RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit

Rajasthan Board RBSE Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

RBSE Class 8 Sanskrit ध्येयवाक्यानि पाठ्यपुस्तकस्य प्रश्नोत्तराणि

RBSE Class 8 Sanskrit ध्येयवाक्यानि मौखिकप्रश्नाः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां पदानाम् उच्चारण कुरुत
(नीचे लिखे हुए पदों का उच्चारण कीजिए):
स्पृशं, दीप्तम्, वहाम्यहम्, अहर्निशं, प्रवर्तनाय, समनसः, शुभास्ते, जलेष्वेव।

नोट:
छात्रगण अपने आप ही उच्चारण करें।

प्रश्न 2.
एकपदेन उत्तरत
(एक पद में उत्तर दीजिए.-)

(क) किं जयते ?
(किसकी जीत होती है?)

(ख) कस्मात् वृष्टि: जायते?
(किससे वर्षा होती है?)

(ग) शं नो वरुणः कस्य ध्येयवाक्यम्?
(‘शं नो वरुणः’ किसका ध्येय वाक्य है?)।

(घ) सिद्धिः केन भवति?
(सिद्धि किससे होती है?)

(ङ) सत्यं शिवं सुन्दरम्’कस्य ध्येयवाक्यम् अस्ति ?
(‘सत्यं शिवं सुन्दरम्’ किसका ध्येय वाक्य है ?)
उत्तराणि:
(क) सत्यमेव (सत्य की)
(ख) आदित्यात् (सूर्य से)
(ग) भारतीयजलसेनायाः (भारतीय जल सेना का)
(घ) कर्मजा (कर्म से)
(ङ) राष्ट्रियदूरदर्शनस्य (राष्ट्रीय दूरदर्शन का)

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

RBSE Class 8 Sanskrit ध्येयवाक्यानि लिखितप्रश्नाः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर एक पद में लिखिए.)

(क) सर्वस्य लोचनम् किम्?
(सभी का नेत्र क्या है ?)

(ख) “धर्मचक्रप्रवर्तनाय” कस्य विभागस्य ध्येयवाक्यम् ?
(धर्मचक्रप्रवर्तनाय’ किस विभाग का ध्येय वाक्य है ?)

(ग) नो शंकः कुर्यात्?
(हमारा कल्याण कौन करे?)

(घ) राष्ट्रियदूरदर्शनस्य ध्येयवाक्यं किम् ?
(राष्ट्रीय दूरदर्शन का ध्येय वाक्य क्या है?)

(ङ) आद्यं धर्मसाधनं किम् ?
(पहला धर्म साधन क्या है ?)
उत्तराणि:
(क) शास्त्रम् (शास्त्र)
(ख) लोकसभायाः (लोकसभा का)
(ग) वरुणः (वरुण)
(घ) सत्यं शिवं सुन्दरम् (सत्य, शिव, सुन्दर)
(ङ) शरीरम् (शरीर)।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

प्रश्न  2.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकवाक्येन लिखत –
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए-)

(क) वयं कुत्र जयामहे ?
(हम सब कहाँ विजय प्राप्त करें ?)

(ख) विद्यया किम् अश्नुते ?
(ज्ञान से क्या प्राप्त होता है ?)

(ग) स्वर्गादपि का गरीयसी ?
(स्वर्ग से भी बढ़कर क्या है ?)

(घ) किं वहाम्यहम् ?
(मैं क्या वहन करूँ ?)

