RBSE Solutions for Class 7 Hindi Chapter 5 बेणेश्वर की यात्रा

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Rajasthan Board RBSE Class 7 Hindi Chapter 5 बेणेश्वर की यात्रा (यात्रा संस्मरण)

RBSE Class 7 Hindi बेणेश्वर की यात्रा पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठ से

सोचें और बताएँ –

प्रश्न 1.
बेणेश्वरधाम का मेला कब भरता है?
उत्तर:
बेणेश्वरधाम का मेला माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर कृष्ण पंचमी तक भरता है।

प्रश्न 2.
मेले में कौन-कौनसे प्रदेश के लोग आते हैं?
उत्तर:
इस मेले में गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान के लोग आते हैं।

प्रश्न 3.
मावजी का जन्म कहाँ पर हुआ था?
उत्तर:
मावजी का जन्म साबला (डूंगरपुर) में हुआ था।

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लिखें

प्रश्न – नीचे लिखे शब्दों का प्रयोग करते हुए – रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(साबला, पूर्णिमा, प्रेम सागर, बेणेश्वरधाम)
1. बेणेश्वर का मुख्य मेला …….. को भरता है।
2. ………. को आदिवासियों का कुंभ कहा जाता है।
3. मावजी महाराज का जन्म ……………. में हुआ था।
उत्तर:
1. पर्णिमा
2. बेणेश्वरधाम
3. साबला।

RBSE Class 7 Hindi बेणेश्वर की यात्रा अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
बेणेश्वर किन-किन नदियों पर स्थित है?
उत्तर:
बेणेश्वर सोम, जाखम और माही नदियों के संगम पर बने टापू पर स्थित है।

प्रश्न 2.
शिव मन्दिर किसने और कब बनवाया था?
उत्तर:
शिव मन्दिर डूंगरपुर के महारावल आसकरण ने लगभग पाँच सौ साल पहले बनवाया था।

प्रश्न 3.
मेले की सारी व्यवस्थाएँ किसके निर्देशन में होती
उत्तर:
मेले की सारी व्यवस्थाएँ साबला पंचायत समिति के निर्देशन में होती हैं।

RBSE Class 7 Hindi बेणेश्वर की यात्रा  लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मावजी महाराज द्वारा रचित ग्रन्थों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मावजी महाराज ने पाँच ग्रन्थों की रचना की, उन ग्रन्थों के नाम ये हैं –

  1. प्रेमसागर
  2. सोमसागर
  3. मेघसागर
  4. रतनसागर और
  5. अनन्तसागर।

प्रश्न 2.
मावजी के बाद गादी पर कौन बैठी?
उत्तर”मावजी के बाद साबला में स्थित उनकी गादी पर पुत्र-वधू जनकुँवरी बैठी। वह लगभग अस्सी साल तक गादीपति रही।

प्रश्न 3.
मेले की शुरुआत कैसे होती है?
उत्तर:
माघ शुक्ला एकादशी को साबला गादी के महन्तजी वहाँ हरि मन्दिर पर झण्डा फहराते हैं, इसी के साथ मेले की शुरुआत होती है।

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RBSE Class 7 Hindi बेणेश्वर की यात्रा  दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मेले में आदिवासियों की संख्या पूर्णिमा के दिन सबसे अधिक क्यों होती है? कारण सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
बेणेश्वरधाम में आदिवासी लोग अपने परिवार के उन लोगों के फूल (अस्थियाँ) प्रवाहित करते हैं, जिनका बीते वर्ष निधन हो गया था। वहाँ पर संगम पर यह कार्य अपनी युगों पुरानी परम्परा के अनुसार होता है और पूर्णिमा के दिन ही अस्थियों को प्रवाहित किया जाता है। कई लोग अपने हाथों में ‘सउड़ी’ (मिट्टी का छोटा बर्तन, जिसमें फूल रखे रहते हैं उन्हें) लेकर आते हैं और संगम पर अस्थियाँ प्रवाहित कर स्नान करके वापिस जाते हैं। इसी कारण पूर्णिमा को आदिवासियों की भीड़ रहती है।

प्रश्न 2.
बेणेश्वर मेले का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर:
डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिलों की सीमा पर बेणेश्वरधाम स्थित है। माघ महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी से वहाँ पर मेला शुरू होता है, जो कि कृष्णपक्ष पंचमी तिथि तक चलता है। यह मेला सोम, जाखम और माही नदी के संगम पर स्थित एक टापू पर होता है। वहाँ पर शिवजी के मन्दिर के अलावा श्रीकृष्ण और ब्रह्माजी का मन्दिर है।

