RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 19 कला एवं स्थापत्य

Rajasthan Board RBSE Class 7 Social Science Chapter 19 कला एवं स्थापत्य

RBSE Solutions for Class 7 Social Science

RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 19 कला एवं स्थापत्य

RBSE Class 7 Social Science कला एवं स्थापत्य Intext Questions and Answers

गतिविधि

पृष्ठ संख्या  – 163

प्रश्न 1.
राजस्थान में इनके अलावा और भी दुर्ग हैं, उनके बारे में जानकारी इकट्ठी करके लिखिए। चित्रों का संग्रह कीजिए। अथवा राजस्थान के किलों की सूची बनाएँ।
उत्तर:
राजस्थान की स्थापत्य कला में दुर्गों का विशेष स्थान रहा है। राजस्थान में दुर्गों का निर्माण बड़े पैमाने पर किया गया। इन दुर्गों में निम्नलिखित दुर्ग तत्कालीन दुर्ग-स्थापत्य कला के श्रेष्ठ उदाहरण हैं –

  1. भरतपुर का लोहागढ़ दुर्ग
  2. आबू का अचलगढ़ किला
  3. बूंदी का तारागढ़ दुर्ग
  4. आमेर (जयपुर) का दुर्ग
  5. नागौर का किला
  6. बीकानेर का जूनागढ़ दुर्ग
  7. हनुमानगढ़ का भटनेर दुर्ग
  8. माण्डलगढ़ दुर्
  9. गअलवर. का बाला दुर्ग
  10. जैसलमेर का सोनारगढ़ दुर्ग
  11. जोधपुर का मेहरानगढ़ दुर्ग
  12. झालावाड़ का गागरोन दुर्ग
  13. चित्तौड़ का चित्तौड़गढ़
  14. राजसमन्द का कुंभलगढ़
  15. जालौर का जालौर – दुर्ग
  16. सवाई माधोपुर का रणथम्भौर।

नोट – छात्र इनके चित्रों का संग्रह स्वयं करें।

पृष्ठ संख्या – 172

प्रश्न 2.
अपने आस-पास के मन्दिरों की सूची अपने गुरुजी और बड़ों की मदद से बनाइये।
उत्तर:
राजस्थान में अनेक मन्दिरों का निर्माण हुआ। राजस्थान में निर्मित मन्दिरों की सूची निम्नलिखित हैं –

  1. कालिका माता का मन्दिर (चित्तौड़गढ़)
  2. बाडोली के मन्दिर (कोटा)
  3. एकलिंगजी का मन्दिर, (उदयपुर)
  4. ब्रह्माजी का मन्दिर (पुष्कर)
  5. रणकपुर के जैन मन्दिर (पाली)
  6. आबू के देलवाड़ा के जैन मन्दिर – 1 (सिरोही)
  7. गोविन्ददेव का मन्दिर (जयपुर)
  8. जगत शिरोमणि मन्दिर (आमेर)
  9. शिलादेवी का मन्दिर (आमेर)
  10. ओसियाँ के मन्दिर (जोधपुर)
  11. लक्ष्मीनारायण का मन्दिर (बीकानेर)
  12. करणीमाता का मन्दिर (बीकानेर)
  13. नीलकण्ठेश्वर मन्दिर (अलवर)
  14. किराडू के मन्दिर (बाड़मेर)
  15. हर्षनाथ मन्दिर (सीकर)
  16. मथुराधीश का मन्दिर (कोटा)
  17. केशवराय का मन्दिर (कोटा)
  18. हर्षत माता का मन्दिर (बाँदीकुई)
  19. अम्बिका
  20. मन्दिर (उदयपुर)
  21. जगदीश मन्दिर (उदयपुर)
  22. सास – बहू मन्दिर (नागदा – उदयपुर)
  23. श्रीनाथजी का मन्दिर (राजसमन्द)
  24. एकलिंगनाथ मन्दिर (उदयपुर)
  25. ऋषभदेव मन्दिर (उदयपुर)
  26. भण्डदेवरा मन्दिर (बारां)
  27. कमलेश्वर महादेव (बूंदी)
  28. आभानेरी का मन्दिर (दौसा)

RBSE Class 7 Social Science कला एवं स्थापत्य Text Book Questions and Answers

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एक व दो के सही उत्तर कोष्ठक में लिखिएप्रश्न –
(i) पटवों की हवेलियाँ हैं?
(अ) जैसलमेर में
(ब) जोधपुर में
(स) जयपुर में
(द) उदयपुर में।
उत्तर:
(अ) जैसलमेर में

(ii) देलवाड़ा के जैन मन्दिर हैं?
(अ) सिरोही में
(ब) जोधपुर में
(स) जयपुर में
(द) उदयपुर में
उत्तर:
(अ) सिरोही में

प्रश्न 2.
स्तंभ ‘अ’ को स्तंभ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए
RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल 1
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल 2

प्रश्न 3.
परकोटा एवं प्राचीर क्या हैं?
उत्तर:

  1. परकोटा – परकोटा दुर्ग की रक्षा के लिए चारों ओर से उठाई गई ऊँची और बड़ी दीवार होती है।
  2. प्राचीर – प्राचीर का अर्थ है – चारदीवारी।

प्रश्न 4.
‘दुर्ग’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
दुर्ग से आशय उस क्षेत्र अथवा स्थान से है, जिसके चारों ओर प्राचीर या परकोटा बना हो।

