RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit

Rajasthan Board RBSE Class 8 Sanskrit Chapter 6 प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः

RBSE Class 8 Sanskrit प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः पाठ्यपुस्तकस्य प्रश्नोत्तराणि

RBSE Class 8 Sanskrit प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः मौखिकप्रश्नाः

प्रश्न 1.
निम्नलिखितानां शब्दानाम् उच्चारणं कुरुत
(नीचे लिखे हुए शब्दों का उच्चारण कीजिए)
कृष्णाङ्गारचूर्णम्, त्रिकोणमितिः, भैषजरसायनम्, सुदीर्घा, प्रयुज्यमानानि, प्रयुज्यन्ते, प्रकाशनिस्सारणक्रिया।

नोट:
छात्र अपने आप उच्चारण करें।

प्रश्न  2.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि वदत
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर बताइये-)

(क) चिकित्साक्षेत्रे राजस्थानस्य प्राचीनः प्रसिद्धचिकित्सकः कः आसीत् ?
(चिकित्सा के क्षेत्र में राजस्थान के प्राचीन प्रसिद्ध चिकित्सक कौन थे?)

(ख) वाग्भट्टेन विरचितः ग्रन्थः क अस्ति ?
(वाग्भट्ट द्वारा विरचित ग्रन्थ कौन सा है ?)

(ग) राजस्थानस्य प्राचीनः ज्योतिषाचार्यः कः अस्ति?
(राजस्थान के प्राचीन ज्योतिषाचार्य कौन हैं ?)

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(घ) ब्रह्मगुप्तेन विरचितः ग्रन्थः कः ?
(ब्रह्मगुप्त द्वारा विरचित ग्रन्थ कौन-सा है ?)

(ङ) ग्रहाणांगतिविषये कस्मिन् ग्रन्थे वर्णनम् अस्ति ?
(ग्रहों की गति के विषय में किस ग्रन्थ में वर्णन है ?)
उत्तराणि:
(क) चिकित्साक्षेत्रे राजस्थानस्य प्राचीनः प्रसिद्धचिकित्सकः वाग्भट्टः आसीत्।
(चिकित्सा के क्षेत्र में राजस्थान के प्राचीन प्रसिद्ध चिकित्सक वाग्भट्ट थे।)

(ख) वाग्भट्टेन विरचितः ग्रन्थः अष्टांग हृदयः अस्ति।
(वाग्भट्ट द्वारा विरचित ग्रन्थ अष्टांग हृदय है।)

(ग) राजस्थानस्य प्राचीन: ज्योतिषाचार्यः ब्रह्मगुप्तः अस्ति।
(राजस्थान के प्राचीन ज्योतिषाचार्य ब्रह्मगुप्त हैं।)

(घ) ब्रह्मगुप्तेन विरचितः ग्रन्थः ब्रह्मस्फुटसिद्धान्तः अस्ति।
(ब्रह्मगुप्त द्वारा विरचित ग्रन्थ ब्रह्मस्फुट-सिद्धान्त है।)

(ङ) ग्रहाणां गतिविषये ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त नामके ग्रन्थे वर्णनम् अस्ति।
(ग्रहों की गति के विषय में ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त नामक ग्रन्थ में वर्णन है।)

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RBSE Class 8 Sanskrit प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः लिखितप्रश्नाः

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत
(एक पद में उत्तर लिखिए)

(क) वृक्षायुर्वेदग्रन्थस्य रचयिताः कः ?
(वृक्षायुर्वेद ग्रन्थ के रचयिता कौन हैं ?)

(ख) शुल्बसूत्रं केन रचितम्?
(शुल्ब सूत्र किसने रचा है?)

(ग) आर्यभट्टः किं जानाति स्म ?
(आर्यभट्ट क्या जानते थे?)

(घ) शल्यक्रियायाः जनकः कः ?
(शल्यक्रिया के जनक कौन हैं ?).

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(ङ) गुरुत्वाकर्षणसिद्धान्तं कः प्रतिपादितवान् ?
(गुरुत्वाकर्षण-सिद्धान्त को किसने प्रतिपादित किया है?)
उत्तराणि:
(क) महर्षिः पराशरः।
(ख) बोधायनेन।
(ग) प्रकाशगतिम्।
(घ) सुश्रुतः।
(ङ) भास्कराचार्यः।

प्रश्न 2.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि एकवाक्येन लिखत
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए-)

(क) महर्षिः पराशरः वनस्पतीनां किं कृतवान् ?
(महर्षि पराशर ने वनस्पतियों का क्या किया ?)

(ख) विद्युत्कोशस्य आविष्कारकः कः आसीत् ?
(बैट्री के आविष्कार कर्ता कौन थे ?)

(ग) “पृथ्वी सूर्यस्य परिक्रमा करोति’ इति सिद्धान्तं कः प्रतिपादितवान् ?
(“पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है” यह सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया ?)

(घ) भास्कराचार्यः किं प्रतिपादितवान् ?
(भास्कराचार्य ने क्या प्रतिपादित किया ?)

