RBSE Solutions for Class 7 Hindi Chapter 13 भारत की मनस्विनी महिलाएँ

RBSE Solutions for Class 7 Hindi

Rajasthan Board RBSE Class 7 Hindi Chapter 13 भारत की मनस्विनी महिलाएँ (पत्र)

RBSE Class 7 Hindi भारत की मनस्विनी महिलाएँ पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठ से

उच्चारण के लिए –

प्रश्न – ब्रह्मवादी शुभाशीर्वाद, वैविध्य, आध्यात्मिक।
उत्तर:
शब्दों का सही उच्चारण करें। सोचें और बताएँ –

प्रश्न 1.
किरण ने अपने पत्र में क्या पूछा था?
उत्तर:
किरण ने अपने पत्र में भारत की मनस्विनी महिलाओं के बारे में जानकारी देने के लिए पूछा था।

प्रश्न 2.
मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है, कैसे?
उत्तर:
मनुष्य यदि अच्छा और उत्तम आचरण वाला बनने की सोचता है, तो वह वैसा बनने की कोशिश करता है। वह मनस्वियों के अच्छे गुणों को अपने जीवन में उतारता है। इस तरह वह अपनी सोच के अनुसार बनता है।

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प्रश्न 3.
विवेकानन्दजी के गुरु का नाम बताइए।
उत्तर:
विवेकानन्दजी के गुरु का नाम रामकृष्ण परमहंस था।

लिखें –

RBSE Class 7 Hindi भारत की मनस्विनी महिलाएँ  बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
नारी जाति के प्रति पुरुष वर्ग ने क्यों श्रद्धासम्मान प्रकट किया है?
(क) नारी पुरुष से अधिक बुद्धिमती होती है।
(ख ) वह रसोई का काम अधिक करती है।
(ग) पुरुष नारी से डरता है।
(घ) उसने भारतीय सभ्यता के विकास में विशेष योगदान दिया है।
उत्तर:
(घ) उसने भारतीय सभ्यता के विकास में विशेष योगदान दिया है।

प्रश्न – खाली जगह भरिए –

  1. रामकृष्ण परमहंस की पत्नी …………. ‘को भी भूला नहीं जा सकता।
  2. पार्वती जिसने ……….. के घर जन्म लिया।

उत्तर:

  1. शारदामणि
  2. हिमाचल।

RBSE Class 7 Hindi भारत की मनस्विनी महिलाएँ  अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
यह पत्र किसने किसको लिखा है?
उत्तर:
यह पत्र सत्यनारायण लाल नामक दादा ने अपनी पोती किरण को लिखा है।

प्रश्न 2.
किरण दादाजी से क्या जानना चाहती थी?
उत्तर:
किरण दादाजी से भारत की मनस्विनी नारियों के बारे में जानना चाहती थी।

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प्रश्न 3.
कील के स्थान पर उंगली किसने लगाई थी?
उत्तर:
रानी कैकेयी ने रथ में कील के स्थान पर अपनी उंगली लगाई थी।

RBSE Class 7 Hindi भारत की मनस्विनी महिलाएँ  लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
बाबा ने अपने पोते-पोतियों को बधाई क्यों भेजी
उत्तर:
बाबा अपने पोते-पोतियों से काफी दूर रहते हैं। वे उन्हें बहुत प्यार करते हैं। वे अपनी कक्षा में पढ़ने में चतुर हैं। रोमा ने प्रथम स्थान पाया है। इस तरह की सफलता का पता चलने पर बाबा ने उन सभी को बधाई भेजी है।

प्रश्न 2.
विद्वत्ता के क्षेत्र में किसकी महिमा आज भी गाई जाती है?
उत्तर:
विद्वत्ता के क्षेत्र में अनेक ऋषि-मुनिजनों की पत्नियों का उल्लेख मिलता है। गार्गी और मैत्रेयी ऐसी ही ऋषिपत्नियाँ थीं, जिनकी विद्वत्ता की महिमा आज भी गाई जाती है और उनके वचन प्रमाण माने जाते हैं।

