RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit

Rajasthan Board RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

प्रत्यय-जो शब्द किसी संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण या धातु (क्रिया) शब्द के पश्चात् किसी विशेष अर्थ को व्यक्त करने के लिये जोड़ा जाता है, उसको प्रत्यय कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:

  1. कृत् प्रत्यय
  2. तद्धित प्रत्यय।

1. कृत् प्रत्यय – जिन प्रत्ययों को जोड़कर संज्ञा, विशेषण, अव्यय तथा कहीं-कहीं क्रियापद का निर्माण किया जाता है, उन प्रत्ययों को ‘कृत्’ प्रत्यय कहते हैं। कृत् प्रत्ययों में ‘क्त्वा’, ‘ल्यप्’ एवं ‘तुमुन्’ आदि प्रत्यय आते हैं।
(i) क्त्वा प्रत्यय-‘क्त्वा’ प्रत्यय में से प्रथम वर्ण ‘क्’ का लोप होकर केवल ‘त्वा’ शेष रहता है। पूर्वकालिक क्रिया को बनाने के लिए ‘कर’ या ‘करके’ अर्थ में उपसर्गरहित क्रियाशब्दों में ‘क्त्वा’ प्रत्यय जोड़ा जाता है।

क्त्वा’ प्रत्यय से बने पूर्वकालिक क्रिया रूप
RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण 1

RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

(ii) ल्यप् प्रत्यय-जब क्रिया (धातु) से पूर्व कोई उपसर्ग जुड़ा होता है तो वहाँ ‘क्त्वा’ प्रत्यय के स्थान पर ‘ल्यप्’ प्रत्यय जोड़ा जाता है। ‘ल्यप् प्रत्यय भी ‘कर’ या ‘करके’ अर्थ में ही होता है। ‘ल्यप् प्रत्यय में से ‘ल’ तथा ‘प्’ का लोप हो जाने पर केवल ‘य’ शेष रहता है।

‘ल्यप् प्रत्यय से बने पूर्वकालिक क्रिया रूप
RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण 2

(iii) क्त एवं क्तवतु प्रत्यय – किसी कार्य की समाप्ति का बोध कराने के लिए अर्थात् भूतकाल के अर्थ में ‘क्त’ और ‘क्तवतु’ प्रत्यय होते हैं।

क्त प्रत्यय – ‘क्त’ प्रत्यय धातु से भाववाच्य या कर्मवाच्य में होता है और इसका ‘त’ शेष रहता है।

‘क्त’ प्रत्यय से बने क्रिया रूप
RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण 3

क्तवतु प्रत्यय – ‘क्तवतु’ प्रत्यय कर्तृवाच्य में होता है ‘क्तवतु’ प्रत्यय में से ‘क्’ तथा ‘उ’ का लोप हो जाता है तथा ‘तवत्’ शेष रहता है।

RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

धातु में ‘क्तवतु’ प्रत्यय जोड़ने की विधि – धातुओं में ‘क्तवतु’ (तवत्) प्रत्यय लगाने की सरल विधि यह है कि क्त-प्रत्ययान्त रूपों; जैसे-पठित, लिखित आदि में पुल्लिंग रूप बनाने के लिए ‘वान्’ जोड़ते हैं; जैसे – पठितवान्, लिखितवान्, नपुंसकलिंग रूप बनाने के लिए ‘वत्’ जोड़ते हैं; जैसे-पठितवत्, लिखितवत् आदि। स्त्रीलिंग रूप बनाने के लिए इनमें ‘वती’ जोड़ते हैं; जैसे-पठितवती, लिखितवती आदि।

क्तवतु प्रत्ययान्त शब्द
RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण 4

(iv) शतृ एवं शानच् प्रत्यय – वर्तमानकाल के स्थान पर धातु से ‘शतृ’ और ‘शानच्’ प्रत्यय होते हैं।

शतृ प्रत्यय – ‘शतृ’ प्रत्यय परस्मैपदी धातुओं में लगता है, इसका ‘अत्’ शेष रहता है। यह रूप विशेषण जैसा होता है। इसके रूप तीनों लिंगों में चलते हैं। जैसे-
पठ् + शतृ – पठ् + अत् = पठन्, पठन्ती, पठत्।

‘शतृ’ प्रत्यय से बने क्रिया रूप
RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण 5

शानच् प्रत्यय – ‘शानच्’ प्रत्यय आत्मनेपदी धातुओं में लगता है, इसमें से ‘आन’ शेष बचता है तथा यह भी विशेषण जैसा होता है। इसके रूप भी तीनों ही लिंगों में चलते हैं। जैसे:
सेव् + शानच् – सेव + अम् + आन = सेवमानः, सेवमाना, सेवमानम्।

RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

शानच् प्रत्यय से बने क्रिया रूप
RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण 6

(v) तव्यत् प्रत्यय – ‘चाहिए’ तथा ‘योग्य’ अर्थ को प्रकट करने के लिए ‘तव्यत्’ प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। यह ‘कृत्’ प्रत्यय है। इसमें ‘तव्य’ शेष रहता है।

तव्यत् प्रत्यय से बने क्रिया रूप
RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण 7

(vi) अनीयर् प्रत्यय – ‘चाहिए’ तथा ‘योग्य’ अर्थ को प्रकट करने के लिए ‘अनीयर’ प्रत्यय का भी प्रयोग किया जाता है। इसमें ‘अनीय’ शेष रहता है।

अनीयर् प्रत्यय से बने क्रिया रूप
RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण 8

RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

(vii) तुमुन् प्रत्यय – ‘को’ अथवा ‘के लिए’ अर्थ को बताने के लिए ‘तुमुन्’ प्रत्यय का प्रयोग होता है। ‘तुमुन्’ प्रत्यय का ‘तुम्’ शेष रहता है। ‘तुमुन्’ प्रत्यान्त शब्द अव्यय होते हैं। अतः इनके रूप नहीं चलते।

