RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 10 दीनबन्धुः विवेकानन्दः

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit

Rajasthan Board RBSE Class 8 Sanskrit Chapter 10 दीनबन्धुः विवेकानन्दः

RBSE Class 8 Sanskrit दीनबन्धुः विवेकानन्दः पाठ्यपुस्तकस्य प्रश्नोत्तराणि

RBSE Class 8 Sanskrit दीनबन्धुः विवेकानन्दः मौखिकप्रश्नाः

प्रश्ना  1.
अधोलिखितानां शब्दानाम् उच्चारणं कुरुत –
(नीचे लिखे हुए शब्दों का उच्चारण कीजिए-)
मेघाच्छन्नेः इतस्ततः अस्पृशत् उत्थापयन् रुधिरक्लिन्नम् व्रणपट्टिकां अबध्नात् जीर्णशीर्णः ज्ञापितवान् प्रस्थितः।

नोट:
छात्रगण अपने आप ही उच्चारण करें।

प्रश्ना 2.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि वदत्
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर बोलिए-)

(क) कस्मिन् मासे अतीव शीतदिवसः आसीत् ?
(किस महीने में अत्यधिक ठण्डा दिन था ?)

(ख) मार्गे कः पतितः आसीत् ?
(रास्ते में कौन गिरा हुआ था ?)

(ग) “भवान् कः” इति कः पृष्टवान् ?
(आप कौन हैं” ऐसा किसने पूछा ?)

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(घ) वयं सर्वे कस्य वरदपुत्राः ?
(हम सब किसके घरदपुत्र हैं ?)
उत्तराणि:
(क) पौषमासे
(ख) मानवः
(ग) नरेन्द्रः
(घ) ईश्वरस्य।

RBSE Class 8 Sanskrit दीनबन्धुः विवेकानन्दः लिखितप्रश्नाः

प्रश्ना 1.
अधोलिखितानांप्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत –
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर एक पद में लिखिए-)

(क) “उतिष्ठत बन्धो ! उतिष्ठत” इति कः उक्तवान् ?
(“उठिए बन्धु ! उठिए” ऐसा कौन बोला ?)

(ख) नरेन्द्रः वृद्धं केन आच्छादितवान् ?
(नरेन्द्र ने वृद्ध को किससे ढक दिया ?)

(ग) कस्य नेत्राभ्याम् अश्रुधारा वहति स्म ?
(किसके नेत्रों में आँसु की धारा बह रही थी?)

(घ) अशुभदर्शनम् इति मत्वा वृद्धं के ताडितवन्तः?
(‘अकल्याणकारी दर्शन’ ऐसा मानकर वृद्ध को किन्होंने प्रताड़ित किया ?)

(ङ) कस्य हृदयः व्यथितः सञ्जातः ?
(किसका हृदय दुखी हो गया ?)
उत्तराणि:
(क) नरेन्द्रः (नरेन्द्र)
(ख) स्वकम्बलेन (अपने कम्बल से)
(ग) वृद्धस्य (वृद्ध के),
(घ) अज्ञातजनाः (अज्ञात लोगों ने)
(ङ) नरेन्द्रस्य (नरेन्द्र का)

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प्रश्ना 2.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत –
(नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखिए)

(क) जनाः कुत्र अटन्ति स्म?
(लोग कहाँ घूम रहे थे?)

(ख) वृद्धः कीदृशः आसीत् ?
(वृद्ध कैसा था ?)

(ग) वृद्धस्य दुर्गतिं के कृतवन्तः ?
(वृद्ध की दुर्गति किन्होंने की?)

(घ) कोलकातानगरस्य वातावरणं कथम् आसीत् ?
(कोलकाता नगर का वातावरण कैसा था ?)

