RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit

Rajasthan Board RBSE Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

RBSE Class 8 Sanskrit सुभाषितानि पाठ्यपुस्तकस्य प्रश्नोत्तराणि

RBSE Class 8 Sanskrit सुभाषितानि मौखिकप्रश्नाः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां शब्दानाम् उच्चारणं कुरुत –
(नीचे लिखे हुए शब्दों का उच्चारण कीजिए-)
नद्यः, नादन्ति, वारिवाहाः, नम्रास्तरवः, नवाम्बुभिर्भूरि,
अनुद्धताः, निगृहति, यद्भर्तुरेव, एवास्तमेति, शतान्यपि,
भ्रातृभाज्यं, यस्तिष्ठति, सन्मित्रलक्षणमिदं, तृणैर्गुणत्वमापन्नैः।
उत्तरम्:
छात्रगण अपने आप उच्चारण करें।

प्रश्न 2.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि वदत् –
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर बोलिए-)

(क) स्वयमेव अम्भः के न पिबन्ति ?
(स्वयं जल कौन नहीं पीती हैं ?)

(ख) उदयकाले सवितुः वर्णः कीदृशः ?
(उदय के समय में सूर्य का रंग कैसा होता है ?)

(ग) सर्वधनं प्रधानम् किं ?
(सभी धनों में श्रेष्ठ कौनसा (धन) है ?)

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

(घ) तृणैः गुणत्वमापन्नैः के बध्नन्ते ?
(छोटे-छोटे तिनके से कौन बाँधे जाते हैं ?)

(ङ) मित्रं कस्मात् निवारयति ?
(मित्र किससे दूर हटाता है?)

(च) कः श्रेष्ठः पुत्रः ?
(श्रेष्ठ पुत्र कौन है ?)
उत्तराणि:
(क) स्वयमेव अम्भः नद्यः न पिबन्ति।
(स्वयं ही जल नदियाँ नहीं पीती हैं।)

(ख) उदयकाले सवितुः वर्णः ताम्रवर्णः।
(उदय के समय में सूर्य का रंग लाल होता है।)

(ग) सर्वधनं प्रधानम् विद्याधनम्।
(सभी धनों में श्रेष्ठ विद्याधन है।)

(घ) तृणैः गुणत्वमापन्नैः दन्तिनः बभन्ते।
(मिले हुए छोटे-छोटे तिनकों से हाथी बाँधे जाते हैं।)

(ङ) मित्रं पापात् निवारयति।
(मित्र पाप से दूर हटाता है।)

(च) श्रेष्ठः पुत्रः सः सन्ति यः सुचरितैः पितरं प्रीणाति।
(श्रेष्ठ पुत्र वही है जो अच्छे चरित्रों से पिता को प्रसन्न करता है।)

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

RBSE Class 8 Sanskrit सुभाषितानि लिखित प्रश्नाः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत –
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर एक पद में लिखिए-)

(क) फलोद्गमैः वृक्षाः कथं भवन्ति ?
(फल लगने से वृक्ष किस प्रकार हो जाते हैं ?)

(ख) सम्पत्तौ च विपत्तौ च केषाम् एकरूपता ?
(सम्पत्ति और विपत्ति में किनकी एकरूपता रहती है ?)

(ग) सन्मित्रं कुत्र योजयते?
(अच्छा मित्र कहाँ जोड़ता है?)

(घ) का श्रेष्ठा भार्या ?
(कौन श्रेष्ठ पत्नी है ?)

(ङ) चौरहार्यं किं नास्ति ?
(चोर द्वारा किसे नहीं चुराया जा सकता ?)
उत्तराणि:
(क) नम्राः
(ख) महताम्
(ग) हिताय
(घ) हितमिच्छति
(ङ) विद्याधनम्।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

प्रश्न 2.
अधोलिखितप्रश्नानाम् एकवाक्येन उत्तरं लिखतु –
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए-)
(क) स्वयं फलानि के नखादन्ति ?
(अपने आप फलों को कौन नहीं खाते हैं ?)

(ख) परोपकारिणां स्वभावः कीदृशः भवति ?
(दूसरों का भला करने वालों का स्वभाव कैसा होता है ?) ।

(ग) पञ्च जकाराः के सन्ति ?
(पाँच जकार कौन-कौन से हैं?)

