RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 14 भारतीय कालगणना

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit

Rajasthan Board RBSE Class 8 Sanskrit Chapter 14 भारतीय कालगणना

RBSE Class 8 Sanskrit भारतीय कालगणना पाठ्यपुस्तकस्य प्रश्नोत्तराणि

RBSE Class 8 Sanskrit भारतीय कालगणना मौखिकप्रश्नाः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां पदानाम् उच्चारणं कुरुत –
(नीचे लिखे हुए पदों का उच्चारण कीजिए-)
शक्नोति, विद्वांसः, संवत्सराः, विक्रमसंवत्, ईसवीयसंवत्, एक्सालण्ट आल इन वन, कक्षा-8 प्रयुज्यते, सपादद्वि, माङ्गलिकाः, तर्पणादिकृत्यं, पुष्यनक्षत्रस्य, सङ्क्रान्तिः।
नोट
छात्रगण अपने आप उच्चारण करें।

प्रश्न 2.
अधोलिखितानां प्रश्नानां एकपदेन उत्तराणि वदत –
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के एक पद में उत्तर बताइये-)

(क) एकस्मिन् वर्षे कति मासाः भवन्ति ?
(एक वर्ष में कितने महीने होते हैं ?)

(ख) वसन्तपञ्चमी कस्मिन् मासे भवति ?
(वसन्तपञ्चमी किस महीने में होती है? )

(ग) एकस्मिन् वर्षे कति ऋतवः भवन्ति ?
(एक वर्ष में कितनी ऋतुएँ होती हैं ?)

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(घ) एकस्मिन् वर्षे सूर्यः कति नक्षत्रेषु परिभ्रमति ?
(एक वर्ष में सूर्य कितने नक्षत्रों में घूमता है ?)
उत्तराणि;
(क) द्वादशः (बारह)
(ख) माघमासे (माघ के महीने में)
(ग) षड् (छह)।
(घ) सप्तविंशति (सत्ताईस)।

RBSE Class 8 Sanskrit भारतीय कालगणना लिखितप्रश्नाः

प्रश्न 1.
लघूत्तरात्मकः प्रश्नाः

(क) कालः कीदृशःअस्ति ?
(समय कैसा है ?)

(ख) वर्षशब्दस्य वाचकाः अन्ये शब्दाः के ?
(वर्ष शब्द के वाचक अन्य शब्द कौन-कौन हैं ?)

(ग) नक्षत्राणांसंख्या कति सन्ति ?
(नक्षत्रों की संख्या कितनी है ?)

(घ) भारतीयमासानां पक्षयोः नामनी लिखत ?
(भारतीय महीनों के पक्षों के नाम लिखिए।)
उत्तराणि:
(क) कालः सततं प्रचलति।
(समय निरन्तर चलता है।)

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(ख) वर्ष शब्दस्य वाचकाः अन्ये शब्दाः संवत्, संवत्सरः वर्षम् चेति।
(वर्ष शब्द के वाचक अन्य शब्द संवत्, संवत्सर और वर्ष हैं।)

(ग) नक्षत्राणां संख्या सप्तविंशति सन्ति।
(नक्षत्रों की संख्या 27 है।)

(घ) भारतीयमासानां पक्षयोः शुक्लपक्ष: कृष्णपक्षः च नामनी स्तः।
(भारतीय महीनों के पक्षों के शुक्लपक्ष और कृष्ण पक्ष दो नाम हैं।)

प्रश्न 2.
उचित शब्देन सह मेलनं कुरुतः –
(सही शब्दों के साथ मिलान कीजिए-)
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उत्तराणि:
(क) – (इ) द्वादश
(ख) – (अ) एकम्
(ग) – (ई) षट
(घ) – (आ) पञ्चदश

प्रश्न 3.
मञ्जूषातः शब्दान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
(मञ्जूषा से शब्दों को चुनकर रिक्त स्थानों को पूरा कीजिए-)
राष्ट्रिय, गणना, त्रिंशद्, प्रचलति, सपादद्वि
उत्तराणि:
(क) कालविषयिनी गणना वैदिककालात् प्रचलिता अस्ति।
(ख) कालचक्रं सततं प्रचलति।
(ग) तत्र शकसंवत् अस्माकं राष्ट्रिय संवत् विद्यते।
(घ) सपादद्वि नक्षत्राणां मेलनं कृत्वा एकस्याः राशेः निर्माणं भवति।
(ङ) एकस्मिन् मासे त्रिंशद् दिवसाः भवन्ति।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखितशब्दानां पर्यायवाची शब्दान् लिखत (नीचे लिखे हुए शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए)
उत्तराणि:
(क) संवत्सरः – संवत, वर्षम्।
(ख) सूर्यः – रविः, दिवाकरः, सविता।
(ग) वसन्तः – मधुः, माघवः, ऋतुराजः।
(घ) माहः – मासः, महीना।
(ङ) चन्द्रः – शशिः, इन्दुः, मयंकः।

