RBSE Solutions for Class 7 Science Chapter 2 प्राणियों में पोषण

Rajasthan Board RBSE Class 7 Science Chapter 2 प्राणियों में पोषण

RBSE Solutions for Class 7 Science

RBSE Solutions for Class 7 Science Chapter 2 प्राणियों में पोषण

RBSE Class 7 Science प्राणियों में पोषण Intext Questions and Answers

पाठगत प्रश्न

पृष्ठ – 15

प्रश्न 1.
मानव शरीर के अन्दर भोजन का पाचन कैसे होता है?
उत्तर:
मनुष्य की आहार नाल के सभी भाग. मिलकर भोजन के पाचन का कार्य करते हैं। आमाशय की आंतरिक भित्ति, क्षुद्रान्त्र तथा आहार नाल से सम्बद्ध विभिन्न ग्रन्थियाँ जैसे लार ग्रन्थि, यकृत, अग्नाशय आदि पाचक रस नावित करते हैं। पाचक रस जटिल भोज्य पदार्थों को उनके सरल रूप में बदल देते हैं और भोजन का पाचन शुरू होता है।

पृष्ठ – 16

प्रश्न 2.
क्या सभी दाँत एक जैसे दिखाई देते हैं?
उत्तर:
नहीं। सभी दाँत एक जैसे दिखाई नहीं देते हैं। बनावट एवं कार्यों एवं आकार के आधार पर कुछ दाँत नुकीले, कुछ चौड़े होते हैं, सभी एकसमान नहीं होते हैं।

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प्रश्न 3.
दांतों की बनावट में क्या अन्तर है?
उत्तर:
बनावट के आधार पर कुछ दाँत धारदार होते हैं, कुछ नुकीले होते हैं तथा कुछ खुरदरे होते हैं।

प्रश्न 4.
क्या विभिन्न दांतों के कार्यों में भी अन्तर होता है?
उत्तर:
दाँतों को कार्यों के आधार पर भी वर्गीकृत किया जा सकता है जो कि निम्न हैं –

  1. कुछ दाँत भोजन को काटने के काम आते हैं। जैसेकृतनक दाँत।
  2. कुछ दाँत भोजन को चीरने-फाड़ने के काम आते हैं। जैसे-रखनक दाँत।
  3. कुछ दाँत भोजन को चबाने का कार्य करते हैं। जैसे-अन चवर्णक दाँत।

पृष्ठ – 18

प्रश्न 5.
जीभ के कार्यों की जानकारी दीजिए।
उत्तर:
जीभ भोजन के स्वादों की जानकारी देती है। यह लार को भोजन में मिलानी है। भोजन को चबाने में, दाँतों की सफाई करने में एवं बोलने में भी सहायता करती है।

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पृष्ठ – 19

प्रश्न 6.
दीर्घ रोम की आंत्र में क्या भूमिका है?
उत्तर:
दीर्घ रोम पचे हुए भोजन के अवशोषण हेतु तलाक्षेत्र बढ़ा देते हैं। प्रत्येक दीर्घ रोम में सूक्ष्म रुधिर वाहिकाओं का जाल फैला रहता है। दीर्घ रोम की सतह से पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है तथा वह रुधिर वाहिकाओं में चला जाता है।

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सही विकल्प का चयन कीजिए

Question 1.
मनुष्य की मुखगुहा में कुल कृतनक दाँतों की संख्या होती है …………………
(अ) 2
(ब) 4
(स) 6
(द) 8
उत्तर:
(द) 8

Question 2.
पचे हुए भोजन का मुख्य रूप से अवशोषण जिस अंग में होता है, वह है …………………
(अ) आमाशय
(ब) क्षुद्रान्व
(स) बृहदान्त्र
(द) मुख
उत्तर:
(ब) क्षुद्रान्व

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Question 3.
हमारे शरीर में पाचन की मुख्य क्रिया जिस अंग में पायी जाती है, वह है …………………
(अ) बृहदान्त्र
(ब) मलाशय
(स) आमाशय
(द) ग्रसिका
उत्तर:
(स) आमाशय

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. अमीबा ……………….. की सहायता से भोजन पकड़ता
  2. रूमिनैन्ट्स में क्षुद्रात्र एवं बृहदान्त्र के बीच ……………….. पाई जाती है।
  3. जीभ पर स्थित …………………… द्वारा स्वाद का पता चलता है।

उत्तर:

  1. पादाभ
  2. अंधनाल
  3. स्वाद कलिकाओं।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अन्तर्गहण की क्रिया क्या है?
उत्तर:
भोजन का अन्तर्ग्रहण मुख द्वारा होता है। आहार को शरीर के अन्दर लेने की क्रिया अन्तर्ग्रहण कहलाती है।