(घ) सन्मित्रलक्षणं के प्रवदन्ति ?
(अच्छे मित्र के लक्षण कौन बतलाते हैं ?)

(ङ) के त्रयं जगति पुण्यकृतो लभन्ते ?
(संसार में पुण्यवान् किन तीन को प्राप्त करते हैं ?)

(च) केषां संहतिः कार्यसाधिका?
(किनका संगठन कार्य को सम्पन्न करने में सहायक होता है ?)
उत्तराणि:
(क) स्वयं फलानि वृक्षाः न खादन्ति।
(वृक्ष अपने फल नहीं खाते हैं।)

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

(ख) परोपकारिणां स्वभावः विनम्रः भवति।
(परोपकारियों का स्वभाव विनम्र होता है।)

(ग) जननी, जन्मभूमिः, जाह्नवी, जनार्दनः, जनकः इति पञ्च जकाराः सन्ति।
(माँ, जन्मभूमि, गंगा, श्रेष्ठ पुरुष और पिता ये पाँच जकार हैं।)

(घ) सन्मित्रलक्षणं सन्तः प्रवदन्ति।
(अच्छे मित्र के लक्षण सज्जन बतलाते हैं।)

(ङ) जगति पुण्यकृतः पुत्रं कलत्रं मित्रञ्च त्रयं लभन्ते।
(संसार में पुण्यवान् अच्छे पुत्र, पत्नी और मित्र को प्राप्त करते हैं।)

(च) अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका।
(छोटी से छोटी वस्तुओं का संगठन कार्य को सम्पन्न करने में सहायक होता है।)

प्रश्न 3.
रिक्तस्थानस्य पूर्तिं कुरुत –
(रिक्त स्थान को पूरा कीजिए-)
उत्तराणि:
(क) परोपकाराय सतां विभूतयः।
(ख) अनुद्धता सत्पुरुषाः समृद्धिभिः
(ग) सन्मित्रलक्षणमिदं प्रवदन्ति सन्तः।
(घ) गच्छन् पिपीलिको याति योजनानां शतान्यपि
(ङ) विद्या धनं सर्वधनम् प्रधानम्।
(च) अल्पानामपि वस्तुनां संहतिः कार्यसाधिका।
(छ) यस्तिष्ठति स बान्धवः

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

प्रश्न 4.
अधोलिखितानांशब्दानांपर्यायवाची शब्दान् लिखत –
(नीचे लिखे हुए शब्दों के पर्यायवाची शब्दों को लिखिए)
यथा:
अम्भः – जलम्
उत्तराणि:
(क) तरु:- वृक्षः पादपः
(ख) सविता – सूर्यः, रविः, भानुः, दिवाकरः
(ग) जाह्नवी – भागीरथी, गंगा, मन्दाकिनी
(घ) जनकः – तातः, पितृ, जन्मदः।
(ङ) जननी – माँ, माता, पालिका, धात्री।
(च) दन्तिनः – गजाः, द्विरदः, द्विपः, हस्ती, करी।
(छ) मित्रं – सहचरः, सुहृदः, सखा।

प्रश्न 5.
अधोलिखितशब्दानां सन्धिविच्छेदं कुरुत –
(नीचे लिखे हुए शब्दों का सन्धि विच्छेद कीजिए-)
यथा:
नाम्भः – न + अम्भः उत्तराणि:
(क) नवाम्बुभिः – नव + अम्बुभिः
(ख) परोपकाराय – पर + उपकाराय
(ग) फलोद्गमैः – फल + उद्गमैः
(घ) एवैषः – एव + एषः
(ङ) शतान्यपि – शतानि + अपि
(च) पापान्निवारयति – पापात् + निवारयति
(छ) भतुरेव – भर्तुः + एव
(ज) नम्रास्तरवः – नम्राः + तरवः
(झ) यस्तिष्ठति – यः + तिष्ठति

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

प्रश्न 6.
अधोलिखितपदानां धातुं लकारं पुरुषं वचनं च लिखत –
(नीचे लिखे हुए पदों की धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए-)
उत्तराणि:
पदम् धातुः लकारः पुरुषः वचनम्
उदाहरण- पिबन्ति पा लट् प्रथम बहुवचनम
RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

