RBSE Solutions for Class 7 Hindi Chapter 7 बस की यात्रा

RBSE Solutions for Class 7 Hindi

Rajasthan Board RBSE Class 7 Hindi Chapter 7 बस की यात्रा (व्यंग्य-लेख)

RBSE Class 7 Hindi बस की यात्रा पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठ से

सोचें और बताएँ –

प्रश्न 1.
लेखक व उसके मित्रों ने क्या तय किया?
उत्तर:
लेखक व उसके मित्रों ने तय किया कि शाम चार बजे की बस से चलें।

प्रश्न 2.
लोगों ने बस के लिए क्या सलाह दी?
उत्तर:
लोगों ने सलाह दी कि समझदार लोग इस शाम वाली बस से यात्रा नहीं करते हैं।

प्रश्न 3.
लेखक व उसके मित्र सुबह घर क्यों पहुँचना चाहते थे?
उत्तर:
उन्हें सुबह घर पहुँच कर अपने काम पर अर्थात् नौकरी पर हाजिर होना था, इसलिए वे सुबह घर पहुँचना चाहते थे।

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लिखें –

RBSE Class 7 Hindi बस की यात्रा  बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
समझदार आदमी के शाम वाली बस से सफर नहीं करने की क्या वजह थी –
(क) खराब रास्ता
(ख) डाकुओं का आतंक
(ग) अधिक किराया
(घ) खटारा बस।
उत्तर:
(घ) खटारा बस।

प्रश्न 2.
बस को देखने पर लेखक के मन में भाव उमड़ा –
(क) दया का
(ख) श्रद्धा का
(ग) प्रेम का
(घ) घृणा का।
उत्तर:
(ख) श्रद्धा का

RBSE Class 7 Hindi बस की यात्रा अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
बस कैसी थी?
उत्तर:
बस खूब पुरानी अर्थात् एकदम खटारा थी।

प्रश्न 2.
बस के काँचों की क्या हालत थी?
उत्तर:
बस पर काँच बहुत कम बचे थे, जो बचे थे वे भी टूटे हुए थे।

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प्रश्न 3.
रवाना होने के बाद बस पहली बार क्यों रुकी?
उत्तर:
बस पहली बार इसलिए रुकी कि उसकी पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया था।

RBSE Class 7 Hindi बस की यात्रा लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक व उसके मित्रों को छोड़ने आने वाले के चेहरे पर कौनसे भाव थे?
उत्तर:
लेखक और उसके मित्रों को जो व्यक्ति बस तक छोडने आये थे, वे ऐसे देख रहे थे कि जैसे अन्तिम विदाई दे रहे हैं। उन्हें लग रहा था कि ये लोग सही समय पर घर नहीं पहुँच सकेंगे। रास्ते में इनके साथ कुछ भी अनहोनी घट सकती है और इनका जीवन खतरे में पड़ सकता है। सजाय पास बुक्स

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प्रश्न 2.
“मैंने उस कम्पनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा।” लेखक के मन में यह भाव क्यों जागा?
उत्तर:
कम्पनी का हिस्सेदार अच्छी तरह जानता था कि बस के टायर कमजोर हैं। रास्ते में कहीं पर भी टायर फट सकते हैं या इनकी हवा निकल सकती है। उस दशा में दुर्घटना भी |हो सकती है, जान भी जा सकती है। फिर भी वे उस बस में सवार थे। इसी बात का विचार कर लेखक के मन में ऐसा भाव जगा।

प्रश्न 3.
लेखक को ऐसा क्यों लगा जैसे सारी बस ही इंजन है? ”
उत्तर:
वह बस काफी पुरानी थी। जब उसका इंजन स्टार्ट हुआ और वह चलने लगी, तो बस की सीटें, काँच और पूरी बॉडी हिलने लग गई थी। उसकी सभी सीटें काफी हिल रही थीं। इस तरह पूरी बस में कम्पन हो रहा था। इससे लेखक को लगा कि सारी बस ही इंजन है।

