RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 5 महाराणा प्रताप

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi Chapter 5 महाराणा प्रताप (कविता)

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

RBSE Class 8 Hindi महाराणा प्रताप पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पपाठ से

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
“धरती जागी, आकाश जगा, वह जागा, तो मेवाड़ जगा।” उक्त पंक्तियों का अर्थ बताइए।
उत्तर:
महाराणा प्रताप के मातृभूमि की रक्षा हेतु जागने (सचेत होने) पर धरती, आकाश और मेवाड़ की जनता भी जाग उठी अर्थात् ये सभी उनके इस अभियान में साथ देने को तैयार हो गए।

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प्रश्न 2.
प्रताप को मातृभूमि का रखवाला बताया गया है, क्यों?
उत्तर:
प्रताप को मातृभूमि का रखवाला इसलिए बताया गया है क्योंकि उन्होंने मुगल शासक अकबर की विशाल सेना को पराजित करके अपनी मातृभूमि मेवाड़ की रक्षा की थी।

लिखें

RBSE Class 8 Hindi महाराणा प्रताप बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रताप के स्वाभिमान को बताया है
(क) अपार सिंधु-सा
(ख) अटल हिमालय-सा
(ग) वन की आग-सा
(घ) चंद्र की किरणों-सा।
उत्तर:
(ख) अटल हिमालय-सा

प्रश्न 2.
महाराणा प्रताप के पक्ष में था –
(क) सत्य
(ख) असत्य
(ग) प्रलोभन
(घ) समझौता।
उत्तर:
(क) सत्य

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RBSE Class 8 Hindi महाराणा प्रताप लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
“आँधी तूफाँ में रुका नहीं” पंक्ति में आँधी तूफान किसके प्रतीक हैं?
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्ति में आँधी तूफान कठिनाई और संकट के प्रतीक हैं, जो मुगलों के आक्रमण के कारण आ रहे थे। अर्थात् मुगलों के आक्रमण का प्रतीक हैं।

प्रश्न 2.
सेना के अभाव में भी प्रताप को सेनानायक क्यों कहा गया है?
उत्तर:
सेना के अभाव में भी प्रताप के अंदर सेनानायक के सभी गुण विद्यमान थे। वे एक कुशल सेनानायक की तरह अपने बचे हुए सैनिकों के साथ मुगल सेना से संघर्ष कर रहे

प्रश्न 3.
प्रताप को कवि ने किन-किन उपमाओं से उपमित किया है?
उत्तर:
प्रताप को कवि ने सूर्य और हिमालय की उपमाओं से उपमित किया है।

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RBSE Class 8 Hindi महाराणा प्रताप दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
इस कविता में कवि ने प्रताप के चरित्र की किन-किन विशेषताओं का चित्रण किया है?
उत्तर:
इस कविता में कवि ने प्रताप के चरित्र की निम्न विशेषताएँ बताई हैंमातृभूमि का सच्चा सेवक और ईमानदार महाराणा प्रताप ने जीवन भर मातृभूमि की सेवा ईमानदारीपूर्वक की थी। अकबर के किसी भी प्रलोभन को उन्होंने स्वीकार नहीं किया। मेवाड़ की रक्षा के लिए उन्होंने युद्ध करना भी स्वीकार कर लिया, जबकि उनके समय के अन्य राजाओं ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी। अत्यंत साहसी-महाराणा प्रताप ने मुगल सैनिकों को हल्दीघाटी के युद्ध में मुँहतोड़ जवाब दिया। मुगलों से युद्ध में उन्होंने वीरतापूर्वक लड़ाई लड़ी और उनको हराकर मांडलगढ़ व चित्तौड़ को छोड़कर संपूर्ण मेवाड़ पर अपना अधिकार कर लिया।

