RBSE Solutions for Class 6 Social Science Chapter 19 महाजनपदकालीन भारत एवं मगध साम्राज्य

Rajasthan Board RBSE Class 6 Social Science Solutions Chapter 19 महाजनपदकालीन भारत एवं मगध साम्राज्य

RBSE Solutions for Class 6 Social Science

RBSE Solutions for Class 6 Social Science Chapter 19 महाजनपदकालीन भारत एवं मगध साम्राज्य

RBSE Class 6 Social Science महाजनपदकालीन भारत एवं मगध साम्राज्य Intext Questions and Answers

गतिविधि

पृष्ठ संख्या – 141

प्रश्न 1.
जैन धर्म के बारे में जानकारी एकत्रित करें।
उत्तर:
जैन धर्म – जैन धर्म काफी प्राचीन धर्म है। यह 24 तीर्थंकरों की शिक्षाओं का परिणाम है। 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे जो वर्द्धमान महावीर से 250 वर्ष पहले हुए थे। इसके 24वें तथा अन्तिम तीर्थंकर महावीर हैं जो छठी शताब्दी में पैदा हुए थे। जैन धर्म की दो प्रमुख शाखाएँ हैं –
(i) दिगम्बर
(ii) श्वेताम्बर। भारत में जैन धर्म के अनुयायियों की संख्या सम्पूर्ण जनसंख्या का लगभग 0.4 प्रतिशत है।

जैन धर्म की प्रमुख शिक्षाएँ एवं सिद्धान्त:

1. जीव और अजीव-जीव और अजीव शाश्वत, अनादि और अनन्त हैं। जीव चैतन्य द्रव्य है और अजीव चैतन्य रहित है।

2. कर्मवाद और पुनर्जन्म-समस्त सुख-दु:ख कर्म के कारण से हैं। कर्म ही मनुष्यों के जन्म-मरण का कारण है। पाप-कर्मों के फलस्वरूप मनुष्य को बार-बार जन्म लेना पड़ता है।

3. त्रिरत्न –

  • सम्यक् दर्शन (यथार्थ, ज्ञान के प्रति श्रद्धा)
  • सम्यक् ज्ञान (सत् और असत् का भेद समझ लेना)
  • सम्यक् चरित्र (इन्द्रिय-विषयों से दूर रहना)।

4. पंचमहाव्रत –

  • अहिंसा
  • सत्य
  • अस्तेय
  • अपरिग्रह
  • ब्रह्मचर्य।

5. स्यादवाद – सत्य के अनेक पहलू होते हैं और परिस्थिति के अनुसार मनुष्य को उसका आंशिक ज्ञान होता है।

6. तपस्या और उपवास पर बल-आत्मा की शद्धि के लिए तपस्या और उपवास पर बल दिया गया है।

7. आत्मवाद-आत्मा अजर और अमर है और सदैव एक-सी बनी रहती है।

8. अनीश्वरवाद-ईश्वर इस सृष्टि का रचयिता और हर्ता नहीं है।

9. नारियों की स्वतन्त्रता पर बल-जैन धर्म में नारियों की स्वतन्त्रता पर बल दिया गया।

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प्रश्न 2.
बौद्ध धर्म के बारे में जानकारी एकत्रित करें।
उत्तर:
गौतम बुद्ध अर्थात् सिद्धार्थ बौद्ध धर्म के संस्थापक माने जाते हैं। वे 563 ईसा पूर्व लुम्बिनी में पैदा हुए थे। उनके पिता कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन थे। सत्य का पता लगाने हेतु 30 वर्ष की आयु में घर छोड़कर तपस्या करने चले गये। तपस्या करते हुए गया में एक पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें सत्य का ज्ञान हुआ। उसके बाद उन्होंने अपनी शिक्षाएँ देना प्रारम्भ कर दिया। उनकी वे शिक्षाएँ बौद्ध धर्म के रूप में प्रस्थापित हुईं। बौद्ध धर्म की दो शाखायें हैं

(i) हीनयान और
(ii) महायान। भारत में बौद्ध धर्म के मानने वाले लोगों की संख्या लगभग 0.8 प्रतिशत है।