शिव मन्दिर का निर्माण पाँच सौ वर्ष पहले हुआ था। वहाँ पर मावजी सन्त ने साधना की थी। उस स्थान पर उनकी गादी है। महन्तजी के द्वारा एकादशी को झण्डारोहण से मेला शुरू होता है। उसमें आदिवासी लोग अधिक आते हैं तथा अपने मृत परिजनों की अस्थियाँ प्रवाहित करते हैं। मेले में सवारी निकलती है। वहाँ मनोरंजन के भी अनेक साधन रहते हैं।

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भाषा की बात –

प्रश्न 1.
बालक ही नहीं बालिकाएँ भी! जवान ही नहीं बढे भी! गरीब ही नहीं अमीर भी! सब तरह के लोग थे।। वाक्य में ‘ही …….. भी’ का प्रयोग हुआ है। आप भी ऐसे पाँच वाक्य बनाइए जिसमें ही ……..भी’ का प्रयोग हुआ हो।
उत्तर:

  1. उस मेले में बालिकाएँ ही नहीं, बूढी औरतें भी थीं।
  2. पेड़ों पर केवल फूल ही नहीं, कुछ फल भी लगे थे।
  3. सर्दियों में पहाड़ों पर वर्षा ही नहीं, बर्फ भी पड़ती है।
  4. श्रमदान का काम केवल अमीर ही नहीं, गरीब भी कर सकते हैं।
  5. वहाँ युवक ही नहीं, बूढ़े भी खेल में भाग लेते हैं।

प्रश्न 2.
मावजी महाराज द्वारा लिखित पाँच ग्रन्थों को ‘चोपड़ा’ कहा जाता है। दिवंगत लोगों की अस्थियों को ‘फूल’ कहा जाता है। मिट्टी से निर्मित छोटे बर्तन को ‘सउड़ी’ कहा जाता है, जिसमें आदिवासी अपने पूर्वजों की अस्थियाँ रखते हैं। आचलिक भाषा में ऐसे अनेक शब्द प्रचलित होते हैं जो एक विशेष अर्थ को व्यक्त करते हैं। अपनी भाषा से ऐसे कुछ शब्दों का चयन कर उनके अर्थ लिखिए।
उत्तर:
अपने क्षेत्र में प्रचलित भाषा से स्वयं शब्द छाँटिये। जैसे –
मलाण = मेला या पर्व का स्थान। गादी = मुख्य साधना का स्थान। सागर = पानी निकलने की जगह। कलसा = पूजा हेतु मिट्टी का पात्र। गंगोज = श्राद्ध पर गंगाजल की पूजा एवं भोज।।

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प्रश्न 3.
‘मुझे पता ही नहीं लगा और पूर्णिमा आ गई।’ इस बात को हम इस प्रकार भी लिख सकते हैं-‘मुझे पता ही नहीं लगा। पूर्णिमा आ गई।’ इस प्रकार के वाक्यों को संयुक्त वाक्य कहा जाता है। संयुक्त वाक्य में वाक्यों को ‘और’, ‘तथा’, ‘या’ आदि से जोड़ा जाता है। आप भी इसी प्रकार के पाँच वाक्य बनाइए।
उत्तर:

  1. मैं पढ़ा रहा था और उसी समय नींद आ गई।
  2. राम खेल रहा था और रमा रो रही थी।
  3. वृद्ध खेत में हल चला रहा था तथा गुड़ाई भी कर रहा था।
  4. कल वर्षा होगी और सर्दी बढ़ जायेगी।
  5. हमारी परीक्षा अप्रेल में होगी या मई में होगी।

प्रश्न 4.
मिश्र वाक्य भी वाक्य का एक भेद है। आप अपने शिक्षक से मिश्र वाक्य के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
जिस वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य होता है और उससे आश्रित एक या एक से अधिक उपवाक्य होते हैं, वह मिश्र वाक्य कहलाता है। जैसे – सुभद्रा श्रीकृष्ण की बहिन थी, जिसका विवाह अर्जुन से हुआ था। इसमें ‘सुभद्रा श्रीकृष्ण की बहिन थी’ – मुख्य या प्रधान उपवाक्य है। ‘जिसका विवाह अर्जुन से हुआ था’ आश्रित उपवाक्य है।