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प्रश्न 3.
‘शिव’ तत्त्व क्या है?
उत्तर:
‘शिव’ तत्त्व समस्त जीव – जगत् के लिए कल्याण का तत्त्व है। उसमें सभी दानव, मानव, सुर, असुर, दैत्य, गन्धर्व आदि एक समान भाव से आश्रय पाते हैं। ‘शिव’ तत्त्व में विषय-वासना को भस्म करने की क्षमता है। इसमें सर्प, सिंह, मूषक, मयूर आदि सभी जीव एक साथ आनन्द से विचरण करते हैं। ‘शिव’ सभी का कल्याण अर्थात् भलाई करते हैं।

RBSE Class 7 Hindi भारत की मनस्विनी महिलाएँ  दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पाठ में आई मनस्विनी महिलाओं को सूचीबद्ध कर उनका संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर:
पाठ में निम्नलिखित महिलाओं के नाम आये हैं, उनका संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है –
पार्वती – भगवान् शिव की पत्नी, जिन्होंने विरक्त शिव को संसार के कल्याण के लिए तैयार किया। इनकी माता मैना तथा पिता हिमाचल थे।
सावित्री – ये एक राजकुमारी थीं। इनका विवाह सत्यवान से। हुआ।
अपने पतिव्रता – धर्म के तेज से ये यमराज से अपने पति के प्राण वापिस लायीं।
अनुसूया – ये महर्षि अत्रि की पत्नी थीं। इन्होंने परीक्षा लेने आये तीनों देवों को शिशु रूप में खिलाया।
मदालसा – ये ब्रह्म ज्ञान की विदुषी थीं। इन्होंने अपने सभी पुत्रों को ब्रह्मवादी बना दिया था।
कैकेयी – राजा दशरथ की रानी थीं। उन्होंने देवासुर संग्राम में दशरथ की सहायता की थी। गार्गी व मैत्रेयी-ये वेद ज्ञान की विदुषी थीं। इन्होंने शास्त्रार्थ में बड़े-बड़े ज्ञानियों को परास्त किया।
सीता – श्रीराम की धर्मपत्नी थीं। इन्होंने अपने आदर्श चरित्र से विश्व-महिलाओं का सम्मान बढ़ाया। रानी भवानी, अहल्याबाई व लक्ष्मीबाई-ये तीनों श्रेष्ठ प्रशासिका एवं वीरांगना के रूप में प्रसिद्ध रहीं। शारदामणि-ये रामकृष्ण परमहंस की पत्नी थीं। इन्होंने पति के कार्यों में सहयोग किया और विवेकानन्द के पथप्रदर्शन में महत्त्वपूर्ण कार्य किया।

प्रश्न 2.
“मनुष्य जैसा सोचता है वैसा ही बनता है।” इस कथन के प्रमाण में जानकारी प्राप्त कर उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
यह कथन पूरी तरह सत्य है कि मनुष्य अपने मन में जैसा बनना चाहता है या सोचता है, वह वैसा ही बन जाता है। क्योंकि वह अपनी सोच के अनुसार आचरण करने लगता है और बाधाओं की चिन्ता न करके उसी दिशा में बढ़ता है। उदाहरण के लिए स्वामी विवेकानन्द ने अपने गुरुजी के कार्यों को पूरा करने का निर्णय लिया, संन्यासी बनकर जनता की भलाई में लगने के लिए सोचा, तो वे अपने माता-पिता को त्यागकर, स्वामी रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बन गये। उन्होंने गुरुजी के मिशन को सारे संसार में फैलाया। अनेक स्थानों पर घूम-घूमकर देश-सेवा एवं नवजागरण का सन्देश दिया। उनकी कीर्ति आज सर्वत्र व्याप्त है।

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भाषा की बात –

प्रश्न 1.
“तुमने गौरी का नाम सुना है। उसने हिमाचल के घर जन्म लिया था।” दूसरे वाक्य में गौरी के स्थान पर ‘उसने’ शब्द का प्रयोग किया गया है। संज्ञा के स्थान पर काम आने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। सर्वनाम के छह भेद होते हैं –
(क) पुरुषवाचक – मैं, हम, तुम, तू, वह, वे, यह, ये।
(ख) निश्चयवाचक – वे, वह।
(ग) अनिश्चयवाचक – कुछ, कोई।
(घ) संबंधवाचक – जो, जिसकी, जिसने, उसने।
(ङ) प्रश्नवाचक – कौन, क्या, कब, कहाँ, कैसे।
(च) निजवाचक – अपने, आप, स्वयं, खुद।।
उत्तर:
उक्त परिभाषा और सभी भेदों को अच्छी तरह समझिये।