RBSE Class 7 Hindi बस की यात्रा दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक रास्ते में आने वाले पेड़ों को दुश्मन क्यों समझ रहा था?
उत्तर:
लेखक जिस बस में सवार था, वह एकदम पुरानी खटारा बस थी। चलते समय वह काफी कॉपती हुई चल रही थी, उसकी सीटें एवं बॉडी आदि सब पूरी तरह कमजोर थे। सड़क के दोनों ओर खड़े पेड़ों से टकरा जाने एवं दुर्घटना होने की आशंका हो रही थी। इसलिए जो भी पेड़ नजर में आता या समीप आता, बस उससे टकरा जायेगी, इसी आशंका से लेखक उन पेड़ों को दुश्मन समझ रहा था।

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प्रश्न 2.
“गजब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।” लेखक को हैरानी क्यों हुई?
उत्तर:
बस काफी पुरानी थी और एकदम खटारा हो गई थी। जब लेखक ने बस कम्पनी के हिस्सेदार से पूछा कि यह बस चलती भी है, तो उसका उत्तर सुनकर लेखक को आश्चर्य हुआ। उसने कहा कि यह अपने आप चलती है। यह कथन व्यंग्य से भरा था। बस तो चलाने पर चलती है, परन्तु जो अपने आप चलती है, वह दुर्घटना कर सकती है। इसी बात का विचार कर लेखक को हैरानी हुई और वह अपने साथियों सहित बस की हालत पर सोचने लगे।

भाषा की बात –

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का अर्थ लिखकर इनका वाक्यों में प्रयोग कीजिएअवज्ञा, इत्मीनान, क्रान्तिकारी, हिस्सेदार, प्रयाण।
उत्तर:
अवज्ञा-आज्ञा न मानना, तिरस्कार करना। महात्मा गाँधी ने अंग्रेज सरकार के खिलाफ सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाया था। पापा५।। इत्मीनान-विश्वास। हमारी ही टीम विजयी होगी, इस | इत्मीनान से हम मैच देखने लगे। क्रान्तिकारी-परिवर्तन के पक्षधर। क्रान्तिकारी लोग देश की आजादी के लिए शहीद हो गये। हिस्सेदार-साझीदार। कई किसान हिस्सेदार बनकर खेती करते हैं। प्रयाण-प्रस्थान, चले जाना। हमारे वीर सिपाहियों ने सीमा की ओर प्रयाण किया।

प्रश्न 2.
‘आया है, सो जाएगा, राजा, रंक, फकीर’ एक लोकोक्ति है। हम आपसी बातचीत में अक्सर ऐसी लोकोक्तियों का प्रयोग करते हैं। शिक्षक/शिक्षिका की मदद से ऐसी कुछ लोकोक्तियों को कॉपी में लिखकर उनके अर्थ जानिए।
उत्तर:
निर्देशानुसार लिखिए।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए –
(क) आगे-पीछे करना
(ख) जान हथेली पर रखना।
उत्तर:
(क) आगे-पीछे करना-घबराकर निर्णय न कर पाना। प्रयोग-जरा-सी अड़चन आने पर आगा-पीछा करना ठीक नहीं है।
(ख) जान हथेली पर रखना-जिन्दगी की परवाह नहीं कर काम करना। प्रयोग-कुछ सैलानी जान हथेली पर रखकर हिमालय की चोटियों पर चढ़ने लगते हैं।

प्रश्न 4.
श्रद्धा शब्द का वर्तनी विश्लेषण श्++अ+द+ध्+आ है। आप भी निम्नलिखित शब्दों का वर्तनी विश्लेषण कर लिखिए।
उत्तर:
1.क्षीण-क्ष+ई++अ।
2. प्रयाण-प्++अ+य्+आ+ण्+अ।
3. उत्सर्ग-उ+त्+स्+अ++ग्+अ।
4. वृद्धावस्था -व्+ऋ+++आ+व्+अ+स्+थ्+आ।