(ङ) “त्वचारोपणम्” आदी कः कृतवान् ?
(चमड़ी का प्रत्यारोपण प्रारम्भ में किसने किया ?)
उत्तराणि:
(क) महर्षिः पराशरः वनस्पतीनां वर्गीकरणं कृतवान् ?
(महर्षि पराशर ने वनस्पतियों का गुणों के आधार पर वर्गीकरण किया।)

(ख) विद्युत्कोशस्य आविष्कारक: अगस्त्यः आसीत्।
(बैट्री के आविष्कारकर्ता अगस्त्य थे।)

(ग) “पृथ्वी सूर्यस्य परिक्रमा करोति” इति सिद्धान्तं आर्यभट्टः प्रतिपादितवान्।
(“पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है” यह सिद्धान्त आर्यभट्ट ने प्रतिपादित किया।)

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(घ) भास्कराचार्यः त्रैराशिकं-नियमादीन प्रतिपादितवान्।
(भास्कराचार्य ने त्रैरासिक नियम आदि को प्रतिपादित किया।)

(ङ) “त्वचारोपणम्” आदौ सुश्रुतः कृतवान्।
(चमड़ी का प्रत्यारोपण प्रारम्भ में सुश्रुत ने किया।)

प्रश्न 3.
रेखाङ्कितं पदम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(रेखांकित पद के आधार पर निर्माण कीजिए-)
(क) परमाणुवादस्य जनकः महर्षिः कणादः अस्ति।
(ख) विमानविद्यायाः वर्णनं भारद्वाजः अकरोत्।
(ग) भारतीकृष्णतीर्थः वैदिकगणितं रचितवान्।
(घ) महर्षिः पाणिनिः अष्टाध्यायी रचितवान्।
उत्तराणि:
(क) परमाणुवादस्य जनकः कः अस्ति?
(ख) कस्याः वर्णनं भारद्वाज अकरोत् ?
(ग) कः वैदिकगणितं रचितवान् ?
(घ) महर्षिः पाणिनिः कां रचितवान् ?

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प्रश्न 4.
समुचितं मेलनं कुरुत (सही मिलान कीजिए-)
उत्तराणि:
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प्रश्न 5.
अधोलिखितानां प्रकृतिप्रत्यानां प्रयोगं कृत्वा नवशब्दानां निर्माणं कुरुत –
(नीचे लिखे हुए प्रकृति प्रत्ययों का प्रयोग करके नवीन शब्दों का निर्माण कीजिए)
उत्तराणि:
RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः - 2

प्रश्न  6.
मञ्जूषातः चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(मञ्जूषा से चुनकर रिक्त स्थानों को पूरा कीजिए-)
अस्माकम्, किम्, एषः, तस्य, एतस्य
(क) अतः ………” नाम्ना ………” नामकरणम् अभवत्।
(ख) सम्प्रति …………… एव।
(ग) एतस्य नामकरणस्य कारणं …………….. ?
(घ) महोदय ! वदतु कृपया …………. भारते ?
उत्तराणि:
(क) तस्य, एतस्य
(ख) एषः
(ग) किम्
(घ) अस्माक।

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RBSE Class 8 Sanskrit प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः अन्य महत्वपूर्णः प्रश्नाः

RBSE Class 8 Sanskrit प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः वस्तुनिष्ठप्रश्नोत्तराणि

प्रश्न 1.
वैज्ञानिकानां विषये वार्तालाप: कुत्र प्रचलित?
(क) वने
(ख) गृहे
(ग) आपणे
(घ) विद्यालये।
उत्तराणि:
(घ) विद्यालये।

प्रश्न 2.
प्राचीन: भारतीयः महान् गणितज्ञः आसीत्
(क) बोधायनः
(ख) चरकः
(ग) आर्यभट्टः
(घ) वाग्भट्टः।
उत्तराणि:
(ग) आर्यभट्टः

प्रश्न 3.
गणितविषये कार्यं कृतवान्
(क) भास्करः
(ख) ब्रह्मगुप्तः
(ग) पराशरः
(घ) सुश्रुतः।
उत्तराणि:
(क) भास्करः

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प्रश्न 4.
‘ब्रह्मस्फुटसिद्धान्तः’ इति कस्य ग्रन्थः
(क) भास्करस्य
(ख) बोधायनस्य
(ग) ब्रह्मगुप्तस्य
(घ) वाग्भट्टस्य।
उत्तराणि:
(ग) ब्रह्मगुप्तस्य

प्रश्न 5.
भारतीयचिकित्सायाः कति अङ्गानि सन्ति –
(क) चत्वारि
(ख) त्रीणि
(ग) पञ्चः
(घ) अष्टौ।
उत्तराणि:
(घ) अष्टौ।

RBSE Class 8 Sanskrit प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः अतिलघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न 1.
राजस्थानस्य ज्योतिषाचार्यः कः आसीत् ?
उत्तरम:
राजस्थानस्य ज्योतिषाचार्यः ब्रह्मगुप्तः आसीत्।