प्रश्न 2.
प्रत्येक सर्वनाम का प्रयोग करते हुए दो-दो वाक्य अपने शिक्षक / शिक्षिका की सहायता से लिखिए।
उत्तर:
1. पुरुषवाचक सर्वनाम –

  • मैं अपना पाठ पढ़ता
  • तुम सब कहाँ जा रहे हो?

2. निश्चयवाचक सर्वनाम –

  • वे सभी छात्र व्यायाम कर रहे हैं।
  • वह घर जा रहा है।

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम –

  • आज कोई भी नहीं आया।
  • कुछ किताबें अन्दर रखी थीं।

4. संबंधवाचक सर्वनाम –

  • उसने सारा खेल बिगाड़ दिया।
  • जो पढ़ाई करेगा, पास होगा।

5. प्रश्नवाचक सर्वनाम –

  • कौन व्यक्ति ऐसा करेगा?
  • कैसे और कहाँ से लाऊँ?

6. निजवाचक सर्वनाम –

  • स्वयं जाकर देख आओ।
  • अपने आप काम करते रहो।।

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प्रश्न 3.
जैसा कि आप जानते हैं कि किसी शब्द को बहुवचन में प्रयोग करने पर उसकी वर्तनी में बदलाव आता है; जैसे-एक खिड़की के लिए हम ‘खिड़की’ का प्रयोग करते हैं और एक से अधिक के लिए ‘खिड़कियाँ’।

खिड़की शब्द की वर्तनी में बदलाव यह हुआ है कि अंत के वर्ण “की.” की मात्रा दीर्घ (ई) से ह्रस्व (इ) हो गई है। ऐसे शब्दों को जिनके अंत में दीर्घ ईकार होता है, बहुवचन बनाने पर वह इकार हो जाता है, यदि शब्द के अंत में ह्रस्व इकार होता है तो उसमें परिवर्तन नहीं होता; जैसे – नीति – नीतियाँ।
आप नीचे दिए शब्दों का वचन बदलकर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए –
उत्तर:
उँगली – उँगलियाँ
तैयारी – तैयारियाँ
ताली – तालियाँ
देवियों – देवी।
जिम्मेदारियों – जिम्मेदारी
स्वाभिमानियों – स्वाभिमानी

पाठ से आगे –
प्रश्न 1.
देवासुर संग्राम की अन्तर्कथा जानिए।
उत्तर:
पुराणों में प्राचीन काल की अनेक कथाएँ हैं। उनमें देवताओं एवं असुरों (दैत्यों) के युद्धों का वर्णन अनेक बार हुआ है। देवों एवं असुरों के एक युद्ध में राजा दशरथ भी देवताओं की ओर से लड़ने गये थे और उस युद्ध में देवताओं को विजय मिली थी।

प्रश्न 2.
यदि सीता के स्थान पर आप होती तो राम के वनवास पर क्या करती? लिखिए।
उत्तर:
भारतीय नारी होने से हम अपनी संस्कृति एवं पतिव्रतधर्म के कारण वही करतीं जो सीताजी ने किया था। हम उस हालत में पति का साथ देतीं।

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प्रश्न 3.
इस पाठ में हमने प्राचीन विदुषी महिलाओं के बारे में पढ़ा है। ऐसी ही आधुनिक विदुषी महिलाओं की जानकारी प्राप्त कर लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक काल में अनेक विदुषी महिलाएँ हुई हैं। इनमें से कुछ कवयित्री, कहानी-लेखिका एवं शिक्षिका हैं। यहाँ कुछ नाम दिये जा रहे हैं – सुभद्राकुमारी चौहान (कवयित्री), महादेवी वर्मा (कवयित्री, शिक्षिका), सहजोबाई (सन्त कवयित्री), कृष्णा सोबती (कहानी| लेखिका), उषा प्रियंवदा, मन्नू भण्डारी, निरुपमा सोवती, उषारानी मित्रा, कीर्ति चौधरी आदि कथा-लेखिकाएँ। इन सभी की जानकारी हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपलब्ध है।

