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Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 5 Question Answer in Hindi राजस्थान में व्यापार
हमारा राजस्थान कक्षा 7 पाठ 5 के प्रश्न उत्तर
I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के विकल्प को कोष्ठक में लिखिए-
1. राजस्थान में निम्नांकित में से कौन-सा उद्योग बड़े उद्योग की श्रेणी में आता है?
(अ) घाणी तेल
(ब) शहद
(स) सूती वस्त्र उद्योग
(द) खादी सिल्क
उत्तर:
(स) सूती वस्त्र उद्योग
2. कौन-सी वस्तु राजस्थान से निर्यात नहीं की जाती है?
(अ) ऊनं
(ब) जवाहरात
(स) पेट्रोल
(द) संगमरमर पत्थर
उत्तर:
(स) पेट्रोल
II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. ब्यावर में वर्ष 1889 में ……………. की स्थापना की गयी।
उत्तर:
सूती वस्त्र मिल
2. राजस्थान सरकार ने कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति का निर्माण वर्ष ……………. में किया है।
उत्तर:
2019
III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
राजस्थान में आयात की जाने की वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
राजस्थान में चावल, मिट्टी के तेल, खनिज तेल, बिजली के सामान, मशीनरी, परिवहन उपकरणों आद का आयात किया जाता है।
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प्रश्न 2.
राज्य में निर्यात संवर्धन की दो योजनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
- राज्य स्तरीय निर्यात पुरस्कार योजना।
- निर्यात प्रोत्साहन, प्रक्रिया एवं दस्तावेजीकरण।
IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
राजस्थान में कृषि आधारित उद्योगों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में कृषि आधारित उद्योगों को दो श्रेणी में बाँटा जा सकता है-
1. वृहत उद्योग – राजस्थान में कृषि आधारित बड़े उद्योगों में मुख्यतया सूती वस्त्र उद्योग तथा चीनी उद्योग सम्मिलित हैं। सूती वस्त्र उद्योग राजस्थान का प्राचीन एवं सर्वाधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। बड़े उद्योगों में सूती वस्त्रों का उत्पादन मशीनों द्वारा व्यापक स्तर पर किया जाता है। जबकि, चीनी उद्योग के अंतर्गत वृहद मिलों में गन्ने का रस प्रयोग कर चीनी एवं शक्कर का निर्माण किया जाता है।
2. लघु एवं कुटीर उद्योग – राजस्थान राज्य में कृषि आधारित लघु उद्योगों में मुख्यतया खाद्य तेल, गुड़, खांडसारी एवं दाल उद्योग शामिल हैं। जबकि राजस्थान खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड राज्य में खादी के साथ-साथ अन्य कुटीर उद्योगों का भी प्रबंधन करता है । कुटीर उद्योगों में सूती खादी, खादी सिल्क, घाणी तेल, गुड़ तथा खांडसारी, शहद आदि शामिल हैं।
प्रश्न 2.
आयात-निर्यात की परिभाषा एवं महत्त्व को समझाइये।
उत्तर:
आयात-निर्यात वस्तु विनिमय के अंतर्गत अन्य देश या राज्य से वस्तुओं को मंगवाना आयात कहलाता है एवं वस्तुओं को अन्य देश या राज्य में भेजना निर्यात कहलाता हैं।
महत्त्व – आयात-निर्यात राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं एवं स्थानीय जनजीवन के विकास व समुन्नति हेतु अति महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि सभी राज्यों या देशों के पास कुछ विशेष वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करने के लिए आवश्यक संसाधन और कौशल नहीं होता है।
प्रत्येक वस्तु का उत्पादन एक विशेष भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थिति में होता है। वस्तुओं के उत्पादन हेतु विशेष प्राकृतिक संसाधनों, अन्य कौशलों व कई बार विशेष तकनीक की भी आवश्यकता होती है, जो कि सर्वत्र उपलब्ध हो ऐसा जरूरी नहीं है। अतः किसी स्थान विशेष में जिन वस्तुओं का उत्पादन अधिक होता है उसे निर्यात किया जाता है एवं जिन वस्तुओं का उत्पादन कम होता है उसे आयात किया जाता है।
Class 7 Hamara Rajasthan Chapter 5 Important Question Answer in Hindi
I. निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-
1. राजस्थान में कृषि आधारित बड़े उद्योग हैं-
(अ) सूती वस्त्र उद्योग
(ब) चीनी या शक्कर उद्योग
(स) गुड़ या खांडसारी उद्योग
(द) दोनों (अ) व (ब)
उत्तर:
(द) दोनों (अ) व (ब)
2. राजस्थान में पहली सूती वस्त्र मिल की स्थापना किस वर्ष हुई?
