RBSE Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 4 आदिकत्रिः वाल्मीकिः

RBSE Solutions for Class 7 Sanskrit

Rajasthan Board RBSE Class 7 Sanskrit Chapter 4 आदिकत्रिः वाल्मीकिः

RBSE Class 7 Sanskrit आदिकत्रिः वाल्मीकिः पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखितशब्दानाम् उच्चारणं कुरुत –
युष्माकम्, कमण्डलुः, ममाधिकारः, ख्यातनामा, दस्युः, प्रवेष्टुम्, पुत्रादीन्, व्याधेन, विद्धम्, त्वमगमः।
उत्तरम्:
[नोट-उपर्युक्त शब्दों का शुद्ध उच्चारण अपने अध्यापकजी की सहायता से कीजिए।]

प्रश्न 2.
निम्नलिखितप्रश्नान् एकपदेन उत्तरत –
(क) सप्त ऋषयः कुत्र गच्छन्ति स्म ?
उत्तरम्:
सघने वने।

(ख) रत्नाकरः कुत्र गत्वा कुटुम्बजनान् अपृच्छन् ?
उत्तरम्:
गृहम्।

(ग) स स्वमस्तकं कुत्र अनमत् ?
उत्तरम्:
ऋषीणां चरणेषु।

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(घ) वाल्मीकिः तमसातीरे केन विद्यं खगम् अपश्यत् ?
उत्तरम्:
व्याधेन।

(ङ) रामायणकथा कीदृशी अस्ति ?
उत्तरम्:
रम्या।

प्रश्न 3.
रेखाङ्कितानि पदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-.
(क) इदं श्रुत्वा रत्नाकरः स्तब्धः अभवत्।
(ख) स आगत्य ऋषीणां चरणेषु समस्तकम् अनमत्।
(ग) ऋषेः मुखात् श्लोकः निरगच्छत्।
(घ) इयं कथा रमणीया अस्ति।
(ङ) महाकवेः ख्यातिः प्रसृता अभवत् ।
उत्तरम्:
प्रश्ननिर्माणम् –
(क) इदं श्रुत्वा कः स्तब्धः अभवत् ?
(ख) स आगत्य केषां चरणेषु समस्तकम् अनमत् ?
(ग) ऋषेः कस्मात् श्लोकः निरगच्छत् ?
(घ) इयं कथा कीदृशी अस्ति ?
(ङ) महाकवेः का प्रसृता अभवत् ?

प्रश्न 4.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि पूरयतरत्नाकरः, श्लोकः, कर्णपथे, सप्त, वाल्मीकिः
उत्तरम्:
(क) ऋषीणां कर्णपथे भयंकरः ध्वनिः पतितः।
(ख) वाल्मीकेः पूर्वनाम रत्नाकरः आसीत्।
(ग) सप्त ऋषयः वने अगच्छन्।
(घ) वाल्मीकेः मुखात् श्लोकः निर्गतः।
(ङ) रामायणस्य रचनाकारः वाल्मीकिः अस्ति।

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प्रश्न 5.
अधोलिखितेषु पदेषु प्रयुक्तम् उपसर्ग लिखत
यथा – आगत्य – आङ्
उत्तरम्:
(क) वियोगेन – वि
(ख) आरभत – आ
(ग) विलोक्य – वि
(घ) अनुवादः – अनु
(ङ) प्रतिकारः – प्रति

प्रश्न 6.
सुसङ्गतानि पदानि मेलयत –
(क) कालिदासः – योगसूत्रम्
(ख) वेदव्यासः – अष्टाध्यायी
(ग) माघः – अर्थशास्त्रम्
(घ) पतञ्जलिः – रघुवंशम्
(ङ) चाणक्यः – महाभारतम्
(च) पाणिनिः – शिशुपालवधम्
उत्तरम्:
(क) कालिदासः – रघुवंशम्।
(ख) वेदव्यासः – महाभारतम्।
(ग) माघः – शिशुपालवधम्।
(घ) पतञ्जलिः – योगसूत्रम्।
(ङ) चाणक्यः – अर्थशास्त्रम्।
(च) पाणिनिः – अष्टाध्यायी।

