RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 सुभाषचंद्र बोस का पत्र

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi Chapter 10 सुभाषचंद्र बोस का पत्र (पत्र)

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RBSE Class 8 Hindi सुभाषचंद्र बोस का पत्र पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पपाठ से

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
यह पत्र किसने और कहाँ से लिखा है ?
उत्तर:
यह पत्र नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने माँडले जेल में रहते हुए लिखा है।

प्रश्न 2.
लोकमान्य तिलक ने कारावास में कितने वर्ष बिताए?
उत्तर:
लोकमान्य तिलक ने कारावास में छह वर्ष बिताए।

प्रश्न 3.
सुभाषचंद्र बोस ने श्री केलकर को पत्र क्यों लिखा ?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस ने श्री केलकर को अपने माँडले कारावास में होने की जानकारी देने के लिए पत्र लिखा। इस पत्र को लिखने का एक अन्य कारण यह भी था कि लोकमान्य तिलक ने अपने कारावास काल का अधिकांश भाग माँडले जेल में ही गुजारा था जिसकी विस्तृत जानकारी वे श्री केलकर को देना चाहते थे।

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लिखें

RBSE Class 8 Hindi सुभाषचंद्र बोस का पत्र बहुविकल्पी

प्रश्न 1.
लोकमान्य तिलक को बीमारी थी –
(क) मधुमेह की
(ख) हृदय की
(ग) श्वास की
(घ) कोई भी नहीं
उत्तर:
(क) मधुमेह की

प्रश्न 2.
सुभाषचंद्र बोस ने माँडले जेल को तीर्थ स्थल कहा, क्योंकि –
(क) वहाँ लोग दर्शन-पूजन करने जाते थे
(ख) वहाँ देश के क्रांतिकारियों को बंदी रखा जाता था
(ग) वहाँ सुभाषचंद्र बोस को बंदी रखा गया था
(घ) वहाँ तिलक को छह वर्ष तक बंदी बनाकर रखा गया था।
उत्तर:
(घ) वहाँ तिलक को छह वर्ष तक बंदी बनाकर रखा गया था।

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निम्न शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कर लिखिए –
(यातनाएँ, साख, चहारदीवारी, पुलिस)

  1. बाजार में अनुराग की बड़ी ……………. है।
  2. स्वतंत्रता सैनानियों को जेल में कई …………. भोगनी पड़ी।
  3. …………. शांति और व्यवस्था बनाने के लिए आवश्यक
  4. पक्षी भी पिंजरे की ………….. में सुखी नहीं रह पाते।

उत्तर:

  1. साख
  2. यातनाएँ
  3. पुलिस
  4. चहारदीवारी।

RBSE Class 8 Hindi सुभाषचंद्र बोस का पत्र अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
“मेरे लिए यह एक तीर्थ स्थल है” यह वाक्य किसने
उत्तर:
“मेरे लिए यह एक तीर्थ स्थल है” यह वाक्य सुभाषचंद्र बोस ने कहा।

प्रश्न 2.
वे दंड संहिता के अंतर्गत बंदी थे। यहाँ ‘वे’ शब्द किनके लिए प्रयुक्त हुआ है ?
उत्तर:
वे दंड संहिता के अंतर्गत बंदी थे। यहाँ ‘वे’ शब्द लोकमान्य तिलक के लिए प्रयुक्त हुआ है।

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RBSE Class 8 Hindi सुभाषचंद्र बोस का पत्र लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सुभाषचंद्र बोस को बरहमपुर जेल से कौन-सी जेल में स्थानांतरित किया गया ?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस को बरहमपुर जेल से माँडले जेल में स्थानांतरित किया गया।

प्रश्न 2.
जेल में लोकमान्य तिलक ने किस ग्रंथ की रचना की? इस ग्रंथ ने तिलक की क्या पहचान बनाई?
उत्तर
जेल में लोकमान्य तिलक ने सुप्रसिद्ध ‘गीता भाष्य’ नामक ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ की रचना ने तिलक को ‘शंकर’ और ‘रामानुज’ जैसे महान भाष्यकारों की श्रेणी में स्थापित कर दिया।

RBSE Class 8 Hindi सुभाषचंद्र बोस का पत्र दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकमान्य तिलक द्वारा जेल में की जाने वाली भेंटों के दौरान होने वाली समस्याओं को लिखिए।
“उत्तर:
लोकमान्य तिलक को जेल में किसी अन्य बंदी से मिलने-जुलने नहीं दिया जाता था। उन्हें संतोष देने वाली एकमात्र वस्तु किताबें र्थी और वे एक कमरे में एकाकी रहते | थे। यहाँ रहते हुए उन्हें दो या तीन भेंटों से अधिक का मौका नहीं दिया गया। ये भेंट भी पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में होती थीं जिससे वे कभी भी किसी से खुलकर दिल की बात नहीं कर पाए।

