RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 9 जैसलमेर की राजकुमारी

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi Chapter 9 जैसलमेर की राजकुमारी

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

RBSE Class 8 Hindi जैसलमेर की राजकुमारी पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पपाठ से

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
राजकुमारी का नाम क्या था?
उत्तर:
राजकुमारी का नाम रत्नावती था।

प्रश्न 2.
दुर्ग को किसकी सेना ने घेर रखा था?
उत्तर:
दुर्ग को अलाउद्दीन की सेना ने घेर रखा था।

प्रश्न 3.
राजकुमारी के पिता का क्या नाम था?
उत्तर:
राजकुमारी के पिता का नाम रत्नसिंह था।

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लिखें

निम्नलिखित वाक्यों को अपनी कॉपी में लिखकर सही वाक्य पर (✓) और गलत वाक्य पर (x) का निशान लगाइए –

  1. जैसलमेर के दुर्गाधिपति महाराज रत्नसिंह थे।
  2. “बेटी तुझसे मुझे ऐसी ही आशा है” ये शब्द बुजुर्ग सैनिक ने कहे।
  3. राजकुमारी ने जिसे मार गिराया, वह मृत व्यक्ति यवन था।
  4. बुजुर्ग को गद्दारी करने के लिए सोने का प्रलोभन दिया था।

उत्तर:

  1. सही
  2. गलत
  3. सही
  4. सही।

RBSE Class 8 Hindi जैसलमेर की राजकुमारी अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
राजकुमारी की तुलना किससे की गई है?
उत्तर:
राजकुमारी की तुलना फरिश्ते (देवदूत) से की गई

प्रश्न 2.
मलिक काफूर कौन था?
उत्तर:
मलिक काफूर एक गुलाम था जो यवन सेना का सेनापति था।

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प्रश्न 3.
राजकुमारी के सम्मुख उनके पिता के संदेशवाहक के रूप में कौन आया था?
उत्तर:
राजकुमारी के सम्मुख उनके पिता के संदेश- वाहक के रूप में यवन सैनिक आया था।

RBSE Class 8 Hindi जैसलमेर की राजकुमारी लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पाठ में दुश्मन को किन-किन उपनामों से पुकारा गया है?
उत्तर:
पाठ में दुश्मन को धूर्त, छलिया, टिड्डी और पापिष्ठ जैसे उपनामों से पुकारा गया है।

प्रश्न 2.
यवनों के आक्रमण का राजकुमारी द्वारा किए गए उपहास का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यवनों के आक्रमण का राजकुमारी उपहास करते हुए कहती है कि ये धूर्त रोज धूल उड़ाते हैं, गोली बरसाते हैं, इससे इनको कोई लाभ तो होता नहीं, उल्टे हमारा किला गंदा होता है।

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प्रश्न 3.
मलिक काफूर ने बुजुर्ग सैनिक को रिश्वत क्यों दी थी?
उत्तर:
मलिक काफूर ने बुजुर्ग सैनिक को रिश्वत इसलिए दी थी कि बुजुर्ग सैनिक दुर्ग का द्वार खोल देगा और वह अपने सौ चुने हुए योद्धाओं के साथ उसके बताए हुए गुप्त मार्ग से दुर्ग के भीतर महलों में पहुँच जाएगा।

RBSE Class 8 Hindi जैसलमेर की राजकुमारी दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कहानी के भाव को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
“जैसलमेर की राजकुमारी’ कहानी हमें यह बताती है कि महिलाएँ भी अपने देश और महल की सुरक्षा कर सकती हैं। उनके पास भी बुद्धि-चातुर्य और सैन्य-कौशल के द्वारा शत्रुओं को पराजित करने की शक्ति होती है। राजकुमारी रत्नावती ने पिता की अनुपस्थिति में किले की सुरक्षा पूरी चौकसी के साथ जिस प्रकार से की वह प्रशंसा के योग्य है।

घूस देकर मलिक काफूर के महल में घुसने की योजना को उसने इस प्रकार से विफल किया कि मलिक काफूर दाँत पीसकर रह गया। राजकुमारी ने राजा की अनुपस्थिति में मलिक काफूर और उसके सैनिकों का भोजन के अभाव में अपने से ज्यादा ध्यान रखा। उसकी इसी देशभक्ति व दयालुता से चकित होकर मलिक काफूर ने उसे फरिश्ता कहा है।

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प्रश्न 2.
राजकुमारी के रण कौशल का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजकुमारी की पिता से वीरतापूर्ण बातें उसके साहस और पूर्ण विश्वास की परिचायक हैं। राजकुमारी ने पिता से दुर्ग की रक्षा का जो वादा किया था उसको पूरी निष्ठा के साथ पिता के वापस आने तक निभाया। वह दुर्ग की मीनारों और गुंबदों पर चढ़कर सारी रात स्वयं दुर्ग की सुरक्षा का ध्यान रखती थी, उसके सनसनाते हुए तीर यवन सेना की हँसी उड़ाते थे। यवनों के दल का दुर्ग पर भयंकर आक्रमण वह तब तक देखती रही जब तक वे दुर्ग की आधी दीवार पर चढ़ नहीं गए।