प्रश्न 7.
(क) सप्तमीविभक्तेः रूपाणि लिखत –
उत्तरम्:
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(ख) चित्रं दृष्ट्वा सप्तमीविभक्तेः रूपाणि जानीत रिक्तस्थानानि च पूरयत –
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यथा – कपाटिका – कपाटिकायाम्
उत्तरम्:
(क) शाखा – शाखायाम्
(ख) वाटिका – वाटिकायाम्
(ग) माला – मालायाम्
(घ) पाकशाला – पाकशालायाम्
(ङ) कक्षा – कक्षायाम्

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(ग) चित्रं दृष्ट्वा सप्तमीविभक्तेः रूपाणि जानीत रिक्तस्थानानि च पूरयत –
RBSE Solutions for Class 7 sanskrit Chapter 4 आदिकत्रिः वाल्मीकिः - 4
यथा – नदी – नद्याम्
उत्तरम्:
(क) कूपी – कूप्याम्
(ख) देवी – देव्याम्
(ग) दूरवाणी – दूरवाण्याम्
(घ) जननी – जनन्याम्।
(ङ) सरस्वती – सरस्वत्याम्

प्रश्न 8.
रेखांकितपदे सप्तमीविभक्तिं प्रयुज्य वाक्यनिर्माणं कुरुत –
यथा – लेखनी
हस्तः लेखनी हस्ते अस्ति।
उत्तरम्:
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प्रश्न 9.
सप्तमीविभक्तेः द्विवचने बहुवचने च रूपाणि लिखत।
उत्तरम्;
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प्रश्न 10.
रेखाङ्कितपदानां द्विवचने बहुवचने च प्रयोगं कृत्वा वाक्यानि रचयत –
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प्रश्न 11.
उचितां विभक्तिं प्रयुज्य वाक्यानि पूरयतयथा –
नौका जले विहरति। ………. (जलम्)
(क) ब्रह्ममन्दिरं ………… अस्ति। (पुष्करम्)
(ख) छात्राः विद्यालयस्य …….. क्रीडन्ति। (क्रीडाङ्गणम्)
(ग) खगाः …………. कूजन्ति। (शाखा)
(घ) माता …………… पाकं करोति। (पाकशाला)
उत्तरम्:
(क) ब्रह्ममन्दिरं पुष्करे अस्ति।
(ख) छात्राः विद्यालयस्य क्रीडाङ्गणे क्रीडन्ति।
(ग) खगाः शाखायां कूजन्ति।
(घ) माता पाकशालायां पाकं करोति।

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योग्यता – विस्तारः

1. रामायण का परिचय:
महर्षि वाल्मीकि ने ही आदिकाव्य रामायण की रचना की। यह संस्कृत में लिखा गया है। इसमें मर्यादा पुरुषोत्तम राम की कथा वर्णित है ।
इसकी कथा सात काण्डों में विभाजित है। उनके नाम हैं –

  • बालकाण्डम्।
  • अयोध्याकाण्डम्।
  • किष्किन्धाकाण्डम्।
  • अरण्यकाण्डम्।
  • सुन्दरकाण्डम्।
  • युद्धकाण्डम्।
  • उत्तरकाण्डम्।

इसमें चौबीस हजार (24000) पद्य हैं, इसलिए इसे “चतुर्विशंतिसाहस्री” भी कहा जाता है। इसकी कथा पर आश्रित विभिन्न भाषाओं में अनेक ग्रन्थ लिखे गये हैं। जैसे –
तमिलभाषायाम्, कम्बरामायणम्
अवधिभाषायाम्, . रामचरितमानसम्।

2. सर्वनाम शब्दानां सप्तमीविभक्तेः रूपाणि जानीम –
(सर्वनाम शब्दों के सप्तमी विभक्ति के रूप)

