RBSE Solutions for Class 7 Hindi Chapter 16 राजस्थानी काव्य

RBSE Solutions for Class 7 Hindi

Rajasthan Board RBSE Class 7 Hindi Chapter 16 राजस्थानी काव्य (दोहा, सोरठा)

RBSE Class 7 Hindi राजस्थानी काव्य पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठ से

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
पालने में वीरता का गुण कौन सिखाती है?
उत्तर:
पालने में वीरमाता पुत्र को वीरता का गुण सिखाती हैं।

प्रश्न 2.
संकलित दोहे व सोरठे किस भाषा में हैं?
उत्तर:
संकलित दोहे व सोरठे राजस्थानी भाषा में हैं।

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प्रश्न 3.
मरुधरा का मौसम अधिकांशतः कैसा रहता है?
उत्तर:
मरुधरा का मौसम अक्सर शुष्क एवं वर्षा रहित रहता

लिखें –

RBSE Class 7 Hindi अरावली की आत्मकथा बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि सूर्यमल्ल मीसण ने नारी के किस रूप को उभारा है?
(क) श्रंगार प्रिय
(ख) अबला
(ग) वीर
(घ) हास्य प्रिय।
उत्तर:
(ग) वीर

प्रश्न 2.
कवि कृपाराम ने अपने सोरठों में किसको सम्बोधित किया है?
(क) रामिया को
(ख) जीवड़ा को
(ग) भानिया को
(घ) राजिया को।
उत्तर:
(घ) राजिया को।

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रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –
1. थे मनुहारौ ……….. मेड़ी झाल बंदूक।
2. कदे …………… आवसी, दुखड़ा देसी काट।
3. बहै ……….. रा घाव, रती न ओषद राजिया।
4. पूत सिखावै ……….., मरण बड़ाई माय।
उत्तर:
1. पाहुणाँ
2. कळायण
3. जीभ
4. पालणै।

RBSE Class 7 Hindi अरावली की आत्मकथा अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वीर माता अपने शिशु को क्या सिखाती है?
उत्तर:
वीर माता अपने पुत्र को मातृभूमि की रक्षा के लिए मरण-महोत्सव करना सिखाती है।

प्रश्न 2.
वीर माता कैसे पड़ोसी नहीं चाहती?
उत्तर:
वीर माता कायरता दिखाने वाले लोगों को पड़ोसी | नहीं चाहती।

प्रश्न 3.
ननद भाभी से क्या आग्रह करती है?
उत्तर:
ननद भाभी से आग्रह करती है कि अचानक आये शत्रुरूपी मेहमानों का तलवार-बन्दूक से स्वागत किया जावे।

RBSE Class 7 Hindi अरावली की आत्मकथा लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मरुधरा की आशाओं को कौन पूरा करता है?
उत्तर:
मरुधरा की आशाओं को उचित समय पर बरसने वाला बादल पूरा करता है। भाव यह है कि उचित मौसम पर वर्षा होती रहे, तो इससे खेती के लिए एवं पीने के लिए पानी मिल जाता है। इसलिए बादलों को ही आशाओं को पूरा करने वाला बताया गया है।

प्रश्न 2.
रात-दिन काली घटाओं का इन्तजार कौन करती
उत्तर:
राजस्थान की शुष्क धरती रात-दिन काली घटाओं का इन्तजार करती है। अर्थात् यहाँ के किसान और खेतिहर लोग काली घटाओं का इन्तजार करते हैं, ताकि उनके दुःख कट जावें और अकाल न पड़े।

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प्रश्न 3.
कृपाराम के अनुसार कैसे लोगों से सम्पर्क नहीं रखना चाहिए?
उत्तर:
कृपाराम के अनुसार जो लोग मुख से तो मीठे-मीठे वचन बोलते हैं, परन्तु पेट या हृदय में सदा बुरे विचार रखते हैं, ऐसे बनावटी या कपटी आचरण वाले लोगों से सम्पर्क (मेल-जोल) नहीं रखना चाहिए। ऐसे ही दुष्ट लोगों के लिए ‘मुख में राम बगल में छुरी’ कहा गया है।

