RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 15 वृहत्तर भारत

Rajasthan Board RBSE Class 7 Social Science Chapter 15 वृहत्तर भारत

RBSE Solutions for Class 7 Social Science

RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 15 वृहत्तर भारत

RBSE Class 7 Social Science वृहत्तर भारत Intext Questions and Answers

गतिविधि

पृष्ठ संख्या  – 135

प्रश्न 1.
भारतीय संस्कृति के विभिन्न देशों पर पड़े प्रभाव को जानें एवं उसके उदाहरण अपनी नोटबुक में लिखें।
उत्तर:
भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं का विश्व के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़े प्रभाव का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया जा सकता है।
1. भाषा और साहित्य का प्रभाव – संस्कृत में लिखे अभिलेख बर्मा, स्याम, मलय, प्रायद्वीप, कम्बोडिया, अन्नाम, सुमात्रा, जावा, बोर्निया, चम्पा आदि देशों में पाए गए हैं।

2. धर्म का प्रभाव – बर्मा और स्याम में बौद्ध धर्म का व्यापक प्रचार था। जहाँ बौद्ध धर्म प्रधान था, वहाँ ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि की पूजा की जाती थी।

3. समाज का प्रभाव – इन देशों में वर्ण व्यवस्था प्रचलित थी। भारत की भाँति वहाँ विवाह की अनेक रस्में प्रचलित. थीं वहाँ सती प्रथा भी प्रचलित थी। भारत की भाँति ही वहाँ के समाज का मुख्य खाद्य चावल और गेहूँ ही था। आभूषण व वस्त्रों का पहनने का प्रकार भी भारत की भाँति ही था।

4. कला का प्रभाव – भारत की भाँति वहाँ कला धर्म से प्रभावित थी। वहाँ की कला का प्रारम्भिक रूप पूर्णतः भारतीय ढंग का है। जावा के बरोबुदूर के मन्दिर में निर्मित मूर्तियों पर भारतीय मूर्तिकला का प्रभाव देखा जा सकता है। कम्बुज के अंगकोरवाट के मन्दिर के मध्य और किनारे के शिखर उत्तर भारतीय शैली के हैं। बर्मा के सर्वोत्तम मन्दिर ‘पगान का आनन्द’ भारतीय शैली से ही विकसित हुआ है।

RBSE Class 7 Social Science वृहत्तर भारत Text Book Questions and Answers

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एक व दो के सही उत्तर कोष्ठक में लिखिए –
(i) चम्पा में कितने संस्कृत अभिलेख मिले हैं?
(अ) 50
(ब) 70 से कम
(स) 150 से अधिक
(द) 100 से अधिक
उत्तर:
(द) 100 से अधिक

(ii) कम्बुज के कौन से नरेश ने कुल 326 छन्दों के चार अभिलेखों की रचना की है ………………….
(अ) जयवर्मन
(ब) यशोवर्मन
(स) राजवर्मन
(द) बहुवर्मन
उत्तर:
(ब) यशोवर्मन

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प्रश्न 2.
जावा की सबसे लोकप्रिय मूर्ति का क्या नाम है?
उत्तर:
जावा की सबसे लोकप्रिय मूर्ति ‘भटारगुरु’ है।

प्रश्न 3.
भारतीय वर्ण व्यवस्था में वर्णित चार वर्णों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. ब्राह्मण
  2. क्षत्रिय
  3. वैश्य
  4. शूद्र (हरिजन)

प्रश्न 4.
‘वयंग’ क्या है? स्पष्ट करें।
उत्तर:
जावा में नाटक का लोकप्रिय रूप ‘छाया नाट्य’ है, जो ‘वयंग’ कहलाता है। वयंग के कथानक मुख्यतः रामायण और महाभारत से लिए गए हैं और आज भी जावा निवासियों के इस्लाम धर्म मानने के बावजूद भी ये खेल वहाँ आज भी उतने ही लोकप्रिय एवं प्रचलित हैं, जो भारतीय संस्कृति की व्यापकता के प्रतीक हैं।