पुंल्लिङ्गे नपुंसकलिङ्गेच –
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स्त्रीलिङ्गे –
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त्रिषुलिङ्गेषु –
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RBSE Class 7 sanskrit आदिकत्रिः वाल्मीकिः अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 7 sanskrit आदिकत्रिः वाल्मीकिः वस्तुनिष्ठप्रश्ना

प्रश्ना 1.
‘आदिकविः वाल्मीकिः’ पाठस्य क्रमः अस्ति –
(क) तृतीयः
(ख) चतुर्थः
(ग) पञ्चमः
(घ) सप्तमः।
उत्तरम्:
(ख) चतुर्थः

प्रश्ना 2.
सघने वने ऋषयः गच्छन्ति स्म –
(क) त्रयः।
(ख) पञ्च
(ग) नंव
(घ) सप्त।
उत्तरम्:
(घ) सप्त।

प्रश्ना 3.
रामायणस्य रचयिता अस्ति
(क) वाल्मीकिः
(ख) तुलसीदासः
(ग) कालिदासः
(घ) ब्रह्मा।
उत्तरम्:
(क) वाल्मीकिः

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प्रश्ना 4.
‘आदिकाव्यम्’ अस्ति।
(क) रघुवंशम्
(ख) महाभारतम्
(ग) रामायणम्
(घ) किरातार्जुनीयम्।
उत्तरम्:
(ग) रामायणम्

कोष्ठकेभ्यः समुचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
1. इति ऋषयः ………। (अपृच्छत्, अपृच्छम्, अपृच्छन्)
2. तेऽपि …………. पापकर्मणि भागभूताः भविष्यन्ति। (अस्य, अस्मिन्, इदम्)
3. रत्नाकरः आगत्य ….. चरणेषु अनमत्। (पुत्राणां, पत्न्याः , ऋषीणां)
4. ………… मुखात् एकः श्लोकः निरगच्छत् ।(ऋषेः, व्याधस्य, क्रौञ्च्याः)
उत्तराणि:
1. अपृच्छन्
2. अस्मिन्
3. ऋषीणां
4. ऋषेः।

RBSE Class 7 sanskrit आदिकत्रिः वाल्मीकिः अतिलघूत्तरात्मकप्रश्नाः

एकपदेन उत्तरत

प्रश्न 1.
महर्षेः वाल्मीके: वास्तविकं नाम किमासीत्?
उत्तरम्:
रत्नाकरः।

प्रश्न 2.
रत्नाकरः कैः प्रदत्तं रामनामजपम् आरभत् ?
उत्तरम्:
ऋषिभिः।

प्रश्न 3.
रत्नाकरस्य शरीरे पिपिलिकाभिः किं रचितम्?
उत्तरम्:
वल्मीकम्।

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प्रश्न 4:
संस्कृतसाहित्यस्य आदिकविः कः मन्यते ?
उत्तरम्:
महर्षिः वाल्मीकिः।

RBSE Class 7 sanskrit आदिकत्रिः वाल्मीकिः लघूत्तरात्मकप्रश्नाः

पूर्णवाक्येन उत्तरत

प्रश्न 1.
रत्नाकरः किमर्थं पापाचरणं करोति स्म?
उत्तरम्:
रत्नाकरः स्वस्य कुटुम्बपालनाय पोषणाय च पापाचरणं करोति स्म।

प्रश्न 2.
पापकर्मणः फलविषये कुटुम्बजनाः किम् अवदन्?
उत्तरम्:
ते अवदन् यत्-“यः पापकर्म करिष्यति तस्य फलमपि स एव प्राप्स्यति।”

प्रश्न 3.
रत्नाकरः किम् नाम्ना ख्यातो कविः जातः ?
उत्तरम:
रत्नाकरः ‘वाल्मीकिः’ इति नाम्ना ख्यातो कविः जातः।