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प्रश्न 5.
चित्तौड़गढ़ के किले का निर्माण किसने करवाया?
उत्तर:
चित्तौड़गढ़ के किले का निर्माण मौर्यवंशी शासक चित्रांगद द्वारा सातवीं सदी में करवाया गया था। तदनन्तर प्रतिहार, राष्ट्रकूट और परमार शासकों द्वारा भी इसके निर्माण में अभिवृद्धि की गई।

प्रश्न 6.
चित्रशैली से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
चित्रशैली से तात्पर्य चित्र बनाने के एक विशेष प्रकार के तरीके से है।

प्रश्न 7.
पोथी चित्रशैली की क्या पहचान है?
उत्तर:
पोथी चित्रशैली की पहचान है – गरुड़ की सी आगे ‘निकली हुई नाक, पतली आँख, छोटी ठुड्डी, ऐंठी अंगुलियाँ, पतली कमर इत्यादि इन चित्रों में लाल; नीले व पीले रंगों का प्रयोग किया जाता था। इनकी रेखाओं की एक जैसी मोटाई होती थी।

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प्रश्न 8.
राजस्थान की मूर्तिकला की प्रसिद्ध प्रतिमाएँ कौन – कौनसी हैं?
उत्तर:
राजस्थान की मूर्तिकला की प्रसिद्ध प्रतिमाएँ इस प्रकार –

  1. शैव प्रतिमाएँ – शैव प्रतिमाओं में महेश मूर्ति, अर्द्धनारीश्वर, उमा महेश्वर, हरिहर आदि की प्रतिमाएँ प्रमुख हैं।
  2. वैष्णव प्रतिमाएँ – वैष्णव प्रतिमाओं में दशावतार प्रतिमाएँ, लक्ष्मीनारायण, गजलक्ष्मी, गरुड़ासीन विष्णु की प्रतिमाएँ प्रमुख हैं।
  3. शाक्त प्रतिमाएँ – शाक्त देवालयों में महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमाओं की प्रधानता है।

प्रश्न 9.
मारवाड़ के प्रमुख मंदिर कौन – कौनसे हैं?
उत्तर:
मारवाड़ के प्रमुख मंदिर हैं –

  1. देलवाड़ा का जैन मन्दिर (आबू पर्वत – सिरोही)
  2. रणकपुर का जैन मन्दिर (पाली)
  3. किराडू के मंदिर (बाड़मेर) तथा
  4. ओसियाँ के मंदिर (जोधपुर)

प्रश्न 10.
राजस्थानी चित्रशैली से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
रायकृष्ण दास ने राजपूताना राज्य में पल्लवित चित्रकला को ‘राजस्थानी चित्रशैली’ की संज्ञा दी, जिसे सभी विद्वानों ने स्वीकार किया है। राजस्थानी चित्रों की विषयवस्तु मुख्य रूप से धार्मिक कथाओं पर आधारित रही है।

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प्रश्न 11.
राजस्थान में जैन मन्दिरों के किसी एक केन्द्र का विवरण लिखें।
उत्तर:
देलवाड़ा के जैन मन्दिर-देलवाड़ा के जैन मन्दिर आबू पहाड़ की बस्ती से लगभग डेढ़ मील की दूरी पर हैं। प्रथम मन्दिर विमलशाह का है तथा दूसरा मन्दिर नेमिनाथ का है। इन मन्दिरों के भीतरी भागों में खम्भों, छतों, मण्डपों, द्वारों आदि की तक्षणकला अनुपम है। इन मन्दिरों की कारीगरी, तक्षण कला और खुदाई का काम अनुपम है।

शिल्प कला की दृष्टि से ये मन्दिर अपने ढंग की कारीगरी के उत्कृष्ट क नमूने हैं। इन मन्दिरों में जन-जीवन की विविध झांकियों से र सम्बन्धित मूर्तियों का उपयोग किया गया है। इन मन्दिरों की नक्काशी अपने ढंग की विलक्षण है जिसको देखकर दर्शक आश्चर्यचकित हो जाता है। मण्डप का काम बड़ा बारीक है। ये मन्दिर मध्यकालीन राजस्थान के वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

RBSE Class 7 Social Science कला एवं स्थापत्य Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
इस्लामिक शैली वाला देश का सबसे पहला भवन समूह बना ………………
(अ) लाहौर में
(ब) अजमेर में
(स) महरौली में
(द) चित्तौड़ में
उत्तर:
(स) महरौली में

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Question 2.
दिल्ली का लाल किला बनवाया था ………………
(अ) बाबर ने
(ब) हुमायूँ ने
(स) अकबर ने
(द) शाहजहाँ ने
उत्तर:
(द) शाहजहाँ ने

Question 3.
किस किले को यूनेस्को ने ‘वैश्विक विरासत’ घोषित किया है?
(अ) लाहौर का किला
(ब) आगरा का लाल किला
(स) दिल्ली का लाल किला
(द) चित्तौड़ का दुर्ग।
उत्तर:
(ब) आगरा का लाल किला

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Question 4.
महाराणा कुम्भा ने अपने राज्य काल में लगभग किले बनवाये थे ………………
(अ) 32
(ब) 132
(स) 200
(द) 208
उत्तर:
(अ) 32

Question 5.
बणी – ठणी किस चित्र शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है?
(अ) जयपुर शैली
(ब) किशनगढ़ शैली
(स) मारवाड़ शैली
(द) मेवाड़ शैली
उत्तर:
(ब) किशनगढ़ शैली