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
आपने अब तक कौन-कौनसे मेले देखे हैं? किसी एक मेले का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
व्याकरण-भाग में ‘पुष्कर मेला’ निबन्ध दिया गया है, उसे लिखिए।

प्रश्न 2.
कल्पना कीजिए कि आप परिवार के साथ मेला घूमने गये हो। वहाँ भीड़-भाड़ में आप अपने परिवार से बिछुड़ गये। ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे?
उत्तर:
ऐसी स्थिति में हम –

  1. पहले तो अपने परिवार को खोजने और मिलने का प्रयास करेंगे।
  2. फिर पुलिस के कर्मचारियों तथा मेला-क्षेत्र के स्वयंसेवकों के पास जाकर उनसे सहायता लेंगे।
  3. यदि मोबाइल या अन्य कोई साधन मिले तो परिवार के लोगों से सम्पर्क करेंगे या उन्हें सूचना देंगे।

यह भी करें –

प्रश्न 1.
बेणेश्वर में बेण के पेड़ अधिक होते थे। कहा जाता है कि यहाँ दैत्यराज बलि ने यज्ञ किया था। दैत्यराज बलि की अंतर्कथा ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर:
पुराणों में ऐसी कथा मिलती है कि दैत्यराज बलि महादानी भी था। एक बार भगवान् विष्णु ने वामन रूप धारण किया और बलि के पास जाकर तीन कदम रखने की भूमि का दान माँगा। बलि ने वामन की याचना सहर्ष स्वीकार की। तब वामन भगवान् ने एक पैर से अथवा एक कदम से सारी पृथ्वी और दूसरे से सारा आकाश नाप दिया। तीसरे कदम को बलि के सिर पर रखा और उसे पाताल भेज दिया। इस प्रकार उस दैत्यराज से वामन भगवान् ने देवताओं को राज्य वापिस दिला दिया।

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प्रश्न 2.
आप कभी बेणेश्वर जाएं तो मावजी महाराज द्वारा लिखित ग्रन्थों को संग्रहालय में पढ़िए।
उत्तर:
वहाँ जाकर पढ़िए।

RBSE Class 7 Hindi बेणेश्वर की यात्रा अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 7 Hindi बेणेश्वर की यात्रा  वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
बेणेश्वर मेले को आदिवासियों का कहा जाता है –
(क) कुम्भ
(ख) पर्व
(ग) त्योहार
(घ) उत्सव।
उत्तर:
(क) कुम्भ

प्रश्न 2.
बेणेश्वरधाम का मेला माघ मास की किस तिथि से शुरू होता है?
(क) पंचमी
(ख) एकादशी
(ग) त्रयोदशी
(घ) पूर्णिमा।
उत्तर:
(ख) एकादशी

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प्रश्न 3.
किस मन्दिर में बैठकर सन्त मावजी ने साधना की थी?
(क) हरि मन्दिर में
(ख) ब्रह्मा मन्दिर में
(ग) शिव मन्दिर में
(घ) जाखन मन्दिर में।
उत्तर:
(ग) शिव मन्दिर में

प्रश्न 4.
बेणेश्वर मेले में किसकी सवारी निकलती है?
(क) शिवजी की
(ख) गंगामाता की
(ग) महारावल की
(घ) महन्तजी की।
उत्तर:
(घ) महन्तजी की।

प्रश्न 5.
बेणेश्वर का मेला कितने दिनों तक चलता है?
(क) सात
(ख) दस
(ग) आठ
(घ) बारह।
उत्तर:
(ख) दस

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रिक्त स्थानों की पूर्ति –
प्रश्न 6.
निम्न रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिये गये सही शब्दों से कीजिए –
(क) मुख्य मेला ………….. को रहता है। (पंचमी / पूर्णिमा)
(ख) मावजी की मुख्य गादी ……….. में है। (साबला / आबूदरा)
(ग) वहाँ सभी धर्मों के प्रति ……… था। (विश्वास / सम्मान)
(घ) लोग इनको ……….. का अवतार मानते हैं। (शिव / कृष्ण)
उत्तर:
(क) पूर्णिमा
(ख) साबला
(ग) सम्मान
(घ) कृष्ण।

