RBSE Solutions for Class 6 Social Science Chapter 3 अंतरिक्ष खोज

Rajasthan Board RBSE Class 6 Social Science Solutions Chapter 3 अंतरिक्ष खोज

RBSE Solutions for Class 6 Social Science

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RBSE Class 6 Social Science अंतरिक्ष खोज Intext Questions and Answers

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पृष्ठ संख्या – 21

प्रश्न 1.
स्पुतनिक और अपोलो अंतरिक्ष मिशन के बारे में जानकारियाँ एकत्र कीजिये और कक्षा में शिक्षक व साथियों से चर्चा कीजिए।
उत्तर:
1. स्पुतनिक अन्तरिक्ष मिशन – विश्व का पहला उपग्रह 1957 में स्पुतनिक – 1 तत्कालीन सोवियत संघ द्वारा अंतरिक्ष में रॉकेट से भेजा गया। सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रम के अन्तर्गत ही स्पुतनिक – 2 द्वारा पहली बार जीवित प्राणी ‘लाईका’ नाम की कुतिया को भेजा गया।

2. अपोलो अंतरिक्ष मिशन – वर्ष 1969 में अमेरिका ने अपोलो 11 अंतरिक्ष यान से तीन मनुष्यों को सफलता के साथ न सिर्फ अंतरिक्ष की सैर करवायी बल्कि दो अंतरिक्ष यात्रियों को चन्द्रमा की सतह पर भी उतारा। नील आर्मस्ट्रांग विश्व के पहले व्यक्ति बने जिन्होंने चन्द्रमा की सतह पर कदम रखा।

प्रश्न 2.
आपका सबसे पसंदीदा अंतरिक्ष यात्री कौन है? उस पर संक्षिप्त आलेख लिखिए और कक्षा में पढ़ कर सुनाइए।
उत्तर:
कल्पना चावला:
मेरी सबसे पसंदीदा अन्तरिक्ष यात्री कल्पना चावला है। कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली भारत में जन्मी पहली महिला एवं राकेश शर्मा के बाद दूसरी भारतीय थी। कल्पना चावल का जन्म हरियाणा के करनाल जिले में 1961 में हुआ था। कल्पना चावला एक शोध वैज्ञानिक एवं अन्तरिक्ष यात्री थी। कल्पना चावला का निधन अपने छः सहयोगियों के साथ फरवरी 2003 में उस समय हो गया जब वे कोलम्बिया अन्तरिक्ष यान से पृथ्वी पर वापस लौट रहे थे।

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पृष्ठ संख्या – 22

प्रश्न 3.
कृत्रिम उपग्रहों से होने वाले लाभों की सूची बनाइए।
उत्तर:
कृत्रिम उपग्रहों से हमें निम्न लाभ प्राप्त होते हैं –

  1. कृत्रिम उपग्रहों द्वारा टेलीफोन, टेलीविजन, रेडियो आदि की तरंगों का प्रसारण किया जाता है।
  2. इनसे जासूसी एवं रक्षा सम्बन्धी अनेक जानकारियाँ मिलती हैं।
  3. कृत्रिम उपग्रहों की सहायता से हमें तूफान या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की जानकारी पूर्व में ही मिल जाती है।
  4. इससे जान-माल को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सकता है।
  5. कृषि, वन और जल संसाधनों की व्यवस्था में भी कृत्रिम उपग्रहों द्वारा प्राप्त जानकारियाँ काफी उपयोगी साबित हो रही हैं।
  6. इनकी सहायता से मौसम, जलवायु, संसाधन आंकलन सम्बन्धी पूर्वानुमान लगाया जाता है।