पाठ से आगे
प्रश्न 1.
सविनय अवज्ञा व असहयोग आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता कौन थे? इन आन्दोलनों का क्या उद्देश्य था? पुस्तकालय में उपलब्ध किताबों के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
सविनय अवज्ञा तथा असहयोग आन्दोलन का नेतृत्व करने वाले महात्मा गाँधी थे। जब भारत अंग्रेजों की सत्ता के अधीन था, तो देश को आजादी दिलाने के लिए गाँधीजी ने इन आन्दोलनों को प्रारम्भ किया था। इनका उद्देश्य विदेशी सरकार को भगाना और देश को आजादी दिलाना था।

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प्रश्न 2.
आपके पास भी किसी यात्रा के खट्टे-मीठे अनुभव होंगे। अपने अनुभवों को लिखिए।
उत्तर:
आपके द्वारा अपने परिवार या सहपाठियों के साथ | की गई किसी यात्रा का वर्णन स्वयं कीजिए।

यह भी करें –
प्रश्न 1.
हरिशंकर परसाई हिन्दी के नामी व्यंग्यकार हुए हैं। उन्होंने व्यंग्य विधा को अपनी सशक्त रचनाओं से समृद्ध किया। पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों से परसाई जी की अन्य रचनाओं को पढ़िए।
उत्तर:
हरिशंकर परसाई के कहानी-संग्रह हैं -हँसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे उनके निबन्ध-संग्रह हैं-तब की बात और थी, भूत के पाँव पीछे, बेईमानी की परत, पगडण्डियों का जमाना, सदाचार का ताबीज, शिकायत मुझे भी है। उनके व्यंग्य-संग्रह हैं वैष्णव की फिसलन. तिरछी रेखाएँ, ठिठुरता हुआ गणतन्त्र, विकलांग श्रद्धा का दौर। इन सभी संग्रहों में परसाईजी की व्यंग्यात्मक रचनाओं का संकलन किया गया है। पुस्तकालय से इन्हें लेकर पढ़िए।

प्रश्न 2.
कल्पना कीजिए यदि बस जीवित प्राणी होती, बोल सकती तो अपनी बुरी हालत व कष्टों को किन शब्दों में प्रकट करती?
उत्तर:
यदि बस जीवित प्राणी होती तो वह कहती कि मैं बूढ़ी हो गई हूँ। मेरा शरीर ढीला व कमजोर है। मैं अब सवारियों को नहीं ले जा सकती और सड़क पर तेजी से नहीं दौड़ सकती। अब मुझे एकदम आराम करने दो।

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प्रश्न 3.
यातायात के कई साधन होते हैं, जैसे-बस, रेल, वायुयान, जलयान। आपने कौन-कौनसे साधनों का उपयोग किया है? लिखिए।
उत्तर:
हमने बस एवं रेल से यात्रा की है। बस से हम अपने ननिहाल गये और रेल से जयपुर गये।

RBSE Class 7 Hindi बस की यात्रा अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 7 Hindi बस की यात्रा वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक एवं उनके मित्रों ने कहाँ से बस से यात्रा प्रारम्भ की?
(क) जबलपुर से
(ख) सतना से 1
(ग) पन्ना से
(घ) भोपाल से।
उत्तर:
(ग) पन्ना से

प्रश्न 2.
बस पर सदियों के अनुभव के थे –
(क) निशान
(ख) खरोंच
(ग) चोट
(घ) धब्बे।
उत्तर:
(क) निशान

प्रश्न 3.
डॉक्टर मित्र ने उस बस को किसकी तरह बताया?
(क) पुरानी महिला की तरह
(ख) नयी-नवेली बहू की तरह
(ग) खूखार डाकू की पत्नी की तरह
(घ) अपनी पत्नी की तरह।
उत्तर:
(ख) नयी-नवेली बहू की तरह