(ङ) कः स्पृशं दीप्तम् ?
(प्रकाशित स्पर्श क्या है ?)
उत्तराणि:
(क) वयं नभसि अवस्थितान् शत्रून् हत्वा जयामहे।
(हम आकाश में अवस्थित शत्रुओं को मारकर विजय प्राप्त करें।)

(ख) विद्यया अमरतायाः प्राप्तिः भवति।
(विद्या से अमरत्व की प्राप्ति होती है।)

(ग) जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।
(जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।)

(घ) योगक्षेमं वहाम्यहम्।
(योग और क्षेम को वहन करूँ।)

(ङ) नभः स्पृशं दीप्तम्।
(प्रकाशित स्पर्श आकाश है।)

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

प्रश्न  3.
रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत:
(रेखांकित पद के आधार पर प्रश्ननिर्माण कीजिए-)
(क) यतो धर्मस्ततो जयः
(ख) सर्वस्य लोचनं शास्त्रम्
(ग) जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।
(घ) विद्यया अमृतम् अश्नुते।
(ङ) सिद्धिर्भवति कर्मजा
(च) सर्वस्य लोचनं शास्त्रम्।
(छ) आदित्याद् जायते वृष्टिः।
उत्तराणि:
(क) यतो धर्मस्ततो कः?
(ख) सर्वस्य लोचनं किम?
(ग) का स्वर्गादपि गरीयसी?
(घ) विद्यया किम् अश्नुते?
(ङ) सिद्धिर्भवति केन?
(च) कस्य लोचनं शास्त्रम्?
(छ) कस्मात् जायते वृष्टिः?

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

प्रश्न 4.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा अधोलिखितानि रिक्तस्थानानि पूरयत
(मञ्जूषा से पदों को चुनकर नीचे लिखे हुए रिक्त स्थानों को पूरा कीजिए-)
समनसः, संस्कृतिः, मा सद्, जयामहे, हिताय बहुजन
(क) बहुजन ……….. सुखाय।
(ख) कला रक्षणम्।
(ग) जलेष्वेव ………
(घ) असतो ………. गमय।
(ङ) उदबुध्यध्वं ……….. सखायः।
उत्तराणि:
(क) हिताय बहुजन
(ख) संस्कृति
(ग) जयामहे
(घ) मा सद्
(ङ) समनसः।।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

प्रश्न  5.
समेलनं कुरुत:
(सही मिलान कीजिए.-)
(क) धर्मचक्रप्रवर्तनाय – पेराडेनिया विश्वविद्यालय श्रीलंका
(ख) सत्यं शिवं सुन्दरम् – भारतीयमौसमविभागः।
(ग) सर्वस्य लोचनं शास्त्रम् – राजस्थानराज्यपथ परिवहन निगमः
(घ) आदित्यात् जायते वृष्टिः – लोकसभा
(ङ) शुभास्ते पन्थानः सन्तु – राष्ट्रियदूरदर्शनम्
उत्तराणि:
(क) धर्मचक्रप्रवर्तनाय – लोकसभा।
(ख) सत्यं शिवं सुन्दरम् – राष्ट्रियदूरदर्शनम्।
(ग) सर्वस्य लोचनं शास्त्रम् – पेराडेनिया विश्वविद्यालय श्रीलंका।
(घ) आदित्यात् जायते वृष्टिः – भारतीयमौसमविभागः।
(ङ) शुभारः पन्थानः सन्तु – राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगमः।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

प्रश्न 6.
अधोलिखितानां पदानां सन्धिविच्छेदं कुरुत:
(नीचे लिखे हुए पों का सन्धि-विच्छेद कीजिए-)
(क) धर्मस्ततः
(ख) वहाम्यहम्
(ग) सिद्धिर्भवति
(घ) शुभास्ते
(ङ) जलेष्वेव।
उत्तराणि:
धर्मः + ततः
(ख) वहामि + अहम्
(ग) सिद्धिः + भवति
(घ) शुभाः + ते
(ङ) जलेषु + एव।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

RBSE Class 8 Sanskrit ध्येयवाक्यानि अन्य महत्वपूर्णः प्रश्नाः

RBSE Class 8 Sanskrit ध्येयवाक्यानि वस्तुनिष्ठप्रश्नोत्तराणि

प्रश्न 1.
वृष्टिः केन जायते ?
(क) शशिनः
(ख) अग्नेः
(ग) आदित्यात्
(घ) आकाशात्।
उत्तराणि:
(ग) आदित्यात्