RBSE Class 8 Sanskrit सुभाषितानि अन्य महत्वपूर्णः प्रश्नाः

RBSE Class 8 Sanskrit सुभाषितानि वस्तुनिष्ठप्रश्नोत्तराणि

प्रश्ना 1.
वारिवाहाः किं न अदन्ति –
(क) भोजनम्
(ख) मांसम्
(ग) शस्य
(घ) धान्यम्।
उत्तराणि:
(ग) शस्य

प्रश्ना 2.
मित्रम् कस्मात् निवारयति –
(क) भयात्
(ख) पापात्
(ग) पुण्यात्
(घ) भोजनात्।
उत्तराणि:
(ख) पापात्

प्रश्ना 3.
पञ्च जकारेषु अयं नास्ति –
(क) जनकः
(ख) जहाजः
(ग) जाह्नवी
(घ) जनार्दनः।
उत्तराणि:
(ख) जहाजः

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

प्रश्ना 4.
व्यये कृते का वर्धते एव ?
(क) वित्तम्
(ख) गृहम्
(ग) सम्पत्तिः
(घ) विद्या।
उत्तराणि:
(घ) विद्या।

प्रश्ना 5.
सुपुत्रः सुचरितैः कं प्रीणाति ?
(क) मातरं
(ख) मित्रम्
(ग) पितरं
(घ) भगिनीम्।
उत्तराणि:
(ग) पितरं

RBSE Class 8 Sanskrit सुभाषितानि अतिलघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न 1.
‘हिताय’ इति पदे का विभक्तिः प्रयुक्ता?
उत्तरम्:
‘हिताय’ इति पदे चतुर्थी विभक्तिः प्रयुक्ता।

प्रश्न 2.
अगच्छन् कः एकं पदम् अपि न गच्छति?
उत्तरम्:
अगच्छन् गरुडः एकं पदम् अपि न गच्छति।

प्रश्न 3.
सूर्यः अस्तसमये कस्य वर्णस्य भवति?
उत्तरम्:
सूर्यः अस्तसमये रक्तवर्णस्य भवति।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

प्रश्न 4.
गुणान् कः प्रकटीकरोति ?
उत्तरम्:
सन्मित्रम् गुणान् प्रकटीकरोति।

प्रश्न 5.
कः फलानि न खादति?
उत्तरम्:
वृक्षः फलानि न खादति।

RBSE Class 8 Sanskrit सुभाषितानि लघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न 1.
पाठाधारे परोपकारिणः के सन्ति?
उत्तरम्:
पाठाधारे परोपकारिण: नद्यः वृक्षाः वारिवाहा: च सन्ति।

प्रश्न 2.
सन्मित्रस्य लक्षणानि कानि सन्ति?
उत्तरम्:
सन्मित्रस्य लक्षणानि सन्ति – सः पापात् निवारयति, हिताय योजयते, गुह्यं निगृहति, गुणान् प्रकटीकरोति, आपत्तौ न जहाति ददातिकाले च।

प्रश्न 3.
के के पञ्च जकाराः दुर्लभा ?
उत्तरम्:
जननी, जन्मभूमिः, जाह्नवी, जनार्दनः जनक च पञ्च जकाराः दुर्लभा सन्ति।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

प्रश्न 4.
‘जन्मभूमिश्च’इतिपदस्यसन्धिविच्छेदः भविष्यति।
उत्तरम्:
जन्मभूमिः + च इति पदस्य सन्धिविच्छेदः भविष्यति। सुमेलनं कुरुत
(क) जननी जन्मभूमिश्च – दुर्भिक्षे शत्रुसङ्कटे
(ख) गच्छन् पिपीलिकोयाति- संहतिः कार्यसाधिका
(ग) चौरहार्यं – जाह्नवी च जनार्दनः
(घ) अल्पानामपि वस्तूनां – योजनानां शतान्यपि
(ङ) उत्सवे व्यसने प्राप्ते – न च राजहार्य
उत्तरम्:
(क) जाह्नवी च जनार्दनः
(ख) योजनानां शतान्यपि
(ग) न च राजहार्य
(घ) संहतिः कार्यसाधिका
(ङ) दुर्भिक्षे शत्रुसङ्कटे।

महत्वपूर्णानां शब्दार्थानां सूची
RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

पाठ-परिचयः
संस्कृत-वाङ्मय ज्ञान निधि के रूप में जाना जाता है। अमर कवियों ने अपनी-अपनी कृतियों में उदात्तभावों और सार्वभौम सत्य को अत्यन्त मार्मिक रूप से व्यक्त किया है। उन ग्रन्थों से इस पाठ में दस श्लोक संकलित हैं। उन श्लोकों में परोपकार की महिमा का, अच्छे मित्र के लक्षण, संस्कारयुक्त पुत्र, महान विभूतियों की एकरूपता का माता और मातृभूमि की महत्ता, विद्या धन की महिमा का वर्णन किया गया है।.