फिर उसने भारी-भारी पत्थरों और गरम तेल से कई सैनिकों के मुँह झुलस दिए और कई सैनिकों को चटनी बना डाला। पूरी सेना हाय-तौबा करते हुए भाग निकली। एक यवन सैनिक जो रात में चुपके से पीठ पर गठरी बाँधे एक व्यक्ति को लेकर दर्ग पर चढ़ रहा था उसे भी उसने तीर से मार गिराया। घूस देकर महल में घुसते हुए मलिक काफूर को भी उसने अपनी नई चाल से कैद कर लिया। मलिक काफूर अपनी मूर्खता पर दाँत पीस रहा था और उसकी सहेलियाँ इतने चूहों को चूहेदानी में फंसाकर हँस रही थीं।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
“राजकुमारी रत्नावती दुश्मनों के दांत खट्टे कर रही थी” यहाँ ‘दाँत खट्टे करना’ एक मुहावरा है। पाठ में आए मुहावरों को छाँटकर स्वरचित वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
पाठ में आए मुहावरों का प्रयोग निम्नलिखित है-
1.शत्रु से लोहा लेना:
वीरतापूर्वक लड़ना-सेना के जवानों ने सीमा पर शत्रु से वीरतापूर्वक लोहा लिया।

2. मृत्यु और जीवन को खेल समझना:
जीवन की चिंता न करना भारतीय वीरों ने सदा मृत्यु और जीवन को एक खेल समझा है।

3. प्राण लेकर भागना:
बचना-1965 के युद्ध में पाकिस्तानी सैनिक भारतीय आक्रमण को देख प्राण लेकर भाग निकले।

4. बाल बाँका न होना:
कोई नुकसान न होनाअलाउद्दीन के सैनिक राजकुमारी का बाल भी बांका नहीं कर सके।

5. कंगूरे पर नजर डालना:
समृद्धि के बारे में सोचनावैभव ने कभी मेहनत से कमाई नहीं की, लेकिन उसकी नजर हमेशा कंगूरे पर ही रहती है।

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6. हँसी-ठट्टा न होना:
काम आसान न होना-जैसलमेर के दुर्ग पर अधिकार करना शत्रुओं के लिए हँसी-ट्टटा नहीं था।

7.गर्द उड़ाना-असफल प्रयास करना:
मलिक काफूर के सैनिक दुर्ग पर आक्रमण क्या करते सिर्फ गर्द उड़ाकर चले जाते।

8. छिन्न-भिन्न होना- बिखर जाना:
आँधी-तूफान के कारण उसका छप्पर छिन्न-भिन्न हो गया।

9. तलवार के घाट उतारना-जान से मारना:
राणाप्रताप ने मेवाड़ की रक्षा के लिए शत्रुओं को तलवार के घाट उतार दिया।

10. हतबुद्धि हो जाना:
कुछ तय न कर पाना अचानक आई बाढ़ से सारे तीर्थयात्री हतबुद्धि से हो गए और बहने से न बच सके।

प्रश्न 2.
जिस सामासिक पद के दोनों पदों में विशेषणविशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
जैसे-महाराज = महान है जो राजा। आप कर्मधारय समास के पाँच उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
कर्मधारय समास के पाँच उदाहरण निम्नलिखित हैं –

  1. नीलकमल – नीला है जो कमल
  2. श्वेत अश्व – श्वेत (सफेद) है जो अश्व
  3. महामुनि – महान है जो मुनि
  4. महामानव – महान है जो मानव
  5. कमलनयन – कमल हैं जो नयन (नेत्र)

प्रश्न 3.
यवन सैनिक घोड़े पर बैठकर आया, पर किले का दरवाज़ा बंद था। जैसे ही उसने दरवाजा खटखटाया, चिड़िया पर फड़फड़ाकर उड़ गई। उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द ‘पर’ का प्रयोग तीन अलग-अलग अर्थों में हुआ है। आप भी ऐसे वाक्य बनाइए जिसमें एक शब्द का प्रयोग बार-बार हुआ हो और अर्थ हर बार अलग-अलग हो।
उत्तर:

  • एक चीनी लड़की एक दुकान पर चीनी भाषा में चार किलोग्राम चीनी माँग रही है।
  • गया अपने घर से रेलगाड़ी के द्वारा गया को अपने दोस्तों के साथ गया।

नोट:

  • चीनी देश, चीनी भाषा, चीनी पदार्थ
  • गया बालक का नाम, गया स्थान का नाम और गया क्रिया।
  • इस तरह तीनों शब्द के अर्थ हर बार अलग अलग हैं।’