(अ) 1880 में
(ब) 1888 में
(स) 1889 में
(द) 1988 में
उत्तर:
(स) 1889 में
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3. वस्तुओं का विनिमय निम्न से संबंधित है-
(अ) आयात
(ब) निर्यात
(स) दोनों (अ) व (ब)
(द) उत्पादन
उत्तर:
(स) दोनों (अ) व (ब)
4. राजस्थान में निम्न का आयात किया जाता है-
(अ) मिट्टी का तेल
(ब) खनिज तेल
(स ) चावल
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी
II. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए-
1. वर्तमान में ……………. को वस्त्र नगरी के नाम से भी जाना जाता है।
उत्तर:
भीलवाड़ा
2. चीनी मिलें ……………. उत्पादन क्षेत्रों के पास स्थापित की जाती हैं।
उत्तर:
गन्ना
3. जब व्यापार एक राज्य या अन्य राज्य से होता है तो यह ……………. व्यापार कहलाता है।
उत्तर:
अन्तर्राज्यीय
4. ……………. सरसों एवं ग्वार, अजवाइन, धनिया, मेथी, ईसबगोल, ऊन के उत्पादन में अग्रणी है।
उत्तर:
राजस्थान।
III. अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
राजस्थान के आर्थिक विकास में कौनसे क्षेत्र महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
राजस्थान के आर्थिक विकास में कृषि के साथ-साथ उद्योग एवं व्यापार का भी महत्त्वपूर्ण स्थान है।
प्रश्न 2.
राजस्थान में प्रथम सूती वस्त्र मिल की स्थापना कहाँ पर हुई?
उत्तर:
राजस्थान में पहली सूती वस्त्र मिल “द कृष्णा मिल्स लि.” की स्थापना ब्यावर में वर्ष 1889 में की गई थी।
प्रश्न 3.
राजस्थान में कुटीर उद्योगों का प्रबंधन कौन करता है?
उत्तर:
राजस्थान खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड राज्य में खादी के साथ अन्य कुटीर उद्योगों के प्रबंधन का भी कार्य करता है।
प्रश्न 4.
राजस्थान शुद्ध रूप से किन वस्तुओं का आपूर्तिकर्ता है?
उत्तर:
राजस्थान शुद्ध रूप से ज्वार एवं बाजरा, तिलहन, कच्चा सूत, खली, संगमरमर और पत्थर, बांस, सरसों का तेल, निर्मित सूत आदि वस्तुओं का आपूर्तिकर्ता है।
IV. लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
राजस्थान के सूती वस्त्र उद्योग पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सूती वस्त्र उद्योग – यह राजस्थान में कृषि आधारित मुख्य वृहद उद्योगों में से एक है। सूती वस्त्र उद्योग राजस्थान का प्राचीन, परम्परागत, संगठित एवं सर्वाधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। इस हेतु कपास की खेती की जाती है, जब कपास पक जाते हैं तो उसे बीज से अलग कर रोएं निकाल लिए जाते हैं। रुई को छोटी-छोटी गुच्छी बनाकर चरखे पर काती जाती है जिससे सूत के धागे प्राप्त होते हैं। इन धागों को पहले रंग कर ताने बनाए जाते हैं, फिर ताने को खड्डी पर चढ़ाकर कपड़ा बना लिया जाता है। बड़े उद्योगों में सूती वस्त्रों का निर्माण मशीनों द्वारा बड़े स्तर पर किया जाता है।
राजस्थान में प्रथम सूती वस्त्र मिल की स्थापना सन् 1889 में ब्यावर में की गई। वर्तमान में ब्यावर, भीलवाड़ा, जयपुर, किशनगढ़, पाली, हनुमानगढ़, कोटा, गंगानगर, विजयनगर आदि में सूती वस्त्र की मिलें स्थापित हैं। भीलवाड़ा को वस्त्र नगरी के नाम से भी जाना जाता है।
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प्रश्न 2.