अपनी बातों पर अडिग रहने वाला-अकबर ने महाराणा प्रताप को अपनी अधीनता स्वीकार करने के लिए अपने विश्वासपात्र लोगों को भेजा लेकिन उन्होंने सभी की बातें अस्वीकार कर र्दी। सुख-सुविधाओं का त्यागी – मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने महलों की सुख-सुविधाओं का त्याग कर दिया। वे जंगल-जंगल घूमते रहे तथा अनेक कष्टों को सहकर भी उन्होंने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की।

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प्रश्न 2.
निम्न पंक्तियों की व्याख्या कीजिए –
(क) वह इतिहासों का अमर पृष्ठ
मेवाड़ शौर्य का वह अंगार।
उत्तर:
इस कविता में कवि ने प्रताप के चरित्र की निम्न विशेषताएँ बताई हैंमातृभूमि का सच्चा सेवक और ईमानदार—महाराणा प्रताप ने जीवन भर मातृभूमि की सेवा ईमानदारीपूर्वक की थी। अकबर के किसी भी प्रलोभन को उन्होंने स्वीकार नहीं किया। मेवाड़ की रक्षा के लिए उन्होंने युद्ध करना भी स्वीकार कर लिया, जबकि उनके समय के अन्य राजाओं ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी। अत्यंत साहसी-महाराणा प्रताप ने मुगल सैनिकों को हल्दीघाटी के युद्ध में मुँहतोड़ जवाब दिया।

मुगलों से युद्ध में उन्होंने वीरतापूर्वक लड़ाई लड़ी और उनको हराकर मांडलगढ़ व चित्तौड़ को छोड़कर संपूर्ण मेवाड़ पर अपना अधिकार कर लिया। अपनी बातों पर अडिग रहने वाला-अकबर ने महाराणा प्रताप को अपनी अधीनता स्वीकार करने के लिए अपने विश्वासपात्र लोगों को भेजा लेकिन उन्होंने सभी की बातें अस्वीकार कर र्दी। सुख-सुविधाओं का त्यागी–मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने महलों की सुख-सुविधाओं का त्याग कर दिया। वे जंगल-जंगल घूमते रहे तथा अनेक कष्टों को सहकर भी उन्होंने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की।

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प्रश्न 2.
निम्न पंक्तियों की व्याख्या कीजिए –
(क) वह इतिहासों का अमर पृष्ठ मेवाड़ शौर्य का वह अंगार।
व्याख्या:
महाराणा प्रताप ने अपने घोड़े चेतक पर चढ़कर हल्दीघाटी के मैदान में मुगलों की सेना से जिस प्रकार वीरतापूर्वक युद्ध किया वह इतिहास के पन्नों में अमर हो गया है। उन्होंने मेवाड़ की वीरता की परंपरा को अपनी वीरता की ज्वाला से फिर प्रकाशित कर दिया था।

(ख) सब विपक्ष में था उसके बस, सत्य पक्ष में था उसके।
व्याख्या:
महाराणा प्रताप का जीवन जिन कठिनाइयों में बीता था उसको देखकर कवि को लगता है कि प्रताप के जीवन में कुछ भी उनके अनकल न था, सब उनके विरोध में खड़े थे। सभी राजपूत राजाओं ने मुगलों की अधीनता स्वीकार कर ली थी, लेकिन प्रताप अपनी मातृभूमि की रक्षा किसी भी कीमत पर करना चाहते थे. इसलिए उन्होंने सत्य का रास्ता अपनाकर वीरतापूर्वक मेवाड़ की रक्षा के लिए युद्ध किया और सभी युद्धों में विजय प्राप्त की।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
नीचे एक शब्द का वर्ण विश्लेषण दिया गया है, इसे समझकर दिए गए शब्दों का वर्ण विश्लेषण कीजिए –
मातृभूमि – म् + आ – त् + ऋ + भ् + ऊ + म् + इ

