RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 12 कुण्डलियाँ छंद

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi Chapter 12 कुण्डलियाँ छंद (कुण्डलियाँ)

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

RBSE Class 8 Hindi कुण्डलियाँ छंद पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठ से

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
कंडलियाँ पाठ के लेखक का नाम बताइए।
उत्तर:
‘कुंडलियाँ’ पाठ के रचनाकार गिरधर कविराय हैं।

प्रश्न 2.
“बिना विचारे जो ………. कुंडलियाँ को यदि हम जीवन में उतार लें, तो हमें क्या-क्या लाभ होगा?
उत्तर:
यदि हम उक्त कुंडली को अपने जीवन में उतार लें तो हमें किसी भी कार्य को करने के बाद पछताना नहीं पड़ेगा क्योंकि हम बिना विचारे कोई काम ही नहीं करेंगे। जो काम विचारकर होगा वह सही होगा।

लिखें

RBSE Class 8 Hindi कुण्डलियाँ छंद बहुविकल्पी

प्रश्न 1.
राँध्यो का अर्थ है –
(क) सेकना
(ख) पकाना
(ग) रमना
(घ) राग आलापना
उत्तर:
(ख) पकाना

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प्रश्न 2.
पाठ में ‘पाछै’ शब्द का अर्थ है –
(क) पीछा करना
(ख) पिछवाड़े रहना
(ग) बाद में
(घ) वापस करना
उत्तर:
(ग) बाद में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. खान-पान सम्मान ……………. मनहिं न भावै।
  2. गुन …………. घटि गई, यहै कहि रोयो हीरा।
  3. मीठे वचन …………… विनय, सब ही की कीजै।
  4. नदियाँ-नाला जहाँ पड़े, तहाँ …………… अंग।

उत्तर:

  1. राग-रंग
  2. कीमत
  3. सुनाय
  4. बचावत।

RBSE Class 8 Hindi कुण्डलियाँ छंद अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
दौलत पाकर मनुष्य को क्या न करने की सलाह दी गई?
उत्तर:
दौलत पाकर मनुष्य को अभिमान न करने की सलाह दी गई है।

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प्रश्न 2.
आदमी की जग हँसाई कब होती है ?
उत्तर:
जब वह बिना विचारे कोई कार्य करता है, तो उसकी जग-हँसाई होती है।

प्रश्न 3.
हीरा को छेद कर कमर में बाँधने पर हीरे को कैसा लगता है ?
उत्तर:
छेदकर कमर में बाँधने पर हीरे को लगता है, जैसे कोई मूर्ख स्त्री बिना नमक, हल्दी के सब्जी पका रही हो। आशय यह है कि हीरा अपनी कद्र न होने पर बहुत दु:खी है।

RBSE Class 8 Hindi कुण्डलियाँ छंद लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हीरा किस बात पर पछताने लगा?
उत्तर:
हीरा इस बात पर पछताने लगा कि वह कहाँ आ गया है, जहाँ उसके गुणों की कोई कीमत नहीं है। उसे छेदकर लोग कमर में बाँध रहे हैं। अपना आदर न होने से वह पछताने लगा।

प्रश्न 2.
कुंडलियाँ में लाठी के क्या-क्या गुण बताए गए
उत्तर:
कवि ने बताया है कि रास्ते में कोई नदी-नाला आ जाए तो उसे पार कराने में, कुत्ता यदि झपट कर आए तो उसे भगाने में लाठी काम आती है। यदि राहगीर को रास्ते में दुश्मन या बटमार मिल जाएँ तो वह उनका मस्तक लाठी से फोड़ सकता है। अतः अन्य हथियारों की अपेक्षा लाठी अधिक उपयोगी है।

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प्रश्न 3.
किसी काम को बिना सोचे-समझे करने पर क्या परिणाम होते हैं?
उत्तर:
बिना सोचे-समझे किसी काम को करने पर बाद में पछताना पड़ता है। जगत में उपहास होता है। ऐसी परिस्थिति में मन बेचैन रहता है और व्यक्ति का खान-पान, सम्मान, राग-रंग आदि में मन नहीं लगता। इससे अपना काम तो बिगड़ता ही है, साथ में होने वाला दुःख कभी टलता नहीं है। वह हृदय में सदा खटकता है।

