RBSE Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 समर्पण

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi Chapter 1 समर्पण (कविता)

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

RBSE Class 8 Hindi समर्पण पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठ से

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
कवि किसके प्रति समर्पित होने की बात कह
उत्तर:
कवि मातृभूमि के प्रति समर्पित होने की बात कह रहा है।

प्रश्न 2.
‘भाल पर मल दो, चरण की धूल थोड़ी’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
‘भाल पर मल दो, चरण की धूल थोड़ी’ से तात्पर्य है भारत माता के प्रति कवि द्वारा सम्मान प्रकट करना।

प्रश्न 3.
कवि किस-किस से क्षमा माँगता है?
उत्तर:
कवि अपने गाँव, घर-द्वार तथा आँगन से क्षमा माँगता है।

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लिखें

RBSE Class 8 Hindi समर्पण बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
समर्पण कविता के माध्यम से कवि हमें संदेश देना चाहता है –
(क) सर्वस्व समर्पण का
(ख) स्वाभिमान का
(ग) परोपकार करने का
(घ) स्वावलंबन का।
उत्तर:
(क) सर्वस्व समर्पण का

प्रश्न 2.
कविता के अनुसार हम ऋणी हैं –
(क) मातृभूमि के
(ख) साहूकार के
(ग) डॉक्टर के
(घ) किसान के।
उत्तर:
(क) मातृभूमि के

प्रश्न 3.
थाल में भाल सजाकर लाने की बात कही है –
(क) प्राप्ति के लिए
(ख) स्वार्थ के लिए
(ग) शील के लिए
(घ) समर्पण के लिए।
उत्तर:
(घ) समर्पण के लिए।

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रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –

  1. माँ तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं …………..। (अकिंचन / निवेदन)
  2. मन समर्पित ……………अर्पित, रक्त का कण-कण समर्पित। (धरती / प्राण)
  3. तोड़ता हूँ ………….का बंधन। (मोह / क्षमा)
  4. ………….. का तृण-तृण समर्पित (सुमन / नीड़)

उत्तर:

  1. अकिंचन
  2. प्राण
  3. मोह
  4. नीड़।

RBSE Class 8 Hindi समर्पण लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कविता में किसके चरण की धूल भाल पर मलने की बात कही है?
उत्तर:
कविता में मातृभूमि के चरणों की धूल भाल पर मलने की बात कही गई है। कवि इस पंक्ति के द्वारा भारत माता के प्रति अपने सम्मान को प्रकट करता है। भारत माँ के चरणों की धूल को मस्तक पर लगाकर कवि उसको अपना सब कुछ समर्पित करने की प्रतिज्ञा करता है।

प्रश्न 2.
कवि ‘माँ’ का ऋण कैसे उतारना चाहता है?
उत्तर:
कवि अपना तन, मन और जीवन समर्पित करके ‘माँ’ का ऋण उतारना चाहता है। इसके अतिरिक्त कवि देश-प्रेम से ओत-प्रोत होकर कहता है—मैं अपने रक्त की प्रत्येक बूंद, आयु का प्रत्येक क्षण और घर का तिनका-तिनका मातृभूमि को समर्पित कर दूंगा।

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RBSE Class 8 Hindi समर्पण दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए –
(क) मन समर्पित, प्राण अर्पित, रक्त का कण-कण समर्पित।
व्याख्या:
कवि मातृभूमि के ऋण को उतारने के लिए अपना सर्वस्व उसके चरणों में अर्पित कर देना चाहता है। कवि कहता है – माँ! तुम्हारी रक्षा के लिए मैं अपना मन, प्राण और शरीर में बची हुई रक्त की एक-एक बूंद तुम्हारे चरणों में समर्पित कर दूंगा।

(ख) ये सुमन लो, यह चमन लो, नीड़ का तृण-तण समर्पित।
व्याख्या:
कवि देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ बलिदान करने की भावना से कहता है हे माँ! ये फूलों जैसे जीवन के सारे सुख, यह सुंदर बगीचे जैसा देश और तिनका-तिनका चुनकर बनाया गया सपनों के संसार-सा मेरा जीवन, यह सब मैं तुम्हारी रक्षा में समर्पित कर दूंगा। तुम्हारे लिए मैं अपना सर्वस्व न्योछावर कर दूंगा।