प्रलोभन, शौर्य, महाधृती
उत्तर:
शब्दों का वर्ण विश्लेषण निम्नलिखित है –

प्रलोभन:
प् + र् + अ + ल् + ओ + भ् + अ + न् + अ

शौर्य:
श् + औ + र् + य् + अ

महाधृती:
म् + अ + ह् + आ + ध् + ऋ + त् + ई

प्रश्न 2.
निम्न शब्दों में से शुद्ध शब्द का चयन कर लिखिए –
(क) सत्यकति, सतकति, सत्यकृति
(ख) विधायक, विदायक, विधायिक
(ग) सौर्य, शौर्य, शोर्य
उत्तर:
शुद्ध शब्द निम्नलिखित हैं –
(क) सत्यकृति
(ख) विधायक
(ग) शौर्य।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्द समूहों के लिए एक शब्द लिखिए –
(क) जिसे टाला न जा सके
(ख) जो शांत न हो।
(ग) कभी न मरता हो
उत्तर:
शब्द समूह के लिए एक शब्द निम्नलिखित हैं –
(क) अटल
(ख) अशांत
(ग) अमर

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों को शब्दकोश क्रम में लिखिएमातृभूमि, प्रलोभन, शौर्य, राष्ट्र, उन्नायक, काँटा, स्वाभिमान, हिम्मतवाला, गंभीर।
उत्तर:
शब्दों का शब्दकोश क्रम निम्नलिखित है –
उन्नायक, काँटा, गंभीर, प्रलोभन, मातृभूमि, राष्ट्र, शौर्य, स्वाभिमान, हिम्मतवाला।

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
यदि महाराणा प्रताप अकबर की अधीनता स्वीकार कर लेते, तो क्या होता?
उत्तर:
यदि महाराणा प्रताप अकबर की अधीनता स्वीकार कर लेते, तो उनके स्वाभिमान की रक्षा न हो पाती। भारत के अन्य राजपूत राजाओं की तरह उनका मेवाड़ गुलाम हो जाता। मेवाड़ की जनता को मगलों के शासन में रहना पड़ता। मेवाड की नारियाँ अपने सम्मान की रक्षा न कर पाती। प्रताप ने हिंदू राजाओं के सामने यह आदर्श प्रस्तुत किया कि मुगलों की अधीनता स्वीकार करना कायरता है। यह उदाहरण भी वह प्रस्तुत न कर पाते।

प्रश्न 2.
महाराणा प्रताप ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। मातृभूमि के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाले प्रताप की जीवनी का अध्ययन कीजिए।
उत्तर:
महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 ई. को कुंभलगढ़ में हुआ था। 32 वर्ष की आयु में राणाप्रताप का राज्यारोहण हुआ। अपने साम्राज्य विस्तार के प्रयासों में अकबर ने मेवाड़ को भी जीतना चाहा। अकबर ने अपने कई विश्वासपात्रों को प्रताप के पास अपनी अधीनता स्वीकार करने के लिए भेजा कितु सभी प्रयास असफल हुए। परिणामत: 18 जून 1576 ई. को हल्दीघाटी के मैदान में भयंकर युद्ध हुआ जिसमें मुगल सेना पराजित हुई। 1583 ई. में हए दिवेर के युद्ध में भी प्रताप ने मुगलों को हराया। 19 जनवरी, 1597 ई. को 57 वर्ष की आयु में चावंड में स्वाधीनता के इस महान पुजारी ने अंतिम साँस ली।

प्रश्न 3.
प्रताप से संबंधित अन्य कविताओं एवं गीतों का संकलन कर बाल सभा में सुनाइए।
उत्तर:
प्रताप से संबंधित अन्य कविताएँ निम्नलिखित हैं –

(1) रण बीच चौकड़ी भर-भरकर,
चेतक बन गया निराला था।
राणाप्रताप के घोड़े से,
पड़ गया हवा का पाला था।।

(2) चढ़ चेतक पर तलवार उठा,
करता था भूतल पानी को।
राणा प्रताप सिर काट-काट,
करता था सफल जवानी को।

यह भी पढ़ें

प्रश्न 1.