प्रश्न 4.
कवि गिरधर ने दौलत को मेहमान क्यों कहा है ?
उत्तर:
दौलत मेहमान की भाँति स्थायी रूप से घर में निवास करने वाली नहीं होती। वह दो-चार दिन रहकर वापस चली जाती है। अस्थिरता उसके स्वभाव में है। अतः लोगों को दौलत की प्राप्ति पर स्वप्न में भी अभिमान नहीं करना चाहिए।

RBSE Class 8 Hindi कुण्डलियाँ छंद दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कंडलियाँ “हीरा अपनी खानि को ……… यहै कहि रोयो हीरा” पंक्तियों की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
हीरा अपनी खान की याद करके बार-बार पछता रहा है कि वह वहाँ से गँवार लोगों के बीच बिकने को आ गया। वह सोचता है कि जहाँ मेरी कीमत, गुणों को कोई नहीं जानता, मैं वहाँ क्यों बिकने के लिए आया हूँ। मैं ऐसे अवगुणी लोगों के बीच में हूँ, जो छेद करके मुझे कमर में बाँधते हैं। यह मेरे साथ ऐसा व्यवहार है मानो बिना हल्दी, नमक के किसी फूहड़ स्त्री ने साग बना दिया हो। हीरा कैसे धारण किया जाता है यह गँवारों को पता नहीं होता। कवि गिरधर कहते हैं कि ऐसे समय में गुणीजन को धैर्य रखना चाहिए, परंतु यह बहुत कठिन है। हीरा तो बार-बार यह सोचकर रोने लगता है कि गँवार लोगों के हाथ पड़ कर उसके गुण और मूल्य दोनों बेकार हो गये।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
“पाहुन निसि-दिन चारि, रहत सब ही के दौलत” में निसि-दिन से तात्पर्य निशा (रात) व दिन से है। उक्त ‘कुंडलियाँ’ पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिएयश, हँसाय, बिगाड़ना, सम्मान, गुण
उत्तर:
यश = अपयश
हँसाय = रुलाय
बिगाड़ना = सुधारना
सम्मान = अपमान
गुण = अवगुण

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प्रश्न 2.
दो या दो से अधिक पदों के मिलने से समास बनता है। समास का एक प्रकार है, वंद्व समास। इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं, जैसे – माता और पिता = माता-पिता।
इसमें ‘और’ शब्द का लोप होकर योजक चिह्न (-) आ जाता है। ऐसे ही वंद्व समास के दस उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
रात और दिन = रात – दिन
भाई और बहिन = भाई – रहिन
खान और पान = खान – न
राग और रंग = राग – रं
सुख और दुख = सुख – दुख
घर और बाहर = घर – बाहर
गिने और चुने = गिने – चुने
खट्टे और मीठे = खट्टे – मीठे
रुपया और पैसा = रुपया – पैसा
जीवन और मरण = जीवन – मरण

प्रश्न 3.
पाठ में आए निम्नलिखित तद्भव शब्दों के तत्सम रूप लिखिए –
जस, गुन, छेद, माथा
उत्तर:
जस = यश गुन = गुण छेद = छिद्र माथा = मस्तक

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प्रश्न 4.
पाठ में आए निम्नलिखित कारकों के विभक्ति चिहनों को. लिखिए –

  1. अधिकरण कारक
  2. संबोधन कारक
  3. कर्मकारक
  4. संबंध कारक

उत्तर:

  1. अधिकरण कारक में, पे, पर।
  2. संबोधन कारक हे, ओ, अरे।
  3. कर्मकारक – को।

पाठ से आगे

1. ‘बातन हाथी पाइए, बातन हाथी पाँव’ उक्ति पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
2. पाठ से संबंधित दोहे व पंक्तियों का संकलन कीजिए; जैसे
तुलसी मीठे वचन ते, सुख उपजत चहुँ ओर।
वशीकरण एक मंत्र है, तजिए वचन कठोर।।
उत्तर:
कवि का आशय है कि हम अपनी बोलने, बात करने  की शैली के अनुसार ही परिणाम पाते हैं।
सार्थक और मधुर  बोली, पुरस्कार-सम्मान दिलाती है, वहीं कर्कश और कठोर  बातें हमें अपमानित करा सकती हैं।
3. बोली एक अमोल है जो कोई बोले जानि।
हिए तराजू तौलिकें तब मुख बाहर आनि।।

