RBSE Solutions for Class 6 Social Science Chapter 20 मौर्य एवं गुप्तकालीन भारत

Rajasthan Board RBSE Class 6 Social Science Solutions Chapter 20 मौर्य एवं गुप्तकालीन भारत

RBSE Solutions for Class 6 Social Science

RBSE Solutions for Class 6 Social Science Chapter 20 मौर्य एवं गुप्तकालीन भारत

RBSE Class 6 Social Science मौर्य एवं गुप्तकालीन भारत Intext Questions and Answers

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पृष्ठ संख्या – 145

प्रश्न 1.
आचार्य चाणक्य ने कौनसा ग्रन्थ लिखा?
उत्तर:
आचार्य चाणक्य ने ‘अर्थशास्त्र’ नामक ग्रन्थ लिखा।

प्रश्न 2.
चन्द्रगुप्त मौर्य ने नन्द वंश के कुशासन को किस वर्ष में समाप्त किया?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 ई. पूर्व में नन्द वंश के कुशासन को समाप्त किया।

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प्रश्न 3.
‘इण्डिका’ नामक पुस्तक किसने लिखी?
उत्तर:
मेगस्थनीज ने ‘इण्डिका’ नामक पुस्तक लिखी, जिसमें मौर्यकालीन शासन व्यवस्था की जानकारी मिलती है।

प्रश्न 4.
अशोक महान् किसका पुत्र था?
उत्तर:
अशोक महान् बिन्दुसार का पुत्र था।

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न एक से तीन तक के सही उत्तर कोष्ठक में लिखिए –
प्रश्न 1.
आचार्य चाणक्य किस विश्वविद्यालय का शिक्षक था?
(अ) नालन्दा
(ब) तक्षशिला
(स) बनारस
(द) विक्रमशिला
उत्तर:
(ब) तक्षशिला

प्रश्न 2.
मेगस्थनीज किसका राजदूत था?
(अ) सिकन्दर
(ब) सेल्यूकस
(स) चन्द्रगुप्त मौर्य
(द) सम्राट अशोक
उत्तर:
(ब) सेल्यूकस

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प्रश्न 3.
विक्रमादित्य की उपाधि किस शासक ने धारण की थी?
(अ) सिकन्दर
(य) चन्द्रगुप्त द्वितीय
(स) चन्द्रगुप्त मौर्य
(द) सम्राट अशोक
उत्तर:
(ब) चन्द्रगुप्त द्वितीय

प्रश्न 4.
‘अर्थशास्त्र’ नामक पुस्तक किसने लिखी थी?
उत्तर:
‘अर्थशास्त्र’ नामक पुस्तक आचार्य चाणक्य ने लिखी थी।

प्रश्न 5.
अमित्रघात किस मौर्य सम्राट् का नाम था?
उत्तर:
अमित्रघात बिन्दुसार का नाम था।

प्रश्न 6.
मगध की राजधानी का क्या नाम था?
उत्तर:
मगध की राजधानी का नाम पाटलिपुत्र था।

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प्रश्न 7.
चीनी यात्री फाह्यान किसके शासन काल में भारत आया था?
उत्तर:
चीनी यात्री फाह्यान चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासन काल में भारत आया था।

प्रश्न 8.
सम्राट अशोक का धम्म क्या था?
उत्तर:
सम्राट अशोक का धम्म सम्राट अशोक ने लोगों को शिक्षा देने के लिए ‘धम्म महामात्य’ नामक अधिकारी नियुक्त किये। सम्राट अशोक द्वारा प्रचारित इस नीतिगत शिक्षा को ‘सम्राट अशोक का धम्म’ कहा जाता था। अशोक के धम्म में जनता को अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया जाता था। अशोक के धम्म की शिक्षाएँअशोक के धम्म की प्रमुख शिक्षाएँ निम्नलिखित थीं –

  1. दैनिक जीवन की समस्याओं को लेकर नीतिगत तरीके से रहना।
  2. पड़ोसियों से न लड़ना।
  3. सबसे अच्छा व्यवहार करना।
  4. दूसरे धर्म के लोगों से टकराव न करना।

