RBSE Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

RBSE Solutions for Class 6 Hindi

Rajasthan Board RBSE Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

RBSE Class 6 Hindi नीति सुधा पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

सोचें और बताएँ

प्रश्न 1.
कायर और कृपण किसका जतन करते हैं?
उत्तर:
कायर अपने प्राणों की रक्षा का तथा कृपण धन बचाने का प्रयत्न करते हैं।

प्रश्न 2.
बूंद पर कदली की संगत का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
स्वाति नक्षत्र की बूंद यदि कदली पर गिरती है, तो वह कपूर बन जाती है।

लिखें 

RBSE Class 6 Hindi नीति सुधा बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि बाँकीदास ने सूर कहा है –
(क) किसान को
(ख) वीर पुरुष को
(ग) व्यापारी को
(घ) राजा को
उत्तर:
(ख) वीर पुरुष को

RBSE Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

प्रश्न 2.
मेंगल मोटा दाँत सों नाना नखरो नार। यहाँ रेखांकित शब्द का अर्थ है –
(क) शेर
(ख) बन्दर
(ग) हाथी
(घ) घोड़ा
उत्तर:
(ग) हाथी

प्रश्न 3.
किस प्रकार के बलिदान पर बाँधव लोग हर्षित होते –
(क) अकाल मृत्यु पर।
(ख) देश हितं में बलिदान पर
(ग) दुर्घटना में मृत्यु पर
(घ) सामान्य मृत्यु पर
उत्तर:
(ख) देश हितं में बलिदान पर

दिये गए शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(पावस, दादुर, कदली, मेंगल, नार)

  1. केले को ……. भी कहते हैं।
  2. शेर को ……. भी कहते हैं।
  3. वर्षा ऋतु को ……….. ऋतु भी कहते हैं।
  4. हाथी को ……… भी कहते हैं।
  5. मेंढक को ……….. भी कहते हैं।

उत्तर:

  1. कदली
  2. नार
  3. पावस
  4. मेंगल
  5. दादुर।

RBSE Class 6 Hindi नीति सुधा लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्षा ऋतु में कोयल के मौन हो जाने का क्या कारण है?
उत्तर:
वर्षा ऋतु में सब ओर मेंढ़कों का टर्र-टर्र स्वर सुनाई देता है। तब कोयल सोचती है कि मूखों के इस शोर में मेरी मधुर बोली कौन सुनेगा? इसलिए वह मौन हो जाती है।

प्रश्न 2.
वृन्द ने खेती सूखने पर बरसने वाले बादलों को महत्त्व क्यों नहीं दिया?
उत्तर:
खेती सूख जाने के बाद बरसने वाले बादलों से वह हरी-भरी नहीं हो सकेगी। इसलिए समय पर ही दी गई वस्तु का महत्त्व होता है। वृन्द ने समय निकल जाने पर दी गई वस्तु का कोई महत्त्व नहीं माना है।”

RBSE Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

प्रश्न 3.
आदमी बिना गुण के महान क्यों नहीं होता?
उत्तर:
कोई भी आदमी यदि बिना गुणों के ही महान बन जाए तो इस संसार में गुणों को अर्जित करने का महत्त्व ही कम हो जायेगा। संसार में गुणों का ही महत्त्व है, इसलिए महान बनने के लिए गुण आवश्यक है।

RBSE Class 6 Hindi नीति सुधा दीर्घउत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि ने संगति का जो प्रभाव बताया है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
कवि ने बताया है कि मनुष्य पर संगति का बड़ा प्रभाव पड़ता है। अच्छी संगति में रहने पर व्यक्ति अच्छा अर्थात् सदाचारी होता है तथा बुरी संगति में रहने से बुरा अर्थात् दुराचारी होता है। जल की बूंद केले की संगति से कपूर बन जाती है, साँप के मुँह में गिरने से विष तथा सीप के मुँह में गिरने से मोती बन जाती है। अतः मनुष्य को हमेशा अच्छी संगति में ही रहना चाहिए, क्योंकि मनुष्य जैसी संगति करेगा, उसे वैसा ही फल प्राप्त होगा।