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यह भी करें

1. ‘कुंडलियाँ’ छंद के सस्वर वाचन का अभ्यास कीजिए और बाल-सभा में सुनाइए।
2. पाठ में लाठी के अनेक उपयोग बताए गए हैं। कक्षा में एक रूमाल रखकर बिना बोले हाव-भाव से प्रत्येक विद्यार्थी एक उपयोग बताएँ।
उत्तर संकेत:
विद्यार्थी स्वयं करें।

यह भी जानें

कुंडलियाँ छंद:
जिस प्रकार साँप कुंडली लगाकर बैठता है तब उसके फन और पूँछ एक ही रेखा (सीध) में होते हैं, इसी प्रकार यह छंद जिस शब्द से प्रारंभ होता है, उसी शब्द पर ही आकर खत्म होता है। इसमें प्रथम दो पंक्तियाँ दोहे की और शेष चार पंक्तियाँ रोला छंद की होती हैं।

RBSE Class 8 Hindi कुण्डलियाँ छंद अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 8 Hindi कुण्डलियाँ छंद बहविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में से चंचल स्वभाव युक्त है –
(क) मेहमान
(ख) जल
(ग) दौलत
(घ) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(ख) जल

प्रश्न 2.
बिना विचारे कार्य करने का परिणाम होता है –
(क) अपना काम शीघ्र हो जाता है।
(ख) अपना काम बिगड़ जाता है।
(ग) कम धन खर्च होता है।
(घ) सभी को आराम मिलता है।
उत्तर:
(ख) अपना काम बिगड़ जाता है।

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प्रश्न 3.
हीरे की पहचान कौन कर सकता है?
(क) खान मालिक
(ख) श्रमिक
(ग) गुणीजन
(घ) गँवार।
उत्तर:
(ग) गुणीजन

प्रश्न 4.
कवि के अनुसार सबसे उत्तम हथियार है।
(क) बेंत
(ख) लाठी
(ग) चाकू
(घ) पिस्टल।
उत्तर:
(ख) लाठी

प्रश्न 5.
कवि गिरधर ने किस छंद में अपने पद लिखे ?
(क) दोहा
(ख) कुंडलियाँ
(ग) चौपाई
(घ) रोला।
उत्तर:
(ग) चौपाई

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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. लाठी में …………. बहुत है, सदा राखिए ………….।
  2. कहाँ …………. आय, छेद करि ………….. में बाँध्यो।
  3. बिना …………. जो करै, सो पाछै ………….।
  4.  ………….. निसि दिन चारि, रहत सब ही के …………. ।

उत्तर:

  1. गुन, संग
  2. बिकानो, कटि
  3. बिचारे, पछताय
  4. पाहुन, दौलत।

सुमेलित कीजिए –

खण्ड ‘अ’ एवं खण्ड ‘ब’ में दी गई पंक्तियों का मिलान कीजिए –
खण्ड ‘अ’                            खण्ड ‘ब’
(क) मीठे वचन सुनाय – दुःख कछु टरत न टारे
(ख) पाहुन निसि दिन चारि – सो पाछै पछताय।
(ग) बिना विचारे जो करै – विनय सब ही की कीजै
(घ) कह गिरधर कविराय – रहत सब ही के दौलत
उत्तर:
(क) विनय सब ही की कीजै।
(ख) रहत सब ही के दौलत।
(ग) सो पाछै पछिताय।
(घ) दुःख कछु टरत न टारे।

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RBSE Class 8 Hindi कुण्डलियाँ छंद अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हमें किस प्रकार के वचन सुनाने चाहिए?
उत्तर:
हमें मीठे वचन सुनाने चाहिए।

प्रश्न 2.
‘दुःख कछु टरत न टारे’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव- बिना विचार के काम करने से उत्पन्न दुःख असह्य होता है, जो किसी प्रकार टलता नहीं है।