प्रश्न 2.
भारत ने अब तक कौन – कौनसे कृत्रिम उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े हैं? इनमें से किन्हीं दो पर जानकारी एकत्र कीजिये।
उत्तर:
भारत द्वारा अब तक अनेक उपग्रह छोड़े गए हैं। इनमें प्रमुख उपग्रह – भास्कर, एप्पल, इनसेट, रोहिणी, आई.आर.एस., एडुरोट, हिमसेट, कार्टोसेट, रिसोर्ससेट, ओशनसेट, जी-सेट, चन्द्रयान, मंगलयान आदि हैं।

1. मंगलयान – भारत ने मंगल ग्रह की जानकारी हेतु नवम्बर, 2013 में आन्ध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से प्रक्षेपित किया तथा यह उपग्रह सितम्बर 2014 में मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया है। भारत पहले प्रयास में यह उपलब्धि हासिल करने वाला विश्व का एकमात्र देश है।

2. चन्द्रयान – यह भारत द्वारा प्रक्षेपित उपग्रह है। इससे चन्द्रमा के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। यह कृत्रिम उपग्रह अक्टूबर, 2008 में प्रक्षेपित किया गया है।

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प्रश्न 3.
भास्कराचार्य द्वितीय, टॉलेमी या आर्यभट्ट की जीवनी पर जानकारी एकत्र कीजिए।
उत्तर:
भास्कराचार्य द्वितीय:
भास्कराचार्य द्वितीय भारत के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री थे। इनका जन्म 1114 ई. में हुआ था तथा इन्होंने 36 वर्ष की आयु में ‘सिद्धान्त शिरोमणि’ नामक ग्रन्थ की रचना की। इनका मानना था कि पृथ्वी गोलाकार है तथा अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण सब चीजों को अपनी क ओर खींचती है। ‘सिद्धान्त शिरोमणि’ के अतिरिक्त इन्होंने व्याकरण की आठ, चिकित्सा की छः, योग की छः, गणित की पांच, भरत शास्त्र की दो पुस्तकें लिखीं। इनकी पुस्तकों बा में अंक गणित, बीज गणित, ज्यामिति शास्त्र आदि का विस्तृत वर्णन है।

टॉलेमी:
यनान में ईसा पूर्व चौथी सदी में अन्तरिक्ष ज्ञानविज्ञान का विकास होने लगा। टॉलेमी यहाँ के प्रमुख दार्शनिक थे। इनका मानना था कि पृथ्वी केन्द्र में है तथा सूर्य उसके चारों ओर चक्कर लगाता है। इनका जन्म 100 ई. में तथा मो मृत्यु 170 ई. में हुई। आर्यभट्ट – आर्यभट्ट भारत के महान् खगोलविद् थे। इनका जन्म 550 ई. पूर्व में हुआ तथा मृत्यु 476 ई. पूर्व में हुई। इनकी मान्यता थी कि पृथ्वी गोल है। इन्होंने ईसा से पूर्व पाँचवीं सदी में यह बता दिया था कि पृथ्वी स्थिर नहीं है। में इन्होंने पृथ्वी की परिधि की सही गणना उसी समय कर ली थी।

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प को चुनिये –
(i) भारत द्वारा पहला कृत्रिम उपग्रह प्रक्षेपित किया गया था ………………..
(क) 1960 ई.
(ख) 1975 ई.
(ग) 1947 ई.
(घ) 1985 ई.
उत्तर:
(ख) 1975 ई.

(ii) राजस्थान में प्राचीन जंतर-मंतर वेधशाला स्थित है ………………..
(क) उदयपुर
(ख) कोटा
(ग) जयपुर
(घ) जोधपुर
उत्तर:
(ग) जयपुर

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. आर्यभट्ट भारत के महान् ………………. थे।
  2. भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को गति देने का श्रेय ………………. को है।
  3. पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलने के लिए ………………. किलोमीटर प्रति सेकंड की गति की आवश्यकता पड़ती है।
  4. भारत द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गये प्रथम कृत्रिम उपग्रह का नाम ………………. रखा गया था।

उत्तर:

  1. खगोलविद्
  2. विक्रम साराभाई
  3. 11.2
  4. आर्यभट्ट

प्रश्न 3.
भारत के प्रमुख खगोलशास्त्रियों के नाम बताइए।
उत्तर:
भारत के प्रमुख खगोलशास्त्रियों में आर्यभट्ट, वराहमिहिर, भास्कराचार्य द्वितीय के नाम उल्लेखनीय हैं।

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प्रश्न 4.
प्राचीन काल में विश्व में अंतरिक्ष की खोज की शुरुआत कहाँ-कहाँ से हुई?
उत्तर:
प्राचीन काल में विश्व में अन्तरिक्ष की खोज की शुरुआत भारत, मेसोपोटामिया, मिस्त्र, चीन और यूनान से हुई।

प्रश्न 5.
मिस्र के पिरामिडों का निर्माण कब और क्यों हुआ?
उत्तर:
मिस्र के पिरामिडों का निर्माण लगभग 2500 ई. पूर्व हुआ था। अब तक प्राप्त प्रमाणों के अनुसार यह माना जाता है कि इन पिरामिडों का निर्माण तारों की दिशा और गति को जानने के लिए किया गया था।

प्रश्न 6.
आर्यभट्ट के खगोलीय योगदान की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
आर्यभट्ट का खगोलीय योगदान – आर्यभट्ट का खगोलीय योगदान निम्नलिखित है –

  1. आर्यभट्ट ने पांचवीं शताब्दी में ही बता दिया था कि पृथ्वी गोलाकार है। यह स्थिर नहीं है बल्कि यह अपने अक्ष पर घूमती है। इसके घूमने के, कारण ही हमें लगता है कि तारे उदय व अस्त होते हैं।
  2. उन्होंने पृथ्वी की परिधि लगभग 24835 मील बताई थी, जो कि वर्तमान काल में भूवैज्ञानिकों द्वारा बताई गई परिधि 24901 मील के बहुत कुछ समान है।
  3. उन्होंने चन्द्रग्रहण का कारण चन्द्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ना बताया था, जो. सही है।

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प्रश्न 7.
दूरबीन क्या है? इसके लाभ बताइए।
उत्तर:
दूरबीन – दूरबीन एक ऐसा उपकरण है जिसकी.सहायता से दूर स्थित वस्तुएँ हमें पास व बड़ी दिखाई देती हैं।

लाभ –

  1. दूरबीन से हम दूर स्थित वस्तुओं को साफ साफ देख सकते हैं।
  2. आधुनिक तथा बड़ी दूरबीनों की सहायता से वैज्ञानिक ब्रह्मांड के बारे में लगातार नई-नई जानकारियाँ एकत्रित कर रहे हैं।
  3. उदयपुर में ‘मास्ट’ नामक सौर दूरबीन की सहायता से सूर्य का अध्ययन किया जा रहा है।
  4. दूरबीनों को कम्प्यूटरों से जोड़कर खगोलीय पिंडों का अध्ययन अत्यन्त शुद्धता से किया जा रहा है।

प्रश्न 8.
यूनान के किस गणितज्ञ और भूगोलवेत्ता ने पृथ्वी की परिधि का पहली बार सही आकलन किया?
उत्तर:
पृथ्वी की सही परिधि का आकलन सर्वप्रथम यूनान के गणितज्ञ और भूगोलवेत्ता इराटोस्थनेस ने ईसा पूर्व तीसरी सदी में किया।

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प्रश्न 9.
विश्व के प्रमुख अन्तरिक्ष यात्रियों एवं उनके कार्यों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
विश्व के प्रमुख अन्तरिक्ष यात्री विश्व के प्रमुख अन्तरिक्ष यात्री निम्न हैं –
1. यूरी गागरिन – यूरी गागरिन अन्तरिक्ष यान वोस्तोक – 1 में अन्तरिक्ष की यात्रा करने वाले प्रथम व्यक्ति बने। इन्हें अन्तरिक्ष की अधिक जानकारी हेतु सोवियत संघ द्वारा 1961 में अन्तरिक्ष में भेजा।