शेष नाग सिर सहस्र पै, धर धारी खुद आप।
इक भाला की नोक पै, थें ढाबी परताप।

(हे प्रताप! ईश्वर के अवतार शेषनाग ने अपने सहस्र फणों पर पृथ्वी को थाम रखा है, किंतु आपने तो भाले की एक नोक पर (मातृभूमि की रक्षा करते हुए) उसे थामे रखा है।)

प्रश्न 2.

सिर दे दै नहँ दै धरा, यो भड़पण अणमाप।
नहँ सिर दै, नहँ दै धरा, सो बाजै परताप।।

(राजस्थान के वीरों की परंपरा रही है कि वे सिर दे देते हैं; किंतु धरती पर दूसरों का अधिकार नहीं होने देते हैं। यह उनके अद्भुत शौर्य का उदाहरण है किंतु जो न तो सिर देता है और न ही धरती देता है, वह प्रताप कहलाता है।)

RBSE Class 8 Hindi महाराणा प्रताप अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 8 Hindi महाराणा प्रताप बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राणाप्रताप का घोड़ा किस रंग का था?
(क) लाल
(ख) सफेद
(ग) नीला
(घ) काला।
उत्तर:
(ग) नीला

प्रश्न 2.
मुगलों से राणा प्रताप का युद्ध कहाँ हुआ था?
(क) कुरुक्षेत्र
(ख) पानीपत
(ग) तराइन
(घ) हल्दीघाटी।
उत्तर:
(घ) हल्दीघाटी।

प्रश्न 3.
राणाप्रताप ने किससे नाता तोड़ लिया था?
(क) महलों से
(ख) मातृभूमि से
(ग) बच्चों से
(घ) संसार से।
उत्तर:
(क) महलों से

प्रश्न 4.
जंगल-जंगल में मातृभूमि की रक्षा के लिए कौन घूम रहा था?
(क) महाराणा प्रताप
(ख) अकबर
(ग) राजा मानसिंह
(घ) सेना।
उत्तर:
(क) महाराणा प्रताप

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. वह सबका भाग्य ……….. था। (विधायक / उन्नायक)
  2. जितनी विपदाएँ ………… हुईं। (मुखर / प्रखर)
  3. सब विपक्ष में था उसके, बस सत्य……….में था उसके। (दक्ष / पक्ष)
  4. सेना थी उसके पास नहीं, फिर भी वह………..था। (सेनानायक / खलनायक)

उत्तर:

  1. विधायक
  2. प्रखर
  3. पक्ष
  4. सेनानायक।

सुमेलित कीजिएखण्ड ‘अ’ एवं खण्ड ‘ब’ में दी गई पंक्तियों का मिलान कीजिए –
खण्ड ‘अ’                                      खण्ड ‘ब’
(क) वह मातृभूमि का रखवाला – ऐसा प्रताप हिम्मत वाला
(ख) स्वतंत्रता की वेदी पर – कष्टों से कब डिगने वाला
(ग) स्वाभिमान का अटल – जिसने सब-कुछ था दे हिमाला डाला
(घ) जो सोच लिया कर दिखलाया – आन बान पर मिटने वाला
उत्तर:
(क) आन-बान पर मिटने वाला।
(ख) जिसने सब कुछ था दे डाला।
(ग) कष्टों से कब डिगने वाला।
(घ) ऐसा प्रताप हिम्मत वाला।

RBSE Class 8 Hindi महाराणा प्रताप अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
राणाप्रताप आजादी के कैसे सूरज थे?
उत्तर:
राणाप्रताप आजादी के ऐसे सूरज थे जिसका उजाला कभी खत्म नहीं हुआ।

प्रश्न 2.
मेवाड़ का वह कौन-सा व्यक्ति था जिसका नाम इतिहास में अमर हो गया?
उत्तर:
राणाप्रताप मेवाड़ के ऐसे व्यक्ति थे जिनका नाम इतिहास में अमर हो गया।

