RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 17 हूंकार की कलंगी

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi Chapter 17 हूंकार की कलंगी

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

RBSE Class 8 Hindi हूंकार की कलंगी पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

 पाठ से

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
कोसीथळ के कामदार के पास कहाँ से संदेश आया ?
उत्तर:
कोसीथळ के कामदार के पास उदयपुर से मेवाड़ के महाराणा का संदेश आया।

प्रश्न 2.
कोसीथळ किस कुल की जागीर थी ?
उत्तर:
कोसीथळ चूंडावत कुल की जागीर थी।

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प्रश्न 3.
कोसीथळ की सेना किसके नेतृत्व में लड़ाई में शामिल हुई ?
उत्तर:
कोसीथळ की सेना माँजी के नेतृत्व में लड़ाई में शामिल हुई।

लिखें

RBSE Class 8 Hindi हूंकार की कलंगी बहुविकल्पी

प्रश्न 1.
मेवाड़ महाराणा की ओर से संदेश आया था –
(क) समस्त जागीरदार लगान जमा करें।
(ख) उदयपुर में आयोजित उत्सव में शामिल हों।
(ग) मेवाड़ दरबार में अपनी उपस्थिति दें।
(घ) सैन्य बल सहित युद्ध में हाजिर हों।
उत्तर:
(घ) सैन्य बल सहित युद्ध में हाजिर हों।

प्रश्न 2.
कोसीथळ जागीर में महाराणा के संदेश से चिंता पैदा हो गई क्योंकि –
(क) कोसीथळ जागीर के ठाकुर अस्वस्थ थे।
(ख) कोसीथळ जागीर के पास सैन्य शक्ति का अभाव था।
(ग) कोसीथळ के ठाकुर की उम्र अभी पाँच वर्ष से भी कम थी।
(घे) कोसीथळ के ठाकुर युद्ध में शामिल होना नहीं चाहते थे।
उत्तर:
(ग) कोसीथळ के ठाकुर की उम्र अभी पाँच वर्ष से भी कम थी।

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RBSE Class 8 Hindi हूंकार की कलंगी अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सळूबरराव जी ने हमले से पहले हड़ोल वालों को क्या समझाया ?
उत्तर:
सळूबरराव जी ने समझाया कि वीरो! मर जाना लेकिन पैर पीछे मत करना। हड़ोल में रहने की यही आपकी प्रतिष्ठा है। हम इसे पीढ़ियों से निभा रहे हैं और आज भी निभाना है। अपनी जिम्मेदारी निभाना, देश के लिए मरना अमरता की निशानी है।

प्रश्न 2.
संदेश पढ़कर कोसीथळ ठाकुर की माँ ने क्या कहा ?
उत्तर:
कोसीथळ ठाकुर की माँ ने जब संदेश सुना तो चिंताग्रस्त हो गईं कि ठाकुरसा तो अभी पाँच वर्ष के ही हैं अतः वहाँ उन्हें लेकर कैसे जाएँ ? फिर साथ में राणाजी की चेतावनी भरी पंक्तियाँ भी जलते हए अंगारे के समान हैं।

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प्रश्न 3.
युद्ध में घायल महिला को देखकर राणाजी ने क्या पूछा ?
उत्तर:
घायल महिला को देखकर राणाजी ने पूछा कि सच बताना, तुम कौन हो ? तुम्हारे ठिकाने का क्या नाम है ? यदि तुम दुश्मन भी हो तब भी सच बतलाना। मैं तुम्हारा | आदर करता हूँ। आप मेरी बहिन के समान हैं।

RBSE Class 8 Hindi हूंकार की कलंगी  लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
राणाजी की आँखों में करुणा एवं गर्व के आँसू क्यों छलक पड़े ?
उत्तर:
राणाजी को जब यह ज्ञात हुआ कि उनके आदेश के कारण एक माँ ने अपने बेटे की इज्जत बचाने के लिए स्वयं रणभूमि में जाने का निश्चय कर लिया। इसके साथ ही मेवाड़ की वीर नारियों की परंपरा का अनुसरण भी किया। यह घटना करुणा और गर्व की अनुभूति कराने वाली थी। अत: उनकी आँखों से आँसू छलक पड़े।

