RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 2 विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit

Rajasthan Board RBSE Class 8 Sanskrit Chapter 2 विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा

RBSE Class 8 Sanskrit विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा पाठ्यपुस्तकस्य प्रश्नोत्तराणि

RBSE Class 8 Sanskrit विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा मौखिकप्रश्नाः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां शब्दानाम् उच्चारणं कुरुत-
(नीचे लिखे हुए शब्दों का उच्चारण कीजिए)
उत्तर:
कस्मिंश्चिद, शास्त्रपारङ्गता, शास्त्रविमुखः, प्रभूतम्, मन्त्रणाम्, अस्थिसञ्चयः, तेनोत्सुकतया
नोट – छात्रगण अपने आप ही उच्चारण करें।

प्रश्न 2.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि वदत
(नीचे लिखे हए प्रश्नों के उत्तर बताइये-)
(क) कतिपुत्राः बुद्धिरहिताः आसन्?
(कितने पुत्र बुद्धि से रहित थे?)
उत्तर:
त्रयपुत्राः बुद्धिरहिताः आसन्।
(तीन पुत्र बुद्धि से रहित थे।)

(ख) कस्य समीपं विद्या नासीत्?
(किसके पास विद्या नहीं थी?)
उत्तर:
चतुर्थस्य समीपं विद्या नासीत्।
(चौथे के पास विद्या नहीं थी।)

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(ग) चर्ममांसरुधिरं केन संयोजितम्?
(चमड़ी, मांस और खून किसने जोड़कर खड़ा किया?)
उत्तर:
चर्ममांसरुधिरं द्वितीयेन संयोजितम्।
(चमड़ी, मांस और खून दूसरे ने जोड़कर खड़ा किया।)

(घ) सिंहंसजीवंकः करोति?
(शेर को जीवित कौन करता है?)
उत्तर:
सिंहं सजीवं तृतीयः करोति।
(सिंह को जीवित तीसरा करता है।)

(ङ) का वरम् अस्ति?
(कौन श्रेष्ठ है?)
उत्तर:
बुद्धिः वरम् अस्ति।
(बुद्धि श्रेष्ठ है।)

RBSE Class 8 Sanskrit विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा लिखितप्रश्नाः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर एक पद में लिखिए-)

(क) धनार्जनाय ब्राह्मणपुत्राः कुत्र गच्छन्ति?
(धन कमाने के लिए ब्राह्मणपुत्र कहाँ जाते हैं?)
उत्तर:
पूर्वदेशम् (पूर्व देश को)

(ख) “एषः सिंहः रच्यते” इति कः उक्तवान्?
(‘यह सिंह बनाया जा रहा है’ ऐसा किसने कहा?)
उत्तर:
चतुर्थपुत्रः (चौथे पुत्र ने)

(ग) शास्त्रविमुखः कः आसीत्?
(शास्त्रविमुख कौन था?)
उत्तर:
चतुर्थः (चौथा)

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(घ) ते त्रयः केन मारिताः?
(वे तीनों किसके द्वारा मार दिये गये?)
उत्तर:
सिंहेन (सिंह के द्वारा)

(ङ) कस्मात् बुद्धि उत्तमा?
(किससे बुद्धि उत्तम – है?)
उत्तर:
विद्यायाः (विद्या से)

प्रश्न 2.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकवाक्येन लिखत-
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए-)

(क) प्रस्तुतः पाठः कस्मात् ग्रन्थात् सङ्कलितः?
(प्रस्तुत पाठ किस ग्रन्थ से संकलित है?)
उत्तर:
प्रस्तुत पाठः पञ्चतंत्रात् ग्रन्थात् संकलितः।
(प्रस्तुत पाठ पञ्चतन्त्र ग्रन्थ से संकलित है।)

(ख) केन प्रभावेन सिंहः सजीवः अभवत्?
(किसके प्रभाव से शेर सजीव हुआ?)
उत्तर:
विद्यया प्रभावेन सिंहः सजीवः अभवत्।
(विद्या के प्रभाव से सिंह सजीव हुआ।)

