RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण वाक्यपरिवर्तनम

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit

Rajasthan Board RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण वाक्यपरिवर्तनम

वाक्यों के कहने के ढंग को ‘वाच्य’ कहा जाता है। वाक्य को अभिव्यक्त करने के अनेक ढंग होते हैं जिनमें कभी कर्ता की प्रधानता होती है, कभी कर्म की और कभी क्रिया की। अत: वाच्य की परिभाषा इस प्रकार से की जाती है-“वाक्य में कर्ता, कर्म, क्रिया में से किसकी प्रधानता है, इस बात का ज्ञान कराने की दशा को ‘वाच्य’ कहते हैं।” संस्कृत में वाच्य के तीन भेद होते हैं-

  1. कर्तृवाच्य
  2. कर्मवाच्य
  3. भाववाच्य।

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वाच्य-परिवर्तन की विधि-कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तन करने के लिए वाक्य में कर्ता का तृतीया विभक्ति में तथा कर्म को प्रथमा विभक्ति में परिवर्तन करके कर्म के पुरुष एवं वचन के अनुसार कर्मवाच्य की क्रिया लगाते हैं। जैसे-
(i) रामः पाठं पठति (राम पाठ पढ़ता है।)कर्तृवाच्य (क्रिया सकर्मक)।
रामेण पाठः पठ्यते। (राम के द्वारा पाठ पढ़ा जाना है)- कर्मवाच्य

इसी प्रकार से कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाने के लिए भी कर्ता को तृतीया में परिवर्तित करके क्रिया को प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपद) में लगाते हैं। जैसे-
(i) बालकः हसति। (कर्तृवाच्य)-क्रिया अकर्मक
बालकेन हस्यते। (भाववाच्य)

(ii) वयं हसामः। (कर्तृवाच्य)-क्रिया अकर्मक
अस्माभिः हस्यते। (भाववाच्य)

कर्मवाच्य एवं भाववाच्य की क्रिया-
कर्मवाच्य एवं भाववाच्य में सभी प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग किया जा सकता है, परन्तु धातु चाहे परस्मैपदी हो या आत्मनेपदी दोनों का प्रयोग आत्मनेपद में ही होता है। कर्म एवं भाववाच्य की क्रिया बनाने के नियम इस प्रकार हैं1. मूल धातु के बाद ‘य’ लगाया जाता है। जैसे-पठ्पाठ्य, लिख-लिख्य, गम्-गम्य, सेव-सेव्य, लभ-लभ्य आदि।

2. इन दोनों प्रकार की धातुओं के रूप आत्मनेपद में ही चलाये जाते हैं, जैसे- पठ्-पठ्यते, पठ्येते, पठ्यन्ते। (परस्मैपद) सेव्-सेव्यते, सेव्यते, सेव्यन्ते। (आत्मनेपद)

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3. ऋकारान्त धातुओं के अन्तिम ऋ का प्रायः ‘रि’ हो जाता है, जैसे-कृ-क्रियते, मृ-म्रियते आदि परन्तु स्मृ, जागृ आदि कुछ धातुएँ इसका अपवाद हैं। इनके ऋ का अर् होता है। जैसे-स्मृ-स्मर्यते, जागृ-जागर्यते आदि।

4. धातु के आरम्भ के य, व का प्रायः क्रमशः इ, उ हो जाता है। जैसे-यज्-इज्यते, वच्-उच्यते, वष्-उष्यते, वप्-उप्यते, वह्-उह्यते, वद्-उद्यते।

5. प्रच्छ एवं ग्रह आदि धातुओं के र का ऋ हो जाता है। जैसे-प्रच्छ्-पृच्छ्यते, ग्रह-गृह्यते आदि।

6. धातु के अन्तिम इ, उ का दीर्घ हो जाता है। जैसे-इ-ईयते, चि-चीयते, जि-जीयते, नी-नीयते, क्री-क्रीयते, श्रु-श्रूयते, हु-हूयते, दु-दूयते आदि।

7. आकारान्त धातुओं के ‘आ’ का ई हो जाता है। जैसेदा-दीयते, पा-पीयते, स्था-स्थीयते, हा-हीयते , विधा-विधीयते, मा-मीयते आदि। परन्तु कुछ आकारान्त धातुओं के ‘आ’ का परिवर्तन नहीं होता। जैसे-घ्रा-घ्रायते, ज्ञा-ज्ञायते आदि।