प्रश्न 2.
राणाजी ने उस वीरांगना की सराहना कैसे की ?
उत्तर:
राणाजी ने उस वीरांगना की सराहना करते हुए कहा कि आज वर्षों से मेवाड़ की आन बची हुई है, वह आप जैसी देवियों का प्रताप है। आप जैसी देवियों ने मेवाड़ का सिर ऊँचा कर रखा है। जब तक ऐसी वीर माताएँ हैं तब तक हमारा देश पराधीन नहीं हो सकता है।

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प्रश्न 3.
कोसीथळ की वीर माता को राणाजी ने क्या सम्मान दिया ?
उत्तर:
कोसीथळ की वीर माता को राणाजी ने हूंकार की कलंगी देकर सम्मानित किया। जिसे न केवल उसका पुत्र, बल्कि आने वाली पीढ़ियाँ भी धारण कर अपना सिर ऊँचा रख सकेंगे और उस वीर माता की वीरता को याद रखेंगे।

RBSE Class 8 Hindi हूंकार की कलंगी दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मेवाड़ से आए संदेश को पढ़कर कोसीथळ कामदार का चेहरा क्यों उतर गया ?
उत्तर:
मेवाड़ दरबार से जब यह संदेश आया कि सभी सरदारों को सैन्य बल व शस्त्र सहित उदयपुर पहुँचना है और उसमें रियायत नहीं होगी। साथ ही राणाजी के हाथ से लिखी दो चेतावनी भरी पंक्तियाँ कि अनुपस्थिति पर जागीर जब्त होगी और हरामखोरी मानी जाएगी। यह संदेश पढ़कर कामदार का चेहरा इसलिए उतर गया कि वहाँ के ठाकुरसा की उम्र पाँच वर्ष से भी कम थी, ऐसी स्थिति में आदेश का पालन कैसे करेंगे ? यह सोचकर वे चिंताग्रस्त थे।

प्रश्न 2.
राणाजी के संदेश से माँजी चिंतित क्यों हो गईं?
उत्तर:
राणाजी के संदेश में स्पष्ट लिखा था कि सरदारों की अनुपस्थिति हरामखोरी मानी जाएगी व उनकी जागीर जब्त होगी। कोसीथळ ठाकुरसा मात्र पाँच वर्ष के थे। माँजी की चिंता यह थी कि राणाजी के आदेश का पालन कैसे करें ? यदि नहीं कर पाए तो प्रतिष्ठा समाप्त हो जाएगी। जब ठाकुरसा बड़े होंगे तो कोई भी उन पर व्यंग्य करेगा और उनकी गर्दन नीची रहेगी। यही चिंता माँजी को सता रही थी।

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प्रश्न 3.
युद्ध में शामिल होने के लिए कोसीथळ में क्या-क्या तैयारियाँ की गईं ?
उत्तर:
युद्ध के लिए प्रस्थान करने के लिए कोसीथळ का सारा सैन्य बल सज गया। नगाड़ों पर कूच करने के डंके बजने लगे। ध्वजा की पताकाएँ खोल दी गईं। जीन कसे हुए घोड़े तैयार हो गए। माँजी ने नेतृत्व करने का फैसला किया था, वे भी लौह-कवच युक्त हो गई थीं। इस तरह युद्ध में जाने का अपूर्व उत्साह देखा जा सकता था।

भाषा की बात
प्रश्न 1.
निम्नलिखित राजस्थानी शब्दों का सामने दिए हिंदी शब्दों से मिलान कीजिए –
1. ससतर     (क) दुश्मन
2. पड़दा      (ख) शस्त्र
3. धिरकार   (ग) प्रताप
4. दुसमण   (घ) धिक्कार
5. परताप    (ड़) पर्दा
उत्तर:
1. (ख) शस्त्र
2. (ड़) पर्दा
3. (घ) धिक्कार
4. (क) दुश्मन
5. (ग) प्रताप

प्रश्न 2.
निम्नलिखित राजस्थानी मुहावरों का अर्थ स्पष्ट कीजिए –
(क) मूंडो उतरणो
(ख) आसा रा दीवा
(ग) छाती धड़-धड़ करणो
(घ) छाती में दूध उतरणो
(ङ) माथो नीचो व्हैणो
(च) पग पाछा नी देवणा
(छ) माथो ऊंचो व्हैणो।
उत्तर:
(क) मुँह उतर जाना
(ख) आशा का दीपक
(ग) छाती धक-धक करना
(घ) छाती में दूध उतरना
(ङ) सिर नीचा होना
(च) पाँव पीछे न लेना
(छ) सिर ऊँचा होना।.