प्रसंस्करण व निर्यात संवर्धन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
प्रसंस्करण – यह ऐसी प्रक्रिया होती है जिसके द्वारा शीघ्र नष्ट हो जाने वाले कृषि उत्पादों को खाद्य पदार्थ के रूप में रूपांतरित किया जाता है जिससे कि उनका दीर्घावधिक उपयोग हो सके।
निर्यातन संवर्धन – राजस्थान राज्य कई वस्तुओं के उत्पादन में अग्रणी है तथा यहाँ निर्यात की कई संभावनाएँ हैं, किन्तु पर्याप्त निर्यात नहीं हो पा रहा है। इसलिए सरकार ने निर्यात संवर्धन की कई योजनाएँ लागू की हैं, जैसे—- राज्य स्तरीय निर्यात पुरस्कार योजना। इसके साथ-साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत उद्यमियों को अपना निर्यात व्यापार प्रारम्भ करने हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाता है।
राजस्थान काफी समृद्ध है, किन्तु आर्थिक विकास हेतु राज्य में प्रसंस्करण एवं निर्यात संवर्धन को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
V. निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
आयात-निर्यात से क्या अभिप्राय है? राजस्थान के संदर्भ में इस पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
आयात-निर्यात से अभिप्राय-अन्य देशों एवं राज्यों से विभिन्न वस्तुओं को मंगवाना आयात कहलाता है जबकि कुछ वस्तुओं को अपने यहाँ से अन्य देशों एवं राज्यों को भेजना निर्यात कहलाता है।
प्रत्येक वस्तु का उत्पादन एक विशेष भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थिति में किया जाता है। किसी भी वस्तु के उत्पादन हेतु विशेष प्राकृतिक संसाधनों, शारीरिक श्रम, विशेष कौशल व कई बार कुछ तकनीकों की भी आवश्यकता होती है, जो हर राज्य या देश के पास उपलब्ध हो ऐसा जरूरी नहीं है। अतः किसी स्थान विशेष में जिन वस्तुओं का उत्पादन बहुतायत होता है उसे अन्य स्थानों पर बेचा जाता है तथा जिन वस्तुओं का उत्पादन कम होता है उसे अन्य स्थानों से खरीदा जाता है। इस प्रकार वस्तुओं का विनिमय करना व्यापार कहलाता है। व्यापार राज्यों के मध्य होता है तो अन्तर्राज्यीय व्यापार कहलाता है और जब यह राष्ट्रों के मध्य होता है तो अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है।
राजस्थान में आयात-निर्यात की स्थिति – राजस्थान राज्य में जो भी वस्तुएँ उत्पादित की जाती हैं, चाहे कृषि उत्पाद हों, वनोत्पाद हों या फिर औद्योगिक उत्पादन, राज्य में एक स्थान से दूसरे स्थान को भेजी जाती हैं। राजस्थान सरसों, ग्वार, अजवाइन, धनिया, मेथी, ईसबगोल, व ऊन के उत्पादन में अग्रणी है। इसके साथ ही जीरा, मोटे अनाज, सोयाबीन, दालों, तिलहन, सब्जियों, लहसुन, संतरे व दुग्ध के उत्पादन में भी राज्य का प्रमुख योगदान है। इनमें से कई वस्तुओं को वैसे का वैसे जबकि कुछ को प्रसंस्कृत करके राज्य से बाहर भेजा जाता है।
