RBSE Solutions for Class 6 Social Science Chapter 17 हमारा अतीत

Rajasthan Board RBSE Class 6 Social Science Solutions Chapter 17 हमारा अतीत

RBSE Solutions for Class 6 Social Science

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RBSE Class 6 Social Science हमारा अतीत Intext Questions and Answers

गतिविधि

पृष्ठ संख्या – 122

प्रश्न 1.
प्राचीन जीवन कैसा रहा होगा? इसके बारे में सोचें और चर्चा करें।
उत्तर:
प्राचीन जीवन वर्तमान सामाजिक परिवेश से भिन्न रहा होगा। यथा – प्राचीन काल में आदि मानव झुण्ड बनाकर जंगलों में भोजन की तलाश में घूमता रहता होगा। वह जानवरों का शिकार करके खाता होगा तथा गुफाओं में रहता होगा। वह जंगली जानवरों के भय से गुफा के दरवाजे पर आग जलाकर अपनी रक्षा करता होगा। वह पत्थर के औजारों। एवं बर्तनों का प्रयोग करता होगा। वह जानवरों की खाल से ठण्ड के समय अपना बचाव करता होगा। इस प्रकार प्राचीन जीवन खेती-बाड़ी व यातायात के आधुनिक यातायात के साधनों के अभाव का तथा स्थायी निवास से रहित घुमक्कड़ जीवन रहा होगा।

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पढ़ें एवं बताएँ

पृष्ठ संख्या – 123

प्रश्न 2.
वंशावली लेखकों का इतिहास लेखन में किस प्रकार योगदान रहा?
उत्तर:
वंशावली लेखकों का इतिहास लेखन में योगदान

  1. वंशावली लेखन की परम्परा भी इतिहास को जानने का एक साल माध्यम है। जन्म से लेकर मृत्यु तक का सम्पूर्ण लेखा वंशावाली लेखकों की बहियों में लिखा जाता है।
  2. राव (बड़वा), भाट, बारोट, जागा, तीर्थ पुरोहित (पण्डे), सनीमंगा, हेलया, पंजीकर आदि अनेक समुदायों ने इस वंशावली लेखन द्वारा भारतीय नृवंश का सम्पूर्ण विवरण अपनी
  3. बहियों में संकलित कर रखा है। भारत में वंशावली लेखकों के पास हर जाति का इतिहास सुरक्षित है। इससे वर्तमान इतिहास का लेखन व प्रकाशन हो सका।

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पृष्ठ संख्या – 124

प्रश्न 3.
आदि – मानव ने क्या-क्या सीखा, क्या-क्या खोजा व उसने क्या-क्या आकृतियाँ या उपयोगी चीजें बनाई? अपने अध्यापक की सहायता से सूची बनाएँ।
उत्तर:

  1. आदि मानव ने क्या – क्या सीखा – आ दि मानव ने गुफाओं में रहना, आग जलाना, जानवरों को पालना, पौधे उगाना, शिकार करना, खेती करना, पत्थरों के हथियार बनाना आदि सीखा।
  2. आदि मानव ने क्या – क्या खोजा – आदि मानव ने तांबा, जस्ता और सीसा की खोज की। आदि मानव ने क्या-क्या आकृतियाँ या उपयोगी चीजें
  3. बनाई – आदि मानव ने पत्थर के औजारों, जानवरों की आकृतियाँ बनाई तथा पहिया बनाया, पत्थर का चाक बनाकर बर्तन बनाए, कपड़ा बुनना आदि उपयोगी चीजें बनाई।

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पृष्ठ संख्या – 127

प्रश्न 4.
सिन्धु – सरस्वती घाटी सभ्यता के नगर-नियोजन की प्रमुख विशेषताओं की सूची बनाइये।
उत्तर:
सिन्धु – सरस्वती घाटी सभ्यता के नगर-नियोजन की प्रमुख विशेषताएँ ये थीं –

  1. दुर्ग निर्माण
  2. शहर निर्माण
  3. समकोण पर काटती हुई सड़कें
  4. आयताकार खण्डों में विभक्त नगर
  5. जाल की तरह फैले योजनाबद्ध तरीके से बसे भवन
  6. नालियाँ
  7. धान्यागार
  8. भट्टियाँ
  9. सभाभवन
  10. बाजार
  11. चौर
  12. स्नानकुण्ड आदि।