प्रश्न 2.
सुश्रुतः कस्याः चिकित्साया: जनकः आसीत् ?
उत्तरम्:
सुश्रुतः शल्यचिकित्सायाः जनकः आसीत्।

प्रश्न 3.
अस्मिन् पाठे केषां वर्णनम् अस्ति?
उत्तरम्:
अस्मिन् पाठे प्राचीनः भारतीय वैज्ञानिकानां वर्णनम् अस्ति ।

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प्रश्न 4.
प्रकाशस्य गतिं कः जानाति स्म ?
उत्तरम:
प्रकाशस्य गतिं सम्यक् रूपेण आर्यभट्टः जानाति स्म।

प्रश्न 5.
महर्षिः पराशरः कस्मिन् ग्रन्थे वनस्पतीनां वर्गीकरणं कृतवान्?
उत्तरम्:
महर्षिः पराशरः ‘वृक्षायुर्वेदः’ ग्रन्थे वनस्पतीनां वर्गीकरणं कृतवान्।

RBSE Class 8 Sanskrit प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः लघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न 1.
एकः वार्तालापः कस्मिन् विषये कुत्र प्रचलति?
उत्तरम्:
एकः वार्तालापः वैज्ञानिकानां विषये एकस्मिन् विद्यालये प्रचलति।

प्रश्न 2.
अस्य पाठाधारे चतुर्णां वैज्ञानिकानां नामानि लिखत।
उत्तरम्:
अस्य पाठाधारे चतुर्णां वैज्ञानिकानां नामानि सन्तिबोधायनः, पराशरः, आर्यभट्टः, चरकः च।

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प्रश्न 3.
पृथ्वी कस्य परिक्रमा करोति ?
उत्तरम्:
पृथ्वी सूर्यस्य परिक्रमा करोति।

प्रश्न 4.
गणित विषये कः कार्यं कृतवान् ?
उत्तरम्:
गणितविषये भास्कराचार्यः कार्यं कृतवान्।

RBSE Class 8 Sanskrit प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः निबन्धात्मकं प्रश्नोत्तरम्

प्रश्न 1.
‘प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः’ इति पाठस्य आधारे वार्तालापस्य सारं लिखत।
उत्तरम्:
एक विद्यालय में अध्यापक-छात्रों के बीच भारतीय वैज्ञानिकों के बारे में एक बातचीत चल रही है। हेमन्त नामक छात्र के पूछने पर आचार्य ने कहा कि भारत देश वैदिक काल से ही वैज्ञानिकों का देश है। भारत की वैज्ञानिक परम्परा बहुत लम्बी है। उसका परिचय संस्कृत के ग्रन्थों में मिलता है। जया नामक छात्रा के पूछने पर बताया कि वनस्पति विज्ञान के बारे में पराशर ने वनस्पतियों का वर्गीकरण किया है।

विद्युत्कोश (बैट्री) के बारे में पूछे जाने पर बताया कि ताँबा, जस्ता, कोयला और पारा के मिलाने से बिजली पैदा हई जैसा कि महर्षि अगस्त्य ने लिखा है। चेतन नामक छात्र द्वारा गणित विषय में जानकारी किये जाने पर आचार्य ने आर्यभट्ट का परिचय देते हुए बताया कि उन्हें प्रकाश की गति का विशेष ज्ञान था।

उन्होंने पृथ्वी के गोलार्द्ध, दिन-रात छः ऋतुएँ, साप्ताहिक दिनों, कालगणना खगोल विज्ञान आदि पर बहुत कार्य किया है। भास्कराचार्य ने गुरुत्वाकर्षण सिद्धान्त को प्रतिपादित किया है। चिकित्सा के क्षेत्र में हमारे पूर्वजों का ज्ञान कैसा था, इसका उत्तर देते हुए आचार्य ने बताया कि आचार्य सुश्रुत तो शल्यचिकित्सा के जनक थे। उन्होंने त्वचारोपण, नासिकारोपण, कर्णरोपण पर बहुत कार्य किया है।

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उन्होंने जिन उपकरणों का प्रयोग किया वे आधुनिक चिकित्सकों द्वारा प्रयोग में लाये जाते हैं। आचार्य चरक ने भैषज रसायन, ज्वालापरीक्षण आदि चिकित्सा पद्धतियों का निर्देशन किया है। राजस्थान के खगोलशास्त्री एवं ज्योतिषाचार्य के बारे में पूछे जाने पर आचार्य ने बताया कि ब्रह्मगुप्त राजस्थान के खगोलशास्त्री एवं ज्योतिषाचार्य थे। उन्होंने ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त नामक ग्रन्थ की रचना की। जिसमें चन्द्रग्रहण, सूर्यग्रहण आदि का वर्णन विस्तार से किया गया है। उसमें अनेक यन्त्रों का भी उल्लेख किया गया है।