(ग) “भो: तिष्ठतु भवान्” इति कः निषेधितवान्?
(अरे! आप ठहरें’ ऐसा किसने मना किया?)
उत्तर:
‘भोः ! तिष्ठतु भवान्’ इति बुद्धिमता निषेधितवान्।
(‘अरे ! आप ठहरें’ ऐसा बुद्धिमान ने मना किया।)

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(घ) सुबुद्धिः कस्माद् अवतीर्य गृहंगतः?
(बुद्धिमान् किससे उतरकर घर चला गया?)
उत्तर:
सुबुद्धिः वृक्षात् अवतीर्य गृहं गतः।
(बुद्धिमान् वृक्ष से उतरकर घर चला गया।)

(ङ) के विनश्यन्ति?
(कौन विनष्ट हो जाते हैं)
उत्तर:
बुद्धिहीनाः विनश्यन्ति।
(बुद्धिहीन लोग विनष्ट हो जाते हैं।)

प्रश्न 3.
रेखाङ्कितपदान् आधारीकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(रेखांकित पदों के आधार मानकर प्रश्ननिर्माण कीजिए-)

(क) ते मन्त्रणाम् अकुर्वन्।
(ख) कस्मिंश्चिद् ग्रामे चत्वारो ब्राह्मणपुत्राः वसन्ति स्म।
(ग) तेन सिंहः सजीवः कृत।
(घ) प्रथमः अस्थिसञ्चयं करोति।
(ङ) सुबुद्धिः वृक्षाद् अवतीर्य गृहं गतः।
उत्तर:
(क) ते काम् अकुर्वन्?
(ख) कस्मिंश्चिद् ग्रामे चत्वारः के वसन्ति स्म?
(ग) तेन कः सजीवः कृतः?
(घ) प्रथमः किं करोति?
(ङ) कः वृक्षाद् अवतीर्य गृहं गतः?

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प्रश्न 4.
मञ्जूषातः शब्दान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(मञ्जूषा से शब्दों को चुनकर खाली जगहों को पूरा कीजिए-)
सिंहेन, वृक्षाद्, बुद्धिमान्, बाल्यकालाद्, एकः, चतुर्थः, विद्या, विद्यायाः, विफलां-

(क) एकस्तु …………. किन्तु शास्त्रविमुखः।
(ख) अहो! अस्मासु ……………….. मूढः।
(ग) त्वं स्वगृहं गच्छ यतस्ते ………….. नास्ति।
(घ) वयं ………………… एव एकत्र क्रीडिताः।
(ङ) ते त्रयः अपि ………….. उत्थाय मारिताः।
उत्तर:
(क) बुद्धिमान्
(ख) एकः
(ग) विद्या
(घ) बाल्यकालाद्
(ङ) सिंहेन।

प्रश्न 5.
उदाहरणं दृष्ट्वा निर्देशानुसारं रिक्तस्थानानि पूरयत-
(उदाहरण को देखकर निर्देश के अनुसार रिक्त स्थानों को पूरा कीजिए-)

उदाहरण:
अतः……………. स्वोपार्जितं धनं न दास्यामि। (एतद्शब्दः चतुर्थीविभक्तिः एकवचनम्)
उत्तर:
तः अस्मै स्वोपार्जितं धनं न दास्यामि।

(क) गच्छ यतः ……………… विद्यारहितः असि। (युष्मद्शब्दः प्रथमाविभक्तिः एकवचनम्)
(ख) ते मार्गे ……………….. अन्तः कतिचिद् अस्थीनि अपश्यन्। (अरण्यशब्दः षष्ठीविभक्तिः एकवचनम्)
(ग) अहं ………………. विफलां न करोमि। (विद्याशब्दः द्वितीयाविभक्तिः एकवचनम्)
(घ) ……………………….. अवतीर्य गृहं गतः। (वृक्षशब्दः पञ्चमीविभक्तिः एकवचनम्)
उत्तर:
(क) त्वं
(ख) अरण्यस्थ
(ग) विद्यां
(घ) वृक्षाद्।

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प्रश्न 6.
उचितपदेन सह सुमेलनं कुरुत-
(सही पद के साथ मिलान कीजिए-)

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उत्तर:
(क) – (इ)
(ख) – (ई)
(ग) – (उ)
(घ) – (आ)
(ङ) – (अ)

प्रश्न 7.
उचित अव्ययेन रिक्तस्थानम् पूरयत-
(सही अव्यय से रिक्त स्थान को पूरा-)

