RBSE Solutions for Class 8 Social Science Chapter 20 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम

Rajasthan Board RBSE Class 8 Social Science Chapter 20 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम

RBSE Solutions for Class 8 Social Science

RBSE Class 8 Social Science 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम Intext Questions and Answers

RBSE Solutions for Class 8 Social Science Chapter 20 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम

पृष्ठ – 132

गतिविधि

प्रश्न 1.
राजस्थानी लोककवियों द्वारा 1857 पर लिखी गई कुछ अन्य रचनाओं का संकलन कीजिए।
उत्तर:
1. दगो धरियो डूंग सूं सौबे पाकडै छाँवणी दोला, लोह लाल लंगरां अमाप फौजांलेर। लाखाँ मुखाँ आठों सोवाऊपरै सोभा गलीधो जोम अंगी सींग ने आगरै कीधो जे – कवि राज बाँकी दास

2. फिरंगा तणी अणवा फजेतु करवाने कस – कस कमर, जण – जण वण जंग जीत, लड्या ओ धरा लाडला।
– कविराज शंकर दान

3. जीते, फिरंगाण साहाँ केता वेडया जाडा।
थरु, किल्ले भेडया समरा भडा थाट॥
जलावन्द जाहू वार छडेया लाठ नूं जंगा।
केवाड़ पापसूं शेखा हंडिया कपाट॥
– डूंगरसिंह जवाहर सिंह शेखावत

राजस्थानी लोक कवियों की अन्य प्रमुख रचनाएँ
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पृष्ठ – 138

प्रश्न 2.
क्रान्तिकारियों के चित्र संकलित कीजिए।
उत्तर:
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प्रश्न 3.
क्रान्ति से सम्बन्धित लोकगीतों का संकलन करें। अपने शिक्षक व अभिभावक का सहयोग प्राप्त करें।
संकेत:
विद्यार्थी स्वयं करें।

RBSE Class 8 Social Science 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम Text Book Questions and Answers

प्रश्न एक व दो के सही उत्तर चुनिए –

प्रश्न 1.
1857 क्रान्ति का श्रीगणेश करने की तिथि क्या तय की गई थी?
(अ) 8 अप्रैल
(ब) 29 मार्च
(स) 31 मई
(द) 9 मई।
उत्तर:
(स) 31 मई

प्रश्न 2.
कोटा में क्रान्ति का नेतृत्व किसने किया?
(अ) जयदयाल
(ब) लक्ष्मीबाई
(स) कुशाल सिंह
(द) कुँअर सिंह
उत्तर:
(अ) जयदयाल

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प्रश्न 3.
1857 की क्रान्ति राजस्थान में कहाँ से शुरू हुई?
उत्तर:
1857 की क्रान्ति राजस्थान में नसीराबाद से शुरू हुई।

प्रश्न 4.
कोटा में किस अंग्रेज अधिकारी की हत्या की गई?
उत्तर:
कोटा में मेजर बर्टन की हत्या की गई।

प्रश्न 5.
1857 की क्रान्ति में गीत रचने वाले कवि कौन – कौन थे?
उत्तर:
कवि बाँकीदास, सूरजमल मीसण, आढ़ा जवान जी, आसिया बुधजी आदि।

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प्रश्न 6.
1857 की क्रान्ति में शहीद होने वाला प्रथम क्रान्तिकारी कौन था?
उत्तर:
1857 की क्रान्ति में शहीद होने वाला प्रथम क्रान्तिकारी मंगल पाण्डे था।

प्रश्न 7.
आउवा में हुई प्रमुख क्रान्ति की घटनाओं पर टिप्पणी लिखो।
उत्तर:
एरिनपुरा के सैनिकों की भेंट ‘खेरवा’ नामक स्थान पर आउवा (पाली) के ठाकुर कुशाल सिंह से हुई। कुशाल सिंह की सेना ने 8 सितम्बर, 1857 को ‘बिथोड़ा’ नामक । ‘स्थान पर जोधपुर राज्य की सेना को पराजित किया। ए. जी. जी. जार्ज लॉरेंस स्वयं सेना लेकर आउवा पहुँचा, किन्तु 18 सितम्बर 1857 को वह भी पराजित हुआ। जोधपुर का पॉलिटिकल एजेन्ट मेकमोंसन क्रान्तिकारियों द्वारा मारा गया। उसका सिर आउवा के किले के द्वार पर लटका दिया गया। जनवरी 1858 में होम्स के नेतृत्व में एक सेना ने आउवा पर आक्रमण कर दिया। अंग्रेजों ने आउवा के किलेदार को रिश्वत देकर किले के द्वार खुलवा लिए एवं किले पर अधिकार कर लिया।

