RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण अनुवाद प्रकरण

RBSE Solutions for Class 8 Sanskrit

Rajasthan Board RBSE Class 8 Sanskrit व्याकरण अनुवाद प्रकरण

अनुवाद का अर्थ:
एक भाषा को दूसरी भाषा में परिवर्तित करने का नाम अनुवाद है। संस्कृत वाक्यों में कर्ता, क्रिया, कर्म आदि का स्थानक्रम स्थिर नहीं है। लेखक या बोलने वाला अपनी इच्छानुसार इन्हें किसी भी स्थान पर रख सकता है। यही संस्कृत भाषा की विशेषता है। यह कारक प्रधान भाषा है। अव्ययों को छोड़कर कोई भी शब्द या धातु ऐसी नहीं है जिसका बिना रूप बनाये प्रयोग किया जा सके। अतः वचन, विभक्ति व पुरुष का ज्ञान परमावश्यक है।

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संस्कृत अनुवाद के लिए आवश्यक निर्देश:

1. किसी भी वाक्य का संस्कृत में अनुवाद करने से पूर्व उस वाक्य के कर्ता, क्रिया और कर्म के साथ-साथ काल एवं अन्य कारकों के बोधक चिह्नों को भी भली-भाँति समझ लेना चाहिए।

2. अनुवाद में केवल अव्ययों को छोड़कर कोई अन्य शब्द बिना किसी विभक्ति अथवा प्रत्यय के प्रयुक्त नहीं होता है।

3. संस्कृत में तीन वचन होते हैं:
(क) एकवचन
(ख) द्विवचन
(ग) बहुवचन।

4. संस्कृत में तीन पुरुष होते हैं:
(क) प्रथम पुरुष
(ख) मध्यम पुरुष
(ग) उत्तम पुरुष।

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5. इस प्रकार किसी क्रिया के एक काल में नौ (9) रूप होते हैं। जहाँ ‘युष्मद्’ शब्द के त्वम्, युवाम्, यूयम् रूपों का प्रयोग किया जाता है, वहाँ मध्यम पुरुष की क्रिया का प्रयोग होगा। जहाँ ‘अस्मद्’ शब्द के अहम्, आवाम्, वयम् रूपों का प्रयोग किया जाता है, वहाँ उत्तम पुरुष की क्रिया का प्रयोग होगा। शेष सभी संज्ञा, सर्वनाम आदि शब्द प्रथम पुरुष में आते हैं और उनके साथ प्रथम पुरुष की क्रिया का ही प्रयोग होगा।

6. कर्ता जिस पुरुष या वचन का होगा, उसी पुरुष और वचन की क्रिया का प्रयोग होगा।

7. अनुवाद के लिए शब्द-रूपों तथा धातु-रूपों को याद रखना परमावश्यक है, क्योंकि इनके बिना अनुवाद हो ही नहीं सकता। अत: सबसे पहले रूपों का अभ्यास कर लेना चाहिए।

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8. निम्नलिखित कारक, कारक चिह्न एवं विभक्तियों को भी भली-भाँति समझ लेना चाहिए:
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अर्थात् कर्त्ता में प्रथमा, कर्म में द्वितीया, करण कारक में तृतीया, सम्प्रदान कारक में चतुर्थी, अपादान कारक में पंचमी, सम्बन्ध कारक में षष्ठी तथा अधिकरण कारक में सप्तमी विभक्ति प्रयुक्त होती है। सम्बोधन कारक में सम्बोधन विभक्ति का प्रयोग किया जाता है।

9. अनुवाद करने से पूर्व वाक्य में होने वाली क्रिया के काल का निर्णय कर उसी के अनुसार धातु रूप का प्रयोग करना चाहिए।

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अभ्यासः

निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए

  1. मोहन दौड़ता है।
  2. तुम पाठ पढ़ते हो।
  3. मैं दूध पीता हूँ।
  4. हम दोनों कहाँ जाते हैं ?
  5. मोहन प्रातः व्यायाम करता है।
  6. वह गाँव को गया।
  7. कृष्ण ने अर्जुन से कहा।
  8. ब्रह्मदत्त जाएगा।
  9. मोहनश्याम पत्र लिखेगा।
  10. तुम प्रसन्न होंगे।
  11. हम क्या चाहेंगे?
  12. राधा पाठ पढ़े।
  13. तुम दोनों पत्र लिखो।
  14. धूम्रपान न करो।
  15. उसे पाठ पढ़ना चाहिए।

अनुवाद

  1. मोहनः धावति।
  2. त्वं पाठं पठसि।
  3. अहं दुग्धं पिबामि।
  4. आवां कुत्र गच्छावः?
  5. मोहनः प्रात: व्यायाम करोति।
  6. सः ग्रामम् अगच्छत्।
  7. कृष्णः अर्जुनम् अकथयत्।
  8. ब्रह्मदत्तः गमिष्यति।
  9. मोहनश्यामः पत्रं लेखिष्यति।
  10. त्वं प्रसन्नः भविष्यसि।
  11. वयं किम् एषिष्यामः?
  12. राधा पाठं पठतु।
  13. युवां पत्रं लिखतम्।
  14. धूम्रपानं मा कुरु।
  15. सः पाठं पठेत्।

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