प्रश्न 5.
भारतीयमासानां तिथीनांच नामानि लिखत। –
(भारतीय महीनों और तिथियों के नाम लिखिए।)
उत्तराणि:
भारतीयमासाः –

  1. चैत्रमासः
  2. वैशाखमास
  3. ज्येष्ठमासः
  4. आषाढमासः
  5. श्रावणमासः
  6. भाद्रपदमासः
  7. आश्विनमासः
  8. कार्तिकमासः
  9. मार्गशीर्षमासः
  10. पौषमासः
  11. माघमासः
  12. फाल्गुनमासः।

तिथयः-प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा, अमावस्या चेति।

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प्रश्न 6.
ऋतूणां नामानि लिखत।
(ऋतुओं के नाम लिखिए।)
उत्तराणि:
ऋतवः षट् भवन्ति।
(ऋतुएँ छह होती हैं।)

तासाम् नामानि सन्ति –
(उनके नाम हैं–)
वसन्तः, ग्रीष्मः, वर्षा, शरद्, हेमन्तः शिशिरश्च।

RBSE Class 8 Sanskrit भारतीय कालगणना अन्य महत्वपूर्णः प्रश्नाः

RBSE Class 8 Sanskrit भारतीय कालगणना वस्तुनिष्ठप्रश्नोत्तराणि –

प्रश्न 1.
एकस्मिन् वर्षे मासाः भवन्ति –
(अ) पञ्चदशः
(ब) सप्त
(स) त्रिंशत्
(द) द्वादशः।
उत्तराणि:
(द) द्वादशः।

प्रश्न 2.
एकस्मिन् मासे दिवसाः भवन्ति।
(अ) त्रिंशत्
(ब) पञ्चदशः
(स) द्वादशः
(द) सप्तविंशति।
उत्तराणि:
(अ) त्रिंशत्

प्रश्न 3.
एकस्मिन् पक्षे तिथयः भवन्ति –
(अ) त्रिंशत्
(ब) द्वादशः
(स) पञ्चदशः
(द) सप्तः।
उत्तराणि:
(स) पञ्चदशः

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प्रश्न 4.
एकस्मिन् वर्षे ऋतवः भवन्ति –
(अ) द्वादशः
(ब) षट्
(स) पञ्चदशः
(द) सप्त।
उत्तराणि:
(ब) षट्

प्रश्न 5.
होलिकादहनम् कस्मिन मासे भवति –
(अ) चैत्रमासे
(ब) फाल्गुनमासे
(स) कार्तिकमासे
(द) श्रावणमासे।
उत्तराणि:
(ब) फाल्गुनमासे

RBSE Class 8 Sanskrit भारतीय कालगणना लघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न 1.
एकस्य वर्षस्य पञ्चानाम् उत्सवानाम् नामानि लिखत।
उत्तराणि:
एकस्य वर्षस्य पञ्चानाम् उत्सवानाम् नामानि सन्ति भगवतः रामचन्द्रस्य जन्मोत्सवः, अक्षय तृतीया, रक्षाबन्धनम् दीपोत्सवः होलिकादहनम् च।

प्रश्न 2.
गोवर्धनपूजा कदा भवति ?
उत्तराणि:
गोवर्धनपूजा दीपोत्सवस्य पश्चात् अपरे दिने भवति।

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प्रश्न 3.
विद्यादेव्याः सरस्वत्याः पूजनं कदा भवति?
उत्तराणि:
विद्यादेव्याः सरस्वत्याः पूजनं माघमासे वसन्त पञ्चम्यां तिथौ भवति।।

प्रश्न 4.
अधुनाः कः युगः प्रचलति?
उत्तराणि:
अधुना वैवस्वत मन्वन्तरस्य अष्टाविंशतितमः महायुगः प्रचलति।

