से 25 प्रतिशत तक कमी लाना। 
  22. 2020 तक उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (IPHS) के मानकों के अनुसार पैरामेडिक्स और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  23. 2025 तक उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेवकों की आई.पी.एच.एस. मानदंड के अनुसार उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  24. 2025 तक उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में मानदंडों के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक देखभाल सुविधा स्थापित उपलब्ध करना। 2020 तक स्वास्थ्य प्रणाली के घटकों पर सूचना के जिला-स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस को सुनिश्चित करना।

प्रश्न 12. 
भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट आने के लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी रहे हैं?
उत्तर:
भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट आने के लिए जनसांख्यिकीविदों और समाजशास्त्रियों के द्वारा कई कारण उत्तरदायी बताये गये हैं:

  1. स्वास्थ्य सम्बन्धी कारक: यह कारक पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों को अधिक प्रभावित करता है। क्योंकि स्त्रियों को ही गर्भधारण करना और बच्चों को पैदा करना होता है।
  2. मृत्यु की जोखिम: चूँकि स्त्रियों को ही बच्चे पैदा करते समय मृत्यु की जोखिम को उठाना पड़ता है। मातृ मृत्यु दर के कारण स्त्री-पुरुष अनुपात में विषमता उत्पन्न होती है।
  3. शैशवावस्था में बच्चियों की देखभाल की कमी: भारत में प्रायः यह देखा जाता है कि शैशवावस्था में बच्चियों की उचित तरीके से देखभाल नहीं हो पाती है। परिणामस्वरूप उचित देखरेख न हो पाने के कारण बच्चियों की मत्यु हो जाती है।
  4. लिंग परीक्षण: लिंग विशेष में गर्भपात करवाने के कारण बच्चियों की हत्या कर दी जाती है, जो कि भारत में एक गम्भीर सामाजिक समस्या है।
  5. वैज्ञानिक तकनीक: आज विज्ञान के द्वारा सोनोग्राफी जैसी नई तकनीक को विकसित कर दिया गया है जिसके द्वारा आसानी से यह पता चल जाता है कि माँ के गर्भ में लड़का है अथवा लड़की। इसका विकास इस उद्देश्य से किया गया था कि माँ के गर्भ में शिशु किसी विकार से पीड़ित ना हो, परन्तु इसके द्वारा गर्भ में भ्रूण का पता लगा लिया जाता है और लड़की होने की स्थिति में उसे नष्ट कर दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप देश में स्त्रीपुरुष अनुपात काफी विषम बनता जा रहा है।
  6. सामाजिक कुरीतियाँ: दहेज जैसी कुरीतियों के कारण भी लोग लिंग परीक्षण का सहारा लेकर माता के गर्भस्थ शिशु के लड़की होने की स्थिति में नष्ट करवा देते हैं। इसके कारण भी स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट आती जा रही है। निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में काफी गिरावट आ रही है जो कि देश के लिए चिन्ता का विषय है।

प्रश्न 13. 
अकाल भी बढ़ती हुई मृत्यु दर का एक प्रमुख एवं पुनरावर्तक स्रोत था। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अकाल भी बढ़ती हुई मृत्यु दर के एक प्रमुख एवं पुनरावर्तक स्रोत थे। एक जमाना था जब अकाल व्यापक रूप से और बार-बार पड़ते थे। उन दिनों अकाल पड़ने के कई कारण होते थे जिनमें से एक यह था कि जिन इलाकों में खेती वर्षा पर निर्भर रहती थी वहाँ वर्षा की कमी के कारण खेती की उपज कम होती थी जिससे लोग घोर गरीबी और कुपोषण की हालत में जीवन बिताने को मजबूर हो जाते थे। इसके अलावा, परिवहन और संचार के साधनों की समुचित व्यवस्था न होने के कारण और राज्य की ओर से इस दिशा में पर्याप्त प्रयत्न न किए जाने के कारण भी अकाल पड़ते थे। किंतु, जैसा कि अमर्त्य सेन एवं अनेक विद्वानों ने दर्शाया है कि अकाल अनाज के उत्पादन में गिरावट आने के कारण ही नहीं पड़े बल्कि 'हकदारी की पूर्ति का अभाव' अथवा भोजन खरीदने या/और किसी तरह से प्राप्त करने की लोगों की अक्षमता के कारण भी अकाल पड़ते रहे हैं।