प्रश्न 9.
चन्द्रगुप्त द्वितीय के नवरल कौन-कौन थे?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त द्वितीय के नवरल चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबार में नौ विद्वानों की एक मण्डली थी, जिन्हें ‘नवरत्न’ कहा गया है।
चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबार में नौरत्न:
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प्रश्न 10.
चीनी यात्री फाह्यान ने गुप्त साम्राज्य के बारे में क्या लिखा है?
उत्तर:
चीनी यात्री फाह्यान का गुप्त साम्राज्य के बारे में वर्णन चीनी यात्री फाह्यान चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासन काल में भारत आया था। उसने गुप्त साम्राज्य के बारे में लिखा है कि-“सम्राट् की प्रजा सुखी है। सम्राट् न तो शारीरिक र दण्ड देता है और न ही प्राण दण्ड। चाण्डालों के अलावा कोई मांस व मदिरा का सेवन नहीं करता है। लोग घरों में ताले भी नहीं लगाते हैं।” चन्द्रगुप्त द्वितीय का शासन काल प्रजा के लिए सुखमय एवं सम्पन्नता भरा था। चीनी यात्री फाह्यान ने यह भी लिखा है कि गुप्त काल में प्रजा सुखी थी। राजा दयावान थे। देश में धन-वैभव की कोई कमी नहीं थी। चारों ओर समृद्धि एवं उन्नति का बोलबाला था। सोने के सिक्के प्रचलन में थे। इस काल में कला च साहित्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई थी।

प्रश्न 11.
सम्राट अशोक ने लोक कल्याण के लिए कौनकौनसे कार्य किये थे?
उत्तर:
सम्राट अशोक द्वारा लोक कल्याण के लिए किये गए कार्य सम्राट अशोक ने लोक कल्याण के लिए निम्नलिखित कार्य किए थे –

  1. सम्राट अशोक ने सड़कों, छायादार वृक्षों, कुओं, धर्मशालाओं, मनुष्यों तथा पशुओं के लिए चिकित्सालयों का निर्माण करवाया।
  2. उसने घोषणा करवाई थी कि जनता अपने कष्टों के निवारण के लिए राजा से किसी भी समय मिल सकती है।
  3. अशोक के समय प्रजा के कष्टों में कमी आई थी तथा लोगों के नैतिक आचरण में वृद्धि हुई थी।

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प्रश्न 12.
गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण-युग क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
गुप्तकाल – भारतीय इतिहास का स्वर्ण-युग गुप्तकाल में सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में अत्यधिक उन्नति हुई। इस युग में भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का अभूतपूर्व विकास हुआ। तत्कालीन भारत की इसी सर्वांगीण उन्नति के आधार पर इतिहासकारों ने गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण-युग कहा है। निम्नलिखित आधारों पर गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण-युग कहा जाता है –

1. महान् सम्राटों का युग – गुप्तकाल में ऐसे अनेक सम्राट हुए जो अत्यन्त पराक्रमी, महान विजेता और योग्य शासक थे। चन्द्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त द्वितीय, स्कन्दगुप्त आदि ऐसे महान गुप्त सम्राट थे जिन्होंने अपने पराक्रम तथा सैन्य शक्ति के अला पर अनेक विजय प्राप्त की तथा गुप्तसाम्राज्य की सीमाओं का अत्यधिक विस्तार किया। चन्द्रगुप्त द्वितीय ने शकों और कुषाणों को पर्गाजत किया तथा स्कन्दगुप्त ने हूणों को परास्त किया।

2. राजनीतिक एकता स्थापित करना – गुप्त सम्राटों ने देश के अधिकांश भागों को जीतकर एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया और उसमें राजनीतिक एकता स्थापित की। गुप्त सम्राटों ने देश में राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार किया
और सम्पूर्ण साम्राज्य को राजनीतिक एकता के सूत्र में बाँध दिया।

3. उत्तम शासन – व्यवस्था-गुप्त सम्राट् केवल महान् विजेता ही नहीं, अपितु वे सुयोग्य प्रशासक भी थे। उन्होंने अपने सामान्य में सुदृढ एवं उत्तम शासन व्यवस्था की स्थापना की जिसके फलस्वरूप देश में सुख-शान्ति और समृद्धि बढ़ी।