योग्यता-विस्तारः
संस्कृत व्याकरण के नियमों के रचयिता पाणिनि का जन्म शालातुर गाँव में हुआ। इनके पिता का नाम पणिन, माता का नाम दाक्षी और आचार्य का नाम वर्ष था। ये ही अष्टाध्यायी नामक व्याकरण ग्रन्थ के रचयिता थे। आयुर्वेद, योग के नवीन आविष्कार में वैज्ञानिकों का योगदान लिखिए।
उत्तरम्:
1. ब्रह्मगुप्त – ब्रह्मस्फुट सिद्धांत
2. आर्यभट्ट – खगोल विज्ञान
3. सुश्रुत – शल्य क्रिया।

महत्वपूर्णानां शब्दार्थानां सूची
RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः - 3

पाठ-परिचयः
वास्तविक रूप से आधुनिक युग वैज्ञानिक युग है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विज्ञान और तकनीक ने प्रवेश कर लिया है। प्रकृति के रहस्यों को विज्ञान ने उद्घाटित किया है। वैज्ञानिकों ने हमारी जीवन-पद्धति को, खान-पान व्यवस्था को और आचार-विचारों को प्रभावित किया है। वे वैज्ञानिक अनेक हैं। उन वैज्ञानिकों में से बोधायन, पराशर, अगस्त्य, आर्यभट्ट, भास्कर, सुश्रुत, ब्रह्मपुत्र आदि प्रमुख हैं। भारत की वैज्ञानिक परम्परा बहुत लम्बी है। उसका परिचय संस्कृत के प्राचीन ग्रन्थों में प्राप्त होता है।।

मूल अंश, शब्दार्थ, हिन्दी अनुवाद एवं प्रश्नोत्तर

1. (एकस्मिन् विद्यालये आचार्य-छात्राणां मध्ये वैज्ञानिकानां विषये वार्तालापः प्रचलति।)

आचार्य:
पाइथागोरसतः पञ्चदशशतात् वर्षपूर्वम् आचार्यः बोधायनःशुल्बसूत्रे एतस्य प्रमेयस्य प्रयोगं कृतवान्। भारतीयाः अङ्काः अपि ततः पूर्वम् आसन्।

हेमन्तः
महोदय! अपि प्राचीनकाले भारतदेशे वैज्ञानिकाः आसन् ?

आचार्य:
भारतदेशः वैदिककालात् एव वैज्ञानिकानां देशः अस्ति। चिकित्सा-अभियान्त्रिकी-गणित-विज्ञानादिषु क्षेत्रेषु भारतीय-वैज्ञानिकाः बहुः कार्यं कृतवन्तः।

जया
महोदय! वनस्पतिविज्ञानविषये किं कार्यं भारते अभवत्?

आचार्य:
महर्षिः पराशरः ‘वृक्षायुर्वेदः’ ग्रन्थे वनस्पतीनां वर्गीकरणं कृतवान्। वृक्षेषु प्रकाश-निस्तारण-क्रियायाः (प्रकाशसंश्लेषणम्) पर्णस्य अवान्तर-भागानाम् (प्लाज्मा-इत्यादीनाम्) अपि वर्णनं पराशरः कृतवान्।

शब्दार्थः
एकस्मिन् = एक। प्रचलति = चल रहा है। पञ्चदशशतात् = 15 सौ वर्ष पूर्व से। प्राचीनकाले = पुराने समय में। वैदिककालात् एव = वैदिक काल से ही। कृतवन्तः = किए हैं। वर्गीकरणम् = गुणों के आधार पर स्थान निर्धारण। अवान्तर = आन्तरिक।शुल्बसूत्रे = शुल्बसूत्र में। एतस्य प्रमेयस्य = इस प्रमेय का। कृतवान् = किया। भारतीयाः = भारत के। अड्काः = अंक। ततः = उससे। पूर्वम् = पहले। आसन् = थे। भारतदेशे = भारत देश में। क्षेत्रेषु = क्षेत्रों में। बहुः = बहुत। विषये = विषय में। भारते = भारत में। अभवत् = हुआ। ग्रन्थे = ग्रन्थ में। वृक्षेषु = वृक्षों में।

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हिन्दी अनुवादः
(एक विद्यालय में अध्यापक और छात्रों के बीच वैज्ञानिकों के विषय में बातचीत चल रही है)

आचार्य:
पाइथागोरस से पन्द्रह सौ वर्ष पहले आचार्य बोधायन ने शुल्बसूत्र में इस प्रमेय का प्रयोग किया था। भारतीय अंक भी इससे पूर्व थे।

हेमन्त:
महोदय ! क्या पुराने समय में भारत देश में वैज्ञानिक थे?