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प्रश्न 4.
उस बस की रफ्तार प्रति घण्टा थी
(क) दस-बारह मील
(ख) तीस-चालीस मील
(ग) पच्चीस-तीस मील
(घ) पन्द्रह-बीस मील।
उत्तर:
(घ) पन्द्रह-बीस मील।

प्रश्न 5.
लेखक ने सोचा कि बस कम्पनी के हिस्सेदार को नेता होना चाहिए –
(क) क्रान्तिकारी आन्दोलन का
(ख) बस कम्पनी संगठन का
(ग) आन्दोलनकारी मजदूरों का
(घ) सरकारी कर्मचारियों का।।
उत्तर:
(क) क्रान्तिकारी आन्दोलन का

रिक्त स्थानों की पूर्ति –
प्रश्न 6.
निम्न रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिये गये| सही शब्दों से कीजिए –
(क) यह बस पूजा के…………. थी। (अयोग्य / योग्य)
(ख) लग रहा था कि हमारी सीट के नीचे ……… है । (इंजन / टायर)
(ग) लगता था, जिन्दगी इसी बस में ……….. है। (गुजारनी / गवानी)
(घ) उत्सर्ग की ऐसी भावना ………. है। (सुलभ / दुर्लभ)
उत्तर:
(क) योग्य
(ख) इंजन
(ग) गुजारनी
(घ) दुर्लभ।

RBSE Class 7 Hindi बस की यात्रा अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 7.
लेखक एवं उसके मित्रों को कहाँ से कहाँ जाना था?
उत्तर:
लेखक एवं उसके मित्रों को पन्ना कस्बे से जबलपुर अपने घर जाना था।

प्रश्न 8.
जो व्यक्ति लेखक व उनके मित्रों को बस में बैठाने आये, वे कैसे देख रहे थे?
उत्तर:
जो व्यक्ति बस में बैठाने आये वे उन्हें ऐसे देख रहे थे कि जैसे अन्तिम विदा दे रहे हों।

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प्रश्न 9.
लेखक बस की खिड़की से दूर क्यों सरक गया?
उत्तर:
बस की खिड़की के काँच चटक गये थे, उनसे बचने के लिए लेखक खिड़की से दूर सरक गया था।

प्रश्न 10.
क्षीण चाँदनी में वक्षों की छाया के नीचे बस कैसी लग रही थी?
उत्तर:
उस समय बस थक कर बैठ गई किसी बुढ़िया की तरह एकदम दयनीय लग रही थी।

प्रश्न 11.
बस के टायर की हवा कहाँ पर निकली थी?
उत्तर:
बस के टायर की हवा एक पुलिया के ऊपर पहुँचते ही निकली थी।

RBSE Class 7 Hindi बस की यात्रा लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 12.
“उस पर सवार कैसे हुआ जा सकता है!” लेखक ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर:
वह बस बहुत ही पुरानी और एकदम खटारा थी। उसकी बॉडी एवं सीटें कमजोर थीं, खिड़की के काँच टूटे हुए थे। वह सड़क पर चलाने योग्य नहीं थी, क्योंकि उससे दुर्घटना हो सकती थी। इन्हीं बातों का विचार कर लेखक ने ऐसा कहा कि वह सवारी के योग्य नहीं थी।

प्रश्न 13. लेखक को बस का इंजन अपनी सीट के नीचे क्यों लग रहा था?
उत्तर:
जब बस का इंजन स्टार्ट किया गया, तो काफी पुराना होने से वह जोर-जोर से कम्पन करने लगा। इससे बस की सभी सीटें हिलने लगीं। इंजन जोर से आवाज कर रहा था, तब लेखक को ऐसा लग रहा था कि इंजन मानो उसकी सीट के नीचे है।