प्रश्न 2.
कवि बाँकीदास ने वीर पुरुष के क्या लक्षण बताए हैं?
उत्तर:
कवि बाँकीदास ने वीर पुरुष के लक्षण बताते हुए कहा है कि वीर पुरुष युद्ध में जाते समय पंचांग या मुहूर्त को नहीं देखता है और न शगुन का विचार करता है। युद्ध में जाते समय वीर पुरुष के मुख पर चमक आ जाती है। वह युद्ध में बलिदान होना ही अपना मंगल मानता है।

प्रश्न 3.
‘दीबो अवसर को भलो, जासो सुधरे काम’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि वृन्द ने बताया है कि किसी को भी देना या सहायता करनी है तो उसको उसी समय देना चाहिए जब उसे जरूरत हो। इस प्रकार देने या सहायता करने से उसका काम बन जाता है। अवसर बीत जाने पर देना उसी प्रकार व्यर्थ होता है जैसे खेती सूख जाने के बाद वर्षा का होना।

RBSE Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

भाषा की बात –
प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों को ध्यानपूर्वक पढ़िए –
बताना, बैठना, बोलना, जानना, देना, लेना, होना, गढ़ना, बुझाना। ऊपर लिखे हुए सभी शब्दों से किसी कार्य के होने या करने का बोध होता है। ऐसे शब्दों को ‘क्रिया’ शब्द कहते हैं। क्रिया के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं –
(1) अकर्मक क्रिया
(2) सकर्मक क्रिया।

अकर्मक क्रिया – जिन क्रियाओं का फल सीधा कर्ता पर पड़ता है, उन्हें अकर्मक क्रिया कहते हैं। अकर्मक क्रियाओं का कर्म नहीं होता; जैसे – नीरज सोता है, किसको सोता है? इसका उत्तर कर्म के रूप में प्राप्त नहीं होता। अतः यहाँ ‘सोता है’ अकर्मक क्रिया है।

सकर्मक क्रिया-जिन क्रियाओं का फल कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़ता है, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं। सकर्मक क्रिया के लिए कर्म का होना आवश्यक है; जैसेसुशीला केला खाती है। किसको खाती है? ‘केले को’। अतः यहाँ ‘खाती है’ सकर्मक क्रिया है। आप भी दिये गए वाक्यों में से अकर्मक क्रिया छाँटकर लिखिए।

  1. रवि सड़क पर दौड़ता है।
  2. सुषमा गाती है।
  3. अक्षय पुस्तक पढ़ रहा था।
  4. राधा स्नान करेगी।

उत्तर:
अकर्मक क्रिया
(1) दौड़ता है
(2) गाती है।

पाठ से आगे –
प्रश्न 1.
पाठ में रहीम ने संगति का असर होना बताया है। आप पर अपने साथियों की किन-किन बातों का असर पड़ता है? लिखिए।
उत्तर:
स्वयं सोच कर लिखें।

प्रश्न 2.
बाँकीदासजी ने शगुन देखना व पंचांग देखकर कार्य करने को व्यर्थ बताया है। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? लिखिए।
उत्तर:
मैं इस बारे में यह सोचता हूँ कि मनुष्य को अपना कार्य करना चाहिए, क्योंकि कार्य करना ही मनुष्य के वश में होता है उसका फल देना विधाता के अधीन होता है। काम करने वाले को शगुन देखना व पंचांग देखकर कार्य करना कोई मायने नहीं रखता है।

RBSE Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

यह भी करें –
प्रश्न 1.
पाठ में आए दोहों को याद कर बाल सभा में सुनाइए।
उत्तर:
दोहों को याद कर बाल सभा में स्वयं सुनाइए।