प्रश्न 2.
ज्ञानेन कस्याः प्राप्तिः भवति ?
(क) धनस्य
(ख) यशसः
(ग) अमरतायाः
(घ) विषस्य।
उत्तराणि:
(ग) अमरतायाः

प्रश्न 3.
वयं रक्षामः इति कस्य ध्येयवाक्यम् ?
(क) भारतीय तटरक्षकस्य
(ख) इण्डोनेशियन जलसेनायाः
(ग) भारतीयजीवन-बीमानिगमस्य
(घ) भारतीयवायुसेनायाः
उत्तराणि:
(क) भारतीय तटरक्षकस्य

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

प्रश्न 4.
लोकसभायाः किं ध्येयवाक्यम् ?
(क) सत्यं शिवं सुन्दरम्
(ख) योगक्षेमं वहाम्यहम्
(ग) असतो मा सद् गमय
(घ) धर्मचक्रप्रवर्तनाय।
उत्तराणि:
(घ) धर्मचक्रप्रवर्तनाय।

RBSE Class 8 Sanskrit ध्येयवाक्यानि अतिलघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न 1.
कस्य एव विजयः भवति?
उत्तराणि:
सत्यमेव जयते।

प्रश्न 2.
अस्माकं जीवनं कस्मै भवेत् ?
उत्तराणि:
अस्माकं जीवनं सम्पूर्ण समाजस्य हिताय सुखाय च भवेत्।

प्रश्न 3.
शासकः स्वप्रजाम् अपि कस्मिन् योजयेत् ?
उत्तराणि:
शासकः स्वप्रजाम् अपि कर्तव्यपालने योजयेत् ?

प्रश्न 4.
वयं सर्वे मिलित्वा कस्य रक्षणकार्यं करणीयम ?
उत्तराणि:
वयं सर्वे मिलित्वा देशस्य रक्षणकार्यं करणीयम्।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

RBSE Class 8 Sanskrit ध्येयवाक्यानि लघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न 1.
संस्कृतस्य ध्येय वाक्यं कुत्र स्वीकृतम् ?
उत्तरम्:
संस्कृतस्य ध्येयवाक्यं न केवलं भारते, अपितु विदेशेषु अपि स्वराष्ट्रस्य विभागस्य प्रतीकचिह्न स्वीकृतम्।

प्रश्न 2.
आकाशवाण्याः ध्येयवाक्यम् किम् अस्ति ?
उत्तरम्:
आकाशवाण्याः ध्येयवाक्यम् “बहुजनहिताय बहुजनसुखाय” इत्यस्ति।

प्रश्न 3.
अस्माकं दूरदर्शनम् किं प्रस्तौति ?
उत्तरम्:
अस्माकं दूरदर्शनम् सत्यं शिवं सुन्दरम् इति प्रस्तौति।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

प्रश्न 4.
धर्मसाधनस्य प्रथमंसोपानं किम् अस्ति?
उत्तरम्:
अस्माकं शरीरं धर्मसाधनस्य प्रथमं सोपानम् अस्ति।

योग्यता-विस्तारः

हिन्दी अनुवाद – भाषा का खेल –
(क) अध्यापक छात्रों का एक मण्डल बनाकर बीच में खड़े होकर एक ध्येयवाक्य को बोलें। छात्रों को क्रमानुसार उस विभाग का नाम बोलना चाहिए। जो असत्य बोलता है अथवा अनुचित बोलता है वह मण्डल से बाहर हो जाता है। इसी प्रकार अध्यापक किसी भी विभाग का नाम बोलें, छात्रों को वैसे ही उस विभाग का ध्येय वाक्य बोलना चाहिए। अन्त में जो शेष रहता है वही विजेता होता है।