RBSE Class 8 Sanskrit भारतीय कालगणना निबन्धात्मक प्रश्नोत्तरः

प्रश्न 1.
भारतीय कालगणना’ इति पाठाधारे मासानुसारं पर्वाणां हिन्दी भाषायां सूची सज्जीकुर्वन्तु।
उत्तराणि:

प्रस्तुत पाठ में वर्ष, महीना, दिन, ऋतु, नक्षत्र, राशि, पर्व आदि का उल्लेख किया गया है। यहाँ महीनों के अनुसार व्रत, पर्व आदि की सूची दी जा रही है।

  1. चैत्रमास भगवती दुर्गा की उपासना, सिन्धी समाज का पर्व चैट्टी चन्द्र, श्रीराम का जन्मोत्सव।।
  2. वैशाखमास – अक्षय तृतीया, बुद्धपूर्णिमा।
  3. ज्येष्ठ मास – निर्जला एकादशी, वट सावित्री व्रत।।
  4. आषाढ़मास – देवशयनी एकादशी, गुरु पूर्णिमा, भगवान् जगन्नाथ की रथयात्रा।
  5. श्रावणमास – हरियाली अमावस्या, श्रावणी तृतीया, रक्षाबन्धन।
  6. भाद्रपदमास – श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, ऋषि पञ्चमी, गणेशोत्सव, अनन्त चतुर्दशी।
  7. आश्विन मास – पितरों को तर्पण आदि, दुर्गा देवी पूजा, विजयदशमी।
  8. कार्तिकमास – कर्क चतुर्थी, अहोई अष्टमी, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धनपूजा, भैया दूज, देवोत्थान एकादशी, कार्तिक पूर्णिमा।
  9. मार्गशीर्षमास – मोक्ष दिलाने वाली एकादशी का व्रत।
  10. पौषमास – पुत्रदा एकादशी, मकरसंक्रान्ति, पोङ्गल आदि पर्व।
  11. माघमास – वसन्त पञ्चमी पर सरस्वतीपूजा, माघ जयन्ती, माघपूर्णिमा।
  12. फाल्गुनमास – होलिकादहन, धूलिवन्दन, वर्ष का समापन।

योग्यता-विस्तारः

बारह राशियों के नाम –

  1. मेष
  2. वृषभ
  3. मिथुन
  4. कर्क
  5. सिंह
  6. कन्या
  7. तुला
  8. वृश्चिक
  9. धनु
  10. मकर
  11. कुम्भ
  12. मीन।

भारतीय छह ऋतुएँ-

  1. वसन्त
  2. गर्मी
  3. वर्षा
  4. शरद्
  5. हेमन्त
  6. शिशिर।

सप्ताह के सात दिन –

  1. रविवार
  2. सोमवार
  3. मंगलवार
  4. बुधवार
  5. गुरुवार
  6. शुक्रवार
  7. शनिवार।

महीने के दो पक्ष –

  1. कृष्णपक्ष
  2. शुक्लपक्ष

दो अयन –

  1. उत्तरायण
  2. दक्षिणायन

सत्ताईस नक्षत्र –

  1. अश्विनी
  2. भरणी
  3. कृतिका
  4. रोहिणी
  5. मृगशिरा
  6. आर्द्रा
  7. पुनर्वसु
  8. पुष्य
  9. आश्लेषा
  10. मघा
  11. पूर्वाफाल्गुनी
  12. उत्तराफाल्गुनी
  13. हस्त
  14. चित्रा
  15.  स्वाति
  16. विशाखा
  17. अनुराधा
  18. ज्येष्ठा
  19. मूल
  20. पूर्वाषाढा
  21. उत्तराषाढा
  22.  श्रवण
  23. धनिष्ठा
  24. शतभिषा
  25. पूर्वाभाद्रपद
  26. उत्तराभाद्रपद
  27. रेवती।

क्रमवाचक शब्द 21 से 50 तक (मूलरूपम्)
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महत्वपूर्ण शब्दार्थानां सूची शब्दः सरलार्थः
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पाठ-परिचयः
वैदिक युग में ज्योतिषशास्त्र की उपयोगिता यज्ञों के लिए थी। वैदिक युग से लेकर वराहमिहिर के समय तक ज्योतिष के सिद्धान्तों का विकास हो गया। इसी क्रम में ग्रहों की संचार काल गणना के विषय में भी विचार मन्थन हुआ। सूर्योदय-सूर्यास्त का निरूपण, नक्षत्रों की गतिविधियों का भी विचार हुआ। इस पाठ में षड् ऋणुओं, बारह महीनों का उल्लेख किया गया है।