2. नील आर्मस्ट्राँग – अमेरिका ने 1969 में अपोलो – 11 द्वारा तीन अन्तरिक्ष यात्रियों को अन्तरिक्ष में भेजा। इनमें से दो को चन्द्रमा की सतह पर भी उतारा। नील आर्मस्ट्राँग विश्व के पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने चन्द्रमा की सतह पर पहला कदम रखा। इससे अन्तरिक्ष सम्बन्धी एवं चन्द्रमा सम्बन्धी कई जानकारियाँ प्राप्त हुईं।

3. राकेश शर्मा – भारत के राकेश शर्मा पहले भारतीय थे जिन्होंने 1984 में अन्तरिक्ष यात्रा की। राकेश शर्मा ने सोयुट टी – 11 यान में दो अन्य सोवियत अन्तरिक्ष यात्रियों के साथ न सिर्फ अन्तरिक्ष की सैर की बल्कि उन्होंने सोयुज 7 स्पेस स्टेशन पर आठ दिन रुक कर कई वैज्ञानिक परीक्षण किए।

4. कल्पना चावला – कल्पना चावला अन्तरिक्ष में यात्रा करने वाली भारत में जन्मी पहली महिला एवं राकेश शर्मा के बाद दूसरी भारतीय थी। ये एक शोध वैज्ञानिक एवं प्रसिद्ध अन्तरिक्ष यात्री थी जिनका काफी महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।

5. सुनिता विलियम्स – सुनिता विलियम्स अन्तरिक्ष यात्रा करने वाली भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक है। ये अन्तरिक्ष में सर्वाधिक समय बिताने वाली महिला है। अन्तरिक्ष की जानकारी प्राप्त करने एवं शोध में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान है।

RBSE Class 6 Social Science अंतरिक्ष खोज Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
‘सिद्धान्त शिरोमणि’ नामक ग्रन्थ की रचना की ……………….
(अ) आर्यभट्ट ने
(ब) भास्कराचार्य द्वितीय ने
(स) घराहमिहिर ने
(द) अरस्तु ने।
उत्तर:
(ब) भास्कराचार्य द्वितीय ने

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Question 2.
दुनिया की सर्वप्रथम तारों की तालिका ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में कहाँ तैयार हुई ………………. थी?
(अ) मिस्र में
(ब) चीन में
(स) यूनान में
(द) भारत में
उत्तर:
(ब) चीन में

Question 3.
आकाशीय पिंडों को देखने में प्रयोग किये जाने वाले दूरबीन का आविष्कार किया ……………….
(अ) गैलीलियो ने
(ब) इराटोस्थेनेस ने
(स) कॉपरनिकस ने
(द) भास्कराचार्य ने
उत्तर:
(अ) गैलीलियो ने

Question 4.
सर्वप्रथम दूरबीन का आविष्कार किया था ……………….
(अ) गैलीलियो ने
(ब) कॉपरनिकस ने
(स) हेंस लिप्पेर्सी ने
(द) न्यूटन ने।
उत्तर:
(स) हेंस लिप्पेर्सी ने

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Question 5.
उदयपुर जिले की फतहसागर झील में एक टापू पर स्थित देश की सबसे बड़ी सौर दूरबीन का नाम है ……………….
(अ) वेणु बापू
(ब) हब्बल
(स) जंतर – मंतर
(द) मास्ट
उत्तर:
(द) मास्ट