प्रश्न 8.
डूंगजी – जवाहर जी का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के पूर्व राजस्थान के सीकर क्षेत्र में ड्रैगजी व जवाहर जी नामक काका – भतीजा प्रसिद्ध सेनानी रहे। इन्होंने अंग्रेजों की बीकानेर व जोधपुर की सेना से संघर्ष किया। अपने बलिदान के कारण ये लोग गीतों में अमर हो गए।

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प्रश्न 9.
1857 की क्रान्ति के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1857 की क्रान्ति के कारण-1857 की क्रान्ति के अनेक कारण थे जिनमें से कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित
1. राजनीतिक कारण:
लार्ड क्लाइव ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी को राजनीतिक संस्था बना दिया। वेलेजली और हेस्टिंग्स ने अंग्रेजी राज्य में अनचित ढंग से राज्य वद्धि के प्रयास किए। डलहौजी ने साम्राज्य विस्तार की नीति अपनायी। जिसमें गोद निषेध नीति प्रमुख थी। मुगल बादशाह का अपमान किया गया। अंग्रेजों की गलत नीतियों से शासक, सामन्त एवं जन-सामान्य में असन्तोष व्याप्त हो गया।

2. सामाजिक और धार्मिक कारण:
अंग्रेजों ने भारतीयों के जीवन में हस्तक्षेप किया और उनकी परम्पराओं का विरोध किया। अंग्रेजों ने भारतीयों के देवी-देवताओं का भी अपमान किया। उन्होंने ईसाई धर्म के प्रचार की खुली छूट दे दी। वे तरह – तरह के प्रलोभन देकर भारत के कमजोर वर्ग के लोगों को धर्म-परिवर्तन के लिए उकसाने लगे। इन कारणों के चलते भारतीयों में असन्तोष व्याप्त हो गया।

3. आर्थिक कारण:
अंग्रेजों ने सत्ता प्राप्ति के बाद भारत का बेरहमी से शोषण किया। अंग्रेजों ने रियासतों को खूब लटा तथा भारी-भरकम राजस्व व लगान वसला। तरह-तरह के कर लगाने से भारतीय व्यापारियों और किसानों की स्थिति बदतर हो गई।

4. सैनिक कारण:
अनेक सैनिक अपनी – अपनी परम्पराओं, वेशभूषा और खान-पान को जारी रखना चाहते थे किन्तु अंग्रेजों ने उनकी परम्पराओं पर प्रतिबन्ध लगा दिया। भारतीय सैनिकों को कम वेतन दिया जाता था तथा उन्हें उच्च पद नहीं दिए जाते थे। एक तात्कालिक कारण यह भी था कि सैनिकों को चर्बी लगे कारतूस दाँत से काटने पड़ते थे जिसे भारतीय सैनिक गलत मानते थे। इस प्रकार सैनिकों में विद्रोह उत्पन्न हो गया।

प्रश्न 10.
1857 की क्रान्ति की मुख्य घटनाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1857 की क्रान्ति की मुख्य घटनाएँ निम्नलिखित
1. क्रान्ति की योजना नाना साहब पेशवा और उनके सहयोगी अजीमुल्ला तथा रंगोजी बापू ने मुख्य रूप से तैयार की थी। मुगल बादशाह बहादुरशाह के नेतृत्व में 31 मई 1857 ई. के दिन सम्पूर्ण भारत में एक साथ क्रान्ति शुरू होनी थी।

2. यह योजना 29 मार्च को बैरकपुर में हुई चर्बी लगे कारतूस की घटना ने छिन्न-भिन्न कर दी। इस घटना में मंगल पाण्डे ने दो अंग्रेज अधिकारियों को मार दिया। मंगल पाण्डे को गिरफ्तार कर 8 अप्रैल को फाँसी दे दी गई।

3. क्रान्तिकारी सैनिकों ने दिल्ली को ओर कूच किया और 11 मई को दिल्ली पर अपना अधिकार कर बहादुर शाह को सम्राट घोषित कर दिया।