(ङ) वृद्धः कुत्र प्रविष्टवान् ?
(वृद्ध ने कहाँ प्रवेश किया?)
उत्तराणि:
(क) जनाः राजपथेषु इतस्ततः अटन्ति स्म।
(लोग सड़कों पर इधर-उधर घूम रहे थे।)।

(ख) वृद्धः पतितः आसीत्।
(बूढ़ा गिरा पड़ा था।)

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(ग) वृद्धस्य दुर्गतिं अज्ञातजनाः कृतवन्तः।
(बूढ़े की दुर्गति अज्ञात लोगों ने की।)

(घ) कोलकातानगरस्य वातावरणं अतीव शीतम् आसीत्।
(कोलकाता.शहर का वातावरण अत्यधिक ठण्डा था।)

(ङ) वृद्धः एकस्मिन् भवनं प्रविष्टवान्।
(बूढ़े ने एक भवन में प्रवेश किया।)

प्रश्ना 3.
मञ्जूषातः उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानानि पूरयत –
(मञ्जूषा से सही पद चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए)
अश्रुधारा, गतिः, रक्तधारा, मस्तकम्, अन्धत्वेन, जन्मना
उत्तराणि:
(क) तस्य मस्तकम् रुधिरक्लिन्नम् आसीत्।
(ख) एतादृशी गतिः कथम् अभवत्।
(ग) जन्मना अस्पृश्यः अशुभदर्शन: अस्मि।
(घ) नेत्रभ्याम् अश्रुधारा प्रवहति स्म।
(ङ) अन्धत्वेन न ज्ञातवान् के आसन् ते ?

प्रश्ना 4.
अधोलिखितानां पदानां प्रयोगं कृत्वा वाक्यानि रचयत –
(नीचे लिखे हुए पदों का प्रयोग करके वाक्य बनाइये )
उत्तराणि:
उदाहरणम् – सर्वदा – अहं सर्वदा सत्यं वदामि।
तस्य – तस्य मस्तकं रुधिरक्लिन्नम् आसीत्।
आसीत् – प्रात:कालस्य समयः आसीत्।
भवतः – भवतः एतां दुगर्ति के कृतवन्तः?
मम – मम दुर्भाग्यशालिनः मुखदर्शनेन भवतः दिनम् अमंगलम् न भवेत।
प्रवहति – वृद्धस्य नेत्राभ्याम् अश्रुधारा प्रवहति स्म।

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प्रश्ना 5.
अधोलिखितेषुपदेषु सन्धिविच्छेदं कुरुत –
(नीचे लिखे हुए पदों में सन्धि विच्छेद कीजिए-)
उत्तराणि:
पदम् सन्धिविच्छेदः
(क) सूर्योदयः सूर्य + उदयः।
(ख) तथापि तथा + अपि।
(ग) नरेन्द्रः नर + इन्द्रः ।
(घ) सोद्वेगम् स + उद्वेगम्।
(ङ) मेघाच्छन्ने मेघ + आच्छन्ने।

प्रश्ना 6.
अधोलिखिताना रेखाङ्कितपदानाम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(नीचे लिखे हुए रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण कीजिए)
(क) अस्मिन् पाठे दीनबन्धुः विवेकानन्दः अस्ति।
(ख) राजपथेषु जना अटनार्थं गच्छन्ति।
(ग) नरेन्द्रः वस्त्रेण तस्य व्रणपट्टिकाम् अकरोत्।
(घ) मन्दिरं मत्वा एकस्मिन् भवनं प्रविष्टवान्।
(ङ) तस्य नेत्राभ्याम् अश्रुधारा प्रवहति।
उत्तराणि:
(क) कस्मिन् पाठे दीनबन्धुः विवेकानन्दः अस्ति ?
(ख) राजपथेषु जना किमर्थं गच्छन्ति ?
(ग) नरेन्द्रः वस्त्रेण कस्य व्रणपट्टिकाम् अकरोत् ?
(घ) मन्दिरं मत्वा कुत्र प्रविष्टवान् ?
(ङ) तस्य नेत्राभ्याम् का प्रवहति ?