महात्मा बुद्ध की शिक्षाएँ अथवा बौद्ध धर्म के सिद्धान्त:

1. चार आर्य सत्य –

  • संसार दु:खों का घर है।
  • दु:खों का कारण तृष्णा है।
  • तृष्णा नष्ट कर देने से दु:खों से छुटकारा प्राप्त हो सकता है।
  • तृष्णा के विनाश के लिए अष्टांगिक मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।

2. अष्टांगिक मार्ग –

  • सम्यक् दृष्टि
  • सम्यक् संकल्प
  • सम्यक् वाणी
  • सम्यक् कर्म
  • सम्यक् जीवन
  • सम्यक् व्यवहार
  • सम्यक् व्यायाम
  • सम्यक् समाधि।

3. मध्यम मार्ग – न तो मनुष्य को घोर तपस्या करनी चाहिए और न ही अधिक भोगविलास में लिप्त रहना चाहिए।

4. कर्मवाद और पुनर्जन्म-मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल भुगतना पड़ता है। कर्मों का फल भोगने के लिए मनुष्य को बार-बार जन्म लेना पड़ता है।

5. अनात्मवाद-आत्मा शरीर के समान ही नाशवान है।

6. निर्वाण – जब मनुष्य की वासनाएँ एवं तृष्णाएं नष्ट हो जाती हैं, तो वह ‘निर्वाण” की स्थिति प्राप्त करता है।

7. प्रतीत्य समुत्पाद – प्रत्येक कार्य अथवा वस्तु का कोई कारण होता है। सम्पूर्ण संसार कार्य-कारण की इस शृंखला से चलता है।

8. बाह्याडम्बरों का विरोध – महात्मा बुद्ध ने बाह्याडम्बरों, कर्मकाण्डों का विरोध किया।

9. जाति – प्रथा का विरोध-महात्मा बुद्ध ने जाति प्रथा का विरोध किया।

10. स्वावलम्बन पर बल – मनुष्य को अपने पुरुषार्थ और बुद्धि पर ही भरोसा करना चाहिए।

सोचें और बताएँ

पृष्ठ संख्या – 141

प्रश्न 1.
लोहे के प्रयोग का कृषि उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ा होगा?
उत्तर:
लगभग 700 ई.पूर्व तक लोहे का प्रयोग पहले से अधिक होने लगा था। लोहे से बनाए जाने वाले औजारों से कृषि तथा अन्य उत्पादन के साधनों में प्रगति हुई। इससे कृषि उत्पादन बढ़ा।

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प्रश्न 2.
कृषि उत्पादन बढ़ने से नगरों का विकास कैसे हुआ होगा?
उत्तर:
कृषि उत्पादन बढ़ने से आबादी बढ़ी जिससे नगरों का विकास हुआ। यही वह समय था, जब गंगा और यमुना नदी के तट पर अनेक प्रमुख शहरों की स्थापना हुई। इन शहरों में से इन्द्रप्रस्थ, हस्तिनापुर, कौशाम्बी तथा बनारस | आज भी प्रसिद्ध नगरों में गिने जाते हैं। गंगा नदी स्वयं ही एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग थी। इसके द्वारा समुद्र तक पहुँचना भी सम्भव था। इसके अतिरिक्त गंगा घाटी के प्रदेश के पास में ही लौह-अयस्क काफी मात्रा में मिलता था। इसका लाभ उठाकर कुछ महाजनपदों ने अपना प्रभाव बहुत बढ़ाया। इससे मगध का बहुत विस्तार हो गया।

RBSE Class 6 Social Science महाजनपदकालीन भारत एवं मगध साम्राज्य Text Book Questions and Answers

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न एक से तीन तक के सही उत्तर कोष्ठक में लिखिए –
प्रश्न 1.
मरस्य महाजनपद की राजधानी थी …………………….
(अ) विराटनगर
(ब) वाराणसी
(स) मधुरा
(द) अयोध्या
उत्तर:
(अ) विराटनगर