राजस्थान शुद्ध रूप से ज्वार, बाजरा, तिलहन, कच्चा सूत, खली, संगमरमर, पत्थर, बांस, सरसों का तेल, निर्मित सूत आदि का आपूर्तिकर्ता है तथा इनका निर्यात अन्य राज्यों को किया जाता है। जबकि अन्य राज्यों से चावल, मिट्टी के तेल, खनिज तेल, बिजली के सामान, मशीनरी, परिवहन उपकरणों आदि का आयात किया जाता है। राजस्थान से अनेक वस्तुएँ दूसरे देशों को भी निर्यात की जाती हैं। जिनमें शामिल हैं— कपड़ा, जवाहरात एवं आभूषण, आयामी संगमरमर पत्थर, ग्रेनाइट तथा अभ्रक पत्थर की वस्तुएँ, ऊन एवं ऊनी कपड़े, रासायनिक सामग्रियाँ, हस्तशिल्प, चमड़ा एवं चर्म उत्पाद, तैयार वस्त्र, अभियांत्रिकी, कृषि एवं खाद्य उत्पाद, दरियाँ एवं कालीन, धातु (लौह), इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर इत्यादि।
इस प्रकार, राजस्थान राज्य बहुत-सी वस्तुओं के उत्पादन में अग्रणी है तथा यहाँ निर्यात की काफी संभावनाएँ भी हैं, किन्तु पर्याप्त निर्यात हो नहीं पा रहा है। अतः सरकार ने निर्यात संवर्धन की कई योजनाएँ लागू की हैं, जैसे- ‘राज्य स्तरीय निर्यात पुरस्कार योजना’। साथ ही, ‘निर्यात प्रोत्साहन, प्रक्रिया एवं दस्तावेजीकरण’ पर प्रशिक्षण कर्यक्रम के तहत उद्यमियों को अपना निर्यात व्यापार शुरू करने हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति, 2019 का निर्माण किया है जिसके अंतर्गत राज्य में कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि उत्पादों की निर्यात संभावनाओं को तलाशकर उन अवसरों का लाभ उठाने के प्रावधान करती है।
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गतिविधि-
प्रश्न- फल-सब्जी, डेयरी उत्पाद का प्रसंस्करण किया जाता है, जिसे आप पैकेट बन्द भोजन, पेय पदार्थों के रूप में उपयोग करते हैं।
शिक्षक की सहायता से प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की सूची बनाइए।
उत्तर:
प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की सूची
खाद्य पदार्थ
- डेयरी उत्पाद (दूध, दही, क्रीम, घी, पनीर, चीज आदि)
- फ्रोजन फल व सब्जियाँ, मांस
- कृत्रिम मक्खन, मूँगफली का मक्खन
- डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, सब्जियाँ
- फास्ट फूड (पिज्जा, बर्गर, हैमबर्गर, सैंडविच आदि)
- पैक पेय जल/पेय पदार्थ (सूप, शोरबा, जूस)
- कोल्ड ड्रिंक, कृत्रिम रस, कृत्रिम नींबू पानी
- अचार, मुरब्बा, चटनी, सिरका, सॉस, केचप, मेयोनेज आदि
- मिठाइयाँ, कलाकन्द, मिष्ठान
- कैंडी, टॉफी, चॉकलेट आदि
- चीनी, गुड़, खांडसारी आदि
- बिस्कुट, ब्रेड, टोस्ट
- सूखे फल व मेवे
- केक, पेस्ट्री, पैनकेक
- नमकीन, ढोकला, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स आदि