(क) गृहीत ………… केशेषु मृत्युना धर्ममाचरेत्। (सह, खलु, इव, च)
(ख) न चौरहार्य न …………. राजहार्यं न भ्रातृभाज्य न च भारकारि। (यथा, च, तु, ना)
(ग) व्यये कृते वर्धते …………. नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्। (एव, इव, च पुनः)।
(घ) आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां ……….. समाचरेत। (च, यद्यपि, क्व, न)
(ङ) सत्यम् ………. जयते नानृतम्। (श्वः, अद्य, तदा, एव)
उत्तर:
(क) खलु
(ख) तु
(ग) एव
(घ) न
(ङ) एव।

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RBSE Class 8 Sanskrit विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा अन्य महत्वपूर्णः प्रश्नाः

RBSE Class 8 Sanskrit विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा वस्तुनिष्ठप्रश्नोत्तराणि

प्रश्न 1.
कति ब्राह्मणपुत्राः परस्परं मित्रभावेन वसन्ति स्म?
(क) त्रयः
(ख) चत्वारः
(ग) पञ्चः
(घ) एकः
उत्तर:
(ख) चत्वारः

प्रश्न 2.
ब्राह्मणपुत्राः कुत्र अगच्छन्?
(क) स्वदेशं
(ख) विदेशं
(ग) स्वगृहं
(घ) स्वविद्यालयम्।
उत्तर:
(ख) विदेशं

प्रश्न 3.
‘दास्यामि’ इति पदे कः लकारः प्रयुक्तः?
(क) लट्लकारः
(ख) लोट्लकारः
(ग) लङ्लकारः
(घ) लृट्लकारः
उत्तर:
(घ) लृट्लकारः

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प्रश्न 4.
विद्यायाः का उत्तमा?
(क) लक्ष्मी
(ख) भवनम्
(ग) बुद्धिः
(घ) मित्रता।
उत्तर:
(ग) बुद्धिः

प्रश्न 5.
ते त्रयः अपि केन उत्थाय मारिताः?
(क) सिंहेन
(ब) बुद्धिमता
(ग) गजेन
(घ) एकेन मूर्खण।
उत्तर:
(क) सिंहेन

RBSE Class 8 Sanskrit विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा अतिलघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न 1.
चतुर्षु कति शास्त्रपारङ्गताः बुद्धिरहिता: च कति आसन्?
उत्तर:
चतुर्पु त्रयः शास्त्रपारङ्गताः बुद्धिरहिताः च त्रयः आसन्।

प्रश्न 2.
चतुषु चतुर्थः कीदृशः आसीत्?
उत्तर:
चतुर्षु चतुर्थः बुद्धिमान् किन्तु शास्त्रविमुखः आसीत्।

प्रश्न 3.
धनोपार्जनाय ते कुत्र अगच्छन्?
उत्तर:
धनोपार्जनाय ते विदेशम् अगच्छन्।

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प्रश्न 4.
सिंहेन के मारिताः?
उत्तर:
सिंहेन ते त्रयः अपि मारिताः।

प्रश्न 5. ‘विनश्यन्ति’ इत्यत्र कः लकारः अस्ति?
उत्तर:
‘विनश्यन्ति’ इत्यत्र लट्लकारः।

RBSE Class 8 Sanskrit विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा लघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न 1.
अयं पाठः कस्मात् ग्रन्थात संकलितः?
उत्तर:
अयं पाठः विष्णु शर्मणा विरचितात् पञ्चतन्त्रात् संकलितः।

प्रश्न 2.
वयं बाल्यकालाद् एव एकत्र क्रीडिताः इति केन उक्तम्?
उत्तर:
तृतीयेन उक्तम्-अहो नोचितम् एवं कर्तुं यतो हि वयं बाल्यकालाद् एव एकत्र क्रीडिताः।

प्रश्न 3.
ब्राह्मणपुत्राःमार्गेअरण्यस्य अन्तः कानि अपश्यन्?
उत्तर:
ब्राह्मणपुत्रा:मार्गे अरण्यस्य अन्तःकतिचिद् अस्थीनि अपश्यन्।