प्रश्न 2.
लोकमान्य तिलक के बलिदान को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
लोकमान्य तिलक ने माँडले जेल में अनेक मानसिक और शारीरिक यंत्रणाएँ सही थीं। उनका राजनैतिक जीवन बिखर गया था। वे मधुमेह रोग से पीड़ित थे और बहुत अधिक वृद्ध हो गए थे। वे उन दिनों गीता की भावना में मग्न रहते थे। शायद इसीलिए दुःख और यंत्रणाओं का उन पर प्रभाव नहीं पड़ता था। अपने दार्शनिक विचारों के कारण वे इस जेल की गुलामी सहते हए भी अपना मानसिक संतुलन बनाए रखते थे। उन्होंने इन अंधकारमय दिनों में ‘गीता भाष्य’ जैसे विशाल एवं युग निर्माणकारी ग्रंथ की रचना करके अपनी मातृभूमि के लिए जो अमूल्य भेंट तैयार की वह विश्व के महापुरुषों की कृतियों में प्रथम श्रेणी में रखने योग्य है। इस प्रकार देश के लिए उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
मुझे विश्वास है कि उन्हें किसी अन्य बंदी से नहीं मिलने दिया जाता था। उक्त वाक्य में ‘मुझे विश्वास है’ प्रधान उपवाक्य है। ‘कि उन्हें किसी बंदी से नहीं मिलने दिया जाता था।’ से जुड़ा हुआ है। ऐसे वाक्य जिनमें एक प्रधान उपवाक्य हो तथा अन्य उपवाक्य उस पर आश्रित हो, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। इसी प्रकार सरल वाक्य में एक उद्देश्य और एक ही विधेय होता है, जैसे सुभाषचंद्र बोस ने पत्र लिखा। संयुक्त वाक्य में दो सरल वाक्यों को ‘और’, ‘या’ आदि समुच्चयबोधक अव्ययों से जोड़ दिया जाता है, जैसेलोकमान्य तिलक ने गीता भाष्य लिखा और जेल में ही रहे। पाठ में आए ऐसे सरल, संयुक्त व मिश्र वाक्यों को छाँट कर लिखिए।
उत्तर:
पाठ में आए कुछ सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य निम्नलिखित हैं –
(i) सरल वाक्य:
वे दंड संहिता के अंतर्गत बंदी थे। उन्हें मधुमेह की बीमारी थी।

(ii) मिश्र वाक्य:
मैं नहीं जानता कि आपको मालूम है या नहीं कि मैं यहाँ गत जनवरी से कारावास में हूँ। हम जानते हैं कि लोकमान्य ने कारावास में छह वर्ष बिताए।

(iii) संयुक्त वाक्य:
वे यहाँ एकदम अकेले रहे और उन्हें कोई बौद्धिक स्तर का साथी नहीं मिला। यहाँ रहते हुए उन्हें दो या तीन भेंटों से अधिक का मौका नहीं दिया गया और भेंट भी पुलिस और जेल अधिकारियों की उपस्थिति में हुई होगी।

प्रश्न 2.
नीचे लिखे सामासिक पदों का विग्रह करते हुए समास का नाम लिखिए –
अंतरिक्ष यान, स्वतंत्रता प्राप्ति, जल प्रदूषण, जल-जन्तु, मल निकासी, मौसम चक्र।
उत्तर:
उपरिलिखित सामासिक पदों का विग्रह एवं समास के नाम निम्नलिखित हैं –
अंतरिक्ष यान – अंतरिक्ष का यान – संबंध तत्परुष
स्वतंत्रता प्राप्ति – स्वतंत्रता की प्राप्ति – संबंध तत्पुरुष
जल प्रदूषण – जल में प्रदूषण – अधिकरणतत्पुरुष
जल-जंत – जल का जंतू – संबंध तत्पुरुष
मल निकासी – मल की निकासी – संबंध तत्पुरुष
मौसम चक्र – मौसम का चक्र – संबंध तत्पुरुष