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों को शब्दकोश क्रम में लिखिए। बुजुर्ग, सैनिक, प्राचीर, सूर्य, द्वारा, चीत्कार, दाँत, दंग, दुःख।
उत्तर:
उपर्युक्त शब्दों का शब्दकोश क्रम निम्नलिखित हैं –
चीत्कार, दंग, दाँत, दु:ख, द्वारा, प्राचीर, बुजुर्ग, सूर्य, सैनिक।

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पाठ से आगे

प्रश्न 1.
जैसलमेर के दुर्ग के बारे में और भी जानकारी एकत्र करके लिखिए
उत्तर:
जैसलमेर का किला जैसलमेर की शान माना जाता है। यह शहर के केंद्र में स्थित है। इसे 1156 ई. में एक भाटी राजपूत शासक जैसल द्वारा त्रिकुट पहाड़ी के शीर्ष पर निर्मित किया गया था। जैसलमेर किले में कई खूबसूरत हवेलियाँ, मंदिर और सैनिकों तथा व्यापारियों के आवासीय परिसर हैं। यह किला एक 30 फुट ऊँची दीवार से घिरा हुआ है। यह 99 बुों वाला विशाल किला है। किला परिसर में कई कुएँ हैं जिससे यहाँ के निवासियों को नियमित पानी मिलता था। यह किला राजपूत और मुगल शैली के स्थापत्य का आदर्श नमूना है।

प्रश्न 2.
जैसलमेर को किन-किन नामों से जाना जाता है? पता लगाकर लिखिए।
उत्तर:
जैसलमेर का किला ‘सोनार किला’ या स्वर्ण किला’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह पीले बलुआ पत्थर का किला सूर्यास्त के समय सोने की तरह चमकता है।

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प्रश्न 3.
दुर्ग के अलावा जैसलमेर में और कौन-कौन से दर्शनीय स्थल हैं? सूची बनाइए।
उत्तर:
जैसलमेर में दुर्ग के अलावा अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल अग्रलिखित हैं –

  1. तनौट माता मंदिर
  2. जैन मंदिर
  3. पटवों की हवेली
  4. बड़ा बाग
  5. जैसलमेर युद्ध संग्रहालय
  6. लोंगेवाला युद्ध स्मृति भवन
  7. महाराजा पैलेस आदि।

कल्पना कीजिए

प्रश्न 1.
आप सर्दी की छुट्टियों में जैसलमेर अपने परिवार के साथ भ्रमण पर गए। आपने वहाँ क्या-क्या देखा? अपने शब्दों में यात्रा वृत्तांत लिखिए।
उत्तर:
इस वर्ष में सर्दी की छुट्टियों में जैसलमेर अपने परिवार के साथ गया। हम लोग जैसलमेर स्टेशन से ऑटो रिक्शा बुक करके जैसलमेर दुर्ग पहुँचे। वहाँ मैंने पीले बलुआ पत्थर से बने विशाल किले को देखा। इतनी ऊँची और रिक्शा बुक करके जैसलमेर दुर्ग पहुँचे। वहाँ मैंने पीले बलुआ पत्थर से बने विशाल किले को देखा। इतनी ऊँची और मजबूत इमारत मैंने पहली बार देखी थी। यह किला 30 फुट ऊँची पत्थर की दीवार से घिरा है। इसमें बड़े-बड़े लगभग 99 बुर्ज बने हैं। इसके अंदर बहुत से कुएँ भी हैं जिनमें पीने का पानी उपलब्ध है।

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इस किले में मैंने कई बड़े-बड़े द्वार देखे जो बहुत ही सुंदर आकृति में बनाए गए हैं। इनके नाम भी अलग-अलग हैं। जैसे—अखाई पोल, हवा पोल, सूरज पोल, गणेश पोल आदि। सबसे ऊँचा और अच्छा द्वार हमें अखाई पोल लगा। यह किले का मुख्य द्वार है। जिसे किले के साथ ही 1156 ई. में बनवाया गया था। शाम 4 बजे हम लोग वहाँ से स्टेशन के लिए चल पड़े। वैसे वहाँ देखने की बहुत-सी सुंदर जगहें हैं लेकिन समय न होने के कारण अपनी अधूरी जिज्ञासा के साथ हमें वापस आना पड़ा।

सृजन

दीयासलाई की तूलिकाओं की मदद से आप भी दुर्ग के मॉडल का सृजन कर सकते हैं। आवश्यक सामग्री थर्माकॉल शीट, सफेद ड्राइंग शीट, रंग (पानी वाले), बुश, माचिस की तूलिकाएँ आदि।
उत्तर:
छात्र-छात्राएँ अपने अभिभावक और अध्यापक महोदय की सहायता से उपर्युक्त मॉडल स्वयं बनाएँ।