प्रश्न 2.
दक्षिणी भारत में स्थित महाजनपद था …………………….
(अ) मत्स्य
(ब) शूरसेन
(स) मगध
(द) अश्मक
उत्तर:
(द) अश्मक

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प्रश्न 3.
सोलह महाजनपदों का सबसे पहले उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?
(अ) अंगुत्तर निकाय
(व) ऋग्वेद
(स) अथर्ववेद
(द) उपनिषद्
उत्तर:
(अ) अंगुत्तर निकाय

प्रश्न 4.
जनपद से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जनपद का अर्थ है – जनों का अर्थात् मनुष्यों का निवास स्थान प्रारम्भ में लोग कबीलो के रूप में निवास करते थे। जन-समूह या कबीला जितने भू-भाग पर रहता था, वह भाग जनपद कहलाया।

प्रश्न 5.
महाजनपद कैसे बने?
उत्तर:
बड़े एवं महत्वपूर्ण जनपदों द्वारा छोटे जनपदों को अपने राज्य में मिला लिया और वे महाजनपद कहलाने लगे

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प्रश्न 6.
महाभारत काल में राजस्थान में कौनसा महाजनपद स्थित था?
उत्तर:
महाभारत काल में राजस्थान में मत्स्य महाजनपद स्थित था। इसकी राजधानी विराटनगर (जयपुर से अलवर जाने वाले मार्ग पर स्थित वर्तमान नाम बैराठ) थी।

प्रश्न 7.
प्रमुख महाजनपदों के नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रमुख महाजनपद छठी शताब्दी ई.पूर्व में भारत में सोलह महाजनपद थे। ये निम्नलिखित थे –

  1. अंग
  2. मगध
  3. काशी
  4. कौशल
  5. यजि
  6. मल्ल
  7. पेदि
  8. वत्स
  9. कुरु
  10. पांचाल
  11. मत्स्य
  12. शूरसेन
  13. अश्मक
  14. अवन्ति
  15. कम्बोज और
  16. गान्धार

प्रश्न 8.
मगध के प्रमुख शासकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मगध के प्रमुख शासकों के नाम निम्नलिखित हैं –

  1. हर्यक वंश – बिम्बिसार, अजातशत्रु
  2. शिशुनाग वंश – शिशुनाग
  3. नन्दवंश महापद्मनन्द, घनानन्द

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प्रश्न 9.
महाजनपदों की शासन-व्यवस्था पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
महाजनपदों की शासन व्यवस्था महाजनपदों की शासन-व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं –

1. राजतन्त्रात्मक तथा गणतन्त्रात्मक दोनों प्रकार की शासन व्यवस्थाओं का प्रचलन-महाजनपदों में राजतन्त्रात्मक तथा गणतन्त्रात्मक दोनों प्रकार की शासन-व्यवस्थाओं का प्रचलन था। दोनों में मुख्य अन्तर यह था कि यहाँ राजतन्त्रात्मक शासन में शासन की सम्पूर्ण शक्ति एक व्यक्ति के हाथ में होती थी और वंशानुगत शासन होता था, वहीं गणराज्यों में प्रशासन गण या समूह द्वारा संचालित होता था, जिसके प्रतिनिधि जनता से चुने जाते थे।

2. राजा – राजा गणपति कहलाता था। कुछ महाजनपदों में उसे राजा भी कहते थे। वह निर्वाचित किया जाता था। राजा अपने राज्य के लोगों की भलाई के लिए कार्य करता था।

3. मन्त्रिपरिषद – मन्त्रिपरिषद् गणपति को शासन चलाने में सलाह देती थी। शासन की सबसे महत्त्वपूर्ण इकाई मन्त्रिपरिषद् मानी जाती थी।

4. परिषद् – यह वर्तमान लोकसभा के समान होती थी। गणपति और मन्त्रिपरिषद् शासन के बारे में परिषद् को जानकारी देते थे। परिषद् के सदस्यों का चुनाव जनता करती थी और यहीं पर गणपति और मन्त्रिपरिषद् के सदस्य बैठते थे।