(ग) स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित आयु का क्षण-क्षण समर्पित।।
व्याख्या:
कवि देश की धरती पर आए संकट की रक्षा के लिए अपने जीवन का सर्वस्व बलिदान करने के लिए तैयार है। वह कहता है कि मैंने अपने जीवन को सँवारने के लिए जो सपना देखा है, उन सपनों का और भविष्य को जानने-समझने के जिन प्रश्नों को मन में रखा है, उन प्रश्नों का; तथा अपने जीवन का हर पल, हर क्षण अर्थात् अपनी हर साँस को मैं तुम्हारे मान और सम्मान की रक्षा के लिए बलिदान कर दूंगा।

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प्रश्न 2.
कविता में कवि मातृभूमि पर क्या-क्या न्योछावर कर देना चाहता है? अपने विचार विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
कविता में कवि मातृभूमि पर अपना मन, तन और जीवन न्योछावर कर देना चाहता है, क्योंकि उसने जिस भूमि पर जन्म लिया है, जिसका अन्न खाकर और जल पीकर बड़ा हुआ है, उसके प्रति प्रेम की भावना उसके जीवन में सबसे अधिक महत्व रखती है। वह धरती माँ के लिए अपने मन, प्राण और रक्त की एक-एक बँद समर्पित करना चाहता है। अपनी कमर में ढाल बाँधकर. हाथों में तलवार लेकर, भारत भूमि की धूल माथे से लगाकर, माँ का आशीर्वाद लेकर बिना देर किए, अपने सपनों, प्रश्नों और जीवन के प्रति मोह को छोड़कर मातृभूमि की रक्षा के लिए चल देने को तैयार है। वह इसके लिए अपने गाँव, घर-द्वार, आँगन, इन. सबको छोड़ देने को तत्पर है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
नीचे लिखे पदों में समास का नाम बताइएक्षण-क्षण, मोह-बंधन, घर-आँगन।
उत्तर:
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए –
तलवार, धरती, सुमन, चमन
उत्तर:
तलवार = खड्ग, असि।
धरती = वसुंधरा, पृथ्वी सुमन = पुष्प, फूल।
चमन = फुलवारी, वाटिका

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ जानकर वाक्य में प्रयोग कीजिए –
निवेदन, अर्पित, भाल, क्षमा
उत्तर:
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों को शुद्ध करके लिखिए –
आशिस, सपन, अरपित, रिण
उत्तर:
अशुद्ध     शुद्ध
आशिस   आशीष
सपन       स्वप्न
अरपित    अर्पित
रिण          ऋण

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
हमारे लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि है। हम ऐसे क्या कार्य कर सकते हैं, जिनसे हमारे राष्ट्र का विकास हो सके, लिखिए।
उत्तर:
यदि हम अपने राष्ट्र का विकास करना चाहते हैं तो यह आवश्यक है कि हम सभी भारतीयों को अपना भाई समझें, चाहे वे किसी भी धर्म या संप्रदाय के हों। “हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, आपस में सब भाई-भाई’ का नारा स्वीकार करके हम देश को एक सूत्र में बाँध सकते हैं। इसके अतिरिक्त देश के विकास के लिए हम निम्नलिखित काम कर सकते हैं –

  1. समाज में फैली हुई बुराइयों जैसे-अशिक्षा, नशा, बाल-विवाह, छुआछूत आदि को दूर करना।
  2. अपनी सुंदर कलाकृतियों का निर्माण। जब विदेशी इन्हें खरीदेंगे तो देश को विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होगी।
  3. स्वरचित कविताओं के द्वारा हम देशवासियों में त्याग की भावना जगा सकते हैं।
  4. नए-नए उद्योगों और आविष्कारों द्वारा हम देश के आर्थिक विकास में सहयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 2.
देश की सेवा में हम सब क्या-क्या कर सकते हैं? समूह में चर्चा कर लिखिए।
उत्तर:
देश की सेवा के लिए यह आवश्यक नहीं है कि हम सेना में ही भर्ती हों। हम देश में जहाँ भी जिस पद पर रहें, वहाँ ईमानदारी से अपना कार्य करें, यही देश की सबसे बड़ी सेवा है। इसके साथ-साथ हम देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करने वाली हर बात का ध्यान रखें और उसके निवारण का उपाय खोजें। इस प्रकार राष्ट्र की सेवा के लिए हम निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं –

  1. देश से भ्रष्टाचार समाप्त करने में सहयोग देना।
  2. राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने में सहयोग देना।
  3. विभिन्न संप्रदायों में पारस्परिक तनाव और विद्वेष की भावना को समाप्त करना।
  4. उन्नत कृषि तकनीक को विकसित करके किसानों का जीवन सुखमय बनाना।
  5. राजनीति से भाई-भतीजावाद और जातिवाद समाप्त करना आदि।

सृजन

‘मेरा संकलन’ में देशभक्ति गीतों को लिखिए।
उत्तर:
पुस्तकालय से देशभक्ति के गीतों की पुस्तक लेकर तथा शिक्षक महोदय की सहायता से देशभक्ति के गीतों का संकलन छात्र स्वयं करें। उदाहरणस्वरूप यहाँ कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं –

  1. जय बोलो उस धीरव्रती की, जिसने सोता देश जगाया, जिसने मिट्टी के पुतलों को वीरों का बाना पहनाया।
  2. जिसकी रज में लोट-लोटकर बड़े हुए हैं, घुटनों के बल सरक-सरक कर बड़े हुए हैं, हम खेले कूदे हर्षयुत, जिसकी प्यारी गोद में हे मातृभूमि! तुझको निरख, मग्न क्यों न हों मोद में।

RBSE Class 8 Hindi समर्पण अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 8 Hindi समर्पण बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि अपना मन, तन और जीवन समर्पित करना चाहता हैं –
(क) परिवार को
(ख) अपने माता-पिता को
(ग) देश की धरती को
(घ) मजदूरों व किसानों को
उत्तर:
(ग) देश की धरती को

प्रश्न 2.
कवि मातृभूमि को थाल में सजाकर देना चाहता है –
(क) मूल्यवान आभूषण
(ख) अपनी कविताएँ
(ग) अपना मस्तक
(घ) स्वादिष्ट भोजन।
उत्तर:
(ग) अपना मस्तक

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प्रश्न 3.
कवि अपने मस्तक पर लगवाना चाहता है –
(क) चंदन
(ख) रोली का टीका
(ग) भारत माँ के चरणों की धूल
(घ) गुलाल।
उत्तर:
(ग) भारत माँ के चरणों की धूल

प्रश्न 4.
कवि ने क्षमा माँगी है –
(क) अपने मित्रों से
(ख) अपने पुत्र-पुत्रियों से
(ग) देशवासियों से
(घ) अपने गाँव, घर, द्वार और आँगन से।
उत्तर:
(घ) अपने गाँव, घर, द्वार और आँगन से।

प्रश्न 5.
‘समर्पण’ कविता की रचना की है –
(क) सुमित्रा नंदन पंत ने
(ख) सुभद्रा कुमारी चौहान ने
(ग) रामावतार त्यागी ने
(घ) गोपाल दास नीरज ने।
उत्तर:
(ग) रामावतार त्यागी ने

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रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –

  1. मन समर्पित, तन समर्पित, और यह ……………”समर्पित।
  2. बाँध दो कसकर ……….. पर ढाल मेरी।
  3. तोड़ता हूँ मोह का बंधन …………… “दो।
  4. चाहता हूँ देश की धरती…….”कुछ और भी हूँ।

उत्तर:

  1. जीवन
  2. कमर
  3. क्षमा
  4. तुझे।

सुमेलित कीजिए –

खण्ड ‘अ’ एवं खण्ड ‘ब’ में दी गई पंक्तियों का मिलान कीजिए –
खण्ड ‘अ’                  खण्ड ‘ब’
(क) मन समर्पित – तुझे कुछ और भी दूँ
(ख) थाल में लाऊँ – कमर पर ढाल मेरी
(ग) बाँध दो कसकर – तन समर्पित
(घ) चाहता हूँ देश की धरती – सजाकर भाल जब भी
उत्तर:
(क) तन समर्पित
(ख) सजाकर भाल जब भी
(ग) कमर पर ढाल मेरी
(घ) तुझे कुछ और भी हूँ।

RBSE Class 8 Hindi समर्पण अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि के ऊपर किसका ऋण बहुत है?
उत्तर:
कवि के ऊपर देश की धरती का ऋण बहुत है।

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प्रश्न 2.
“थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब भी। कर दया स्वीकार लेना, वह समर्पण” पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
देश की धरती से कवि ने निवेदन किया है कि जब मैं अपना भाल थाल में सजाकर लाऊँ, तब तुम दया करके मेरे इस समर्पण को स्वीकार कर लेना।

