RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम (जीवनी)

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

RBSE Class 8 Hindi संत कँवरराम पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पपाठ से

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
पाठ के अनुसार भारत विश्वगुरु किस कारण बना?
उत्तर:
पाठ के अनुसार भारतभूमि को संत और संतत्व की ईश्वर प्रदत्त अनूठी देन थी जिसके कारण भारत विश्वगुरु बना।

प्रश्न 2.
संत कँवरराम का जन्म कब हआ?
उत्तर:
संत कॅवरराम का जन्म 13 अप्रैल, 1885 को सिंध प्रांत के सक्खर जिले में जरवारन गाँव में हुआ था।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 3.
संत कँवरराम की अंतिम सात रातों को किस नाम से पुकारा जाता है?
उत्तर:
संत कँवरराम की अंतिम सात रातों को ‘सात रातों’ के नाम से पुकारा जाता है।

लिखें

RBSE Class 8 Hindi संत कँवरराम  बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
संत कँवरराम का जन्म हुआ था –
(क) कराची में
(ख) क्वेटा में
(ग) जरवारन में
(घ) शिकारपुर में।
उत्तर:
(ग) जरवारन में

प्रश्न 2.
अखंड भारत का प्रांत था –
(क) सक्खर
(ख) जरवारन
(ग) काबुल
(घ) सिंध।
उत्तर:
(घ) सिंध।

प्रश्न 3.
संत कॅवरराम अपना गुजारा करते थे –
(क) भिक्षा से
(ख) भजन करने से
(ग) चने बेचकर
(घ) परिश्रम करके।
उत्तर:
(ग) चने बेचकर

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

RBSE Class 8 Hindi संत कँवरराम अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संत कवरराम के माता-पिता का क्या नाम था?
उत्तर:
संत कँवरराम की माता का नाम तीरथबाई और पिता का नाम ताराचंद था।

प्रश्न 2.
संत कँवरराम ने गायन विदया किससे सीखी?
उत्तर:
संत कँवरराम ने गायन विद्या संगीतज्ञ गुरु हासाराम से सीखी।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

RBSE Class 8 Hindi संत कँवरराम लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संत कँवरराम ने अपना जीवन किन लोगों को समर्पित किया?
उत्तर:
संत कवरराम ने गरीबों, अनाथों और मोहतानों (लाचारों) के कल्याण के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया। दान में मिले धन और सामग्री को वह गरीब विधवाओं तथा योग्य निर्धन लोगों को बाँट देते थे। इस धन में से वह अपने काम के लिए एक पैसा भी नहीं लेते थे। अपना गुजारा उबले चने, मूंग, चावल बेचकर करते थे।

प्रश्न 2.
संत कँवरराम को दोनों आगंतुक क्यों नहीं पहचान पाए?
उत्तर:
संत कँवरराम को दोनों आगंतुक इसलिए नहीं पहचान पाए क्योंकि संत कँवरराम सत्संगियों के साथ गारे की तगारी उठाकर सेवा में लगे थे। आगंतुकों ने कभी यह कल्पना नहीं की थी कि कोई संत तगारी उठाकर काम कर सकता है।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 3.
सद्गुरु सतरामदास के स्वर्गवास पश्चात् भी संत कँवरराम क्या करते रहे?
उत्तर:
सद्गुरु सतरामदास के स्वर्गवास होने के पश्चात् भी संत कँवरराम अकेले ही समाजोत्थान के साथ सत्संग में लगे रहे। अपाहिजों और विधवाओं की सेवा, अनाथ, बेसहारा लड़कियों का विवाह कराना, विद्यालय, अस्पताल, धर्मशालाएँ बनवाना। इन सभी कामों की प्रेरणा वह अपने शिष्यों को देते रहे।

RBSE Class 8 Hindi संत कँवरराम दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.