प्रश्न 3.
“था पवन रह गया ठगा-ठगा।” पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-प्रताप की गति हवा से भी अधिक थी। अर्थात्

प्रश्न 4.
किसके लिए पत्थर-पत्थर सिंहासन बन गया था?
उत्तर:
राणाप्रताप के लिए पत्थर-पत्थर सिंहासन बन गया था।

प्रश्न 5.
“महलों से नाता तोड़ लिया थी सारी वसुधा राजभवन” पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव- महलों से नाता तोड़कर राणा प्रताप ने सारी वसुधा (मातृभूमि) को राजभवन (आवास) बनाया। –

RBSE Class 8 Hindi महाराणा प्रताप लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘ऐसा प्रताप हिम्मत वाला’ प्रताप की हिम्मत के बारे में कवि ने क्या-क्या बातें बताई हैं ?
उत्तर:
प्रताप ने मुगलों से मातृभूमि की रक्षा की। वह अपनी आन-बान पर मिट जाने को तैयार रहे। स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उन्होंने अपना सब कुछ दाँव पर लगा दिया। अपने स्वाभिमान को कभी झुकने नहीं दिया। कष्टों के सामने कभी हिम्मत नहीं हारी। जो मन में ठान लिया उसे करके दिखाया।

प्रश्न 2.
“आजादी का ऐसा सूरज, उजियारा जिसका चुका नहीं।” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आशय-महाराणा प्रताप ने मातृभूमि के मान-सम्मान के लिए अपने अंदर स्वतंत्रता की जो ज्योति जगाई थी, वह सूर्य के प्रकाश के समान तेज और कभी न बुझने वाली चमक थी अर्थात् मातृभूमि की आजादी की जो भावना महाराणा प्रताप के अंदर थी वह आँधी-तूफान जैसी मुश्किलों को झेल कर भी बनी रही।

प्रश्न 3.
सब कुछ विपक्ष में होते हुए भी राणाप्रताप ने क्या किया ?
उत्तर:
सब कुछ विपक्ष में होते हुए भी राणाप्रताप ने सत्य का पक्ष कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने मुगलों की अधीनता कभी स्वीकार नहीं की। अपनी मातृभूमि की आन-बान के लिए उन्होंने कभी भी कोई समझौता नहीं किया।

प्रश्न 4.
राणाप्रताप के किन गुणों को कवि ने मुख्य रूप से कविता में वर्णित किया है?
उत्तर:
राणाप्रताप सत्य के रास्ते पर चलने वाले, सत्य को करके दिखाने वाले, तेज के भंडार, महान धैर्यवान, शक्ति के भंडार, धरती के गौरव, मातृभूमि की रक्षा के महान व्रत को धारण करने वाले महामानव थे। ये सभी गुण महाराणा प्रताप के अंदर थे, जिनका वर्णन कवि ने कविता में किया है।

RBSE Class 8 Hindi महाराणा प्रताप दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पठित कविता के आधार पर बताइए कि महाराणा प्रताप का जीवन कैसा था?
उत्तर:
मातृभूमि की रक्षा का कठोर व्रत लेने के कारण महाराणा प्रताप ने अपने संपूर्ण सुखों का बलिदान स्वतंत्रता की वेदी पर कर दिया था। वे अपने मजबूत इरादों से कभी भी विचलित नहीं हुए। इसीलिए उन्होंने अकबर की अधीनता स्वीकार करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, जिसका परिणाम उन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध के रूप में देखा था जिसमें वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए उन्होंने मुगल सैनिकों के छक्के छुड़ा दिए थे।