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RBSE Class 8 Sanskrit दीनबन्धुः विवेकानन्दः अन्य महत्वपूर्णः प्रश्नाः

RBSE Class 8 Sanskrit दीनबन्धुः विवेकानन्दः वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तराणि

प्रश्न: 1.
कस्य मासस्य अतीव शीतदिवसः ?
(क) ज्येष्ठमासस्य
(ख) श्रावणमासस्य
(ग) पौषमासस्य
(घ) फाल्गुनमासस्य।
उत्तरम्:
(ग) पौषमासस्य

प्रश्न: 2.
नरेन्द्रस्य पितुः नामास्ति।
(क) विश्वनाथः
(ख) विश्वनाथदत्तः
(ग) आचार्य विश्वनाथः
(घ) विश्वनाथप्रतापः।
उत्तरम्:
(ख) विश्वनाथदत्तः

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प्रश्न: 3.
अन्धः कः आसीत् ?
(क) वृद्धः
(ख) नरेन्द्रः
(ग) विश्वनाथदत्तः
(घ) न कोऽपि एतेषु।
उत्तरम्:
(क) वृद्धः

प्रश्न: 4.
वृद्धः कुत्र गन्तुमिच्छति ?
(क) गृहम्
(ख) वनं
(ग) विद्यालयं
(घ) आश्रमं।
उत्तरम्:
(घ) आश्रमं

प्रश्नः 5.
कः वृद्धं स्कन्धे निधाय प्रस्थितः ?
(क) नरेन्द्रः
(ख) वृद्धः
(ग) अपरिचितजनः
(घ) पथिकः।
उत्तरम्:
(क) नरेन्द्रः।

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RBSE Class 8 Sanskrit दीनबन्धुः विवेकानन्दः अतिलघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न: 1.
अस्य पाठस्य किं नामास्ति ?
उत्तरम्:
अस्य पाठस्य नामः ‘दीनबन्धुः विवेकानन्दः’ इति अस्ति।

प्रश्न: 2.
नरेन्द्रः कस्य पुत्रः आसीत् ?
उत्तरम्:
नरेन्द्रः विश्वनाथदत्तस्य पुत्रः आसीत्।

प्रश्न: 3.
नरेन्द्रः स्वकम्बलेन कम् आच्छादितवान् ?
उत्तरम्:
नरेन्द्रः स्वकम्बलेन तं वृद्धम् आच्छादितवान्।

प्रश्न: 4.
नरेन्द्रस्य हृदयः कथं सञ्जातः ?
उत्तरम्:
नरेन्द्रस्य हृदयः व्यथितः सञ्जातः।

प्रश्नः 5.
जीर्णशीर्णैः वस्त्रैः कः आवृत्तः ?
उत्तरम्:
जीर्णशीर्णै: वस्त्रैः वृद्धः आवृत्तः।

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RBSE Class 8 Sanskrit दीनबन्धुः विवेकानन्दः लघूत्तरीयाः प्रश्नाः

प्रश्न: 1.
अस्मिन् पाठे कस्य भावस्य प्रतिपादनम् अस्ति ?
उत्तरम्:
अस्मिन् पाठे नरेन्द्रस्य करुणाभावस्य प्रतिपादनम् अस्ति

प्रश्न: 2.
विश्वेऽस्मिन् कति जनाः करुणाभावपराः सन्ति?
उत्तरम्:
विश्वेऽस्मिन् विरलाजनाः व करुणाभावपराः सन्ति।

प्रश्न: 3.
प्रभाते मन्दिरे-मन्दिरे किं भवति ?
उत्तरम्:
प्रभाते मन्दिरे-मन्दिरे मंगलध्वनिः भवति।

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प्रश्न: 4.
प्रातःकाले अटनार्थम् कुत्र गन्तव्यम् ?
उत्तरम:
प्रात:काले अटनार्थं राजपथेषु गन्तव्यम्।

