RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 13 अपराजिता

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi Chapter 13 अपराजिता (कहानी)

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

RBSE Class 8 Hindi अपराजिता पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठ से

सोचें और बताएँ

प्रश्न. 1.
डॉ. चंद्रा ने कौन-कौन सी उपाधियाँ प्राप्त की थीं ?
उत्तर:
डॉ. चंद्रा ने बी.एससी. प्राणिशास्त्र में एम.एससी., माइक्रोबायलोजी में पीएच.डी. तथा जर्मन भाषा की शिक्षा की उपाधियाँ प्राप्त की।

प्रश्न 2.
लेखिका ने “नशे की गोलियाँ खाने लगा” किस व्यक्ति के लिए कहा और क्यों ?
उत्तर:
लेखिका ने “नशे की गोलियाँ खाने लगा” यह लखनऊ के मेधावी लड़के के लिए कहा क्योंकि वह आई. ए.एस. की परीक्षा देकर इलाहाबाद से लौटते समय ट्रेन से गिरकर अपना हाथ गँवा बैठा था और निराशा में डूब गया था।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 13 अपराजिता

लिखें

RBSE Class 8 Hindi अपराजिता बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
अपराजिता कहा गया है –
(क) श्रीमती टी. सुब्रह्मण्यम् को
(ख) प्रोफेसर को
(ग) आई.ए.एस. को
(घ) चंद्रा को
उत्तर:
(घ) चंद्रा को

प्रश्न 2.
डॉ. चंद्रा को माइक्रोबायोलॉजी में पीएच.डी. मिली –
(क) 1976 ई. में
(ख) 1977 ई. में
(ग) 1967 ई. में
(घ) 1966 ई. में
उत्तर:
(क) 1976 ई. में

निम्नलिखित वाक्यों में से गलत वाक्यों को सही करके लिखिए –
1. ‘अपराजिता’ पाठ की लेखक शिवानी है।
2. डॉ. चंद्रां अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति थी।
3. डॉ. चंद्रा की माताजी श्रीमती टी. सुब्रह्मण्यम् ने अपनी बेटी के लिए कोई साधना नहीं की।
4. हमें विपरीत परिस्थितियों में हाथ-पर-हाथ धर कर बैठ जाना चाहिए।
5. डॉ. चंद्रा का निचला धड़ काम नहीं करता था।
उत्तर:
सही वाक्य:
1. ‘अपराजिता’ पाठ की लेखिका शिवानी हैं।
3. डॉ. चन्द्रा की माताजी श्रीमती टी. सुब्रह्मण्यम् ने अपनी बेटी के लिए बहुत कठिन साधना की।
4. हमें विपरीत परिस्थितियों में हाथ-पर-हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

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RBSE Class 8 Hindi अपराजिता अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
“मैडम मैं चाहती हूँकि कोई मुझे सामान्य-सा सहारा भी न दें” ये शब्द किसके हैं?
उत्तर:
ये शब्द डॉ. चंद्रा के हैं।

प्रश्न 2.
लेखिका ने डॉ. चंद्रा को सबसे पहले कहाँ देखा ?
उत्तर:
लेखिका ने डॉ. चंद्रा को स्वयं के बंगले के पास अपनी शानदार कोठी में कार से उतरते हुए देखा।

प्रश्न 3.
‘वीर जननी’ पुरस्कार किसे मिला?
उत्तर:
वीर जननी का पुरस्कार टी. सुब्रह्मण्यम् को मिला।

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RBSE Class 8 Hindi अपराजिता लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
डॉ. चंद्रा की शारीरिक अक्षमता उसका साहस थी,कैसे?
उत्तर:
डॉ. चंद्रा बड़ी-बड़ी इच्छाएँ रखने वाली महिला थीं। वह किसी से साधारण-सा सहारा भी नहीं चाहती थीं। वह अपना कार्य स्वयं करना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने एक ऐसी कार बनाई जिसे वे स्वयं चला सकें। वह अपनी प्रयोगशाला के कार्यों को सुगम बनाकर उसका संचालन स्वयं करती थीं।

