RBSE Solutions for Class 7 Hindi Chapter 2 लव-कुश

RBSE Solutions for Class 7 Hindi

Rajasthan Board RBSE Class 7 Hindi Chapter 2 लव-कुश (कहानी)

RBSE Class 7 Hindi लव-कुश पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठ से

उच्चारण के लिए –

प्रश्न – स्वर्ण, आश्रम, वाल्मीकि, महर्षि।
उत्तर:
छात्र स्वयं उच्चारण करना सीखिए।

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
लव-कुश कहाँ रहते थे ?
उत्तर:
लव-कुश महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहते थे।

प्रश्न 2.
लव-कुश के गुरुजी का क्या नाम था ?
उत्तर:
लव-कुश के गुरुजी का नाम महर्षि वाल्मीकि था।

प्रश्न 3.
लव-कुश के पिता कौन थे?
उत्तर:
अयोध्या के राजा श्रीराम लव-कुश के पिता थे।

RBSE Solutions for Class 7 Hindi Chapter 2 लव-कुश

लिखें

RBSE Class 7 Hindi लव-कुश अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लव-कुश किस शस्त्र को चलाने में कशल थे ?
उत्तर:
लव-कुश बाण चलाने में बहुत ही कुशल थे।

प्रश्न 2.
आश्रम में किसका घोड़ा आ गया था ?
उत्तर:
आश्रम में श्रीराम के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा आ गया था।

प्रश्न 3.
“मुनि बालको, मेरे अश्व को शीघ्र छोड़ दो।” यह किसने, किससे कहा ?
उत्तर:
यह श्रीराम ने लव-कुश से कहा।

RBSE Class 7 Hindi लव-कुश लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लव-कुश के दैनिक क्रिया-कलाप क्या थे?
उत्तर:
लव-कुश का दैनिक कार्य गुरु वाल्मीकि से रामायण की कथा सुनना और उसे कण्ठस्थ करके रोजाना गान करना था। गुरु की आज्ञा का पालन करना और आश्रम के मुनि कुमारों के साथ खेलना उनका नित्य कर्म था।

प्रश्न 2.
कैसे पता चला कि आश्रम में आया घोड़ा अश्वमेध यज्ञ का है?
उत्तर:
सीता जब कुश के साथ घोड़े के पास गई, तो उसने उसकी गर्दन में एक स्वर्ण-पत्र लटकता हुआ देखा। उस स्वर्ण-पत्र पर अंकित था, ‘यह राजा रामचन्द्र के अश्वमेध यज्ञ का अश्व है।’ उस स्वर्ण-पत्र को पढ़ने से उक्त बात का पता चला।

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प्रश्न 3.
राम प्रसन्न क्यों थे?
उत्तर:
जब श्रीराम को वाल्मीकि ने बताया कि ये आपके पुत्र हैं तो उन्हें देखकर तथा उनकी वीरता का परिचय पाकर श्रीराम प्रसन्न थे। उन्होंने अपने दोनों पुत्रों को पहली बार देखा था और सीता से भी वहीं आश्रम में मिलन हुआ था, इस कारण भी वे प्रसन्न थे।

RBSE Class 7 Hindi लव-कुश दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सीता कब और क्यों संकट में पड़ गई?
उत्तर:
सीता ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में अपने दोनों पुत्रों लव-कुश को जन्म दिया था। उसने उन्हें उनके पिता का नाम नहीं बताया था। लव-कुश के द्वारा श्रीराम के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा पकड़ने पर सीता ने उस घोड़े को छोड़ देने को कहा, परन्तु वे दोनों नहीं माने और युद्ध करने को तैयार हो गये। उस समय सीता धर्मसंकट में पड़ गई, क्योंकि वह लव-कुश से उनके पिता का और घोड़े के स्वामी का नाम नहीं बताना चाहती थी और उनसे अपने पुत्रों का युद्ध भी नहीं चाहती थी। वह अज्ञात अनर्थ से बचना भी चाहती थी।