लेकिन अब भारतीय कृषि की उत्पादकता में (विशेष रूप से सिंचाई के विस्तार के कारण) पर्याप्त वृद्धि हो जाने, संचार के साधनों में सुधार हो जाने और सरकार द्वारा अधिक तेजी से राहत और निरोधक उपाय किए जाने से अकाल के कारण होने वाली मौतों की संख्या में बहुत तेजी से कमी आई है। किंतु आज भी देश के कुछ पिछड़े क्षेत्रों से भुखमरी के कारण लोगों के मरने के समाचार मिलते रहते हैं। सरकार ने अभी कुछ समय पहले ही ग्रामीण इलाकों में भूख और भुखमरी की समस्या के समाधान के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) नामक एक कानून बनाया है।

प्रश्न 14. 
भारत में ग्रामीण व नगरीय जनसंख्या की स्थिति क्या है? देश में बढ़ते हुए नगरीकरण के लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी रहे हैं?
उत्तर:
ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या की स्थिति-सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल जनसंख्या के 68.8 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्र में निवास करते हैं जबकि 31.2 प्रतिशत व्यक्ति शहरी क्षेत्र में निवास करते हैं जो कि 20वीं शताब्दी के आरम्भ में 11 प्रतिशत था। भारत में नगरीकरण के लिए उत्तरदायी कारण भारत में नगरीकरण के लिए निम्न कारण उत्तरदायी रहे हैं:
(1) रोजगार के अवसर: ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं को काम के पर्याप्त अवसर प्राप्त नहीं हो पाते हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त अवसर होते हैं। परिणामस्वरूप ग्रामीण युवा गाँवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे।

(2) संसाधनों की कमी: गाँवों में तालाब, वन प्रदेश तथा गोचर भूमि जैसी साझा सम्पत्ति के संसाधनों में तेजी से कमी आ रही है। तालाब और पोखर सूख गये हैं, वनों को काट डाला गया है। ईंधन, चारा तथा अन्य अनुपूरक खाद्य वस्तुयें लोगों को मुफ्त में मिला करती थीं परन्तु आज ऐसा सम्भव नहीं है। आज इन साझा संसाधनों के द्वारा गरीब व्यक्तियों का गुजारा हो पाना मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में गाँवों के लोगों का शहरों की ओर प्रवसन होता जा रहा है।

(3) सामाजिक कारण: कुछ लोग सामाजिक कारणों से शहरी जीवन को पसन्द करते हैं। जैसे कि शहरों में गुमनामी के जीवन को जिया जा सकता है। इसके अलावा शहरों में अपरिचितों के साथ सम्पर्क होता रहता है जो कि विभिन्न कारणों से लाभकारी हो सकता है। अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लोगों को जो कि पीड़ित समूह के अन्तर्गत आते हैं, शहरी जीवन उन अपमानजनक स्थितियों से बचा सकता है जिसे वे गाँवों में भुगतते हैं क्योंकि शहरों में उनकी जाति को कोई भी नहीं जानता है। गांव के लोग शहरों में आकर के उन निम्न कामों को कर लेते हैं जिन्हें गाँवों में वे नहीं कर सकते हैं। शहरों में इन लोगों को बदनामी का किसी भी प्रकार का डर नहीं होता है। इन कारणों की वजह से भी शहर गाँवों के लिए आकर्षण के केन्द्र बनते जा रहे हैं।

(4) शहरों में सुविधायें: कई बार विभिन्न सुविधाओं जैसे-शिक्षा, धन की सुरक्षा, यातायात और संचार सुविधाओं आदि के कारण भी लोग गाँवों से शहरों की ओर पलायन करते हैं।
निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि आज विभिन्न कारणों से लोग गाँवों को छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। परिणामस्वरूप ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत घटता जा रहा है और नगरीकरण की प्रवृत्ति के कारण शहरों की जनसंख्या का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है।

प्रश्न 15. 
भारत की जनसंख्या नीति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भूमिका-किसी भी राष्ट्र के लिए जनसंख्या की गतिशीलता एक महत्त्वपूर्ण विषय होती है, जो कि राष्ट्र के विकास की सम्भावनाओं को यहाँ तक कि स्वास्थ्य और कल्याण को भी गहराई से प्रभावित करती है। विकासशील देशों को इस सम्बन्ध में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस बात में कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिये कि भारत पिछले पचास वर्षों से भी अधिक समय से अपनी जनसंख्या नीति का पालन करता आ रहा है। सम्भवतः भारत विश्व का प्रथम देश रहा है जिसके द्वारा सन् 1952 में अपनी जनसंख्या नीति की घोषणा की गई थी।

