RBSE Solutions for Class 6 Social Science Chapter 22 हमारी सांस्कृतिक विरासत

Rajasthan Board RBSE Class 6 Social Science Solutions Chapter 22 हमारी सांस्कृतिक विरासत

RBSE Solutions for Class 6 Social Science

RBSE Solutions for Class 6 Social Science Chapter 22 हमारी सांस्कृतिक विरासत

RBSE Class 6 Social Science हमारी सांस्कृतिक विरासत Intext Questions and Answers

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पृष्ठ संख्या – 161

प्रश्न 1.
स्वतन्त्र भारत में प्रकाशित होने वाली पहली डाक टिकट कौनसी थी, जिसमें राष्ट्रीय चिन्ह के प्रतीक को दर्शाया गया है?
उत्तर:
यह जय हिन्द नामक 19 आने की टिकट थी।

गतिविधि

पृष्ठ संख्या – 164

प्रश्न 2.
हमारे राष्ट्रीय चिन्ह का उपयोग कहाँ-कहाँ होता है? सूची बनाइये।
उत्तर:
हमारे राष्ट्रीय चिन्ह का उपयोग होता है –

  1. भारतीय मुद्राओं में
  2. डाक टिकटों में
  3. पासपोर्ट में
  4. पेनकार्ड में
  5. भारत सरकार के प्रिंट विज्ञापनों में
  6. भारत सरकार द्वारा दिये गये मैडलों में आदि
  7. भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल के लैटरपैड पर तथा
  8. भारत की जल, थल, वायु सेना की वेशभूषा के साथ।

RBSE Class 6 Social Science हमारी सांस्कृतिक विरासत Text Book Questions and Answers

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
स्तूप निर्माण में होने वाला खर्च कौन वहन करता था?
उत्तर:
स्तूप निर्माण में राजा, श्रेष्ठि, व्यापारी और अन्य लोग खर्च वहन करते थे।

प्रश्न 2.
अजन्ता की गुफाएँ कौनसी नदी घाटी के पहाड़ को काट कर बनाई गई थीं?
उत्तर:
अजन्ता की गुफाएँ महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में बामोरा नदी घाटी के पहाड़ काटकर बनाई गई थीं।

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प्रश्न 3.
स्तूप किसे कहते हैं?
उत्तर:
श्रेष्ठ भिक्षुओं के सम्मान में अस्थियों के ऊपर मिट्टी एवं ईंटों आदि से बनाए जाने वाले अर्द्ध-गोलाकार टीले को स्तूप कहा जाता है।

प्रश्न 4.
अमरावती का स्तूप कहाँ स्थित है?
उत्तर:
अमरावती का स्तूप वर्तमान आन्ध्रप्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर अमरावती शहर में स्थित है।

प्रश्न 5.
जातक कथाएँ किससे संबंधित हैं?
उत्तर:
जातक कथाएँ बुद्ध के पूर्व जन्म की कथाओं से संबंधित हैं।

प्रश्न 6.
विहार किसे कहते हैं?
उत्तर:
पहाडों पर निर्मित जिन गुफाओं का इस्तेमाल भिक्षुओं के रहने के लिए होता था, ऐसी गुफाओं को विहार कहते हैं।

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प्रश्न 7.
‘आर्यभट्टीय’ ग्रन्थ की रचना किसने की?
उत्तर:
‘आर्यभट्टीय’ ग्रन्थ की रचना आर्यभट्ट ने की।

प्रश्न 8.
चरक ने किस ग्रंथ की रचना की?
उत्तर:
चरक ने “चरक संहिता’ नामक ग्रन्थ की रचना की।

प्रश्न 9.
स्तूप की संरचना के बारे में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्तूप की संरचना – स्तूप का शाब्दिक अर्थ होता है – टीला। प्रारम्भ में स्तूप केवल एक टीला मात्र था, परन्तु कालान्तर में इसका आकार इंट अथवा पत्थरों से बम बनाया जाने लगा। इसके ऊपर छा लगा दिया गया। चारों ओर परिक्रमा के लिए ‘वेदिका’ बनाकर प्रदक्षिणा पथ का निर्माण किया गया। गलियारे को प्रतिमाओं से सजाया जाने लगा।