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प्रश्न 5.
‘बोरोबूदर’ व ‘लोरो – जंगरंग’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
उत्तर:
1. बोरोबूदर:
जावा का बरोबोदूर का मन्दिर जावा की वास्तुकला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इस मन्दिर का निर्माण 750 से 850 ई. के बीच जावा के सम्राट शैलेन्द्रो के संरक्षण में बना था। इसमें एक के ऊपर एक नौ मंजिलें बनी हुई हैं तथा सबसे ऊपर एक घंटानुमा. स्तूप है. यह मन्दिर अत्यन्त सुन्दर एवं आकर्षक है। इस मन्दिर के बरामदों में अनेक मूर्तियाँ बनी हुई हैं। ये मूर्तियाँ 11 पंक्तियों में बनी हुई हैं तथा इन मूर्तियों की संख्या लगभग 1500 है। बोरोबूदर की बुद्ध की मूर्ति तथा मेनदूत की बोधिसत्व की स्वतन्त्र मूर्तियाँ जावा की मूर्तिकला के सुन्दरतम नमूने माने जाते हैं। चेहरे पर दैवी आध्यात्मिक भाव इन मूर्तियों की प्रमुख विशेषता है। विद्वानों के मतानुसार भारत की गुप्तकालीन मूर्तिकला से ही इन मूर्तियों की रचना करने की प्रेरणा मिली होगी।

2. लोरो – जंगरंग:
लोरो – जंगरंग का मन्दिर प्रभ्बनन की घाटी में स्थित है तथा इस मन्दिर का स्थान बरोबोदूर के मन्दिर के बाद द्वितीय माना जाता है। इसमें आठ मुख्य मन्दिर हैं। उनमें शिव की मूर्ति प्रतिष्ठित है। उसके उत्तर के मन्दिर में विष्णु की और दक्षिण के मन्दिर में ब्रह्मा की मूर्ति है। इसके बरामदे के अन्दरूनी भाग में उत्कीर्ण मूर्तियों के 42 फलक हैं जिनमें शुरू से लेकर लंका पर आक्रमण तक के रामायण के दृश्य अंकित हैं। विद्वानों के मतानुसार ‘बरोबोदर’ तथा ‘लोरो – जंगरंग’ जावा और भारतीय कला के क्लासिकल तथा रोमांटिक स्वरूपों को व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 6.
‘अंगकोरवाट का मन्दिर’ पर टिप्पणी लिखो।
उत्तर:
अंगकोरवाट का मन्दिर-वृहत्तर भारत के हिन्दू मन्दिरों में कम्बुज के अंगकोरवाट का विष्णु मन्दिर विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसका निर्माण 1125 ई. में कम्बुज के सम्राट सूर्यवर्मा द्वितीय द्वारा कराया गया। यह सम्पूर्ण मन्दिर पत्थर का बना हुआ है। इस मन्दिर के चारों ओर 650 फीट चौड़ी तथा 2 मील लम्बी खाई है। इसमें 36 फीट चौड़ा पत्थर का रास्ता है। पश्चिमी फाटक से पहले बरामदे तक की सड़क 1560 फीट लम्बी और 7 फीट ऊँची है। अन्तिम मंजिल का केन्द्रीय शीर्ष जमीन से 210 फीट की ऊँचाई पर है। मन्दिर में जाने के लिए 36 फीट चौड़ा एक पुल बनवाया गया है। मन्दिर के बीच का शिखर सबसे ऊँचा है तथा चारों कोनों पर चार अन्य शिखर बनाए गए हैं। मन्दिर अपनी मूर्तिकला के लिए भी प्रसिद्ध है।

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प्रश्न 7.
भाषा साहित्य के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति के प्रभाव का वर्णन करो।
उत्तर:
भाषा व साहित्य के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति का प्रभाव:
1. संस्कृत में लिखित अभिलेख:
संस्कृत में लिखित अभिलेख बर्मा, स्याम, मलय प्रायद्वीप, कम्बोडिया, अन्नाम, सुमात्रा, जावा और बोर्निया में मिले हैं। इनमें से सबसे प्राचीन लेख ईसा की दूसरी-तीसरी शताब्दी का है। वहाँ संस्कृत का प्रयोग 1000 वर्षों से अधिक काल तक होता रहा। हिन्द – चीन के अधिकांश भागों में आज भी पालि, जो संस्कृत से निकली हुई है, दैनिक प्रयोग में आती है। इस मन्दिर के बरामदों में अनेक मूर्तियाँ बनी हुई हैं। ये मूर्तियाँ 11 पंक्तियों में बनी हुई हैं तथा इन मूर्तियों की संख्या लगभग 1500 है।