प्रश्न 4.
वाल्मीकिः ब्रह्मण: आदेशेन किम् अलिखत्?
उत्तर:
वाल्मीकिः ब्रह्मणः आदेशेन आदर्शपुरुषस्य रामस्य रामायणकथाम् अलिखत्।

RBSE Class 7 sanskrit आदिकत्रिः वाल्मीकिः निबन्धात्मकप्रश्ना

प्रश्न 1.
अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –

  1. सघने वने सप्त ऋषयः गच्छन्ति स्म।
  2. अहं कुटुम्बपालनाय इदं करोमि।
  3. रत्नाकरः गृहं गत्वा पत्नी पुत्रादीन् अपृच्छत्।
  4. ऋषेः मुखात् एकः श्लोकः निरगच्छत्।

उत्तरम्:
प्रश्ननिर्माणम् –

  1. सघने वने के गच्छन्ति स्म ?
  2. अहं किमर्थम् इदं करोमि ?
  3. रत्नाकरः गृहं गत्वा कान् अपृच्छत् ?
  4. ऋषेः मुखात् कः निरगच्छत् ?

प्रश्न 2.
घटनाक्रमानुसार क्रमरहितवाक्यानि संयोजयत

  1. सः कविः रामस्य रामायणकथाम् अलिखत्।
  2. सः ऋषिभिः प्रदत्तं रामनामजपम् आरभत्।
  3. एकदा सघने वने सप्त ऋषयः गच्छन्ति स्म।
  4. स: वाल्मीकिः इति नाम्ना ख्यातो कवि! जातः।
  5. रत्नाकरस्य हृदये महापीडा जाता।

उत्तरम्:
वाक्य-संयोजनम्

  1. एकदा सघने वने सप्त ऋषयः गच्छन्ति स्म।
  2. रत्नाकरस्य हृदये महापीडा जाता।
  3. सः ऋषिभिः प्रदत्तं रामनामजपम् आरभत्।
  4. स: वाल्मीकिः इति नाम्ना ख्यातो कविः जातः।
  5. सः कविः रामस्य रामायण कथाम् अलिखत्।

प्रश्न 3.
‘आदिकविः वाल्मीकिः’ कथायाः सारः हिन्दीभाषायां लिखत।
उत्तरम्:
कथा-सार-प्रस्तुत कथा के अनुसार एक सजाव पास बुक्स बार गहन वन में सप्त-ऋषि जा रहे थे, तभी उनके कानों में भयानक आवाज सुनाई पड़ी कि-“रुको, तुम्हारे पास जो कुछ भी रुद्राक्ष, कमण्डल, वस्त्र आदि हैं, उन्हें यहीं भूमि पर रख दो। इन पर मेरा अधिकार है, तुम्हारा नहीं।” तब ऋषियों ने पूछा कि तुम कौन हो और किनके लिए यह पापकर्म कर रहे हो ? तब उसने कहा कि “मैं रत्नाकर नामक प्रसिद्ध डाकू हूँ, और यह सब अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए कर रहा हूँ।”

ऋषियों ने कहा कि, “आप जिनके लिए यह कर रहे हो, उनसे पूछो कि क्या वे इस पापकर्म में भागीदार होंगे ?” – रत्नाकर ने घर जाकर पत्नी, पुत्र आदि से पूछा। तब उन्होंने कहा कि जो पापकर्म करेगा, वही उसका फल भी प्राप्त करेगा, हम नहीं। यह सुनकर रत्नाकर स्तब्ध रह गया। उसके हृदय में अत्यधिक पीड़ा हुई और वह _ वहाँ आकर ऋषियों के चरणों में गिर पड़ा। इसके बाद ऋषियों द्वारा दिये गये राम के नाम का उसने जप आरम्भ कर दिया।

