RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 17 राजस्थान एवं दिल्ली सल्तनत

Rajasthan Board RBSE Class 7 Social Science Chapter 17 राजस्थान एवं दिल्ली सल्तनत

RBSE Solutions for Class 7 Social Science

RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 17 राजस्थान एवं दिल्ली सल्तनत

RBSE Class 7 Social Science राजस्थान एवं दिल्ली सल्तनत Intext Questions and Answers

गतिविधि

पृष्ठ संख्या  – 150

प्रश्न 1.
दिल्ली व राजस्थान के राजवंशों के काल को तिथि वर्ष क्रमानुसार लिखो।
उत्तर:
दिल्ली के राजवंश –

  1. गुलाम वंश (1206 से 1290 ई.)
  2. खिलजी वंश (1290 ई. से 1320 ई.)
  3. तुगलक वंश (1320 ई. से 1414 ई.)
  4. सैय्यद वंश (1414 ई. से 1451 ई.)
  5. लोदी वंश (1451 ई. से 1526 ई.)
  6. मुगल वंश (1526 ई. से 1707 ई.)

राजस्थान के राजवंश –

  1. चौहान वंश 551 ई.
  2. गुहिल वंश (मेवाड़) 566 ई.
  3. कछवाहा वंश (आमेर) 967 ई.
  4. गुहिल वंश (बागड़ – 1177 ई.)
  5. कछवाहा वंश (ढूंढाड़) 1137 ई.
  6. भाटी वंश (जैसलमेर) 1155 ई.
  7. सिसौदिया वंश (मेवाड़) 1326 ई.
  8. यादव वंश (करौली) 1348 ई.
  9. राठौड़ वंश (बीकानेर) 1465 ई.
  10. राठौड़ वंश (मारवाड़) 13वीं सदी।

RBSE Class 7 Social Science राजस्थान एवं दिल्ली सल्तनत Text Book Questions and Answers

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
स्तम्भ ‘अ’ को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए –

उत्तर:

प्रश्न 2.
तराइन के प्रथम युद्ध में कौन विजयी रहा?
उत्तर:
तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान विजयी रहा।

प्रश्न 3.
मुहम्मद गौरी के बाद सत्ता प्राप्ति के संघर्ष में कौन विजयी रहा?
उत्तर:
मुहम्मद गौरी के बाद सत्ता प्राप्ति के संघर्ष में कुतुबुद्दीन ऐबक विजयी रहा।

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प्रश्न 4.
अलाउद्दीन खिलजी रणथम्भौर पर आक्रमण क्यों करना चाहता था?
उत्तर:
अलाउद्दीन खिलजी ने निम्न कारणों से रणथम्भौर पर आक्रमण किया –

  1. अलाउद्दीन सम्पूर्ण भारत को जीतना चाहता था।
  2. रणथम्भौर का दुर्ग दिल्ली के निकट था।
  3. रणथम्भौर का दुर्ग अभेद्य माना जाता था।
  4. रणथम्भौर का दुर्ग सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण था।
  5. हम्मीर देव ने अलाउद्दीन खिलजी के कुछ शत्रुओं को अपने राज्य में शरण दे रखी थी।

प्रश्न 5.
अलाउद्दीन के चित्तौड़ पर आक्रमण का संक्षिप्त विवरण लिखिए।
उत्तर:
अलाउद्दीन खिलजी का चित्तौड़ पर आक्रमण| अलाउद्दीन खिलजी ने एक विशाल सेना लेकर चित्तौड़ की ओर प्रस्थान किया और चित्तौड़ पहुँच कर दुर्ग का घेरा डाल दिया। दुर्ग का घेरा आठ माह तक चलता रहा लेकिन अलाउद्दीन को कोई सफलता नहीं मिली। तब अलाउद्दीन ने कूटनीति का सहारा लेते हुए संधि वार्ता की पहल की। संधि वार्ता के दौरान रतन सिंह को बात-चीत करते हुए अपने पड़ाव तक ले गया और उसे कैद कर लिया। गौरा 3 और बादल के प्रयासों से रतनसिंह कैद से मुक्त हुए और वे पुनः किले में आ गए। अब युद्ध अवश्यंभावी हो गया था तथा दुर्ग में रसद सामग्री भी समाप्त हो गई थी। राजपूत सरदारों ने केसरिया वस्त्र धारण किए और किले के द्वार खोल दिए।