प्रश्न 2.
लव-कुश और सैनिक के संवाद को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
सबसे पहले घोड़े की खोज में आया सैनिक लव से बोला, “बालक, यहाँ अश्वमेध का अश्व तो नहीं आया?” कुश ने उत्तर दिया, “देखते नहीं, वह पेड़ पर क्या बँधा है?” लव ने कहा कि घोड़ा मत खोलना, इसे हमने पकड़ लिया है। सैनिक ने कहा, बालको, यह राजा राम के अश्वमेध का अश्व है। इसे वही पकड़ सकता है जो राम से युद्ध कर सके। कुश ने कहा कि हम युद्ध के लिए तैयार हैं। तुम यदि घोड़ा ले जाने के लिए आगे बढ़े तो हमारे बाणों से मारे जाओगे। तब उन दोनों ने सैनिक से युद्ध करके हरा दिया और उसके हाथ बाँधकर कहा कि जाकर अपने सेनापति से कहो कि यहाँ से लौट जाओ और किसी दूसरे घोड़े का प्रबन्ध कर लो।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
लव-कुश में दोनों पद प्रधान हैं क्योंकि दोनों पद संज्ञा हैं। जिस समास में दोनों पद प्रधान हों उसे द्वंद्व समास कहते हैं। उनका समास विग्रह करने पर योजक चिह्न के स्थान पर ‘और’ शब्द लिखा जाता है, जैसे लव और कुश। आप भी ऐसे आठ पद लिखिए जिनमें दोनों पद प्रधान हों तथा विग्रह करने पर बीच में ‘और’ शब्द आता हो।
उत्तर:

  1. रात-दिन-रात और दिन
  2. दाल-रोटी| दाल और रोटी
  3. माता-पिता-माता और पिता
  4. राम-श्याम – राम और श्याम
  5. सुबह-शामसुबह और शाम
  6. रोजी-रोटी-रोजी और रोटी
  7. चाय-पानी – चाय और पानी
  8. भाई-बहिनभाई और बहिन।

प्रश्न 2.
‘लक्ष्मण’ तत्सम शब्द है। लक्ष्मण’ का तद्भव शब्द लखन’ होता है। नीचे लिखे तत्सम शब्दों के तद्भव रूप लिखिए।
उत्तर:
तत्सम शब्द – तद्भव
स्वर्ण – सोना
अष्ट – आठ
गृह – घर च
न्द्र – चंद, चाँद
मूर्ति – मूरत

इस तरह के अन्य तत्सम शब्द छांटकर उनके तद्भव रूप लिखिए।
उत्तर:
जन्म – जनम
तपस्वी – तपसी
गुण – गुन
स्वर – सुर

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संस्कृत के जो शब्द मूल रूप में हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं, वे तत्सम शब्द कहलाते हैं। मूल रूप से संस्कृत से आए, मगर अब कुछ बदलाव के साथ में हिन्दी में प्रयुक्त शब्द तद्भव शब्द कहलाते हैं जैसे ‘नासिका’ व ‘दुग्ध’ तत्सम हैं और उनसे बने शब्द क्रमशः ‘नाक’ और ‘दूध’ तद्भव हैं।
उत्तर:
परिभाषा समझिए।

प्रश्न 3.
विराम का अर्थ होता है-रुकना। हम बातचीत करते समय भावों-विचारों के अनुरूप बीच-बीच में रुकते हैं। भाषा में बीच-बीच में रुकने के लिए कुछ विशेष चिह्न होते हैं। उन्हें विराम-चिह्न कहते हैं। उचित विराम-चिह्न लगाकर पुनः लिखिएलव-कुश ने चन्द्रकेतु को कहा वीर हम वाल्मीकि के शिष्य हैं तुम्हारा परिचय क्या है।
उत्तर:
लव-कुश ने चन्द्रकेतु को कहा, “वीर! हम वाल्मीकि के शिष्य हैं। तुम्हारा परिचय क्या है?”

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
रामायण की कथा का गान करना, गुरु की आज्ञापालन करना और मुनि कुमारों के साथ खेलना लवकुश का दैनिक कार्य था। आप दिनभर क्या-क्या कार्य करते हैं? लिखिए।
उत्तर:
हम सुबह उठकर अपना पाठ पढ़ते हैं, कविताओं को कण्ठस्थ करते हैं। थोड़ी देर तक योगा और व्यायाम करते हैं। फिर तैयार होकर विद्यालय जाते हैं और वहाँ पर अध्ययन करते हैं। विद्यालय से घर आकर गृह-कार्य करते हैं। थोड़ी देर मनोरंजन भी करते हैं और माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हुए उनके बताये काम भी करते हैं। रात्रि में पढ़ाई के बाद सो जाते हैं।