(ख) अध्यापक को छात्रों के दो दल अथवा तीन दल बनाकर प्रश्नोत्तर कार्यक्रम चलाना चाहिए। प्रत्येक दल का नामकरण करके (जैसे–पाणिनि दल, व्यास दल, वाल्मीकि दल, शिवाजीदल और प्रताप दल) प्रत्येक दल एक-एक प्रश्न पूछे। उत्तर देने की समय सीमा एक मिनट हो। उससे यदि कोई भी उचित उत्तर देता है, तब उस दल के लिए तीन अंक हों। यदि उस दल से उत्तर नहीं आता है तब उस प्रश्न का अंक शून्य दिया जाना चाहिए। उसके बाद प्रश्न अगले दल में जाये। यदि वे उसी प्रश्न का उत्तर सही देते हैं तो उनके लिए एक अंक अतिरिक्त दिया जाय। तत्पश्चात् दूसरे दल के लिए मूलप्रश्न आवे। यहाँ सभी प्रश्न ध्येय वाक्यों में से ही होवे। अन्त में जो दल सबसे अधिक अंक पाता है वह विजेता होता है।)

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

अन्य प्रसिद्ध वाक्यों को भी पढ़िए
ध्येयवाक्यम्                      विभागः
(क) अतिथि: देवो भव – भारतीयपर्यटनविभागः
(ख) श्रम एव जयते – श्रमविभागः
(ग) योगः कर्मसु कौशलम् – भारतीय औद्योगिकसंस्थानम् खड्गपुरम्
(घ) कर्मण्येवाधिकारस्ते मा – इण्डोनेशियन् वायुसेना फलेषु कदाचन
(ङ) सा विद्या या विमुक्तये – विद्याभारती
(च) वीरभोग्या वसुन्धरा – भारतीयस्थलसेना (राजपूताना)
(छ) बुद्धिः सर्वत्र भ्राजते – कोलम्बो विश्वविद्यालयः श्रीलंका
(ज) योगस्थः कुरु कर्माणि – कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालयः हरियाणा
(झ) योऽनूचानः स नो महान् – राष्ट्रियसंस्कृतसंस्थानम्, नव देहली
(ञ) धर्मो विश्वस्य जगतः – प्रतिष्ठा – राजस्थानविश्वविद्यालयः, जयपुरम्
(ट) धर्मो रक्षति रक्षित: – अनुसन्धान एवं विश्लेषण विभागः
(ठ) श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानम्। – महर्षिदयानन्द -सरस्वतीविश्वविद्यालयः अजयमेरु।
(ड) मानकः पथप्रदर्शकः – भारतीयमानकविभागः
(ढ) कृण्वन्तो विश्वमार्यम् – आर्यसमाजः
(छात्रों को अपने आप भी इस प्रकार के ध्येयवाक्यों का संग्रह करना चाहिए।)

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

महत्वपूर्ण शब्दार्थानां सूची
RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

पाठ-परिचयः
संस्कृत वाङ्मय ज्ञान-निधि के रूप में जाना जाता है। इसके अमर कवियों ने अपनी-अपनी कृतियों में उदात्त भावों, सार्वभौम सत्य और ध्येयवाक्यों की रचना की है। उनमें से कुछ वाक्य-खण्डों को विविध संस्थाओं ने अपने प्रतीक चिहनों में ध्येय वाक्य के रूप में स्वीकार किया है। केवल भारत में ही नहीं अपितु विदेशों में भी अपने राष्ट्र अथवा विभाग के प्रतीक चिह्न में संस्कृत के ध्येयवाक्य को स्वीकार किया है। इसी से संस्कृत का वैश्विक महत्व स्वयं ही सिद्ध होता है।

मूल अंशः शब्दार्थः अनुवादः, भावार्थः
ध्येयवाक्यानि       विभागाः

1. सत्यमेव जयते – भारतसर्वकारः
2. यतो धर्मस्ततो जयः – सर्वोच्चन्यायालयः
3. सत्यं शिवं सुन्दरम् – राष्ट्रियदूरदर्शनम्
4. बहुजनहिताय बहुजनसुखाय – आकाशवाणी
5. धर्मचक्र प्रवर्तनाय – लोकसभा