4. साहित्य की उन्नति – गुप्तकाल में साहित्य के क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति हुई। महाकवि कालिदास ने ‘रघुवंश’, ‘मेघदूत’, ‘ऋतुसंहार’ तथा ‘कुमारसम्भव’ नामक काव्य ग्रन्थ लिखा। महाकवि कालिदास ने ‘मालविकाग्निमित्र’, विक्रमोर्वशीयम्’ तथा ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ नामक नाटकों की रचना की। विष्णुधर्मा ने ‘पंचतन्य’ की रचना की।

5. कलाओं की उन्नति – गुप्तकाल में वास्तुकला, मूर्तिकला, चित्रकला, संगीतकला आदि की अत्यधिक उन्नति हुई। इस युग में अनेक भव्य एवं विशाल मन्दिरों का निर्माण हुआ जिनमें तिगवा का विष्णु मन्दिर, देवगढ़ का दशावतार का मन्दिर, भूमरा का शिव मन्दिर आदि उल्लेखनीय हैं। इस युग में अनेक गुहा मन्दिरों, विहारों, स्तूपों, मूर्तियों आदि का भी निर्माण हुआ।

6. विज्ञान की उन्नति – गुप्तकाल में ज्योतिष, विज्ञान, चिकित्साशास्त्र, रसायनशास्त्र, धातुशास्त्र आदि क्षेत्रों में अत्यधिक उन्नति हुई। आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त आदि गुप्तकाल के महान् ज्योतिषी एवं गणितज्ञ थे। इस युग में दशमलव प्रणाली का आविष्कार हुआ। महरौली का लौहस्तम्भ गुप्तकालीन रसायनशास्त्र तथा धातु विज्ञान की चरम उन्नति का परिचायक है।

7. आर्थिक समृद्धि – गुप्तकाल में आर्थिक क्षेत्र में भी अत्यधिक उन्नति हुई। यह युग जनता की आर्थिक समृद्धि का युग था। इस युग में कृषि, उद्योग, व्यवसाय तथा व्यापार सभी उन्नत अवस्था में थे। उपर्युक्त कारणों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि गुप्तकाल भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग था। इस काल में – प्रजा सुखी थी। चारों ओर समृद्धि एवं उन्नति का बोलबाला – था। सोने के सिक्के प्रचलन में थे।

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प्रश्न 13.
समुद्रगुप्त के व्यक्तित्व पर लेख लिखिए।
उत्तर:
समुद्रगुप्त का व्यक्तित्व – समुद्रगुप्त के व्यक्तित्व का विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया में अनेक शिव मविवाद का वियों आदि
1. बीर एवं पराक्रमी योद्धा – चन्द्रगुप्त प्रथम के बाद उसका सुयोग्य पुत्र समद्रगुप्त मगध का शसक बना। वह एक वीर एवं पराक्रमी योद्धा तथा महान् विजेता था। उसने उत्तर भारत के समस्त शासकों को पराजित किया और धनानन्द
दक्षिण एवं पूर्वोत्तर में भी अपने राज्य का विस्तार किया। समुद्रगुप्त ने भारत के विशाल भू-भाग को जीतकर अश्वमेध यज्ञ किया और उसकी स्मृति में अश्व के चित्र अंकित सोने के सिक्के चलाए।

2. विद्वान एवं विद्वानों का आश्रयदाता – समुद्रगुप्त स्वयं विद्वान था तथा विद्वानों का आश्रयदाता था। उसके दरबार में अनेक विद्वान थे। हरिषेण उनका मन्त्री तथा लेखक था। हरिषेण ने ‘प्रयाग-प्रशस्ति’ की रचना की थी। ‘प्रयागप्रशस्ति’ से समुद्रगुप्त के विजय अभियानों की जानकारी मिलती है।

3. महान् संगीतज़ – समुद्रगुप्त स्वयं एक महान् संगीतज्ञ था। उसे बीणा-वादन का शौक था।

4. प्रजापालक तथा धर्मनिष्ठ शासक – वह प्रजापालक एवं धर्मनिष्ठ शासक था, जिसने वैदिक धर्म एवं परम्पराओं के अनुसार शासन किया था।

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
मौर्य साम्राज्य की स्थापना के पूर्व मगध पर नन्द वंश के किस शासक का शासन था?
(अ) बिम्बिसार
(ब) अजातशत्रु
(स) चन्द्रगुप्त मौर्य
(द) घनानन्द
उत्तर:
(द) घनानन्द

