RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 2 सुभागी

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi Chapter 2 सुभागी (कहानी)

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

RBSE Class 8 Hindi सुभागी  पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पपाठ से

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
तुलसी महतो के कितने बच्चे थे?
उत्तर:
तुलसी महतो के दो बच्चे थे-सभागी और राम।

प्रश्न 2.
तुलसी महतो अपनी बेटी सुभागी से बहुत प्यार करते थे, क्यों?
उत्तर:
तुलसी महतो अपनी बेटी सुभागी से बहुत प्यार करते थे क्योंकि छोटी उम्र में ही वह घर के काम में चतुर और खेती-बाड़ी के काम में निपुण थी और उसका बड़ा भाई रामू कामचोर और आवारा था।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 2 सुभागी

प्रश्न 3.
तुलसी महतो ने गाँव वालों को क्यों इकट्ठा किया था?
उत्तर:
तुलसी महतो ने गाँव वालों को इसलिए इकट्ठा किया था क्योंकि वे रामू से परेशान थे और उसे अलग करना चाहते थे।

प्रश्न 4.
सजनसिंहने सुभागी को अपनी पुत्रवधू के रूप में क्यों चुना?
उत्तर:
सजन सिंह ने सुभागी को अपनी पुत्रवधू के रूप में इसलिए चुना क्योंकि वे उसके परिश्रम और व्यवहार से बहुत प्रभावित थे।

लिखें

RBSE Class 8 Hindi सुभागी बहुविकल्पी

प्रश्न 1.
सुभागी ने सम्भाल रखा था –
(क) व्यापार का सारा काम
(ख) घर का सारा काम
(ग) समाज का सारा काम
(घ) गाँव का सारा काम।
उत्तर:
(ख) घर का सारा काम

प्रश्न 2.
“बहादुर वह है, जो अपने बल पर काम करे” यह कहा –
(क) तुलसी ने
(ख) रामू ने
(ग) सजनसिंह ने
(घ) सुभागी ने
उत्तर:
(ख) रामू ने

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प्रश्न 3.
गाँव के मुखिया सजनसिंह थे –
(क) कठोर
(ख) सज्जन
(ग) धनवान
(घ) अक्खड़।
उत्तर:
(ख) सज्जन

निम्नलिखित वाक्यों को अपनी कॉपी में लिखकर सही वाक्य पर (✓) और गलत वाक्य पर (x) का निशान लगाइए –

  1. रामू ने घर का सारा काम – काज संभाल रखा था।
  2. रामू ने कहा -“जब एक साथ गुज़र न हो, तो अलग हो जाना ही अच्छा है।”
  3. तुलसी ने कहा “बेटी, हम तुम्हें न छोड़ेंगे। चाहे संसार छूट जाए।”
  4. लक्ष्मी ने कहा “अगले जन्म में भी तुम मेरी कोख से ही जन्म लो।”
  5. “दादा इतना सम्मान पाकर मैं पागल हो जाऊँगी।” सुभागी ने कहा।

उत्तर:

  1. गलत
  2. सही
  3. सही
  4. सही
  5. सही।

RBSE Class 8 Hindi सुभागी अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सुभागी ने घर का क्या-क्या काम संभाल रखा था ?
उत्तर:
सुभागी ने घर का सारा काम संभाल रखा था। वह पहर रात में उठकर कूटने-पीसने लग जाती, चौका-बर्तन करती, गोबर थापती, खेत में काम करने चली जाती। दोपहर में आकर जल्दी-जल्दी खाना पकाकर सबको खिलाती थी।

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प्रश्न 2.
“लड़के से लड़की भली, जो कुलवंती होय” यह किसने और क्यों कहा?
उत्तर:
“लड़के से लड़की भली, जो कुलवंती होय” यह कथन तुलसी महतो ने कहा क्योंकि पंचों के बीच में रामू ने ढिठाई से जवाब दिया और चलता बना।

RBSE Class 8 Hindi सुभागी लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
रत्न कितना कठोर निकला और यह दंड कितना मंगलमय।” तुलसी ने ऐसा क्यों सोचा?
उत्तर:
तुलसी ने ऐसा इसलिए सोचा क्योंकि जब रामू का जन्म हुआ था तो उसने बड़ी खुशी के साथ कर्ज लेकर उत्सव मनाया था और पुत्री सुभागी के पैदा होने पर उसने एक पैसा भी खर्च नहीं किया था। लेकिन जब रामू सुभागी से लड़कर बाप से अलग होने को कहता है तब महतो की सोच बदल जाती है। वह कहता है, मैं जिसे रत्न समझता था वह पत्थर जैसा कठोर निकला और जिसे दंड समझता था वह हमारे लिए वरदान है।