प्रश्न 4.
चतुर्थः कुत्र अगच्छत्?
उत्तर:
चतुर्थः वृक्षाद् अवतीर्य स्वगृहम् अगच्छत्।

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निबन्धात्मकं प्रश्नोत्तरम्

प्रश्न 1.
‘विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा’ इति कथायाः सारं हिन्दीभाषायां लिखत।
उत्तर:
किसी गाँव में चार ब्राह्मण पुत्र रहते थे। उनमें से तीन शास्त्रों के विद्वान, लेकिन बुद्धिहीन थे। चौथा बुद्धिमान् लेकिन शास्त्रविमुख था। एक बार उन्होंने सलाह की कि विदेश जाकर धन कमाया जाय।

कुछ ही दूर जाकर सबसे बड़ा बोला कि हममें से एक बिना पढ़ा-लिखा है, बुद्धिबल से विद्या के बिना राजा से दान नहीं मिलेगा। अतः यह घर वापस चला जाय। दूसरे ने भी यही कहा। तब तीसरा बोला, ऐसा करना ठीक नहीं है क्योंकि हम सब बचपन से ही एक साथ खेले-कूदे हैं, यह भी हमारे कमाये हुए धन का भोग करेगा।

वे सब चल दिये। कुछ ही दूर पर जंगल से अन्दर कुछ हडिडयाँ देखीं। एक बोला-आज विद्या की परीक्षा की जाय। यह कोई जीव मरा हुआ पड़ा है। इसे विद्या के प्रभाव से जीवित करते हैं। पहले ने बड़ी उत्सुकता से हड्डियाँ एकत्र की। दूसने ने चमड़ी, मांस, खून से जोड़कर खड़ा किया। तीसरे ने जैसे ही उसका जीवन सञ्चार करना चाहा तो उस चौथे (शास्त्र विमुख) ने रोककर, यह सिंह बनाया जा रहा है। यह उठकर हम सबको खा लेगा।

तब वही (तीसरा) बोला-तुम चुप रहो, मूर्ख हो, मैं अपनी विद्या को विफल नहीं कर सकता। इसे देखकर चौथे ने कुछ क्षण रुकने के लिए कहा तथा वृक्ष पर चढ़ गया। उन तीनों के द्वारा सिंह जीवित किया गया और उसने उठकर तीनों को मार दिया। वह चौथा वृक्ष से उतरकर अपने घर चला गया। इसीलिए कहा गया है कि विद्या से बुद्धि उत्तम होती है। क्योंकि बुद्धिहीन वे तीनों ब्राह्मण पुत्र मारे गये।

योग्यता-विस्तारः

(क) ग्रन्थपरिचयः
पञ्चतन्त्र नामक ग्रन्थ के रचयिता विष्णु शर्मा हैं। इस ग्रन्थ में पाँच तन्त्र हैं-

  1. मित्रभेद
  2. मित्रलाभ
  3. सन्धि विग्रह
  4. लब्धप्रणाश
  5. अपरीक्षित कारक।

महिलारोप्य नाम के नगर में अमर शक्ति नाम का राजा था। उसके बाहुशक्ति, उग्रशक्ति और अनन्तशक्ति नाम के तीन मूर्ख पुत्र थे। विष्णु शर्मा ने उन राजकुमारों को ज्ञान कराने के लिए इस कथा ग्रन्थ की रचना की। इस ग्रन्थ में पशु-पक्षियों को पात्र बनाकर सरल भाषा में अनेक ग्रन्थों से सूक्तियों और उदाहरणों को संग्रह करके बालकथाओं की रचना की। निश्चय ही यह कथाग्रन्थ बालकों के लिए बहुत प्रेरणादायक है। इस प्रकार के कथाग्रन्थ शुकसप्तति, वैतालपञ्चविंशति, सिंहासनद्वात्रिंशिका, हितोपदेश, कथासरित्सागर इत्यादि हैं।

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(ख) भाषा विस्तार:
जिन शब्दों के रूप में कभी कोई विकार उत्पन्न नहीं होता अर्थात् जिन शब्दों के रूप सभी लिङ्गों, सभी विभक्तियों और सभी वचनों में एक सदृश रहते हैं वे शब्द अव्यय कहलाते हैं।

वाक्य में अव्यय शब्द अनेक प्रकार से प्रयुक्त होता है। – तदनुरूप ही अव्यय पाँच प्रकार के माने जाते हैं-