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प्रश्न 14.
पुलिया पर यदि बस स्पीड में होती तो क्या हो सकता था?
उत्तर:
पुलिया पर बस यदि स्पीड में होती, तो टायर के फिस्स होते ही वह उछल कर नीचे नाले में गिर जाती। तब भयानक दुर्घटना हो सकती थी और कई सवारियों का प्राणान्त हो सकता था। कई लोग घायल हो सकते थे और बस पूरी तरह पिचक सकती थी।

प्रश्न 15.
लेखक ने किसकी उम्मीद छोड़ दी थी? और क्यों?
उत्तर:
लेखक ने उस खटारा बस से सकुशल घर पहुँचने की उम्मीद छोड दी थी, क्योंकि बस रास्ते में कई बार खराब हो गई थी। इस कारण काफी देर हो रही थी और बस की गति एकदम कम हो गई थी। इससे वह समय पर अपने गन्तव्य पर नहीं पहुँच सकती थी।

प्रश्न 16.
लेखक बस कम्पनी के हिस्सेदार के बारे में क्या सोचने लगा?
उत्तर:
लेखक सोचने लगा कि इस आदमी को अपने प्राणों की परवाह नहीं है। इसके साहस और बलिदान की भावना का सही उपयोग नहीं हो रहा है। इसे तो किसी क्रान्तिकारी आन्दोलन का नेता होना चाहिए। प्रतिदिन ऐसी बस में यात्रा करने से यह कैसे बच पाया है।

RBSE Class 7 Hindi बस की यात्रा निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 17.
“पूरी बस सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौर से गुजर रही थी।” लेखक के इस कथन का आशय बताइये।
उत्तर:
अवज्ञा का आशय आदेश न मानना है। बस काफी पुरानी थी। उसकी बॉडी कमजोर पड़ गई थी, जो कि इंजन के स्टार्ट होते ही काँपने लगी थी। बस की सीटें भी काफी हिल रही थीं, लगता था कि सीट का बस की बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी सीट बॉडी को छोड़कर आगे निकलती हुई प्रतीत होती थी, तो कभी बॉडी सीट को छोड़ती हुई और भागती हुई लग रही थी। इस प्रकार उस बस के सभी पुों में, सीट एवं बॉडी आदि में परस्पर असहयोग-सा चल रहा था। इसे ही लेखक ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन कहा है।

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प्रश्न 18.
लेखक ने पन्ना पहुँचने की उम्मीद क्यों छोड़ दी?
उत्तर:
लेखक जिस बस में यात्रा कर रहा था, वह काफी पुरानी और जर्जर हालत में थी। रास्ते में कुछ दूर जाते ही उसके पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया था। फिर आगे बढ़ने पर इंजन में खराबी आ गयी थी। आगे एक पुलिया पर उसका टायर फिस्स हो गया था। इस तरह की खराबियों को ठीक करने में काफी समय लग गया था। बस की गति भी कम हो गई थी। फिर उसमें क्या खराबी आयेगी, यह अनिश्चित था। इससे लेखक को समय पर पन्ना पहुँचने की उम्मीद कम ही थी। उसने यह उम्मीद छोड़ दी थी और तनाव से मुक्त हो गया था।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिएबस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आन्दोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी। हर हिस्सा दूसरे से असहयोग कर रहा था। पूरी बस सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौर से गुजर रही थी। सीट का बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी लगता, सीट बॉडी को छोड़कर आगे निकल गई है।

प्रसंग – यह गद्यांश ‘बस की यात्रा’ पाठ से लिया गया है। इसके लेखक हरिशंकर परसाई हैं। इसमें लेखक ने पुरानी बस के कल-पुर्जी एवं सीटें आदि को लेकर सुन्दर व्यंग्य किया है।
व्याख्या – लेखक बताता है कि बस इतनी पुरानी एवं खटारा थी कि उसके चलने में शंका हो रही थी।