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न एक व दो के सही उत्तर कोष्ठक में लिखिए –
प्रश्न 1.
सिन्धु घाटी सभ्यता का सबसे पहला उत्खनित स्थान कौनसा था?
(अ) मोहनजोदड़ो
(ब) हड़प्पा
(स) कालीबंगा
(द) लोथल।
उत्तर:
(ब) हड़प्पा

प्रश्न 2.
सिन्धु सभ्यता ईसा से कितने वर्ष पुरानी मानी जाती है?
(अ) 2000 वर्ष
(ब) 5000 वर्ष
(स) 2500 वर्ष
(द) 4000 वर्ष
उत्तर:
(स) 2500 वर्ष

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प्रश्न 3.
इतिहास को जानने के प्रमुख स्रोत कौन – कौनसे हैं?
उत्तर:
इतिहास को जानने के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं –
1. पुरातात्विक स्रोत – पुरातात्विक स्रोत वे हैं जो पुराने हैं और पुरातत्त्ववेत्ताओं द्वारा एकत्रित किए गए हैं। प्राचीन काल के भवन, स्मारक, किले, सिक्के, शिलालेख आदि सभी पुरातात्विक स्रोत कहलाते हैं।

2. साहित्यिक स्रोत – साहित्यिक स्रोत वे हैं, जो किसी भी भाषा में लिखित रूप में प्राप्त हैं। कहानियाँ, कथाएँ व किसी भाण एवं लिपि के ग्रन्थ साहित्यिक स्रोत कहलाते हैं।

3. वंशावलियाँ – भाषा, लिपि, विभिन्न कलाएँ, साहित्य, इतिहास लेखन एवं परम्परा के साथ ही वंशावली लेखन की एक अनोखी परम्परा हमारे पूर्वजों द्वारा विकसित की गई थी, जो इतिहास को जानने का एक सरल माध्यम है। जन्म से लेकर मृत्यु तक का सम्पूर्ण लेखा-जोखा वंशावली लेखकों की बहियों में लिखा जाता है। राय, भाट, बारोट, जागा, तीर्थ-पुरोहित (पण्डे), रानीमंगा, पंजीकार आदि अनेक समुदायों ने इस वंशावली लेखन द्वारा भारतीय नृवंश का सम्पूर्ण विवरण अपनी बहियों में संकलित कर रखा है। भारत में वंशावली लेखकों के पास हर जाति का इतिहास सुरक्षित है।

4. पुरालेखों एवं विदेशी यात्रियों के वर्णन – ऐसे सरकारी, गैर-सरकारी व व्यक्तिगत दस्तावेज जिनसे हमारे पूर्वजों के रहन-सहन एवं संस्कृति की जानकारी मिलती है तथा भारत में आने वाले विदेशी यात्रियों द्वारा लिखे गए उनके अनुभव, जिनसे भारत के बारे में जो जानकारी मिलती है, वे भी इतिहास के स्रोत कहलाते हैं, जैसे द्वेनसांग तथा मेगस्थनीज के भारत सम्बन्धी वर्णन।

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प्रश्न 4.
आदिमानव का जीवन कैसा था?
उत्तर:
आदिमानव का जीवन –
1. घुमक्कड़ी जंगली जीवन – प्राचीन काल में आदि मानव झुण्ड बनाकर जंगलों में भोजन की तलाश में घूमता रहता था। जानवरों का शिकार करके खाना, गुफाओं में रहना, वही उसकी दिनचर्या थी। वह जंगली जानवरों के भय से गुफा के दरवाजे पर आग जलाकर अपनी रक्षा करता था। वह पत्थर से ही आग जलाता, पत्थर के नि व औजारों का उपयोग करता था। इस काल में आदि मानव घुमक्कड़ जीवन बिताता था।

2. सामूहिक जीवन – वह छोटे-छोटे समूहों में रहता था। समूह के नेता या मुखिया के साथ भोजन की तलाश में वह इधर-उधर घूमता रहता था और जब एक स्थान पर भोजन समाप्त हो जाता था तब वह दूसरे स्थान पर चला जाता था।

3. पत्थर के बने औजारों व हथियारों का प्रयोग – वह पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़े काट कर पतली धार वाले हथियार औरी, चाकू आदि बनाकर उनका प्रयोग करने लगा। बड़े टुकड़ों से वह कुल्हाड़ी, हथौड़ी, बसूला आदि बनाकर लकड़ी काटने एवं अन्य उपयोग में लेने लगा।