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. दक्षिण भारत के कावलूर (तमिलनाडु) नामक स्थान पर 23 मीटर की एक ………………… को कम्प्यूटर से जोड़ दिया गया है। (वेणु बापू दूरबीन/मास्ट दूरबीन)
  2. अंतरिक्ष के रहस्यों को उद्घाटित करने के लिए वैज्ञानिकों ने अप्रेल, 1990 में ………………… को अंतरिक्ष यान से पृथ्वी से 112 किमी ऊपर स्थापित किया। (वेणु बापू दूरबीन/हब्बल अंतरिक्ष दूरबीन)
  3. पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलने के लिए 11.2 किमी. प्रति सेकंड की गति की आवश्यकता पड़ती है जिसे ………………… कहते हैं। (गुरुत्वाकर्षण वेग/पलायन वेग)
  4. कृत्रिम उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के लिए दिए गए वेग को उपग्रह का ………………… कहते हैं। (पलायन वेग/प्रक्षेपण वेग)
  5. 1961 में ………………. ने पहला मानव सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा। (सोवियत संघ/चीन)

उत्तर:

  1. वेणु बापू दूरबीन
  2. हब्बल अंतरिक्ष दूरबीन
  3. पलायन वेग
  4. प्रक्षेपण वेग
  5. सोवियत संघ

सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
1. (iii)
2. (i)
3. (ii)
4. (iv)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पांचवीं सदी में भारत के किस खगोलविद ने बताया कि पृथ्वी गोलाकार है तथा यह घूमती है?
उत्तर:
आर्यभट्ट ने।

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प्रश्न 2.
सवाई जयसिंह ने पहली वेधशाला कब एवं कहाँ बनाई?
उत्तर:
सवाई जयसिंह ने पहली वेधशाला 1724 में दिल्ली में बनाई।

प्रश्न 3.
सवाई जयसिंह द्वारा किन तीन यन्त्रों का आविष्कार किया गया?
उत्तर:

  1. सम्राट यन्त्र
  2. जयप्रकाश यन्त्र
  3. राम यन्त्र

प्रश्न 4.
कृत्रिम उपग्रह किसे कहते हैं?
उत्तर:
कृत्रिम उपग्रह वे कृत्रिम पिंड हैं जो वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न उपयोगों हेतु अन्तरिक्ष में भेजे जाते हैं तथा वे पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाते हैं।

प्रश्न 5.
कृत्रिम उपग्रहों का कोई एक उपयोग बताइए।
उत्तर:
कृत्रिम उपग्रहों द्वारा टेलीफोन, टेलीविजन, रेडियो आदि की तरंगों का प्रसारण किया जाता है।

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प्रश्न 6.
अन्तरिक्ष में जाने वाला पहला जीवित प्राणी कौन था?
उत्तर:
अन्तरिक्ष में जाने वाला पहला जीवित प्राणी ‘लाईका’ नामक कुतिया थी जिसे सोवियत संघ ने स्पुतनिक – 2 द्वारा भेजा था।

प्रश्न 7.
भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो – का गठन कब और किसने किया?
उत्तर:
भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में सन् 1962 में ‘इसरो’ का गठन किया गया।

प्रश्प 8.
देश की सबसे बड़ी दूरबीन ‘मास्ट’ कहाँ स्थापित की गई?
उत्तर:
देश की सबसे बड़ी दूरबीन ‘मास्ट’ उदयपुर में फतहसागर झील के टापू पर स्थापित की गई है।

प्रश्न 9.
चन्द्रमा की सतह पर पहला कदम रखने वाले व्यक्ति का नाम बताइए।
उत्तर:
नील आर्मस्ट्रांग।

प्रश्न 10.
दो भारतीय अन्तरिक्ष यात्रियों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. राकेश शर्मा
  2. कल्पना चावला।

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प्रश्न 11.
भारत के प्रथम उपग्रह का नाम बताइए तथा यह कहाँ से प्रक्षेपित किया गया?
उत्तर:
प्रथम भारतीय कृत्रिम उपग्रह का नाम आर्यभट्ट था जिसे अप्रेल, 1975 में पूर्व सोवियत संघ के बेकानूर अन्तरिक्ष केन्द्र से प्रक्षेपित किया गया।