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

शब्दार्थ:
सत्यमेव = सत्य ही। जयते = विजय को प्राप्त करता है। यतो = जहाँ। धर्मः = धर्म। ततो = वहीं। सत्यम् = सत्य। शिवं = कल्याण। बहुजनहिताय = बहुत लोगों के हित के लिए। सुखाय = सुख के लिए। प्रवर्तनाय = लागू करने के लिए। धर्मः = कर्तव्य।

अनुवादः
(1) भारत सरकार का ध्येय वाक्य है सत्य ही विजय प्राप्त करता है अर्थात् सत्य की ही विजय होती है।
(2) सर्वोच्चन्यायालय का ध्येयवाक्य है-जहाँ धर्म होता है वहाँ विजय होती है।
(3) राष्ट्रीयदूरदर्शन का ध्येयवाक्य है-परमात्मा सत्य स्वरूप है, वही विश्व का कल्याण करता है। वही सन्दर है।
(4) आकाशवाणी का ध्येयवाक्य है-हमारा जीवन सम्पूर्ण समाज के हित और सुख के लिए हो।
(5) लोकसभा का ध्येयवाक्य है शासकं अपने धर्म (कर्तव्य) का पालन करते हुए अपनी प्रजा को कर्तव्य पालन में लगावे।

भावार्थ:
(1) भारत सरकार के ध्येय वाक्य के अनुसार सत्य की ही विजय होती है। यह हमारे देश का मूल मन्त्र है। सत्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है। सत्य ही शाश्वत है। अतः सत्य विजय को प्राप्त करता है।
(2) सर्वोच्च न्यायालय के ध्येयवाक्य के अनुसार जहाँ धर्म होता है वहीं विजय होती है। अधर्म की हमेशा पराजय होती है। यदि हम न्यायपूर्वक कार्य करें तो हमारी विजय निश्चित है।
(3) राष्ट्रीय दूरदर्शन के ध्येयवाक्य के अनुसार वह परमात्मा सत्यस्वरूप है, वही विश्व का कल्याण करता है। अतः वह – परम दयालु है। वही सुन्दर है। इस ब्रह्माण्ड में उससे सुन्दर कोई भी नहीं है।
(4) आकाशवाणी के ध्येयवाक्य के अनुसार हमारा जीवन सम्पूर्ण समाज के कल्याण और सुख के लिए होवे। हम सब. उसके सुख के लिए हमेशा प्रयत्न करें।
(5) लोकसभा के ध्येयवाक्य के अनुसार शासक का दायित्व होता है कि वह सभी मानवों का धर्मपूर्वक पालन करे। शासक अपना कर्तव्य-पालन करता हुआ अपनी प्रजा को भी कर्तव्य पालन में लगावे।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

6 योगक्षेमं वहाम्यहम् – भारतीयजीवनबीमानिगमः
7 आदित्यात् जायते वृष्टि – भारतीयमौसमविभागः
8 नभः स्पृशं दीप्तम् – भारतीयवायुसेना
9. शन्नो वरुणः – भारतीयजलसेना
10. शरीरमाद्यं खलुधर्मसाधनम् – अखिलभारतीय आयुर्विज्ञानसंस्थानम्।

शब्दार्थ:
योगक्षेम = अप्राप्त वस्तु की प्राप्ति योग, प्राप्त वस्तु की रक्षा क्षेम है। आदित्यात् = सूर्य से। वृष्टिः = वर्षा। दीप्तम् = प्रकाशित। शम् + नः = हमारा कल्याण करे। आद्यम् = पहला। शरीरम् = शरीर।

अनुवादः
(6) भारतीय जीवन बीमा निगम का ध्येय वाक्य है – अप्राप्त वस्तुओं को हम प्राप्त करें और प्राप्त वस्तुओं की रक्षा करें।
(7) भारतीय मौसम विभाग का ध्येय वाक्य है – सूर्य से वर्षा होती है।
(8) भारतीय वायुसेना का ध्येय वाक्य है – प्रकाशित आकाश का स्पर्श करना।
(9) भारतीय जल सेना का ध्येय वाक्य है – जल के स्वामी वरुण हमारा कल्याण करें।
(10) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान का ध्येय वाक्य है – धर्म साधन की पहली सीढ़ी शरीर है।