RBSE Class 7 Hindi अरावली की आत्मकथा दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
किस प्रकार के घावों का कोई इलाज नहीं है?
उत्तर:
जीभ से बनने वाले घावों का कोई इलाज नहीं है। तलवार या किसी हथियार से शरीर पर घाव हो जावे, तो उसकी पट्टी-मरहम करने से इलाज हो जाता है। ऐसे घावों की अनेक दवाइयाँ हैं । परन्तु चुभने वाले एवं कडुवे वचनों से हृदय पर जो घाव हो जाता है, उसको मिटाने का कोई उपाय नहीं है। क्योंकि ऐसे बुरे वचन सदा याद आते रहते हैं, वे हृदय में जब-तब उभर जाते हैं और कष्ट पहुँचाते हैं। कटु-वचन से बनने वाले ऐसे घावों का कोई इलाज नहीं है।

प्रश्न 2.
कार्य-सिद्धि हेतु कौनसे गुण जरूरी हैं?
उत्तर:
कार्य-सिद्धि हेतु बल, पराक्रम और हिम्मत का होना जरूरी है। पराक्रम ऐसा गुण है कि उससे सभी को वश में किया जा सकता है तथा सभी काम साधे जा सकते हैं। पराक्रम से व्यक्ति राजा बन सकता है और अपना प्रभाव जमा पाता है। जैसे सिंह पराक्रम से ही वन का राजा माना जाता है और सारे पशु उससे भयभीत रहते हैं।

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प्रश्न 3.
किसान का परिवार कैसे मौसम में खेत में काम करता है?
उत्तर:
राजस्थान सूखा प्रदेश है। यहाँ पर गर्मी अधिक पड़ती है। यहाँ पर किसान का परिवार तेज धूप में तपता हुआ,| जोर से चलने वाली लू से झुलसता हुआ खेत में काम करता है। अर्थात् वह गर्मी के मौसम में खेत में काम करता है। वह सोचता है कि वर्षा होगी, खेती उपजेगी, इसलिए वर्षा से पहले ही खेतों को सुधार लें। इस तरह वह गर्मी के दिनों में भी काम करता है।

भाषा की बात –
प्रश्न 1.
नीचे दिये राजस्थानी शब्दों के हिन्दी रूप लिखिए –
रुत, किरसाण, डौढ़ी, मुसकल, स्याळ
उत्तर:
रुत – ऋतु
किरसाण – किसान
डौढ़ी – ड्योढ़ी
मुसकल – मुश्किल
स्याळ – सियार

प्रश्न 2.
कवि नानूराम संस्कर्ता के दोहों में खेती-बाड़ी से जुड़ी शब्दावली का प्रयोग हुआ है। अपने अंचल की स्थानीय भाषा में प्रयुक्त रसोई एवं खान-पान की शब्दावली की सूची बनाइए।
उत्तर:
राजस्थान प्रदेश में मेवाड़ी, मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाती व ब्रजभाषा के अलग-अलग अंचल या क्षेत्र हैं। आप जिस क्षेत्र में रहते हैं, वहाँ प्रचलित शब्दावली की सूची स्वयं बनावें।

प्रश्न 3.
‘गण-औगण जिण गाँव ……. । उक्त पद में ‘ग’ वर्ण का दोहरान हुआ है। संकलित रचनाओं में से ऐसे चरण छाँटिए, जिनमें वर्णों की आवृत्ति हुई हो।
उत्तर:

  1. हालरियाँ हुलराय।
  2. मरण बड़ाई माय।
  3. घट माँही खोटा घड़े।
  4. रंग्या स्याला राजिया।
  5. तीखा तावड़िया तपै।
  6. रहणो मुसकल राजिया।
  7. तन लागौं तरवारियाँ।
  8. मच्छ गळागण माँय।

प्रश्न 4.
दोहों में पंक्ति के अंत में तुक मिलता है। जैसेहुलराय व माय। कृपाराम के सोरठों को पढ़कर पहचान कीजिए कि उनमें तुक का मिलान कहाँ हुआ है?
उत्तर:
सोरठों में तुक पहले व तीसरे चरण में मिलती है, जैसे –
पाटा पीड़ उपाव,
बहै जीभ रा घाव,
इसी प्रकार मीठास व इखलास, कोय व होय।