प्रश्न 12.
भारत द्वारा भेजे ‘मंगलयान’ ने मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक कब प्रवेश किया?
उत्तर:
सितम्बर, 2014 में।

प्रश्न 13.
उपग्रह का प्रक्षेपण वैग किसे कहते हैं?
उत्तर:
कृत्रिम उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के लिए दिए गए वेग को उपग्रह का प्रक्षेपण वेग कहते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘एस्ट्रोसैट’ क्या है?
अथवा
भारत की प्रथम अन्तरिक्ष वेधशाला कौनसी है और यह कहाँ व कब स्थापित की गई?
उत्तर:
एस्ट्रोसैट भारत की पहली अन्तरिक्ष वेधशाला है जिसे इसरो द्वारा श्रीहरिकोटा से अक्टूबर 2015 में प्रक्षेपित किया गया था। एस्ट्रोसैट से ब्रह्माण्ड का अध्ययन करने में सहायता मिलेगी।

प्रश्न 2.
भारत द्वारा भेजे विभिन्न उपग्रहों से हमें क्या लाभ होता है?
उत्तर:
भारत द्वारा भेजे विभिन्न उपग्रहों से दूरसंचार, प्रसारण, मौसम, जलवायु, सुदूर संवेदन, मानचित्रण, संसाधन आकलन, सूखा, बाढ़ व तूफान सम्बन्धी पूर्वानुमान, रक्षा सम्बन्धी गतिविधियाँ तथा कई अन्य राष्ट्र उपयोगी कार्यों का क्रियान्वयन सुचारु रूप से होने लगा है। इससे देश के विकास में मदद मिली है।

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प्रश्न 3.
मंगल अभियान पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मंगल ग्रह की जानकारी हेतु भारत ने ‘मंगलयान’ नामक एक अन्तरिक्ष यान नवम्बर, 2013 में आन्ध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र से प्रक्षेपित किया। यह यान सितम्बर, 2014 में सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश कर गया। पहले प्रयास में यह उपलब्धि हासिल करने वाला भारत विश्व का एकमात्र देश है।

प्रश्न 4.
मास्ट नामक सौर दूरबीन कहाँ स्थित है? इसका क्या उपयोग किया जा रहा है?
उत्तर:
मास्ट नामक सौर दूरबीन राजस्थान राज्य के उदयपुर जिले की फतहसागर झील में एक टापू पर स्थित है। यह देश की सबसे बड़ी दूरबीन है जिसका वजन 12 टन है। इसकी सहायता से सूर्य का अध्ययन किया जा रहा है।

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प्रश्न 5.
आधुनिक काल में दूरबीनों को कम्प्यूटर से क्यों जोड़ा जा रहा है? भारत में स्थित ऐसी किसी एक दूरबीन का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
आधुनिक काल में वैज्ञानिकों द्वारा दूरबीनों को कम्प्यूटरों से जोड़ कर खगोलीय पिंडों का अध्ययन अत्यन्त शुद्धता के साथ किया जा रहा है। दक्षिण भारत के कावलूर (तमिलनाडु) नामक स्थान पर 2.3 मीटर की एक वेणु बापू दूरबीन को कम्प्यूटर से जोड़ दिया गया है। दूरबीन को किसी तारे या आकाशगंगा की दिशा में ठीक-ठीक स्थापित करने में कम्प्यूटर हमारी सहायता करते हैं।

प्रश्न 6.
अन्तरिक्ष विज्ञान में सवाई जयसिंह के योगदान को संक्षेप में बताइये।
उत्तर:
राजा सवाई जयसिंह ने पाँच वेधशालाओं का निर्माण कराया। ये दिल्ली, जयपुर, बनारस, उज्जैन तथा मथुरा में स्थित हैं। इनमें जयपुर की वेधशाला सबसे बड़ी है। वेधशालाओं के अतिरिक्त इन्होंने तीन नये यंत्रों का भी आविष्कार किया जिनके नाम सम्राट् यंत्र, जयप्रकाश यंत्र तथा राम यंत्र रखे। इनमें सम्राट् यंत्र सबसे बड़ा तथा ऊंचा है। आज लगभग 300 वर्षों बाद भी यह यंत्र समय बताने में सक्षम है।