RBSE Class 8 Sanskrit दीनबन्धुः विवेकानन्दः निबन्धात्मक प्रश्नोत्तरः

प्रश्न: 1.
दीनबन्धुः विवेकानन्दः’ इति पाठस्य सारं हिन्दी भाषायां लिखत।
उत्तरम्:
श्री विश्वनाथदत्त के घर में जन्मे नरेन्द्र बचपन से दयालु एवं प्रतिभासम्पन्न थे। वे छुआछूत का घोर विरोध करते थे। वे हमेशा दीन-दुखियों की सेवा करने में विश्वास करते थे। एक बार वे सड़क पर जा रहे थे। अचानक उनका पैर सड़क पर घायल अवस्था में पड़े हुए एक बूढ़े आदमी से टकरा गया। रुककर उससे पूछा। वह बेहोश था। नरेन्द्र ने सिर पर मलहम-पट्टी की और अपने कम्बल से ढक दिया। होश आने पर फिर पूछा, बूढ़े आदमी ने लम्बी साँस लेकर कहा – मैं अछूत, अपवित्र हूँ।

मुझ भाग्यहीन का अशुभ दर्शन करके आपका आज का दिन खराब न हो जाय। उसके नेत्रों से आँसू बह रहे थे। धीरज बँधाते हुए नरेन्द्र बोला, हम सब ईश्वर की सन्तान हैं। कोई अछूत, अपवित्र नहीं है। लेकिन यह बतायें कि यह दुर्गति किसने की है। वह बोलामैं मंगल ध्वनि को सुनकर तथा मन्दिर समझकर एक भवन में प्रवेश कर गया। वहाँ लोगों ने मुझे बुरी तरह फटकार दिया। अन्धा होने के कारण मैं उन्हें देख नहीं सका। इस वृत्तान्त को सुनकर नरेन्द्र का मन अत्यन्त दुखी हुआ और करुणापूर्वक अपने कन्धे पर रखकर रामकृष्ण आश्रम की ओर चल दिया।

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योग्यता-विस्तारः

(क) पाठविस्तारः – श्रीरामकृष्णपरमहंसः
हिन्दी अनुवाद – जब स्वामी दयानन्द ने उत्तर भारत में आर्यसमाज का प्रचार किया तभी बंगाल प्रान्त में रामकृष्णपरमहंस अपने उपदेशों से नये जीवन का संचार कर रहे थे। रामकृष्ण महोदय का जन्म हुगली जिले में एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ। विवाहित होते हुए भी इस विरक्त ने बीस वर्ष की अवस्था में ही संन्यासी होकर छह महीने तक समाधि लगाकर योग-साधना की।

उनके उपदेश सरल और प्रभावपूर्ण थे। लोगों को आपस में सहनशीलता का प्रदर्शन करना चाहिए। दरिद्रनारायण की सेवा वास्तव में परमेश्वर की सेवा है। स्वामी विवेकानन्द उनके प्रमुख शिष्य थे। श्रीरामकृष्णपरमहंस ईश्वर में पूर्ण आस्था रखने वाले, काली के भक्त, गरीबों के उद्धार करने वाले और सिद्ध पुरुष थे।

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(ख) भाषा क्रीडा
सभी बालक मण्डल निर्माण करेंगे। अध्यापक बीच में खड़े होकर प्रत्येक बालक को आदेश देते हैं कि एक श्वास में महापुरुषों के नाम बोलिए। इसी प्रकार सभी बालकों का क्रम आ जायेगा। जो बालक एक श्वास में सबसे अधिक नाम बोलता है, वह विजयी होता है।