RBSE Class 7 Hindi बेणेश्वर की यात्रा अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 7.
बेणेश्वर धाम कहाँ पर स्थित है?
उत्तर:
बेणेश्वरधाम डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिले की सीमा | पर, साबला पंचायत क्षेत्र में स्थित है।

प्रश्न 8.
बेणेश्वर मेला कब और कितने दिनों चलता है?
उत्तर:
बेणेश्वर मेला माघ शुक्ला एकादशी से कृष्ण पंचमी तक अर्थात् पूरे दस दिनों चलता है।

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प्रश्न 9.
मावजी ने कहाँ पर बैठकर अपने ग्रन्थों की रचना की थी?
उत्तर:
मावजी ने बेणेश्वर के शिव मन्दिर में बैठकर अपने पाँचों ग्रन्थों की रचना की थी।

प्रश्न 10.
मेले में महन्तजी की सवारी किस स्थान पर जाती है?
उत्तर:
मेले में महन्तजी की सवारी सोम-माहीसागर स्थल के आबूदरा नामक स्थान पर जाती है।

प्रश्न 11.
मेले की व्यवस्था में पंचायत समिति का सहयोग कौन करता है?
उत्तर:
मेले की व्यवस्था में साबला पंचायत समिति का सहयोग बाँसवाड़ा और डूंगरपुर जिले का प्रशासन करता है।

RBSE Class 7 Hindi बेणेश्वर की यात्रा लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 12.
बेणेश्वर टापू का भौगोलिक महत्त्व बताइए।
उत्तर:
बेणेश्वर टापू सोम, जाखम एवं माही नदियों से घिरा टापू है। इसका क्षेत्रफल लगभग दो सौ चालीस बीघा है। इस पर कई मन्दिर हैं, जिनमें शिव, कृष्ण एवं ब्रह्मा के मन्दिर हैं। यहाँ शिव मन्दिर आठ सौ वर्ष पुराना है। यहीं पर इस क्षेत्र के प्रसिद्ध सन्त मावजी की गादी है और मेला भी यहीं पर लगता है।

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प्रश्न 13.
मावजी द्वारा रचे गये ग्रन्थों की क्या विशेषता
उत्तर:
मावजी द्वारा पाँच ग्रन्थ रचे गये, जिनकी विशेषता यह है कि इनमें अनेक भविष्यवाणियाँ लिखी हुई हैं। ऐसा विश्वास है कि इनकी भविष्यवाणियाँ अभी तक सही साबित हुई हैं। ये बागड़ी भाषा में रचित हैं तथा इन्हें ‘चोपड़ा’ कहा जाता है।

प्रश्न 14.
बेणेश्वर के प्रसिद्ध तीन मन्दिरों का परिचय लिखिए।
उत्तर:
बेणेश्वर में प्रसिद्ध शिव मन्दिर डूंगरपुर के महारावल आसकरण ने लगभग पाँच सौ वर्ष पहले बनवाया था। मावजी की पुत्रवधू ने हरि मन्दिर बनवाया। बागड़ क्षेत्र के लोगों ने बेणेश्वर टापू पर ब्रह्माजी का मन्दिर बनवाया। इनके अलावा वहाँ पर अन्य देवों के मन्दिर भी हैं, परन्तु उक्त तीन मन्दिर विशेष प्रसिद्ध हैं।

RBSE Class 7 Hindi बेणेश्वर की यात्रा निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 15.
बेणेश्वर मेला किस तरह लगता है? बताइये।
उत्तर:
बेणेश्वर मेला माघ महीने की शुक्लपक्ष की एकादशी से प्रारम्भ होता है। इस दिन साबला गादी के महन्तजी हरिमन्दिर पर झण्डा फहराते हैं। फिर यात्रीगण वहाँ पर स्नान करते हैं। भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। पूर्णिमा के दिन धूम-धाम से महन्तजी की सवारी निकलती है, जो गाजे-बाजे के साथ सोम-माही सागर संगम पर स्थित आबूदरा नामक स्थान पर पहुँचती है। महन्तजी हरिमन्दिर में पूजा-अर्चना करते हैं। आदिवासी लोग संगम स्थल पर ‘सउड़ी’ प्रवाहित कर स्नान करते हैं।