प्रश्न 2.
पुस्तकालय से अन्य कवियों के नीतिपरक दोहे एकत्र करके अपनी डायरी में लिखिए।
उत्तर:
स्वयं कीजिए।

RBSE Class 6 Hindi नीति सुधा अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 6 Hindi नीति सुधा वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वाति नक्षत्र की बूंद केले पर गिरने से बनती है –
(क) कपूर
(ख) मोती
(ग) जहर
(घ) अमृत।
उत्तर:
(क) कपूर

प्रश्न 2.
मनुष्य बड़ा होता है
(क) धन से
(ख) पद से
(ग) गुणों से
(घ) बड़ाई से।
उत्तर:
(ग) गुणों से

प्रश्न 3.
चतरसिंह बावजी ने बतायी है –
(क) कर्म की प्रबलता
(ख) भाग्य की प्रबलता
(ग) रस्सी की प्रबलता
(घ) समय की प्रबलता।
उत्तर:
(ख) भाग्य की प्रबलता

RBSE Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

प्रश्न 4.
वीर माता प्रसन्न होती है –
(क) पुत्र के जन्म पर
(ख) पुत्र द्वारा युद्ध में वीर गति प्राप्त करने पर
(ग) पुत्र के युद्ध में जाने पर
(घ) पुत्र द्वारा अच्छे कार्य करने पर।
उत्तर:
(ख) पुत्र द्वारा युद्ध में वीर गति प्राप्त करने पर

प्रश्न 5.
बॉकीदासजी कवि हैं –
(क) ब्रजभाषा के
(ख) अवधी भाषा के
(ग) राजस्थानी भाषा के
(घ) खड़ीबोली हिन्दी के।
उत्तर:
(ग) राजस्थानी भाषा के

रिक्त स्थानों की पूर्ति –
प्रश्न 6.
उचित शब्द से रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –

  1. पावस देखि …………. मन कोयल साधी मौन। (कबीर / रहीम)
  2. बड़े न हूजै गुननि बिन, विरद ……….. पाय। (बड़ाई / पढ़ाई)
  3. बणी ………… री सींदरी, वणी सूत री पाग। (सूत / सुत)
  4. कृपण जतन धन रो करे …………….’जीव जहान। (कायर / वीर)
  5. दीबो अवसर को भलो ………….. सुधरे काम। (तासो / जासो)

उत्तर:

  1. रहीम
  2. बड़ाई
  3. सूत
  4. कायर
  5. जासो।।

RBSE Class 6 Hindi नीति सुधा अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 7.
किस ऋतु में कोयल चुप हो जाती है?
उत्तर:
कोयल वर्षा की ऋतु में चुप हो जाती है।

प्रश्न 8.
‘कनक’ शब्द के दो अर्थ कौन-कौनसे हैं?
उत्तर:
‘कनक’ शब्द के दो अर्थ सोना और धतूरा हैं।

RBSE Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

प्रश्न 9.
भाग्य की महत्ता बताने के लिए कवि ने किसको उदाहरण रूप में प्रस्तुत किया है?
उत्तर:
भाग्य की महत्ता बताने के लिए कवि ने रस्सी और पगड़ी को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।

प्रश्न 10.
कृपण और कायर में क्या अन्तर होता है?
उत्तर:
कृपण धन एकत्र करने की तथा कायर प्राण रक्षा की कोशिश करता है।

प्रश्न 11.
‘नीति-सुधा’ पाठ में किन-किन राजस्थानी भाषा के कवियों के दोहों का संकलन किया गया है?
उत्तर:
नीति-सुधा’ पाठ में चतरसिंह बावजी व बाँकीदास जी के दोहों का संकलन किया गया है।

RBSE Class 6 Hindi नीति सुधा लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 12.
कोयल से क्या अभिप्राय है? उसने मौन क्यों साध ली है?
उत्तर:
कोयल से अभिप्राय विद्वान व्यक्ति से है। बुरा समय आ जाने पर मूर्ख लोगों की आवाज ही सुनी जाती है, विद्वानों की कोई नहीं सुनता। इसलिए विद्वान का ऐसे समय चुप रहना ही उचित है।