प्रश्न 2.
यदि लव-कुश अश्व को सैनिक के कहने पर छोड़ देते तो क्या होता ?
उत्तर:
यदि लव-कुश वैसा करते तो सीता को चिन्ता नहीं होती। लव-कुश का चन्द्रकेतु एवं लक्ष्मण से युद्ध नहीं होता। श्रीराम भी उनके पास नहीं आते और उनसे सभी का मिलना भी नहीं हो पाता। उस दशा में लव-कुश अपने पिता को नहीं देख पाते।

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प्रश्न 3.
आपके अनुसार बच्चों में कौन-कौनसे गुण होने चाहिए?
उत्तर:
हमारी दृष्टि से बच्चों में ये गुण होने चाहिए – वे साहसी, लगनशील, पढ़ाई में मन लगाने वाले, निडर, आज्ञाकारी, बुद्धिमान्, चतुर, स्पष्टवादी और सत्यवादी आदि। गुणों से युक्त हों।

RBSE Class 7 Hindi लव-कुश अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 7 Hindi लव-कुश वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
महर्षि वाल्मीकि का आश्रम किस नदी के किनारे था ?
(क) गंगा
(ख) यमुना
(ग) गोदावरी
(घ) तमसा।
उत्तर:
(घ) तमसा।

प्रश्न 2.
लव-कुश में किसके सभी गुण मौजूद थे?
(क) क्षत्रिय के
(ख) मुनियों के
(ग) राजाओं के
(घ) ब्राह्मण के।
उत्तर:
(क) क्षत्रिय के

प्रश्न 3.
घोड़े की गर्दन में एक लटक रहा था
(क) मुकुट
(ख) हार
(ग) स्वर्णपत्र
(घ) सूचना-पट्ट।
उत्तर:
(ग) स्वर्णपत्र

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प्रश्न 4.
लक्ष्मण के पुत्र का नाम था –
(क) सूयकेतु
(ख) चन्द्रकेतु
(ग) धूमकेतु
(घ) अश्वकेतु।
उत्तर:
(ख) चन्द्रकेतु

प्रश्न 5.
“यही तुम्हारे पिता हैं अयोध्या के राजा राम।” यह किसने कहा?
(क) सीता ने
(ख) सेनापति ने
(ग) वाल्मीकि ने
(घ) लक्ष्मण ने।
उत्तर:
(ग) वाल्मीकि ने

रिक्त स्थानों की पूर्ति

प्रश्न 6.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिये गये सही शब्दों से कीजिए –
(क) आश्रम में एक सुन्दर ……….. आ गया है। (घोड़ा / कुत्ता)
(ख) घोड़ा सोने के आभूषणों से ………… था। (लदा / सज्जित)
(ग) हम वाल्मीकि के. ………… हैं। (पुत्र / शिष्य)
(घ) सैनिक ने लव-कुश पर एक ……… छोड़ा। (बाण / हथियार)
(ङ) यही तुम्हारे पिता हैं. ………… के राजा राम। (मिथिला / अयोध्या)
उत्तर:
(क) घोड़ा
(ख) सज्जित
(ग) शिष्य
(घ) बाण
(ङ) अयोध्या।

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RBSE Class 7 Hindi लव-कुश अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 7.
लव-कुश का पालन-पोषण किसने किया?
उत्तर:
लव-कुश का पालन-पोषण महर्षि वाल्मीकि ने अपने आश्रम में किया था। |प्रश्न 8. आश्रम से बाहर आयी सीता से कुश ने क्या कहा?
उत्तर:
कुश ने कहा कि आश्रम में एक सुन्दर घोड़ा आ गया है। उसे हमने पकड़कर एक पेड़ से बाँध लिया है।

प्रश्न 9.
अश्वमेध के अश्व की रक्षा का भार किस पर था?
उत्तर:
अश्वमेध के अश्व की रक्षा के लिए विशाल सेना चल रही थी, उसकी रक्षा का भार लक्ष्मण के पुत्र चन्द्रकेतु पर था।

