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Class 6 Hamara Rajasthan Chapter 4 Question Answer in Hindi राजस्थान में प्राचीन सभ्यता स्थल
हमारा राजस्थान कक्षा 6 पाठ 4 के प्रश्न उत्तर
I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर कोष्ठक में लिखिए-
1. निम्न में से किस जिले में कालीबंगा स्थित है?
(अ) जालौर
(ब) हनुमानगढ़
(स) सीकर
(द) उदयपुर
उत्तर:
(ब) हनुमानगढ़
2. अशोक का भाब्रू शिलालेख निम्न में से कहाँ प्राप्त हुआ?
(अ) बैराठ
(ब) गणेश्वर
(स) आहड़
(द) बालाथल
उत्तर:
(अ) बैराठ
II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. सीकर जिले में नीम का थाना तहसील में ……………. से एक विशिष्ट संस्कृति के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
उत्तर:
गणेश्वर
2. आहड़ बस्ती प्राचीनकाल में ……………. नगरी के नाम से जानी जाती थी।
उत्तर:
तांबावती
III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
राजस्थान में किन्हीं दो ताम्र पाषाणकालीन स्थलों के नाम लिखिये।
उत्तर:
(1) आहड़ (2) गणेश्वर।
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प्रश्न 2.
बालाथल सभ्यता के अवशेष किस जिले से प्राप्त हुए हैं?
उत्तर:
बालाथल सभ्यता के अवशेष उदयपुर जिले से प्राप्त हुए हैं।
प्रश्न 3.
आहड़ सभ्यता किस नदी के किनारे विकसित हुई ?
उत्तर:
आहड़ सभ्यता आहड़ (बेड़च) नदी के किनारे विकसित हुई।
IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
राजस्थान में सभ्यता के प्राचीन स्थल कौन-कौन से हैं? किन्हीं दो का वर्णन करें।
उत्तर:
राजस्थान में सभ्यता के अनेक प्राचीन स्थल हैं । इनमें से प्रमुख हैं— कालीबंगा, आघाटपुर या आहड़, बालाथल, गणेश्वर, बैराठ आदि। इनमें से दो का संक्षिप्त वर्णन निम्न प्रकार है-
(1) कालीबंगा – यह हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे स्थित है। यहाँ खुदाई में सिंधु-सरस्वती सभ्यता काल का एक नगर मिला है जिसके मकानों में ईंटों का प्रयोग किया गया है। गन्दे पानी के निकास के लिए नालियाँ बनी हुई हैं तथा अग्निकुण्ड (वेदिकाएँ) भी मिले हैं। यहाँ दूसरे टीले के उत्खनन में एक दुर्ग के अवशेष मिले हैं।
(2) आहड़ – आहड़ प्राचीन सभ्यता स्थल उदयपुर के पूर्व में बेड़च नदी के किनारे स्थित है। यहां से प्राप्त मकानों की दीवारें पत्थरों एवं मिट्टी से तथा छतें बाँस और केलू से बनी होती थीं। आहड़वासी बर्तन बनाने की कला में निपुण थे। यहाँ से उत्खनन में अनेक सामग्री प्राप्त हुई है। यह ताम्र- पाषाण कालीन सभ्यता थी।
प्रश्न 2.
कालीबंगा पुरास्थल की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
कालीबंगा पुरास्थल की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-
- यहाँ खुदाई में सिंधु-सरस्वती सभ्यता काल का एक नगर मिला है, जिसके मकानों में ईंटों का प्रयोग किया गया था।
- मकानों में चार-पाँच बड़े तथा कुछ छोटे कमरे होते थे।
- बस्ती के गंदे पानी के निकास के लिए यहाँ लकड़ी. व ईंटों की नालियाँ बनी हुई थीं।
- यहां चबूतरे भी मिले हैं, जिन पर अग्निकुण्ड (वेदिकाएँ) बने हुए हैं। शायद इनका प्रयोग धार्मिक कार्यों हेतु होता था।
- दूसरे टीले के उत्खनन में एक दुर्ग के अवशेष मिले हैं।
- इस क्षेत्र में नगर की प्राचीर के बाहर जोती हुई, कृषि भूमि के साक्ष्य भी मिले हैं।
- खुदाई में गाय के मुख वाले प्याले, तांबे के बैल, कांस्य के दर्पण, हाथी दाँत का कंघा, मिट्टी के बर्तन, काँच की मणियाँ, खिलौने अदि भी प्राप्त हुए हैं।
- कालान्तर में नदियों का पानी सूखने और मरुस्थल के बढ़ने से यह समृद्ध बस्ती उजड़ गई।
Class 6 Hamara Rajasthan Chapter 4 Important Question Answer in Hindi
बहुचयनात्मक प्रश्न-
1. प्रारम्भिक युग था-
(अ) लौह युग
(ब) ताम्र-कांस्य युग
(स) प्रस्तर युग
(द) कल-युग
उत्तर:
(स) प्रस्तर युग
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2. मनुष्य ने सर्वप्रथम कौनसी धातु का उपयोग प्रारम्भ किया?