5. सैन्य व्यवस्था – गणराज्य की रक्षा के लिए सेना और सेनापति होता था। युद्ध के समय जनता सेना का साथ देती थी। बड़े-बड़े नगरों एवं राजधानी की देखभाल के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी होती थी।

6. न्याय – गणराज्यों में न्याय की अच्छी व्यवस्था थी। नीचे के स्तर के न्यायालय द्वारा किसी को अपराधी घोषित किये जाने पर अपने से ऊपर के न्यायालय में भेजा जाता था तथा निर्दोष पाए जाने पर छोड़ दिया जाता था। राजा न्याय का सर्वोच अधिकारी होता था, जो सभी न्यायालयों द्वारा अपराधी बताए जाने के बाद ही दण्ड देता था।

7. कर एवं आय – महाजनपदों के राज विशाल दुर्ग बनवाते थे और बड़ी सेनाएँ रखते थे। इसलिए उन्हें प्रचुर संसाधनों एवं कर्मचारियों की आवश्यकता होती थी। अत: महाजनपदों के राजाओं द्वारा नियमित रूप से कर वसूले जाते थे। कृषि, व्यापार तथा व्यवसाय से कर लिया जाता था। वनों और खदानों से होने वाली आय राज्य की होती थी। इससे मन्त्रिपरिषद्, सेना और पुलिस का खर्च चलाया जाता था।

प्रश्न 10.
मगध महाजनपद एक साम्राज्य कैसे बना? विस्तृत रूप से बताइये।
उत्तर:
मगध महाजनपद का साम्राज्य के रूप में निर्माण छठी शताब्दी ई.पू. में भारत में 16 महाजनपद थे। इन 16 महाजनपदों में से मगध राजनीतिक, भौगोलिक एवं सामरिक पाटलिपुत्र शीघ्र ही न केवल राजनीति का वरन् शिक्षा व संस्कृति का भी केन्द्र बन गया। नन्द राजाओं ने माप-तौल की नई प्रणाली भी चलाई। मगध साम्राज्य का इतना उत्थान हुआ कि लगभग एक हजार वर्ष तक मगध एक साम्राज्या के रूप में महत्त्वपूर्ण बन गया। इसी की नींव पर आगे चल कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना हुई। यूनानी प्रमाणों से भी जानकारी मिलती है कि नन्द राजाओं का एक विस्तृत राज्य था, जिसमें सिकन्दर के समय में व्यास नदी के आगे की शक्तिशाली जातियाँ एक साम्राज्य के अधीन थीं और उसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी। नन्दों के पास एक बहुत बड़ा कोष था। उनके पास एक विशाल सेना भी थी, जिससे भयभीत होकर सिकन्दर की सेना ने व्यास नदी से आगे बढ़ने से इन्कार कर दिया था।

RBSE Class 6 Social Science महाजनपदकालीन भारत एवं मगध साम्राज्य Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
मत्स्य की राजधानी थी ……………………….
(अ) अलवर
(ब) भरतपुर
(स) करौली
(द) विराटनगर
उत्तर:
(द) विराटनगर

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Question 2.
काशी की राजधानी थी ……………………….
(अ) लखनक
(ब) अयोध्या
(स) वाराणसी
(द) दिया
उत्तर:
(स) वाराणसी

Question 3.
वर्तमान लोकसभा के समान कौनसी संस्था होती थी?
(अ) समिति
(ब) सभा
(स) मन्त्रिपरिषद्
(द) परिषद्
उत्तर:
(द) परिषद्

Question 4.
कौनसा महाजनपद पूर्वी अफगानिस्तान में स्थित था?
(अ) गांधार
(ब) तक्षशिला
(स) अश्मक
(द) शूरसेन।
उत्तर:
(अ) गांधार

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Question 5.
लोहे का प्रयोग पहले से अधिक होने लगा थाी ……………………….
(अ) लगभग 500 ई. पूर्व तक
(ब) लगभग 1200 ई. पूर्व तक
(स) लगभग 1700 ई. पूर्व तक
(द) लगभग 700 ई. पूर्व तक
उत्तर:
(द) लगभग 700 ई. पूर्व तक