4. नाना साहब और तात्या टोपे ने कानपुर पर अधिकार कर लिया। अवध में बेगम हजरत महल के नेतृत्व में अवध की जनता ने संघर्ष आरम्भ किया। झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई, बिहार में बाबू कुँवर सिंह, असम में दीवान मणिराम व कंदर्पेश्वर सिंह, उड़ीसा में सुरेन्द्र शाही व उज्ज्वल शाही ने क्रान्ति का नेतृत्व किया।

5. वर्मा व लंका से सेनाओं को बुला लिया। पंजाब की सिख सेना व नेपाल की गोरखा सेना भी अंग्रेजों के साथ थी। सेनापति जनरल नील ने बनारस और इलाहाबाद को क्रान्तिकारियों से मुक्त करवाया। नाना साहब की सेना भी कानपुर में पराजित हो गई। बहादुरशाह को दिल्ली पर अधिकार कर कैद कर लिया गया। लक्ष्मीबाई और तांत्या टोपे ने अंग्रेजों का जमकर मुकाबला किया।

6. ग्वालियर को अंग्रेजी सेना ने घेर लिया किन्तु रानी लक्ष्मीबाई वहाँ से बच निकली। काफी दूर जाकर रानी अंग्रेजों से लड़ती हुई वीरगति को प्राप्त हुईं। विश्वासघातियों के कारण तात्या टोपे भी पकड़े गए और उन्हें भी फाँसी दे दी गई।

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प्रश्न 11.
1857 की क्रान्ति के परिणाम लिखिए।
उत्तर:
यद्यपि 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम असफल रहा परन्तु इसके परिणाम दूरगामी रहे। गोद-निषेध की नीति को समाप्त कर राजाओं को गोद लेने की अनुमति दी गई। भारत कम्पनी के शासन के स्थान पर ब्रिटिश क्राउन के सीधे नियन्त्रण में आ गया। रानी विक्टोरिया ने अपने घोषणा पत्र (1858 ई.) में आश्वासन दिया कि सभी देशी राजाओं का अस्तित्व बना रहेगा। जागीरदार वर्ग ने विद्रोह के दौरान अंग्रेज विरोधी भूमिका निभाई थी।

अतः अंग्रेजों ने सामन्त वर्ग की शक्ति समाप्त करने की नीति अपनायी। सामन्तों से सैनिक सेवा के बदले अब नकद राशि ली जाने लगी। प्रशासन में सामन्तों की भूमिका को समाप्त करने हेतु नौकरशाही में अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त अनुभवी एवं स्वामिभक्त व्यक्तियों की नियुक्ति प्रारम्भ हुई। इसके फलस्वरूप राजभक्त अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त मध्यम वर्ग का विकास हुआ। इस क्रान्ति ने भारत में आगामी ब्रिटिश नीतियों को भी व्यापक रूप से प्रभावित किया। लार्ड डफरिन ने अपने कार्यालय में कांग्रेस की स्थापना की अनुमति प्रदान की।

इसके पीछे उद्देश्य यह था कि भारतीयों को अपनी बात कहने का कोई मंच मिल जाए ताकि पुनः 1857 ई. जैसी क्रान्ति न हो। बाद में स्वतन्त्रता सेनानियों ने 1857 की क्रान्ति से प्रेरणा ली। इस क्रान्ति के परिणाम जो भी रहे हों, किन्तु यह सत्य है कि इसने ब्रिटिश साम्राज्यवाद एवं औपनिवेशिक शासन की जड़ों को हिला दिया था।

RBSE Class 8 Social Science 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
प्लासी के युद्ध में विजय प्राप्त करने के पश्चात् अंग्रेजों ने अपने शासन की नींव डाली …………………..
(अ) बिहार में
(ब) महाराष्ट्र में
(स) बंगाल में
(द) उड़ीसा में
उत्तर:
(स) बंगाल में

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Question 2.
अंग्रेजी राज्य के विरुद्ध सबसे बड़ी और देशव्यापी क्रान्ति हुई …………………..
(अ) 1823 ई. में
(ब) 1857 ई. में
(स) 1866 ई. में
(द) 1947 ई. में।
उत्तर:
(ब) 1857 ई. में

Question 3.
1857 की क्रांति में प्रमुख धार्मिक कारण क्या था?
(अ) गोद निषेध प्रथा
(ब) पैतक अधिकार से वंचित करना
(स) ईसाई धर्म का जबरदस्ती रोपण
(द) दस्तकारों पर अत्याचार।
उत्तर:
(स) ईसाई धर्म का जबरदस्ती रोपण