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए 

  1. कुवत – उल – इस्लाम मस्जिद के निकट ही विश्व की प्रसिद्ध ……………… है।
  2. दिल्ली का लाल किला और ……………… शाहजहाँ द्वारा बनवाये गए थे।
  3. ……………… जैसा अभेद्य और दुर्गम दुर्ग कदाचित् देश में, नहीं है।
  4. पश्चिमी अरावली श्रृंखला की ……………… पहाड़ी पर जालौर का दुर्ग स्थित है।
  5. चित्तौड़ के दुर्ग का निर्माण ……………… द्वारा सातवीं सदी में करवाया गया।

उत्तर:

  1. कुतुबुमीनार
  2. आगरा का लाल किला
  3. रणथम्भौर
  4. सोनगिरि
  5. मौर्यवंशी शासक चित्रांगद मौर्य।

निम्नलिखित प्रश्नों में सत्य अथवा असत्य कथन बताइये

  1. जालौर दुर्ग पर लगभग 13वीं सदी तक परमार राजाओं का अधिकार था।
  2. मेहरानगढ़ का दुर्ग मेवाड़ में स्थित है।
  3. ‘बणी – ठणी’ हाड़ौती शैली का उत्कृष्ट चित्र है।
  4. देलवाड़ा का जैन मन्दिर आबू पर्वत-सिरोही में स्थित
  5. बाडोली के मन्दिर जयपुर में स्थित हैं।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. असत्य

स्तंभ’अ’को स्तंभ ‘ब’ से समेलित करें
RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल 3
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल 4

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कुवत – उल – इस्लाम तथा कुतुबमीनार कहाँ स्थित हैं?
उत्तर:
दिल्ली के पास महरौली में।

प्रश्न 2.
मुगल स्थापत्य के दो अभूतपूर्व नमूने कौनसे हैं?
उत्तर:

  1. दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा
  2. आगरा में ताजमहल।

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प्रश्न 3.
इस्लामिक शैली वाला देश का प्रथम भवन समूह कहाँ बना?
उत्तर:
इस्लामिक शैली वाला देश का प्रथम भवन समूह संभवतः दिल्ली के पास महरौली में बना।

प्रश्न 4.
यूनेस्को ने किस किले को ‘वैश्विक विरासत’ घोषित किया है।
उत्तर:
यूनेस्को ने आगरा के लाल किले को ‘वैश्विक विरासत’ घोषित किया है।

प्रश्न 5.
दिल्ली के लाल किले तथा आगरा के ताजमहल का निर्माण किसने करवाया था?
उत्तर:
शाहजहाँ ने।

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प्रश्न 6.
स्थापत्य के विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. नगरीय स्थापत्य
  2. दुर्ग निर्माण
  3. स्तूप
  4. मन्दिर
  5. पुर अथवा नगर
  6. ग्रामीण स्थापत्य

प्रश्न 7.
राजस्थान में ऊँचे पर्वतीय स्थानों पर बने हुए चार दुर्गों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. चित्तौड़गढ़
  2. कुम्भलगढ़
  3. रणथम्भौर
  4. जालौर।

प्रश्न 8.
कौनसे दुर्ग का स्थापत्य राजपूत व मुगल कला के समन्वय का सुन्दरं उदाहरण है?
उत्तर:
बूंदी के तारागढ़ दुर्ग का स्थापत्य।

प्रश्न 9.
वर्तमान में कौनसा दुर्ग व इसके आस-पास का क्षेत्र ‘रणथम्भौर बाघ परियोजना’ के अन्तर्गत आ गया है।
उत्तर:
वर्तमान में रणथम्भौर के दुर्ग व आसपास का क्षेत्र. ‘रणथम्भौर बाघ परियोजना’ के अन्तर्गत आ गया है।

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प्रश्न 10.
‘विजय स्तम्भ’ का निर्माण किसने करवाया था?
उत्तर:
‘विजय स्तम्भ’ का निर्माण महाराजा कुम्भा ने करवाया था।

प्रश्न 11.
मध्ययुगीन चित्रकला शैली के दो प्रमुख केन्द्र कौनसे हैं?
उत्तर:

  1. पश्चिमी भारत का क्षेत्र
  2. पूर्वी भारत का क्षेत्र।

प्रश्न 12.
राजस्थानी चित्र शैली से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
राजपूताना राज्य में पल्लवित चित्रकला को राजस्थानी चित्र शैली’ कहा जाता है।

प्रश्न 13.
कौनसा युग राजस्थानी चित्रकला का ‘स्वर्णिम युग’ कहलाता है?
उत्तर:
17वीं सदी का युग राजस्थानी चित्रकला का ‘स्वर्णिम युग’ कहलाता है।

प्रश्न 14.
‘बणी – ठणी’ किस चित्रशैली का चित्र है?
उत्तर:
‘बणी – ठणी’ किशनगढ़ चित्रशैली का चित्र है।

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प्रश्न 15.
मेवाड़ के प्रमुख मन्दिर कौनसे हैं?
उत्तर:
मेवाड़ के प्रमुख मन्दिर हैं –

  1. जगदीश मन्दिर (उदयपुर)
  2. सास – बहू मन्दिर (नागदा – उदयपुर)
  3. अम्बिका मन्दिर (जगत – उदयपुर)
  4. श्रीनाथजी का मन्दिर (राजसमन्द)
  5. श्री एकलिंगनाथ मन्दिर (उदयपुर)
  6. ऋषभदेव जैन मन्दिर (उदयपुर)