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उसके शरीर पर चींटियों ने बामी (वल्मीक) बना दी थी, इससे वह ‘वाल्मीकि’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। एक बार वाल्मीकि ने तमसा नदी के किनारे किसी शिकारी द्वारा घायल एक काम-मोहित क्रौञ्च पक्षी को देखा। अपने साथी के वियोग से क्रौञ्ची उच्च स्वर से करुण क्रन्दन करने लगी, जिसे सुनकर वाल्मीकि का हृदय द्रवित हो गया और उनके मुख से सहसा “मा निषाद प्रतिष्ठां …….” इत्यादि श्लोक निकला। यही श्लोक संस्कृत-साहित्य का प्रथम श्लोक एवं वाल्मीकि ‘आदिकवि’ के रूप में प्रसिद्ध – हुए तथा ब्रह्माजी के आदेश से उन्होंने श्रीराम की रामायण कथा की रचना की। जो संसार में अत्यन्त रमणीय कथा है।

पाठ-परिचय:
प्रस्तुत पाठ में लौकिक संस्कृत-साहित्य के प्रथम महाकाव्य रामायण के रचयिता आदिकवि वाल्मीकि का परिचय दिया गया है। रामायण की रचना से पूर्व वैदिक ग्रन्थ ही थे, अतः लौकिक संस्कृत में सबसे पहले रामायण की ही रचना हुई, इससे यह आदिकाव्य तथा इसके रचयिता वाल्मीकि आदिकवि कहलाये, साथ ही वाल्मीकि का परिचय देते हुए बतलाया गया है कि किस प्रकार रत्नाकर नामक डाकू (लुटेरा) का सप्तऋषियों के वचन से हृदय परिवर्तित हो जाता है तथा वह आदिकवि बन जाता है।

पाठ के कठिन-शब्दार्थ

RBSE Solutions for Class 7 sanskrit Chapter 4 आदिकत्रिः वाल्मीकिः - 1

पाठ का हिन्दी-अनुवाद एवं पठितावबोधनम्

(संस्कृतसाहित्यस्य …….. अवगच्छामः)

(संस्कृत-साहित्य के आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जीवनगाथा अत्यन्त विचित्र है। एक चिन्तन मात्र से ही अथवा घटना मात्र से उनका जीवन कैसे परिवर्तित हो जाता है। आइए, हम इस पाठ के माध्यम से जानते हैं।)

(1) एकदा सघने वने ……. भागभूताः भविष्यन्ति?”

हिन्दी-अनुवाद:
एक बार गहन वन में सप्त-ऋषि (सप्तर्षि) जा रहे थे। उनके कानों में भयानक आवाज सुनाई पड़ी। “हे ऋषियों ! रुको, तुम्हारे पास में विद्यमान रुद्राक्ष, कमण्डल, वस्त्र आदि वस्तुओं को यहाँ भूमि पर रख दो। इन पर मेरा अधिकार है, तुम्हारा नहीं।” “अरे, तुम कौन हो ?” ऐसा ऋषियों ने पूछा। क्या तुम नहीं जानते हो ? “मैं रत्नाकर नाम वाला प्रसिद्ध डाकू हूँ।

इस वन में मेरे भय के कारण कोई भी प्रवेश करने का उत्साह नहीं करता है” ऐसा रत्नाकर ने कहा। ऋषि बोले-“पुत्र! किनके लिए तुम अपने जीवन में यह पाप का आचरण करते हो ?” रत्नाकर बोला-“मैं अपने परिवार का पालन और पोषण करने के लिए यह करता हूँ।” “आप जिनके लिए यह आचरण कर रहे हो, उनसे पूछो कि क्या वे भी इस पाप कर्म में भागीदार होंगे ?”