Question 4.
कवि बांकीदास का सम्बन्ध कहाँ से है?
(अ) जोधपुर से
(ब) बूंदी से
(स) कोटा से
(द) अजमेर से
उत्तर:
(अ) जोधपुर से

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Question 5.
31 मई 1857 की तय क्रान्ति के प्रतीक चिहन थे …………………..
(अ) हँसिया और त्रिशूल
(ब) कमल का फूल व चपाती
(स) हाथ का पंजा और बन्दूक
(द) बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी
उत्तर:
(ब) कमल का फूल व चपाती

Question 6.
क्रांतिकारियों ने बहादुरशाह को सम्राट कब घोषित किया?
(अ) 9 मई को
(ब) 11 मई को
(स) 31 मई को
(द) 5 जून को
उत्तर:
(ब) 11 मई को

Question 7.
नीमच में क्रांति कब हुई?
(अ) 31 मई को
(ब) 2 जून को
(स) 3 जून को
(द) 15 जून को
उत्तर:
(स) 3 जून को

Question 8.
जनरल राबर्ट ने कोटा को क्रांतिकारियों से कब मुक्त करवाया?
(अ) अक्टूबर 1857 में
(ब) मार्च 1958 में
(स) दिसम्बर 1858 में
(द) जनवरी 1860 में।
उत्तर:
(ब) मार्च 1958 में

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Question 9.
डूंगजी व जवाहर जी थे …………………..
(अ) स्वतन्त्रता सेनानी
(ब) साहित्यकार
(स) अंग्रेज सेना के अधिकारी
(द) सामन्त
उत्तर:
(अ) स्वतन्त्रता सेनानी

स्तम्भ’अ’को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
1. (b)
2. (c)
3. (d)
4. (a)

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उत्तर:
1. (b)
2. (c)
3. (d)
4. (a)

रिक्त स्थानों की पर्ति कीजिए –

  1. ……………….. ई. में प्लासी के युद्ध में विजय प्राप्त करके अंग्रेजों ने बंगाल में अपने साम्राज्य की नींव डाली।
  2. धार्मिक क्षेत्र में सरकार ने ……………….. धर्म के प्रचार की छूट दे दी।
  3. ……………….. को बैरकपुर की छावनी में सैनिकों को चर्बी चढ़े कारतूस वितरित किए गए।
  4. कानपुर में नाना साहब एवं ……………….. ने क्रान्ति का नेतृत्व किया।
  5. असम में ……………….. ने क्रान्ति का नेतृत्व किया।

उत्तर:

  1. 1757
  2. ईसाई
  3. 29 मार्च
  4. तात्याटोपे
  5. दीवान मणिराम।

अति लघत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अंग्रेजी राज्य के विरुद्ध सबसे बड़ी और देशव्यापी क्रान्ति कब हुई?
उत्तर:
1857 ई. में।

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प्रश्न 2.
भारत के शासक अंग्रेजों की किस नीति से चिंतित हो गए?
उत्तर:
भारत के शासक अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति से चिंतित हो गए।

प्रश्न 3.
भारतीय दस्तकारों ने अपना पुश्तैनी कार्य क्यों छोड़ दिया था?
उत्तर:
अंग्रेजों ने इंग्लैण्ड में बने माल को भारत में खपाने के लिए भारतीय वस्त्रों पर भारी कर लगाया और दस्तकारों पर अत्याचार किया जिससे उन्होंने अपना पुश्तैनी कार्य छोड़ दिया।

प्रश्न 4.
अंग्रेजी सेना में अधिकांश सैनिक कहाँ के थे?
उत्तर:
अंग्रेजी सेना में अधिकांश सैनिक अवध के थे।

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प्रश्न 5.
अंग्रेजी सेना के भारतीय सैनिकों में असन्तोष का सबसे बड़ा कारण क्या था?
उत्तर:
कारतूसों पर गाय और सूअर की चर्बी लगी होना और उन कारतूसों को दाँतों से काटना सैनिकों में असन्तोष का सबसे बड़ा कारण बना।

प्रश्न 6.
राजपूताने के साहित्यकारों ने 1857 के संग्राम में क्या भूमिका निभाई?
उत्तर:
राजपूताने के साहित्यकारों ने शासकों, सामन्तों एवं जनता को प्रेरित कर 1857 के संग्राम के लिए माहौल तैयार किया।