प्रश्न 2.
“ईश्वर सब द्वार एक साथ बंद नहीं करता। यदि एक द्वार बंद करता भी है, तो दूसरा द्वार खोल देता है” चंद्रा की माता जी ने यह बात क्यों कही ?
उत्तर:
“ईश्वर सब द्वार एक साथ बंद नहीं करता। यदि एक द्वार बंद करता भी है, तो दूसरा द्वार खोल देता है” चंद्रा की माताजी ने यह बात इसलिए कही क्योंकि जब उनकी पुत्री को मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला तो उसने विज्ञान के क्षेत्र में शिक्षा पाकर उच्चतम सफलता प्राप्त की।

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प्रश्न 3.
लखनऊ के छात्र को डॉ. चंद्रा से क्या प्रेरणा लेनी चाहिए?
उत्तर:
लखनऊ के छात्र को डॉ चंद्रा से यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि किसी भी परिस्थिति से घबराना नहीं चाहिए और उसका साहस से मुकाबला करना चाहिए। डॉ. चंद्रा अपंग, होते हुए भी अदम्य उत्साह, प्रसन्नता से भरपूर थीं।।

RBSE Class 8 Hindi अपराजिता दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अपराजिता डॉ. चंद्रा की माताजी सहृदयता और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति थीं, कैसे ? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
अपराजिता डॉ. चंद्रा की माता सहृदयता और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति थी। उन्होंने अपनी पुत्री के प्रति जो अगाध प्रेम और वात्सल्य दर्शाया है वह अतुलनीय है। उनकी पुत्री चंद्रा शारीरिक रूप से अक्षम थी। वे भगवान से निरंतर उसके जीवन के लिए प्रार्थना करती रहती थीं। जब एक प्रसिद्ध आर्थोपैडिक सर्जन के विषय में सुना तो वहाँ एक वर्ष तक चंद्रा का इलाज कराया और बेटी के कुछ ठीक होने पर उसे स्कूली शिक्षा स्वयं दी। उसकी उच्च शिक्षा के लिए हर समय उसकी छाया बनकर उसकी व्हील चेयर के पीछे-पीछे घूमती रही। अपनी पुत्री की बड़ी उपलब्धियों में उनका बहुत योगदान रहा। श्रीमती सुब्रह्मण्यम में अपार शक्ति थी। उन्होंने अपनी पुत्री को भरपूर साहस देकर उसे सफलता की चरम सीमा तक पहुँचा दिया। वे ममत्व की मूर्ति थीं।

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प्रश्न 2.
“विचार परिवर्तनशील होते हैं।”लेखिका ने ऐसा क्यों-कहा था?
उत्तर:
संकेत-पाठ्य सामग्री में यह वाक्य ही नहीं है।

भाषा की बात

1. “डॉ. चंद्रा अदम्य साहस की धनी थी” वाक्य में ‘साहस’ शब्द डॉ. चंद्रा की विशेषता बता रहा है यह गुणवाचक विशेषण है। इसी प्रकार के अन्य विशेषण छाँटकर सूची बनाइए।
उत्तर:
1. कुछ माह, सारा काम, समस्त सामग्री, बहुत छोटी-परिमाण वाचक विशेषण। अठारहवें महीने, चौथा दिन-संख्यावाचक विशेषण।
2. अपठित शब्द का अर्थ होता है, जो पहले से न पढ़ा हो। अपठित गद्यांश गद्य के वे अंश हैं, जो हमने पहले नहीं पढ़े हैं, ऐसे गद्यांशों को पढ़कर समझा जाता है, फिर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए जाते हैं।

आप भी नीचे लिखे गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
बाँस का यह झुरमुट मुझे अमीर बना देता है। उससे मैं अपना घर बना सकता हूँ। बाँस के बर्तन और औजार इस्तेमाल करता हूँ। सूखे बाँस को मैं ईंधन की तरह इस्तेमाल करता हूँ। बाँस का आचार खाता हूँ। बाँस के पालने में मेरा बचपन गुजरा। आज मेरा बच्चा भी बाँस के पालने में ही झूलता है। मैं बाँस से बनी सामग्री बेचकर जीवनयापन करता हूँ।
(क) उपर्युक्त मद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) लेखक को अमीर कौन बना देता है?
(ग) लेखक की जीविका कैसे चलती है?
उत्तर:
(क) उपयोगी बाँस।
(ख) लेखक को बाँस अमीर बना देता है।
(ग) लेखक की जीविका बाँस से चलती है।