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प्रश्न 3.
अपने भात्रों-विचारों के आदान-प्रदान करने का सशक्त माध्यम है पत्र लेखन। यह प्राचीनकाल से चला आ रहा स्थायी तरीका है। इसके परिणामस्वरूप हम नेताजी का पत्र आज भी पढ़ पा रहे हैं। आज समय बदल रहा है। इंटरनेट, वाट्सएप, मोबाइल आदि कई माध्यमों से हम अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, लेकिन पत्र को नकार नहीं सकते। पत्र मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं –
(क) औपचारिक पत्र: यह पत्र विद्यालयों, कार्यालयों में पदाधिकारियों को औपचारिक विषयों के लिए लिखे जाते है।
(ख) अनौपचारिक पत्र: जब हम अपने परिजनों, मित्रों आदि को व्यक्तिगत रूप से संबोधित करते हुए कोई पत्र लिखते हैं, तो वह अनौपचारिक पत्र होता है।
प्रस्तुत पाठ इसका उदाहरण है। आप अपने नगर पालिका अध्यक्ष को पत्र लिखकर सफाई व्यवस्था के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर:
नगर पालिका अध्यक्ष को पत्र लिखकर सफाई व्यवस्था के बारे में जानकारी देने हेतु अनौपचारिक पत्र का नमूना इस प्रकार है –
पता
मोहन नगर
बयाना (राज.) ………….
विषय:
नगर में सफाई व्यवस्था ठीक न होने से बीमारी फैलने की आशंका।

महोदय,

मैं निर्भय त्रिपाठी बयाना के अंतर्गत आने वाले मोहन नगर का निवासी हूँ। आपको विनम्रतापूर्वक अवगत कराना चाहता हूँ कि पिछले कई महीनों से हमारे क्षेत्र में सफाई की उचित व्यवस्था न होने के कारण इस क्षेत्र में जगह-जगह पड़ा कूड़ा सड़ रहा है। पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैलने लगी है। नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगा है। गंदगी के कारण मक्खी-मच्छर आदि से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। अतः आपसे निवेदन है कि शीघ्र ही उचित सफाई व्यवस्था का प्रबंध कराएँ।

सधन्यवाद

पाठ से आगे
स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की महती भूमिका रही थी, उनकी जीवनी का अध्ययन कीजिए। उत्तर-सुभाषचंद्र बोस सर्वत्र ‘नेताजी’ के नाम से लोकप्रिय थे। इनका जन्म 23 जनवरी, 1897 को ‘कटक’ में हुआ था। इन्होंने 1919 ई. में कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1920 ई. में इनका चयन ‘भारतीय लोक सेवा’ (I.C.S.) में हो गया। गाँधी जी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर 1921 ई. में नौकरी छोड़कर इन्होंने राजनीति में प्रवेश किया।

गाँधी जी के असहयोग आंदोलन को बीच में रोक देने से वे बहुत दु:खी हुए और कालांतर में देशबंधु चितरंजनदास के साथ मिल गये। 25 अक्टूबर, 1924 को उन्हें गिरफ्तार करके बर्मा की माँडले जेल में बंद कर दिया गया। 1931 ई. में हुए गाँधी-इरविन समझौते का भी इन्होंने विरोध किया। 1938-39 ई. में इन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। इन्होंने ‘फारवर्ड ब्लॉक’ नामक नई पार्टी गठित की थी। “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” बोस का प्रसिद्ध नारा था। 18 अगस्त, 1945 को संभवतः विमान दुर्घटना में इनकी मृत्यु हो गई।

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सजन

प्रश्न 1.
आपके विद्यालय में कई उत्सव, त्योहार मनाए जाते हैं। किसी एक उत्सव या त्योहार का वर्णन पत्र रूप में लिखकर अपने मित्र को भेजिए।
उत्तर:
प्रिय मित्र.
अवधेश कुमार
आपको यह बताते हुए मुझे बड़ी प्रसन्नता हो रही है कि इस वर्ष हमारे यहाँ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव बड़े ही आकर्षक ढंग से मनाया गया। श्रीकृष्ण की बड़ी सुंदर झाँकी हम सभी मित्रों ने मिलकर सजाई थी। लाइट की अच्छी-अच्छी झालरों से हम लोगों ने इसे और अधिक सुंदरता प्रदान की थी। सभी लोगों ने रात्रि के बारह बजे तक धूमधाम से श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारी की थी। जैसे ही रात्रि के बारह बजे हम सभी श्री कृष्ण जी की जय, कन्हैया की जय बोलने लगे। श्री कृष्ण की जय-जयकार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था। सभी ने मिलकर कई तरह के भजन गाये। मैंने भी एक गीत सुनाया –

तू ही टान्हा है, बंशीवाला है,
तू ही गोकुल का नन्दलाला है।

तू ही घनश्याम, तू ही मोहन, तू ही तो कृष्ण मुरारी है।
मोर मुकुट सिर पर साजे, गिरधर तू, तू ही बनवारी है।
तू ही कान्हा ………… ||