खोज-बीन

आपने ‘जैसलमेर की राजकुमारी’ के साहस की कहानी इस पाठ में पढ़ी। ऐसी ही साहस की कहानियाँ पुस्तकालय में पढ़िए।
उत्तर:
संकेत-छात्र:
छात्राएँ झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, किरण बेदी, बछेद्री पाल, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स आदि की कहानियाँ पुस्तकालय से पुस्तक लेकर पढ़ें।

संकलन

राजस्थान की गौरवगाथा एवं पराक्रम की घटनाओं का पता लगाकर ‘मेरा संकलन’ में लिखिए।
उत्तर:
राजस्थान की गौरव गाथा एवं पराक्रम की कुछ घटनाएँ अग्रलिखित हैं –

1. अकबर ने बहुत प्रयास किया कि मेवाड़ के महाराणा प्रताप उसकी अधीनता स्वीकार कर लें किंतु राणाप्रताप ने अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया। हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप के इसी स्वाभिमान का प्रतीक है।

2. पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गोरी के बीच तराइन का युद्ध, पृथ्वीराज की वीरता का सजीव वर्णन हमें साहित्य एवं इतिहास में मिलता है।

3. राणासांगा की वीरता की गौरवगाथा का प्रमाण खानवा के युद्ध में बाबर से लड़ाई के दौरान मिलता है। का युद्ध, पृथ्वीराज की वीरता का सजीव वर्णन हमें साहित्य एवं इतिहास में मिलता है।

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4. राणासांगा की वीरता की गौरवगाथा का प्रमाण खानवा के युद्ध में बाबर से लड़ाई के दौरान मिलता है।

5. चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी के जौहर की कथा जो राजा रत्नसिंह की पत्नी थीं। अलाउद्दीन ने पद्मिनी को पाने के लिए चित्तौड़ पर आक्रमण किया था। इस प्रकार ऐसी बहुत-सी वीरता की घटनाएँ राजस्थान के इतिहास में पढ़ने योग्य हैं, जिसे आप ‘मेरा संकलन’ में एकत्रित करके लिख सकते हैं।

तब और अब

नीचे लिखे शब्दों के मानक रूप लिखिए –
खाद्य, उद्धरण, खट्टे, चिट्ठी
उत्तर:
उपरिलिखित शब्दों के मानक रूप निम्नलिखित हैं –
खाद्य, उद्धरण, खट्टे, चिट्ठी।

RBSE Class 8 Hindi जैसलमेर की राजकुमारी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 8 Hindi जैसलमेर की राजकुमारी बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जैसलमेर के दुर्ग पर आक्रमण करने वाला शासक था –
(क) शाहजहाँ
(ख) कुतुबुद्दीन
(ग) अलाउद्दीन
(घ) औरंगजेब।
उत्तर:
(ग) अलाउद्दीन

प्रश्न 2.
जैसलमेर की राजकुमारी ने पोशाक पहन रखी थी –
(क) मर्दानी
(ख) जनानी
(ग) गुजराती
(घ) राजस्थानी।
उत्तर:
(क) मर्दानी

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प्रश्न 3.
“पिता जी! दुर्ग की चिंता न कीजिए।”कथन किसका –
(क) मैनावती का
(ख) रलावती का
(ग) पद्मावती का
(घ) पार्वती का।
उत्तर:
(ख) रलावती का

प्रश्न  4.
“बेटी तुझसे मुझे ऐसी ही आशा है।” कथन है –
(क) मानसिंह का
(ख) भवानी सिंह का
(ग) मलिक काफूर का
(घ) रत्नसिंह का।
उत्तर:
(घ) रत्नसिंह का।

प्रश्न  5.
दुर्ग पर प्रबल आक्रमण किया था –
(क) यवन दल ने
(ख) जनता दल ने
(ग) दानव दल ने
(घ) रामा दल ने।
उत्तर:
(क) यवन दल ने

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प्रश्न  6.
यवन सेनापति मलिक काफूर अपने योद्धाओं के साथ फँस गया –
(क) गुफा में
(ख) जंगल में
(ग) चूहेदानी में
(घ) राजकुमारी के चक्रव्यूह में।
उत्तर:
(घ) राजकुमारी के चक्रव्यूह में।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. रत्नसिंह ने मालवे तक शाही सेना को ……….. दिया था। (खदेड़ / तहस-नहस)
  2. मलिक काफूर की आँखों में ………..भर आए। (सपने / आँसू)
  3.  दुर्ग में प्रत्येक वीर को. ………… मिल रहा था। (पुरस्कार / पुकार)
  4. गगनभेदी जय-निनाद से धरती. ……….. .काँप उठे। (आसाम / आसमान)

उत्तर:

  1. खदेड़
  2. आँसू
  3. पुरस्कार
  4. आसमान।

RBSE Class 8 Hindi जैसलमेर की राजकुमारी अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आक्रमण के लिए प्रस्थान करते समय रत्नसिंह किस स्थिति में थे?
उत्तर:
आक्रमण के लिए प्रस्थान करते समय रत्नसिंह जिरहबख्तर पहने एक हाथी के फौलादी हौदे पर बैठे थे।

प्रश्न 2.
मलिक काफूर दुर्ग को कैसे वश में करना चाहता था?
उत्तर:
मलिक काफूर सोचता था कि जब किले में खाद्य पदार्थ कम हो जाएगा तो दुर्ग वश में आ जाएगा।

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प्रश्न 3.
द्वार रक्षक को यवन सैनिक ने घूस में क्या दिया था?
उत्तर:
द्वार रक्षक को यवन सैनिक ने घूस में सोने की पोटली दी थी।

प्रश्न 4.
कितने दिन बीतने पर गुप्तचर ने अलाउद्दीन को कोर्निस की?
उत्तर:
अट्ठारह सप्ताह बीतने पर गुप्तचर ने अलाउद्दीन को कोर्निस की।

प्रश्न 5.
महाराज रत्नसिंह किस प्रकार के झंडे को फहराते हुए दुर्ग की ओर आ रहे थे?
उत्तर:
महाराज रत्नसिंह सूर्यमुखी झंडे को फहराते हुए दुर्ग की ओर आ रहे थे।

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RBSE Class 8 Hindi जैसलमेर की राजकुमारी लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
यवनों की सेना को राजकुमारी क्या कहती थी?
उत्तर:
यवनों की सेना का मजाक उड़ाते हुए राजकुमारी कहती-“मैं स्त्री हूँ, पर अबला नहीं।” मुझमें मर्दो जैसा साहस और हिम्मत है। मेरी सहेलियाँ भी देखने भर की स्त्रियाँ हैं। मैं इन पापिष्ठ यवनों को कुछ नहीं समझती।”

प्रश्न 2.
यवनों के प्रबल आक्रमण का सामना राजकुमारी ने कैसे किया?
उत्तर:
यवनों के प्रबल आक्रमण को राजकुमारी चुपचाप देखती रही। जब शत्रु दुर्ग की दीवारों पर आधी दूर तक चढ़ आए तब भारी-भारी पत्थर के ढोंके और गर्म तेल की ऐसी मार पड़ी कि शत्रु सेना छिन्न-भिन्न हो गई।

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प्रश्न 3.
राजकुमारी के चक्रव्यूह में फंसने पर यवनों की क्या स्थिति हुई?
उत्तर:
यवनों के प्रबल आक्रमण को राजकुमारी चुपचाप देखती रही। जब शत्रु दुर्ग की दीवारों पर आधी दूर तक चढ़ आए तब भारी-भारी पत्थर के ढोंके और गर्म तेल की ऐसी मार पड़ी कि शत्रु सेना छिन्न-भिन्न हो गई।

प्रश्न 4.
राजकुमारी के चक्रव्यूह में फंसने पर यवनों की क्या स्थिति हुई?
उत्तर:
राजकुमारी के चक्रव्यूह में फंसने पर यवनों को न पीछे का रास्ता मिलता था न आगे का। वे वास्तव में कैद हो गए थे और अपनी मूर्खता पर पछता रहे थे। मलिक काफूर दाँत पीस रहा था। राजकुमारी की सहेलियाँ उन पर हँस रही र्थी।

प्रश्न 5.
अलाउद्दीन के पास जाकर गुप्तचर ने क्या संदेश दिया?
उत्तर:
अलाउद्दीन के पास जाकर गुप्तचर ने कहा- “वहाँ किसी तरकीब से रसद पहुँच गई है। अब किला, नौ महीने पड़े रहने पर भी हाथ न आएगा। फिर शाही फौज के लिए पानी अब किसी तालाब में नहीं है।”

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प्रश्न 6.
राजकुमारी की अतिथि सेवा से प्रसन्न होकर मलिक काफूर ने क्या कहा?
उत्तर:
राजकुमारी की अतिथि सेवा से प्रसन्न होकर मलिक काफूर ने कहा-“महाराज! राजकुमारी तो पूजने लायक हैं, इंसान नहीं, फरिश्ता हैं। मैं ताजिंदगी इनकी मेहरबानी नहीं भूल सकता।”

RBSE Class 8 Hindi जैसलमेर की राजकुमारी nदीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भोजन के अभाव में दुर्ग के भीतर राजपूतों की क्या स्थिति हो गई? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
भोजन के अभाव में दुर्ग के भीतर राजपूत भूखों मरने लगे। राजकुमारी का शरीर पीला हो गया था। उसके अंग शिथिल हो गए, पर नेत्रों का तेज वैसा ही था। उसे कैदियों के भोजन की बड़ी चिंता थी। किले का प्रत्येक आदमी राजकुमारी को देवी की भाँति पूजता था। उसने मलिक काफूर के पास जाकर कहा-“यवन सेनापति, मुझे तुमसे कुछ परामर्श करना है, मैं विवश हो गई हूँ।