  1. उपसर्ग
  2. क्रिया विशेषण
  3. समुच्चयबोधक
  4. मनोविकारसूचक
  5. अन्य प्रकीर्ण।

अव्ययज्ञान-तालिका

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महत्वपूर्ण शब्दार्थानां सूची

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पाठ-परिचयः
प्रस्तुत पाठ की कथा संस्कृत कथा साहित्य के सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रन्थ पञ्चतन्त्र से संकलित है।। इसके लेखक विष्णु शर्मा हैं। छठी शताब्दी ई. तक पञ्चतन्त्र की कथाओं का भारत से बाहर भी लोकप्रिय हो जाना इतिहास सिद्ध है। पञ्चतन्त्र के वर्तमान रूप में मित्रभेद, मित्रलाभ, सन्धि विग्रह, लब्धप्रणाश तथा अपरीक्षित कारक ये पाँच तन्त्र हैं। प्रत्येक तन्त्र की मुख्य कथा एक ही है किन्तु मुख्यकथा की पुष्टि में अनेक गौण कथाएँ आती जाती हैं।

मूल अंश, शब्दार्थ, हिन्दी अनुवाद एवं प्रश्नोत्तर

(1) कस्मिंश्चिद् ग्रामे चत्वारो ब्राह्मणपुत्राः परस्परं मित्रभावेन वसन्ति स्म। चतुर्पु त्रयः शास्त्रपारङ्गताः परन्तु बुद्धिरहिताः। एकस्तु बुद्धिमान् किन्तु शास्त्रविमुखः। ते कदाचिद् मन्त्रणाम् अकुर्वन्- “यदि विदेशं गत्वा प्रभूतं धनं नार्जयाम तर्हि विद्यया किं प्रयोजनम्? तत् पूर्वदेशं गच्छामः।”

एवं किञ्चिद् मार्गं गते तेषु ज्येष्ठतरः अवदत्-“अहो! अस्मासु एक: अशिक्षितः केवलम् अस्ति बुद्धिमान्। न च राजप्रतिग्रहो बुद्धिबलेन प्राप्स्यति विद्यां विना। अतः अस्मै स्वोपार्जितं धनं न दास्यामि। त्वं स्वगृहं गच्छ यतस्ते विद्या नास्ति।” ततः द्वितीयः अवदत्-“भोः सुबुद्धे ! त्वं स्वगृहं गच्छ यतस्त्वं विद्यारहितः असि।” ततः तृतीयेन उक्तम्-“अहो नोचितम् एवं कर्तुं यतो हि वयं बाल्यकालाद् एव एकत्र क्रीडिताः। अतः आगच्छतु महानुभाव ! भवान् अस्मद् उपार्जितस्य वित्तस्य समभागी भविष्यति।”

शब्दार्थः
कस्मिंश्चिद् = किसी। ग्रामे = गाँव में। चत्वारो = चार। परस्परं = आपस में। मित्रभावेन = मित्रतापूर्वक। वसन्ति स्म% रहते थे। शास्त्रपारङ्गताः = शास्त्रों के विद्वान्। बुद्धिरहिताः = बुद्धि से हीन। शास्त्रविमुखः = शास्त्र से विमुख। मन्त्रणाम् = सलाह को। प्रभूतं = बहुत अधिक। विद्यया = विद्या से। राजप्रतिग्रहः = राजा द्वारा दिया गया दान। प्राप्स्यति = प्राप्त करेगा। वित्तस्य = धन का। यतो हि = क्योंकि। क्रीड़िताः = खेले हैं। उपार्जितस्य = कमाये हुए। समभागी= समान हिस्सेदार। भविष्यति = होंगे। चतुर्यु = चारों में। त्रयः = तीन। परन्तु = लेकिन। एकः = एक। ते= उन्होंने। अकुर्वन् = की। गत्वा = जाकर। नार्जयाम = अर्जित नहीं करते हैं। तर्हि = तो। किं = क्या। प्रयोजनम् = उद्देश्य, मतलब, लाभ। गच्छामः = चलते हैं, जाते हैं। किञ्चिद् = कुछ। मार्गगते = रास्ता चलने पर, रास्ता जाने पर। तेषु = उनमें से। ज्येष्ठतरः = बड़ा। अवदत् = बोला। अस्मासु = हम में। बुद्धिबलेन = बुद्धि के बल से। विद्या विना = बिना विद्या के। अस्मै = इसके लिए। स्वोपार्जितं = अपने कमाये हुए। धनं = धन को। दास्यामि = दूँगा। त्वं = तुम। स्वगृहं = अपने घर को। गच्छ = जाओ। उक्तम् = कहा गया। नोचितं = उचित नहीं है। एवं कर्तुं = इस प्रकार करना। बाल्यकालाद् = बचपन से। एव = ही। एकत्र = इकट्ठे, साथ-साथ।