प्रश्न 10.
महर्षि वाल्मीकि के नेत्रों से हर्ष के आँसू क्यों निकले?
उत्तर:
जब श्रीराम ने अपने पुत्रों को बाँहों में भर लिया, तो उनका मधुर मिलन देखकर महर्षि वाल्मीकि के नेत्रों से खुशी के आँसू निकले।

RBSE Class 7 Hindi लव-कुश लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 11.
घोड़ा खोलने के लिए आये सैनिक ने लव से क्या कहा?
उत्तर:
घोड़ा खोलने के लिए आये सैनिक ने लव से कहा कि यह राजा राम के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा है। इसे वही पकड़ सकता है जो हमारी सेना से और राजा राम से युद्ध कर सकता है। इसलिए तुम अभी बालक हो और अपना बाल हठ छोड़कर घोड़ा ले जाने दो।

प्रश्न 12.
चन्द्रकेतु से लव-कुश ने क्या कहा?
उत्तर:
चन्द्रकेतु ने जब लव-कुश को युद्ध के लिए ललकारा, तो उन्होंने उससे कहा कि हम महर्षि वाल्मीकि के शिष्य हैं। हम कायर नहीं हैं। हम यूँ ही यह अश्व नहीं छोड़ेंगे। हम युद्ध करने को तैयार हैं। हमसे युद्ध करो और अपने घोड़े को छुड़ा ले जाओ।

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प्रश्न 13.
सैनिक ने यज्ञशाला में आकर श्रीराम से क्या कहा?
उत्तर:
सैनिक घबराया हुआ श्रीराम के पास यज्ञशाला में आया और उसने कहा कि वाल्मीकि के आश्रम में लव और कुश नामक दो बालकों ने घोड़ा पकड़ लिया। उनसे हमारा युद्ध हुआ, तो उनके बाणों से अनेक वीर मूर्छित हो गये, वीर लक्ष्मण भी मूर्छित हैं। महाराज, वे साधारण बालक नहीं हैं।

RBSE Class 7 Hindi लव-कुश निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 14.
सीता क्या सुनकर व्याकुल हो गई थी?
उत्तर:
लव और कुश ने घोड़े को छुड़ाने आये सैनिकों को जृम्भकास्त्र चलाकर मूर्छित कर दिया। फिर लक्ष्मण आये तो उन्हें भी मूर्छित कर दिया। इस घटना की सूचना एक तपस्वी ने आकर दी और महर्षि वाल्मीकि से कहा कि शीघ्रता से वहाँ पर चलिए। लक्ष्मण के मूर्छित होने का समाचार सुनकर सीता व्याकुल हो गई थी। उसे अपने पुत्रों के हाथों अनर्थ हो जाने की आशंका होने लगी कि अब इनका मुकाबला अपने पिता श्रीराम से होगा, जो कि ठीक नहीं रहेगा। वह उन्हें कैसे बतायेगी कि ये तुम्हारे ही पुत्र हैं।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए –
(क) लव-कुश में क्षत्रिय के सभी गुण विद्यमान थे। छोटी-सी अवस्था में वे शस्त्र चलाना सीख गए थे। बाण चलाने में तो वे बहुत ही निपुण थे। उनका निशाना अचूक था। वे बड़े वीर और साहसी थे।

प्रसंग – यह गद्यांश ‘लव-कुश’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसमें बताया गया है कि महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहते हुए लव-कुश में सभी गुणों का विकास हो गया था।

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व्याख्या – लव-कुश को बचपन से ही महर्षि वाल्मीकि ने सभी विद्याओं का ज्ञान दिया था। इससे उन दोनों में क्षत्रियों के सभी गुण मौजूद थे। वे क्षत्रियों के समान वीर भी थे तथा छोटी-सी उम्र में ही सारे हथियारों को चलाना अर्थात् युद्ध में शस्त्रास्त्र प्रयोग करना सीख गये थे। वे दोनों बालक बाण चलाने में बड़े ही कुशल थे, अर्थात् धनुर्विद्या में पारंगत थे। इस कारण वे जब बाण से निशाना साधते थे, तो वह अपने निशाने से जरा भी इधर-उधर नहीं होता था। वे बालक होते हुए भी बड़े वीर और साहसी थे। इस कारण वे किसी से नहीं डरते थे।