प्रश्न 7.
31 मई, 1857 ई. की क्रान्ति की योजना किसने तैयार की थी?
उत्तर:
31 मई, 1857 ई. की क्रान्ति की योजना नाना साहब पेशवा और उनके सहयोगी अजीमुल्ला तथा रंगोजी बापू ने मुख्य रूप से तैयार की थी।

प्रश्न 8.
मंगल पांडे को फाँसी कब दी गयी?
उत्तर:
मंगल पांडे को 8 अप्रैल, 1857 में फाँसी दी गयी।

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प्रश्न 9.
अवध में किसके नेतृत्व में जनता ने संघर्ष आरम्भ कर दिया?
उत्तर:
अवध में बेगम हजरत महल के नेतृत्व में वहाँ की जनता ने संघर्ष आरम्भ कर दिया।

प्रश्न 10.
राजस्थान के नसीराबाद में किन सैनिकों ने अपने अधिकारियों पर हमला कर दिया।
उत्तर:
नसीराबाद में तैनात पन्द्रहवीं नेटिव बंगाल इन्फैंट्री के सैनिकों ने।

प्रश्न 11.
आबू में अंग्रेजों का विरोध किसने किया?
उत्तर:
21 अगस्त, 1857 को एरिनपुरा छावनी में तैनात एक टुकड़ी ने आबू में अंग्रेजों का विरोध कर दिया।

प्रश्न 12.
क्रांतिकारियों ने दिल्ली कूच से पूर्व क्या नारा दिया था?
उत्तर:
क्रांतिकारियों ने दिल्ली कूच से पूर्व “चलो दिल्ली मारो फिरंगी’ का नारा दिया था।

प्रश्न 13.
कुशाल सिंह की सेना ने कब और कहाँ जोधपुर की सेना को परास्त किया?
उत्तर:
कुशाल सिंह की सेना ने 8 सितम्बर, 1857 को ‘बिथोड़ा’ नामक स्थान पर जोधपुर राज्य की सेना को बुरी तरह परास्त किया।

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प्रश्न 14.
रानी विक्टोरिया ने अपने घोषणा पत्र (1858 ई.) में क्या आश्वासन दिया?
उत्तर:
रानी विक्टोरिया ने अपने घोषणा पत्र में आश्वासन दिया कि सभी देशी राजाओं का अस्तित्व बना रहेगा।

प्रश्न 15.
1857 के विद्रोह को किसने प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम कहा?
उत्तर:
सर्वप्रथम वीर सावरकर ने अपने अकाट्य तर्कों द्वारा साबित कर दिया कि 1857 का विद्रोह भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम था।

प्रश्न 16.
कौन – सी देवी प्रतिमा 1857 ई. के स्वतंत्रता संग्राम में सेनानियों की प्रेरणा स्रोत रही?
उत्तर:
आउवा की कुलदेवी सुगाली माता की प्रतिमा।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
डलहौजी की गोद-निषेध नीति क्या थी? समझाइए।
उत्तर:
डलहौजी ने साम्राज्य विस्तार के लिए एक नई नीति बनाई। जिन देशी राजाओं की कोई अपनी संतान नहीं थी, उनके राज्यों को अंग्रेजी राज्य में मिलाना शुरू कर दिया। हिन्दुओं में गोद लेने की प्रथा रही है। पुत्र नहीं होने की स्थिति में राजा अपनी रिश्तेदारी या बिरादरी में से किसी लड़के को अपना उत्तराधिकारी बनाने के लिए गोद लेते थे। राजा के मरने के बाद वही लड़का राज्य का स्वामी होता था। डलहौजी ने इस प्रथा को अमान्य कर दिया। यही नीति ‘गोद – निषेध’ नीति कहलाई। इस नीति का प्रभाव अनेक राज्यों पर पड़ा, जिनमें सम्बलपुर, जेतपुर, सतारा, नागपुर, बिठूर और झाँसी आदि मुख्य थे।