Question 2.
आचार्य चाणक्य को किस नाम से जाना जाता है?
(अ) घनानन्द
(ब) कौटिल्य
(स) कुणाल
(द) कुशाग्न
उत्तर:
(ब) कौटिल्य

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Question 3.
मेगस्थनीज कौन था?
(अ) यूनान का शासक
(ब) सेल्यूकस का सेनापति
(स) सेल्यूकस का राजदूत
(द) चाणक्य
उत्तर:
(स) सेल्यूकस का राजदूत

Question 4.
चन्द्रगुप्त मौर्य ने सिकन्दर के किस उत्तराधिकारी को पराजित कर दिया था?
(अ) विमकदफिस
(ब) कुजलकदफिस
(स) अजातशत्रु
(द) सेल्यूकस
उत्तर:
(द) सेल्यूकस

Question 5.
चन्द्रगुप्त मौर्य ने किसे श्रवणबेलगोला में अपना गुरु बनाया एवं तप का मार्ग अपनाया?
(अ) भद्रबाहु
(ब) उदयन
(स) हेमचन्द्र
(द) भगवती
उत्तर:
(अ) भद्रबाहु

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. बिन्दुसार ने ………………….. तक विशाल साम्राज्य पर शासन किया।
  2. अशोक के अभिलेखों में उसका नाम ………………….. राजा लिखा है।
  3. अशोक ने मगध के पड़ोस में स्थित ………………….. पर आक्रमण किया।
  4. अशोक ………………….. में मौर्य सम्राट् बना।
  5. अशोक के अधिकतर अभिलेख ………………….. भाषा में हैं जो आम लोगों की भाषा थी।

उत्तर:

  1. 272 ई.पूर्व
  2. देवानांप्रियदर्शी
  3. कलिंग
  4. 269 ई.पूर्व
  5. प्राकृत

स्तम्भ ‘अ’ को स्तम्भ’ब’ से सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
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अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आचार्य चाणक्य को किस अन्य नाम से जाना जाता है और क्यों?
उत्तर:
आचार्य चाणक्य को कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि वह एक चतुर राजनीतिज्ञ थे।

प्रश्न 2.
‘इण्डिका’ का महत्त्व बताइये। इसका रचयिता कौन था?
उत्तर:
मेगस्थनीज ने ‘इण्डिका’ नामक पुस्तक की रचना की। इस पुस्तक में मौर्यकालीन शासन-व्यवस्था की जानकारी मिलती है।

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प्रश्न 3.
‘विष्णुगुप्त’ के नाम से कौन प्रसिद्ध है?
उत्तर:
विष्णुगुप्त के नाम से आचार्य चाणक्य प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 4.
सेल्यूकस कौन था?
उत्तर:
सेल्यूकस सिकन्दर का उत्तराधिकारी था।

प्रश्न 5.
चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को पराजित करके किन भू-भागों को प्राप्त किया था?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को पराजित करके कंधार, काबुल, हैरात प्रदेश एवं बलूचिस्तान का कुछ भू-भाग प्राप्त किया था।

प्रश्न 6.
अशोक के अभिलेखों में अशोक को क्या लिखा गया है?
उत्तर:
अशोक के अभिलेखों में अशोक को ‘देवानां प्रियदर्शी’ तथा अशोक लिखा गया है।

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प्रश्न 7.
अशोक ने मगध के पड़ोस में स्थित किस राज्य पर आक्रमण किया और क्यों किया?
उत्तर:
मगध के पड़ोस में कलिंग का शक्तिशाली राज्य स्थित था, जिसे अशोक जीतना चाहता था।

प्रश्न 8.
अशोक मगध का सम्राट् कब बना था?
उत्तर:
अशोक 269 ई. पूर्व में मगध का सम्राट् बना था।

प्रश्न 9.
अशोक ने कलिंग के युद्ध के बाद कभी युद्ध न करने का फैसला क्यों किया था?
उत्तर:
कलिंग विजय के नरसंहार को देखकर सम्राट अशोक ने कभी युद्ध न करने का फैसला किया था।

प्रश्न 10.
सम्राट अशोक किस धर्म का अनुयायी था?
उत्तर:
सम्राट अशोक स्वयं बौद्ध धर्म का अनुयायी था।