बोरोबूदर की बुद्ध की मूर्ति तथा मेनदूत की बोधिसत्व की स्वतन्त्र मूर्तियाँ जावा की मूर्तिकला के सुन्दरतम नमूने माने जाते हैं। चेहरे पर दैवी आध्यात्मिक भाव इन मूर्तियों की प्रमुख विशेषता है। विद्वानों के मतानुसार भारत की गुप्तकालीन मूर्तिकला से ही इन मूर्तियों की रचना करने की प्रेरणा मिली होगी। चम्पा में 100 से अधिक संस्कृत अभिलेख मिले हैं। कम्बुज में इससे भी अधिक संख्या में संस्कृत अभिलेख मिले हैं जो साहित्य की दृष्टि से उच्च कोटि के हैं। वे सुन्दर, निर्दोषपूर्ण काव्य-शैली में लिखे गए हैं।

2. छन्दों, अलंकारों की जानकारी:
इन अभिलेखों के रचयिताओं ने प्रायः सभी छन्दों का प्रयोग किया है और उनसे संस्कृत व्याकरण, अलंकार और छन्द शास्त्र के विकसित सिद्धान्तों का पूर्ण ज्ञान प्रकट होता है। इनसे रामायण, महाभारत काव्य, पुराण और साहित्य के ६.य अंगों तथा भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक विचारों की भी जानकारी मिलती

3. अभिलेखों में वेद, स्मृति, ब्राह्मण, बौद्ध और जैन धार्मिक ग्रन्थों की जानकारी:
इन अभिलेखों से वेद, वेदान्त, स्मृति तथा ब्राह्मण, बौद्ध और जैन धार्मिक ग्रन्थों, रामायण, महाभारत, काव्य, पुराण, पाणिनि के व्याकरण और पतंजलि के महाभाष्य तथा मनु, वात्स्यायन, सुश्रुत, प्रवरसेन, मयूर और गुणाढ्य की रचनाओं के अध्ययन की जानकारी भी. मिलती है।

4. राजाओं तथा प्रमुख अधिकारियों का साहित्यिक कार्यों में योगदान:
चम्पा के तीन राजाओं के विद्वान होने का उल्लेख मिलता है। उनमें से एक चारों वेदों का ज्ञाता था। कम्बुज-नरेश यशोवर्मन शास्त्र और काव्यों का रसिक था तथा उसने महाभाष्य पर टीका लिखी थी।

5. जावा के निवासियों का संस्कृत साहित्य के सृजन में योगदान:
जावा के निवासियों ने न केवल संस्कृत साहित्य का अध्ययन किया, वरन् उन्होंने भारतीय साहित्य के अनुकरण पर अपने एक विस्तृत साहित्य का सृजन भी किया। महत्त्वपूर्ण रचनाओं में रामायण और महाभारत का जावी भाषा में हुआ, गद्यानुवाद उल्लेखनीय है। स्मृति और पुराणों पर आधारित भी अनेक ग्रन्थों की रचना की गई। कुछ रचनाएँ इतिहास, भाषा शास्त्र तथा आयुर्वेद पर भी पाई जाती हैं। विषय, गुण और मात्रा की दृष्टि से जावा के साहित्य में प्राचीन भारतीयों का यह योगदान एक उल्लेखनीय कार्य है। भारत के बाहर कहीं भी भारतीय साहित्य का इतना लाभपूर्ण न तो अध्ययन हुआ है और न उसका इतना महत्त्वपूर्ण परिणाम ही रहा है।

6. बौद्ध पालि साहित्य का सृजन:
बर्मा और सिंहल में बौद्ध पालि साहित्य का सृजन हुआ। इन दोनों देशों में बौद्ध, धर्म ग्रन्थों में पाली भाषा अपनाई गई जिसने वहां नये साहित्य को जन्म दिया और आज तक वह निरन्तर चली आ रही है।