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मूलअंश, शब्दार्थ, हिन्दी अनुवाद एवं प्रश्नोत्तर

1. कालचक्र सततं प्रचलति। भारते कालविषयिनी गणना वैदिककालात् प्रचलितः अस्ति। अत्र विभिन्नाः संवत्सराः प्रचलिताः अभवन्। परम् अद्यत्वे व्यवहारे विक्रमसंवत्, शालिवाहन, शकसंवत्, ईसवीयसंवत् चेति संवत्सराः प्रमुखाः सन्ति। तत्र शकसंवत् अस्माकं राष्ट्रियसंवत् विद्यते। विक्रमसंवत् प्राचीनकालाद्-विशेषतः लोकव्यवहारे प्रचलति। ईसवीयसंवत् च अद्यत्वे राजकार्ये प्रायेण प्रयुज्यते। संवत्, संवत्सरः, वर्ष चेति शब्दाः पर्यायवाचिनः सन्ति। एकस्मिन् वर्षे वसन्तः, ग्रीष्मः, वर्षा, शरद, हेमन्तः शिशिरश्चेति षड्ऋतवः भवन्ति।

शब्दार्थ:
सततं = लगातार। प्रचलति = चलता है। कालविषयिनी = समय सम्बन्धी। वैदिक कालात् = वैदिक समय से। संवत्सराः = वर्ष, वर्ष गणना। अद्यत्वे= आजकल। राजकार्ये = राजकीय काम में। प्रयुज्यते = प्रयोग किया जाता है। पर्यायवाचिना = पर्यायवाची। षड्ऋतवः = छह ऋतुएँ। गणना = गिनती। कालचक्रं = समय का पहिया। अस्ति = प्रचलित रही है/प्रचलिता। प्रचलित अभवन = प्रचलित हुए। परम् = लेकिन। व्यवहारे = व्यवहार में। लोकव्यवहारे = लोक व्यवहार में।

हिन्दी अनुवादः
समय का पहिया लगातार चलता रहता है। भारतवर्ष में समय सम्बन्धी गिनती वैदिक काल से प्रचलित रही है। यहाँ अनेक वर्ष प्रचलित हुए। लेकिन आजकल व्यवहार में विक्रमसम्वत्, शालिवाहन, शकसम्वत् और ईस्वीय सम्वत् ये ही वर्ष प्रमुख हैं। उनमें शकसम्वत् हमारा राष्ट्रिय संवत् है। विक्रम सम्वत् प्राचीनकाल से ही विशेष रूप से लोक व्यवहार में चलता है और ईस्वीय वर्ष आजकल प्रायः राजकीय कार्य में प्रयोग किया जाता है। संवत्, संवत्सर और वर्ष ये शब्द पर्यायवाची हैं। एक वर्ष में वसन्त, गर्मी, वर्षा, शरद्, हेमन्त और शिशिर ये छह ऋतुएँ होती हैं।

(क) भारते कालविषयिनीगण्ना कस्मात् कालात् प्रचलितः अस्ति ?
उत्तराणि:
भारते कालविषयिनी गणना वैदिक कालात् प्रचलिता अस्ति।

(ख) अद्यत्वे राजकार्ये किम् संवत् प्रयुज्यते?
उत्तराणि:
अद्यत्वे राजकार्ये ईस्वीय संवत् प्रयोगं प्रयुज्यते।

(ग) एकस्मिन् वर्षे कतयः ऋतुः भवन्ति?
उत्तराणि:
एकस्मिन् वर्षे षड्ऋतवः भवन्ति।

(घ) षड्ऋतूनां कानि नामानि सन्ति?
उत्तराणि:
षड्ऋतूनां नामानि सन्ति-वसन्तः, ग्रीष्मः, वर्षा, शरद, हेमन्तः शिशिरः च!