अपनी भाषा में सरलार्थ कीजिए 
की रीझाया कीअ परिचायां
या थिपा हिन्दु पायां पेश जायो
या पिया मोमिन पढ़ा बुत खानो।
उत्तर:
सरलार्थ – इन पंक्तियों के माध्यम से संत कवरराम ईश्वर का भजन करते थे। इनके द्वारा वे कहते हैं- हे
ईश्वर ! मैं तुझे कैसे रिझाऊँ, तुम्हें किस प्रकार से प्रसन्न करूँ, तुम्हें किस तरह से मनाऊँ। क्या हिंदू बनकर जामा वस्त्र पहनूं अथवा (मुसलमान) बनकर कुरान शरीफ पहूँ। हे ईश्वर! मैं तुम्हें किस प्रकार से मना लूँ, किस तरह तुम्हें प्रसन्न कर लूँ। इसका कोई उपाय मुझे बता दो, जिससे मेरा मन तुम्हारे चरणों में लगा रहे।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 2.
संत कँवरराम स्वावलंबी व्यक्ति थे, उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संत कँवरराम स्वावलंबी व्यक्ति थे क्योंकि वे अपनी झोली में आई धन सामग्री गरीब विधवाओं व विशेष योग्यजनों में बाँटते और जनहित में खर्च करते थे। अपने जीवन का गुजारा करने के लिए वे प्रतिदिन उबले चने, मूंग, चावल आदि बेचते थे। इससे जो पैसे उन्हें मिलते थे, उसी से वे अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। रहड़की में दरबार की सेवा का जब काम चल रहा था तब भी वे सत्संगियों के साथ गारे की तगारी उठाकर काम में लगे रहते थे। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि संत कँवरराम स्वावलंबी व्यक्ति थे।

प्रश्न 3.
संत कँवरराम ने समाजोत्थान के कौन-कौन से कार्य किए? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संत कँवरराम ने अपने जीवन में अर्जित ज्ञान, तपस्या और साधनामय शरीर को समाज और उसके जरूरतमंद हिस्सों को समर्पित कर दिया। दान आदि के द्वारा जो धन सामग्री उन्हें मिलती थी उसे वे गरीब विधवाओं और जनहित में ही खर्च करते थे। गरीबों, अपाहिजों और विधवाओं की सेवा में उन्होंने अपना जीवन बिता दिया। अनाथ और बेसहारा बालिकाओं की शादी के लिए उन्होंने सार्थक प्रयास किए। उनकी इसी परोपकार भावना से प्रेरित होकर हजारों की संख्या में लोगों ने विद्यालय, अस्पताल और धर्मशालाएँ बनवाई तथा अनाथ बालक-बालिकाओं को सहारा देने के लिए लोग समाजोत्थान के कार्य में लग गए।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

भाषा की बात

प्रश्न 1.
“मोहताजों के कल्याण के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया” वाक्य में ‘मोहताजों’ उर्दू भाषा का शब्द आया है, जिसका अर्थ होता है ‘लाचारों।’ आप भी पाठ के आधार पर उर्दू शब्दों की सूची बनाकर अर्थ लिखिए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 2.
पाठ में योगी-वैरागियों’ शब्द आए हैं, योजक चिहन का लोप होने पर योगी और वैरागी बनता है यह वंद्व समास का उदाहरण है। पाठ में आएवंद्व समास के अन्य उदाहरणों को छाँटकर विग्रह कीजिए।
उत्तर:
पाठ में आए द्वंद्व समास के अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं –

संत – महात्माओं – संत और महात्माओं
ऋषि – मुनियों – ऋषि और मुनियों
कर्म – धर्म –
कर्म और धर्म
व्यक्तित्व – कृतित्व – व्यक्तित्व और कृतित्व
भरण – पोषण –
भरण और पोषण
साधु – संतों –
साधु और संतों
प्रेम – भक्ति
– प्रेम और भक्ति

प्रश्न 3.
पाठ में समाजोत्थान शब्द आया है, जिसका संधि विच्छेद समाज + उत्थान होता है। यह गुण संधि स्वर संधि का एक भेद है। स्वर संधि के प्रकारों को उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
पाठ में आए स्वर संधि के प्रकार उदाहरण सहित निम्नलिखित हैं –
परमात्मा – परम + आत्मा – दीर्घ स्वर संधि
एकैक – एक + एक – वृद्धि स्वर संधि
उपर्युक्त – उपरि + उक्त – यण स्वर संधि
पवन – पो + अन – अयादि स्वर संधि