प्रश्न 2.
यदि जीभ पर स्वाद कलिकाएं न हों तो कौनसी क्रिया प्रभावित होगी?
उत्तर:
जीभ पर विभिन्न स्वादों को पहचान करने वाली स्वाद कलिकाएँ पायी जाती हैं जो कि जीभ पर विभिन्न स्थानों पर स्थित होती हैं। इन्हीं स्वाद कलिकाओं के द्वारा ही हमें विभिन्न प्रकार के स्वादों जैसे-मीठा, कड़वा, खारा, नमकीन आदि जानकारी होती है। यदि जीभ पर स्वाद कलिकाएं नहीं हों तो हमें भोज्य पदार्थों के विभिन्न प्रकार के स्वादों का पता नहीं चल पायेगा। इनके अभाव में प्रत्येक भोज्य पदार्थ स्वादहीन ही महसूस होगा।

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प्रश्न 3.
रूमिनन्ट्स में यदि अंधनाल नहीं होगी तो क्या होगा?
उत्तर:
घास खाने वाले जन्तु रूमिनन्ट्स या रोमन्थी कहलाते हैं। रूमिनैन्ट्स में क्षदान्त्र एवं बृहदान्त्र के बीच एक थैलीनुमा बड़ी संरचना होती है, जिसे अंधनाल कहते हैं। भोजन में उपस्थित सेलुलोस का पाचन इसी अंधनाल में, सेलुलोस को अपपटित करने वाले जीवाणुओं द्वारा किया जाता है , जो कि मनुष्य की आहार नाल में अनुपस्थित होते हैं। अत: रूमिनन्ट्स में यदि अंधनाल नहीं होगी तो भोजन में उपस्थित सेलूलोस का पाचन नहीं हो पायेगा।

प्रश्न 4.
मनुष्य के विभिन्न प्रकार के दाँतों के नाम एवं कार्य लिखिए।
उत्तर:
मनुष्य में कुल 32 दाँत पाये जाते हैं जिन्हें कार्यों एवं अन्य विशेषताओं के आधार पर चार भागों में वर्गीकृत किया गया है। दाँतों के विभिन्न प्रकारों के नाम एवं कार्य. अन प्रकार है –

  1. कृतनक – इस प्रकार के दाँत भोजन को काटने का कार्य करते हैं। इनकी ऊपरी व निचले जबड़े में संख्या 44 होती है।
  2. रदनक – इस प्रकार के दाँत भोजन को चीरने-फाड़ने का कार्य करते हैं। इनकी संख्या ऊपरी व निचले जबड़े में 2-2 होती है।
  3. अनचवर्णक – इस प्रकार के दाँत भोजन को चबाने का कार्य करते हैं। इनकी संख्या ऊपरी व निचले जबड़े में 4-4 होती है।
  4. चवर्णक – इस प्रकार के दाँत भोजन को और बारीक चबाने का कार्य करते हैं। इनकी संख्या ऊपरी व निचले जबड़े में 6-6 होती है।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आमाशय में भोजन का पाचन कैसे होता है?
उत्तर:
आमाशय मोटी भित्ति वाली एक थैलीनुमा संरचना होती है। यह चपटा एवं ‘U’ आकृति का होता है तथा आहार नाल का सबसे चौड़ा भाग है। यह एक ओर ग्रसिका से खाद्य प्राप्त करता है तथा दूसरी ओर शूद्रान्त्र में खुलता है। आमाशय में भोजन का पाचन-आमाशय में भोजन पहुँचाने के बाद आमाशय की मोटी भित्तियों में पेशीय संकुचन होता है, जिससे भोजन का मसलना शुरू होता है।

आमाशयी ग्रन्थियों में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं जठर रस का स्रावण होता है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल आमाशय के माध्यम को अम्लीय बना देता है तथा भोजन के साथ आए जीवाणुओं को नष्ट कर देता है। जठर रस में कुछ पाचक एन्जाइम होते हैं जो प्रोटीन को सरल अवयवों में तोड़ने का कार्य करते हैं। आमाशय में भोजन लुगदी जैसा हो जाता है, जिसे क्षुद्राव में धकेल दिया जाता है।

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प्रश्न 2.
अमीबा के भोजन ग्रहण करने व पाचन की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अमीबा जलाशयों में पाया जाने वाला एककोशिकीय जीव है। अमीबा निरन्तर अपनी आकृति एवं स्थिति बदलता रहता है। अमीबा की कोशिका को घेरे हुए एक कोशिका झिल्ली होती है। कोशिका में एक गोल सघन केन्द्र होता है एवं कोशिका द्रव में बुलबुले समान अनेक संकुचनशील रसधानियाँ पाई जाती हैं। यह एक अथवा अधिक अंगुली के समान प्रवर्ष निकालता रहता है, जिन्हें पादाभ कहते हैं जो इसे गति एवं भोजन पकड़ने में सहायता करते हैं। अमीबा कुछ सूक्ष्म जीवों को आहार के रूप में ग्रहण करता है। जब अमीबा को भोजन का आभास होता है तो वह खाद्यकण के चारों ओर पादाभ विकसित करके उसे निगल लेता है। खाद्य पदार्थ उसकी खाद्यधानी में फंस जाते हैं। यह प्रक्रिया एण्डोसाइटोसिस कहलाती है।
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RBSE Class 6 Social Science प्राणियों में पोषण Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
खाद्य पदार्थों का अमीबा की खाद्यधानी में फंस जाना क्या कहलाता है?
(अ) एण्डोसाइक्लोटिस
(ब) एण्डोसाइटोसिस
(स) एक्स्ट्रोसाइटोसिस
(द) एक्स्ट्रोसाइक्लोरिस
उत्तर:
(ब) एण्डोसाइटोसिस