4. पशुपालन व कृषि कार्य का प्रारम्भव स्थायी निवास का प्रारम्भ-प्रारम्भ में आदिमानव को कपड़े पहनने का ज्ञान नहीं था। बाद में वह जानवरों को पालना, पौधे उगाना तथा अन्न पैदा करना सीख गया जिससे उसका धुमक्कड़ जीवन समाप्त हो गया और वह एक स्थान पर झोंपड़ी बनाकर रहने लगा और वहीं खेती करने लगा। धीरे-धीरे उसने तांबे, जस्ते तथा सीसे आदि धातुओं का प्रयोग करना शुरू कर दिया।

5. पहिये का ज्ञान तथा मिट्टी के बर्तनों का उपयोगकालान्तर में आदि मानव ने पहिया बनाना सीखा, पत्थर की चाक बनाकर मिट्टी के बर्तन बनाना लगा। वह गेहूँ, जौ तथा कपास की खेती करने लगा और झोपड़ी बनाकर रहने लगा।

प्रश्न 5.
आदिमानव के प्रमुख हथियार एवं औजार कौनकौनसे थे?
उत्तर:
आदिमानव के प्रमुख हथियार एवं औजार आदिमानव के प्रमुख हथियार और औजार क्रमश: पत्थर के पतली धार वाले हथियार आरी, चाकू तथा कुल्हाड़ी, हथौड़ी, बसूला आदि थे।

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प्रश्न 6.
क्या कारण था कि प्राचीन सभ्यताएँ नदी किनारे मैदानों में पनपी?
उत्तर:
प्राचीन सभ्यताएँ नदी किनारे मैदानों में पनपी। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित थे –

  1. पर्याप्त मात्रा में जल की उपलब्धता
  2. नदियों के पास में समतल भूमि की उपलब्धता
  3. उपजाऊ भूमि की उपलब्धता, तथा
  4. नदी के समीप अनेक प्रकार के जीवों की उपलब्धता आदि।

प्रश्न 7.
सिन्धु – सरस्वती सभ्यता के प्रमुख स्थल कौनसे हैं?
उत्तर:
सिन्धु – सरस्वती सभ्यता के प्रमुख स्थल सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के प्रमुख स्थल मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, कोटदीजी एवं चन्दड़ो वर्तमान में पाकिस्तान में हैं। इसके अतिरिक्त भारत में इसके स्थल हैंपंजाब (भारत) में रोपड़ा हरियाणा में बणावली, मीताथल; राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में कालीबंगा स्थल गुजरात में लोथल और धोलावीरा तथा उत्तर प्रदेश में आलमगीरपुर आदि।

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प्रश्न 8.
सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के नगर-नियोजन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सिन्धु-सरस्वती सभ्यता का नगर-नियोजन सिन्धु-सरस्वती सभ्यता की नगर निर्माण योजना विकसित थी। इसका विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है –
1. दुर्ग – हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो दोनों नगरों के अपने दुर्ग थे। इन दुर्गों में शासक वर्ग के परिवार रहते होंगे। हड़प्पा के दुर्ग में सबसे अच्छी इमारतें धान्यागारों की थी। ये धान्यागार आयताकार में नदी के पास बनी होती थी। सम्भवतः नदी के रास्ते से माल नावों से लाया जाता होगा और इन गोदामों में रखा जाता होगा। नगर के इसी भाग में भट्टियाँ थीं जहाँ धातुकार सांबे, काँसे, टीन आदि वस्तुएँ तैयार करते होंगे।

2. शहर तथा उसके भवन – प्रत्येक नगर में दुर्ग के बाहर एक उससे निम्न स्तर का शहर था, जहाँ ईंटों के मकानों में अन्य लोग रहते होंगे। जनसाधारण के रहने के लिए बनाया गया शहर योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया था। भवन में इंटों की मोटी दीवारें, खिड़कियाँ और दरवाजे अधिक पाए गए हैं। तेल के बड़े-बड़े मटके, रसोई के पास नाली, जानवरों को रखने के स्थान भी भवनों में पाए गए हैं। कुछ घरों में कुएँ भी प्राप्त हुए हैं। मकानों में स्नानागार भी मिले हैं।