प्रश्न 13.
वीर माता अपने जीवन में किस दिन सबसे अधिक खुश होती है?
उत्तर:
वीर माता अपने जीवन में उस दिन सबसे अधिक खुश होती है जिस दिन उसका पुत्र युद्ध में जाकर शत्रुओं से लड़ते-लड़ते वीर गति को प्राप्त हो जाता है।

RBSE Class 6 Hindi नीति सुधा निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 14.
“संगति का प्रभाव मनुष्य पर सबसे अधिक पड़ता है।” इस कथन को रहीम के दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कहा गया है कि मनुष्य पर सबसे अधिक प्रभाव उसकी संगति का ही पड़ता है। इस सम्बन्ध में रहीमजी ने बताया है कि स्वाति नक्षत्र में बादलों से गिरने वाली जल की बूंद केवल जल ही होती है किन्तु उसके गिरने के स्थान के कारण उसके तीन रूप हो जाते हैं। वह केले पर गिर कर कपूर, सीपी में गिर कर मोती और साँप के मुख में -गिर कर विष बन जाती है। अतः जो व्यक्ति जैसी संगति में बैठता है, वह वैसा ही बन जाता है।

RBSE Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

पाठ-परिचय:
नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ में रहीम, बिहारी, चतरसिंह बावजी, बाँकीदासजी और कवि वृन्द के नीति-वचनों का संकलन किया गया है। इनके जीवनोपयोगी कथनों के माध्यम से पाठकों को शिक्षा दी गयी है जिससे वे अपने जीवन-पथ पर चलते हुए जीवन को सफल बना सकें।

सप्रसंग व्याख्याएँ –
(1) कदली सीप …………… फल दीन॥

कठिन-शब्दार्थ:
कदली = केला। भुजंग = साँप। स्वाति = स्वाति-नक्षत्र में बादलों से गिरने वाली बूंद।

प्रसंग – यह दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक में ‘नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता रहीमजी हैं। रहीमजी ने बताया है कि जो व्यक्ति जैसी संगति में बैठता है, उसको वैसा ही फल प्राप्त होता है।
व्याख्या / भावार्थ – रहीमजी कहते हैं कि स्वाति-नक्षत्र में बादलों से गिरने वाली पानी की बूंद केवल एक ही होती है किन्तु उसके गिरने के स्थान के कारण तीन रूप हो जाते हैं। यदि वह केले के पत्ते पर गिरती है तो वह कपूर बन जाती है। यदि वह सीपी में गिरती है, तो मोती बन जाती है और यदि वह बूंद साँप के मुख में गिर जाती है तो विष बन जाती है। अतः जो व्यक्ति जैसी संगति में बैठता है, वह संगति उसे वैसा ही फल देती है।

(2) पावस देखि रहीम मन …………. हमको पूछत कौन?

कठिन-शब्दार्थ:
पावस = वर्षा ऋतु। मौन = चुप्पी। दादुर = मेंढक। वक्ता = बोलने वाले।।
प्रसंग – यह दोहा रहीम द्वारा रचित ‘नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। बुरा समय आने पर मूर्ख व्यक्तियों की ही चला करती है, विद्वान को कोई नहीं पूछता है। इसी सम्बन्ध में वर्णन है।
व्याख्या / भावार्थ – रहीमजी कहते हैं कि वर्षा ऋतु को आते देखकर कोयल (विहान) ने अपने मन में मौन धारण कर लिया है। वह सोचती है कि अब जब मेंढक (मूर्ख) ही बोलने वाले बन गए हैं तो हमें कौन पूछता है।

(3) बड़े न हूजै गुननि बिन ………….. गढ्यो न जाए।

कठिन-शब्दार्थ:
हजै = होना। गुननि = गुणों। बिनु = बिना। विरद = झूठी प्रशंसा। कनक = धतूरा और | सोना । गहनौ = गहना, आभूषण। गढ्यो = बनना।