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पठितावबोधनम् –
निर्देश:-उपर्युक्तं गद्यांशं पठित्वा यथानिर्देशं प्रश्नान्
उत्तरत:
प्रश्ना –
(क) एकपदेन उत्तरत
(i) सघने वने के गच्छन्ति स्म ?
(ii) ख्यातनामा दस्युः कः आसीत् ?
(ख) पूर्णवाक्येन उत्तरत –
(i) रत्नाकरः किमर्थं पापाचरणं करोति स्म ?
(ii) ऋषीणां कर्णपथे किम् पतितः ?
(ग) ‘पापकर्मणि’ इति पदे का विभक्तिः, किञ्च वचनम् ?
(घ) “अहं मम कुटुम्बपालनाय ……..” इत्यत्र ‘अहम्’ इति सर्वनामस्थाने संज्ञापदं किम् ?
(ङ) ‘कोऽपि’ इति पदस्य सन्धिविच्छेदं कुरुत।
उत्तरम्:
(क) (i) सप्त ऋषयः। (ii) रत्नाकरः।
(ख) (i) रत्नाकरः स्वस्य कुटुम्बपालनाय पोषणाय च पापाचरणं करोति स्म।
(ii) ऋषीणां कर्णपथे भयङ्करः ध्वनिः पतितः।
(ग) सप्तमी, एकवचनम्।
(घ) रत्नाकरः।
(ङ) कः + अपि।

(2) रत्नाकरः गृहं ………. जातः कविः असौ।

हिन्दी-अनुवाद:
रत्नाकर ने घर जाकर पत्नी, पुत्र आदि से पूछा। “जो पापकर्म करेगा, उसका फल भी वही प्राप्त करेगा, हम नहीं” ऐसा परिवार के लोग बोले। यह सुनकर रत्नाकर आश्चर्यचकित हो गया। उसके हृदय में अत्यधिक पीड़ा हुई। आकर के वह ऋषियों के चरणों में झुक गया। उसने ऋषियों द्वारा दिये गये ‘राम’ के नाम का जप आरम्भ कर दिया। उसके शरीर में चींटियों द्वारा बनाये गये बम्बोट/बामी (वल्मीक) के कारण यह कवि ‘वाल्मीकि’ नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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पठितावबोधनम् –
निर्देश:
उपर्युक्तं गद्यांशं पठित्वा यथानिर्देशं प्रश्नान्
उत्तरत:
प्रश्ना – (क) एकपदेन उत्तरत –
(i) कस्य हृदये महापीडा जाता ?
(ii) रत्नाकराय रामनामजपं कैः प्रदत्तम् ?
(ख) पूर्णवाक्येन उत्तरत –
(i) पापकर्मणः फलं कः प्राप्नोति ?
(ii) केन कारणेन रत्नाकरः वाल्मीकिः इति नाम्ना ख्यातो जातः ?
(ग) ‘अपृच्छत्’ इति क्रियायाः कर्तृपदं किम् ?
(घ) ‘श्रुत्वा’-इत्यत्र कः प्रत्ययः ?
(ङ) ‘अनमत्’-अत्र कः लकारः ?
उत्तरम्:
(क) (i) रत्नाकरस्य। (ii) ऋषिभिः।
(ख) (i) यः पापकर्म करोति तस्य फलमपि स एव प्राप्नोति।
(ii) शरीरे पिपिलिकाभिः रचितेन वल्मीकेन रत्नाकरः ‘वाल्मीकिः’ इति नाम्ना ख्यातो जातः।।
(ग) रत्नाकरः।
(घ) क्त्वा।
(ङ) लङ्लकारः।

(3) एकदा तमसा ………. श्लोकः निरगच्छत्। मा निषाद प्रतिष्ठा त्वमगमः शाश्वतीः समाः।। यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥

हिन्दी-अनुवाद:
एक बार तमसा नदी के किनारे स्थित शिकारी के द्वारा घायल किये हुए एक काममोहित (कामावस्था में संलग्न) क्रौञ्च पक्षी को (महर्षि वाल्मीकि ने) देखा। उस जीवन-साथी के वियोग से व्याकुल क्रौञ्ची के उच्च करुण क्रन्दन को (वाल्मीकि ने) सुना। उसकी ‘दयनीय दशा को देखकर द्रवित हृदय वाले ऋषि के मुख से एक श्लोक निकला – अरे शिकारी! तुम सैंकड़ों वर्षों तक प्रतिष्ठा को प्राप्त नहीं करोगे, क्योंकि तुमने क्रौञ्च पक्षी के जोड़े में से काममोहित एक (क्रौञ्च) को मार दिया है।