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अनुवाद:
किसी गाँव में चार ब्राह्मण पुत्र आपस में मित्रतापूर्वक रहते थे। चार में से तीन शास्त्रों के विद्वान् लेकिन बुद्धि से हीन थे। एक बुद्धिमान लेकिन शास्त्र से विमुख था। उन्होंने एक सलाह की, “यदि विदेश जाकर बहुत अधिक धन नहीं कमायें तो विद्या से क्या लाभ होगा? तो पूर्व देश की ओर चलते हैं।”

इस प्रकार कुछ रास्ता चलने पर उनमें से बड़ा बोला-“ओ ! हममें से एक बिना पढ़ा-लिखा केवल बुद्धिमान है। और राजा द्वारा दिया गया धन विद्या के बिना बुद्धि बल से प्राप्त नहीं होगा। इसलिए इसे अपने कमाये हुए धन को नहीं दूंगा।। तुम अपने घर जाओ क्योंकि तुम्हारे पास विद्या नहीं है। उसके बाद दूसरा बोला-“हे बुद्धिमान् ! तुम अपने घर जाओ, क्योंकि तुम विद्या रहित हो।” फिर तीसरे ने कहा-“अरे, ऐसा करना उचित नहीं है क्योंकि हम सब बचपन से ही साथ-साथ खेले हैं। इसलिए हे महानुभाव ! आओ, आप हमारे कमाये हुए धन के बराबर के हिस्सेदार होंगे।”

(क) कस्मिंश्चिद् ग्रामे कति ब्राह्मणपुत्राः केन प्रकारेण वसन्ति स्म?
उत्तर:
कस्मिंश्चिद् ग्रामे चत्वारः ब्राह्मणपुत्राः परस्परं मित्रभावेन वसन्ति स्म।

(ख) चतुर्पु एकः कीदृशः आसीत्?
उत्तर:
चतुर्पु एकः बुद्धिमान् किन्तु शास्त्रविमुखः आसीत्।

(ग) के विदेशं गन्तुं विचारयन्ति?
उत्तर:
चत्वारः ब्राह्मणपुत्राः विदेशं गन्तुं विचारयन्ति।

(घ) “भवान् अस्मद् उपार्जितस्य वित्तस्य समभागी भविष्यति” इति केन उक्तम्?
उत्तर:
‘भवान् अस्मद् उपार्जितस्य वित्तस्य समभागी भविष्यति’ इति तृतीयेन उक्तम्।

(ङ) ‘ब्राह्मणंपुत्राः परस्परं मित्रभावेन वसन्ति स्म’ इत्यत्र ‘वसन्ति स्म’ इति क्रियापदस्य कर्तपदं किम् अस्ति?
उत्तर:
‘ब्राह्मणपुत्राः परस्परं मित्रभावेन वसन्ति स्म’ अत्र ‘वसन्ति स्म’ क्रियापदस्य कर्तृपदम् ‘ब्राह्मणपुत्राः’ अस्ति।

(च) त्वं स्वगृहं गच्छ’ इत्यत्र कः लकारः प्रयुक्तः?
उत्तर:
‘त्वं स्वगृहं गच्छ’ इत्यत्र लोट्लकारः प्रयुक्तः।

(छ) विद्यया किं प्रयोजनम्? इत्यत्र ‘विद्यया’ पदे का विभक्तिः प्रयुक्ता?
उत्तर:
‘विद्यया किं प्रयोजनम्’ इत्यत्र विद्यया पदे तृतीया विभक्तिः प्रयुक्ता।