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पाठ से आगे –

प्रश्न 1.
राजस्थान के इतिहास से ऐसे दो नारियों के नामों का उल्लेख कीजिए जिन्होंने अपने कार्यों से वीरता का आदर्श प्रस्तुत किया हो।
उत्तर:
रानी कर्णवती, रानी चूंडावत अथवा रानी पद्मावती।

प्रश्न 2.
मरुस्थलीय परिवेश में बारिश उत्सव की तरह होती है। अपने अंचल में बारिश के माहौल का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जयपुर अंचल में जुलाई महीने के अन्त से वर्षा प्रारम्भ होती है और पूरे अगस्त तक होती रहती है। प्रारम्भ में काली बादली के आगे-आगे आँधी एवं धूल का गुबार आता है, फिर कुछ देर तक जोरदार वर्षा होती है। बाद में वर्षा रिमझिम होती रहती है। कभी-कभी तेज वर्षा होती है तो नदी-नाले विकराल रूप धारण कर लेते हैं।

तालाब एवं पोखर पानी से लबालब हो जाते हैं। अरावली की पहाड़ियों से झरने बहने लगते हैं, सूखी नदियों में पानी आ जाता है। वर्षा के मौसम में पेड़-पौधे एवं धरती हरी-भरी हो जाती है। खेती लहलहाने लगती है। मोर नाचने लगते हैं। लोगों को इससे प्रसन्नता होती है, किसानों को अच्छी उपज की आशा होने लगती है। इससे खेतों एवं गाँवों में चहल-पहल बढ़ जाती है।

यह भी करें –

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पाठ में आपने राजस्थानी भाषा के तीन कवियों की रचनाएँ पढ़ीं। अपने शिक्षक / शिक्षिका की सहायता से राजस्थानी के तीन अन्य कवियों की रचनाओं का संकलन कर अपनी डायरी में लिखिए।
उत्तर:
निर्देशानुसार स्वयं लिखिए।

प्रश्न 2.
पाठ में संकलित दोहों / सोरठों को कंठस्थ कर उनको विद्यालय की प्रार्थना सभा अथवा अन्य अवसरों पर सुनाइए।
उत्तर:
दोहे – सोरठे कण्ठस्थ कीजिए और सुनाइए।

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प्रश्न 3.
पाठ में संकलित रचनाओं से दो-तीन दोहों/सोरठों का चयन कर उनको सुन्दर लिखावट में चार्ट पेपर पर लिखिए व विद्यालय की भित्ति पत्रिका में प्रकाशन हेतु शिक्षक / शिक्षिका को दीजिए।
उत्तर:
निर्देशानुसार स्वयं करें।

RBSE Class 7 Hindi अरावली की आत्मकथा अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 7 Hindi अरावली की आत्मकथा वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
‘माथा मोल बिकाय’ से कवि का क्या आशय
(क) सिर कटवा देना
(ख) सिर का सौदा करना
(ग) बलिदान हो जाना
(घ) बदला चुकाना।
उत्तर:
(ग) बलिदान हो जाना

प्रश्न 2.
‘थे मनुहारौ पाहणौ’-मेहमानों की मनुहार किससे करने को कहा है?
(क) दूध-दही से
(ख) छाछ-राबड़ी से
(ग) मीठे भोजन से
(घ) बन्दूक चलाने से।
उत्तर:
(घ) बन्दूक चलाने से।

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प्रश्न 3.
‘कदे कळावण आवसी, दुखड़ा देसी काट।’ यह किसने कहा?
(क) किसान ने
(ख) वर्षा-ऋतु ने
(ग) श्रमिकों ने
(घ) व्यापारियों ने।
उत्तर:
(क) किसान ने

प्रश्न 4.
‘हलकार्यों की होय, रंग्या स्यालाँ राजिया।’ इसमें सियार को किसका प्रतीक बताया गया है?
(क) सिंह का
(ख) कायर का
(ग) वीर का
(घ) साहसी का।
उत्तर:
(ख) कायर का