(अ) ताँबे का
(ब) सोने का
(स) लोहे का
(द) एल्युमीनियम का
उत्तर:
(अ) ताँबे का
3. बुना हुआ वस्त्र निम्न में किस स्थान से प्राप्त हुआ है?
(अ) कालीबंगा
(ब) बालाथल
(स) आहड़
(द) गणेश्वर
उत्तर:
(ब) बालाथल
4. प्राचीन सभ्यता स्थल बागोर किस जिले में स्थित है?
(अ) जयपुर
(स) हनुमानगढ़
(ब) उदयपुर
(द) भीलवाड़ा
उत्तर:
(द) भीलवाड़ा
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. धीरे-धीरे मानव ने पत्थर के स्थान पर के उपकरण बनाने प्रारम्भ किये।
उत्तर:
धातु
2. कालीबंगा की नगर योजनाकी नगर योजना के समरूप दिखाई देती है।
उत्तर:
सिंधु घाटी
3. बर्तन बनाने की कला में दक्ष थे।
उत्तर:
आहड़वासी
4. गणेश्वर में उपकरण बहुतायत में मिले हैं।
उत्तर:
ताम्र।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
प्रारम्भिक युग को ‘प्रस्तर युग’ क्यों कहा गया है?
उत्तर:
प्रारम्भिक युग के प्राप्त उपकरणों में पत्थर के उपकरणों की संख्या अत्यधिक है, अतः इसे ‘प्रस्तर युग’ कहा गया है।
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प्रश्न 2.
राजस्थान में ताम्र सभ्यता के अवशेष किन क्षेत्रों से प्राप्त हुए हैं?
उत्तर:
राजस्थान में ताम्र सभ्यता के अवशेष कालीबंगा, गणेश्वर और आहड़ आदि क्षेत्रों से प्राप्त हुए हैं।
प्रश्न 3.
प्राचीन सभ्यता केन्द्र तिलवाड़ा किस जिले में स्थित है?
उत्तर:
प्राचीन सभ्यता केन्द्र ‘तिलवाड़ा’ बाड़मेर जिले में स्थित है।
प्रश्न 4.
कालीबंगा की समृद्ध बस्ती के उजड़ने का क्या कारण था?
उत्तर:
कालान्तर में नदियों का पानी सूखने तथा मरुस्थल के बढ़ने से कालीबंगा की समृद्ध बस्ती उजड़ गई।
उजड़ गई।
प्रश्न 5.
धूलकोट किसे कहते हैं?
उत्तर:
उदयपुर के पूर्व में आहड़ (बेड़च) नदी के किनारे दो टीले दिखाई देते हैं, जिसको स्थानीय लोग धूलकोट कहते हैं।
प्रश्न 6.
गणेश्वर की संस्कृति को क्या कहा जाता है ?
उत्तर:
गणेश्वर की संस्कृति को ताम्र संचयी संस्कृति कहा जाता है।
प्रश्न 7.
लौह कालीन इतिहास को जानने के लिए किन सभ्यता स्थलों के विवरण उल्लेखनीय हैं?
उत्तर:
लौह कालीन इतिहास को जानने के लिए बैराठ, सांभर, बागौर, रेढ़ आदि सभ्यता सथलों के विवरण उल्लेखनीय हैं।
प्रश्न 8.
बैराठ कस्बा किस जिले में स्थित है?
उत्तर:
बैराठ कस्बा जयपुर जिले में स्थित है।
प्रश्न 9.
पुरातत्व की दृष्टि से बैराठ के दो महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों के नाम बताइये।
उत्तर:
(1) बीजक की पहाड़ी (2) भीम डूंगरी।
प्रश्न 10.
जालोर जिले में कौनसा प्राचीन संस्कृति केन्द्र स्थित है?
उत्तर:
भीनमाल।
लघुत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
उत्खनन से कौनसे प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए?