(ग) भाषा विस्तार
दा(देना) ललकारः (भूतकाल)
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क्री (खरीदना) लङ् लकारः (भूतकाल)
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श्रु(सुनना) लङ्लकार
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ज्ञा (जानना) लङ्लकार
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महत्वपूर्णानांशब्दार्थानां सूची –
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पाठ-परिचयः
दीनबन्धु‌ ‌विवेकानन्द‌ ‌का‌ ‌जन्म‌ ‌श्री‌ ‌विश्वनाथदत्त‌ ‌के‌ ‌घर‌ ‌में‌ ‌12‌ ‌जनवरी‌ ‌सन्‌ ‌ 1863‌ ‌ई.‌ ‌को‌ ‌हुआ‌ ‌था।‌ ‌बचपन‌ ‌का‌ ‌नाम‌ ‌नरेन्द्रदत्त‌ ‌था।‌ ‌नरेन्द्र‌ ‌बचपन‌ ‌से‌ ‌ही‌ ‌प्रतिभासम्पन्न‌ ‌थे।‌ ‌ उन्होंने‌ ‌बचपन‌ ‌में‌ ‌ही‌ ‌दर्शनों‌ ‌का‌ ‌अध्ययन‌ ‌कर‌ ‌लिया‌ ‌था।‌ ‌विश्व‌ ‌प्रसिद्ध‌ ‌स्वामी‌ ‌विवेकानन्द‌ ‌ स्वामी‌ ‌रामकृष्ण‌ ‌परमहंस‌ ‌महोदय‌ ‌के‌ ‌शिष्य‌ ‌थे।‌ ‌उन्होंने‌ ‌न‌ ‌केवल‌ ‌भारतवर्ष‌ ‌में‌ ‌अपितु‌ ‌पाश्चात्य‌ ‌ देशों‌ ‌में‌ ‌भी‌ ‌व्यापक‌ ‌मानव‌ ‌धर्म‌ ‌की‌ ‌उच्च‌ ‌स्वर‌ ‌में‌ ‌उद्घोषणा‌ ‌की‌ ‌थी।‌ ‌4‌ ‌जुलाई‌ ‌सन्‌ ‌1902‌ ‌ई.‌ ‌ को‌ ‌इस‌ ‌महान्‌ ‌‌विभूति‌ ‌ने‌ ‌पार्थिव‌ ‌शरीर‌ ‌को‌ ‌त्याग‌ ‌दिया।‌

मूल अंश, शब्दार्थ, हिन्दी अनुवाद एवं प्रश्नोत्तर

(1) प्रात:कालस्य समयः आसीत्। पौषमासस्य अतीव शीतदिवसः। सूर्योदयः अभवत् तथापि मेघाच्छन्ने गगने इदानीमपि पूर्णप्रकाशस्य अभावः आसीत्। कोलकातानगरस्य राजपथेषु इतस्ततः जनाः अटनार्थं गच्छन्ति स्म। नरेन्द्रः अपि मार्गे गच्छति स्म। सहसा तस्य पादः किमपि वस्तु अस्पृशत्। सः व्यरमत् सम्यक् दर्शनेन ज्ञातवान् यत् जीर्णशीर्णैः वस्त्रैरावृतः कोऽपि मानवः मार्गे पतितः। तम् उत्थापयन् “उत्तिष्ठ बन्धो ! उत्तिष्ठ।” इति नरेन्द्रः उक्तवान् किन्तु सः अन्धः पङ्गः चेतनाविहीनश्च आसीत्। तस्य मस्तकम् अपि रुधिरक्लिन्नम् आसीत्। नरेन्द्रःस्ववस्त्रेण तस्य मस्तके व्रणपट्टिकाम् अबध्नात्। अनन्तरं स्वकम्बलेन तम् आच्छादितवान्।

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शब्दार्थ:
प्रातः कालस्य = प्रातः काल का। आसीत् = था। अतीव = बहुत। अभवत् = हुआ। तथापि % फिर भी। इदानीम = अब। अपि = भी। प्रकाशस्य = प्रकाश का। नगरस्य = नगर के। मार्गे = रास्ते में। तस्य = उसका। पादः = पैर। किमपि = किसी। सम्यक = अच्छी तरह। यत् = कि । कोऽपि = कोई। तम् = उसे। उक्तवान = कहा। तस्य = उसका। मस्तकम् = सिर। स्ववस्त्रेण = अपने कपड़े से। मस्तके = सिर पर। अनन्तरं = उसके बाद। तम् = उसे। शीतदिवसः = ठण्डा दिन। मेघाच्छन्ने = बादलों से ढके हुए।