Question 2.
मानव में दाँतों की कुल संख्या कितनी होती है?
(अ) 31
(ब) 33
(स) 32
(द) 34
उत्तर:
(स) 32

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Question 3.
अमीबा अंगुली के समान प्रवर्ष निकालता है इन्हें क्या कहते हैं?
(अ) हस्ताभ
(ब) पादाभ
(स) मुकुल
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) पादाभ

Question 4.
निम्न में से घास खाने वाले जन्तु क्या कहलाते हैं?
(अ) रूमौनर
(ब) एण्डोसाइटोसिस
(स) रोमन
(द) जलाशयों
उत्तर:
(अ) रूमौनर

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Question 5.
चवर्णक दाँत निम्न में से कैसे होते हैं?
(अ) धारदार
(ब) नुकीले
(स) खुरदरे
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) खुरदरे

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. अमीया जलाशयों में पाया जाने वाला ……………….. जीव है। (एककोशिकीय/बहुकोशिकीय)
  2. घास में ……………….. की प्रचुर मात्रा होती है। (प्रोटीन/सेलुलोस)
  3. मुख्य रूप से आहार का विना पचा हुआ भाग ……………….. के रूप में निष्कासित करते हैं। (वमन/मल)
  4. आहार नाल एवं सम्बद्ध ग्रन्थियां मिलकर ……………….. का निर्माण करती हैं। (आहार नाल/पाचन तन्त्र)
  5. पित्त रस ……………….. के पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (वसा/कार्वोहाइड्रेट)

उत्तर:

  1. एककोशिकीय
  2. सेलुलोस
  3. मल
  4. पाचन तन्त्र
  5. बसा

कॉलम (1) को कॉलम (2) से मिलाकर सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
1. (ब)
2. (द)
3. (अ)
4. (य)
5. (स)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
रूमेन क्या है?
उत्तर:
शाकाहारी जन्तु पास को जल्दी-जल्दी निगलकर आमाशय के एक भाग में इकट्ठा कर लेते हैं, जिसे रूमेन कहते हैं।

प्रश्न 2.
घास में कौनसा कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है?
उत्तर:
पास में सेलुलोस नामक कार्बोहाइड्रेट पाया जाता

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प्रश्न 3.
रूमीनेन्ट या रोमन्धी जन्तु किसे कहते हैं?
उत्तर:
जुगाली करने वाले शाकाहारी जन्तुओं को रूमीनेन्ट या रोमन्धी जन्तु कहते हैं, जैसे-गाय, भैंस।

प्रश्न 4.
अंधनाल किसे कहते हैं?
उत्तर:
रूमीनेन्ट जन्तुओं में क्षुद्रान्त्र एवं बृहदान्त्र के बीच थैलीनुमा संरचना अंधनाल कहलाती है।

प्रश्न 5.
अंधनाल का क्या कार्य है?
उत्तर:
अंधनाल में जीवाणुओं द्वारा भोजन में उपस्थित सेलुलोस का पाचन होता है।

प्रश्न 6.
भोजन का अन्तर्गहण किसे कहते हैं?
उत्तर:
आहार को मुख द्वारा शरीर के अन्दर लेने की प्रक्रिया भोजन का अन्तर्ग्रहण कहलाती है।

प्रश्न 7.
लार ग्रन्थि कहाँ स्थित होती है? यह कौनसा रस स्रावित करती है?
उत्तर:
हमारे मुख में लार ग्रन्थियाँ होती हैं जो कि लार रस (लार) का प्रावण करती हैं।

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प्रश्न 8.
स्वाद कलिकाएँ कहाँ पायी जाती हैं?
उत्तर:
स्वाद कलिकाएँ जीभ पर पायी जाती हैं।

प्रश्न 9.
स्वाद कलिकाओं का क्या कार्य है?
उत्तर:
स्वाद कलिकाओं से हमें विभिन्न प्रकार के स्वादों का पता चलता है। जैसे कड़वा, मोठा, नमकीन, खारा आदि।

प्रश्न 10.
पाचक रस (जठर रस) का क्या कार्य है?
उत्तर:
पाचक रस (जठर रस) प्रोटीन को सरल पदार्थों में तोड़ने का कार्य करते हैं।