प्रश्न 2.
तुलसी महतो ने अंतिम समय सजनसिंह से क्या बात कही ?
उत्तर:
तुलसी महतो ने अंतिम समय में सजनसिंह से कहा”भैया ! अब तो चलने की बेला है। सुभागी के पिता अब तुम्ही हो। उसे तुम्हीं को सौंपे जाता हूँ और कुछ नहीं कहूँगा भैया सदा भगवान् तुम्हें सुखी रखे।” सजन सिंह ने रामू को बुलाकर लाने को कहा तो महतो ने कहा – “नहीं भैया, उस पापी का मुँह मैं नहीं देखना चाहता।”

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प्रश्न 3.
लक्ष्मी ने अंतिम समय सुभागी को क्या आशीर्वाद दिया?
उत्तर:
लक्ष्मी ने अपनी पुत्री सुभागी की सेवा-सुश्रूषा से प्रसन्न होकर अंतिम समय में उसे आशीर्वाद दिया, “तुम्हारे जैसी बेटी पाकर मैं तर गई। मेरा क्रिया-कर्म तुम्हीं करना। मेरी भगवान से यही प्रार्थना है कि अगले जन्म में भी तुम मेरी कोख से ही जन्म लो।”

RBSE Class 8 Hindi सुभागी दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सुभागी के जीवन का कठोर व्रत क्या था और उसने उसे कैसे पूरा किया ?
उत्तर:
सुभागी के जीवन का कठोर व्रत था जब तक वह कमाकर सजनसिंह के रुपये नहीं चुकता कर देती तब तक अन्य किसी कार्य के बारे में नहीं सोचेगी। तीन साल तक सुभागी ने रात को रात और दिन को दिन नहीं समझा। वह – दिनभर खेती-बाड़ी का काम करने के बाद रात को आटा पीसती। तीसवें दिन तीन सौ रुपये लेकर वह सजनसिंह के पास पहुँच जाती। इसमें वह कभी नागा नहीं करती थी। अपने दिन-रात के परिश्रम से जब उसने सजनसिंह को आखिरी किस्त चुकाई तो उसकी खुशी का ठिकाना न था, क्योंकि तीन साल की साधना के बाद उसके जीवन का कठोर व्रत पूरा हो गया था।

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प्रश्न 2.
कहानी ‘सुभागी’ का सार अपनी भाषा में लिखिए।
उत्तर:
‘सुभागी’ प्रेमचंद की बहुत प्रसिद्ध कहानी है। ‘सुभागी’ तुलसी महतो की पुत्री है। उसका और उसके भाई का विवाह हो गया था, किंतु सुभागी छोटी उम्र में ही विधवा हो गयी। उसने दसरा विवाह नहीं किया। वह अपने घर का सारा काम-काज करती और माँ-बाप की खब सेवा भी करती थी। राम उसके इस व्यवहार से जलता था। एक दिन वह झगड़ा करके माँ-बाप से अलग हो गया। कुछ दिन बाद तुलसी महतो मर जाते हैं और उनके वियोग में उनकी पत्नी भी मर जाती है।

बाबा की तेरहवीं में सुभागी गाँव के मुखिया सजनसिंह से लिए गए उधार रुपए को अकेले ही परिश्रम करके चुकाती है। सजनसिंह अंत में सुभागी से प्रार्थना करके उसे अपने घर की बहू बनने को कहते हैं क्योंकि वे सुभागी के परिश्रम एवं व्यवहार से बहुत प्रभावित थे और उनका पुत्र सुभागी को बहुत प्रेम करता था। इस बात को सुभागी ने प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
उसकी कार्य शक्ति और हिम्मत देख लोग दाँतों तले उँगली दबाते थे। रेखांकित वाक्यांश एक मुहावरा है, जिसका अर्थ आश्चर्य करना है। आप भी निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए –

  1. लाल-पीला होना।
  2. नौ-दो ग्यारह होना।
  3. दुःख की सीमा नरहना।
  4. अपने मुँह मियाँ मिठूहोना।

उत्तर:

  1. लाल-पीला होना-गुस्से में होना – आप तो बिना वजह मुझ पर लाल-पीला हो रहे हैं।
  2. नौ-दो ग्यारह होना – भाग जाना -पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गए।
  3. दुःख की सीमा न रहना – असहनीय कष्ट–बेटी के विधवा हो जाने पर माँ के दुःख की सीमा न रही।
  4. अपने मुँह मियाँ मिठूहोना – अपनी प्रशंसा स्वयं करनातुम कोई काम तो करते नहीं, बस अपने मुँह मियाँ मिठू बनते रहते हो।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उचित विराम चिहनों का प्रयोग कीजिए –
तुलसी देख लिया आप लोगों ने इसका मिज़ाज भगवान ने बेटी को दुख दे दिया नहीं तो मुझे खेती बाड़ी लेकर क्या करना था जहाँ रहता वहीं कमाता खाता भगवान ऐसा बेटा बैरी को भी न दे लड़के से लड़की भली जो कुलवंती होय
उत्तर:
तुलसी “देख लिया आप लोगों ने इसका मिजाज? भगवान ने बेटी को दुःख दे दिया, नहीं तो मुझे खेती-बाड़ी लेकर क्या करना था ? जहाँ रहता वहीं कमाता-खाता। भगवान ऐसा बेटा बैरी को भी न दे। लड़के से लड़की भली, जो कुलवंती होय।”