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प्रश्न 2.
अंग्रेजी शासन से सामन्त वर्ग क्यों नाराज था? समझाइए।
उत्तर:
शासकों के अतिरिक्त सामन्त वर्ग भी अंग्रेजों से नाराज था। यहाँ का सामन्त वर्ग अपनी जनता से कर वसूल करता था और राजा को देता था। युद्ध के समय राजा को सैनिक शक्ति प्रदान करता था। अतः दरबार में सामन्तों का सम्मान था। किन्तु सहायक सन्धियों के बाद शासकों की सामन्तों पर से निर्भरता खत्म हो चुकी थी व राजाओं ने सामन्तों के अधिकारों में कटौती कर दी थी। सामन्त इसका कारण अंग्रेजों को मानते थे। जैसे मेवाड़ के रावत केसरी सिंह (सलूम्बर) महाराणा के दुर्व्यवहार को अंग्रेजों की शह मानते थे। इसी प्रकार जोधपुर के ठाकुर अजीत सिंह, जयपुर में दीवान अँथाराम आदि अंग्रेजों से नाराज हो गए।

प्रश्न 3.
सन् 1857 ई. की क्रान्ति के सैनिक कारणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
1857 ई. की क्रांति के सैनिक कारण-तत्कालीन अंग्रेजी सेना में अधिकांश सैनिक अवध के थे। अवध को अंग्रेजी राज्य में मिलाने के बाद इन सैनिकों के मनोबल को बड़ा धक्का लगा। उनके मन में विद्रोह के अंकुर प्रस्फुटित होने लगे। कई सैनिक अपनी परम्पराओं के अनुसार रहन – सहन व खान – पान रखना चाहते थे। वे बाल-दाढ़ी रखते और पगड़ी या साफा बाँधते थे। अंग्रेजों ने इस पर पाबंदी लगा दी, जिसे सैनिकों ने अपना घोर अपमान समझा।

भारतीय सैनिकों को मान्य परम्पराओं के विरुद्ध बाह्य देशों में भेजा जाने लगा। इन्हें वेतन भी कम मिलता था और वर्दी के पैसे भी स्वयं देने पडते थे। डाक द्वारा उनका नि:शुल्क पत्र व्यवहार भी बन्द कर दिया गया। सैनिकों में असन्तोष का सबसे बड़ा कारण कारतूसों पर गाय और सूअर की चर्बी का होना था, जिन्हें काम में लेने से पहले दाँतों से काटना पड़ता था।

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प्रश्न 4.
1857 ई. की क्रान्ति में भूमिका निभाने वाले साहित्यकारों के नाम लिखकर उनके योगदान को समझाइए।
उत्तर:
अंग्रेजों की सन्धियों के बाद राजपूताने में अंग्रेजों की उपस्थिति मात्र से साहित्यकार उद्वेलित एवं व्यथित थे। जोधपुर के बाँकीदास, बूंदी के सूरजमल मीसण, आढ़ा जवानजी, बारहठ दुर्गादत्त, आढ़ा जादूराम, आसिया बुध जी, गोपालदान दधिवाड़िया आदि न जाने कितने ही साहित्यकार थे, जिन्होंने अंग्रेजों की घोर निन्दा की।

अपनी जनता एवं शासकों को उनके विरुद्ध संघर्ष के लिए प्रेरित किया। राजा से लेकर गरीब जनता तक ने अंग्रेजों के खिलाफ संग्राम के बीज बोने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राजपूताने के साहित्यकारों ने शासकों, सामन्तों एवं जनता को प्रेरित कर 1857 के संग्राम के लिए माहौल तैयार किया।

प्रश्न 5.
29 मार्च की बैरकपुर एवं 9 मई की मेरठ की घटना और इनके प्रभाव का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
29 मार्च को बैरकपुर की छावनी में सैनिकों को चर्बी चढ़े कारतूस वितरित किए गए। उन्होंने कारतूसों को दाँतों से काटने से मना कर दिया। अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया। तब तक मंगल पाण्डे नामक एक सैनिक ने अपनी बन्दूक से वहाँ उपस्थित दोनों अधिकारियों को मार दिया। मंगल पाण्डे पकड़ा गया और उसे 8 अप्रैल को फाँसी दे दी गई। इसी क्रम में मेरठ में एक भारतीय पलटन को चर्बी वाले कारतूस दिए गए।

सैनिकों ने उन्हें उपयोग करने से मना कर दिया। उन सबको गिरफ्तार कर लिया गया, इससे सैनिकों में असन्तोष फैल गया। यह घटना 9 मई को घटित हई। क्रान्ति के नेताओं ने कुछ सैनिकों को समझाकर 31 मई तक प्रतीक्षा करने को कहा किन्तु अगले ही दिन सैनिकों ने विद्रोह कर अपने गिरफ्तार साथियों को रिहा करवा लिया। कई अंग्रेज अधिकारी मार डाले गए। सैनिकों ने दिल्ली की ओर कूच किया और 11 मई को दिल्ली पर अधिकार करके बहादुरशाह को सम्राट घोषित कर दिया।