चित्तौड़ का शासक रावल रतनसिंह और उसके सेनापति गोरा व बादल वीरतापूर्वक लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुए। इधर रानी पद्मिनी के नेतृत्व में विशाल संख्या में स्त्रियों ने किले के अन्दर जौहर किया। यह चित्तौड़ का पहला जौहर था। 1303 में चित्तौड़ पर अलाउद्दीन खिलजी का अधिकार हो गया। अलाउद्दीन ने चित्तौड़ की जनता का कत्लेआम का आदेश दिया। मुस्लिम सैनिकों ने जनता को खूब लूटा और. अन्य भवनों तथा मन्दिरों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद चित्तौड़ का दुर्ग अपने पुत्र खिज्र खाँ को सौंप कर अलाउद्दीन दिल्ली लौट आया।

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प्रश्न 6.
जालौर पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जालौर पर अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण 1305 ई. में कान्हड़देव जालौर का शासक बना। साम्राज्य विस्तार की आकांक्षा, जालौर की महत्त्वपूर्ण सामरिक वव्यापारिक स्थिति, कान्हड़देव के बढ़ते शक्ति प्रभाव को रोकने आदि कारणों से अलाउद्दीन जालौर को जीतना चाहता था। 1308 में अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर पर अधिकार करने के लिए एक विशाल मुस्लिम सेना भेजी। देशद्रोहियों की सहायता से छल – कपट द्वारा खिलजी सेना ने सिवाणा के. दुर्ग को जीत लिया।

इसके बाद मेड़ता के निकट मलकाना में राजपूत सैनिकों ने खिलजी सेना पर धावा बोल दिया और सेनापति शम्स खाँ को उसकी पत्नी सहित बन्दी बना लिया। इस पर अलाउद्दीन खिलजी ने एक विशाल सेना लेकर जालौर पहुँच कर अलाउद्दीन खिलजी ने दुर्ग पर घेरा डाल दिया। जालौर के शासक कान्हड़देव ने अपनी सम्पूर्ण शक्ति के साथ खिलजी सेना का मुकाबला किया। धीरे-धीरे दुर्ग में रसद सामग्री समाप्त होने लगी। ऐसी संकटपूर्ण स्थिति में एक दहिया राजपूत सरदार ने कान्हड़देव से विश्वासघात करते हुए राज्य प्राप्त करने के लालच में खिलजी सेना को एक गुप्त द्वार से किले में प्रवेश करवा दिया।

राजद्रोही पति की पत्नी ने अपने पति को मार डाला कान्हड़देव ने खिलजी सेना का वीरतापूर्वक मुकाबला किया और लड़ता हुआ वीरगति को प्राप्त हुआ। इस प्रकार जालौर के दुर्ग पर अलाउद्दीन खिलजी का अधिकार हो गया।

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प्रश्न 7.
महाराणा कुम्भा के शासन काल की जानकारी कौन – कौन से स्रोतों से प्राप्त होती है?
उत्तर:
महाराणा कुम्भा के शासन कालं की जानकारी के स्रोत-महाराणा कुम्भा के शासनकाल की जानकारी के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं –

  1. एकलिंग महात्म्य
  2. रसिकप्रिया
  3. कुम्भलगढ़ प्रशस्ति
  4. कीर्तिस्तम्भ का शिलालेख