3. सड़कें – इन नगरों में सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और नगर आयताकार खण्डों में विभक्त हो जाता था। इस प्रकार नगर में भवन जाल की तरह फैले थे। भवन खुले, चौड़े और बड़े थे।

4. नालियाँ – घरों का गन्दा पानी निकालने के लिए नाली थी जो प्रायः जमीन में दबाकर बनाई जाती थीं।

5. अन्य विशेषताएँ – खुदाई में सभा-भवन, बाजार, चौक, स्नानकुण्ड आदि मिले हैं जो उनकी नगर नियोजन की सुव्यवस्थित योजना की जानकारी देते हैं।

प्रश्न 9.
सिन्धु-सरस्वती सभ्यता की समकालीन विश्व संस्कृतियों पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सिन्धु – सरस्वती सभ्यता की समकालीन विश्व संस्कृतियों पर टिप्पणी सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के समान ही विश्व के अन्य देशों में भी नदी-घाटियों के पास सभ्यताओं का विकास हुआ था। उनमें से निम्नलिखित नदी-घाटी सभ्यताओं को विद्वान हमारी सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के साथ ही विकसित होने वाली सभ्यता मानते हैं।

  1. मिस्र की नील नदी घाटी सभ्यता – अफ्रीका के उत्तरपश्चिम मिस क्षेत्र में नील नदी के दोनों किनारों पर यह सभ्यता विकसित हुई।
  2. मेसोपोटामिया की दजला – फरात सभ्यता – वर्तमान ईरान के दोआब (मेसोपोटामिया) स्थान पर दजला एवं फरात नामक नदियों के भू-भाग पर यह सभ्यता विकसित हुई। इसी क्षेत्र में सुमेरिया, बेबीलोनिया और असीरिया आदि सभ्यताओं का भी विकास हुआ।
  3. चीन की हाङ्हो नदी सभ्यता – चीन की बहो नदी के निचले हिस्से के मैदानी इलाकों में जहाँ उपजाक दुम्मट मिट्टी पाई जाती थी, वहाँ इस सभ्यता का विकास हुआ।

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प्रश्न 10.
राजस्थान के प्रमुख पुरातात्विक स्थल कौनकौनसे हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान के प्रमुख पुरातात्विक स्थल राजस्थान के प्रमुख पुरातात्विक स्थल अनलिखित हैं –
1. कालीबंगा – राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में कालीबंगा नामक स्थान पर 1961 में दो टीलों की खुदाई में पुराऐतिहासिक काल के अवशेष प्राप्त हुए हैं। वर्तमान घग्घर नदी के किनारे पर स्थित इन टीलों से खुदाई में जो सामग्री प्राप्त हुई है, वह हड़प्पा संस्कृति से मिलती-जुलती है।

2. आहाड़ – उदयपुर की बेड़च नदी के किनारे पर आहाड़ नामक बस्ती ‘तामनगरी’ के नाम से प्रसिद्ध थी। इसी बस्ती के पूर्व दिशा में मिट्टी के टीलों पर खुदाई में पाषाण युग एवं ताम्र-युग के पत्थर, ताँबे और मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं।

3. गिलूण्ड – उदयपुर से 9 किमी. उत्तर पूर्व में गिलूण्ड (राजसमन्द) नामक स्थान पर एक टीले की खुदाई में आहाड़ के पुराने अवशेष प्राप्त हुए हैं। आहाड़ एवं गिलूण्ड दोनों स्थलों की सभ्यता आहाड़ संस्कृति के नाम से जानी जाती है।

4. बागौर – भीलवाड़ा जिले के बागौर नामक स्थान पर कोठारी नदी के किनारे पाषाण एवं ताम्रकालीन उपकरण एवं पुरावशेष एक टीले की खुदाई में प्राप्त हुए हैं। यह बनास संस्कृति के नाम से जाना जाता है।

5. बालाचल – उदयपुर के पूर्व में 42 किमी. दूर बल्लभ नगर के निकट बालाथल नामक गाँव में एक टीले की खुदाई में ताम्र-पाषाणकालीन बर्तन, मूर्तियाँ एवं अन्य ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए हैं।

6. नोह – पूर्वी राजस्थान के भरतपुर शहर से 5 किमी. दूर नोह नामक स्थान पर तांबे और हड़ियों के उपकरण, लोहे की कुल्हाड़ी इत्यादि प्राप्त हुए हैं।