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प्रश्न 11.
अशोक ने पाटलिपुर में तृतीय बौद्ध संगीति क्यों : आयोजित की?
उत्तर:
बौद्ध धर्म में उत्पन्न मतभेदों को दूर करने के लिए। अशोक ने पाटलिपुत्र में तृतीय बौद्ध संगीति आयोजित की।

प्रश्न 12.
अशोक ने सिंहल (श्रीलंका) में धर्म के प्रचार के लिए किन धर्म प्रचारकों को भेजा?
उत्तर:
अशोक ने सिंहल (श्रीलंका) में धर्म के प्रचार के लिए महेन्द्र एवं संघमित्रा को भेजा।

प्रश्न 13.
गुप्त वंश का प्रथम प्रतापी शासक कौन था?
उत्तर:
गुप्त वंश का प्रथम प्रतापी शासक चन्द्रगुप्त प्रथम था, जो 319-320 ई. में शासक बना।

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प्रश्न 14.
हरिषेण कौन था? उसने किसकी रचना की थी?
उत्तर:
हरिषेण समुद्रगुप्त का मन्त्री एवं उच्च कोटि का विद्वान था। उसने ‘प्रयाग-प्रशस्ति’ लिखी जिससे समुद्रगुप्त के विजय अभियानों की जानकारी मिलती है।

प्रश्न 15.
किस गुप्त-सम्राट् के दरबार में नौ विद्वानों की एक मण्डली थी, जिन्हें क्या कहा गया है?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबार में नौ विद्वानों की एक मण्डली रहती थी, जिन्हें ‘नवरत्न’ कहा गया है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आचार्य चाणक्य पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
आचार्य चाणक्य ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। आचार्य चाणक्य तक्षशिला विश्वविद्यालय के शिक्षक थे। वे विष्णुगुप्त तथा कौटिल्य के नामों से भी जाने जाते थे। जब नन्दवंश के अन्तिम राजा घनानन्द ने अपने दरबार में उनका अपमान कर दिया, तो चाणक्य ने घनानन्द के कुशासन को समाप्त करने की प्रतिज्ञा ली। उन्होंने चन्द्रगुप्त मौर्य को शिक्षा देकर मगध का शासक बना दिया एवं स्वयं उनके प्रधानमन्त्री बनाकर अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण की। आचार्य चाणक्य ‘अर्थशास्त्र’ एवं ‘राजनीतिशस्य’ के विद्वान् थे। चाणक्य ने ‘अर्थशास्त्र’ नामक ग्रन्थ लिखा, जिससे मौर्यकालीन साम्राज्य की राज-व्यवस्था एवं शासन प्रणाली की जानकारी मिलती है। वे भारतवर्ष को एक सूत्र में बाँधना चाहते थे।

प्रश्न 2.
चन्द्रगुप्त मौर्य की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. चन्द्रगुप्त मौर्य में बाल्यावस्था से ही नेतृत्व का गुण था। चाणक्य के सहयोग से चन्द्रगुप्त मौर्य 322 ई. पूर्व में नन्दवंश के शासक घनानन्द को पराजित करके मगध शासक बना था।
  2. इसके बाद उसने छोटे – छोटे राज्यों को पराजित कर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की।
  3. चन्द्रगुप्त मौर्य ने सिकन्दर के सेनापति सेरन्यूकस को पराजित किया। सन्धि के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य को सेल्यूकस से कंधार, काबुल, हिरात तथा बलूचिस्तान के प्रदेश प्राप्त हुए। सेल्यूकस ने अपनी पुत्री का विवाह चन्द्रगुप्त मौर्य से कर दिया।

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प्रश्न 3.
बिन्दुसार पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य के उत्तराधिकरी बिन्दुसार ने मौर्यसाम्राज्य की प्रतिष्ठा को बनाए रखा। बिन्दुसार को ‘अमित्रघात’ के नाम से भी जाना जाता था। आचार्य चाणक्य बिन्दुसार के दरबार में भी प्रधानमन्त्री थे। बिन्दुसार ने 272 ई. पूर्व तक शासन किया।