यह भी करें –
प्रश्न 1.
आपकी जानकारी में ऐसी महिलाएँ अवश्य होंगी, जिन्होंने समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है। उनका नाम व उनके द्वारा किए गए कार्य की तालिका बनाइए।
उत्तर:
महिलाओं के नाम किए गए कार्य –

  1. महादेवी वर्मा शिक्षण कार्य, गरीबों की सहायता।
  2. सरोजिनी नायडू देश – सेवा, प्रशासन।
  3. मदर टेरेसा बेसहारा रोगियों, अनाथों एवं विधवाओं की सेवा।
  4. साध्वी ऋतम्भरा आपदा पीड़ित स्त्रियों एवं बालकों की सेवा, उनके स्वरोजगार का काम।
  5. सुनीता नारायण समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण के कार्य।

प्रश्न 2.
महिला और पुरुष का समाज के विकास में बराबर महत्त्व है। इस विषय पर बाल सभा में अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर:
बाल सभा में ये विचार प्रकट करें महिला माता के रूप में सन्तान को सद्गुणों की शिक्षा देती है। पत्नी के रूप में हर काम में पति का साथ देती है और बहिन के रूप में स्नेह रखती है। महिला प्रत्येक काम में पुरुष के समान समाज का विकास करती है।

वर्तमान में महिलाएँ शिक्षिका, डॉक्टर, वकील, अभिनेत्री, समाज-सेविका, अधिकारी, राजनेता आदि सभी क्षेत्रों में दिखाई देती हैं। अब तो हमारे देश की सेना एवं पुलिस में भी नारियाँ सेवा देने लगी हैं और समाज-सेवा के अनेक काम कर रही हैं। समाज के विकास में अब महिलाओं का बराबरी का महत्त्व माना जाता है।

RBSE Class 7 Hindi भारत की मनस्विनी महिलाएँ अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 7 Hindi भारत की मनस्विनी महिलाएँ  वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में किसी अनजान वयस्क महिला को क्या कहकर संबोधित करते हैं?
(क) बहिनजी
(ख) भाभीजी
(ग) माताजी
(घ) देवीजी।
उत्तर:
(ग) माताजी

प्रश्न 2.
पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था –
(क) तप
(ख) पूजन
(ग) नृत्य
(घ) अनशन।
उत्तर:
(क) तप

प्रश्न 3.
सावित्री ने किसके फंदे से पति को बचाया था?
(क) देवराज के
(ख) यमराज के
(ग) असाध्य रोग के
(घ) शत्रुओं के।
उत्तर:
(ख) यमराज के

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प्रश्न 4.
ब्रह्म-ज्ञान की साकार प्रतिमा किसे कहा गया है?
(क) पार्वती को
(ख) पावित्री को
(ग) शारदामणि की
(घ) मालमा का।
उत्तर:
(घ) मालमा का।

प्रश्न 5.
भारत की वीर नारियों में किसकी गणना की जाती है?
(क) शारदामणि की
(ख) मैत्रेयी की
(ग) रानी लक्ष्मीबाई की
(घ) सती सावित्री की।
उत्तर:
(ग) रानी लक्ष्मीबाई की

रिक्त स्थानों की पूर्ति –
प्रश्न 6.
निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिये गये सही शब्दों से कीजिए –
(क) नारी ने ही पुरुष को गृहस्थ और ………… बनाया। (संन्यासी / किसान)
(ख) जो विषय-वासना को ………….. करने की क्षमता रखता (समाप्त / भस्म)
(ग) एक थी माता अनुसूया, महर्षि ……….. की पत्नी। (गर्ग / अत्रि)
(घ) राम राजा बने तो सीता को ………… दे दिया। (वनवास / रानी पद)
उत्तर:
(क) किसान
(ख) भस्म
(ग) अत्रि
(घ) वनवास।।