भावार्थ:
(6) भारतीय जीवन बीमा निगम के ध्येय वाक्य के अनुसार स्पष्ट है कि योग अर्थात् अप्राप्त वस्तु की प्राप्ति। क्षेम का अर्थ है प्राप्त वस्तु का संरक्षण। इस प्रकार अप्राप्त वस्तुओं को हम प्राप्त करें तथा प्राप्त वस्तुओं की रक्षा करें।
(7) भारतीय मौसम विभाग के ध्येय वाक्य के अनुसार-सूर्य से वर्षा होती है अर्थात् जब सूर्य तपता है तब समुद्रों में अवस्थित जल वाष्प के रूप में आकाश में जाता है। उसी से बादलों का निर्माण होता है। बादल जल बरसाते हैं।
(8) भारतीय वायु सेना के ध्येयवाक्य के अनुसार-हमें प्रकाशित आकाश का स्पर्श हो। अर्थात् हमारी गति न केवल भूमण्डल में अपितु आकाशमण्डल में भी निर्बाध रूप से हो। हम आकाश में अवस्थित शत्रुओं को मारकर विजय प्राप्त करें।
(9) भारतीय जल सेना के ध्येय वाक्य के अनुसार-जल के स्वामी वरुण देव हमारा कल्याण करें। समुद्र पार करने में कोई बाधा उत्पन्न न हो, वहाँ भी हमारा कल्याण हो।
(10) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ध्येय वाक्य के अनुसार धर्म साधन की प्रथम सीढ़ी हमारा शरीर ही है। शरीर के बिना हम कुछ भी प्राप्त करने में समर्थ नहीं हो सकते। अतः यत्नपूर्वक शरीर की रक्षा करनी चाहिए।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

11. असतो मा सद्गमय: – केन्द्रीयमाध्यमिकशिक्षाबोर्ड
12. विद्ययाऽमृतमश्नुते – राष्ट्रियशैक्षिक अनुसन्धानम् एवं प्रशिक्षण परिषद् (NCERT)
13. उबुध्यध्वं समनसः सखायः – राज्यशैक्षिक अनुसन्धानम् एवं प्रशिक्षणसंस्थानम् (SIERT)
14. सिद्धिर्भवतिकर्मजा – माध्यमिकशिक्षा-बोर्ड राजस्थानम्
15. शुभास्ते पन्थानः सन्तु – राजस्थानराज्य-पथ परिवहन निगमः

शब्दार्थः
असतः = असत्य से। विद्यया = ज्ञान से। उबुध्यध्वम् = जागो सचेत हो। समनसः = एक जैसे मन वाले। सखायः = मित्र। सिद्धिः = कार्यसिद्ध। कर्मजा = कर्म से। शुभाः = मंगलमय। पन्थानः = मार्ग। सन्तु = होंगे।

अनुवाद:
(11) केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का ध्येय वाक्य है – मुझे असत्य से सत्य की ओर ले जाओ। हम कभी भी सन्मार्ग को छोड़कर अन्यत्र विचरण न करें।
(12) राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् का। ध्येय वाक्य है – ज्ञान से अमरता की प्राप्ति होती है। शरीर के नष्ट हो जाने पर भी यश शाश्वत रहता है।
(13) राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण संस्थान का ध्येयवाक्य है हे मित्रो ! आप जागरूक हो अर्थात् सज्जन शक्ति एक होकर जागृत हो।
(14) माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान का ध्येयवाक्य है| कर्म से ही कार्य की सिद्धि होती है।
(15) राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम का ध्येय वाक्य है-आपका मार्ग मंगलमय हो। मार्ग में किसी प्रकार की कोई बाधा न आवे।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