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पाठ से आगे

प्रश्न 1.
तुलसी महतो और लक्ष्मी अगर सुभागी को घर से अलग कर देते तो क्या होता?
उत्तर:
तुलसी महतो और लक्ष्मी अगर सुभागी को घर से अलग कर देते तो वह असहाय हो जाती। भाई तो उससे जलन रखता ही था। माँ-बाप का सहारा न होने पर वह टूट जाती। उसका जीवन विधवा होने से तो दु:खी था ही और माँ-बाप के सहयोग न देने से लोगों की निगाहें उस पर गलत ढंग से भी पड़ती जिससे उसका जीवन बर्बाद हो सकता था। माँ-बाप पर भी अपने कर्तव्य का पालन न करने का आरोप लगता। समाज के लोग यही कहते कि माँ-बाप ने भी अपनी संतान को अनाथ की तरह छोड़ दिया। उनका यह कृत्य समाज में सदैव घृणा की दष्टि से देखा जाता।

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प्रश्न 2.
अगर सुभागी अपने माता-पिता की सेवा न करती तो उसके माता-पिता का जीवन कैसा होता?
उत्तर:
अगर सभागी अपने माता-पिता की सेवा न करती तो उसके माता-पिता का जीवन कष्टमय हो जाता क्योंकि उनका पुत्र रामू कामचोर और आवारा था। तुलसी महतो जब सात-आठ दिन बीमार थे तो सुभागी ही उनकी सेवा करती थी और उनके परलोक सिधार जाने पर उसी ने उनके तेरहवीं का कार्यक्रम सजनसिंह की सहायता से किया। माँ की बीमारी में भी वह तन-मन से उनकी सेवा करती रही। यदि वह न होती तो माता-पिता दोनों का क्रिया-कर्म कोई न करता क्योंकि रामू तो साफ मना कर देता है यह सब करने से।

चर्चा करें

प्रश्न 1.
परिश्रम सफलता की कुंजी है, कैसे ? आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
परिश्रम ही हर सफलता का द्वार खोलता है। यदि हम परिश्रमी हैं तो हमारी प्रगति निश्चित है। बिना परिश्रम के थाली की रोटी भी मुँह में नहीं जाती। जो लोग आलसी होते हैं वे न तो किसी परीक्षा में कभी सफल होते हैं और न जीवन में कोई महत्वपूर्ण कार्य ही कर पाते हैं। सोते हुए शेर के मुख में शिकार अपने आप नहीं जाता। आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। इसलिए हमें लगातार मेहनत करते हुए संसार की प्रत्येक वस्तु प्राप्त करने की इच्छा रखनी चाहिए। तुलसीदास ने कहा है सभी पदार्थ इस संसार में हैं लेकिन कर्म न करने वाले मनुष्य उसे कभी नहीं पाते हैं। विद्यार्थी इस उदाहरण के आधार पर चर्चा करें।

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प्रश्न 2.
मृत्युभोज सामाजिक कुरीति है। हमारे समाज में ऐसी अनेक कुरीतियाँ हैं। उनकी सूची बनाकर एक-एक कुरीति पर एक-एक विद्यार्थी कक्षा में अपने विचार प्रकट करें।
उत्तर:
हमारे समाज की कुछ कुरीतियाँ निम्न हैं –

  1. दहेज-प्रथा – दहेज प्रथा वर्तमान समाज का कोढ़ बन गई है। इसके कारण माता – पिता अपनी पुत्री को भार मानते हैं। पुत्र तो खुशियों का खजाना कहलाता है लेकिन पुत्रियों के संबंध में लोग इसी चिंता से परेशान रहते हैं कि उसके लिए दहेज का प्रबंध कैसे किया जाए ?
  2. बाल-विवाह-बाल – विवाह एक ऐसी सामाजिक बुराई है जिससे लड़के और लड़की दोनों का जीवन नरक बन जाता है। बाल्यावस्था में विवाह हो जाने से दोनों की शिक्षा पूरी नहीं हो पाती। कम उम्र में स्वस्थ बच्चा भी पैदा नहीं होता। छोटी उम्र में माँ बनने पर अनेक महिलाओं की मृत्यु भी हो जाती है।
  3. बालश्रम भी एक कुरीति है। जो बच्चों के विकास में बाधक है।
  4. कन्या शिक्षा का विरोध आज भी बहुत से क्षेत्रों में होता है। यह भी एक कुरीति है।
  5. पशुबलि अंधविश्वास को बढ़ावा देती है जो समाज के विकास में बाधक है।