प्रश्न 8.
महाराणा कुम्भा के शासन की उपलब्धियों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
महाराणा कुम्भा के शासन की उपलब्धियाँमहाराणा कुम्भा के शासन की उपलब्धियों का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया जा सकता है –
1. मालवा पर विजय:
1437 ई. में महाराणा कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी पर आक्रमण किया। सारंगपुर नामक स्थान पर मेवाड़ तथा मालवा की सेनाओं के बीच भीषण युद्ध हुआ, जिसमें महमूद खिलजी बुरी तरह पराजित हुआ। महमूद खिलजी की सेना को परास्त होकर भागना पड़ा। इस भागती सेना का कुम्भा ने माण्डु तक पीछा किया और महमूद खिलजी को बन्दी बना लिया। इस विजय के उपलक्ष में महाराणा कुम्भा ने चित्तौड़ में ‘कीर्तिस्तम्भ’ का निर्माण करवाया।

कुम्भा ने महमूद खिलजी को 6 महीने तक कैद में रखने के बाद मुक्त कर दिया। मुक्त होकर महमूद खिलजी ने कुम्भलगढ़, चित्तौड़ आदि पर बार-बार आक्रमण किये, परन्तु उसे असफलता का मुँह देखना पड़ा।

2. गुजरात पर विजय:
कुम्भा की सहायता से शम्स खाँ नागौर की गद्दी पर बैठ गया। परन्तु गद्दी पर बैठने के बाद शम्स खाँ ने कुम्भा से सम्बन्ध विच्छेद कर लिए। इस प्रकार कुम्भा ने एक विशाल सेना लेकर नागौर की ओर प्रस्थान किया। गुजरात के सुल्तान ने शम्स खाँ की सहायता के लिए अपनी सेना भेज दी। परन्तु कुम्भा ने गुजरात के शासक कुतुबुद्दीन तथा नागौर के शासक शम्स खाँ की संयुक्त सेना को पराजित कर दिया। कुछ समय बाद गुजरात तथा मालवा की संयुक्त सेनाओं ने मेवाड़ पर आक्रमण किया, परन्तु कुम्भा ने गुजरात तथा मालवा की संयुक्त सेनाओं को पराजित कर दिया। इस प्रकार कुम्भा अपने समय का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक बन गया।

3. अन्य विजयें:
कुम्भा ने आबू और सिरोही, मारवाड़, बूंदी, डूंगरपुर, रणथम्भौर आदि पर भी विजय प्राप्त की।

4. सांस्कृतिक उपलब्धियाँ:
कुम्भा एक उच्च कोटि का विद्वान एवं विद्वानों का आश्रयदाता था। उसने ‘संगीत मीमांसा’, ‘रसिकप्रिया’ आदि ग्रन्थ लिखे। कुम्भा एक महान निर्माता भी था। उसका काल भारतीय कला के इतिहास में स्वर्णिम काल कहा जा सकता है। मेवाड़ – राज्य में कुल 84 दुर्ग हैं, जिनमें से 32 दुर्गों का निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया था। इनमें कुम्भालगढ़ का दुर्ग विशेष रूप से उल्लेखनीय है। दुर्ग के चारों ओर विशाल प्राचीर है तथा उसे बुर्जियों द्वारा सुरक्षित किया गया है। कुम्भा ने अनेक मन्दिरों का भी निर्माण करवाया। इनमें चित्तौड़ का कुम्भा श्याम का मन्दिर, शृंगार गौरी का मन्दिर, एकलिंगजी का मीरां मन्दिर आदि उल्लेखनीय हैं।

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प्रश्न 9.
राव शेखा के जीवन से क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर:
राव शेखा के जीवन से प्रेरणा-राव शेखा पन्द्रहवीं शताब्दी का एक अद्वितीय व्यक्तित्व था। उसके जीवन से हमें निम्नलिखित प्रेरणाएँ मिलती हैं:
1. स्वाभिमान बनाए रखना –
राव शेखा कच्छवाहावंशीय होने से आमेर राज्य का सम्मान बनाये रखने के लिए वह उसे वार्षिक कर देता रहता था। आमेर का शासक चन्द्रसेन राव शेखा को आमेर राज्य की अधीनता में लाना चाहता था। परन्तु राव शेखा एक स्वाभिमानी व्यक्ति था। वह आमेर राज्य की अधीनता स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था। अतः राव शेखा तथा चन्द्रसेन के बीच एक दशक तक युद्ध होते रहे। अन्त में 1471 ई. के युद्ध में राव शेखा की विजय हुई। इसलिए चन्द्रसेन को शेखा को एक स्वतन्त्र शासक स्वीकार करना पड़ा। शेखा युद्ध कला में निपुण था। इससे हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें अपना स्वाभिमान बनाए रखना चाहिए और दूसरे की अधीनता में नहीं रहना चाहिए।