7. चद्भावती (आबू-सिरोही) – माउण्ट आबू की तलहटी में आबू रोड के निकट चन्द्रावती नामक स्थान पर ऐसे पुरावशेष प्राप्त हुए हैं, जो प्राचीन मानव-जीवन के निवास-आवास और उनके जीवन के विविध पक्षों पर प्रकाश डालते हैं। चन्द्रावती पुरामध्य काल में एक अत्यन्त महत्व का स्थान था। यहाँ चल रहे उत्खनन से किले के अवशेष एवं अनाज-संग्रह के कोठार मिले हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यहाँ एक विशाल दुर्ग था। यह परमार वंश की राजधानी थी।

8. गणेश्वर – सीकर जिले में कांतली नदी के तट पर इस सभ्यता स्थल से ताम्रपाषाण काल की वस्तुएं बड़ी मात्रा में मिली हैं।

9. बैराठ – जयपुर जिले में स्थिता बैराठ विभिन्न युगों में विकसित सभ्यता स्थल रहा है। महाभारत काल में यह मत्स्य जनपद की राजधानी था। यहाँ से सम्राट अशोक के शिलालेख भी प्राप्त हुए हैं।

RBSE Class 6 Social Science हमारा अतीत Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Question 1.
सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के किन भागों में नगर सभ्यता का विकास हुआ?
(अ) मरुस्थलीय
(ब) सामुद्रिक
(स) पर्वतीय
(द) मैदानी
उत्तर:
(द) मैदानी

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Question 2.
सर्वप्रथम पंजाब में हड़प्पा की खुदाई हुई …………………….
(अ) 1920
(ब) 1925
(स) 1922
(द) 19181
उत्तर:
(स) 1922

Question 3.
सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है …………………….
(अ) कालीबंगा
(ब) लोथल
(स) घोलावीरा
(द) शिवालिक पहाड़ी
उत्तर:
(द) शिवालिक पहाड़ी

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Question 4.
हड़प्पा के दुर्ग में सबसे अच्छी इमारतें थी …………………….
(अ) स्नानागार की
(ब) धान्यागारों की
(स) जुलाहों की
(द) दुगौ की
उत्तर:
(ब) धान्यागारों की

Question 5.
मेसोपोटामिया की सभ्यता विकसित हुई …………………….
(अ) नील नदी
(ब) ह्वाङहो नदी
(स) दजला और फरात
(द) रोम में
उत्तर:
(स) दजला और फरात

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. सिन्धु – सरस्वती सभ्यता वर्तमान में …………………… पुरानी मानी जाती है।
  2. सरस्वती नदी के तट पर …………………… होने का प्रामाणिक विवरण प्राप्त होता है।
  3. सिन्धु – सरस्वती सभ्यता का प्रमुख स्थल गुजरात में है।
  4. मिल की सभ्यता ……………………. में विकसित हुई।
  5. कालीबंगा राजस्थान के …………………… जिले में स्थित है।

उत्तर:

  1. 4,500 वर्ष
  2. वेदों की रचना
  3. लोथल
  4. नील नदी की घाटी में
  5. हनुमानगढ़

स्तम्भ’अ’को स्तम्भ’ब’ से सुमेलित कीजिए

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उत्तर:
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अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पुरातात्विक स्रोत से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
पुरातात्विक स्रोत वे हैं जो पुराने हैं और पुरातत्त्ववेत्ताओं द्वारा इकट्ठे किये जाते हैं।

प्रश्न 2.
साहित्यिक स्रोत किसे कहते हैं?
उत्तर:
साहित्यिक स्रोत वे हैं, जो किसी भी भाषा में लिखित रूप में प्राप्त हैं। कहानियाँ, कथाएँ व किसी भाषा एवं लिपि के.ग्रन्थ साहित्यिक स्रोत कहलाते हैं।

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प्रश्न 3.
पुरा-ऐतिहासिक काल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
आज से दस हजार वर्ष पूर्व तक का काल पुराऐतिहासिक काल माना जाता है।

प्रश्न 4.
पुरा-ऐतिहासिक काल के मानव के दो पाषाण हथियारों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. आरी
  2. चाकू

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प्रश्न 5.
पाषाण के बाद पुरा-ऐतिहासिक काल के मानव ने किन धातुओं की खोज की?
उत्तर:
पाषाण के बाद पुरा – ऐतिहासिक काल के मानव ने तांबे, जस्ते और सीसे की खोज की।