इस तरह से नाच-गाने का कार्यक्रम सबह तक चलता रहा, जिसमें सभी को बहुत आनंद आया। लेकिन मित्र तुम्हारे इस उत्सव में शामिल न हो पाने की कमी सभी को महसूस हो रही थी। तुम होते तो इसका मजा ही कुछ और होता। तुम्हारी सुरीली आवाज इस बार हम लोग नहीं सुन पाए किंतु आने वाली जन्माष्टमी हम लोग तुम्हारे बिना नहीं मनाएँगे और हाँ, मित्र परिवार में सभी कुशल तो हैं, पत्र लिखकर शीघ्र सूचना देना। सभी को मेरा यथायोग्य नमस्कार कहना।

तुम्हारा स्नेही
प्रकाशचंद्र पटेल

प्रश्न 2.
विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र एवं जानकारी एकत्र कर ‘मेरा संकलन’ में संकलित कीजिए।
उत्तर:
कुछ स्वतंत्रता सेनानियों की जानकारी निम्न लिखित है –
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(1) महात्मा गाँधी:
महात्मा गाँधी को बापू और राष्ट्रपिता की उपाधि से सम्मानित किया गया। सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह इनके महत्त्वपूर्ण हथियार थे। 1919 से 1948 तक इन्होंने भारतीय राजनीति का नेतृत्व इन्हीं के माध्यम से किया। रवींद्रनाथ टैगोर ने इन्हें ‘महात्मा’ तथा जवाहरलाल नेहरूं ने ‘बापू’ की उपाधि दी। तत्कालीन भारत सरकार (ब्रिटिश सरकार) ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान इन्हें ‘कैसर-ए-हिंद’ की उपाधि दी किंतु विदेशी सरकार की नीतियों से नाराज होकर इन्होंने यह उपाधि वापस कर दी। असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन, नमक कानून तोड़ने के लिए दांडी यात्रा, भारत छोड़ो आंदोलन आदि के द्वारा इन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय योगदान दिया। 30 जनवरी, 1948 को एक प्रार्थना सभा में नाथूराम गोडसे ने गाँधीजी को गोली मारकर हत्या कर दी।

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(2) लाला लाजपत राय:
लाला लाजपत राय का जन्म पंजाब प्रांत के लुधियाना जिले में में हुआ था। इन्हें ‘पंजाब का शेर’ व ‘पंजाब केसरी’ के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त हुई। इन्होंने कानून की शिक्षा प्राप्त करके वकालत प्रारंभ की किंतु बाद में दयानंद के संपर्क में आने के कारण आर्य समाज के प्रबल समर्थक बन गए। लाजपत राय को पंजाब में वही स्थान प्राप्त था जो महाराष्ट्र में तिलक को। अपने अमेरिका प्रवास के दौरान लाला जी ने दो संस्थाओं-‘इंडियन होमरूल एवं इंफार्मेशन ब्यूरो’ की स्थापना की। ‘यंग इंडिया’ नामक समाचार पत्र भी इन्होंने ही संपादित किया था।

(3) गोपालकृष्ण गोखले:
गोपालकृष्ण गोखले का जन्म महाराष्ट्र के कोल्हापुर नामक स्थान पर एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। ये बी.ए तक शिक्षा प्राप्त करके गोविंद रानाडे
द्वारा स्थापित ‘डक्कन एजूकेशन सोसायटी’ के सदस्य बन गए। गोपालकृष्ण गोखले महाराष्ट्र के ‘सुकरात’ कहे जाने वाले रानाडे के शिष्य और महात्मा गाँधी के गुरु थे। उन्होंने नमक कर, अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में भारतीयों को अधिक स्थान देने के मुद्दे को काउंसिल में उठाया। 1906 में इन्होंने कलकत्ता अधिवेशन में बायकाट के प्रस्ताव का समर्थन किया। 1915 में इनकी मृत्यु हो गई। लोकमान्य तिलक ने गोखले को भारत का हीरा’, ‘महाराष्ट्र का लाल’ और ‘कार्यकर्ताओं का राजा’ कहकर उनकी सराहना की है।

तब और अब

नीचे लिखे शब्दों के मानक रूप लिखिए –
सुप्रसिद्ध, यद्यपि, उद्देश्य, बौद्धिक
उत्तर:
उपर्युक्त शब्दों के मानक रूप निम्नलिखित हैं –
सुप्रसिद्ध, यद्यपि, उद्देश्य, बौद्धिक।