2. धार्मिक सहिष्णुता –
राव शेखा एक धर्म-सहिष्णु व्यक्ति था। वह सभी धर्मों का सम्मान करता था उसकी प्रेरणा से ही पठानों ने गाय का मांस न खाने का संकल्प लिया। अतः शेखा के जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें | धार्मिक सहिष्णुता का पालन करना चाहिए।

3. नारियों का सम्मान करना – राव शेखा नारी अस्मिता का रक्षक था। नारी के सम्मान को सुरक्षित रखने के लिए शेखा ने 1488 में अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। इससे हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें नारियों का सम्मान करना चाहिए।

RBSE Class 7 Social Science राजस्थान एवं दिल्ली सल्तनत Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
महमूद गजनवी ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किए ………………..
(अ) 7 बार
(ब) 10 बार
(स) 17 बार
(द) 21 बार
उत्तर:
(स) 17 बार

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Question 2.
दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई ………………..
(अ) 1526 ई. में.
(ब) 1191 ई. में
(स) 1326 ई. में
(द) 1206 ई. में
उत्तर:
(द) 1206 ई. में

Question 3.
भारत में प्रथम मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना की ………………..
(अ) इल्तुतमिश ने
(ब) कुतुबुद्दीन ऐबक ने
(स) महमूद गजनवी ने
(द) बाबर ने
उत्तर:
(ब) कुतुबुद्दीन ऐबक ने

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Question 4.
हम्मीरदेव शासक था ………………..
(अ) चित्तौड़ का
(ब) अजमेर का
(स) जालौर का
(द) रणथम्भौर का
उत्तर:
(द) रणथम्भौर का

Question 5.
1308 में अलाउद्दीन खिलजी ने किस दुर्ग पर अधिकार कर लिया था ………………..
(अ) सिवाणा
(ब) जालौर
(स) सिरोही
(द) चित्तौड़
उत्तर:
(अ) सिवाणा

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. महमूद गजनवी ने ………………. में सोमनाथ मन्दिर पर आक्रमण किया और उसे खूब लूटा।
  2. ………………. अलाउद्दीन खिलजी रणथम्भौर दुर्ग पर घेरा डाले रहा परन्तु उसे कोई सफलता नहीं मिली।
  3. हम्मीर ने 17 युद्ध किए थे, जिनमें से वह ………………. युद्धों में विजयी रहा।
  4. 1302 ई. में ………………. मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ में गद्दी पर बैठा।
  5. 1305 ई. में. ………………. जालौर का शासक बना।

उत्तर:

  1. 1025 ई. में
  2. लगभग एक वर्ष तक
  3. 16
  4. रावल रतनसिंह
  5. कान्हड़देव

निम्नलिखित प्रश्नों में सत्य अथवा असत्य कथन बताइये 

  1. तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान मे मुहम्मद गौरी को पराजित किया।
  2. मुहम्मद गौरी के बाद सत्ता प्राप्ति के लिए होने वाले संघर्ष में कुतुबुद्दीन ऐबक विजयी हुआ।
  3. कान्हड़देव चित्तौड़ का पराक्रमी शासक था।
  4. महाराव शेखा आमेर के शासक चन्द्रसेन के अधीन था।
  5. कुम्भा ने 84 दुर्गों में से 42 दुर्गों का निर्माण करवाया।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. असत्य

स्तंभ ‘अ’ को स्तंभ ‘ब’ से सुमेलित करें

उत्तर:

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
दिल्ली सल्तनत की स्थापना कब हुई और वह कब तक चली?
उत्तर:
दिल्ली सल्तनत की स्थापना 1206 में हुई और वह 1526 ई. तक चली।

प्रश्न 2.
दिल्ली सल्तनत के अन्तर्गत किन प्रमुख राजवंशों ने शासन किया?
उत्तर:
दास वंश, खिलजी वंश, तुगलक वंश, सैयद वंश और लोदी वंश।

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प्रश्न 3.
रणथम्भौर के दुर्ग पर विजय प्राप्त करने में कौन खिलजी शासक असफल रहा?
उत्तर:
जलालुद्दीन खिलजी।

प्रश्न 4.
अलाउद्दीन खिलजी के समय चित्तौड़ का शासक कौन था? वह गद्दी पर कब बैठा?
उत्तर:
अलाउद्दीन खिलजी के समय चित्तौड़ का शासक रावल रतनसिंह था। वह 1302 ई. में गद्दी पर बैठा।

प्रश्न 5.
अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर आक्रमण करने के क्या कारण थे?
उत्तर:

  1. मेवाड़ का बढ़ता हुआ प्रभाव
  2. अलाउद्दीन खिलजी की साम्राज्य – विस्तार की लालसा
  3. चित्तौड़ के दुर्ग का सामरिक महत्त्व।

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प्रश्न 6.
रणथम्भौर के दुर्ग के घेरे के दौरान किस खिलजी सेनापति की मृत्यु हो गई?
उत्तर:
नुसरत खाँ।

प्रश्न 7.
मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश की नींव किसने डाली?
उत्तर:
सिसोदा गाँव के सरदार हम्मीर ने।

प्रश्न 8.
कान्हड़देव कौन था? वह जालौर का शासक कब बना?
उत्तर:
कान्हड़देव जालौर का शासक था। वह 1305 ई. में जालौर का शासक बना।

प्रश्न 9.
महाराणा कुम्भा ने मालवा के किस सुल्तान को पराजित किया और कब किया?
उत्तर:
महाराणा कुम्भा ने 1437 ई. में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी को पराजित किया।

प्रश्न 10.
कीर्तिस्तम्भ का निर्माण किसने करवाया और क्यों करवाया?
उत्तर:
मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में महाराणा कुम्भा ने ‘कीर्तिस्तम्भ’ का निर्माण करवाया।

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प्रश्न 11.
महाराणा कुम्भा ने राजस्थान में स्थित 84 दुर्गों में से कितने दुर्गों का निर्माण करवाया?
उत्तर:
32 दुर्गों का।

प्रश्न 12.
मेवाड़ के किस दुर्ग को ‘अजय दुर्ग’ के नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
कुम्भलगढ़ दुर्ग को।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
तुर्क आक्रमणकारियों के द्वारा भारत पर किए गए आक्रमणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. महमूद गजनवी के आक्रमण – भारत की राजनीतिक दुर्बलता का लाभ उठाकर महमूद गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किए। इन आक्रमणों में महमूद गजनवी ने मन्दिरों को तोड़ा और अपार धन-सम्पत्ति लूट कर गजनी ले गया। उसने 1025 में गुजरात के प्रसिद्ध मन्दिर सोमनाथ मन्दिर पर आक्रमण किया और मन्दिर को ध्वस्त कर विपुल धन लूट कर ले गया।

2. मुहम्मद गौरी के आक्रमण – मुहम्मद गौरी ने भारत पर अनेक आक्रमण किये। 1191 ई. में तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गौरी को पराजित कर दिया परन्तु 1192 ई. में मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित कर अपनी पराजय का बदला ले लिया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप भारत में मुस्लिम शासन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया। 1194 ई. में मुहम्मद गौरी ने जयचन्द गहड़वाल को भी पराजित कर दिया।