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प्रश्न 8.
‘समाज एवं धर्म’ के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति के प्रभाव का वर्णन करो।
उत्तर:
समाज के क्षेत्र में भारतीय संस्कति का प्रभाव –
1. समाज के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति के प्रभाव:
(i) वर्ण – व्यवस्था – भारतीय समाज की भाँति वृहत्तर भारत के समय में भी वर्ण-व्यवस्था प्रचलित थी। यहाँ भी समाज चार प्रमुख वर्गों में विभाजित था। ये चार वर्ण थे –

  • ब्राह्मण
  • क्षत्रिय
  • वैश्य

शूद्र (हरिजन) परन्तु जिस प्रकार बाद में चार वर्गों में विसंगति भारत में उत्पन्न हुई वैसी वहाँ की संस्कृति में नहीं हुई। बाली और कम्बोज के लोगों में जो जाति – व्यवस्था का स्वरूप आज दिखाई दे रहा है, उसे हम भारत की प्राचीन वर्ण व्यवस्था का उदाहरण समझ सकते हैं।

(ii) विवाह – यहाँ भी विवाह की भारत के समान एक पवित्र धार्मिक संस्कार माना जाता था। विवाह का आदर्श, विभिन्न प्रकार की वैवाहिक रस्में, उनका स्वरूप और वैवाहिक सम्बन्ध लगभग भारत के समाज की तरह ही प्रचलित थे।

(iii) सती प्रथा – भारत की भाँति यहाँ भी सती – प्रथा प्रचलित थी।

(iv) स्त्रियों का सम्मानजनक स्थान – समाज में स्त्रियों का सम्मानजनक स्थान था। पर्दा-प्रथा का प्रचलन नहीं था। स्त्रियों को पर्याप्त स्वतन्त्रता थी। भारत की भाँति यहाँ भी स्त्रियों को अपना पति चुनने का अधिकार था।

(v) मनोरंजन के साधन – यहाँ जुआ, मुर्गों की लड़ाई, संगीत, नृत्य और नाटक लोगों के मनोरंजन के प्रमुख साधन थे। शतरंज का खेल भी समाज में प्रचलित था। जावा में नाटक का लोकप्रिय रूप ‘दाया-नाट्य’ है जो ‘वयंग’ कहलाता है। ‘वयंग’ के कथानक मुख्यतः रामायण और महाभारत से लिए गए हैं और आज भी यह खेल वहाँ लोकप्रिय एवं प्रचलित है जो भारतीय संस्कृति के प्रभाव का परिचायक है।

(vi) भोजन एवं वस्त्राभूषण – भारत की भाँति ही वहाँ के समाज का मुख्य खाद्य चावल और गेहूँ ही था। वहाँ पान खाना भी प्रचलन में था। वहाँ आभूषण एवं वस्त्रों का पहनने का प्रकार भी भारत की ही तरह था।

2. धर्म के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति के प्रभाव –
(i) बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार-बर्मा और स्याम में बौद्ध धर्म प्रधान था।

(ii) पौराणिक हिन्दू धर्म का प्रचार – प्रसार अधिकांश देशों में पौराणिक हिन्दू धर्म ही विशेष रूप से लोकप्रिय था। वहाँ त्रिमूर्ति अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु और शिव की पूजा होती थी। परन्तु शिव की पूजा मुख्य रूप से होती थी। जावा में ‘भटारगुरु’ की मूर्ति बहुत लोकप्रिय है। ऐसा प्रतीत होता है कि शायद हिन्देशिया का कोई मूल देवता इसमें मिल गए थे।

(iii) भारतीय विद्वानों द्वारा कम्बुज की यात्रा – कम्बुज के अभिलेखों से ज्ञात होता है कि अनेक विद्वान लोग भारत से कम्बुज जाते थे तथा वहाँ के भी कई विद्वान लोग भारत आते थे। शिवसोम नामक भारतीय विद्वान वहाँ के राजा इन्द्रवर्मन के गुरु थे।