मातृभूमि की रक्षा और अपनी प्रजा तथा नारियों के सम्मान के लिए ही उन्होंने महलों के सुख को त्यागकर जंगल-जंगल घूमते हुए अनेक विपत्तियाँ सही थीं, लेकिन अपने जीते जी उन्होंने मेवाड़ पर मुगलों का अधिकार नहीं होने दिया। उनके मन में मातृभूमि की स्वतंत्रता की ऐसी धुन सवार थी कि न तो कभी उन्होंने सत्य का पक्ष छोड़ा और न कभी समझौते के बारे में सोचा। इस प्रकार हम देखते हैं कि अत्यंत कठिन जीवन जीते हुए भी, महाराणा प्रताप का जीवन बहुत ही सार्थक और प्रशंसनीय था।

पाठ-परिचय

महाराणा प्रताप का नाम श्रेष्ठ योद्धा के रूप में आज भी जाना जाता है। अकबर की अधीनता न स्वीकार करके राणा प्रताप ने हल्दीघाटी के युद्ध में अपनी वीरता और मातृभूमि से प्रेम को प्रकट किया था। मातृभूमि पर अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले वीरों की जय-जयकार आज भी कवियों की कलम करती आ रही है।

मातृभूमि की रक्षा के लिए राणा प्रताप ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। महाराणा प्रताप ने सर्वस्व त्यागकर अंतिम समय तक मातृभूमि के लिए मर मिटने का जो आदर्श प्रस्तुत किया उसने उन्हें इतिहास के पन्नों में अमर बना दिया। उनके धैर्य, उनकी शक्ति, उनके तेज और सत्य के प्रताप की गाथा इस कविता में प्रस्तुत की गई है।

पदयांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ

1. वह मातृभूमि का रखवाला
आन-बान पर मिटने वाला,
स्वतंत्रता की वेदी पर जिसने सब कुछ था दे डाला।
स्वाभिमान का अटल हिमाला

कष्टों से कब डिगने वाला,
जो सोच लिया कर दिखलाया
ऐसा प्रताप हिम्मत वाला।

कठिन शब्दार्थ:
आन-बान = गौरव की भावना। वेदी = धार्मिक कार्य हेतु बनाया गया स्थल। स्वाभिमान = आत्मसम्मान। अटल = कभी न टलने वाला। हिमाला = , हिमालय। डिगना = विचलित होना।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी के ‘महाराणा प्रताप’ पाठ से लिया गया है। इसमें राणा प्रताप के मातृभूमि के लिए बलिदान होने की भावना को व्यक्त किया गया है।

व्याख्या / भावार्थ:
इन पंक्तियों में कवि कहता है कि महाराणा प्रताप मातृभूमि के गौरव की रक्षा के लिए मर मिटने वालों वीरों में से एक थे। उन्होंने स्वतंत्रता और आत्मसम्मान के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया था। हिमालय की। तरह कभी भी विचलित न होने वाला उनका गर्व था। कष्टों के सामने वे कभी घुटने नहीं टेकते थे। उन्होंने जो सोच लिया उसे करके दिखा देते थे। ऐसे वीर और साहसी थे महाराणा प्रताप।

2. थे कई प्रलोभन, झुका नहीं,
आँधी तूफां में रुका नहीं,
आजादी का ऐसा सूरज
उजियारा जिसका चुका नहीं।

वह नीले घोड़े का सवार
वह हल्दीघाटी का जुझार,
वह इतिहासों का अमर पृष्ठ
मेवाड़ शौर्य का वह अंगार।

कठिन शब्दार्थ:
प्रलोभन = लालच। तूफां = तूफान। उजियारा = उजाला, प्रकाश। चुका = समाप्त। सवार = सवारी करने वाला। जुझार = लड़ने वाला वीर, योद्धा । अमर = सदा जीवित रहने वाला। शौर्य = वीरता, पराक्रम। अंगार = दहकता हुआ कोयला, जिसमें आग हो।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी के ‘महाराणा प्रताप’ शीर्षक से ली गई हैं। इसमें कवि ने यह बताया है कि अकबर ने राणाप्रताप को उसकी अधीनता स्वीकार करने के लिए कई बार अपने विश्वासपात्रों को भेजा और तरह-तरह के प्रलोभन दिए, लेकिन राणा प्रताप ने यह स्वीकार नहीं किया, बल्कि हल्दीघाटी के मैदान में युद्ध की चुनौती दे दी।