दुर्ग में खाद्य सामग्री बहुत कम हो गई है और मुझे यह संकोच हो रहा है कि आपकी अतिथि सेवा कैसे की जाए। अब कल से हम एक मुट्ठी अन्न लेंगे और आप लोगों को दो मुट्ठी उस समय तक मिलेगा, जब तक कि अन्न दुर्ग में रहेगा, आगे ईश्वर मालिक है।” राजकुमारी की ये बातें सुनकर मलिक काफूर की आँखों में आँसू भर आए। उसने कहा”राजकुमारी ! मुझे यकीन है कि आप बीस किलों की हिफाजत कर सकती हैं।”

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प्रश्न 2.
रात के अंधकार में किले की ओर बढ़ती हुई मूर्ति को देखकर राजकुमारी ने क्या किया?
उत्तर:
रात के अंधकार में किले की ओर बढ़ती हुई मूर्ति को देखकर राजकुमारी ने समझा पिता का संदेशवाहक होगा। वह चुपचाप उत्सुक होकर उधर ही देखती रही। किंतु उसे आश्चर्य तब हुआ, जब उसने देखा कि वह गुप्त द्वार की ओर न जाकर सिंह द्वार की ओर जा रहा है। यह अवश्य शत्रु है। राजकुमारी ने ऐसा अनुमान लगाकर एक तीखा बाण हाथ में लिया और छिपती हुई उस मूर्ति के साथ ही द्वार के दरवाजे के ऊपर आ गई।

राजकुमारी ने देखा वह मूर्ति दुर्ग की दीवार पर चढ़ने का उपाय सोच ही रही थी कि राजकुमारी ने बाण धनुष पर चढ़ाकर ललकार कर कहा-“वहीं खड़ा रह और बता किसलिए आया है?” उसने अपने को महाराज का। जरूरी संदेशवाहक बताया और किले में आने के लिए कहा। राजकुमारी ने कहा वहीं से बताओ क्या संदेश है? उसके न बताने पर राजकुमारी ने तीर मारा जो उसके कलेजे को पार कर गया। देखने पर पता चला कि यह यवन था जो अपनी पीठ पर एक अन्य आदमी को गठरी में बाँधे हुए था। यह देख राजकुमारी जोर से हँस पड़ी।

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पाठ-परिचय:
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा लिखित प्रस्तुत पाठ ‘जैसलमेर की राजकुमारी’ रत्नावती के शौर्य, साहस एवं परोपकारिता जैसे गुणों की गाथा है। अलाउद्दीन के आक्रमण के समय राजा रत्नसिंह ने दुर्ग की रक्षा का भार अपनी अल्पवय बेटी पर छोड़ दिया। राजकुमारी ने युद्ध काल में न केवल दुर्ग की रक्षा की बल्कि अपने बुद्धि चातुर्य से यवन सेनापति मलिक काफूर को बंदी बना लिया। फलतः अलाउद्दीन को संधि प्रस्ताव करना पड़ा।

कठिन शब्दार्थ:
दुर्ग = किला। निर्भय = निडर। दुर्गाधिपति = दुर्ग का स्वामी। बलिष्ठ = सर्वाधिक शक्तिशाली। मर्दानी = पुरुषों जैसी। जिरहबख्तर = छाती पर पहना जाने वाला लोहे का जाल। फौलाद = असली लोहा। हौदा = हाथी के ऊपर रखा बैठने का आसन। प्रस्थान = जाना। धूर्त = चालाक, धोखेबाज। छलिया = छल करने वाले, कपटी। वक्र = टेढ़ा, तिरछा । गगनभेदी = आकाश को भेदने वाला। निनाद = ध्वनि। उपत्यका = पहाड़ी के नीचे की भूमि, घाटी। टिड्डी = फसलों को खा जाने वाले कीड़े। रसद = खाद्य सामग्री, अनाज।

अजेय = जिसे जीता न जा सके। अबला = असहाय नारी। पापिष्ठ = सबसे बड़ा पापी। प्रबल = तेज, बलवान। आक्रांत = जिस पर हमला किया गया हो। बुर्ज = गुंबद, मीनारं। प्राचीर = चहारदीवारी। पौर = ड्योढ़ी, दरवाजा। फौरन = तुरंत। मुजरा = झुककर किया जाने वाला अभिवादन। पोटली = छोटी थैली। अशक्य = जो न हो सके, असाध्य। हिफाजत = सुरक्षा। कोर्निस = झुककर सलाम करना। तरकीब = उपाय, युक्ति। हत्बुद्धि = बुद्धि से निराश, भ्रष्टबुद्धि। गैरहाजिर = अनुपस्थित। सख्त = कठोर। ताजिंदगी = उम्रभर। मेहरबानी = कृपा। धौंसा = बड़ा नगाड़ा, डंका।

गयांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ तथा अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. यह जैसलमेर के दुर्गाधिपति महाराज रत्नसिंह की कन्या थी, इस समय बलिष्ठ अरबी घोड़े पर चढ़ी हुई थी और मर्दानी पोशाक पहने थी। उसकी कमर में दो तलवारें लटक रही थीं। कमरबंद में पेशकब्ज, पीठ पर तरकस और हाथ में धनुष था। वह चंचल घोड़े की रास को बलपूर्वक खींच रही थी, जो एक क्षण भी स्थिर रहना नहीं चाहता था। रत्नसिंह जिरहबख्तर पहने एक हाथी के फौलादी हौदे पर बैठे आक्रमण के लिए प्रस्थान कर रहे थे। सामने उनके घोड़े हिनहिना रहे थे और शस्त्र झनझना रहे थे।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘जैसलमेर की राजकुमारी’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक ‘आचार्य चतुरसेन शास्त्री’ हैं। इस गद्यांश में जैसलमेर की राजकुमारी और उसके पिता की युद्ध वेशभूषा का चित्रण किया गया है। व्याख्या-लेखक कहता है कि अलाउद्दीन के विरुद्ध जो युद्ध करने के लिए कह रही है वह जैसलमेर के राजा रत्नसिंह की बेटी है।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 9 जैसलमेर की राजकुमारी

वह उस समय बलशाली अरबी घोड़े पर पुरुषों के कपड़े पहनकर सवार थी। कमर में दोनों तरफ तलवारें लटक रही थीं, कमर में कमरबंद बँधा हुआ था। धनुषबाण हाथ में लिए वह वीर वेशभूषा में घोड़े की लगाम को बल पूर्वक खींचकर घोड़े को रोके हुए थी, क्योंकि घोड़ा पलभर के लिए भी रुकना नहीं चाह रहा था। राजा रत्नसिंह युद्ध के वस्त्र धारणकर हाथी पर सवार होकर अलाउद्दीन की शाही सेना पर आक्रमण करने के लिए जा रहे थे। उनकी सेना के अनेक घोड़े हिनहिनाने रहे थे और सैनिकों के शस्त्र झनझना रहे थे।

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
वीरवेश में राजकुमारी।

प्रश्न 2.
राजकुमारी ने सैनिकों का वेश क्यों धारण कर रखा था?
उत्तर:
उस समय अलाउद्दीन ने जैसलमेर पर आक्रमण कर दिया था और दुर्ग की रक्षा का भार राजकुमारी पर ही था।

प्रश्न 3.
जैसलमेर की राजकुमारी ने क्या वेशभूषा धारण कर रखी थी?
उत्तर:
राजकुमारी एक वीर पुरुष जैसी वेशभूषा धारण कर रखी थी। उसकी कमर से तलवारें लटक रही थीं। पीठ पर तरकस और हाथ में धनुष था।

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प्रश्ना 4.
राजकुमारी को बलपूर्वक रास खींच कर घोड़े को क्यों काबू करना पड़ रहा था?
उत्तर:
राजकुमारी को इसलिए बलपूर्वक घोड़े को काबू करना पड़ रहा था क्योंकि घोड़ा बड़ा बलवान था और भागने को आतुर हो रहा था।

2. टिड्डी-दल की भाँति शत्रु ने दुर्ग घेर रखा था। सब प्रकार की रसद बाहर से आनी बंद थी। प्रतिदिन यवन दल गोली और तीरों की वर्षा करता था। पर जैसलमेर का अजेय दुर्ग गर्व से मस्तक उठाए खड़ा था। यवन समझ गए कि दुर्ग गर्व से मस्तक उठाए खड़ा था। यवन समझ गए कि दुर्ग विजय करना हँसी-ठट्टा नहीं है। दुर्ग रक्षिणी, राज नंदिनी रत्नावती निर्भय अपने दुर्ग में सुरक्षित बैठी शत्रुओं के दाँत खट्टे कर रही थी। उसके साथ में पुराने विश्वस्त राजपूत वीर थे, जो मृत्यु और जीवन का खेल समझते थे।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘जैसलमेर की राजकुमारी’ नामक पाठ से लिया गया है। इस अंश में लेखक ने जैसलमेर के दुर्ग की दृढ़ता और राजकुमारी रत्नावती की वीरता का परिचय कराया है।