प्रश्न 4.
सम्राट अशोक पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सम्राट अशोक अपने पिता के शासन काल में प्रान्तीय उपरत्या (प्रशासक) था। इससे उसे शासन करने का अनुभव प्राप्त हुआ। अशोक के अभिलेखों में उसका नाम देवानांप्रियदी राज एवं अशोक लिखा है। अशोक 269 ई. पूर्व में मौर्य सम्राट् बना। उसने कलिंग पर आक्रमण किया और उस पर अधिकार कर लिया। परन्तु इस युद्ध में हुए भीषण नरसंहार को देखकर प्रतिज्ञा की कि वह भविष्य में कभी बुद्ध नहीं करेगा। अशोक बौद्ध धर्म का अनुयायी था, | परन्तु वह सभी धर्मों का सम्मान करता था। उसने ‘धम्म महामात्य’ नामक अधिकारी नियुक्त किये जो लोगों को शिक्षा देते थे। इसे ‘अशोक का धम्म’ कहा जाता था।

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प्रश्न 5.
चन्द्रगुप्त द्वितीय की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चन्द्रगुप्त द्वितीय की उपलब्धियाँ चन्द्रगुप्त द्वितीय समुद्रगुप्त का पुत्र था। वह अपने पिता समुद्रगुप्त की भौति योग्य एवं प्रतिभाशाली था। वह एक पराक्रमी योद्धा, कुशल शासक एवं साहित्य तथा कला का संरक्षक था। उसने शक एवं कुषाण शासकों को पराजित किया चन्द्रगुप्त द्वितीय का साम्राज्य भी भारत के बहुत से भाग पर विस्तृत था। विजय अभियानों के बाद चन्द्रगुप्त द्वितीय ने ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि धारण कर विक्रम संवत् चलाया था। चन्द्रगुप्त द्वितीय बुद्ध-क्षेत्र में जितना वीर था, शान्तिकाल में उससे कहीं अधिक कर्मठ था। वह स्वयं विद्वान् था तथा विद्वानों का आश्रयदाता था। उसके दरबार में नौ विद्वानों की एक मण्डली थी, जिन्हें “नवरल’ कहा गया है।

प्रश्न 6.
मेगस्थनीज पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
मेगस्थनीज-सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को चन्द्रगुप्त के दरबार में अपना राजदूत बनाकर भेजा था। इस प्रकार – मेगस्थनीज चन्द्रगुप्त के दरबार में सेल्यूकस का राजदूत था जो मगध की राजधानी पाटलिपुत्र में कई वर्षों तक रहा। मेगस्थनीज ने इंडिका नामक पुस्तक भी लिखी जिसमें मौर्यकालीन शासन व्यवस्था की जानकारी प्राप्त होती है। वर्तमान में इंडिका हमें अपने वास्तविक रूप में नहीं मिलती है, परन्तु यूनानी लेखकों ने इंडिका की कुछ घटनाओं को अपने साहित्य में स्थान दिया है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सम्राट अशोक की धार्मिक नीति का विवेचन कीजिए।
उत्तर:
सम्राट अशोक की धार्मिक नीति-सम्राट अशोक की धार्मिक नीति का विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है –
1. बौद्ध धर्म का अनुयायी व प्रचारक – सबाट असोक स्वयं बौद्ध धर्म का अनुयायी था। बौद्ध धर्म में उत्पन्न मतभेदों को दूर करने के लिए उसने पाटलिपुत्र में तृतीय बौद्ध संगीत (महासभा) का आयोजन किया। इसके बाद विदेशों में धर्म के प्रचार के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न धर्म प्रचारक भेजे। विदेशों में भारतीय संस्कृति व धर्म के प्रचार में अशोक का योगदान अद्वितीय रहा है।

2. सभी धर्मों के प्रति उदार नीति-यद्यपि सम्राट अशोक बौद्ध धर्म का अनुयायी था, तथापि उसने सभी धर्मों के प्रति उदार नीति रखी। उसने अच्छे आचरण पर बल दिया तथा पशु वध को दण्डनीय घोषित कर दिया।

3. नीतिगत शिक्षा-धम्म-अशोक ने विभिन्न सम्प्रदायों के लोगों के बीच सद्भाव एवं एकता बनाए रखने हेतु, प्रजा को शिक्षा देने हेतु धम्म महासभा नामक अधिकारियों की नियुकिा की। इस नीतिगत शिक्षा में जनता को अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया जाता था। यथापड़ोसियों से न लड़ो, दूसरे धर्म के लोगों से टकराव न करो तथा सबसे अच्छा व्यवहार करो आदि।

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