RBSE Class 8 Hindi सुभाषचंद्र बोस का पत्र अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 8 Hindi सुभाषचंद्र बोस का पत्र बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकमान्य ने अपने कारावास का अधिकांश समय बिताया था –
(क) बरहमपुर जेल में
(ख) नैनी जेल में
(ग) तिहाड़ जेल में
(घ) माँडले जेल में।
उत्तर:
(क) बरहमपुर जेल में

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प्रश्न 2.
कारावास में लोकमान्य को सांत्वना देने वाली एकमात्र वस्तु थी –
(क) टेलीविजन
(ख) किताब
(ग) ट्रांजिस्टर
(घ) कैरमबोर्ड।
उत्तर:
(ख) किताब

प्रश्न 3.
माँडले जेल की जलवायु थी —
(क) कैंसर की बीमारी वाली
(ख) टी.बी. रोग बढ़ाने वाली
(ग) सिरदर्द पैदा करने वाली
(घ) मंदाग्नि तथा गठिया को जन्म देने वाली।
उत्तर:
(घ) मंदाग्नि तथा गठिया को जन्म देने वाली।

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प्रश्न 4.
अपनी मातृभूमि के लिए कारावास में लोकमान्य ने कौन-सी अमूल्य भेंट तैयार की?
(क) रामायण
(ख) महाभारत
(ग) ‘गीता भाष्य’
(घ) पंचतंत्र की कहानियाँ।
उत्तर:
(ग) ‘गीता भाष्य’

निम्न शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(बौद्धिक, अंधकारमय, निष्कासित, बहुमूल्य, कृतित्व)

  1. उन …………. दिनों में अपनी मातृभूमि के लिए अमूल्य भेंट तैयार की।
  2. मुझे भारत से …………. कर दिया गया था।
  3. उन्हें कोई ………….. स्तर का साथी नहीं मिला।
  4. जेलें मानव के …………. की निशानी हैं।
  5. माँडले जेल में लोकमान्य को अपने …………. जीवन __ के छह वर्ष बिताने पड़े।

उत्तर:

  1. अंधकारमय
  2. निष्कासित
  3. बौद्धिक
  4. कृतित्व
  5. बहुमूल्य।

RBSE Class 8 Hindi सुभाषचंद्र बोस का पत्र अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कारावास के दिनों में गीता की भावना लोकमान्य को कौन-सा लाभ पहुँचाती थी?
उत्तर:
कारावास के दिनों में गीता की भावना लोकमान्य को दुःख और यंत्रणाओं से ऊपर रखती थी।

प्रश्न 2.
लोकमान्य के कारावास के दिनों में देश का राजनैतिक जीवन कैसा था ?
उत्तर:
लोकमान्य के कारावास के दिनों में देश का राजनैतिक जीवन मंद गति से खिसक रहा था।

प्रश्न 3.
जेल में रहते हुए लोकमान्य की मुलाकात अन्य लोगों से कैसे होती थी ?
उत्तर:
जेल में रहते हुए लोकमान्य की मुलाकात अन्य लोगों से पुलिस और जेल अधिकारियों की उपस्थिति में होती थी।

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प्रश्न 4.
सुभाषचंद्र बोस को माँडले जेल पहुँचकर कौन-सी बात अच्छी नहीं लगी थी?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस को माँडले जेल पहुँचकर यह बात अच्छी नहीं लगी थी कि उन्हें भारत से निष्कासित कर दिया गया था।

RBSE Class 8 Hindi सुभाषचंद्र बोस का पत्र लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
माँडले जेल में स्थानांतरण के आदेश के समय सुभाषचंद्र बोस को क्या स्मरण नहीं था ?
उत्तर:
माँडले जेल में स्थानांतरण के आदेश के समय सुभाषचंद्र बोस को यह स्मरण नहीं था कि लोकमान्य तिलक ने अपने कारावास काल का अधिकांश भाग माँडले जेल में ही गुजारा था।

प्रश्न 2.
माँडले जेल में जिस वार्ड में लोकमान्य रहते थे वहाँ किस चीज से बचाव नहीं हो पाता था ?
उत्तर:
माँडले जेल में जिस वार्ड में लोकमान्य रहते थे वह लकड़ी के तख्तों से बना था, जिसमें गर्मी में लू और धूप से, वर्षा में पानी से, शीत ऋतु में सर्दी से तथा सभी ऋतुओं में धूल भरी हवाओं से बचाव नहीं हो पाता था।

प्रश्न 3.
बोस के अनुसार माँडले का मौसम कैसा था?
उत्तर:
बोस के अनुसार माँडले का मौसम शरीर को शिथिल कर देने वाला और मंदाग्नि तथा गठिया रोग को जन्म देने वाला था। यह व्यक्ति की जीवन शक्ति को धीरे-धीरे सोख लेने