प्रसंग – यह दोहा पाठ्यपुस्तक में संकलित ‘नीति-सुधा’ पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता बिहारीजी हैं। कवि ने बताया है कि बिना गुणों के व्यक्ति बड़ा नहीं होता है।
व्याख्या / भावार्थ – कवि कहता है कि जब तक किसी व्यक्ति में गुण नहीं है तब तक वह व्यक्ति बड़ा नहीं बन सकता, चाहे उसे कितना भी यश क्यों न मिल जाए। जैसे धतूरे का एक नाम कनक भी है और सोने को भी कनक कहा जाता है, लेकिन धतूरे को कनक कहने से उससे आभूषण नहीं बनाया जा सकता है।

RBSE Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

(4) अति अगाध अति ओथरो ……… जाकी प्यास बुझाय॥

कठिन-शब्दार्थ:
अगाध = गहरा । ओथरो = छिछला। कूप = कुआँ। सर = तालाब। वाप = बावड़ी। सागर = समुद्र। जाकी = जिसकी। बुझाय = शान्त हो।
प्रसंग – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित ‘नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। कवि बिहारी ने इसमें वस्तु की उपयोगिता का महत्त्व बताया है।
व्याख्या / भावार्थ-कवि कहता है कि नदी, कुआँ, तालाब तथा बावड़ी का जल चाहे अत्यन्त गहरा हो अथवा अत्यन्त उथला हो, परन्तु एक प्यासे व्यक्ति के लिए तो वही स्थान समुद्र के समान है जिससे उसकी प्यास शान्त होती है।

(5) वणी सूत री सींदरी ………….. जणीं रो भाग॥

कठिन-शब्दार्थ:
सींदरी = रस्सी। पाग = पगड़ी। बँधना = बाँधने में। फरक = अंतर।
प्रसंग – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित ‘नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसमें रचयिता कवि चतरसिंह बावजी ने भाग्य के महत्त्व का वर्णन किया है।
व्याख्या / भावार्थ – कवि बावजी कहते हैं कि सूत को बँटकर रस्सी बनाई जाती है और सूत से ही पगड़ी बनाई जाती है। लेकिन इन दोनों के बाँधने में फर्क होता है। रस्सी से पशु बाँधा जाता है तो पगड़ी सिर की शोभा बढ़ाती है। जिसका जैसा भाग्य होता है, वह वैसा ही पाता है।

(6) काम बड़ो वो ही बड़ो ………… नखरो नार॥

कठिन-शब्दार्थ:
वृथा = बेकार। बड़ो = बड़ा। आकार = शरीर। मेंगल = हाथी। मोटा = मोटे, बड़े-बड़े। नाना = छोटा। नख = नाखून। नार = शेर।
प्रसंग – यह दोहा चतरसिंह बावजी द्वारा रचित ‘नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। कवि ने बताया है कि आदमी का महत्त्व बड़े काम करने से ही होता है।
व्याख्या / भावार्थ – कवि बावजी कहते हैं इस संसार में आदमी का महत्त्व बड़े काम करने से ही होता है, शरीर से बड़ा होने पर नहीं। जैसी हाथी का शरीर और दाँत दोनों ही बड़े होते हैं, परन्तु शेर के नाखून छोटे होते हुए भी, उसकी शक्ति हाथी से अधिक होती है।

(7) कृपण जतन धन …………. जिण रौ खायो अन्न।

कठिन-शब्दार्थ:
कृपण = कंजूस। जतन = प्रयत्न। कायर = डरपोक। सूर = शूरवीर। उणरा = उनका। जिणरो = जिनका।
प्रसंग – प्रस्तुत दोहा बाँकीदासजी द्वारा रचित ‘नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। कवि ने यहाँ मानव मनोवृत्ति का वर्णन करते हुए कहा है।
व्याख्या / भावार्थ – कवि कहता है कि इस संसार में कंजूस व्यक्ति धन को बचाने का प्रयास करता है। कायर व्यक्ति अपने प्राण बचाने का प्रयत्न करता है। परन्तु शूरवीर उन व्यक्तियों की रक्षा के लिए प्रयत्न करता है जिनका उसने नमक या अन्न खाया है।