गगने = आकाश में। राजपथेष = सड़कों या राजमार्गों पर। इतस्ततः = इधर-उधर। अटनार्थं = घूमने के लिए। गच्छन्ति स्म= जा रहे थे। गच्छति स्म = जा रहा था। सहसा = अचानक। अस्पृशत् = छुआ। व्यरमत् = रुका। दर्शनेन = देखने से। ज्ञातवान् = जाना। जीर्णशीर्णैः वस्त्रैः = फटे-पुराने कपड़ों से। आवृत्तः = ढका हुआ। पतितः = गिरा हुआ है। उत्थापयन् = उठाते हुए। उत्तिष्ठ = उठो। अन्धः = अन्धा। पङ्ग = लँगड़ा। चेतनाविहीनश्चः = चेतनाहीन। रुधिरक्लिन्नम् = रक्त से गीला। व्रणपट्टिकाम् = घाव पर पट्टी। अबध्नात् = बाँधी। स्वकम्बलेन = अपने कम्बल से। आच्छादितवान् = ढक दिया।

हिन्दी अनुवादः
सबेरे का समय था। पौष माह का अत्यधिक ठण्डा दिन। सूर्योदय हो गया फिर भी बादलों से ढके हुए आकाश में इस समय भी पूर्ण रूप से प्रकाश का अभाव था। कोलकाता शहर की सड़कों पर इधर-उधर लोग घूमने के लिए जा रहे थे। नरेन्द्र भी रास्ते में जा रहा था। अचानक उसका पैर किसी वस्तु से छुआ। वह रुका, ठीक तरह देखने से मालूम हुआ कि फटे-पुराने कपड़ों से ढका हुआ कोई मनुष्य सड़क पर गिरा हुआ है। उसे उठाते हुए “उठो बन्धु ! उठो” इस तरह नरेन्द्र ने कहा लेकिन वह अन्धा, लँगड़ा और चेतनाशून्य था। उसका सिर भी रक्त से गीला था। नरेन्द्र ने अपने कपड़े से उसके सिर के घाव पर पट्टी बाँध दी। उसके बाद अपने कम्बल से उसे ढक दिया।

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(क) शीतदिवसः कस्य मासस्य आसीत् ?
उत्तरम्:
अतीव शीतदिवसः पौषमासस्य आसीत्।

(ख) कस्य नगरस्य कुत्र जनाः अटनार्थं गच्छन्ति स्म?
उत्तरम्:
कोलकातानगरस्य राजमार्गेषु जना: अटनार्थं गच्छन्ति स्म।

(ग) मार्गे नरेन्द्रः कम् अपश्यत् ?
उत्तरम्:
मार्गे नरेन्द्रः एकं चेतनाविहीनम् जनम् अपश्यत्।

(घ) पतितस्य जनस्य मस्तकं कीदृशम् आसीत् ?
उत्तरम्:
पतितस्य जनस्य मस्तकं रुधिरक्लिन्नम् आसीत्।

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(ङ) नरेन्द्रः केन तं जनम् आच्छादितवान् ?
उत्तरम्:
नरेन्द्रः स्वकम्बलेन तं जनम् आच्छादितवान्।

(च) ‘पाताले’ इति पदस्य किम् विलोमपदम् अत्र प्रयुक्तम्?
उत्तरम्:
‘पाताले’ इति पदस्य ‘गगने’ विलोमपदम् अत्र प्रयुक्तम्।

(छ) ‘उत्थापयन्’ इति पदे कः प्रत्ययः प्रयुक्तः?
उत्तरम्:
उत्थापयन् इति पदे शतृ प्रत्ययः प्रयुक्तः।

(2) कतिपयकालानन्तरं प्राप्तायां चेतनायां नरेन्द्रः तं वृद्धम् “भवान् कः? एतादृशी गतिः कथम् अभवत्” इति पृष्टे सति सः वृद्धः नेत्रे शून्ये प्रसार्य निःश्वस्य च उक्तवान् – “जन्मना अस्पृश्यः अशुभदर्शनः अस्मि। मम दुर्भाग्यशालिनः मुखदर्शनेन भवतः एतद् दिनं व्यर्थम् अमङ्गलं च न भवेत् ।” तस्य नेत्रभ्याम् अश्रुधारा प्रवहति स्म। नरेन्द्रः तं सान्त्वयन् सोद्वेगं “अरे जन्मना एव कथम् अस्पृश्यता अपवित्रता अशभदर्शनं च। वयं सर्वे ईश्वरस्य वरदपुत्राः। अस्तु भवतः एतां दुर्गतिं के कृतवन्तः” इति पृष्टवान्।