प्रश्न 11.
मानव शरीर की सबसे बड़ी प्रन्थि कौनसी है?
उत्तर:
मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रन्धि यकृत होती

प्रश्न 12.
पित्त रस कहाँ निर्मित होता है एवं कहाँ इकट्ठा रहता है?
उत्तर:
यकृत द्वारा पित्त रस नावित होता है जो पित्ताशय में संग्रहित रहता है।

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प्रश्न 13.
पित्त रस का क्या कार्य है?
उत्तर:
जैसे कड़वा, मोठा, नमकीन, खारा आदि।

प्रश्न 14.
अग्नाशय रस कहाँ निर्मित होता है?
उत्तर:
आनाशय प्रन्धि में।

प्रश्न 15.
आनाशय रस का क्या कार्य है?
उत्तर:
यह कार्बोहाइड्रेट एवं प्रोटीन को उनके सरल रूप में परिवर्तित कर देता है।

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प्रश्न 16.
भोजन का अवशोषण कहाँ होता है?
उत्तर:
भोजन का अवशोषण क्षुद्रात्र में होता है।

प्रश्न 17.
पोषण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जन्तुओं द्वारा अपनी शारीरिक वृद्धि, विकास एवं अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक भोजन ग्रहण करने की प्रक्रिया पोषण कहलाती है।

प्रश्न 18.
कभी-कभी भोजन के बाद उल्टी (वमन) का क्या कारण है?
उत्तर:
कभी-कभी हमारा आमाशय खाए हुए भोजन को स्वीकार नहीं करता है, फलस्वरूप उल्टी (वमन) द्वारा उसे बाहर निकाल देता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पाचन किसे कहते हैं?
उत्तर:
हमारे द्वारा ग्रहण किये गये भोजन में कार्याहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवणों जैसे जटिल पदार्थ होते हैं। इन जटिल पदार्थों को सीधे ही उपयोग में नहीं लिया जा सकता है, उन्हें उपयोग हेतु विभिन्न ग्रन्थियों एवं पाचक रसों द्वारा सरल पदार्थों में परिवर्तित किया जाता है। अत: जटिल खाद्य पदाथों के सरल पदाथों में परिवर्तित होने या टूटने के प्रक्रम को पाचन कहते हैं।

प्रश्न 2.
अमीबा का संक्षिप्त वर्णन.कीजिये।
उत्तर:
अमीबा जलाशयों में पाया जाने वाला एककोशिकीय जीव है। अमीबा एक कोशिका झिल्ली से घिरा रहता है। इसमें एक गोल केन्द्रक एवं संकुचनशील रसधानियाँ पायी जाती हैं। यह एक या अधिक प्रवर्ष निकालता रहता है जिन्हें पादाभ कहते हैं, जो कि अमीबा को गति करने एवं भोजन करने में सहायता करते हैं। अमीबा अपनी आकृति निरन्तर बदलता रहता है।

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प्रश्न 3.
एण्डोसाइटोसिस क्या है?
उत्तर:
अमीबा सूक्ष्म जीवों को आहार के रूप में ग्रहण करता है। जब अमीबा को भोजन का आभास होता है तो यह खाद्य कण के चारों ओर पादाभ विकसित कर उसे निगल लेता है। खाद्य पदार्थ अमीबा की खाद्यधानी में फंस जाते हैं। यह प्रक्रिया एन्डोसाइटोसिस कहलाती है। अमीबा की खाद्य धानी में ही पाचक रस सावित होते हैं।

प्रश्न 4.
‘जुगाली’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
गाय, भैंस आदि शाकाहारी जन्तु चारे (घास) को सर्वप्रथम जल्दी-जल्दी निगल लेते हैं और इसे आमाशय के एक भाग में इकट्ठा कर लेते हैं। आमाशय का यह भाग रूमेन या प्रथम आमाशय कहलाता है। रूमेन में भोजन का आंशिक पाचन होता है, जिसे जुगाल या कड़ कहते हैं। बाद में इस भोजन को छोटे-छोटे पिण्डकों के रूप में मुख में लाकर चबाते रहते हैं। इस प्रक्रम को जुगाली करना या रोमन्धन कहते हैं। ऐसे जन्तु रूमीनेन्ट या रोमन्धी कहलाते हैं।

प्रश्न 5.
‘जुगाल’ (कड़) क्या है?
उत्तर:
शाकाहारी जन्तु चारे (घास) को जल्दी-जल्दी निगल कर आमाशय के एक भाग में एकत्रित कर लेते हैं। आमाशय के इस भाग को रूमेन कहते हैं। रूमेन में भोजन का आशिक पाचन शुरू हो जाता है, जिसे ‘जुगाल’ (कड़) कहते हैं।