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3. निम्नलिखित शब्दों को शब्दकोश क्रम में लिखिए –
अपराजिता, चंद्रा, चिकित्सा, लखनऊ, प्रयोगशाला, ईश्वर, पुत्री, ईंट, चींटी, प्रसिद्ध, प्रौढ़ा, आश्चर्य।
उत्तर:
अपराजिता, आश्चर्य, ईश्वर, ईंट, चिकित्सा, चींटी. चंद्रा, पुत्री, प्रयोगशाला, प्रसिद्ध, प्रौढ़ा, लखनऊ।

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
अपराजिता के स्थान पर आप होते तो क्या करते? सोचकर लिखिए।
उत्तर:
अपराजिता के स्थान पर हम होते तो साहस से काम लेते। जीवन को जीने की नई दिशा देते। हम कभी निराश नहीं होते और अपने विकास के लिए जहाँ कहीं भी सफलता की संभावनाएँ दिखाई पड़ती उन्हें पाने का प्रयास करते। हम कभी अपनी हिम्मत को टूटने नहीं देते। कहावत भी है कि हिम्मते मर्दा मददे खुदा। यदि मनुष्य हिम्मत करता है तो भगवान भी उसकी सहायता करता है। हम अपनी अपंगता को अपने विकास में कभी आड़े नहीं आने देते। अपनी महत्वाकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ते रहते।

प्रश्न 2.
पाठ में सम्मिलित निम्न योग्यताओं / परीक्षाओं के पूरे नाम शिक्षक से जानिए – बी.एससी., एम.एससी., पीएच.डी., आई.ए.एस.
उत्तर:
बी.एससी:
बैचलर ऑफ साइंस एम.एससी. – मास्टर ऑफ साइंस पी.एचडी.-डाक्टर ऑफ फिलॉसफी आई.ए.एस.-इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस

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प्रश्न 3.
ऐसी अन्य उपाधियों / योग्यताओं की सूची बनाइए।
उत्तर:
बी.ए.-बैचलर ऑफ आर्ट्स एम.ए – मास्टर ऑफ आर्ट्स बी.एड. – बैचलर ऑफ एजूकेशन एम.एड.-मास्टर ऑफ एजुकेशन

यह भी करें

प्रश्न 1.
राजस्थान में कई ऐसी संस्थाएँ हैं जो विशेष योग्यजन की चिकित्सा सहायता से जुड़ी हैं। उनका पता कीजिए – और अपनी व्यक्तिगत डायरी में लिखिए। जरूरतमंद व्यक्तियों तक उक्त जानकारी पहुँचाइए।
उत्तर:
नारायण सेवा संस्थान, जोधपुर ऐसी संस्था है जो जरूरतमंदों की सहायता करती है और उनको समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास करती है।

प्रश्न 2.
इस प्रकार की कहानियों का संकलन कर साहस और सौहार्द की घटनाएँ बाल-सभा में सुनाएँ।
उत्तर:
संकेत – छात्र स्वयं करें।

मन की बात

प्रश्न  1.
डॉ. चंद्रा को लेखिका ने अपराजिता कहा है। आप उसे और क्या नाम देना चाहेंगे ?
उत्तर:
अनन्या, दिव्यांशी, देवांगना।

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प्रश्न  2.
‘मेरी माँ’ विषय पर एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर:
सबको जन्म देने वाली माँ ही होती है। सबका यही कहना होता है कि मेरी माँ बहुत अच्छी है। मेरी माँ मुझे बहुत प्यारी लगती है। माँ मुझे बहुत प्यार करती है। वह मेरे प्रत्येक कार्य में मेरी सहायता करती है। जब मैं बहुत परेशान होती हैं तो मेरी माँ मझे अपने प्यार के स्पर्श से सहलाती है इससे मेरी परेशानी दूर हो जाती है। वह मुझे परेशानी का अहसास नहीं होने देती है। मैं अपनी माँ को अपना सबसे बड़ा सहारा मानती हूँ। तब और अब नीचे लिखे शब्दों के मानक रूप लिखिएद्वार, बुद्धि, दीप्त, प्रसिद्ध उत्तर-द्वार, बुद्धि, दीप्त, प्रसिद्ध