प्रश्न 7.
पलायन वेग क्या है?
उत्तर:
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलने के लिए 11.2 किलोमीटर प्रति सेकण्ड की गति की आवश्यकता पड़ती है। इसे पलायन वेग या एस्केप स्पीड कहा जाता है।

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प्रश्न 8.
मिस्र के पिरामिडों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मिस्र के पिरामिडों की स्थापना 2500 ई. पूर्व से भी पहले हुई। पिरामिड पत्थरों से मानव द्वारा निर्मित एक भव्य इमारत है जिसके वर्गीय आधार की चारों भुजाओं से ढलान बनाती त्रिभुजाकार दीवार शीर्ष पर एक-दूसरे से जुड़कर एक छोटे वर्ग का निर्माण करती है। मिस्र के गीजा के महान् पिरामिड की ऊँचाई 454 फीट है जो आधुनिक 48 मंजिला भवन के बराबर है। प्राचीन मिस्र में इसका उपयोग इसमें राजा और रानी के शव को सुरक्षित रखने के साथ तारों की स्थिति जानने के लिए किया जाता था। गीजा के महान पिरामिड का ध्रुव तारे की सीध में होना इस मत की पुष्टि करता है।

प्रश्न 9.
भारतीय वेधशालाओं पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भारत में भी प्राचीन समय से ही वेधशालाओं का निर्माण किया गया है। विद्वानों का मत है कि पहले पाटलीपुत्र, नालन्दा आदि स्थानों पर बनी वेधशालाओं से तारों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी। जयपुर के राजा सवाई जयसिंह ने देश में पाँच स्थानों दिल्ली, जयपुर, बनारस, उज्जैन एवं मथुरा में वेधशालाओं का निर्माण करवाया था। वर्तमान में अक्टूबर 2015 में देश की पहली अन्तरिक्ष वेधशाला ‘एस्ट्रोसैट’ को प्रक्षेपित किया गया है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम को संक्षेप में समझाइये।
उत्तर:
इसरो का गठन – वैज्ञानिक होमी जहाँगीर भाभा के नेतृत्व में सन् 1962 में परमाणु ऊर्जा विभाग ने अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (ISRO – इसरो) का गठन किया। इसरो की प्रगति-भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को गति देने का श्रेय विक्रम साराभाई को है। विभिन्न उपयोगों के लिए भारत के वैज्ञानिकों ने कई कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किए हैं।

प्रथम भारतीय कृत्रिम उपग्रह का नाम आर्यभट्ट था जिसे 19 अप्रेल, 1975 में पूर्व सोवियत संघ के बेकानूर अंतरिक्ष केन्द्र से प्रक्षेपित किया गया। इसके साथ ही भारत ऐसा करने वाला विश्व का छठा देश बन गया। 1975 से अब तक भारत द्वारा अभेक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे जा चुके हैं। इनमें प्रमुख हैं – भास्कर, एप्पल, इनसेट, रोहिणी, आई.आर.एस., एडुसेट, हिमसेट, कार्टोसेट, रिसोर्ससेट, ओशनसेट, जीसेट, चन्द्रयान, मंगलयान आदि।

उपग्रहों का उपयोग-इन उपग्रहों की सहायता से दूर संचार, प्रसारण, मौसम, जलवायु, सुदूर संवेदन, मानचित्रण, संसाधन आकलन, सूखा, बाढ़ व तूफान संबंधी पूर्वानुमान, रक्षा सम्बन्धी गतिविधियाँ और अन्य कई सार्वजनिक व राष्ट्रोपयोगी कार्यों का संपादन सुचारु रूप से संभव होने लगा है।

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