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
संत कँवरराम के जीवन से हमें क्या प्रेरणा मिलती है? लिखिए।
उत्तर:
संत कँवरराम के जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें अपने जीवन का गुजारा करने के लिए मेहनत करनी चाहिए और बचे हुए समय को मानवता के कल्याण के लिए अर्पित कर देना चाहिए। मानवता के कल्याण के लिए संत कँवरराम की तरह हम निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं –

  1. गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना।
  2. समाज के लोगों को अपने ज्ञान से शिक्षित और जागरूक करना।
  3. अनाथ और बेसहारा लोगों की कुछ आर्थिक मदद करना।
  4. विद्यालय, अस्पताल एवं धर्मशालाएँ आदि बनवाना।
  5. अनाथ और बेसहारा बालिकाओं की शादी आदि में किसी भी प्रकार का सहयोग करना।

प्रश्न 2.
संत कँवरराम का जीवन स्वावलंबन से ओत-प्रोत था। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ भी हमें स्वावलंबन का संदेश देता है। आपने भी समाज में स्वावलंबन से पूर्ण कार्यों को होते देखा है। ऐसे कार्यों को सूचीबद्ध कर लिखिए।
उत्तर:
समाज में स्वावलंबन से पूर्ण कार्यों की सूची निम्नलिखित है –

  1. वृक्षारोपण अभियान
  2. पोलियो उन्मूलन अभियान
  3. राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS)
  4. जन जागरूकता रैली
  5. नुक्कड़-नाटक
  6. राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC)
  7. स्वयं सहायता समूहों का निर्माण

RBSE Class 8 Hindi संत कँवरराम अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 8 Hindi संत कँवरराम बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संत कवरराम अपनी झोली में आई धन-सामग्री किसमें बाँटते थे –
(क) गरीब विधवाओं में
(ख) धनी व्यक्तियों में
(ग) बंदरों में
(घ) राह चलते लोगों में
उत्तर:
(क) गरीब विधवाओं में

प्रश्न 2.
संत कँवरराम की पहली पत्नी का नाम था –
(क) जोधा बाई
(ख) सहजो पाई
(ग) काकनिबाई
(घ) लक्ष्मी बाई।
उत्तर:
(ग) काकनिबाई

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 3.
काकनिबाई की मृत्यु हुई –
(क) टाइफाइड बुखार से
(ख) निमोनिया से
(ग) मलेरिया से
(घ) स्नोफीलिया से।
उत्तर:
(ख) निमोनिया से

प्रश्न 4.
मृत बालक को लौरी देते हुए संत कँवरराम लीन हो गए –
(क) बाँसुरी बजाने में
(ख) नाच-गाने में।
(ग) भोजन-भंडारे में
(घ) ईश्वर आराधना में।
उत्तर:
(घ) ईश्वर आराधना में।

प्रश्न 5.
संत कँवरराम की दूसरी पत्नी का नाम था –
(क) सुशीला बाई
(ख) गंगा बाई
(ग) जीजा बाई
(घ) शांति बाई।
उत्तर:
(ख) गंगा बाई

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. वे सादगी,, सेवा, परोपकार व विनम्रता की ………. बन (प्रतिमूर्ति / पत्थर मूर्ति)
  2. ………… की व्यवस्था काकनिबाई ही संभालती थी। (धर्म-कर्म / भोजन-भंडारे)
  3. कँवर इस मिट्टी के ………. का ही नाम है। (पतले / पुतले)
  4. माता ऐसी ……… नहीं लिया करें। (परीक्षा / आकांक्षा)

उत्तर:

  1. प्रतिमूर्ति
  2. भोजन-भंडारे
  3. पुतले
  4. परीक्षा।

RBSE Class 8 Hindi संत कँवरराम अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
गारे की तगारी उठाए संत कँवरराम कहाँ सेवा में लगे थे?
उत्तर:
गारे की तगारी उठाए संत कँवरराम रहड़की में दरबार की सेवा में लगे थे।