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प्रश्न 3.
इस पाठ में ‘रुं 5 ऊभा हुग्या’ तथा ‘लड़ता लड़ता मरग्या’ जैसे वाक्यांश आए हैं, जिनमें किसी न किसी शब्द की आवृत्ति हुई है। पाठ पढ़कर ऐसे अन्य शब्द छाँटिए व उनके अर्थ लिखिए।
उत्तर:

  • छाती धड़-धड़ करवा लागी = छाती धकधक करने लगी।
  • काली-काली भोली-भोली आंख्या = काली-काली भोली-भाली आँखें।
  • लुगायां कसी कसी वीरता सूं झगड़ा कीधा = स्त्रियों ने कैसी-कैसी वीरता से लड़ाई की।
  • कंवली-कंवली बाँहों ने पकड़ गोद में उठावा ने आगै व्हीया = कोमल-कोमल बाँहों को पकड़कर गोद में उठाने हेतु आगे आई।
  • गाला रे होठ अड़ातां अड़ातां मां री पलकाँ आली व्हेगी। = गालों से होठ लगाते-लगाते माँ की पलकें गीली हो गईं।
  • लारै लारै सारी जमीत = पीछे-पीछे सारी सेना।
  • गज-गज लांबा केस = गज भर लंबे केश।

पाठ से आगे
प्रश्न 1.
अगर कोसीथळ की ओर से लड़ाई में कोई नहीं जाता तो क्या होता ? कल्पना के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
अगर कोसीथळ की ओर से लड़ाई में कोई नहीं जाता तो राणाजी के आदेशानुसार जागीर जब्त हो जाती। पुरखों की बनी हुई विरासत समाप्त हो जाती। कोसीथळ घराने की अन्य रिश्तेदार मजाक बनाते। उधर लड़ाई में चूण्डावतों की साख पर भी असर पड़ता। मेवाड़ में वीर नारियों की अनेक कहानियों में कोसीथळ की वीर माता का उल्लेख है। यदि वह नहीं जाती तो इस गौरव का अवसर समाप्त हो जाता।

यह भी करें
1. इस पाठ की लेखिका लक्ष्मीकुमारी चूंडावत ने लोक कथाओं को आधार बनाकर अनेक कहानियों की रचना की है। विद्यालय के पुस्तकालय से उनकी अन्य कहानियाँ तलाश कर पढ़िए।
नोट:
विद्यार्थी स्वयं करें।

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2. हाड़ी रानी, पन्नाधाय जैसी महिलाओं ने अपने जीवन से वीरता की मिसाल पेश की है। अपने शिक्षक/शिक्षिका की मदद से ऐसे उदाहरणों का संकलन कर डायरी में लिखिए।
नोट:
विद्यार्थी स्वयं करें।

यह भी जानें
पुस्तकालय से झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की कहानी प्राप्त कर पढ़िए।
नोट:
विद्यार्थी स्वयं करें।

RBSE Class 8 Hindi हूंकार की कलंगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 8 Hindi हूंकार की कलंगी बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चूंडावतों की जागीर का नाम था –
(क) भीमताल
(ख) काशीपुर
(ग) कोसीथल
(घ) रामथल।
उत्तर:
(ग) कोसीथल

प्रश्न 2.
कोसीथल के सैन्य बल का नेतृत्व किया –
(क) कामदार ने –
(ख) माँजी ने
(ग) ठाकुरसा ने
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ख) माँजी ने

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प्रश्न 3.
युद्ध में गाया जाने वाला राग है –
(क) राग मल्हार
(ख) राग सारंग
(ग) राग विहाग
(घ) राग सिंधू।
उत्तर:
(घ) राग सिंधू।