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के उद्देश्य-भारत की राष्ट्रीय जनसंख्या नीति ने परिवार कल्याण कार्यक्रम के रूप में ठोस रूप धारण किया है। इसके निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण उद्देश्य रहे हैं

  1. जनसंख्या संवृद्धि की दर और स्वरूप को प्रभावित करके सामाजिक दृष्टि से वांछनीय दिशा की ओर ले जाने का प्रयत्न करना।
  2. प्रारम्भिक दिनों में इस कार्यक्रम का महत्त्वपूर्ण उद्देश्य था-जन्म नियंत्रण के विभिन्न उपायों के माध्यम से जनसंख्या संवृद्धि की दर को धीमा करना।
  3. जन-स्वास्थ्य के मानक स्तरों में सुधार करना।
  4. जनसंख्या तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी मुद्दों के बारे में आम लोगों में जनचेतना पैदा करना जिससे जन्म दर को नियंत्रित करने में सफलता मिल सके।
  5. जनसंख्या शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना और 14 वर्ष से कम आयु के बालक और बालिकाओं को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराना। 
  6. विवाह योग्य आयु को बढ़ाना।
  7. प्रजनन दर को कम करने के लिए सम्बन्धित उपायों की सूचना, परामर्श और सेवाओं को सभी दंपतियों को प्रदान करना।
  8. अशोधित जन्म दर, कुल प्रजनन दर, अशोधित मृत्यु दर के साथ-साथ मातृ मृत्यु दर को विकास के धारणीय स्तर तक लाना।
  9. एड्स तथा अन्य संक्रामक बीमारियों को नियंत्रित करना। निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय जनसंख्या नीति जनसंख्या नियंत्रण तथा देश की खुशहाली की दिशा में एक मील का पत्थर है।

प्रश्न 16. 
जनसंख्या में आयु संरचना का क्या अर्थ है? आर्थिक विकास और संवृद्धि के लिए उसकी क्या प्रासंगिकता है?
उत्तर:
आयु संरचना का अर्थ-जनसंख्या में आयु संरचना है:
1. 0 से 14 वर्ष का आयु समूह 
2. 15 से 59 वर्ष का आयु समूह 
3. 60 वर्ष और इससे अधिक।

  1. प्रथम वर्ग में बच्चे (आश्रित जनसंख्या) आती है। 
  2. दूसरे वर्ग में युवां और प्रौढ़ (कार्यशील जनसंख्या) आती है। 
  3. तीसरे वर्ग में (वृद्ध) आश्रित जनसंख्या आती है।

भारत की जनसंख्या की आयु संरचना-1961-2026

वर्ष

आयु वर्ग (प्रतिशत के पूर्ण रूप में)

जोड़

0-14 वर्ष

15-59 वर्ष

60 वर्ष से अधिक

1961

1971

1981

1991

2001

2011

2026

41

42

40

38

34

29

23

53

53

54

56

59

63

64

6

5

6

7

7

8

12

100

100

100

100

100

100

100


उपर्युक्त सारणी से स्पष्ट है कि 15 वर्ष से नीचे के समूह की कुल जनसंख्या में (1961 में 41 प्रतिशत, 2011 में 29 प्रतिशत तथा 2026 में 23 प्रतिशत) गिरावट आई है। इसका अर्थ यह है कि भारत में जन्म दर में धीरे-धीरे कमी आ रही है। कुल जनसंख्या में 15-59 आयु के कार्यशील वर्ग का भाग बढ़ रहा है जो कि 1961 में 53 प्रतिशत से 2011 में 63 प्रतिशत तथा आगे 2026 में 64 प्रतिशत तक हो सकता है। इससे यह अर्थ निकलता है कि यह आयु समूह (अर्जक समूह) वृद्धि कर रहा है जो कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए एक सकारात्मक संकेत है। अब तीसरे आयु समूह को देखा जाये तो इसमें 1961 के 6 प्रतिशत, 2011 में 8 प्रतिशत तथा 2026 में 12 प्रतिशत होने की उम्मीद है। इसका कारण जीवन प्रत्याशा में वृद्धि का होना है।

आर्थिक समृद्धि और विकास में आयु संरचना की प्रासंगिकता: 