प्रश्न 16.
जैसलमेर की तीन प्रसिद्ध हवेलियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. जैसलमेर की सालिम सिंह की हवेली
  2. नथमल की हवेली
  3. पटवों की हवेली।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सल्तनतकालीन स्थापत्य का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
दिल्ली में मुस्लिम सल्तनत की स्थापना के साथ ही नए स्थापत्य ने जन्म लिया। पश्चिमी एशिया के प्रभाव से अब हिन्दुस्तान में भी मस्जिदों का निर्माण होने लगा। सम्भवतः इस्लामिक शैली वाला देश का सबसे पहला भवन समूह दिल्ली के पास महरौली में बना। यहाँ कुव्वतउल-इस्लाम मस्जिद के निकट ही विश्व की प्रसिद्ध कुतुबमीनार है।

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प्रश्न 2.
मुगलकालीन स्थापत्य को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
मुगल सम्राटों ने भारत में मस्जिदों के साथ-साथ कई अन्य मकबरे भी बनवाये। इन मकबरों में मध्य और पश्चिमी एशिया की स्थापत्य कला का भी प्रभाव था। दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा तथा आगरा में ताजमहल. मुगल स्थापत्य के अभूतपूर्व नमूने हैं। शाहजहाँ ने दिल्ली के लाल किले और आगरे के लाल किले का निर्माण करवाया। ये क्रमशः रिहायशी और सामरिक किले हैं।

प्रश्न 3.
‘विजय स्तम्भ’ के स्थापत्य की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी पर विजय प्राप्त करने की याद में महाराणा कुम्भा ने चित्तौड़ में ‘विजय स्तम्भ’ का निर्माण करवाया। यह चित्तौड़ के अत्यन्त प्राचीन तीर्थ स्थल गोमुख कुण्ड के उत्तरपूर्वी कोण पर निर्मित है। यह स्तम्भ 47 फीट वर्गाकार और 10 फीट ऊँचे चबूतरे पर बना है। यह 122 फीट ऊँचा है। यह 9 मंजिला स्मारक अपनी कारीगरी का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस स्मारक स्तम्भ पर उत्कीर्ण नामांकित मूर्तियाँ हैं। इस स्तम्भ को ‘भारतीय मूर्तिकला का शब्दकोश’ कहना उचित होगा। इस स्तम्भ का निर्माण करने वाले शिल्पी जइता तथा उसके पुत्र थे। इस स्तम्भ का निर्माण सन् 1440 में प्रारम्भ होकर सन् 1448 में पूर्ण हुआ।

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प्रश्न 4.
दुर्गों की उपयोगिता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
दुर्ग न केवल सामरिक दृष्टि से वरन् शासकों के आवास, सेना और सामान्य लोगों के रहने के लिए भी उपयुक्त थे। इसमें खाद्य भण्डारण, कुंड, जलाशय आदि आवश्यक सुविधाएँ होती थीं। दुर्ग में इतनी व्यवस्था होती थी कि कई महीने बिना परेशानी, बिना किसी समस्या के दुर्ग के अन्दर लोग तब तक रह सकते थे, जब तक कि सेना दुश्मन को न हरा दे।

प्रश्न 5.
शासकों द्वारा बनाए गए पहाड़ी क्षेत्र के दुर्गों एवं मैदानी क्षेत्र के दुर्गों में क्या अन्तर होता था?
उत्तर:
शासकों द्वारा बनाए गए पहाड़ी क्षेत्र के दुर्गों के आस-पास अनेक गहरी खाइयाँ बनाई जाती थीं जिनमें पानी भरकर दुश्मनों को रोका जा सकता था जबकि मैदानी क्षेत्र के दुर्गों के चारों ओर चौड़ी खाइयाँ बनाई जाती थीं जिनमें संकरे मार्ग भी होते थे। इन खाइयों को नदी अथवा तालाब से जोड़ा जाता था।

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प्रश्न 6.
राजस्थान चित्र शैली के प्राचीन ग्रन्थ चित्रों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
राजस्थानी चित्र शैली के अनेक सचित्र ग्रन्थ उपलब्ध हैं जिनमें राजस्थानी चित्र शैली का आरम्भिक स्वरूप निखरता दिखाई देता है। इन ग्रन्थ चित्रों में ‘लौरचन्द्रा’, ‘मृगावती’, ‘गीत गोविन्द’, ‘चोर पंचाशिका’, ‘नायक-नायिका भेद’, ‘चावण्ड रागमाला’ आदि ग्रन्थों में जैन शैली का परिष्कृत रूप निखरने लगा। रसिकप्रिया’, ‘रामायण’, ‘भागवत पुराण’ चित्रों में यह मौलिक रूप में दिखाई देती है। ‘चोर पंचाशिका’ व ‘चावण्ड रागमाला’ ग्रन्थों को कला इतिहासज्ञों ने राजस्थानी चित्रकला शैली के आरम्भिक ग्रन्थ चित्र माना है। इनका समय लगभग 16वीं शताब्दी पूर्वार्द्ध माना गया है।

प्रश्न 7.
राजस्थानी चित्रशैली के चित्रों की विषयवस्तु का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थानी चित्रशैली के चित्रों की विषयवस्तु मुख्य रूप से धार्मिक कथाओं पर आधारित रही है। चित्रकारों ने कृष्ण लीला सम्बन्धी अनेक चित्र बनाये। इसके अतिरिक्त राजा के दरबार, आखेट-क्रीड़ा आदि पर भी अनेक चित्र बने धार्मिक विषयों पर अनेक चित्र बनते रहे।