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प्रश्न 6.
लार रस के क्या कार्य होते हैं?
उत्तर:
जब हम भोजन को चबाते हैं तो लार ग्रन्धियों से लार निकलकर भोजन में मिल जाती है। लार रस से निकलने वाले रस को लार रस रहते हैं। लार मिलने से भोजन लुगदीनुमा एवं लसलसा हो जाता है। यहाँ भोजन का आशिक पाचन शुरू हो जाता है। लसलसे भोजन को निगलने में आसानी रहती है।

प्रश्न 7.
यकृत क्या है?
उत्तर:
यकृत हमारे शरीर में स्थित गहरे लाल भूरे रंग की प्रन्थि है, जो उदर के ऊपरी भाग में दाहिनी ओर अवस्थित रहती है। यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रन्थि होती है। यह पित्त रस का प्रावण करती है जो कि पित्ताशय में संग्रहित रहता है। पित्त रस वसा के पाचन में सहायता करता है।

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प्रश्न 8.
अग्नाशय ग्रन्थि क्या होती है?
उत्तर:
अग्नाशय हल्के पीले रंग की बड़ी ग्रन्थि होती है, जो आमाशय के ठीक नीचे स्थित होती है। इससे साबित अग्नाशयिक रस काबोहाइड्रेट एवं प्रोटीन पर क्रिया कर इन्हें इनके सरल रूपों में अपघटित कर देता है।

प्रश्न 9.
बृहदान्त्र (बड़ी आंत) का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बृहदान्त्र (बड़ी आंत) आहार नाल का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह क्षुदान्त्र की तुलना में चौड़ी एवं छोटी होती है और लगभग 1.5 मीटर लम्बाई की होती है। बृहदान्त्र का मुख्य कार्य जल एवं कुछ लवणों का अवशोषण करना होता है। यह मलाशय से जुड़ी होती है। जहाँ इसके द्वारा भोजन का शेष अपचित भाग भेज दिया जाता है।
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प्रश्न 10.
निष्कासन किसे कहते हैं?
उत्तर:
भोजन का वह भाग जिसका पाचन नहीं हो पाता है अथवा अवशोषण नहीं हो पाता है वह वृहदान्त्र से मलाशय में चला जाता है। मलाशय में यह अपचित पदार्थ अर्थ ठोस मल के रूप में रहता है। समय-समय पर यह मल गुदा द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है। इसे निष्कासन कहते हैं।

प्रश्न 11.
मानव दाँतों के प्रकार एवं प्रत्येक प्रकार के दाँतों की संख्या एक तालिका रूप में लिखिए।
उत्तर:
मानव दाँतों के प्रकार एवं उनकी संख्या:
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प्रश्न 12.
मनुष्य की आहार नाल क्या है? इसे कितने भागों में विभाजित किया गया है?
उत्तर:
आहार नाल – भोजन एक सतत नली से गुजरता है, जो मुख गुहिका से प्रारम्भ होकर गुदा तक जाती है। यह नली आहार नली कहलाती है। मनुष्य की आहार नाल को निम्न भागों में विभाजित किया गया है –

  1. मुख गुहिका
  2. ग्रास नली या ग्रसिका
  3. आमाशय
  4. क्षुद्रांत्र (छोटी आंत)
  5. बृहदान्त्र (बड़ी आंत)
  6. मलद्वार या गुदा।

प्रश्न 13.
ग्रसिका में भोजन की गति किस प्रकार होती है?
उत्तर:
मुख द्वारा निगला हुआ भोजन ग्रसिका में जाता है, प्रसिका गलो एवं वक्ष से होती हुई जाती है और आमाशय से जुड़ जाती है। ग्रसिका की भित्ति के संकुचन से भोजन नीचे की ओर सरकता जाता है। यानि सम्पूर्ण आहार नाल संकुचित होती रहती है तथा इस गति के कारण भोजन नीचे की ओर चलता रहता है।

प्रश्न 14.
पाचन तन्त्र क्या होता है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य की आहार नाल के सभी भाग, मुख गुहिका से लेकर मलद्वार तक, मिलकर पाचन तन्त्र का निर्माण करते हैं। जैसे-जैसे भोजन विभिन्न भागों से गुजरता है, उससे विभिन्न पटकों का पाचन भी क्रमिक रूप से होता जाता है। आमाशय की आन्तरिक भित्ति, शुद्रान्त्र तथा आहार नाल से सम्बद्ध विभिन्न ग्रन्थियाँ जैसे, लारप्रन्थि, यकृत, अग्नाशप आदि पाचक रस स्रावित करती है। पाचक रस जटिल पदार्थों को उनके सरल रूप में बदल देते हैं। आहार नाल एवं सम्बद्ध प्रन्थियाँ मिलकर पाचन तन्त्र का निर्माण करते हैं। प्रश्न 15. जीभ क्या है? चित्र भी बनाइये। उत्तर:जीभ एक मांसल पेशीय अंग है जो पीछे की ओर मुख-गुहिका के अधर तल से जुड़ी होती है। इसका अन भाग स्वतन्त्र होता है और किसी भी दिशा में मुड़ सकता है। इस पर स्वाद कलिकाएँ होती हैं जिनसे हमें विभिन्न प्रकार के स्वाद का पता चलता है।