व्याख्या / भावार्थ:
कवि कहता है कि मुगल सम्राट अकबर ने महाराणा प्रताप के सामने अपनी अधीनता स्वीकार करने के लिए बहुत लालच दिए लेकिन वे इन सबके सामने कभी झुके नहीं। उनके अंदर आजादी की वह रोशनी थी जो सूर्य के समान चमकती थी, उनके अंदर की वह चमक कभी कम नहीं हुई अर्थात् उनके मन में मातृभूमि को सदैव स्वतंत्र रखने की जो भावना थी वह किसी भी प्रकार के आँधी-तूफान जैसे मुगलों के आक्रमण से विचलित नहीं महाराणा प्रताप ने नीले घोड़े पर सवार होकर हल्दीघाटी के मैदान में अकबर से जो वीरतापूर्वक युद्ध किया था उसकी कहानी इतिहास के पन्नों में अमर हो गई है। महाराणा प्रताप मेवाड़ की वीरता के जलते हुए वैसे अंगारे के समान थे, जिसे अकबर जैसा शक्तिशाली राजा भी बुझा नहीं सका।

3. धरती जागी, आकाश जगा
वह जागा तो मेवाड़ जगा,
वह गरजा, गरजी दसों दिशा
था पवन रह गया ठगा-ठगा।

हर मन पर उसका था शासन
पत्थर-पत्थर था सिंहासन,
महलों से नाता तोड़ लिया
थी सारी वसधा राजभवन।

कठिन शब्दार्थ:
पवन = वायु, हवा। ठगा-ठगा = चकित रह गया। नाता = संबंध। वसुधा = पृथ्वी, धरती। राजभवन = राजा का महल। गरजना = घोर ध्वनि वाली आवाज।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के ‘महाराणा प्रताप’ शीर्षक से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने महाराणा प्रताप के स्वदेशाभिमान का वर्णन किया है।

व्याख्या / भावार्थ:
महाराणा प्रताप ने अपनी मातृभूमि के लिए जो त्याग किया था, उसी से प्रभावित होकर धरती, आकाश, दसों दिशाएँ और संपूर्ण मेवाड़ की जनता ने उनके कार्यों में सहयोग देना प्रारंभ कर दिया। महाराणा प्रताप यदि रात-रात भर जागते तो धरती, आकाश भी जागते रहते, उनके साथ-साथ मेवाड़ की जनता भी सचेत रहती।

उनकी गंभीर गर्जना सुनकर ऐसा लगता मानो दशों दिशाएँ गरज रही हों। उसकी वीरता और तीव्र गति से पवन (हवा) भी आश्चर्यचकित रह जाता था। राणा प्रताप का केवल मेवाड़ की धरती पर ही शासन नहीं था। चित्तौड़ की जनता के मन में भी उनके लिए असीम सम्मान था । मातृभूमि का प्रत्येक पत्थर उनके लिए सिंहासन के समान था। राणा प्रताप ने महलों की सुख-सुविधाएँ त्याग कर वन का कठिन जीवन अपनाया था। मातृभूमि के स्वतंत्र होने तक उन्होंने भूमि पर सोने का व्रत लिया था। उन्होंने मेवाड़ की सारी भूमि को ही राजभवन मान लिया था।

4. वह जन-जन का उन्नायक था
वह सबका भाग्य विधायक था,
सेना थी उसके पास नहीं
फिर भी वह सेनानायक था।

जंगल-जंगल में वह घूमा
काँटों को बढ़-बढ़कर चूमा,
जितनी विपदाएँ प्रखर हुईं
उतना ही ज्यादा वह झूमा।