प्रश्न 4.
मेवाड़ की सेना में सबसे पहले हमला करने व आक्रमण झेलने का गौरव किसके पास था ?
(क) हड़ोल के पास
(ख) मेनार के पास
(ग) गोगुंदा के पास
(घ) कुंभलगढ़ के पास।
उत्तर:
(क) हड़ोल के पास

प्रश्न 5.
राणाजी ने माँजी को किस तरह सम्मानित किया ?
(क) वीर माता की उपाधि देकर
(ख) एक बड़ी जागीर देकर
(ग) मेवाड़ी पगड़ी धारण करवाकर
(घ) हूंकार की कलंगी देकर।
उत्तर:
(घ) हूंकार की कलंगी देकर।

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प्रश्न 6.
चूंडावतों के मुखिया थे –
(क) सलूंबर राव
(ख) भीण्डर राव
(ग) कानोड़ राव
(घ) विजयपुर राव।
उत्तर:
(क) सलूंबर राव

 रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. कोसीथळ ने ठाकुर की आयु. …………….”वर्ष की थी।
  2. हमले का सामना सबसे पहले ………………”ने किया।
  3. हडोल चुंडावतों की ……………….”थी।
  4. पत्ताजी की माँ ने …………….. से लड़ाई लड़ी थी।

उत्तर:

  1. पाँच
  2. चूंडवतों
  3. जागीर
  4. अकबर।

RBSE Class 8 Hindi हूंकार की कलंगी अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
राणाजी का आदेश किसके नाम लिखा गया ?
उत्तर:
मेवाड़ के समस्त सरदारों के नाम राणाजी का आदेश लिखा गया।

प्रश्न 2.
राणाजी के अनुसार सरदारों की अनुपस्थिति को किस रूप में माना जाएगा ?
उत्तर:
राणाजी के अनुसार देश पर आई विपत्ति की बेला में सरदारों की अनुपस्थिति को हरामखोरी माना जाएगा।

प्रश्न 3.
अकबर की फौज से लड़ने वाली मेवाड़ की वीर नारियाँ कौन थी ?
उत्तर:
अकबर की फौज से लड़ने वाली वीर नारियाँ थीं – जयमल पत्ताजी की माता तथा उनकी रानी।

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प्रश्न 4.
घायलों में पुरुष वेश में कौन स्त्री थी?
उत्तर:
कोसीथळ ठाकुर की माता पुरुष वेश में लड़ रही थीं। वह घायल अवस्था में रण-क्षेत्र में पड़ी थीं।

प्रश्न 5.
देश के लिए मरना किसकी निशानी मानी गई है ?
उत्तर:
देश के लिए मरना अमरता की निशानी मानी गई है।

RBSE Class 8 Hindi हूंकार की कलंगी लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मेवाड़ दरबार के आदेश को पढ़कर कोसीथळ कामदार का मुँह क्यों उतर गया ?
उत्तर:
कोसीथळ के कामदार ने जब आदेश में उदयपुर पहुँचने की बात पढ़ी तो उसका मुँह उतर गया। कारण यह था कि वहाँ का ठाकुरसा पाँच वर्षीय बालक अभी युद्ध लड़ने लायक नहीं था। आदेश में किसी प्रकार की छूट भी नहीं थी। ऐसी स्थिति में आदेश का पालन कैसे होगा, इस चिंता में कामदार का मुँह उतर गया।

प्रश्न 2.
माँजी के मन में मेवाड़ की वीर नारियों का इतिहास क्यों स्मरण में आया ?
उत्तर:
मेवाड़ राणाजी के आदेश का पालन करना, ठाकुरसा की उम्र पाँच वर्ष से भी कम होना, अनुपस्थिति की स्थिति में जागीर जब्त होना, प्रतिष्ठा धूमिल होना आदि आशंकाओं को भाँपकर माँजी के मन में मेवाड़ की वीर नारियों का इतिहास याद आ गया। इन वीर नारियों ने मेवाड़ पर संकट के समय रण-क्षेत्र में दुश्मनों का सामना किया व अमर गति को प्राप्त हुई। जिसमें जयमल पत्ता की माताजी व उनकी ठकुरानी का नाम उल्लेखनीय है, जो अकबर की फौज से भिड़ गई थीं।