प्रश्न 16.
बेणेश्वर मेले में क्या-क्या सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं?
उत्तर:
बेणेश्वर मेले में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। वहाँ तीरंदाजी, गैर-नृत्य एवं रासलीला के आकर्षक कार्यक्रम चलते हैं। आदिवासी लड़के-लड़कियाँ समूह में लोकगीत गाते हैं, उनके सुरीले गीतों में लोकजीवन की झलक होती है। बच्चों के लिए गुब्बारे, खिलौने, धनुष और तीर, झूले-चकरी और सर्कस, मदारी तथा जादू के खेल भी होते हैं। वहाँ पर इकतारा, तम्बूरा, मंजीरे, ढोल आदि अनेक वाद्य-यन्त्रों की धुनें सुनने को मिलती हैं। इस प्रकार वहाँ पर मनोरंजन के अनेक कार्यक्रम होते हैं।

RBSE Solutions for Class 7 Hindi Chapter 5 बेणेश्वर की यात्रा

प्रश्न 17.
‘बेणेश्वर’ का आशय क्या बताया गया है?
उत्तर:
सोम-माहीसागर के संगम पर स्थित टापू में बेणेश्वर का मन्दिर है। इसी कारण वह पवित्र धाम है। आदिवासी अपनी बागड़ी भाषा में शिवजी को बणैला’ कहते हैं । इसी कारण वहाँ ‘बेणका’ अर्थात् शिवजी का मन्दिर बनाया गया। वहाँ पर बेण (बाँस) के पेड़ अधिक होते थे। इसी कारण इसका ‘बेणका ईश्वर’ से बेणेश्वर नाम पड़ा है। इस तरह बणैला शिवजी का धाम ‘बेणेश्वरधाम’ कहलाया। शिवजी का पवित्र तीर्थ होने से ‘बेणेश्वर धाम’ कहलाता है।

प्रश्न 18.
निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए –
(क) इसी मन्दिर में बैठकर मावजी महाराज ने अपना ‘चोपड़ा’ लिखा था। मावजी इस क्षेत्र के प्रसिद्ध संत हुए हैं। इनका जन्म अठारहवीं शताब्दी में साबला (डूंगरपुर) में हुआ था। लोग इनको कृष्ण का अवतार मानते हैं। मावजी महाराज ने सोमसागर, प्रेमसागर, मेघसागर, रतनसागर एवं अनंतसागर नामक पाँच ग्रन्थों की रचना की है। इनको बागड़ी भाषा में ‘चोपड़ा’ कहा जाता है। उनके चोपड़े में अनेक भविष्यवाणियाँ लिखी हुई हैं।

प्रसंग – यह गद्यांश ‘बेणेश्वर की यात्रा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। यह संकलित यात्रा संस्मरण है। इसमें साबला के सन्त मावजी का परिचय दिया गया है।
व्याख्या – इसमें बताया गया है कि साबला में टापू पर जो |शिव मन्दिर बनाया गया है, वह काफी पुराना मन्दिर है।

ऐसा माना जाता है कि इसी शिव मन्दिर में बैठकर मावजी महाराज ने अपने ग्रन्थों की रचना की थी। उनके ग्रन्थों को ‘चोपड़ा’ कहते हैं। मावजी महाराज उस आदिवासी क्षेत्र के प्रसिद्ध सन्त एवं साधक माने जाते हैं। उनका जन्म वहीं पर साबला नामक स्थान पर हुआ था जो कि डूंगरपुर जिले का एक प्रसिद्ध स्थान है। इनका जन्म अठारहवीं शताब्दी में हुआ था।

वहाँ के लोग मावजी को श्रीकृष्ण भगवान् का अवतार मानते हैं। मावजी ने पाँच चोपड़े अर्थात् ग्रन्थों की रचना की, उनके नाम हैं – सोमसागर, प्रेमसागर, मेघसागर, रतनसागर और अनन्तसागर। इन ग्रन्थों को बागड़ी भाषा में चोपड़ा कहा जाता है। मावजी के ग्रन्थों में अनेक भविष्यवाणियाँ लिखी हुई हैं, जो कि प्रामाणिक मानी जाती हैं। इसी से इनके ग्रन्थों का काफी महत्त्व है।

RBSE Solutions for Class 7 Hindi Chapter 5 बेणेश्वर की यात्रा

(ख) यहाँ के अनोखे वातावरण ने मुझे पूर्णिमा तक रुकने के लिए मजबूर कर दिया। मेला स्थल पर दुकानें और मनोरंजन के भरपूर साधन थे। दुकानों में खेती और गृहस्थी के लिए आवश्यकता की वस्तुएँ थीं। वहाँ बच्चों के लिए गुब्बारे और खिलौने, धनुष और तीर, झूले-चकरी और सर्कस, मदारी तथा जादू के खेल भी थे। सब उनका आनंद ले रहे थे।