RBSE Class 8 Hindi अपराजिता अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 8 Hindi अपराजिता बहुविकल्पीय

प्रश्न 1.
श्रीमती टी. सुब्रह्मण्यम् ने कठिन साधना की –
(क) जीवन भर
(ख) पच्चीस वर्षों तक
(ग) कुछ दिनों तक
(घ) कुछ घंटों तक।
उत्तर:
(ख) पच्चीस वर्षों तक

प्रश्न  2.
हँसमुख लड़की चंद्रा की वेशभूषा ने लेखिका को स्मरण करा दिया –
(क) अपनी पुत्री का
(ख) अंतरिक्ष यात्री का
(ग) किसी अभिनेता का
(घ) राणा सांगा का।
उत्तर:
(घ) राणा सांगा का।

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प्रश्न  3.
श्रीमती सुब्रह्मण्यम् को चमत्कृत कर दिया –
(क) लेखिका की बातों ने
(ख) संत के आशीर्वाद ने
(ग) बेटी की अनोखी बदधि ने
(घ) डाक्टरों के आश्वासन ने।
उत्तर:
(ग) बेटी की अनोखी बदधि ने

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(दक्षता, रिक्तता, विच्छिन्न, निर्जीव, नीरस, जिह्वाग्र, प्रतिभा)

  1. स्वयं अपने जीवन की ……………. बहुत छोटी लगने लगती
  2. एक युवती ने अपने …………. निचले धड़ को बड़ी ………….से नीचे उतारा।
  3. …………… भुजा के साथ-साथ, धीरे-धीरे वह मानसिक संतुलन भी खो बैठा।
  4. सरस्वती स्वयं ही जैसे ………….. पर बैठ गई थीं।

उत्तर:

  1. रिक्तता
  2. निर्जीव, दक्षता
  3. विच्छिन्न
  4.  जिह्वाग्र।

RBSE Class 8 Hindi अपराजिता अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखिका ने पिछले महीने किसे देखा था?
उत्तर:
लेखिका ने पिछले महीने एक ऐसी अभिशप्त काया देखी थी जिसे विधाता ने कठोरतम दंड दिया था।

प्रश्न 2.
वह बिते-भर की लड़की लेखिका को किससे कम नहीं लगी ?
उत्तर:
वह बितेभर की लड़की मुझे किसी देवांगना से कम नहीं लगी।

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प्रश्न 3.
युवक किस परीक्षा को देने इलाहाबाद गया था?
उत्तर:
युवक आई.ए.एस. की परीक्षा देने इलाहाबाद गया था।

प्रश्न 4.
डॉ. चंद्रा का गर्दन से नीचे का भाग क्यों निर्जीव हो गया था ?
उत्तर:
डॉ. चंद्रा का गर्दन से नीचे का भाग पोलियो नामक बीमारी ने निर्जीव कर दिया था।

प्रश्न 5.
डॉ. चंद्रा की माँ उसे बैंगलूर के किस स्कूल में प्रवेश दिलाना चाहती थीं?
उत्तर:
बैंगलूर के प्रसिद्ध माउंट कारमेल स्कूल में।

RBSE Class 8 Hindi अपराजिता लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखिका को डॉ. चंद्रा की कहानी सुनकर कौन-सा युवक याद आया ?
उत्तर:
लेखिका को उदास आँखों वाला वह गोरा उजले वस्त्रों से सज्जित लखनऊ का मेधावी युवक याद आया जिसे | कुछ माह पूर्व लेखिका ने अपनी बहन के यहाँ देखा था। वह
युवक जीवन से निराश होकर जी रहा था।

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प्रश्न 2.
डॉ. चंद्रा ने कैसी कार का नक्शा बनाया था?
उत्तर:
डॉ. चंद्रा की कार उनकी माँ को चलानी पड़ती थी जिससे उसकी माँ टी. सुब्रहमण्यम् को बहत परेशानी होती थी। अपनी माँ को ज्यादा परेशान न करने के उद्देश्य से डॉ. चंद्रा ने ऐसी कार का नक्शा बनाया जिसे वह स्वयं चला सकें।