आचार्य:
भारतदेश वैदिक काल से ही वैज्ञानिकों का देश है। चिकित्सा-अभियान्त्रिकी-गणित-विज्ञान आदि क्षेत्रों में भारतीय वैज्ञानिकों ने बहुत कार्य किए हैं।

जया:
महोदय! वनस्पति विज्ञान विषय में क्या कार्य भारत में हुआ? आचार्य महर्षि पराशर ने ‘वृक्षायुर्वेद’ नामक ग्रन्थ में वनस्पतियों का (गुणों के आधार पर स्थान निर्धारण) वर्गीकरण किया है। वृक्षों में प्रकाश निकलने की क्रिया का (प्रकाश संश्लेषण) पत्तों के आन्तरिक भागों का (प्लाज्मा इत्यादि का) भी वर्णन पराशर ने किया है।

(क) केषां मध्ये कुत्र वार्तालाप: प्रचलति?
उत्तरम्:
आचार्य-छात्राणां मध्ये वार्तालाप: एकस्मिन् विद्यालये प्रचलति।

(ख) अस्मिन् वार्तालापे किं विषयम् अस्ति?
उत्तरम्:
अस्मिन् वार्तालापे विज्ञानः वैज्ञानिकाश्च विषयम् अस्ति ।

(ग) अपि प्राचीनकाले भारतदेशे वैज्ञानिका: आसन् ? इति केन पृष्टम् ?
उत्तरम्:
अपि प्राचीनकाले भारतदेशे वैज्ञानिकाः आसन् ? इति हेमन्तेन पृष्टम्।

(घ) वनस्पतीनां वर्गीकरणं कः कृतवान्?
उत्तरम्:
वनस्पतीनाम् वर्गीकरणं महर्षिः पराशरः वृक्षायुर्वेदः ग्रन्थे कृतवान्।

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(ङ) “एकस्मिन् विद्यालये’ इत्यत्र विद्यालये पदे का विभक्तिः प्रयुक्त?
उत्तरम्:
‘एकस्मिन् विद्यालये’ इत्यत्र विद्यालये पदे सप्तमी विभक्तिः प्रयुक्ता।

(च) किं कार्यं भारते अभवत् ? इत्यत्र अभवत्’ पदे कः लकारः?
उत्तरम्:
‘किं कार्यं भारते अभवत्’ इत्यत्र ‘अभवत्’ पदे लङ्लकारः अस्ति।

(छ) पाइथागोरसप्रमेयस्य शुल्बसूत्रे कः प्रयोगं कृतवान् ?
उत्तरम्:
आचार्यः बोधायनः।

2. कृष्ण:-अपि प्राचीनकाले विद्युत्कोशः (बैट्री) अपि आसीत् किम्?

आचार्य:
अवश्यमेव आसीत्। ताम्रपत्रं यशदपत्रं कृष्णाङ्गारचूर्णं पारद-इत्यादीनां संयोगेन विद्युद् उत्पन्ना भवति इति महर्षिः अगस्त्यः लिखितवान्।

चेतन:
महोदय ! वदतु कृपया, अस्माकं भारते गणितविषये अन्यत् किं प्रमुखं कार्यम् अभवत् ?

आचार्य:
प्राचीन: भारतीयः महान् गणितज्ञः आर्यभट्टः प्रकाशस्य गतिं सम्यक् जानाति स्म। पृथ्वीगोलाकारा अस्ति। पृथ्वी स्व अक्षे भ्रमति, तेन एवं दिवारात्री भवतः। पृथ्वी सूर्यस्य परिक्रमा करोति, तेन एव षड् ऋतवः भवन्ति। सप्ताहे दिनानां क्रमः, प्रकाशस्य गतिः, कालगणना, खगोलविज्ञानं, त्रिकोणमिति इत्यादिषु क्षेत्रेषु आचार्यः आर्यभट्टः बहुकार्य कृतवान्।

शब्दार्थः
विद्युत्कोशः = विद्युत का सञ्चित भण्डार (बैट्री)। ताम्रपत्रं = ताँबा। यशदपत्रम् = जस्ते की छड़। पारदः = पारा। कृष्णाङ्गारचूर्ण = कोयले का चूर्ण। वदतु = बतायें, बोलें। अस्माकं = हमारे। भारते = भारत में। गणितविषये = गणित विषय पर। अन्यत् = दूसरा अन्य। गणितज्ञः = गणित विषय के जानकार। प्रकाशस्य गतिं = प्रकाश की गति को। जानाति स्म = जानते थे। अक्षे= धरा पर। दिवारात्री = दिन और रात। भ्रमति = घूमती है। तेन एव = उसी से ही। भवतः = होते हैं। सूर्यस्य = सूर्य की। करोति = करती है। षड् ऋतवः = छः ऋतुएँ। भवन्ति = होती हैं। बहुकार्यम् = बहुत कार्य। कृतवान् = किया।

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हिन्दी अनुवादः
कृष्ण:
क्या पुराने समय में विद्युत् का सञ्चित भण्डार (बैट्री) भी थी ?

आचार्य:
अवश्य थी। ताँबा, जस्ते की छड़, कोयले का चूर्ण और पारा इत्यादि के मेल से बिजली पैदा होती है, ऐसा महर्षि अगस्त्य ने लिखा है।

चेतन:
महोदय ! कृपया बतायें, हमारे भारत देश में गणित विषय में अन्य दो प्रमुख क्या कार्य हुए ?