विशेष – लव-कुश के गुणों का वर्णन किया गया है।

(ख)”महाराज, सारे देश का भ्रमण करने के बाद अश्व अयोध्या लौट रहा था, तब वाल्मीकि आश्रम के लव और कुश नामक दो बालकों ने उसे पकड़ लिया। हमने उन्हें समझाया, वे नहीं माने। आखिर युद्ध करना पड़ा। वे साधारण बालक नहीं हैं, महाराज! उनके बाणों से हमारी सेना के अनेक वीर मूर्छित हो गए। वीर लक्ष्मण भी मूर्छित हो गए हैं।”

प्रसंग – यह गद्यांश ‘लव-कुश’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। जब श्रीराम यज्ञशाला में थे, तो एक सैनिक घबराया हुआ आया और उसने जो कुछ कहा, इसमें उसी का वर्णन है।

व्याख्या – सैनिक ने आदर से सिर झुकाते हुए श्रीराम से कहा कि महाराज, सभी देशों का भ्रमण करने के बाद जब अश्वमेध का घोड़ा अयोध्या लौट रहा था, तो महर्षि वाल्मीकि के आश्रम के दो बालकों ने उसे पकड़ लिया। उन वीर बालकों के नाम लव और कुश हैं। हमने उन बालकों को काफी समझाया, परन्तु वे नहीं माने और उन्होंने घोड़ा नहीं छोड़ा।

इस कारण आखिर में उनसे हमारी सेना को युद्ध करना पड़ा। महाराज, वे साधारण बालक नहीं हैं। क्योंकि उन्होंने युद्ध में हमारी सेना को हरा दिया है। उनके बाणों से हमारी सेना के अनेक बड़े-बड़े वीर बेहोश व घायल हो गये हैं। उनके बाणों से बलशाली लक्ष्मण भी मूर्छित हो गये हैं। अर्थात् लक्ष्मण भी उनका मुकाबला नहीं कर पाये

विशेष – लव-कुश की वीरता का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए| “हम पुरुषार्थी हैं। आपने ही तो हमें शिक्षा दी है कि पुरुषार्थी युद्ध से भी नहीं डरते। फिर आप हमें भय क्यों दिखा रही हैं?” कुश ने लव के स्वर में स्वर मिलाकर कहा। सीता धर्म संकट में पड़ गई। वह महर्षि वाल्मीकि को बुलाने चली गई। क्या पिता-पुत्र में युद्ध होगा? सीता अज्ञात अनर्थ की आशंका से सिहर उठी।
प्रश्न
(क) यह गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
(ख) रेखांकित शब्दों के अर्थ लिखिए।
(ग) लव ने यह किससे कहा?
(घ) सीता किस बात से सिहर उठी?
उत्तर:
(क) यह गद्यांश ‘लव-कुश’ शीर्षक पाठ से लिया गया है।
(ख) पुरुषार्थी = पराक्रम दिखाने वाला। अनर्थ = बुरा होना।
(ग) लव ने यह अपनी माता सीता से कहा।
(घ) यदि लव-कुश का अपने पिता श्रीराम से युद्ध हुआ, तो बुरा होगा, इस बात का विचार कर सीता सिहर उठी।

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पाठ-परिचय
यह पाठ रामायण-कथा पर आधारित है। महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में लव-कुश अपनी माता सीताजी के साथ रहते थे। श्रीराम का अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा आया, उसे लव-कुश ने रोक दिया। फिर सेना से युद्ध हुआ। अन्त में श्रीराम आये और लव-कुश से उनका मिलन हुआ।

कठिन-शब्दार्थ:
होनहार = अच्छे लक्षणों वाला। बाल्यकाल = बचपन। निपुण = चतुर, समझ वाले। नित्यप्रति = हमेशा। नित्यकर्म = रोजाना का काम। सज्जित = सजाया गया। स्वर्ण = सोना। अश्वमेध = एक प्रसिद्ध यज्ञ । पुरुषार्थी = पराक्रम दिखाने वाला। अज्ञात = अनजाना। अनर्थ = बुरा होना। सिहर = काँपना। अश्व = घोड़ा। ललकारा = चुनौती दी। सेनानायक = सेना का मुखिया । जुम्भकास्त्र = बेहोश करने वाला एक हथियार। मूर्तिवत् = अचल, बेजान। यज्ञशाला = यज्ञ करने का स्थान। अद्भुत = अनोखा। मूर्छित = बेहोश।

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