प्रश्न 3.
डॉक्टरेट की उपाधि संयुक्त रूप से किस-किसको मिलनी चाहिए थी और क्यों?
उत्तर:
डॉक्टरेट की उपाधि संयुक्त रूप से डॉ. चंद्रा और उनकी माताजी श्रीमती टी. सुब्रह्मण्यम् को मिलनी चाहिए थी क्योंकि उनकी माँ ने पच्चीस वर्षों तक अपनी पुत्री के साथ कठिन साधना की थी। पीएच.डी. के शोध कार्य में भी वे उनके साथ लगी रहती थीं।

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प्रश्न 4.
लेखिका को उस हँसमुख लड़की को देखकर किसका नाम स्मरण हो आता था?
उत्तर:
लैदर जैकेट के कठिन जिरह-बख्तर में कसी उस हँसमुख लड़की को देख लेखिका को युद्ध क्षेत्र में डटे राणा सांगा का स्मरण हो आता था। क्षतविक्षत शरीर, घावों के असंख्य चिह्न किंतु आभामंडित भव्य मुद्रा आकर्षित करती थी।

RBSE Class 8 Hindi अपराजिता दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लखनऊ के युवक एवं डॉ. चंद्रा में क्या अंतर था?
उत्तर:
लखनऊ का वह युवक आई.ए.एस. की परीक्षा देने इलाहाबाद गया था। वहाँ से लौटते समय किसी स्टेशन पर चाय लेने उतरा कि गाड़ी चल पड़ी और चलती ट्रेन में हाथ में चाय के कुल्हड़ सहित चढ़ने के प्रयास में वह गिर गया और हाथ पहिए के नीचे आ गया। प्राण तो बच गए परंतु दायाँ हाथ चला गया। उसी विच्छिन्न भुजा के साथ-साथ रहते हुए उसका दु:ख बढ़ गया वह निराश होकर नशे की गोलियाँ खाने लगा।

केवल एक हाथ खोकर ही उसने हथियार डाल दिए। दूसरी ओर डॉ. चंद्रा जिनके शरीर का निचला धड़ निष्प्राण था, मांस पिंड मात्र, सदा उत्फुल्ल हैं, चेहरे पर विषाद की एक रेखा भी नहीं थी। उसकी आँखों में अपार उत्साह था। हर पल उसमें अपना जीवन जीने की उत्कंठा और जीवन में उच्चतम ऊँचाइयों तक पहुँचने की महत्वाकांक्षाएँ थीं।

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प्रश्न 2.
“चिकित्सा ने जो खोया है, वह विज्ञान ने पाया है।” डॉ. चंद्रा के प्रोफेसर ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर:
प्रोफेसर का मानना था कि डॉ. चंद्रा अपंग होते हुए भी बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं। अपनी महत्वाकांक्षा के कारण वे एक डॉक्टर बनना चाहती थी जिसके लिए उन्होंने कठिन परिश्रम करके मेडिकल परीक्षा में प्रथम स्थान भी प्राप्त कर लिया लेकिन उनकी अपंगता के कारण उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया इसके बाद भी डॉ. चंद्रा ने हिम्मत नहीं हारी वे कभी निराश नहीं हुईं।

उन्होंने अपनी दिशा मोड़ दी और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ी तथा माइक्रोबायालोजी में पीएच. डी. (शोध कार्य) की उपाधि प्राप्त की। यदि उनके बुद्धि कौशल का लाभ चिकित्सा क्षेत्र को मिलता तो चिकित्सा क्षेत्र लाभान्वित होता किंतु डॉ चंद्रा को प्रवेश न देकर चिकित्सा क्षेत्र ने बहुत कुछ खो दिया और वही विलक्षण प्रतिभा विज्ञान के क्षेत्र से जुड़ गई जिसका लाभ विज्ञान को मिला।