प्रश्न 3.
व्यक्ति कब पछताता है ?
उत्तर:
बिना विचार के कार्य करने पर व्यक्ति पछताता है।

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प्रश्न 4.
कहाँ बिकानो आय, छेद करि कटि में बाँध्यो पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव- हीरा सोचता है कि जहाँ मेरी कीमत, गुणों को कोई नहीं पहचानता, मैं वहाँ क्यों बिकने आ गया। ये अवगुणी लोग मुझमें छेद करके कमर में बाँधते हैं।

प्रश्न 5.
कवि ने हाथ में क्या रखने की सलाह दी है ?
उत्तर:
कवि ने हाथ में लाठी रखने की सलाह दी है।

प्रश्न 6.
कुंडलियाँ छंद का निर्माण किन दो छंदों के योग से होता है ?
उत्तर:
कुंडलियाँ छंद का निर्माण दोहे और रोला के योग से होता है।

RBSE Class 8 Hindi कुण्डलियाँ छंद लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मीठे वचन सुनाय, विनय सब ही की कीजै।
कह गिरधर कविराय’अरे यह सब घट तौलत’।।
पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आशय-उक्त पंक्ति के माध्यम से कविराय गिरधर ने सलाह दी है कि दौलत की प्राप्ति पर सपने में भी अभिमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह तो चंचल जल के समान आती-जाती रहती है। मनुष्य को जगत में जीवित रहते यश का अर्जन करना चाहिए, मीठे वचन बोलना चाहिए तथा ऐसा करने से विनम्रता को धारण कर सभी का आदर करना चाहिए। दौलत आने पर मनुष्य के इन्हीं गुणों की तौल अर्थात् परीक्षा होती है। जो इस परीक्षा में असफल होते हैं वे अपनी हँसी कराते हैं और पछताते हैं।

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प्रश्न 2.
‘बिना बिचारे जो करै ‘ पंक्ति में कवि ने बिना विचार के कार्य करने के क्या परिणाम बताए हैं ?
उत्तर:
बिना विचारे कार्य करने पर कवि ने बताया है कि –

  1. ऐसा करने से स्वयं का काम बिगड़ जाता है।
  2. जगत में हँसी का पात्र बनना पड़ता है।
  3. चित्त को चैन नहीं मिलता।

प्रश्न 3.
‘यहै कहि रोयो हीरा’ पद में निहित आशय को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आशय-हीरा अपने गुणों के कारण जाना जाता है। अपनी कद्र न होने पर हीरा निराश तो है ही, साथ ही साथ अपमानजनक व्यवहार से वह आहत भी है। वह अपना धैर्य खोकर रोने लगता है। यही स्थिति गुणीजन की भी है। एक सीमा तक वह अपने स्वाभिमान को बनाए रखता है, किंतु अपमान होने पर वह धैर्य खो देता है। अपने गुणों का अपमान कोई सहन नहीं कर सकता।

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प्रश्न 4.
कुंडलियाँ छंद की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. यह छंद छः चरणों का होता है।
  2. प्रथम दो पंक्तियाँ दोहा छंद की व शेष चार पंक्तियाँ रोला छंद की होती हैं।
  3. यह छंद जिस शब्द से प्रारंभ होता है, उसी शब्द पर आकर समाप्त होता है।

RBSE Class 8 Hindi कुण्डलियाँ छंद दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘दौलत पर अभिमान न करने तथा सोच-समझकर कार्य करने की प्रेरणा कवि ने दी है।’ संकलित पदों के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
कविराय गिरधर ने दौलत को चंचल, अस्थिर बताते हुए कहा है कि इसका स्वप्न में भी अभिमान नहीं करना चाहिए। यह जल के समान कुछ समय तक ही अपने पास रहती है –

“चंचल जल दिन चारि को, ठाऊँ न रहत निदान।”
अत: व्यक्ति को अपने जीवन काल में यश को प्राप्त करना चाहिए। लोगों से मधुर वाणी बोलते हुए विनम्र भाव से जीवन जीना चाहिए। इसी प्रकार कवि ने बिना विचारे कार्य न करने का संदेश देते हुए कहा है कि ऐसा न करने पर स्वयं का तो काम बिगड़ेगा ही, साथ में जगत में उपहास भी होगा –