प्रश्न 3.
‘समर्पण’ कविता में किस चीज को लाने में देरी न करने के लिए कहा गया है?
उत्तर:
समर्पण’ कविता में तलवार को माँजकर लाने में देरी न करने के लिए कहा गया है।

प्रश्न 4.
“भाल पर मल दो, चरण की धूल थोड़ी” पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव- उक्त पंक्ति में भारत माता के चरणों की धूल को कवि भाल (मस्तक) पर मलने के लिए कहता है।

प्रश्न 5.
‘समर्पण’ कविता में कवि क्या चाहता है?
उत्तर:
‘समर्पण’ कविता में कवि तन, मन और जीवन के साथ देश की धरती को कुछ और भी देना चाहता है।

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प्रश्न 6.
किसका कण-कण कवि देश की धरती को समर्पित करता है?
उत्तर:
रक्त का कण-कण कवि देश की धरती को समर्पित करता है।

RBSE Class 8 Hindi समर्पण लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि ने भारत माँ से दयापूर्वक क्या स्वीकार कर लेने का निवेदन किया है और क्यों?
उत्तर:
कवि यह मानता है कि उस पर धरती माँ का बहुत बड़ा ऋण है। इसको चुकाने के लिए उसके पास कोई साधन नहीं है। वह माँ का एक निर्धन बेटा है। इसलिए वह अपना सिर देकर, माँ की रक्षा में अपने प्राण देकर इस ऋण को कुछ कम करना चाहता है। इसीलिए वह धरती माँ से निवेदन करता है कि वह उसकी इस तच्छ भेंट को अवश्य स्वीकार कर ले। इससे उसकी आत्मा को परम शांति मिलेगी।

प्रश्न 2.
कवि ने अपना तन, मन, जीवन, घर-द्वार और रिश्ते-नाते सब देश की धरती को समर्पित कर दिए। फिर भी उसके मन में क्या इच्छा बनी हुई है और क्यों? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि का तन, मन, जीवन, घर-द्वार और गाँव, नाते और बंधन, ये सभी देश की धरती से ही मिले हैं। अतः उनका समर्पण कोई त्याग नहीं है। उसकी वस्तु उसी को सौंप दी तो इसमें कवि का अपना योगदान क्या रहा? इसके साथ-साथ कवि के मन में निरंतर यह इच्छा बनी रहती है कि वह देश की धरती को कुछ और भी दे। यह मातृभूमि के प्रति उसकी सच्ची श्रद्धा और भक्ति का प्रमाण है।

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प्रश्न 3.
कवि क्या लाने के लिए कहता है और क्यों?
उत्तर:
कवि देश की धरती से तलवार माँजकर लाने के लिए और कमर पर ढाल को कसकर बाँधने के लिए कहता है क्योंकि वह तेज धार वाली तलवार से भारत माँ के शत्रुओं को मार गिरायेगा और उसके सम्मान तथा स्वतंत्रता की रक्षा कर सकेगा।

प्रश्न 4.
“तोड़ता हूँ मोह का बंधन, क्षमा दो। गाँव मेरे द्वार घर-आँगन क्षमा दो” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आशय-गाँव, घर, आँगन से क्षमा माँगने से कवि का तात्पर्य है.कि वह कवि अपने गाँव, घर, आँगन में ही खेलकद कर बड़ा हआ है। बचपन से लेकर आज तक उसकी हर आवश्यकता गाँव और घर के लोगों ने परी की है। इसलिए गाँव और घर की देखभाल करना उसका कर्तव्य बनता है लेकिन देश की धरती पर संकट आने के कारण वह अपने गाँव, घर, आँगन से क्षमा माँगकर देश की रक्षा के लिए बलिदान हो जाना चाहता है।

RBSE Class 8 Hindi समर्पण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘समर्पण’ कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
उत्तर:
समर्पण’ कविता देश-प्रेम की भावना को व्यक्त करती है। देश की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। देश के हित के लिए व्यक्ति को अपना सब कुछ न्योछावर कर देना चाहिए। कवि अपने तन, मन और जीवन को देश की धरती की रक्षा के लिए अर्पित कर देता है। यही नहीं भारत माँ ने उस पर जो उपकार किया है उसके बदले में वह कुछ और अधिक भारत माँ को देना चाहता है।