8. उपधा के अनुस्वार () या उससे बने पञ्चम वर्ण का लोप हो जाता है। जैसे-बन्ध-बध्यते, रञ्ज-रज्यते, मन्थ्-मथ्यते, ग्रन्थ्-ग्रथ्यते, प्रशंस्-प्रशस्यते, दंश्-दश्यते, परन्तु शङ्क, वञ्च् आदि में ऐसा नहीं होता।

9. धातु के अन्तिम ऋ का ईर् हो जाता है। जैसे-वि + दृ = विदीर्यते, निगृ = निगीर्यते, उद् + तृ = उत्तीर्यते, ज़ – जीर्यते, शृ – शीर्यते।

10. दीर्घ, ई, ऊ अन्त वाली तथा सामान्य हलन्त धातुओं से सीधा ‘य’ जोड़कर अत्मनेपद में रूप चलाये जाते हैं। जैसे- नी-नीयते, भू-भूयते, क्रीड्-क्रीड्यते, पच्-पच्यते आदि।

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पठ् धातु ल्ट् लकार

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कर्मवाच्य और भाववाच्य के रूप

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वाच्य-परिवर्तन के कुछ उदाहरण

(1) कर्तवाच्य से कर्मवाच्य – कर्तवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तन करते समय वाक्य के कर्ता को तृतीया विभक्ति में कर्म को प्रथमा विभक्ति में परिवर्तित करके क्रिया को कर्म के अनुसार बनाया जाता है।
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अभ्यासः

प्रश्ना 1.
‘गम्’ धातोः लट् लकारे प्रथम पुरुष एकवचने कर्मवाच्यरूपं किमस्ति?
(अ) गम्यते
(ब) गम्येते
(स) गम्यन्ते
(द) गच्छति।
उत्तर:
(अ) गम्यते

प्रश्ना 2.
‘पठ्’ धातोः लट्लकारे उत्तम पुरुष बहुवचने कर्मवाच्य रूपं किमस्ति?
(अ) पठ्यते
(ब) पठ्यामहे
(स) पठ्यध्वे
(द) पठ्यन्ते।
उत्तर:
(ब) पठ्यामहे

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प्रश्ना 3.
‘कृ’ धातोः लट् लकार-प्रथम पुरुष-एकवचनस्य कर्मवाच्य रूपं किम्?
(अ) करोति
(ब) कुर्वन्ति
(स) क्रियते
(द) करोमि।
उत्तर:
(स) क्रियते

प्रश्ना 4.
‘ब्रू’ धातोः लट्लकारे प्रथम पुरुष द्विवचने कर्मवाच्य रूपं किमस्ति?
(अ) उच्ये
(ब) उच्यामहे
(स) उच्यन्ते
(द) उच्यते।
उत्तर:
(द) उच्यते।

प्रश्ना 5.
‘पूज्’ धातोः लट् लकार प्रथम पुरुष बहुवचने कर्मवाच्य रूपं किम्?
(अ) पूज्यन्ते
(ब) पूज्येते
(स) पूज्यते
(द) पूज्यसे।
उत्तर:
(अ) पूज्यन्ते

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प्रश्ना 6.
‘पच्’ धातोः लट् लकार मध्यमपुरुष एकवचने कर्मवाच्य रूपं किम्?
(अ) पच्यते
(ब) पच्यसे
(स) पच्येते
(द) पच्यन्ते।
उत्तर:
(ब) पच्यसे

प्रश्ना 7.
‘भू’ धातोः लट् लकार मध्यमपुरुषस्य द्विवचने कर्मवाच्य रूपं किम्?
(अ) भूयते
(ब) भूयेते
(स) भूयेथे
(द) भूयन्ते।
उत्तर:
(स) भूयेथे

प्रश्ना 8.
‘जन्’ धातोः लट् लकार मध्यम पुरुष बहुवचने कर्मवाच्य रूपं किम्?
(अ) जन्यते
(ब) जन्येते
(स) जन्यन्ते
(द) जन्यध्वे।
उत्तर:
(द) जन्यध्वे।

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प्रश्ना 9.
‘शक्’ धातोः लट् लकार उत्तम पुरुष एकवचने कर्मवाच्य रूपं किम्?
(अ) शक्ये
(ब) शक्यावहे
(स) शक्यामहे
(द) शक्यते।
उत्तर:
(अ) शक्ये

प्रश्ना 10.
‘रक्ष’ धातोः लट् लकार उत्तम पुरुष द्विवचने कर्मवाच्य रूपं किम्?
(अ) रक्ष्यते
(ब) रक्ष्यावहे
(स) रक्ष्यामहे
(द) रक्ष्यसे।
उत्तर:
(ब) रक्ष्यावहे

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