(iv) आश्रमों की स्थापना – कम्बुज में अनेक आश्रम स्था थे। राजा यशोवर्मन ने 100 आश्रम स्थापित किए थे। न आश्रमों में रहने वाले लोगों एवं वहाँ के विद्यार्थियों का पूरा ध्यान रखा जाता था।

प्रश्न 9.
बर्मा के आनन्द मन्दिर का वर्णन करते हुए ड्यूरोसाईल के कथन का विश्लेषण करें।
उत्तर:
बर्मा का आनन्द मन्दिर बर्मा में सर्वोत्तम मन्दिर पेगन का ‘आनन्द मन्दिर’ है। यह 564 फीट के चौकोर आँगन के बीच में स्थित है। मुख्य मन्दिर ईंटों का बना हुआ और वर्गाकार है। यह भव्य अनुपात तथा व्यवस्थित नियोजन के लिए प्रसिद्ध है। मन्दिर का सौन्दर्य पत्थर की असंख्य उत्कीर्ण मूर्तियों और दीवार पर लगे मिट्टी के चमकीले फलकों से बढ़ गया है। यहाँ पत्थर की उत्कीर्ण मूर्तियों की संख्या 80 है और उनमें बुद्ध के जीवन की मुख्य घटनाएँ अंकित हैं।

विद्वानों के मतानुसार यह मन्दिर भारतीय शैली में ही विकसित हुआ है। इस ढंग के मन्दिर बंगाल में पाए जाते हैं और सम्भवतः उन्हीं से ‘आनन्द मन्दिर’ के नियोजन की प्रेरणा मिली होगी। आनन्द मन्दिर के बारे में ड्यूरोसाईल का कथन-आनन्द मन्दिर के बारे में ड्यूरोसाईल का कथन है कि “जिन वास्तुकारों ने ‘आनन्द मन्दिर’ का नियोजन और निर्माण किया, वे निःसन्देह भारतीय थे।

शिखर से लेकर कुर्सी तक प्रत्येक वास्तु तथा बरामदों में पाई जाने वाली अनेक प्रस्तर मूर्तियाँ तथा कुर्सियाँ और गलियारों में लगे मिट्टी के फलकों में भारतीय कला – कौशल और प्रतिभा की अमिट छाप दिखाई पड़ती है। इस दृष्टि से हम यह मान सकते हैं कि आनन्द मन्दिर बर्मा की राजधानी में बना होने पर भी एक भारतीय मन्दिर ही है।”

RBSE Class 7 Social Science वृहत्तर भारत Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
चम्पा में संस्कृत अभिलेख मिले हैं ……………….
(अ) 200 से अधिक
(ब) 50 से अधिक
(स) 100 से अधिक
(द) 70 से अधिक
उत्तर:
(स) 100 से अधिक

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Question 2.
बर्मा और स्याम में कौनसा धर्म प्रधान था?
(अ) जैन धर्म
(ब) ब्राह्मण धर्म
(स) बौद्ध धर्म
(द) इस्लाम धर्म
उत्तर:
(स) बौद्ध धर्म

Question 3.
वृहत्तर भारत के देशों में किस देवता की पूजा मुख्य रूप से होती थी?
(अ) बह
(ब) विष्णु
(स) गणेश
(द) शिव
उत्तर:
(द) शिव

Question 4.
जावा में नाटक का लोकप्रिय रूप कहलाता है ………………
(अ) वयंग
(ब) एकांकी
(स) वीथी
(द) आश्रम
उत्तर:
(अ) वयंग

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Question 5.
बरोबोदूर का मन्दिर स्थित है ………………
(अ) स्याम
(ब) बर्मा
(स) कम्बुज
(द) जावा
उत्तर:
(द) जावा

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. वृहत्तर भारत के देशों में संस्कृत का प्रयोग ……………… वर्षों से अधिक काल तक होता रहा।
  2. ………………. के अधिकांश भागों में आज भी पालि दैनिक प्रयोग में आती है।
  3. कम्बुज नरेश ………………. ने महाभाष्य पर टीका लिखी।
  4. वृहत्तर भारत के देशों में त्रिमूर्ति ……………… की पूजा होती थी।
  5. भारत की तरह ही वृहत्तर भारत के देशों के समाज का मुख्य खाद्य ……………… है।