प्रश्न 16.
जीभ के कार्य बतलाइये।
उत्तर:
जीभ के कार्य –

  1. बोलने के लिए जीभ का उपयोग करते हैं।
  2. यह भोजन में लार मिलाने का कार्य करती है।
  3. भोजन को निगलने में सहायता करती है।
  4. जीभ पर स्वाद कलिकाएँ होती हैं, इनके द्वारा हमें विभिन्न स्वादों का पता चलता है।

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प्रश्न 17.
दंतक्षय क्या है?
उत्तर:
सामान्यतः हमारे मुख में जीवाणु पाये जाते हैं। खाना खाने के बाद दाँत व मुख अच्छी तरह साफ न करने पर ये जीवाणु वृद्धि करने लगते हैं। ये जीवाणु दाँतों के बीच फंसी शर्करा का विघटन कर अम्ल का निर्माण करते हैं। यह अम्ल धीरे-धीरे दाँतों को क्षति पहुंचाते हैं, इसे दंत क्षय कहते हैं। इस दंत क्षय बीमारी का समय पर इलाज करा लेना चाहिए नहीं तो असह्य पीड़ा के बाद दाँत टूटकर गिर जाते हैं। चॉकलेट, ठण्डे पेय तथा चीनी युक्त मिठाइयाँ दंत क्षय के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम दो बार दांतुन/मंजन करनी चाहिए।

प्रश्न 18.
दीर्घ रोम (रसांकुर ) किसे कहते हैं? इनके क्या कार्य हैं?
उत्तर:
शूद्रान्त्र की आन्तरिक भित्ति पर अंगुली के समान उभरी हुई हजारों की संख्याओं में संरचनाएं होती है। इन संरचनाओं को दीर्घ रोम (रसांकुर) कहते हैं। दीर्घ रोम (रसांकुर) के कार्य –

  1. दीर्घ रोम पचे हुए भोजन के अवशोषण हेतु तल का क्षेत्र बढ़ा देते हैं।
  2. दीर्घ रोमों में सूक्ष्म रुधिर वाहिकाओं का जाल होता है अतः इसकी सतह से पचे हुए भोजन का अवशोषण होकर यह रूधिर वाहिकाओं में चला जाता है।

प्रश्न 19.
दस्त क्या होते हैं एवं इसका उपचार कैसे करें?
उत्तर:
कभी-कभी हमें जलरूपी पतले मल के बार-बार निष्कासन की आवश्यकता होती है। इस स्थिति को दस्त कहते हैं। यह संक्रमण, खाद्य विषाक्तता अथवा अपच के कारण की स्थिति होती है। चरमावस्था में वह घातक भी हो सकता है। इसका मुख्य कारण शरीर से लवण एवं जल की अत्यधिक क्षति होना है। इसका चिकित्सक से उपचार कराना चाहिए एवं वहाँ पहुँचने से पूर्व रोगी को उबाल कर ठण्डा किये हुए जल में एक चुटकी नमक एवं चीनी घोलकर पिलानी चाहिए। इसे जीवन रक्षक घोल या ओ.आर.एस. कहते हैं जो सरकारी अस्पतालों में भी मिलाता है।

प्रश्न 20.
अमीबा एवं मानव के पोषण में एक समानता एवं एक असमानता बताइए।
उत्तर:

  1. अमीबा और मानव दोनों पोषण में समानता – इसका चिकित्सक से उपचार कराना चाहिए एवं वहाँ पहुँचने से पूर्व रोगी को उबाल कर ठण्डा किये हुए जल में एक चुटकी नमक एवं चीनी घोलकर पिलानी चाहिए।
  2. अमीबा एवं मानव के पोषण में असमानता – अमीबा में भोजन का अन्तर्ग्रहण पादाभों द्वारा होता है एवं इसका पाचन खाद्यधानी में होता है जबकि मानव मुख के द्वारा भोजन का अन्तर्ग्रहण करता है, इसे आहार नाल में पचाकर उसका उपयोग करते हैं।

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प्रश्न 21.
वजासन क्यों किया जाता है एवं इसको करने की विधि के चरण क्या हैं?
उत्तर:
बजासन-जिन लोगों को अपचन, एसिडिटी, कब्ज, गैस, मोटापा इत्यादि की समस्याएं हैं इनसे निपटने के लिए बेहद सरल एवं उपयोगी योगासन ‘वज्रासन’ किया जाता है। वज्रासन विधि के चरण –