प्रश्न 5.
‘पूत सिखावै पालणै, मरण बड़ाई माय।’ माता अपने पुत्र को क्या सिखाती है?
(क) मौत अचानक होवे।
(ख) मौत का सामना मत करो।।
(ग) मरण को उत्सव की तरह मानो।
(घ) मरण की बड़ाई करते रहो।
उत्तर:
(ग) मरण को उत्सव की तरह मानो।

रिक्त स्थानों की पूर्ति –
प्रश्न 6.
निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिये गये सही शब्दों से कीजिए –
(क) नहँ पड़ोस कायर नराँ, हेली ……….. सुहाय। (संग / बास)
(ख) वूठ कळावण मुरधरा पूरण ………. आस। (वाकी / आखी)
(ग) मुख ऊपर मीठास ………. मांही खोटा घडै। (सिर / घट)
(घ) किरसाणां रा डीकरा …….. सुधारै खोर। (खेत / मेंढ़)
उत्तर:
(क) बास
(ख) आखी
(ग) घट
(घ) खेत।

RBSE Class 7 Hindi अरावली की आत्मकथा अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 7.
कवि कृपाराम ने सोरठे किसे सम्बोधित कर लिखे?
उत्तर:
कवि कृपाराम ने अपने सेवक राजिया को सम्बोधित कर सोरठे लिखे।

प्रश्न 8.
‘कळायण’ से कवि का क्या आशय है?
उत्तर:
‘कळायण’ से कवि का आशय बादलों की काली घटा से है।

प्रश्न 9.
‘हलकार्यों की होय’ का आशय बताइये।
उत्तर:
कायर व्यक्ति को ललकारने से क्या हो सकता है? इससे वह वीरता नहीं दिखा पाता है।

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प्रश्न 10.
सूर्यमल्ल मीसण के दोहों में किस भाव की प्रधानता है?
उत्तर:
सूर्यमल्ल मीसण के दोहों में वीरता या वीर भावों की प्रधानता है।

RBSE Class 7 Hindi अरावली की आत्मकथा लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 11.
‘माथा मोल बिकाय’ कथन से वीरों की क्या विशेषता बतायी गई है?
उत्तर:
राजपूत वीर अपने स्वामी के नमक का मोल अपना सिर देकर चुकाते थे। वे स्वामिभक्त होते थे तथा मातृभूमि की रक्षा के लिए मर-मिटते थे। उक्त कथन से वीरों के सहर्ष बलिदान होने की विशेषता बताई गई है।

प्रश्न 12.
‘नहँ पड़ोस कायर नराँ’ कथन से वीर नारी की क्या विशेषता प्रकट हुई है?
उत्तर:
इस कथन से वीर नारी की यह विशेषता प्रकट हुई है कि वह वीर क्षत्राणी है, वीर की पत्नी है और वीरता दिखाना ही उसे अच्छा लगता है। वह कायरता दिखाने वालों से घृणा करती है। वीरोचित भावना रखना और वैसा ही आचरण करना – ये दो विशेषताएँ यहाँ प्रकट हुई हैं।

प्रश्न 13.
कवि कृपाराम ने किस गाँव में रहना कठिन = बताया है? क्यों?
उत्तर:
कवि कृपाराम ने ऐसे गाँव में रहना कठिन बताया है, जहाँ गुणों की कदर नहीं हो, अवगुणों का तिरस्कार भी न हो और मनमर्जी का आचरण करने वाले लोग हों। ऐसे गाँव। न तो कोई किसी को सुनता है और न अपना दायित्व समझता है। वहाँ पर अन्याय अधिक होता है।