भावार्थः
(11) केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के ध्येय वाक्य के अनुसार भक्त ईश्वर से निवेदन करता है कि वह मुझे असत्य से सत्य की ओर ले जावे अर्थात् हम कभी भी सन्मार्ग छोड़कर अन्यत्र विचरण न करें।
(12) राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् के ध्येय वाक्यानुसार ज्ञान से अमरता की प्राप्ति होती है। विद्या
से मानव यश प्राप्त करता है।
(13) राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण संस्थान के ध्येय वाक्यानुसार समान मन वाले हे मित्रो ! आप लोग जागरूक हों।
(14) माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के ध्येय वाक्यानुसारकर्म से कार्यसिद्धि होती है। इसलिए हम सब अपने अपने कार्य में प्रवृत्त हों।
(15) राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के ध्येय वाक्यानुसार-आपका मार्ग सुखप्रद एवं कल्याणमय होवे, मार्ग में कोई भी बाधा न आये अर्थात् कहीं कोई विपत्ति का सामना न करना पड़े।

16. कला संस्कृतिः रक्षणम् – सिङ्गापुर इण्डियन फाईन आर्ट्स सोसाइटी (सिङ्गापुरम्)
17. जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी – नेपालदेशः (राष्ट्रिय आदर्शवाक्यम्)
18. सर्वस्य लोचनं शास्त्रम् – पेराडेनिया विश्वविद्यालयः श्रीलङ्का
19. जलेष्वेव जयामहे – इण्डोनेशियन् जलसेना
20. वयं रक्षामः – भारतीय तटरक्षक:

शब्दार्थः
रक्षणम् = रक्षा करना। स्वर्गादपि = स्वर्ग से भी। गरीयसी = बढ़कर है। शास्त्रम् = शास्त्र। जयामहे – विजय प्राप्त करें। रक्षामः = रक्षा करे।

अनुवाद:
(16) सिंगापुर इण्डियन फाईन आर्ट्स सोसाइटी (सिंगापुर) का ध्येयवाक्य है -कला और संस्कृति की रक्षा करनी चाहिए।
(17) नेपाल देश का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है कि जननी और जन्मभमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।
(18) पेराडेनिया विश्वविद्यालय श्रीलंका का ध्येयवाक्य है कि शास्त्र द्वारा मानव उचित और अनुचित सबको देखने में समर्थ होता है। अतः शास्त्र सभी का नेत्र है।
(19) इन्डोनेशिया जल सेना का ध्येयवाक्य है कि जलों पर हमारी विजय हो
(20) भारतीय तटरक्षक का ध्येय वाक्य है कि सभी मिलकर देश की रक्षा करें।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 3 ध्येयवाक्यानि

भावार्थ:
(16) सिंगापुर इण्डियन फाइन आर्ट्स सोसाइटी (सिंगापुर) के ध्येयवाक्य के अनुसार कला और संस्कृति रक्षा करने योग्य होती है। कला और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की मूलधारा होती है।
(17) नेपाल देश के राष्ट्रीय आदर्शवाक्य के अनुसार – माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। इसलिए हमें माता का सम्मान और सेवा करनी चाहिए। साथ ही मातृभूमि की रक्षा भी करनी चाहिए।
(18) पेराडेनिया विश्वविद्यालय श्रीलंका के ध्येय- वाक्यानुसार शास्त्र सभी की दृष्टि होती है। सामान्य नेत्रों से हम केवल प्रत्यक्षपदार्थ ही देख सकते हैं। लेकिन शास्त्र द्वारा मानव उचित-अनुचित को अपने विवेक से देखने में समर्थ होता है।
(19) इण्डोनेशिया जलसेना के ध्येयवाक्यानुसार हमारी जलों में विजय होवे। केवल आकाशीय स्थलों पर ही नहीं अपितु महासागर में भी हम शत्रुओं को जीतकर विजय प्राप्त करें।
(20) भारतीय तटरक्षक के ध्येय वाक्य के अनुसार हम सभी को मिलकर देश की रक्षा का कार्य करना चाहिए।

Leave a Comment