उत्तर:

  1. 1000
  2. हिन्द – चीन
  3. यशोवर्मन
  4. ब्रह्मा, विष्णु और शिव
  5. चावल और गेहूँ।

निम्नलिखित प्रश्नों में सत्य अथवा असत्य कथन बताइये –

  1. वृहत्तर भारत के देशों में सती प्रथा प्रचलित थी।
  2. अंगकोरवाट का विष्णु मन्दिर कम्बुज में स्थित है।
  3. आनन्द मन्दिर जावा में स्थित है।
  4. वृहत्तर भारत के देशों में पर्दा-प्रथा प्रचलित थी।
  5. इन देशों में पान खाना प्रचलन में था।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. सत्य

स्तंभ ‘अ’ को स्तंभ ‘ब’ से सुमेलित करेंस्तंभ’अ’
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उत्तर:
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अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हिन्द चीन के अधिकांश भागों में आज भी कौनसी भाषा दैनिक प्रयोग में आती है?
उत्तर:
पालि भाषा।

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प्रश्न 2.
चम्पा में कितने संस्कृत अभिलेख मिले हैं?
उत्तर:
चम्पा में 100 से अधिक संस्कृत अभिलेख मिले हैं।

प्रश्न 3.
बर्मा और स्याम में कौन – सा धर्म प्रधान था?
उत्तर:
बर्मा और स्याम में बौद्ध धर्म प्रधान था।

प्रश्न 4.
वृहत्तर भारत के देशों में किन हिन्दू देवताओं की पूजा की जाती थी?
उत्तर:
इन देशों में ब्रह्मा, विष्णु और शिव की पूजा की जाती थी।

प्रश्न 5.
इन देशों में किस देवता की पूजा मुख्य रूप से की जाती थी?
उत्तर:
शिव की पूजा।

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प्रश्न 6.
शिवसोम कौन थे?
उत्तर:
शिवसोम कम्बुज के राजा इन्द्रवर्मन के गुरु थे।

प्रश्न 7.
वृहत्तर भारत के देशों में भारतीय समाज की भाँति पाई जाने वाली दो सामाजिक विशेषताएँ बताइये।
उत्तर:

  1. इन देशों में वर्ण-व्यवस्था प्रचलित थी।
  2. इन देशों में सती प्रथा भी प्रचलित थी।

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प्रश्न 8.
वृहत्तर भारत के देशों में भारत की तरह वहाँ के समाज का मुख्य खाद्य क्या था?
उत्तर:
चावल और गेहूँ।

प्रश्न 9.
बरोबोदूर का मन्दिर किस राजा के संरक्षण में बना था?
उत्तर:
बरोबोदूर का मन्दिर जावा के राजा शैलेन्द्रो के संरक्षण में बना था।

प्रश्न 10.
अंगकोरवाट का विष्णु मन्दिर कहाँ स्थित है?
उत्तर:
अंगकोरवाट का विष्णु मन्दिर कम्बुज में स्थित है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वृहत्तर भारत के देशों में भाषा और साहित्य के क्षेत्र में हुई उन्नति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बर्मा, स्याम, मलय प्रायद्वीप, कम्बोडिया, अन्नाम, सुमात्रा, जावा और बोर्निया में संस्कृत में लिखे अभिलेख मिले हैं। चम्पा में 100 से अधिक संस्कृत अभिलेख मिले हैं। इन अभिलेखों के रचयिताओं ने प्रायः सभी छन्दों का प्रयोग किया है। उनमें रामायण, महाभारत, पुराण और साहित्य के अन्य अंगों की भी जानकारी मिलती है, जावा में रामायण और महाभारत का जावी भाषा में हुआ गद्यानुवाद उल्लेखनीय है। वहाँ स्मृति और पुराणों के ढंग की भी रचनाएँ हुईं और कुछ रचनाएँ इतिहास, भाषाशास्त्र और आयुर्वेद आदि पर भी पाई जाती हैं।