मूल अंश, अन्वय, शब्दार्थ, अनुवाद, भावार्थ।

(1) पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः,
स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः।।
नादन्ति शस्यं खलु वारिवाहाः
परोपकाराय सतां विभूतयः॥

अन्वयः
नद्यः स्वयम् एव अम्भः न पिबन्ति। वृक्षाः फलानि स्वयं न खादन्ति। वारिवाहाः शस्यं खलु न अदन्ति। सतां विभूतयः परोपकाराय (भवन्ति)। शब्दार्थः-नद्यः = नदियाँ। अम्भः = जल। न = नहीं। पिबन्ति = पीती हैं। स्वयमेव = स्वयं ही। वृक्षाः = पेड़।। फलानि = फलों को। खादन्ति = खाते हैं। वारिवाहाः = बादल। शस्यं = अन्न को। अदन्ति = खाते हैं। सतां = सज्जनों की। विभूतयः = सम्पतियाँ । परोपकाराय = दूसरों की भलाई के लिए। भवन्ति = होती हैं।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

हिन्दी अनुवादः
नदियाँ अपना जल स्वयं ही नहीं पीती हैं। (और) वृक्ष (अपने) फलों को नहीं खाते हैं। बादल भी (अपने द्वारा उगाये गये)अन्न को नहीं खाते हैं। निश्चित ही सज्जनों की सम्पत्तियाँ दूसरों की भलाई के लिए होती हैं।

भावार्थ
परोपकार की महिमा बताते हुए कहा गया है कि नदियाँ पूर्ण जल वाली होती हैं लेकिन स्वयं जल ग्रहण न करके दूसरों को जल प्रदान करती हैं जिससे संसार के लोगों का कल्याण होता है। इसी प्रकार पेड़ भी फलों को स्वयं नहीं खाते हैं और न ही बादल अन्न को खाते हैं। अर्थात दूसरों की भलाई करते हैं। उसी प्रकार सज्जनों की सम्पत्तियाँ केवल दूसरों की भलाई के लिए ही होती हैं।

(2) भवन्ति नम्रास्तरवः फलोदगमैः,
नवाम्बुभिभूरि विलम्बिनो घनाः।
अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः,
स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥

अन्वयः
फलोद्गमैः तरव: नम्राः भवन्ति। घनाः नवाम्बुभिः भूरि विलम्बिनः (भवन्ति)। समृद्धिभिः सत्पुरुषाः अनुद्धता (भवन्ति)। एषः परोपकारिणाम् स्वभावः एव (भवति)। शब्दार्थः-फलोद्गमैः = फल लगने से। तरवः = वृक्ष। नम्राः = झुक जाते, विनम्र। घनाः = बादल। नवाम्बुभिः = नवीन जलों से। भूरि = बहुत अधिक। विलम्बिनः = लटकने वाले। समृद्धिभिः = धन-दौलत से। सत्पुरुषाः = सज्जन पुरुष। अनुद्धताः = विनम्र । परोपकारिणाम् = परोपकारियों का। एषः = यह। स्वभावः = व्यवहार।

हिन्दी अनुवादः
फल लगने से पेड़ झुक जाते हैं। बादल अत्यधिक नवीन जल से लटकने वाले होते हैं। धन-सम्पत्तियों से युक्त सज्जन पुरुष विनम्र हो जाते हैं। क्योंकि परोपकारियों का यह स्वभाव ही होता है।.