प्रश्न 3.
हमारे समाज में अनेक अच्छी प्रथाएँ हैं, जैसे संयुक्त परिवार प्रथा आदि। ऐसी अच्छी प्रथाओं पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
हमारे समाज की कुछ अच्छी प्रथाएँ निम्नलिखित –

  1. सामूहिक विवाह इस प्रथा में कई लड़के – लड़कियों का एक साथ विवाह करवाया जाता है जिससे समय एवं बहुत अधिक आर्थिक बचत होती है।
  2. पंचायत द्वारा घरेलू विवाद का निदान होने से व्यर्थ में कोर्ट कचहरी का चक्कर नहीं लगाना पड़ता।
  3. तालाबों का निर्माण – इससे भूमिगत जल का स्तर बढ़ता है। जल प्रदूषण कम होता है। जानवरों को पीने के लिए पानी सरलता से मिल जाता है।
  4. वृक्षों को अधिक से अधिक लगाना – इससे पर्यावरण शुद्ध होता है। फल, फूल और लकड़ी प्राप्त होती है।
  5. धर्मशालाओं का निर्माण होने से जनता को आवागमन के दौरान ठहरने में बहुत सुविधा रहती है।

यह भी करें

सजन सिंह व सुभागी के संवाद को आधार बनाकर बाल-सभा में मंचन कीजिए।
उत्तर:
सजन सिंह व सुभागी के निम्नलिखित संवाद को आधार बनाकर बाल-सभा में मंचन (नाटक) किया जा सकता है –
सजन सिंह:
बेटी मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ क्या तुम उसे मानोगी?
सुभागी:
(विनम्रतापूर्वक) आप कहिए तो, क्यों नहीं मानूंगी?
सजनसिंह:
अब तो तुमने मेरे सारे रुपये चुका दिए। तुम्हारे ऊपर मेरा कोई एहसान नहीं है, कहो तो कहूँ।
सुभागी:
जी! अवश्य कहिए। सजनसिंह मैं चाहता हूँ तुम मेरे घर की बहू बनो, मेरा लड़का भी यह चाहता है। क्या तुम्हें स्वीकार है?
सुभागी:
दादा, मेरे लिए इससे अच्छी बात और क्या होगी? सजनसिंह ईश्वर ने तुम्हें देवी बनाकर भेजा है, बेटी। तुम्हारी सहमति से मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई। सुभागी-आप तो मेरे पिता के समान हैं। मैं आपकी बात मैं कैसे टाल सकती हूँ?
सजनसिंह:
सौभाग्यवती हो बेटी। आज मेरा जीवन सफल हो गया।

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RBSE Class 8 Hindi सुभागी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 8 Hindi सुभागी बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कामचोर और आवारा था –
(क) सुभागी
(ख) सजनसिंह
(ग) तुलसी
(घ) रामू।
उत्तर:
(घ) रामू।

प्रश्न 2.
तुलसी महतो पहले किसे रत्न समझते थे?
(क) पुत्री को
(ख) नाती को
(ग) पुत्र को
(घ) भाई को।
उत्तर:
(ग) पुत्र को

प्रश्न 3.
माता के देहांत के बाद सुभागी के जीवन का क्या लक्ष्य था?
(क) मौज-मस्ती करना
(ख) पशुओं को चराना
(ग) खेती-बारी सँभालना
(घ) सजनसिंह के रुपये चुकाना।
उत्तर:
(घ) सजनसिंह के रुपये चुकाना।

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प्रश्न 4.
जात-पाँत में कौन विश्वास करता था?
(क) तुलसी महतो
(ख) सजनसिंह
(ग) सजनसिंह का बेटा
(घ) रामू।
उत्तर:
(ख) सजनसिंह

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –

  1. वह न मेरा पिता है, न मैं उसका. …….हूँ। (नौकर/बेटा)
  2. बेटी, हम तुम्हें न छोड़ेंगे। चाहे……….छूट जाये। (संसार/घर/राम)
  3. सेवा…………..लगती है या मीठी। (कड़वी/नमकीन)
  4. पुत्र को रत्न समझा था, पुत्री को…………..के पापों का (परोपकार/पूर्वजन्म)

उत्तर:

  1. बेटा
  2. संसार
  3. कड़वी
  4. पूर्वजन्म।

RBSE Class 8 Hindi सुभागी अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सुभागी अपने भाई को किसी काम के लिए क्योंनहीं रोकती थी?
उत्तर:
क्योंकि उसका मानना था कि ये जवान पुरुष होकर काम न करेंगे तो गृहस्थी कैसे चलेगी।

प्रश्न 2.
तुलसी महतो ने बेटी को अलग करने के संदर्भ में क्या कहा है?
उत्तर:
तुलसी महतो ने बेटी को अलग करने के संदर्भ में कहा-“बेटी, हम तुम्हें न छोड़ेंगे। चाहे संसार छूट जाए।”