  1. भोजन करने के पाँच मिनट बाद आसन बिछाकर दोनों पैर सामने की तरफ फैलाकर बैठ जायें।
  2. इसके बाद बायें पैर के घुटने को मोड़कर इस तरह बैठे कि पैरों के पंजे पीछे और ऊपर की ओर हो जायें।
  3. अब दायें पैर का घुटना भी इस प्रकार मोड़ लें।
  4. दोनों पैरों के अंगूठे एक-दूसरे से मिलाकर रखें।
  5. शरीर को सीधा रखें।
  6. अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें।

प्रश्न 22.
आमाशय का नामांकित चित्र बनाइये।
उत्तर:
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निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
घास खाने वाले जानवरों (रूमीनेन्ट्स) की पाचन प्रणाली को सचित्र समझाइए।
उत्तर:
घास खाने वाले जन्तुओं को रूमीनेन्ट्स या रोमन्थी या शाकाहारी जन्तु भी कहते हैं जैसे गाय, भैंस आदि। ये जन्तु पहले घास को जल्दी-जल्दी निगलकर आमाशय के एक भाग में भण्डारण या इकट्ठा कर लेते हैं। आमाशय का यह भाग रूमेन (प्रथम आमाशय) कहलाता है। रूमेन में भोजन का आशिक पाचन होता है, जिसे जुगाल (कह) कहते हैं। बाद में जन्तु इस भोजन को छोटे-छोटे पिण्डों के रूप में वापस मुख में लाता है और उसे चबाता रहता है। इस प्रक्रम को जुगाली करना या रोमन्थन कहते हैं। रूमीनेन्टस में क्षुद्रान्त्र एवं बृहदान्त्र के बीच एक थैलीनुमा बड़ी सावना होती है जिसे अंधनाल कहते हैं। रूमीनेन्ट्स के भोजन (घास) में सेलूलोस की प्रचुर मात्रा होती है जो कि एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है। भोजन के इस सेलुलोज का पाचन अंधनाल में कुछ जीवाणुओं द्वारा कर दिया जाता है।
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प्रश्न 2.
मनुष्य की मुख गुहा में दांतों की संख्या, प्रकार एवं इनके कार्यों को सारणीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य मुख गुहा में दो जबड़े ऊपर एवं नीचे व्यवस्थित रहते हैं। दोनों जबड़ों में 16-16 दाँत होते हैं। इस प्रकार मनुष्य की मुखगुहा में कुल 32 दाँत होते हैं। इन दांतों की संख्या, प्रकार एवं कार्य निम्न प्रकार वर्गीकृत हैं
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प्रश्न 3.
मानव पाचन तन्त्र की क्रिया-प्रणाली का वर्णन कीजिए।
अथवा मानव आहार नाल के विभिन्न भागों का कार्यों सहित सचित्र वर्णन कीजिए। उत्तर:मानव पाचन तन्त्र-मानव में आहार नाल एवं सम्बद्ध सावी प्रन्थियाँ मिलकर पाचन तंत्र का निर्माण करते हैं। आहार नाल के विभिन्न भागों में भोजन का पाचन क्रमिक रूप से होता है। पाचन तन्त्र या आहार नाल के मुख्य भाग, कार्य एवं क्रियाविधि निम्न प्रकार हैं –

1. मुख एवं मुख गुहिका – भोजन का अन्तर्ग्रहण मुखा द्वारा होता है। हमारे मुखा में लार ग्रन्थि होती है जो लार रस (लार) का नावण करती है। जीभ के द्वारा दाँतों द्वारा काटे, चबाये गये भोजन में लार मिलाने का कार्य किया जाता है। लार मिलने से भोजन लसलासा एवं लुगदीनुमा हो जाता है। यहाँ भोजन का आशिक पाचन शुरू हो जाता है। लसलसे भोजन को निगलने में आसानी होती है।

2. ग्रास नली या ग्रसिका – मुख गुहिका द्वारा निगला हुआ भोजन ग्रसिका में जाता है। ग्रसिका या भोजन नली गले व वक्ष से होती हुई जाती है। ग्रसिका की भिति के संकुचन से भोजन नीचे की ओर सरकता जाता है।

3. आमाशय – यह एक थैलीनुमा और मोटी भित्ति वाली संरचना है। इसकी आन्तरिक सतह श्लेष्मा, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा जठर रस सावित करती है। यहाँ पर अम्ल जीवाणुओं को नष्ट कर माध्यम को अम्लीय बना देता है। जठर रस प्रोटीन को सरल पदार्थों में विघटित कर देता है।