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

भावार्थ:
यहाँ भी परोपकारियों के स्वाभाविक गुणों के बारे में बताया गया है कि फल लगने के कारण वृक्ष भी झुक जाते हैं। बादल भी अत्यधिक नवीन जल से भरे हुए लटकते रहते हैं। समृद्धि सम्पन्न सज्जन भी विनम्र हो जाते हैं, क्योंकि दूसरों की भलाई करने वालों का यह स्वाभाविक गुण होता है।

(3) पापान्निवारयति योजयते हिताय,
गुह्यं निगृहति गुणान् प्रकटीकरोति। .
आपद्गगतं च न जहाति ददाति काले,
सन्मित्रलक्षणमिदं प्रवदन्ति सन्तः॥

अन्वयः
पापात् निवारयति, हिताय योजयते, गुह्यं निगृहति, गुणान् प्रकटीकरोति। आपद्गतं न जहाति च काले ददाति। सन्तः इदं सन्मित्रलक्षणम् प्रवदन्ति। शब्दार्थः-पापात् = पाप से। हिताय = हितकर कार्य के लिये, भलाई के लिये। निवारयति = हटाता है। योजयते = जोड़ता है। गुह्यं = छिपाने योग्य को। निगृहति = छिपाता है। प्रकटीकरोति = प्रकट करता है। आपद्गतं = संकट के समय में। जहाति = छोड़ता है। ददाति % 3D देता है। सन्तः = सज्जन। प्रवदन्ति = बतलाते हैं।

हिन्दी अनुवादः
पाप से हटाता है, भलाई के लिए जोड़ता है। छिपाने योग्य को छिपाता है। गुणों को प्रकट करता है। संकट के समय साथ नहीं छोड़ता है। (आवश्यकता पड़ने पर समय अनुसार (धन) देता है। सज्जनों ने अच्छे मित्रों के यही लक्षण बतलाये हैं। भावार्थ-अच्छे मित्रों के लक्षण बतलाते हुए कहा गया है कि वह पाप कर्मों से हटाता है, भलाई, हितकर कार्यों से जोड़ता है, गोपनीय को छिपाता है, मित्र के गुणों को प्रकट करता है। विपत्ति के समय मित्र का साथ नहीं छोड़ता है, और समय अनुसार (धन) देता है अर्थात् आर्थिक मदद भी करता है। सज्जनों ने अच्छे मित्रों के ये ही लक्षण बताये हैं।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

(4) यः प्रीणयेत् सुचरितैः पितरं स पुत्रो,
यद्भतुरव हितमिच्छति तत्कलत्रम्।
यन्मित्रमापदि सुखे च समक्रिय एव,
एतत्त्रयं जगति पुण्यकृतो लभन्ते।

अन्वयः
यः सुचरितैः पितरं प्रीणयेत् सः पुत्रः, यद् भर्तुः एव हितम् इच्छति तत् कलत्रम् यद् आपदि सुखे च समक्रियं तत् मित्रम्। एतत् त्रयं जगति पुण्यकृतः लभन्ते।

शब्दार्थ:
यः = जो। सुचरितैः = अच्छे चरित्र से। पितरं = पिता को। प्रीणयेत् = प्रसन्न करे। भर्तुः = पति का। हितम् = कल्याण। इच्छति = चाहती है। कलत्रम् = पत्नी। आपदि = आपत्ति में। सुखे = सुख में। समक्रियं = समान व्यवहार वाला। एतत्त्रयं = इन तीनों को। जगति = संसार में। पुण्यकृतः = पुण्यवान्। लभन्ते = पाते हैं।

हिन्दी अनुवादः
जो अच्छे चरित्र से पिता को प्रसन्न करे, वह पुत्र है! जो अपने पति का कल्याण चाहती है, वह पत्नी है और जो आपत्ति में तथा सुख में समान व्यवहार वाला होता है, वह मित्र है। इन तीनों को संसार में पुण्यवान् ही प्राप्त करते हैं।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

भावार्थ:
मनुष्य रूप में संसार में जन्म लेना सौभाग्य की बात है। मनुष्य को सांसारिक वस्तुओं की प्राप्ति भाग्य से ही होती है। पुण्यात्मा को ही सद्-वस्तुओं की प्राप्ति होती है। सुकर्म | करने वाले व्यक्ति को ही सुपुत्र मिलता है। पति का सदैव कल्याण चाहने वाली पत्नी मिलती है तथा विपत्ति में एवं सुख में समान रहने वाला मित्र मिलता है।