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प्रश्न 3.
अंत्येष्टि के अवसर पर रामू ने पिता के लिए क्या कहा?
उत्तर:
अंत्येष्टि के अवसर पर रामू ने पिता के लिए कहा”जिस पिता ने मरते समय मेरा मुँह देखना स्वीकार न किया, वह न मेरा पिता है, न मैं उसका बेटा हूँ।”

प्रश्न 4.
तुलसी महतो की तेरहवीं के भोज में कुल कितने रुपये खर्च हुए?
उत्तर:
तुलसी महतो की तेरहवीं के भोज में कुल तीन हजार रुपये खर्च हुए।

प्रश्न 5.
पति के देहांत के बाद लक्ष्मी की क्या दशा
उत्तर:
पति के देहांत के बाद लक्ष्मी का दाना-पानी छूट गया।

RBSE Class 8 Hindi सुभागी लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
दादा की तबियत ज्यादा खराब होने पर जब सुभागी रामू को बुलाने गई तब राम ने क्या कहा?
उत्तर:
दादा की तबियत खराब होने पर जब सुभागी रामू को बुलाने गई तब रामू ने कहा-“मैं क्या डॉक्टर-हकीम हूँ कि देखने चलूँ? जब तक अच्छे थे, तब तक तो तुम उनके गले का हार बनी हुई थीं। अब जब मरने लगे तो मुझे बुलाने आई हो?”

प्रश्न 2.
तुलसी महतो को कौन-सी बीमारी हो गई थी, जिससे वे परलोक सिधार गए?
उत्तर:
तुलसी महतो को सात-आठ दिन से बहुत तेज बुखार था। लक्ष्मी पास में बैठी उनकी सेवा करती रहती थी लेकिन सात दिन से बुखार नहीं उतरा था। अंतिम समय में महतो ने पानी माँगा पर जब तक वह पानी लाती तब तक उनके हाथ-पाँव ठंडे हो गये। सुभागी गाँव के मुखिया सजनसिंह को बुलाकर लायी। दो-चार बात मुखिया से करके तथा सुभागी को उन्हें सौंप करके वे परलोक सिधार गये।

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प्रश्न 3.
लक्ष्मी के पचास वर्षों का नियम क्या था? वह उसे क्यों नहीं तोड़ पा रही थी?
उत्तर:
लक्ष्मी के पचास वर्षों का नियम था कि पति के बिना खाए वह भोजन न करती थी। वह इस नियम को इसलिए नहीं तोड़ पा रही थी कि जब वह सुभागी के आग्रह पर चौके में जाती तो उसे याद आता कि अभी तो पति ने खाया ही नहीं है। भूख भी उसकी इस विचारधारा पर विजय नहीं पा सकी। अतः उसने नियम नहीं तोड़ा बल्कि प्राण छोड़ दिए।

प्रश्न 4.
सुभागी की तारीफ क्यों हो रही थी?
उत्तर:
सुभागी बहुत ही नेक, बुद्धिमान और समझदार लड़की थी। वह माता-पिता की सेवा के साथ ही घर-बाहर का काम बड़ी लगन से करती थी। इसीलिए सबके मुँह से सुभागी की तारीफ हो रही थी कि लड़की नहीं, देवी है। दो मर्दो का काम भी करती है, उस पर माँ-बाप की सेवा भी करती है। सजनसिंह तो कहते, यह इस जन्म की देवी

RBSE Class 8 Hindi सुभागी दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रामू ने सुभागी को कौन-कौन से ताने दिए? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
सुभागी के विधवा होने पर जब सभी उसे दुबारा शादी करने के लेने के लिए समझा रहे थे तो सुभागी ने कहा-“मेरा मन शादी करने को नहीं कहता, आप जो काम कहो वह सिर-आँखों के बल करने को तैयार हूँ।” इस पर उजड्ड रामू ने कहा-“तुम अगर सोचती हो कि भैया कमाएँगे और मैं बैठी मौज करूँगी, तो इस भरोसे न रहना।”

अम्मा-दादा की सेवा से भी रामू को जलन होती थी। इसी कारण वह एक दिन सुभागी से बोला-“अगर उन लोगों से बड़ा मोह है तो उसको लेकर अलग क्यों नहीं रहती हो! तब सेवा करो तो मालूम हो कि सेवा कड़वी लगती है या मीठी।” दादा की तबियत बिगड़ने पर जब सुभागी रामू को बुलाने जाती है तब भी रामू ने ताने देते हुए कहा, “क्या मैं डॉक्टर-हकीम हूँ कि देखने चलूँ ? जब तक अच्छे थे, तब तक तो तुम उनके गले का हार बनी हुई थीं।”