उत्तर:
उत्खनन से अनेक प्रकार के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए। इनमें आवास स्थल, लकड़ी, अनाज, हड्डी और पत्थरों के अस्त्र-शस्त्र, बर्तन, सिक्के तथा अन्य उपकरण प्रमुख हैं।
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प्रश्न 2.
प्रस्तर युग में मनुष्य ने किस प्रकार के उपकरण बनाये तथा क्यों?
उत्तर:
प्रस्तर युग में मनुष्य ने कुल्हाड़ी, गंडासा, छुरा जैसे उपकरण बनाये। क्योंकि प्रस्तर युग में मानव अपनी आवश्यकता पूर्ति के लिए जानवरों का शिकार करता था अथवा जंगलों से कंदमूल एकत्रित कर अपना पेट भरता था।
प्रश्न 3.
राजस्थान में प्रस्तर युग के उपकरण मुख्यतः किस प्रकार के स्थानों से बहुतायत में मिले हैं?
उत्तर:
राजस्थान में प्रस्तर युग के उपकरण मुख्यतः बनास, गम्भीरी, बेड़च और चम्बल नदियों की घाटियों और शैलाश्रयों में बहुतायत में मिले हैं।
प्रश्न 4.
कालीबंगा की खोज किसने की? वर्णन कीजिये।
उत्तर:
कालीबंगा की खोज पुराविद अमलानंद घोष ने की। इन्होंने राजस्थान में दृषद्वती और सरस्वती नदी की घाटी में करीब दो दर्जन पुरास्थलों की खोज की। इनमें हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे स्थित कालीबंगा प्रमुख है। बाद में डॉ. बी. बी. लाल और बी. के. थापर के निर्देशन में यहाँ खुदाई की गई।
प्रश्न 5.
आघाटपुर के नामकरण का इतिहास समझाइये।
उत्तर:
उदयपुर के पूर्व में आहड़ (बेड़च) नदी के किनारे दो टीले दिखाई देते हैं, जिसको स्थानीय लाग धूलकोट कहते हैं। यह बस्ती पहते तांबावती के नाम से जानी जाती थी। यह ताँबे के औजारों के निर्माण का केन्द्र था। इसी कारण सम्भवतः इसका यह नाम पड़ा। 10वीं या 11वीं शताब्दी में इसे आघाटपुर के नाम से जाना जाने लगा।
प्रश्न 6.
गणेश्वर में मिट्टी के किस प्रकार के बर्तन मिले हैं?
उत्तर:
गणेश्वर में मिट्टी के दो प्रकार के बर्तन मिले हैं—
(1) हड़प्पा पूर्व संस्कृति के हल्के लाल रंग के पतले बर्तन।
(2) लाल चिकनी मिट्टी विशिष्ट चित्रकारी वाले मजबूत बर्तन। इन बर्तनों में मर्तबान, कलश, प्याले, तसले, ढक्कन हाडी प्रमुख हैं।
प्रश्न 7.
राजस्थान में सभ्यता के प्रमुख प्राचीन केन्द्र कौनसे हैं?
उत्तर:
राजस्थान में सभ्यता के अनेक प्राचीन केन्द्र हैं। इनमें हनुमानगढ़ जिले में स्थित कालीबंगा; उदयपुर जिले में स्थित आहड़ बालाथल, सीकर जिले में स्थित गणेश्वर; भीलवाड़ा जिले के बागोर, ओझियाणा जयपुर जिले में स्थित बैराठ, सांभर, जोधपुर, टोंक जिले में स्थित नगर, रेढ़: चित्तौड़ में नगरी; भरतपुर में नोह: जालोर में भीनमाल; राजसमन्द में पछमाता, गिलुण्ड आदि स्थल सभ्यता के प्रमुख प्राचीन केन्द्र हैं। ये पाषाण, ताम्र पाषाण तथा ताम्र-लौहकाल की संस्कृति को प्रकट करते हैं।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
प्राचीन पुरास्थल आहड़ की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन पुरास्थल आहड़ की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-
- यहां खुदाई में प्राप्त मकानों की दीवारें, पत्थरों एवं मिट्टी से बनी हुई हैं। जिनकी छत बांस और केलू से बनी होती थीं।
- बड़े कमरों के बीच में बाँस की परदी पर मिट्टी चढ़ाकर उसे छोटे-छोटे कमरों में विभाजित किया जाता था।
- मकानों में चार से छ: चूल्हे मिले हैं जो संयुक्त परिवार के साक्ष्य हैं।
- यहां उच्च कोटि के चावल उत्पादित होते थे।
- यहाँ एक भट्टीनुमा चूल्हा मिला है जिससे पता चलता है कि, यहाँ ताँबा पिघलाया जाता था।
- यहाँ लाल-भूरे मृद्भाण्ड मिले थे जो हाथ की सफाई तथा अलंकरण की दृष्टि से उत्कृष्ट थे।
- धूलकोट के 1951-52 में हुए उत्खनन में तश्तरियाँ, दीपक, धूपदानियाँ, कटोरियाँ, मटके, कलश, चूड़ियाँ, खिलौने, 26 किस्म की मणियाँ, 6 ताँबे की मुद्राएँ और तीन मुहरें प्राप्त हुई हैं।
- प्राकृतिक प्रकोप से इस सभ्यता का विध्वंस हुआ और इस सभ्यता के लोग उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़े तथा गिलुण्ड व भगवानपुरा जैसे स्थान बसाए।
प्रश्न 2.
