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Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 4 Question Answer in Hindi राजस्थान में कृषि विपणन
हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 4 के प्रश्न उत्तर
आओ करके देखें-
प्रश्न 1.
मंडियों में किसानों को कौनसी सुविधाएँ दी जाती हैं? पता लगाइए।
उत्तर:
मंडियों में किसानों को निम्नलिखित सुविधाएँ दी जाती हैं-
- कृषि जिंसों की बिक्री और खरीद की सुविधा प्रदान करना।
- किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलवाना।
- बिचौलियों से किसानों का बचाव एवं सुरक्षा प्रदान करना।
- दैनिक बाजार भावों की जानकारी प्रदान करना।
- उपज के मूल्यों की ऑनलाइन उपलब्ध करवाना।
- किसानों की सहायता हेतु आढ़तियों की व्यवस्था करना।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर किसानों की उपज खरीदना।
प्रश्न 2.
यह पता लगाइए कि आपके क्षेत्र में उचित मूल्य की दुकान पर कौन-कौनसी वस्तुएँ किस कीमत पर मिल रही हैं?
उत्तर:
| मूल्य सूची (उचित मूल्य की दुकान) | |
| सामग्री | मूल्य |
| 1. गेहूँ | …………………… |
| 2. चीनी | …………………… |
| 3. केरोसीन | …………………… |
| 4. चावल/मोटा अनाज | …………………… |
| 5. अन्य | …………………… |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
I. अग्रलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-
1. कृषि विपणन बोर्ड मदद करता है-
(अ) किसान की
(ब) शिक्षक की
(स) विद्यार्थी की
(द) पशुपालक की
उत्तर:
(अ) किसान की
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2. कृषि उपज मण्डी में मध्यस्थों से वसूला जाता है-
(अ) बाजार शुल्क
(ब) लाइसेन्स शुल्क
(स) सेवा शुल्क
(द) परीक्षा शुल्क
उत्तर:
(ब) लाइसेन्स शुल्क
II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. मंडियों की स्थापना तथा विकास के लिए राजस्थान में ……………. की स्थापना 1974 में की गई।
उत्तर:
राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड
2. सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा ……………. को खाद्य वस्तुएँ सही दाम में मिलती हैं।
उत्तर:
गरीब उपभोक्ताओं।
III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
राज्य में नियमन के लिए किन कृषि जिंसों को अधिसूचित किया गया है?
उत्तर:
राज्य में नियमन के लिए निम्न कृषि जिंसों को अधिसूचित किया गया है-
अनाज, बाजरा, दलहन, तिलहन, कपास, लघु वनोपज आदि।
प्रश्न 2.
राज्य की कोई दो कृषि उपज मंडियों के नाम बताइए जो विश्व प्रसिद्ध हैं।
उत्तर:
उत्तर:
राज्य की जोधपुर मंडी जीरे तथा कोटा की रामगंज मंडी धनिया व मेथी के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।
IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
कृषि उपज मंडियों से आप क्या समझते हैं? इन मंडियों की क्या आवश्यकता है?
उत्तर:
कृषि उपज मंडी – यह एक ऐसा बाजार है, जहाँ कृषि उपज को खरीदा और बेचा जाता है। यह बाजार न केवल कृषि जिंसों की बिक्री और खरीद की सुविधा प्रदान करता है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और ग्रामीण कल्याण में भी मदद करता है। ये बाजार नियमों के आधार पर संचालित होते हैं, इसलिए इन्हें विनियमित बाजार भी कहा जाता है। इन बाजारों का विनियमन कृषि विपणन बाजार समिति द्वारा किया जाता है।
आवश्यकता – कृषि उपज मंडियों के माध्यम से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य दिलाने का प्रयास किया जाता है। ये बिचौलियों से किसानों का बचाव कर उनकी उपज को बोली द्वारा बेचने की सुविधा प्रदान करती हैं। कई मंडियों में दैनिक बाजार भावों की जानकारी भी प्रदान की जी है। वर्तमान में कुछ मंडियाँ ऑनलाइन भी बाजार भाव प्रसारित कर रही हैं, जिससे उपज का सही मूल्य कभी भी प्राप्त किया जा सकता है।
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प्रश्न 2.