ढाल और तलवार लेकर देश की रक्षा के लिए जाते समय वह मातभमि की मिट्टी को अपने माथे पर लगाता है तथा मातभमि का आशीर्वाद लेता है। कवि अपने इस कर्म से भारत माता को सम्मानित करता है। भारत माँ के ऋण को चुकाने के लिए वह अपने गाँव, घर-द्वार और आँगन के मोह को भी छोड़ देता है। वस्तुतः कविता के माध्यम से कवि देशवासियों के अंदर त्याग, बलिदान और समर्पण की भावना को भरना चाहता है।

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प्रश्न 2.
‘समर्पण’ कविता आपके मन में मातृभूमि के प्रति क्या भावनाएँ जगाती है? अपने विचार संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
समर्पण’ कविता हमारे मन में अपनी मातृ भूमि में प्रति संपूर्ण समर्पण का भाव जगाती है। तन, मन, धन और जीवन इन सभी पर मातृभूमि के उपकार है। धरती के इस ऋण को चुकाना हमारा परम कर्तव्य है। भारत माँ की सेवा करते हुए संकट के समय अपने प्राणों को भी न्योछावर कर ‘देना ही सच्ची देशभक्ति है। यह हमारा जन्मभूमि पर कोई एहसान नहीं है। हमारे मन में निरंतर यह भाव रहना चाहिए कि हम देश की धरती की जो भी सेवा कर पा रहे हैं वह हमारा सौभाग्य है और हमको इससे भी बढ़कर कुछ समर्पण करने की इच्छा बनाए रखनी चाहिए।’

पाठ-परिचय:

प्रस्तुत कविता ‘समर्पण’ में भारत माता के प्रति कवि के सर्वस्व समर्पण का भाव व्यक्त हुआ है। कवि मातृभूमि के उपकारों और ऋणों से गद्गद है। उसने अपना मन, अपना तन और अपना जीवन भारत माँ को समर्पित कर दिया है लेकिन इतने से ही उसके मन को संतोष नहीं हो रहा है। वह चाहता है कि उसे इनसे भी बढ़कर कुछ और भारत माता के चरणों में चढ़ाना चाहिए।

पदयांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ।

1. मन समर्पित तन समर्पित,
और यह जीवन समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी ढूँ।।

माँ तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिंचन,
किंतु इतना कर रहा, फिर भी निवेदन।
थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब भी,
कर दया स्वीकार लेना, वह समर्पण,

मन समर्पित, प्राण अर्पित
रक्त का कण-कण समर्पित,
चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ॥

कठिन शब्दार्थ:
समर्पण = सौंपना, देना, भेंट करना।
समर्पित = सौंपा हुआ।
ऋण = कर्ज।
अकिंचन = बहुत गरीब, दरिद्र।
निवेदन = नम्रतापूर्वक कहना, विनती, प्रार्थना।
स्वीकार = अपनाना।
अर्पित = भेंट किया हुआ।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ रामावतार त्यागी द्वारा रचित कविता ‘समर्पण’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में देश की धरती को अपना सब कुछ समर्पित करने के बाद भी कवि के हृदय में मातृभूमि को कुछ और देने की चाहत व्यक्त हो रही है।

व्याख्या / भावार्थ:
कवि भारत माँ से बहुत प्रेम करता है, उसने भारत माँ की सेवा और रक्षा के लिए अपना तन, मन और जीवन समर्पित कर दिया है, लेकिन उसके मन में इससे भी ज्यादा और कुछ देने की तमन्ना है, क्योंकि देश की धरती का उसके ऊपर बहुत अधिक ऋण है। कवि बहुत गरीब है, उसके पास धरती को देने के लिए धन-दौलत कुछ नहीं है। धरती माता से वह निवेदन कर रहा है कि उसके पास सबसे प्रिय और मूल्यवान वस्तु उसके प्राण हैं।

अतः जब कभी वह मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करे तो माता उसकी इस तुच्छ भेंट को स्वीकार कर ले। इससे उसके मन को बड़ा संतोष होगा। मन, प्राण और रक्त की एक-एक बूंद भी वह माँ के चरणों में चढ़ा देने को तैयार है, लेकिन इतने पर भी उसकी यह अभिलाषा शेष है कि वह कुछ और भी माँ को समर्पित कर सकता तो धन्य हो जाता।

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2. माँज दो तलवार को लाओ न देरी,
बाँध दो कसकर, कमर पर ढाल मेरी,
भाल पर मल दो, चरण की धूल थोड़ी,
शीश पर आशीष की छाया घनेरी,
स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित,
आयु का क्षण-क्षण समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी हूँ।