पाठ-परिचय:
अपराजिता पाठ में लेखिका ने एक ऐसी लड़की के व्यक्तित्व को उभारा है, जिसके शरीर के अधिकांश अंग निर्बल थे। किंतु उसने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर सिद्ध कर दिया कि वह अक्षम नहीं सक्षम है। लेखिका शिवानी को अपने पड़ोस की एक शारीरिक रूप से अक्षम लड़की डॉ. चंद्रा को देखकर ऐसा लगा कि वह समाज के निराश व अक्षम लोगों के लिए प्रेरणा-स्रोत है। इसी के साथ जुड़ी डा. चंद्रा की माँ की भी कहानी है जिन्होंने अपने जीवन के सारे सुख अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए न्योछावर कर दिए। डा. चंद्रा को मिली सभी सफलताओं के पीछे उनकी माँ टी. सुब्रह्मण्यम् का महान योगदान है।

कठिन शब्दार्थ:
विधाता = ईश्वर। स्वयं = अपने आप। विलक्षण = अद्भुत। रिक्तता = खालीपन। अकारण = बिना कारण के। अंतर्यामी = अंदर की बातें जाने वाला, ईश्वर। अकस्मात = अचानक। विच्छिन्न = अलग करना। कठिन = मुश्किल। उत्फल्ल= प्रसन्नतापूर्वक। अपराजिता = जिसने कभी हार न मानी हो। चेयर = कुर्सी। काया = शरीर। विपत्ति = परेशानी। दंड = सजा। प्रौढ़ा = अधेड़ उम्र की। व्हील = पहिये। निर्जीव = बेजान। नित्य = प्रतिदिन। भीतर = अंदर। दंग = हैरान। तटस्थता= सहज भाव। नियत = निश्चित। नियति = भाग्य। आघात = कष्ट। दक्षता = चतुराई। देवांगना = देवी। बितेभर = छोटी-सी। उदास = दुखी। उजले = साफ। मेधावी = होशियार।

विच्छिन्न = कटी हुई। भुजा = हाथ। मानसिक = मन का। संतुलन = नियंत्रण। पूर्व = पहले। निचला = नीचे का। धड़ = शरीर का हिस्सा। पटुता = चतुराई। अभिशप्त = जिसे किसी का शाप लगा हो। मात्र = केवल। जिजीविषा = जीने की इच्छा। बोटी-बोटी = अंग-अंग। सुगम = आसान। सुदृढ़ = मजबूत। निरंतर = लगातार । यातनाप्रद = कष्ट देने वाली। सहिष्णु = सहनशील। डॉक्टरेट = पीएच. डी. (शोधकार्य) डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी। पक्षाघात= लकवा । स्वर = आवाज। जिहवाग्र = जीभ के अगले भाग पर। सर्वोच्च = सबसे ऊँचा। क्षत-विक्षत = घायल। दम = ताकत। शल्य = चीरफाड़। रंचमात्र = थोड़ा-सा। पृष्ठ = पन्ना। विशिष्ट = विशेष। जननी = माँ। उल्लास = खुशी। व्यथा = परेशानी। द्वार = दरवाजा।

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गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ तथा अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
1. उसकी कोठी का अहाता एकदम हमारे बंगले के अहाते से जुड़ा था। अपनी शानदार कोठी में उसे पहली बार कार से उतरते देखा तो आश्चर्य से देखती ही रह गई। कार का द्वार खुला, एक प्रौढ़ा ने उतरकर पिछली सीट से व्हील चेयर निकाल कर सामने रख दी और भीतर चली गई। दूसरे ही क्षण, धीरे-धीरे बिना किसी सहारे के, कार से एक युवती ने अपने निर्जीव निचले धड़ को बड़ी दक्षता से नीचे उतारा, फिर वैसाखियों से ही व्हील चेयर तक पहुँच उसमें बैठ गई और बड़ी तटस्थता से उसे स्वयं चलाती कोठी के भीतर चली गई। मैं फिर नित्य नियत समय पर उसका यह आवागमन देखती और आश्चर्यचकित रह जाती-ठीक जैसे कोई मशीन बटन खटखटांती अपना काम किए चली जा रही हो। संदर्भ एवं प्रसंग प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘अपराजिता’ नामक पाठ से लिया गया है। इसकी लेखिका शिवानी हैं। इन पंक्तियों में शारीरिक रूप से अक्षम महिला