  1. 60 वर्ष से ऊपर के लोगों की जनसंख्या में वृद्धि से यह संकेत निकलता है कि भारत में जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है, जो चिकित्सा विज्ञान, जन स्वास्थ्य उपायों तथा पोषण से जुड़ी है। यह संकेत भारत में संवृद्धि तथा आर्थिक विकास को सूचित करते हैं।
  2. 0.14 आयु वर्ग की जनसंख्या में गिरावट से सिद्ध होता है कि राष्ट्रीय जनसंख्या नीति उचित नीति से लागू की गई है और भारत के लोग जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन की आवश्यकता को समझने लगे हैं।
  3. आयु संरचना से यह भी पता चलता है कि अर्जक जनसंख्या में वृद्धि हो रही है जो कि यह संकेत करता है कि भारतीय जनसंख्या में प्रौढ़ों (अर्जकों) की संख्या बढ़ रही है। निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि देश के आर्थिक विकास और समृद्धि में आयु संरचना का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

प्रश्न 17. 
स्वातंत्र्योत्तर काल में नगरीकरण की रफ्तार में तेजी आई है। विस्तारपूर्वक उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
रेडियो, टेलीविजन, समाचारपत्र जैसे जनसंपर्क एवं जनसंचार के साधन अब ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के समक्ष नगरीय जीवन शैली और उपभोग के स्वरूपों की तस्वीरें पेश कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, दूरदराज के गाँवों में रहने वाले लोग नगरीय तड़क-भड़क और सुख-सुविधाओं से सुपरिचित हो जाते हैं उनमें भी वैसा ही उपभोगपूर्ण जीवन जीने की लालसा उत्पन्न हो जाती है। नगरीय दृष्टिकोण से विचार किया जाए तो नगरीकरण में हो रही तेज संवृद्धि यह दर्शाती है कि कस्बे या शहर ग्रामीण जनता को चुंबक की तरह अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। जिन लोगों को ग्रामीण इलाकों में काम (पर्याप्त काम) नहीं मिलता वे काम की तलाश में शहर चले जाते हैं। गाँवों से नगरों की ओर प्रवसन की गति में इसलिए भी तेजी आई है क्योंकि गाँवों में तालाबों, वन प्रदेशों और गोचर भूमियों जैसे साझी संपत्ति के संसाधनों में बराबर कमी आती जा रही है। पहले साझे संसाधनों से गरीब लोग गाँवों में गुजारा कर लिया करते थे हालाँकि, उनके पास जमीन बहुत कम या बिल्कुल नहीं हुआ करती थी। अब ये संसाधन निजी संपत्ति के रूप में बदल गए हैं अथवा खत्म हो गए हैं। नकद आमदनी कमाने के अवसर गाँवों में कम हो गए हैं।

कभी-कभी लोग शहरी जीवन को कुछ सामाजिक कारणों से भी पसंद करते हैं जैसे कि शहरों में गुमनामी की जिंदगी जी जा सकती है। इसके अलावा, यह तथ्य कि नगरीय जीवन में अपरिचितों से संपर्क होता रहता है जो कुछ भिन्न कारणों से लाभकारी साबित हो सकता है। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों जैसे सामाजिक रूप से पीड़ित समूहों को शहरी रहन-सहन कुछ हद तक रोजमर्रा की उस अपमानजनक स्थिति से बचाता है जो उन्हें गाँवों में भुगतनी पड़ती है जहाँ हर कोई उनकी जाति से उन्हें पहचानता है। शहरी जीवन की गुमनामी के कारण सामाजिक दृष्टि से प्रभुत्वशाली ग्रामीण समूहों के अपेक्षाकृत गरीब लोग शहर में जाकर कोई भी नीचा समझा जाने वाले काम करने से नहीं हिचकिचाते जिसे वे गाँव में रहते हुए बदनामी के डर से नहीं कर सकते थे। इन सभी कारणों से शहर ग्रामीणों के लिए आकर्षक गंतव्य बन गए हैं। दिन-पर-दिन बढ़ते जा रहे शहर जनसंख्या के इस प्रवाह के प्रमाण हैं। स्वातंत्र्योत्तर काल में नगरीकरण की तेज रफ्तार से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है।

प्रश्न 18.
भारत में जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारणों की विवेचना कीजिए। 
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि के लिए निम्न कारण उत्तरदायी रहे हैं
1. उच्च जन्म दर और निम्न मृत्यु दर-भारत में जन्म दर उच्च है और उसके मुकाबले मृत्यु दर काफी नीची है। चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण एक ओर तो लोगों की जीवन प्रत्याशा बढ़ी है तो दूसरी ओर मृत्यु दः में भी गिरावट आई है परन्तु जिस गति से जन्म दर नियंत्रित होनी चाहिये उसमें सफलता नहीं मिल पाई है परिणामस्वरूप जनसंख्या वृद्धि हो रही है।