वे उस बस में सवार हो गये थे। वह बस उम्मीद के विपरीत इंजन के स्टार्ट होते ही चल पड़ी। परन्तु उसकी हालत देखकर लेखक को लगा कि वह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समय अवश्य नयी रही होगी। अर्थात् यह सन् 1935-1940 के बीच खरीदी गई होगी। इसी कारण बस को सविनय अवज्ञा आन्दोलन की मानो ट्रेनिंग मिल गई थी।

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क्योंकि उसकी बॉडी, सीटें एवं इंजन आदि सभी हिस्से आपस में असहयोग कर रहे थे, अत्यधिक पुराने होने से काफी हिल रहे थे, अनियन्त्रित लग रहे थे। ऐसा लगता था कि अभी भी वह बस पुराने समय के सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौर से गुजर रही थी। क्योंकि सीटों का बस की बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी लगता था कि सीट अपनी जगह से अलग होकर बॉडी से आगे निकल जायेगी या बॉडी आगे चली जायेगी और सीट पीछे रह जायेगी। अत्यधिक कमजोर हालत होने से बस पूरी तरह अनफिट थी।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए| मैंने उस कम्पनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार |श्रद्धाभाव से देखा। वह टायरों की हालत जानते हैं फिर भी जान हथेली पर लेकर इसी बस से सफर कर रहे हैं। उत्सर्ग की ऐसी भावना दुर्लभ है। सोचा, इस आदमी के साहस और बलिदान भावना का सही उपयोग नहीं हो रहा है। इसे तो किसी क्रान्तिकारी आन्दोलन का नेता होना चाहिए।
प्रश्न –
(क) यह गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
(ख) रेखांकित शब्दों के अर्थ लिखिए।
(ग) लेखक ने बस कम्पनी के हिस्सेदार को किस भाव से देखा?
(घ) उस आदमी की किस भावना का सही उपयोग नहीं हो रहा था।
उत्तर:
(क) यह गद्यांश ‘बस की यात्रा’ पाठ से लिया गया है।
(ख) श्रद्धाभाव = आदर और आस्था का भाव। उत्सर्ग = त्याग, बलिदान।
(ग) लेखक ने बस कम्पनी के हिस्सेदार को बड़े आदर एवं आस्था-विश्वास के भाव से देखा।
(घ) उस आदमी के त्याग, उत्साह एवं बलिदानी भावना का सही उपयोग नहीं हो रहा था।

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पाठ-परिचय:
यह पाठ हरिशंकर परसाई द्वारा लिखा गया व्यंग्य-लेख है। इसमें लेखक और उनके पाँच मित्रों ने मध्यप्रदेश के पन्ना कस्बे से जबलपुर जाने के लिए बस में यात्रा करने का निश्चय किया। वे एक पुरानी खटारा बस में सवार हो गये। इसमें उसी बस-यात्रा का रोचक वर्णन किया गया है।

कठिन-शब्दार्थ:
श्रद्धा = आदरपूर्ण आस्था या विश्वास। वयोवृद्ध = आयु में बूढ़ा। हाजिर = उपस्थित। सफर = यात्रा। वृद्धावस्था = बुढ़ापा। रंक = गरीब। कूच = प्रस्थान, चल पड़ना। निमित्त = के लिए, बहाना। सविनय = नम्रता के साथ। अवज्ञा = आज्ञा न मानना। रफ्तार = गति। इत्तफाक = संयोग। क्षीण = कमजोर। दयनीय = एकदम बुरी हालत, दया करने योग्य। प्राणान्त = मृत्यु। बियावान = घना जंगल, सुनसान स्थान। अन्त्येष्टि = अन्तिम संस्कार। उत्सर्ग = बलिदान। प्रयाण = प्रस्थान, आगे बढ़ना। मंजिल = लक्ष्य। ग्लानि = दु:ख, खेद, मानसिक पीड़ा।

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