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प्रश्न 2.
सजनसिंह के चरित्र की क्या विशेषताएँ थीं? लिखिए।
उत्तर:
सजनसिंह गाँव के मुखिया और बहुत ही सज्जन व्यक्ति थे। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. गाँव के मुखिया और लोगों के शुभचिंतक – सजनसिंह गाँव के मुखिया हैं, इसलिए पंचायत में बँटवारे के लिए तुलसी महतो उन्हें बुलाकर लाते हैं। तुलसी महतो की बीमारी में भी सजन सिंह उन्हें देखने आते रहते हैं। लक्ष्मी भी जब तक जीवित थी वे सुबह-शाम हाल पूछने जरूर आते थे।
  2. ईमानदार – तेरहवीं के भोज में जितना खर्च हुआ था उसे सुभागी से सच-सच बताया।
  3. सुभागी के कार्यों के प्रशंसक – सुभागी के मेहनती स्वभाव और अच्छे आचरण कीसजनसिंह प्रशंसा करते हैं। वे उसे इस जन्म की देवी कहते हैं।
  4. समझदार और धैर्यशील – जब सुभागी बाबा के भोज के सारे पैसे चुका देती है तभी वह उससे अपने दिल की बात मानने के लिए कहते हैं।
  5. वचन के पक्के – तुलसी महतो अपनी बेटी को उन्हें सौंपकर जाते हैं इसलिए उन्होंने उसे अपनी बहू बनाया जो उनके लिए बेटी समान ही थी।

पाठ-परिचय:

‘सुभागी’ कथा सम्राट प्रेमचंद द्वारा लिखी गई बहुत ही मार्मिक कहानी है। ‘सुभागी’ तुलसी महतो की लड़की विधवा हो गयी। वह घर का सारा काम बड़ी मेहनत से करती। उसका भाई रामू आवारा था, जो माँ-बाप से लड़कर अलग हो जाता है। कुछ दिन बाद तुलसी महतो की मृत्यु हो गई। गाँव के मुखिया सजन सिंह की सहायता से उसने जोरदार मृत्यु भोज किया। कुछ दिन बाद सुभागी की माँ की भी मृत्यु हो गई। अब सुभागी के जीवन का एक ही लक्ष्य था- मुखिया सजन सिंह के रुपये चुकाना।

इसके लिए वह दिन-रात मेहनत करती और महीने के अंत में तीन सौ रुपये लेकर वह सजन सिंह को दे आती। जिस दिन सुभागी ने आखिरी किस्त चुकाई उस दिन वह बहुत खुश थी। जब वह चलने लगी तो सजन सिंह ने उससे प्रार्थना भरे शब्दों में कहा-“बेटी मैंने अब तक तुमसे इसलिए कुछ नहीं कहा क्योंकि तुम अपने को मेरा देनदार समझ रही थीं। अब रुपये चुका दिए। मेरा तुम्हारे ऊपर कोई एहसान नहीं है।

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मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ लेकिन तुम्हें माननी पड़ेगी।” सुभागी ने कहा, “मैं आपका हुक्म कैसे टाल सकती हूँ।” सजन सिंह ने कहा- “मेरी इच्छा है कि तुम मेरे घर की बहू बनकर मेरे घर को पवित्र करो।” सुभागी ने कृतज्ञ होकर बस इतना कहा “दादा, इतना सम्मान पाकर मैं पागल हो जाऊँगी।” सजन सिंह ने सुभागी को सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद दिया और कहा-“मुझ-सा भाग्यशाली संसार में और कौन होगा?’

कठिन शब्दार्थ:
निपुण = कुशल, बहुत चतुर। आवारा = बिना काम के घूमने वाला। आफत = संकट मुसीबत। उजड्ड = असभ्य, अक्खड़। आसरा = सहारा। आपे से बाहर = बहुत क्रोधित। वाह-वाही = प्रशंसा, बड़ाई। जन्मोत्सव = जन्म मनाया जाना। जलसा = उत्सव। निर्वाह = गुजारा, निभाव। ढिठाई = बेशर्मी, ढीठपन। कुलवंती = अच्छे कुल की। मिजाज = स्वभाव। गोदान = गाय दान किया जाना। आग्रह = जोर देना। निवाला = कौर। दिलोजान से = पूरी शक्ति से। कोख = गर्भ। किस्त = निश्चित समय पर चुकाया जाने वाला धन । व्रत = प्रतिज्ञा। कृतज्ञ = एहसान मानने वाला। साक्षात = प्रकट, शरीर लेकर। भगवती = देवी, दुर्गा।

गदयांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ तथा अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. रात को कभी माँ के सिर में तेल लगाती तो कभी उसकी देह दबाती। जहाँ तक उसका बस चलता, माँ-बाप कों कोई काम न करने देती। हाँ, भाई को न रोकती। सोचती, यह तो जवान आदमी है, ये काम न करेंगे तो गृहस्थी कैसे चलेगी? मगर रामू को यह बुरा लगता। अम्मा और दादा को तिनका तक नहीं उठाने देती और मुझे पीसना चाहती है। यहाँ तक कि एक दिन वह आपे से बाहर हो गया। सुभागी से बोला, “अगर उन लोगों से बड़ा मोह है, तो उनको लेकर अलग क्यों नहीं रहती हो! तब सेवा करो तो मालूम हो कि सेवा कड़वी लगती है या मीठी। दूसरों के बल पर वाहवाही लेना आसान है। बहादुर वह है, जो अपने बल पर काम करे।”

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गदयांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित ‘सुभागी’ नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक प्रेमचंद जी हैं। इसमें माता-पिता के प्रति सुभागी की सेवा-भावना का परिचय दिया गया है।

व्याख्या:
सभागी अपने माता-पिता की खब सेवा करती थी। रात को माँ के सिर में तेल लगाना, उसकी देह दबाना तथा माँ-बाप को कोई काम न करने देना उसका रोज का नियम था। किंतु भाई को किसी काम को करने से वह नहीं रोकती थी क्योंकि यदि भाई काम नहीं करेगा तो घर का खर्च कैसे चलेगा? रामू को सुभागी की यह बात बुरी लगती थी। अतः एक दिन नाराज होकर उसने सुभागी से कहायदि तुम्हें अम्मा-बाबू से बहुत लगाव है तो तुम उन्हें लेकर अलग हो जाओ। उसके बाद सेवा करोगी तो पता चलेगा कि सेवा करने में अच्छी लगती है या बुरी। काम दूसरे करें और प्रशंसा तुम्हें मिले। अकेली माँ-बाप की सेवा और घर का काम करना तब अपने को बहादर समझना।

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प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
सुभागी की कर्तव्यनिष्ठा।

प्रश्न 2.
रामू किसे बहादुर कहता है?
उत्तर:
रामू के अनुसार बहादुर वह है जो अपने बल पर काम करे।

प्रश्न 3.
रामू को क्या बुरा लगता था?
उत्तर:
रामू को सुभागी का दिन-रात माँ-बाप की सेवा में लगे रहना बुरा लगता था। वह हर समय यही सोचता रहता कि यह अम्मा और दादा को तिनका तक नहीं उठाने देती और मुझे गृहस्थी की चक्की में पीसना चाहती है।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 2 सुभागी

प्रश्न 4.
रामू ने आपे से बाहर होकर सुभागी से क्या कहा?
उत्तर:
रामू आपे से बाहर होकर एक दिन सुभागी से बोला”अगर उन लोगों से बड़ा मोह है, तो उनको लेकर अलग क्यों नहीं रहती हो! तब सेवा करो तो मालूम हो कि सेवा कड़वी लगती है या मीठी।

2. रात को तुलसी लेटे तो वह पुरानी बात याद आई। जब रामू के जन्मोत्सव में उन्होंने रुपये कर्ज लेकर जलसा किया था और सुभागी पैदा हुई, तो घर में रुपये रहते हुए भी उन्होंने एक कौड़ी तक खर्च न की। पुत्र को रत्न समझा था, पुत्री को पूर्वजन्म के पापों का दंड। वह रत्न कितना कठोर निकला और यह दंड कितना मंगलमय! दूसरे दिन महतो ने गाँव के आदमियों को इकट्ठा करके कहा, “पंचो, अब रामू का और मेरा एक घर में निर्वाह नहीं होता। मैं चाहता हूँ कि तुम लोग इंसाफ़ से जो कुछ मुझे दे दो, वह | लेकर अलग हो जाऊँ। रात-दिन की बहस अच्छी नहीं।”

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी के ‘सुभागी’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक प्रेमचंद जी हैं। इस गद्यखंड में तुलसी महतो अपने पुराने दिनों को याद करते हुए सो जाते हैं और अगले दिन पंचायत बुलाकर रामू का फैसला करवा देते हैं।

व्याख्या:
लेखक कहता है कि बेटे के व्यवहार से दुःखी रात को सोने के लिए तुलसी महतो लेटे तो उन्हें पुराने दिन याद आ गए। जब रामू पैदा हुआ था तो उन्होंने बड़ी धूमधाम से घर में उत्सव मनाया था और कर्ज लेकर खूब खर्चा भी किया था लेकिन सुभागी के पैदा होने पर उन्होंने एक कौड़ी भी खर्च नहीं की थी। उन्होंने पुत्र को रत्न समझा था लेकिन आज वह कितना निर्दयी निकला और पुत्री को उन्होंने भगवान का दिया हुआ दंड माना था लेकिन सुभागी देवी के समान माँ-बाप का मंगल करने वाली निकली। दूसरे दिन महतो ने गाँव के लोगों को बुलाकर कहा-पंचो, रामू के साथ मेरी गुजर-बसर एक घर में नहीं हो पा रही है। इसलिए आप लोग ईमानदारी से फैसला कर दें। जो आप हमें देंगे वह लेकर मैं अलग हो जाऊँगा। दिन-रात इस तरह से घर में कलह होना अच्छा नहीं है।