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. लगभग ………………….. तक लोहे का प्रयोग पहले से अधिक होने लगा था।
  2. छठी शताब्दी ई.पू. में भारत में ………………….. महाजनपद थे।
  3. ………………….. माप – तौल की नई प्रणाली भी चलाई।
  4. कोसल राज्य का भू-विस्तार आधुनिक उत्तरप्रदेश के …………………..
  5. वञ्चि की राजधानी ………………….. थी।

उत्तर:

  1. 700 ई.पूर्व
  2. 16
  3. नन्द राजाओं ने
  4. अवध क्षेत्र
  5. वैशाली

स्तम्भ ‘अ’ को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए –

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उत्तर:RBSE Solutions for Class 6 Social Science Chapter 19 महाजनपदकालीन भारत एवं मगध साम्राज्य

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनपद का अर्थ बताइये।
उत्तर:
जनपद का अर्थ है-जनों का अर्थात् मनुष्यों का निवास-स्थान।

प्रश्न 2.
मत्स्य महाजनपद की स्थिति बताइये। इसकी राजधानी बताये।
उत्तर:
मत्स्य महाजनपद का विस्तार आधुनिक राजस्थान के अलवर जिले से चम्बल नदी तक था। इसकी राजधानी विराटनगर थी।

प्रश्न 3.
बुद्ध के समय के चार शक्तिशाली राजतन्त्रों के नाम
उत्तर:

  • कोसल
  • वत्स
  • मगध
  • अवन्ति

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प्रश्न 4.
कुरु महाजनपद की स्थिति बताइये। इसकी राजधानी बताइये।
उत्तर:
इस राज्य में आधुनिक दिल्ली के आसपास के प्रदेश थे। इन्द्रप्रस्थ इसकी राजधानी थी।

प्रश्न 5.
महाजनपदों को शासन-व्यवस्था में शासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई कौनसी थी?
उत्तर:
महाजनपदों की शासन-व्यवस्था में शासन की सबसे महत्त्वपूर्ण इकाई मन्त्रिपरिषद् मानी जाती थी।

प्रश्न 6.
गंगा और यमुना नदी के तट पर बसने वाले चार शहरों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • इन्द्रप्रस्थ
  • हस्तिनापुर
  • कौशाम्बी
  • अनारस

प्रश्न 7.
16 महाजनपदों में राजनीतिक, भौगोलिक एवं सामरिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण महाजनपद कौनसा था?
उत्तर:
मगध।

प्रश्न 8.
मगध साम्राज्य में माप-तौल की नई प्रणाली किसने चलाई?
उत्तर:
मगध साम्राज्य में माप-तौल की नई प्रणाली नन्द राजाओं ने चलाई।

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प्रश्न 9.
किस सेना से भयभीत होकर सिकन्दर की सेना ने व्यास नदी से आगे बढ़ने से इन्कार कर दिया था?
उत्तर:
नन्द राजाओं द्वारा संगठित विशाल सेना से भयभीत होकर सिकन्दर की सेना में व्यास नदी से आगे बढ़ने से इन्कार कर दिया था।

प्रश्न 10.
किसने नन्द वंश को समाप्त कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य ने नन्दवंश को समाप्त कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी।

प्रश्न 11.
सोलह महाजनपदों की सर्वप्रथम जानकारी किस ग्रन्थ में मिलती है?
उत्तर:
बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय में।

प्रश्न 12.
छठी शताब्दी ई.पू. कौनसा विश्वविद्यालय शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था?
उत्तर:
छठी शताब्दी ई.पू. तक्षशिला विश्वविद्यालय शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
महाजन पदों की कोई दो विशेषताएं लिखिये।
उत्तर:
महाजनपद की प्रमुख विशेषताएं ये थी –

  1. प्रत्येक महाजनपद की अपनी – अपनी राजधानी होती थी। कई राजधानियों में किलेबन्दी भी की गई थी।
  2. महाजनपद के शासक नियमित सेना रखने लगे थे। सिपाहियों को वेतन देकर पूरे साल रखा जाता था। कुछ वेतन आहत सिक्कों के रूप में होता था।