की हिम्मत के बारे में बताया गया है। व्याख्या लेखिका शिवानी कहती हैं कि उस युवती की कोठी और उनका बंगला सटे हुए थे। जब उन्होंने पहली बार डॉ. चंद्रा को देखा तो आश्चर्य से चकित हो गई थीं। एक कार से अधेड़ उम्र की महिला ने एक व्हील चेयर निकाल कर रख दिया और फिर डॉ. चंद्रा ने बिना किसी सहारे के अपने निर्जीव धड़ को सावधानी से नीचे उतारा और फिर वैसाखी से व्हील चेयर तक पहुँच कर उस पर बैठ गईं। उसे स्वयं चलाकर वह अपनी कोठी में चली गईं। उनका प्रतिदिन का आना-जाना और कार्य-शैली को देखकर उन्हें लगा कि डॉ. चंद्रा किसी रोबोट की भाँति कार्य करती रहती थीं।

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
अपराजिता डॉ. चन्द्रा।

प्रश्न 2.
लेखिका के बँगले के पास किसकी कोठी थी ?
उत्तर:
लेखिका के बंगले के पास डॉ. चंद्रा की कोठी थी।

प्रश्न 3.
लेखिका ने डॉ. चंद्रा को पहली बार कब देखा?
उत्तर:
लेखिका ने डॉ. चंद्रा को पहली बार तब देखा जब वह कार से अपनी कोठी में आकर उतरी थीं।

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प्रश्न 4.
डॉ. चंद्रा को देखकर लेखिका को कैसा लगा ?
उत्तर:
डॉ. चंद्रा को देखकर लेखिका को लगा जैसे कोई मशीन बटन खटखटाते अपना काम करती जा रही हो।

2. मैं चाहती हूँ कि मेरी पंक्तियों को उदास आँखों वाला वह गोरा, उजले वस्त्रों से सज्जित लखनऊ का मेधावी युवक भी पढ़े, जिसे मैंने कुछ माह पूर्व अपनी बहन के यहाँ देखा था। वह आई. ए. एस. की परीक्षा देने इलाहाबाद गया। लौटते समय किसी स्टेशन पर चाय लेने उतरा कि गाड़ी चल पड़ी। चलती ट्रेन में हाथ के कुल्हड़ सहित चढ़ने के प्रयास में गिरा और पहिये के नीचे हाथ पड़ गया। प्राण तो बच गए, पर दायाँ हाथ चला गया।

उसी विच्छिन्न भुजा के साथ-साथ धीरे-धीरे वह मानसिक संतुलन भी खो बैठा। दुख भुलाने के लिए नशे की गोलियाँ खाने लगा। केवल एक हाथ खोकर ही उसने हथियार डाल दिए। इधर चंद्रा, जिसका निचला धड़ है निष्प्राण, मांसपिंड मात्र, सदा उत्फुल्ल है, चेहरे पर विषाद की एक रेखा भी नहीं, बुद्धिदीप्त, आँखों में एक अदम्य उत्साह, प्रतिपल-प्रतिक्षण भरपूर जीने की उत्कट जिजीविषा और फिर कैसी-कैसी महत्त्वाकांक्षाएँ।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘अपराजिता’ नामक पाठ से लिया गया है। इस पाठ की लेखिका शिवानी हैं। यहाँ एक युवक की निराशा और अपंग डॉ. चंद्रा के उत्साह के बारे में बताया गया है।

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व्याख्या:
लेखिका शिवानी का कहना है कि मैंने लखनऊ के एक ऐसे मेधावी युवक को देखा था जो आई. ए. एस. की परीक्षा देने इलाहाबाद गया और लौटते समय ट्रेन से गिरने के कारण घायल हो गया था। उसकी एक भुजा कट गयी थी। इस वजह से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया और वह नशे का आदी हो गया। वह निराश हो गया था। एक तरफ डॉ. चंद्रा जैसी उत्साह से भरपूर लड़की थीं।