RBSE Class 7 Hindi भारत की मनस्विनी महिलाएँ  अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 7.
हमारे पूर्वजों ने नारी को क्या कहकर सम्मान दिया है?
उत्तर:
हमारे पूर्वजों ने ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता:’ कहकर नारी-जाति को सम्मान दिया है।

प्रश्न 8.
भारतीय चिन्तन की सात्त्विक अभिव्यक्ति क्या है?
उत्तर:
अनजान वयस्क महिला को माताजी कहकर संबोधित करना भारतीय चिन्तन की सात्त्विक अभिव्यक्ति है।

प्रश्न 9.
पार्वती ने किसकी पुत्री रूप में जन्म लिया था?
उत्तर:
पावती ने हिमाचल पर्वत की पुत्री के रूप में जन्म लिया था।

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प्रश्न 10.
सावित्री ने किस अलौकिक शक्ति का परिचय दिया?
उत्तर:
सावित्री ने यमराज के फंदे से अपने मृत पति को जीवित लौटा लाने का अलौकिक शक्ति का कार्य किया।

प्रश्न 11.
देवी मदालसा की क्या विशेषता थी?
उत्तर:
देवी मदालसा ब्रह्म-ज्ञान की विदुषी थी और अपने पुत्रों को सुशिक्षा देने वाली माता थी।

RBSE Class 7 Hindi भारत की मनस्विनी महिलाएँ लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 12.
भारतीयों के द्वारा नारी-जाति का किस रूप में पूजन किया जाता है?
उत्तर:
भारतीय समाज में नारियों को शक्ति, सम्पत्ति और समृद्धि की देवियों में माना जाता है। इस कारण यहाँ पर नारियों को दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में पूजा जाता है। इस तरह नारियों के सम्मान को सबसे ऊपर और श्रेष्ठ पाना लाना,नया उनकी प्रतिष्ठा की जाती है।

प्रश्न 13.
सावित्री ने संसार के सामने कौन-सा आदर्श रखा? कैसे?
उत्तर:
सावित्री एक राजकुमारी थी, परन्तु ससुराल आकर उसने पति का अनुसरण करना अपना कर्त्तव्य माना। वह पति के साथ वन में गयी तथा अन्धे सास-ससुर के साथ पति की सेवा के साथ ही पातिव्रत्य का आदर्श संसार के सामने रखा। कठोर तपस्या करके यमराज के पाश से अपने पति को मुक्त कराया और पति के जीवन की रक्षा की।।

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प्रश्न 14.
अनुसूया की क्या महिमा प्रसिद्ध है?
उत्तर:
महर्षि अत्रि की पत्नी अनुसूया पतिव्रत-धर्म का पालन करने में प्रसिद्ध थी। एक बार ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव उसकी परीक्षा लेने आये। वे अनुसूया की अलौकिक शक्ति से बालक बन गये और माता अनुसूया की गोद में शिशु रूप में खेलने लगे। इससे उसकी महिमामयी शक्ति को सभी सादर स्मरण करने लगे, उनकी दिव्य मातृत्व-महिमा प्रसिद्ध हुई।

प्रश्न 15.
सीता ने वनवास में कौनसी दो अनमोल निधियाँ पायीं?
उत्तर:
धोबी द्वारा निन्दा करने से श्रीराम ने सीता को वनवास दिया। सीता ने वन में अपनी कुटी बनाई और वहीं अपने दोनों पुत्रों-लव और कश को जन्म दिया। इस तरह सीता ने लव और कुश के रूप में दो पुत्र-रूपी अनमोल निधियाँ पायीं तथा स्वयं को धन्य माना।

प्रश्न 16.
शारदामणि ने अपने कर्तव्य का पालन कैसे |किया?
उत्तर:
शारदामणि ने अपने पति के कार्यों में पूरा सहयोग किया। उनके देहान्त के बाद आश्रम का संचालन स्वयं किया और अपने पति के शिष्य विवेकानन्द को आगे बढ़ाया। रामकृष्ण मिशन का कार्य विश्व के कोने-कोने में फैलाया और अपने पति की कीर्ति सब ओर फैलायी। रामकृष्ण परमहंस के व्यक्तित्व के विकास में शारदामणि का बड़ा भारी सहयोग माना जाता है।