प्रसंग – यह गद्यांश ‘बेणेश्वर की यात्रा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने मेले के आकर्षण का वर्णन किया है।
व्याख्या – लेखक बताता है कि वह बेणेश्वर में एक दिन रुककर लौट जाना चाहता था। परन्तु वहाँ पर मनोरंजन का अनोखा माहौल था, अनेक आकर्षण की चीजें थीं।

इस कारण उसे पूर्णिमा तक वहाँ पर रुकना ही पड़ा। बेणेश्वर में जहाँ पर मेला लग रहा था, वहाँ पर बहुत-सी दुकानें लगी थीं और मनोरंजन के अनेक साधन थे। वहाँ पर दुकानों में खेती से सम्बन्धित सामान और घर-गृहस्थी के काम की बहुत-सी जरूरी वस्तुएँ थीं। मेले में आये स्थानीय लोग मनचाहा सामान खरीद रहे थे। वहाँ पर बच्चों के लिए गुब्बारे और खिलौने थे, धनुष और तीर थे, झूले-चकरी और सर्कस था। वहाँ पर मदारी और जादू के खेल भी थे, जिनसे बच्चों के साथ बड़ों का भी मनोरंजन हो रहा था। इस प्रकार उस मेले में मनोरंजन की भरपूर व्यवस्था थी। सभी लोग उनका आनन्द ले रहे थे।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए। पूर्णिमा के दिन आदिवासियों की संख्या सबसे अधिक थी। कई लोगों के हाथों में ‘सउड़ी’ थी। उसमें उनके परिवार के उन लोगों के ‘फूल’ (अस्थियाँ) थे, जिनका बीते वर्ष में निधन हो गया था। उन्होंने संगम-स्थल पर अपनी युगों पुराची परम्परा के अनुसार उन अस्थियों को प्रवाहित किया। उसके बाद उन्होंने स्नान किया, खाना बनाकर खाया और घर लौट गए।
प्रश्न –
(क) यह गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
(ख) रेखांकित शब्दों के अर्थ लिखिए।
(ग) पूर्णिमा के दिन अधिक भीड़ क्यों थी?
(घ) संगम-स्थल का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
(क) यह गद्यांश ‘बेणेश्वर की यात्रा’ पाठ से लिया गया है।
(ख) सउड़ी = मिट्टी से बना छोटा बर्तन। प्रवाहित = जलधारा में बहाना।
(ग) पूर्णिमा के दिन मुख्य मेला भरता है, इस कारण उस दिन आदिवासियों की अधिक भीड़ थी।
(घ) संगम-स्थल को पवित्र स्थान माना जाता है। वहाँ पर कुम्भ पर्व के समान स्नान कर पितरों को जलांजलि दी जाती है।

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पाठ-परिचय
राजस्थान के डूंगरपुर जिले की साबला पंचायत समिति के क्षेत्र में बेणेश्वरधाम पड़ता है। वहाँ पर माघ शुक्ला एकादशी से पंचमी तक मेला भरता है। इस यात्रा-संस्मरण पाठ में उसी का वर्णन किया गया है।

कठिन-शब्दार्थ:
एकादशी = ग्यारहवीं तिथि। जाग्रत = जागना, उठना। प्रबल = ताकतवर, दृढ़। कुंभ = पवित्र स्नान-पर्व। हवै = अब। संगम = नदियों के मिलने का स्थान। टापू = चारों ओर से जल से घिरा भूभाग। बणैला = बना हुआ। हाबलो = साबला, एक जगह का नाम। रइ ग्यू = रह गया। प्राचीन = बहुत पुराना। सो = छह। आबीग्यू = आ गया। इयाँ = यहाँ। मंदर = मन्दिर। शिलालेख = पत्थरों पर लिखा गया लेख। जन-समूह = लोगों का समूह। कएं = कहते हैं। गादी = गद्दी या बैठने का स्थान। बालचर = स्काउट बच्चे। तीरंदाजी = बाण चलाना। गगनभेदी = आकाश तक फैलने वाले। प्रवाहित = बहा देना। सउड़ी = मिट्टी का छोटा बर्तन।

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