प्रश्न 2.
संत कँवरराम कौन-सा राग गाने लगे जिससे आसमान के बादल साफ हो गए?
उत्तर:
संत कँवरराम सोरठ राग गाने लगे जिससे आसमान के बादल साफ हो गए।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 3.
कहाँ पर सोरठ राग सुनाते हुए वर्षा बंद हो गई थी?
उत्तर:
सिंध के कुंभलेमन ग्राम में सोरठ राग सुनाते हुए वर्षा बंद हो गई थी।

प्रश्न 4.
सारंग राग सुनाने का कहाँ और किसने अनुरोध किया?
उत्तर:
जेकवाबाद शहर में संत के भजन करते समय एक श्रद्धालु ने सारंग राग सुनाने का अनुरोध किया।

प्रश्न 5.
शोक में कौन-सा राग गाया जाता है?
उत्तर:
शोक में मारू राग गाया जाता है।

RBSE Class 8 Hindi संत कँवरराम लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
श्रद्धालु ने जब सारंग राग गाने का आग्रह नहीं छोड़ा तब संत ने क्या किया?
उत्तर:
श्रद्धालु ने जब सारंग राग गाने का आग्रह नहीं छोड़ा तब संत ने गाना प्रारंभ किया। चारों ओर से उमड़-घुमड़ कर बादल आने लगे और मूसलाधार वर्षा होने लगी। लोगों ने प्रार्थना की तो संत ने गाना बंद कर दिया

प्रश्न 2.
एक जमींदार ने संत की शक्ति परखने के लिए क्या कहा?
उत्तर:
एक जमींदार ने संत की शक्ति परखने के लिए भजन के समय हो रही वर्षा को बंद करने के लिए कहा। तब संत ने सोरठ राग गाया और देखते ही देखते बादल बिखरने लगे तथा आसमान साफ हो गया।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 3.
“भला कोई संत तगारी कैसे उठा सकता है?” आगंतुकों के इस कथन पर संत कँवरराम ने क्या
उत्तर:
आगंतुकों के इस कथन पर संत कँवरराम ने उत्तर दिया-“दरबार की सेवा ही परमात्मा की सेवा है, जो बगैर तगारी उठाए कैसे पूरी हो सकती है।”

प्रश्न 4.
संत कँवरराम का नाम बड़े आदर और श्रद्धा के साथ क्यों लिया जाता है?
उत्तर:
संत कँवरराम की सादगी.सरलता.सहजता, विनम्रता और संत प्रकृति के कारण उनका नाम बड़े आदर और श्रद्धा के साथ लिया जाता है।

प्रश्न 5.
संत कँवरराम की मृत्यु कैसे हुई?
उत्तर:
संत कँवरराम 1 नवंबर, 1939 को अपनी टोली के साथ सक्खर जाने के लिए एक स्टेशन से गाड़ी में बैठे थे। जैसे ही इंजन ने सीटी बजाई कातिलों ने संत पर गोलियाँ चला दीं। एक गोली उनके माथे पर लगी और वे हरे राम हरे राम कहते हुए अनंत में विलीन हो गए।

RBSE Class 8 Hindi संत कँवरराम दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संत कँवरराम चमत्कारी व्यक्ति थे, उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
संत कँवरराम के चमत्कारों से सिंध का संपूर्ण समाज प्रभावित था। इस संबंध में उनसे जुड़ी घटनाएँ अग्रलिखित –

1. एक बार संत कँवरराम सुबह शिकारपुर शहर के शाहीबाग में भजन कर रहे थे। अचानक एक महिला ने अपने मृत बालक को रेशमी कपड़े में लपेटकर संत को देते हुए विनती की कि साईं कृपा कर इस बालक को लौरी दीजिए। संत को लौरी देते समय यह एहसास हुआ कि बालक जीवित नहीं है, तब वे

2. ईश्वर के ध्यान में लीन हो गए। कुछ ही देर बाद बालक रोने लगा।

3. कुंभले मन ग्राम में भजन सुनाते समय जब वर्षा होने लगी तब उन्होंने राग सोरठ गाकर वर्षा बंद कर दी थी।