आचार्य:
प्राचीन भारतीय महान् गणितज्ञ (गणित विषय के जानकार) आर्यभट्ट प्रकाश की गति को अच्छी प्रकार जानते थे। पृथ्वी गोल आकार में है। पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, उसी से दिन और रात होते हैं। पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है, उसी से छह ऋतुएँ होती हैं। सप्ताह में दिनों का क्रम, प्रकाश की गति, काल गणना, खगोलविज्ञान आदि क्षेत्रों में आचार्य आर्यभट्ट ने बहुत कार्य किया है।

(क) आर्यभट्टः कः आसीत् ?
उत्तरम्:
आर्यभट्टः प्राचीनः भारतीयः महान् गणितज्ञः आसीत्।

(ख) बैट्री किं कथ्यते ?
उत्तरम्:
विद्युत् सञ्चितभण्डारः इति बैट्री कथ्यते।

(ग) विद्युत्सञ्चितभण्डारस्य विषये कः लिखितवान्?
उत्तरम्:
विद्युत्सञ्चितभण्डारस्य विषये महर्षिः अगत्स्यः लिखितवान्।

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(घ) पृथ्वी कुत्र भ्रमति?
उत्तरम्:
पृथ्वी स्वअक्षे भ्रमति।

(ङ) आचार्यः आर्यभट्टः किं किं कार्यं कृतवान् ?
उत्तरम्:
आचार्यः आर्यभट्टः सप्ताहे दिनानां क्रमः, प्रकाशस्य गतिः, कालगणना खगोलविज्ञानं त्रिकोणमिति इत्यादिषु क्षेत्रेषु बहुकार्यं कृतवान्।

(च) ‘पृथ्वी सूर्यस्य परिक्रमा करोति इत्यत्र ‘करोति’ पदे कः लकारः?
उत्तरम्:
‘पृथ्वी सूर्यस्य परिक्रमा करोति’ इत्यत्र ‘करोति’ पदे लट्लकारः।

(छ) सूर्यस्य परिक्रमा का करोति?
उत्तर:
सूर्यस्य परिक्रमा पृथ्वी करोति।

3. आदित्यः
आचार्य! किं भास्करः अपि गणित-विषये कार्यं कृतवान् ?

आचार्य:
आम्! गुरुत्वाकर्षणसिद्धान्तं (पै) इति गणित-चिह्नस्यामानं त्रैराशिक-नियमादीन् भास्कराचार्यः प्रतिपादितवान्।

नीता:
महोदय ! चिकित्साक्षेत्रे अस्माकं पूर्वजानां ज्ञानं कीदृशम् आसीत् ?

आचार्यः
शल्यचिकित्सायाः जनक: आचार्यः सुश्रुतः प्रायशः सर्वाः शल्यक्रियाः करोति स्म। यथा त्वचारोपणम् (प्लास्टिक सर्जरी), नासिकारोपणम्, कर्णरोपणम् तन्त्रिकाचिकित्सा, नेत्रचिकित्सा इत्यादयः। शल्यक्रियायां यानि – उपकरणानि सुश्रुतेन प्रयुक्तानि तानि एव उपकरणानि तथैव आधुनिक-चिकित्साक्षेत्रे प्रयुज्यन्ते।

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शब्दार्थः
पै = गणित में प्रयुक्त एक चिह्न (1)। प्रतिपादितवान् = प्रतिपादित किया है। चिकित्साक्षेत्रे = चिकित्सा के क्षेत्र में। शल्यचिकित्सायाः = चीरफाड़कर चिकित्सा करना। त्वचारोपणम् = त्वचा का प्रत्यारोपण। नासिकारोपणम् = नासिका (नाक) का आरोपण। कर्णरोपणम् = कान को पुनः जोड़ना। प्रयुज्यन्ते = प्रयोग में लाये जाते हैं।

अनुवादः
आदित्य क्या भास्कर (महोदय) ने भी गणित विषय में कार्य किया है ?

आचार्य:
हाँ। गुरुत्वाकर्षण सिद्धान्त को (पै) (गणित में प्रयुक्त एक चिह्न) नामक इस गणित चिह्न का मान त्रिराशिक-नियम आदि को भास्कराचार्य ने प्रतिपादित किया है।

नीता:
महोदय ! चिकित्सा क्षेत्र में हमारे पूर्वजों का ज्ञान कैसा था ?