RBSE Class 7 Hindi भारत की मनस्विनी महिलाएँ  निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 17.
भारतीय नारियों में अनादि काल से कौन-कौनसे गुण रहे?
उत्तर:
लेखक बताता है कि भारतीय नारियाँ अनादि काल से अपनी विद्या, बुद्धि, कला – कुशलता, कर्मठता तथा सहिष्णुता के आधार पर मानव समाज को सुखी बनाने का सफल प्रयास करती रहीं। उन्होंने अपना जीवन त्याग, तपस्या, शौर्य, उदारता, भक्ति, वात्सल्य, जन्म – भूमि प्रेम तथा आध्यात्मिक चिन्तन से ज्ञान – सम्पन्न बनाया। उन्होंने श्रेष्ठ गुणों को अपनाकर अनेक उच्च आदर्श समाज के सामने रखे हैं। सन्तान-स्नेह, पति-भक्ति, भ्रातृत्व स्नेह एवं गृहस्थ जीवन के निर्वाह की दृष्टि से भी भारतीय नारियों में अनेक गुण दिखाई देते हैं। मानव-सभ्यता की नींव उन्हीं पर टिकी मानी जाती है।

प्रश्न 18.
‘को बड़-छोट कहत अपराधू’ इस कथन से लेखक ने भारतीय मनस्विनी नारियों के सम्बन्ध में क्या कहा है?
उत्तर:
इस कथन से लेखक ने भारतीय मनस्विनी नारियों के सम्बन्ध में कहा है कि यहाँ पर एक-से बढकर एक मनस्विनी नारियाँ हुई हैं। उनके गुणों एवं आदर्शों, लोकोत्तर शक्ति और पतिभक्ति के हजारों उदाहरण मिल जाते हैं। ऐसी गुणवती नारियों में कौन छोटी है और कौन बड़ी, ऐसा निर्णय करना ठीक नहीं है, ऐसा निर्णय करना तो बड़ा भारी अपराध है। वस्तुतः इनमें कोई भी छोटी नहीं है, सब अपने-अपने आचरण एवं गुणों से महिमामयी हैं। अतः किसे श्रेष्ठ बताया जावे और किसे नहीं, यह दोष ही कहा जायेगा। लेखक ने इसी आशय से अपने पत्र में उक्त कथन का समावेश किया है।

प्रश्न 19.
‘भारत की मनस्विनी महिलाएँ’ पाठ से क्या शिक्षा मिलती है? बताइये।
उत्तर:
प्रस्तुत पाठ में लेखक ने भारत की कुछ प्रमुख मनस्विनी नारियों का उल्लेख किया है तथा उनके उच्च आदर्शों एवं गुणों के उदाहरण भी दिये हैं। इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि नारियों का सदैव सम्मान करना चाहिए। भारतीय संस्कृति के अनुसार उनके साथ आदरपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। महिलाएँ माता, बहिन एवं पत्नी रूप में मनुष्य जाति का विकास करती हैं। वे पुरुष को गृहस्थ, किसान, योद्धा, ज्ञानी एवं तपस्वी बनाने में पूरा सहयोग करती हैं। उनमें उदारता, त्याग, प्रेम, भक्ति, शौर्य, सहनशीलता आदि गुण होते हैं। हमें ऐसे गुणों को अपनाना चाहिए।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिये –
(क) नारी ने ही पुरुष को गृहस्थ और किसान बनाया। उसका यह प्रयत्न मानव सभ्यता तथा संस्कृति के भवन की नींव की पहली शिला प्रमाणित हुआ। स्वयं गार्हस्थ्य जीवन के केन्द्र में स्थिर-स्थित रहकर भारतीय नारी ने बड़े-बूढ़ों की सेवा की, नन्हें-मुन्नों को पाला – पोसा और पति के कंधे से कंधा मिला पारिवारिक दायित्व का स्निग्ध निर्वहन किया।