प्रश्न 8.
राजस्थान में चित्र-निर्माण की प्रमुख शैलियों के नाम लिखिये।
उत्तर:
राजस्थान में चित्र निर्माण की प्रमुख शैलियाँ निम्न हैं –

  1. मेवाड़ शैली – (उदयपुर, नाथद्वारा, देवगढ़, चावण्ड)
  2. मारवाड़ शैली – (सिरोही, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर)
  3. हाड़ौती शैली – (बूंदी, कोटा, झालावाड़)
  4. ढूंढाड़ शैली – (जयपुर, अलवर, उनियारा, शेखावाटी)
  5. किशनगढ़ शैली – (अजमेर, किशनगढ़)

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प्रश्न 9.
‘मंदिर’ शब्द से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
‘मंदिर’ शब्द से तात्पर्य है – वह स्थान जहाँ हम अपने आराध्य देवी – देवता की पूजा करते हैं। मंदिर का तलछन्द/भूमि तल विस्तार (ग्राउण्ड विस्तार)इस प्रकार होता है –

  1. प्रवेश मण्डप
  2. सभा मण्डप और
  3. गर्भगृह इसका ऊर्ध्व विस्तार (एलीवेशन) पीठ, मण्डोवर, शिखर आदि में विभाजित होता है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
राजस्थान के दुर्ग – स्थापत्य की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान के दुर्ग – स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएँ –
1. दुर्ग से तात्पर्य – वह क्षेत्र या स्थान जिसके चारों ओर प्राचीर या परकोटा बना है। राजस्थान के इतिहास में लोक भाषा में दुर्ग के पर्याय के रूप में ‘किला’ शब्द का प्रयोग किया जाता रहा है।

2. दुर्ग के निर्माण का उद्देश्य – अधिकांश दुर्ग सामरिक दृष्टि से और सुरक्षा के लिए बनाए जाते थे। सुरक्षा की दृष्टि से दुर्ग ऊँची पहाड़ियों पर, गहरी नदियों के किनारे अथवा मैदानी क्षेत्रों में बनाए जाते थे।

3. गहरी खाइयों का निर्माण – जहाँ तक सम्भव हो, दुर्ग के आस – पास एक या अनेक गहरी खाइयाँ भी बनाई जाती थीं जिनमें पानी भरकर शत्रु को रोका जा सकता था।

4. आवश्यक सुविधाएँ – ये दुर्ग न केवल सामरिक दृष्टि से वरन् शासकों के आवास, सेना और सामान्य लोगों के रहने के लिए भी उपयुक्त थे। इनमें खाद्य भण्डारण, कुंड, जलाशय आदि आवश्यक सुविधाएँ होती थीं। दुर्ग में इतनी व्यवस्था होती थी कि कई महीने बिना परेशानी, बिना किसी समस्या के दुर्ग के अन्दर लोग रह सकते थे, जब तक कि सेना शत्रु को न हरा दे।

5. मैदानी दुर्गों की संरचना – मैदानी दुर्गों में भी पूर्ववत् विशेषताएँ तो रहती थीं किन्तु ऐसे दुर्गों के चारों ओर चौड़ी खाइयाँ बनाई जाती थीं, जिन्हें नदी या तालाब से जोड़ा जाता था। इनमें संकड़े मार्ग भी बने होते थे।

6. राजस्थान के प्रसिद्ध दुर्ग – राजस्थान में ऊँचे पर्वतीय स्थानों पर निम्नलिखित प्रमुख दुर्ग बने हुए हैं:

  • चित्तौड़गढ़
  • कुम्भलगढ़ (राजसमन्द)
  • जालौर
  • रणथम्भौर (सवाईमाधोपुर)
  • तारागढ़ (बून्दी)
  • मेहरानगढ़ (जोधपुर)
  • सोनारगढ़ (जैसलमेर)
  • गागरोन (झालावाड़)
  • जूनागढ़ (बीकानेर)
  • आमेर (जयपुर)

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प्रश्न 2.
बून्दी के तारागढ़ दुर्ग के स्थापत्य की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
बून्दी के तारागढ़ दुर्ग के स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएँ –

  1. दुर्ग की स्थिति – अरावली पहाड़ी के उत्तर भाग में सतुर की दूसरी पहाड़ी पर हाड़ा शासकों के कलात्मक महल बने हुए हैं जिन्हें तारागढ़ दुर्ग के नाम से जाना जाता
  2. दुर्ग का निर्माण – तारागढ़ दुर्ग का निर्माण 1354 ई. में राव बरसिंह ने करवाया था। इस दुर्ग के चारों ओर दृढ़ दीवार का निर्माण किया गया।
  3. राजपूत व मुगल कला का सुन्दर समन्वय – बूंदी दुर्ग का स्थापत्य राजपूत व मुगलकला के समन्वय का सुन्दर उदाहरण है।
  4. राजमहलों को सुन्दर भित्ति चित्रों से सुसज्जित करना – दुर्ग के छत्रसाल महल तथा यंत्रशाला को सुन्दर भित्ति चित्रों से सुसज्जित किया
  5. गया है। बादल महल तथा अनिरुद्ध महल की चित्रशाला में चित्रित भित्ति चित्र राजस्थान की भित्ति चित्र परम्परा के सुन्दर उदाहरण हैं।
  6. स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण – भवनों की शानदार छतरियों व दरबार हाल के अलंकृत स्तम्भ स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