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प्रश्न 3.
हड़ौल जागीर की गौरवमयी पहचान का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
हडोल मेवाड़ रियासत में चूण्डावतों की जागीर थी। अपनी वीरता के कारण ये प्रसिद्ध थे। जब भी कोई आक्रमण करना होता तो सबसे आगे हड़ौल के सैनिक ही रहते और यदि कभी हमला होता तो आगे रहकर यहीं के सैनिक सामना करते। इसी परंपरा को वे वर्षों से निभाते आ रहे थे।

प्रश्न 4.
वीर माता ने राणाजी से उपहार में क्या माँगा ?
उत्तर:
जब राणाजी ने प्रसन्नतापूर्वक माँजी को अपनी वीरता का उपहार देना चाहा तो माँ ने अपने पुत्र की प्रतिष्ठा के लिए कहा कि आप मुझे ऐसी चीज उपहार में दें जिससे मेरा पुत्र अपने दूसरे लोगों में सिर ऊँचा करके बैठे अर्थात् वह गौरव की अनुभूति करे।

प्रश्न 5.
माँजी के व्यक्तित्व से क्या प्रेरणा मिलती है ?
उत्तर:
माँजी के व्यक्तित्व से यह प्रेरणा मिलती कि संकट आने पर नारियों को भी पुरुषों की भाँति अना वीरत्व प्रदर्शित करना चाहिए। अपने परिवार, समाज की प्रतिष्ठा के लिए यदि कुछ करना पड़े तो आगे आना चाहिए। जब तक ऐसा साहस रहेगा तो कोई भी दुश्मन हमें कमजोर समझकर 1 दुस्साहस नहीं कर पाएगा।

RBSE Class 8 Hindi हूंकार की कलंगी दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मेवाड़ के सरदारों को उदयपुर पहुँचने के आदेश पर कोसीथळ ठाकुर की माताजी के मन में आए विचारों को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
मेवाड़ के सरदारों को जब आदेशित किया गया कि वे अपने सैन्य और शस्त्रबल सहित उदयपुर उपस्थिति दें। साथ में राणाजी की चेतावनी युक्त पंक्तियाँ भी थीं। आदेश की भाषा इतनी कठोर थी कि इसमें कोई छूट नहीं थी और पालन करना अनिवार्य था। अब क्या किया जाए ? यदि वहाँ उपस्थित नहीं होंगे तो जागीर जब्त होने पर बेटे की प्रतिष्ठा व कुल की शान समाप्त हो जाएगी। बड़ा होने पर वह हँसी का पात्र होगा। यदि आदेशानुसार उपस्थिति देनी पड़े तो पाँच वर्ष से भी छोटे बालक को कैसे भेजा जाए ? यही विचार माँजी के मन में आ रहे थे।

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प्रश्न 2.
कोसीथळ की वीर माता की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
कोसीथळ की वीर माता एक छोटी-सी जागीर के अल्पवय ठाकुरसा की माँ थी, जिसने अपने बेटे की प्रतिष्ठा – के लिए स्वयं रणभूमि में जाने का निश्चय किया। पाठ के आधार पर उसकी निम्न विशेषताएँ प्रकट होती हैं –
(1) ममता की प्रतिमूर्ति:
माँजी अपने अल्पवय बेटे से बहुत प्यार करती हैं। जब वह युद्ध भूमि में जाने के लिए तैयार – होती हैं। वीर वेश में अपनी माँ को देखकर बालक सहम जाता है तो वह उसे गोद में लेकर चूमती है। ममता के कारण उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं।

(2) स्वाभिमानी नारी:
वह इस बात को सहन करने के लिए तैयार नहीं हैं कि उनका पुत्र अपना सिर नीचा करे। जब राणाजी से उपहार की बात आती है तब भी वह कहती हैं कि ऐसा उपहार देना कि मेरा बेटा सभी में अपना सिर ऊँचा कर गौरव की अनुभूति करे।

(3) युद्ध निपुण:
वह वीर नारी होने के साथ ही युद्धनिपुण थीं। दुश्मन पर वार करना, ढाल से बचाव करना व दूसरे हाथ से भाले का वार कर दुश्मन को मार देने का कौशल यही दर्शाता है कि वह एक युद्ध निपुण वीर नारी थीं।