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प्रश्न 10.
प्राचीन काल के साहित्य के बारे में लेख लिखिये।
उत्तर:
प्राचीन काल में साहित्य का विकास-प्राचीन काल का साहित्य कई तरह का था। कुछ धर्म से सम्बन्धित तथा कुछ धर्मनिरपेक्ष था। धर्म से सम्बन्धित साहित्य में वैदिक साहित्य, जातक कथाएँ, रामायण, महाभारत जैसे महाकाव्य आते हैं तो धर्मनिरपेक्ष साहित्य में संगम साहित्य, गुप्तकालीन व गुप्तोत्तर साहित्य तथा विज्ञान एवं तकनीकी साहित्य आता है। यथा –

1. वैदिक साहित्य – कहानी, काव्य आदि साहित्य में गिने जाते हैं। वैदिक साहित्य बोला और सुना जाता था और इसी रूप में नई पीढ़ी को हस्तान्तरित किया जाता था। इनको सही उच्चारण के साथ अगली पीढ़ी को सम्प्रेषित किया जाता था। साहित्य लिखने का प्रारम्भ चौथी सदी ईस्वी से शुरू होता है।

2. जातक कथाएँ – ये बुद्ध के पूर्व जन्म की कथाएँ हैं। अनेक काव्य और कथाएँ धर्म के अलावा भी थीं, जो पुरानी यादों को ताजा करती थीं।

3. महाकाव्य – ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ प्रसिद्ध महाकाव्य हैं। रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी। इस महाकाव्य में अयोध्या के राजकुमार श्रीराम के साहसिक कार्यों एवं उनके मर्यादा पुरुषोत्तम जीवन की महागाथा है। ‘महाभारत’ के रचयिता महर्षि वेदव्यास थे। ‘महाभारत’ में कुंरु परिवार के बीच लड़े गए बुद्ध से सम्बन्धित गाथा है। महाभारत में ही कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए महान् संदेश, जो आज भी प्रासंगिक है. ‘भगवद्गीता’ के रूप में संग्रहीत है।

4. संगम साहित्य – दक्षिण भारत के मदुरै शहर में तमिल भाषा के साहित्य को ‘संगम साहित्य’ कहा जाता है। यह साहित्य आज भी जीवन्त है। संगम साहित्य में शिल्प्पादिकारम, मणिमेकले, जीवक चिन्तामणि आदि महाकाव्यों का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

5. गुप्तकालीन एवं गुप्तोत्तर साहित्य – गुप्त काल में कालिदास ने ‘रघुवंश’, ‘मेघदूत’, ‘कुमारसम्भव’ तथा ‘ऋतुसंहार’ नामक काव्य-ग्रन्थ लिखे। कालिदास ने ‘मालविकाग्निमित्रम्’, ‘विक्रमोर्वशीयम्’ तथा ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ नामक नाटक लिखे। विशाखदत्त ने ‘मुद्राराक्षसम्’ तथा ‘देवी चन्द्रगुप्तम्’ नामक नाटक लिखे। शूद्रक ने ‘मृच्छकटिकम्’ नामक नाटक की रचना की। विष्णु शर्मा ने ‘पंचतन्त्र’ की रचना की।

अमरसिंह ने ‘अमरकोश’ की रचना की। बाणभट्ट ने ‘हर्षचरित’ तथा ‘कादम्बरी’ की रचना की। हर्षवर्धन. ने ‘रत्नावली’, ‘नागानन्द’ तथा ‘प्रियदर्शिका’ की रचना की। ‘शिल्प्पादिकारम्’ की रचना इलांगरे ने की तथा ‘मणिमेखलई की रचना सीतलै सत्तनार ने की। भरत का ‘नाट्यशास्त्र’ इस काल की प्रमुख रचना है जो नाट्य-नर्तन, अभिनय, संगीत आदि कलाओं की जानकारी देता है। इसी काल में ‘विष्णु-धर्मोत्तर पुराण’ की रचना की गई।

6. विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में प्राचीन भारतीय साहित्य का विकास – विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में भी भारत का प्राचीन सहित्य अत्यन्त उन्नत था। चरक नामक प्रसिद्ध चिकित्साशास्त्री ने ‘चरक संहिता’ नामक आयुर्वेद का ग्रन्थ लिखा। इसमें दवाओं और बीमारी के इलाज के बारे में वर्णन है। सुश्रुत भारत के प्रथम शल्य चिकित्सक थे। उन्होंने ‘सुश्रुत संहिता’ नामक ग्रन्थ लिखा जिसमें शल्य चिकित्सा सम्बन्धी जानकारी संगृहीत है।

7. खगोलशास्त्रीय साहित्य – आर्यभट्ट गुप्तकालीन भारत के एक महान् खगोलशास्त्री एवं गणितज्ञ थे। उन्होंने ‘आर्यभट्टीय’ नामक ग्रन्थ लिखा जिसमें खगोलशास्त्र के बारे में उपयोगी जानकारी मिलती है। इससे भारत के खगोल विज्ञान की महानता पर प्रकाश पड़ता है। प्रश्न 11. भाग’अ’ को भाग ‘ब’ से सुमेलित कीजिए

RBSE Class 6 Social Science हमारी सांस्कृतिक विरासत Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
स्तूप का शाब्दिक अर्थ होता है ……………….
(अ) मन्दिर
(ब) वेदिका
(स) मीनार
(द) टीला
उत्तर:
(द) टीला

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Question 2.
साँची का महास्तूप स्थित है ……………….
(अ) राजस्थान में
(ब) उत्तर प्रदेश में
(स) मध्यप्रदेश में
(द) बिहार में
उत्तर:
(स) मध्यप्रदेश में

Question 3.
अजन्ता की गुफाएँ स्थित हैं ……………….
(अ) महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में
(ब) तमिलनाडु में
(स) मध्यप्रदेश में
(द) बिहार में
उत्तर:
(अ) महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में

Question 4.
किस काल में सर्वप्रथम बुद्ध को मानव रूप में मूर्तियाँ बी?
(अ) गुप्त काल में
(ब) हड़प्पा काल में
(स) मौर्य काल में
(द) कुषाण काल में
उत्तर:
(द) कुषाण काल में

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Question 5.
हर्षचरित के रचयिता थे ……………….
(अ) हर्षवर्धन
(ब) बाणभट्ट
(स) कालिदास
(द) शूद्रक
उत्तर:
(ब) बाणभट्ट

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. ………………… अपने शिष्यों को उनके अवशेषों को स्तूप में रखने को कहा था।
  2. अजन्ता में कुल ………………… गुफाएँ हैं।
  3. ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के रचयिता ………………… थे।
  4. आयुर्वेद का ग्रन्ध चरक ने लिखा था जो ………………… था।
  5. कालिदास ने अपने काव्यों में ………………… दोनों भाषाओं का प्रयोग किया है।

उत्तर:

  1. शाक्यमुनि गौतम बुद्ध
  2. 29
  3. कालिदास
  4. महान् चिकित्सक
  5. संस्कृत और प्राकृत

स्तम्भ’अ’को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
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अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
चैत्य किसे कहते हैं?
उत्तर:
पहाड़ों पर निर्मित कुछ गुफाओं में पूजा के लिए ठोस पाषाण स्तूप बनवाये गये। ऐसे पूजा स्थल को चैत्य कहा गया है।

प्रश्न 2.
स्तूप किसके सम्मान में बनवाए जाते थे?
उत्तर:
स्तूप श्रेष्ठ बौद्ध भिक्षुओं के सम्मान में बनवाए जाते

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प्रश्न 3.
कुषाण काल की सर्वोत्तम देन क्या रही?
उत्तर:
कुषाणकालीन बुद्ध की मानव रूप में बनी मूर्तियाँ। भारतीय कला को इस युग की सर्वोत्तम देन रहीं।