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शब्दार्थाः
कतिपयकालानन्तरम् = कुछ समय बाद। प्राप्तायां चेतनायां = चेतना जाग्रत होने पर। एतादृशी = ऐसी। गतिः = स्थिति। पृष्टे सति = पूछने पर। प्रसार्य = फैलाकर। निःश्वस्य = लम्बी श्वास छोड़कर। जन्मना = जन्म से। अस्पृश्यः = अछूत। अशुभदर्शनः = अकल्याण दर्शन, अशुभ दर्शन। मुखदर्शनेन = मुख देखने से। व्यर्थम् = बेकार। अमङ्गलम् = अकल्याणकारी। भवेत् = होवे। तस्य = उसके। नेत्राभ्याम् = नेत्रों से। अश्रुधारा = आँसुओं की धारा। प्रवहति स्म = बह रही थी। सान्त्वयन् = धीरज बँधाकर। सोद्वेगं = उद्वेग सहित । वयं = हम सब। ईश्वरस्य = ईश्वर के। वरदपुत्राः = ज्येष्ठपुत्र। भवतः = आपकी। एतां = ऐसी। के= किन्होंने। कृतवन्तः = की है। पृष्टवान् = पूछा।

हिन्दी अनुवादः
कुछ समय के बाद चेतना जाग्रत होने पर नरेन्द्र ने उस वृद्ध से “आप कौन हैं ? ऐसी स्थिति कैसे हुई” यह पूछे जाने पर वह बूढ़ा आदमी शून्य नेत्रों को फैलाकर और लम्बी साँस छोड़कर बोला-“जन्म से अछूत, अकल्याणकारी दर्शन वाला हूँ। मुझ दुर्भाग्यशाली के मुँह देखने से आपका यह दिन बेकार में ही अकल्याणकारी न हो जाय।” उसके नेत्रों से आँसुओं की धारा बह रही थी। नरेन्द्र उसे धीरज बँधाता हुआ उद्वेग के साथ (बोला) “अरे जन्म से ही कैसी अछूतता, अपवित्रता और अकल्याणकारी दर्शन । हम सभी ईश्वर के वरदपुत्र हैं। ठीक है आपकी ऐसी दुर्गति किन्होंने की है” ऐसा पूछा।

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(क) नरेन्द्रः वृद्धम् कदा अपृच्छत् ?
उत्तरम्:
नरेन्द्रः वृद्धम् प्राप्तायां चेतनायाम् अपृच्छत्।

(ख) वृद्धः आत्मनं कीदृशं कथयति ?
उत्तरम्:
वृद्धः आत्मनं अस्पृश्यः अशुभदर्शनः कथयति।

(ग) कस्य नेत्राभ्याम् अश्रुधारा प्रवहति ?
उत्तरम्:
तस्य वृद्धस्य नेत्राभ्याम् अश्रुधारा प्रवहति।

(घ) वयं कस्य पुत्राः स्म?
उत्तरम् वयं ईश्वरस्य वरदपुत्राः।

(ङ) भवान्’ इति पदे का विभक्तिः प्रयुक्ता ?
उत्तरम्:
‘भवान्’ इति पदे प्रथमा विभक्तिः प्रयुक्ता।

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(च) ‘भवेत्’ इति पदे कः लकारः ?
उत्तरम्;
‘भवेत्’ इति पदे विधिलिङ्लकारः अस्ति।

(छ) ‘गन्तव्यम्’ इत्यस्मिन पदे प्रत्ययं निर्दिशत?
उत्तरम्:
‘गन्तव्यम्’ इत्यस्मिन पदे ‘तव्य प्रत्ययः’ अस्ति।