प्रश्न 2.
मत्स्य महाजनपद का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मत्स्य राज्य का विस्तार आधुनिक राजस्थान के अलवर जिले से चम्बल नदी तक था। इसकी राजधानी विराटनगर (जयपुर से अलवर जाने वाले मार्ग पर स्थित, वर्तमान नाम बैराठ) थी। महाभारत के अनुसार पाण्डवों ने यहाँ अपना अज्ञातवास का समय बिताया था।

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प्रश्न 3.
बजि संघ के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
वजि राज्य गंगा नदी के उत्तर में नेपाल की पहाड़ियों तक विस्तृत था। पश्चिम में गण्डक नदी इसकी सीमा बनाती थी और पूर्व में सम्भवतः इसका विस्तार कोसी और महानन्दा नदियों के तटवती जंगलों तक था। यह एक संघात्मक गणराज्य था जो आठ कुलों से बना था। इसकी राजधानी वैशाली थी। बुद्ध और महावीर स्वामी के काल में यह एक अत्यन्त शक्तिशाली गणराज्य था। बाद में मगध शासक ने इसे अपने राज्य में मिला लिया।

प्रश्न 4.
गंगा नदी के आसपास अनेक शहर बसने के क्या कारण थे?
उत्तर:
गंगा नदी के आसपास अनेक शहर बसने के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे –

  1. गंगा नदी स्वयं ही एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग थी और इसके द्वारा समुद्र तक पहुँचना भी सम्भव था।
  2. गंगा घाटी का जो इलाका था, वहाँ पास में ही लौहअयस्क काफी मात्रा में मिलता था। इसका लाभ उठाकर महत्व भी सम्भव जो इलाका कुछ महाजनपदों ने अपना प्रभाव
  3. बहुत बढ़ा लिया। इनमें से मगध इतना बड़ा हो गया कि उसके विस्तार को साम्राज्य का दर्जा दिया गया।

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प्रश्न 5.
मगध की महत्ता के कारण लिखिए।
उत्तर:
मगध की महत्ता के कारण – मगध की महत्ता के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे –

  1. गंगा और सोन नदियों से घिरा होना-मगध चारों ओर से गंगा और सोन जैसी नदियों से घिरा हुआ था। ये नदियाँ जल यातायात, जल आपूर्ति तथा भूमि के उपजाऊपन के लिए महत्वपूर्ण थीं। मगध क्षेत्र में खेती की उपज अच्छी होती थी। आवागमन सस्ता और सुलभ होता था।
  2. हाधियों की उपलब्धता-मगध के कुछ हिस्सों में जंगल थे, जहाँ बड़ी संख्या में हाथी उपलब्ध थे। अतः यहाँ से हाथियों को पकड़ा जा सकता था। हाथी सेना के महत्वपूर्ण अंग थे।
  3. लोह-खनिज के भण्डार-मगध में लोह-यनिज के भण्डार भी थे, जिनसे लोहा निकालकर मजबूत औजारों और हथियारों का निर्माण किया जा सकता था।
  4. भौगोलिक स्थिति-मगध की राजधानियाँ-गिरिखज, राजगृह, पाटलिपुत्र आदि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित थीं।

प्रश्न 6.
मगध के उत्थान एवं विकास में नन्द-वंश के शासकों के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. नन्द-शासकों ने एक विशाल सेना का गठन किया और एक व्यवस्थित शासन-प्रणाली को जन्म दिया।
  2. उन्होंने पाटलिपुत्र को समस्त उत्तरी भारत का राजनीतिक केन्द्र बना दिया।
  3. उन्होंने माप-तौल की नई प्रणाली चलाई।
  4. मगध साम्राज्य का इतना उत्थान हुआ कि लगभग एक हजार वर्ष तक मगध एक साम्राज्य के रूप में महत्वपूर्ण बन गया।
  5. नन्द-राजाओं के पास एक बड़ा कोष था तथा एक विशाल सेना थी।