“काम बिगारे आपनो, जग में होत हँसाय।”
साथ ही चित्त भी बेचैन रहेगा। खान-पान, राग-रंग में मन नहीं लगेगा। इससे उत्पन्न दुःख टलेगा भी नहीं। अत: कवि ने सोच-समझकर कार्य करने की प्रेरणा दी है।

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पाठ-परिचय:

कवि गिरधर ने अपनी कुंडलियों में नीतिपरक तथा लोक अनुभव से जुड़ी हुई बातें कही हैं। संकलित पदों की मुख्य विषय-वस्तु है दौलत पाकर व्यक्ति को अभिमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अस्थिर है। कोई भी कार्य सोच-विचार कर करना चाहिए, अन्यथा जगत में वह व्यक्ति हँसी का पात्र बनता है। गुणवान व्यक्ति का अपने ही निवास पर कई बार सम्मान नहीं होता परंतु उसे धैर्य धारण कर समय का इंतजार करना चाहिए। लाठी में बहुत गुण हैं। यह उपयोगी है। अत: व्यक्ति को इसे सदैव अपने पास रखना चाहिए।

पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ

1. दौलत पाय न कीजिए, सपने में अभिमान।
चंचल जल दिन चारि को, ठाँऊ न रहत निदान।।
ठाँऊ न रहत निदान, जियत जग में जस लीजै।
मीठे वचन सुनाय, विनय सब ही की कीजै।।
कह गिरधर कविराय, अरे यह सब घट तौलत।
पाहुन निसि दिन चारि, रहत सब ही के दौलत।

कठिन शब्दार्थ:
दौलत = धन। चारि = चार। ठाँऊ = स्थिर। जस = यश। घट = हृदय। तौलत = तौलती है। पाहुन = मेहमान। निसिदिन = निशदिन, रात दिन।

संदर्भ एवं प्रसंग:
उपर्युक्त कुंडली कवि गिरधर द्वारा रचित है। इसमें कवि ने धन पर अभिमान न करने का संदेश देते हुए संसार में मनुष्य को यशप्राप्ति के लिए प्रयासरत रहने को कहा है।

व्याख्या / भावार्थ:
कवि का संदेश है कि व्यक्ति को दौलत की प्राप्ति पर स्वप्न में भी अभिमान नहीं करना चाहिए क्योंकि दौलत चंचल जल के समान होती है, जो चार दिन भी (थोड़े समय भी) व्यक्ति के पास स्थिर नहीं रह सकती। यहाँ कवि यह कहना चाहता है कि व्यक्ति को अपने जीवन काल में यश प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। उसे मीठे वचन बोलने चाहिए। सभी के प्रति विनम्र भाव से रहना चाहिए। गिरधर कवि के अनुसार हृदय आपकी परीक्षा लेता है। दौलत तो चार रात-दिन की मेहमान है। वह कभी भी चली जाएगी और व्यक्ति अभिमानवश अपना सब कुछ गँवा देगा।

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2. बिना बिचारे जो करै, सो पाछै पछताय।
काम बिगारे आपनो, जग में होत हँसाय।।
जग में होत हँसाय, चित्त में चैन न पावै।
खान-पान सम्मान. राग-रँग मनहिं न भावै।।
कह गिरधर कविराय, दुःख कछु टरत न टारे।
खटकत हैं जिय माहिं, करै जो बिना बिचारे।

कठिन शब्दार्थ:
पाछै = बाद में। पछताय = पछताता है। चैन = आराम। टरत = टलना। खटकत = खटकता है। जिय = हृदय। माहि = अंदर।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत पद्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक के ‘कुंडलियाँ’ नामक पाठ से ली गई हैं जिसमें गिरधर कविराय ने बिना विचारे कार्य करने के परिणामों को दर्शाया है। उन्होंने लोगों को सोच-विचारकर कार्य करने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या / भावार्थ:
कवि का कथन है कि जो व्यक्ति बिना सोच-विचार के कार्य करता है, वह बाद में पछताता है। वह अपना काम तो बिगाड़ता ही है, साथ में जग में हँसी का पात्र भी बनता है। जगत में उपहास का पात्र बनने से उसके मन को कभी चैन नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में उसके मन को खान-पान, सम्मान, राग-रंग आदि कुछ भी अच्छा नहीं लगता। कवि गिरधर स्पष्ट करते हैं कि यह एक ऐसा दुःख है जो टालने से नहीं टलता। वह सदैव दिल में खटकता रहता है, व्यक्ति को बेचैन करता रहता है। अतः बिना सोचे-विचारे कोई भी कार्य सदैव दुःख पहुँचाने वाला ही होता है।