(8) सूर न पूछे टीपणो …………. मुख नूर॥

कठिन-शब्दार्थ:
टीपणो = पंचांग। सकुन = शगुन। समर = युद्ध। नूर = आभा, तेज।
प्रसंग – प्रस्तुत दोहा बाँकीदासजी द्वारा रचित ‘नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। कवि ने शूरवीर की शोभा का वर्णन किया है।
व्याख्या / भावार्थ-कवि कहता है कि शूरवीर व्यक्ति युद्ध आदि में जाने के लिए पंचांग या मुहूर्त या शगुन को कभी नहीं देखता है। क्योंकि वह युद्ध में मरने में ही अपना कल्याण मानता है इसीलिए युद्ध में जाते समय उसके चेहरे से नूर अर्थात् तेज ही चमकता है।

RBSE Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 नीति सुधा

(9) सुत मरियो हित देश ………… जतरी हरखि आज॥

कठिन-शब्दार्थ:
सुत = बेटा। मरियो = शहीद हुआ। हरख्यो = खुश होना। हरखि = खुश हुई। जतरी = जितनी।
प्रसंग – प्रस्तुतः दोहा बाँकीदास द्वारा रचित ‘नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। कवि ने यहाँ वीर माता की वीरोचित भावना का वर्णन किया है।
व्याख्या / भावार्थ – कवि वर्णन करता हुआ कहता है कि जिस दिन वीर माता का पुत्र देश के लिए शहीद हुआ, उससे यह जानकर सारा बन्धु समाज अतिप्रसन्न हुआ और माता भी पुत्र के जन्म के समय इतनी प्रसन्न नहीं हुई थी, जितनी कि पुत्र के शहीद होने पर हुई।

(10) जो जाकी गुन जानहि ………….. भाग निबोरी लेत॥

कठिन-शब्दार्थ:
मुन = गुण। तिहि = उसी को। कोकिल = कोयल। अंबहि = आम। काग = कौआ। निबोरी = नीम का फल।
प्रसंग – प्रस्तुत दोहा कवि वृन्द द्वारा रचित ‘नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। कवि संसार की नीति का वर्णन करता हुआ कहता है कि
व्याख्या / भावार्थ – संसार की यह नीति है कि जो जिसके गुण को जानता है वही उसे आदर देता है। जैसे वसंत ऋतु में कोयल मीठे आम को और कौआ ग्रीष्म ऋतु में कड़वे नीम के फल अर्थात् निबोरी को ही पसन्द करता है, अर्थात् आदर देता है।

(11) दीबो अवसर को भलो …………. धन को कोने काम॥

कठिन-शब्दार्थ:
दीबो = दिया हुआ, देना। भलो = अच्छा। जासो = जिससे। सुखे = सूखने पर। बरसियो = बरसना। घन = बादल। कोने = नहीं।

प्रसंग – यह दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित ‘नीति-सुधा’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता कवि वृन्द हैं। कवि ने यहाँ समय पर देना या सहायता करना ही महत्त्वपूर्ण बताया है।
व्याख्या / भावार्थ – कवि वृन्द कहते हैं कि यदि हमें किसी को कुछ देना है तो हमें उसकी जरूरत के समय ही उसकी सहायता करनी चाहिए, क्योंकि समय पर देने से काम बन जाता है। जैसे बादल समय पर वर्षा करते हैं तो खेती होती है। यदि खेती सूखने के बाद वर्षा हो, तो उस वर्षा से क्या लाभ?

Leave a Comment