(3) ततः “प्रभाते मङ्गलध्वनिं श्रुत्वा मन्दिरं मत्वा एकस्मिन् भवनं प्रविष्टवान्। तत्र अशुभदर्शन: अपवित्रः अस्पृश्यः इति उक्त्वा मां ताडितवन्तः। अन्धत्वेन न ज्ञातवान् के आसन् ते इति।” नरेन्द्रस्य हृदय: व्यथितः सञ्जातः। करुणया तस्य स्कन्धे स्वहस्तं निधाय “भवतः कुत्र गन्तव्यम् ?” इति पृष्टे सति वृद्धः ज्ञापितवान् यत् सः रामकृष्णपरमहंसस्य आश्रमं गन्तुमिच्छति। नरेन्द्रः तं वृद्धं स्कन्धे निधाय गन्तव्यं प्रति प्रस्थितः।।

शब्दार्थाः
प्रभाते = प्रात:काल में। श्रुत्वा = सुनकर। मत्वा = मानकर। प्रविष्टवान् = प्रवेश किया। उक्त्वा = कहकर। मां = मुझे। ताडितवन्तः = प्रताड़ित किया। अन्धत्वेन = अन्धा होने के कारण। ज्ञातवान् = जाना। आसन् = थे। व्यथितः = दु:खी। सञ्जातः = हुआ। करुणया = करुणापूर्वक। स्कन्धे = कन्धे पर। सहस्तं = अपना हाथ। के = कौन। ते = वे। भवतः कुत्र गन्तव्यम् = आपको कहाँ जाना है। पृष्टं सति = पूछने पर। निधाय = रखकर। ज्ञापितवान् = बताया। गन्तुमिच्छति = जाना चाहता है। प्रस्थितः = प्रस्थान किया।

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हिन्दी अनुवादः
उसके पश्चात् “प्रात:काल में शुभ ध्वनि को सुनकर मन्दिर मानकर एक भवन में प्रवेश किया। वहाँ अकल्याणकारी दर्शन वाले, अपवित्र, अछूत ऐसा कहकर मुझको प्रताडित करने लगे। अन्धा होने के कारण नहीं जान पाया, वे कौन थे।” नरेन्द्र का हृदय दुःखी हुआ। करुणापूर्वक उसके कन्धे पर अपना हाथ रखकर “आपको कहाँ जाना है” ? ऐसा पूछने पर वृद्ध ने बताया कि वह रामकृष्ण परमहंस के आश्रम में जाना चाहता है। नरेन्द्र उस वृद्ध को कन्धे पर रखकर गन्तव्य की ओर प्रस्थान किया।

(क) मंगलध्वनिं कः अश्रुणोत् ?
उत्तरम्:
मंगलध्वनिं वृद्धः अश्रुणोत्।

(ख) मन्दिरं कः अमन्यत् ?
उत्तरम्:
मन्दिरं वृद्धः अमन्यत्।

(ग) केन कारणेन वृद्धः न ज्ञातवान् ?
उत्तरम्:
अन्धत्वेन वृद्धः न ज्ञातवान्।

(घ) कस्मात् कारणात् नरेन्द्रः व्यथितः सञ्जातः ?
उत्तरम्:
जनानां दुर्व्यवहारात् नरेन्द्रः व्यथितः सञ्जातः।

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 10 दीनबन्धुः विवेकानन्दः

(ङ) वृद्धः कुत्र गन्तुमिच्छति स्म ?
उत्तरम्:
वृद्धः रामकृष्णपरमहंसस्य आश्रमं गन्तुमिच्छति स्म।

(च) ‘गन्तुमिच्छति’ इति पदस्य सन्धिविच्छेदः भविष्यति।
उत्तरम्:
‘गन्तुम् + इच्छति’ इति सन्धिविच्छेदः भविष्यति।

(छ) ताडितवन्तः’ इत्यस्मिन् पदे किम् प्रत्यय अस्ति ?
उत्तरम्:
‘ताडितवन्तः’ इत्यस्मिन् पदे क्तवतु प्रत्ययं अस्ति।

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