प्रश्न 4.
अजन्ता में कुल कितनी गुफाएँ हैं? इनमें चैत्य तथा विहार गुफाएँ कितनी हैं?
उत्तर:
अजन्ता में कुल 29 गुफाएं हैं। इनमें से पाँच गुफाएँ पूजा स्थल चैत्य हैं और बाकी गुफाएँ भिक्षुओं के रहने के लिए विडार हैं।

प्रश्न 5.
अशोक के किस स्तम्भ को भारत के राष्ट्रीय चिह्न के रूप में स्वीकार किया गया है?
उत्तर:
अशोक के सारनाथ के स्तम्भ को भारत के राष्ट्रीय चिह के रूप में स्वीकार किया गया है।

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प्रश्न 6.
अशोक के सारनाथ के स्तम्भ के शीर्ष पर कौनसे पशु पीठ सटाए बैठे हुए हैं?
उत्तर:
अशोक के सारनाथ के स्तम्भ के शीर्ष पर चार सिंह पीठ सटाए बैठे हुए हैं।

प्रश्न 7.
‘संगम साहित्य’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
दक्षिण भारत के मदुरै शहर में तमिल भाषा के साहित्य को ‘संगम साहित्य’ कहा जाता है।

प्रश्न 8.
‘पंचतन्त्र’ के रचयिता कौन थे?
उत्तर:
विष्णु शर्मा।

प्रश्न 9.
हर्षवर्धन की तीन रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. रत्नावली
  2. नागानन्द
  3. प्रियदर्शिका

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प्रश्न 10.
आर्यभट्ट ने किस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया घा?
उत्तर:
आर्यभट्ट ने सबसे पहले यह बताया कि पृथ्वी गोल है तथा अपनी धुरी पर घूमती है। उसने यह भी बताया कि ग्रहण के समय पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ती है।

प्रश्न 11.
नाट्यशास्त्र का रचयिता कौन था?
उत्तर:
नाट्यशास्त्र का रचयिता भरत था।

प्रश्न 12.
सुश्रुतसंहिता की रचना किसने की थी?
उत्तर:
सुश्रुतसंहिता की रचना सुश्रुत ने की थी।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संस्कृति पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
किसी भी देश की संस्कृति उसकी अपनी आत्मा होती है जो उसकी सम्पूर्ण मानसिक पहचान को सूचित करती है। यह किसी एक व्यक्ति या राजा के सुकृत्यों तथा सुकार्यों का परिणाम मात्र नहीं होती है, अपितु अनगिनत ज्ञात व अज्ञात व्यक्तियों के निरन्तर चिन्तन, दर्शन, कार्य, परम्पराओं का परिणाम होती है। मानव द्वारा सृजित कला, शिल्प, स्थापत्य, साधना, संगीत, नृत्य, वैयक्तिक जीवन के नियम, आस्था आदि विषय भी संस्कृति के अन्तर्गत आते हैं। देश और काल में संस्कृति के स्वरूप में मानवीय प्रयत्नों से बदलाव आते रहे और इस प्रकार संस्कृति का विकास होता रहा।

प्रश्न 2.
बिहार क्या थे?
उत्तर:
पहाड़ों पर निर्मित कुछ गुफाओं का प्रयोग बौद्ध भिक्षुओं के रहने के लिए भी होता था, जिन्हें विहार कहा जाता था। विहार दो अथवा तीन-मंजिला होते थे। विहार में ठहरने के अलावा भिक्षु अध्ययन करते, ध्यान करते तथा अनेक विषयों पर विचार-विमर्श करते थे।

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प्रश्न 3.
स्तूप, चैत्य तथा विहारों की मूर्ति कला एवं चित्रकला को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन काल में निर्मित स्तूपों, चैत्यों तथा विहारों की दीवारों को मूर्तियों व चित्रों से सुसज्जित किया गया है। इन मूर्तियों व चित्रों के विषय बुद्ध के जीवन की घटनाएँ एवं बुद्ध के पूर्व जन्म की कथाएँ (जातक कथाएँ) हैं। गुफाओं में स्वतन्त्र रूप से कहीं-कहीं पशु-पक्षी व प्रकृति का अलंकरण भी किया गया है।