(ङ) ‘वर्षम्’ इतिपदस्य पर्यायवाचिनः शब्दाः सन्ति।
उत्तराणि:
वर्षम् इति पदस्य संवत्, संवत्सरः वर्षम् इति पर्यायवाचिन: शब्दाः सन्ति।

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(च) ‘प्रयुज्यते’ इति पदे कः लकारः प्रयुक्तः?
उत्तराणि:
‘प्रयुज्यते’ इति पदे लट्लकारः प्रयुक्तः।

(छ) ‘अद्यत्वे इति किम् पदम् अस्ति?
उत्तराणि:
‘अद्यत्वे’ इति अव्ययपदम् अस्ति।

2. एकस्मिन् वर्षे सूर्यः सप्तविंशति (27) नक्षत्रेषु परिभ्रमति। एतदनुसारमेव भारतीय वर्षस्य निर्माणम् भवति। द्वादशानां नक्षत्राणां पूर्णिमातिथेः अनुसारं द्वादशानां मासानां नामकरणं जातम्। सपादद्वि नक्षत्राणां मेलनं कृत्वा एकस्या राशेः निर्माणं भवति। सूर्यः एकमासे एकस्मिन् राशौ भ्रमति। द्वादशमासानां नामकरणं पूर्णिमातिथौ आगतस्य चान्द्रनक्षत्रस्य उपरि जातम्। यथा-चैत्र-चित्राम्, वैशाख-विशाखाम्, ज्येष्ठः ज्येष्ठाम्, आषाढ:-पूर्वाषाढाम्, श्रावणः- श्रवणं, भाद्रपद:-भाद्रपदम्, आश्विन:-अश्विनी, कार्तिक:-कृतिकां, मार्गशीर्षः-मृगशिरां, पौषः-पुष्यं, फाल्गुन:-फाल्गुनीमाश्रित्य विख्याताः।

शब्दार्थः
नक्षत्रेषु = नक्षत्रों में। परिभ्रमति = चारों ओर घूमता है। द्वादशानां नक्षत्राणां = बारह नक्षत्रों। पूर्णिमा तिथेः = पूर्णिमा की तिथि के। सपादद्वि = सवा दो। मेलनं कृत्वा = मिलाकर। राशौ = राशि पर। भ्रमति = घूमता है। आगतस्य = आये हुए। आश्रित्य = आश्रित होकर। विख्याताः = प्रसिद्ध हैं।

अनुवादः
एक वर्ष में सूर्य 27 नक्षत्रों में चारों ओर घूमता है। इसी के अनुसार भारतीय वर्ष की रचना होती है। बारह नक्षत्रों की पूर्णिमा तिथि के अनुसार बारह महीनों का नामकरण हुआ। सवा दो नक्षत्रों को मिलाकर एक राशि की रचना होती है। सूर्य एक महीने में एक राशि पर घूमता है। बारह महीनों का नामकरण पूर्णिमा तिथि पर आए हुए चन्द्र नक्षत्र के ऊपर हुआ है।

जैसे चित्रा नक्षत्र के आधार पर चैत्र मास, विशाखा नक्षत्र के नाम पर वैशाख मास, ज्येष्ठा नक्षत्र पर ज्येष्ठ मास, पूर्वाषाढ़ा के आधार पर आषाढ़ मास, श्रवण के आधार पर श्रावण मास, भाद्रपद के आधार पर भाद्रपद मास, अश्विनी नक्षत्र के आधार पर आश्विन मास, कृतिका के आधार पर कार्तिक, मृगशिरा के नाम पर मार्गशीर्ष मास, पुष्य नक्षत्र पर पौष मास मघा नक्षत्र पर माघ और फाल्गुनी नक्षत्र पर फाल्गुन मास प्रसिद्ध हैं।

(क) नक्षत्राणां संख्या कति अस्ति?
उत्तराणि:
नक्षत्राणां संख्या सप्तविंशतिः अस्ति।

(ख) एकस्याः राशेः निर्माणं केन प्रकारेण भवति?
उत्तराणि:
एकस्याः राशेः निर्माण सपादद्वि नक्षत्राणां मेलनं कृत्वा भवति।

(ग) द्वादशानां मासानां नामकरणं कथं जातम्?
उत्तराणि:
द्वादशानाम् नक्षत्राणां पूर्णिमातिथे: अनुसारं द्वादशानां मासानां नाम करणं जातम्।

(घ) सूर्यः एकमासे कस्मिन् राशौ भ्रमति?
उत्तराणि:
सूर्यः एकमासे एकस्मिन् राशौ भ्रमति।

(ङ) चित्राम् आश्रित्य कः मासः प्रसिद्धः?
उत्तराणि:
चित्राम् आश्रित्य चैत्र: मासः प्रसिद्धः।

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(च) ‘फाल्गुनीमाश्रित्य’ इति पदस्य सन्धि विच्छेदः भविष्यति।
उत्तराणि:
फाल्गुनीम्+आश्रित्य इति सन्धि विच्छेदः भविष्यति।