4. क्षुद्रात्र (छोटी आंत) – इसे छोटी आंत भी कहते हैं। इसकी लम्बाई लगभग 6-8 मीटर और अत्यधिक कुण्डलीनुमा होती है। क्षुद्रात्र में यकृत ग्रन्धि द्वारा पित्त रस नावित किया जाता है जो पित्ताशय में संग्रहित होता रहता है। पित्त रस वसा के पाचन में सहायता करता है। अग्नाशय प्रन्धि से अग्नाशविक रस का स्रावण होता है जो कार्बोहाइड्रेट्स एवं प्रोटीन पर क्रिया कर उनके सरल रूप में अपघटित कर देता है। क्षुद्रात्र की भित्ति द्वारा सावित पाचक रस की क्रिया से भोजन के सभी घटकों का पाचन पूरा हो जाता है। भोजन के जिस भाग का पाचन अथवा अवशोषण नहीं होता, उसे बृहदान्त्र में भेज दिया जाता है।

5. बृहदान्त्र (बड़ी आंत) – इसे बड़ी आंत भी कहते हैं। यह क्षुदान की तुलना में चौड़ी एवं छोटी होती है। इसकी लम्बाई लगभग 1.5 मीटर होती है। यह मलाशय से जुड़ी होती है। जल एवं कुछ लवण बृहदान्त्र में अवशोषित होते हैं। शेष बचा हुआ अपचित पदार्थ मलाशय में चला जाता है। यहाँ यह अर्ध ठोस मल के रूप में रहता है।

6. मलद्वार अथवा गुदा – समय-समय पर यह मल गुदा द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है। इस प्रकार विभिन्न चरणों के द्वारा मानव पाचन क्रिया पूरी हो जाती है। (नोट-चित्र पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों में दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न संख्या 3 के उत्तर में देखें।

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प्रश्न 4.
क्षुद्रांत्र में होने वाले अवशोषण एवं स्वांगीकरण के प्रक्रम को समझाइए।
उत्तर:
शुद्रांत्र में अवशोषण एवं स्वांगीकरण-शुद्रांत्र लगभग 6 से 8 मीटर लम्बी अत्यधिक कुंडलित नली होती है। यह यकृत एवं अग्न्याशय से नाव प्राप्त करती है। इसके अतिरिक्त इसकी भित्ति से भी कुछ रस सावित होते हैं। आंशिक रूप से पचा भोजन दांत्र के निचले भाग में पहुंचता है जहाँ आंत्र रस पाचन क्रिया को पूर्ण कर देता है। पचा हुआ भोजन अवशोषित होकर शुद्रांत्र की भित्ति में स्थित रुधिर वाहिकाओं में चला जाता है। इस प्रक्रम को ‘अवशोषण’ कहते हैं। क्षुद्रांत्र की आंतरिक भित्ति पर अँगुली के समान उभरी हुई संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें ‘दीर्घ रोम’ अथवा रसांकुर कहते हैं।

ये दीर्घ रोम पचे हुए भोजन के अवशोषण हेतु तल क्षेत्र बढ़ा देते हैं। प्रत्येक दीर्घ रोम में सूक्ष्म रुधिर वाहिकाओं का जाल फैला रहता है। दीर्घ रोम की सतह से पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है। अवशोषित पदार्थों का स्थानान्तरण रुधिर वाहिकाओं द्वारा शरीर के विभिन्न भागों तक होता है, जहाँ उनका उपयोग जटिल पदार्थों को बनाने में किया जाता है। इस प्रक्रम को ‘स्वांगीकरण’ कहते हैं। कोशिकाओं में उपस्थित ग्लूकोस का विघटन ऑक्सीजन की सहायता से कार्बन डाई-आक्साइड एवं जल में हो जाता है और कर्जा मुक्त होती है। भोजन का वह भाग, जिसका पाचन नहीं हो पाता अथवा अवशोषण नहीं होता, बृहदान्त्र में भेज दिया जाता

प्रश्न 5.
जिन भोजन सम्बन्धी अच्छी आदतों से हम स्वस्थ रह सकते हैं उन आदतों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भोजन सम्बन्धी अच्छी आदतें –

  1. भोजन करने से पहले एवं बाद में हाथ एवं मुख अच्छी तरह से साफ करें।
  2. भोजन स्वच्छ स्थान पर बैठ कर करें।
  3. हमेशा ताजा एवं ढका हुआ भोजन करें।
  4. निश्चित समय पर भोजन करें।
  5. भोजन स्वस्थ मन से तनाव मुक्त रहकर, धैर्यपूर्वक करी
  6. संतुलित भोजन करें।
  7. भोजन को अच्छी तरह चबायें।
  8. भोजन में रेशेदार पदार्थ तथा हरी सब्जी का सलाद के रूप में सेवन करें।
  9. आवश्यकता से अधिक भोजन नहीं करें।
  10. सभी प्रकार का भोजन रुचिपूर्वक करें।
  11. भोजन करते समय बातें नहीं करें।
  12. भोजन करने के लगभग एक घण्टे बाद पानी पीयें।
  13. भोजन झूठा नहीं छोड़ें क्योंकि भारतीय ग्रन्थों में इसे ‘अन्न देवता’ कहा गया है।

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