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प्रश्न 7.
भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई.पू. को एक परिवर्तनकारी काल क्यों माना जाता है?
उत्तर:
समकालीन बौद्ध एवं जैन साहित्यिक स्रोतों के आधार पर जो जानकारी मिलती है, उसके अनुसार भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई.पू. को एक परिवर्तनकारी काल माना जाता है क्योंकि –

  1. इस काल को प्राय: आरम्भिक राज्यों को नगरों, लोहे के प्रयोग और सिक्कों के विकास के साथ जोड़ा जाता है।
  2. इसी काल में बौद्ध तथा जैन सहित विभिन्न धार्मिक क विचारधाराओं का भी विकास हुआ है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
6ठी शताब्दी (ई.पू.) में भारत के महाजनपदों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
महाजनपद छठी शताब्दी ई.पूर्व में भारत में महाजनपदों की संख्या 16 थी। ये निम्नलिखित थे –
1. मत्स्य – इस महाजनपद का विस्तार आधुनिक राजस्थान के अलवर जिले से चम्बल नदी तक था। इसकी राजधानी विराटनगर (जयपुर से अलवा जाने वाले मार्ग पर स्थित्त, वर्तमान नाम बैराठ) थी। महाभारत के अनुसार पाण्डवों ने यहाँ अपना अज्ञातवास का समय बिताया था।

2. काशी – यह सम्भवतः प्रारम्भ में महाजनपद काल का सर्वाधिक शक्तिशाली राज्य था। इसकी राजधानी वाराणसी थी, जो अपने वैभव, ज्ञान एवं शिल्प के लिए बहुत प्रसिद्ध थी। महाजनपद काल का अन्त होते-होते यह कोसल राज्य में विलीन हो गया।

3. कोसल – इस राज्य का भू-विस्तार आधुनिक उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में था। रामायण में इसकी राजधानी अयोध्या बताई गई है। प्राचीन काल में दिलीप, रघु, दशरथ और श्रीराम आदि सूर्यवंशी शासकों ने इस पर शासन किया था। औद्ध ग्रंथों में इसकी राजधानी श्रावस्ती बताई गई है। बुद्ध के समय यह चार शक्तिशाली राजतन्त्रों में से एक था।

4. अंग – यह राज्य मगध के पश्चिम में स्थित था। इसमें आधुनिक बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिले सम्मिलित थे। मगध व अंग राज्यों के बीच चम्मा नदी बहती थी। चम्पा इसकी राजधानी का भी नाम था। यह उस काल के व्यापार एवं सभ्यता का प्रसिद्ध केन्द्र था। अंग और मगध के बीच निरन्तर संघर्ष हुआ करते थे। अन्ना में मगध ने अंग को अपने राज्य में मिला लिया।

5. मगध – इस राज्य का अधिकार क्षेत्र मोटे तौर पर आधुनिक बिहार के पटना और गया जिलों के भू-प्रदेश पर था। इसकी प्राचीनतम राजधानी गिरिव्रज थी। बाद में राजगृह व पाटलिपुत्र इसकी राजधानी बने। प्रारम्भ में यह एक छोटा-सा राज्य था, परन्तु इसकी शक्ति में निरन्तर विकास होता गया । बुद्ध के काल में मगध चार शक्तिशाली राजतन्त्रों में से एक था।

6. बजि – यह राज्य गंगा नदी के उत्तर में नेपाल की पहाड़ियों तक विस्तृत था। पश्चिम में गण्डक नदी इसकी सीमा बनाती थी और पूर्व में सम्भवतः इसका विस्तार कोसी और महानन्दा नदियों के तटवर्ती जंगलों तक था। यह एक संघात्मक गणराज्य था जो आठ कुलों से बना था। इसकी राजधानी वैशाली थी। बुद्ध और महावीर के काल में यह एक अत्यन्त शक्तिशाली गणराज्य था। बाद में मगध के शासक ने इसे अपने राज्य में सम्मिलित कर लिया था।

7. मल्ल – यह भी एक गणराज्य था। यह दो भागों में बँटा हुआ था। एक की राजधानी कुशीचाग (वर्तमान उत्तरप्रदेश के देवरिया जिले में आधुनिक कुशीनगर) और दूसरे की पावा थी। मल्ल लोग अपने पराक्रम तथा बुद्धप्रियता के समाजाला लिए विख्यात थे। मल्ल राज्य अन्तत: मगध साम्राज्य में|मिला लिया गया।