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(2) तथा कृते ते मार्गे अरण्यस्य अन्तः कतिचिद् अस्थीनि अपश्यन् ततः एकेनोक्तम् “अहो! अद्य विद्याप्रत्ययः कर्तव्यः। किञ्चिद् सत्वम् एतद् मृतं तिष्ठति। तद् विद्याप्रभावेण जीवनसहितं कुर्मः। अहम् अस्थिसञ्चयं करोमि।” ततः
तेनोत्सुकतया अस्थिसञ्चयः कृतः।
द्वितीयेन क्रमशः चर्ममांसरुधिरं च संयोजितम्।
तृतीयः अपि यावज्जीवनं सञ्चारयति तावत् सुबुद्धिः निषेधितवान् अवदच्च-“भोः तिष्ठतु भवान्। एषः सिंह: रच्यते। यदि एनं सजीवं करिष्यति चेद् अयं निश्चयेन सर्वान् अपि खादिष्यति।”

शब्दार्थः
तथा कृते = वैसा यरने पर। मार्गे = रास्ते में। अरण्यस्य = जंगल के। अन्तः = अन्दर। कतिचिद् = कुछ। अस्थीनि = हड्डियाँ। अपश्यन् = देखा, देखो। एकेनोक्तम् = एक ने कहा। अद्य = आज। विद्याप्रत्ययः = विद्या की परीक्षा। सत्वं = प्राणी। मृतं = मरा हुआ। तेनोत्सुकतया = उसके द्वारा उत्सुकता से। संयोजितम् = जोड़ कर खड़ा किया। निषेधितवान् = मना किया। रच्यते = बनाया जा रहा है। सर्वान् अपि = सभी को। खादिष्यति = खा जायेगा। कर्त्तव्यः = करनी चाहिए। किञ्चिद् = कोई। विद्या प्रभावेण = विद्या के प्रभाव से। जीवन सहितं = जीवित। कुर्मः = करते हैं। अस्थिसञ्चयं = हडिड्यों को एकत्रित। करोमि = करता हूँ। कृतः = किया गया। यावत् = जैसे ही। जीवनं सञ्चारयति = जीवन (प्राणों) का सञ्चार करता है। अवदत् = बोला। एषः = यह। करिष्यति = करेगा। अयं = यह। सर्वान् = सभी को। खादिष्यति = खा जायेगा।

अनुवाद:
वैसा करने पर उन्होंने रास्ते में जंगल के अन्दर कुछ हड्डियाँ देखीं, उसके बाद एक ने कहा-“अरे! आज विद्या की परीक्षा करनी चाहिए। कोई प्राणी यह मरा हुआ स्थित है। तो विद्या के प्रभाव से जीवित करते हैं। मैं हड्डी एकत्र करता हूँ।” उसके बाद उसके द्वारा उत्सुकता से हड्डियों को एकत्रित किया गया। दूसरे ने क्रमपूर्वक चमड़ी मांस और खून जोड़कर खड़ा किया। तीसरा भी ज्यों ही जीवन सञ्चार करता है त्यों ही बुद्धिमान् ने मना किया और बोलाअरे ! आप ठहरें। यह शेर बनाया जा रहा है। यदि इसे जीवित करोगे तो यह निश्चित रूप से सभी को खा जायेगा।

(क) ते अरण्यस्य अन्तः कानि अपश्यन्?
उत्तर:
ते मार्गे अरण्यस्य अन्तः कतिचिद् अस्थीनि अपश्यन्।

(ख) ‘अहो अद्य विद्याप्रत्ययः कर्तव्यः’ इति केन उक्तम्?
उत्तर:
‘अहो अद्य विद्याप्रत्ययः कर्तव्यः’ इति एकेन उक्तम्।

(ग) अरण्ये सत्वं कीदृशं तिष्ठति?
उत्तर:
अरण्ये सत्वं मृतं तिष्ठति।

(घ) कः अस्थिसञ्चयं करोति?
उत्तर:
प्रथमः अस्थिसञ्चयं करोति।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 2 विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा

(ङ) चर्ममांसरुधिरंच कः संयोजयति?
उत्तर:
चर्ममांसरुधिरं च द्वितीयः संयोजयति।

(च) यावज्जीवनम् इति पदस्य सन्धिविच्छेदं कुरुत।
उत्तर:
यावत् + जीवनम् इति सन्धि विच्छेदः।