प्रश्न 4.
अजन्ता की गुफाओं पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
अजन्ता की गुफाओं में प्राचीन स्थापत्य, शिल्प और चित्रकला के उत्कृष्ट नमूने देखने को मिलते हैं। महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में बाघोरा नदी की घाटी में पहाड़ी काट कर दूसरी सदी ईसा पूर्व में ये गुफाएँ बनी हैं। हर गुफा से नीचे नदी तक जाने के लिए सीढ़ी काटी गई हैं। यहाँ कुल 21 गुफाएं हैं। इनमें से पांच गुफाएँ पूजा स्थल ‘चैत्य’ हैं और बाकी गुफाएँ भिक्षुओं के रहने के लिए विहार हैं। 490 ई. के बाद अजन्ता की गुफाओं को त्याग दिया गया।

प्रश्न 5.
490 ई. के बाद अजंता की गुफाओं को क्यों त्याग दिया गया?
उत्तर:
490 ई. के बाद अजन्ता का इस्तेमाल करने वाला सारा समुदाय यह स्थान छोड़कर एलोरा चला गया क्योंकि ऐलोरा उस समय के प्रमुख व्यापारिक मार्ग पर था।

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प्रश्न 6.
‘रामायण’ एवं ‘महाभारत’ के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
‘रामायण’ एवं ‘महाभारत’ भारत के प्रसिद्ध महाकाव्य है। रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी। इसमें अयोध्या के राजकुमार श्रीराम के साहसिक कार्यों एवं उनके मर्यादा पुरुषोत्तम जीवन की महागाथा है। श्रीराम के जीवन की कथा भारत के अलावा पूर्वी एशिया में भी प्रसिद्ध है। आज भी श्रीराम की कथा भारत के कोने-कोने के साथ सम्पूर्ण पूर्वी एशिया तथा विश्व के विभिन्न भागों में सुनी व मंचित की जाती है। ‘महाभारत’ की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी। इसमें कुरु परिवार के बीच लड़े गए युद्ध से सम्बन्धित गाथा है। महाभारत में ही कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए महान् संदेश, जो आज भी प्रासंगिक हैं, ‘भगवद्गीता’ के रूप में संग्रहीत हैं।

प्रश्न 7.
गुप्तकालीन साहित्य की उन्नति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गुप्तकाल में संस्कृत भाषा एवं साहित्य की अत्यधिक उन्नति हुई। कालिदास गुप्तकाल के महान् कवि एवं नाटककार थे। कालिदास ने रघुवंश, मेषदूत, ऋतुसंहार तथा कुमारसम्भव नामक काव्य ग्रन्थ लिखे। उन्होंने ‘मालविकाग्निमित्रम्’, ‘विक्रमोर्वशीयम्’ तथा अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ नामक नाटक लिखे। कालिदास ने अपने काव्यों में संस्कृत तथा प्राकृत दोनों भाषाओं का प्रयोग किया है। अन्य वर्ग के शिक्षित पात्र संस्कृत बोलते थे तथा शेष लोग प्राकृत। शुद्रक ने ‘मृच्छकटिकम्’ नामक नाटक लिखा। विशाखदत्त ने ‘मुद्राराक्षस’ तथा ‘देवीचन्द्रगुप्तम्’ नामक नाटकों की रचना की। विष्णु शर्मा ने ‘पंचतन्त्र’ की रचना की। भरत ने ‘नाट्यशास्त्र’ की रचना की जो नाट्य, नर्तन, अभिनय, संगीत आदि कलाओं की जानकारी देता है। इसी काल में ‘विष्णु-धर्मोत्तर पुराण’ की भी रचना हुई।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अजन्ना में चित्र बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अजन्ता में चित्र बनाने की विधि अजन्ता के भित्ति-चित्रों के निर्माण के लिए पहले पहाड़ की खुरदरी दीवार को तैयार किया जाता था। इसके लिए खड़िया, गोबर, बारीक बजरी का,गारा, चावल की भूसी, उड़द की दाल के छिलके, अलसी को पानी में कई दिनों तक मिलाकर सड़ाया जाता था। इन सभी को मिलाकर पीसकर पलस्तर हेतु गाढ़ा लेप तैयार कर दीवार पर एक इंच मोटा पलस्तर कर दिया आता था। इसके ऊपर अण्डे के छिलके की मोटाई के बराबर सफेद चूने का मोल चढ़ाया जाता था। इसके बाद लाल रंग की रेखाओं से कच्चा चित्र बनाकर उसमें रंग भर दिया जाता था। चित्र में रंग भर देने और काली रेखाओं से पक्का चित्र बन जाने के बाद उसे कन्नी से पीटा जाता था, जिससे रंग दीवार की गहराई तक पैठ जाता था। इसके बाद पूरे चित्र को चिकने पत्थर से घोट कर पॉलिश की जाती थी। इस विधि को फ्रेस्को (भित्ति-चित्र) कहा अजन्ता की गुफाओं के भीतर चैत्यों में निर्मित स्तूपों पर बुद्ध के चित्रों और बुद्ध के समय की अनेक कथाओं को चित्रित किया गया है। इनके साथ बचे रिक्त स्थानों को पुष्पीय अलंकरण अथवा पशु-पक्षी की आकृतियों से सजाया गया।