प्रश्न 6.
सिन्धु – सरस्वती सभ्यता के उन दो पुरास्थलों का नाम लिखिए जिनकी खुदाई की गई।
उत्तर:

  1. सर्वप्रथम 1922 में पंजाब में हड़प्पा की खुदाई।
  2. मोहनजोदड़ो की खुदाई।

प्रश्न 7.
सिन्धु – सरस्वती सभ्यता की समकालीन दो विश्व सभ्यताओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. मिस्र की नील नदी घाटी की सभ्यता।
  2. मेसोपोटामिया की दजला-फरात सभ्यता।

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प्रश्न 8.
राजस्थान के दो प्रमुख पुरातात्विक स्थल बताइये।
उत्तर:

  1. हनुमानगढ़ जिले में स्थित कालीबंगा।
  2. उदयपुर की बेडच नदी के किनारे स्थित आहाड़।

प्रश्न 9.
चन्द्रावती कहाँ स्थित है?
उत्तर:
चन्द्रावती माउण्ट आबू की तलहटी में आबूरोड के निकट स्थित है।

प्रश्न 10.
महाभारत काल में मत्स्य जनपद की राजधानी कौनसी थी?
उत्तर:
बैराठा

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सरस्वती नदी पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सरस्वती नदी का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसके तट पर वेदों की रचना होने का प्रामाणिक विवरण प्राप्त होता है। विद्वानों के अनुसार वैदिक संस्कृति का जन्म इसी नदी के किनारे पर हुआ था। सरस्वती नदी का उद्गम स्थल शिवालिक पहाड़ी से माना जाता है। यह नदी राजस्थान में होती हुई कच्छ की खाड़ी में गिरती थी। कालान्तर में यह नदी लुप्त हो गई। नवीन खोजों से ज्ञात होता है कि सरस्वती नदी घाटी में सुसंस्कृत तथा सुव्यवस्थित सभ्यता का प्रादुर्भाव हुआ था।

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प्रश्न 2.
सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के सामाजिक वों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सिन्धु – सभ्यता में तीन सामाजिक वर्ग रहते होंगे –

  1. शासक वर्ग – यह वर्ग दुर्ग में रहता था।
  2. व्यापारी वर्ग – बह शहर के दूसरे भाग में रहता था।
  3. मजदूर वर्ग एवं किसान वर्ग – इस वर्ग में मजदूर वर्ग एवं आसपास के किसान सम्मिलित थे। किसान अन्न पैदा करते तथा गाँवों में रहते थे।

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प्रश्न 3.
सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के नगरों के नष्ट होने के क्या कारण ?
उत्तर:
सिन्धु – सरस्वती सभ्यता के नगरों के नष्ट होने के कारण –

  1. बाढ़ों का प्रकोप – कुछ विद्वानों के अनुसार सिन्यु नदी की बातें सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के नगरों के विनाश के लिए उत्तरदायी थीं।
  2. भूकम्प – कुछ इतिहासकारों का मत है कि सम्भवतः किसी शक्तिशाली भूकम्प के द्वारा सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के नगरों का विनाश हुआ था।
  3. महामारी – कुछ विद्वानों का विचार है कि सिन्धुसरस्वती सभ्यता के नगरों का विनाश किसी महामारी के बड़े पैमाने पर फैलने से हुआ होगा।
  4. जलवायु परिवर्तन – कुछ विद्वानों का मत है कि सिन्धु-सरस्वती नदी के मार्ग बदलने से अनेक नगर उजड़ गए और लोग बर्बाद हो गए।

प्रश्न 4.
चन्द्रावती पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
माउण्ट आबू की तलहटी में आबूरोड के निकट चन्द्रावती नामक स्थान पर ऐसे पुरावशेष मिले हैं, जो प्राचीन मानव-जीवन के निवास-आवास और उनके जीवन के विविध पक्षों की जानकारी देते हैं। चन्द्रावती पुरामध्यकाल में एक अत्यन्त महत्त्व का स्थल था। यहाँ चल रहे उत्खनन से किले के अवशेष एवं अनाज-संग्रह के कोठार मिले हैं। रेसा प्रतीत होता है कि यहाँ एक विशाल दुर्ग था। यह नरमार वंश की राजधानी थी।

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