(5) उदेति सविता रक्तो,
रक्तश्चास्तमये तथा।
सम्पत्तौ च विपत्तौ च महतामेकरूपता॥

अन्वयः
सविता रक्तः उदेति तथा अस्तसमये रक्तः (च भवति)। महताम् सम्पत्तौ विपत्तौ च एकरूपता (भवति)।

शब्दार्थः
सविता = सूर्य। उदेति = उदय होता है। रक्त = – लाल वर्ण वाला। अस्तसमये = अस्त होने के समय। महताम् 1 = महापुरुषों का। हिन्दी

अनुवादः
सूर्य लाल वर्ण का उदय होता है और अस्त होने के समय लाल रंग का ही होता है। अत: महापुरुषों का सम्पत्ति काल और विपत्ति काल में एक-सा ही रूप होता है।

भावार्थः
महापुरुषों की विशेषता बताते हुए कहा गया है कि जिस प्रकार सूर्य प्रात:काल उदय के समय लाल रंग वाला होता है और सायंकाल अस्त होते समय भी लाल रंग का ही होता है। ऐसे ही महापुरुष अच्छे समय में या बुरे समय में एक समान रहते हैं।

(6) जननी जन्मभूमिश्च,
जाह्नवी च जनार्दनः।
जनकः पञ्चमश्चैव,
जकाराः पञ्च दुर्लभाः॥

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

अन्वयः
जननी, जन्मभूमिः च जाह्नवी, जनार्दनः च पञ्चमः जनकः च पञ्च जकाराः दुर्लभाः (सन्ति)।

शब्दार्थ:
जननी = माँ। जन्मभूमिः = जन्म स्थान। जाहनवी = गंगा। जनार्दनः = श्रेष्ठ पुरुष। जनकः = पिता। दुर्लभाः 1 = कठिनता से प्राप्त होने वाले।

हिन्दी अनुवादः
माँ, जन्म-स्थान, गंगा, श्रेष्ठ पुरुष और पाँचवाँ पिता, ये पाँच जकार कठिनाई से प्राप्त होने वाले हैं।

भावार्थ:
इस संसार में माता, मातृभूमि, गंगा, श्रेष्ठ पुरुष और पिता ये पाँचों जकार अर्थात् ‘ज’ वर्ण से प्रारम्भ होने वाले पदार्थ संसार में बड़ी कठिनाई से प्राप्त होते हैं।

(7)  गच्छन् पिपीलिको याति
योजनानां शतान्यपि।

    अगच्छन् वैनतेयोऽपि,
पदमेकं न गच्छति॥

अन्वयः
गच्छन् पिपीलकः शतानि अपि योजनानां याति। अगच्छन् वैनतेयः एकं पदम् अपि न गच्छति।

शब्दार्थः
गच्छन् = जाती हई। पिपीलकः = चींटी। शतानि = सैकड़ों। योजनानां = कोसों को। याति = जाती है। अगच्छन् = न जाता हुआ। वैनतेयः = गरुड़। पदम् = पग।

हिन्दी अनुवादः
चलती हुई चींटी सैकड़ों कोस चली जाती है लेकिन न जाता हुआ गरुड़ एक पग भी नहीं जा पाता है।

भावार्थ:
यहाँ कार्यरत रहने की प्रेरणा देते हुए कहा गया है कि भले ही चींटी छोटी है लेकिन वह निरन्तर चलती हुई सैकड़ों कोसों को पार कर अपने गन्तव्य पर पहुँच ही जाती है। दूसरी ओर पक्षियों का राजा गरुड़ यदि नहीं चल रहा है तो वह वहीं का वहीं रह जाता है। एक कदम भी आगे नहीं जा पाता है।

(8) न चौरहार्यं न च राजहार्य,
न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि।
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं,
विद्याधनं सर्वधनं प्रधानम्॥

अन्वयः
(सा विद्या) चौरहार्यं न, राजहार्यं न, भ्रातृभाज्यं न भारकारि च न। नित्यं व्यये कृते वर्धते एव। अतः विद्याधनं सर्वधनं प्रधानम्।