पाठ-परिचय:
शत्रु के आक्रमण को भांपकर मेवाड़ के महाराणा ने अपनी रियासत के सभी सरदारों को आदेश पहुँचाया कि वे अपने सैन्यबल सहित उदयपुर उपस्थित हों। ऐसा नहीं करने पर उनकी जागीर जब्त करने के साथ ही उन्हें हरामखोर माना जाएगा। यह आदेश जब कोसीथल पहुँचा तो वहाँ के कामदार चिंता में पड़ गए। उनके ठाकुर तो पाँच वर्ष के बालक थे। आदेश का पालन जरूरी था। माँजी को आदेश की बात पहुँचाई गई। माँजी ने खानदान की प्रतिष्ठा और बालक के भविष्य को देखते हुए सैन्य वस्त्र धारण कर लिए व अपने सैन्य बल सहित उपस्थिति दे दी। हमला हुआ तो चूण्डावतों के द्वारा सबसे पहले सामना किया गया।

माँजी की तलवार चमक उठी। ढाल से अपना बचाव करते हए भाले से उन्होंने वार किया। उनके हाथ से घोड़े की लगाम छूट गई और वह घायल होकर नीचे गिर गईं। सायं को युद्ध की समाप्ति पर जब घायलों को ढूँढ़ते समय पता लगा कि सैन्य वेश में कोई स्त्री है तो राणाजी के समक्ष उन्हें प्रस्तुत किया गया। माँजी ने सारी बात बताई। राणाजी ने उनकी वीरता पर गर्व महसूस करते हुए पुरस्कार दिया कि ‘हुंकार की कलंगी’ आपके बेटे के सिर पर ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियाँ भी धारण करेंगी और आपकी वीरता याद की जाएगी।

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कठिन-शब्दार्थ:
हुकम = आदेश। जमीत = सैन्यबल। ससतराँ = शस्त्र। हाजर = उपस्थित। दसगतां = हस्ताक्षर। ओळलाँ = पंक्तियाँ। रियायत = छूट। टाबर = संतान। नैनपण = बचपन। जूण = जिंदगी। जनानी = महिलाओं की। डोढ़ी = द्वार। अरज = निवेदन। डावड़ी = दासी। ऊभा = खड़े। मूंडा मूंड = आमने-सामने। बारणा = द्वारा। पड़दो = पर्दा। माँयने = अन्दर। मुजरो = अभिवादन। अक्खर = अक्षर। हीज = केवल। सरणाटो = सन्नाटा। बळबळता = जलते हुए। खीरा = अंगारा। परसंगी = रिश्तेदार। रोळ = मजाक। मोसो = व्यंग्य। खोस लीधी = छीन ली। थिरता = स्थिरता।

ठिमरास = – धैर्य। अणूळी = अनुचित। घराणां = खानदान। नगारा = नगाड़े। निसाण = ध्वजा। कंवळी = कोमल। भेख = भेष। अड़ातां = स्पर्श करते हुए। आळी = गीली। भळकावतो = चमकता हुआ। मांझी = मल्लाह। अधबीचै = मध्य में। पाटवी = मुखिया। बटका = टुकड़ा। पळाका = चमकना। पाँसळी = पसली। रान = लगाम। ढळकग्या = नीचे गिर गई। पाटा पीड़ = मरहम-पट्टी। ठबक्या = स्तब्ध, चकित। लुगाई = स्त्री। बेन = बहिन। माळकाँ = मालिकों की। हरामखोरी = धोखेबाजी। परताप = प्रताप, तेजस्विता। माँवां = माताएँ। मरजी = इच्छा। बगसावो = दीजिए। हूंकार = ललकारने का भाव, स्वाभिमान सूचक भाव। पैर = पहनकर।

गयांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ तथा अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
1. मेवाड़ रा सारा सरदारां रे नाम हुकम लिख्यो गियो। “सारा सरदार आप री पूरी जमीत अर पूरा ससतराँ सूधी उदैपुर हुकम पोंचतां ही हाजर व्हे जावै। देर नी करै।” हुकम रे ऊपरै राणाजी आप दसगतां तूं दो ओळाँ लिखी, “जो हाजर नी व्हेला वीं री जागीर एकदम जब्त करली जावैला। काँई तरै री रियायत कोनी होसी। देस री विपद री वेळा में हाजर नीं व्हेणों हरामखोरी मानी जासी।”