3. हीरा अपनी खानि को, बार-बार पछताय।।
गुन-कीमत जाने नहीं, कहाँ बिकामो आय।।
कहाँ बिकानो आय, छेद करि कटि में बाँध्यो।
बिन हरदी बिन लौन, साग ज्यों फूहर राँध्यो।।
कह गिरधर कविराय, कहाँ लगि धरिये धीरा।
गुन-कीमत घटि गई, यहै कहि रोयो हीरा।।

कठिन शब्दार्थ:
खानि = खान, घर। बिकानो = बिक गया। कटि = कमर । हरदी = हल्दी। लौन = नमक। साग = सब्जी। फूहर = फूहड़, गँवार। राँध्यो = पकाया। धीरा = धैर्य।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत पद्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक के ‘कुंडलियाँ’ नामक पाठ से ली गई हैं। कवि गँवार लोगों के बीच फंस गए गुणवान व्यक्ति की दशा का वर्णन हीरे से कर रहा है।

व्याख्या / भावार्थ:
हीरा अपनी खान की याद करके बार-बार पछता रहा है कि वह जहाँ से गवार लोगों के बीच बिकने को आ गया। वह सोचता है कि जहाँ मेरी कीमत, गुणों को कोई नहीं जानता, मैं वहाँ क्यों बिकने के लिए आया हूँ। मैं ऐसे अवगुणी लोगों के बीच में हूँ, जो छेद करके मुझे कमर में बाँध ते हैं। यह मेरे साथ ऐसा व्यवहार है मानो बिना हल्दी, नमक के किसी फूहड़ स्त्री ने साग बना दिया हो। हीरा कैसे धारण. किया जाता है यह गँवारों को पता नहीं होता। कवि गिरधर कहते हैं कि ऐसे समय में गुणीजन को धैर्य रखना चाहिए, परंतु यह बहुत कठिन है। हीरा तो बार-बार यह सोचकर रोने लगता है कि गँवार लोगों के हाथ पड़ कर उसके गुण और मूल्य दोनों बेकार हो गये।

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4. लाठी में गुन बहुत है, सदा राखिए संग।
नदियाँ नाला जहाँ पड़े, तहाँ बचावत अंग।।
तहाँ बचावत अंग, झपट कुत्ते को मारे।
दुश्मन, दामनगीर, ताही का मस्तक फारै।।
कह गिरधर कविराय, सुनो हे धुर के साठी।
सब हथियारन छोड़, हाथ में राखिए लाठी।।

कठिन शब्दार्थ:

बचावत = बचाता है। दामनगीर = लुटेरे। ताही = उनका। धुर के साठी = राहगीर।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक के ‘कुंडलियाँ’ नामक पाठ से लिया गया है। गिरधर कविराय ने इस कुंडली में लाठी के गुणों का विवेचन करते हुए अन्य हथियारों की अपेक्षा उसे उपयोगी बताया है।

व्याख्या / भावार्थ:
कवि गिरधर कहते हैं कि लाठी में बहुत सारे गुण हैं। अतः इसे हमेशा अपने साथ रखना चाहिए। लाठी के साथ होने पर रास्ते में होने वाली हानि से यह बचाती है। यदि कोई कुत्ता झपट कर आए तो लाठी उस कुत्ते को भगा सकती है। यदि राहगीर को रास्ते में दुश्मन, लुटेरे आदि मिल जायें तो वह उनका मस्तक फाड़ सकती है। अतः गिरधर कविराय कहते हैं कि तुम सब हथियारों को छोड़कर लाठी को थाम लो। यह तुम्हारी सभी प्रकार से रक्षा करने में समर्थ है।

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