4. जेकवाबाद शहर में भजन करते समय एक श्रद्धालु ने जब सारंग राग सुनाने की जिद की तो उन्होंने इस राग को गाकर वर्षा करवा दी थी। इस प्रकार हम देखते हैं कि संत कँवरराम एक चमत्कारी व्यक्ति थे।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 2.
संत कँवरराम की समाज सेवा में उनकी दोनों पलियों ने किस प्रकार योगदान किया?
उत्तर:
संत कँवरराम के जीवन-आदर्शों से प्रभावित होकर काकनिबाई भी समाज सेवा में संलग्न हो गईं। भोजन-भंडारे की व्यवस्था काकनिबाई ही सँभालती थी। छब्बीस वर्षों तक उन्होंने निरंतर इस कार्य में अपने स्वामी का साथ दिया। किन्तु निमोनिया हो जाने के कारण वे परलोक चली गईं। भंडारे की व्यवस्था बिगड़ने के कारण लोगों के आग्रह पर उन्होंने दूसरा विवाह गंगा बाई के साथ किया। गंगा बाई भी काकनि बाई की तरह साधु-संतों की सेवा श्रद्धा के साथ करती थीं। इस प्रकार उनकी दोनों पत्नियों ने संत की समाज सेवा में भरपूर सहयोग दिया।

पाठ-परिचय:

भारतवर्ष में अनेक ऋषि-मुनियों, महात्माओं और संतों ने जन्म लिया है। जिन्होंने समाज को संस्कारित करने और सभी के कल्याण के लिए जीवनभर प्रयास किये। ऐसे ही एक संत कँवरराम थे; जिन्होंने अपने ज्ञान, तपस्या और शरीर से जरूरतमंद लोगों का कल्याण किया। संत कँवरराम का जन्म 13 अप्रैल, 1885 को सिंध प्रांत के सक्खर जिले में जरवारन गाँव में हुआ था। इनकी माता का नाम तीरथबाई और पिता का नाम ताराचंद था। संत कँवरराम बचपन से ही साधु स्वभाव के थे।

उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, अपाहिजों व विधवाओं की सेवा में लगा दिया। उनकी प्रेरणा और प्रयास से समाज में आज बहुत से सामाजिक उत्थान के कार्य हो रहे हैं। उनकी मधुर वाणी में भजन सुनकर लोग भक्ति में डूब जाते थे। 1 नवम्बर, 1939 को वे अपने साथियों के साथ रेल से सक्खर जा रहे थे तभी कातिलों ने उन पर गोलियां चला दी। एक गोली उनके माथे पर लगी और हरे राम-हरे राम कहते हुए उनके प्राण-पखेरू उड़ गए।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

कठिन-शब्दार्थ:
सनातन काल = सदा से चला आता समय। सृष्टि = जगत। अद्वितीय = बेजोड़, अकेला। अनुसरण = पीछे चलना। संस्कारित = सुधरा हुआ। यापन = बिताना। अभूतपूर्व = जैसा पहले न हुआ हो। कृतित्व = कार्य। सान्निध्य = समीपता। संतत्व = संत जैसा भाव। प्रतिमूर्ति = समान, उदाहरण। मोहताज = गरीब, अभावग्रस्त । तगारी = परात या तसला। संत प्रकृति = संतों जैसा स्वभाव। चौपट = नष्ट। श्रद्धालु = श्रद्धा रखने वाला।

मूसलाधार = बहुत जोर की। अपाहिज = असमर्थ, लूले-लँगड़े आदि। समाजोत्थान = समाज की उन्नति। जाफरानी = केसरिया रंग। आभास = संकेत, अनुमान। कातिल = हत्यारा। विलीन होना = खो जाना, मिट जाना। सुमर = स्मरण कर। कीअ = कैसे। रीझाया = प्रसन्न करूँ। नाले = नाम के। अलख = ईश्वर। जामा = वस्त्र। परिचायां = मनाऊँ। मोमिन = मुसलमान। बुत खानो = मंदिर। मुहिंजो = पार लगाना। बेड़ो = नाव।

गदयांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ तथा अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. सनातन काल से भारतवर्ष के संत-महात्माओं, ऋषि-मुनियों, योगी-वैरागियों ने अपने कर्म-धर्म व साधना से सृष्टि का न केवल शृंगार किया अपितु मानवता के कल्याण के अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किए। भारतभूमि और उस पर स्थापित हमारे समाज ने उनका अनुसरण करते हुए सभ्य, संस्कारित व सर्व हितकारी जीवनयापन करने के अवसर प्राप्त किए हैं। भारतभूमि को संत और संतत्व की ईश्वर प्रदत्त अनूठी देन है जिसके रहते ही भारत विश्वगुरु के रूप में स्थापित हो सका।।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी के संत कँवरराम’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक गोपीचंद सिंधी हैं। इसमें लेखक ने संत-महात्माओं के द्वारा किए जाने वाले उपकारों के प्रभाव का वर्णन किया

व्याख्या:
लेखक कहता है कि प्राचीन काल से ही भारत में संत-महात्माओं, ऋषि-मुनियों और योगी-वैरागी लोगों ने अपने अच्छे कर्म और धर्म के दवारा तथा कठोर साधना से इस संसार को न केवल सुंदर बनाया है बल्कि मानव समूह की भलाई के लिए अनोखे उदाहरण भी प्रस्तुत किए हैं। भारत के लोगों ने इन संतों के आदर्श जीवन पर चलकर, इनसे प्रेरणा लेकर सभ्य, सुसंस्कृत एवं सबके लिए मंगलकारी जीवन व्यतीत करने का मौका प्राप्त किया है। संत और संतों के पवित्र आचरण के रूप में ईश्वर ने भारतभूमि को यह अनोखा उपहार दिया है, जिससे भारत को दुनिया में विश्वगुरु के रूप में पहचान मिली है।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
संतों की भूमि : भारतवर्ष

प्रश्न 2.
भारतभूमि को ईश्वरप्रदत्त अनूठी देन क्या
उत्तर:
भारतभूमि को ईश्वरप्रदत्त अनूठी देन संत और संतत्व

प्रश्न 3.
भारत विश्वगुरु के रूप में किसने स्थापित किया?
उत्तर:
भारत के समाज को यहाँ के ऋषि-मुनियों और संत-महात्माओं ने अपने आचरण, त्याग और तपस्या से विश्व गुरु के रूप में स्थापित किया।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 4.
सनातन काल से भारतवर्ष की क्या विशेषता रही है ?
उत्तर:
सनातन काल से संत-महात्माओं, ऋषि-मुनियों एवं योगियों ने अपने धर्म-कर्म एवं साधना से संसार को सुंदर बनाने और मानवता के कल्याण के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है।

2. संत के चमत्कारों से सिंध का संपूर्ण समाज उनसे अधिक प्रभावित होता गया। संत कँवरराम का व्यक्तित्व और कृतित्व जीवन में प्रेरणास्पद रहा है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गरीबों, अपाहिजों व विधवाओं की सेवा में लगा दिया। अनाथ और बेसहारा बालिकाओं की शादी करवाने के लिए जीवन पर्यंत सार्थक प्रयास किए। संत कँवरराम के उन्हीं भागीरथी प्रयासों का परिणाम है कि आज भी उनकी प्रेरणा से बड़ी संख्या में विद्यालय, अस्पताल, धर्मशालाएँ, विधवा विवाह और अनाथ बालक-बालिकाओं को संबलन देने के धर्मार्थ कार्य में हजारों लोग जुड़कर समाजोत्थान का कार्य कर रहे हैं।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘संत कँवरराम’ पाठ से ली गई हैं। इसके लेखक ‘गोपीचंद सिंधी’ हैं। इसमें संत कँवरराम के सामाजिक योगदान की प्रशंसा की गई है।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

व्याख्या:
लेखक कहता है कि संत कँवरराम कभी-कभी ऐसे चमत्कारपूर्ण कार्य करते थे जिससे सिंध का सारा समाज प्रभावित हो जाता था। उनका व्यक्तित्व और कार्य-दोनों लोगों के लिए प्रेरणादायक थे क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, विकलांगों (दिव्यांगों) और विधवाओं की स्थिति को सुधारने और उनकी सेवा में बिता दिया था।