तुमुन् प्रत्यय से बने क्रिया रूप
RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण 9

2. तद्धित प्रत्यय – संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण शब्दों में जोड़े जाने वाले प्रत्यय तद्धित’ प्रत्यय कहे जाते हैं। तद्धित प्रत्ययों में ‘तरप्’, ‘तमप्’ आदि प्रत्यय आते हैं। संस्कृत में विशेषण की निम्न तीन अवस्थाएँ मानी जाती हैं-
(i) साधारण अवस्था – साधारण अवस्था में विशेषण की स्थिति जैसी की तैसी बनी रहती है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता।

(ii) तुलनात्मक अवस्था – दो की तुलना में एक की विशेषता बताने के लिए ‘तरप्’ प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। ‘तरप्’ का ‘तर’ शेष रहता है। ‘तरप्’ प्रत्यय से बने शब्द के रूप तीनों लिंगों में चलते हैं।

(iii) अतिशयावस्था – बहुतों में से एक की विशिष्टता बताने के लिए ‘तमप्’ प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। ‘तमप्’ का ‘तम’ शेष रहता है। ‘तमप्’ प्रत्यय से बने शब्द के रूप भी ‘तरप’ के समान तीनों लिंगों में चलते हैं।
RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण 10

RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

अभ्यासः – 1

प्रश्ना 1.
निम्नलिखित शब्दों के प्रकृति-प्रत्यय लिखिए-

  1. त्यक्तुम्,
  2. श्रेष्ठतमः
  3. नियन्तुम्
  4. कर्त्तव्यम्
  5. द्रष्टुम्।

उत्तर:

  1. त्यज् + तुमुन्
  2. श्रेष्ठ + तमप्
  3. नि + यम् + तुमुन्
  4. कृ + तव्यत्
  5. दृश् + तुमुन्।

प्रश्ना 2.
धातु व प्रत्यय को जोड़कर पद रचना कीजिए:

  1. त्यज् + तुमुन्
  2. श्रेष्ठ + तमप्
  3. कथ् + क्तवतु
  4. कृ + तव्यत्।

उत्तर:

  1. त्यक्तुम्
  2. श्रेष्ठतमः
  3. कथितवान्
  4. कर्तव्यम्।

RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

अभ्यासः – 2

प्रश्ना 1.
छावाः पठितम् विद्यालयं गच्छन्तिा रेखांकितपदे प्रत्ययास्ति-
(अ) तुमुन्
(ब) क्त्वा
(स) ल्यप्
(द) तव्य
उत्तर:
(अ) तुमुन्

प्रश्ना 2.
गुरुः वन्दनीयः अस्ति। रेखांकितपदे प्रत्ययास्ति
(अ) तुमुन्
(ब) अनीयर्
(स) क्त्वा
(द) ल्यप्
उत्तर:
(ब) अनीयर्

प्रश्ना 3.
एकास्तु बुद्धिमान् किन्तु शास्त्रविमुखः। रेखांकितपदे प्रत्ययास्ति
(अ) तुमुन्
(ब) ल्यप्
(स) शानच्
(द) क्तवतु
उत्तर:
(स) शानच्

RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

प्रश्ना 4.
सः गोनू सा’ पण्डितं पृष्टवान् रेखांकित पदे प्रत्ययास्ति।
(अ) ल्यप्
(ब) अनीयर्
(स) शानच्
(द) क्तवतु।
उत्तर:
(द) क्तवतु।

प्रश्ना 5.
वन्दनीय पदे प्रयुक्त प्रत्ययास्ति
(अ) अनीयर्
(ब) क्त्वा
(स) ल्यप्
(द) तुमुन्
उत्तर:
(अ) अनीयर्

अभ्यासः – 3

अधोलिखितेषु पदेषु प्रकृतिप्रत्यय विभागं कुरुत

प्रश्ना 1.
गृहीतं, कृत्वा, कर्तव्यः, अवगम्य।
उत्तर:
गृहीतुं = गृह् + तुमुन्।, कृत्वा = कृ + क्त्वा।
कर्तव्यः = कृ + तव्यत्।, अवगम्य = अव + गम् + ल्यप्।

RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

प्रश्ना 2.
त्यक्तुम्, श्रेष्ठतमः, नियन्तुम्, कर्त्तव्यम्।
उत्तर:
त्यक्तुम् = त्यज् + तुमुन्।, श्रेष्ठतमः = श्रेष्ठ तमप्।
नियन्तुम् = नि + यम् + तुमुन्।, कर्तव्यम् = कृ + तव्यत्।

प्रश्ना 3.
कृतवान्, आगत्य, गत्वा, गतवान्।
उत्तर:
कृतवान् = कृ + क्तवतु।, आगत्य = आ + गम् + ल्यप्
गत्वा = गम् + क्त्वा, गतवान् = गम् + क्त्वतु।

RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

प्रश्ना 4.
प्राप्तवान्, कृत्वा, कथितवान्, स्थापयित्वा।
उत्तर:
प्राप्तवान् = प्र + आप + क्तवतु, कृत्वा = कृ+क्त्वा।
कथितवान् = कथ् + क्तवतु।, स्थापयित्वा = स्था + णिच् + क्त्वा।

प्रश्ना 5.
उक्तवान्, समर्पितवान्, मत्वा, स्थापयितुम्
उत्तर:
उक्तवान् = वच् + क्तवतु। समर्पितवान् = सम् + अर्प +क्तवतु।
मत्वा = मन्+क्त्वा।, स्थापयितुम् = स्था + णिच् + तुमुन्।

RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण प्रत्यय प्रकरण

Leave a Comment