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प्रश्न 6.
प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में नाना साहब, तांत्या टोपे तथा रानी लक्ष्मीबाई के योगदान का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
कानपुर में नानासाहब व तांत्यां टोपे ने क्रान्ति का नेतृत्व किया। उन्होंने कानपुर पर अधिकार कर लिया। झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई ने क्रान्ति का नेतृत्व किया। उस समय भारत का गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंभ था। उसने मद्रास, बम्बई, वर्मा व लंका से सेनाओं को बुला लिया। पंजाब की सिख सेना व नेपाल की गोरखा सेना भी अंग्रेजों के साथ थी। सेनापति जनरल नील ने बनारस व इलाहाबाद को क्रान्तिकारियों से मुक्त करवा लिया तथा नाना साहब की सेना भी कानपुर में पराजित हो गई।

अंग्रेजों ने दिल्ली में बहादुरशाह को गिरफ्तार कर लिया। तात्या टोपे और लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया। कुछ विश्वासघातियों के कारण लक्ष्मीबाई ग्वालियर के पास एक स्थान पर वीरता पूर्वक शहीद हो गईं। तात्या टोपे बच गए किन्तु विश्वासघात के कारण उनको भी गिरफ्तार करके फाँसी दे दी गई।

प्रश्न 7.
राजस्थान में हुई 1857 की स्वतन्त्रता क्रान्ति की प्रमुख घटनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में क्रान्ति की शुरुआत नसीराबाद से हुई। 28 मई को नसीराबाद में तैनात पन्द्रहवीं नेटिव बंगाल इनफैंट्री के सैनिकों ने अपने अधिकारियों पर हमला बोल दिया और दिल्ली की ओर रवाना हो गए। नीमच में मोहम्मद अली बेग नामक सैनिक ने कर्नल अबॉर्ट को चुनौती दी व 3 जून को नीमच में भी क्रान्ति हो गई।

21 अगस्त, 1857 को एरिनपुरा छावनी में तैनात एक टुकड़ी ने आबू में अंग्रेजों का विरोध कर दिया। कुशाल सिंह की सेना ने 8 सितम्बर, 1857 को बिथोड़ा नामक स्थान पर जोधपुर राज्य की सेना को परास्त किया जो कि अंग्रेजों का साथ दे रही थी। 18 सितम्बर, 1857 को ए. जी. जी. जार्ज लोरेन्स को भी इस सेना ने परास्त किया। 15 अक्टूबर, 1857 में कोटा की सेना में भी नाराजगी भड़क गई और सैनिकों ने मेजर बर्टन : का सिर काटकर पूरे कोटा शहर में घुमाया। इस प्रकार राजस्थान 1857 की क्रान्ति से अछूता नहीं रहा।

RBSE Solutions for Class 8 Social Science Chapter 20 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम

प्रश्न 8.
“इन्होंने तूफान में तरंग अवरोध का कार्य नहीं किया होता तो हमारी कश्ती बह जाती” यह शब्द किसने और क्यों कहे थे?
उत्तर:
राजपूताने में कुछ सामन्तों ने आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह के नेतृत्व को स्वीकार करके ब्रिटिश विरोध नीति अपनायी। क्रान्तिकारियों को प्रायः प्रत्येक स्थान पर स्थानीय कृषकों, जनसामान्य, हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदायों का पर्याप्त समर्थन मिला किन्तु देशी रियासतों के शासकों ने अंग्रेजों का भरपूर समर्थन किया। वे अंग्रेजों के वफादार बने रहे। उन्होंने अंग्रेजों को शरण और सैनिक सहायता प्रदान की। बीकानेर का शासक तो स्वयं अपनी सेना के साथ अंग्रेजों की सहायता के लिए राज्य के बाहर भी गया। राजाओं के सहयोग के बारे में तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग ने ये शब्द कहे कि, “इन्होंने तूफान में तरंग अवरोध का कार्य नहीं किया होता तो, हमारी कश्ती बह जाती।”