2.  निर्धनता-देश में आज भी लगभग 26 प्रतिशत व्यक्ति निर्धनता रेखा के नीचे अपना जीवनयापन कर रहे हैं। ये लोग वे हैं जिनको भरपेट भोजन भी नहीं मिल पाता है और इन्हें निम्न जीवन स्तर पर अपना गुजारा करना पड़ता है। इन लोगों को निम्न श्रेणी के रोजगार करने पड़ते हैं। ऐसी स्थिति में इन परिवारों में अधिक बच्चों को परिवार की दृष्टि से अच्छा माना जाता है क्योंकि परिवार में अधिक सन्तानें होने की स्थिति में परिवार की आय बढ़ जाती है। इसलिए जाने और अनजाने में अधिक सन्तानों को जन्म दिया जाता है।

3. अशिक्षा-भारत में आज भी कुल जनसंख्या के 27 प्रतिशत व्यक्ति अशिक्षा में अपना जीवन जी रहे हैं। अशिक्षित व्यक्ति अधिक सन्तानोत्पत्ति के दुष्प्रभावों को नहीं जान पाते हैं। ऐसी स्थिति में वे जाने और अनजाने में अधिक सन्तानों को जन्म दे बैठते हैं जिससे जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा मिलता है।

4. सामाजिक कुरीतियाँ और धार्मिक अन्धविश्वास-भारत में सामाजिक और धार्मिक कुरीतियाँ भी जनसंख्या के लिए उत्तरदायी रही हैं। पुत्र प्राप्ति की चाहत में कितने ही माता-पिता अनचाही सन्तानों को जन्म देते हैं। इसी प्रकार से बाल विवाह भी अधिक सन्तानोत्पत्ति को बढ़ावा देते हैं।

5. अन्य कारण-कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था, मनोवैज्ञानिक कारण, गर्म जलवायु इत्यादि अन्य कई कारण हैं जो कि जनसंख्या वृद्धि के उत्तरदायी कारण माने जा सकते हैं।

प्रश्न 19. 
जनसांख्यिकी सम्बन्धी प्रमुख सिद्धान्तों को समझाइये। 
उत्तर:
जनसांख्यिकी सम्बन्धी सिद्धान्त 
1. माल्थस का जनसंख्या सिद्धान्त-माल्थस के अनुसार जनसंख्या उस दर की तुलना में तीव्र गति से बढ़ती है, जिस दर पर मनुष्य के भरण-पोषण के साधन बढ़ सकते हैं। इसीलिए मानव हमेशा गरीबी के स्तर पर जीवन-यापन करने के लिए दण्डित किया जाता है क्योंकि कृषि उत्पादन की वृद्धि हमेशा जनसंख्या वृद्धि से कम ही रहेगी। अत: आर्थिक संवृद्धि के लिए जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करना आवश्यक है। जनसंख्या नियन्त्रण के लिए अधिक उम्र में विवाह तथा आत्मसंयम अथवा ब्रह्मचर्य का पालन करके जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित किया जा सकता है।
आलोचना - माल्थस के सिद्धान्त की निम्न आधारों पर आलोचना की जाती है:

  1. आर्थिक संवृद्धि जनसंख्या वृद्धि से अधिक हो सकती है। 19वीं सदी में जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के बाद भी खाद्यान्नों का उत्पादन और जीवन स्तर उन्नत बने थे।
  2. गरीबी का कारण जनसंख्या वृद्धि नहीं बल्कि आर्थिक संसाधनों का असमान वितरण है।

2. जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धान्त-इस सिद्धान्त के अनुसार जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास के सभी स्तरों से जुड़ी होती है और प्रत्येक समाज विकास से सम्बन्धित जनसंख्या के एक निश्चित स्वरूप का अनुसरण करता है।
जनसंख्या वृद्धि के तीन चरण होते हैं:
(क) अल्पविकसित समाजों में जनसंख्या वृद्धि दर, जन्म दर तथा मृत्यु दर दोनों के अधिक होने के कारण, कम होती है।
(ख) संक्रमणशील अर्थात् विकासशील समाज में जनसंख्या वृद्धि दर ऊँची होती है।
(ग) विकसित समाज में जनसंख्या वृद्धि दर नीची पाई जाती है। अत: संक्रमणकालीन अवस्था में समाज में जनसंख्या विस्फोट की समस्या पायी जाती है क्योंकि जन्म - दर बढ़ी हुई होती है, लेकिन मृत्यु-दर रोग नियन्त्रण आदि के द्वारा नीचे आ जाती है।
 

Prasanna
Last Updated on June 16, 2022, 5:09 p.m.
Published June 10, 2022