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प्रश्न 2.
हम्मीरदेव चौहान की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हम्मीरदेव चौहान 1282 ई. में रणथम्भौर की गद्दी पर बैठा। वह एक पराक्रमी तथा महत्त्वाकांक्षी शासक था। 1291 ई. से पूर्व तक दिग्विजय करके उसने अपने राज्य गया। की सीमाओं का विस्तार कर लिया था। उसने कई राज्यों को जीत कर अपने साम्राज्य का अंग बनाया और कई राज्यों से केवल कर ही लिया। हम्मीर ने भीमरस के शासक अर्जुन, धार के परमार शासक और मेवाड़ के शासक समरसिंह को पराजित कर राजस्थान में अपना प्रभुत्व स्थापित किया। मेवाड़ के पश्चात् वह आबू, वर्धनपुर (काठियावाड़), पुष्कर, चम्पा, त्रिभुवनगिरी होता हुआ स्वदेश लौट गया। इन विजयों से राजस्थान में रणथम्भौर के चौहानों की राजनीतिक प्रतिष्ठा बढ़ गई।

प्रश्न 3.
हम्मीर देव का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर:

  1. हम्मीरदेव एक वीर योद्धा एवं कुशल सेनापति था. अलाउद्दीन ने सैन्य-शक्ति के बल पर नहीं, बल्कि छल-कपट से रणथम्भौर को जीता था। हम्मीर ने 17 युद्ध किए थे, जिनमें से वह 16 युद्धों में विजयी रहा था।
  2. हम्मीर विद्वानों और कलाकारों का आश्रयदाता था। विजयादित्य इसके दरबार का प्रसिद्ध विद्वान था।
  3. हम्मीर शरणागतों का रक्षक था। उसने शरणागतों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

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प्रश्न 4.
अलाउद्दीन खिलजी के जालौर पर आक्रमण करने के क्या कारण थे?
उत्तर:

  1. अलाउद्दीन खिलजी एक महत्त्वाकांक्षी शासक था। वह राजस्थान के स्वतन्त्र राज्यों पर अधिकार करके अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था।
  2. जालौर का दुर्ग सामरिक दृष्टि से बड़ा महत्त्वपूर्ण था क्योंकि यह दुर्ग अत्यन्त सुरक्षित था।
  3. गुजरात तथा मालवा पर अपना अधिकार बनाए रखने के लिए तथा दक्षिण भारत को जीतने के लिए जालौर पर अधिकार करना आवश्यक था।
  4. जालौर के शासक कान्हड़देव ने खिलजी सेना को जालौर-राज्य में से गुजरने की अनुमति नहीं दी थी। इससे अलाउद्दीन कान्हड़देव से नाराज था।
  5. गुजरात – विजय के बाद जब खिलजी सेना जालौर| राज्य की सीमा से गुजर रही थी तो कान्हड़देव ने खिलजी सेना पर आक्रमण कर दिया और उनका बहुत सा सामान लूट लिया। इससे अलाउद्दीन खिलजी तथा कान्हड़देव के बीच शत्रुता बढ़ गई।

प्रश्न 5.
कान्हड़देव का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर:

  1. वीर योद्धा एवं स्वाभिमानी शासककान्हड़देव एक वीर योद्धा, देशभक्त एवं स्वाभिमानी शासक था। वह सैनिक नेतृत्व में अपने समय के किसी राजपूत शासक से कम नहीं था।
  2. धर्म – सहिष्णु – कान्हड़देव एक धर्म – सहिष्णु व्यक्ति था तथा सभी धर्मों का सम्मान करता था।
  3. कूटनीतिक योग्यता का अभाव – कान्हड़देव में कूटनीतिक योग्यता का अभाव था। उसकी महानता और अधिक बढ़ जाती, यदि वह
  4. अपनी स्वतन्त्रता की रक्षा अन्य राजपूत शासकों को साथ लेकर करता।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
रणथम्भौर पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
1. रणथम्भौर पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के कारण:

  • अलाउद्दीन खिलजी एक अत्यन्त महत्त्वाकांक्षी शासक था। वह सम्पूर्ण भारत पर अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहता था।
    रणथम्भौर का दुर्ग दिल्ली के निकट था।
  • रणथम्भौर का दुर्ग सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण था। यह अभेद्य दुर्ग माना जाता था।
  • रणथम्भौर के शासक हम्मीर ने अलाउद्दीन के कुछ शत्रुओं को अपने राज्य में शरण दे दी थी, जिससे सुल्तान – बहुत नाराज था।