RBSE Class 7 Hindi अरावली की आत्मकथा निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 14.
वीर माता अपने पुत्र को पालने में क्या संस्कार देती है?
उत्तर:
सूर्यमल्ल मीसण द्वारा रचित दोहे में बताया गया है| कि वीर माता अपने छोटे से बालक को जब पालने में झुलाती है, तब वह लोरी गाकर अपने कुल और परिवार के अनुसार वीरता दिखाने के गीत सुनाती है। वह अन्य माताओं की तरह पुत्र को पालने में झुलाते समय केवल सुलाना नहीं। चाहती है, बल्कि वह तो उसे ऐसे गीत सुनाती है, जिनमें मातृभूमि की रक्षा का भाव रहता है तथा वीरों के द्वारा मरण को महोत्सव मनाने का जोश भरा रहता है। इस प्रकार वीर माता अपने पुत्र को प्रारम्भ से ही वीरता दिखाने और बलिदानी भावना रखने का संस्कार देती है। वह चाहती है कि बचपन से ही उसका पुत्र वंश-परम्परा के अनुसार पराक्रमी बने।

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प्रश्न 15.
ननद-भाभी के प्रसंग से कवि ने क्या सन्देश दिया है?
उत्तर:
कवि ने बताया है कि जब घर के सारे पुरुष अपने काम से गये हों, उसी समय शत्रु आ जाये, तो वीर क्षत्रियों के घर की स्त्रियाँ शत्रु का वीरता से सामना करती हैं। वे शत्रुओं को मारने और स्वयं भी मरने में पीछे नहीं रहती हैं। इसी का उदाहरण ननद-भाभी का प्रसंग। नाद करनी कि मैं ड्योढ़ी पर खड़ी हाकर, हाथ में तलवार लाकर शत्रु को रोकती हूँ और भाभी बन्दूक लेकर ऊपर अटारी या मेढ़ से उन पर गोलियाँ चलावे। इस तरह बिना बुलाये मेहमानों का अच्छा सत्कार हो जायेगा। इस प्रसंग से नारियों को वीरता एवं साहस दिखाने का सन्देश दिया गया है।

प्रश्न 16.
कृपाराम के सोरठों से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर:
कृपाराम चारण कवि थे। इनके सोरठों से अनेक बातों की शिक्षा मिलती है। जैसे दूसरों को कठोर वचन नहीं कहने चाहिए, क्योंकि कठोर वचनों का घाव हृदय पर होता है, जिसे ठीक करने की कोई दवा नहीं है। ऐसे लोगों की संगति नहीं करनी चाहिए या मेल-मिलाप नहीं करना चाहिए, जो स्वार्थ के कारण सामने मीठी-मीठी बातें करें और पीठ पीछे सदा बुराई करें, अहित सोचें। साहस एवं पराक्रम रखने से ही सब काम सधते हैं। गुणों की इज्जत करने वालों के साथ रहना लाभकारी होता है, परन्तु गुणों से रहित व्यक्ति सदा अन्याय और अपराध करते हैं। ऐसे लोगों से दूर ही रहना चाहिए।

पाठ-परिचय:
इस पाठ में राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध कवि सूर्यमल्ल मीसण, नानूराम संस्कर्ता और कृपाराम की कविताएँ संकलित हैं। इनमें राजस्थान की वीर-परम्परा एवं संस्कृति का वर्णन किया गया है।

सप्रसंग व्याख्याएँ –

1. दोहा-इला न देणी ……… बड़ाई माय॥

कठिन-शब्दार्थ:
इला = भूमि। हुलराय = प्रसन्नता प्रकट कर। पूत = पुत्र।

प्रसंग – यह दोहा सूर्यमल्ल मीसण द्वारा रचित है। इसमें कोई वीर माता अपने पुत्र को देश-प्रेम की सीख देती है।

व्याख्या – कवि सूर्यमल्ल मीसण कहते हैं कि क्षत्राणी वीर माता अपने पुत्र को यह शिक्षा देती है कि अपनी भूमि किसी भी हालत में दूसरों को नहीं देनी चाहिए। अपनी भूमि या मातृभूमि के लिए मरने से नहीं डरना चाहिए। वीर माता पालने में झुलाते समय मातृभूमि की रक्षा के लिए मरण का महत्त्व बता देती है या सिखा देती है।

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2. नहँ पड़ोस कायर ……… बिकाय॥