(छ) भवति’ इति क्रियापदे कः लकारः प्रयुक्त?
उत्तराणि:
‘भवति’ इति क्रियापदे लट्लकारः प्रयुक्तः।

(3) 1. चैत्रमासः – अस्मात् मासाद् एवं विक्रमसम्वत् प्रारभ्यते। भगवतीदुर्गायाः उपासना, चैत्री चन्द्रः (सिन्धी समाजस्यपर्व:) भगवतः श्री रामचन्द्रस्य जन्मोत्सवश्च अस्मिन्नेव मासे आगच्छति।
2. वैशाखमासः – अस्मिन् मासे अक्षयतृतीया, बुद्धपूर्णिमा च आयातः। बहूनि माङ्गलिक-कार्याणि अप्यस्मिन् मासे भवन्ति।
3. ज्येष्ठमासः – अस्मिन् मासे निर्जला-एकादशी, वटसावित्री-व्रतपूजनम् अन्ये च माङ्गलिकाः उत्सवाः भवन्ति।
4. आषाढमासः – अस्मिन् मासे देवशयनी एकादशी, गुरुपूर्णिमा, भगवतः जगन्नाथस्य रथ यात्रादयः व्रतोत्सवाः भवन्ति।
5. श्रावणमासः – अस्मिन् मासे बहूनि-धार्मिकपर्वाणि यथा-हरियाली अमावस्या, श्रावणी तृतीया, श्रावणीकर्म रक्षाबन्धनं च आयोज्यन्ते।
6. भाद्रपदमास: – अस्मिन् मासे भगवतः श्रीकृष्णस्य जन्मोत्सवपर्वणः, वत्सद्वादश्याः, ऋषिपञ्चम्याः, अनन्तचतुर्दश्याः आयोजनं भवति।

शब्दार्थः
प्रारभ्यते = प्रारम्भ किया जाता है। अस्मिन्नेव = इसी में। आयातः = आते हैं। माङ्गलिक कार्याणि = कल्याणकारी कार्य। आयोज्यन्ते = आयोजित किये जाते हैं। जन्मोत्सवपर्वणः = जन्मोत्सव पर्व का।

हिन्दी अनुवादः
(1) चैत्र का महीना – इस महीने से ही विक्रम संवत् प्रारम्भ किया जाता है। भगवती दुर्गा की उपासना चैत्री चन्द्र (सिन्धी समाज का त्योहार) और भगवान श्री रामचन्द्र का जन्मोत्सव इसी महीने में आता है।
(2) वैशाख का महीना – इस महीने में अक्षय तृतीया और बुद्ध पूर्णिमा आते हैं। बहुत से कल्याणकारी कार्य भी इस महीने में होते हैं।
(3) ज्येष्ठ(जेठ) का महीना इस महीने में निर्जला एकादशी वटसावित्री व्रत पूजा और दूसरे कल्याणकारी त्यौहार होते हैं।
(4) आषाढ़ का महीना – इस महीने में देवशयनी एकादशी, गुरुपूर्णिमा, भगवान जगन्नाथ की रथ-यात्रा आदि व्रत त्यौहार होते हैं।
(5) श्रावण (सावन) का महीना इस महीने में बहुत से धार्मिक पर्व जैसे हरियाली अमावस्या, श्रावणी तृतीया, श्रावणी कर्म और रक्षाबन्धन आयोजित किये जाते हैं।
(6) भाद्रपद (भादों) का महीना – इस महीने में भगवान् श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव त्योहार, वत्सद्वादशी, ऋषि पञ्चमी, गणेशोत्सव और अनन्त चतुर्दशी का आयोजन होता है।

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(क) कस्यात्मासात् विक्रमसंवत् प्रारभ्यते?
उत्तराणि:
चैत्रमासाद एव विक्रमसंवत् प्रारभ्यते?