उन्होंने ऐसी लड़कियों की शादी करवाने के लिए जीवनभर प्रयास किया जिनके माँ-बाप नहीं थे और जिनका कोई सहारा नहीं था। उनके इन्हीं प्रयासों के कारण आज बहुत अधिक संख्या में लोग विद्यालय, अस्पताल, धर्मशालाएँ आदि बनवा रहे हैं और विधवा-विवाह तथा अनाथ बालक-बालिकाओं को सहारा देने का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकार के धर्म के कामों में आज हजारों की संख्या में लोग जुड़ रहे हैं। जिससे समाज का उत्थान हो रहा है।

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
संत कॅवराम की समाज सेवा।

प्रश्न 2.
संत कँवरराम का व्यक्तित्व एवं कृतित्व कैसा था?
उत्तर:
संत कँवरराम का व्यक्तित्व एवं कृतित्व प्रेरणास्पद था।

प्रश्न 3.
संत कँवरराम के भागीरथी प्रयासों का परिणाम क्या हुआ?
उत्तर:
संत कँवरराम के भागीरथी प्रयासों से हजारों लोग धर्म के इस काम से जुड़ गए हैं।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 4.
संत कँवरराम ने जीवनपर्यंत कौन-सा सार्थक प्रयास किया?
उत्तर:
अनाथ और बेसहारा बालिकाओं की शादी करवाने के लिए संत कँवरराम ने जीवनपर्यंत सार्थक प्रयास किया।

3. संत कँवरराम के सतगुरु सतरामदास के स्वर्ग लगे रहते। अपनी मधुर वाणी व भजनों से जन-जन में प्रेम-भक्ति का संदेश देते। उनके संगीतमय भजनों के माधुर्य के साथ-साथ पीड़ितों का दर्द भी बया होता था। उनकी आवाज़ पर हजारों लोग मोहित हो जाते थे। पैरों में धुंघरुओं की पायल, कानों में कुंडल, सर पर लाल जाफ़रानी रंग की पगड़ी, तन पर श्वेत जामा और कमर पर बाँधनी बाँधकर संगीत की मस्ती में झूमने की छटा देखते ही बनती थी।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘संत कँवरराम’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक गोपीचंद सिंधी हैं। इसमें संत कँवरराम के गीत-संगीत के प्रेम और सामाजिक उत्धान की भावना का परिचय प्रस्तुत किया गया है।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

व्याख्या:
लेखक कहता है कि जब संत कँवरराम के गुरु सतरामदास की मृत्यु हो गई तो वे अकेले ही सामाजिक कार्यों में लगे रहते और सत्संग-भजन करते थे। उनकी मीठी वाणी और भजनों से लोग प्रेरित होकर भक्ति में लीन हो जाते थे। उनके भजनों में संगीत की मिठास तो होती ही थी, इसके साथ-साथ पीड़ित लोगों का दर्द भी उनसे प्रकट होता था।

उनकी आवाज ऐसी थी कि लोग उनकी ओर खिंचे चले आते थे। जब वे पैरों में घुघरू बाँधकर, कानों में कुंडल धारण कर, सिर पर केसरिया रंग की पगड़ी, सफेद रंग का कुर्ता और कमर में करधनी बाँधकर संगीत और भजन में भाव-विभोर होकर मस्ती में झूमने लगते तो बहुत ही सुंदर दृश्य होता था। देखने वाले भी उन्हीं के साथ मस्ती में झूम उठते थे।

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
संत कँवरराम का अलौकिक व्यक्तित्व।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 संत कँवरराम

प्रश्न 2.
संत कँवरराम अपने भजनों से क्या संदेश देते थे?
उत्तर:
संत कँवरराम अपने भजनों से जन-जन को प्रेम और भक्ति का संदेश देते थे।

प्रश्न 3.
संत कँवरराम की कौन-सी वेशभूषा देखते ही बनती थी?
उत्तर:
संत कँवरराम जब पैरों में घुघरुओं की पायल, कानों में कुंडल, सर पर जाफ़रानी रंग की पगड़ी, तन पर श्वेत जामा और कमर पर करधनी बाँधकर संगीत की मस्ती में झूमने लगते तब उनकी छटा देखते ही बनती थी।

Leave a Comment