शब्दार्थ:
चौरहार्यं = चोर द्वारा चुराया जाना। राजहार्यम् = राजा द्वारा छीनना। भ्रात॒भाज्यम् = भाई द्वारा बाँटना। भारकारि = बजन बढ़ाने वाली। व्यये कृते = व्यय किए जाने पर। वर्धते = बढ़ती ही है। हिन्दी अनुवादः-(वह विद्या) चोर द्वारा चुराई नहीं जा सकती, राजा द्वारा छीनी नहीं जा सकती, भाई द्वारा बाँटी नहीं जा सकती और न वजन बढ़ाने वाली है। व्यय करने पर अर्थात् प्रतिदिन प्रयोग में लाने पर भी बढ़ती ही है। अतः विद्यारूपी धन सभी धनों में प्रधान है।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

भावार्थ:
विद्या की सार्वभौमता तथा महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि जिसके पास विद्यारूपी धन है, उस धन को न चोर चुरा सकता है, न राजा छीन सकता है, न. भाई आपस में बँटवारा कर सकता है और न यह भारस्वरूप है। अन्य धन-सम्पत्ति तो खर्च करने पर कम होती है लेकिन विद्यारूपी धन जितना खर्च किया जाता है अर्थात् विद्या जितनी भी दी जाती है, वह उतनी ही बढ़ती है। अतः विद्यारूपी धन सभी धनों में श्रेष्ठ धन है।

(9) अल्पानामपि वस्तूनां,
संहतिः कार्यसाधिका।
तणैर्गुणत्वमापन्नः
बध्यन्ते मत्तदन्तिनः॥

अन्वयः
अल्पानाम् अपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका (भवति)। मत्तदन्तिनः तृणैर्गुणत्वम् आपन्नैः बध्यन्ते।

शब्दार्थः
अल्पानाम् = छोटी सी। वस्तूनां= वस्तुओं का। संहतिः = संगठन। कार्यसाधिका = कार्य को सम्पन्न करने वाली। तृणगुणत्वम् आपन्नैः= छोटे-छोटे तिनके मिलकर। मत्तदन्तिनः = मतवाले हाथी। बध्यन्ते = बाँध दिये जाते हैं।

हिन्दी अनुवादः
छोटी-छोटी वस्तुओं का संगठन भी कार्य सम्पन्न करने में सहायक हो जाता है। मतवाले हाथी छोटे-छोटे तिनकों से मिलकर बनी रस्सी से बाँधे जा सकते हैं। भावार्थ संसार में छोटी-सी वस्तु का अपना महत्त्व होता है। वे छोटी-छोटी वस्तुएँ मिलकर बड़े से बड़े कार्य को सम्पन्न करने में सहायक हो सकती हैं। जिस प्रकार मतवाले हाथी के लिए एक तिनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है लेकिन वे ही छोटे-छोटे तिनके मिलकर रस्सी के रूप में उसे बाँध सकते हैं।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 11 सुभाषितानि

(10) उत्सवे व्यसने प्राप्ते,
दुर्भिक्षे शत्रुसङ्कटे।
राजद्वारे श्मशाने च,
यस्तिष्ठति स बान्धवः॥

अन्वयः
उत्सवे व्यसने दुर्भिक्षे शत्रुसङ्कटे प्राप्ते राजद्वारे श्मशाने च यः तिष्ठति स बान्धवः (अस्ति)।

शब्दार्थः
उत्सवे पर्व पर। व्यसने प्राप्ते= बुरी आदत आ जाने पर। दुर्भिक्षे = अकाल पड़ने पर । शत्रुसङ्कटे = शत्रु द्वारा संकट पैदा किये जाने पर। राजद्वारे = राजदरबार में। श्मशाने = श्मशान में। तिष्ठति = साथ देता है। बान्धवः = भाई, मित्र, नातेदार, रिश्तेदार।

हिन्दी अनुवादः
किसी पर्व पर, बुरी आदत के समय, अकाल की स्थिति में, शत्रु द्वारा संकट पैदा किये जाने पर, राज दरबार में और श्मशान में जो साथ देता है वही बन्धु-बान्धव है।

भावार्थ:
यहाँ बताया गया है कि संसार में सच्चा सगा-सम्बन्धी वही है जो किसी उत्सव-समारोह में, किसी – गलत आदत के पड़ जाने पर, अकाल में, शत्रु द्वारा चढ़ाई कर दिये जाने पर, राजदरबार में,श्मशान में सहायता करता है अर्थात् साथ देता है वही वास्तव में बन्धु है।

Leave a Comment