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पठितावबोधनम् –
निर्देशः
उपर्युक्तं कथांशं पठित्वा यथानिर्देशं प्रश्नान्
उत्तरत:
प्रश्ना – (क) एकपदेन उत्तरत –
(i) ऋषिः कस्याः करुणं क्रन्दनम् अशृणोत् ?
(ii) कस्य मुखात् एकः श्लोकः निरगच्छत् ?
(ख) पूर्णवाक्येन उत्तरत –
(i) ऋषिः तमसा नद्याः तीरे किम् अपश्यत् ?
(ii) कस्याः दयनीयां दशां विलोक्य ऋषेः हृदयं द्रवितः जातः ?
(ग) ‘नद्याः’ इत्यत्र का विभक्तिः, किञ्च वचनम् ?
(घ) ‘करुणं क्रन्दनम्’-इत्यत्र विशेषणं किम् ?
(ङ) ‘विलोक्य’ इति पदे उपसर्गः कः, प्रत्यय च कः?
उत्तरम्:
(क) (i) क्रौञ्च्याः।
(ii) ऋषेः।
(ख) (i) ऋषिः तमसा नद्याः तीरे व्याधेन विध्यम् एकं काममोहितं क्रौञ्चखगम् अपश्यत्।।
(ii) क्रौञ्च्याः दयनीयां दशां विलोक्य ऋषेः हृदयं द्रवितः जातः।
(ग) षष्ठी, एकवचनम्।
(घ) करुणम्।
(ङ) वि उपसर्गः, ल्यप् प्रत्ययः।

(4) अयमेव श्लोकः ……… रामायणी कथा।”

हिन्दी-अनुवाद:
यही श्लोक लौकिक संस्कृत-साहित्य का प्रथम श्लोक है और कवि (वाल्मीकि) आदिकवि (प्रथम कवि) हुए। ब्रह्माजी के आदेश से ही उन कवि (वाल्मीकि) ने आदर्श पुरुष राम की रामायण-कथा को लिखा। यह कथा अत्यन्त रमणीय है, इसलिए कहा जाता है-“रामायण की कथा रमणीय है।”

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पठितावबोधनम् –
निर्देशः
उपर्युक्तं गद्यांशं पठित्वा यथानिर्देशं प्रश्नान्
उत्तरत:
प्रश्ना – (क) एकपदेन उत्तरत –
(i) आदिकविः कः जातः ?
(ii) का रम्या कथा ?
(ख) पूर्णवाक्येन उत्तरत –
(i) ब्रह्मणः आदेशेन कवि: वाल्मीकिः काम् अलिखत् ?
(ii) लौकिकसंस्कृतसाहित्यस्य आदिश्लोकः कः ?
(ग) ‘अयमेव’ इत्यस्य सन्धिविच्छेदं कुरुत।
(घ) ‘अलिखत्’ इत्यत्र कः लकारः ?
(ङ) रामस्य’ इत्यत्र का विभक्तिः, किञ्च वचनम् ?
उत्तरम्:
(क) (i) कविः वाल्मीकिः।
(ii) रामायणी कथा।
(ख) (i) ब्रह्मणः ‘आदेशेन कविः वाल्मीकिः आदर्शपुरुषस्य रामस्य रामायणकथाम् अलिखत्
(ii) “मा निषाद प्रतिष्ठाम् …….” इत्यादि श्लोकः लौकिकसंस्कृतसाहित्यस्य आदिश्लोकः।
(ग) अयम् + एव।
(घ) लङ्लकारः।
(ङ) षष्ठी, एकवचनम्।

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