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक के ‘हूंकार की कलंगी’ नामक पाठ से अवतरित है। इस अंश में आक्रमण के समय उदयपुर के महाराणा का अपने सरदारों को दिए गए आदेश का उल्लेख है।

व्याख्या:
उदयपुर के महाराणा ने शत्रु के आक्रमण को देखकर मेवाड़ के सारे सरदारों को आदेशित किया कि वे समस्त सैन्यबल और शस्त्रों सहित इस आदेश के पहुँचते ही उदयपुर उपस्थित हो जाएँ। इसमें किसी प्रकार का विवि नहीं होना चाहिए। इस आदेश के ऊपर राणाजी ने हस्ताक्षर करते हुए दो चेतावनी भरी पंक्तियाँ लिखीं जिसमें उन्होंने लिखा कि जो हाजिर नहीं होगा उसकी जागीर जब्त कर ली जाएगी। इसमें किसी तरह की कोई छूट नहीं होगी। देश इस समय विपत्ति की बेला से गुजर रहा है और जो कोई भी इसमें उपस्थित नहीं होगा उसका यह कृत्य हरामखोरी और धोखेबाजी की श्रेणी में माना जाएगा।

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प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
महाराणा का आदेश।

प्रश्न 2.
आदेश पर हस्ताक्षर किसने किए?
उत्तर:
आदेश पर हस्ताक्षर राणाजी ने किए।

प्रश्न 3.
मेवाड़ के सारे सरदारों को क्या हुक्म दिया गया ?
उत्तर:
मेवाड़ के सारे सरदारों को हुक्म दिया गया कि वे अपने समस्त सैन्यबल सहित एवं शस्त्रों को लेकर आदेश मिलते ही उदयपुर पहुँचें।

प्रश्न 4.
आदेश के ऊपर दो पंक्तियों में राणाजी ने क्या लिखा?
उत्तर:
आदेश के ऊपर राणाजी ने लिखा कि जो उपस्थित नहीं होगा उसकी जागीर जब्त कर ली जाएगी। उसमें किसी प्रकार की रियायत नहीं होगी। देश की विपदा के समय अनुपस्थिति हरामखोरी मानी जाएगी।

2. हमलो व्हीयो। हड़ोल चूंडावताँ री। हमलो करै तो पै’लां हड़ोल वाळा ही आगै बढे अर सत्रुवाँ रो हमलो झेलै तो ही हडोल पै ही जोर आवै। सिंधू राग गावण लाग्या। हड़ोल रै अधबीचै, चूंडावताँ रा पाटवी सळूबर रावजी ऊभा व्हे बोल्या, “मरदाँ ! दुसमणाँ पै घोड़ा ऊर दो। मर जाणो पण पग पाछो नी देणो। या हडोल में रैवारी इज्जत, आपाँ पीढ्याँ सँ निभाय रिया हां, आज ई आपणी जिम्मेदारी ने पूरी निभावजो, देस सारु मरणो अमर व्हेणो है। हाँ, बँचो लगामाँ।”

संदर्भ एवं प्रसंग:
हमारी पाठ्य पुस्तक के ‘हूंकार की कलंगी’ नामक पाठ से संकलित इस अंश में युद्ध के दृश्य का वर्णन हुआ है। युद्ध में हमला होना तथा उसका जवाब देना आदि परंपराओं का उल्लेख हुआ है।

व्याख्या:
जब हमला हुआ तो परंपरानुसार हड़ौल की कमान रियासत के चूंडावत सैनिकों ने संभाली। परंपरा थी कि यदि आक्रमण होगा तो पहला आक्रमण हड़ौल वाले ही करेंगे और शत्रु का हमला हुआ तो उसे झेलने वाले भी हड़ौल के चूंडावत ही होंगे। सिंधूराग यानी कि युद्ध के गान गाए जाने लगे। सैनिकों के बीच में चूंडावतों के मुखिया एवं नेतृत्वकर्ता सलूंबर राव खड़े होकर बोलने लगे कि मर्दी!