प्रश्न 2.
वृहत्तर भारत के देशों पर धर्म के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
यद्यपि स्याम और बर्मा में बौद्ध धर्म प्रधान था परन्तु अधिकांश देशों में पौराणिक हिन्दू धर्म का व्यापक प्रचलन था। वहाँ ब्रह्मा, विष्णु और शिव की पूजा होती थी, परन्तु शिव की पूजा मुख्य रूप से होती थी। भारत से अनेक विद्वान कम्बुज जाते थे। शिवसोम कम्बुज के राजा इन्द्रवर्मन के गुरु थे। कम्बुज में अनेक आश्रम स्थापित थे। इन आश्रमों में रहने वाले लोगों एवं वहाँ के विद्यार्थियों का पूरा ध्यान रखा जाता था। बच्चों, वृद्धों, गरीबों एवं असहायों का भी पालन इन आश्रमों में किया जाता था।

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प्रश्न 3.
कम्बुज के मन्दिरों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कम्बुज के आरम्भिक मन्दिरों में भारतीय मन्दिरों से बहुत कुछ सादृश्यता दिखाई देती है। ग्यारहवीं-बारहवीं शताब्दी में एक नवीन शैली का जन्म हुआ। मन्दिर के मध्य और किनारे के शिखर उत्तर भारतीय शैली के हैं। इस ढंग का सर्वोत्तम नमूना ‘अंगकोरवाट का मन्दिर’ है। शिखरों को चारों दिशाओं की ओर मुंह किए मुण्डों द्वारा ढक कर एक नवीनता उत्पन्न की गई है। मन्दिरों और नगरों के चारों ओर गहरी खाई और उसके ऊपर पुलनुमा रास्ता और रास्ते के दोनों ओर सांप के शरीर को खींचते हुए दैत्यों की आकृतियाँ बनी हुई हैं जो सेतु के जंगले का काम करते हैं। विश्व की वास्तुकला में यह अनोखी और मौलिक वस्तुएँ हैं।

प्रश्न 4.
जावा के लोगों द्वारा संस्कृत साहित्य के विकास में दिए गए योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जावा के लोगों ने न केवल संस्कृत साहित्य का अध्ययन किया वरन् उन्होंने स्वतः विस्तृत साहित्य का सृजन भी किया। यहाँ रामायण और महाभारत का जावी भाषा में हुआ प्राचीन गद्यानुवाद उल्लेखनीय है। जावा में स्मृति और पुराणों के ढंग की भी रचनाएँ हुईं और कुछ रचनाएँ इतिहास, भाषाशास्त्र और आयुर्वेद पर भी हुईं। विषय, गुण और मात्रा की दृष्टि से जावा का साहित्य, प्राचीन भारतीयों द्वारा जावा के इतिहास में एक उल्लेखनीय कार्य है। भारत के बाहर कहीं भी भारतीय साहित्य का इतना लाभपूर्ण न तो अध्ययन हुआ और न उसका इतना महत्त्वपूर्ण परिणाम ही रहा।

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प्रश्न 5.
वृहत्तर भारत के देशों की सामाजिक अवस्था भारतीय सभ्यता से किस प्रकार प्रभावित थी?
उत्तर:

  1. वृहत्तर भारत के देशों में वर्ण – व्यवस्था प्रचलित थी जो भारतीय सभ्यता एवं समाज का मूल आधार है।
  2. यहाँ विवाह का आदर्श, विभिन्न प्रकार की रस्में, उसका स्वरूप और वैवाहिक सम्बन्ध लगभग भारत के समाज की भाँति ही थे।
  3. यहाँ सती प्रथा प्रचलित थी, परन्तु यहाँ पर्दा प्रथा नहीं थी।
  4. यहाँ जुआ, मुर्गों की लड़ाई, संगीत, नृत्य और नाटक लोगों के मनोरंजन के प्रमुख साधन थे। जावा में नाटक का लोकप्रिय रूप ‘वयंग’ है।
  5. यहाँ के समाज का मुख्य खाद्य चावल और गेहूँ था। यहाँ के लोग पान भी खाते थे।
  6. आभूषणों व वस्त्रों का पहनने का प्रकार भी भारत की ही तरह था।

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