प्रश्न 3.
रणथम्भौर दुर्ग के स्थापत्य की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
रणथम्भौर दुर्ग के स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएँ –

  1. अभेद्य एवं दुर्गम दुर्ग – रणथम्भौर का दुर्ग भारत का प्रसिद्ध दुर्ग है। ऐसा अभेद्य तथा दुर्गम दुर्ग कदाचित देश में दूसरा नहीं है।
  2. दुर्ग की स्थिति – रणथम्भौर का दुर्ग एक ऊँची पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। दुर्ग का नाम ‘रणथम्भपुर’ है।’ विद्वानों के अनुसार इस
  3. दुर्ग का निर्माण चौहानवंशी राजाओं ने करवाया, जिन्होंने 600 वर्षों तक इस क्षेत्र पर एकछत्र शासन किया। यह सैन्य दृष्टि से बड़ा महत्त्वपूर्ण है।
  4. रणथम्भौर बाघ परियोजना में सम्मिलित होनावर्तमान में रणथम्भौर का दुर्ग व इसके आस-पास का सघन वन क्षेत्र ‘रणथम्भौर बाघ परियोजना के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया है, जिससे इसके जीर्णोद्धार व संरक्षण का कार्य प्रगति पर है।

प्रश्न 4.
जालौर दुर्ग के स्थापत्य कला की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जालौर दुर्ग के स्थापत्य कला की विशेषताएँ –
1. दुर्ग की स्थिति – जालौर का दुर्ग पश्चिमी अरावली श्रृंखला की सोनगिरि पहाड़ी पर समुद्र तट से 2408 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। पहाड़ी के शीर्ष पर 800 गज लम्बा और 400 गज चौडा समतल मैदान है। तीन दरवाजों को पार करके चौथे मुख्य द्वार से दुर्ग में प्रवेश किया जाता है।

2. दुर्ग का निर्माण – जालौर के दुर्ग का निर्माण परमार राजाओं धारावर्ष तथा मुंज ने दसवीं शताब्दी में करवाया था।

3. दुर्ग में निर्मित भवन – जालौर दुर्ग में अनेक हिन्दू एवं जैन मन्दिर, बुर्ज आदि बनाए गए हैं। दुर्ग पर मुस्लिम पीर मलिक शाह की मस्जिद भी है। दुर्ग में अतुलित जल भण्डार, कुएँ, कुंड आदि बने हुए हैं। इस दुर्ग पर लगभग 13वीं सदी तक परमार राजाओं का अधिकार था। यह दुर्ग प्राचीरों के कुछ भाग को छोड़कर अब भी अच्छी स्थिति में है।

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प्रश्न 5.
चित्तौड़ के दुर्ग के स्थापत्य की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चित्तौड़ के दुर्ग की स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएँ –
1. दुर्ग की स्थिति – चित्तौड़ का दुर्ग उदयपुर-दिल्ली मार्ग पर उदयपुर से 120 किलोमीटर उत्तर:पूर्व में स्थित है। यह एक ऊँची पहाड़ी पर सुदृढ़ प्राचीर से घिरा हुआ है।

2. दुर्ग का निर्माण – चित्तौड़ के किले का निर्माण मौर्यवंशी शासक चित्रांगद मौर्य द्वारा सातवीं सदी में करवाया गया। इसके बाद प्रतिहार, सिसौदिया एवं परमार शासकों द्वारा भी इसके निर्माण में अभिवृद्धि की गई।

3. दुर्ग के अन्दर भवन – दुर्ग में राजमहल, कलात्मक मन्दिर, जलाशय आदि बने हुए हैं। मेवाड़ के महाराणा कुम्भा ने दुर्ग के कई स्थलों का जीर्णोद्धार करवाया। दुर्ग के अनेक भवन, मन्दिर, स्तम्भ आदि बने हुए हैं, जो भारतीय स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। चित्तौड़ का दुर्ग कुम्भाकालीन भारतीय स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है। चित्तौड़ के दुर्ग में विजय स्तम्भ’ भी बना हुआ है।

प्रश्न 6.
राजस्थान के मन्दिर निर्माण की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
राजस्थान के मन्दिर निर्माण की प्रमुख विशेषताएँ –
1. मंदिर से तात्पर्य – मंदिर शब्द से तात्पर्य है – वह स्थान जहाँ हम अपने आराध्य देवी – देवता की पूजा करते है।

2. मंदिर का तलछन्द/भूमितल विस्तार – मन्दिर का तलछन्द/भूमि तल विस्तार प्रवेश मण्डप, सभा मण्डप तथा गर्भगृह में विभाजित होता है। इसका ऊर्ध्व विस्तार (एलीवेशन) पीठ, मण्डोवर, शिखर आदि में विभाजित होता है।

3. राजस्थान के मन्दिर – राजस्थान में मध्यकाल में कई महत्त्वपूर्ण मन्दिरों का निर्माण हुआ। राजस्थान के प्रमुख मन्दिर निम्नलिखित हैं
(i) मेवाड़ क्षेत्र के प्रमुख मन्दिर – मेवाड़ क्षेत्र के प्रमुख मन्दिर ये हैं –