वाला था।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 सुभाषचंद्र बोस का पत्र

RBSE Class 8 Hindi सुभाषचंद्र बोस का पत्र दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कारावास का जीवन सभ्य समाज से किस प्रकार भिन्न होता है?
उत्तर:
कारावास के जीवन के नियम और सिद्धांत सभ्य समाज से भिन्न होते हैं। सभ्य समाज ने जिन विचारों और संस्कारों को प्रतिबद्ध (बँधकर) होकर स्वीकार किया है, वे जेलों में लागू नहीं होते। अपनी आत्मा के विरुद्ध गए बिना, अपने आप को बंदी जीवन के प्रति अनुकूल बना पाना : आसान नहीं है। इसके लिए हमें पिछली आदतें छोड़नी होती हैं और फिर भी अपना स्वास्थ्य एवं फुर्ती बनाए रखनी होती है। सभी तरह के नियमों के आगे झुकना पड़ता है, फिर भी अंदर से अपने को प्रसन्न रखना होता है। सभ्य समाज में इस तरह का कोई बंधन नहीं होता हम अपनी इच्छानुसार काम करने के लिए लगभग स्वतंत्र होते हैं। अंदर से अपने को प्रसन्न रखना होता है। सभ्य समाज में इस तरह का कोई बंधन नहीं होता हम अपनी इच्छानुसार काम करने के लिए लगभग स्वतंत्र होते हैं।

प्रश्न 2.
बोस के अनुसार लोकमान्य की कौन-सी बात बहुत कम लोगों को पता होगी?
उत्तर:
बोस के अनुसार लोकमान्य ने छह वर्ष कारावास में बिताए लेकिन यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि उस अवधि में उन्हें किस हद तक शारीरिक और मानसिक कष्टों से गुजरना पड़ा था। वे वहाँ एकदम अकेले रहे, उन्हें कोई उनके स्तर का बौद्धिक साथी नहीं मिला। उन्हें किसी 1 अन्य बन्दी से मिलने-जुलने नहीं दिया जाता था। छह वर्षों में उन्हें केवल दो या तीन बार लोगों से भेंट करने का मौका मिला, वह भी पुलिस और जेल अधिकारियों की उपस्थिति में, जिससे वे कभी खुलकर और दिल से किसी से बात नहीं कर पाए। उन तक कोई अखबार नहीं पहुँचने दिया जाता था। उन्हें बाहरी दुनिया से एकदम अलग कर दिया गया था। इस दौरान उन्होंने जो मानसिक और शारीरिक यंत्रणा झेली उसे बहुत कम लोग जानते हैं।

पाठ-परिचय:

अंग्रेजों द्वारा जब सुभाषचंद्र बोस को बरहमपुर जेल से माँडले जेल भेज दिया जाता है तब अपनी स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने अपने स्नेही श्री केलकर जी को यह पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने लोकमान्य तिलक के उसी जेल (माँडले जेल) में बिताए गए छह वर्षों की पीड़ा और इस कठिन समय के बावजूद उनके द्वारा लिखे गए ‘गीता भाष्य’ जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ की विशेष चर्चा की है।

कठिन शब्दार्थ:

दिलचस्पी = रुचि, जानने की इच्छा। कारावास = जेल में रहने का दंड। हतोत्साहित = उत्साह न रह जाना। स्थानांतरण = स्थान बदलना, अन्य स्थान पर भेजना। गीता भाष्य = गीता की व्याख्या। भाष्यकार = व्याख्या करने वाला। प्रणयन = रचना करना। परिवेश = ‘वातावरण। निष्कासित = निकाल दिया गया। राहत = शांति। यंत्रणा = पीड़ा, कष्ट। हार्दिकता से = मन से। दंड संहिता = कानून का ग्रंथ। शिथिल = कमजोर मंदाग्नि = अपचरोग। यातनाएँ = घोर कष्ट। कति = रचना, बनाई गई वस्तु। संस्कार = अच्छा आचरण। प्रतिबदध = बँधा हुआ,वचन दे चुका। युग निर्माणकारी = नया युग लाने वाला। सुदीर्घ = बहुत लम्बा।

गदयांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ तथा अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