आज दुश्मनों पर घोड़े चढ़ा दो। मर जाना लेकिन अपने पैर पीछे मत आने देना। यही हड़ौल में रहने की इज्जत है। हम लोगों ने पीढ़ियों से इस इज्जत व शान को बनाए रखा है। आज भी आप इस इज्जत को निभाएँगे। एक बात ध्यान में रखना कि देश की इज्जत के लिए मरना मतलब अमर हो जाना है। खींचो अपने घोड़ों की लगाम और दुश्मनों पर टूट पड़ो।

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
हड़ौलों की युद्ध परंपरा।

प्रश्न 2.
युद्ध के समय कौन-सा राग गाया जाता है?
उत्तर:
युद्ध के समय सिंधूराग गाया जाता है।

प्रश्न 3.
आक्रमण के समय कौन आगे रहते थे?
उत्तर:
हड़ौल चूंडावतों की थी। हमला करते समय वे ही आगे रहते, वे ही आगे बढ़ते।

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प्रश्न 4.
सलूंबर राव ने अपने सैनिकों को क्या सीख दी?
उत्तर:
सलूम्बर राव ने कहा कि वीरो! दुश्मनों पर घोड़े दौड़ा दो। मर जाना, लेकिन पीछे मत हटना। इस हड़ौल में रहने के लिए यही प्रतिष्ठा का सूचक है।

3. करुणा अर गुमान रा आँसू राणाजी रे आँख्या में छलक गिया। “धन्न है थाँ!” राणाजी गद्गद व्हेग्या! “यो मेवाड़ बरसाँ सँ आन राख रियो जो था जसी देवियाँ रो परताप है। थाँ देवियाँ म्हारो अर मेवाड़ रो माथो ऊँचो कर राख्यो है। जठा तक असी माँवां है जतरै आपाँ रो देस पराधीन कोनी व्है।”

संदर्भ एवं प्रसंग:
हूँकार की कलंगी’ नामक पाठ से यह अंश संकलित है। इसमें उस दृश्य का वर्णन है, जब महाराणा को यह पता लगा कि कोसीथल ठाकुर की माँ ने युद्धभूमि में लड़ाई लड़ी तो उनका मस्तक गर्व से ऊँचा हो गया।

व्याख्या:
राणाजी ने ठाकुर की माँ की वीरता को देखकर कहा आप धन्य हैं। प्रसन्नता और भावुकता के साथ यह कहते हुए राणाजी की आँखों से करुणा और अभिमान के आँसू छलक पड़े। मेवाड़ की आन-बान और शान के लिए क्षत्राणियों ने जो परंपरा बनाई वह आज भी आप जैसी देवियों का ही प्रताप है। यह दृश्य देखकर राणाजी कहने लगे कि मेवाड़ का सिर आप जैसी देवियों ने सदैव ऊँचा रखा है। समय आने पर आप जैसी नारियों ने इसकी रक्षा की है। जब तक ऐसी माताएँ हैं, तब तक इस देश को कोई पराधीन नहीं कर सकता। महाराणा ने माँजी का इस तरह मान किया।

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
कोसीथळ ठाकुर की वीर माँ।

प्रश्न 2.
राणाजी के अनुसार मेवाड़ के सिर को ऊँचा किसने रखा है ?
उत्तर:
राणाजी के अनुसार यहाँ की वीर नारियों ने मेवाड़ का सिर सदा ऊँचा रखा है।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 17 हूंकार की कलंगी

प्रश्न 3.
राणाजी की आँखों से आँसू क्यों छलक पड़े ?
उत्तर:
माँजी की वीरता और साहस को देखकर करुणा और गर्व के आँसू राणाजी की आँखों से छलक पड़े।

प्रश्न 4.
मेवाड़ की आन में नारियों की क्या भूमिका रही है?
उत्तर:
मेवाड़ की वर्षों से चली आ रही आन-बान में यहाँ की नारियों ने अपनी भूमिका निभाई है। समय-समय पर पर उन्होंने युद्ध भूमि में वीरता भी दिखाई और जौहर की ज्वाला में भी कूद पड़ी।

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