(ख) सिन्धीसमाजस्य पर्वः कस्मिन् मासे भवति?
उत्तराणि:
सिन्धीसमाजस्य पर्वः चैत्रमासे भवति।

(ग) बुद्धपूर्णिमायाः पर्व कस्मिन मासे आयाति?
उत्तराणि:
बुद्धपूर्णिमायाः पर्व वैशाखमासे आयाति।

(घ) ज्येष्ठ मासस्य माङ्गलिकः उत्सवाः के के सन्ति?
उत्तराणि:
ज्येष्ठ मासस्य माङ्गलिक उत्सवः निर्जला एकादशी वट-सावित्री-व्रतपूजनम् अन्यं चा माङ्गलिक उत्सवः भवन्ति।

(ङ) रक्षाबन्धनम् पर्व कदा आयोज्यते?
उत्तराणि:
रक्षाबन्धनम् पर्व श्रावणमासस्य पूर्णिमायाम् आयोज्यते।

(च) ‘भगवतः’ इति पदे का विभक्तिः अस्ति ?
उत्तरम्:
भगवतः इति पदे पञ्चमी/षष्टी विभक्तिः अस्ति।

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(छ) श्रीकृष्ण जन्मोत्सवः कदा भवति?
(अत्र अव्ययपदं किम् अस्ति?
उत्तराणि:
‘श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कदा भवति’ अत्र कदा अव्ययपदम् अस्ति।

(4) 7. आश्विनमासः – अस्य मासस्य प्रथमपक्षे पितृणाम्। तर्पणादिकृत्यं भवति। द्वितीये पक्षे च दुर्गा देव्याः पूजा सर्वत्र भवति। क्षत्रियाणां शस्त्रादि पूजनार्थं विजयदशमी पर्वः शरदपूर्णिमा अति अस्मिन् मासे भवति।
8. कार्तिकमास: – अस्मिन् मासे कर्मचतुर्थी, अहोई अष्टमी, धनत्रयोदशी, दीपावलीमहोत्सवः, गोवर्धनपूजा, भ्रातृद्वितीया देवोत्थायी एकादशी, कार्तिकपूर्णिमादीनि पर्वाणि समायान्ति।
9. मार्गशीर्ष मास: – अस्मिन् मासे मोक्षप्रदा। एकादशीव्रतमायाति।
10. पौषमासः – अस्मिन् मासे पुत्रदा एकादशी मकरसङ्क्रान्तः केरलादिप्रदेशस्य पोङ्गल इत्यादीनि पर्वाणि च भवन्ति।
11. माघमासः – अस्मिन् मासे वसन्तपञ्चम्यां तिथौ विद्यादेव्याः सरस्वत्याः पूजनं महाकवि माघस्य जयन्ती माघ पूर्णिमा च भवन्ति।
12. फाल्गुनमास: – अस्मिन् मासे होलिकादहनम्, धूलिवन्दनं सम्वत्सरावसानं च भवति।

शब्दार्थ:
पितॄणां = पूर्वजों का। दुर्गादेव्याः = दुर्गा देवी की। क्षत्रियाणां = क्षत्रियों के। भ्रातृद्वितीया = भैयादूज। समायान्ति = आते हैं। विद्यादेव्याः = विद्या की देवी।

हिन्दी अनुवादः
(7) आश्विन (क्वार) का महीना-इस महीने के पहले पक्ष में पूर्वजों के तर्पण आदि की क्रिया होती है और दूसरे पक्ष में दुर्गा देवी की पूजा सब जगह होती है। क्षत्रियों के हथियार आदि की पूजा के लिए विजयदशमी पर्व और शरद-पूर्णिमा भी इसी महीने में होती है।
(8) कार्तिक का महीना – इस महीने में कर्म चतुर्थी, अहोई अष्टमी, धनतेरस, दीपावली महोत्सव, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, देवोत्थान एकादशी, कार्तिक पूर्णिमा आदि पर्व आते हैं।
(9) मार्गशीर्ष (अगहन) का महीना – इस महीने में मोक्ष प्रदान कराने वाली एकादशी व्रत आता है।
(10) पौष (पूस) का महीना – इस महीने में पुत्रदायक एकादशी, मकरसंक्रान्ति और केरल आदि राज्य के पोङ्गल इत्यादि पर्व होते हैं।
(11) माघ का महीना – इस महीने में वसन्तपञ्चमी की तिथि को विद्या की देवी सरस्वती का पूजन, महाकवि माघ की जयन्ती और माघ पूर्णिमा होती है।
(12) फाल्गुन (फागुन) – का महीना-इस महीने में होलिका दहन, धूलिवन्दन (धूलेण्डी) और संवत्सर का अन्त होता है।

(क) दुर्गादेव्याः पूजा सर्वत्र कस्मिन् मासे भवति?
उत्तराणि:
सर्वत्र दुर्गादेव्याः पूजा आश्विन मासे भवति।