कठिन-शब्दार्थ:
हेली = अरी सखी। वास = निवास। सुहाय = अच्छा लगता है। बलिहारी = न्यौछावर। माथा = सिर।

प्रसंग – यह दोहा सूर्यमल्ल मीसण द्वारा रचित है। इसमें वीर नारी ने कायर लोगों से सदा दूर रहने का भाव प्रकट किया है।

व्याख्या – कवि वर्णन करता है कि कोई वीर नारी अपनी सखी से कहती है कि अरी सखि! मुझे कायर लोगों के पड़ोस में रहना अच्छा नहीं लगता है। मैं तो उस देश के लोगों पर न्यौछावर हो जाना चाहती हूँ, जहाँ पर सिर बिक जाते हैं। अर्थात् वीर पुरुष मातृभूमि की खातिर अपना सिर कटवाने में जरा भी संकोच नहीं करते हैं, ऐसे वीर पुरुषों के समीप रहना अच्छा लगता है।

3. भाभी हँ डौढी ……… बंदूक॥

कठिन-शब्दार्थ:
हूँ = मैं। डौढ़ी = ड्योढ़ी, मुख्य द्वार। लीधाँ = लिए हुए। खेटक = ढाल। रूक = तलवार। थे = आप। मनुहारौ = मनुहार करो। पाहुणाँ = मेहमान। मेड़ी = अटारी।

प्रसंग – यह दोहा कवि सूर्यमल्ल मीसण द्वारा रचित है। इसमें दो वीर-नारियों के वार्तालाप का वर्णन किया गया है।

व्याख्या – कवि बताता है कि देवरानी अपनी जेठानी से या ननद अपनी भाभी से कहती है कि मैं ढाल और तलवार लेकर ड्योढ़ी पर खड़ी हूँ। तुम भी बन्दूक लेकर मेड़ी या अटारी पर चढ़कर इन शत्रु रूपी मेहमानों की मनुहार करो, स्वागत करो। अर्थात् इन्हें परास्त कर दो। भाव यह है कि जब घर पर कोई पुरुष नहीं रहे और अचानक शत्रु आ जावे, तो वीर नारी उसका मुकाबला करने के लिए अपनी भाभी या जेठानी से यह बात कहती है। वह उन शत्रुरूपी मेहमानों का स्वागत तलवार और बन्दूक से करती है।

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4. वूढ कळायण! ….. बारां मास॥

कठिन-शब्दार्थ:
कळायण = काली घटा। मुरधरा = रेगिस्तानी धरती। तूठ्याँ = प्रसन्न होने से। रूड़ी रुतौ = सूखा मौसम, ऋतु। बारां = बारह।

प्रसंग – यह दोहा कवि नानूराम संस्कर्ता द्वारा रचित है। इसमें बादलों की काली घटा से बरसने का आग्रह किया गया

व्याख्या – कवि नानूराम संस्कर्ता बताते हैं कि किसान कहता है-काली घटा, तू इस मरुधरा (रेतीली धरती) पर बरस जा तथा यहाँ के लोगों की सारी आशाओं को पूरा कर दे। यदि ऐसा हो जाये तो यहाँ सूखे मौसम में भी प्रसन्नता से समय बीत जायेगा और बारह महीनों लोग मौज में रहेंगे। अर्थात् काली बादली के समय पर बरसने से मरुधरा के किसानों का जीवन सुखमय बन जायेगा।

5. दे दरसण, दोरी ………… काट॥

कठिन-शब्दार्थ:
दोरी = परेशान। धरा = धरती। जोवै = इन्तजार करे। कदे = कब। कळायण = काली घटा। आवसी = आयेगी।

प्रसंग – यह दोहा कवि नानुराम संस्कर्ता द्वारा रचित है। इसमें राजस्थान के किसानों की चिन्ता का वर्णन किया गया है।

व्याख्या – कवि वर्णन करता है कि राजस्थान का किसान काली बादली से प्रार्थना करता है कि तू जल्दी से दर्शन दे, यह सूखी धरती परेशान हो रही है और रात-दिन तुम्हारे रास्ते को देख रही है, तुम्हारे आने का इन्तजार कर रही है कि कब काली घटा आयेगी और हमारे दु:खों को मिटा देगी?