आचार्य:
शल्य (चीर फाड़कर चिकित्सा करने) चिकित्सा के जनक आचार्य सुश्रुत लगभग सभी शल्य क्रियाएँ करते थे। जैसे—चमड़ी का प्रत्यारोपण, ‘प्लास्टिक सर्जरी’, नाक का आरोपण, कान को पुनः जोड़ना, तंत्रिका चिकित्सा, नेत्र चिकित्सा इत्यादि। शल्य क्रिया में जिन उपकरणों को सुश्रुत ने प्रयोग किया, वे ही उपकरण वैसे ही आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में प्रयोग में लाये जाते हैं।

(क) भास्कराचार्यः गणितविषये किं कार्यं कृतवान् ?
उत्तरम्:
भास्कराचार्यः गणित (पै) चिह्नस्यामानं त्रैराशिक-नियमादीन् प्रतिपादितवान्।

(ख) शल्यचिकित्सायाः जनकः कः आसीत् ?
उत्तरम्:
शल्यचिकित्सायाः जनकः सुश्रुतः आसीत्।

(ग) शल्यचिकित्सायां का:-काः परिगण्यन्ते?
उत्तरम्:
शल्यचिकित्सायां त्वचारोपणम्, नासिकारोपणम्, कर्णरोपणम, तन्त्रिका-चिकित्सा, नेत्रचिकित्सा इत्यादयः परिगण्यन्ते।

(घ) आधुनिक-चिकित्साक्षेत्रेकानि उपकरणानि प्रयुज्यन्ते ?
उत्तरम्:
आधुनिक चिकित्साक्षेत्रे तानि एव उपकरणानि प्रयुज्यन्ते यानि उपकरणानि सुश्रुतेन प्रयुक्तानि।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 प्राचीन-भारतीय-वैज्ञानिकाः

(ङ) अस्माकं पूर्वजानाम्’ इत्यत्र सर्वनामपदम् किम्?
उत्तरम्:
‘अस्माकं पूर्वजानाम्’ इत्यत्र सर्वनामपदम् ‘अस्माकम्’ अस्ति।

(च) तथैव’ इति पदस्य सन्धिविच्छेदं कुरुत।
उत्तरम्:
‘तथैव’ पदस्य सन्धिविच्छेदम् अस्ति–तथा + एव।

(छ) ‘प्रतिपादितवान्’ इत्यस्मिन् पदे प्रत्यय निर्देशत।
उत्तर:
‘प्रतिपादितवान्’ इत्यस्मिन् पदे क्तवतु’ प्रत्ययः अस्ति।

4. भरतः
आचार्य ! चरकः अपि भैषजरसायनं, ज्वालापरीक्षणं, वनस्पति आधारिता च चिकित्सापद्धतिं निर्दिष्टवान्।

गरिमा:
महोदय ! प्राचीनभारतीयवैज्ञानिकानां नामानि तेषाम् अविष्काराः च विस्तरेण कुत्र लभ्यन्ते।

आचार्य:
भारतस्य वैज्ञानिकपरम्परा सुदीर्घास्ति। तस्याः। परिचयः संस्कृतस्य प्राचीनग्रन्थेषु प्राप्यते।।

नीता:
भारतीयचिकित्सापद्धत्याः कानि-कानि अङ्गानि सन्ति ?

आचार्य:
भारतीयचिकित्सायाः अष्टौ अङ्गानि सन्ति।

नीता:
एकस्मिन्नेव ग्रन्थे अष्टौ अङ्गानि केन निरूपितानि ?

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आचार्य:
वाग्भट्टेन। असौ वाग्भट्टः रणस्तम्भपुरस्य (रणथम्भौरः) धीर-वीरः हम्मीरस्य पितामहः आसीत्।

शब्दार्थः
भैषजरसायनं = पेड़-पौधों के रस से औषधि निर्माण की प्रक्रिया। लभ्यन्ते = प्राप्त होते हैं। सुदीर्घाः = बहुत लम्बी। प्राप्यते = प्राप्त होता है। पद्धत्याः = पद्धति के। निरूपितानि = निरूपित किये गये हैं। ज्वालापरीक्षणं = अग्नि-परीक्षण। निर्दिष्टवान = निर्दिष्ट किया है।। वैज्ञानिकानां = वैज्ञानिकों के। विस्तारेण = विस्तार से।। कुत्र = कहाँ। तस्याः = उसका। प्राचीनग्रन्थेषु = प्राचीन ग्रन्थों में। अष्टौ = आठ। एकस्मिन्नेव = एक ही।

हिन्दी अनुवादः
भरत-आचार्य ! चरक ने भी पेड़-पौधों के रस से औषधि-निर्माण की प्रक्रिया को, अग्नि-परीक्षण और वनस्पति पर आधारित चिकित्सा पद्धति को निर्दिष्ट किया है। गरिमा महोदय ! प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों के नाम और उनके आविष्कार विस्तार से कहाँ प्राप्त किये जाते हैं। आचार्य भारत की वैज्ञानिक परम्परा बहुत लम्बी है। उसका परिचय संस्कृत के प्राचीन ग्रन्थों में प्राप्त होता है। नीता-भारतीय-चिकित्सा पद्धति के कौन-कौन से अंग आचार्य-भारतीय चिकित्सा के आठ अंग हैं।

नीता:
एक ही ग्रन्थ में आठ अंगों को किसने निरूपित किया है ?