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प्रश्न 2.
मौर्यकालीन स्तम्भ-निर्माण तथा मूर्तिकला का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मौर्यकालीन स्तम्भ निर्माण तथा मूर्तिकलामौर्यकालीन स्तम्भ निर्माण तथा मूर्तिकला का वर्णन अनलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है –
1. शिलालेख – मौर्य काल में स्तम्भ निर्माण तथा मूर्तिकला की महत्त्वपूर्ण उन्नति हुई। सम्राट अशोक के समय में सम्पूर्ण मौर्य साम्राज्य में पत्थर तराश कर विभिन्न स्थानों पर | शिलालेख रखे गए जिनमें साम्राज्य की व्यवस्था के सम्बन्ध में सम्राट् के विचारों का उल्लेख था। ऐसा प्रतीत होता है कि ये शिलालेख सम्राट अशोक द्वारा लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के माध्यम थे।

2. पाषाण स्तम्भ तथा उन पर बनी मूर्तियाँ – मौर्यकाल में अनेक स्थानों पर पत्थर के स्तम्भ (लाट) खम्भे खड़े किये गए. जिन पर सम्राट अशोक का सन्देश होता था। कई स्तम्भों पर पशुओं जैसे सिंह, बैल, घोड़ा, हाथी को बहुत सुन्दर मूर्तियाँ बलुआ पत्थर से बनती थीं। सारनाथ की लाट व महरौली का लौह-स्तम्भ तत्कालीन कला के अभूतपूर्व उदाहरण हैं। सारनाथ से जो अशोक स्तम्भ मिला है, उसके शीर्ष पर चार सिंह पीठ सटाए बैठे हुए हैं।

उसके शीर्ष भाग पर उत्कीर्ण सिंह इतने आकर्षक और सुन्दर हैं कि उसे भारत के राष्ट्रीय चिह के रूप में स्वीकार किया गया है। इस स्तम्भ के सिरे पर चार शेर चारों दिशाओं की ओर मुंह किए हुए बैठे हैं, जो राष्ट्र की शक्ति व शौर्य के प्रतीक हैं। इनके नीचे गोलाकार चौकी है, उस पर उभारदार चक्र, बैल, योड़ा, हाथी, शेर की आकृतियाँ बनाई गई हैं। अशोक स्तम्भ का यह शीर्ष विश्व की मूर्तिकला में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। स्तम्भों और मूर्तियों पर ओपदार पॉलिश की गई है।

3. स्वतन्त्र मूर्तियाँ – इसी प्रकार इस काल में स्वतन्य मूर्तियाँ भी बनी हैं जिनमें पाटलिपुत्र के समीप दीदारगंज की चंबर-धारिणी स्त्री की मूर्ति, पटना व परखम से प्राप्त वक्षों की मूर्तियाँ, लोहानपुर से प्राप्त मानव पड़ मौर्यकालीन | शिल्पकला के उत्कृष्ट नमूने हैं।