कठिन शब्दार्थ:
माँजना = रगड़कर साफ करना।
ढाल = तलवार आदि के आघात को रोकने के लिए लोहे आदि का बना हुआ गोलाकार फलक।
भाल = मस्तक।
चरण = पाँव।
शीश = सिर।
आशीष = आशीर्वाद।
छाया = आश्रय,
सहारा। घनेरी = घनी, बहुत।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश ‘रामावतार त्यागी’ द्वारा रचित कविता ‘समर्पण’ से लिया गया है। इसमें कवि धरती द्वारा किए गए उपकारों को चुकाने के लिए वीर वेश धारणकर युद्ध में जाने को तैयार है।

व्याख्या / भावार्थ:
कवि भारतमाता से उसकी रक्षा के लिए युद्धभूमि में जाने की आज्ञा ले रहा है। वह कहता है कि उसकी तलवार की धार पैनी करके उसे थमा दी जाय। उसकी ढाल उसकी कमर से बाँध दी जाय। वह भारत माता से आग्रह करता है कि वह अपने चरणों की धूल का टीका उसके मस्तक पर लगा दे और उसके सिर पर हाथ रखकर उसे विजय का आशीर्वाद प्रदान करे। वह अपने अधूरे सपनों को, अनसुलझी समस्याओं को और अपने जीवन के एक-एक क्षण उसके चरणों में अर्पित करना चाहता है। वह दृढ़ हृदय के साथ रणभूमि में जाना चाहता है। किंतु फिर भी उसके मन में एक ही कसक बाकी रहेगी कि काश! मैं धरती माता को कुछ और भी दे पाता।

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3. तोड़ता हूँ मोह का बंधन, क्षमा दो,
गाँव मेरे द्वार घर-आँगन, क्षमा दो,
आज सीधे हाथ में तलवार दे दो,
और बाएँ हाथ में ध्वज को थमा दो।
ये सुमन लो, यह चमन लो,
नीड़ का तृण-तृण समर्पित,
चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी हूँ।।

कठिन शब्दार्थ:
मोह = ममता।
बंधन = संबंध, आकर्षण।
क्षमा = माफी।
द्वार = दरवाजा।
ध्वज = झंडा, भारत का राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा)।
नीड़ = घोंसला, छोटा घर।
तृण-तृण = तिनका-तिनका।

संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ रामावतार त्यागी’ द्वारा रचित कविता ‘समर्पण’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि देश की रक्षा के लिए मोह और प्रेम के सभी बंधनों को तोड़ देने का दृढ़ निश्चय व्यक्त कर रहा है।

व्याख्या / भावार्थ:
कवि ने अपने गाँव. घर-आँगन सभी के प्रति मोह त्याग दिया है। वह सभी से क्षमा माँगते हुए विदा लेने को तैयार है। वह एक हाथ में तलवार और दूसरे में भारत का झंडा लेकर युद्ध में जाना चाहता है। यह फूलों के समान जीवन के सुख, यह बगीचे के समान देश और तिनके-तिनके जोडकर रचा सपनों का संसार, सब कुछ छोड़कर, सारे नाते तोड़कर कवि कर्तव्य की बलि वेदी पर प्राण-न्योछावर करने जा रहा है। यह सब करने के बावजूद कवि के मन में एक अभिलाषा शेष ही रही कि वह देश की धरती के लिए कुछ और भी करे।

केवल पढ़ने के लिए –

हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन, तन से, मन से, धन से, तन, मन, धन, जीवन से, हम करें राष्ट्र आराधन। अंतर से, मुख से, कृति से, निश्चल हो निर्मल मति से, |श्रद्धा से, मस्तक नति से, हम करें राष्ट्र अभिवादन। अपने हँसते शैशव से, अपने खिलते यौवन से, प्रौढ़ता पूर्ण जीवन से, हम करें राष्ट्र का अर्चन। अपने अतीत को पढ़कर, अपना इतिहास उलटकर, अपना भवितव्य समझकर, हम करें राष्ट्र का चिंतन। हैं याद हमें युग-युग की, जलती अनेक घटनाएँ,. जो माँ की सेवा पथ पर, आयीं बनकर विपदाएँ। हमने अभिषेक किया था, जननी का अरि-षोणित से, हमने शृंगार किया था, माता का अरि-मुण्डों से।।

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