राजस्थान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को समझाइए।
उत्तर:
सार्वजनिक वितरण प्रणाली- आम उपभोक्ताओं तक कृषि उपज एवं अन्य खाद्य वस्तुएँ सही दामों में पहुँचाने के लिए सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था की है। इसके अंतर्गत कृषि उपजों, विशेषकर अनाजों को उचित मूल्य की दुकानों या राशन की दुकानों के माध्यम से गरीब उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का प्रयास किया जाता है। इससे सभी को खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य की पूर्ति में सहायता प्राप्त होती है। यह कार्य खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामला विभाग द्वारा किया जाता है।
उचित मूल्य की दुकानों के नेटवर्क के माध्यम से गेहूँ, चावल, चीनी एवं केरोसीन जैसी आवश्यक वस्तुओं का वितरण, मासिक आधार पर नियमित रूप से किया जाता है। वर्तमान में पोस (पीओएस) मशीन द्वारा उपभोक्ताओं को बायोमैट्रिक सत्यापन के उपरांत राशन सामग्री का वितरण किया जा रहा है। इससे लक्षित लाभार्थियों तक सामग्री की पहुँच सुनिश्चित हो सकी है।
Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 4 Important Question Answer in Hindi
I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-
1. राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड की स्थापना किस वर्ष की गई?
(अ) 1971 में
(ब) 1972 में
(स) 1973 में
(द) 1974 में
उत्तर:
(द) 1974 में
2. मंडियों में बाजार शुल्क किससे वसूला जाता है?
(अ) खरीददारों से
(ब) मध्यस्थों से
(स) किसानों से
(द) मंडी समिति से
उत्तर:
(अ) खरीददारों से
3. मंडियों में लाइसेंस शुल्क किससे वसूल किया जाता है?
(अ) कृषि विपणन बाजार समिति से
(ब) कृषि उपज मंडी से
(स) किसानों से
(द) मध्यस्थों से
उत्तर:
(द) मध्यस्थों से
4. उचित मूल्य की दुकानों के नेटवर्क स्थापित करने का कार्य किसका है?
(अ) आढ़तियों का
(ब) राज्य सरकार का
(स) केन्द्र सरकार का
(द) उपभोक्ताओं का
उत्तर:
(ब) राज्य सरकार का
II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-
1. सरकार ने कई मंडियों को ……………. कर दिया है, जिससे उपज के मूल्य कभी भी पता किये जा सकते हैं।
उत्तर:
ऑनलाइन
2. किसानों की सहायता के लिए मंडी में ……………. भी होते हैं।
उत्तर:
आढ़तिये
3. किसान को उसकी उपज का सही मूल्य दिलवाने का प्रयास ……………. द्वारा किया जाता है।
उत्तर:
सरकार
4. राज्य के निर्धन वर्गों तक ……………. को सही कीमत पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से पहुँचाया जाता है।
उत्तर:
खाद्यान्नों
III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
नाथू को अपनी मूंग की फसल बेचने में कठिनाई क्यों हुई?
उत्तर:
पिछले वर्ष मूँग की कीमत बहुत अधिक थी अतः इस बार सभी किसानों ने मूंग की फसल बोई। परिणामत: मूंग की पैदावार अधिक हो गई और उसे बेचने में कठिनाई हुई।
प्रश्न 2.
किसी फसल की अच्छी पैदावार का कोई एक दुष्परिणाम बताइए।
उत्तर:
फसल की अच्छी पैदावार होने पर उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता है।
प्रश्न 3.
राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य क्या रहा है?
उत्तर:
राजस्थान राज्य में कृषि उपज मंडियों की स्थापना तथा उनका विकास करने के लिए राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड को स्थापित किया गया।
प्रश्न 4.