प्रश्न 3.
कुषाणकालीन मूर्तिकला का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कुषाण काल में सर्वप्रथम बुद्ध की मानव रूप में मूर्तियाँ बर्नी जो भारतीय कला के इस युग की सर्वोत्तम देन हैं। इस काल की कला के गान्धार व मथुरा मुख्य केन्द्र थे। गान्धार व मथुरा में बौद्ध तथा हिन्दू देवी-देवताओं, जैन तीर्थकरों, शिव के दो रूप जैसे एकलिंग व दुसरा मानव रूप के साथ-साथ कृष्ण-बलराम, कार्तिकेय, इन्द्र, सूर्य, लक्ष्मी, सरस्वती आदि की मूर्तियाँ दर्शनीय हैं। यहाँ यक्ष-यक्षिणी की मूर्तियाँ भी बनी हैं।

गान्धार मूर्ति-कला-गान्धार मूर्तिकला के शिल्पकार यूनानी थे, परन्तु उनकी कला का आधार भारतीय विषय थे। गान्धार मूर्तिकला में बुद्ध की मूर्तियों के सिर पर धुंघराले जूड़े में . बंधे हुए बाल और प्रभामण्डल उकेरा गया है। इन मूर्तियोंमें वस्त्रों में पारदर्शिता एवं सलवटों का यथार्थ प्रभाव आया है। बुद्ध की मूर्तियाँ यूनानी देवता अपोलो से मिलतीजुलती हैं। इस शैली की मूर्तियाँ स्लेटी पत्थर की हैं।

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प्रश्न 4.
गुप्तकालीन मन्दिर निर्माण कला, मूर्तिकला तथा चित्रकला का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गुप्तकालीन मन्दिर निर्माण कला – गुणाकाल में अनेक भवन एवं विशाल मन्दिरों का निर्माण किया गया। इनमें नागौर में स्थित भूमरा का शिव मन्दिर, जबलपुर जिले के तिगवा का विष्णु मन्दिर, देवगढ़ का दशावतार मन्दिर, भीतरगाँव का मन्दिर आदि उल्लेखनीय हैं।

मूर्तिकला – गुप्तकाल में मूर्तिकला का अत्यधिक विकास हुआ। गुप्तकाल की मूर्तिकला भारतीय तत्त्वों से ओत-प्रोत थी। इस काल में हिन्दू धर्म से सम्बन्धित अनेक मूर्तियों का निर्माण हुआ। इनमें मथुरा की विष्णु मूर्ति, शेषनाग, शैय्या पर वित्राम करते हुए विष्णु (देवगढ़ मन्दिर, झांसी, उत्तर प्रदेश में), शिव-पार्वती, त्रिमूर्ति आदि प्रमुख हैं। उदयगिरि से प्राप्त वराह की मूर्ति गुप्तकालीन मूर्तिकला का एक श्रेष्ठ नमूना है।

सारनाथ की बुद्ध मूर्ति तत्कालीन मूर्तिकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मूर्ति में बुद्ध पद्मासन लगाए धर्मचक्र प्रवर्तन की मुद्रा में बैठे हुए हैं। इसके अतिरिक्त मथुरा की बुद्ध मूर्ति तथा सुल्तानगंज की बुद्ध मूर्ति भी उल्लेखनीय हैं। |मधुरा तथा गोरखपुर से प्राप्त महावीर स्वामी की मूर्तियाँ भी बड़ी सुन्दर और आकर्षक हैं। भारतीय कला के इतिहास में गुप्तकाल को स्वर्ण-युग के नाम से जाना जाता है।

चित्रकला – गुप्तकालीन चित्रकला के सर्वोत्कृष्ट नमूने अजन्ता की गुफाओं में मिलते हैं। इन चित्रों में मरणासन्न राजकुमारी’, ‘महाभिनिष्क्रमण’ तथा ‘माता और पुत्र’ चित्र बहुत ही सुन्दर, वास्तविक और प्रभावशाली हैं।

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