कठिन शब्दार्थ:
उन्नायक = ऊपर उठाने वाला। विधायक = विधान करने वाला, निर्माता। सेनानायक = सेना का नेतृत्व करने वाला। विपदाएँ = समस्याएँ, परेशानियाँ। प्रखर = तेज। झूमा = आनंदित हुआ।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी के ‘महाराणा प्रताप’ शीर्षक से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने महाराणा प्रताप की वीरता, सहनशीलता तथा नेतृत्व क्षमता का गुणगान किया है।

व्याख्या / भावार्थ:
महाराणा प्रताप ने प्रत्येक व्यक्ति को ऊपर उठाने का कार्य किया। वे सबके भाग्य को बनाने वाले थे। उनके पास अकबर की तरह सैकड़ों हाथी, घोड़े और पैदल लोगों की सेना नहीं थी लेकिन वे एक अच्छे सेनानायक थे। उन्होंने अपनी छोटी-सी सेना का नेतृत्व इस प्रकार किया कि अकबर की विशालकाय सेना परास्त हो गई।

वह कष्टों और कठिनाइयों को सहन करते हुए घूमते रहे। जंगल-जंगल घूमते रहे और मार्ग में आने वाले सभी काँटेरूपी संकटों को हर्षपूर्वक स्वीकार करते रहे। जैसे-जैसे परेशानियाँ तेज होती गईं वैसे-वैसे वह आनंदित होते गए। जितनी मुश्किलें बढ़ती गईं उतना ही वह उत्साहित होकर उनका सामना करते गए।

5. सब विपक्ष में था उसके
बस, सत्य पक्ष में था उसके,
समझौता उसने नहीं
किया जाने क्या मन में था उसके।

वह सत्यपथी, वह सत्यकृती,
वह तेजपुंज, वह महाधृती,
वह शौर्यपुंज, भू की थाती
वह महामानव, वह महाव्रती।

कठिन शब्दार्थ:
विपक्ष = विरोध में। पक्ष = अपनी तरफ। समझौता = आपस में किसी बात को स्वीकार कर लेना। सत्यपथी = सत्य का अनुकरण करने वाला राही। सत्यकृति = वास्तविक रूप में करने वाला। तेजपुंज = बहुत तेजस्वी, प्रतापी। महाधृती = महान् धैर्यवान। शौर्यपुंज = वीरता से पूर्ण। भू – पृथ्वी। थाती = धरोहर, अमानत। महामानव = महान मानव। महाव्रती = महान व्रत का पालन करने वाला।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी’ के ‘महाराणा प्रताप’ शीर्षक से ली गई हैं। इसमें कवि ने महाराणा प्रताप के संघर्षमय जीवन और सत्य के प्रेमी स्वरूप की प्रशंसा की है।

व्याख्या / भावार्थ:
उस समय परिस्थितियाँ राणा प्रताप के पक्ष में नहीं थीं। अकबर जैसे शक्तिशाली शत्रु से लोहा लेना था। सेना का फिर से संगठन करना था। धन की कमी थी। हर बात उनके विरुद्ध थी लेकिन वह सत्य पर डटे हुए थे। वह स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए लड़ रहे थे। सत्य ही उनका एकमात्र बल था। सत्य के बल पर उन्होंने अकबर की शर्तों पर समझौता नहीं किया। उन्होंने मन में स्वतंत्र और सम्मानपूर्ण जीवन के लिए लड़ते रहने का निश्चय कर रखा था।

राणा प्रताप ने कभी सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। वह बड़े धैर्य के साथ सारे संकटों को झेलते रहे। सत्य पर डटे रहने के प्रण को कभी नहीं त्यागा। वह बड़े तेजस्वी पुरुष थे। मेवाड़ ही नहीं वह सारे भारत की भूमि के अमूल्य धरोहर के समान थे। यही कारण है कि उन्हें आज भी एक महापुरुष और प्रतिज्ञापालक के रूप में आदर के साथ स्मरण किया जाता है।

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