कृषि उपज मंडियों की आय का मुख्य स्रोत बताइए।
उत्तर:
मंडियों में खरीददारों से बाजार शुल्क तथा मध्यस्थों से लाइसेंस शुल्क वसूल किया जाता है, जो कि इन मंडियों की आय होती है।
IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. आढ़तियों से आप क्या समझते हैं? इनकी भूमिका स्पष्ट कीजए।
उत्तर:
विभिन्न मंडियों में अन्य सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं के अतिरिक्त किसानों की सहायता हेतु आढ़तिये भी होते हैं। इन आढ़तियों में से कुछ आढ़तिये, जिन्हें कच्चे आढ़तिये भी कहा जाता है, किसानों की उपज को मंडी में बनी अपनी दुकानों पर बेचते हैं और अपनी आढ़त या कमीशन काटकर किसान को उसकी उपज के उचित मूल्य का भुगतान कर देते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ पक्के आढ़तिये भी होते हैं जो कि कच्चे आढ़तियों से थोक व्यापारियों या मिल वालों के लिए उपज का क्रय करते हैं तथा क्रय किए गए सामग्री का अपनी व्यवस्था के अनुसार संग्रह भी करते हैं।
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प्रश्न 2.
किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने हेतु सरकार प्रत्यक्षतः क्या उपाय करती है? स्पष्ट कीजिए
उत्तर:
यदि किसान को कृषि उपज मंडियों में भी सही खरीददार नहीं मिलते हैं, तो भी किसान को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। यदि किसान को उसकी उपज का सही दाम देने वाले क्रेता नहीं मिलते, तो ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ पर सीधे किसान से उसकी उपज को खरीद लिया जाता है। इस प्रकार से, किसानों के उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने हेतु सरकार द्वारा प्रत्यक्ष तौर पर प्रयास किया जाता है।
V. निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
‘राजस्थान में कृषि विपणन’ का विस्तृत विवरण दीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में कृषि विपणन- किसानों को अपनी पैदा की गई फसल को बेचने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। स्थानीय स्तर पर फसल बेचने हेतु काफी प्रयास करने पड़ते थे। यदि कोई फसल खरीदने को तैयार भी होता, तो उपज का मूल्य काफी कम देना चाहता। इस कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। यदि फसल की पैदावार अच्छी हो जाती, तो उचित दाम मिलने में दिक्कत आती थी। इस तरह की स्थिति का निवारण करने हेतु सरकार द्वारा कृषि उपज मंडियों की व्यवस्था की गई।
कृषि उपज मंडी – यह सरकार द्वारा स्थापित एक ऐसा बाजार है, जहाँ कृषि उपज को खरीदा और बेचा जाता है। यहाँ कृषि जिंसों की बिक्री और खरीद की सुविधा प्रदान की जाती है। इन मंडियों के माध्यम से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य दिलवाने का प्रयास किया जाता है। ये मंडियाँ नियमों के आधार पर संचालित होती हैं, इसलिए इन्हें विनियमित बाजार भी कहा जाता है। इन बाजारों का विनियमन कृषि विपणन बाजार समिति द्वारा किया जाता है।
कृषि विपणन- इसके अंतर्गत वे सभी गतिविधियाँ या सेवाएँ आती हैं जो कृषि को खेत से लेकर उपभोक्ता तक पहुँचाने में करनी पड़ती हैं, जैसे— परिवहन, प्रसंस्करण, भण्डारण, ग्रेडिंग आदि।
राजस्थान में कृषि विपणन मंडियों की स्थापना तथा विकास हेतु राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड की स्थापना सन् 1974 में की गई। इसके पश्चात् बिचौलियों से किसानों का बचाव कर उचित मूल्य पर उनकी उपज को बेचने की सुविधा प्रदन की गई। किसान अपनी फसलों को मंडियों में ले जाते हैं, जहाँ बोली लगाई जाती है तथा सही दाम पर फसलों को खरीदा जाता है।