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प्रसंग – यह गद्यांश ‘भारत की मनस्विनी महिलाएँ’ पाठ से लिया गया है। यह एक पत्र है और इसके लेखक सत्यनारायण लाल हैं। इसमें नारी की श्रेष्ठता का वर्णन किया गया है।
व्याख्या – लेखक बताता है कि भारतीय समाज में पुरुष वर्ग नारी-जाति का प्राचीन काल से ही सम्मान करता रहा है। इसका कारण यह है कि नारी की ही प्रेरणा से पुरुष गृहस्थ बनता है और किसान या खेती आदि का कार्य करता है। नारी सदा पुरुष को प्रेरित करने का कार्य करती है। उसके ऐसे प्रयास से ही मानव सभ्यता और संस्कृति रूपी विशाल भवन की नींव मजबूत हुई है। नारी ही उसकी नींव की पहली शिला है। वह स्वयं गृहस्थी का जीवन अपनाती है –

और उसमें प्रमुख हिस्सा लेकर परिवार के बड़े-बूढ़ों की सेवा करती है। वही नन्हें-मुन्नों को जन्म देकर व पाल-पोस कर बड़ा करती है। नारी गृहस्थ जीवन में पति का पूरा साथ निभाती है और उससे कंधा-से-कंधा मिलाकर अर्थात् पूरे साहस एवं परिश्रम से अपनी गृहस्थी का प्रेमपूर्वक निर्वाह करती है। इस प्रकार नारी के ही प्रयासों से सुखमय गृहस्थ जीवन का निर्माण होता है।

(ख) एक भारतीय नारी अपने पति के सत्कार्य में सदा |सहयोगिनी रही है। माँ शारदामणि पति की साधना में सहायिका बनकर उनकी सेवा में संलग्न हो गईं। धीरेधीरे उनमें भी आध्यात्मिक शक्ति का समावेश और विकास हुआ। रामकृष्ण के निर्वाण के बाद शारदामणि ने ही उस आश्रम का संचालन किया, जिसका निर्माण परमहंस देव ने किया था।

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प्रसंग – यह गद्यांश ‘भारत की मनस्विनी महिलाएँ’ पाठ से लिया गया है। इसके लेखक सत्यनारायण लाल हैं। इसमें माँ शारदामणि के श्रेष्ठ आचरण का वर्णन किया गया है।
व्याख्या – लेखक कहता है कि शारदामणि के पति रामकृष्ण परमहंस संन्यासी बन गये थे। उनका मन गृहस्थी से अध्यात्म की ओर चला गया था। ऐसी स्थिति में माँ शारदामणि ने अपने सुख-भोग को त्यागकर पति के अच्छे कार्यों में सहयोग करना अपना कर्त्तव्य माना।

उन्होंने भारतीय नारी के आदर्शों के अनुसार पति की सहयोगिनी बनने में जरा भी संकोच नहीं किया। इस कारण वह पति की साधना में उनकी सेवा करने लग गईं। धीरे-धीरे शारदामणि में भी पति के प्रभाव से आध्यात्मिक शक्ति का विकास होने लगा। जब रामकृष्ण परमहंस का निधन हुआ, तो शारदामणि ने ही उनके आश्रम का संचालन किया और अपने पति के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए उनके शिष्य विवेकानन्द को योग्य बनाया। इस तरह माँ शारदामणि ने पति-धर्म का सुन्दर निर्वाह किया।

प्रश्न 21.
अग्रलिखित गद्यांशों को पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) वह पार्वती, जिसने हिमाचल के घर जन्म लिया और पति रूप में शिव की प्राप्ति के लिए घोर तप किया था। अब इस आख्यान को समझने की कोशिश करो। पार्वती नारी जाति का प्रतिनिधित्व करती हैं। ‘शिव’ समग्र जीव-जगत के लिए कल्याण तत्त्व हैं, जहाँ मानव-दानव, सुर-असुर, दैत्य-गंधर्व सब एक समान आश्रय पाते हैं।