  • जगदीश मन्दिर (उदयपुर)
  • सास|बहू मन्दिर (नागदा – उदयपुर)
  • अम्बिका मन्दिर (जगत – उदयपुर)
  • श्रीनाथजी का मन्दिर (राजसमन्द)
  • श्री एकलिंगनाथ मन्दिर (उदयपुर)
  • ऋषभदेव जैन मन्दिर (उदयपुर)

(ii) मारवाड़ क्षेत्र के प्रमुख मंदिर – मारवाड़ क्षेत्र के प्रमुख मन्दिर ये हैं –

  • देलवाड़ा का जैन मन्दिर (आबू पर्वत| सिरोही)
  • रणकपुर का जैन मन्दिर (पाली)
  • किराडू के मन्दिर (बाड़मेर)
  • ओसियाँ के मन्दिर (जोधपुर)

(iii) हाड़ौती क्षेत्र के प्रमुख मन्दिर –

  • बाडोली (रावतभाटा)
  • भण्डदेवरा (बारां)
  • कमलेश्वर महादेव (बूंदी)
  • सूर्य मन्दिर (झालरापाटन, झालावाड़)

(iv) शेखावाटी – जयपुर क्षेत्र के प्रमुख मन्दिर

  • गोविन्ददेवजी का मन्दिर (जयपुर)
  • आभानेरी मन्दिर (दौसा)
  • खाटू श्यामजी (सीकर) आदि

4. मन्दिरों का निर्माण – इन मन्दिरों का निर्माण ‘महाराजाओं, जागीरदारों, रानियों और श्रेष्ठि संघों द्वारा समयसमय पर करवाया जाता था। कभी-कभी इतना बड़ा मन्दिर बनाने वाला अपना बड़प्पन भी दिखाना चाहता था।

5. मन्दिरों की देख – रेख – मन्दिरों की देख – रेख के लिए स्थानीय शासकों द्वारा व्यवस्था की जाती थी।

6. मन्दिरों का संचालन-सरकार द्वारा सुरक्षित देवालयों की पूजा-अर्चना का दायित्व वर्तमान में ‘देवस्थान विभाग’ द्वारा किया जाता है।

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प्रश्न 7.
राजस्थान की मूर्ति कला पर एक निबन्ध लिखिए
उत्तर:
राजस्थान की मूर्ति कला गुप्तकालीन भारतीय मूर्ति कला के आदर्श तत्त्वों ने कला को नया रूप प्रदान किया। गुप्तकालीन मूर्तिकला का राजस्थान की मूर्तिकला पर भी प्रभाव पड़ा। इस समय राजस्थान में वैष्णव, शैव, शाक्त, सूर्यादि धमों के प्रसार के साथ – साथ जैन धर्म को भी राजकीय संरक्षण प्राप्त था। इसलिए उपर्युक्त धर्मों के देवी-देवताओं के देवालयों एवं प्रतिमाओं का पर्याप्त मात्रा में निर्माण किया गया राजस्थान में मूर्तियों से अलंकृत देवालयों का निर्माण गुर्जर – प्रतिहार, परमार, चौहान, गुहिल शासकों के संरक्षण में हुआ है, लेकिन प्रतिहारों का योगदान सर्वाधिक रहा है।
1. शैव धर्म से सम्बन्धित मूर्तियाँ:
शैव धर्म की प्राचीन परम्परा में शिव के लिंग-विग्रह और मानवीय प्रतिमाएँ पर्याप्त मात्रा में निर्मित हुई हैं। इन प्रतिमाओं में महेश मूर्ति, अर्द्ध नारीश्वर, उमा महेश्वर, हरिहर व अनुग्रह मूर्तियों को पर्याप्त उत्कीर्ण किया गया है। इन सभी प्रतिमाओं का सौन्दर्य अनुपम है।

2. वैष्णव धर्म से सम्बन्धित प्रतिमाएँ:
प्राचीन काल में राजस्थान में वैष्णव धर्म का भी व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ। वैष्णव धर्म के प्रसार की पुष्टि राजस्थान में ईसा-पूर्व प्रथम द्वितीय सदी में नगरी के अभिलेख से होती है। वैष्णव प्रतिमाओं में दशावतार प्रतिमाएँ लक्ष्मीनारायण, गरुड़ासीन विष्णु आदि प्रमुख हैं। विष्णु की विशिष्ट प्रतिमाओं में वैकुण्ठ, अनन्त, त्रैलोक्य मोहन इत्यादि पर्याप्त रूप से उत्कीर्ण की गई हैं।

3. शाक्त धर्म से सम्बन्धित प्रतिमाएँ:
पूर्व मध्यकाल में शाक्त मत का व्यापक प्रसार था। परिणामस्वरूप कई शाक्त देवालयों का निर्माण हुआ। इन देवालयों में ‘महिषासुर मर्दिनी’ की प्रतिमाओं की प्रधानता है।

4. सूर्य धर्म से सम्बन्धित प्रतिमाएँ:
सूर्य मत का प्रभाव 8 – 9वीं शताब्दी से देखा जा सकता है। ओसियां, वरमाण (सिरोही), झालरापाटन, चित्तौड़गढ़, उदयपुर में आज भी सूर्य मन्दिर स्थित हैं।