(छ) ‘निषेधितवान्’ इति पदस्य अर्थं लिखत।
उत्तर:
‘मना किया’ इति पदस्य अर्थः अस्ति।

(3) सः अकथयत्-“धिङ् मूर्ख ! तूष्णी भव। अहं विद्यां विफलां न करोमि सम्प्रति।” तेन बुद्धिमता उक्तम्-“तर्हि प्रतीक्षां कुरु क्षणं यावत्, अहं वृक्षम् आरोहामि।” तथाचरितं यावत् सः सजीवः कृतः तावत् ते त्रयः अपि सिंहेन उत्थाय मारिताः। सः पुनः वृक्षाद् अवतीर्य गृहं गतः।
अत एवोच्यते-
वरं बुद्धिर्न सा विद्या, विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा।
बुद्धिहीना विनश्यन्ति, यथा ते सिंहकारकाः॥

शब्दार्थः
अकथयत् = कहा। धिङ् मूर्ख = धिक्कार है मूर्ख। तूष्णीं = चुप। भव = हो जाओ। सम्प्रति = इस समय। बुद्धिमता = बुद्धिमान के द्वारा। तर्हि = तो। प्रतीक्षा = इन्तजार। आरोहामि = चढ़ता हूँ। तथाचरितं = वैसा किया। सिंहेन = शेर द्वारा। उत्थाय = उठकर। मारिताः = मार दिये गये। अवतीर्य = उतरकर। विद्यां विफलं = विद्या को विफल। करोमि = करता हूँ। उक्तम् = कहा गया। तर्हि = तो। कुरु = करो। कृतः = किया गया। वृक्षाद् = वृक्ष से। गतः = चला गया। वरम् = श्रेष्ठ। विद्यायाः = विद्या से। विनश्यन्ति = विनष्ट हो जाते हैं। सिंहकारकाः = सिंह को जीवित करने वाले।

अनुवाद:
वह (तीसरा) बोला-मूर्ख ! धिक्कार है, चुप हो जाओ। मैं इस समय विद्या को विफल नहीं करता। उस बुद्धिमान ने कहा-तो कुछ देर तक प्रतीक्षा करो, मैं वृक्ष पर चढ़ता हूँ। जैसे ही उसने उस (सिंह) को सजीव किया, वैसे ही वे तीनों ही सिंह के द्वारा उठकर मार दिये गये। वह फिर वृक्ष से उतर कर घर चला गया। इसीलिए कहा गया है वह बुद्धि श्रेष्ठ है विद्या नहीं। विद्या से बुद्धि उत्तम होती है। बद्धिहीन विनष्ट हो जाते हैं जैसे वे सिंह को जीवित करने वाले (तीनों मित्र मारे गये)।

(क) धिङ् मूर्ख ! तूष्णीं भव’ इति केन कथितम्?
उत्तर:
‘धिङ् मूर्ख ! तूष्णी भव’ इति तृतीयेन कथितम्।

(ख) वृक्षम् कः आरोहति?
उत्तर:
वृक्षम् सः बुद्धिमान् आरोहति।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 2 विद्यायाः बुद्धिरुत्तमा

(ग) अहं वृक्षम् आरोहामि’ इत्यत्र ‘अहम्’ इति कर्तृपदस्य किं क्रियापदम्?
उत्तर:
‘अहम्’ कर्तृपदस्य ‘आरोहामि’ इति क्रियापदम् अस्ति।

(घ) ‘तेन बुद्धिमता उक्तम्’ इदं कस्य प्रकारस्य वाक्यम् अस्ति?
उत्तर:
‘तेन बुद्धिमता उक्तम्’ इदं कर्मवाच्यस्य वाक्यम् अस्ति।

(ङ) विद्यायाः का उत्तमा भवति?
उत्तर:
विद्यायाः बुद्धिः उत्तमा भवति।

(च) ‘बुद्धिर्न’ इत्यस्य सन्धि-विच्छेदं कुरुत।
उत्तर:
बुद्धिः + न इति सन्धि-विच्छेदः अस्ति।

(छ) सिंह कारकाः के आसन्?
उत्तर:
सिंह कारकाः ते त्रयः ब्राह्मणपुत्राः आसन्।

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