(ख) दीपोत्सवः कस्य मासस्य उत्सवः अस्ति?
उत्तराणि:
दीपोत्सव कार्तिकमासस्य उत्सवः अस्ति।

(ग) मोक्षप्रदा एकादशी व्रतम् कस्मिन् मासे आयाति?
उत्तराणि:
मोक्षप्रदा एकादशी व्रतम् मार्गशीर्ष मासे आयाति।

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(घ) वसन्तपञ्चम्यां तिथौ कस्याः आराधना भवति?
उत्तराणि:
वसन्तपञ्चम्यां तिथौ विद्यादेव्याः सरस्वत्याः । आराधना भवति।

(ङ) कस्मिन् मासे होलिका दहनम् भवति?
उत्तराणि:
फाल्गुनमासे होलिका दहनं भवति।

(च) ‘अस्मिन्’ इति पदे का विभक्तिः ?
उत्तराणि:
अस्मिन् इति पदे सप्तमी विभक्तिः।

(छ) सम्वत्सर+अवसानम् इति अस्य सन्धिः भविष्यति।
उत्तराणि:
सम्वत्सरावसानम् इति सन्धिपदम् भविष्यति।

(5) एकस्मिन् मासे त्रिंशद् दिवसाः द्वौ पक्षौ च भवतः-शुक्ल: कृष्णश्च। तत्र प्रत्येक पक्षे पञ्चदश तिथयोः भवन्ति। तत्र शुक्लपक्षान्ते पूर्णिमा कृष्णपक्षान्ते च अमावस्या भवति। तिथिनां नामानि एवं बोध्यानि-प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, पष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी. दशमी. एकादशी. द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा, अमावस्या चेति। एवं बृहस्पतिमाश्रित्य षष्टि संवत्सराणां चक्र: प्रवर्तते । चतुर्युगानामेक: महायुगः भवति। द्विसप्ततिमहायुगानाम् एकः मन्वन्तरः भवति। अधुना वैवस्वत मन्वन्तरस्य अष्टाविंशतितमो महायुगो प्रचलति।

शब्दार्थ:
त्रिंशत् = तीस। पञ्चदश = पन्द्रह। तिथयः = तिथियाँ। आश्रित्य = आधार पर। संवत्सराणां = संवत्सरों का। चतुर्युगानाम् = चार युगों का। द्विसप्तति = बहत्तर। अष्टविंशतितः = अट्ठाईसवाँ। प्रचलति = चल रहा है।

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हिन्दी अनुवादः
एक महीने में तीस दिन शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दो पक्ष होते हैं। उनमें प्रत्येक पक्ष में पन्द्रह तिथियाँ होती हैं। शुल्क पक्ष के अन्त में पूर्णिमा और कृष्णपक्ष के अन्त में अमावस्या होती है। तिथियों के नाम इस प्रकार जानने चाहिए …….. प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा और अमावस्या। इस प्रकार वृहस्पति के आधार पर साठ संवत्सरों का चक्र होता है। चार | युगों का एक महायुग होता है। बहत्तर महायुगों का एक मन्वन्तर होता है। अब वैवस्वत मन्वन्तर का अट्ठाईसवाँ महायुग चल रहा है।

(क) एकस्मिन् मासे कति दिवसाः भवन्ति?
उत्तराणि:
एकस्मिन् मासे त्रिंशत् दिवसाः भवन्ति।

(ख) प्रत्येक पक्षे कति तिथयः भवन्ति।
उत्तराणि:
प्रत्येक पक्षे पञ्चदश तिथयः भवन्ति।

(ग) कृष्णपक्षान्ते का भवति?
उत्तराणि:
कृष्णपक्षान्ते अमावस्या भवति।

(घ) पूर्णिमा कदा भवति?
उत्तरम्:
पूर्णिमा शुक्लपक्षान्ते भवति।

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(ङ) चतुर्युगानाम् किम् भवति?
उत्तराणि:
चतुर्युगानाम् एक महायुगः भवति।

(च) ‘भवति’ इति क्रियापदस्य द्विवचनस्य रूपं किम् अस्ति ?
उत्तराणि:
भवति’ इति क्रियापदस्य द्विवचनस्य रूपं भवतः अस्ति।

(छ) एकस्मिन् वर्षे कति पूर्णिमाः भवन्ति?
उत्तराणि:
एकस्मिन् वर्षे द्वादश पूर्णिमाः भवन्ति।

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