(1) मैं नहीं जानता कि आपको मालूम है या नहीं कि मैं यहाँ गत जनवरी से कारावास में हूँ। जब बरहमपुर जेल (बंगाल) से मुझे माँडले जेल के लिए स्थानांतरण का आदेश मिला था, तब मुझे यह स्मरण नहीं आया था कि लोकमान्य तिलक ने अपने कारावास काल का अधिकांश भाग माँडले जेल में ही गुजारा था। इस चहारदीवारी में, यहाँ के बहुत ही हतोत्साहित कर देने वाले परिवेश में, स्वर्गीय लोकमान्य ने अपने सुप्रसिद्ध ‘गीता भाष्य’ ग्रंथ का प्रणयन किया था जिसने मेरी नम्र राय में उन्हें ‘शंकर’ और ‘रामानुज’ जैसे प्रकांड भाष्यकारों की श्रेणी में स्थापित कर दिया है।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी के ‘सुभाषचंद्र बोस का पत्र’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक स्वयं सुभाषचंद्र बोस’ हैं। इसमें सुभाषचंद्र बोस माँडले जेल में रहते हुए अपने परम मित्र श्री केलकर को ‘लोकमान्य तिलक’ द्वारा इसी जेल में गुजारे गए दिनों की यादों के बारे में बता रहे हैं।

व्याख्या:
सुभाषचंद्र बोस अपने मित्र श्री केलकर जी को पत्र लिखते हुए इस बात की जानकारी दे रहे हैं कि मैं बीते जनवरी महीने से कारावास में हूँ। इसकी जानकारी आपको है या नहीं मुझे पता नहीं है। किंतु जब मुझे बरहमपुर (बंगाल) जेल से माँडले जेल भेजा गया तब मुझे यह बात नहीं पता थी कि इसी जेल में लोकमान्य तिलक ने अपना अधिकांश समय बिताया था। जेल की इन दीवारों के बीच जहाँ लोगों का उत्साह बहुत कम हो जाता है, ऐसे वातावरण में लोकमान्य ने अपना महान ग्रंथ ‘गीता भाष्य’ लिखा था, जो मेरे विचार से ‘शंकराचार्य’ और ‘रामानुजाचार्य’ जैसे व्याख्याकारों की बराबरी का है।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 सुभाषचंद्र बोस का पत्र

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
सुभाषचन्द्र बोस माँडले जेल में।

प्रश्न 2.
लोकमान्य तिलक ने माँडले कारावास के दिनों में क्या किया था ?
उत्तर:
लोकमान्य तिलक ने इन दिनों में गीता पर अपनी व्याख्या लिखी थी।

प्रश्न 3.
सुभाषचंद्र बोस अपने मित्र को किस बात की जानकारी दे रहे हैं ?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस अपने मित्र को इस बात की जानकारी दे रहे हैं कि वे गत जनवरी माह से कारावास गृह में हैं।

प्रश्न 4.
शंकराचार्य ओर रामानुजाचार्य कौन थे?
उत्तर:
शंकराचार्य और रामानुजाचार्य बड़े विद्वान और धर्माचार्य थे। उन्होंने गीता आदि धर्म ग्रंथों की व्याख्या (भाष्य) लिखी थीं।

(2) अपनी आत्मा के ह्रास के बिना, बंदी जीवन के प्रति अपने आपको अनुकूल बना पाना आसान नहीं है। इसके लिए हमें पिछली आदतें छोड़नी होती हैं और फिर भी स्वास्थ्य और स्फूर्ति बनाए रखनी होती है। सभी तरह के नियमों के आगे नत होना होता है और फिर भी आंतरिक प्रफुल्लता अक्षुण्ण रखनी होती है। केवल लोकमान्य जैसा दार्शनिक ही, उस यंत्रणा और दासता के बीच मानसिक संतुलन बनाए रख सकता था और गीताभाष्य जैसे विशाल एवं युग निर्माणकारी ग्रंथ का प्रणयन कर सकता था।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘सुभाष चंद्र बोस का पत्र’ नामक पाठ से लिया गया है। ‘नेताजी ने इस अंश में बताया है कि जेल के जीवन से सामंजस्य बिठाना एक सभ्य और सुशिक्षित व्यक्ति के लिए बड़ा कठिन होता है।

व्याख्या:
सुभाष चंद्र कहते हैं कि कारागार के घटिया जीवन से तालमेल बिठाने के लिए व्यक्ति को अपनी आत्मा को गिराना पड़ता है। यह कोई आसान काम नहीं होता। इसके लिए हमें पिछली आदतों को छोड़ना पड़ता है और फिर भी अपने आपको स्वस्थ और फुर्तीला बनाए रखना पड़ता है। जेल के अच्छे-बुरे सभी नियम मानने पड़ते हैं। इतने पर भी मन को भीतर से प्रसन्न बनाए रखना पड़ता है। यह किसी तपस्या से कम नहीं होता। केवल लोकमान्य जैसे ज्ञानी लोग ही उस मानसिक कष्ट और दास जैसे जीवन को सहते हुए, मन को वश में रख सकते हैं। ऐसी विपरीत स्थितियों में कोई लोकमान्य जैसा महापुरुष ही गीता भाष्य जैसे विशाल और युग की विचारधारा को बदल देने वाले ग्रंथ की रचना कर सकता था।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 सुभाषचंद्र बोस का पत्र