सभ्यता के प्राचीन स्थल के रूप में बालाथल का वर्णन कीजए।
उत्तर:
बालाथल –
- बालाथल सभ्यता, ताम्रपाषाण कालीन आहड़ संस्कृति से सम्बन्धित है।
- यहाँ 11 कमरों के एक बड़े भवन एवं दुर्ग जैसे चिह्न भी प्राप्त हुए हैं।
- बालाथल में ताँबे के चाकू, कुल्हाड़ी, छैनी, बाण, जैसे उपकरण तथा कर्णफूल, गले के हार की लटकन आदि आभूषण मिले हैं।
- यहाँ के निवासियों में मिश्रित अर्थव्यवस्था प्रचलित थी। कृषि, पशुपालन तथा शिकार तीनों जीविका के साधन थे।
- बालाथल में लोहा गलाने की भट्टियों के चिह्न मिले हैं।
- बैराठ के अतिरिक्त बालाथल ही ऐसा स्थान है, जहाँ बुना हुआ वस्त्र प्राप्त हुआ है।
प्रश्न 3.
गणेश्वर के बारे में आप क्या जानते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गणेश्वर –
- गणेश्वर सीकर जिले के नीम का थाना तहसील में स्थित एक पुरास्थल है।
- यहाँ से एक विशिष्ट संस्कृति के अवशेष मिले हैं। इसे ताम्र संचयी संस्कृति कहा जाता है।
- यह संस्कृति पूर्वी राजस्थान एवं गंगाघाटी के क्षेत्र में पल्लवित हुई।
- गणेश्वर में ताम्र उपकरण बहुतायत में मिलते हैं। इसका कारण खेतड़ी ताम्र भण्डार की निकटता रही होगी।
- यहाँ ताम्र उपकरणों में बाण, छैनियाँ, मछली पकड़ने के कांटे, उस्तरे के फलक, अंगूठियाँ आदि प्रमुख हैं।
- सम्भवतः यहाँ से दोहरी पेचदार शिरावाली ताम्र पिनों को पश्चिमी तथा मध्य एशिया में निर्यात किया जाता था।
- गणेश्वर में मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं।
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प्रश्न 4.
पुरास्थल के रूप में बैराठ की विशेषताएँ बतलाइये।
उत्तर:
एक पुरास्थल के रूप में बैराठ की विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-
- बैराठ कस्बा जयपुर जिले में स्थित है जो कि हर युग में सभ्यता संस्कृति का प्रमुख केन्द्र रहा है।
- इसकी बीजक की पहाड़ी तथा भीम डूंगरी पुरातत्व की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
- महाभारत काल में यह विराटनगर के रूप में मत्स्य जनपद की राजधानी थी, जहाँ पाण्डवों ने अपने अज्ञातवास के अन्तिम दिन व्यतीत किये थे।
- मौर्य काल में भी यह एक प्रमुख केन्द्र था। यहाँ अशोक के दो स्तम्भ लेख (भाब्रू या बैराठ शिलालेख) एवं बौद्ध मठ के अवशेष प्राप्त होते हैं।
- यहाँ एक कमरे में 36 चाँदी की मुद्राएँ मिली हैं। जिनमें 8 पंचमार्क एवं 28 भारतीय यूनानी शासकों की हैं।
- खुदाई में स्वास्तिक तथा त्रिरत्न चक्र के चिह्न युक्त अलंकृत घड़े दीपक, नाचता हुआ पक्षी, पत्थर की संदूकें, लोहे की कीलें एवं हाथ से बना हुआ वस्त्र भी मिला है।