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
कन्या : एक मंगलमय उपहार।

प्रश्न 2.
पुत्र और पुत्री को लेकर तुलसी की समझ क्या थी?
उत्तर:
तुलसी पुत्र को रत्न समझते थे और पुत्री को पूर्वजन्म के पापों का दंड।

प्रश्न 3.
तुलसी के विचार बाद में पुत्र और पुत्री के संबंध में क्या हो गए?
उत्तर:
तुलसी ने बाद में विचार किया कि जिस पुत्र को मैं रत्न समझता था वह कितना कठोर निकला और जिस पुत्री को मैं दंड समझता था वह जीवन के लिए कितना मंगलमय

प्रश्न 4.
तुलसी महतो ने दूसरे दिन गाँव के आदमियों को बुलाकर क्या कहा?
उत्तर:
तुलसी महतो ने दूसरे दिन गाँव के आदमियों को बुलाकर कहा-“पंचो, अब रामू का और मेरा एक घर में गुजारा नहीं होता। मैं चाहता हूँ, आप लोग जो कुछ मुझे ईमानदारी से दे दें मैं वह लेकर अलग हो जाऊँ। रात-दिन की बहस अच्छी नहीं।”

3. माता के देहांत के बाद सुभागी के जीवन का केवल एक लक्ष्य रह गया–सजनसिंह के रुपए चुकाना। तीन साल तक सुभागी ने रात को रात और दिन को दिन न समझा। उसकी कार्य-शक्ति और हिम्मत देखकर लोग दाँतों तले अंगुली दबाते थे। दिनभर खेती-बाड़ी का काम करने के बाद वह रात को आटा पीसती। तीसवें दिन तीन सौ रुपये लेकर वह सजनसिंह के पास पहुँच जाती।

इसमें कभी नागा न पड़ता। अब चारों ओर से उसकी शादी के पैगाम आने लगे। सभी उसको अपने घर की बहू बनाना चाहते थे। जिसके घर सुभागी जाएगी, उसके भाग्य फिर जाएँगे। सुभागी यही जवाब देती, “अभी वह दिन नहीं आया।” जिस दिन सुभागी ने आखिरी किस्त चुकाई, उस दिन उसकी खुशी का ठिकाना न था। आज उसके जीवन का कठोर व्रत पूरा हो गया।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी के ‘सुभागी’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक प्रेमचंद जी हैं। इसमें सजन सिंह के कर्ज को चुकाने के लिए सुभागी द्वारा किए गए परिश्रम का वर्णन है।

व्याख्या:
जब सुभागी की माँ भी संसार से गुजर गई तब सुभागी के सामने केवल एक ही उद्देश्य रह गया कि वह सजन सिंह के रुपये चुका दे। इसके लिए उसने तीन साल तक दिन-रात काम किया। उसके काम करने की क्षमता और लगन देखकर लोग आश्चर्यचकित थे। दिन को खेती-बाड़ी का काम करके वह रात को आटा पीसती और महीने के अंत में तीन सौ रुपये सजनसिंह को दे आती थी, इसमें कभी नागा नहीं होता था। उसका अच्छा आचरण और मेहनती स्वभाव देखकर लोग शादी के लिए उसके यहाँ रिश्ते लेकर आने लगे लेकिन वह कहती “अभी वह दिन नहीं आया है।” जिस दिन उसने सजनसिंह के सारे पैसे चुका दिए उस दिन वह बहुत खुश थी क्योंकि उसने तीन साल पहले जो प्रण किया था पूरा हो गया था।

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
सुभागी का कठोर व्रत।

प्रश्न 2.
सुभागी कैसी लड़की थी?
उत्तर:
सुभागी अच्छे चरित्र वाली बहुत ही मेहनती लड़की थी।

प्रश्न 3.
माँ के देहांत के बाद सुभागी का लक्ष्य क्या था? उसने उसे कब पूरा किया ?
उत्तर:
माँ के देहांत के बाद सुभागी का केवल एक ही लक्ष्य था सजनसिंह के रुपये चुकाना। उसने दिन-रात कड़ी मेहनत करके कमाई की और तीन साल के अंदर-अंदर सजनसिंह के तीन हजार रुपये चुकता कर दिये।

प्रश्न 4.
सुभागी की मेहनत देखकर लोगों के मन में क्या विचार आता था ?
उत्तर:
सुभागी की मेहनत देखकर लोग उसे अपने घर की बहू बनाने का विचार करते थे। चारों तरफ से उसकी शादी के पैगाम आने लगे। लोग कहते जिसके घर सुभागी जायेगी, उसके भाग्य फिर जाएंगे।

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