व्याख्या:
अलाउद्दीन की सेना ने जैसलमेर के दुर्ग को चारों ओर से ऐसे घेर रखा था मानो टिडिड्यों ने किसी खेत को घेर लिया हो। किले में बाहर से कोई वस्तु अंदर नहीं जा सकती थी। नित्य ही शत्रुओं की गोलियाँ बरसती र्थी लेकिन जैसलमेर के सदा विजयी रहने वाले किले का कुछ नहीं बिगड़ रहा था। वह तो गर्व से सिर उठाए शत्रुओं की हँसी उड़ाता-सा लगता था। दुर्ग की रक्षा का भार राजकुमारी रत्नावती पर था। वह अपने दुर्ग में निडरता से सुरक्षित बैठी थी और अपनी कुशल चालों से शत्रुओं को नीचा दिखा रही थी। उसके साथ भाड़े पर लड़ने वाले.यवन-सिपाही नहीं थे बल्कि वे पुराने और परखे हुए राजपूत वीर थे जिनके लिए जीना और मरना एक खेल की तरह था।

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प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
जैसलमेर का अजेय दुर्ग।

प्रश्न 2.
यवनों की समझ में क्या बात आ गई?
उत्तर:
उनकी समझ में आ गया कि जैसलमेर के दुर्ग पर अधिकार कर पाना कोई आसान काम नहीं था।

प्रश्न 3.
शत्रु-सेना के घेरे के कारण क्या कठिनाई हो रही थी?
उत्तर:
शत्रु-सेना के घेरे के कारण बाहर से रसद आनी बंद थी और यवन सेना रोज गोलियों और तीरों की वर्षा करती रहती थी।

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प्रश्न 4.
यवन सेना और रत्नावती की सेना में क्या अंतर था?
उत्तर:
यवन सेना संख्या में अधिक थी और साधनों से युक्त थी लेकिन राजकुमारी की सेना छोटी होते हुए भी ऐसे वीरों की सेना थी जो मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण हथेली पर रखकर लड़ रहे थे।

3. मलिक काफूर एक गुलाम था जो यवन सेना का अधिपति था। वह दृढ़ता और शांति से राजकुमारी की चोटें सह रहा था। उसने सोचा था कि जब किले में खाद्य पदार्थ कम हो जाएँगे, दुर्ग वश में आ जाएगा। फिर भी वह समय-समय पर दुर्ग पर आक्रमण कर देता था परंतु दुर्ग की चट्टानों और भारी दीवारों को कोई क्षति नहीं पहुँचती थी। राजकुमारी बहुधा बुर्ज पर से कहती-“ये धूर्त, गर्द उड़ाकर तथा गोली बरसाकर मेरे किले को गंदा और मैला कर रहे हैं। इससे क्या लाभ होगा?

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक से आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा लिखित कहानी ‘जैसलमेर की राजकुमारी’ से लिया गया है। इसमें अलाउद्दीन के सेना नायक मलिक काफूर की दुर्ग पर अधिकार करने की असफल कोशिशों का वर्णन किया गया है।

व्याख्या:
जैसलमेर पर आक्रमण करने आई अलाउद्दीन की सेना का सेनापति मलिक काफूर था। उसके दुर्ग पर किए गए हर आक्रमण को राजकुमारी रत्ना विफल कर देती थी। काफूर राजकुमारी के इन प्रहारों को चुपचाप सह रहा था। उसे विश्वास था कि जब किले में भोजन सामग्री कम होने लगेगी तो राजकुमारी हथियार डाल देगी और दुर्ग पर उसका अधिकार हो जाएगा।

फिर भी वह सैनिकों का उत्साह बनाए रखने के लिए बीच-बीच में दुर्ग पर हमला कराता रहता था। इससे उस विशाल और अत्यन्त दृढ़ दुर्ग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता था। राजकुमारी शत्रुओं को चिढ़ाने के लिए कहा करती थी कि ये मूर्ख लोग अपनी गोलियों और धूल से उसके किले को गंदा करने के अलावा और कुछ नहीं कर पाते हैं। इस मूर्खता से इनको कोई लाभ नहीं होगा?

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प्रश्नोत्तर प्रश्न
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
यवनों का निष्फल आक्रमण।

प्रश्न 2.
यवन सेना का अधिपति कौन था?
उत्तर:
यवन सेना का अधिपति मलिक काफूर था।

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प्रश्न 3.
मलिक काफूर राजकुमारी की चोटें क्यों सह रहा था?
उत्तर:
मलिक काफूर राजकुमारी की चोटें इसलिए सह रहा था क्योंकि उसने सोचा था कि जब किले में खाद्य पदार्थ कम हो जाएँगे तो दुर्ग वश में आ जाएगा।

प्रश्न 4.
मलिक काफूर के आक्रमण से दुर्ग पर कोई क्षति क्यों नहीं पहुँचती थी?
उत्तर:
मलिक काफूर के दुर्ग पर आक्रमण से कोई क्षति इसलिए नहीं पहुँचती थी क्योंकि दुर्ग की दीवारें पत्थरोंचट्टानों से बनी मजबूत और भारी थीं।

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