आचार्य:
वाग्भट्ट ने। वह वाग्भट्ट रणथम्भौर के धीर-वीर हम्मीर के बाबा थे।

(क) भैषजरसायनं कः निर्दिष्टवान् ?
उत्तरम्:
भैषजरसायनं चरकः निर्दिष्टवान्।

(ख) भारतस्य वैज्ञानिकपरम्परायाः परिचयः कुत्र प्राप्यते?
उत्तरम्:
भारतस्य वैज्ञानिकपरम्परायाः परिचयः संस्कृतस्य प्राचीनग्रन्थेषु प्राप्यते।

(ग) भारतीयचिकित्सायाः कति अंगानि सन्ति ?
उत्तरम्:
भारतीयचिकित्सायाः अष्टौ अंगानि सन्ति।

(घ) हम्मीरस्य पितामहः कः आसीत् ?
उत्तरम्:
हम्मीरस्य पितामहः वाग्भट्टः आसीत्।

(ङ) विस्तरेण कुत्र प्राप्यते ? इत्यत्र ‘प्राप्यते’ पदे कः लकारः अस्ति?
उत्तरम्:
विस्तरेण कुत्र प्राप्यते? इत्यत्र प्राप्यते पदे लट्लकारः अस्ति।

(च) “एकस्मिन्नेव’ इत्यस्य सन्धिविच्छेदं कुरुत।
उत्तरम्:
एकस्मिन् + एव।

(छ) धीर-वीरः’ इत्यत्र पदे समास निर्देशयत।
उत्तरम्:
धीर-वीर’ अस्मिन् पदे द्वन्द्वसमासः अस्ति।

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5. आदित्यः
राजस्थानस्य खगोलशास्त्री, ज्योतिषाचार्यः कः आसीत् ?

आचार्य:
ब्रह्मगुप्तः राजस्थानस्य खगोलशास्त्री, ज्योतिषाचार्यः च आसीत्। तस्य ग्रन्थस्य नाम ब्रह्मस्फुटसिद्धान्तः अस्ति। अस्मिन् ग्रन्थे सूर्यवेधस्य प्रक्रिया विधिवद् वर्णिता। चन्द्रसूर्ययोः ग्रहणस्य गणना अस्मिन् ग्रन्थे विस्तारेण उल्लेखितास्ति। ब्रह्मगुप्तेन ज्योतिषयन्त्रशालायाम् अनेकयन्त्राणाम् उल्लेखः कृतः।

शब्दार्थः
राजस्थानस्य = राजस्थान का। विधिवद् = विधिपूर्वक। वर्णिता = वर्णन किया गया है। चन्द्रसूर्ययोः = चन्द्रमा और सूर्य की।

हिन्दी अनुवादः
आदित्य राजस्थान के खगोलशास्त्री और ज्योतिषाचार्य कौन थे?
आचार्य:
ब्रह्मगुप्त राजस्थान के खगोलशास्त्री और ज्योतिषाचार्य थे। उनके ग्रन्थ का नाम ‘ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त’ है। इस ग्रन्थ में सूर्यवेध की प्रक्रिया का विधिपूर्वक वर्णन किया गया है।

चन्द्र:
सूर्य ग्रहण की गणना इस ग्रन्थ में विस्तार से उल्लिखित है। ब्रह्मगुप्त ने ज्योतिष यन्त्रशाला में अनेक यन्त्रों का उल्लेख किया है।

(क) राजस्थानस्य खगोलशास्त्री ज्योतिषाचार्यः च कः आसीत् ?
उत्तरम्:
राजस्थानस्य खगोलशास्त्री ज्योतिषाचार्यः च ब्रह्मगुप्तः आसीत्।

(ख) ब्रह्मगुप्तेन केषाम् उल्लेखः कृतः ?
उत्तरम्:
ब्रह्मगुप्तेन ज्योतिषयन्त्रशालायाम् अनेकयन्त्राणाम् उल्लेखः कृतः।

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(ग) ब्रह्मगुप्तस्य ग्रन्थस्य नाम किम् आसीत् ?
उत्तरम्:
ब्रह्मगुप्तस्य ग्रन्थस्य नाम ब्रह्मस्फुटसिद्धान्तः अस्ति।

(घ) ब्रह्मस्फुटसिद्धान्तः नामके ग्रन्थे कस्य प्रक्रिया विधिवद् वर्णिता?
उत्तरम्:
ब्रह्मस्फुटसिद्धान्ते नामके ग्रन्थे सूर्यवेधस्य प्रक्रिया विधिवद् वर्णिता।

(ङ) ‘उल्लेखः’ इत्यस्य पदस्य सन्धिविच्छेदं कुरुत।
उत्तरम:
सन्धिविच्छेदः – उत् + लेखः।

(च) ‘अस्ति’ पदे कः लकारः अस्ति?
उत्तरम्:
‘अस्ति’ पदे लट्लकारः अस्ति।

(छ) ‘कृतः’ इत्यत्र प्रत्ययं निर्देशयत।
उत्तरम्:
‘कृत’: इत्यत्र ‘क्त’ प्रत्ययः अस्ति।

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