प्रश्न – (क) यह गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
(ख) रेखांकित शब्दों के अर्थ लिखिए।
(ग) पार्वती ने घोर तप क्यों किया था?
(घ) ‘शिव’ तत्त्व को क्या बताया गया है?
उत्तर:
(क) यह गद्यांश ‘भारत की मनस्विनी महिलाएँ’ पाठ से लिया गया है।
(ख) आख्यान = पौराणिक कथा कल्याण तत्त्व = सबकी भलाई रने वाला मूल रूप।
(ग) शिवजी को पति रूप में पाने के लिए पार्वती ने घोर तप किया था।
(घ) ‘शिव’ तत्त्व का संसार का तथा सभी प्राणियों की भलाई करने वाला तत्त्व बताया गया है।

(ख) उसने आत्मबल का सहारा लिया। जंगल में जाकर कुटी छंवाई। वहाँ पुत्रों के रूप में लव-कुश नामक दो अनमोल निधियाँ पायीं। और वे पुत्र भी कैसे? अभी दूध के दाँत भी नहीं टूटे थे कि सीता के इन दो लालों ने, अश्वमेध के घोड़े के लिए लड़ते समय, राम की सेना के महारथियों के दाँत खट्टे कर दिए।

प्रश्न – (क) यह गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
(ख) रेखांकित शब्दों के अर्थ लिखिए।
(ग) जंगल में कुटी किसने छुवाई?
(घ) वे दो पुत्र कौन और कैसे थे?
उत्तर:
(क) यह गद्यांश ‘भारत की मनस्विनी महिलाएँ’ पाठ से लिया गया है।
(ख) आत्मबल = अपनी आत्मा का बल। निधियाँ = खजाने, भण्डार।
(ग) जंगल में सीता ने अपने लिए कुटी छंवाई।
(घ) वे दो पुत्र लव और कुश थे। वे दोनों बालक होते हुए भी बड़े शक्तिशाली और पराक्रमी थे।

पाठ-परिचय:
पत्र-शैली में लिखित इस पाठ के लेखक सत्यनारायण लाल हैं। इसमें हमारे देश की प्रमुख मनस्विनी नारियों का संक्षिप्त परिचय दिया गया है। भारतीय नारियों को अनेक श्रेष्ठ गुणों वाली बताया गया है।

कठिन-शब्दार्थ:
अनुज = छोटा भाई। जिज्ञासा = जानने की इच्छा। मनस्विनी = उच्च विचारों वाली, विदुषी। प्रशस्त = शुभ, बाधारहित। अनादि = जिसके आरम्भ का पता न हो। सहिष्णुता = सहनशीलता। वात्सल्य = माता का सन्तान से प्रेम। सुधी = बुद्धिमान्, ज्ञानी। कलाप = समूह, राशि। वाङ्मय = समस्त साहित्य। सुरभित = सुगन्धित। वयस्क = बड़ी उम्र का। सात्विक = हृदय का पवित्र भाव। गार्हस्थ्य = घर-गृहस्थी का। निर्वहन = निर्वाह, निभाना। विपुल = बड़ा। प्रतिष्ठा = इज्जत से रखना। अधिष्ठात्री = सम्मानित, सर्वाधिक पूज्य देवी। कल्याण = भलाई। विषय-वासना = भोग-स्त्री सुख की प्रबल इच्छा।

उन्मुख = उस ओर प्रवृत्त। वन्य = जंगली। पातिव्रत्य = पतिव्रत धर्म। अलौकिक = इस संसार में न होने वाला, दिव्य। तज्जनित = उससे उत्पन्न। लोकोत्तर = इस लोक से परे। शुभ = कल्याणकारी। धुरंधर = आगे रहने वाले, श्रेष्ठतम। देवासुर = देवताओं एवं राक्षसों का। विरथ = रथ से रहित। सघन = घनघोर। प्रांगण = आँगन, मैदान। प्रतिवाद = विरोध। निधियाँ = खजाने, भण्डार। साँसत = संकट। मनोरथ = मन की अभिलाषा। सत्कार्य = अच्छा कार्य। जाज्वल्यमान = चमकता हुआ। प्रच्छन्न = छिपा हुआ, न दिखाई देने वाला। सुवास = सुगन्ध। दीर्घायु = लम्बी आयु। आरोग्य = रोग रहित।

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