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
महामना लोकमान्य तिलक की जिजीविषा।

प्रश्न 2.
जेल के जीवन को स्वीकार करने के लिए आदमी को क्या करना पड़ता है?
उत्तर:
उसे अपनी पिछली आदतें छोड़नी पड़ती हैं और जेल के सभी नियमों का पालन करना पड़ता है।

प्रश्न 3.
लोकमान्य तिलक ने कैसी स्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखा?
उत्तर:
तिलक जी ने मानसिक और शारीरिक कष्ट सहन किए और अंग्रेजी-दासता के भाव से दुखी होते हुए भी अपने मन को संतुलित बनाए रखा।

प्रश्न 4.
लोकमान्य तिलक ने कौन-सा विशाल और युग का निर्माण करने वाला ग्रन्थ रचा?
उत्तर:
लोकमान्य तिलक ने गीता भाष्य जैसा विशाल और नए युग का निर्माण कर सकने वाला महान ग्रंथ रचा था।

प्रश्न 4.
लोकमान्य तिलक ने कौन-सा विशाल और युग का निर्माण करने वाला ग्रन्थ रचा?
उत्तर:
लोकमान्य तिलक ने गीता भाष्य जैसा विशाल और नए युग का निर्माण कर सकने वाला महान ग्रंथ रचा था।

(5) मैं जितना ही इस विषय पर चिंतन करता हूँ उतना ही ज्यादा मैं उनके प्रति आदर और श्रद्धा में डूब जाता हूँ। आशा करता हूँ कि मेरे देशवासी लोकमान्य की महत्ता को आँकते हुए इन सभी तथ्यों को भी दृष्टिपथ में रखेंगे। जो महापुरुष मधुमेह से पीड़ित होने के बावजूद इतने सुदीर्घ कारावास को झेलता गया और जिसने उन अंधकारमय दिनों में अपनी मातृभूमि के लिए ऐसी अमूल्य भेंट तैयार की, उसे विश्व के महापुरुषों की श्रेणी में प्रथम पंक्ति में स्थान मिलना चाहिए।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी के ‘सुभाषचंद्र बोस का पत्र’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक ‘सुभाषचंद्र बोस’ हैं। इसमें बोस ने यह कामना की है कि देशवासी लोकमान्य तिलक की महानता को स्वीकार करके उनको विश्व के महापुरुषों में स्थापित करेंगे।

व्याख्या:
सुभाषचंद्र बोस श्री केलकर जी को पत्र लिखते हुए कहते हैं कि मैं यहाँ रहकर जितना लोकमान्य के संघर्षमय जीवन के विषय में सोचता हूँ उतना ही अधिक मेरे मन में उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा बढ़ती जाती है। मेरी यह कामना है कि मेरे देश के लोग जब भी लोकमान्य के महत्त्व और देश के लिए उनके योगदान पर विचार करें तो उनके इस संघर्षमय जीवन और लोकहितकारी गीता भाष्य जैसी रचना को ध्यान में रखेंगे। जिस महापुरुष ने मधुमेह रोग के कष्ट को सहते हुए जेल का लंबा जीवन व्यतीत किया है। जीवन में निराशा भर देने वाले उन दिनों में भी जिसने देश के युवाओं के लिए गीता भाष्य जैसा बहुमूल्य उपहार दिया, उसे विश्व के महापुरुषों की पहली पंक्ति में गिना जाना चाहिए।

RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 सुभाषचंद्र बोस का पत्र

प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
नेताजी सुभाषचन्द बोस की कामना।

प्रश्न 2.
लोकमान्य को सुभाषचंद्र बोस के अनुसार कहाँ स्थान मिलना चाहिए?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस के अनुसार लोकमान्य को विश्व के महापुरुषों की श्रेणी में प्रथम पंक्ति में स्थान मिलना चाहिए।

प्रश्न 3.
लोकमान्य के विषय में चिंतन का लेखक के मन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
लोकमान्य के विषय में लेखक जितना चिंतन करता है उसका मन उतना ही अधिक उनके प्रति आदर और श्रद्धा में डूब जाता है।

प्रश्न 4.
सुभाषचंद्र बोस क्या आशा करते हैं ?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस आशा करते हैं कि मेरे देशवासी लोकमान्य की महानता को आँकते हुए उनके कारावास के संघर्षमय जीवन को भी ध्यान में रखेंगे।

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