5. जैन धर्म से सम्बन्धित प्रतिमाएँ:
राजस्थान में जैन धर्म का भी काफी प्रचार-प्रसार रहा है। राजस्थान में जैन धर्म का प्रसार 6 – 7 वीं सदी से ही स्थापत्य व शिल्प कला के रूप में दिखाई देता है। सिरोही क्षेत्र में बसन्तगढ़ और आहाड़ क्षेत्र से प्राप्त धातु की जैन प्रतिमाएँ इसके प्राचीनतम उदाहरण हैं। मीरपुर, आबू, देलवाड़ा के जैन मन्दिर, रणकपुर, चित्तौड़गढ़, ओसियां में जिनालयों के निर्माण की परम्परा इसके सुन्दर उदाहरण हैं।

6. मूर्तिकला की प्रमुख विशेषताएँ:
इस युग की हिन्दू व जैन प्रतिमाओं के निर्माण में भारतीय. प्रतिमा विज्ञान के नियमों का अनुसरण किया गया है। इन प्रतिमाओं में आभूषण, परिधान व केश-विन्यास, अभंग व त्रिभंग मुद्रा में उत्कीर्ण प्रतिमाएँ इस युग की मूर्तिकला की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

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प्रश्न 8.
राजस्थान की हवेलियों के स्थापत्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
राजस्थान की हवेलियों का स्थापत्य राजस्थान में हवेलियों के निर्माण की स्थापत्य कला भारतीय वास्तुकला के अनुसार रही है। जयपुर की हवेली परम्परा इतनी प्रसिद्ध हुई कि शेखावाटी के श्रेष्ठी वर्ग ने अपने अपने गाँव में विशाल हवेलियाँ बनवाने की परम्परा ही डाल दी। रामगढ़, नवलगढ़, मुकुन्दगढ़ की विशाल हवेलियाँ हवेली – शैली स्थापत्य के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। जैसलमेर की हवेलियाँ-जैसलमेर की सालिम सिंह की हवेली, नथमल की हवेली और पटवों की हवेली पत्थर की जालियों एवं कटाई के कारण विश्व में प्रसिद्ध हैं। अन्य स्थानों की हवेलियाँ – करौली, भरतपुर, कोटा आदि की हवेलियाँ भी अपनी कलात्मक कार्यों के कारण बेजोड़ मानी जाती हैं।

प्रश्न 9.
राजस्थान की छतरियों के स्थापत्य की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान की छतरियों के स्थापत्य की विशेषताएँ –
1. छतरियों से तात्पर्य – राजस्थान में राजाओं, सामन्तों एवं श्रेष्ठि लोगों की मृत्यु के पश्चात् उनकी स्मृति में स्थापत्य की दृष्टि से बनाए गए विशिष्ट स्मारक छतरियों और देवल के नाम से जाने जाते हैं।

2. प्रसिद्ध छतरियाँ – अलवर में मूंसी महारानी की छतरी, करौली में गोपाल सिंह की छतरी, बूंदी में चौरासी खम्भों की छतरी, राजगढ़ में सेठों की छतरी, गेटोर में महाराजा ईश्वरी सिंह की छतरी, जोधपुर में जसवन्त सिंह का थड़ा, आयड़ की छतरियाँ और जैसलमेर में बड़ा बाग की छतरियों का स्थापत्य अत्यन्त सुन्दर है।

3. शेखावाटी की छतरियाँ – शेखावाटी की छतरियों में चित्रित मानव जीवन के विविध दृश्य अत्यन्त सुन्दर और आकर्षक हैं। सीकर के शासकों देवीसिंह तथा लक्ष्मण सिंह की छतरियाँ भी तत्कालीन स्थापत्य के उत्कृष्ट नमूने हैं। शेखावाटी की छतरियों से शेखावत-काल के वीरों के इतिहास पर अच्छा प्रकाश पड़ता है। झुन्झुनूं जिले की अनुपम तथा भित्ति चित्रों से सुसज्जित छतरी परशरामपुर में शार्दूल सिंह की छतरी मानी जाती है। शेखावाटी की माधोसिंह, कल्याण सिंह तथा हरदयाल सिंह की छतरियाँ अपनी सादगी, विशालता और उन्नत अधिष्ठान के लिए प्रसिद्ध हैं।

4. रामगढ़ शेखावाटी की छतरियाँ – रामगढ़ शेखावाटी धनाढ्य सेठों की नगरी कहलाती है। यहाँ के सेठों ने विपुल धन लगाकर विशाल एवं शानदार हवेलियाँ बनवाईं। रामगोपाल पोदार की छतरी शेखावाटी संभाग की सबसे बड़ी छतरी मानी जाती है।

5. अलवर की छतरी – अलवर के नैड़ा अंचल की छतरियाँ – कला और शिल्प की उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ बने हुए भित्ति-चित्र भित्ति चित्रण की तत्कालीन दक्षता और शिल्पकला की विशिष्टता के प्रतीक हैं।

6. मंडौर की छतरियाँ – मंडौर में स्थापत्य कला की नक्काशी से युक्त विशाल देवालय के पास ही बने पंचकुंडा में भव्य छतरियाँ बनी हुई हैं। मंडौर में राव मालदेव से लेकर तख्तसिंह तक के मारवाड़ के शासकों के देवलों के नाम से विख्यात स्मारक बने हुए हैं। ये स्मारक लाल घाटू के पत्थरों से बने हुए हैं, जिन पर पत्थर के शिल्पियों की सुन्दर तक्षण कला देखी जा सकती है। यहाँ के विशालकाय देवलों में महाराजा जसवन्तसिंह, अजीत सिंह व तख्त सिंह के देवल दर्शनीय हैं।

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