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1857 ई. की क्रान्ति के सामाजिक एवं धार्मिक कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1857 ई. की क्रान्ति के सामाजिक व धार्मिक कारण – अंग्रेजों ने सामाजिक सुधार के नाम पर भारतीयों के जीवन में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया था। इसकी भारतीयों में तीव्र प्रतिक्रिया हुई। इसके अतिरिक्त अंग्रेज भारतीय नागरिकों के साथ अपमानजनक व्यवहार करते थे। एक सामान्य अंग्रेज भी बड़े – से – बड़े भारतीय का अपमान कर देता था। भारतीय रीति-रिवाजों का मजाक उड़ाया जाता था तथा यहाँ की परम्पराओं को तोड़ने की कोशिश की जाती थी। भारतीयों को उच्च पदों पर नियुक्त नहीं किया जाता था। इससे भारतीय समाज में नाराजगी थी।

धार्मिक क्षेत्र में अंग्रेजी सरकार ने ईसाई धर्म के प्रचार की छूट दे दी, जिससे ईसाई मिशनरियों ने समाज के कमजोर वर्ग का धर्म परिवर्तन करवाने का कार्य आरम्भ कर दिया। भारतीय देवी-देवताओं व पूजा विधियों की खिल्लियाँ उड़ाई जाने लगीं। जेल में कैदियों को ईसाई धर्म स्वीकार करने के लिए बाध्य किया जाता था। ईसाई धर्म स्वीकार करने पर उनकी सजा में कमी कर दी जाती थी तथा अन्य कैदियों की तुलना में अधिक सुविधाएँ दी जाती थीं। ईसाई बनने वालों को सरकारी नौकरी में ऊँचे पदों पर बिठाया जाता था। इस नीति ने भारतीय समाज के मन में अंग्रेजों के विरुद्ध घोर विद्रोह पैदा कर दिया।

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प्रश्न 2.
1857 ई. के स्वतन्त्रता संग्राम के आर्थिक कारण क्या थे? समझाइए।
उत्तर:
1857 ई. के स्वतन्त्रता संग्राम के आर्थिक कारण – कम्पनी के शासन के पूर्व भारत एक कृषि एवं उद्योग प्रधान देश था। इसकी आर्थिक सम्पन्नता के कारण इसे सोने की चिड़िया कहा जाता था तथा यह विश्व में सामाजिक विज्ञान | 619 व्यापार का प्रमुख केन्द्र था। अंग्रेजों ने सत्ता प्राप्ति के बाद इसका बेरहमी से शोषण किया। अंग्रेजों के आगमन से पूर्व बंगाल एक समृद्ध प्रान्त था। किन्तु अंग्रेजों ने इसे इस कदर लूटा कि वहाँ भुखमरी व्याप्त हो गई। लाखों लोग अकाल में मारे गए।

बंगाल के मैदानों में भारतीय किसानों व दस्तकारों की हड्डियों के ढेर लग गए। अंग्रेजों ने किसानों से इतना अधिक भू-राजस्व वसूला कि किसान खेती छोड़ने को बाध्य हो गए व कई पुराने जमींदार लगान न दे पाने के कारण जमींदारी खो बैठे। अंग्रेजों ने इंग्लैण्ड में बने माल को भारत में खपाने के लिए भारतीय वस्त्रों पर भारी कर लगाया और दस्तकारों पर अत्याचार किया, जिससे उन्होंने अपना पैतृक कार्य त्याग दिया। राजस्थान में भी अंग्रेजों ने शासकों से भारी मात्रा में खराज (कर) वसूल करना शुरू कर दिया व आर्थिक संसाधनों पर भी अंग्रेज नियन्त्रण करने लगे। अंग्रेजों ने अफीम व नमक के व्यापार पर अधिकार जमा लिया।

उन्होंने बकाया खराज के नाम पर जयपुर व जोधपुर से उनके नपक उत्पादन के स्रोत छीन लिए। समस्त रियासतों से समझौता कर नमक पर चुंगी लागू कर दी, जिससे जनता में भारी रोष फैला। ठीक इसी प्रकार हाड़ौती (दक्षिण राजपूताना) में अफीम की पैदावार पर एकाधिकार स्थापित करने के लिए बंगाली अफीम के मुकाबले यहाँ अफीम को नियन्त्रित करने हेतु भारी कर लगाए, जिससे यहाँ के किसानों एवं व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ। इससे यहाँ भारी मात्रा में तस्करी बढ़ी व खाद्यान्न संकट पैदा हो गया। इन सभी कारणों ने जन सामान्य को क्रान्ति के लिए प्रेरित किया।

 

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