2. खिलजी सेना द्वारा रणथम्भौर पर आक्रमण:
अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर सेनापति उलुग खाँ तथा नुसरत खाँ ने रणथम्भौर की ओर प्रस्थान किया। खिलजी सेना ने झाइन के दुर्ग पर अधिकार कर लिया और रणथम्भौर के दुर्ग पर घेरा डाल दिया। घेरे के दौरान पत्थर लगने से खिलजी सेनापति नुसरत खाँ बुरी तरह घायल हो गया और मारा गया। राजपूती सेना ने दुर्ग से निकलकर खिलजी सेना पर धावा बोल दिया जिससे उलुग खाँ को अपने प्राण बचाने के लिए भागना पड़ा व उसकी सेना को पीछे हटना पड़ा।

3. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा रणथम्भौर पर आक्रमण:
नुसरत खाँ की मृत्यु का समाचार सुन कर अलाउद्दीन खिलजी एक विशाल सेना लेकर रणथम्भौर पहुँच गया। लगभग एक वर्ष तक सुल्तान रणथम्भौर दुर्ग पर घेरा डाले रहा, परन्तु उसे कोई सफलता नहीं मिली। सुल्तान ने छल – कपट से काम लेते हुए हम्मीरदेव के सेनापतियों को प्रलोभन देकर अपनी ओर मिला लिया। उधर दुर्ग में रसद सामग्री भी समाप्त हो रही थी। अतः राजपूत सैनिक दुर्ग से निकलकर शत्रु – सेना पर टूट पड़े। हम्मीर वीरतापूर्वक लड़ता हुआ मारा गया। इस प्रकार 1301 ई. में रणथम्भौर पर अलाउद्दीन खिलजी का अधिकार हो गया।

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प्रश्न 2.
महाराव शेखा के जीवन एवं व्यक्तित्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
महाराव शेखा का जीवन एवं व्यक्तित्व –
1. आमेर-राज्य की अधीनता मानने से इन्कार करना:
महाराव शेखा पन्द्रहवीं शताब्दी का एक अद्वितीय व्यक्तित्व था। उसका जन्म 1433 ई. में हुआ था। कच्छवाहा वंशीय होने से आमेर-राज्य का सम्मान बनाये रखने के लिए वह वार्षिक कर देता रहता था। परन्तु वह आमेर राज्य की अधीनता स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था। दूसरी ओर आमेर का शासक चन्द्रसेन शेखा. को अपनी अधीनता में लाना चाहता था। अतः दोनों पक्षों के बीच एक दशक तक युद्ध होते रहे। अन्त में 1471 ई. के युद्ध में शेखा की विजय हुई इसलिए चन्द्रसेन को शेखा को एक स्वतन्त्र शासक स्वीकार करना पड़ा।

2. अपने राज्य का विस्तार करना:
महाराव शेखा एक वीर योद्धा था। उसने अपने आस-पास के प्रदेशों पर अधिकार करना शुरू किया। उसने भिवानी, हिसार व अन्य अनेक प्रदेशों पर अधिकार कर लिया। इससे उसके राज्य की सीमाओं का विस्तार हुआ। उसके राज्य में गाँवों की संख्या 360 तक पहुँच गई तथा उसका राज्य अमरसर का क्षेत्रफल आमेर राज्य से भी बड़ा था।

3. चारित्रिक विशेषताएँ:
राव शेखा एक धर्म-सहिष्णु व्यक्ति था। उसके प्रयासों से पठानों ने गाय के मांस को न खाने का संकल्प लिया। शेखा नारी अस्मिता का भी रक्षक था। नारी के सम्मान को सुरक्षित रखने के लिए उसने 1488 ई. में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था। जहाँ उसकी मृत्यु हुई, वहाँ उसकी यादगार में एक छतरी बनी

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