6. तीखा तावड़िया ………….. खोर॥

कठिन-शब्दार्थ:
तावड़िया = धूप, सूर्य। तीखा = तेज। लवाँ = गर्म हवाओं का।

प्रसंग – यह दोहा कवि नानूराम संस्कर्ता द्वारा रचा गया है। इसमें राजस्थान के किसानों के द्वारा खेतों में काम करने का वर्णन किया गया है।

व्याख्या – कवि वर्णन करता है कि जब धूप बहुत तेज तपती है और गर्म हवा (लू) का जोर रहता है, शरीर को झुलसाने वाली लू चलती है, ऐसे मौसम में किसान का परिवार खेतों की निराई-गुड़ाई आदि करता है।

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7. सोरठा-पाटा पीड़ ……………. राजिया॥

कठिन-शब्दार्थ:
तन = शरीर। तरवारियाँ = तलवारें। रती = थोड़ा-सा। ओषद = दवा। पाटा = पट्टी।

प्रसंग – यह सोरठा कवि कृपाराम द्वारा रचित है। इसमें कृपाराम ने अपने सेवक राजिया को सम्बोधित करते हुए वाणी या कठोर वचन के घावों की दवा न होने का वर्णन किया है।

व्याख्या – कवि कहता है कि हे राजिया! शरीर पर तलवार आदि के घाव लग जावें, तो उनका पट्टी करने से इलाज हो सकता है, उनकी पीड़ा कम करने के उपाय हो सकते हैं, परन्तु जीभ के द्वारा बने घावों अर्थात् कठोर वचनों के घावों की कोई दवा नहीं है।

8. मुख ऊपर ………… नहँ राजिया॥

कठिन-शब्दार्थ:
मीठास = मीठापन, मधुरता। घट = हृदय। खोटा = बुरा। इसड़ा V = ऐसे से।

प्रसंग – यह सोरठा कवि कृपाराम द्वारा रचित है। इसमें मुख में कुछ और हृदय में कुछ रखने वालों से सावधान रहने को कहा गया है।

व्याख्या – कवि कहता है कि हे राजिया! जो मुँह से तो मीठी-मीठी बातें कहें, परन्तु उनके हृदय में बुराई रहे, ऐसे लोगों से आत्मीयता नहीं रखनी चाहिए।

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9. कारज सरै न कोय ………… राजिया॥

कठिन-शब्दार्थ:
प्राक्रम = पराक्रम। हीमत = हिम्मत। स्यालां = सियार।

प्रयंग – यह योरठा कवि कृपाराम द्वारा रचित है। इसमें पराक्रम से ही सारे काम सधते हैं, कोरे दिखावे से नहीं ………. इस बात का महत्त्व दर्शाया गया है।

व्यख्या – कवि कृपाराम कहते हैं कि हे राजिया! बल, पराक्रम व हिम्मत के बिना कोई काम नहीं हो सकता। सियार को चाहे रंग लो, उसे शेर का रंग-रूप दे दो, परन्तु ऐसा करने से क्या लाभ? क्योंकि वह शेर की तरह पराक्रमी नहीं हो सकता।

10. गण-औगण ……….. राजिया॥

कठिन-शब्दार्थ:
औगण = अवगुण। माँय = में। मुसकल = कठिन।

प्रसंग – यह सोरठा कवि कृपाराम खिड़िया द्वारा रचित है। इसमें गुणों की इज्जत न करने वालों का साथ न देने या उनके साथ न रहने का वर्णन किया गया है।
व्याख्या – कवि कहता है कि हे राजिया! जहाँ पर लोग गुणों एवं अवगुणों को सुनकर या समझ-देखकर भी अपने आचरण में सुधार न कर सकें, ऐसे गाँव या स्थान पर रहना कठिन है, वहाँ पर तो विनाश की ही स्थिति रहती है। आशय यह है कि छोटी मछली को बड़ी मछली निगल जाने की स्थिति में वहाँ सदा अव्यवस्था रहती है।

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