बड़ी मंडियों में दैनिक बाजार भावों की जानकारी मुहैया करवायी जाती है। सरकार ने कई मंडियों को ऑनलाइन भी कर दिया है जिससे कि उपज के मूल्य घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं।
आढ़तियों की भूमिका – लगभग सभी मंडियों में किसानों की सहायता हेतु आढ़तिये भी होते हैं। ये आढ़तिये दो तरह के होते हैं-
(i) कच्चे आढ़तिये – वे आढ़तिये जो किसानों की उपज को मंडी में बनी अपनी दुकानों पर बेचते हैं और अपनी आढ़त या कमीशन काटकर किसान को उसकी उपज के सही मूल्य का भुगतान कर देते हैं।
(ii) पक्के आढ़तिये- वे आढ़तिये जो कच्चे आढ़तियों से थोक व्यापारियों या मिल वालों के लिए उपज का क्रय करते हैं एवं सामग्रियों का संग्रह करते हैं।
न्यूनतम समर्थन मूल्य – यदि किसानों को कृषि उपज मंडियों में उनकी उपज का सही मूल्य भुगतान करने वाले क्रेता नहीं मिलते, तो सीधे सरकार द्वारा उनकी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद लिया जाता है। इस तरह के प्रत्यक्ष प्रयास द्वारा सरकार किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य प्रदान करती है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली – एक ओर जहाँ सरकार नियमित कृषि मंडियों के माध्यम से किसानों को उचित मूल्य दिलवाने का प्रयास करती है। वहीं दूसरी ओर, सरकार आम उपभोक्ता तक कृषि उपज एवं अन्य खाद्य वस्तुओं को पहुँचाने का भी प्रयास करती है। इसके लिए सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था की है।
उचित मूल्य की दुकान – इसके माध्यम से सरकार द्वारा किसानों से खरीदी गई कुछ उपजों, विशेषकर अनाजों को गरीब उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का प्रयास किया जाता है। इससे सभी को खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य की पूर्ति में सहायता प्राप्त होती है। यह कार्य खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामला विभाग द्वारा संपादित किया जाता है।
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गतिविधि
प्रश्न-
आपके क्षेत्र की मंडी में जाइये एवं वहाँ होने वाले क्रियाकलापों की सूची बनाइये एवं कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
क्षेत्रीय मंडी में होने वाले क्रियाकालपों की सूची
- मंडी में चारों ओर चहल-पहल है, सब कुछ गतिमान है।
- आढ़तिये अपने-अपने आढ़त पर विराजमान हैं।
- दुकानदार अपनी दुकानों को सजाने में संलग्न हैं। खरीददार लगातार मंडी में आ रहे हैं।
- कुछ लोग दुकानों पर सामानों का भाव पूछ रहे हैं।
- कहीं ट्रकों से खाद्य सामग्रियाँ उतारी जा रही हैं।
- कुछ छोटे विक्रेता रेहड़ी व ठेले पर साग-सब्जियाँ बेच रहे हैं।
- मंडी में एक ओर अनाज व परचून की दुकाने हैं, तो दूसरी ओर फल व सब्जियों की दुकानें सजी हैं।
- मंडी में शांति व सुरक्षा बनाए रखने हेतु मंडी समिति की ओर से सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।
- खरीददारों की मदद हेतु पूछताछ केन्द्र की व्यवस्था की गयी है।
- खरीदे गए सामग्रियों को मंडी के बाहर तक पहुँचाने हेतु दिहाड़ी मजदूर भी अपने कार्य हेतु तत्पर हैं।
- मंडी के गेट के समीप कुछ जलपान की दुकानें भी हैं, जहाँ लोग चाय-कॉफी पी रहे हैं।
- मंडी के बाहर छोटे वाहन सवारियों हेतु खड़े हैं, जो उनके खरीदे गए वस्तुओं को घर तक पहुँचा रहे हैं।