8. चेदि – यह राज्य आधुनिक बुन्देलखण्ड के पश्चिमी भागों में स्थित था। इसकी राजधानी शक्तिमती थी, जिसे बौद्ध साहित्य में सोत्थवती कहा गया है। चेदि लोगों का उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। महाभारत में यहाँ के राजा शिशुपाल का उल्लेख है, जिसके शासन काल में इस राज्य |ने बहुत उन्नति की। इसी समय इस वंश की एक शाखा कलिंग में स्थापित हुई।

9. वत्स – यह राज्य गंगा नदी के दक्षिण में और काशी व कोसल के पश्चिम में स्थित था और इसकी राजधानी कौशाम्बी थी, जो व्यापार का एक प्रसिद्ध केन्द्र थी। कौशाम्बी इलाहाबाद से लगभग 48 किमी. की दूरी पर है। बुद्ध के समय यहाँ का राजा उदयन था, जो बड़ा पराक्रमी व शक्तिशाली था। उसकी मृत्यु के बाद मगध ने इस राज्य को अपने सम्राज्य में मिला लिया।

10. कुरु – इस राज्य में आधुनिक दिल्ली के आसपास के प्रदेश थे। इसकी राजधानी इन्द्रप्रस्थ थी। यह महाभारत काल का एक प्रसिद्ध राज्य था। हस्तिनापुर इस राज्य का एक अन्य प्रसिद्ध नगर था।

11. पांचाल – इस महाजनपद का विस्तार (आधुनिक बदायूँ और फर्रुखाबाद के जिले रोहिलखण्ड) और मध्य दोआब में था। यह दो राज्यों में विभक्त था –

  • उत्तरी पांचाल तथा
  • दक्षिणी पांचाल । उत्तरी पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र और दक्षिणी पांचाल की राजधानी काम्पिल्य थी। यहाँ गणतन्त्रीय शासन व्यवस्था स्थापित थी।

12. शूरसेन – इस जनपद की राजधानी मथुरा थी। महाभारत तथा पुराणों में यहां के राजवंशों को यदु अथवा यादव कहा गया है। इसी राजवंश की यादव शाखा में श्रीकृष्ण उत्पन्न हुए।

13. अश्मक – यह राज्य दक्षिण में गोदावरी नदी के तट पर स्थित था। इसकी राजधानी पोतलि अथवा पोदन थी। बाद में अवन्ति ने इसे अपने राज्य में मिला लिया।

14. अवन्ति – इस राज्य के अन्तर्गत वर्तमान कम्जैन का भू-प्रदेश तथा नर्मदा घाटी का कुछ भाग आता था। यह राज्य भी दो भागों में विभाजित था –

  • उत्तरी भाग की राजधानी उजैन थी तथा
  • दक्षिणी भाग की राजधानी महिष्मती श्री। बुद्धकालीन चार शक्तिशाली राजतन्त्रों में से एक यह भी था। बाद में यह मगध राज्य में सम्मिलित कर लिया गया।

15. गान्धार-यह राज्य (वर्तमान पाकिस्तान के पेशावर तथा रावलपिण्डी के जिले) पूर्वी अफगानिस्तान में स्थित था। इस राज्य में कश्मीर घाटी तथा प्राचीन तक्षशिला का भू-प्रदेश भी आता था। इसकी राजधानी तक्षशिला थी। तक्षशिला का विश्वविद्यालय उस समय शिक्षा का प्रसिद्ध केन्द्र था।

16. कम्बोज-यह महाजनपद गान्धार राज्य से सटे हुए भारत के पश्चिमोत्तर भाग (कश्मीर का उत्तरी भाग, पामीर तथा अदख्शां के प्रदेश) में स्थित था। राजपुर तथा द्वारका इस राज्य के दो प्रमुख नगर थे। यह पहले राजतन्त्र था, परन्तु बाद में गणतन्त्र बन गया।

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