जिसके शरीर का निचला हिस्सा निर्जीव था, केवल एक मांस का पिंड जैसा था, उसमें जीवन को जीने की ललक बनी हुई थी और मन में बड़ी ऊँची-ऊँची इच्छाएँ विद्यमान र्थी शरीर का निचला हिस्सा निर्जीव होने के बावजूद वह अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहीं हैं। शारीरिक अक्षमता उसके कार्य में आड़े नहीं आ रही है। लेखिका चाहती है कि जिंदगी से निराश लोग उससे सबक लें और विकास के पथ पर आगे बढ़ें।

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
उत्कट जिजीविषा का जीवन में महत्व।

प्रश्न 2.
चंद्रा कैसी लडकी थी? उत्तर:
चंद्रा अपंग होते हुए भी अत्यंत साहसी और महत्वाकांक्षी लड़की थी।

प्रश्न 3.
युवक का हाथ कब कट गया?
उत्तर:
युवक जब आई.ए.एस. की परीक्षा देने इलाहाबाद गया था तब एक ट्रेन दुर्घटना में उसका हाथ कट गया।

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प्रश्न 4.
युवक पर दुर्घटना का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
युवक दुर्घटना के बाद मानसिक संतुलन खो बैठा और नशे की गोलियाँ खाने लगा।

3. मेरी बड़ी इच्छा थी, मैं डॉक्टर बनूँ। मैं अपंग डॉ. मेरी वर्गीज के सफल जीवन की कहानी पढ़ चुकी थी। परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर भी मुझे मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला। कहा गया मेरा निचला धड़ निर्जीव है, मैं एक सफल शल्य-चिकित्सक नहीं बन पाऊँगी” किंतु डॉ. चंद्रा को प्रोफेसर के शब्दों में, “मुझे यह कहने में रंचमात्र भी हिचकिचाहट नहीं होती कि डॉ. चंद्रा ने विज्ञान की प्रगति में महान् योगदान दिया है। चिकित्सा ने जो खोया है, वह विज्ञान ने पाया।”

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘अपराजिता’ नामक पाठ से लिया गया है। इसकी लेखिका शिवानी हैं। इसमें डॉ. चंद्रा के विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के विषय में बताया गया है, जिससे चिकित्सा क्षेत्र वंचित रह
गया।

व्याख्या:
लेखिका शिवानी के अनुसार डॉ. चंद्रा, डॉ. मेरी वर्गीज के सफल जीवन की कहानी पढ़कर डाक्टर बनना चाहती थीं। डॉ. चंद्रा को मेडिकल की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के बावजूद भी प्रवेश नहीं मिला। उन्हें शारीरिक अपंगता के कारण कह दिया गया था कि वे एक सफल शल्य-चिकित्सक नहीं बन सकेंगी। डॉ. चंद्रा निराश नहीं हुईं और विज्ञान के क्षेत्र में चली गईं। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उनके प्रोफेसर ने बिना संकोच के कहा कि डा. चंद्रा ने विज्ञान के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उनकी प्रतिभा का जो लाभ चिकित्सा क्षेत्र को मिल सकता था वह विज्ञान ने प्राप्त कर लिया।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 13 अपराजिता

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
अपराजिता डॉ. चन्द्रा।

प्रश्न 2.
डॉ. चंद्रा ने किसके जीवन की कहानी पढ़ी थी ?
उत्तर:
डॉ. चंद्रा ने डॉ. मेरी वर्गीज के जीवन की कहानी पढ़ी थी।

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प्रश्न 3.
डॉ. चंद्रा शल्य-चिकित्सक क्यों नहीं बन पाईं ?
उत्तर:
डॉ. चंद्रा शल्य-चिकित्सक इसलिए नहीं बन पाईं क्योंकि मेडिकल कालेज ने उनका प्रवेश यह कह कर रोक दिया कि उनका निचला धड़ निर्जीव हैं

प्रश्न 4.
डॉ. चंद्रा ने किस क्षेत्र में महान योगदान दिया और उनके विषय में उनके प्रोफेसर ने क्या कहा ?
उत्तर:
डॉ. चंद्रा. उनके विषय में उनके प्रोफेसर ने कहा कि डा. चंद्रा के कारण विज्ञान ने जो उपलब्धि प्राप्त की, वह चिकित्सा के क्षेत्र ने खो दिया।

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